गैजेट्स

Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । इंटरनेट ने न सिर्फ पूरी दुनिया को एक वैश्विक गांव बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है, बल्कि इसने घर बैठे काम करने की इच्छुक लोगों की खातिर कई मौके भी तैयार किए हैं।
    अब आप इंटरनेट से न सिर्फ जानकारी हासिल कर सकते हैं, बल्कि आप इसके जरिये अच्छी कमाई भी कर सकते हैं। थोड़ा संयम और थोड़ी मेहनत आपको घर बैठे ही अपने काम के साथ-साथ कमाई करने का मौका देती है। आगे जानें 5 ऐसे ही मौकों के बारे में, जिनके जरिये आप कमाई कर सकते हैं।
    ऐप्स- ऐप्स ने न सिर्फ हर चीज को आपके मोबाइल पर पहुंचाया है, बल्कि इसने कई नये तरह के कारोबार को भी जन्म दिया है। यहां तक कि मोदी सरकार भी आपको ऐप के जरिये कमाई का मौका दे रही है।
    ये हैं मौके- मोदी सरकार भीम ऐप का इस्तेमाल करने पर आपको 750 रुपये तक का कैशबैक तो देती ही है, लेकिन इसके अलावा आप डिजिटाइज इंडिया ऐप के जरिये सरकार के लिए डेटा एंट्री कर सकते हैं और पैसे कमा सकते हैं।
    इसके अलावा पेट्यून्स नाम का ऐप आपको इनकमिंग कॉल्स के जरिये पैसे कमाने का मौका देता है। कीटू ऐप के जरिये आप व्हाट्सऐप पर चैटिंग कर कमाई कर सकते हैं। ये सारे ऐप भारत में ही तैयार किए गए हैं।
    ब्लॉगिंग- आपको लिखने का शौक है, तो आप अपना ब्लॉग शुरू कर सकते हैं। अगर आप कुछ पैसे खर्च कर सकते हैं, तो महज 5 से 7 हजार रुपये में आप अपनी वेबसाइट शुरू कर सकते हैं और कमाई कर सकते हैं।
    कैसे होगी कमाई- अपने ब्लॉग और वेबसाइट को आप गूगल एडसेंस से जोड़ सकते हैं। एडसेंस आपकी वेबसाइट पर विज्ञापन दिखाता है, जिसके बदले आपको पैसे मिलते हैं। सिर्फ यही नहीं, अमेजन और ऐपल जैसी बड़ी कंपनियों के साथ आप एफिलिएट मार्केटिंग कर सकते हैं और अपनी वेबसाइट पर विज्ञापन दिखाकर पैसे कमा सकते हैं।
    यूट्यूब- लगभग सबको मालूम है कि यूट्यूब से अच्छी-खासी कमाई होती है। कई लोगों ने इसे फुल-टाइम करीयर भी बना दिया है। आप भी अपनी नौकरी के साथ यूट्यूब के जरिये कमाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ अपना पसंदीदा विषय चुनना है और उस पर वीडियोज बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करने हैं।
    कुछ समय बाद ही इस प्लैटफॉर्म से आप कमाई करना शुरू कर देंगे। इसके बाद जैसे ही आप के वीडियोज चलेंगे, वैसे ही आपकी कमाई भी शुरू हो जाएगी। जैसे ही आप वीडियोज से कम से कम 100 डॉलर (तकरीबन 6500 रुपये) तक की कमाई कर लेते हैं, वैसे ही यूट्यूब आपके खाते में पैसे भेज देता है।
    पढ़ाइए- आपको पढ़ाने का शौक है, तो अपने खाली समय में आप ऑनलाइन पढ़ा सकते हैं। डेमी.कॉम जैसे कई ऐसे प्लैटफॉर्म हैं, जो आपको हिंदी समेत अन्य कई विषय ऑनलाइन पढ़ाने का मौका देते हैं। कई ऐसे प्लैटफॉर्म भी हैं, जो आपको अपनी फीस तय करने का मौका भी देते हैं।
    टैलेंट के बूते कमाइए- ये जरूरी नहीं है कि आपको इंटरनेट से कमाई करने के लिए गीत गाना या फिर लिखना आना जरूरी है, बल्कि आप अपने किसी भी टैलेंट के बूते कमाई कर सकते हैं।
