राष्ट्रीय

Posted Date : 12-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 12 फरवरी। प्रदेश में पिछले 6 साल में शराब बिक्री से राजस्व में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। अप्रैल से नवम्बर 2018 तक शराब बिक्री से 28 सौ करोड़ की राजस्व प्राप्ति हुई है। यह जानकारी आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। 
    जनता कांग्रेस सदस्य अजीत जोगी ने पूछा कि जनवरी 2014 से 30 नवम्बर 2018 तक प्रदेश में कितनी शराब की बिक्री हुई है और कितना राजस्व प्राप्त हुआ है? इसके जवाब में आबकारी मंत्री ने बताया कि वर्ष 2013-14 में तीन माह में ही शराब बिक्री से 536 करोड़ की आय हुई थी।
    श्री लखमा ने बताया कि वर्ष 2014-15 में 2449 करोड़ 30 लाख, 2015-16 में 2911 करोड़ 31 लाख, वर्ष 2016-17 में 3307 करोड़ 65 लाख और वर्ष 2017-18 में 3908 करोड़ 78 लाख और पिछले 6 महीने में 2784 करोड़ 3 लाख की प्राप्ति हुई है। 

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क

    उम्मीद है कि बाकी बेकसूर आदिवासियों को भी ऐसा न्याय मिलेगा

    रायपुर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने  दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद के खिलाफ बस्तर में दर्ज हत्या के मामले में चालान से उनका नाम हटा दिया है। पुलिस ने अपनी जांच में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया।
    ज्ञात हो कि 7 नवंबर, 2016 को सुकमा जिले के नामा गांव के निवासी सोमनाथ बघेल की हत्या कर दी गई थी।  घटना के वक्त बस्तर क्षेत्र के आईजी रहे एसआरपी कल्लूरी ने कहा था कि हत्या के बाद बघेल की पत्नी विमला बघेल के बयान के आधार पर पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, दिल्ली के जोशी अधिकार संस्थान के सदस्य विनीत तिवारी, सीपीएम के नेता संजय पराते, स्थानीय सरपंच मंजु कावासी और एक स्थानीय व्यक्ति मंगल राम वर्मा पर मामला दर्ज किया था। हालांकि विमला ने कैमरे के सामने इस बात से साफ इंकार किया था कि किसी के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।  इन सभी लोगों के खिलाफ  सुकमा जिले के तोंगपाल थाने में  धारा 302, 120 बी, 147, 148, 149, 352 तथा 25, 27 आम्र्स एक्ट के तहत तोंगपाल थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। 
    सोमवार को एक स्थानीय अदालत में दायर किए गए आरोप पत्र में पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें मामले के आरोपी तमाम लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। 
    सुकमा जिले के एसपी जितेन्द्र शुक्ला ने कहा, जांच के बाद हमें इस मामले में बनाए गए सभी आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं. और सभी गांव वालों का बयान लेने के बाद हमें ये मालूम हुआ है कि हत्या के समय आरोपियों में से कोई वहां मौजूद नहीं था, इसलिए हम उनके खिलाफ मामला वापस ले रहे हैं।
    पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए नंदिनी सुंदर ने कहा है कि बेतुके सिद्धांतों की जगह पुलिस ने सबूतों के आधार पर जांच जारी रखकर अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा, जब सीबीआई ने ताड़मेटला हिंसा के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था, ठीक उसके बाद हमारे खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। 
    यह साफ जाहिर था कि प्रारंभिक आरोप बदले की भावना से लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सभी साधारण निर्दोष आदिवासियों को भी वैसा ही न्याय मिलेगा, जो हमें मिला है।
    बस्तर में प्रोफेसर नंदिनी सुंदर की उपस्थिति और हस्तक्षेप खासे चर्चित रहे हैं। नक्सलियों को आतंकी मानने वाला पक्ष नलिनी सुंदर और उनके सहयोगियों को नक्सलियों के प्रति संवेदनशील होने का आरोप लगाता रहा है, जबकि नंदिनी सुंदर और उनके सहयोगी ऐसे किसी आरोप को सिरे से ख़ारिज करते रहे हैं।  
    घटनाक्रम पर एक नजर
    पुलिस की विवेचना जिसमें गवाहों के बयान शामिल हैं उससे यह तथ्य था कि नलिनी सुंदर अपने सहयोगियों के साथ उक्त गाँव में 12 से 17 मई के बीच गई थीं, और उन्होंने कथित तौर पर ग्रामीणों को यह सलाह दी कि, वे पुलिस के पास ना जाया करें ।
    पुलिस अभिलेख में नलिनी सुंदर और उनके सहयोगियों को पुलिस ने धारा 120 बी के तहत इस प्रकरण में आरोपी बनाया। अपराध दर्ज होते ही नंदिनी मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई और उन्हें तत्काल गिरफ़्तारी से राहत मिल गई, राज्य पुलिस को यह निर्देश मिले कि वो कार्यवाही के एक माह पूर्व नोटिस दे।  देश भर में बस्तर पुलिस की इस कार्रवाई को बदले की कार्रवाई के तौर पर देखा गया था। राज्य सरकार की किरकिरी भी हुई थी।  उस वक्त एसआरपी कल्लूरी बस्तर आईजी थे। उन्हें निलंबित करने की मांग भी की गई थी।  मानवाधिकार समूहों ने एफआईआर को गलत और सीधे सीधे कल्लूरी के इशारे पर प्रायोजित बताया था।

     

