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27-May-2020

एंबुलेंस से पहले क्वॉरंटीन सेंटर में प्रसव
ग्रामीणों ने मितानिन को जाने से रोका

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
महासमुन्द, 27 मई।
गुजरात से लौटी एक गर्भवती ने सोमवार को क्वॉरंटीन सेंटर काकेनचुआं में एक शिशु को जन्म दिया। क्वॉरंटीन सेंटर से फोन पर इस बात की जानकारी मिली है कि महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही पर ना तो उसे घर-परिवार के लोगों की सहायता मिल पाई और न ही जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी। गांव वालों ने मितानिन को भी क्वॉरंटीन सेंटर में जाने से रोक दिया। जब तक सरकारी एंबुलेंस काकेनचुआं पहुंची, तब तक मजदूर महिला मां बन चुकी थी। समाचार लिखे जाने तक बीएमओ के निर्देश पर जच्चा-बच्चा दोनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
 
महिला के पति भागीरथी ने फोन कर 'छत्तीसगढ़' को जानकारी दी है कि वह ग्राम काकेनचुआ का मूल निवासी है। पत्नी के साथ मजदूरी करने गुजरात गए थे। वे दोनों 24 मई को ही काकेनचुआं वापस आए हैं। जहां उन्हें 14 दिन के क्वॉरंटीन में स्कूल में रखा गया है। भागीरथी ने बताया कि सोमवार को 12 बजे के बाद उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। यह उनका पहला बच्चा है लिहाजा पहले तो पत्नी ने सामान्य दर्द समझकर ध्यान नहीं दिया। पर जब दर्द बढ़ा तो वह कराहने लगीं। भागीरथी ने सेंटर में रह रहे लोगों से सहयोग चाहा पर कोई तैयार ही नहीं हुआ। गांववाले भी सहयोग देने तैयार नहीं हुए। यहां तक मितानिन को भी यह कहकर सेंटर के अंदर नहीं जाने दिया गया कि उन्हें भी 14 दिन क्वॉरंटीन में रहना होगा। फोन से सरकारी सुविधा मांगने की कोशिश की गई पर कोई सुविधा नहीं मिली। इस बीच पता नहीं किसने सरकारी एम्बुलेंस को फोन किया था। जब सरकारी एम्बुलेंस पहुंची, तब तक उसकी पत्नी एक शिशु को जन्म दे चुकी थीं।
 
ज्ञात हो कि जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में इस वक्त जच्चा बच्चा स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, वहां आइसोलेशन वार्ड नहीं है। जच्चा-बच्चा दोनों को पाटसेन्द्री के जनरल वार्ड में ही रखा गया है। इस पर भागीरथी ने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या अन्य किसी अस्पताल के आइसोलेशन सेंटर में रखा जाना चाहिए। भागीरथी ने कहा कि पीएचसी पाटसेन्द्री में उन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा महसूस हो रहा है। इस मामले में कलेक्टर सुनील जैन ने कहा है कि जच्चा बच्चा दोनों के लिए तत्काल विशेष व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टर ने मामले की जानकारी मिलते ही सीएमएचओ को मदद के निर्देश भी दे दिए हैं। 


27-May-2020

देश में संक्रमित 1.50 लाख के पार, पिछले 24 घंटों में 6387 नये मरीज और 170 मौतें

नयी दिल्ली, 27 मई (वार्ता)। देश में पिछले दो दिन में संक्रमण के नये मामलों की संख्या में आंशिक कमी और लगभग 4000 लोगों के रोगमुक्त होने से जहां थोड़ी राहत मिली है, वहीं पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 6387 नये मामले सामने आने से देश में इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या 1.50 लाख के पार पहुंच गई है।

भारत इस संक्रमण से प्रभावित होने के मामले में दुनिया भर में 10वें स्थान पर है। पिछले 24 घंटों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में इस संक्रमण के 6387 नये मामले दर्ज किये गये हैं तथा 170 लोगों ने जान गंवाई है। वहीं इस अवधि में 3935 लोग ठीक भी हुए हैं। 

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेश में अब तक इससे 151767 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 4337 लोगों की मौत हुई है। देश में फिलहाल कोरोना के कुल 83004 सक्रिय मामले हैं। इससे एक दिन पहले 6535, सोमवार को 6977 और रविवार तथा शनिवार को क्रमश: 6767 और 6654 नये मामले सामने आये थे।  

महाराष्ट्र इस महामारी से देश में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इस राज्य में कोरोना ने बहुत कहर बरपाया है। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में 2091 नये मामले सामने आये हैं। इसके बाद राज्य में अब तक इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 54758 हो गई है। राज्य में इस जानलेवा विषाणु से अब तक 1792 लोगों की मौत हुई है तथा 16954 इसके संक्रमण से ठीक हुए हैं।

कोरोना वायरस से प्रभावित होने के मामले में तमिलनाडु दूसरे नंबर पर है। तमिलनाडु में अब तक 17,728 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 127 लोगों की मृत्यु हुई है। वहीं 9342 लोगों को उपचार के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। कोविड-19 से प्रभावित होने के मामले में देश का पश्चिमी राज्य गुजरात तीसरे नंबर पर है। गुजरात में अब तक 14,821 लोग इससे संक्रमित हुए हैं तथा 915 लोगों ने जान गंवाई है। इसके अलावा 7139 लोग इस बीमारी से उबरने में कामयाब हुए हैं। कोरोना के कारण राष्ट्रीय राजधानी की भी स्थिति काफी ङ्क्षचताजनक बनी हुई है। दिल्ली में 14,465 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 228 लोगों ने जान गंवाई है। वहीं 7223 मरीजों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

राजस्थान में भी कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 7536 हो गयी है तथा 170 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4171 लोग पूरी तरह ठीक हुए हैं।

आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना की चपेट में अब तक 6548  लोग आए हैं तथा 170 लोगों की मौत हुई है। वहीं 3698 लोग इससे ठीक हुए हैं। पश्चिम बंगाल में 4009  लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं तथा 283 लोगों की मौत हो चुकी है और अब तक 1486 लोग ठीक हुए है। तेलंगाना में अब तक कोरोना से 1991 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 57 लोगों ने कोरोना के कारण जान गंवाई है। वहीं 1284 लोग अब तक इससे ठीक हुए हैं। 

दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 3171 और कर्नाटक में 2283 लोग संक्रमित हैं तथा इन राज्यों में इससे मरने वालों की संख्या क्रमश: 57 और 44 है। वहीं केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1759 हो गई है और 24 लोगों की मृत्यु हुई है। पंजाब में 40, हरियाणा में 17, बिहार में 13, ओडिशा में सात, केरल में छह,  हिमाचल प्रदेश में पांच, झारखंड और असम में चार-चार, चंडीगढ़ और उत्तराखंड में चार-चार तथा मेघालय में इस महामारी से एक व्यक्ति की मौत हुई है।


27-May-2020

फ्लाइट में कोरोना पॉजिटिव, सभी यात्री क्वारंटाइन

नई दिल्ली 27 मई. एयर इंडिया की दिल्ली-लुधियाना उड़ान में एक यात्री कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इस विमान के सभी 36 यात्रियों को क्वारंटाइन किया गया है। एयर इंडिया के 4 कर्मचारी जो इस उडान पर थे उन्हें भी पंजाब में क्वारंटाइन किया गया है।

देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस के 6387 नए मामले सामने आए हैं और 170 लोगों की मौत हुई है। देश में कोरोना वायरस के कुल मामलों की संख्या 1,51,767 हो गई है। इसमें अब तक 64,425 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि अब तक कुल 4337 लोगों की जान जा चुकी है। देश में जानलेवा महामारी के 83,004 एक्टिव केस हैं। महाराष्ट्र में संक्रमितों की संख्या 54 हजार को पार कर गई है और अब तक 1,792 लोगों की मौत हुई है।  


27-May-2020

ट्विटर ने पहली बार राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट को झूठा बताया

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के किसी ट्वीट को ट्विटर ने पहली बार फ़ैक्ट चेक के लिए चिन्हित किया है.

इस ट्वीट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा था, "पोस्टल मतदान में धांधली होने की पूरी संभावना है. मेल बॉक्स को चोरी किया जा सकता है, इसके ज़रिए फर्जी मतदान किया जा सकता है और फिर इसे अवैध तरीके से प्रिंट कर के भी भेजा जा सकता है."

ट्विटर ने ट्रंप के दो ट्वीट्स पर फैक्ट चेकिंग का नोटिफिकेशन लगा दिया है.

इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ट्विटर को ट्वीट के ज़रिये ही जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ट्विटर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दम घोंट रहा है. ट्विटर के नोटिफिकेशन में लिखा गया है "पोस्टल मतदान से जुड़े तथ्यों के बारे में जानिए."

