राष्ट्रीय

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से स्कूली लड़कियों की दी जाने वाली स्कॉलरशिप के लिए निर्धारित बजट में इस बार करीब 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी का फैसला हुआ है। मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (एमएईएफ) ने स्कूली लड़कियों के लिए चलाई जाने वाली अपनी बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के कुल बजट में बढ़ोतरी करने के फैसले के साथ यह भी निर्णय लिया है कि इस साल आक्रामक प्रचार अभियान चलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकें।
    साल 2017-18 में इस योजना के तहत करीब 1.15 लाख लड़कियों को स्कॉलरशिप दी गई थी। इसके लिए करीब 78 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित था। एमएईएफ के सचिव रिजवानुर रहमान ने बताया, बेगम हजरत महल योजना के तहत इस बार हमने फैसला किया है कि बजट को कम से कम 90 करोड़ रुपये करेंगे। इस बारे में हमने मंत्रालय को भी अवगत कराया है।
    उन्होंने कहा, साल 2017-18 में तकरीबन 1.15 लाख लड़कियों को छात्रवृत्ति दी गयी है। हमारी कोशिश होगी 2018-19 में लाभार्थियों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो। अभी भी इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। हम इस बार कोशिश कर रहे हैं कि जागरूकता फैलाने के अलग-अलग माध्यमों से आक्रामक प्रचार अभियान चलाया जाए।
    उन्होंने कहा कि देश भर में एमएईएफ के करीब 300 गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से भी बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति योजना के बारे जागरूकता फैलाई जा रही है। इस योजना के तहत आवेदन करने वाली नौवीं और 10वीं कक्षा की लड़कियों को सालाना पांच-पांच हजार रुपये और 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राओं को छह-छह हजार रुपये दिये जाते हैं। (भाषा)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । दिल्ली की भाजपा इकाई ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सैकड़ों व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं और हर एक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सदस्य बनाया गया है। ताकि उन्हें सीधे सूचना मिल सके।
    दिल्ली की भाजपा इकाई 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मंडल स्तर पर टीमों का नए सिरे से गठन कर रही है और पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को व्हाट्सएप सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ला रही है।
    दिल्ली भाजपा इकाई के मीडिया मामलों के प्रमुख एवं सोशल मीडिया इकाई के सह-प्रभारी नीलकांत बख्शी ने बताया, हम पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक, 1800 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं और इसकी संख्या बढ़ ही रही है। इस कदम का लक्ष्य सीधे सूचना मुहैया कराना और फर्जी खबरों पर रोक लगाना है।
    व्हाट्सएप के हर ग्रुप में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और दिल्ली के भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी के संपर्क नंबर होंगे। पिछले महीने एक बैठक में शाह ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को फर्जी समाचार पोस्ट करने और गलत संदेश फैलाने से बचने की हिदायत की थी। उनका कहना था कि इससे पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचता है।
    उन्होंने बताया कि पार्टी ने आने वाले महीनों में जिला और मंडल स्तर पर सोशल मीडिया को लेकर बैठकें करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश और भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार की उपलब्धियों को सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए बैठकें की जाएंगी। (आज तक)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने रेलवे की मांग बढऩे के साथ किराया बढ़ोतरी (फ्लेक्सी-फेयर) योजना को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। कैग ने रेलवे को आगाह करते हुए कहा कि इस योजना से यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कैग ने कहा कि रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों से पहले ही यात्री दूर हो चुके हैं और वे अन्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्रा करने को तरजीह दे रहे हैं।
    'फ्लेक्सी किराया योजनाÓ के तहत ट्रेनों में जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं उसके किराये में इजाफा होता जाता है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में मांग बढऩे के साथ किराये में बढ़ोतरी व्यवस्था शुरू करने से इस श्रेणी की ट्रेनों में यात्रियों से होने वाली आय में 552 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है, लेकिन इन ट्रेनों में 2015-16 के मुकाबले नौ सितंबर 2016 से 31 जुलाई 2017 के दौरान यात्रियों की संख्या में 6.75 लाख की कमी आई है।
    रिपोर्ट में कहा गया है, जब भी किराये में वृद्धि की जाती है तो यात्रियों की संख्या बेहद कम हो जाती है। सभी राजधानी, दुरंतो और शताब्दी ट्रेनों में 'फ्लेक्सी फेयरÓ योजना शुरू करते समय इस विषय पर विचार नहीं किया गया।
    कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थर्ड एसी श्रेणी से रेलवे को सबसे ज्यादा लाभ होता है लेकिन 'फ्लेक्सी किराया योजनाÓ शुरू करने के बाद इसमें यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई और खाली सीटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
    कैग ने कहा, जिन मार्गों पर प्रीमियम ट्रेन चलती है उन्हीं मार्गों पर चलने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अक्टूबर 2016 और फरवरी 2017 के दौरान प्रीमियम ट्रेनों से अधिक पाई गई। यात्रियों ने राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों के बजाय अधिक समय लेने के बावजूद मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्रा करने का विकल्प चुना।(भाषा)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । भारत के बेहतरीन खुफिया सेटेलाइट बनाने वाले डॉ. तपन के. मिश्रा को बीते शुक्रवार को अहमदाबाद में इसरो अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के डायरेक्टर के पद से हटा दिया गया। बताया जा रहा है कि इसरो के उपक्रमों के निजीकरण का उन्होंने विरोध किया जिसकी वजह से उन्हें डायरेक्टर के पद से हटा दिया गया।
    भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरपर्सन के. सिवन ने एक आदेश जारी कर कहा, तपन मिश्रा को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है। उन्हें इसरो मुख्यालय में वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया जाता है और वो चेयरमैन को रिपोर्ट करेंगे।Ó
    मिश्रा को उनके पद से हटाने से एक दिन पहले ही भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दो प्राइवेट कंपनियों और एक सार्वजनिक उपक्रम के साथ 27 सेटेलाइट बनाने का करार किया था। इस करार से तपन मिश्रा सहमत नहीं थे और उन्होंने इसका विरोध किया।
    मिश्रा को रिसात 1 जैसी खुफिया सेटेलाइट बनाने के लिए जाना जाता है। ये सेटेलाइट भारत और उसके पड़ोसी देशों पर निगरानी रखता है। ये सेटेलाइट अंधेरे में भी काम कर सकता है। मिश्रा ने कहा कि वे इसरो में काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, मेरे लिए इसरो सबसे बड़ी चीज है। आज मैं जो कुछ भी हूं वो इसरो के वजह से ही हूं।
    सूत्रों ने बतााया कि इसरो के उपक्रमों के निजीकरण को लेकर मिश्रा और चेयरमैन के बीच सहमति नहीं थी। 
    उन्होंने जीसैट-11 के लॉन्च होने में देरी पर भी चिंता व्यक्त की थी। वहीं मार्च में जीसैट-6ए से संपर्क टूट जाने पर इसरो को काफी धक्का लगा था।
    57 वर्षीय तपन मिश्रा ने पश्चिम बंगाल के जाधवपुर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। एक समय मिश्रा को दिमाग का कैंसर भी था और 10 दिन तक वे कोमा में रहे थे। मिश्रा ने बताया, अस्पताल की छुट्टी के चार दिन बाद ही मैंने ऑफिस में अपना काम संभाल लिया और 10 घंटे तक काम किया। मिश्रा की अगुवाई में ही भारत कई निगरानी सेटेलाइट जैसे कि रिसात और कार्टोसैट बनाने में सफल हुआ था।(टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । राजस्थान के अलवर में एक बार फिर से भीड़ ने गो-तस्करी के शक में व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी है। जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में शुक्रवार को गो तस्करी के संदेह में हरियाणा के कोलगांव निवासी अकबर खान की हत्या कर दी गई है।
    इस पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है, वह इस घटना की निंदा करते हैं लेकिन यह सिर्फ अकेली घटना नहीं है। हमें इसके इतिहास में जाना होगा। यह क्यों हो रहा है? कौन इसे रोकेगा? 1984 का सिख दंगा इतिहास की सबसे बड़ी 'मॉब लिंचिगÓ थी।Ó
    मेघवाल ने कहा, जैसे-जैसे मोदीजी लोकप्रिय होते जायेंगे ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी। बिहार में चुनाव के समय 'अवार्ड वापसीÓ, यूपी चुनाव में 'मॉब लिचिंगÓ और 2019 में कुछ और होगा। मोदीजी ने योजनाएं दी और उसका असर दिख रहा है। ये उसका एक रिएक्शन है।
    वहीं, अलवर लिंचिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है, इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। ऐसी कोई गांरटी नहीं है कि हमने मृत्युदंड का कानून बनाया है तो कोई कल से मुत्युदंड का भागी नहीं बनेगा, कोई मर्डर होगा नहीं। लेकिन हम कड़े कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
    कटारिया अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं। इसके पहले पिछले साल अप्रैल में अलवर में ही कथित गोरक्षकों की पिटाई से पशु व्यापारी पहलू खान की मौत हो गई थी। 
    उस समय कटारिया ने उन कथित गोरक्षकों का बचाव भी किया। उन्होंने कहा, दोनों तरफ से गलती हुई है। लोग जानते हैं कि गो-तस्करी गैरकानूनी है फिर भी वह इसे करते हैं। गोभक्त तो सिर्फ ऐसे लोगों को रोकने की कोशिश करते हैं जो ऐसे अपराधों में लिप्त होते हैं।
    हालांकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अभी की घटना की निंदा करते हुए ट्वीट कर दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अलवर में गो परिवहन से संबंधित वारदात में हुई नृशंस हत्या की मैं कड़े शब्दों में निंदा करती हूं। घाटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    दूसरी ओर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटना को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्वीट किया है, गाय को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने का अधिकार है और एक मुस्लिम को मारा जा सकता है, क्योंकि उनके 'जीनेÓ का मौलिक अधिकार नहीं है। मोदी शासन के 4 साल- लिंच राज।(एएनआई)
     