    इसके लिए आप फीवर.कॉम जैसे कई प्लैटफॉर्म का रुख कर सकते हैं। इन प्लैटफॉर्म पर आपको जो भी काम आता है, उसकी बोली लगा सकते हैं। आप ही अपना चार्ज तय करेंगे। सामने वाले व्यक्ति को अगर आपका ऑफर पसंद आता है, तो वह आपकी डील ले लेगा। इस तरह आप यहां से कमाई करेंगे।  (आज तक)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • अफवाहों को वायरल होने से रोकने के लिए वाट्सएप ने एक नई पहल की है। अब यूजर किसी मैसेज को एक साथ पांच से ज्यादा लोगों या गु्रप्स को फॉरवर्ड नहीं कर सकेंगे। कंपनी मीडिया मैसेजेज के लिए बना क्विक फॉरवर्ड बटन भी हटाने जा रही है। वाट्सएप की यह पहल ऐसे समय पर आई है जब बीते चार महीनों के दौरान सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के चलते भीड़ ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 25 से भी ज्यादा लोगों को मार डाला है। केंद्र सरकार ने उससे इसे लेकर जवाब भी मांगा है कि वह इस तरह की अफवाहों को वायरल होने से रोकने के लिए क्या बंदोबस्त कर रही है। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • वॉट्सऐप अपने प्लैटफॉर्म पर एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है ताकि स्पैम और फर्जी खबरों पर लगाम लगाई जा सके। इंस्टेंट मेसेजिंग ऐप अब वॉट्सऐप पर साझा किए जाने वाले सभी मेसेज, विडियोज़ और फोटोज़ को फॉरवर्ड करने के लिए एक लिमिट सेट करेगा। भारत में वॉट्सऐप एक बार में 5 चैट्स के लिए लिमिट टेस्ट करेगा और इसके बाद क्विक फॉरवर्ड बटन के जरिए इन्हें हटाया जा सकेगा। यह बटन मीडिया मेसेज के पास बना होगा। इसका मतलब है कि अगर एक मेसेज को पांच बार एक ही अकाउंट से कोई मेसेज फॉरवर्ड किया गया है, और इसके बाद लिमिट क्रॉस होने पर वॉट्सऐप पर उस मेसेज को फॉरवर्ड करने का ऑप्शन को डिसेबल हो जाएगा।
    वॉट्सऐप ने एक ब्लॉग पोस्ट में खुलासा किया, आज से हम वॉट्सऐप पर मेसेज फॉरवर्ड करने की लिमिट को टेस्ट करेंगे, जो हर किसी पर लागू होगी। भारत में लोग दुनिया के किसी भी दूसरे देश से ज्यादा मेसेज, फोटोज़ और विडियो फॉरवर्ड करते हैं। हम एक बार में 5 चैट के लिए लिमिट टेस्ट करेंगे और उसके बाद मीडिया मेसेज के पास बना क्विक फरवर्ड बटन हटा दिया जाएगा।
    गौर करने वाली बात है कि भारत में करीब 250 मिलियन से ज्यादा लोग वॉट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं और वॉट्सऐप का यहां सबसे बड़ा बाजार है। पिछले कुछ महीनों में वॉट्सऐप पर वायरल हुए विडियो और मेसेज के जरिए मॉब लिंचिंग और हिंसा की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए नफरत भरा कॉन्टेन्ट और अफवाहें फैलाने के चलते देश के कई हिस्सों में लोगों को घेरकर मारने की घटनाएं सामने आई हैं। केंद्र सरकार ने वॉट्सऐप से इस संबंध में एक्शन लेने को कहा है।
    फेसबुक के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी मिनिस्ट्री को एक चिट्ठी लिखी थी। कंपनी ने कहा था कि देश में हिंसा की घटनाओं का होना बहुत भयावह है और इन अफवाहों को रोकने के लिए नए कदम उठाए गए।
    वॉट्सऐप के मुताबिक, नए बदलावों से यह सुनिश्चित होगा कि इंस्टेंट मेसेजिंग ऐप एक प्राइवेट मेसेजिंग ऐप ही रहे और गलत जानकारियां व अफवाहों को फैलने से रोका जा सके। हालांकि, जरूरत है कि वॉट्सऐप फॉरवर्ड किए जाने वाले टेक्स्ट मेसेज के लिए भी कुछ करे। लोग आसानी से इन टेक्स्ट मेसेज को कॉपी कर पेस्ट करके फॉरवर्ड कर देते हैं। ऐसा करने से हाल ही में आया फॉरवर्डेड लेबल भी नहीं दिखता। वॉट्सऐप ने अपने ब्लॉग पोस्ट में आगे कहा कि हम यूजर्स की सेफ्टी और प्रिवेसी को लेकर प्रतिबद्ध हैं। इसीलिए ऐप में एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन दिया गया है। हम लगातार ऐप में नए फीचर्स लाने पर काम करेंगे ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके। वॉट्सऐप के अमेरिकी मुख्यालय और भारतीय कामकाज से जुड़े सीनियर अधिकारियों ने चुनाव आयोग के अलावा बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात की है। वॉट्सऐप का कहना है कि भारत में आगामी चुनावों के दौरान अपने प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने की कोशिश के तहत उसने ये मुलाकातें की हैं।(टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • व्हाट्सऐप लगातार अपने यूजर्स के लिए नए-नए फीचर अपडेट कर रहा है. फेक न्यूज से लड़ने के लिए 'Forwarded' का फीचर देने के बाद अब व्हाट्सऐप ने 'Mark as Read' और 'Mute' बटन को रोल आउट कर दिया है. इन फीचर्स के आ जाने के बाद आप व्हाट्सऐप मैसेज आने पर नोटिफिकेशन पैनल से ही जरूरी एक्शन ले सकेंगे.
    व्हाट्सऐप ने अपने लेटेस्ट व्हाट्सऐप एंड्रॉयड बीटा ऐप पर म्यूट बटन को अपडेट कर दिया है. आप जैसे ही किसी कॉन्टैक्ट से 51 से ज्यादा मैसेज रिसीव करेंगे, यह नोटिफिकेशन में एक्टिव हो जाएगा. इस फीचर की मदद से आप उस यूजर के मैसेज को आसानी से नोटिफिकेशन पैनल से ही म्यूट कर सकेंगे और आपको ऐप खोलना भी नहीं पड़ेगा. इन फीचर को नोटिफिकेशन पैनल में 'Reply To' बटन के बगल में जगह मिलेगी.  
    व्हाट्सऐप की जानकारी देने वाले WABetaInfo कि रिपोर्ट के अनुसार Mute बटन WhatsApp बीटा वर्ज़न 2.18.216 का हिस्सा है. इस बटन को व्हाट्सऐप बीटा एंड्रॉयड ऐप का इस्तेमाल करने वाले सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दिया गया है. लेकिन Mark as Read बटन को अभी बीटा टेस्टर्स के लिए रिलीज नहीं किया गया है. WABetaInfo की मानें तो इस बटन की मदद से यूजर नोटिफिकेशन पैनल से ही किसी भी मैसज को Mark as Read कर सकते हैं.
    'Mute' बटन को रोलआउट करने के साथ ही व्हाट्सऐप ने स्टीकर प्रिव्यू भी जारी किया है. WABetaInfo के अनुसार यह WhatsApp बीटा वर्ज़न 2.18.218 का हिस्सा है, लेकिन स्टीकर्स को आने वाले समय में आम यूज़र के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें यह भी बताया गया है कि अपडेटेड स्टीकर पैक के बारे में '+' बटन पर ग्रीन डॉट के जरिए जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा एक अपडेट बटन भी होगा जिसकी मदद से यूजर एक बार में किसी भी स्टीकर पैक को एक साथ डाउनलोड कर सकेंगे.
    WABetaInfo ने जो ट्वीट किया है उसमें Bibimbap Friends और Unchi & Rollie स्टीकर्स नजर आ रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि यह स्टीकर्स शुरुआती लॉन्च का हिस्सा हो सकते हैं. गौरतलब है कि व्हाट्सऐप के मालिक फेसबुक ने अपने F8 डेवलपर कॉन्फ्रेंस में पहली बार WhatsApp पर जल्द ही स्टीकर्स लाए जाने की जानकारी दी गई थी. (न्यूज18)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • 17 जुलाई 2018. गूगल ने प्रसिद्ध खगोलविद जॉर्ज लेमैत्रे को उनके 124वें जन्मदिन पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है. बेल्जियम के रहने वाले लेमैत्रे ने 1927 में आधुनिक बिग बैंग थ्योरी की नींव रखी थी. उन्होंने दुनिया को बताया कि ब्रह्मांड की शुरुआत एक बहुत बड़े धमाके से हुई थी, और तभी से समय की भी शुरुआत हुई. बाद में अमेरिकी खगोलविद एडविन हुबल ने लेमैत्रे की थ्योरी की पुष्टि की थी.