पर ट्रंप अपनी प्रतिक्रिया में यहीं नहीं रुके. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया.
ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, "अब ट्विटर 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप कर रहा है. उसका कहना है कि पोस्टल मतदान पर मेरा बयान भ्रष्टाचार और धांधली को बढ़ावा दे सकता है. इसके लिए वह सीएनएन और वॉशिंगटन पोस्ट की एक फैक्ट चेकिंग स्टोरी को आधार मान ररहा है. अमेज़न समर्थित वॉशिंगटन पोस्ट और फेक न्यूज़ फैलाने वाले सीएनएन को आधार मान रही है."

"ट्विटर फ्री स्पीच को पूरी तरह रोक रहा है और मैं राष्ट्रपति होने के नाते ऐसा होने नहीं दूंगा."

ट्विटर क्या कह रहा है?

राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट के नीच ट्विटर ने जो नोटिफिकेशन लगाया है को यूजर्स को एक ऐसे पेज पर ले जाता है जहां पोस्टल बैलट को लेकर किए गए राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को 'तथ्यों पर परे करार' दिया गया है.

ट्विटर ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को बेबुनियाद करार देने के लिए सीएनएन. वॉशिंगटन पोस्ट और दूसरे न्यूज़ आउटलेट्स की रिपोर्टों का सहारा लिया है.

इस पेज पर ट्विटर ने अपने यूजर्स को बताया है कि आपको क्या जानने की ज़रूरत है? ट्विटर का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का दावा गलत है कि पोस्टल बैलट से चुनावों में धांधली की संभावना है.

फैक्ट चेक करने वाले लोगों के हवाले से ट्विटर का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि पोस्टल बैलट से मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी की जा सकती है.
ट्विटर के मुताबिक़ ट्रंप का ये कहना भी गलत है कि कैलिफोर्निया राज्य में रहने वाले जिस व्यक्ति को चाहे पोस्टल बैलट भेज सकता है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पोस्टल बैलट पाने वाला व्यक्ति कौन है और वो इसे कैसे हासिल कर रहा है. सच तो ये है कि केवल रजिस्टर्ड वोटर ही पोस्टल बैलट हासिल कर सकते हैं.

ट्विटर ने एनबीसी न्यूज़ के हवाले से कहा है कि अमरीका के पांच राज्यों में चुनाव पूरी तरह से पोस्टल बैलट से कराने का फ़ैसला किया गया है. कुछ राज्यों ने इसके लिए अपने यहां सुविधाएं देने का फ़ैसला किया है.

ट्विटर ने कहा है कि भ्रामक या गलत जानकारी वाले ट्वीट्स को चिन्हित करने का काम करती रहेगी लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट्स पर कार्रवाई करने में सुस्त रही है.

ट्रंप का राष्ट्रपति चुनाव अभियान संभाल रहे ब्रैड पास्केल ने ट्विटर का इस कदम की आलोचना की है.

उन्होंने कहा, "ट्विटर फेक न्यूज़ फैलाने वाले फैक्ट चेकर्स के साथ साझेदारी कर रहा है. ये उसकी राजनीतिक साजिश है. हमने कुछ महीने पहले ट्विटर से अपने सभी विज्ञापन वापिस ले लिए थे."(bbc.com/hindi)
 


27-May-2020

देखें LIVE : राहुल गाँधी की कोरोना संकट पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. आशीष झा और कारोलिंसका इंस्टिट्यूट के प्रो. जोहान गिसेके से चर्चा, 'प्ले' पर क्लिक करें -


27-May-2020

देश में कोरोना डेढ़ लाख पार, 24 घंटे में 170 मौतें , 6,387 नए मामले
दुनियाभर के देशों के साथ-साथ भारत में भी कोरोनावायरस  के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. देश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पर पहुंच गया है. -परिमल कुमार, 

नई दिल्ली: दुनियाभर के देशों के साथ-साथ भारत में भी कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. देश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पर पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोनावायरस मरीज़ों की कुल संख्या 1,51,767 हो गई है और जबकि इस वायरस से अब तक 4,337 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के 6,387 नए मामले सामने आए हैं और 170 लोगों की जान गई है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 64,426 मरीज़ कोरोना को मात देने में कामयाब हुए हैं. रिकवरी रेट 42.45 प्रतिशत पर पहुंच गया है. (khabar.ndtv.com/)
 


27-May-2020

ICMR ने राज्यों से कहा- प्राइवेट लैब में तय हो कोरोना टेस्ट की कीमत, लोगों को कम करना होगा खर्च
अभी तक प्राइवेट लैब्स 5,000 रुपये में COVID-19 समेत 50 या उससे अधिक टेस्ट का पैकेज ऑफर कर रही हैं.

नई दिल्ली. देश इस समय कोरोना संकट के दौर से गुजर रहा है. हर दिन कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट कराना चाहती है, जिससे इस महामारी को पूरी तरह से हराया जा सके. कोरोना की जांच के लिए अभी तक देश में आरटी-पीसीआर की कीमत 4,500 रुपये तय की गई थी, जिसे अब कम करने की बात कही जा रही है. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने सभी राज्यों से कहा है कि वह निजी लैब के साथ बातचीत कर टेस्ट की एक कीमत तय करें जिससे कोरोना के टेस्ट को और ज्यादा किया जा सके.

क्लिक करें और यह भी पढ़े : क्या निजी अस्पतालों के दम पर कोरोना से लड़ सकेगा भारत ?
 

बता दें कि अभी तक प्राइवेट लैब्स 5,000 रुपये में कोविड-19 समेत 50 या उससे अधिक टेस्ट का पैकेज ऑफर कर रही हैं. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने राज्यों को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि अब देश में कई कंपनियां जांच किट तैयार करने लगी हैं, जिसके कारण किट को बाजार में उतारने के लिए इनकी कीमतें भी तेजी से कम हो रही हैं.

ऐसे में जब किट सस्ते में मिलने लगी हैं तो लैब को भी टेस्ट के दाम घटाने की जरूरत है. आईसीएमआर ने राज्यों से कहा है कि वह सभी निजी लैब के साथ कोरोना टेस्ट की जांच के लिए सही कीमत का निर्धारण करे, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी जांच करा सकें.

आईसीएमआर ने मुफ्त में जांच करने की अपील की थी

बता दें कि आईसीएमआर ने प्राइवेट लैब्स से मुफ्त में कोरोना टेस्ट करने की अपील की थी. आईसीएमआर की इस अपील का प्राइवेट लैब्स पर कोई खास असर देखने को नहीं मिला था. प्राइवेट लैब्स की आईसीएमआर की दलील को यह कहते हुए मानने से इनकार कर दिया था कि उन्हें अपने कर्मचारियों का वेतन देना पड़ता है और साथ ही किट तथा रीजेंट की लागत भी चुकानी पड़ती है. ऐसे में वे मुफ्त में जांच नहीं कर सकते हैं.(hindi.news18.com)
 


27-May-2020

4 लाख से अधिक मजदूर आने की संभावना-सिंहदेव 
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि अभी एहतिहात बरतने की जरूरत है. सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की आवश्यकता है.
- सुरेंद्र सिंह

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रवासी मजदूरों के लिए 18 हजार 491 क्वारंटाइन सेंटर चिन्हित किए गए हैं, जिनकी क्षमता 6 लाख 78 हजार 720 है.  लेकिन वर्तमान में यहां एक लाख 36 हजार 633 मजदूर रखे गए हैं. जैसे-जैसे मजदूर बाहर से आ रहे हैं, इन केंद्रों की क्षमता का अधिक इस्तेमाल होते जा रहा है. सरकार का कहना है कि प्रदेश में अब तक 48 हजार 116 कोरोना संदिग्धों की पहचान कर उनकी जांच की गई, जिसमें 45 हजार 22 की रिपोर्ट निगेटिव पाए गए है. वहीं दो हजार 922 की जांच जारी है. फिलहाल और कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई है.

प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के साथ ही कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अलग-अलग टीम बनाकर उन सबकी जांच की जा रही है. फिलहाल प्रदेश में कुल 110 एक्टिव मरीज हैं और इन सभी का एम्स और सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है. वहीं 67 ठीक होकर अपने घर चले गए हैं. जानकारी के मुताबिक वर्तमान में 40 हजार 649 लोग होम क्वारंटाइन में रखे गए हैं और उनकी नियमित जांच चल रही है.

