राष्ट्रीय

Posted Date : 22-Apr-2018
  • अमेठी/सुकमा, 22 अप्रैल । छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शुक्रवार देर रात सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सीआरपीएफ के एएसआई अनिल कुमार मौर्य का अंतिम संस्कार आज किया जाएगा। वह अमेठी जिला के नरैनी गांव के रहने वाले थे। उनका पार्थिव शरीर शनिवार शाम 7.30 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा था।

    छत्तीसगढ़ के सुकमा में शुक्रवार रात सीआरपीएफ की दो टीमें नियमित सर्चिंग पर निकली थी, किष्टाराम में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हो गई, जिसमें एएसआई अनिल कुमार मौर्य शहीद हो गए। ये मुठभेड़ सीआरपीएफ की 212वीं नम्बर बटालियन के साथ हुई।
    इसी इलाके में 13 मार्च को सीआरपीएफ की एन्टी लैंडमाइन व्हीकल को उड़ा दिया था। जिसमे सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हो गए थे। वहीं शहीद के बेटे ने कहा है कि पापा सात को मार कर शहीद हुए। मुझे मौका मिला तो मैं बीस को मारकर बदला लूंगा। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। महाराष्ट्र के उल्हासनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा पर खाताधारक के शव के साथ परिवार के लोगों ने प्रदर्शन किया। मृतक के बैंक खाते से अधिकारियों ने पैसा नहीं निकलने दिया, जिसका उन्होंने विरोध जताया। परिवार के लोग एकाउंट से पैसा निकाले जाने की गुहार लगाते रहे, ताकि अस्पताल में भर्ती लकवाग्रस्त व्यक्ति का इलाज हो सके। मगर बैंक ने पैसा देने से इंकार कर दिया, क्योंकि अस्पताल में भर्ती व्यक्ति के हस्ताक्षर और उपस्थिति की जरूरत थी।
    दरअसल खाताधारक गणेश दो महीने पहले पैरालिसिस होने पर केईएम हास्पिटल में भर्ती हुआ था। परिवार के पास जब पैसा नहीं बचा तो वे बैंक शाखा गए और अधिकारियों से गणेश के खाते में जमा 25 हजार रुपये देने की गुहार लगाने लगे। बोले कि बीमारी के कारण गणेश बैंक में नहीं आ सकता। बैंकवालों ने साफ मना करते हुए कहा कि एकाउंट व्यक्तिगत हैं, इस नाते पैसा तभी निकलेगा, जब गणेश मौजूद रहेगा। बहन महानंदा ने बताया कि भाई अस्पताल के बिस्तर पर बेहोश पड़ा था, ऐसे में कैसे उसके हस्ताक्षर ले सकते थे।
    हमने अस्पताल के बिस्तर पर लेटे भाई की तस्वीर क्लिक कर बैंक अधिकारियों को दिखाई। मगर अधिकारियों ने पैसा निकालने से मना कर दिया। बहन ने कहा कि पिछले सप्ताह पिता ने जब पैसा निकालने के लिए प्रार्थना की थी तो बैंक अधिकारियों ने हस्ताक्षर के लिए अस्पताल आने की बात कही थी, मगर वो नहीं आए। एक संबंधी से पैसे उधार लेकर दवाएं खरीदनी पड़ीं। 
    इस बारे में उल्हासनगर पीएनबी शाखा के प्रबंधक सोमनाथ सरोडे ने कहा-हम किसी के खाते का पैसा किसी दूसरे को नहीं दे सकते। मानवीय आधार पर हमने अस्पताल विजिट करने की बात कही थी मगर तब तक खाताधारक की मौत हो गई।  (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • भोपाल, 22  अप्रैल। एक कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उसकी पत्नी पर उनकी गौशाला में गाय काटने का जुर्म कायम किया गया। पत्नी गिरफ्तार है और पति फरार है। पत्नी को एक स्थानीय अदालत ने दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा है। 
    एक सरकारी अस्पताल, जेपी हॉस्पिटल में फार्मासिस्ट का काम करने वाले सुरेन्द्र सिंह कौरव 18 राज्यों में काम कर रहे शासकीय कर्मचारी संघ का अध्यक्ष भी है। यह संघ भारतीय मजदूर संघ से संबंद्ध है जो कि भाजपा का मजदूर संगठन है। 
    कटरा हिल्स पुलिस थाने के प्रभारी एल डी मिश्रा ने बताया कि भोपाल के बगल बगरोदा में यह दंपत्ति गौशाला चलाती है। 
    जब गांव वालों ने शिकायत की कि वहां गाय काटी जाती है तो पुलिस ने छापा मारा। इस पर पुलिस को वहां कुल तीन गायें मिलीं और गाय का मांस भी बरामद किया गया। एसपी ने बताया कि गौशाला से गाय का मांस मिला है। लोगों का आरोप था कि शिकायत के बाद भी पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही, जबकि वहां पर गायों की हत्या की जा रही हैं।   (इंडियन एक्सपे्रस)

     

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • भारती जैन
    नई दिल्ली, 22 अप्रैल । निर्भया गैंगरेप के जघन्य मामले के चलते देश भर में हुए आंदोलन के बाद सरकार ने पॉक्सो ऐक्ट लागू किया गया था और रेप के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया। साल 2013 में जस्टिस जेएस वर्मा के नेतृत्व में बनी कमिटी की सिफारिशों के आधार पर यह कानून बनाया गया था। हालांकि रेप के खिलाफ देश भर में बने माहौल के बावजूद वर्मा ने मौत की सजा का यह कहते हुए विरोध किया था कि यह पीछे ले जाने वाला होगा। यही नहीं जस्टिस वर्मा ने मौत की सजा को लेकर कहा था कि इसका बहुत असर भी देखने को नहीं मिलता है। 
    अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अमरीकी अदालतों के फैसलों का उदाहरण देते हुए वर्मा के नेतृत्व वाले पैनल ने कहा था कि मौत की सजा शुरू करना पीछे ले जाने वाला कदम होगा क्योंकि यह जघन्यतम अपराधों के लिए ही तय की गई है। इस पैनल में वर्मा के अलावा हाईकोर्ट के पूर्व जज लीला सेठ, पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यन भी शामिल थे। वर्मा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दुनिया भर में मौत की सजा से गंभीर अपराधों में कमी आना सिर्फ एक मिथक है। 
    तमाम महिला संगठनों और स्कॉलर्स के विचारों को ध्यान में रखते हुए वर्मा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वह जघन्यतम अपराधों में मौत की सजा के विरोध में नहीं हैं। लेकिन, समाज के व्यापक हित में मौत की सजा को खत्म किए जाने पर विचार करना चाहिए। (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • शुक्रिया पीएम मोदी
    नई दिल्ली, 23 अप्रैल। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने रविवार को अपना अनशन समाप्त तोड़ दिया। एक बच्ची ने स्वाति का अनशन खुलवाया। उन्होंने कहा, मैं अकेले लड़ रही थी, लेकिन मुझे देशभर से लोगों को समर्थन मिल रहा था। आजाद भारत में यह ऐतिहासिक जीत है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अध्यादेश को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा का प्रावधान है। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद स्वाति मालीवाल ने अनशन तोडऩे का फैसला लिया है।
    पिछले 10 दिन से राजघाट पर भूख हड़ताल कर रहीं स्वाति ने अपने समर्थकों से कहा, प्रधानमंत्री ने हमारी और देश की मांगें सुनीं। इसलिए मैंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, मैं इस अध्यादेश को लाने के लिए प्रधानमंत्री की शुक्रगुजार हूं। मैं देश की जनता को इस जीत के लिए बधाई देती हूं।
    हालांकि स्वाति ने इससे पहले ट्वीट किया था कि वह तब तक अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगी जब तक बेटियों की सुरक्षा के लिए कुछ ठोस नहीं होता। 
    उन्होंने ट्वीट में कहा, मैं अध्यादेश पारित होने तक अनशन करती रहूंगी। पुलिस के संसाधन और जवाबदेही भी बढऩे चाहिए। वाकई दुख की बात है कि कुछ चैनल झूठी खबर फैला रहे हैं कि मैंने अनशन तोड़ दिया है। सभी समाचार चैनलों से मेरी अपील है कि फर्जी खबर नहीं चलाएं।
    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को स्वाति से अनशन तोडऩे की अपील की थी, लेकिन दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा था कि वह अपनी मांगें पूरी नहीं होने तक भूख हड़ताल जारी रखेंगी।
    स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छह मांगें उठाईं। उन्होंने अध्यादेश पारित करने, संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से पुलिस कर्मी तैनात करने और पुलिस बलों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।  (जी न्यूज)

     

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • रायगंज (बंगाल), 22 अप्रैल । उत्तर दिनाजपुर जिले में स्कूल की अवधि समाप्त होने के बाद एक शिक्षक ने चौथी कक्षा की दो छात्राओं के साथ क्लासरूम के अंदर ही चार दिन तक लगातार बलात्कार किया।
    सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूल में हुई यह घटना शुक्रवार तब सामने आई जब पीडि़त लड़कियों में से एक ने स्कूल जाने से इंकार कर दिया। पुलिस ने बताया कि 35 वर्षीय विवाहित शिक्षक फरार है।
    उन्होंने बताया कि शिक्षक ने दोनों बच्चियों के साथ इस हफ्ते स्कूल की अवधि समाप्त होने के बाद लगातार चार दिन तक बलात्कार किया और उन्हें इस बारे में किसी को भी कुछ बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
    एक बच्ची ने अपने माता-पिता को इस बारे में बताया। उसने दूसरी लड़की का नाम भी उन्हें बताया। इसके बाद लड़की के माता-पिता दूसरी बच्ची के घर गए और इस घटना के बारे में उन्हें जानकारी दी। दोनों बच्चियों के माता-पिता ने शुक्रवार रात उस शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कराया।(भाषा)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल । पत्नी के अवैध संबंध होने के शक में 17 साल के पिता ने अपने दो महीने के बच्चे की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि पिता को शक था कि यह बच्चा उसका नहीं है।