    जॉर्ज लेमैत्रे का जन्म 17 जुलाई, 1894 को बेल्जियम में हुआ था. वे एक कैथोलिक पादरी होने के साथ खगोलविद और बेल्जियम की ल्युवेन कैथोलिक यूनिवर्सिटी में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर भी थे. लेमैत्रे ने अपनी बिग बैंग थ्योरी को अतिप्राचीन परमाणु परिकल्पना से जोड़ा. उन्होंने कहा कि ब्रह्मांड सबसे पहले एक विशाल भारी गोला था. अरबों साल पहले उसमें जबर्दस्त विस्फोट हुआ जिससे अत्यधिक ऊर्जा निकली. यह ऊर्जा इतनी अधिक थी कि इसकी वजह से ब्रह्मांड आज भी फैलता जा रहा है. धमाके के कुछ लाख साल बाद तारे और आकाशगंगाएं अस्तित्व में आए. बाद में कई ग्रहों का जन्म हुआ जिनमें हमारी पृथ्वी भी शामिल है.

    साल 1933 में एल्बर्ट आइंस्टाइन ने भी लेमैत्रे के इस सिद्धांत की प्रशंसा की थी. तब कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दुनिया के कुछ महान वैज्ञानिक एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए हुए थे. लेमैत्रे ने कार्यक्रम में अपने सिद्धांत पर व्याख्यान दिया था. उसके बाद आइंस्टाइन ने कहा था कि ब्रह्मांड के निर्माण के संबंध में उन्होंने जितनी भी थ्योरी सुनी थीं, लेमैत्रे का सिद्धांत उनमें सबसे ज्यादा संतुष्टि देने वाला था.

    जॉर्ज लेमैत्रे ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी. लेकिन प्रथम विश्व युद्ध में बेल्जियम के भाग लेने की वजह से उनका अध्ययन बाधित हुआ. युद्ध के बाद लेमैत्रे ने अलग-अलग कॉलेजों से अपनी पढ़ाई पूरी की. 1925 में वे बेल्जियम लौट आए और ल्युवेन कैथोलिक यूनिवर्सिटी में अंशकालिक अध्यापन करने लगे. अपने करियर का बाकी समय उन्होंने यहीं गुजारा.

