विशेष रिपोर्ट

Posted Date : 21-Sep-2018
  • शशांक तिवारी
    रायपुर, 21 सितंबर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश में जोगी पार्टी और बसपा के गठबंधन से नफे-नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। पहली नजर में दोनों पार्टियों के मिलकर चुनाव लडऩे से कांग्रेस के परम्परागत वोटबैंक में सेंध लगने और भाजपा को बड़े फायदे का अंदाजा है। मगर, भाजपा को अब अनुसूचित जाति की आरक्षित सीटों को बचाने की तगड़ी चुनौती भी है। इन सीटों पर भाजपा को पिछले चुनाव में एकतरफा जीत मिली थी, दस आरक्षित सीटों में से 9 भाजपा को मिली थी, और उसके पीछे उस वक्त कांगे्रस नेता रहे अजीत जोगी का हाथ आम चर्चा में था। अब जोगी पार्टी और बसपा गठबंधन की पूरी कोशिश अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों को जीतने की होगी। 
    बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस को झटका देते हुए गुरूवार को जोगी पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया। कांग्रेस का बसपा से गठबंधन की कोशिश पिछले कई महीनों से चल रही थी। एक समय ऐसा भी आया, जब दोनों पार्टियां गठबंधन करने के नजदीक भी आ गई थी।  बसपा का अनुसूचित जाति मतदाताओं पर अच्छी पकड़ है और बसपा के वोटबैंक ट्रांसफर भी होते हैं। इन सब कारणों के चलते कांग्रेस के रणनीतिकार विशेषकर मैदानी इलाकों में गठबंधन के रास्ते  बड़े फायदें की उम्मीद पाले थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होने से भाजपा ने राहत की सांस ली है। 
    भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि जोगी पार्टी और बसपा के गठबंधन से अजा वोटों का गठबंधन के पक्ष में ध्रुवीकरण होगा और इससे गैर अजा वोटरों के सहारे भाजपा की राह आसान हो जाएगी। पहली नजर में तो यह सब होता दिख रहा है, लेकिन भाजपा की राह पहले के मुकाबले ज्यादा कठिन दिख रही है। वजह यह है कि प्रदेश की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 10 में से 9 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट है। पिछले चुनाव में विशेषकर बिलासपुर संभाग में सतनाम सेना के बैनरतले अनुसूचित जाति निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। चर्चा है कि इन प्रत्याशियों को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी मदद पहुंचाई थी। इससे न सिर्फ आरक्षित सीटें बल्कि अनुसूचित जाति बाहुल्य कई सीटें कांग्रेस के हाथ से निकल गई। जबकि आदिवासी इलाकों में विशेषकर बस्तर में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन रहा है और सरगुजा संभाग में बराबर की स्थिति रही। 
    जानकारों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री जोगी और बसपा का आधार एक ही है। यानी दोनों की ही अजा वोटरों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। अब दोनों मिलकर अजा सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत झोकेंगे। यही नहीं, उन इलाकों पर भी दोनों का फोकस रहेगा जहां अनुसूचित जाति के वोटरों की गिनती अच्छी खासी है। गौर करने लायक बात यह है कि आदिवासी इलाकों में न तो जोगी पार्टी का और न ही बसपा का कोई ज्यादा प्रभाव है। श्री जोगी के मुख्यमंत्रित्व काल में पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस सरकार सिर्फ आदिवासी सीटें हारने के कारण नहीं बन पाई थी। जोगी पार्टी-बसपा गठबंधन की कोशिश इस बात पर होगी कि कम से कम इतनी सीटें आ जाए कि उनके बिना प्रदेश में सरकार न बन पाए। 
