विशेष रिपोर्ट

Posted Date : 20-May-2018
  • राजेश अग्रवाल

    गोंडवाना पार्टी और एकता परिषद् के साथ गठजोड़ बिलासपुर सहित कई जिलों के परिणामों पर असर डालेगा, जोगी की पार्टी का भी मैदान में उतरना तय है ही...

    बिलासपुर, 20 मई (छत्तीसगढ़)। अभा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिलासपुर में पूरा वक्त दिया पर सत्ता के लिए उतावले कांग्रेसियों में उनकी नसीहत कितना काम करेगी इसे लेकर संशय खत्म नहीं हुआ है। टिकट की दावेदारी के लिए राहुल गांधी के दौरे के साथ शुरू हुआ संघर्ष आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। बिलासपुर की सभा की तैयारी में हुई चूक ने उन्हें सुनने पहुंचे कार्यकर्ताओं को निराश कर दिया। राहुल गांधी से मिलवाने के लिए नाम तय किए जाने पर भी हुए खेल को लेकर पार्टी के कई नेता नाराज हैं। राहुल की सभाओं ने विरोधी दल भाजपा और पैर जमाने में जुटी अजीत जोगी की पार्टी भी सतर्क दिखाई दे रही है। 
    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पहली बार 17 मई की रात बिलासपुर में रुके। इससे पहले वे नसबंदी कांड में पहुंचे थे। तब कार्यकर्ता उनका केवल स्वागत कर पाए, चर्चा नहीं। तब और अब के राहुल के प्रवास में भारी फर्क लोगों ने देखा। पूरे प्रवास में वे गंभीर रहे, विरोधी उपहास उड़ा सकें ऐसा कुछ नहीं कहा, विरोधियों पर किए गए सवालों पर उनकी टिप्पणी भी गरिमा से भरी रही। 
    कांग्रेस अध्यक्ष की पेन्ड्रारोड इलाके में सभा की घोषणा होते ही छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के संस्थापक अजीत जोगी और उनके पुत्र अमित जोगी ने इसे व्यक्तिगत चुनौती की तरह ले लिया। उन्होंने पेन्ड्रारोड में कांग्रेस की सभा को फ्लाप बताने के लिए उसी दिन वहीं पर सभा कर ली। जोगी कांग्रेस की सभा में भारी भीड़ जुटी पर कोटमी में हुई राहुल गांधी की जंगल सत्याग्रह सभा में भी पंडाल खचाखच भरा हुआ था। पार्टी को बड़ी कामयाबी तब मिली जब इस कार्यक्रम में आने के लिए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और एकता परिषद् को मना लिया गया। बताया जा रहा है कि इसमें पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत की कोशिश रही। भीड़ में बड़ी संख्या इन दोनों संगठनों से जुड़े आदिवासी समुदाय के लोग थे। 
    दोनों ही कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिले के लोग भी पहुंचे। कांग्रेस की ओर से जोगी को कोई चुनौती नहीं दी गई थी, विधायक अमित जोगी ने दावा किया था कि राहुल गांधी का पंडाल खाली रहेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। कांग्रेस प्रवक्ता शैलेष पांडेय का कहना था कि जोगी की सभा से हमें कोई मतलब नहीं था, हमने 25 हजार लोगों के लिए यहां कार्यक्रम रखा था, जबकि इससे बहुत ज्यादा लोग कार्यक्रम सुनने पहुंचे। 
    दूसरा बड़ा कार्यक्रम बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में 24 विधानसभा क्षेत्रों के बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद का कार्यक्रम रखा गया था। भीड़ के लिहाज से यह सभा सफल रही। सभी विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आए। पर खराब प्रबंधन ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं बल्कि खुद राहुल गांधी को नाराज कर डाला। इस सभा की जिम्मेदारी शहर जिला कांग्रेस कमेटी को दो गई थी, पर व्यावहारिक रूप से इसे प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव की टीम देख रही थी। विशाल आकार के स्टेडियम में पूरे कार्यकर्ता बिखरे हुए बैठे थे और राहुल गांधी के लिए एक छोटा मंच बीचों बीच बनाया गया था। दोनों के बीच इतनी अधिक दूरी थी कि किस छोर से कौन सवाल कर रहा है, यही पता नहीं चल रहा था। लाउड स्पीकर बहुत से लगे थे पर बहुत गूंजने के कारण लोग क्या सवाल कर रहे हैं पता नहीं चला। हालांकि राहुल गांधी ने कई सवालों को समझकर जवाब देने की कोशिश की पर थोड़ी देर बाद ही पता चल गया कि यहां कार्यक्रम जारी नहीं रखा जा सकता और वे यह कार्यक्रम अधूरा छोड़कर चले गए। 
    पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पी एल पुनिया ने राहुल गांधी और कार्यकर्ताओं से इस बात इस खराब व्यवस्था को लेकर माफी भी मांगी। भाजपा ने इस विफलता को हाथों हाथ लिया और आरोप लगाया कि जो व्यक्ति पार्षद का चुनाव भी नहीं जीत सका, उसे राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यक्रम कराने की जिम्मेदारी दे दी गई। मालूम हो कि अटल श्रीवास्तव एक बार पार्षद चुनाव हार चुके हैं। 
    राहुल गांधी के साथ 17 मई की शाम सामाजिक, व्यापारिक संगठनों से संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया था। राहुल गांधी से मिलने के लिए जो नाम तय किए गए उन पर सवाल उठाया गया। एक पुराने कांग्रेस पदाधिकारी ने दावा किया कि राहुल गांधी से मिलवाने के नाम पर कुछ लोगों से बड़ी रकम वसूली गई। इसके कारण कुछ भाजपा से जुड़े लोगों का नाम भी इस सूची में शामिल किया गया। महिला कांग्रेस की नेत्रियों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई, जब उन्हें राहुल गांधी से नहीं मिलने दिया गया। 
    राहुल गांधी की कोटमी सभा विफल तो हुई नहीं, उल्टे एक दिलचस्प घटनाक्रम में कोटा की विधायक डॉ.रेणु जोगी राहुल गांधी की सभा में पहुंच गई। हालांकि पूरी राहुल गांधी के प्रवास की तैयारियों से वह पूरी तरह अलग-थलग रखी गई थीं। एक तरफ  राहुल गांधी को चुनौती देने के लिए अजीत जोगी की पेन्ड्रा में सभा चल रही थी तो दूसरी तरफ डॉ. जोगी राहुल की सभा में  न केवल पहुंची बल्कि उन्हें मंच पर विठाया गया, उनसे राहुल गांधी का स्वागत भी कराया गया। 
    विरोधियों को राहुल गांधी ने सख्ती से जवाब तो दिया पर शालीनता के साथ। अजीत जोगी को मौकापरस्त बताते हुए उन्होंने उनके कांग्रेस में लौटने की संभावनाओं पर विराम लगा दिया। डॉ. रेणु जोगी को मंच में आने से न रोककर उन्होंने बड़प्पन का परिचय दिया। हालांकि डॉ. रेणु जोगी ने कई बार गांधी परिवार से नजदीकी होने का हवाला देते हुए कांग्रेस में ही रहने की बात कर चुकी हैं पर जोगी भी दावा करते हैं कि उनकी पत्नी उनके राजनैतिक कदम में साथ हैं। 
    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की टिप्पणी का जवाब भी उन्होंने बड़ी शालीनता से दी लेकिन साथ ही भाजपा और आरएसएस को निशाने पर भी ले लिया। राहुल ने कहा कि हां, मैं हमेशा सीखता रहता हूं और इसीलिए छत्तीसगढ़ भी आया हूं। ये भाजपा और आरएसएस के लोग हैं, जो सोचते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं। 
    निश्चित ही राहुल गांधी की इस यात्रा के कई निष्कर्ष निकलते हैं। बिलासपुर और आसपास के जिलों में जिनमें मध्यप्रदेश के विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ आने से कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। इसके एवज में मरवाही या तानाखार से पार्टी प्रमुख हीरासिंह मरकाम को मौका मिल सकता है। पत्थलगढ़ी आंदोलन के बाद आदिवासी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में लगी भाजपा को इस नए समीकरण का जवाब तलाशना होगा। 
    चुनाव के बाद यदि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस त्रिशंकु की स्थिति पैदा करती है तो गठबंधन की संभावना भले ही हो, पर अब इस विधानसभा चुनाव से पहले जोगी की कांग्रेस वापसी नहीं होने वाली। उनका अलग होकर मैदान में उतरना कांग्रेस के लिए कितना नुकसानदेह है यह आगे पता चलेगा। 
    कांग्रेसियों को राहुल गांधी के दौरे ने जो विश्वास जगाया है, वह उसके अति आत्मविश्वास में बदलने का खतरा है। ऐसे में टिकट की दावेदारी के लिए अधिक उठापटक हो सकती है। बिलासपुर में टिकट के सारे दावेदारों ने अपने पोस्टर बैनर पाट दिए हैं। एकजुटता की राहुल गांधी की नसीहत चुनाव आते तक कायम रहती है या नहीं यह देखने की जरूरत  होगी। 