    साल 1934 में लेमैत्रे को बेल्जियम में विज्ञान के सबसे बड़े पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वे वेटिकन सिटी की पोन्टिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज के सदस्य भी चुने गए और जीवनपर्यंत इस पद पर सक्रिय रहे. 20 जून, 1966 को उनका निधन हो गया. इससे कुछ ही समय पहले उन्होंने ब्रह्मांडीय सूक्ष्म तरंग विकिरण (कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन) की खोज की थी. ब्रह्मांड को समझने में उनकी यह खोज महत्वपूर्ण मानी गई. आज खगोल विज्ञान का हर नियम इस सिद्धांत पर आधारित है और इसी का विस्तार है.(सत्याग्रह)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • यूजर की मृत्यु के बाद उसके फेसबुक एकाउंट पर किसका अधिकार है? जर्मनी की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले में फैसला सुनाकर तस्वीर साफ कर दी है।
    जर्मन शहर काल्र्सरुहे में देश की सर्वोच्च संघीय अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मृतक के फेसबुक अधिकार उसके परिवार को मिलने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि विरासत का अधिकार, डाटा प्राइवेसी से पहले आता है।
    असल में यह मामला एक 15 साल की किशोरी की मौत बाद अदालत में पहुंचा। किशोरी की मौत 2012 में ट्रेन से टकराने से हुई। मृतक के माता पिता ने फेसबुक से बेटी का डाटा देने को कहा। परिवार जानना चाहता था कि उनकी बेटी की मौत कैसे हुई, क्या वह हादसा था या फिर आत्महत्या? मौत का सही कारण पता चले बिना ट्रेन ड्राइवर को भी मुआवजा नहीं मिल पा रहा था।
    फेसबुक ने डाटा और मैसेज एक्सेस देने से इंकार कर दिया। इसके बाद 2015 में परिवार ने निचली अदालत का रुख किया। निचली अदालत ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि निजी संवाद का फेसबुक डाटा भी जर्मनी के विरासत संबंधी कानून के तहत आता है। अदालत के मुताबिक नाबालिगों के मामले में अभिभावकों को अपने बच्चे की कम्युनिकेशन हिस्ट्री जानने का अधिकार है।
    निचली अदालत के फैसले के खिलाफ फेसबुक ने अपील कोर्ट का दरवाजा खटकाया। फेसबुक ने कहा कि किसी व्यक्ति का डाटा प्राइवेसी का अधिकार उसकी मौत के बाद भी सुरक्षित रहता है। यह जर्मनी के संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। अमरीकी सोशल मीडिया कंपनी के मुताबिक परिजनों को मृतक के फेसबुक प्रोफाइल को श्रद्धाजंलि पेज में तब्दील करने का या पूरी तरह डिलीट करने का अधिकार है, लेकिन डाटा एक्सेस का हक नहीं है। अपील कोर्ट ने 2017 में फेसबुक के हक में फैसला दिया। 
    इसके बाद कानूनी लड़ाई सर्वोच्च संघीय अदालत में पहुंची। जुलाई 2018 को संघीय अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि फेसबुक को मृतक को परिजनों को डाटा देना ही होगा। फेसबुक डाटा भी विरासत संबंधी कानून के दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह परिजनों को मृतक की किताबों और उसके पत्रों का अधिकार मिलता है, उसी तरह डाटा का अधिकार भी मिलना चाहिए।
    संघीय अदालत के फैसले के बाद संवैधानिक अदालत में अपील की जा सकती है लेकिन फेसबुक के वकील क्रिस्टियान रोन्के ने कहा, मुझे नहीं लगता कि अब कोई और अपील होगी। (एएफपी)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर कई बड़ी हस्तियों के फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट आई है। ट्विटर ने फर्जी अकाउंट बंद करने का एक अभियान चलाया, जिसके बाद ये गिरावट देखने को मिली है। इसमें पीएम मोदी के करीब 3 लाख फॉलोअर्स कम हो गए। वहीं, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और सुषमा स्वराज के फॉलोअर्स भी कम हुए हैं।
