राष्ट्रीय

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • जबलपुर, 25 अप्रैल । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज करते हुए कहा कि अपनी निश्चित पराजय को देखकर मोदी अब इंटरव्यू का सहारा ले रहे हैं, यह इंटरव्यू पूरी तरह से प्रायोजित है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस इंटरव्यू को संज्ञान में लेने की सलााह भी दी। श्री बघेल जबलपुर में कांग्रेस प्रत्याशी विवेक तन्खा के समर्थन में चुनावी सभा करने आये थे। इस दौरान वे पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
    श्री बघेल ने मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल को असफल बताकर चुनावी वादे पूर नहीं करने का आरोप लगाया। मोदी पर तंज कसते कहा कि वे लोगों के हाथों में झाड़ू पकड़ाकर खुद विदेश यात्रा पर करते हैं। पांच साल असफल रहने के बाद अगले पांच साल क्या करेंगे, इसका उनके पास कोई हिसाब नहीं है। बीजेपी पर सेना के नाम पर वोट मांगने का आरोप लगाया। चुनाव के दौरान सवाल-जवाब पर भी सीएम ने तंज कसा उन्होंने कहा कि बीजेपी के विरोध में बोलना राष्ट्र विरोधी है क्या ? उन्होंने बताया कि सभी राष्ट्रवाद के दायरे में आते हैं। मोदीजी के पास जनता के सवालों का जवाब नहीं है। नोटबंदी के बाद कालाधन कहां गया पता नहीं चला। राहुल गांधी के पास सभी सवालों के हैं जवाब, लेकिन मोदीजी को सवाल पूछना रास नहीं आता।
    अक्षय कुमार और मोदी के इंटरव्यू को बघेल ने प्रायोजित बताया। चुटकी लेते हुए कहा कि नकली पत्रकारों को छोड़ असली पत्रकारों को इंटरव्यू दे रहे हैं मोदी। सीएम ने अक्षय कुमार को बाहरी बताते हुए कहा कि वे भारतीय नहीं हैं, उनके पास कनाडा की नागरिकता है। उन्होंने कहा कि पेड न्यूज के दायरे में है मोदी-अक्षय का साक्षात्कार। चुनाव आयोग को संज्ञान में लेने की दी सलाह।
    भूपेश बघेल ने कांग्रेस की न्याय योजना की तरीफ में कहा कि 72 हजार के जरिए निश्चित ही गरीबी पर वार होगा। बघेल ने अमित शाह पर भी तंज कसा, उन्होंने कहा कि अटल-आडवाणी की भाजपा को देखा, लेकिन नई भाजपा का नेतृत्व तड़ीपार के हाथों पहली बार देखा। बघेल ने भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर भी निशाना साधा, साध्वी पर छत्तीसगढ़ में चाकूबाजी करने का आरोप लगाया। बघेल का दावा है कि केंद्र में किसी हालत में एनडीए की सरकार नहीं बनने वाली। भूपेश ने मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज को गब्बरसिंह के अंदाज में  भाषण देने वाला बताया, और कहा- हार देख कर बौखला गए हैं भाजपा नेता। (पलपलइंडिया)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • अहमदाबाद, 25 अप्रैल । गुजरात की महिला एवं बाल विकास मंत्री विभावरी दवे के खिलाफ भावनगर में आचार संहिता के उल्लंघन के लिए बुधवार को मामला दर्ज किया गया है। कांग्रेस नेता द्वारा चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करने के बाद यह मामला दर्ज किया गया है।
    सूचना के अनुसार विभावरी देवी 23 अप्रैल को हो रहे तीसरे चरण के चुनाव के दौरान भावनगर सिटी पोलिंग बूथ पर वोट देने पहुंचीं तो उन्होंने नारा लगाया कि मोदी हैं तो मुमकिन है। वह भावनगर पूर्वी क्षेत्र से विधायक हैं।
    शुरू में भावनगर लोकसभा सीट से सांसद और कांग्रेस नेता मनहर पटेल ने इस मुद्दे को उठाया और बाद में बीजेपी की राज्य इकाई ने चुनाव निकाय के साथ इसकी शिकायत दर्ज कराई। बाद में मंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
    गुजरात में तीसरे चरण के चुनाव के लिए 64.11 फीसदी के साथ के सबसे ज्यादा वोटिंग हुई थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार पिछली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 63.66 फीसदी था।
    यह पहली बार नहीं हुआ है जब किसी नेता के खिलाफ इस तरह का मामला दर्ज हुआ है। इससे पहले विवादित बयान देने के कारण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती के ऊपर चुनाव आयोग ने उनके ऊपर कुछ दिनों के लिए भाषण देने पर रोक लगा दिया था।
    दरअसल लोकसभा चुनाव सात चरणों में होना है। जिसमें से तीन चरण के चुनाव हो चुके हैं। चुनावों के नतीज़ों की घोषणा 23 मई को की जाएगी। (न्यूज18)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • कोलकाता, 25 अप्रैल । पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में खुले में शौच करना बुधवार को एक किसान को भारी पड़ गया। इसमें मजेदार ये हुआ कि खुले में शौच कर रहे किसान के साथ किसी ग्रामीण या अधिकारी ने कुछ नहीं किया, बल्कि एक हाथी ने उन्हें सजा दी। हाथी ने किसान को अपने सूड़ से उठा लिया और 50 मीटर दूर जाकर पटक दिया। 55 साल के किसान (निरंजन साहिश) की हालत खतरे से बाहर है और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
    किसान को पटकने के बाद हाथी जंगल में चला गया। घटना के कुछ देर बाद तक किसान अकेले जमीन पर गिरे रहे। बाद में वन विभाग के अधिकारी ने किसान को अस्पताल में भर्ती कराया। निरंजन को पैरों और पीठ में चोट लगी है।
    इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग घटनास्थल की ओर नहीं जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि खाने की तलाश में हाथी गांव की तरफ आया होगा, लेकिन इंसान को देखते ही वह भडक़ गया होगा जिसके बाद यह घटना घटी। गांव वालों का कहना है कि निरंजन साहिश हर दिन की तरह बुधवार को भी शौच के लिए गया था। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । अपने पति के बगल में बैठी, कभी हिंदी तो कभी गुजराती में बोलती बिलकीस बानो। आंसुओं से उनका गला बार-बार रूंध रहा था इसलिए वो रुक-रुककर बोल रही थीं। बीच-बीच में उनके पति याक़ूब उनके कंधे पर हाथ फेरते, उनका हौसला बढ़ाते।
    साल 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार और अपने परिवार के 14 लोगों की हत्या देखने वाली बिलकीस बानो को 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ मिला है।
    शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को आदेश दिया है कि वो बिलकीस को मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये, उनकी पसंद की जगह पर एक घर और एक सरकारी नौकरी दे।
    अदालत के आदेश के बाद बिलकीस और उनके पति ने दिल्ली के प्रेस क्लब में मीडिया से बात की। बिलकीस ने कहा कि वो मुआवजे का एक हिस्सा यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और उनके बच्चों के लिए दान करना चाहती हैं।
