राष्ट्रीय

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Date : 25-Jun-2019

नीरज प्रियदर्शी
हरिवंशपुर (वैशाली) से, 25 जून । बिहार की राजधानी पटना से लगभग 45 किमी दूर वैशाली के हरिवंशपुर गाँव में दिमाग़ी बुखार यानी एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने उन्हीं लोगों पर मुकदमा दर्ज कर दिया जिनके बच्चे इस महामारी की चपेट में अपनी जान गंवा चुके हैं।
इस बीमारी को प्रभावित इलाकों में स्थानीय लोग चमकी बुखार भी कह रहे हैं। इससे अब तक करीब डेढ़ सौ बच्चों की मौत हो चुकी है।
हरिवंशपुर के मुसहर टोला से सात बच्चे, पासवान टोला और ततवा टोला से दो-दो बच्चे इसकी चपेट में आए हैं। मुसहर टोली में जहां से सबसे अधिक बच्चों की मौत हुई है, जि़ला प्रशासन का पिछले दो हफ्तों से कैंप लगा है। अभी भी बुखार से तपते बच्चों का कैंप में आने का सिलसिला जारी है।
सोमवार की सुबह मुसहर टोले में बुखार से पीडि़त सात बच्चों की जांच हो चुकी थी। एक का बुखार इतना बढ़ गया था कि उसे भगवानपुर पीएचसी में रेफर कर दिया गया।
रोकथाम के नाम पर कैंप लगाकर तीन नर्सों को प्रखंड अस्पताल से उठाकर टोले में एक पेड़ के नीचे कुर्सी-चौकी देकर बिठा दिया गया है। कहने को तो हरिवंशपुर में सरकारी मेडिकल कैंप है लेकिन उसमें इस्तेमाल की जाने वाली कुर्सियां और चौकी भी गांव वालों के ही हैं।
गाँव वाले इस वक़्त सबसे अधिक इस बात से डरे हैं कि पुलिस ने बच्चों की मौत पर विरोध-प्रदर्शन करने वाले पीडि़त परिजनों के ऊपर ही केस कर दिया है।
18 जून को जिस दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिमागी बुखार के मरीजों का हाल जानने के लिए 
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा करने गए थे। टोले वालों ने अपने यहां की समस्याओं मसलन पीने का पानी, बुखार से इलाज की व्यवस्था की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन किया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनएच-22 से होकर जाएंगे इसी को देखते हुए सडक़ किनारे स्थित गाँव के लोगों ने रोड का घेराव कर दिया था।
पुलिस ने रोड घेराव के कारण ही 19 नामजद और 20 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजदों में करीब आधे दर्जन वे लोग हैं जिनके बच्चों की मौत बुखार से हुई है।
सुरेश सहनी के दो भतीजों प्रिंस कुमार और छोटू कुमार की आठ जून को इस बीमारी से मौत हो गई। पुलिस ने उनके ऊपर भी एफआईआर दर्ज की है।
सुरेश कहते हैं, हम लोग तो पहले से पीडि़त हैं जबकि पुलिस कहती है कि हमने रोड जाम किया। इसलिए केस किया गया है। हम क्या करें! कोई तो हमें देखने आता नहीं है। हमलोगों ने सोचा कि मुख्यमंत्री इस रास्ते से जाएंगे तो उनको रोककर अपना हाल सुनाएंगे। लेकिन वो हेलिकॉप्टर से गए।
पुलिस ने राजेश सहनी, रामदेव सहनी, उमेश मांझी और लल्लू सहनी को नामजद अभियुक्त बनाया है। इनके बच्चों की मौत भी दिमागी बुखार से हुई है। कई लोग पुलिस के डर से गाँव के बाहर रह रहे हैं।
एफआईआर में 65 वर्षीय एक बुज़ुर्ग शत्रुघ्न सहनी का भी नाम है। शत्रुघ्न सहनी को काफी पहले लकवाग्रस्त हो गए थे। इसकी वजह से न तो वो ठीक से चल फिर पाते हैं और न बोल बाते हैं।
दिमागी बुखार में अपने दो बेटों को खोने वाले चतुरी सहनी कहते हैं, सांसद जी आए तो थे। लेकिन क्या हुआ, पता नहीं।
चतुरी के दो ही बेटे थे, दोनों नहीं रहे। वो कहते हैं, एक ही दिन दोनों चले गए। उसी में 95 हजार खर्च हो गया। किसी तरह गाँव वालों ने कुछ चंदा करके दे दिया। बाकी कर्ज हो गया है। अब चुकाना है।
भगवानपुर प्रखंड अस्पताल के मेडिकल कैंप में अपने पाँच वर्षीय बेटे रोहित को दिखाने आए देवेंद्र सहनी का कहना है कि रात में कोई कैंप में नहीं था, इसलिए दिखा नहीं पाए थे। सुबह बता चला कि रोहित को 100 डिग्री बुखार है।
हरिवंशपुर की आबादी करीब पाँच हजार है। गाँव में सब तरह की जातियाँ हैं और सभी जाति का एक अलग टोला है। मसलन मुसहर टोली या मल टोली में मल्लाह और मुसहर जाति के लोग रहते हैं। दुसाध जाति का अलग दुसाध टोला है।
रामनाथ सहनी इशारा करते हुए कहते हैं, रोड के उस पार बड़ी जातियों के लोग हैं। राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार। उसी पार यादव लोग भी हैं। लेकिन उधर किसी के लडक़ा को चमकी नहीं है। जो रोड के इस पार हैं, उनके घरों के बच्चे ही मरे हैं। उन लोग के पास अच्छा इलाज है। हम अगर कहीं अच्छे अस्पताल में जाते भी हैं तो भगा देता है लोग। वो कहते हैं, रोड के उस पार वालों ने भी विपदा में साथ निभाया है। पानी का इंतजाम हो या मीडिया से लेकर प्रदर्शन की बात हो, वो हमारे पीछे खड़े रहे हैं।
भगवानपुर पीएससी की रेखा कुमारी पिछले 12 दिनों से गांव में कैंप कर रही हैं। आखिर हरिवंशपुर में बच्चे क्यों बीमार पड़ रहे हैं इस पर रेखा कहती हैं, यहां सबसे बड़ी समस्या पानी की ही है। पूरे टोले में एक ही चापाकल था जिससे लोग पानी पीते हैं, अब वो भी सूख गया है। उस पानी का सैंपल रिसर्च वाले भी ले गए हैं। बाकी यहां बहुत सी दिक्क़तें हैं। जागरूकता का अभाव है। साफ-सफाई नहीं है, गरीबी है, अशिक्षा है।
पानी वाकई यहां की सबसे बड़ी समस्या है। जिस विरोध-प्रदर्शन के लिए टोलेवालों पर केस हुआ था, उनकी मुख्य मांगों में पानी भी था। रामनाथ सहनी कहते हैं, यहां के मुखिया से हमने कई बार मांग की। लेकिन एक भी चापा कल नहीं गड़ा। 12 जून को जब बच्चों की मौत होने लगी, हमने पानी के लिए बीडीओ को लिखित आवेदन दिया था। उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।
फिलहाल मुशहरी टोले के लोग डरे हुए हैं। रविवार को जब लालगंज के लोजपा विधायक राजकुमार साह गांव में आए थे तो मीडिया चैनलों पर यह खबर चली कि विधायक को लोगों ने गुस्से में बंधक बना लिया था। चतुरी सैनी कहते हैं, हमलोग सवाल पूछ रहे थे उनसे। बंधक बनाने की कोई बात ही नहीं है। उनके साथ भी चार से पांच सौ लोग थे, उस वक्त, क्या हुआ हम नहीं जानते।
भगवानपुर के थाना प्रभारी संजय कुमार ने बीबीसी से कहा, रोड जाम करना एक अपराध है। हमने उसी आधार पर केस दर्ज किया है। ऊपर से आदेश था। बाद में हालांकि हमारे ही कहने पर गाँव वालों ने रास्ता खाली भी किया, लेकिन कऱीब तीन घंटे तक रोड जाम रहा।
लेकिन नेताओं और मंत्रियों के प्रति यहां के लोगों का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर है। बच्चों की मौत का गम तो पहले से था ही, अब पुलिस से भी नाराजग़ी बढऩे लगी है।
चतुरी कहते हैं, दारोगा सुबह शाम चक्कर लगाने लगा है। लोगों से पकड़ कर पूछताछ हो रही है। लेकिन यहां के हालात में कोई बदलाव नहीं है। एक चापा कल था वो सूखा पड़ा है। दो दिन पहले पानी का एक टैंकर आया था। दोबारा नहीं आया। (बीबीसी)