    पुलिस ने कहा कि यह घटना बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके का है। जहां 17 साल के पिता ने शक के आधार पर नवजात शिशु को पीट-पीटकर मार डाला। उन्होंने कहा कि बच्चे की मां भी नाबालिग है। दोनों की दस महीने पहले ही शादी हुई थी। पिता ने वारदात को तब अंजाम दिया जब उसकी पत्नी बच्चे को उसके पास छोड़कर पालिका बाजार में सेल्सगर्ल की नौकरी की तलाश में गई थी। जब वह वापस लौटी तो बच्चा बेसुध पड़ा था और उसका पति वहां नहीं थी। 
    वह बच्चे को अस्पताल लेकर गई जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • धनंजय महापात्रा
    नई दिल्ली, 22 अप्रैल । सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियां राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू को नोटिस दे चुकी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वरिष्ठ वकील और न्यायविद उनके साथ खड़े हैं। इस बीच यह जानकारी मिली है कि अभी चीफ जस्टिस खुद को सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज से दूर नहीं करेंगे। 
    सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने बताया कि जस्टिस मिश्रा मानते हैं कि उनको हटाने के लिए लाया जा रहा प्रस्ताव तुच्छ आरोपों पर आधारित, राजनीतिक विचारों से प्रेरित और उन्हें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कत्र्तव्य पूरा करने से रोकने वाला है। 
    सूत्रों ने कहा कि पूर्व अटॉर्नी जनरल के परासरन और उनके बेटे मोहन, पूर्व सॉलिसिटर जनरल के अलावा पूर्व वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पवानी ने उनका समर्थन किया है। इनका मानना है कि चीफ जस्टिस ने कुछ भी गलत नहीं किया है। परासरन और पवानी के मुताबिक कांग्रेस का महाभियोग प्रस्ताव का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल बचकाना है। 
    सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने कहा कि चीफ जस्टिस का मानना है कि यदि राज्यसभा चेयरमैन प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो वह अपने स्टैंड पर दोबारा विचार करेंगे अन्यथा वह प्रशासनिक और न्यायिक काम को पहले की तरह अंजाम देते रहेंगे। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस खेल कर रही है, क्योंकि वह पार्टी से जुड़े कुछ वकीलों की एक संवेदनशील केस की सुनवाई टालने की मांग चीफ जस्टिस द्वारा ठुकराए जाने से नाराज है। 
    राज्यसभा के चेयरमैन को अधिकार है कि यदि वह नोटिस में दिए गए कारणों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो प्रस्ताव को खारिज कर सकते हैं। महाभियोग के पिछले मामले में, जोकि सुप्रीम कोर्ट के जज वीरास्वामी रामास्वामी के खिलाफ लाया गया था, तब के चीफ जस्टिस ने उन्हें न्यायिक काम से अलग तभी किया था जब लोकसभा स्पीकर रबी राय ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज ओ चिन्नप्पा रेड्डी की अगुआई में जांच समिति का गठन कर दिया था। कमेटी ने जस्टिस रामास्वामी को भ्रष्टाचार के 14 आरोपों में से 11 का दोषी पाया। 
    चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ नोटिस साइन करने वाले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तब लोकसभा में रामास्वामी का बचाव किया था। कांग्रेस ने जस्टिस रामास्वामी के खिलाफ प्रस्ताव को गिरा दिया था और इसके लिए अपने कुछ सदस्यों को वोटिंग से अलग रखा और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का समर्थन किया था। (टाईम्स न्यूज)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल । रेप पर सबसे सख्त कानून आज से लागू हो गया है। अब 12 साल से कम उम्र की नाबालिगों से रेप पर मौत की सजा मिलेगी। अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर चली ढाई घंटे की कैबिनेट मीटिंग के बाद सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया था।
    नए कानून के मुताबिक, नाबालिगों से रेप के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की जाएगी। फॉरेंसिक जांच के जरिए सबूतों को जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की व्यवस्था भी की जाएगी। इतना ही नहीं दो महीने में ट्रायल पूरा करना होगा। अगर अपील दायर होती है तो 6 महीने में निपटारा करना होगा। नाबालिग के साथ बलात्कार के केस को कुल 10 महीने में खत्म करना होगा।
    आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 के मुताबिक, किसी महिला से बलात्कार के मामले में अब न्यूनतम सजा 10 साल के कठोर कारावास की होगी जो उम्रकैद तक विस्तारित हो सकती है। उम्रकैद का मतलब है कि व्यक्ति को जीवन के अंत तक रिहा नहीं किया जाएगा।
    दिसम्बर 2012 में निर्भया मामले के बाद आपराधिक कानूनों में संशोधन किया गया था। इसके तहत किसी भी महिला से बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा सात साल की कठोर कारावास रखी गई थी। जम्मू कश्मीर के कठुआ और गुजरात के सूरत जिले में हाल ही में लड़कियों से बलात्कार और हत्या की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है।
    नवजात से लेकर 12 साल की कम उम्र तक की नाबालिग का बलात्कार करने वालों को कम से कम 20 साल या ताउम्र सजा या फिर मौत की सजा हो सकती है।
    नवजात से लेकर 12 साल की कम उम्र तक की नाबालिग के सामूहिक बलात्कार की स्थिति में या तो पूरी जिंदगी जेल में गुजारनी होगी या फिर मौत की सजा। बारह साल से 16 साल की उम्र की नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार की सूरत में दोषियों को पूरी उम्र जेल में गुजारनी होगी।
    16 साल से कम उम्र की नाबालिग के साथ बलात्कार करने के दोषी के लिए कम से कम 20 साल जेल में गुजारनी होगी जिसे पूरी जिंदगी तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। अभी कम से कम सजा 10 साल के लिए है।
    16 साल से ऊपर की उम्र के किसी से बलात्कार होता है तो उसके लिए कम से कम 10 साल जेल की सजा होगी जिसे पूरी जिंदगी तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। अभी कम से कम सजा 7 साल के लिए है।
    बलात्कार के सभी मामलों की जांच का काम दो महीने में पूरा करना जरुरी होगा। मुकदमे पर बहस वगैरह के लिए भी दो महीने का वक्त तय किया गया है। वहीं अपील को 6 महीने के भीतर निबटाना होगा।
    16 साल से कम उम्र की नाबालिग के बलात्कार, चाहे वो सामूहिक बलात्कार ही क्यों ना हो, के मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी। सोलह साल से कम उम्र की नाबालिग के बलात्कार के मामले में जमानत की याचिका पर सुनवायी के पहले प्रभावित बेटी के प्रतिनिधियों और सरकारी वकील को 15 दिन का नोटिस मिलेगा।
    व्यवस्था में सुधार किया जाएगा, नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। सरकारी वकीलों के नए पद घोषित होंगे। सभी थानों और अस्पतालों में बलात्कार पीडि़ता के लिए फोरेंसिक किट उपलब्ध कराए जाएंगे। बलात्कार से जुड़े मामलों को समयबद्ध तरीके से निबटाने के लिए विशेष तौर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्ति होगी।
    हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश में बलात्कार से जुड़े मामलों के लिए विशेष फॉरेसिंग लैब बनाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि तमाम उपायों को तीन महीने में अमली जामान पहनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही ये भी तय हुआ है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में यौन अपराधियों का प्रोफाइल तैयार किया जाएगा और तमाम राज्य आपस में इस जानकारी को साझा करेंगे। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • मुंबई, 22 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में भारत की बात प्रोग्राम में डॉक्टरों को लेकर जो बयान दिया था उसकी आलोचना होनी शुरू हो गई है। एसोसिएशन ऑफ मेडिकल कंसल्टेंट्स (मुंबई) और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर असंतोष व्यक्त किया है जिसमें उन्होंने डाक्टरों के फर्जीवाड़े का जिक्र करते हुए उन्हें फार्मास्येटिकल कंपनियों को प्रमोट करने के लिए विदेशी अधिवेशनों में भाग लेने की सलाह दी थी। आईएमए की तरफ बोलते हुए डॉ. विनोद शर्मा ने प्रधानमंत्री के उस बयान को शर्मनाक बताया है। वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डा. रवि वांखेडकर ने कहा कि भारतीय डाक्टरों को लेकर मोदी की टिप्पणी से हमसब नाराज हैं, और वह भी लंदन में जहां का 70 प्रतिशद्य मेडिकल सिस्टम भारतीयों द्वारा चलता है।
    उन्होंने कहा कि जहां तक दवाइयों के दाम का सवाल है वह सरकार के हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय मेडिकल एसोसिएशन पीएम मोदी से उनके बयान पर पुनर्विचार करने की अपील करता है।