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पिछले सप्ताह ही राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी में कई बड़े बदलाव करते हुए दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, कमलनाथ, सुशील कुमार शिंदे और करण सिंह की कांग्रेस की सुप्रीम बॉडी से छुट्टी कर दी थी।
    कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नवनिर्मित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) अनुभव और ऊर्जा का संगम है। उन्होंने आगे कहा कि यह कांग्रेस वर्किंग कमेटी बीते हुए अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच का पुल है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के लोगों को भारत के शोषितों को उठाने और उनके लिए लडऩे की बात कही। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की यह पहली बैठक है। 
    बैठक की अध्यक्षता करते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस के नेताओं को याद दिलाया कि कांग्रेस की भूमिका भारत के आवाज के रूप में है और जिस तरह बीजेपी संस्थानों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और गरीबों पर हमले कर रही है, ऐसे में पार्टी की क्या जिम्मेदारी है। 
    वहीं, यूपीए की चेयरमैन और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि हम गठबंधन को और कारगर बनाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं और  इस प्रयास में हम सभी उनके (कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी) साथ हैं। 
    उन्होंने आगे कहा कि हमें लोगों को लोकतंत्र के इस खतरनाक काल से बचाना है। आगे उन्होंने देश के गरीबों और वंचितों में निराशा और डर की भावना को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के भाषणों में साफ झलक रहा है कि मोदी सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गई है।
    इसके अलावा इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि हम राहुल गांधी को आश्वस्त करते हैं कि भारत की सामाजिक समरसता और आर्थिक विकास को पुन: पटरी पर लाने के लिए पार्टी उनका भरपूर समर्थन करेगी। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भी रणनीति पर बात चीत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, सीडब्ल्यूसी में 23 सदस्य, 19 स्थायी आमंत्रित सदस्य और नौ आमंत्रित सदस्य शामिल किए गए हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने विकास की कोई ठोस नीति बनाने के बजाय पीएम मोदी के जुमले और खुद की तारीफ वाली रणनीति को सिरे से खारिज कर दिया।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • मुंबई, 22 जुलाई । टीवी एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला की बीएमडब्लू कार ने शनिवार को तीन गाडिय़ों में टक्कर मार दी। इस हादसे में करीब 3 लोगों के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ अपनी गाड़ी खुद चला रहे थे और वह नशे में थे। गाड़ी की स्पीड इतनी तेज थी कि हादसे के बाद उनकी गाड़ी डिवाइडर पर जा चढ़ी। घटना के बाद सिद्धार्थ को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
    जानकारी के मुताबिक, यह घटना मुंबई के ओशिवारा इलाके में हुई। बताया जा है कि हादसे के समय सिद्धार्थ की कार काफी तेज गति में थी। हादसे में सिद्धार्थ को भी काफी चोटें आई हैं। ओशिवारा पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है।
    सिद्धार्थ शुक्ला को टीवी सीरियल 'बालिका बधुÓ से काफी फेम मिला था।  उन्होंने इसके बाद 'बाबुल का आंगन छूटे नाÓ में भी काम किया है। सिद्धार्थ शुक्ला बॉलीवुड फिल्म 'हम्प्टी शर्मा की दुल्हनियाÓ में अंगद के रोल में भी नजर आ चुके हैं।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । देश में काम कर रहे विदेशी पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी की गयी है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें जम्मू कश्मीर जाने के लिए पहले से अनुमति लेनी होगी।
    दिल्ली के विदेशी समाचार संस्थानों को विदेश मंत्रालय द्वारा 22 मई 2018 को एक पत्र भेजा गया जिसमें कहा गया कि भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को अब से जम्मू कश्मीर जाने से पहले लिखित में आवेदन करना होगा, जिसके बाद ही वे जम्मू कश्मीर के किसी हिस्से में जा सकते हैं।
    इस पत्र में लिखा था, विदेश मंत्रालय द्वारा ऐसा देखा गया है कि भारत में रह रहे विदेशी पत्रकार अपने पत्रकारिता के काम के लिए यात्राएं करते समय ऐसी प्रतिबंधित/संरक्षित (प्रोटेक्टेड) जगहों पर जा रहे हैं, जहां जाने के लिए पूर्व अनुमति/विशेष परमिट लेने की आवश्यकता होती है। ऐसे क्षेत्रों में बिना पूर्व अनुमति/विशेष परमिट के जाने से पत्रकार के लिए अनावश्यक रूप से असुविधा खड़ी हो सकती है।
    मंत्रालय की ओर से जारी संरक्षित क्षेत्रों की श्रेणी में मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के 'हिस्सेÓ और पूरे सिक्किम और नगालैंड आते हैं, वहीं पूरा अंडमान निकोबार द्वीप और सिक्किम के कुछ हिस्से प्रतिबंधित क्षेत्र में आते हैं।