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • रायपुर, 12 फरवरी (छत्तीसगढ़)। राज्य के स्पेशल डीजी और ईओडब्ल्यू-एसीबी के मुखिया रहे मुकेश गुप्ता और उनके सहयोगी रहे एसपी रजनेश सिंह के खिलाफ बीती रात ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा एक और मामला दर्ज किया गया है। यह मामला गैरकानूनी टेलीफोन टैपिंग के आरोप में भारतीय टेलीग्राफ एक्ट के तहत रात 9 बजे दर्ज हुआ है। इसमें सूचनाकर्ता ईओडब्ल्यू-एसीबी के इंस्पेक्टर जीवनप्रकाश कुजूर को बताया गया है। 
    यह मामला मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा तीन दिन पहले दर्ज किए गए एक मामल से अलग है जिसमें इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के अलावा भी कई धाराएं लगाई गई थीं। ग्यारह फरवरी को दर्ज इस दूसरी एफआईआर में भी इस एक्ट के अलावा दस धाराएं और लगाई गई हैं। लेकिन राज्य पुलिस द्वारा बनाई गई एफआईआर की वेबसाईट पर ईओडब्ल्यू-एसीबी के दो थाने तो दिखाए जा रहे हैं, उनमें दर्ज कोई भी एफआईआर वेबसाईट पर नहीं दिख रही है। 
    इस बीच ईओडब्ल्यू-एसीबी के आईजी एसआरपी कल्लूरी ने कल एक स्पष्टीकरण जारी करके यह बताया था कि मीडिया में पोस्ट की गई यह खबर सही नहीं है कि उनके विभाग के एक डीएसपी आरके दुबे को निलंबित किया गया है, या उनके निलंबन की कोई नोटशीट चल रही है। यह स्पष्टीकरण कल्लूरी द्वारा प्रदेश के महाधिवक्ता को भेजे गए एक पत्र की शक्ल में सामने आया था। (बाकी पेजï 5 पर)
    इसके पहले ऐसी समाचार पोस्ट किए गए थे कि दबावपूर्वक बयान लेने का आरोप लगाते हुए जिस डीएसपी आरके दुबे ने अदालत में ईओडब्ल्यू-एसीबी के मौजूदा अफसरों के खिलाफ शपथ पत्र दिया था, उसे निलंबित कर दिया गया है। कल महाधिवक्ता को भेजे गए पत्र में इस बात का खंडन किया गया है। 
    उल्लेखनीय है कि प्रदेश के कुख्यात नागरिक आपूर्ति निगम, नान घोटाले की जांच को लेकर यह पूरी कार्रवाई की जा रही है। ईओडब्ल्यू-एसीबी के मुखिया रहते हुए तत्कालीन एडीजी मुकेश गुप्ता एवं एसपी रजनेश सिंह ने जो जांच की थी उसे ईओडब्ल्यू-एसीबी के आज के अधिकारी गैरकानूनी, अनाधिकृत, अपराध, और साजिश पा रहे हैं। इन दोनों अफसरों को पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद भूपेश बघेल सरकार ने निलंबित भी कर दिया है। 
    उल्लेखनीय है कि नान घोटाले की बुनियाद वह टेलीफोन टैपिंग है जो कि ईओडब्ल्यू-एसीबी ने मुकेश गुप्ता की अगुवाई में नान से जुड़े अफसरों की की थी। फोन की इन्हीं कॉल रिकॉर्डिंग की बातचीत को अदालत ने सुबूत की तरह पेश भी किया गया था। अब अगर ईओडब्ल्यू-एसीबी इस टेलीफोन टैपिंग को अपराध मान रही है, तो शायद उसके माध्यम से जुटाई गई बातचीत भी सुबूत की तरह अदालत में न टिके। उल्लेखनीय है कि कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट तक के फैसले हैं कि अवैध रूप से जुटाए गए सुबूत अदालत में मान्य नहीं होते। लोगों को याद होगा कि कुख्यात राडिया टेप में बहुत सी बातें दर्ज हुई थीं, लेकिन वह टैपिंग गैरकानूनी थी, इसलिए अदालत में उसका कोई महत्व नहीं रहा।

     

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नोटबंदी की तरह एक झटके में नहीं होगी शराबबंदी, लोगों को मौत के मुंह में नहीं ढकेल सकते-भूपेश

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 12 फरवरी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को शराबबंदी  पर दो टूक शब्दों में कहा कि एक झटके में शराबबंदी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है, और सभी  कारणों का अध्ययन करने के बाद ही शराबबंदी की जाएगी। 
    प्रश्नकाल में भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने यह मामला उठाया। इसके जवाब में आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि पिछली सरकार के अध्ययन दल ने शराबबंदी को लेकर केरल, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात और बिहार का दौरा किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट दी थी। यह रिपोर्ट खारिज कर दी गई है। श्री लखमा ने कहा कि नोटबंदी की तरह शराबबंदी लागू करने की जल्दी नहीं है। अध्ययन दल का गठन किया गया है। सभी से राय लेकर लागू किया जाएगा। 
    पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने आबकारी मंत्री के बयान पर ऐतराज जताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल ने जनघोषणा पत्र में शराबबंदी का वादा किया था। सभी पहलूओं को ध्यान में रखकर और अध्ययन कर शामिल किया गया है। सरकार बनने के बाद आंख बंद करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शराब से राज्य बर्बाद हो रहा है। दस साल के बच्चे से लेकर बड़े बुढ़े भी शराब पी रहे हैं। पिछले 15 साल में शराब की खपत 15 गुना बढ़ गई है। श्री जोगी ने शराबबंदी पर तत्काल कदम उठाने का जोर दिया। 
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है। नोटबंदी जैसी स्थिति लाकर लोगों को मौत के मुंह में नहीं ढकेल सकते। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने जर्सी गाय देने और धान का समर्थन मूल्य 21 सौ रूपए करने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? श्री बघेल ने कहा कि हमें पांच साल के लिए जनादेश मिला है, लेकिन घोषणा पत्र के सारे वादे को पचास दिन में ही पूरा कराना चाहती है।
    उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर सरकार गंभीर है। क्या कभी किसी ने कल्पना की थी कि 25 सौ रूपए क्विंटल में धान खरीदा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शराबबंदी भी की जाएगी। श्री बघेल ने कहा कि जब तक इसको लेकर जनजागरण नहीं होगा तब तक यह सफल नहीं हो सकता। श्री बघेल ने कहा कि शराबबंदी लागू करने के लिए दो अलग-अलग कमेटियां बनाई गई है। अध्ययन दल जहां शराबबंदी लागू हुई है वहां का अध्ययन करेगी। उन राज्यों में भी जाएगी जहां शराबबंदी के बाद फिर से शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि वे खुद इसको लेकर विधानसभा सत्र के दौरान ही सदस्यों से सुझाव लेंगे। 