    फेक अकाउंट के खिलाफ चलाए गए ट्विटर के अभियान में अब तक 7 करोड़ फर्जी अकाउंट डिलीट किए गए हैं। इस वजह से कई बड़ी हस्तियों के फॉलोअर्स की संख्या में भी गिरावट आ गई। जानकारी के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी के फॉलोअर्स की संख्या में करीब 3 लाख की गिरावट हुई है। पहले पीएम मोदी के 4 करोड़ 34 लाख फॉलोअर्स थे जो कि घटकर 4 करोड़ 31 लाख हो गए हैं।
    वहीं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के करीब 74 हजार फॉलोअर कम हुए हैं तो केजरीवाल के 92 हजार फॉलोअर कम हुए हैं। साथ ही राहुल गांधी के 20 हजार फॉलोअर्स चलते बने हैं। पहले राहुल गांधी के 72 लाख 40 हजार फॉलोअर्स थे जो घटकर 72 लाख 20 हजार हो गए हैं।
    ऐसा नहीं कि सर्फ भारतीय नेताओं के फॉलोअर्स में कमी आई है। ट्विटर द्वारा संदिग्ध गतिविधियों के लिये खातों को हटाने के चलते अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब एक लाख, जबकि पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के चार लाख फॉलोअर कम हो गए। वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक माइक्रो ब्लागिंग साइट का यह कदम अपने प्लेटफार्म को अधिक साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाया है।
    ट्विटर स्पैम, ट्रोलिंग और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों से भरा रहा है। ट्विटर पर हर महीने 33.6 करोड़ लोग लॉग इन करते हैं, लेकिन इनमें से कई प्रोफाइल महीने में कम से कम एकबार भी सक्रिय नहीं थे। कंपनी ने बताया कि उसके इस कदम से छह प्रतिशत फॉलोअर प्रभावित हो सकते हैं और कई लोकप्रिय एकाउंट में अगले एक हफ्ते में फॉलोअर में कमी आ सकती है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप के 5.34 करोड़ फॉलोअर में से करीब एक लाख कम हो गये, जबकि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के 10.4 करोड़ फॉलोअर में से चार लाख कम हो गये। (आज तक)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 11 जुलाई । सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की बाढ़ के बीच फेसबुक ने चुनाव आयोग को भरोसा दिया है कि वह अपने नेटवर्क के जरिए इन पर रोक लगाएगा। फेसबुक एक ऐसा सिस्टम लागू कर रहा है जो खुद इसे सत्यापित कर पाएगा। साथ ही, चुनावी प्रचार कंटेंट को आयोग के पास भी जांच के लिए भेजा जाएगा। बताया जाता है कि फर्जी कंटेट मिलने पर संबंधित फेसबुक अकाउंट को ब्लॉक भी किया जा सकता है। इससे पहले चुनाव आयोग ने फेसबुक से फर्जी खबरों को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा था।(सत्याग्रह)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के बीच अफवाहों पर रोक लगाने के लिए सोशल मैसेजिंग कंपनी वाट्सएप ने एक नया फीचर शुरू किया है. इसमें यूजर को यह जानकारी दी जाएगी कि कौन सा मैसेज फॉरवर्डेड है और कौन सा मौलिक. अपने बयान में कंपनी ने कहा है कि इस फीचर से लोग जान सकेंगे कि जो मैसेज उन्हें मिला है वह उनके किसी परिचित ने खुद लिखा है या किसी और ने. वाट्सएप के मुताबिक यूजर स्पैम यानी फर्जी मैसेज को रिपोर्ट भी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उससे सीधे संपर्क भी कर सकते हैं. कंपनी का यह भी कहना है कि एप के लेटेस्ट वर्जन को डाउनलोड करने के बाद ही यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी.