    पीएम ने कहा था कि डॉक्टर फार्मास्यूटिकल फर्मों को बढ़ावा देने के लिए विदेशों में सम्मेलनों में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा था कि सस्ते विकल्प उपलब्ध होने पर भी डॉक्टर अक्सर महंगी दवाएं लिखते हैं। पीएम पिछले दिनों पांच दिनों विदेश यात्रा पर थे। उस दौरान उन्होंने यह टिप्पणी लंदन में की थी।  (वन इंडिया)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। मुजफ्फरनगर जिले में एक 13 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। यह मासूम बच्ची जिस डॉक्टर के पास अपना इलाज कराने के लिए गई थी, उसी डॉक्टर ने उसके साथ रेप किया। यह घटना मंगलवार की है। पीडि़त बच्ची के परिवार वालों का कहना है कि उनकी बच्ची पिछले दो दिनों से लापता थी अचानक बदहवासी की हालत में उनकी बच्ची जब घर पहुंची तो उसे देखकर परिवार वालों के होश उड़ गए। पीडि़त बच्ची ने जब अपने साथ हुए यौन अपराध के बारे में घरवालों को बताया तो परिवार वालों ने तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
    इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीडि़त मासूम का मेडिकल जांच कराया। पुलिस का कहना है कि यह बच्ची अपना इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास गई हुई थी। डॉक्टर ने ड्रग इंजेक्शन देकर लड़की को बेहोश किया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले के आरोपी डॉक्टर को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि चिकित्सक के क्लिनिक से कई सारी संदिग्ध चीजें मिली हैं जिसको लेकर जांच जारी है।  (जनसत्ता)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने की 11 तारीख को नेपाल जा रहे हैं। भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी यात्रा के दौरान राजधानी काठमांडू के अलावा जनकपुर भी जा सकते हैं। जनकपुर नेपाल का अहम धार्मिक स्थल है। इसकी अहमियत भारत में भी है क्योंकि ऐसा माना जाता है रामायण काल के राजा जनक की राजधानी यही थी। यहीं भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। पौरणिक मान्यता के हिसाब से आज भी नियत तिथि पर अयोध्या, उत्तर प्रदेश से राम बारात जनकपुर पहुंचती है। फिर जनकपुर में राम-सीता विवाह की रस्में निभाई जाती हैं।
    बहरहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा की भी अपनी अहमियत है क्योंकि बीते कुछ समय से भारत-नेपाल के संबंध चीन के बढ़ते दखल के कारण कुछ असहज हो गए थे। मगर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा 'ओलीÓ इस बार पद संभालने के तुरंत बाद सबसे पहले भारत की यात्रा पर आए। उन्होंने छह से आठ अप्रैल के बीच नई दिल्ली की यात्रा के दौरान भारत के साथ अपने देश के संबंधों को पहले की तरह सामान्य बनाने की पहल की। और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल जा रहे हैं जो इस कोशिश की सफलता का संकेत है।
    नेपाल और भारत के राजनयिक इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताते हैं, अभी तैयारियां चल रही हैं। हमें प्रधानमंत्री मोदी की जनकपुर यात्रा का कार्यक्रम बनाने के लिए भी कहा गया है। उनकी यह यात्रा नवंबर-2014 से लंबित है। अगर हुई तो अब तक के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी नेपाल यात्रा होगी।  (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • मुंबई, 22 अप्रैल । गैंगस्टर अबू सलेम दूसरी शादी करना चाहता है। बताया जाता है कि इसके लिए उसने 45 दिन की पैरोल (जेल से बाहर जाने की इजाजत) मांगी थी। लेकिन नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त ने उसकी अर्जी खारिज कर दी है।
    खबरों के मुताबिक सलेम ने विशेष विवाह कानून के तहत पैरोल के लिए अर्जी लगाई थी। इसमें उसने दलील दी थी कि वह 12 साल, तीन महीने, 14 दिन से जेल में है। इस दौरान उसने एक बार भी न तो छुट्टी ली और न ही जेल से बाहर गया। लिहाजा इस बार उसकी पैरोल मंजूर की जानी चाहिए क्योंकि वह पांच मई को सैयद बहार कौसर उर्फ हिना से निकाह करना चाहता है।
    बताया जाता है कि उसकी अर्जी कोंकण के सभागीय आयुक्त के कार्यालय से होती हुई ठाणे के पुलिस आयुक्त के पास पांच अप्रैल को पहुंची थी। इसके बाबत मुंबई पुलिस ने तफसील से इसकी तस्दीक की और फिर इसे खारिज कर दिया गया। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब सलेम ने पैरोल की अर्जी लगाई हो। इससे पहले भी वह हिना से शादी के लिए पैरोल मांग चुका है। उसका दावा यह भी है कि वह हिना से फोन पर ही निकाह कर चुका है।
    साल 1993 के श्रृंखलाबद्ध मुंबई बम धमाकों के आरोपित सलेम को आजीवन कारावास की सजा हुई है। वह इस वक्त मुंबई तलोजा जेल में सजा काट रहा है। उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था। (एएनआई)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • कैबिनेट की मंजूरी