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली, 12 फरवरी । राफेल डील पर मोदी सरकार और विपक्षी दलों के बीच सियासी तकरार जारी है। आज एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर एक ई-मेल का जिक्र किया और कहा कि राफेल डील होने से ठीक पहले अनिल अंबानी फ्रांस के मंत्री से मिले थे। सवाल उठता है कि राफेल डील होने से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षामंत्री से कैसे मिले? मोदी बिचौलिये का काम कर रहे थे।
    उन्होंने कहा, अनिल अंबानी को पहले से पता था कि उन्हें राफेल सौदा मिलने वाला है। प्रधानमंत्री ने जो किया वह देशद्रोह और सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, पहले ये भ्रष्टाचार का मामला था, अब ये ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का मामला हो गया है। इस पर कार्रवाई शुरु हो जानी चाहिए।
    राहुल ने कहा, प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा से समझौता किया है। उन्होंने रक्षा मामले की जानकारी एक ऐसे व्यक्ति को दी जिसके पास ये जानकारी नहीं होनी चाहिए।
    राहुल गांधी ने कथित ई-मेल दिखाकर कहा, एक ई-मेल है जिसमें लिखा है कि राफेल डील होने से पहले अनिल अंबानी फ्रांस के रक्षा मंत्री से मिले। इस बैठक में अनिल अंबानी ने कहा कि मोदी फ्रांस के दौरे पर आने वाले हैं और एक एमओयू साइन होने वाला है यानि राफेल डील होने वाला है। सवाल उठता है कि राफेल डील के बारे में रक्षा मंत्री को नहीं मालूम है, विदेश सचिव को नहीं मालूम है। लेकिन अनिल अंबानी को डील होने से 10 दिन पहले पता चल गया। यानि मोदी बिचौलिये का काम कर रहे थे। उन्हें बताना चाहिए कि अनिल अंबानी को कैसे राफेल डील के बार में पता चला।
    उन्होंने आगे कहा कि ये रक्षा से जुड़ा मामला है। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन किया गया है। इस मामले में क्रिमिनल कार्रवाई होनी चाहिए। प्रधानमंत्री को इस मामले में जवाब देना चाहिए।
    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रक्षा के जुड़े मामलों पर सीएजी की रिपोर्ट को चौकीदार ऑडिटर जनरल रिपोर्ट करार दिया। उन्होंने राफेल डील को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि सरकार ने कोर्ट में सही जानकारी नहीं दी। कैग रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखा गया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
    राहुल गांधी ने कहा कि सभी विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच करवानी हो करवा लें। लेकिन राफेल डील की भी जांच हो। आप क्यों नहीं जांच करा रहे हैं। जेपीसी जांच करा दी जाए। एक ही बात है कि वह इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं। इसलिए प्रधानमंत्री जेपीसी जांच नहीं करा रहे हैं। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली/जयपुर, 12 फरवरी । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मौरीन वाड्रा से जयपुर के ईडी दफ्तर में पूछताछ जारी है। ये पूछताछ बीकानेर लैंड डील मामले से जुड़ी हुई है। मंगलवार को रॉबर्ट वाड्रा की मां से पहले चरण की पूछताछ हुई, ईडी ने इस दौरान उनका सेल्फ डिक्लेरेशन लिया। जबकि रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ अब भी जारी है। जयपुर के एक होटल में चल रही पूछताछ में ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा से ये सवाल दागे।
    - उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्टपिटैलिटी के कितने डायरेक्टर हैं?
    - आप कबसे कंपनी के डायरेक्टर हैं?
    - कंपनी किस तरह का काम करती है?
    - कितने बैंक में कंपनी के खाते हैं?
    - आपके कितने बैंक अकाउंट हैं?
    - कंपनी की बिजनेस डीटेल्स क्या हैं?
    - स्काईलाइट के साथ कितनी कंपनियां जुड़ी हैं?
    - बीकानेर में जमीन के बारे में कैसे पता लगा?
    - क्या आप जानते थे कि जमीन सरकार की है?
    रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां से ईडी के कुल 11 अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। इन अधिकारियों ने करीब 55 सवालों की लिस्ट तैयार की है। इन सवालों में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए जमीनों की खरीद फरोख्त में पैसे के इस्तेमाल को लेकर पूछा जा रहा है।
    दरअसल, ईडी ने अपने छापे में यह पाया था कि जिस महेश नागर के जरिए स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी की जमीन बीकानेर में खरीदी गई थी वह जमीन महेश नागर के ड्राइवर अशोक कुमार के पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए खरीदी गई थी। लिहाजा यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर क्या जरूरत थी कि ड्राइवर के नाम पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करनी पड़ी।
    अब ड्राइवर के पास पैसे कहां से आए और उसने कैसे खरीदें। पैसे लोगों को कैसे दिया गया, दलाल जयप्रकाश बांगड़वा से कैसे संपर्क में आए और इसको कैसे भुगतान किया। इसके अलावा यह पूछा जा रहा है कि 2012 में जब स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने फिनलिज प्राइवेट लिमिटेड को बेची तो इस कंपनी के बारे में पता किया था या नहीं।
    राजस्थान हाई कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा को ईडी के जयपुर ऑफिस में पेश होने का आदेश दिया था, जिसके लिए वह सोमवार को ही वहां पहुंच गए थे। लखनऊ में रोड शो करने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा भी देर शाम अपने पति रॉबर्ट वाड्रा से मिलने पहुंचीं, वह मंगलवार सुबह वापस लखनऊ लौटेंगी।
    ईडी की पूछताछ से पहले रॉबर्ट वाड्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि मैं अपनी 75 वर्षीय मां के साथ ईडी के सामने पेश होने जा रहा हूं। ये केंद्र सरकार सीनियर सिटिजन के साथ इस प्रकार दुर्व्यवहार कर रही है, जो एक कार क्रैश में अपनी बेटी को चुकी है, अपने बेटे और पति को भी वह खो चुकी हैं।
    वाड्रा ने कहा कि तीन मौतों के बाद मैंने सिर्फ उन्हें कुछ समय मेरे दफ्तर में बिताने को कहा और उनपर भी इस तरह के आरोप लगा दिए। रॉबर्ट वाड्रा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 4 साल 8 महीने में इस सरकार ने कुछ नहीं किया, लेकिन लोकसभा चुनाव से एक महीने पहले ही मुझ पर आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार को लगता है कि लोगों को ये नहीं दिख रहा?
    राजस्थान हाई कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां को पूछताछ करने में एजेंसियों की मदद करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि बीकानेर लैंड डील मामले में ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को तीन बार समन भेजा था, लेकिन वह एक भी बार पेश नहीं हुए थे। जिसके बाद एजेंसी ने कोर्ट का रुख किया और अब जाकर वाड्रा पेश हो रहे हैं।
    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ कर रही है। वाड्रा अभी तक तीन बार दिल्ली के ईडी दफ्तर में पेश हो चुके हैं, जहां उनसे क्रमश: 5 घंटे, 8 घंटे और 6 घंटे तक पूछताछ हुई थी। ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा के सामने लंदन में फ्लैट की डिटेल्स रखीं, हालांकि वाड्रा ने इन सभी आरोपों को झुठलाया दिया।
    जयपुर पहुचंने से पहले ही रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी पत्नी प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक डेब्यू पर इमोशनल पोस्ट भी लिखा। वाड्रा ने लिखा, यूपी और देश के लोगों की सेवा करने के लिए तुम्हारे नए सफर के लिए मेरी हार्दिक बधाई पी (प्रियंका)। तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त, एक परफेक्ट पत्नी और हमारे बच्चों के बेस्ट मां हो।  (आजतक)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली, 12 फरवरी । कोलकाता की कंपनी इमामी लि। पर एमएफ्स का भारी-भरकम 2,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जो कंपनी के प्रमोटरों को इमामी के सूचीबद्ध शेयरों को गिरवी रखकर दिया गया था। इमामी समूह पर गैर-एमएफ्स कर्जदाताओं के भी शेयरों को गिरवी रखकर बड़ी रकम का कर्ज दिया गया (प्रतिभूतियों के बदले कर्ज) है। इमामी के प्रमोटरों की कंपनी में 72 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें से आधा कर्ज के बदले गिरवी रखा हुआ है। समस्या यह है कि इमामी के शेयरों की दैनिक ट्रेडिंग की मात्रा मुश्किल से 10-12 करोड़ रुपये है। इमामी के शेयर अपने उच्च स्तर से फिलहाल आधी कीमत पर हैं और आगे कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं। साल 2015 में इमामी ने केश किंग का 1,684 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया था और इसके लिए 950 करोड़ रुपये शेयर गिरवी रखकर कर्ज के रूप में जुटाए थे। उसने केश किंग और संबंधित ब्रांड्स को एसबीएस बॉयोटेक से खरीदा था, जिस सौदे को विश्लेषकों ने उस वक्त काफी महंगा करार दिया था।  
    सोमवार को इंट्राडे कारोबार में कंपनी के शेयरों में 11 फीसदी गिरावट दर्ज की गई, जो कि चार सालों के न्यूनतम स्तर 336 रुपये प्रति शेयर रही, हालांकि बाद में कुछ सुधार देखा गया और चार फीसदी की गिरावट के साथ 368 रुपये प्रति शेयर की दर पर बंद हुए।  जैसा कि जी के मामले में हुआ था, एमएफ्स ने गिरवी रखे शेयरों को इसलिए नहीं बेचा था कि इससे शेयरों के दाम तेजी से गिर जाएंगे और मूल रकम की वसूली नहीं हो पाएगी। इससे यह सवाल उठ खड़ा होता है कि जब गिरवी रखे शेयरों को भुनाकर कर्ज की वसूली नहीं की जा सकती तो एमएफ्स ने क्या सोचकर इतनी भारी-भरकम रकम का कर्ज शेयरों को गिरवी रखकर दिया। 
    इसके अलावा अपोलो हॉस्पिटल के शेयरों की कीमत में सोमवार को कारोबार में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह कंपनी के शेयरों में पिछले सात सालों में किसी एक दिन हुई सबसे बड़ी गिरावट है, जिससे निवेशक घबराए हुए हैं। कंपनी में प्रमोटरों की 34 फीसदी हिस्सेदारी है और उन्होंने अपने करीब 75 फीसदी शेयर गिरवी रखे हैं, जिससे निवेशक समुदाय में भय का माहौल है।  सोमवार को कंपनी के शेयरों में आई भारी गिरावट के पीछे मद्रास उच्च न्यायालय का अपोलो की उस याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करना है, जिसमें मांग की गई थी कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे। जयललिता को 2016 में उनकी मृत्यु से पहले अपोलो अस्पताल में किए गए इलाज की शुद्धता और पर्याप्तता को देखने के लिए एक जांच आयोग के गठन पर रोक लगाई जाए। (आईएनएस)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली, 12 फरवरी । बिहार शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट के अवमानना का सामना कर रहे सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट बरसा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि नागेश्वर राव को पता होना चाहिए था कि बिहार शेल्टर मामले के उस वक्त के जांच अधिकारी ए के शर्मा को हटाने से क्या असर होगा। राव को फटकार लगाते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम नागेश्वर राव को अवमानना का दोषी करार देंगे। एक तरफ वो कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया जाए, और दूसरी तफर वो शर्मा का रिलीविंग ऑर्डर साइन कर देते हैं। चीफ जस्टिस ने कड़े लहजे में कहा कि अगर एक दिन बाद रिलीविंग ऑर्डर साइन होता तो क्या आसमान टूट पड़ता?

    सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव को अवमानना का दोषी माना है। सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव पर 1 लाख का जुर्माना लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने सजा में कहा कि जब तक आज कोर्ट चलती रहेगी, कोर्ट में ही एक कोने में बैठे रहेंगे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की मनाही के बाद नागेश्वर राव ने अफसर का तबादला किया था। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • रायपुर, 12 फरवरी। राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने सरकारी स्कीमों सेदीनदयाल उपाध्याय  का नाम हटाया है। छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की पांच योजनाओं से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का नाम जोड़ा गया है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ नगरीय अधोसंरचना विकास निधि से संचालित राज्य प्रवर्तित योजनाओं के नाम बदल दिए हैं। इससे संबंधित आदेश सोमवार को जारी किया गया था। 
    अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने दीनदयाल उपाध्याय स्वावलंबन योजना का नाम बदलकर राजीव गांधी स्वावलंबन योजना कर दिया है। वहीं, पंडित दीनदयाल उपाध्याय सर्वसमाज मांगलिक भवन योजना का नाम अब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर सर्वसमाज मांगलिक भवन योजना होगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एलईडी पथ प्रकाश योजना का नया नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी एलईडी पथ प्रकाश योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय आजीविका केंद्र योजना का नाम राजीव गांधी आजीविका केंद्र योजना और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शुद्ध पेयजल योजना का नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी शुद्ध पेयजल योजना कर दिया है।
    राज्य में पंडित दीनदयाल उपध्याय के नाम से शुरू की गई योजनाओं का नाम बदलने को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि पार्टी योजनाओं से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाने को लेकर विधानसभा में अपना विरोध दर्ज कराएगी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने इन योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या किया? यदि बिना प्रावधानों के सिर्फ नाम बदला गया है तो यह बदलापुर की नई कड़ी है। सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जानबूझ कर सभी योजनाओं के नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर बदले हैं। यह उनकी मानसिकता को दिखाता है।
    राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर हटाने का आदेश दिया गया था। वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिसंबर 2017 में सर्कूलर जारी करके सभी विभागों को आदेश दिए थे कि उनके लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में इस्तेमाल करें। अब अशोक गहलोत सरकार ने उस सर्कूलर को वापस ले लिया है।  (भाषा)

     

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली, 12 फरवरी । जयपुर में आज प्रवर्तन निदेशालय के सामने पोस्टर लगाए हैं। जिसमें प्रियंका गांधी, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी है। पोस्टर में उनके समर्थन में नारे लिखे गए हैं। बीकानेर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी आज जयपुर में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मौरीन से पूछताछ करेगा। रॉबर्ट वाड्रा की मां मौरीन वाड्रा भी उस फर्म में पार्टनर हैं, जिसने ज़मीन का सौदा किया था।  रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मौरीन प्रवर्तन निदेशालय के ऑफिस पहुंच गए हैं उनके साथ प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद हैं।  

    मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ में रोड शो के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा देर रात जयपुर पहुंच गईं। इससे पहले जब ईडी ने दिल्ली में रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ की थी, तब भी प्रियंका पति को प्रवर्तन निदेशालय के ऑफिस तक उन्हें छोडऩे और लेने गई थीं।

    दिल्ली में पिछले सप्ताह, ईडी ने विदेश में अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने में उनकी कथित भूमिका के लिए धनशोधन के संबंध में उनसे गहन पूछताछ की थी। राजस्थान उच्च न्यायालय ने वाड्रा और उनकी मां को ईडी के साथ सहयोग करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद ईडी ने उनके खिलाफ नया समन जारी किया था। इस मामले में इससे पहले वाड्रा ने एजेंसी द्वारा भेजे गए तीन समन का जवाब नहीं दिया था।

    वाड्रा और उनकी मां के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत बयान दर्ज किया जाएगा। राजस्थान पुलिस ने जमीन आवंटन में कथित फर्जीवाड़े को लेकर बीकानेर तहसील द्वारा दर्ज शिकायत पर आरोप-पत्र और एफआईआर दर्ज किया था, जिसका अध्ययन करने के बाद ईडी ने बीकानेर जमीन सौदा मामले में 2015 में आपराधिक मामला दर्ज किया था। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • नई दिल्ली, 12 फरवरी । दिल्ली के करोल बाग में स्थित अपर्ति होटल में मंगलवार तडक़े भीषण आग गई। आग की चपेट में आने से एक बच्चे सहित 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से झुलसे हैं। वहीं, फायरकर्मियों ने अबतक करीब 35 लोगों को बाहर निकाल लिया है। हालांकि, अभी कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की सूचना है। राहत व बचाव कार्य जारी है। आग लगने के पीछे के कारणों का अबतक कुछ पता नहीं चल पाया है। अब तक राममनोहर लोहिया अस्पताल में 17 मृतकों को लाया गया है। अभी तक 13 मृतकों को आरएमएल, 2 को लोडी हार्डिंग और 2 को बीएलके अस्पताल में लाया जा चुका है। इसके अलावा कुछ घायल गंगाराम अस्पताल भी ले जाये गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक, करोलबाग के होटल अर्पित पैलेस में आग सुबह करीब साढ़े चार बजे लगी। गहरी नींद में सोए लोग इससे पहले कुछ समझ पाते, आग फैलती चली गई। इसके बाद लोगों में दहशत फैल गई। चीफ फायर ऑफिसर के मुताबिक 2 लोग बिल्डिंग से कूद पड़े। होटल में कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की भी आशंका है। फायर ब्रिगेड रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। अग्निशमन विभाग के डिप्टी चीफ सुनील चौधरी ने बताया कि होटल अर्पित पैलेस में आग की चपेट में आने से 17 लोगों की मौत हो गई। हालांकि आग बुझा दी गई है।

    उधर, शवों को बाहर लाया जा रहा है। बचाव एवं राहत कार्य फिलहाल जारी है। अग्निशमन विभाग के अनुसार करोल बाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में तडक़े आग लग गई। सूचना मिलते ही 26 दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और बचाव एवं राहत कार्य शुरू किया गया। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें एक आदमी छत से कूद कर जान बचाने की कोशिश कर रहा है। आग लगने की घटना उस समय हुई जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे।

    बताया जा रहा है कि होटल में 40 कमरे हैं। केरल से आए एक ही परिवार के 35 लोगों को बचाया गया है, जबकि कुछ गंभीर रूप से झुलसे है। माना जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। केरल से आए एक ही परिवार के 10 लोग होटल अर्पित पैलेस में ठहरे थे। अग्निशमन विभाग के मुताबिक मरने वालों में एक बच्चा, एक महिला और 7 पुरुष शामिल हैं।

    फायर ऑफिसर ने बताया कि आग पर सुबह करीब 8 बजे तक काबू पा लिया गया था। इस हादसे में मारे गए लोगों के शव भी बाहर निकाल लिए गए हैं। करीब 30 लोगों को होटल से बाहर निकाल लिया गया है। होटल में आग सुबह साढ़े चार बजे के आसपास फैलनी शुरू हुई। यह आग कैसे फैली, अभी तक इसका पता नहीं चल पाया है। (लाइव हिन्दुस्तान)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • -सुशांत सिंह

    नई दिल्ली, 12 फरवरी । मार्च 2015 के चौथे हफ्ते में कारोबारी अनिल अंबानी तत्कालीन फे्रंच रक्षा मंत्री जीन-वी ली ड्रायन के पेरिस स्थित दफ्तर पहुंचे थे और उनके शीर्ष सलाहकारों से मुलाकात की थी। इसके ही करीब 15 दिन बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्रांस से 36 राफेल एयरक्राफ्ट विमान खरीदने का ऐलान किया था। द इंडियन एक्सप्रेस को यह जानकारी मिली है। मीटिंग में फे्रंच रक्षा मंत्री के स्पेशल अडवाइजर जीन क्लॉड मैलेट, उनके इंडस्ट्री अडवाइजर क्रिस्टोफी सोलोमॉन और इंडस्ट्रियल अफेयर्स के लिए टेक्निकल अडवाइजर ज्योफ्री बुकेट भी शामिल थे। सोलोमॉन ने एक यूरोपीय डिफेंस कंपनी के शीर्ष अधिकारी को अंबानी से हुई मुलाकात को गुप्त और कल्पना के मुताबिक बेहद कम वक्त में प्लान बताया था।

    मीटिंग की जानकारी वाले एक अधिकारी के मुताबिक, अंबानी ने एयरबस हेलिकॉप्टर्स के साथ व्यापारिक और सामारिक हेलिकॉप्टर्स, दोनों ही मोर्चों पर साथ काम करने की इच्छा जताई। कहा जाता है कि अंबानी ने इस मुलाकात में एक मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का जिक्र किया, जो तैयार हो रहा था और उस पर पीएम के दौरे के दौरान हस्ताक्षर होना था। जब अंबानी ने तत्कालीन फ्रेंच रक्षा मंत्री के दफ्तर का दौरा किया था, यह जानकारी सभी को थी कि पीएम नरेंद्र मोदी 2015 के अप्रैल 9 से 15 के बीच फ्रेंच के आधिकारिक दौरे पर होंगे। इस बारे में ली ड्रायन के आधिकारिक प्रवक्ता को पिछले हफ्ते भेजे गए ईमेल का अभी तक जवाब नहीं मिला है। वहीं, अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप की तरफ से भी कोई जवाब नहीं आया है।