 


Date : 25-Jun-2019

नई दिल्ली, 25 जून । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार शाम मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। इस विधेयक में यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक में आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसी तरह अयोग्य घोषित किये जाने के बावजूद वाहन चलाते रहने पर भी दस हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी।
विधेयक इससे पहले राज्य सभा में लंबित था और 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह निरस्त हो गया था। सूत्रों ने बताया, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है। इसमें विभिन्न यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में सडक़ सुरक्षा के क्षेत्र में काफी सख्त प्रावधान रखे गये हैं। किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बैठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संशोधन विधेयक में आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर दस हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार अयोग्य करार दिये जाने के बावजूद वाहन चलाते रहने पर भी दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ओला, उबर जैसे ग्रुप का ड्राइविंग लाइसेंसों के नियमों का उल्लंघन करने पर विधेयक के प्रावधानों के अनुरूप एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
विधेयक में किये गये प्रावधान 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं। इन सिफारिशों को संसद की स्थायी समिति ने भी जांच परख की है। विधेयक के मसौदे में तेज गाड़ी भगाने पर एक हजार से दो हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना रखा गया है। बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार रुपये का जुर्माना और तीन माह के लिये लाइसेंस निलंबित किया जाना शामिल है।
किशोर द्वारा गाड़ी चलाते हुये सडक़ पर कोई अपराध करने की स्थिति में गाड़ी के मालिक या अभिभावक को दोषी माना जायेगा और वाहन का रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जायेगा। इस तरह के अपराध में वाहन मालिक और अभिभावक को दोषी माना जायेगा और तीन साल के सजा के साथ ही 25 हजार रुपये तक का जुर्माना किया जायेगा। साथ ही वाहन का पंजीकरण भी निरस्त कर दिया जायेगा।

संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार यातायात नियमों का उल्लंघन होने पर न्यूनतम 100 रुपये की जगह पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं करने पर 500 रुपये के स्थान पर अब दो हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।
अनऑर्थोराइज़्ड वाहन का इस्तेमाल करने पर पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर भी इतना ही जुर्माना देना होगा जबकि अयोग्य करार दिये जाने के बावजूद वाहन चलाने पर दस हजार रुपये का जुर्मान देय होगा। अन्य नियमों के उल्लंघन पर भी कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। (न्यूज18)


Date : 25-Jun-2019

चंडीगढ़, 25 जून । बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा भुगत रहा गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आने के लिए बेताब है, तो हरियाणा सरकार उसे वापस डेरे में पहुंचाने की तैयारी कर रही है। सरकार और बाबा की जल्दबाजी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि नियम कानून भी आड़े नहीं आ रहे हैं।
खास बात ये है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जेल मंत्री कृष्ण पवार और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने खुद गुरमीत राम रहीम को पैरोल देने की पैरवी की है। अनिल विज ने तो यहां तक कह दिया कि गुरमीत सिंह राम रहीम एक आम इंसान के अधिकार के चलते पैरोल का हकदार है।
नियमों के मुताबिक दो साल की सजा पूरी होने के बाद ही पैरोल दी जा सकती है, लेकिन गुरमीत राम रहीम ने दो साल पूरे होने से पहले ही पैरोल के लिए अर्जी दाखिल कर दी। उधर, सुनारिया जेल प्रशासन ने दो साल की अवधि पूरी होने से पहले ही पैरोल के आवेदन को स्वीकार कर यह साबित कर दिया है कि बाबा का दबदबा आज भी कायम है।
गौरतलब है कि हरियाणा में इस साल अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुरमीत राम रहीम के डेरे का मुख्यालय सिरसा में है। हरियाणा में उसके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। अगर गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी जाती है, तो इसमें एक और जहां सरकार का फायदा है। वहीं दूसरी और बाबा को भी खुली हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा।
उसके आ जाने से सिरसा में सुनसान पड़ा डेरा सच्चा सौदा फिर से गुलजार हो जाएगा। राम रहीम डेरे में लौटकर फिर से अपने समर्थक जमा कर सकता है। वहीं सरकार इसके एवज में अपना वोट बैंक मजबूत कर सकती है। हालांकि हरियाणा सरकार के इस फैसले का चारों और विरोध हो रहा है।
दो साल पहले पंचकूला सहित कई स्थानों पर हुए खून खराबे को याद करके लोग आज भी सिहर उठते हैं। उधर, हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने माना है कि हरियाणा के गृह विभाग के पास गुरमीत राम रहीम का पैरोल आवेदन पहुंचा है, लेकिन सरकार ने फिलहाल उसके आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया है।
राज्य के गृह सचिव के मुताबिक अभी सरकार ने सिरसा और रोहतक जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है कि क्या गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी जानी चाहिए? क्या उसको पैरोल देने के बाद इन जिलों में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है?
फिलहाल, गुरमीत राम रहीम के पैरोल के आवेदन ने हरियाणा के राजनीतिक सर्कल में फिर से हलचल पैदा कर दी है। देखना दिलचस्प होगा कि गुरमीत राम रहीम को जेल से छुट्टी मिलती है या फिर उसकी और भारतीय जनता पार्टी की एक दूसरे से फायदा उठाने की योजना धरी की धरी रह जाएगी।
क्या होती है पैरोल
कानून के जानकार बताते हैं कि पैरोल दो तरह की होती हैं, पहली कस्टडी परोल और दूसरी रेग्यूलर पैरोल। कस्टडी पैरोल उस स्थिति में दी जाती है, जब कैदी के परिवार में किसी की मौत जाए या फिर परिवार में किसी की शादी हो या फिर परिवार में कोई बहुत बीमार हो। इसके अलावा अति विशेष परिस्थिति में कस्टडी पैरोल दी जाती है। कस्टडी पैरोल के लिए कैदी जेल अधीक्षक को आवेदन करता है। अगर जेल प्रशासन आवेदन खारिज कर दे तो कोर्ट में अपील की जा सकती है। कस्टडी पैरोल के दौरान आरोपी या दोषी को पुलिस अभिरक्षा में जेल से बाहर लाया जाता है। इसकी अधिकतम अवधि 6 घंटे होती है।
रेगुलर पैरोल दोषी कैदी को ही दी जाती है। अंडर ट्रायल कैदी के लिए इसका प्रावधान नहीं है। इसमें दोषी के लिए एक समय सीमा भी निर्धारित होती है। रेगुलर पैरोल उस दोषी मुजरिमों को नहीं दी जाती, जिसने रेप के बाद हत्या की घटना को अंजाम दिया हो और वह दोषी करार दिया गया हो। पैरोल पाने के लिए कैदी का भारतीय नागरिक होना भी ज़रूरी है। आतंकवाद या देशद्रोह से जुड़े मामलों के दोषी को पैरोल नहीं दी जा सकती। रेगुलर पैरोल एक बार में एक माह के लिए दी जाती है। विशेष स्थिति में इसे बढ़ाया जा सकता है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक पैरोल का फैसला प्रशासनिक होता है। अगर जेल प्रशासन और गृह विभाग से पैरोल का आवेदन निरस्त हो जाए तो इसके लिए दोषी अदालत जा सकता है। पैरोल का आवेदन वही कैदी कर सकता है, जो सजा काट रहा हो। उसका कोई आवेदन किसी भी अदालत में विचाराधीन नहीं होना चाहिए। पैरोल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है।
शर्त यह है कि कैदी का जेल में कंडक्ट अच्छा होना चाहिए। अगर वो पहले जमानत पर छूटा है, तो उस दौरान उसने कोई गलत काम ना किया हो और पैरोल या जमानत की शर्त को पहले कभी भी ना तोड़ा हो। नियमानुसार 6 माह बीतने के बाद दूसरे पैरोल के लिए आवेदन किया जा सकता है। पैरोल का आवेदन कैदी जेल अधीक्षक को देता है और वह उस आवेदन को गृह विभाग के पास भेजता है ताकि उस पर फैसला लिया जा सके। (आजतक)

