राष्ट्रीय

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08-Mar-2021 2:13 PM 8

भोपाल, 8 मार्च | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को नारी को सम्मान देने के दिवस के रूप में मना रहे हैं। इस दिन उनकी सुरक्षा से लेकर वाहन चालक तक महिलाएं ही है। चौहान का कहना है कि महिलाएं सफाई से लेकर अंतरिक्ष में जाने तक के सभी कार्य कर सकती है। मुख्यमंत्री चौहान ने महिला दिवस की शुरुआत महिलाओं से चाय पर चर्चा करके की। उनके वाहन काफिला जिसमें सिर्फ महिला सुरक्षाकर्मी तैनात थी, उनके साथ नेहरू नगर चौराहे पहुंचे। उन्होंने नेहरू चौराहे पर पहुंचकर महिलाओं की समस्याओं की जानकारी ली और झाड़ू भी लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं झाड़ू लगाने से लेकर अंतरिक्ष तक जा रही हैं।

चौहान का कहना है कि महिलाओं ने ही पुरुष को जन्म देने से लेकर उनके जीवन को आसान बनाने की जिम्मेदारी निभाई है। महिलाएं सभी कार्य कर सकती हैं । कोई कार्य असंभव नहीं है। झाड़ू लगाने से लेकर अंतरिक्ष जाने तक सभी सभी कार्य महिलाएं करती हैं।

महिला दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री की सुरक्षा में गाड़ी चलाने ,सुरक्षा ड्यूटी और ओएसडी के कार्य को भी महिलाएं कर रही हैं।

चौहान का कहना है कि मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी जैसी योजनाएं लागू की हैं। पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रबंध किया गया। जन प्रतिनिधि के तौर पर 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई । सरकारी नौकरियों में भी महिलाओं का प्रतिशत निरंतर बढ़ रहा है। महिलाओं की सुविधाओं और सम्मान के लिए सरकार निरंतर कार्य करेगी। (आईएएनएस)


08-Mar-2021 2:12 PM 7

पटना, 8 मार्च | कहा जाता है कि उपर वाले के सामने व्यक्ति का कोई वश नहीं चलता। ऐसा ही एक मामला बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफमें देखने को मिला, जब 24 घंटे पहले निकाह कर सात जन्मों तक साथ चलने का वादा करने वाले पति-पत्नी 12 घंटे भी एक-दूसरे के साथ नहीं निभा सके। दुल्हन की हथेली पर रचे मेंहदी के रंग अभी सुर्ख ही थे कि दूल्हे की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

पटना के फुलवारी शरीफ के ईसापुर के रहने वाले मोहम्मद अली के पुत्र मोहम्मद राजा (22) का निकाह शनिवार को वहीं की रहने वाले एक रिश्तेदार की बेटी के साथ हुआ था। शनिवार को दुल्हन अपने पति के साथ जीवन के हसीन सपने संजोए अपने ससुराल आ गई।

अभी घर में निकाह की खुशियां मन ही रही थी कि रविवार की सुबह राजा ने सीने में दर्द की शिकायत की। आनन-फानन में राजा को परिजनों ने एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चिकित्सकों का कहना है कि राजा की मौत हार्ट अटैक से हुई है। इसके बाद भी परिजनों को जब विश्वास नहीं हुआ है तब मौलाना और पीर फकीर के पास भी गए लेकिन अल्लाह को तो कुछ और ही मंजूर था। राजा वहां चला गया था, जहां से कभी कोई लौटकर नहीं आ सकता।

इस घटना के बाद दोनों घरों में मातम छा गया। एक दिन पहले दुल्हन बनी किशोरी के रोने से आम लोग भी मायूस हैं। (आईएएनएस)

 


08-Mar-2021 2:11 PM 9

नई दिल्ली, 8 मार्च  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को भारतीय युवा कांग्रेस (आईवायसी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लिया। आईवाईसी के मीडिया प्रभारी राहुल राव ने बताया कि बैठक में मुद्रास्फीति, ईंधन और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी, बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा 4 राज्यों - केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव पर भी बातचीत हुई।

सत्र की अध्यक्षता आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी.ने की। 2 दिन चलने वाली यह मीटिंग पार्टी के यूथ विंग हेडक्वार्टर में रखी गई है। मीटिंग में पार्टी के सचिव और आईवाईसी के प्रभारी कृष्णा अल्लावरु भी शामिल हो सकते हैं। (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 2:09 PM 4

लखनऊ, 8 मार्च | राजस्थान के पूर्व राज्यपाल अंशुमान सिंह का सोमवार को लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में निधन हो गया है। वह 86 साल के थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।

उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए प्रयागराज ले जाया गया।

अंशुमन सिंह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अंशुमन सिंह ने 16 जनवरी, 1999 को राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभाला था और मई, 2003 तक वह इस पद पर बने रहे।

1935 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे अंशुमन सिंह कला और कानून के विषय में अपनी पढ़ाई की थी और सन 1957 में इलाहाबाद जिला अदालत में एक वकील बन गए थे।

उन्हें 1984 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और बाद में वे राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने।  (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 1:57 PM 9

आगरा, 8 मार्च : थाना बाह इलाके के कस्बा जरार में बीती रात डबल मर्डर से हड़कंप मच गया. एक सिरफिरे आशिक ने घर में घुसकर अपनी प्रेमिका और उसकी मां को मौत के घाट उतार दिया. सिरफिरे ने दोनों पर चाकू से कई वार किए थे. इस दौरान आरोपी ने प्रेमिका की भाभी पर भी हमला कर दिया. भाभी गंभीर रूप से घायल हो गई. चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण घर की तरफ आने लगे, तभी आरोपी फरार हो गया. सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल भाभी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है.