    बिलकीस ने कहा कि वो अपनी बेटी के वकील बनने का सपना पूरा होते देखना चाहती हैं। उन्होंने कहा, एक पीडि़ता के रूप में मैंने अपने सारे सपनों को मार दिया है। एक दोषमुक्त और जीवित बचे हुए व्यक्ति के रूप में अब उनकी कोई सीमा नहीं है और मेरे अधिकतर सपने मेरे और मेरे बच्चों के लिए हैं, दूसरों के लिए हैं। मैं इस पैसे का इस्तेमाल अपने बच्चों को तालीम देने और एक स्थिर जि़ंदगी देने के लिए करूंगी। मेरी बेटी जो वकील बनना चाहती है, शायद एक दिन इसी न्यायालय के सामने दूसरों के लिए न्याय मांगने खड़ी होगी, यह मेरी दुआ है।
    बिलक़ीस ने कहा, मैंने हमेशा कहा है कि मेरी जीत उन सब औरतों की तरफ़ से भी है, जिन्होंने बहुत तकलीफ़ें तो झेली हैं मगर कभी अदालत तक नहीं पहुंच पाईं। मैं इस पैसे का एक हिस्सा सांप्रदायिक हिंसा की शिकार दूसरी औरतों के न्याय पाने के उनके संघर्ष में और उनके बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए खर्च करना चाहती हूं।
    इससे पहले गुजरात सराकर ने बिलकीस बानो को 5 लाख रुपये मुआवज़ा देने की पेशकश की थी जिस पर बिलक़ीस बानो ने याचिका दायर करके इसे अपर्याप्त बताया था।
    2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रणधी कपूर गांव में एक भीड़ ने बिलक़ीस बानो के परिवार पर हमला किया था।
    इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलक़ीस बानो के साथ गैंगरेप किया गया। उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेहरमी से हत्या कर दी गई। उस वक़्त बिलक़ीस कऱीब 20 साल की थीं।
    इस दंगे में बिलक़ीस बानो की मां, छोटी बहन और अन्य रिश्तेदार समेत 14 लोग मारे गए थे। इस मामले कि सुनवाई की शुरुआत अहमदाबाद में हुई थी लेकिन सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ कीआशंका जताने पर मामले को साल 2004 में बॉम्बे हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।
    21 जनवरी 2008 को स्पेशल कोर्ट ने 11 लोगों को हत्या और गैंगरेप का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। इस मामले में पुलिस और डॉक्टर सहित सात लोगों को छोड़ दिया गया था।
    सीबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दोषियों के लिए और कड़ी सज़ा की मांग की थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मई, 2017 में बरी हुए सात लोगों को अपना दायित्व न निभाने और सबूतों से छेड़छाड़ को लेकर दोषी ठहराया था।
    2002 में हुए गुजरात दंगों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें से ज्यादातर मुसलमान थे। इन दंगों की शुरुआत गोधरा में 60 हिंदू तीर्थ यात्रियों की मौत के बाद हुई थी, जिनकी मौत साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगने के कारण हुई थी। जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर दंगे भडक़ गए। (बीबीसी)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । एक उम्मीदवार के दो सीटों से चुनाव लडऩे पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। इससे पहले चुनाव आयोग ने हलफनामा दायर कर एक प्रत्याशी के एक ही सीट से चुनाव लडऩे वाली याचिका का समर्थन किया था। बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में एक से अधिक सीटों पर चुनाव लडऩे के खिलाफ उम्मीदवारों पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की है।
    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। आयोग ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि दो जगह से चुनाव लडऩा फिर एक सीट छोड़ देना मतदाताओं के साथ अन्याय है। इससे आर्थिक बोझ पड़ता है। इतना ही नहीं आयोग ने सुझाव दिया कि सीट छोडऩे वाले से दोबारा चुनाव का खर्च वसूला जाना चाहिए।
    आयोग ने कहा था कि उसने 2004 के चुनाव सुधार प्रस्ताव में ही कहा था कि कानून में संशोधन होना चाहिए और एक से ज्यादा सीट पर चुनाव लडऩे की इजाजत नहीं होनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए नियम का समर्थन किया था। सरकार ने कहा था कि यह प्रावधान उम्मीदवार को बेहतर विकल्प प्रदान करता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है।
    दरसअल अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में जनप्रतिनिधि कानून की धारा 33(7) को अवैध घोषित करने की मांग की गई, जिसके तहत किसी व्यक्ति को दो सीटों से चुनाव लडऩे की अनुमति दी गई है। याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने अगर उम्मीदवार दोनों जगह से जीत जाता है तो उसे एक सीट छोडऩी पड़ती है और उस छोड़ी हुई सीट पर दोबारा उप चुनाव कराया जाता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में याचिका का समर्थन किया था।
    सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है। अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की थी। इससे कोर्ट ने इंकार कर दिया है। बता दें, इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो सीटों अमेठी और वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने दो सीटों वडोदरा और वाराणसी व सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगढ़ सीट से चुनाव लड़ा था। बाद में मोदी ने वडोदरा और मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ दी थी। (आजतक)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • तेलंगाना, 25 अप्रैल । तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन ने 18 अप्रैल को कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के परिणाम घोषित किए। परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के आत्महत्या करने का मामला सामने आने लगा। 

    रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों को परिणाम सही नहीं लगे जिसके चलते कई छात्रों ने मौत को गले लगा लिया। सात दिनों के भीतर अभी तक 19 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। लगातार हो रही आत्महत्याओं के चलते अभिभावक और छात्र जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए  राज्य सरकार ने बुधवार (24 अप्रैल) को परीक्षा में फेल घोषित हुए 3 लाख से अधिक छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया। 
    इस साल, परीक्षा के लिए 9.74 लाख छात्र उपस्थित हुए। उनमें से, 3.28 लाख फेल हो गए हैं। वहीं अब उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
    तेलंगाना बोर्ड ने इस साल परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन से लेकर रिजल्ट जारी करने की पूरी जिम्मेदारी एक प्राइवेट फर्म को दी थी। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि फर्म की प्रणाली ने हजारों छात्रों को गलती से फेल कर दिया या उन्हें परीक्षा के लिए अनुपस्थित कर दिया। 