 


Date : 25-Jun-2019

नई दिल्ली, 25 जून । मलयालम एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर के 2018 में आए वीडियो ने सोशल मीडिया पर खूब धमाल मचाया था। इस वीडियो ने कुछ ही देर में एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर को 2018 में गूगल पर मोस्ट सच्र्ड पर्सनेलिटी बना दिया था। अब प्रिया प्रकाश वारियर को भी टक्कर देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। यह वीडियो आईएएस टॉपर रहीं टीना डाबी खान का है। टीना डाबी खान ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अपनी मेहंदी दिखाते हुए आंखों से इशारे कर रही हैं। खास बात तो यह है कि टीना डाबी खान के इस वीडियो को लोगों ने करीब 1,72,000 हजार बार देखा है, साथ ही इसपर खूब कमेंट भी किए हैं। 
आईएएस टॉपर टीना डाबी खान ने अपने इस वीडियो को कुछ ही समय पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, लेकिन उनके वीडियो पर लोगों के लाइक्स और कमेंट्स आने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। टीना डाबी खान के वीडियो पर एक फैन ने कमेंट करते हुए लिखा तुमने भारत की आधे से ज्यादा लड़कियों को प्रेरित किया है, जो यह सोचती हैं कि वह कुछ नहीं कर सकतीं। भगवान आपको आशीर्वाद दे।
इसके अलावा उनकी दूसरी फैन ने टीना डाबी खान की तारीफ करते हुए बताया कि वह इस वीडियो को करीब 4 बार देख चुकी हैं। इस वीडियो में टीना डाबी खान का लुक काफी प्यारा लग रहा है। इसके साथ ही उनके हाथ पर लगी मेहंदी ने उनके वीडियो को और भी जबरदस्त बना दिया है। 
24 वर्षीय टीना डाबी खान ने साल 2015 में यूपीएसी परीक्षा में टॉपर बनकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद टीना डाबी खान ने उसी साल आईएएस परीक्षा में दूसरे नंबर पर आए आमिर अतहर खान से शादी की। टीना डाबी खान की शादी के बाद से उन्हें, कश्मीरी बहू, के नाम से भी जाना जाने लगा। दोनों की मुलाकात नॉर्थ ब्लॉक स्थित डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग के दफ्तर में हुई थी। दोनों 2015 से ही एक-दूसरे के साथ हैं। टीना और आमिर शुरूआत से ही अपने रिश्तों को लेकर काफी खुले विचारों के रहे हैं। इसके साथ ही वह अकसर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें और वीडियो भी साझा करते हैं। (आईएएनएस)
 


Date : 25-Jun-2019

नई दिल्ली, 25 जून । दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ की तीर्थयात्रा शांतिपूर्ण रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए इस साल जम्मू-कश्मीर को अतिरिक्त केंद्रीय अद्र्धसैनिक बल उपलब्ध कराया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक एम के सिन्हा ने कहा कि पिछले बरसों के मुकाबले ज्यादा बल उपलब्ध कराए जाने से घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत करने में, पूरे राजमार्ग पर किसी तरह का अवरोध दूर करने वाले दस्ते की तैनाती और तीर्थयात्रियों के शिविरों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि पुलिस, एसडीआरएफ और मजिस्ट्रेट वाले छह विशेष दलों को रामबण जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास उन इलाकों में तैनात किया जाएगा जहां भूस्खलन की आशंका अधिक होती है ताकि यात्रा के दौरान कम से कम अवरोध उत्पन्न हो।
 सिन्हा ने कहा, यात्रा पर किसी तरह के खतरे के बारे में कोई विशिष्ट सूचना नहीं मिली है। लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान चूंकि ऐसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं इसलिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। हमें पिछले सालों की तुलना में इस बार अतिरिक्त केंद्रीय अद्र्धसैनिक बल मिला है और उसी अनुसार पक्के इंतजाम किए गए हैं।
वहीं, अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर जम्मू रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि श्रद्धालु बिना किसी डर के धार्मिक यात्रा पर आएं क्योंकि राज्य में सुरक्षा स्थिति देश के बाकी क्षेत्रों जितनी ही अच्छी है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रेलवे, रंजीत सिंह साम्बयाल ने यह भी कहा कि सभी आने और जाने वाली ट्रेनों तथा यात्रियों के सामान की जांच की जाएगी। इसके लिए विस्फोटकों का पता लगाने के काम में विशेष रूप से प्रशिक्षित श्वान दल को लगाया गया है।
कुल 46 दिन तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा दो रास्तों से शुरू हो रही है। इनमें से पहला अनंतनाग जिले में परंपरागत पहलगाम मार्ग और दूसरा गंदेरबल जिले का बालटाल मार्ग है जो पहलगाम मार्ग से छोटा है। वार्षिक अमरनाथ यात्रा एक जुलाई को शुरू होगी और 15 अगस्त तक चलेगी। (एनडीटीवी)
 


Date : 25-Jun-2019

देहरादून, 25 जून। उत्तराखंड के औली में 200 करोड़ की हाई प्रोफाइल शादी के बाद छूटे 4 टन कचरे को साफ करने के लिए गुप्ता परिवार ने नगर निगम को यूजर चार्ज के रूप मे  54 हजार रुपए दिए हैं।  परिवार ने कचरे के प्रबंधन के लिए पूरा भुगतान करने पर सहमति जताई है। पहाड़ी शहर औली में शादी के बाद बचे कचरे को लेकर परिवार की काफी आलोचना हो रही है और ये मामला कोर्ट में भी पहुंच गया है। नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार ने कहा, गुप्ता परिवार ने यूजर चार्ज के रूप में 54,000 रुपये जमा किए थे। अब तक 150 क्विंटल से अधिक कचरे की सफाई की जा चुकी है। सफाई का काम पूरा होने के बाद, मैनुअल लेबर और वाहनों सहित सभी खर्चों का बिल बनाकर उन्हें भेज दिया जाएगा। परिवार पूरे बिल का भुगतान करने और नागरिक निकाय को एक वाहन देने के लिए सहमत हो गया है। 
नगर निगम ने कचरे को साफ करने के लिए 20 कर्मचारियों को तैनात किया है।  वहीं उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कचरे के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर 7 जुलाई तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का  निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 8 जुलाई को है। इस शादी को लेकर एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि शादी की तैयारियां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं।
इस शादी में कटरीना कैफ, योग गुरु बाबा रामदेव जैसी कई हस्तियों ने शिरकत की। रामदेव ने शादी में दो घंटे का योग सत्र भी आयोजित किया। मेहमानों को लाने ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर किराए पर लिए गए थे। इतना ही नहीं  लगभग सभी होटल और रिसॉर्ट बुक कर लिए गए थे और स्विट्जरलैंड से फूल मंगलवाए गये थे। 
 