    नई दिल्ली, 21 अप्रैल। बारह साल तक की बच्ची से रेप के दोषियों को मौत की सजा देने के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। शनिवार को प्रधानमंत्री आवास पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। अब सरकार इसके लिए अध्यादेश लाएगी। कैबिनेट की बैठक में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस यानी पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी मिलने से 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो गया।
    जम्मू के कठुआ और उत्तर प्रदेश के एटा में नाबालिग बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसके बाद सरकार ने नाबालिग बच्चियों से रेप करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने का फैसला लिया है। इससे पहले महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि वो कठुआ और हाल में हुई दूसरी बलात्कार की घटनाओं से बहुत दुखी हैं और उनका मंत्रालय बहुत जल्द ही पॉक्सो एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने पेश करेगा।
    फिलहाल इस कानून में दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान नहीं है। कैबिनेट की बैठक के एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जवाब में एक पत्र देकर कहा था कि वह पॉक्सो एक्ट में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जिसके तहत 12 साल से कम की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए फांसी की सजा का प्रावधान होगा।
    सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार और उसके बाद हत्या की घटना के बाद से ऐसे अपराध के लिए फांसी की सजा की मांग उठ रही है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जब इस प्रस्ताव के बारे में कहा तो उन्हें हर तरफ से इसको लेकर समर्थन मिला।
    नाबालिगों से बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर खींचा था। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा था कि सिर्फ 2016 में ही नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के 19,675 मामले सामने आए। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री को इन मामलों में तेजी से सुनवाई करके पीडि़तों को न्याय दिलाने का उपाय करना चाहिए।
    दो दिन पहले ही मेनका गांधी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर यौन उत्पीडऩ से निपटने के लिए स्पेशल सेल बनाने को कहा था। मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल को लिखे गए पत्र में मेनका गांधी ने कहा था कि ऐसे मामलों की जांच और सबूत इक_ा करने के लिए पुलिस के लोगों की विशेष ट्रेनिंग होनी चाहिए और राज्यों में फॉरेंसिक लैब की स्थापना होनी चाहिए, जिससे दोषी बच न सके और उन्हें तेजी से सजा दिलाई जा सके।
    वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, मैं पॉक्सो एक्ट में संशोधन की लंबे समय से मांग कर रही हूं। हम इसका स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चियों से रेप के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाई जानी चाहिए।  (आज तक)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल। क्या पगड़ी पहनना सिख धर्म में अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान यह सवाल किया। मामला दिल्ली के एक साइकलिस्ट जगदीप सिंह पुरी से जुड़ा है जिन्होंने स्थानीय साइकलिंग एसोसिएशन के नियमों के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। नियमों के मुताबिक किसी साइकिल प्रतियोगिता में भाग लेते समय हेलमेट पहनना जरूरी है। जगदीप सिंह पुरी ने इसके खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा कि वे हेलमेट नहीं पहन सकते क्योंकि सिख धर्म के अनुसार उनके लिए पगड़ी पहनना अनिवार्य है।
    इस पर जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एलएन राव की बेंच ने सवाल किया कि सिख धर्म के तहत सिर को ढकना अनिवार्य है या पगड़ी पहनना। बेंच ने सिख समुदाय के उन खिलाडिय़ों का उदाहरण दिया जिन्होंने खेलों में भाग लेने के दौरान पगड़ी नहीं पहनी थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने पुरी के वकील आरएस सूरी से कहा, हम इसे (धार्मिक नियम) को समझते हैं। लेकिन क्या आपने ऐसा कोई सबूत दिया जो बताए कि सिख धर्म में केवल पगड़ी पहनना अनिवार्य है? बिशन सिंह बेदी जब क्रिकेट खेलते थे तो अपना सिर साधारण तरीके से ढकते थे। उन्होंने कभी पगड़ी नहीं पहनी। और युद्ध में सिपाही क्या करते हैं? क्या वे हेलमेट नहीं पहनते? 