    आत्महत्या करने वालों में नारायण कॉलेज का एक छात्र जी नागेंद्र था, जिसने परीक्षा में गणित विषय में फेल होने की वजह से आत्महत्या कर ली। नागेंद्र ने अपने घर पर फांसी लगा ली थी। उनके पिता जी विवेकानंद ने कहा कि वह पढ़ाई में अच्छे थे।  हम विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि वह मैथ्स में फेल हो गया, वह उसका पसंदीदा विषय था। रिजल्ट जारी होने के बाद वह दुखी रहने लगा और खानी-पीने से मना करने लगा।  लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि वह अपनी जान ले लेगा। 
    वहीं निजामाबाद के वी वेनेला, जो दो विषयों में असफल रहे थे। जिस दिन रिजल्ट जारी हुआ थी उसी रात को उन्होंने कीटनाशक दवाई का सेवन किया और सुबह उनकी मृत्यु हो गई। 
    तेलंगाना अभिभावक एसोसिएशन के अध्यक्ष एन नारायण ने बताया कि मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण अव्वल छात्रों को कुछ विषयों में 5 या 10 अंक दिए गए हैं और सैकड़ों छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के बावजूद अनुपस्थित किया गया। 
    ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज की के सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बडिय़ां थीं। जब परिणाम घोषित किए गए, तो कंपनी ने स्वीकार किया कि उनमें गड़बडिय़ां थीं, लेकिन उन्होंने कहा कि वे ठीक हो गए थे। अब ऐसा लग रहा है कि पूरी प्रक्रिया गलतियों से भरी थी। 
    कक्षा 11वीं में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र 12वीं कक्षा में फेल हो गए। अभिभावकों ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि पिछले साल की तुलना में छात्रों ने कम अंक हासिल किए हो, लेकिन एक या उससे अधिक विषयों में फेल होने पर सवाल उठ रहे हैं। 
    12वीं की छात्रा जी। नाव्?या को तेलुगू पेपर में 0 अंक मिल थे, नाव्या ने अपना तेलुगू पेपर पुनर्मूल्यांकन  के लिया दिया। पुनर्मूल्यांकन होने के बाद नाव्या को जिस पेपर में 0 अंक प्राप्त हुए थे, उसमें 99 अंक प्राप्त हुए। इसके बाद तेलंगना के रिजल्ट को लेकर बुधवार को विरोध प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया। 
    नव्या का मामला संदेह को मजबूत करता है कि सिस्टम गलतियों से भरा हुआ था। जिसने  ज्यादातर छात्रों को फेल कर दिया। साथ ही कई छात्रों को परीक्षा में शामिल होते हुए भी  अनुपस्थित घोषित कर दिया गया। 
    तेलंगाना पेरेंट्स एसोसिएशन द्वारा एक जनहित याचिका के आधार पर हाईकोर्ट ने मंगलवार को ञ्जस्क्चढ्ढश्व में फेल छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं फिर से जांचने को कहा है। वहीं तेलंगाना शिक्षा विभाग ने अदालत को बताया कि इस प्रक्रिया में कम से कम दो महीने लगेंगे।
    विरोध प्रदर्शन तेज होने के साथ, राज्य सरकार ने उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया। तेलंगाना स्टेट टेक्नोलॉजिकल सर्विस के एमडी जी टी वेंकटेश्वर राव, बीआईटीएस, हैदराबाद के डॉ ए वासन और आईआईटी, हैदराबाद के डॉ। निशांत डोंगरी से मिलकर एक टीम बनाई गई गई है, जो ग्लोबरेना सिस्टम की खामियों की जांच करेगी। (इंडियान एक्सपे्रस)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल। सेना पुलिस में सैनिक के तौर पर महिलाओं की भर्ती के लिए भारतीय थलसेना पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस परियोजना का थलसेना अध्यक्ष का प्रभार संभालते ही जनरल बिपिन रावत ने प्रस्ताव रखा था जिसे रक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में फाइनल मंजूरी दी गई है। इसीबीच सेना की ओर से महिलाओं के लिए जनरल ड्यूटी में सैनिक के तौर पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन आज यानी 25 अप्रैल, 2019 को जारी किया जाएगा। सूचना भारतीय थलसेना की आधिकारिक वेबसाइट द्भशद्बठ्ठद्बठ्ठस्रद्बड्डठ्ठड्डह्म्द्व4।ठ्ठद्बष्।द्बठ्ठ पर उपलब्ध होगी। 
    इसके लिए आवेदन 25 अप्रैल, 2019 से शुरू हो रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख 8 जून, 2019 है। अभ्यर्थियों को पहले कॉमन एंट्रेंस टेस्ट देना होगा जिसके बाद फिजिकल एंड्योरेंस टेस्ट (पीईटी) होगा। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 100 पदों को भरा जाएगा। 
    आयु सीमा : भर्ती के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु साढ़े 17 साल और अधिकतम आयु 21 साल होनी चाहिए। 
    शैक्षिक योग्यता : हर विषय में 33-33 फीसदी या कुल मिलाकर 45 फीसदी नंबरों के साथ 10वीं पास हो या समकक्ष शिक्षा । (नवभारतटाईम्स)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नोएडा, 25 अप्रैल । नोएडा में सेक्टर 90 के पास बुधवार दोपहर को एक युवक से सोने की चेन लूट कर भाग रहे बदमाशों को ग्रामीणों ने पकडक़र जमकर पीटा। इस घटना में एक बदमाश की मौत हो गई, जबकि उसका साथी मौके से भाग गया। बाइक सवार दो बदमाशों को लोगों ने करीब 2 किलोमीटर तक पीछा कर घेर लिया। बदमाशों ने डराने के लिए रास्ते में कई राउंड फायरिंग की। लोगों ने घेरकर एक बदमाश को मार गिराया, जबकि दूसरा भागने में कामयाब रहा। 
    एसएसपी ने बताया कि दोपहर को सेक्टर 90 के पास तनप्रीत नामक युवक अपने चार दोस्तों के साथ यू-ट्यूब पर अपलोड करने के लिए वीडियो बना रहा था। इसी बीच बाइक पर सवार होकर वहां पर दो बदमाश आए। बदमाशों ने तनप्रीत के गले से सोने की चैन झपट ली। जब पीडि़त ने विरोध किया तो बदमाशों ने उनके ऊपर गोली चला दी। 
    गोली की आवाज सुनकर पास के याकूबपुर गांव के लोग दौड़े। ग्रामीणों को आता देख बदमाश बाइक पर सवार होकर भागने लगे। इसी बीच ग्रामीणों ने उनके ऊपर लाठी डंडों एवं सरिया से हमला बोल दिया। उन्होंने बताया कि एक बदमाश के सिर में सरिया लगी, जिसकी वजह से वह मौके पर ही गिर गया और उसकी मौत हो गई। उसका दूसरा साथी मौके से भाग गया। 
    उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान सुनपुरा निवासी प्रवीण के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने युवक से लूटी हुई सोने की चेन बरामद कर ली है। मारे गए बदमाश के पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई है। एसएसपी ने बताया कि फरार बदमाश की गिरफ्तारी की कोशिशें की जा रही हैं। (एजेंसियां)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीडऩ के आरोपों के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में अदालत ने कहा कि अमीर और शक्तिशाली इस अदालत को नहीं चला सकते हैं। कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ षड्यंत्र को लेकर वकील के दावों पर कहा कि अब समय आ गया है कि हम खड़े हों और देश के अमीर एवं ताकतवर लोगों को बताएं कि वे ऐसा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि चार से पांच प्रतिशत वकील ऐसे हैं जो इस महान संस्था को बदनाम कर रहे हैं। कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ षड्यंत्र संबंधी वकील के दावों पर कहा कि इस संस्था को बदनाम करने के लिए एक सोचा समझा हमला किया जा रहा है और सोचा समझा खेल खेला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से इस संस्था से पेश आया जा रहा है, हम उससे नाराज हैं।।। यदि ऐसा होगा तो हम काम नहीं कर पाएंगे।
    इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में विशेष पीठ ने कहा कि वह एक अधिवक्ता के इस दावे की तह तक जाएगी कि मुख्य न्यायाधीश को यौन उत्पीडऩ के आरोप में फंसाने के लिए एक बड़ी साजिश रची गई। तह तक पहुंचने के लिए जांच करते रहेंगे।
    बिचौलियों के सक्रिय होने की जांच करेंगे : जस्टिस अरुण मिश्रा, आर एफ नरीमन और दीपक गुप्ता की विशेष पीठ ने कहा कि हम बिचौलियों के सक्रिय होने और न्यायपालिका के साथ हेराफेरी करने के कथित दावों की जांच करेंगे। इस व्यवस्था में फिक्सिंग की कोई भूमिका नहीं है। हम इसे अंतिम निष्कर्ष तक ले जाएंगे। पीठ ने इस घटनाक्रम को बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला बताया क्योंकि यह देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। 
    विशेष जांच की मांग ठुकराई : कोर्ट ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता का यह आग्रह ठुकरा दिया कि न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल से इस मामले की जांच कराई जाए। पीठ ने कहा कि इस समय न्यायालय किसी भी प्रकार की जांच में नहीं पड़ रहा। हम सीबीआई और खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों से गुप्त मुलाकात कर रहे हैं क्योंकि हम नहीं चाहते कि साक्ष्य सार्वजनिक हों।
    मुख्य न्यायाधीश ने कार्रवाई की : जस्टिस मिश्रा का कहना था कि यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है और मुख्य न्यायाधीश ने कार्रवाई की है। भारत के इतिहास में पहली बार मुख्य न्यायाधीश ने यह कार्रवाई की है। ऐसा पहले से हो रहा था लेकिन किसी मुख्य न्यायाधीश ने ऐसा करने का साहस नहीं दिखाया। 
    अधिवक्ता बैंस को सुरक्षा देने के निर्देश : पीठ ने व्यापक साजिश का दावा करने वाले अधिवक्ता उत्सव सिंह बैंस को पूरी सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए। पीठ ने कहा, न्यायालय नहीं चाहता कि साक्ष्य नष्ट हों या उनके साथ कोई समझौता किया जा सके। (भाषा)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । चौबीस अप्रैल को जारी इलेक्शन कमीशन की ताजा सीजर रिपोर्ट (जब्ती रिपोर्ट) के मुताबिक लोक सभा चुनावों के दौरान जब्त सामान की कुल कीमत  3152.54  करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वर्ष 2014 के लोक सभा चुनावों के दौरान इलेक्शन कमीशन ने कुल 1200 करोड़ रुपये के सामान को जब्त किया था। यानी 2019 के चुनावों के पहले तीन चरण में ही जब्ती करीब 1950 करोड़ ज्यादा हो चुकी है। अब तक इलेक्शन कमीशन ने पहले तीन चरण में करीब 742 करोड़ कैश जब्त किया है, जबकि 2014 के पूरे चुनाव के दौरान सिर्फ 304 करोड़ कैश जब्त किया गया था। 
    चुनाव आयोग ने 24 अप्रैल तक जो सामान जब्त कियाा है, उसमें 742.28  करोड़ रूपये नकदी, 238.87  करोड़ रूपये मूल्य की शराब (टोटल  क्वांटिटी - 123.72  लाख लीटर),  1180.79  करोड़ रूपये मूल्य की ड्रग्स/नारकोटिक्स (गुजरात : 524.34 करोड़, दिल्ली : 352.69  करोड़ और पंजाब : 179.53 करोड़), 942.95 करोड़ रूपये मूल्य का गोल्ड/महंगे मेटल और  47.63  करोड़ रूपये मूल्य का चुनावी गिफ्ट और दूसरे सामान शामिल हैं। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • राहुल संपाल 
    नई दिल्ली, 25 अप्रैल । मध्यप्रदेश की राजनीति में चाणक्य कहे जाने वाले अर्जुन सिंह का परिवार अपनी राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र अजय सिंह इस लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वे सीधी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में है। विधानसभा चुनाव में अजय सिंह को अपने ही गढ़ में हार का मुंह देखना पड़ा था। उनकी पैतृक सीट चुरहट उनके हाथ से निकल गई थी। ऐसे में इस चुनाव में अजय सिंह जीत हासिल करना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
    मध्यप्रदेश का विंध्याचल क्षेत्र पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है। विंध्य क्षेत्र में सीधी, सतना, रीवा और शहडोल लोकसभा सीट आती है। इस क्षेत्र में हमेशा से ही सिंह के परिवार का दबदबा रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सिंह के परिवार के साथ ही प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी भी यहां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को विंध्य क्षेत्र में करारी हार देखने को मिली थी। तीस विधानसभा सीटों पर 24 सीटें भाजपा के खाते में आई थीं।
    पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पिता शिवबहादुर सिंह ने अपना पहला विधानसभा का चुनाव भी चुनहट से ही लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पैतृक सीट और चुरहट के इलाकेदार होने के नाते अर्जुन सिंह यहीं से विधानसभा चुनाव लड़ते थे। अर्जुन सिंह ने अपना पहला विधायकी का चुनाव 1957 में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ा। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए।
    अर्जुन सिंह ने 1991 में सतना लोकसभा का चुनाव लडक़र संसद पहुंचे। पिता अर्जुन सिंह के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद उनके बेटे इस सीट से चुनाव लड़ते रहे और जीतते भी रहे। उन्होंने अपना पहला उपचुनाव 1985 में लड़ा और चुरहट से विधायक बने। हाल ही में हुए विधानसभा में अजय सिंह को हार का सामना करना पड़ा। राज्य में वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे।
    सीधी में अजय सिंह का मुकाबला भाजपा सांसद ?रीति पाठक से है। इस बार भाजपा प्रत्याशी की स्थिति उतनी मज़बूत नहीं है। पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ असंतोष का माहौल है। कई नेता व कार्यकर्ता बेमन से प्रचार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार विंध्याचल की राजनीति में दबदबा रखने वाले अजय सिंह सीधी के बजाए सतना से लोकसभा चुनाव लडऩा चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उनकी बात को नहीं मानकर उन्हें सीधी से टिकट थमा दिया। विधानसभा चुनाव में अगर अजय सिंह जीत हासिल कर लेते तो वह आज मुख्यमंत्री के बाद दूसरे पायदान पर होते।