Date : 25-Jun-2019

नई दिल्ली, 25 जून । गुजरात में दो सीटों पर राज्यसभा चुनाव एक साथ कराने की कांग्रेस की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन में दखल देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चुनावी याचिका यानी इलेक्शन पेटिशन के जरिए ही इसे चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता गुजरात प्रदेश कांग्रेस के वकील विवेक तंखा से कहा कि अभी निर्वाचन आयोग के सामने याचिका लगाएं। चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही हम चुनाव याचिका के रूप में सुनेंगे। इस समय नहीं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि रेगुलर वैकेंसी भरने के लिए एकसाथ चुनाव होते हैं। लेकिन आकस्मिक यानी कैजुअल वैकेंसी के लिए एक साथ चुनाव कराने की कोई बाध्यता नहींहै। आप इसकी याचिका चुनाव आयोग के सामने दाखिल करें।
कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद चुनाव आयोग से इस पर जवाब मांगा गया था। चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल करते हुए दो सीटों पर अलग- अलग चुनाव कराने के अपने फैसले को सही ठहराया है और कहा था कि कांग्रेस की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हलफनामे में कहा गया था कि अमित शाह और स्मृति ईरानी की खाली हुई सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना कानून के मुताबिक है। चुनाव आयोग 1957 से यह चुनाव कराता आया है।
साथ ही कहा गया कि चुनाव आयोग पहले से ही कैजुएल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराता आया है। जब किसी सदस्य की राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल खत्म होता है तो वो रेगुलर वेकेंसी होती है, जिसके लिए एक साथ ही चुनाव कराया जाता है। चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के सत्यपाल मलिक मामले के फैसले का हवाला दिया है, जिसमें हाई कोर्ट ने कहा था कि कैजुअल वैकेंसी को अलग-अलग चुनाव से भरा जाएगा। 
गुजरात कांग्रेस के नेता विपक्ष परेशभाई धनानी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दो सीटों के लिए जारी चुनाव आयोग की अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि एक ही दिन दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना असंवैधानिक और संविधान की भावना के खिलाफ है। गुजरात से राज्यसभा में खाली हुई दो सीटों पर भी 5 जुलाई को चुनाव होंगे। दरसअल, चुनाव आयोग की अधिसूचना की मुताबिक अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई को ही मिल गया था, जबकि स्मृति ईरानी को 24 मई को मिला। इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया। इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे। (एनडीटीवी)
 


Date : 25-Jun-2019

मुंबई, 25 जून । पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपी मेहुल चोकसी को जल्द ही भारत वापस लाया जाएगा। वह अभी तक एंटिगुआ में रह रहा था, लेकिन वहां के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने बयान दिया है कि वह जल्द ही मेहुल चोकसी की नागरिकता रद्द करने वाले हैं। उनके मुताबिक, भारत की ओर से लगातार इसको लेकर दबाव बनाया जा रहा था।
इसी के साथ ही मेहुल चोकसी को भारत लाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा। पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हजार करोड़ रुपये के गबन का आरोप था। ये मामला 2018 में सामने आया था, तभी से ही विपक्ष इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरे हुए है।
मेहुल चोकसी के मामले में भारत अभी इंतजार करेगा। सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत अभी इस इंतजार में है कि पहले एंटिगुआ की सारी कानूनी प्रक्रिया खत्म हो जाए। उसके बाद ही अपने स्तर पर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भारत को अभी तक नागरिकता रद्द होने पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
एंटिगुआ के प्रधानमंत्री के मुताबिक, मेहुल चोकसी को पहले यहां की नागरिकता मिली हुई थी। लेकिन अब इसे रद्द किया जा रहा है और भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है। हम किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने देश में नहीं रखा जाएगा, जिसपर किसी भी तरह के आरोप लगे हों।
प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन के अनुसार, अब एंटिगुआ में मेहुल चोकसी पर किसी तरह का कानूनी रास्ता नहीं बचा है, जिससे वह बच निकले इसलिए उसकी भारत वापसी लगभग तय है।
उन्होंने कहा कि अभी मेहुल चोकसी से जुड़ा पूरा मामला कोर्ट में है, इसलिए हमें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसको लेकर भारत सरकार को पूरी जानकारी दे दी है। हालांकि, मेहुल चोकसी को सभी कानूनी प्रक्रिया पूरा करने का समय दिया जाएगा। जब उसके पास कोई भी कानून ऑप्शन नहीं बचेगा, तो उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।
मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के मसले पर मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान लगातार ये मुद्दा उठाया था। लेकिन अब अगर मेहुल चोकसी की वापसी होती है तो ये मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली बड़ी कामयाबी मानी जा सकती है।
मेहुल चोकसी को कई बार सरकार, एजेंसियों और अदालत की तरफ से समन भेजा गया था, लेकिन उसने हर बार आने से मना किया। मेहुल चोकसी का तर्क था कि अगर वह हिंदुस्तान आएगा तो उसकी लिंचिंग कर दी जाएगी। हालांकि, अब जब एंटिगुआ ने ही उसकी नागरिकता रद्द करने का फैसला कर लिया है तो उसे भारत वापस आना ही होगा। (आजतक)
 


Date : 25-Jun-2019

चंडीगढ़, 25 जून। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बड़ा झटका लग सकता है। पत्रकार हत्या और साध्वियों के साथ रेप के दोषी राम रहीम की पैरोल की अर्जी खारिज हो सकती है। दरअसल, राम रहीम ने खेतीबाड़ी के लिए पैरोल मांगी थी, लेकिन उसके पास कोई कृषि भूमि ही नहीं है। सारी भूमि डेरा सच्चा सौदा ट्रस्ट के नाम है।
रोहतक की सुनारिया जेल में बंद गुरमीत राम रहीम ने खेती-बाड़ी को आधार बनाकर पैरोल मांगी है, लेकिन सिरसा जिला प्रशासन को जो रिपोर्ट हरियाणा सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने भेजी है, उसके मुताबिक राम रहीम के नाम पर सिरसा में कोई भी कृषि भूमि नहीं है।
रेवेन्यू डिपार्टमेंट के तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि डेरे के पास कुल 250 एकड़ भूमि है, लेकिन इस जमीन के रिकॉर्ड पर कहीं भी राम रहीम मालिक या बतौर किसान रजिस्टर्ड नहीं है। माना जा रहा है कि सिरसा के रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के आधार पर राम रहीम की पैरोल की याचिका खारिज की जा सकती है।
इसके अलावा हरियाणा पुलिस की खुफिया रिपोर्ट भी राम रहीम को पैरोल देने के हक में नहीं हैं। पुलिस का मानना है कि ऐसा करने पर सिरसा में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और पंचकूला जैसे हालात बन सकते हैं।
दो-दो साध्वियों से रेप और पत्रकार की हत्या मामले में सजा काट रहा है गुरमीत राम रहीम के जेल से बाहर आने पर सस्पेंस गहरा गया है। राम रहीम ने 42 दिनों के पैरोल की अर्जी दी है। जेल प्रशासन ने अच्छे व्यवहार के सर्टिफिकेट के साथ हरी झंडी भी दे दी। अब जिला प्रशासन को राम रहीम के जेल से बाहर आने को लेकर फैसला लेना है, लेकिन रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के बाद अब उसकी पैरोल की अर्जी खारिज हो सकती है।
हरियाणा में चुनाव से पहले राम रहीम को लेकर सियासत गर्म हो गई है। राम रहीम की करतूत से हैरान-परेशान रही हरियाणा की खट्टर सरकार पैरोल को लेकर काफी उदार दिख रही है। जेल मंत्री कृष्णलाल पंवार, राम रहीम के अधिकार और कानूनी हक की वकालत कर रहे हैं तो बड़बोले मंत्री अनिल विज खुलकर समर्थन में उतर आए हैं।  (आजतक)
 