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Posted Date : 16-May-2018
  • राजेश अग्रवाल
    बिलासपुर, 16 मई (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव का अभियान शुरू करने आ रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दो दिन के बिलासपुर दौरे से कई समीकरण बनने वाले है। कोटमी के मंच पर गोंडवाना गणतंत्र परिषद् को लाने में सफलता मिलने से कांग्रेसी उत्साहित हैं। इस सभा के बाद कोटा विधायक डॉ. रेणु जोगी का कांग्रेस में भविष्य क्या है, यह भी स्पष्ट हो जाएगा। कांग्रेस में किसकी टिकट पक्की होने वाली है इसका अंदाजा भी इस प्रवास से लगेगा, क्योंकि सबको कुछ न कुछ जिम्मेदारी दे दी गई है। 
    जिले के कोटमी में राहुल गांधी गुरुवार दोपहर दो बजे आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह दौरा दिलचस्प इसलिए बन गया है क्योंकि कांग्रेस ने राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी के संस्थापक अजीत जोगी ने खुली चुनौती देते हुए उसी दिन, उसी समय इसी इलाके में समानान्तर सम्मेलन रखा है। कांग्रेस का दावा है कि पेन्ड्रा, मरवाही में जोगी को सब सुनते रहे हैं इसलिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुनने के लिए लोग उत्साहित हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शैलेष पांडेय के अनुसार न केवल जिले के लोगों में बल्कि नजदीकी दूसरे जिलों से भी लोग राहुल गांधी को सुनने आ रहे हैं। राहुल गांधी की सभा के सामने जोगी की सभा की कोई तुलना ही नहीं है, वह फीकी रहेगी। इन दिनों मौसम खराब चल रहा है, जबकि जोगी की सभा में श्रोताओं के लिए आंधी-पानी से बचाव का इंतजाम भी नहीं किया गया है। हमारा पूरा ध्यान राहुल गांधी और कांग्रेस की सफल सभा कराने की ओर है। किसने और क्या और जवाबी सभा रखी है, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। 
    दिलचस्प यह है कि कोटा की विधायक और अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी को राहुल गांधी के पूरे दौरे से अलग-थलग रखा गया है। यहां सभा कराने का प्रभार शैलेष पांडेय  को सौंपा गया है। शैलेश पांडेय कोटा या बिलासपुर से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं, उन्हें इसी क्षेत्र में सभा कराने और यहां भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी है। पांडेय का दावा है कि सभी कार्यकर्ताओं के परिश्रम से राहुल गांधी की सभा ऐतिहासिक होने वाली है।
    यह तय है कि यदि यह सभा सफल रही तो पांडेय के लिए टिकट की राह कुछ आसान हो जाएगी। कांग्रेस के दूसरे प्रवक्ता अभय नारायण राय का कहना है कि राहुल की दोनों सभाओं में कांग्रेस के वर्तमान व पूर्व विधायकों के लिए कुर्सियां रखी गई हैं। जहां तक डॉ. रेणु जोगी का सवाल है उन्होंने राहुल का दौरा तय होने के बाद पार्टी से कोई सम्पर्क नहीं किया है न ही पार्टी ने ही उनको कोई जिम्मेदारी सौंपी है।
     इस मामले में डॉ. रेणु जोगी से कई बार सम्पर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन बंद था। 
    डॉ. रेणु जोगी को पूरी तैयारी से अलग रखा जाना इस बात का साफ संकेत है कि उनकी अगली टिकट कांग्रेस से पक्की नहीं है।  हालांकि यहां से संदीप शुक्ला, अरुण सिंह चौहान जैसे पुराने कार्यकर्ता भी टिकट के लिए जूझ रहे हैं। इन दोनों को ही डॉ. रेणु जोगी का करीबी माना जाता है। 