    इस पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर पत्रकार पहले से दिए गए फॉर्मेट के अनुसार अपनी यात्रा योजना की जानकारी देंगे तो विदेश मंत्रालय उनके लिए विभिन्न सुविधाएं मुहैया करवाने में मदद कर सकेगा। इस पत्र के साथ स्पेशल परमिट के लिए आवेदन करने का फॉर्मेट भी दिया गया है।
    द वायर ने देश में रह रहे कई विदेशी पत्रकारों से बात की, जिनका कहना था कि वे बीते कई वर्षों से कश्मीर जाते रहे हैं, लेकिन कभी उनसे इस तरह अनुमति लेने या पहले सूचित करने की बात नहीं कही गयी। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया के अध्यक्ष एस वेंकट नारायण ने कहा कि वे इस बारे में विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से बात करेंगे।
    अनौपचारिक तौर पर विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस आदेश का मकसद सिर्फ ऐसे क्षेत्रों में विदेशी पत्रकारों के प्रवेश को लेकर बनी दीर्घकालिक नीति को दोहराना है, ऐसे क्षेत्रों में रिपोर्टिंग पर जाने को लेकर कोई पाबंदी नहीं है।
    हालांकि पहले ऐसे कई मामले सामने आये हैं जहां विदेशी शिक्षाविद या पत्रकारों को कश्मीर जाने से रोका गया है, इनमें अमरीका के चर्चित प्रस्तोता डेविड बर्समियन भी शामिल हैं।
    डेविड ने कश्मीर को लेकर काफी रिपोर्टिंग की है। हालांकि 2011 में डेविड जैसे ही भारत पहुंचे, उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पिछली यात्रा में वीसा नियमों का उल्लंघन किया था।
    वहीं, दिसंबर 2017 में पैलेट गन से घायल हुए पीडि़तों पर डॉक्यूमेंट्री बनाने कश्मीर गए फ्रेंच पत्रकार और फिल्मकार कोमिति पॉल एडवर्ड को श्रीनगर में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर भी वीसा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा था।(द वायर )

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • लुधियाना, 22 जुलाई । रेलवे कर्मचारी कुलदीप सिंह को शायद इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि अपनी बेटी को प्रेम प्रसंग के लिए डांटने की कीमत उन्हें जान देकर चुकानी होगी। लड़की ने खुद सुपारी देकर अपने पिता की हत्या करवाई। बेटी ने अपने इस अपराध में मां को भी शामिल कर लिया। उसने अपनी मां से झूठी कहानी गढ़ी कि पिता उसके साथ छेड़छाड़ और उसका यौन शोषण करते हैं। घटना लुधियाना की है। बीते शुक्रवार को रेलवे हेल्पर टेक्नीशियन कुलदीप सिंह की उनके घर में घुसकर हत्या कर दी गई। हत्या की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची तो मामला लूट में हत्या का लग रहा था।
    लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परिवार वाले ही शक के घेरे में आ गए। पुलिस ने मृतक कुलदीप की हत्यारिन बेटी सुगंधा, मृतक की पत्नी गीता और सुगंधा के प्रेमी तरुण कुमार को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की तो हत्या की पूरी कहानी सामने आ गई।
    बेटी ने कुबूल कर लिया कि उसने ही अपने प्रेमी की मदद से सुपारी देकर पिता की हत्या करवाई। (आज तक)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • अलवर, 22 जुलाई । बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने पर फांसी की सजा का कानून बनने के बाद पहली बार राजस्थान में एक रेपिस्ट को मौत की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने सिर्फ ढाई महीने में मामले की सुनवाई कर आरोपी पिंटू ठाकुर (19 वर्ष) को सजा सुना दी है। राजस्थान के अलवर में 7 महीने की बच्ची के साथ रेप किया गया था। 
    जज जगेंद्र अग्रवाल ने कहा कि जो सिर्फ हंसना और रोना ही जानती है, उसके साथ ऐसा कृत्य मानवता को शर्मसार करने वाला है। जब वह सोचने समझने में सक्षम होगी तो उसे महसूस होगा कि धरती पर जन्म लेना उसके लिए अभिशाप था। यदि कारावास की सजा भी दी गई तो गलत संदेश जाएगा, इसलिए मात्र मृत्युदंड ही न्यायोचित है।(आज तक)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • रीमा नागराजन
    नई दिल्ली, 22 जुलाई । प्राइवेट कॉलेजों से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले स्टूड़ेंट्स लोन लेकर महंगी फीस के भार तले ऐसे दब जा रहे हैं कि पढ़ाई के बाद उसे चुकता करना जी का जंजाल बन जा रहा है। प्राइवेट कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के लिए फीस का गणित कुछ ऐसा बन रहा है कि पांचवे साल पढ़ाई पूरी कर निकलने के बाद उनपर 50 लाख रुपये तक का बोझ रह रहा है।  
    औसतन एमबीबीएस के एक प्राइवेट कॉलज की वार्षिक ट्यूशन फीस करीब 10 लाख रुपये है। पांच वर्षों की पढ़ाई के दौरान हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी, इंटरनेट और परीक्षाओं में शामिल कुल खर्च को जोड़ लें तो यह 50 लाख रुपये के पार कर जा रही है। अब अगर 50 लाख के एजुकेशन लोन की ईएमआई की गणना करें तो यह हर महीने करीब 60 हजार रुपये तक आती है। कई राज्यों में डॉक्टरों की की सैलरी 45 से लेकर 65 हजार रुपये तक होती है। 
    निजी डॉक्टरों की बात करें तो शुरुआती सैलरी इससे कम भी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टरों के लिए ईएमआई चुकाना ही भारी मुसीबत का सबब बन जा रहा है। सरकार एक तरफ ज्यादा निजी मेडिकल कॉलेजों को खोलने की अनुमति दे रही है। दूसरी तरफ डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाई जा रहीं हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या अधिक फी सरकार के इस उद्देश्य को चोट नहीं पहुंचा रही? क्या ईएमआई चुकाने के बाद एक डॉक्टर के पास अपनी जीविका चलाने लायक पैसा बच रहा है? 