    वहीं, विंध्याचल क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस ने नया फार्मूला अपनाया है। तीन लोकसभा सीटों पर पार्टी ने ब्राह्मण और ठाकुर उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। भाजपा ने दो सीटों पर ब्राह्मण और एक सीट पर पिछड़ा उम्मीदवार खड़ा किया है।

    विंध्याचल का सियासी मिजाज शुरू से ही अजीब रहा है। जब मध्यप्रदेश की सत्ता पर भाजपा काबिज होती है तो कांग्रेस इस क्षेत्र में बढ़त हासिल कर लेती है। वहीं जब कांग्रेस की लहर होती है तो भाजपा इस क्षेत्र में आगे होती है। विंध्य क्षेत्र के पिछडऩे का एक कारण यह भी रहा है। जब 2018 में कांग्रेस सरकार सत्ता में आई तो 30 विधानसभा सीटों में से 6 सीटें हासिल हुई। इसी चुनाव में कांग्रेस पार्टी के बड़े उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के साधारण उम्मीदवारों ने यहां अच्छी सफलता हासिल की।
    वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ला ने चर्चा में बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र व कांग्रेस के नेता अजय सिंह उर्फ राहुल भैया के नाम से पहचाने जाने वाले के लिए यह चुनाव आसान नहीं है। सीधी विधानसभा में कांग्रेस ने मात्र एक सीट पर जीत हासिल की है। बीजेपी में कुछ नाराज लोगों में विरोध के स्वर जरूर है लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को होता नजर नहीं आ रहा। विधानसभा चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी दो लाख 10 हजार वोट से पीछे थी। इस अंतर को पाटना अजय सिंह के सामने बड़ी चुनौती है।
    अगर इस चुनाव में वे हारते हैं तो पूरे वंश का राजनीति में पतन की ओर चला जाएगा। इसलिए यह चुनाव उनके लिए करो या मरो का चुनाव है।
    वहीं, अर्जुन सिंह के पोते और राहुल सिंह के पुत्र अरुणोदय सिंह ने फिल्मी दुनिया को अपना करियर चुना है। वे कई फिल्मों में काम कर चुके है। (दिप्रिंट)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीडन का आरोप लगाने वाली महिला ने मामले की जांच के लिए बनाए गए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बोबडे पैनल को चिठ्ठी लिखी है। इस चिठ्ठी में आरोप लगाने वाली महिला ने कई सवाल उठाए हैं। पैनल को लिखे खत में महिला ने कहा कि बिना उसकी बात सुने उसका चरित्र हरण कर दिया गया। इसके साथ ही लिखा गया है कि कानून के मुताबिक इन हाउस जांच पैनल में महिला सदस्य का बहुमत व बाहरी व्यक्ति नहीं हैं। वहीं शनिवार की सुनवाई के दौरान जजों व कानूनी अधिकारियों ने इसके पीछे साजिश की टिप्पणी की, जिससे वह भयभीत हैं। 
    साथ ही महिला ने शुक्रवार को इन हाउस जांच पैनल की सुनवाई में कानूनी जानकार की मदद की इजाजत देने और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग की। महिला ने पैनल में जस्टिस रमना को शामिल करने पर भी ऐतराज जताया है। महिला का कहना है कि वह जस्टिस गोगोई के काफी करीब हैं।
    सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीडऩ के आरोपों की आंतरिक जांच के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे को नियुक्त किया गया था। वरिष्ठता क्रम के मुताबिक वह सीजेआई के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। उन्होंने बताया कि नंबर 2 जज होने के नाते प्रधान न्यायाधीश ने उन्हें शीर्ष न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा उनके (सीजेआई के) खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीडऩ के आरोपों की जांच के लिए नियुक्त किया है। 
    न्यायमूर्ति बोबडे ने बताया कि उन्होंने शीर्ष न्यायालय के दो न्यायाधीशों न्यायमूर्ति एनवी रमन और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को शामिल कर एक समिति गठित की है।न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, मैंने समिति में न्यायमूर्ति रमन को शामिल करने का फैसला किया है, क्योंकि वह वरिष्ठता में मेरे बाद हैं और न्यायमूर्ति बनर्जी को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि वह महिला न्यायाधीश हैं।
    बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के उस दावे पर सुनवाई हुई, जिसमें वकील ने कहा था कि सीजेआई के खिलाफ साजिश रची गई है और उनके पास इसके सबूत हैं। वकील उत्सव बैंस ने सुप्रीम कोर्ट में सबूत पेश करते हुए कहा कि सीजेआई को बदनाम करने के लिए मुझे 1.5 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बैंस की ओर से कोर्ट को सौंपे गए सबूतों को देखने के बाद सीबीआई प्रमुख, आईबी प्रमुख और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तलब किया था। 
    सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने दावा किया था कि सीजेआई रंजन गोगोई को बदनाम करने की साजिश रची गई ताकि वो इस्तीफा दे दें। बैंस ने ये भी दावा किया है कि इसके लिए उनसे भी संपर्क किया गया था और कहा गया था कि वो प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस करें। इसे लेकर एक युवक ने उन्हें 1.5 करोड़ रुपये तक देने का ऑफर दिया था। साथ ही उत्सव बैंस दावा किया कि उन्होंने इससे इनकार कर दिया और वो इस मामले की जानकारी देने सीजेआई के घर गए थे लेकिन वो उपलब्ध नहीं थे। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर चुनावी फायदे के लिए राजनीतिक दलों के कथित तौर पर सेना के इस्तेमाल का विरोध हो रहा है। सेना के राजनीतिकण के खिलाफ करीब 260 जाने-माने लोगों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिठ्ठी लिखी है। इन लोगों ने राष्ट्रपति से गुजारिश की है कि चुनाव में फायदे के लिए सेना के नाम का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसपर रोक लगाई जानी चाहिए।
    राष्ट्रपति को भेजी गई इस चिठ्ठी में कुल 156 लोगों ने साइन किए हैं। इसमें उन्होंने सेना के राजनीतिकण पर चिंता जाहिर की है। आने वाले दिनों में इसे खतरे की घंटी भी करार दिया है।
    इस चि_ी में भारतीय सेना को मोदीजी की सेना कहने पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रैली में पाकिस्तान पर हुए एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए भारतीय सेना को मोदीजी की सेना कहा था। इसके बाद उन्हें चुनाव आयोग में सफाई भी देनी पड़ी थी। वहीं, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी ऐसा ही बयान दिया था। चुनाव आयोग ने उन्हें भी नोटिस थमा दिया था।