    इससे पहले सोशल मीडिया पर फेक न्यूज या झूठी जानकारियों पर लगाम लगाने के लिए वाट्सएप ने कल देश के तमाम अखबारों में एक विज्ञापन भी दिया था. इसमें उसने कुछ टिप्स के जरिये बताया है कि यूजर्स कैसे फेक न्यूज या किसी गलत जानकारी को पकड़ या उसे शेयर करने से बच सकते हैं. हाल में बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते देश के कई हिस्सों में भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या के मामले सामने आए हैं. ये अफवाहें वाट्सएप के जरिये ही फैलाई गई थीं. हत्याओं और लोगों के बीच लगातार बढ़ रहे डर को देखते हुए सरकार ने भी वाट्सएप को चेतावनी दी थी.

    वाट्सएप का कहना है कि मॉब लिंचिंग की हालिया घटनाओं से वह भी चिंतित है. कंपनी ने इस बारे में तेजी से कार्रवाई करने का वादा किया है. हालांकि अधिकारियों का आरोप है कि इस मामले में उसने गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाया है. उनका कहना है कि कंपनी अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बच नहीं सकती. इस पर वाट्सएप का कहना है कि कंपनी यूजर्स की निजता को ध्यान में रखते हुए उनके मैसेज नहीं पढ़ती.

    क्या हैं टिप्स?

    - अगर संदेश पर यकीन नहीं है तो उसके बारे में पता लगाएं.

    - डराने या भड़काऊ जानकारी को शेयर करने से पहले दो बार सोचें.

    - फेक न्यूज या झूठे संदेशों में वर्तनी (स्पेलिंग) की गलतियां होती हैं. उन पर गौर करने पर भी जानकारी के सही या गलत होने का पता लगाया जा सकता है.

    - तस्वीरों और वीडियो पर जल्दी भरोसा होता है. लेकिन उन्हें संपादित और भ्रामक तरीके से पेश किया जा सकता है. इसलिए यह देखना न भूलें कि संबंधित तस्वीर या वीडियो किस घटना का है.

    - कई बार जानी-मानी वेबसाइटों के नाम पर गलत जानकारी दी जाती है, लेकिन उनमें भी भाषाई गलतियां होती हैं.

    - जो खबर आपसे शेयर की गई है उसके बारे में दूसरी वेबसाइटों पर देखें. पता करें कि वहां इस बारे में क्या बताया गया है.

    - अगर कोई ठोस आधार न मिले तो उस खबर को शेयर न करें.

    - वाट्सएप पर आप किसी भी नंबर को ब्लॉक कर सकते हैं या किसी भी ग्रुप को छोड़ सकते हैं. (गलत जानकारी के संबंध में) इन फीचरों का इस्तेमाल करें.