    आपको पगड़ी की परिभाषा तय करने की जरूरत है।
    सुनवाई के दौरान आरएस सूरी ने बेंच को बताया कि केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत सिखों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने से छूट दी गई है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई दूसरे देशों में अन्य समुदाय के लोगों को खेल के दौरान पगड़ी पहनने की अनुमति है। सिख समुदाय भी उनमें से एक है। इस पर बेंच ने मिल्खा सिंह का उदाहरण देते हुए कहा, महान खिलाडिय़ों ने कभी पगड़ी नहीं पहनी है। हमें लगता है कि पगड़ी पहनना नहीं बल्कि सिर ढकना अनिवार्य है।
    जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हेलमेट पहनने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि इससे सुरक्षा ही मिलती है। उन्होंने कहा, आप इसे न पहनकर खतरा क्यों उठाते हैं? आप एक साइकिल प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। आप अपने सिर को नुकसान पहुंचा सकते हैं और बाद में कहेंगे कि आयोजकों ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया। बेंच ने अगली सुनवाई की तारीख 23 अप्रैल तय करते हुए याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे पगड़ी के मुद्दे पर किसी प्राधिकारी को कोर्ट में लेकर आएं। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • सूरत, 21 अप्रैल। सूरत में 11 साल की बच्ची के रेप और मर्डर की गुत्थी को आखिरकार पुलिस ने सुलझा लिया है। केस में नया खुलासा सामने आया है कि बच्ची और उसकी मजबूर मां को महज 35 हजार रुपयों में हैवानों ने खरीदा था। मां को बंधुआ मजदूरी के नाम पर खरीद तो लिया गया, लेकिन सिरफिरों की गंदी नजर उस पर लगातार बनी हुई थी।
    दरअसल, आरोपी और उसका एक भाई मार्बल यूनिट में कॉन्ट्रैक्टर हैं जबकि दो अन्य भाई उनके लिए काम करते हैं। केस उस वक्त सामने आया जब 6 अप्रैल को सूरत में सोसाइटी के पीछे क्रिकेट ग्राउंड में एक 11 साल की बच्ची का शव मिला।
    जांच में पाया गया कि बच्ची के साथ 8 बार रेप किया गया और दरिंदगी को अंजाम देने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। वहीं 9 अप्रैल को घटनास्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक महिला की लाश भी मिली थी। बच्ची के साथ इस हद तक बर्बरता की गई कि उसके शरीर पर चोट के 86 निशान पाए गए।
    हरसाई गुर्जर (35) को राजस्थान के सवाई माधोपुर से गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा शुक्रवार को हरसाई के तीन भाईयों को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि हरसाई ने 15 मार्च को बच्ची और उसकी मां को एक शख्स से 35 हजार में खरीदा था। जिसके बाद वह दोनों को सूरत ले गया और वहां उनके साथ रेप करने लगा। महिला द्वारा विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी गई। 
    पुलिस ने बताया कि हरसाई बच्ची को अपने भाई हरि सिंह के घर ले गया। जहां उसने कई दिनों तक बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद 5 अप्रैल को उसने बच्ची की हत्या कर दी क्योंकि उसे बच्ची को छिपाकर रखना मुश्किल हो रहा था। बच्ची के शव को कार में रखकर उसने उसे घर से 1.5-2 किलोमीटर की दूरी पर फेंक दिया। इस मामले को सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की मदद की। वीडियो की जांच में पुलिस ने एक कार देखी जिसके बाद उसके मालिक का पता लगाया गया और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। (अमर उजाला)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने वाली कांग्रेस ने 25 साल पहले सत्ता में रहते हुए ऐसी ही कार्यवाही का विरोध किया था। दिलचस्प बात यह है कि पहले तीन मौकों पर उस वक्त महाभियोग प्रस्ताव लाए गए थे जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी। मई 1993 में जब पहली बार सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति वी रामास्वामी पर महाभियोग चलाया गया तो वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में कपिल सिब्बल ने ही लोकसभा में बनाई गई विशेष बार से उनका बचाव किया था। 
    कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा मतदान से अनुपस्थित रहने की वजह से यह प्रस्ताव गिर गया था। उस वक्त केंद्र में पी वी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। न्यायमूर्ति रामास्वामी के अलावा वर्ष 2011 में जब कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया तो भी कांग्रेस की ही सरकार थी। 
    सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति पी डी दिनाकरण के खिलाफ भी इसी तरह की कार्यवाही में पहली नजर में पर्याप्त सामग्री मिली थी, लेकिन उन्हें पद से हटाने के लिये संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस और छह अन्य विपक्षी दलों ने देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर 'कदाचारÓ और 'पद के दुरुपयोगÓ का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था। 
    राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग का नोटिस देने के बाद इन दलों ने कहा कि संविधान और न्यायपालिका की रक्षा के लिए उनको भारी मन से यह कदम उठाना पड़ा है। (भाषा)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • इंदौर, 21 अप्रैल । कठुआ, सूरत, एटा और इटावा में मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी की खबरों के बीच ऐसी ही एक खबर इंदौर से आई है। इंदौर में 8 महीने की बच्ची के साथ रेप हुआ और उसके बाद उसकी हत्या की गई।
    पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जब बच्ची की लाश मिली तो उसके निजी अंग क्षत-विक्षत हालत में मिले। शुरूआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी बच्ची के रेप की बात सामने आई है।
    पुलिस ने बताया, आरोपी रिश्ते में पीडि़त बच्ची का मामा है, घटना के पीछे कारण बच्ची की मां से आरोपी का झगड़ा होना बताया जा रहा है। आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।(एबीपी न्यूज)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । केंद्र सरकार द्वारा 12 साल से कम उम्र के बच्चों से दुष्कर्म पर मौत की सजा के प्रस्ताव के बाद दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने कहा कि वह नए कानून के लागू होने तक अपना अनशन खत्म नहीं करेंगी। मालीवाल के अनशन का शुक्रवार को आठवां दिन रहा। जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ व उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दुष्कर्म की घटनाओं के विरोध में मालीवाल (33) ने बीते सप्ताह राजघाट पर अपना अनशन शुरू किया और दोषी दुष्कर्मियों के खिलाफ सख्त कानून के तत्काल क्रियान्वयन की मांग की। 
    उन्होंने कहा, हर रोज सरकार द्वारा अदालतों में हलफनामे जमा किए जाते हैं। जब तक कानून लागू नहीं होता, मैं नहीं रूकूंगी। नाबालिगों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को छह महीने के भीतर मौत की सजा का कानून होना चाहिए। 
    इससे पहले दिन में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह 12 साल से कम के बच्चों से दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा का प्रस्ताव कर रहे हैं। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, स्वाति मालीवाल बधाई। अब आपको अनशन खत्म करना चाहिए। हम सभी को अब इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर काम करना चाहिए और बाकी की मांगों के लिए काम जारी रखना चाहिए। इस पर मालीवाल ने कहा कि वह केजरीवाल के आग्रह का सम्मान करती हैं, लेकिन वह अनशन नहीं खत्म करेंगी।(एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • गाजियाबाद, 21 अप्रैल । गाजियाबाद के रहने वाले 21 साल के रवि रस्तोगी की बारात की सूमो घर से नेशनल हाईवे पर कार चढऩे ही वाली थी कि जाम की वजह से ड्राइवर ने कार बैक कर ली और फोन पर बात करने लगा। और इस तरह से धीरे-धीरे सरकती हुई कार 20 फीट गहरे नाले में जा गिरी। नेशनल हाईवे 24 के किनारे किसी तरह का चेतावनी चिन्ह नहीं था। 
    सूमो के पीछे आ रहे बाराती जतिन रस्तोगी भी नाले में कूद पड़े और शीशा तोड़कर एक महिला को खींचने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा वजन की वजह से उसे निकाल नहीं सके। फिर कुछ लोगों को निकाला जा सका। 
    मृतकों में दूल्हे रवि रस्तोगी के पिता, दूल्हे के ताऊ और उनके बड़े बेटे का पूरा परिवार ही खत्म हो गया। दूल्हे के 2 भांजे भी मौत के गाल में समा गए। (एनडीटीवी)

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