स्वास्थ्य विभाग ने कही ये बात

स्वास्थ्य विाग से जारी विशेष मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक प्रदेश में कुल 151 क्वारंटाइन सेंटर हैं, जिनकी क्षमता 3 हजार 292 है. यहां फिलहाल 914 लोग क्वारंटीन में रखे गए हैं. प्रवासी मजदूरों के लिए प्रदेश में 18 हजार 491 क्वारंटीन सेंटर चिन्हित किए गए हैं, जिनकी क्षमता 6 लाख 78 हजार 720 है. लेकिन वर्तमान में यहां एक लाख 36 हजार 633 मजदूर रखे गए हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों या अन्य लोगों की जानकारी आसपास के स्वास्थ्य केन्द्रों में तुरंत देने कहा जा रहा है, ताकि उनकी स्क्रीनिंग और रैपिड जांच तुरंत हो सके. तो वहीं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि अभी एहतिहात बरतने की जरूरत है. सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की आवश्यकता है. आने वाले समय में प्रदेश में प्रवासी मजदूर करीब 4 लाख से अधिक के आने की संभावना है.(hindi.news18.com)

 


27-May-2020

दरभंगा में ज्योति का घर बना पीपली लाइव, नींद अधूरी, खाना-पीना छूटा
सीटू तिवारी
बीबीसी हिंदी के लिए

"शौचालय के लिए आज तक यानी 26 मई तक तो बाहर ही गए हैं. आज घर में बन रहे शौचालय में दरवाजा लग जाएगा. अंजाद (अंदाज) है कि कल से बाहर नहीं जाना पड़ेगा."

ज्योति की मां फूलो देवी ने मुझसे ये फ़ोन पर कहा तो साल 2010 में आई फ़िल्म 'पीपली लाइव' याद आ गई. फ़िल्म में नत्था नाम का एक किसान अपनी ग़रीबी से परेशान आकर आत्महत्या करने की कोशिश करता है. जिसके बाद मीडिया और नेता का नत्था के गांव में जमावड़ा लग जाता है और फ़िल्म के अंत में नत्था गुड़गांव (अब गुरुग्राम) में गुमनामी में मज़दूरी करते दिखता है.

दिलचस्प है कि ज्योति के पिता मोहन पासवान भी गुरुग्राम में ही कुछ महीनों पहले बैट्री रिक्शा चलाते थे. ज्योति का एक कमरे और छोटे से बरामदे वाला घर इस वक़्त पीपली लाइव का सेट सरीखा ही लग रहा है. हमेशा इस छोटे से घर में 40-50 लोगों का जुटान रहता है.

कुछ नेता, कुछ मीडिया वाले, कुछ सामाजिक संगठन, कुछ सरकारी अधिकारी. सब ज्योति की उपलब्धियों और सरकार की नाकामियों को लपकने को बेताब.
 

पोखर के पास पंडाल लगाएंगे

इस जुटान से घर वाले ख़ुश भी हैं और कोरोना के इस काल में डरे हुए भी.

ज्योति के पिता मोहन पासवान ने बीबीसी से कहा, "पोखर के पास पंडाल लगाएंगे. घर बहुत छोटा पड़ता है. कोरोना का भी डर है, लेकिन किसी को मना करेंगे तो कहेगा कि बहुत अहंकार आ गया है. इसलिए सोच रहे हैं कि पोखर के पास पंडाल लगाएं ताकि वहीं आकर लोग मेरी बच्ची को आशीर्वाद दे दे."

दरअसल बिहार के दरभंगा ज़िले के सिंहवाड़ा के सिरहुल्ली गांव में कोरोना से ज़्यादा ज्योति की चर्चा है. यही वजह है कि सोशल या फिज़िकल डिस्टैंसिंग जैसे शब्द यहां आकर दम तोड़ रहे है.

नेता, मंत्री, संगठन, सरकार के लोग आकर ज्योति को लड्डू खिला रहे हैं, अंग वस्त्र से सम्मानित कर रहे हैं, कपड़े दे रहे हैं और सेल्फ़ी ले रहे हैं. कोरोना के संक्रमण से निर्भय होकर.
मास्क लगाए ज्योति, अभी होम क्वारंटीन में हैं लेकिन लोग ज़रूरी शारीरिक दूरी बरत नहीं रहे हैं. मैंने ज्योति से पूछा तो उन्होंने थकी आवाज़ में कहा, "हम अब किसी को कुछ नहीं बोलते. क्या करें?"

नींद अधूरी, खाना-पीना छूटा

ज्योति के घर में सुबह 7 बजे से आने-जाने वालों का मजमा लगना शुरू होता है तो लोगों की महफ़िल रात आठ बजे जाकर ही टूटती है.

मोहन पासवान ने गर्मी का ख़याल रखते हुए एक नया पंखा भी ख़रीद लिया है.

ज्योति की मां फूलो कहती हैं, "उसकी नींद पूरी नहीं हो रही है. लेकिन क्या करें. खाना-पीना भी मुश्किल हो गया है. लेकिन मेरी बिटिया चिड़चिड़ा नहीं रही है. सबसे ख़ुश होकर बात करती है."

ज्योति ने भी बीबीसी से कहा कि उसे अच्छा तो बहुत लग रहा है लेकिन नींद पूरी नहीं हो रही है. वहीं पिता ने उसे सबका फ़ोन कॉल उठाने की हिदायत दी है ताकि कोई बुरा ना मान जाएं.

इंजीनियर, डॉक्टर क्या बनना चाहती है ज्योति?

15 साल की ज्योति पढ़ाई में औसत छात्रा रही है. उसने राजकीयकृत मध्य विद्यालय, सिरहुल्ली से साल 2017 में आठवीं पास किया है.

उसके स्कूल के प्रिंसिपल रत्नेश्वर झा ने बीबीसी को बताया, "ज्योति औसत छात्रा थी. स्कूल की किसी अन्य गतिविधियों में उसकी बहुत दिलचस्पी नहीं थी. शर्मीली थी पहले, लेकिन आज वो हमारे स्कूल के लिए गर्व का विषय है."

ज्योति की मां बताती हैं कि उसने नौवीं में दाख़िला लेकर पढ़ाई छोड़ दी.आंगनबाड़ी में काम करने वाली फूलो बताती हैं, "सब आस पड़ोस के बच्चे ट्यूशन पढ़ते थे लेकिन हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि उसे ट्यूशन पढ़ाए तो उसने पढ़ाई छोड़ दी."

फ़िलहाल अब बिहार सरकार ने ज्योति का नामांकन नौवीं कक्षा में करा दिया है. लेकिन अलग-अलग संस्थाओं ने ज्योति को इंजीनियरिंग, डॉक्टरी पढ़ने या प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए होने वाली तैयारी में उसे मदद का आश्वासन दिया है.
उधर साइकिलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने भी ज्योति को ट्रायल के लिए दिल्ली बुलाया है ताकि उसके साइकिलिस्ट बनने की संभावनाओं को तलाशा जा सके.

केन्द्रीय खेल मंत्री किरन रिजूजू ने इस मामले में स्पोर्टस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया से ज्योति ट्रायल के बाद रिपोर्ट मांगी है.

मेरी इस लड़की को हम कहां-कहां भेजे?

ज्योति क्या चाहती है? मेरे इस सवाल पर किसी पत्रकार के 'वीडियो शूट' के लिए साइकिल चलाकर लौटी ज्योति कहती है, "जब पढ़ लिख लेंगे तो बता देंगे. बस हमको इतना मालूम है कि पढ़ लिख कर कुछ बनना है."

ज्योति ने साइकिलिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया से एक महीने का समय मांगा है. लंबी दूरी तक साइकिल चलाने के चलते उसकी कमर में घाव हो गए हैं, जिसका इलाज चल रहा है.

दिचलस्प है कि लोगों के जमावड़े के चलते टीवी पर ज्योति से जुड़ी क्या ख़बरें चल रही हैं, ये देखने की फ़ुरसत भी परिवार के पास नहीं है.

इधर लोगों से मिल रहे लगातार ऑफ़र से उसके पिता संशय की स्थिति में हैं. वो बेचैन होकर पूछते है, "एक लड़की है इसे हम कहां-कहां भेजेंगें? सब कह रहे हैं कि मकान नौकरी की व्यवस्था करेंगे लेकिन मेरी एक बेटी कहां-कहां जाएगी?"

घर में लग गया नल, अब तक मिल चुकी चार साइकिल

ज्योति के घर में जहां आनन-फ़ानन में शौचालय बन गया वहीं मुख्यमंत्री हर घर नल जल योजना के तहत तीन नल लग गए है.

एक शौचालय के पास और दो बरामदे में. उसके घर में खाना बनाने की गैस है लेकिन गैस भराने के लिए ज़रूरी पैसों के अभाव में ज़्यादातर चूल्हे पर ही खाना बनता है.
इसके अलावा ज्योति को अब तक चार नई साइकिल मिल चुकी है. जिसमें एक स्पोर्ट्स साइकिल भी है जो स्थानीय विधायक संजय सरावगी ने दिया है.

ज्योति ने जो साइकिल गुरुग्राम से दरभंगा आने के लिए ख़रीदी उसको मिलाकर घर में पांच साइकिल हो गई हैं जो इस छोटे से घर से बहुत जगह घेर रही है.