Date : 25-Jun-2019

नई दिल्ली, 25 जून । भारत के कई शहर इस वक्त भीषण जल संकट से गुजर रहे हैं। इनमें चेन्नई सबसे ऊपर है। चेन्नई में जल संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां कई कंपनियों ने पानी की समस्या के कारण कर्मचारियों को ऑफिस आने से मना कर दिया है और, वर्क फ्र ॉम होम, लागू कर दिया है। टाईम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई भारत ही नहीं दुनिया भर में सबसे ज्यादा जल संकट वाला शहर बन गया है। चेन्नई के अलावा कोलकाता दुनिया भर में दूसरा सबसे जल संकट वाला शहर है। तीसरे नंबर पर तुर्की का शहर इस्तांबुल है।

चेन्नई के अलवा भारत के तीन और शहर ऐसे हैं जो दुनिया के भीषण जल संकट वाले शहरों में शामिल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ग्लोबल वाटर स्टीवार्डशिप लीड के एलेक्सिस मॉर्गन ने बताया कि दुनिया के जल संकट से जूझ रहे 400 शहरों में चेन्नई टॉप है। 2018 में इन 400 शहरों पर शोध किया गया था। भारत में चेन्नई के अलावा और कई शहर शामिल हैं जहां भीषण जल संकट बना हुआ है। दुनिया भर के टॉप 20 शहर, जो भीषण जल संकट से गुजर रहे हैं उसमें कोलकाता दूसरे नंबर पर है। दुनिया भर के टॉप 20 जल संकट वाले शहरों में तेहरान छठे नंबर पर है। जापान का जकार्ता सातवें और अमेरिका का लॉस एंजेलिस आठवें नंबर पर है। चेन्नई के अलावा भारत से मुंबई 11वें और दिल्ली 15वें नंबर पर है।
शोध के मुताबिक जल संकट से जूझ रहे शहरों में ज्यादातर शहर नदियों के किनारे बसे हैं। यहां आबादी बहुत ज्यादा है और नदियों के पानी का ज्यादा प्रयोग किया गया। साथ ही इन नदियों के पानी का इस्तेमाल भी बेतरतीब तरीके से किया गया। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और सूखा जैसी समस्याओं का सामना दुनिया भर के कई शहरों के लोगों को करना पड़ रहा है। चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में जलस्रोत लगातार सूख रहे हैं। इससे जल संकट पैदा हो रहा है। साथ ही 1970 से अब तक दुनिया भर में 35 जल के स्रोत सूख चुके हैं। शोध के मुताबिक जिस रफ्तार से जंगल खत्म हो रहे हैं उससे तीन गुना अधिक रफ्तार से जल के स्रोत सूख रहे हैं।
चेन्नई के लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। यहां जल संकट को कम करने के लिए एक करोड़ लीटर पानी वेल्लोर के जोलारपेट से ट्रेन से मंगाया गया। चेन्नई को पानी की सप्लाई करने वाली चार प्रमुख झीलें सूख चुकी है। शहर में जल भंडारण बढ़ाने के लिए जल इकाइयों की मरम्मत और उन्हें मजबूत करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में शहर की लगभग 40 लाख से ज्यादा आबादी के लिए एक मात्र उम्मीद केवल सरकारी टैंकर बची है। (आजतक)


Date : 25-Jun-2019

नयी दिल्ली, 25 जून । दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की टीम ने कपिल सांगवान के गिरोह के 15 सदस्यों को गिरफ्तार करके बड़ी कामयाबी हासिल की है।
अपराध शाखा के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि सभी बदमाश सांगवान के पैरोल पर बाहर आने की पार्टी के लिए गोयला डेरी द्वाराका में इकत्र हुए थे। पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी करके सभी को गिरफ्तार किया है। इनके पास से नौ पिस्तौल तथा 65 कारतूस बरामद किये गये हैं। राजधानी में ऐसा पहली बार हुआ है जब एक बड़े गिरोह के इतने सदस्य एक साथ गिरफ्तार किये गये हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। (वार्ता)
 


Date : 25-Jun-2019

नयी दिल्ली, 25 जून । सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक अथवा वैकल्पिक बनाने पर गम्भीरता से विचार कर रही है। 
कृषि राज्य मंत्री परषोत्तम रुपाला ने मंगलवार को लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय ने कल ही सभी राज्य सरकारों के प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर इस बारे में अपनी राय देने का अनुरोध किया है। 
श्री रुपाला ने कहा कि राज्य सरकारों, विभिन्न किसान संगठनों और अन्य हितधारकों की ओर से इस संबंध में लंबे समय से मांग की जा रही थी, जिसके मद्देनजर इनसे रायशुमारी करने का निर्णय लिया गया है। फसल बीमा योजनाओं में संशोधन अथवा सुधार एक सतत प्रक्रिया है और विभिन्न हितधारकों से सलाह-मशविरे के बाद समय-समय पर सुझाव मांगे जाते है तथा निर्णय किये जाते हैं। 
गौरतलब है कि यह योजना अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसलों के लिए ऋण लेने वाले किसानों के लिए अनिवार्य किया गया है, जबकि गैर-ऋणी किसानों के लिए इसे स्वैच्छिक बनाया गया है। अब इसे सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाने की मांग की जा रही है। (वार्ता)

 