    कई बैंकों में बिना कोलैट्रल के 7 से 10 लाख से अधिक का एजुकेशन लोन नहीं दिया जा रहा। कोलैट्रल के रूप में अधिकतर घर या जमीन गिरवी रखी जाती है। इसकी मदद से संपत्ती की कीमत के बराबर का लोन मिल जाता है। सामान्तया 10-12 साल की अवधि वाले एजुकेशन लोन पर 10 से 12.5 फीसदी तक का ब्याज लगता है। अगर एजुकेशन लोन न हो तो कई अभिभावक अपने बच्चों की एमबीबीएस फी नहीं भर सकते। 
    2017 में टाईम्स ऑफ इंडिया द्वारा 210 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के विश्लेषण में पाया गया कि करीब 50 की फी 10 से 15 लाख रुपये थी। 30 से अधिक कॉलेजों की फी इससे भी ज्यादा थी। कई सरकारी कॉलेजों की भी वार्षिक ट्यूशन फी काफी ज्यादा मिली। एमबीबीएस की पढ़ाई के 4.5 साल पूरे होने के बाद स्टूडेंट्स को एक साल की पेड इंटर्नशिर मिलती है। इस दौरान उनकी सैलरी 20 से 25 हजार रुपये/महीने तक होती है। 
    एमबीबीएस पूरा करने के बाद अगर स्टूडेंट रेजिडेंट डॉक्टर या मेडिकल ऑफिसर के तौर पर अपने तीन साल के पोस्ट ग्रैजुएशन को पूरा कर रहा है तो इस दौरान सरकारी क्षेत्र की सैलरी 40 से 55 हजार रुपये तक होती है। कई राज्यों में प्राइवेट सेक्टर में यह और कम भी हो सकती है। तीन से चार वर्षों के दौरान अच्छी स्थिति में यह सैलरी बढ़कर 70 हजार रुपये तक होती है। तीस से 50 लाख रुपये के एजुकेशन लोन की ईएमआई भी 45 से 65 हजार रुपये के रेंज में होती है। 
    ऐसे में डॉक्टरों के पास इसे चुकाने के बाद अपने लिए पैसा नहीं के बराबर बचता है। जिन डॉक्टरों की शादी हो चुकी होती उनपर परिवार का खर्च चलाने का बोझ भी रहता है। नतीजतन अमरीकी व्यवस्था की तरह ही भारत में भी एमबीबीएस करके निकला हुआ छात्र कर्ज के जाल में फंस जाता है। एक तरफ तो भारत में मेडिकल एजुकेशन स्टूडेंट्स के लिए कर्ज का जाल बन रहा है, दूसरी तरफ सरकार इससे निपटने के लिए कोई खास प्रयास करती नजर नहीं आ रही है। 
    उन राज्यों में जहां फी को लेकर नियमन प्रभावी हैं, वहां भी प्राइवेट कॉलेजों की फी 2.5 लाख रुपये से लेकर 6 लाख रुपये तक है। ऐसे में जो सक्षम नहीं हैं उन्हें इस स्थिति में भी 12 से 30 लाख रुपये तक लोन लेना पड़ता है जिसकी ईएमआई चुकाना उनके लिए बहुत बड़ा सिरदर्द होता है। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • राजकोट, 22 जुलाई । इंसान और कुत्तों का साथ जगजाहिर है और इसीलिए उसे आदमी का सबसे अच्छा दोस्त कहा जाता है। प्राचीन काल से चली आ रही यह दोस्ती एक फिर से सच साबित हो गई है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित अमरेली जिले के सावरकुंडला गांव में एक गड़रिये पर तीन शेरों ने हमला कर दिया। इस मुश्किल घड़ी में गड़रिये के कुत्ते ने उसकी बड़ी मदद की और जान बचा लिया। 
    शेरों के साथ इस जंग में भावेश हमीन भरवाद को पीठ और हाथ पर हल्की चोट आई है। लड़ाई के दौरान एक शेर ने भावेश को अपने पंजे से खींचने की कोशिश की थी। भावेश का सावरकुंडला के सरकारी हॉस्पिटल में इलाज किया गया । यह घटना उस समय हुई जब भावेश अंबार्दी गांव के बाहरी इलाके में अपनी भेड़ों और बकरियों को चरा रहे थे। 
    इसी दौरान तीनों शेर कहीं से आए और भेड़ों पर हमला कर दिया। इस हमले में तीन भेड़ों की मौत हो गई। जब भावेश ने शेरों से अपने जानवरों को बचाने की कोशिश की तो एक शेर ने उन पर हमला कर दिया। शेर जब तक भावेश के पास जा पाता तब तक उनके कुत्ते ने तेज-तेज भौंकना शुरू कर दिया। गांववालों ने बताया कि जब कुत्ता लगातार भौंकता रहा तो उसे सुनकर वे भी मौके पर पहुंचे। 
    बड़ी संख्या में इंसानों को देखकर तीनों शेर वहां से भाग खड़े हुए और भावेश की जान बच गई। 
    गांववालों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी और शेरों पर निगरानी रखना शुरू कर दिया है। उन्हें भय है कि अभी शेर फिर से हमला कर सकते हैं। गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में बड़ी संख्या में एशियाई शेर पाए जाते हैं। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों में हुए गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं और इस वजह से मारे जाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर की है। सड़कों की स्थिति से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, सड़कों पर हुए गड्ढों से देशभर में बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। इससे जुड़ी रिपोर्टें बताती हैं कि इतने लोग तो आतंकवादी हमलों में भी नहीं मारे जाते जितने लोगों की मौत की वजह सड़कों के गड्ढे बन रहे हैं।