इन साइकिलों का क्या कीजिएगा, मेरे इस सवाल पर ज्योति की मां बोलीं, "गुरुग्राम वाली साइकिल को संजोकर रखेंगें क्योकि वो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण निशानी है. बाक़ी साइकिल बच्चे चलाएंगे."
ज्योति की छोटी बहन मानसी पांचवीं में पढ़ती है, भाई दीपक तीसरी कक्षा में और प्रियांशु अभी आंगनबाड़ी जाता है.

बारहवीं तक पढ़े मोहन पासवान कहते हैं, "लोग पैसे से मदद कर रहे हैं लेकिन अकांउट में कितना पैसा आया, ये अभी तक मालूम नहीं किया है. लेकिन जो भी पैसा आ रहा है उससे बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगें."

गर्व और शर्म का विषय

15 साल की ज्योति जो अपने पिता को कभी साइकिल और कभी ट्रक पर बैठाकर गुरुग्राम से सिरहुल्ली पहुंची है, उस पर सोशल साइट्स में लोग बंटे हुए हैं.

किसी के लिए ज्योति गर्व, किसी के शर्म और कोई ज्योति पर गर्व और सरकार पर शर्म महसूस कर रहा है.

दरअसल ज्योति के इस पूरे एपिसोड ने समाज और व्यवस्था को बेपर्द कर दिया है. इस समय भी जब ज्योति को सम्मानित करने वालों की भीड़ उसके घर लगी है, हज़ारों 'ज्योति' सड़क पर पैदल चलती रही है, ट्रेन में ठूंस-ठूंस कर भूखे प्यासे अपने घर आने की पीड़ादायक यात्रा कर रही है.

लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने ज्योति को राष्ट्रपति पुरस्कार देने की अनुशंसा की है, तेजस्वी यादव ने उनकी पढ़ाई लिखाई और शादी का ख़र्च उठाने का भरोसा दिया है तो बिहार सरकार हाशिए पर पड़े समाज के लिए बनी हर कल्याणकारी योजना को ज्योति के घर तक पहुंचाने में लगी है.

बीते आठ दिनों में ज्योति का जीवन बदल गया, लेकिन क्या ये बेहतर नहीं होता कि बिहार, जहां 60 फ़ीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार है वहां प्रत्येक बच्ची-प्रत्येक महिला के जीवन में ये बदलाव सरकार, व्यवस्था और समाज उठाने का ज़िम्मा लेता ? (bbc.com/hindi)
 


27-May-2020

क्या निजी अस्पतालों के दम पर कोरोना से लड़ सकेगा भारत ?

भारत कोरोना प्रभावित दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल हो गया है. इसके साथ ही अस्पतालों में बिस्तरों की कमी की बात सामने आने लगी है. बुरी तरह से प्रभावित मुंबई में अस्पताल के बिस्तर कम पड़ने लगे हैं.

मनीत पारीख की मां के जब कोरोना से संक्रमित होने का पता चला तो उन्हें आनन फानन में मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां के अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में क्रिटिकल केयर बेड खाली नहीं है. पांच घंटे की मेहनत और दर्जनों फोन कॉल के बाद परिवार को बॉम्बे अस्पताल में भर्ती किया गया. एक दिन बाद 18 मई को पारीख के 92 साल के दादा को घर पर सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो वो उन्हें लेकर ब्रीच कैंडी अस्पताल गए लेकिन वहां जगह नहीं मिली.

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पारीख ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "मेरे पिता उनके आगे गिड़गिडा रहे थे. उन्होंने कहा कि उनके पास बेड खाली नहीं है, सामान्य बेड भी नहीं." उन्हें बाद में उसी दिन बॉम्बे हॉस्पिटल में जगह मिल गई लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत हो गई. उनके टेस्ट के नतीजों से पता चला कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित थे. पारीख मानते हैं कि इलाज में देर होने की वजह से उनके पिता की जान गई. लीलावती अस्पताल के अधिकारियों ने रॉयटर्स से बात करने से मना कर दिया और ब्रीच कैंडी अस्पताल के प्रतिनिधियों ने इस पर प्रतिक्रिया के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया.

निजी अस्पतालों पर संदेह

बीते कई सालों से भारत में निजी अस्पतालों ने देश के स्वास्थ्य सेवा की कमान एक तरह से संभाल रखी है. सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा और धन की कमी का निजी अस्पतालों ने जम कर फायदा उठाया है. हालांकि पारीख परिवार के साथ जो हुआ उसे देख कर यह आशंका मजबूत होने लगी है कि कोरोना वायरस के मामले अगर ज्यादा बढ़ गए तो भारत के निजी अस्पताल भी उसका बोझ उठाने की स्थिति में नहीं हैं.

सोमवार को भारत में कोरोना के 6,977 मामले सामने आए जो देश के लिए एक दिन में संक्रमित होने वाले लोगों की अब तक की सबसे बड़ी तादाद है. सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश में कोरोना के मामले 13 दिन में दोगुने हो रहे हैं. सोमवार को संक्रमण में हुई बढ़ोत्तरी के साथ ही भारत ईरान को पीछे छोड़ कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में शामिल हो गया है.

मिशिगन यूनिवर्सिटी में जैव सांख्यिकी और महामारी विज्ञान के प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी का कहना है, "बढ़ती दर नीचे नहीं जा रही है, हम कर्व को फ्लैट होते नहीं देख रहे हैं." मुखर्जी की टीम का अनुमान है कि भारत में जुलाई की शुरुआत तक 630,000 से 21 लाख तक की आबादी कोरोना की चपेट में आ सकती है.

भारत में कोरोना के 20 फीसदी मामले केवल मुंबई में हैं. भारत इतने अधिक मरीजों को कैसे संभालेगा? स्वास्थ्य मंत्रालय से कोरोना के बढ़े मामलों को संभालने के बारे में प्रतिक्रिया मांगने पर कोई जवाब नहीं मिला. भारत के अस्पताल सामान्य दिनों में ही मरीजों से भरे रहते हैं. केंद्र सरकार ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि सारे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती और वह अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य उपकरणों को हासिल करने के लिए तेज कदम उठा रही है.

बिस्तरों की कमी

भारत सरकार के पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि देश के अस्पतालों में करीब 714,000 बिस्तर हैं. 2009 में यह संख्या 540,000 थी. भारत की बढ़ती आबादी की तुलना में प्रति 1000 लोगों पर अस्पताल के बिस्तरों की संख्या में बहुत मामूली सुधार ही हुआ है.  आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रति 1000 लोगों पर 0.5 बिस्तर मौजूद हैं.  इसकी तुलना अगर दूसरे देशों से करें तो चीन में यह आंकड़ा 4.3 और अमेरिका में 2.8 है.

भारत के करोड़ों लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में. हालांकि अस्पताल में भर्ती होने वाले 55 फीसदी लोग निजी अस्पतालों में जाते हैं. बीते दो दशकों में देश के बड़े शहरों में निजी अस्पतालों का बड़ी तेजी से विकास हुआ है और भारत के अमीर होते मध्यवर्गीय लोग इनका उपयोग कर रहे हैं. मुंबई के म्युनिसिपल अथॉरिटी का कहना है कि उसने सरकारी अधिकारियों को कम से कम 100 निजी अस्पतालों के बेड अपने नियंत्रण में लेने का आदेश दिया है ताकि कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बिस्तर मुहैया कराए जा सकें. हालांकि इसके बाद भी लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है.

कर्मचारियों की कमी

अस्पतालों में सिर्फ बिस्तरों की कमी नहीं है. 16 मई को मुंबई की म्युनिसिपल अथॉरिटी ने कहा कि उसके पास कोविड-19 के गंभीर मरीजों की देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं. नतीजा यह हुआ है कि रेसिडेंट डॉक्टरों को आराम के लिए केंद्र सरकार से निर्धारित समय से भी कम समय मिल रहा है. कुछ डॉक्टरों ने रॉयटर्स को बताया कि वे पहले से ही बहुत सारे मरीजों का इलाज कर रहे हैं. कई बार उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण भी नहीं होते और उन्हें खुद को संक्रमण के जोखिम में डाल कर दूसरों का इलाज करना पड़ रहा है.

बीते हफ्तों में मुंबई, पश्चिमी गुजरात, आगरा और कोलकाता के अस्पतालों को आंशिक या पूरी तरह से बंद करना पड़ा क्योंकि कुछ स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे. केंद्र सरकार का कहना है कि अब तक किसी मेडिकल स्टाफ के वायरस से मौत होने की सूचना नहीं है.
नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के 2500 रेजिडेंट डॉक्टरों के संघ के प्रमुख डॉ आदर्श प्रताप सिंह का कहना है, "हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं को कभी प्रमुखता नहीं दी गई. सरकार को अब सच्चाई का अहसास हो रहा है मगर अब बहुत देर हो चुकी है." एम्स के डॉक्टरों ने पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर प्रदर्शन भी किया है. उन्होंने अपने वेतन का कुछ हिस्सा कोरोना वायरस फंड में दान करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को भी सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया.