मृतकों शारदा देवी (50) और उनकी बेटी कामिनी (19) शामिल है. कस्बा जरार निवासी शारदा अपनी बेटी के साथ घर में सोई हुई थी. शारदा का छोटा बेटा मनीष अपने चाचा गणेश के घर सोया हुआ था. परिजनों के मुताबिक, देर रात गांव का ही निवासी गोविंद पुत्र रामनरेश धारदार हथियार चाकू लेकर घर में किसी तरह प्रवेश कर गया. गोविंद ने घर में सो रही शारदा देवी और उनकी बेटी पर चाकू से चेहरे व गर्दन पर कई वार कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया. इसी दौरान चीख-पुकार सुनकर बड़े बेटे राहुल की पत्नी विमलेश भी जाग गई.

विमलेश ने देखा कि सास और ननद मृत अवस्था में पड़ी थी. पहचान होते देख आरोपी गोविंद ने विमलेश पर भी चाकू से हमला बोल दिया. घर में चीख-पुकार सुनकर अन्य ग्रामीणों को इकट्ठा होता देख आरोपी मौके से फरार हो गया. मां-बेटी की डबल हत्या से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया. तत्काल ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल विमलेश को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जहां उसका उपचार जारी है.

मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
डबल मर्डर की सूचना पाकर तत्काल मौके पर एडीजी/आईजी आगरा रेंज ए. सतीश गणेश, एसएसपी आगरा बबलू कुमार, एसपी पूर्वी अशोक वेंकट समेत पुलिस फोर्स पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने घटना की जानकारी लेकर मामले की कार्रवाई शुरू कर दी है. वहीं फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच कर सबूत इकट्ठे किए. पुलिस ने दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. वहीं, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने टीम का गठन किया है.

पांच टीमों का गठन
सूत्रों की मानें तो आरोपी प्रेमी युवक के युवती से प्रेम संबंध थे. प्रेमी युवक और उसकी प्रेमिका को लेकर दोनों परिवारों के बीच झगड़ा भी हुआ थआ. तब मामला रफा-दफा भी हो गया था. दो हफ्ते पहले ही कामिनी की सगाई हुई थी. बताया जा रहा है कि इसी बात से नाराज हो कर गोविंद ने ये खूनी खेल रचा. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी गोविंद को पकड़ने के लिए 5 टीमों का गठन कर दिया गया है. (abplive.com)


08-Mar-2021 1:56 PM 11

पटना, 8 मार्च : बिहार विधान मंडल में बजट सत्र की कार्यवाही जारी है. बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान सोमवार को विधानसभा में जेडीयू के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में ऊर्जा विभाग का जिम्मा संभाल रहे विजेंद्र यादव ने सदन में पुरूष दिवस मनाने की मांग उठाई. विजेंद्र यादव ने प्रश्नकाल के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा, " पुरूष दिवस भी होना चाहिए. अब इस ओर भी विचार कर ने की जरूरत है."

महिला सदस्यों को पहले बोलने का मिला था अवसर

दरसअल, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को सदन में महिला सदस्यों को पहले बोलने का अवसर दिया गया था. ऐसे में महिला सदस्या विजेंद्र यादव से प्रश्न पूछ रही थीं. इसी बीच विपक्ष के विधायक खड़े हुए तो विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें ये कहकर बैठने को बोल दिया कि आज महिला दिवस है सदन की सहमति से महिला सदस्यों को पहले बोलने का अवसर दिया गया है.

नारियों के उत्थान के लिए संकल्पित है सरकार

विधानसभा अध्यक्ष के इसी बात पर मंत्री विजेंद्र यादव ने पुरूष दिवस की बात कही. उनके ऐसा कहने पर आरजेडी नेता भाई वीरेंद्र ने चुटकी ली, जिसके बाद मंत्री जी ने बड़े गंभीरता कहा कि नारी है, तो हम हैं. बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण के लिए बहुत काम किया गया है. आगे भी सरकार नारियों के उत्थान के लिए संकल्पित है. (abplive.com)
 


08-Mar-2021 1:55 PM 10

देहरादून, 8 मार्च : उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की बढ़ती अटकलों के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सोमवार को दिल्ली रवाना हो गए. मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने मुख्यमंत्री के दिल्ली रवाना होने की पुष्टि की लेकिन कहा कि उनके दिल्ली जाने में कोई असामान्य बात नहीं है. हालांकि, सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री रावत को दिल्ली बुलाया है और शनिवार को यहां दो केंद्रीय पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई उत्तराखंड कोर ग्रुप की बैठक के बाद अब रावत से दिल्ली में चर्चा की जाएगी.

सोमवार को रावत के गैरसैंण और देहरादून में कई कार्यक्रम थे लेकिन दिल्ली से आए बुलावे के बाद उनके सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. मंत्रिमंडल विस्तार सहित कुछ बातों को लेकर प्रदेश बीजेपी विधायकों में असंतोष की बातें गाहे बगाहे उठती रही हैं लेकिन प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने शनिवार शाम तब जोर पकड़ लिया जब बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और पार्टी मामलों के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम देहरादून पहुंचे और कोर ग्रुप की बैठक हुई.

राज्य पार्टी कोर ग्रुप की यह बैठक पहले से प्रस्तावित नहीं थी और यह ऐसे समय बुलाई गई जब प्रदेश की नई बनी ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में राज्य विधानसभा का महत्वपूर्ण बजट सत्र चल रहा था. बैठक की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री रावत को तुरंत गैरसैंण से वापस देहरादून आना पड़ा. आनन-फानन में बजट पारित करा कर सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए समाप्त कर दिया गया और बीजेपी विधायकों को भी तत्काल गैरसैंण से देहरादून बुला लिया गया.

रमन सिंह ने हर सदस्य से अलग-अलग बातचीत की

दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चली कोर ग्रुप की बैठक में राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, टिहरी से लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सहित राज्य संगठन के भी कई नेता मौजूद रहे. पार्टी सूत्रों ने बताया कि रमन सिंह ने कोर ग्रुप की बैठक में मौजूद हर सदस्य से अलग-अलग बातचीत की. बाद में सिंह मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में भी गए जहां करीब 40 पार्टी विधायक मौजूद थे. कोर ग्रुप की बैठक के बाद सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय भी गए.

हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि 18 मार्च को प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 70 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी. उन्होंने कहा कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है और पार्टी विधायकों में कोई मनमुटाव नहीं है. (abplive.com)
 


08-Mar-2021 1:54 PM 8

कोलकाता, 8 मार्च : राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं. राजनीति में कब क्या हो जाए किसी को नहीं पता. इस बात का ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल में देखने को मिला है. यहां तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झटका देते हुए सरला मुर्मू ने टीएमसी छोड़ दी है. बड़ी बात यह है कि ममता ने हबीबपुर निर्वाचन क्षेत्र से उनको टिकट भी दे दिया था.

TMC में टिकट मिलने के बावजूद पार्टी छोड़ने का पहला मामला

सरला मुर्मू हबीबपुर निर्वाचन क्षेत्र से टिकट पाने के बावजूद आज बीजेपी में शामिल हो जाएंगी. टीएमसी ने बयान जारी करके कहा है कि हबीबपुर विधानसभा सीट पर अपना उम्मीदवार बदल रही है. क्योंकि सरला मुर्मू का स्वास्थ्य खराब है. टीएमसी का यह पहला मामला है, जब किसी नेता ने टिकट मिलने के बावजूद पार्टी छोड़ दी हो.

पार्टी ने अब प्रदीप बसकी को बनाया नया उम्मीदवार 

टीएमसी ने हबीबपुर सीट से अब प्रदीप बसकी को नया उम्मीदवार बनाया है. मालदा जिले में 26 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है. मालदा जिले में 12 विधानसभा सीट हैं. साल 2016 के चुनाव में इस जिले में तृणमूल कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था और बीजेपी के खाते में 2 सीटें आयीं थीं. कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी. सीटों के मामले में बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी. एक-एक सीट पर माकपा और निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे.

294 में से 291 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा

इस चुनाव में टीएमसी ने उम्मीदवारी के लिए कई मशहूर हस्तियों, महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता दी है. पार्टी ने 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. वहीं तीन सीट उसने अपने सहयोगी दल को दी हैं.

बंगाल में किस चरण में कितनी सीटों पर चुनाव?

पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 294 में से 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएंगे. वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवे चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. नतीजों की घोषणा दो मई को होगी. (abplive.com)
 


08-Mar-2021 1:53 PM 8

नई दिल्ली, 8 मार्च: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिहर के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव को शुभकामनाएं दी हैं कि उनके नेतृत्व में बिहार के लोगों को बेहतर एक्सप्रेसवे की सुविधा मिल सके. दरअसल, अखिलेश ने तेजस्वी के उस ट्वीट का जवाब दिया है, जिसमें तेजस्वी यादव ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर अखिलेश के काम की तारीफ की थी.

तेजस्वी ने लिखा था, "आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे! क्या शानदार कृति है...लगता है जैसे इंसानों को पंख मिल गए हों! यह इस बात को साबित करता है कि  @yadavakhilesh जी जैसा युवा,  ऊर्जावान, नए विचारों वाला और क्रिस्टल क्लियर विजन वाला जीवंत युवा समर्पित नेता, को जब एक मौका मिल जाए तो एक राज्य के लिए क्या कर सकता है."

इस पर अखिलेश यादव ने लिखा, "आपकी तारीफ और सद्भावना के लिए धन्यवाद केजस्वी जी! मैं कामना करता हूं कि बिहार के लोगों को आपके नेतृत्व में एक बेहतर, अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे अनुभव करने का अवसर मिले."

बता दें कि तेजस्वी यादव अखिलेश यादव के भतीजे और सपा के पूर्व सांसद तेजप्रताप सिंह यादव की बहन की रिंग सेरेमनी में शामिल होने सैफई आए थे. तेजप्रताप सिंह यादव तेजस्वी के बहनोई हैं. इस दौरान उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सफर किया था. सफर के दौरान तेजस्वी ने एक वीडियो बनाया था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया था. तेजस्वी के साथ उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी थे. इस कार्यक्रम में दोनों राज्यों के दिग्गज यादव नेता के परिवार शरीक हुए (ndtv.in)
 


08-Mar-2021 1:52 PM 12

नई दिल्ली, 8 मार्च : राज्यसभा में सोमवार को सभापति एम वेंकैया नायडू ने कुछ सदस्यों के दिल्ली में रहते हुए भी सदन में नहीं आने और विभिन्न संसदीय समिति की बैठकों में भाग नहीं लेने पर हैरत जताई. इसके साथ ही उन्होंने सदस्यों को सदन में अपनी पार्टी के चिन्ह का प्रयोग नहीं करने की नसीहत दी. बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नायडू ने कहा कि उच्च सदन में सदस्य विभिन्न तरह की पगड़ी और अंगवस्त्रम पहन कर आते हैं. उन्होंने कहा कि किंतु सदस्यों को अपनी पार्टी के चिन्ह का सदन में प्रयोग नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी सदस्य विशेष को इंगित करते हुए यह बात नहीं कही है. 

उन्होंने कहा, ‘‘कभी कभी मुझे यह जानकर आश्चर्य होता है कि कोई सदस्य दिल्ली में है किंतु वह सदन में नहीं आया.'' उन्होंने कहा कि वह यह बात किसी सदस्य या पार्टी विशेष के लिए नहीं कह रहे हैं. उन्होंने सभी सदस्यों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि वे सदन में उपस्थित हों. सदन की चर्चा को देखे और अपने ज्ञान में वृद्धि करें. 

सभापति ने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद उच्च सदन में पिछले पांच सत्रों से काफी अधिक मात्रा में कामकाज हुआ है. उन्होंने कहा कि मौजूदा बजट सत्र के पहले चरण में उच्च सदन में 100 प्रतिशत कामकाज हुआ और उम्मीद जतायी कि दूसरे चरण में भी काम की यही गति रहेगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 के लिए विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों की अनुदान मांगों पर विचार करने के लिए संसद के दोनों सदनों की बैठकों का तीन सप्ताह तक अवकाश रहा. 