    राष्ट्रपति को लिखी चि_ी में लोगों ने आपत्ति जताते हुए लिखा कि बेशक चुनाव आयोग ने सेना को लेकर बयान देने वाले नेताओं को नोटिस देकर उनसे सफाई मांगी है, लेकिन इसके बाद भी ऐसे बयान आ रहे हैं। चुनाव आयोग के कड़े रुख के बाद भी नेताओं के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। चिठ्ठी में ये भी कहा गया है कि चुनाव आते ही सेना पर बयानबाजी बढ़ जाती है।
    सेना के राजनीतिकरण के आरोप को लेकर इससे पहले 150 पूर्व सैनिकों के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिठ्ठी लिखने की बात मीडिया में चर्चा में थी। लेकिन, बाद में ये झूठी साबित हो गई। दरअसल, राष्ट्रपति भवन ने सेना की ओर से लिखे किसी भी पत्र के मिलने का खंडन कर दिया। वहीं, कुछ पूर्व सैनिक और सैन्य अधिकारी भी ऐसे किसी चि_ी में साइन करने की बात से पलट गए।
    कांग्रेस ने इस चिठ्ठी को आधार बनाते हुए केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था। कांग्रेस ने कहा था कि केंद्र सरकार सेना का इस्तेमाल अपने चुनाव प्रचार के लिए कर रही है।
    अंग्रेजी अखबार, द टेलिग्राफ, की खबर के मुताबिक, पहली चिठ्ठीअब राष्ट्रपति भवन पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इस चिठ्ठी में रिटायर्ड सैन्य अफसरों के दस्तखत नहीं हैं। (न्यूज18)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • जयपुर, 24 अप्रैल (टाईम्स न्यूज)। एक पर्यटक और उसके गाइड पर सोते हुए बाघ पर पत्थर फेंकने के आरोप में 51 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। मामला राजस्थान के रणथम्भोर टाइगर रिजर्व का है। यहां मंगलवार को जोन-6 के पीलीघाट गेट पर पर्यटक और गाइड ने एक सोते हुए बाघ को देखा। एक वनकर्मी ने बताया, इस दौरान पर्यटक कैमरे के साथ जिप्सी में बैठा रहा, जबकि गाइड से नीचे उतरकर बाघ को जगाने के लिए उस पर पत्थर फेंका।  
    यह सब कुछ पार्क में लगे थर्मल इमेजिंग कैमरे में कैद हो गया, जिन्हें बाघों की गतिविधियों को नोटिस करने के लिए लगाया जाता है। डिविजनल वन अधिकारी मुकेश सैनी ने बताया, पर्यटक और गाइड के टाइगर रिजर्व नियमों के उल्लंघन के बाद हमने उन्हें तुरंत पार्क छोडऩे को कहा और 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
    वन विभाग ने इस पर एहतियाती कदम उठाते हुए पर्यटकों की पूरी दिन की सफारी बुकिंग कैंसिल कर दी। इसके अलावा पार्क में सफारी के लिए गाइड की एंट्री पर भी रोक लगा दी। 

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोपों संबंधी मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में हो रही है। सीजेआई का पक्ष रखनेवाले वकील उत्सव बैंस ने कहा कि चीफ जस्टिस को इस मामले में फंसाया जा रहा और उन्होंने कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए हैं। बेंच ने 12.30 तक आईबी डायरेक्टर, सीबीआई प्रमुख और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को तलब किया है। मामले की सुनवाई आज ही 3 बजे से होगी। कोर्ट ने सीजेआई के वकील को भी सुरक्षा देने का निर्देश दिया।  
    सुबह करीब 11.15 बजे मामले की सुनवाई शुरू हुई और सीजेआई के वकील उत्सव बैंस ने कहा कि इस मामले में चीफ जस्टिस की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है। इस पर बेंच ने पूछा कि आपको क्या कहना है। जवाब में सीजेआई के वकील ने कहा कि मैंने सीलबंद लिफाफे में मटीरियल दिए हैं उसमें सीसीटीवी फुटेज है जो कहानी बयान करती है। कील बैंस ने दावा किया कि एक औद्योगिक घराना चीफ जस्टिस को फंसाने के लिए इस साजिश के पीछे है। 
    स्पेशल बेंच ने दस्तावेज देखने के बाद अटॉर्नी जनरल से कहा कि क्या आप किसी जिम्मेदार जांच अधिकारी को मेरे चैम्बर में बुलाएंगे। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर अभी दिल्ली से बाहर हैं। जॉइंट डायरेक्टर आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए इन हाउस पैनल जांच करेगा, लेकिन न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए की जा रही बड़ी साजिश की भी जांच होनी चाहिए। इसके लिए एसआईटी बना कर मामले की छानबीन हो। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर, सीबीआई प्रमुख और आईबी डायरेक्टर को आज ही साढ़े 12 बजे तक कोर्ट में तलब होने का आदेश दिया। 
    यौन शोषण के आरोप के बाद सीजेआई ने कहा था कि वह निर्दोष हैं और उनकी बेदाग छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से आरोप लगाए जा रहे हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच के आंतरिक समिति गठित की गई है। इस समिति में जस्टिस एस ए बोबड़े की अगुवाई में दो और जस्टिस शामिल हैं, जिनमें एक महिला जस्टिस भी हैं। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रह चुके मार्कन्डेय काटजू ने अपनी जिन्दगी में कई फैसले किए होंगे, लेकिन उनके मुताबिक, आज वह एक अंतरजातीय विवाह को लेकर असमंजस में हैं। मार्कन्डेय काटजू से एक ऐसे पढ़े-लिखे युगल ने सलाह मांगी है, जो शादी करना चाहते हैं, लेकिन अलग-अलग जाति से ताल्लुक रखते हैं, और लडक़ी के माता-पिता विवाह के सख्त खिलाफ हैं।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के अनुसार, बहुत-से युवक-युवतियां उनसे शादी को लेकर सलाह मांगते रहे हैं, जब वे अलग-अलग जातियों से हों, और एक-दूसरे से प्यार करते हों, लेकिन उनके माता-पिता (या किसी एक के माता-पिता) शादी के सख्त खिलाफ हों। मार्कन्डेय काटजू के मुताबिक, चूंकि युवक-युवती ने उनके प्रति विश्वास व्यक्त किया है, इसलिए उन्हें सही सलाह ही देनी चाहिए। लेकिन हाल ही में उन्हें फेसबुक पर एक संदेश मिला, जिसमें अनुसूचित जाति का एक युवक और अन्य पिछड़े वर्ग की एक लडक़ी एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं, और शादी करना चाहते हैं, लेकिन युवती के माता-पिता शादी के सख्त खिलाफ हैं।

    दोनों एक ही शहर में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में नौकरी भी करते हैं, लेकिन लडक़ी के माता-पिता के अनुसार, इस शादी से समाज में उनकी इज़्जत पर हर्फ आएगा।सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के अनुसार, मेरी सोच यह कहती है कि ऐसी स्थिति में विद्रोह करना सही है, क्योंकि जाति व्यवस्था हमारे समाज के लिए श्राप है, और यह जितना जल्दी खत्म हो, उतना बेहतर होगा... अंतरजातीय और अंतरधर्म विवाहों से जातिवाद को खत्म करने में सहायता मिलती है, सो, यह देश के लिए अच्छे हैं...
