विशेष रिपोर्ट

Posted Date : 18-Apr-2018
  • विशेष संवाददाता
    रायपुर, 18 अपै्रल (छत्तीसगढ़)। प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस अफसरों में से एक, एडीजी पवन देव के खिलाफ एक महिला सिपाही की यौन प्रताडऩा की शिकायत पर राज्य सरकार बहुत ही अनमने तरीके से अब हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद कार्रवाई करते दिख रही है। लेकिन हाईकोर्ट के समयसीमा निर्धारित करने के बाद भी राज्य के गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के बीच किसी भी कार्रवाई से बचने के लिए इतनी कोशिश की गई कि दोनों के बीच ऐसा ऐतिहासिक टकराव हुआ है जो कि राज्य बनने के बाद से आज तक कभी नहीं हुआ था।
    पिछले डेढ़ बरस से राज्य शासन ने अपनी ही एक सर्वोच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की थी, और जो गृह विभाग इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार था, उसने अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की 45 दिनों की समयसीमा गुजर जाने के बाद कार्रवाई शुरू की है। शासन की एक प्रमुख सचिव रेणु पिल्ले की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी ने स्पष्ट रूप से पवन देव को दोषी ठहराया था, और महिला सिपाही के लगाए हुए आरोपों को सही पाया था। लेकिन इस रिपोर्ट को राज्य शासन ने डेढ़ बरस तक किनारे रख दिया था, और इस महिला सिपाही की याचिका पर कड़ा रूख दिखाते हुए हाईकोर्ट ने डेढ़ महीने में इस पर कार्रवाई करने को कहा था।
    हाईकोर्ट के दिए गए 45 दिन परसों पूरे हो चुके हैं, और पीडि़त महिला सिपाही की वकील, बिलासपुर की एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने आज दोपहर इस संवाददाता को बताया कि राज्य शासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई न करने से हाईकोर्ट की अवमानना की याचिका तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक बहुत छोटी महिला कर्मचारी की यौन-प्रताडऩा के मामले पर जांच रिपोर्ट आ जाने के बावजूद डेढ़ बरस से कोई कार्रवाई न करके एक बहुत बड़ा अन्याय कर रही है, और इसके खिलाफ एक छोटी सी महिला कर्मचारी की ओर से यह लड़ाई जारी है।
    अब पता लगा है कि पुलिस महानिदेशक उपाध्याय से पवन देव पर कार्रवाई को लेकर अभिमत मिलने के बाद गृह विभाग ने किसी कार्रवाई की सिफारिश गृह मंत्री से होते हुए मुख्यमंत्री से की है, लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
    राज्य सचिवालय और पुलिस मुख्यालय के बीच इस कार्रवाई को लेकर अभिमत मांगते हुए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रमण्यम और पुलिस महानिदेशक ए एन उपाध्याय के बीच पिछले कुछ दिनों में कागजी और जुबानी गरमागरमी अभूतपूर्व रही। जानकार लोगों ने बताया है कि सुब्रमण्यम ने कार्रवाई को लेकर डीजीपी से अभिमत पाने के लिए बहुत ही कड़ी जुबान में चि_ियां लिखीं और फोन पर बातें कहीं। इसे लेकर पता चला है कि पुलिस के सबसे बड़े अफसरों में बहुत ही नाराजगी है कि पुलिस महकमे के मुखिया के साथ इतनी बदसलूकी ठीक नहीं है। 
    उल्लेखनीय है कि पवन देव पर महिला सिपाही ने यह आरोप लगाया है कि जब वे बिलासपुर के आईजी थे, और वह महिला उनके मातहत एक जिले में पदस्थ थी, तब पवन देव ने रात-रात भर फोन करके उसे बुलाने की कोशिश की, और उससे लगातार आपत्तिजनक बातें कहीं। इस शिकायत पर बहुत मेहनत करने के बाद राज्य सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई जिसमें रेणु पिल्ले की अध्यक्षता में कुछ दूसरी महिला अफसर भी शामिल थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं के यौन शोषण को लेकर जो विशाखा गाईडलाइंस बनाई थीं, और बाद में जो एक कानून में बदली गईं, उनके तहत यह जांच की गई। लेकिन राज्य शासन ने डेढ़ बरस तक न तो इस रिपोर्ट को खारिज किया, न कोई नई जांच बैठाई, और न ही रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई ही की।
    दूसरी तरफ महिला सिपाही की लगातार शिकायतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर केंद्र सरकार तक ने राज्य सरकार से कई बार इस बारे में कोई कार्रवाई न करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन राज्य सरकार की तरफ से ऐसा पता लगा है कि कोई जवाब नहीं दिया गया। दूसरी तरफ इस दौरान जब पुलिस विभाग ने पदोन्नति की, तो आरोपों से घिरे हुए और जांच में दोषी ठहराए गए आईजी पवन देव को   पदोन्नत करके एडीजी बना दिया गया। इस बीच दिल्ली से जब-जब राज्य शासन से जवाब मांगा गया, और उसके बारे में शिकायतकर्ता महिला सिपाही ने राज्य सरकार से कार्रवाई के बारे में पूछा तो उसे यही जवाब दिया गया कि अभी मामले का अवलोकन किया जा रहा है और  कोई कार्रवाई होने पर सूचित किया जाएगा।
    गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रमण्यम से इस बारे में बात करने के लिए 'छत्तीसगढ़Ó संवाददाता ने पिछले दिनों में फोन पर कोशिश की, लेकिन वे हर बार की तरह इस बार भी मीडिया के फोन से बचते रहे। पुलिस महानिदेशक ए एन उपाध्याय से भी फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने भी न चर्चा की, न वापिस फोन किया। लेकिन राज्य शासन के सचिवालय और पुलिस मुख्यालय के बहुत से वरिष्ठ अफसर पुलिस महानिदेशक के साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव के लिखित और मौखिक बर्ताव को लेकर हक्का-बक्का हैं। 
    इस मामले में आरोपों से घिरे हुए एडीजी पवन देव का कुछ दिन पहले इस संवाददाता से कहना था कि 45 दिनों में राज्य शासन ने इस कमेटी की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की तो वे अनावश्यक आरोपों के शिकार बने हुए हैं, और वे हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेंगे। उनका कहना था कि इस कमेटी की रिपोर्ट के खिलाफ भी वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।

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