सभापति ने इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित समितियों के कामकाज का ब्यौरा दिया. उन्होंने कहा कि राज्यसभा की आठ समितियों ने वर्ष 2021-22 के लिए विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों की अनुदान मांगों पर विचार करने के लिए निर्धारित समय से 12 प्रतिशत अधिक समय लगाया. इन समितियों की इस साल कुल 12 बैठकें हुईं जिनमें 70 से अधिक घंटे तक कामकाज हुआ. 

सभापति ने बताया कि पिछले साल उच्च सदन के सदस्यों की इन बैठकों में उपस्थिति 52 प्रतिशत से अधिक थी जो इस साल 58 प्रतिशत से कुछ अधिक रही. हालांकि, इन बैठकों में लोकसभा के सदस्यों की उपस्थिति कम हुई. निम्न सदन के सदस्यों की इस साल इनमें उपस्थिति 31 प्रतिशत से कुछ अधिक थी जबकि पिछले वर्ष यह 46 प्रतिशत से कुछ अधिक थी. सभापति ने कहा कि इस साल राज्यसभा के 39 ऐसे सदस्य थे जिन्होंने इन समितियों की सभी बैठकों में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल इन समितियों की बैठक में लोकसभा के सदस्यों की उपस्थिति में कमी आयी है. 

उन्होंने कहा कि इस साल इन समितियों की हुई 21 बैठकों में से सभी बैठकों में कोरम था जबकि पिछले साल हुई बैठकों में से तीन बैठक में कोरम नहीं था. उन्होंने कहा कि इस साल इन समितियों की 21 बैठकों में से केवल तीन बैठक ऐसी थीं जो दो घंटे से कम चली. अन्य सभी बैठकों का समय दो घंटे से अधिक रहा. उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास, युवा मामलों सहित कई समितियों की बैठक छह घंटे से अधिक समय तक चली. 

उन्होंने कहा कि इस साल इन समितियों की बैठक में सदस्यों की उपस्थिति घटकर 42 प्रतिशत रह गयी जो पिछले साल 48 प्रतिशत थी. उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिन्होंने किसी समिति की बैठक में भाग नहीं लिया. नायडू ने इन समितियों की बैठक में भाजपा एवं कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियों के सदस्यों की कम उपस्थिति पर चिंता जतायी. नायडू ने कहा कि इस तरह की पार्टियों और समूह के सदस्यों की उपस्थिति इस साल घटकर 27.06 प्रतिशत रह गयी जो पिछले साल 40.05 प्रतिशत थी. सभापति ने कहा कि इस बारे में संबंधित पार्टियों को ध्यान दिये जाने की जरूरत है. 

उन्होंने सदस्यों से चर्चाओं में भाग लेने के लिए अच्छी तरह से तैयारी करके आने को कहा. इसके लिए उन्होंने संसद पुस्तकालय में रखी विभिन्न पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की सहायता लेने की भी सलाह दी. सभापति ने सदस्यों को सूचित किया कि संसद ग्रंथालय के इस वर्ष सौ साल पूरे होने जा रहे हैं और इसमें 14 लाख से अधिक पुस्तकें हैं. उन्होंने कहा कि पुस्तकालय जाने के साथ साथ सदन में आने से भी सदस्यों के ज्ञान में वृद्धि होती है. सभापति ने बजट सत्र के दूसरे चरण में सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए इसमें पूरा योगदान देने का आह्वान किया ताकि यह ‘‘यादगार सत्र'' बन सके. (ndtv.in) 
 


08-Mar-2021 1:50 PM 9

नई दिल्ली, 8 मार्च : बलात्कार मामले में सुप्रीम द्वारा की गई एक टिप्पणी ‘उससे शादी करोगे' पर उपजे विवाद पर सोमवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने टिप्पणी देते हुए कहा कि एक अदालत और एक संस्था के तौर पर हमारा हमेशा महिलाओं के लिए सर्वोच्च सम्मान है. उन्होंने कहा कि खबरों और एक्टिविस्ट ने “क्या आप उससे शादी करेंगे की टिप्पणी को संदर्भ से बाहर देखा, जोकि विवाद पैदा करने और अदालत की छवि को धूमिल करने के लिए था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने मामले के संदर्भ में याचिकाकर्ता व्यक्ति से पूछा था कि क्या वह शिकायतकर्ता से शादी करेगा. उसने उसे "जाओ और शादी करो" के लिए नहीं कहा था. CJI बोबडे की पीठ ने कहा, "उस मामले में अदालत के समक्ष कार्यवाही की पूरी तरह से गलत रिपोर्टिंग की गई. 

उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने एक संस्था के रूप में सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया है. पीठ ने याचिकाकर्ता से कभी भी पीड़ित से शादी करने के लिए नहीं कहा. CJI ने कहा कि एक संस्था और अदालत के रूप में हमारा हमेशा महिलाओं के प्रति सर्वोच्च सम्मान रहा है. एक वकील ने कहा कि कुछ लोग न्यायपालिका की छवि को खराब करते हैं और इन लोगों से निपटने के लिए कुछ व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार के हाथों में हमारी प्रतिष्ठा है, हमें इस तरह हमारी रक्षा करने की जरूरत नहीं है. 

सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा मामले में अदालत के बयानों को पूरी तरह से तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया जैसे कि विवाह और समझौते के लिए कोई सुझाव दिया गया था. आपको बता दें कि  हरियाणा में एक नाबालिग के 26 हफ्ते के गर्भ का गर्भपात कराने कि अनुमति वाली याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी की थी. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी एक मार्च को आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी, जिसने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच द्वारा अपनी अग्रिम जमानत को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी. CJI की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थी. (ndtv.in)
 


08-Mar-2021 1:20 PM 15

छिंदवाड़ा, 8 मार्च | कहते है कि एक वाक्या जिंदगी मे बड़ा बदलाव लाने के लिए काफी होता है, ऐसा ही कुछ हुआ मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा की भावना डेहरिया के साथ। वह मवेशियों के साथ पहाड़ों पर जाती थीं, इसके चलते उन्हें पहाड़ो से इतना प्रेम हो गया कि वह पर्वतारोही बन गईं और उनमें जुनून कुछ इस तरह रहा कि वह हिमालय की माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने में सफल रहीं। छिंदवाड़ा के पातालकोट से महज 17 किलोमीटर दूर बसे तामिया की रहने वाली हैं भावना डेहरिया। भावना पढ़ाई और खेल-कूद के साथ ही घर में पशुपालन के काम में भी सहयोग करती थीं। स्कूल से घर आकर पहाड़ों से पालतू पशुओं को लौटा कर घर लाना भावना का काम था। इस काम ने उनमें पहाड़ों के प्रति प्रेम जगा दिया और इसी दौरान वर्ष 2009 में पातालकोट में एडवेंचर्स प्रोग्राम का आयोजन उनके जीवन का टनिर्ंग प्वाइंट साबित हुआ। उसके पहले तक भावना को यह नहीं पता था कि पर्वतारोहण भी कोई गतिविधि है और इसके लिए किसी कोर्स की जरूरत पड़ती है।

भावना ने स्कूल के दौरान बास्केट बॉल और साइकल पोलो में नेशनल खेला है। खेलकूद में अव्वल रहने के कारण भावना को तामिया के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से एक हफ्ते के लिए इस एडवेंचरस प्रोग्राम में शामिल होने का मौका मिला, इस दौरान उन्हें पर्वतारोही के संदर्भ में विस्तार से जानकारी मिली।

भावना के पिता मुन्ना लाल डेहरिया शिक्षक और माता उमा देवी गृहणी हैं। वहीं उनकी चार बहनें और एक भाई भी हैं। इन स्थितियों में उनके लिए बाहर जाकर प्रशिक्षण हासिल करना आसान नहीं था। इस दौरान उच्च शिक्षा के लिए वह अपनी बहन के साथ भोपाल पहुंची और रॉक क्लाइंबिंग की ।

भावना बताती है कि उच्च शिक्षा के दौरान भोपाल में उसे कई एडवेंचरस गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिला, लेकिन पर्वतारोहण संस्थानों की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। गूगल से सर्च करने पर उन्हें उत्तरकाशी स्थित एशिया के बेस्ट संस्थान नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग की जानकारी मिली। तत्काल उन्होंने अपना आवेदन दे दिया, लेकिन आवेदन देने के दो साल बाद उनका नंबर आया। तभी उन्हें पता चला कि कोर्स की फीस सात हजार 500 रुपए है।

सामान्य आर्थिक परिवार की भावना के लिए उच्च शिक्षा के खर्चे के साथ-साथ यह अतिरिक्त राशि कम राशि नहीं थी। इस दौरान वे भोपाल में अपने छोटे भाई-बहन की पढाई का पूरा जिम्मा भी एक पेरेन्ट की तरह उठा रही थीं । इन सब जिम्मेदारियों के बाद भी उसने माता-पिता से फीस के लिये नहीं कहा, बल्कि एडवेंचर्स गतिविधियों से प्राप्त प्रोत्साहन राशि को ही इसमें लगा दिया। बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स को ए-ग्रेड से क्वालीफाई करने के बाद ही एडवांस कोर्स की ट्रेनिंग मिलती है।

भावना की लगन और मेहनत से उन्होंने ए-ग्रेड के साथ बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स क्वालीफाई किया। उसके बाद एडवांस कोर्स और एम.ओ.आई. कोर्स किया। कोर्स के साथ पहली बार उन्होंने गढ़वाल हिमालय की डी.के.डी. चोटी चढ़ीं जिसके बाद भावना में अब आत्मविश्वास आ चुका था, माउंटेनियरिंग से जुडे सारे कंसेप्ट क्लियर हो चुके थे। (आईएएनएस)


08-Mar-2021 1:19 PM 15

नई दिल्ली, 8 मार्च | भाजपा की राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय ने सोमवार को सदन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर चर्चा करते हुए तीन तलाक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कानून बनाकर तीन तलाक जैसी बुराई से महिलाओं को मुक्ति दिलाई है। भाजपा की राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय ने कहा कि महिला कभी राजनीति का विषय नहीं है। पहले महिलाएं, तीन तलाक शब्द से कितनी भयभीत होती थी! राजनीति के तुष्टीकरण के कारण तीन तलाक जैसी बुराई समाज में बनी हुई थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर महिलाओं को इससे निजात दिलाई।

उन्होंने कहा, "मैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह कहना चाहती हूं कि जब राजनीति करने की शुरुआत होती है तो हमें पीछे धकेल दिया जाता है, लेकिन भाजपा की हमारी सरकार ने महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है।"

सरोज पांडेय ने कहा कि पहले पैदा होने से पहले कई राज्यों में बेटियों को मार दिया जाता था, तो कहीं बिटिया को पैदा होने के बाद खत्म कर दिया जाता था। अनुपात बिगड़ा तो हालात भयानक होने लगे। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की शुरुआत की, जिससे आज इस अनुपात में सुधार आया है। (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 1:19 PM 12

मनोज पाठक 

पटना, 8 मार्च | बिहार के कई राजनीतिक दल अब गांव तक अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए 'गांव की सरकार' में अपना वर्चस्व बनाने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। इसके तहत पार्टियां पंचायत चुनाव के मैदान में उतरे अपने कार्यकर्ताओं को मदद देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रविवार को समाप्त हुई दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यसमिति की बैठक में निचले स्तर पर जहां संगठन को मजबूत करने पर बल दिया गया वहीं पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं को मदद देने की भी घोषणा की गई।