    कांग्रेसियों में इस बात को लेकर खासा उत्साह है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम राहुल गांधी के साथ मंच साझा कर रहे हैं। कटघोरा, तानाखार, मनेन्द्रगढ़, शहडोल आदि इलाके कोटमी से बहुत दूर नहीं है और इन क्षेत्रों में मरकाम का काफी असर है। वे एक बार निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। बाद में भाजपा में शामिल हुए फिर कांग्रेस के करीब आए और तानाखार से फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस समय वहां कांग्रेस से रामदयाल उइके लगातार चुने जा रहे हैं। 
    मरकाम को कांग्रेस के साथ जोडऩे के लिए पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. चरण दास महन्त  ने काफी कोशिश की। सभा में मरकाम के उपस्थित रहने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे या कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ेंगे, पर उनकी राहुल की सभा में मौजूदगी जोगी खेमे के लिए चिंता का विषय जरूर बन गया है। संभावना दिख रही है कि मरवाही या तानाखार में मरकाम को कांग्रेस के समर्थन से उतारा जा सकता है। 
    कांग्रेस की टिकट की कतार में लगे अन्य दावेदारों को भी कोटमी और बहतराई में अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। कोटमी सम्मेलन के लिए डॉ. महन्त, राष्ट्रीय सचिव अरुण उरांव, विधायक रामदयाल उइके कई दिनों से डटे हुए हैं। बहतराई, बिलासपुर के कार्यकर्ता सम्मेलन की जिम्मेदारी प्रभारी कांग्रेस सचिव चंदन यादव, प्रदेश महामंत्री अटल श्रीवास्तव, शेख गफ्फार, अशोक अग्रवाल आदि संभाल रहे हैं। 

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Posted Date : 13-May-2018
  • अतुल पुरोहित
    भोपाल, 13 मई (छत्तीसगढ़)। भाजपा को खड़ा करने वालीं विजयाराजे सिंधिया का जन्म शताब्दी वर्ष मनाने की रूपरेखा बन चुकी है। मप्र सरकार की मंत्री एवं विजयाराजे की छोटी बेटी यशोधरा राजे सिंधिया मनाएंगी। खुद यशोधरा ने अपने गृह नगर शिवपुरी में इसका ऐलान किया है। यशोधरा के अनुसार पार्टी मनाएगी या नहीं उसका उन्हें पता नहीं है, लेकिन वे जरूर यह करेंगी। 
    यशोधरा ने अभी कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया  कि पार्टी यह आयोजन करेगी या नहीं, उन्हें नहीं पता, लेकिन वे जरूर करेंगी। बतौर यशोधरा, राजमाता ने भाजपा को खड़ा किया है। वे देश की अग्रणी महिला रहीं है। इस पर मप्र भाजपा की ओर से किसी भी पदाधिकारी ने इस पर मुंह नहीं खोला। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने भी इस मसले पर चर्चा नहीं की। 
     विजयाराजे सिंधिया का 12 अक्टूबर को जन्मदिवस है, लेकिन हिन्दू तिथि के मुताबिक हर साल करवाचौथ के दिन भी मनाया जाता है। विजयाराजे पहले कांग्रेस में थीं, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा राजघरानों के प्रीवी पर्स खत्म करने के बाद दोनों के बीच ठन गई और   जनसंघ में शामिल हो गई। उनके बेटे माधवराव सिंधिया भी कुछ समय तक जनसंघ में रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। मां-बेटे (माधवराव सिंधिया) के संबंध अच्छे नहीं रहे। जनसंघ में आने के बाद विजयाराजे ने खुद के पैसे से पार्टी को खड़ा किया। उनका सपना भाजपा का प्रधानमंत्री बनना था। राजनीति में सबसे ज्यादा खुशी उन्हें अटलबिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने पर हुई थी।
    भुला रही मप्र भाजपा- विजयाराजे ंिसंधिया के योगदान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अभी भी सार्वजनिक तौर पर मानते हैं, लेकिन मप्र में राजनीतिक गुटबाजी की वजह से वर्तमान में उन्हें भुला सा दिया गया है। हाल के चुनावों मेंं सिंधिया परिवार पर हमले बोले गए हैं। जिससे यशोधरा काफी आहत भी हुई हैं। अपने अपनी पीड़़ा जाहिर भी कर चुकी हैं। खास बात यह है कि अमित शाह ने हाल ही में 4 मई को भोपाल में कहा था कि राजमाता विजयाराजे ने भाजपा को खड़ा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं पिछले साल जब मप्र भाजपा की ओर से अटेर चुनाव में सिंधिया परिवार पर हमला बोला गया था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधिया राजघराने के समय क्षेत्र में  रेल एवं बांध के निर्माण की तारीफ की थी।  
    विजयाराजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को सागर के राणा परिवार में हुआ था। शादी से पहले उनका नाम लेखा दिव्येश्वरी था। उनके पिता महेन्द्रसिंह ठाकुर जालौन जिला के डिप्टी कलेक्टर थे, उनकी माता विंदेश्वरी देवी थीं। विजयाराजे सिंधिया का विवाह के पूर्व का नाम लेखा दिव्येश्वरी था।  21 फरवरी 1941में ग्वालियर के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया से विवाह हुआ। पति की मृत्यु के बाद वह राजनीति में सक्रिय हुई और 1957 से 1998 तक ग्वालियर और गुना संसदीय क्षेत्र से 8 बार सांसद रहीं। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से 25 जनवरी 2001 में उनका निधन हो गया। 

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Posted Date : 10-May-2018
  • दिनेश आकुला
    बेंगलुरु, 10 मई (छत्तीसगढ़)। कर्नाटक में चुनाव प्रचार खत्म होने के ठीक पहले हुए एक रोड शो में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा- राहुल के बयान पर टिप्पणी करना वे न चाहते, न उन्हें पसंद है। उनसे कुछ और सवाल-जवाब-
    सवाल- कर्नाटक के चुनाव भाजपा के लिए कितने महत्वपूर्ण है?
    जवाब- पिछले पांच बरस में सिद्धरमैय्या की सरकार शासन के हर क्षेत्र में असफल रही है। पूरा बेंगलुरु जॉर्ज, हरीश, और रौशन बेग (तीनों बिल्डर) के हवाले कर दिया गया है। राज्य में कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब है। कर्नाटक का विकास बेंगलुरु की ट्रैफिक में फंसा हुआ है। कर्नाटक की जनता नरेन्द्र मोदी के मातहत राज्य में येदियुरप्पा की एक मजबूत सरकार देखना चाहती है।
    सवाल- आपके हिसाब से इस चुनाव के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
    जवाब- विकास, कानून व्यवस्था, और इस शासनकाल में 35 सौ से अधिक किसानों की आत्महत्या, भ्रष्टाचार। मुख्यमंत्री ऐसा है जो कि 40 लाख की घड़ी तोहफे में लेता है, और ऐसे आदमी को राज्य चलाने का कोई हक नहीं है।
    सवाल- आपकी पार्टी ने भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया है, लेकिन आपकी पार्टी की चुनाव में बेल्लारी-बंधुओं को साथ लेकर लड़ रही है। इससे जनता में कैसा संदेश जाएगा?
    जवाब- जिन दो उम्मीदवारों को हमने टिकटें दी हैं, उनके खिलाफ कोई मामले बाकी नहीं हैं, इसलिए आरोप गलत है। 
    सवाल- कुछ घटनाओं को लेकर लोगों में यह आशंका है कि भाजपा सत्ता में आएगी, तो भी येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी...
    जवाब- यह विपक्ष की चाल है जो कि काम नहीं आएगी। येदियुरप्पा हमारे सीएम-प्रत्याशी हैं, इन्हीं की अगुवाई में सरकार बनेगी, और वो अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
    सवाल- बहुत से चुनावी सर्वे कर्नाटक में एक खंडित जनादेश की तरफ इशारा करते हैं...
    जवाब- मैं एक प्रेस कांफे्रंस लेकर सीटों का अपना अनुमान घोषित  करने वाला हूं। अभी हम विपक्ष से बहुत आगे हैं, और हम स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहे हैं।
    सवाल- राहुल गांधी ने कहा है कि वे 2019 में प्रधानमंत्री बनने को तैयार हैं...
    जवाब- मैं राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी करना नहीं चाहता, और न ही पसंद करता हूं।
    सवाल- ममता बैनर्जी से लेकर के. चंद्रशेखर राव तक सभी भाजपा के खिलाफ 2019 में एक बड़ा मोर्चा बनाने की तैयारी कर रहे हैं। आप इससे कैसे निपटेंगे?
    जवाब- यह तो विपक्ष को तय करना है कि वह साथ आए या नहीं, यह हमें तो तय करना नहीं है।
    सवाल- 2019 के चुनाव के बाद हम अमित शाह को कहां पर देखेंगे?
    जवाब- यह तो पार्टी तय करेगी।

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