    अंबानी पीएम के दौरे पर प्रतिनिधिमंडल के हिस्सा थे, जब 36 लड़ाकू विमानों के लिए डील का मोदी और तत्कालीन फे्रंच राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा ऐलान किया गया था। दोनों की तरफ से एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करके इस बात का ऐलान किया गया था। संयोग से अंबानी और फे्रंच अफसरों की मुलाकात वाले हफ्ते में ही 28 मार्च 2015 को रिलायंस डिफेंस की शुरुआत हुई। वहीं, 8 अप्रैल 2015 को तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर ने पीएम मोदी के विदेश दौरे को लेकर मीडिया ब्रीफिंग में राफेल से जुड़ी अटकलबाजियों को तवज्जो नहीं दिया था।

    राफेल डील में अनिल अंबानी की भूमिका पर उस वक्त सवाल उठे जब द इंडियन एक्सप्रेस ने 31 अगस्त 2018 को खबर प्रकाशित की कि उसकी फिल्म कंपनी ने तत्कालीन फे्रंच राष्ट्रपति ओलांद की पार्टनर की फिल्म के प्रोडक्शन में निवेश किया था। इसके दो दिन बाद ही ओलांद के भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच एक एमओयू साइन हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओलांद ने एक फे्रंच वेबसाइट से दावा किया था कि भारत सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी के नाम आगे बढ़ाया था और फे्रंच कंपनी दसॉ ने अंबानी के साथ सौदा किया। ओलांद ने कहा था कि उन्हें अन्य विकल्प नहीं दिए गए। वहीं, दसॉ ने कहा था कि रिलायंस के साथ साझेदारी उनका अपना फैसला था। (जनसत्ता)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • न्यूयॉर्क, 12 फरवरी । शादीशुदा लाइफ सफल बनाने के लिए प्यार और समझदारी ही नहीं बल्कि जीन की भी अहम भूमिका होगी। यह बात एक रिसर्च में सामने आई है। इससे पहले किए गए रिसर्च में इस बात के संकेत मिले हैं कि सफल वैवाहिक जीवन आंशिक तौर पर आनुवांशिक कारकों से प्रभावित होता है और ऑक्सीटोसिन सामाजिक समर्थन में मददगार होता है।

    हालिया शोध के अनुसार, विशेष जीनों में भिन्नता ऑक्सीटोसिन की कार्यपद्धति से जुड़ी होती है और यह समग्र रूप से सफल वैवाहिक जीवन पर असर डालती है।

    जीन पार्टनर्स के बीच समन्वय के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं। इस शोध में विभिन्न तरह के जीनोटाइप-ऑक्सीटोन रिसेप्टर जीन (ओएक्सटीआर) के संभावित जीन संयोजन-का मूल्यांकन किया गया है, जो बताते है कि किस तरह जीवनसाथी एक दूसरे का सहयोग करते हैं। यह सफल वैवाहिक जीवन का प्रमुख निर्धारक होता है।

    ऑक्सीटोसीन के नियमन व रिलीज से जुड़े होने की वजह से ओएक्सटीआर को लक्ष्य बनाया गया।

    अमेरिका के बिंघमटन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर रिचर्ड मैटसन ने कहा, सफल वैवाहिक जीवन के लिए जीन मायने रखते हैं, क्योंकि व्यक्ति के लिए जीन प्रासंगिक होते है और व्यक्तियों की विशेषताएं शादी पर असर डालती हैं। (आईएएनएस)

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Posted Date : 12-Feb-2019
  • भूपेन हजारिका को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा, लेकिन अब खबर आ रही है कि उनके पुत्र तेज हजारिका ने सम्मान लेने से इनकार कर दिया है।

    नई दिल्ली, 12 फरवरी। मशहूर लेखिका गीता मेहता के पद्म सम्मान लेने से इनकार के बाद अब एक बार फिर राष्ट्रीय सम्मान के वापस किए जाने की होड़ लगने वाली है। पिछले दिनों भारत सरकार ने नॉर्थ ईस्ट की आवाज रहे, गंगा पुत्र भूपेन हजारिका को सर्वोच्च सम्मान से नवाजा, लेकिन अब खबर आ रही है कि उनके पुत्र तेज हजारिका ने सम्मान लेने से इनकार कर दिया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भूपेन हजारिका के बेटे ने सम्मान लेने से इनकार कर दिया है लेकिन तेज हजारिका जो पिता के नाम से एक फाउंडेशन चला रहे हैं उन्होंने अपने लंबे चौड़े पोस्ट में साफ लिखा है कि अभी तक उनके पिता को सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा गया है इसकी कोई सूचना नहीं मिली है और इसको लेकर कोई निमंत्रण भी नहीं मिला है। वहीं भूपेन के भाई समर हजारिका ने कहा है कि सम्मान मिलने में देरी हुई है लेकिन ये देश का सर्वोच्च सम्मान है। और यह तेज का फैसला है हमारा नहीं।

    उन्होंने अपने पोस्ट के आखिरी पैराग्राफ में लिखा है कि कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं अपने पिता को दिए गए भारत रत्न को स्वीकार करूंगा या नहीं? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि मुझे अभी तक सरकार की तरफ से कोई निमंत्रण नहीं मिला है तो इसे स्वीकार या फिर अस्वीकार करने जैसा कुछ है ही नहीं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा है कि सरकार ने सम्मानित करने का जो समय चुना है और जल्दबाजी दिखाई है, यह महज लोकप्रियता का सस्ता और साधारण तरीका है।

    वैसे यहां यह लिख देना जरूरी है कि पूरी पोस्ट में नीचे लिखा गया है तेज हज़ारिका। लेकिन यह पोस्ट वैरिफाइड नहीं है। तेज ने कई भारतीय मीडिया चैनलों से बातचीत कर यह स्वीकार किया है कि भारत रत्न देने के समय पर सवाल ‘मैंने भारत रत्न देने को ‘चीप थ्रिल’ नहीं करार दिया है, बल्कि यह जिस समय दिया जा रहा है, उस पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे समय में जब पूर्वोत्तर के लोग नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में सडक़ों पर है, उनके ‘हीरो’ को भारत रत्न देना सवाल खड़े करता है।’

    वहीं इस पोस्ट में आगे लिखा है कि वह अपने पिता को दिया गया भारत रत्व तभी स्वीकार करेंगे जब केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक को वापस लेगी। उन्होंने लिखा है कि मैं भूपेन हजारिका का बेटे होने के नाते यह कहना चाहता हूं कि मेरे पिता का नाम ऐसे समय इस्तेमाल किया गया जब नागरिकता विधेयक जैसे विवादित बिल को अलोकतांत्रिक तरीके से लाने की तैयारी की जा रही है।

    वहीं नवभारत टाईम्स की खबर के अनुसार भारतरत्न दिए जाने के मामले में परिवार दो धड़ों में बंटा हुआ है। भूपेन के छोटे भाई समर हजारिका और मनीषा हजारिका का हवाला देते हुए नवभारत टाईम्स ने लिखा है कि उनका मानना है कि भारत रत्न का अपमान नहीं करना चाहिए।