स्वास्थ्य मामले के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत कम निवेश किया है. भारत सरकार अपनी जीडीपी का महज 1.5 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करती है. 1980 के दशक में तो यह महज 1.3 फीसदी था और पांच साल पहले 1.3 फीसदी.

इस साल नरेंद्र मोदी की सरकार ने स्वास्थ्य बजट को छह फीसदी बढ़ा दिया. हालांकि इसके बावजूद यह सरकार के अपने ही लक्ष्य से काफी पीछे है. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक सरकार ने स्वास्थ्य सेवा पर खर्च 2025 तक जीडीपी का ढाई फीसदी करने की बात कही थी.

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मरीजों की तादाद लगातार तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में अब अस्पताल में बिस्तरों की कमी का मामला उठ रहा है. एनआर/एमजे (रॉयटर्स) (dw.com)

 


27-May-2020

भारत में टिड्डी हमले के पीछे है कोरोना 
-हृदयेश जोशी

भारत के कम से कम तीन राज्य इस वक्त टिड्डियों के हमले की मार झेल रहे हैं और इससे 8,000 करोड़ की मूंग दाल और बहुत सारी अन्य फसलों के नुकसान होने का खतरा है.
टिड्डियों के झुंड अभी राजस्थान, यूपी और मध्यप्रदेश के साथ हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में दिख रहे हैं. इन राज्य सरकारों ने अलर्ट घोषित किया हुआ है और परेशान किसान थाली बजाकर और शोर मचाकर टिड्डियों को भगाने की असफल कोशिश कर रहे हैं. टिड्डियों का हमला वैसे तो नई बात नहीं है लेकिन ताजा संकट के पीछे कोरोना वायरस का भी हाथ है.

संयुक्त राष्ट्र खाद्य संगठन के अधिकारियों ने डीडब्ल्यू को बताया कि मॉनसून के बाद भारत को टिड्डियों के दूसरे बड़े हमले के लिये तैयार रहना चाहिए. इस हमले से खरीफ की फसल को क्षति हुई तो खाद्य सुरक्षा का संकट भी हो सकता है.

                                  क्लिक करें और यह भी पढ़े : 2019 में टिड्डी दलों ने भारत पर 200 से अधिक बार किया हमला
टिड्डियों के पीछे कोरोना वायरस का हाथ

असल में डेजर्ट लोकस्ट के नाम से पहचानी जाने वाली टिड्डियों की प्रजाति हर साल ईरान और पाकिस्तान से भारत पहुंचती है. जहां भारत में ये टिड्डियां एक बार मॉनसून के वक्त ब्रीडिंग करती हैं वहीं ईरान और पाकिस्तान में ये दो बार अक्टूबर और मार्च के महीनों में होता है. मार्च में इन दोनों ही देशों में प्रजनन रोकने के लिए दवा का छिड़काव किया जाता है लेकिन इस बार कोरोना संकट से घिरे ईरान और पाकिस्तान में यह छिड़काव नहीं हुआ और भारत में दिख रहे टिड्डियों के हमले के पीछे यह एक बड़ा कारण है.

                                        क्लिक करें और यह भी पढ़े : राजस्थान, एमपी के बाद यूपी की तरफ बढ़ा खतरनाक टिड्डी दल, कई जिलों में अलर्ट
 

अप्रैल के मध्य में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की रीजनल बैठक में टिड्डियों के खतरे को लेकर चर्चा भी हुई. स्काइप द्वारा हुई इस मीटिंग में मौजूद सूत्रों ने डीडब्ल्यू को बताया कि भारत और पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि इसमें थे. एक पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने मीटिंग में माना कि कोरोना की वजह से इस बार टिड्डियों की ब्रीडिंग रोकने के लिए दवा का छिड़काव नहीं किया जा सका और पाकिस्तान में टिड्डियों का प्रकोप काफी बढ़ गया है. इस अधिकारी ने मीटिंग में कहा कि पाकिस्तान के सामान्य लोग चूंकि अपने घरों के भीतर हैं तो उन्हें इसका अधिक पता नहीं चल रहा लेकिन इन इलाकों में किसान परेशान हैं.

असल में कोविड महामारी के कारण ईरान और पाकिस्तान इस बार टिड्डियों के प्रजनन को रोकने में इस्तेमाल होने वाली दवा नहीं मंगा पाए. एफएओ ने चेतावनी दी है कि इस हमले के बाद जून में बरसात के साथ भारत को टिड्डियों के नए हमले का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उस वक्त भारत-पाकिस्तान सीमा पर प्रजनन तेज हो जाएगा.

पिछले साल से बढ़ गया है टिड्डियों का हमला

अमूमन मॉनसून के वक्त भारत में ब्रीडिंग के बाद टिड्डियां अक्टूबर तक गायब हो जाती हैं लेकिन 2019 में देर तक चले मॉनसून के कारण टिड्डियों का आतंक राजस्थान, गुजरात और पंजाब के इलाकों में इस साल जनवरी तक देखा गया. अब फिर टिड्डियों का लौट आना देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिये बड़ा झटका है.

यूपी और मध्यप्रदेश में तो टिड्डियों का यह प्रकोप 27 साल बाद दिख रहा है. इस साल फरवरी मार्च में लगातार हुई बारिश ने टिड्डियों के पनपने के लिये माहौल बनाये रखा. एफएओ ने पिछले हफ्ते कहा कि ईरान और पाकिस्तान में अनुकूल नमी वाले मौसम में टिड्डियों की ब्रीडिंग जारी है और जुलाई तक यह झुंड पाकिस्तान सीमा से भारत में आते रहेंगे.

टिड्डियां इंसानों और जानवरों पर हमला नहीं करतीं लेकिन यह फसल की जानी दुश्मन हैं. इन्हें कोमल पत्तियां बेहद पसंद होती हैं. एक वर्ग किलोमीटर में 4 से 8 करोड़ तक वयस्क टिड्डियां हो सकती हैं जो एक दिन में इतनी भोजन चट कर सकती हैं जितना 35,000 लोग खाते हैं.

टिड्डियों का संकट केवल भारत या दक्षिण एशिया का नहीं है बल्कि यह दुनिया के 60 देशों में फैली समस्या है जो मूल रूप से अफ्रीका और एशिया महाद्वीप में हैं. अपने हमले के चरम पर हों तो यह 60 देशों में बिखरे दुनिया के 20% हिस्से पर कब्जा कर लेती हैं. इनसे दुनिया की 10% आबादी की रोजी रोटी बर्बाद हो सकती है.

बदलती जलवायु टिड्डियों के लिये अनुकूल

संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की नई रिपोर्ट बताती है कि मुफीद जलवायु का फायदा उठाकर टिड्डियां अब अपनी सामान्य क्षमता से 400 गुना तक प्रजनन करने लगी हैं. यह बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारत उन देशों में है जहां जलवायु परिवर्तन का असर सबसे अधिक दिख रहा है. टिड्डियों का भारत में प्रवेश हवा के रुख पर भी निर्भर करता है. कहा जा रहा है कि पूर्वी तट पर आये विनाशकारी चक्रवाती तूफान अम्फान के कारण भी टिड्डियों के भारत में प्रवेश के लिये स्थितियां बनीं.

ग्लोबल वॉर्मिंग का असर पिछले कुछ सालों में तेज गर्मी के लम्बे मौसम और फिर असामान्य बारिश और अचानक बाढ़ के रूप दिखा है. यह स्थितियां टिड्डियों के प्रजनन चक्र को बढ़ा रही हैं. पिछले साल पहले तो जुलाई तक बरसात नहीं हुई और उसके बाद मॉनसून का लम्बा सीजन चला जिसकी वजह से टिड्डियों का प्रकोप बना रहा.