    बसपा के साथ गठबंधन से जोगी पार्टी को फौरी तौर पर यह फायदा मिलता दिख रहा है कि पिछले दो महीने से जोगी पार्टी के नेता टूटकर कांग्रेस में चले गए थे। अब संभव है कि पार्टी से पलायन करने वालों की संख्या में कमी आए। उल्टे जोगी पार्टी के लोगों को उम्मीद है कि पार्टी को मजबूत स्थिति में देखकर कांग्रेस और भाजपा के असंतुष्ट नेता साथ आ सकते हैं। इससे परे कांग्रेस के कार्यकर्ता इस बात से ज्यादा निराश हैं कि पार्टी के बड़े नेता खुले तौर पर बसपा के साथ गठबंधन की वकालत कर रहे थे। गठबंधन न होने पर इसके पीछे भाजपा का हाथ होना बता दिया। एक तरह से यह संदेश चला गया कि पार्टी अकेले चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है। जबकि हर बार अकेले दम पर चुनाव लड़ती रही है और पिछले चुनाव में 90 सीटों में कुल मिलाकर मात्र 96 हजार मतों से ही पीछे रह गए थे। नगरीय और पंचायत चुनाव भी जोगी के विरोध के बावजूद जीते थे। बताया गया कि जोगी पार्टी और बसपा के बीच चर्चा चल रही थी तब भी पार्टी के रणनीतिकार इसको लेकर गंभीर नहीं थे। जब गठबंधन की घोषणा हुई तो चकित रह गए। पार्टी के कई नेता इसे रणनीतिक चूक मान रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चुनाव प्रबंधन में चूक कई बार हार का कारण बनती है। बहरहाल, जोगी पार्टी और बसपा गठबंधन से विशेषकर मैदानी इलाकों की ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं। कुल मिलाकर चुनाव दिलचस्प हो गया है। 

     

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • अतुल पुरोहित
    भोपाल, 18 सितंबर (छत्तीसगढ़)। प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट फिलहाल भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है। क्योंकि कार्यकर्ता महाकुंभ से पहले सवर्णों की नाराजगी भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि प्रदेश में सवर्ण एवं पिछड़े सीधे तौर पर 148 सीटों को प्रभावित करते हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री निवास पर शुक्रवार देर रात तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह के बीच मंथन चला। जिसमें तय हुआ कि भाजपा एट्रोसिटी का विरोध करने वालों को हर हाल में मनाने की कोशिश करेगी। इसमें बड़े नेताओं को भी जुटना होगा। 
    तीनों नेताओं के बीच करीब पौने दो घंटे तक चली बैठक में यह मुद्दा भी छाया रहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी एट्रोसिटी एक्ट के विरोध के बीच भोपाल आ रहे हैं, इस बीच यदि विरोध करने वाले कांग्रेस नेता के सामने प्रदर्शन या काले झंडे दिखाने की कोशिश करते हैं, तो फिर इसके लिए भाजपा और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं की चिंता सवर्णों के सीधे प्रभाव वाली 148 सीटों को लेकर भी रही। विधानसभा की कुल 230 सीटों में सामान्य वर्ग की 148 सीटें हैं वहीं आरक्षित वर्ग की कुल 82 सीटें हैं। अगर 2013 के विधानसभा चुनाव नतीजों की बात करें तो भाजपा ने सामान्य वर्ग की 148 सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा जमाया था, जो राज्य में सामान्य बहुमत के आंकड़े से मात्र 14 सीटें दूर था। 