Date : 25-Jun-2019

शंकर अर्निमेष 

नई दिल्ली, 25 जून। बीजेपी की नई दिल्ली से सांसद और प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी एक नए अवतार में दिखने वाली हैं। वह अपनी छवि के विपरीत अपनी रचानात्मक भूख को मिटाने के लिए एक राजनैतिक क्राइम थ्रिलर लिखकर उन नेताओं की सूची में शामिल हो रहीं है जिनकी पहचान केवल राजनीति के कारण नहीं होती बल्कि जो अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय है। वकालत से राजनीति और अब राजनीति से उपन्यास लेखिका बनी लेखी के नए नॉवेल का नाम है दि न्यू देल्ही कॉन्सपिरेसी।
उपन्यास की कहानी वेदिका खन्ना नाम की नई दिल्ली के एक सांसद के इर्द-गिर्द घूमती है जिसके घर के सामने एक वैज्ञानिक की दिनदहाड़े हत्या हो जाती है पर मरते वैज्ञानिक के अंतिम शब्दों ने सांसद वेदिका को हिलाकर रख दिया कि लोकप्रिय प्रधानमंत्री राघव मोहन की हत्या का बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है पर वेदिका के पास न तो कोई सुराग़ है न ही कोई इसकी जड़ तक पहुंचने का साधन।
पर वेदिका ने तय कर लिया है कि वो इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करके रहेगी और उसके इस काम में उसका साथ देती है तेजतर्रार पत्रकार ऋेया और साइबर दुनिया को समझने वाला दोस्त कार्तिक। वेदिका कार्तिक और ऋेया के पास वक्त कम है और लक्ष्य बडा। आखिरकार दिल्ली के पॉवर कॉरिडोर से षड्यंत्र का रास्ता तलाशते हुए तीनों को हांगकांग में सुराग़ मिलता है। हांगकांग में मिली लीड उन्हें तिब्बती मांनटेसरी तक पहुंचाती है जहां उन्हें सारे षड्यंत्र का ताना बाना दिखता है और समय रहते वो उस जगह पहुंच जाती है जहां से देश के ऊपर आने वाले बड़े संकट को टाला जा सकता है।
वकालत, सांसद और प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभाते हुए कथाकार के रूप में डेव्यू करने पर मीनाक्षी लेखी दि प्रिंट से बातचीत में कहती हैं ‘इस उपन्यास का मेरी जिंदगी से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह से फिक्शन है और इसका प्लाट कई सालों से मेरे अंदर चल रहा था पर इस पर काम मैने पिछले एक साल में पूरा किया है।’ लेखी बताती हैं अभी तक मैं राजनीतिक भाषण, ब्लॉग, लेख वग़ैरह लिखती रहीं हूं पर उपन्यास लिखना बिल्कुल अलग तरह का काम था। उपन्यास पढक़र मेरे नए रूप से लोग जरूर चौकेंगे।
पर उपन्यास के मुख्य पात्र का सांसद होना और प्लाट में प्रधानमंत्री का होना राजनैतिक गलियारे में कौतूहल जगा चुका है कि नॉवेल में सिर्फ कथा है या कथा में बीजेपी की राजनीति और पॉवर कॉरिडोर के रहस्य का तडक़ा भी शामिल है।
बीजेपी के कई नेता यह जानने में उत्सुक हैं कि कहीं उनका कैरेक्टर तो कथा में नहीं शामिल है? लेखी के मुताबिक अभी तक उन्होंने तय नहीं किया है कि उपन्यास का विमोचन अपनी पार्टी के किसी राजनेता से कराएं या किसी लेखिका से।
एक समय में किताब पढऩे और सिनेमा देखने के शौकीन बीजेपी के लौह पुरुष आडवाणी माने जाते थे। अक्सर शनिवार को आडवाणी के लिए नई दिल्ली के महादेव ऑडिटोरियम में विशेष शो का कार्यक्रम रखा जाता था जिसमें वो परिवार सहित पहुंचते थे। वाजपेयी और आडवाणी का एक प्रिय शगल पुस्तक विमोचन था। वाजपेयी खुद कवि थे और उनका किताबों से बेहद लगाव था।मीनाक्षी लेखी के उपन्यास को हार्पर कॉलिन्स ने छापा है और 8 जुलाई को यह बाजार में आने वाला है। (दिप्रिंट)
 


Date : 25-Jun-2019

बुलंदशहर, 25 जून । उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के एक क्षेत्र के दबंग छेड़छाड़ कर एक घर से लडक़ी को उठाकर ले जा रहे थे। परिवार ने बेटी को उठाकर ले जाने का विरोध किया तो दबंगों ने घर के बाहर बैठे एक ही परिवार के पांच लोगों को कार से कुचल दिया। इस घटना में मां और ताई की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना में तीन महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। मामला बुलंदशहर कोतवाली देहात इलाके के नया गांव का है।
सैकड़ों स्थानीय लोगों ने दबंग आरोपियों की गिरफ्तारी कराने के लिए शवों को एनएच 91 पर रख कर जाम लगा दिया और जमकर हंगामा किया। एसपी सिटी मौके पर पहुंच गए हैं। थाना पुलिस इस वारदात को हादसा बता रही है। (न्यूज18)
 


Date : 25-Jun-2019

कीर्ति दुबे
रोहिंग्या कैंप से लौटकर, 25 जून । मैं बीए-एलएलबी ऑनर्स करूंगी। मैं कानून की पढ़ाई करना चाहती हूं ताकि खुद के अधिकार जान सकूं और लोगों के अधिकार उन्हें बता सकूं। मुझे मानवाधिकार कार्यकर्ता बनना है ताकि जब अपने देश वापस जाऊं तो अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकूं।
22 साल की तस्मीदा ये बात कहती हैं तो उनकी आंखें उम्मीद से भर जाती हैं। तस्मीदा भारत में रह रहे 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों में पहली लडक़ी हैं जो कॉलेज जाएंगी। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में विदेशी छात्र कोटे के तहत फॉर्म भरा है।
दिल्ली में बहने वाली यमुना नदी के किनारे बसे रोहिंग्या बस्ती में तस्मीदा टाट और प्लास्टिक से बने घर में माता, पिता और एक भाई के साथ रहती हैं। अपने छह भाइयों की अकेली बहन तस्मीदा भारत में रोहिंग्या बच्चियों के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। अपनी बात में वो बार-बार म्यांमार हमारा देश कहती हैं, वही म्यांमार जो इन रोहिंग्या मुसलमानों को अपना नागरिक नहीं मानता।