अब इस साल जून में बरसात के साथ भारत-पाकिस्तान सीमा पर टिड्डियों के प्रजनन का नया दौर शुरू होगा. उसके बाद के महीनों में होने वाला टिड्डियों का हमला खरीफ की फसल बर्बाद कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो पहले ही कोरोना संकट झेल रहे भारत के लिये यह दोहरी मार होगी क्योंकि इसका असर देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है.
(dw.com)
 


26-May-2020

बंधक नाबालिग लड़की को पुलिस ने बिहार में छुड़ाया 
 
 कोरबा, 26 मई।('छत्तीसगढ़' संवाददाता ).। रंगमंच पार्टी में काम करने बिहार के गोपालगंज गई एक नाबालिग लड़की को बंधक बना कर रखा गया था। पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा को यह जानकारी लगते ही नाबालिग लड़की की खोज कर  बिहार पुलिस व बाल कल्याण समिति की मदद से रेस्क्यू किया गया। अभी उसे बालिका गृह गोपालगंज बिहार में रखा गया है और जल्द ही कोरबा लाया जाएगा।

 पम्प हाउस  कोरबा निवासी एक महिला ने सीएसईबी चौकी में आकर शिकायत दर्ज कराई कि कोरबा निवासी रेशमा नाम की महिला उसकी नाबालिग लड़की को रंगमंच पार्टी में काम करने के लिए गोपालगंज बिहार ले  गई थी। वह नाबालिग लड़की  मुमताज नामक व्यक्ति के रंगमंच पार्टी में काम कर रही थी । रेशमा उस नाबालिग को छोड़कर कुछ काम से वापस कोरबा आई थी तभी लॉकडाउन हो गया और नाबालिग लड़की गोपालगंज में ही फंस गई है। जिसे मुमताज ने थाना बरौली क्षेत्र में  एक घर में रखा है. नाबालिग से हुई बातचीत के अनुसार मुमताज ने उसे घर मे बंधक बना कर रखा है । महिला ने अपनी  नाबालिक लड़की को आजाद कराने की गुहार पुलिस से लगाई ।  मामले की गम्भीरता को देखते हुए पूरे घटना क्रम से  पुलिस अधीक्षक कोरबा, अभिषेक मीना को अवगत कराकर उनके निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  यू उदय किरण के  मार्गदर्शन में पुलिस टीम के  द्वारा नाबालिग लड़की की खोजबीन की गई । इस दौरान पता चला कि वह   थाना बरौली बिहार में  है। पुलिस ने इसकी जानकारी थाना प्रभारी बरौली एवम महिला संरक्षण अधिकारी गोपालगंज, श्रीमती नाज़िया, से संपर्क कर नाबालिग को रेस्क्यू करने हेतु अनुरोध किया गया । साथ ही बाल कल्याण समिति कोरबा को भी सूचित किया गया ।

महिला संरक्षण अधिकारी  गोपालगंज श्रीमती  नाज़िया के द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए अपने टीम के साथ नाबालिक लड़की को बरामद कर बालिका गृह में रखवाया गया तथा प्रकरण बाल कल्याण समिति गोपालगंज को सुपुर्द किया गया है।बाल कल्याण समिति गोपाल गंज के द्वारा नाबालिग का कथन लिया गया है, एवम मुलाहिजा कराया गया है, अपने संरक्षण में लेकर बालिका गृह गोपलगंज में रखवाया गया है ।

बाल कल्याण समिति कोरबा के सदस्य  दीपक साहू का भी इस प्रकरण में विशेष योगदान रहा है जो लगातार बाल कल्याण समिति गोपलगंज के संपर्क में रहकर बालिका के सहित संरक्षण एवम देखरेख हेतु प्रयासरत है । बाल कल्याण समिति गोपलगंज से मिली जानकारी के अनुसार बालिका के कथन में आए तथ्यों के आधार पर मुमताज के विरुद्ध उचित वैधानिक कार्यवाही की जा रही है । नाबालिग को जल्द ही कोरबा लाया जाएगा। 


26-May-2020

हाईकोर्ट सहित सभी अदालतें कल से फिर बंद


बिलासपुर, 26 मई।('छत्तीसगढ़' संवाददाता ). छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सहित अधीनस्थ सभी अदालतों में कल 27 मई से उपस्थिति के साथ नियमित सुनवाई पर रोक लगा दी गई है। 

लॉकडाउन के बाद बंद अदालती कामकाज ग्रीष्मावकाश को निरस्त करते हुए 18 मई से भौतिक उपस्थिति के साथ शुरू की गई थी।
 
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा आज शाम जारी आदेश में कहा गया है कि कोविड-19 के राज्य में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और उसके अधीनस्थ राज्य के सभी न्यायालयों को बंद रखा जायेगा। हाईकोर्ट एवं सेशन कोर्ट में सिर्फ अत्यावश्यक प्रकृति के मामले जैसे जमानत के लिए आवेदन, सजा के निलम्बन के आवेदन आदि सुने जायेंगे। यह आदेश फिलहाल 15 जून 2020 तक प्रभावी रहेगा, उसके बाद कोरोना पर नियंत्रण की स्थिति को देखते हुए आगे का निर्णय लिया जायेगा। 


26-May-2020

हाथियों ने साइकलसवार को घेरकर कुचल मारा 

भैयाथान, 26 मई('छत्तीसगढ़' संवाददाता)। सूरजपुर जिले के विकासखण्ड भैयाथान के ग्राम पंचायत बिंदिया में एक व्यक्ति को हाथियों ने पटक पटक कर मौत के घाट उतार दिया है. बताया जाता है कि यहां 17 हाथियों का दल विचरण करता हुआ पहुँचा है, और दो घरों को भी ढहा दिया है. हाथियों के गांव में पहुँचते ही ग्रामीण दहशत के कारण अपने घरों से भाग निकले हैं सायकल से एक ग्रामीण अवने घर जा रहा था कि हाथियों ने उसे घेर लिया और उसको अपने पैरों तले कुचल दिया और पटक-पटक कर शव को क्षत-विक्षत कर दिया है. हाथियों के दहशत से ग्रामीणों ने रतजगा करने विवश हो गए हैं हाथियों का दल अभी बुंदिया बाँधपारा में डटा हुआ है।

सूरजपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत डुमरिया बीट के ग्राम पंचायत बुंदिया में 17 हाथियों का दल आ धमका। ग्राम बुंदिया के बंधपारा बस्ती पहुँच गए एकाएक हाथियों के पहुंचने से ग्रामीण में दहशत का माहौल निर्मित हो गया  है। वही यहां ग्रामीणों से प्राप्त जा जानकारी के अनुसार मृतक कपसरा से अपने घर बुंदिया सायकल से आ रहा था कि जैसे ही बांधपारा पहुँचा की आगे से हाथियों ने उसे घेर लिया और अपने पैरों तले कुचल कर मौत के घाट उतार दिया है मृतक की पहचान रमुंनदर राजवाडे के रूप में किया गया है जो कि ग्राम धरमपुर का  निवासी बताया जा रहा है. घटना अभी रात 8 बजे की बताई जा रही है।यहां के ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का कहर उनके घरों पर टूट पड़ा। इस दौरान हाथियों ने 2 घरों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। घर टूटने से भीतर रखा सामान भी नष्ट हो गया। 

हाथियों की दहशत का आलम क्षेत्र में इस कदर छाया हुआ है कि ग्रामीण रतजगा करने मजबूर हैं। हाथ में टार्च, लाइट व मशाल लेकर ग्रामीण अभी हाथियों को गांव से खदेडऩे में लगे हुए हैं।

समाचार लिखे जाने तक हाथी गांव में ही डटे हुए हैं।


26-May-2020

राजस्थान में ग्रेजुएट और MA पास मनरेगा में मिट्टियां ढो रहे 

शरत कुमार
जयपुर , 26 मई :
कोरोना वायरस की वजह से बीमारी के साथ-साथ बेरोजगारी भी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. शहरों में रोजगार नहीं मिलने की वजह से लोग गांव में मनरेगा में रोजगार मांग रहे हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है कि राजस्थान में बड़ी संख्या में MA, B.A और B.Ed करने वाले लोग मनरेगा में काम के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं और यही नहीं कड़ी धूप में मिट्टियां ढो रहे हैं. राजस्थान सरकार के अनुसार कोरोना काल में मनरेगा के तहत रोजगार देने के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. अब तक करीब 40 लाख लोगों ने मनरेगा में काम मांगा है.

जयपुर से 50 किलोमीटर दूर हसलपुर गांव में मनरेगा मजदूर सीता वर्मा भी मिट्टी ढो रही है. 30 साल की सीता वर्मा ने बताया कि उनके पति सीमेंट फैक्ट्री में काम करते थे जहां काम बंद है. घर में दो बच्चे हैं इसलिए मनरेगा में मिट्टी काटने का काम कर रही हैं. ग्रेजुएशन करते वक्त कभी सोचा नहीं था कि इस तरह की परिस्थितियां आएंगी.

सीता कहती हैं कि कोरोना काल मे लॉकडाउन में पति को काम मिल नहीं रहा है और घर पर बच्चे हैं, तो मुझे ही घर से निकलना पड़ा. गांव में मनरेगा काम चलता था मगर कभी सोचा नहीं था कि मुझे भी करना पड़ेगा. पढ़ाई लिखाई करने के बाद मिट्टी काटने का काम मुश्किल है मगर करना तो पड़ेगा ही.
इसी तरह सुमन ने भी इतिहास में ग्रेजुएशन किया है. पति बाहर कमाने गए हुए हैं मगर वहां काम बंद है इसलिए घर चलाने का जिम्मा उठाने के लिए खुद ही मिट्टी ढोने निकल गई हैं. 44 डिग्री के तापमान में मिट्टी ढो रही सुमन का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से परिवार का हाल बुरा हो रखा है. घर चलाने के लिए पैसे चाहिए इसलिए पहली बार मनरेगा में गांव की औरतों के साथ काम करने आई है.