बैठक में पार्टी की तरफ से अहम ऐलान किया गया कि आगामी बिहार पंचायत चुनावों में भाजपा जिला परिषद के चुनाव में योग्य प्रत्याशियों को पार्टी की ओर से समर्थन दिया जाएगा। बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के इस घोषणा को बिहार की सियासत, मुख्य तौर पर ग्रामीण स्तर पर होने वाले पंचायत चुनावों की राजनीति पर गहरा असर पड़ने की संभावना जाहिर की है।

वैसे बिहार में पंचायत चुनाव पार्टियों के आधार पर नहीं होते हैं। वहीं कहा जा रहा है कि यदि भाजपा कार्यकर्ता पंचायत चुनाव में किसी भी पद पर चुनाव लड़ते हैं, तो इसमें भाजपा की ओर से उन्हें पूरी मदद दी जाएगी।

भाजपा के एक नेता कहते हैं कि इसके लिए निचले स्तर तक के सभी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से तैयार किया जाएगा। सभी स्तर के कार्यकर्ताओं को कहा कि वे हर स्तर के चुनाव में खड़े हो और अधिक से अधिक संख्या में सीटें जीतने के लिए पूरजोर कोशिश करें।

इधर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी नई रणनीति बनाई है और इस पर जोरदार तरीके से काम भी कर रही है। राजद के एक नेता की मानें तो पार्टी जल्दी ही इस बारे में औपचारिक तौर पर निर्देश भी जारी करने जा रही है कि राज्य में होने वाली पंचायत चुनाव में प्रत्याशी बनते समय पार्टी के कैडर आपस में तालमेल बनाकर चुनावी मैदान में उतरें।

कहा गया है कि कार्यकर्ता एक-दूसरे के सामने चुनावी मैदान में न उतरें जिससे राजद का कब्जा अधिक से अंधिक सीटों पर हो सके।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी जिसे समर्थन देने की घोषणा करे उसके समर्थन में संबंधित पंचायत या वार्ड के नेता और कार्यकर्ता भी आएं, जिससे पार्टी की पंचायती राज संस्थाओं पर भी मजबूत पकड़ हो सके।

राजद नेताओं का दावा है कि पिछले पंचायत चुनाव में अधिकतर पंचायती राज संस्थाओं पर राजद का कब्जा रहा है। इस विषय में हालांकि राजद द्वारा अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भी कहते हैं कि राजद का संगठन बिहार में सबसे मजबूत है। बिहार में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते हैं, लेकिन पंचायत चुनाव में कार्यकर्ता उतरते हैं। ऐसे में पार्टी की रणनीति होगी कि उसके कार्यकर्ता अधिक से अधिक संख्या में जीते।

बिहार में पंचायत चुनाव अप्रैल-मई में संभावित है। (आईएएनएस)
 


08-Mar-2021 1:13 PM 16

नवनीत मिश्र

नई दिल्ली, 8 मार्च | उत्तराखंड के कई विधायकों की नाराजगी के कारण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी पर खतरा बरकरार है। इस बीच देहरादून से वापसी के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने बतौर ऑब्जर्वर अपनी रिपोर्ट भाजपा आलाकमान को सौंप दी है।

इस रिपोर्ट पर अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बीजेपी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने के लिए आज सोमवार को दिल्ली पहुंच सकते हैं। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी आईएएनएस को दी है।

खास बात है कि राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और कई विधायक पिछले दो दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। बीजेपी के संसदीय बोर्ड की नौ मार्च को दिल्ली में होने वाली बैठक में भी उत्तराखंड के मसले पर विचार होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का दौरा रद्द कर दिया है। ताकि वह दिल्ली पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर राज्य के हालात पर अपना पक्ष रख सकें। सूत्रों का कहना है कि देहरादून में भाजपा नेतृत्व की तरफ से बीते शनिवार को भेजे गए दोनों आब्जर्वर ने कई विधायकों के साथ अलग से बैठक की थी।

इस दौरान विधायकों बताया कि वर्तमान मुख्यमंत्री के नेतत्व में चुनाव लड़ने पर नुकसान हो सकता है। सरकार में ब्यूरोक्रेसी के हावी होने के कारण जनप्रतिनिधियों की नहीं सुनी जा रही है। जिससे जनता में भी नाराजगी है। आब्जर्वर्स ने ये रिपोर्ट बीजेपी नेतृत्व को सौंप दी है।

उत्तराखंड में भाजपा से जुड़े एक नेता ने आईएएनएस से कहा, "अगले वर्ष 2022 में चुनाव है। कई विधायकों की नाराजगी के कारण वर्तमान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चुनाव लड़ना खतरे से खाली नहीं माना जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व विधायकों को मनाकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में जरूर लगा है। आब्जर्वर की रिपोर्ट पर बीजेपी नेतृत्व को आगे का फैसला करना है। चेहरा नहीं बदला तो मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल होना तय माना जा रहा।" (आईएएनएस)

 


08-Mar-2021 12:43 PM 14

नई दिल्ली, 8 मार्च: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि 'भारत में कोविड-19 महामारी खात्मे की ओर बढ़ रही है' और कोविड-19 टीकाकरण अभियान को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों को टीके से जुड़े विज्ञान पर भरोसा और यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके प्रियजनों को समय पर टीके लग जाएं.

हर्षवर्धन ने रविवार को धर्मशिला नारायण अस्पताल के सहयोग से आयोजित दिल्ली चिकित्सा संघ (डीएमए) के 62वें वार्षिक दिल्ली राज्य चिकित्सा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में अब तक कोविड-19 के दो करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं और टीकाकरण दर बढ़कर प्रतिदिन 15 लाख हो गई है.

उन्होंने कहा, 'दूसरे देशों के मुकाबले हमने कोविड-19 टीकों की तेजी से आपूर्ति की है, जो सुरक्षित हैं और उनकी प्रभावकारिता साबित हो चुकी है. प्रारंभिक परिणामों के आधार पर, भारत में निर्मित इन टीकों को दुनियाभर में लगाए जाने के बाद प्रतिकूल प्रभाव के बेहद कम मामले सामने आए हैं.'