22 साल की तस्मीदा भारत में रह रहे 40,000 रोहिंग्या में से पहली लडक़ी हैं जो कॉलेज जाएंगी। कॉलेज तक पहुंचने की लड़ाई तस्मीदा के लिए आसान नहीं रही। वो छह साल की उम्र में म्यांमार छोडक़र बांग्लादेश आ गईं लेकिन जब हालात बिगड़े तो भारी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश आने लगे। बिगड़ते हालात को देखते हुए तस्मीदा के परिवार ने साल 2012 में भारत में शरण ली।
अपने देश से निकलकर दो देशों में शरण लेना और अपनी कहानी बताते हुए तस्मीदा कहती हैं, हमारे दादा जी और पुरानी पीढिय़ों के पास नागरिगता थी लेकिन शिक्षित ना होने के कारण उन लोगों ने अपने अधिकार नहीं जाने और ये नहीं सोचा कि हमारी आने वाली पीढ़ी का क्या होगा। अब हम दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। हम इस दुनिया के तो हैं लेकिन किसी देश के नहीं हैं।
मुझे बचपन से डॉक्टर बनने का शौक था। मैं जब भारत आई तो 10वीं में एडमिशन के लिए आवेदन भरा लेकिन यहां मेरे पास आधार नहीं था। स्कूलों में एडमिशन नहीं मिला। फिर मैंने ओपेन कैंपस से आर्ट्स का फॉर्म भरा। 10वीं पास करने के बाद मैंने 11वीं और 12वीं में राजनीति शास्त्र विषय चुना और जामिया के स्कूल में एडमिशन लिया। हर दिन मैं बर्मा की खबरें देखती हूं वहां ना जाने कितने हमारे जैसे लोगों को मार देते हैं। जला देते हैं। इसलिए मैंने सोचा कि मैं लॉ करूं और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता बनूं।
कॉलेज में जाने की खुशी उनकी आवाज से साफ झलकती है, लेकिन जैसे ही वो अपने बीते हुए कल को याद करती हैं तो मानो सारी चमक उदासी में बदल जाती है। ये लडक़ी उन तमाम लोगों का चेहरा है जिनका कोई देश नहीं है। तस्मीदा उस रोहिंग्या समाज की नई पीढ़ी हैं जो दुनिया में सबसे ज़्यादा सताए गए समुदायों में से एक हैं। एक रिफ्यूजी के आलावा उनकी कोई पहचान नहीं है। कोई देश नहीं है। लेकिन तस्मीदा अपनी पहचान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं।
वो कहती हैं, साल 2005 में मैं 6 साल की थी। मेरे पापा बिजनेस करते थे। वो बाहर से सामान लाते और बर्मा (म्यांमार) में बेचते थे। एक दिन पुलिस हमारे घर पर आई और मेरे पापा को उठा कर ले गई। जब हम उनसे मिलने थाने में गए तो देखा कई लोगों को पुलिस उठा कर लाई थी। पुलिस रोहिंग्या लोगों से पैसे लेती और छोड़ देती।
इसके दो महीने बाद फिर वो (पुलिस वाले) लोग आए और पापा को लेकर चले गए। जब पापा वापस आए तो उन्होंने कहा कि अब हम यहां नहीं रहेंगे। मैं तीसरी क्लास में थी, जब मैं अपने परिवार के साथ बांग्लादेश आ गई।
जब हम 2005 में बांग्लादेश पहुंचे तो हमारे पास कोई रिफ्यूजी कार्ड नहीं था। सब कुछ ठीक चल रहा था, वहां स्कूलों में बांग्ला भाषा जरूरी थी तो मैंने बांग्ला सीखी, इसके बाद स्कूल में दाखिला लिया।
तस्मीदा कहती हैं, पापा मजदूरी करते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था फिर साल 2012 में रोहिग्यां लोगों पर हिंसा म्यांमार में तेज हो गई। कई रोहिंग्या म्यांमार छोडक़र बांग्लादेश आने लगे तो यहां भी शरणार्थियों की जांच होने लगी। हमारे पास कोई कार्ड नहीं था।
जब हालात बिगड़े तो पापा के कुछ जानने वाले भारत में शरण लेकर रह रहे थे। उनसे बात करने के बाद हम भारत आए और हमें संयुक्त राष्ट्र से रिफ्यूजी कार्ड दिया गया।
मैं दिल्ली आई तो साल 2013 से 2015 दो साल तक यहां हिंदी और अंग्रेज़ी सीखी। इसके बाद मैंने अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने की सोची। मैंने कई कोशिश की कि मुझे साइंस पढऩे को मिले लेकिन मेरे पास आधार कार्ड नहीं था तो स्कूलों ने एडमिशन नहीं दिया। इसके बाद मैंने ओपेन कैंपस के जरिए 10 वीं की परीक्षा दी।
मैंने 11वीं-12वीं में राजनीति विज्ञान लिया। इस साल जून में घर वालों को मेरे रिजल्ट का इंतजार था। मैं पास हुई तो मुझे इस बात की ख़ुशी थी कि अब कानून की पढ़ाई करूंगी। दो साल पहले तक मुझे ये भी नहीं पता था कि लॉ क्या होता है, जब इसके बारे में जाना तो लगा यही हमारी जिंदगी बेहतर बना सकता है।
अब तस्मीदा के इरादे बुलंद हैं। उनकी आंखों में कुछ अलग करने की चमक साफ दिखती है। इस ख़ुशी को उनकी फीस की चिंता फीका कर देती है। वह कहती हैं, मैंने फॉरन स्टूडेंट कैटिगरी में आवेदन भरा है। इसकी सालाना फीस हम नहीं दे सकते। मुझे 3600 अमरीकी डॉलर सालाना देना होगा। हम कहां से इतने पैसे लाएंगे?
तस्मीदा ने बताया कि उनके लिए ऑनलाइन फंड रेजिंग की जा रही है और अब तक एक लाख 20 हजार रुपए ही जुट पाए हैं। मुझे, मेरे परिवार को उम्मीद है कि हमे लोगों की मदद मिलेगी।
इस बीच बगल में बने टाट के घर से एक लडक़ी झांक कर रोहिंग्या भाषा में तस्मीदा से कहती है- 12वीं की अपनी ड्रेस (स्कूल यूनिफॉर्म) दे दे, सिलाई करनी है। हमें पता चला कि वह लडक़ी 12 वीं में दाखिला ले चुकी है और तस्मीदा की यूनिफॉर्म अब वह पहनेगी।
तस्मीदा हल्की मुस्कान के साथ रोहिंग्या भाषा में जवाब देती हैं- धो दिया है शाम को ले जाना।हम उम्मीदों से भरे दो चेहरे देखकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ चलते हैं।