    दो जजों की पीठ ने इस स्थिति को बेहद 'डरावनाÓ बताते हुए इसे अत्यंत गंभीर मुद्दा कहा है। जजों का यह भी कहना था कि गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं में मारे जाने वालों के लिए मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए। इस बारे में शीर्ष अदालत ने सड़क सुरक्षा समिति से दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई। जस्टिस विजया कमलेश (वीके) ताहिलरमानी को मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया जा सकता है। वे फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में पदस्थ हैं। मद्रास हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर वे जस्टिस इंदिरा बनर्जी की जगह लेने वाली हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई है। खबरों के मुताबिक जस्टिस ताहिलरमानी मद्रास हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस बनती हैं तो वे इस अदालत में यह पद संभालने वाली लगातार दूसरी महिला होंगी।
    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इसके साथ पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन को दिल्ली स्थानांतरित करने की भी सिफारिश की है। वे दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल की जगह ले रहे हैं। जस्टिस मित्तल को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस एमआर शाह को तरक्की देकर पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। वे दिल्ली स्थानांतरित किए गए जस्टिस मेनन की जगह लेंगे।
    इन जजों को मिलाकर सात उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की गई है। इनमें ऐसे ही केरल हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस ऋषीकेश राय को इसी अदालत में मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। इनके अलावा गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस केएस झावेरी को ओडिशा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश हुई है। वे ओडिशा के चीफ जस्टिस विनीत सरन की जगह ले रहे हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया जा रहा है।
    कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस को झारखंड हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश हुई है। कॉलेजियम ने इससे पहले जनवरी में बोस को सीधे दिल्ली हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने यह सिफरिश लौटा दी थी। यह कहते हुए कि दिल्ली हाईकोर्ट बड़ी अदालत है। यहां अक्सर संवेदनशील मामले आते हैं। ऐसे में किसी मौजूदा चीफ जस्टिस को ही स्थानांतरण के आधार पर दिल्ली में पदस्थ करने की परंपरा रही है। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई। हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में पर्वतारोहियों के दल को एक सैनिक के शव के साथ 1968 में दुर्घटना का शिकार हुए भारतीय वायुसेना के एक विमान के कुछ अवशेष मिले हैं।  पर्वतारोहियों का यह दल बीते महीने चंद्रभागा- 13 चोटी की सफाई अभियान पर निकला था। इसी दौरान उसे ये अवशेष मिले।
    पर्वतारोहियोंं के दल के मुखिया राजीव रावत ने बताया, सबसे पहले हमें विमान के अवशेष दिखे थे। फिर हमने कुछ और दूरी तक इस जगह की तलाशी की जहां दशकों पहले बर्फ में दबे एक सैनिक का शव भी हमें दिखा। इसके बाद हमने यहां की कुछ तस्वीरें खींचकर सेना को भेजीं। अब सेना इस क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रही है। हमें लगता है यहां कई और सैनिकों शव बर्फ के नीचे दबे हो सकते हैं।
    सात फरवरी 1968 को रूस (पहले सोवियत संघ) में निर्मित एएन- 12 विमान ने 98 सैनिकों और उड़ान दल के चार सदस्यों के साथ चंडीगढ़ से लेह के लिए उड़ान भरी थी। लेह में मौसम खराब होने की वजह से इसके पायलट ने विमान को वापस चंडीगढ़ ले जाने का फैसला किया था। इसी दौरान रोहतांग दर्रे के पास इस विमान का संपर्क टूट जाने के बाद यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
    इस विमान दुर्घटना के 35 वर्षों के बाद 2003 में एबीवी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटनीयरिंग एंड अलायड स्पोर्ट्स के एक दल को जहाज के कुछ टूटे हिस्सों समेत एक सैनिक का शव मिला था। इसके अलावा अगस्त 2007 में सेना के एक खोजी दल ने भी इस हादसे के शिकार तीन सैनिकों के शव बरामद किए थे। इस तरह साठ के दशक में हुए उस हादसे के वर्षों बाद अब तक पांच शव तलाश किए जा सके हैं। (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • देवास, 21 जुलाई । अभाव में जीवन व्यतीत करने वाले आशाराम ने एम्स के एंट्रेंस एग्जाम को पहले ही प्रयास में पास करके साबित कर दिया कि गरीबी सफलता में आड़े नहीं आ सकती। 
    आशाराम के पिता रंजीत चौधरी कूड़ा उठाने का काम करते हैं। वह इतने भी पढ़े-लिखे नहीं हैं कि यह समझ सकें कि उनके बेटे ने कौन सी परीक्षा पास की है। आशाराम ने जब उन्हें यह बताया कि उसने इतनी बड़ी परीक्षा पास की है तो वह इसका अर्थ ही नहीं समझ सके और बोले, बेटा तू तो हमेशा ही पास होता है तो इस बार कौन सी नई बात है। तब उनके बेटे ने समझाया, बाबा यह बहुत बड़ा इम्तिहान था और यह स्कूल भी बहुत बड़ा है। अब मैं अपने गांव के कल्लू डॉक्टर की तरह एक डॉक्टर बन जाऊंगा। 