    वहीं समर हजारिका ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि 25 तारीख को जबसे भूपेन हजारिका के सम्मान की घोषणा हुई है तब से उनके बेटे तेज से उनकी कोई बात नहीं हुई है। लेकिन उन्हें आज पता चला कि उसने सम्मान लेने से इनकार कर दिया है, यह उसका निर्णय है हमारा नहीं। हां मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि भूपेन दा को सम्मान देने में सरकार ने बहुत देरी कर दी है। (दिप्रिंट)

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 11 फरवरी। प्रदेश में हैलीकॉप्टर के किराए को लेकर सोमवार को विधानसभा में मामला उठा। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछले दो साल में पुलिस और सरकार द्वारा हैलीकॉप्टर के किराए पर करीब 78 करोड़ रूपए खर्च कर चुकी है। कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि इतनी राशि में दो हैलीकॉप्टर खरीदे जा सकते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस पर विचार करेगी।

    कांग्रेस सदस्य अरूण वोरा ने प्रश्नकाल में यह मामला उठाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 में राज्य पुलिस विभाग के सरकारी उपयोग और पुलिस विभाग द्वारा दो डबल इंजन वाले हैलीकॉप्टर  किराए पर लिए गए थे। जिसके लिए टेंडर आमंत्रित कर ढिल्लन एविएशन प्राईवेट लिमिटेड को काम दिया गया था। इसके एवज में अगस्त 2016 से अक्टूबर 2018 तक कुल 27 माह में पुलिस विभाग के हैलीकाप्टर के लिए 49 करोड़ और सरकारी उपयोग के हैलीकॉप्टर के लिए 29 करोड़ से अधिक की राशि का किराए के रूप में भुगतान किया गया।

    कांग्रेस सदस्य मोहन मरकाम ने कहा कि इतनी राशि से तो सरकार अपना हैलीकॉप्टर खरीद सकती थी। मुख्यमंत्री ने सदस्य के सुझाव को बेहतर माना और कहा कि सरकार इस पर विचार करेगी। 

     

     

     

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 11 फरवरी। बस्तर की बेटी राजेश्वरी सलाम को सोमवार को विधानसभा ऑडोटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन के अवसर पर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में मानव तस्करी पर हो रहे अत्याचार को लेकर कड़ा कानून बनाया जाएगा। कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय और कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे मौजूद रहे।

     विदित हो कि बस्तर की राजेश्वरी को मानव तस्करों ने वर्ष-2012 में अपने चंगुल में फंसा कर सेलम स्थित एक फैक्ट्री में बेच दिया था। अपनी सूझबूझ से राजेश्वरी न सिर्फ उनके चंगुल से बाहर निकली वरन दूसरी लड़कियों को छुड़ाने में कामयाब रही।

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 11 फरवरी। अंतागढ़ प्रकरण की जांच के खिलाफ सोमवार को विधानसभा में जनता कांग्रेस और भाजपा के सदस्य साथ-साथ नजर आए। जनता कांग्रेस के सदस्य धर्मजीत सिंह ने जांच की वैधानिकता पर सवाल खड़े किए। जबकि भाजपा सदस्यों ने सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। इस दौरान सत्ता और विपक्ष सदस्यों के बीच नोंक-झोंक भी हुई और सदन की कार्रवाई दो बार स्थगित करनी पड़ी। बाद में कार्रवाई शुरू होने पर सदस्य गर्भगृह में चले गए और 14 विधायक सदन की कार्रवाई निलंबित कर दिए गए। 

    प्रश्नकाल के तुरंत बाद जनता कांग्रेस के नेता धर्मजीत सिंह ने काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतागढ़ प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उसकी वैधानिकता ही एक साल की रहती है। जबकि सरकार चार साल बाद प्रकरण की जांच करा रही है। प्रत्याशी के नाम वापस लेने की शिकायत  की किसी भी तरह की जांच चुनाव आयोग द्वारा होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार बेरोजगारी भत्ता, शराबबंदी जैसे विषयों को भूलकर इस मामले की जांच करा रही है। उन्होंने सरकार पर बदले की भावना के तहत काम करने का आरोप लगाया। श्री सिंह ने राबर्ट वाड्रा का नाम लिए बिना कहा कि दिल्ली में ईडी दामाद से पूछताछ कर रही है तो यहां भी नंबर बढ़ाने के लिए दामाद (पुनीत गुप्ता) के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर दिया गया है।

    भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा और अन्य सदस्यों ने भी प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठे प्रकरण दर्ज करने का आरोप लगाया। सदस्य नारायण चंदेल ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अनावश्यक परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। चंदेल ने यह भी कहा कि बदले की भावना से काम करना सरकार को शोभा नहीं देता। कांग्रेस सदस्यों ने आरोपों का प्रतिवाद किया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सत्ता पक्ष को तीन-चौथाई बहुमत मिला है। ऐसे में स्वेच्छाचारिता सही नहीं है। टोका-टाकी के बीच कांग्रेस सदस्य बृहस्पत सिंह ने टिप्पणी कर दी कि आप लोग ऐसा काम ही क्यों करते हैं कि पुलिस को खोजने की जरूरत पड़े। इस पर अन्य विपक्षी सदस्य भी खड़े हो गए। दोनों के बीच जमकर नोंक-झोंक हुई।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने दोनों ही दलों के कामरोको प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, लेकिन विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग करते रहे। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में स्थिति ठीक नहीं है। सदस्य ही सुरक्षित नहीं रह गए हैं। उन्होंने कामरोको प्रस्ताव पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। बाकी विपक्षी सदस्य भी खड़े हो गए। सत्ता पक्ष के सदस्य देवेन्द्र यादव और अन्य सदस्यों ने बेटा बचाओ अभियान बंद करो के नारे लगाए। शोर-शराबे के बीच सदन की कार्रवाई पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो जनता कांग्रेस और भाजपा के सदस्य काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा कराने के लिए अड़ गए।

    सभापति पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि एक बार आसंदी ने व्यवस्था दे दी है इसलिए दोबारा इस पर चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने ध्यानाकर्षण सूचना पढऩे के लिए भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल और अजय चंद्राकर का नाम पुकारा, लेकिन विपक्षी सदस्य चर्चा के लिए अड़े रहे। बाद में सदन की कार्रवाई दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्रवाई फिर शुरू होने पर विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग करते रहे और नारे बाजी करते गर्भगृह में चले गए। 14 विधायक सदन की कार्रवाई से निलंबित कर दिए गए।