    लेकिन दूसरी ओर, वास्तविकता को भी देखा जाना जरूरी है... इस मामले में लडक़ी के माता-पिता उच्च रक्तचाप और अन्य रोगों से ग्रसित हैं, और अगर उनकी बेटी एक दलित युवक से शादी कर लेती है, तो यह उनके लिए झटका होगा, जिससे उन्हें दिल का दौरा पड़ सकता है, और उनकी मौत हो सकती है, या वे खुदकुशी कर सकते हैं... जस्टिस मार्कन्डेय काटजू के मुताबिक, उनकी कशमकश यही है, अगर मैं युवक-युवती को शादी करने का सुझाव देता हूं, तो मेरे हाथ खून से रंग सकते हैं... सो, क्या सलाह दूं मैं उन्हें...? अपने सिद्धांतों के विरुद्ध जाऊं, या अपने हाथों को खून से रंगने से बचाऊं...? (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • इंदौर, 24 अप्रैल । अपने बच्चों और भतीजे के साथ यौन शोषण के आरोप में बेंगलुरु में रहने वाले एक बिजनसमैन के खिलाफ उसकी मां ने इंदौर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बिजनसमैन के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। बच्चों -दो लडक़े और एक लडक़ी- के मैजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज कराए गए हैं। सबसे छोटे बच्चे की उम्र तीन साल है। 
    इस साल की शुरुआत में बिजनसमैन की मां और बहन ने उसके खिलाफ बच्चों के यौन उत्पीडऩ के मामले में इंदौर और बेंगलुरु में शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआत में पुलिस ने आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया था लेकिन शिकायतकर्ता के आग्रह पर पॉक्सो की धाराएं भी जोड़ी गईं। दादी और बुआ की शिकायत के आधार पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने भी बच्चों से बात की थी। 
    बच्चों ने पिछले साल अपनी दादी को सारी बात बताई थी। फरवरी 2019 में जब आरोपी इंदौर आया, तो उसकी मां, बहन और जीजा ने उससे इस बारे में पूछताछ की। इसके बाद आरोपी की मां और बहन ने एफआईआर दर्ज कराई। इसी साल 9 मार्च को जिला सीडब्ल्यूसी ने मामले में पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज करने की सिफारिश की। जब पुलिस ने एक महीने तक ऐसा नहीं किया तो बच्चों की दादी ने मैजिस्ट्रेट कोर्ट में प्राइवेट शिकायत दर्ज कराई। मैजिस्ट्रेट संजय भलावी ने बच्चों के बयान दर्ज किए। 
    कोर्ट ने सीआरपीसी की तहत दर्ज ऐप्लिकेशन को खारिज किया और याचिकाकर्ता को पुलिस के पॉक्सो ऐक्ट की धाराएं न लगाने पर नई शिकायत दर्ज करने का अधिकार भी दिया। जांच के बाद पुलिस ने पॉक्सो ऐक्ट की संबंधित सेक्शन के तहत मामला दर्ज किया, जिससे आरोपी को 7 साल की जेल हो सकती है। (टाईम्स न्यूज)
     

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । मच्छर की वजह से किसी अन्य जानवरों की तुलना में यह अधिक लोगों की जान लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मच्छर के कारण हर साल करीब 10 लाख से अधिक मौतें होती हैं। मलेरिया, डेंगू, पीला बुखार, और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोग बीमार पड़ते हैं। यह सभी बीमारियां मच्छरों द्वारा ही होती हैं। ऐसा लगता है कि मच्छरों को जल्द ही दुनिया से खत्म किया जा सकता है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस कंपनी ने मच्छरों को जड़ से खत्म करने का नया तरीका निकाला है। 
    कैलिफोर्निया के फे्रंस्नो में साल 2017 से अल्फाबेट कंपनी के रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के द्वारा एक प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है, जिसमें मच्छरों को खत्म करने का तरीका निकाला है। डिबग प्रोजेक्ट कैलिफोर्निया की एक लैब में मच्छरों को पाल रहा है। ये मेल मच्छर वोल्बाचिया नामक जीवाणु से संक्रमित होते हैं, जो मादा मच्छरों में बांझपन का कारण बनता है। संक्रमित मच्छरों को मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करने के लिए एक दिए गए क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है और लक्ष्य यह होता है कि धीरे-धीरे मच्छरों की आबादी को कम करना है कि ताकि वह अपनी नई पीढ़ी को जन्म न दे सके।
    यह प्रयोग कितना सफल रहा? फिलहाल, छह महीने के कोर्स खत्म होने के बाद डिबग ने कैलिफोर्निया के फे्रस्नो में 15 मिलियन से अधिक संक्रमित मच्छरों को खुला छोड़ा। इसने पूरे दो-तिहाई मादा मच्छर काटने की आबादी को कम कर दिया। यह प्रोजेक्ट कुल मच्छरों की आबादी को 95त्न तक कम करने में सफल हुई।
    डिबग एक अच्छी शुरुआत करने के लिए बंद है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। हम समुदायों के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं, यह दिखाने के लिए कि पर्याप्त अच्छी बग को जारी करने से डिबग का मच्छरों की आबादी और आपदा पर वास्तविक प्रभाव पड़ सकता है, अपनी वेबसाइट पर डिबग लिखते हैं। आखिरकार, हम लाखों लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करने की उम्मीद करते हैं।
    दुनियाभर से मच्छरों को खत्म करने के लिए गूगल की कंपनी अल्फाबेट बेहद आक्रामक है। इसके लिए गूगल ने एक हेल्थ चीफ एक्जीक्यूटिव भी नियुक्त किया है। दुनियाभर में कई सरकारें और बिजनेसमैन मच्छरों से होने वाली समस्या की रोकथाम के लिए मदद को भी तैयार हैं। 2019 में गूगल के लिए मच्छरों को खत्म करना चैलेंजिंग काम होगा। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल (एनडीटीवी)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या के मामले में 9 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने शेखर की पत्नी अपूर्वा को गिरफ्तार कर लिया है। क्राइम ब्रांच का कहना है कि रोहित के साथ शादीशुदा जिंदगी से अपूर्वा शुक्ला तिवारी खुश नहीं थी। यही वजह है कि अपूर्वा ने रोहित को अकेले गला और मुंह दबाकर मारा। क्राइम ब्रांच का यह भी कहना है कि इस हत्या में कोई और अन्य शामिल नहीं था। 