    आशाराम अपने पिता के साथ एमपी के देवास जिले के एक छोटे से गांव विजयगंज मंडी में रहता है। ये लोग एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहते हैं और रंजीत कूड़ा बीनकर अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाते हैं, 18 वर्षीय आशाराम ने जोधपुर-एम्स में अपनी सीट पक्की की है। आशाराम ने बताया, मेरे पिता को अभी इस बारे में कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। मुझे उन्हें समझाने में अभी कुछ वक्त लगेगा। आशाराम का ऑल इंडिया रैंक में 707वां स्थान है और ओबीसी कैटिगरी में उसे 141 वीं जगह मिली है। 
    इससे पहले आशाराम को पुणे की दक्षिणा फाउंडेशन ने स्कॉलरशिप के लिए चुना था। इसके तहत उसे पुणे में ही परीक्षा की तैयारी करवाई जा रही थी। आशाराम का कहना है कि उनकी सफलता में दक्षिणा का बहुत बड़ा योगदान है। आशाराम ने बताया, हमें बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए मेरे पिता बहुत ही मेहनत से काम करते हैं। मुझे जो भी चाहिए होता है वह मुझे लाकर देते हैं। वह स्थानीय प्रशासन का भी शुक्रगुजार है। उसका कहना है कि प्रशासन की मदद से ही उसे बीपीएल कार्ड मिला। इससे उसे अपनी पढ़ाई में काफी मदद मिली। 
    आशराम अब एम्स के मैस की फीस जुटाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया, मुझे 36 हजार रुपये मैस की फीस और 8 हजार रुपये किताबों के देने हैं। हालांकि मैंने किताबों के लिए पैसों का इंतजाम कर लिया है लेकिन मैस की फीस अभी नहीं हो पाई है। मैं चाहता हूं कि एमबीबीएस की पढ़ाई में हर साल मुझे गोल्ड मैडल मिले। मेरे गांव ने जो मुझे इतना कुछ दिया है मुझे वह लौटाना भी है। यहां एक भी अच्छा डॉक्टर नहीं है। (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर से नए चार पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराते समय तीन वर्षों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिर्वाय किया है। दो पहिया वाहनों के लिए पांच साल तक के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिर्वाय किया गया है।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगते हुए कहा सड़क दुर्घटना में लोग मर रहे है। एक लाख से ज्यादा मौत हर साल हो जाती हैं, सड़क दुघर्टना में। हर तीन मिनट में एक दुर्घटना होती है। लोग मर रहे हैं और आप कह रहे हैं कि उन्हें मरने दिया जाए। आप उनको देखिए वे सड़क दुर्घटना में मर रहे है। भारत की जनता मर रही है। उनके लिए कुछ करिए। उनके पास पैसे नहीं होते और आप आठ महीने का समय मांग रहे हैं। किसी भी कीमत पर आपको आठ महीने का समय नहीं दिया जा सकता। 
    एमिकस गौरव अग्रवाल की तरफ से कहा गया थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जब कार या बाइक खरीदी जाती है तब होता है, उसके बाद नहीं कराया जाता, 66 फीसदी से ज्यादा ऐसे वाहन हैं जिनका थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं होता। ऐसे में कमेटी ने एक बार में ही थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की बात कही थी। लेकिन इंश्योरेंस कंपनी ने कहा 20 वर्षों का पैसा एक साथ संभव नहीं हो पाएगा।
    इसके बाद कमेटी ने तीन साल तक के लिए प्रस्ताव रखा। तीन साल चार पहिया वाहन के लिए और पांच साल दो पहिया वाहन के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिर्वाय किया। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कोई लेना नहीं चाहता क्योंकि इंश्योरेंस की किस्त ज्यादा हो जाती है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • फतेहाबाद, 21 जुलाई। हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक तांत्रिक पुजारी अमरपुरी उर्फ बिल्लू को गिरफ्तार किया गया है। पुजारी पर 120 महिलाओं से जबरन संबंध बनाने का आरोप है।
    आरोप है कि अमरपुरी उर्फ बिल्लू प्रेतबाधा के नाम पर महिलाओं को फंसाता था और तंत्र विद्या के दौरान नशीली दवा दे देता था। बेहोशी की हालत में पीडि़ता से रेप करता था और उसका वीडियो बना लेता था। फिर महिलाओं को ब्लैकमेल कर उनका शारीरिक और आर्थिक शोषण करता था। 
    बिल्लू के खिलाफ 9 महीने पहले एक महिला ने रेप का केस दर्ज कराया था। उस मामले में गिरफ्तार होने के बाद उसे जमानत मिल गई थी।
    तांत्रिक अमरपुरी का महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उसके बाद अमरपुरी उर्फ बिल्लू को गिरफ्तार कर उस पर रेप, आईटी ऐक्ट, ब्लैकमेलिंग समेत कई अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया।
    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमरपुरी के पास से 120 वीडियो मिले, जिसमें वह महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाई दे रहा है। पुजारी के कमरे से नशीली गोलियां और तंत्र-मंत्र का सामान भी बरामद किया गया है। 
    पुलिस के अनुसार अमरपुरी उर्फ बिल्लू के कमरे में तीन दरवाजे हैं। वह गुप्त रूप से महिलाओं को अपने कमरे में लाता था। उसके कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। इस मामले में दो महिलाओं और एक पुरुष को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। आरोपी बिल्लू को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