यहां पर मनरेगा के काम में लगे राम अवतार राव तो मार्च के पहले तक निजी स्कूल में टीचर थे. M.A. और B.Ed करने के बाद बच्चों को पढ़ाते थे. मगर लॉकडाउन के दौरान डायमंड स्कूल से नौकरी चली गई और 2 महीने की तनख्वाह भी नहीं मिली तो खुद को मनरेगा में रजिस्टर करवा लिया. 5 लोगों का परिवार है वहां पर 15000 की तनख्वाह थी यहां पर 236 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाता है.

यह हालात अकेले एक गांव के नहीं है बल्कि पूरे राजस्थान की है. जब से मनरेगा बना है तब से अब तक इस तरह के हालात नहीं हुए कि पूरे राजस्थान में 40 लाख लोग मनरेगा के तहत काम मांगे. जो भी शहर से लौट रहा है वह मनरेगा के तहत काम मांग रहा है. राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का कहना है कि शहरों से जो लोग आ रहे हैं उन सब को मनरेगा के तहत हम रोजगार देंगे राजस्थान मनरेगा में देश में नंबर वन हो गया है.

नियम के अनुसार सरकार मनरेगा के तहत 100 दिन काम की गारंटी देती है मगर जिन गांव में डेढ़ सौ लोग काम करते थे उन गांव में 600 लोग काम मांग रहे हैं. ऐसे में कार्य दिवस को घटाने की भी मजबूरी हो गई. हालांकि केंद्र सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपए का बजट अकेले मनरेगा के लिए दिया है. मगर राजस्थान सरकार ने केंद्र को चिट्ठी लिखी है कि मनरेगा के तहत कार्य दिवस को 100 दिन से बढ़ाकर 200 दिन तक किया जाए.(aajtak.intoday.in)


26-May-2020

प्रदेश में आज 68 नए पॉजिटिव

रायपुर, 26 मई (8.45)। छत्तीसगढ़ में आज नए कोरोना मरीजों का रिकॉर्ड टूट गया। इसके पहले के समाचार में हमने 55 नए मरीजों का जिक्र किया था लेकिन अभी-अभी जानकारी मिली है कि 68 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज आए। इसमें से मुंगेली से 27, बेमेतरा 13, राजनांदगांव 12, कांकेर 6, बिलासपुर-जशपुर से 2-2, बलरामपुर और सूरजपुर से एक-एक मरीज मिले हैं। अभी दोपहर बाद मिले 54 मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया जारी है।


26-May-2020

2019 में टिड्डी दलों ने भारत पर 200 से अधिक बार किया हमला

आमतौर पर भारत में हर वर्ष टिड्डी दल के 10 से कम हमले होते हैं, लेकिन 2019 में टिड्डी दलों ने राजस्थान और गुजरात के कई जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया

"टिड्डियों ने डेढ़ लाख रुपए की जीरे की फसल बर्बाद कर दी। जीरे की फसल अरंडी के मुकाबले मुलायम होती है, शायद इसीलिए टिड्डियों ने उसे पहले चट किया। खेती से मुझे हर साल करीब 25-30 बोरी जीरा होता है, लेकिन बमुश्किल एक बोरी जीरा ही हो पाया।” यह दर्द बाड़मेर जिले की सेड़वा तहसील के बुरहान का तला गांव में रहने वाले हाकमराम बालाज का है। हाकमराम ने रबी के मौसम में 45 बीघा जमीन पर जीरे व अरंडी की फसल बोई थी। 2019 के अंत में मावठ (सर्दियों में होने वाली बारिश) हुई, इसलिए हाकमराम को अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन 40 साल के हाकमराम के इस अरमान पर टिड्डी दल ने पानी फेर दिया। टिड्डियों के दो हमलों से उनकी पूरी फसल नष्ट हो गई। 

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हाकमराम बताते हैं, “जीरे की एक बीघा खेती में 1800-2000 रुपए खर्च होते हैं। मैंने 300 रुपए किलो के भाव से 30 किलो बीज खर्च किए थे। इसके अलावा यूरिया और ट्रैक्टर चलवाने का करीब 50-60 हजार रुपए खर्च हुआ। मेरे ऊपर सरकार का चार लाख रुपए का कर्जा पहले से ही है जो मैंने ट्यूबवेल खुदवाने के लिए लिया था।” सात बेटी और एक बेटे के पिता हाकमराम अब 300 रुपए रोजाना पर बेलदारी (दिहाड़ी मजदूरी) को मजबूर हैं। फसल खराब होने से कर्ज चुका पाना, अब उनके लिए बेहद मुश्किल है।

बाड़मेर के किसान जुगताराम भी टिड्डी दल के हमले के भुक्तभोगी हैं। 26 दिसंबर, 2019 को जुगताराम ने ऐसा कुछ देखा जिससे उनके होश फाख्ता हो गए। उन्होंने बताया, “मैंने देखा कि लाखों की संख्या में टिड्डियां उड़कर आ रही हैं। ऐसा लग रहा था मानो काले बादल तेजी से बड़े होते जा रहे हों और कई किलोमीटर के इलाके को ढंककर सूरज को जैसे ग्रहण लगा दिया हो। हमने पुराने तरीकों जैसे खाली बर्तन बजाकर और धुआं करके उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।”

इन कीटों ने तारदो का ताल गांव में स्थित जुगताराम की 12 हेक्टेयर कृषि भूमि पर हमला किया, जिससे उनकी जीरे और अरंडी की खड़ी फसल बर्बाद हो गई तथा उन्हें चार लाख का नुकसान झेलना पड़ा। जिले के 12 अन्य गांवों में भी एक ही दिन में सारी फसल बर्बाद हो गई। जुगताराम ने जो देखा वह रेगिस्तानी या पीली टिड्डियों (शिस्टोसरका ग्रेगेरिया ) का दल था। जुगताराम इन्हें पहचानते हैं। उन्होंने बताया, “मैंने पहली बार उन्हें नहीं देखा था लेकिन इस बार उनका आकार बहुत बड़ा था और उनके हमले का वक्त भी कुछ अटपटा था।”

हाकमराम और जुगताराम की तरह उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों के अलावा गुजरात के चार जिले, पंजाब के तीन और हरियाणा के एक जिले के किसान इतिहास के सबसे भीषण टिड्डी हमले से गुजर रहे हैं। हजारों किसानों की जीरे, ईसबगोल, अरंडी, सरसों और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा है। बीकानेर, अनूपगढ़, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, पाली, उदयपुर, सिरोही और डूंगरपुर जिलों में टिड्डियों का हमला हुआ है। हालात इतने गंभीर हैं कि फसल खराब होने के सदमे से बाड़मेर के 48 वर्षीय किसान निंबाराम जाट और 38 वर्षीय भागराम की मौत हो गई। 

पाकिस्तान से हर वर्ष टिड्डी दल राजस्थान और गुजरात पहुंचते हैं। इनका जीवनकाल 90 दिन का होता है। यह जुलाई में आते हैं, अंडे देते हैं और अक्टूबर तक इनकी नई पीढ़ी पाकिस्तान-ईरान रवाना हो जाती है। टिड्डी दल हरियाली का पीछा करते हैं और उन इलाकों पर हमला करते हैं जहां मॉनसून को गुजरे ज्यादा वक्त न हुआ हो क्योंकि यह उनके खाने और प्रजनन का सबसे सही वक्त होता है।

जोधपुर में केंद्र सरकार के लोकस्ट वॉच सेंटर (एलडब्ल्यूसी) के एक वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आमतौर पर भारत में हर वर्ष टिड्डी दल के 10 से कम हमले होते हैं लेकिन वर्ष 2019 में 200 से ज्यादा बार हमले हुए। अब तक इन हमलों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हमलों की संख्या में बढ़ोतरी के अलावा चश्मदीदों का कहना है कि टिड्डी दल का आकार भी सामान्य आकार के मुकाबले दोगुने से भी अधिक हो गया है।

वर्ष 2019 में भारत में जलवायु संबंधी दो अप्रत्याशित घटनाएं घटीं जो टिड्डी दल के हमले की असामान्य संख्या और आकार पर रोशनी डालती हैं। पहला, पश्चिमी राजस्थान में समय से पहले मॉनसून आया जो आमतौर पर 1 जुलाई को आता था अर्थात यह डेढ़ महीना पहले ही आ गया। इससे टिड्डियों के प्रजनन की परिस्थितियां तैयार हो गईं। दूसरा, नवंबर तक लगातार बारिश होती रही, जिससे टिड्डियों को खाना मिलता रहा और वे यहां जमी रहीं जबकि उन्हें आमतौर पर अक्टूबर में लौट जाना चाहिए था। इन सबमें खास बात यह हुई कि यहां ज्यादा देर तक रुकने के कारण उन्होंने जून, सितंबर और दिसंबर में तीन बार प्रजनन किया। इस तरह तेजी से अपनी संख्या बढ़ाई।