    इससे पहले पुलिस की शक की सुई तीन लोगों रोहित की पत्नी, उसके ड्राइवर और नौकर पर थी। पुलिस ने अपूर्वा को गिरफ्तार करने से पहले उससे तीन दिन की पूछताछ की। बता दें, रोहित शेखर की मौत की वजह पहले हार्ट अटैक या ब्रेन हेमरेज बताई गई थी। लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शेखर की मौत इन वजहों से नहीं बल्कि उनकी गला दबाकर हत्या की गई है। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
    सूत्रों की मानें तो पुलिस को दिए बयान में पत्नी ने दावा किया था की रात वो शेखर के साथ अंतरंग थी और हो सकता है कि मुंह और गला दबा गया हो। रोहित शेखर हत्याकांड में पुलिस के सामने रोहित शेखर की पत्नी ने जो दावा किया वो चौकानें वाला था। सूत्रों के मानें तो अपूर्वा ने बताया कि 15-16 अप्रैल की रात वो रोहित के कमरे में गई थी। वो रोहित के साथ अंतरंग थी। हो सकता है कि रोहित का गला और मुंह दब गया हो जिससे उसकी मौत हो गई हो।
    हालांकि पुलिस का मानना है कि एक वकील होने के नाते उसे पता है कि कानून से कैसे बचना है इसलिए वो ये दावा हत्या को एक दुर्घटना बताने के लिए कर रही हो।क्योंकि रोहित उस वक्त बेहद नशे में था और अगर ऐसा हुआ भी तो अपूर्वा उसे तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले गई। 

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बुधवार को ‘निष्पक्ष और पूरी तरह से गैर राजनीतिक’ बातचीत की। पीएम मोदी ने इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी से जुड़ी उन सभी पहलुओं को साझा किया, जिससे आमतौर पर कम ही लोक वाकिफ हैं। पीएम मोदी ने अपने बचपन से लेकर रियाटरमेंट तक की बातें कीं। इतना ही नहीं, उन्हें किस चीज की तलब है, उनके अकाउंट में कितना पैसा है, वह गुस्सा करते हैं या नहीं, इन तमाम प्रश्नों का बेबाकी से जवाब दिया। 
    अक्षय कुमार के साथ पीएम मोदी की बातचीत के अंश
    मैं आम खाता हूं और मुझे आम पसंद भी है। वैसे जब मैं छोटा था तो हमारे परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी की खरीद कर खा सकें। लेकिन हम खेतों में चले जाते थे और वहां पेड़ के पके आम खाते थे। 
    कभी मेरे मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं और मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड हैं उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गाओं को गुड़ खिला देती। बचपन में मेरा स्वाभाव था किताबें पढऩा, बड़े बड़े लोगों का जीवन पढ़ता था। कभी फ़ौज वाले निकलते थे तो बच्चों की तरह खड़ा होकर उन्हें सेल्यूट करता था। मैंने पीएम बनने के बारे में कभी नहीं सोचा था। जो सोचा नहीं था वो बन गया। भटकते-भटकते यहां पहुंच गया।
    मैं कभी लोगों पर गुस्सा नहीं हुआ, गुस्सा मनुष्य के स्वभाव का हिस्सा है, सो, भीतर गुस्सा जरूर होता होगा, लेकिन उसे व्यक्त करने से रोक लेता हूं। इतने लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहा लेकिन मुझे कभी गुस्सा व्यक्त करने का अवसर नहीं आया। मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता। अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं। सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं। सख्त प्रशासक की छवि सच नहीं है, मैं बहुत काम करवाता नहीं हूं, खुद करता हूं, सो, लोगों को भी करना पड़ता है।
    राजनीतिक दलों के लोगों से अपने रिश्तों के बारे में पीएम मोदी ने बताया कि विपक्षी दलों में भी बहुत अच्छे मित्र हैं। ममता दीदी साल में आज भी मेरे लिए एक-दो कुर्ते भेजती हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी साल में 3-4 बार खास तौर पर ढाका से मिठाई भेजती हैं। ममता दीदी को पता चला तो वो भी साल में एक-दो बार मिठाई जरूर भेज देती हैं।
    अगर मुझे अलादीन का चिराग मिल जाये तो मैं उसे कहूंगा की ये जितने भी समाजशास्त्री और शिक्षाविद हैं उनके दिमाग में भर दो कि वो आने वाली पीढिय़ों को ये अलादीन के चिराग वाली थ्योरी पढ़ानी बंद कर दें। उन्हें मेहनत करने की शिक्षा दें। 
    मेरे ऊपर बनाए गए मीम में खुद को कम, क्रिएटिविटी को ज़्यादा देखता हूं, उन्हें देखकर एन्जॉय करता हूं... अगर कोई मीम आपको अच्छा नहीं लगता, और आप उसे देखकर भी संतुलित रहें, तो बनाने वाले का उद्देश्य नाकाम हो जाता है।
    मैं अपनी मां को पैसा नहीं भेजता, वही आज भी मुझे पैसा देती हैं। मैं जब भी मं से मिलता हूं वे ही सवा रूपया मुझे देती हैं। 
    बचपन से संघ की शाखाओं में जाया करता था, संघ की शाखाओं में वैज्ञानिक खेल खिलाए जाते हैं... शाखाओं के खेलों से अनुशासन और टीम भावना सीखने को मिलती है... वैसे, गुल्ली-डंडा भी बहुत खेला है, योग से ज़्यादा जुड़ा हूं, शारीरिक स्वास्थ्य तैराकी की वजह से है... बचपन में परिवार के सारे कपड़े मैं ही धोया करता था।
    सुबह 5 बजे, शाम 6 बजे चाय की आदत है, शरीर को तलब महसूस होने लगती है।
    जब मैं गुजरात से सीएम बना तो मेरा बैंक अकाउंट नहीं था। जब एमएलए बना तो सेलरी आनी लगी। स्कूल में देना बैंक के लोग आए थे। उन्होंने बच्चों को गुल्लक दिया और कहा कि इसमें पैसे जमा करें और बैंक में जमा कर दें। लेकिन हमारे पास होता तब तो डालते। तब से अकाउंट यूं ही पड़ा रहा। सरकार की तरफ से एक प्लॉट मिलता है, कुछ कम दाम में मिलता है फिर मैंने वो पार्टी को दे दिया। हालांकि कुछ नियम है जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला है। जैसे ही वह क्लीयर होगा, प्लॉट मैं पार्टी के नाम कर दूंगा। (एनडीटीवी)

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