    - एक ही संदेश के बार-बार आने पर ध्यान न दें. एक ही जानकारी कई बार दोहराए जाने से वह सच नहीं हो जाती. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 10-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 10 जुलाई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वॉट्सएप द्वारा फैल रही अफवाह और इनके कारण हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने सभी को झकझोर दिया था। जिसके बाद मोदी सरकार ने भी वॉट्सएप को कदम उठाने को कहा था। अब मंगलवार को वॉट्सएप ने फर्जी अफवाह को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें उन्होंने लोगों को बताया है कि कैसे फर्जी खबरों और अफवाहों से बचा जाए। वॉट्सएप ने मंगलवार को देश के मुख्य अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर 10 प्वाइंट्स में लोगों को इसके बारे में समझाया।
    इन 10 प्वाइंट्स के बारे में बताया...
    1.अग्रेषित किए गए संदेशों से सावधान रहें
    2. ऐसी जानकारी के तथ्यों पर सवाल उठाएं जो आपको परेशान करती है
    3. ऐसी जानकारी की जांच करें जिसपर यकीन करना कठिन हो
    4. ऐसे संदेशों से बचें जो थोड़े अलग दिखते हैं
    5. संदेशों में मौजूद फोटो को ध्यान से देखें
    6. लिंक की भी जांच करें
    7. अन्य स्त्रोतों का उपयोग करें
    8. सोच समझकर संदेशों को साझा करें
    9. आप जो देखना चाहते हैं उसे नियंत्रित कर सकते हैं
    10. झूठी खबरें अक्सर फैलती हैं
    अफवाह फैलने से देशभर में हो रही मॉब लिंचिंग के घटनाओं के बाद सरकार अब इसपर रोक लगाने की कोशिशों में जुटी है। इसी वजह से बच्चा चोरों, झूठी खबरें और फर्जी वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने के लिए फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मदद लेने की योजना बना रही है। बच्चा चोरी की अफवाह की वजह से करीब एक दर्जन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है।
    हाल ही में सरकार ने कंपनी को चेतावनी दी थी कि वह इसे रोकने के लिए उपाय करे। इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए वॉट्सऐप ने बीते बुधवार को सरकार को एक तीन पेज का लेटर भेजकर अपना जवाब दिया था।
    सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर फैली बच्चों को अगवा करने की अफवाहों के चलते एक साल में कम से कम 29 लोगों को पीट-पीट कर मार डाला गया। (आज तक)

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Posted Date : 09-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 9 जुलाई। सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर ने मई और जून में सात करोड़ से अधिक फर्जी खाते बंद कर दिए। इसके बाद ट्विटर ने एक ही दिन में करीब 10 लाख खाते बंद कर दिए। इससे इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या प्रभावित होने की आशंका है। ट्विटर से फिलहाल 33 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। फर्जी खाते बंद किए जाने के बाद इसके मासिक एक्टिव यूजर की संख्या में तेज गिरावट की आशंका है। 
    अक्टूबर के बाद से खाते बंद करने की प्रक्रिया में दोगुनी वृद्धि हुई है। ट्विटर ने अमरीकी कांग्रेस में कहा था कि किस तरह रूस में फर्जी खातों के जरिए 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सिन्हुआ के मुताबिक, फर्जी खातों के जरिए झूठी और सनसनीखेज खबरें फैलाने की वजह से यह कार्रवाई की गई है। फेक अकाउंट के जरिए झूठी और सनसनी खबरें फैलाने की वजह से यह कार्रवाई की गई है। ट्विटर से जुड़े सूत्रों ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि अक्टूबर में बंद किए गए अकाउंट की तुलना में दोगुने से अधिक है। अकाउंट में 10 लाख फर्जी अकाउंट बंद किए गए थे। (आईएएनएस)

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Posted Date : 08-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 8 जुलाई । ट्विटर पर फेक अकाउंट्स की भरमार है और अब खबर आई है कि माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट हर रोज 10 लाख से ज्यादा फेक अकाउंट बंद कर रही है। ट्विटर द्वारा मई और जून में अब तक कुल सात करोड़ से ज्यादा फर्जी खाते बंद किए जाने की जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। गौर करने वाली बात है कि ट्विटर पर फिलहाल 33 करोड़ अकाउंट्स हैं। कंपनी द्वारा फेक अकाउंट बंद करने से यूजर बेस प्रभावित होने की उम्मीद है।  
    फर्जी खाते बंद किए जाने के बाद, ट्विटर के मंथली एक्टिव यूजर की संख्या में तेजी से गिरावट की आशंका है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर के बाद से खाते बंद करने की प्रक्रिया में दोगुनी बढ़त हुई है। 
    ट्विटर ने अमरीकी कांग्रेस में कहा था कि रूस में फर्जी खातों के जरिए 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सिन्हुआ के मुताबिक, फर्जी खातों के जरिए झूठी और सनसनीखेज खबरें फैलने की वजह से यह कार्रवाई की गई है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ने पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक दोगुने से ज्यादा फर्जी अकाउंट बंद किए हैं।(वाशिंगटन पोस्ट)

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