    पुलिस ने पीड़तिाओं से अपना बयान दर्ज करवाने की अपील की है। अमरपुरी का असली नाम अमरवीर है। वह 20 साल पहले पंजाब के मानसा से टोहाना आया था।  शुरुआत में वह जलेबी की दुकान लगाता था। पत्नी की मौत के बाद वह तांत्रिक बन गया।  (आज तक)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • रायबरेली, 21 जुलाई। रायबरेली में एक महिला ने स्थानीय भाजपा नेता पर रेप का आरोप लगाया है। महिला का यह भी आरोप है कि बीजेपी नेता ने रेप के दौरान उसके अश्लील वीडियो भी बनाए। वहीं इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। पीडि़ता का आरोप है कि पुलिस ने बीजेपी नेता के खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
    पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने के चलते थक-हार कर पीडि़ता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। पीडि़ता और उसके परिजनों का यह भी आरोप है कि दारोगा व आरोपी उन पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
    पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक,  भाजपा के टिकट पर नगर पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके निर्लेश सिंह करीब डेढ़ माह से उसका यौन शोषण कर रहे थे। पीडि़ता का कहना है कि निर्लेश सिंह ने रेप के दौरान उसके अश्लील वीडियो भी बना लिए। निर्लेश सिंह अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पीडि़ता को ब्लैकमेल भी कर रहे थे। महिला का आरोप है कि पुलिस ने 16 जुलाई को निर्लेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन भाजपा नेता के दबाव में अभी तक 164 का बयान नहीं करवा रही है।
    उधर, पीडि़ता के पति का कहना है कि यदि आरोपी के रसूख के चलते उस पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे सपरिवार एसपी कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेंगे । वहीं पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रही है। (आज तक)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • हैदराबाद, 21 जुलाई। इस दुनिया में किसी बच्चे को लाने की पूरी प्रक्रिया बेहद जटिल और कई बार खतरों से भरी होती है। जिस वक्त बच्चा पहली बार मां की कोख में आकार लेने लगता है तब से लेकर जन्म तक कुछ भी हो सकता है। नौ महीने का यह सिलसिला ऐसे ही चलता है। कभी सबकुछ ठीक तो कभी कुछ भी ठीक नहीं। लेकिन कुछ ऐसे केस भी होते हैं जिनमें शुरुआत से ही कॉम्पिलकेशन इतने ज्यादा होते हैं कि अच्छे से अच्छे डॉक्टर भी हाथ खड़ा कर देते हैं। कई बार तो बच्चे नौ महीने भी मां की कोख में नहीं रह पाते और समय से पहले डिलिवर हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को बचा पाना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन कुछ काबिल डॉक्टरों की वजह से हैदराबाद में पति-पत्नी बेहद अनोखी बच्ची को जन्म दे पाने में कामयाब रहे। 
    जी हां, हैदराबाद के रेनबो अस्पताल ने हाल ही में ऐलान किया उनके यहां एक कपल ने दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे छोटी बच्ची को जन्म दिया है।
    इस छोटी सी बच्ची का नाम चेरी है और जिस वक्त रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में पैदा हुई तब उसका वजन मात्र 375 ग्राम था। बच्ची की डिलिवरी 25वें हफ्ते में ही कर दी गई थी। जन्म के समय उसकी लंबाई मात्र 20 सेंटीमीटर थी। यानी कि इतनी छोटी कि वह किसी इंसान की हथेली में समा जाए। आमतौर पर बच्चे गर्भ के 36वें से 40वें हफ्ते में पैदा होते हैं; इससे पहले पैदा होने वाले बच्चों को प्री-मेच्योर बेबी कहा जाता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और उनके जीवित बचने की संभावना भी बेहद कम होती है। बच्ची का जन्म चार महीने पहले हुआ था और अब उसका वजन ढाई किलो है।
    अस्पताल ने माता-पिता के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बच्ची के जन्म का ऐलान किया क्योंकि इस तरह के बच्चों के जीवित रहने की संभावना न के बराबर होती है।
    डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची प्री-मेच्योर हुई थी और उम्मीद से चार महीने पहले ही पैदा हो गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बच्चों के बचने की संभावना 0.5 फीसदी होती है। दरअसल, ऐसे बच्चों को कई तरह के इंफेक्शन और कॉम्प्लिकेशन का खतरा रहता है। नतीजतन ऐसे बच्चों के शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं और उनकी मौत हो जाती है। लेकिन रेनबो हॉस्पिटल की टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया। चेरी को पाकर उसके माता-पिता की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। यह जन्म कई मायनों में खास है-
    - एक नवजात की औसत लंबाई 45 से 50 सेंटीमीटर तक होती है। वहीं चेरी की लंबाई मात्र 20 सेंटीमीटर थी।
    - एक नवजात का औसत वजन 2.5 किलो से 3.5 किलो होता है जबकि चेरी का भार मात्र 375 ग्राम था। बहरहाल, हमारी ओर से अस्पताल और माता-पिता को शुभकामनाएं। साथ ही हम दुआ करते हैं कि चेरी का जीवन स्वस्थ और मंगलमय होगा। (एनडीटीवी)

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