    भाजपा तय रणनीति के तहत अब एट्रोसिटी एक्ट का विरोध करने वालों को मनाने का काम करेगी। खास बात यह है कि इस विरोध के बीच भाजपा का 200 पार का नारा खो गया है। जिस तरह से एट्रोसिटी का मुद्दा सुलग रहा है, उससे भाजपा को बहुमत तक पहुंचने में भी कठिनाई महसूस हो रही है। क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एससी-एसटी एक्ट का विरोध करने वाले चुनाव में भाजपा के खिलाफ उतरेंगे या फिर कांग्रेस के समर्थन में जाएंगे। 
    इन सीटों पर सवर्ण और ओबीसी का दखल
    श्योपुर, विजयपुर, सबलगढ़, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी, अटेर, भिण्ड, लहार, मेहगाँव, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर, ग्वालियर ईस्ट, ग्वालियर साउथ, भितरवार, सेवढ़ा, दतिया, पोहरी, शिवपुरी, पिछोर, कोलारस, बमोरी, चाचौड़ा, राघौगढ़, चंदेरी, मुंगावली, खुरई, सुरखी, देवरी, रहली, सागर, बण्डा, टीकमगढ, पृथ्वीपुर, निवाड़ी, खरगापुर, महाराजपुर, राजनगर, छतरपुर,
    बीजावर, मलहेरा, पथरिया, दमोह, जबेरा, पवई, गुन्नौर, पन्ना, चित्रकूट, सतना, नागौद, मैहर, अमरपाटन, रामपुर बघेलान, सिरमौर, सेमरिया, त्यौंथर, मउगंज, देवतालाब, रीवा, गुढ़, चुरहट , सीधी, सिंहावल, सिंगरौली, कौतमा, विजयराघवगढ़, मुड़वारा, बहोरीबंद, पाटन, बरगी, जबलपुर नार्थ, जबलपुर केन्ट, जबलपुर वेस्ट, पनागर, लांजी, परसवाड़ा, बालाघाट, वारासिवनी, कटंगी, सिवनी, केवलारी, नरसिंहपुर, तेन्दूखेड़ा, गाडरवाड़ा, चौरई, सौंसर, छिन्दवाड़ा, मुलताई, बैतूल, हरदा, सिवनी मालवा, होशंगाबाद, सोहागपुर, उदयपुरा, भोजपुर, सिलवानी, विदिशा, बासौदा, सिरोंज, शमशाबाद, भोपाल उत्तर, नरेला, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविन्दपुरा, हुजूर, बुधनी, इछावर, सीहोर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर, सुसनेर, शाजापुर, शुजालपुर, कालापीपल, देवास, हाटपिपल्या, खातेगाँव, मंधाता। बुरहानपुर, बड़वाह, कसरावद, खरगोन, धार, बदनावर, देपालपुर, इंदौर-1, इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, अम्बेडकर नगर महू, राउ, नागदा-खाचरौद, महिदपुर, उज्जैन नार्थ, उज्जैन साउथ, बडनग़र, रतलाम सिटी, जावरा, मंदसौर, सुवासरा, गरोठ, मनासा, नीमच, जावद।

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Posted Date : 14-Sep-2018
  • कृषि विभाग की आत्मा योजना में घोटाला
    चंद्रकांत पारगीर
    बैकुंठपुर, 14 सितंबर (छत्तीसगढ़)। कोरिया जिले में आत्मा योजना के तहत किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रूपए निकाले जाने का बड़ा घोटाला सामने आया है। योजना में किसानों के खेतों की जुताई एक ही दिन में ढाई सौ घंटे में की गई, जबकि जिनके खेतों की जुताई की, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, और तो और उनके हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए हंै, विभाग ने दो सरकारी शिक्षकों के खेत को ट्रैक्टर से जुतवा दिया और जब उन्होंने अपने हस्ताक्षर देखे तो हैरान रह गए। 
    सोनहत कृषि विभाग के प्रभारी अधिकारी पीएल तिवारी का कहना है कि अभी जिन्हें प्रभार मिला है वो बाहर है, उड़द का प्रदर्शन बीते वर्ष लगाया गया था, उस समय के अधिकारी को जिला में अटैच किया गया है, यदि ऐसा मामला सामने आया है तो मंै इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दूंगा, ऐसा होना नहीं चाहिए।
    दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में आत्मा योजना (एग्रिकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेन्सी) लागू है, जिसके तहत कृषि विस्तार सेवाओं में सुधार, कृषि तकनीकी प्रसार प्रद्धतियों में सुधार, किसानों की विशेष आवश्यकताओं की पूर्ति तथा कृषि विभाग के अमले को सक्षम बनाना है। इसके तहत कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में वर्ष 2017-18 में धान की फसल का प्रदर्शन 550 एकड़, उड़द का प्रदर्शन 300 एकड़, तिल का प्रदर्शन 150 एकड़ में लगाया गया। योजना के अनुसार किसानों को नि:शुल्क बीत वितरित किया गया, साथ इसके लिए किसानों के खेत भी ट्रैक्टर की मदद से तैयार किए गए। परन्तु सब कागजों पर ही किसानों को लाभ दे दिया गया। 
    इधर, सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी से मामले का खुलासा हुआ, कि किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर लिए गए, ना तो उन्हें बीज मिले और ना ही उनके खेतों को ट्रैक्टर से बनवाए गए। फर्जी हस्ताक्षर करने में कई गलती कर गए, कुछ ऐसे लोगों का अंगूठा लगाया गया, जो वास्तव में हस्ताक्षर करना जानता है। ऐसी कई महिलाएं मिलीं, जो अंगूठा नहीं लगाती है, उनके प्रमाण पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर कर राशि आहरित कर ली गई। 
    वहीं दो सरकारी शिक्षकों के नाम पर भी फर्जी हस्ताक्षर कर उनके खेत बनाने के नाम पर राशि निकाल ली गई। ग्राम पंचायत पोड़ी के उपसरपंच बृजकुमार से हस्ताक्षर करवा लिए, परन्तु उसे बताया नहीं कि आखिर क्यों उससे हस्ताक्षर करवाए है? 
    मिली जानकारी में यह बात सामने आई है कि एक ही दिन में 125 किसानों के 250 घंटे में 125 एकड़ ट्रैक्टर से खेत की जुताई भी कर दी गई, जिसका 1 लाख 25 हजार का भुगतान भी कर दिया गया है। 
    अब जब सूचना के अधिकार की जानकारी की तफ्तीश करने 'छत्तीसगढ़Ó  संवाददाता ग्राम परिहत पहुंचे तो किसानों के होश उड़ गए। उनका कहना है कि उन्होंनेे योजना का किसी भी प्रकार का लाभ नहीं लिया है तो उनके नाम पर फर्जीवाड़ा हो कैसे गया। 
    परिहत के किसान विंधेश्वर बताते हंै कि उनके पिता के नाम पर प्रदर्शन बताया गया है, जबकि वो धान लगाते हंै, उनके खेत बनाने कोई नहीं आया है। किसान संतूराम हैरान है, वे भी बताते हंै कि कोई भी उनके खेत दुरूस्त करने नहीं आया। 
    किसान बिजैन्द्र कुमार का कहना है कि वो बाजार से बीज खरीदकर धान की खेती कर रहे है, उड़द तो उन्होंने बीते वर्ष बोया ही नहीं है। परिहत की निवासी हिरोदिंया का कहना है कि वो लिखना-पढऩा जानती है, उनके नाम पर अंगूठा लगाकर प्रमाण पत्र जारी किया गया है जो कि फर्जी है। 
    इसी तरह परिहत निवासी हीरावती बताती हंै कि उनके ग्राम परिहत में उड़द के बीज का वितरण ही नहीं हुआ है। प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य राजेन्द्र लाल का कहना है कि इस तरह उनके नाम का प्रयोग घोटले में किया जाना गलत है, वो अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते है और उनका भी फर्जी हस्ताक्षर किया गया है। 
    इसके अलावा ग्राम पंचायत पोड़ी के उपसरपंच बृजकुमार बताते हंै कि उनसे उक्त सभी प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए, परन्तु उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि ट्रैक्टर से खेत बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जबकि उनके गांव में किसी के भी खेतों में ट्रैक्टर चला ही नहीं है। 

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