    प्रश्नकाल के तुरंत बाद जनता कांग्रेस के नेता धर्मजीत सिंह ने काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अंतागढ़ प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उसकी वैधानिकता ही एक साल की रहती है। जबकि सरकार चार साल बाद प्रकरण की जांच करा रही है। प्रत्याशी के नाम वापस लेने की शिकायत  की किसी भी तरह की जांच चुनाव आयोग द्वारा होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार बेरोजगारी भत्ता, शराबबंदी जैसे विषयों को भूलकर इस मामले की जांच करा रही है। उन्होंने सरकार पर बदले की भावना के तहत काम करने का आरोप लगाया।

    भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा और अन्य सदस्यों ने भी प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठे प्रकरण दर्ज करने का आरोप लगाया। सदस्य नारायण चंदेल ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अनावश्यक परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के खिलाफ झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। चंदेल ने यह भी कहा कि बदले की भावना से काम करना सरकार को शोभा नहीं देता। कांग्रेस सदस्यों ने आरोपों का प्रतिवाद किया। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सत्ता पक्ष को तीन-चौथाई बहुमत मिला है। ऐसे में स्वेच्छाचारिता सही नहीं है। टोका-टाकी के बीच कांग्रेस सदस्य बृहस्पत सिंह ने टिप्पणी कर दी कि आप लोग ऐसा काम ही क्यों करते हैं कि पुलिस को खोजने की जरूरत पड़े। इस पर अन्य विपक्षी सदस्य भी खड़े हो गए। दोनों के बीच जमकर नोंक-झोंक हुई।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने दोनों ही दलों के कामरोको प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, लेकिन विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग करते रहे। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में स्थिति ठीक नहीं है। सदस्य ही सुरक्षित नहीं रह गए हैं। उन्होंने कामरोको प्रस्ताव पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की। बाकी विपक्षी सदस्य भी खड़े हो गए। सत्ता पक्ष के सदस्य देवेन्द्र यादव और अन्य सदस्यों ने बेटा बचाओ अभियान बंद करो के नारे लगाए। शोर-शराबे के बीच सदन की कार्रवाई पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • कमीशनखोरी का आरोप

    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 11 फरवरी। राज्य बजट से स्वीकृत कार्यों को रोके जाने के मसले पर सोमवार को विधानसभा में जमकर शोर-शराबा हुआ। भाजपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य अवरूद्ध हो गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता देखकर काम स्वीकृत किए जा रहे हैं। सत्तापक्ष के सदस्यों ने यह आरोप लगा दिया कि पिछली सरकार ने चुनाव से पहले कमीशन लेकर काम स्वीकृत किए गए। अब पैसा वापस करना पड़ेगा, इसलिए बौरा गए हैं। सत्ता और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। बाद में मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट भाजपा सदस्यों ने सदन से वाकऑउट कर दिया।

    प्रश्नकाल में भाजपा सदस्य धरमलाल कौशिक ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य बजट से वित्त पोषित अप्रारंभ निर्माण कार्यों को वित्त विभाग की फिर से सहमति के उपरांत काम शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने पूछा कि कितने काम रूके हैं? इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की अपनी प्राथमिकता है और परीक्षण के बाद ही स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रदेश में 8 हजार 493 काम रोका गया है। श्री बघेल ने कहा कि पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के 203 कामों को स्वीकृति दी गई है।

    पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण के कामों को भी रोक दिया गया है। विधायकों की राय से ही काम स्वीकृत किए जाते रहे हैं। इससे इन क्षेत्रों में विकास कार्य ठप्प पड़ गया है। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी कहा कि नगरीय क्षेत्रों में भी  जो काम राज्य बजट से नहीं होना है, उसे भी रोक दिया गया है। श्री अग्रवाल ने वित्त विभाग के परिपत्र को ही गलत ठहराया है।

    मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि सारे काम रोक दिए गए हैं। ऐसा नहीं है। परीक्षण कर स्वीकृति दी जा रही है। उन्होंने स्काई योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह काम रोक दिया गया है और इससे आप सभी से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। सरकार ने मोबाइल वितरण रोककर गरीबों के हितों में काम कर रही है। उन्होंने कटाक्ष किया कि इसमें इतनी परेशानी क्यों है। कोई और बात तो नहीं है...।

    पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि राज्य बजट से पंचायतों को दिए जाने वाले काम भी रोक दिए गए हैं। इस पर कांग्रेस सदस्य अमरजीत भगत ने टिप्पणी की कि अजय चंद्राकर के विभाग में बिना पैसे दिए कोई काम होता था। दोनों के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई। बाद में विपक्षी भाजपा सदस्यों ने सदन से वाकऑउट कर दिया।

     

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

     रायपुर, 11 फरवरी। प्रदेश के 17 सौ मजरा टोला में बिजली की पहुंच नहीं है। यह जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

    कांग्रेस सदस्य मोहन मरकाम ने पूछा कि प्रदेश में कुल कितने गांव और बसाहटों में बिजली नहीं है? इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 31 दिसंबर की स्थिति में सभी 19 हजार 567 ग्राम विद्युतीकृत हैं, लेकिन उक्त विद्युतीकृत गांवों के 1737 मजराटोला, बसाहटों में बिजली की पहुंच नहीं है।

    श्री बघेल ने यह भी बताया कि विद्युत पहुंच विहीन मजराटोला, बसाहटों में जून 2019 तक विद्युत की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य है, लेकिन नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर जिलों में सुरक्षा की स्थिति और विपरीत भौगोलिक स्थिति के कारण उक्त जिलों के अविद्युतीकृत घरों में विद्युत की पहुंच की समय सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

    भाजपा सदस्य डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी के एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि मस्तुरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 152 गांवों में विद्युत की आपूर्ति उक्त विधानसभा क्षेत्र में स्थापित 33/11 केव्ही के 8 सब स्टेशनों से की जा रही है। 11 गांवों में लो वोल्टेज की शिकायतें प्राप्त हुई है।

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Posted Date : 11-Feb-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 11 फरवरी। प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं से हर महीने पौने 8 सौ करोड़ का राजस्व मिलता है। यह जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

    भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में करीब 50 लाख से अधिक विद्युत उपभोक्ता है। इनमें बीपीएल सहित घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 45 लाख 91 हजार 30 है। जबकि गैर घरेलु उपभोक्ताओं की संख्या 3 लाख 37 हजार 205 है। इसके अलावा औद्योगिक उपभोक्ताओं की संख्या 32 हजार 455 है।

    श्री बघेल ने यह भी कहा कि बिजली उपभोक्ताओं से प्रतिमाह 774 करोड़  30 लाख का राजस्व मिलता है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रभावशील रियायती पैकेज के तहत 31 मार्च 2019 तक विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत शुल्क की दी गई जानकारी प्रदर्शित है। उक्त रियायती पैकेज की वैधता को 31 मार्च 2019 के बाद बढ़ाए जाने का प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।

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