राजस्थान के 12 जिलों का 6,63,391 हेक्टेयर क्षेत्र टिड्डी दल से प्रभावित हुआ। खरीफ सीजन में 2,76,640 हेक्टेयर और रबी सीजन में 3,86,751 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान वाले छह जिले बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, जालौर और पाली थे। इन जिलों में कुल बुआई क्षेत्र में से 1,49,821 हेक्टेयर भूमि पर फसलों को नुकसान हुआ। जिलों में 54,261 किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। आपदा प्रबंधन सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने 90.20 करोड़ रुपए इन जिलों के प्रभावित किसानों के लिए जारी कर दिए हैं। इस राशि में से संबंधित जिलों ने 86.21 करोड़ रुपए का मुआवजा किसानों को वितरित कर दिया है। इसमें से 20.47 करोड़ रुपए बाड़मेर, 2.50 करोड़ बीकानेर, 29.20 करोड़ जैसलमेर, 82 लाख जोधपुर, 37.01 करोड़ रुपए जालौर और 20 लाख रुपए पाली जिले में मुआवजे के रूप में बांटे गए।

पूर्व पौधा संरक्षण अधिकारी और डेजर्ट लोकस्ट एक्सपर्ट अनिल शर्मा का कहना है कि 2019 में हुआ हमला काफी जबरदस्त था। इन टिड्डी दलों ने गुजरात और राजस्थान की 3,92,093 हेक्टेयर जमीन की हरियाली को चट कर दिया। और सरकार कुछ नहीं कर पाई। (www.downtoearth.org.in/hindistory)


26-May-2020

वीआईपी की सुरक्षा के लिए एसपी होंगे जिम्मेदार
डीजीपी ने की समीक्षा, सभी जिलों को निर्देश

रायपुर, 26 मई। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सभी सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से विशिष्ट व्यक्तियों को सुरक्षा श्रेणी प्रदान की गई है और सुरक्षा श्रेणी के अनुरूप अंगरक्षक और सुरक्षा अधिकारी लगाए गए हैं। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक  डी.एम. अवस्थी ने आज बैठक लेकर विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए प्रदेश के सभी सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करने को कहा है ताकि सुरक्षा श्रेणी में जिन पीएसओ की ड्यूटी लगाई है वे अपने कर्त्तव्य पर नियमित रूप से उपस्थित हो रहे है या नहीं, साथ ही उनके अनुशासन, सजगता एवं उनकी कार्यक्षमता सुरक्षा मापदण्डों के अनुरूप है अथवा नहीं, इसका ऑडिट हो सके। डीजीपी श्री अवस्थी ने कहा कि विशिष्टि व्यक्तियों के निवास तथा उनके प्रवास कार्यक्रमों पर संबंधित पुलिस अधीक्षक उनकी सुरक्षा के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे।

डीजीपी ने इसके अलावा विशिष्ट व्यक्तियों को जो वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, उन वाहनों का रख-रखाव तथा चालक एवं फॉलो गार्ड में लगाए गए बल के शारीरिक दक्षता (फिजिकल फिटनेस) का भौतिक रूप से सुरक्षा ऑडिट के निर्देश भी दिए हैं। जारी निर्देश में उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री के प्रत्येक भ्रमण में न केवल पर्याप्त रूप से पुख्ता सुरक्षा रखी जाए, बल्कि सुरक्षा के प्रभावी प्रयास (ए.एस.एल.) भी किया जाए तथा जिले में भ्रमण के दौरान सभी गणमान्य व्यक्तियों के पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किया जाए। 

निर्देश में कहा गया है कि विशिष्टि व्यक्तियों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खासकर बस्तर संभाग, राजनांदगांव तथा कवर्धा प्रवास के दौरान अतिरिक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था लगाई जाए। यदि विशिष्ट व्यक्तियों को आवागमन सड़क मार्ग से हो, तो रोड ओपनिंग पार्टी एवं एंटी सेबोटेज टीम द्वारा नियमित रूप से जांच करा लिया जाए। विशिष्ट व्यक्तियों के कार्यक्रम स्थल एवं विश्राम गृह में भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था लगाई जाए। यह ध्यान रखें कि किसी भी स्थिति में सुरक्षा बल अपर्याप्त नहीं हो, बल्कि परिस्थिति अनुसार निर्धारित मापदण्ड से अधिक बल की व्यवस्था रखी जाए। यदि विशिष्ट व्यक्ति रात्रि विश्राम करते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी के साथ कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जाए।
 
श्री अवस्थी ने कहा है कि सभी पुलिस अधीक्षकों का यह दायित्व होगा कि वे सभी सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों के दूसरे जिलों में जाने की सूचना अनिवार्य रूप से संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को दें, ताकि वहां सुरक्षा प्रबंध किया जा सके। विशिष्टि व्यक्तियों के निवास तथा उनके प्रवास कार्यक्रमों पर संबंधित पुलिस अधीक्षक उनकी सुरक्षा के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे। निर्देश में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (सुरक्षा) द्वारा सभी वीआईपी मूव्हमेंट का तकनीकी ढांचा तैयार कर उसकी सतत् मॉनिटरिंग करें तथा वीआईपी भ्रमण की पूर्व सूचना पुलिस महानिदेशक सहित सभी संबंधित पुलिस अधीक्षकों को अनिवार्य रूप से दी जाए। इसके साथ ही गुप्तवार्ता शाखा, विशेष आसूचना शाखा एवं आई.बी. से प्राप्त सभी इंटेलिजेंस इनपुट को भी गंभीरता से लेते हुए अक्षरश: पालन करते हुए कड़े सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाए।


26-May-2020

कोरोना, 9 जिलों के 13 ब्लॉक रेड और 40 ब्लॉक ऑरेज जोन में, रायपुर सहित बाकी ग्रीन

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 26 मई।
कोरोना संक्रमण के चलते 9 जिलों के 13 ब्लॉकों को रेड जोन में रखा गया है। जबकि 17 जिलों के 40 ब्लॉक ऑरेंज जोन में हैं। बाकी ब्लॉक ग्रीन जोन में रखे गए हैं। बाकी ब्लॉक ग्रीन जोन में रखे गए हैं।
 
इसमें एक उल्लेखनीय बात यह है कि रायपुर जिला ग्रीन जोन में है क्योंकि उसका जिक्र न तो रेड जोन में है और न ही ऑरेंज जोन में है। अधिक मरीजों को देखते हुए जिन जिलों के कुछ या अधिक विकासखंड रेड जोन में रखे गए हैं वे इस प्रकार हैं। 

कोरोना संक्रमण के चलते स्वास्थ्य विभाग ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन को नए सिरे से वर्गीकृत किया है। इस कड़ी में 9 जिले के 13 ब्लॉकों को रेड जोन में शामिल किया गया है। जिनमें डौंडीलोहारा, कोरबा, मुंगेली, रायगढ़ शहरी, छुरिया, अंबिकापुर, कोटा, तखतपुर, बिलासपुर शहरी, मस्तुरी, बिल्हा के अलावा पंडरिया, बलौदाबाजार को रेड जोन में शामिल किया गया है। 

जिन ब्लॉकों को ऑरेंज जोन में रखा गया है उनमें बालोद, डौंडी, गुंडरदेही, बलौदा, बम्हणीडीह, नवागढ़, सक्ती, बिलाईगढ़, सिमगा, पलारी, कसडोल, बकावंड, बस्तरनार, साजा, नवागढ़, गीदम, गुजरा, कुरूद, नगरी, धमतरी शहर, पाटन, निकुम, लोरमी, लैलूंगा, मोहला, घूमका, मैनपाठ, दुर्ग कोंदल, कांकेर, गरियाबंद, हडग़ंवा, मरवाही, बलरामपुर, राजपुर, कुसमी, शंकरगढ़ और रामानुजगंज, वाड्रफनगर शामिल हैं। उक्त के अलावा बाकी ग्रीन जोन में रखे गए हैं। 


26-May-2020

प्रदेश में 55 और कोरोना पॉजिटिव, कुल 275

रायपुर, 26 मई (6.54)। प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस कड़ी में आज दिन भर में कोरोना के 55 और मरीज मिले हैं। इनमें मुंगेली में सबसे ज्यादा 23, बेमेतरा में 10, बिलासपुर में 2 और रायगढ़ में एक मरीज शामिल हैं। इससे पहले सुबह 14 और नए कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इनमें 12 राजनांदगांव जिले और 2 बेमेतरा के हैं। खबर है कि ये सभी क्वॉरंटीन में थे। नए मरीजों को मिलाकर प्रदेश में कुल 275 कोरोना पीडि़त हो गए हैं। राजनांदगांव और बेमेतरा के कोरोना संक्रमित लोगों को यहां लाया जा रहा है। उन्हें कुछ को एम्स में और कुछ को माना में दाखिल कराया जाएगा।