उन्होंने कहा, 'भारत में कोविड-19 महामारी खात्मे की ओर बढ़ रही है. इस चरण में सफलता हासिल करने के लिये हमें तीन कदम उठाने की जरूरत है: कोविड-19 टीकाकरण अभियान को राजनीति से दूर रखें. कोविड-19 टीकों से जुड़े विज्ञान पर भरोसा करें और यह सुनिश्चित करें कि हमारे प्रियजनों को समय पर टीके लगें.'

हर्षवर्धन ने रविवार को धर्मशिला नारायण अस्पताल के सहयोग से आयोजित दिल्ली चिकित्सा संघ (डीएमए) के 62वें वार्षिक दिल्ली राज्य चिकित्सा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में अब तक कोविड-19 के दो करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं और टीकाकरण दर बढ़कर प्रतिदिन 15 लाख हो गई है.

उन्होंने कहा, 'दूसरे देशों के मुकाबले हमने कोविड-19 टीकों की तेजी से आपूर्ति की है, जो सुरक्षित हैं और उनकी प्रभावकारिता साबित हो चुकी है. प्रारंभिक परिणामों के आधार पर, भारत में निर्मित इन टीकों को दुनियाभर में लगाए जाने के बाद प्रतिकूल प्रभाव के बेहद कम मामले सामने आए हैं.'

उन्होंने कहा, 'भारत में कोविड-19 महामारी खात्मे की ओर बढ़ रही है. इस चरण में सफलता हासिल करने के लिये हमें तीन कदम उठाने की जरूरत है: कोविड-19 टीकाकरण अभियान को राजनीति से दूर रखें. कोविड-19 टीकों से जुड़े विज्ञान पर भरोसा करें और यह सुनिश्चित करें कि हमारे प्रियजनों को समय पर टीके लगें.' (ndtv.in)
 


08-Mar-2021 12:42 PM 15

मेरठ, 8 मार्च : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रविवार को मेरठ में हुंकार भरी. यहां आयोजित किसान महापंचायत में उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. साथ ही उन्होंने अंतिम सांस तक किसानों की लड़ाई लड़ने की बात भी कही. प्रियंका ने पंचायत में कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक किसानों के लिए लड़ती रहेंगी, चाहे वह 100 दिन हों या 100 साल. इसके अलावा उन्होंने किसानों से हर गांव से दिल्ली की सीमा पर जाकर विरोध प्रदर्शन करने का आग्रह किया.

"पूंजीपतियों के लिए बनाया कानून"
उन्होंने कहा, "आप कांग्रेस को हर जगह अपने साथ खड़े पाएंगे. जब भी आप मुसीबत में होंगे, हम आपके बगल में होंगे. आपकी लड़ाई हमारी लड़ाई है, और मैं अपनी आखिरी सांस तक आपके साथ रहूंगी." प्रियंका ने कहा कि ये कृषि कानून किसानों के हित में नहीं हैं. ये कानून सबसे बड़े हितधारकों, यानी किसानों से परामर्श किए बिना बनाए गए. कहते हैं, ये कानून किसानों के फायदे के लिए हैं, मगर सच्चाई इसके उलट है. ये कानून पूंजीपतियों के फायदे के लिए बनाए गए हैं.

"सरकार को किसानों की चिंता नहीं"
प्रियंका ने आगे कहा, "100 दिनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं, लेकिन सरकार को जरा भी इनकी चिंता नहीं है. यह सरकार वास्तव में प्रधानमंत्री के दोस्तों द्वारा चलाई जा रही है." कांग्रेस नेता ने गन्ना बकाया के भुगतान में देरी पर भी चिंता व्यक्त की और कहा, "सरकार के पास दो हवाई जहाज खरीदने के लिए पैसे हैं, लेकिन गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान ये नहीं करते. जब मेरे भाई राहुल गांधी ने आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के सम्मान में संसद में दो मिनट का मौन रखा, तो सत्तापक्ष का एक भी सदस्य खड़ा नहीं हुआ. क्या यह किसानों का अपमान नहीं है?"

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी ट्रैक्टर पर बैठकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं और किसानों का स्वागत किया. प्रियंका उत्तर प्रदेश में लगातार 'किसान पंचायतों' में जाकर लोगों को संबोधित कर रही हैं. (abplive.com)
 


08-Mar-2021 12:15 PM 14

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी और भारत के बीच छात्रों के आदान प्रदान को साझा संबंधों में विस्तार का संकेत बताया है तो जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने भविष्य के मुद्दों पर आपसी संवाद बढ़ाने की वकालत की है.

  डॉयचे वैले पर महेश झा की रिपोर्ट- 

कूटनैतिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ पर अपने विशेष संदेश में एस जयशंकर ने आज के दिन को पारस्परिक संबंधों में विशेष दिन बताया. उन्होने कहा कि विज्ञान, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को बड़े पैमाने पर छात्रों के आदान प्रदान में भी देखा जा सकता है. भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के व्यापक सहयोग में जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा परिषद के सुधारों सहित बहुत से मुद्दे शामिल हैं, दोनों देश आतंकवाद पर जीत पाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

एस जयशंकर ने इंडो पेसिफिक को दोनों देशों के सहयोग का नया इलाका बताते हुए कहा कि जर्मनी ने भारत के साथ सहयोग के निर्देश जारी किए हैं ताकि इलाके में नौवहन की आजादी और कानून सम्मत व्यवस्था की गारंटी हो सके. दो दिन पहले ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने टेलिफोन पर बातचीत की और द्विपक्षीय संबंधों का जायजा लिया. साथ ही उन्होंने कोरोना महामारी से पैदा हुई स्थिति के अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की.


जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने अपने संदेश में कहा कि 1951 में ताजा नियुक्त जर्मन राजदूत ने अपनी पहली रिपोर्ट में भारत और जर्मनी के बीच साझा भविष्य के लिए अर्थपूर्ण सबंधों की उम्मीद जताई थी. हाइको मास ने कहा, "उस समय की उम्मीदें आज हकीकत हैं. जर्मनी और भारत रणनैतिक साझेदार हैं, हमारा जीवंत लोकतंत्र हमें जोड़ता है." जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय गठबंधन में साथी के रूप में कानून आधारित वैश्विक व्यवस्था की वकालत करते हैं. हाइको मास ने कहा कि इंडो पेसिफिक पर जर्मनी के पहली बार जारी विदेशनैतिक निर्देश में इलाके के भविष्य के लिए भारत के साथ और निकट संवाद पर जोर है.

यूं तो भारत और जर्मनी के बीच कारोबारी, लोगों के आने जाने और मानवीय स्तर पर संबंध 500 साल से ज्यादा पुराने हैं, लेकिन आधुनिक काल में कूटनैतिक संबंधों की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 7 मार्च 1951 को हुई. 1949 में संघीय जर्मन गणराज्य की स्थापना के बाद उसे मान्यता देने वालों में भारत शुरुआती देशों में शामिल था. हालांकि लोकतंत्र और कानून का राज्य जैसे साझा सिद्धांतों और पांच सदी के कारोबारी संबंधों के कारण दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध स्वाभाविक थे लेकिन इस पर शीतयुद्ध का साया रहा और कुछ ही साल बाद भारत और जर्मनी ने एक दूसरे को परस्पर विरोधी खेमों में पाया. इसके बावजूद शिक्षा, संस्कृति, और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में संबंधों में लगातार विकास होता रहा है.

1990 में जर्मनी के एकीकरण के बाद भारत ने एकीकरण का समर्थन किया लेकिन साथ ही आर्थिक उदारीकरण के बाद जर्मनी से उसकी मदद की अपेक्षाएं भी थीं. हालांकि जर्मनी एकीकरण की अपनी समस्याओं में उलझा था, लेकिन दोनों देश द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार साथ काम कर रहे थे. इसी अवधि में दोनों देशों के बीच रणनैतिक सहयोग संधि हुई जो इसी साल 20 साल की हो रही है. भारत में जर्मन राजदूत वाल्टर जे लिंडनर ने दोनों देशों के संबंधों को करीबी दोस्तों के बीच रणनैतिक साझेदारी बताया है.

भारतीय विदेश मंत्री ने जर्मनी के साथ कूटनैतिक संबंधों की सथापना के मौके पर एक लोगो भी लॉन्च किया जिसे एक प्रतियोगिता के जरिए चुना गया है. इस प्रतियोगिता का आयोजन बर्लिन स्थित जर्मन दूतावास ने किया था. भारत और जर्मनी के नागरिकों के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता में जीतने वाली प्रविष्टि मध्य प्रदेश के नरेश अग्रवाल की रही.


07-Mar-2021 9:20 PM 16

कोलकाता, 7 मार्च | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में एक विरोध मार्च निकाला। हालांकि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोलकाता में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित किया। रसोई गैस की कीमतों में कमी की मांग करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नियमित रूप से रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी करके लोगों को 'लूट' रही है।

उन्होंने कहा, "महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभवित हुई हैं। विरोध में, आज मैंने सिलीगुड़ी में महिलाओं की एक मार्च निकाला है।"

ममता ने कहा कि परिवर्तन दिल्ली में होगा, बंगाल में नहीं।

उन्होंने कहा, "पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल में महिलाओं के लिए कोई सुरक्षा नहीं है, लेकिन यूपी, बिहार और अन्य भाजपा शासित राज्यों को देखें, तो हालत यह है कि महिलाएं दिन के 3 बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकल सकतीं। बंगाल में ही महिलाएं सुरक्षित हैं।"

तृणमूल के बहुचर्चित 'खेला होबे' नारे को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी भी खेलने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, "मैं वन-ऑन-वन खेलने के लिए तैयार हूं .. यदि भाजपा वोट खरीदना चाहती है, तो उससे पैसे ले लें और अपना वोट तृणमूल को दें।" (आईएएनएस)

 


07-Mar-2021 9:17 PM 21

नई दिल्ली, 7 मार्च | पेट्रोल और डीजल के दाम में रविवार को लगातार आठवें दिन स्थिरता बनी रही, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में बीते सप्ताह आई जोरदार तेजी के बाद दोनों वाहन ईंधनों के दाम में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। कच्चे तेल का भाव बीते सप्ताह 69 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया। जानकार बताते हैं कि भारत अपनी खपत जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है और आयात महंगा होने से पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा होना स्वाभाविक है।

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल का भाव रविवार को बना किसी बदलाव के क्रमश: 91.17 रुपये, 91.35 रुपये, 97.57 रुपये और 93.11 रुपये प्रति लीटर पर बना रहा। डीजल की कीमतें भी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में स्थिरता के साथ क्रमश: 81.47 रुपये, 84.35 रुपये, 88.60 रुपये और 86.45 रुपये प्रति लीटर पर बनी हुई हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर ब्रेंट क्रूड का मई डिलीवरी अनुबंध शुक्रवार को बीते सत्र से 4.20 फीसदी की तेजी के साथ 69.54 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान भाव 69.68 डॉलर प्रति बैरल तक उछला। लगातार तीन सत्रों में ब्रेंट का भाव 62.38 डॉलर प्रति बैरल से 7.31 डॉलर यानी 11.71 फीसदी की उछाल के साथ 69.68 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ा।

न्यूयॉर्क मर्के टाइल एक्सचेंज (नायमैक्स) पर डब्ल्यूटीआई का अप्रैल अनुबंध बीते सत्र से 3.81 फीसदी की तेजी के साथ 66.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट (एनजी एवं करेंसी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने कहा कि तेल की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए कीमतों में बहरहाल और तेजी की संभावना बनी हुई है। लिहाजा, पेट्रोल और डीजल के दाम आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल में तेजी से तीन रुपये प्रति लीटर तक पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा हो सकता है। (आईएएनएस)

 


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