Date : 25-Jun-2019

समीरात्मज मिश्र
लखनऊ, 25 जून । उत्तरप्रदेश के रामपुर में छह साल की बच्ची के कथित बलात्कारी को मुठभेड़ में गोली मारने के मामले में रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजयपाल शर्मा की चर्चा सोशल मीडिया पर खूब हो रही है।
एक तरफ तो लोग इसे उनकी बहादुरी करार दे रहें हैं तो दूसरी तरफ बहुत सारे लोग इस मामले में कई सवाल भी उठा रहे हैं, जो न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था को भी घेरे में डाल रही है।
करीब डेढ़ महीने पहले छह साल की एक बच्ची की बेरहमी से हत्या करके शव को कहीं फेंक दिया गया था। आशंका जाहिर की गई कि पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई।
इस मामले में नाजिल नाम के जिस शख्स को पुलिस मुख्य अभियुक्त मान रही थी, दो दिन पहले पुलिस के साथ उसकी मुठभेड़ हुई जिसमें बताया जा रहा है कि एसपी अजयपाल शर्मा ने नाजिल को गोली मार दी जो कि उसकी टांगों पर लगी। बाद में नाजिल को पुलिस ने हिरासत में लेकर अस्पताल भेज दिया। हालांकि अन्य मीडिया से बातचीत में खुद एसपी अजयपाल शर्मा ने यही बताया, सिविल लाइंस थाने की पुलिस के साथ नाजिल की मुठभेड़ हुई जिससे उसके पैर में गोली लग गई।
लेकिन सोशल मीडिया पर अजयपाल शर्मा की तस्वीरों के साथ यही बात वायरल हो रही है कि नाजिल को गोली अजयपाल शर्मा ने ही मारी। इसके लिए अजयपाल शर्मा की जमकर तारीफ भी हो रही है। गोली अजयपाल शर्मा ने ही मारी या फिर किसी और ने, इस बारे में जानने के लिए अजयपाल शर्मा से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि पुलिस ने पीडि़त लडक़ी के परिवार को न्याय दिलाया है, उनके मन में थोड़ा सुकून मिला है, इससे बदमाशों के मन में खौफ पैदा होगा, इससे अपराधों में कमी आएगी इत्यादि। सोशल मीडिया पर तो कई लोग उन्हें भगवान के समकक्ष रख रहे हैं तो कई उन्हें सिंघम का अवतार बता रहे हैं।
लेकिन कई लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी एके जैन कहते हैं कि यदि मुठभेड़ के दौरान अभियुक्त ने गोली चलाई और पुलिस ने आत्मरक्षा में उसे गोली मारी तो इसमें कोई गलत नहीं है लेकिन सिर्फ रेप और हत्या का अभियुक्त मानकर गोली मार दी तो ये बिल्कुल गलत है।
बीबीसी से बातचीत में एके जैन का कहना था, जैसा मैंने खबरों में पढ़ा है कि उस व्यक्ति ने पुलिस पर उस वक़्त गोली चलाई जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी। ऐसे में अपने बचाव में पुलिस अधिकारी का गोली चलाना पूरी तरह से न्यायसंगत है लेकिन रेप के एक अभियुक्त पर गोली चला देना जिसका कि पहले से कोई आपराधिक इतिहास भी न रहा हो तो ये ठीक नहीं है।
एके जैन कहते हैं कि अभियुक्त की तो छोडि़ए यदि आरोप साबित भी हो गए हों तो भी गोली चलाने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि सज़ा देना तो न्यायालय का काम है, पुलिस का नहीं।
वहीं पुलिस विभाग के एक मौजूदा अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर इस कार्रवाई को पूरी तरह से पब्लिसिटी स्टंट करार देते हैं।
उनके मुताबिक, ये बात समझ से परे है कि एक अभियुक्त को किसी एक थाने की पुलिस पकडऩे गई है और उस पर गोली पुलिस अधीक्षक चला रहे हैं। किसी मुठभेड़ का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी का करना कोई सामान्य बात नहीं होती है और ये मामला इतना बड़ा और मुश्किल नहीं था कि इसमें एसपी जैसे अधिकारी को लगना पड़ता।
हालांकि पुलिस अधिकारी की इस कार्रवाई की प्रशंसा करने वाले सोशल मीडिया पर ही नहीं बल्कि उसके अलावा भी तमाम लोग हैं। लखनऊ में अमर उजाला के वरिष्ठ पत्रकार और पिछले करीब डेढ़ दशक से क्राइम की रिपोर्टिंग कर रहे विवेक त्रिपाठी कहते हैं कि एसपी अजयपाल शर्मा ने कुछ भी गलत नहीं किया। उनके मुताबिक ऐसे जघन्य कृत्य के लिए तो और बड़ी सजा दी जानी चाहिए थी।
विवेक त्रिपाठी कहते हैं, पुलिस का इतना भय अपराधियों में रहना चाहिए अन्यथा अपराध रोकना आसान नहीं होगा। हम लोग क्राइम की खबरें कवर करते-करते अपराध और अपराधियों के मनोविज्ञान को भली-भांति समझते हैं। कानून और पुलिस का भय यदि खत्म हो गया तो अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे।
उत्तर प्रदेश में डीजीपी रह चुके एक अन्य रिटायर्ड पुलिस अधिकारी सुब्रत त्रिपाठी भी सिर्फ एक अभियुक्त को गोली मारने के पक्ष में नहीं हैं लेकिन मुठभेड़ में किसी को भी गोली लग जाने को वे बहुत आश्चर्यजनक घटना नहीं मानते हैं।
वहीं लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान इस घटना को राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और बेलगाम पुलिस का नतीजा बताते हैं।
वो कहते हैं, जिस व्यक्ति पर पुलिस को संदेह था, उसके संदेह का क्या आधार था ये किसी को नहीं पता है। उसे पकडऩे की बजाय गोली मारकर पुलिस अपनी नाकामी छिपा रही है। जबकि सच्चाई ये है कि डेढ़ महीने से लापता बच्ची के बारे में उसे तब तक कोई जानकारी नहीं मिली जब तक कि उसकी लाश की सूचना दूसरे लोगों ने नहीं दी। यह अकेली घटना नहीं है बल्कि राज्य में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
मुठभेड़ को लेकर यूपी पुलिस पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि रिटायर्ड डीजीपी एके जैन के मुताबिक पहले के मुकाबले अब मुठभेड़ की घटनाएं बहुत कम होती हैं। उनका कहना है, मैंने जब सत्तर के दशक में नौकरी शुरू की थी, उस वक्त सैकड़ों मुठभेड़ें हर साल होती थीं और कम से कम दो-ढाई सौ अपराधी मारे भी जाते थे। डकैती उन्मूलन अभियान में कितने डकैत मारे गए। लेकिन नब्बे के दशक के बाद मुठभेड़ों में इसलिए कमी आई क्योंकि मानवाधिकार आयोग, जांच एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस अधिकारियों में भी मुठभेड़ को लेकर डर पैदा हो गया।
एके जैन के मुताबिक, आम आदमी के पास मुठभेड़ों पर सवाल उठाने और उनकी शिकायत करने के लिए कई मंच उपलब्ध हैं। इनकी वजह से न सिर्फ फर्जी मुठभेड़ें कम हुई हैं बल्कि अपराधियों को सीधे मौत के घाट उतारने की बजाय उनके पैरों में गोली मारने का चलन भी बढ़ा है। एके जैन कहते हैं, पहले की मुठभेड़ें तो आर या पार की लड़ाई जैसी होती थीं जिनमें या तो पुलिस को मरना है या फिर अपराधी को।
एसपी अजयपाल शर्मा अभी कुछ दिन पहले ही रामपुर गए हैं। इससे पहले वो प्रयागराज स्थित पुलिस मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक कार्मिक के रूप में तैनात थे। पुलिस वालों के बीच, एनकाउंटरमैन, के नाम से मशहूर अजयपाल शर्मा ने करीब दो हफ्ते पहले ही रामपुर में बतौर पुलिस कप्तान, पदभार संभाला था। (बीबीसी)
 


Date : 25-Jun-2019

पद्मश्री जैसा बड़ा नागरिक सम्मान किसी के जीवनयापन में बाधा बन गया हो? ओडिसा के गरीब आदिवासी किसान दायतारी नायक के साथ ऐसा ही हुआ है। इसके चलते नायक अपना पद्मश्री सम्मान वापस लौटाना चाहते हैं।
दायतारी नायक को इसी साल ओडिसा में 3 किलोमीटर पहाड़ खोदकर नहर बनाने के लिए पद्मश्री से नवाजा गया था। अब यही पद्मश्री सम्मान नायक के जीवनयापन में मुश्किलें पैदा कर रहा है। नायक के मुताबिक जिंदा रहने के लिए वे चींटी के अंडे खाने को मजबूर हैं।
75 साल के दायतारी नायक तालाबायतरानी गांव में रहते हैं। ये क्षेत्र खनिज पदार्थों की दृष्टि से बहुत उन्नत है। लेकिन यहां सिंचाई के साधन ना होने की वजह से किसान खेती के लिए पानी से महरूम थे। नायक ने इस सूखे इलाके में सिंचाई के लिए अकेले ही तीन किलोमीटर गोनासिका का पहाड़ खोदकर नहर बना दी। इस नहर से 100 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।
नायक ने ये काम तीन सालों में 2010 और 2013 के बीच किया। इस काम के लिए उनके पास सिर्फ कुदाल और बेल्चा था, उन्होंने इन्हीं से पहाड़ खोदने जैसा दुरूह काम कर डाला। देर से ही सही, लेकिन सरकार ने भी इसके लिए उन्हें सम्मानित किया। लेकिन यही सम्मान अब उनके जीवन में मुश्किलें पैदा कर रहा है।
दायतारी नायक कहते हैं कि सम्मान मिलने से पहले उन्हें आसानी से मजदूरी का काम मिल जाता था। लेकिन पद्मश्री के बाद से लोग उन्हें काम देने से कतराते हैं। उनके मुताबिक लोग कहते हैं कि मजदूरी का काम उनके सम्मान के अनुरूप नहीं है।
नायक के मुताबिक पद्मश्री ने उन्हें कदर गरीबी की ओर धकेल दिया है कि उन्हें अपने परिवार का पेट पालना मुश्किल हो रहा है। वे कहते हैं, पद्मश्री ने किसी भी तरह से मेरी मदद नहीं की है। पहले मैं दैनिक मजदूरी किया करता था। लेकिन अब लोग मुझे काम नहीं देते उन्हें लगता है कि ये काम मेरी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है। अब हम चींटी के अंडे खाकर बसर कर रहे हैं।
उन्होंने बताया, अब मैं अपने परिवार को चलाने के लिए तेंदू के पत्ते और आम पापड़ बेचता हूं। सम्मान ने मेरा सब कुछ ले लिया। मैं इसे वापस लौटाना चाहता हूं, ताकि मुझे फिर से काम मिल सके।
नायक कहते हैं कि 700 रुपये की वृद्ध पेंशन से उनके पूरे परिवार का जीवन यापन संभव नहीं है। उन्हें कुछ दिन पहले इंदिरा आवास योजना के तहत एक घर आवंटित हुआ था, जो कि अधूरा है। इसकी वजह से उन्हें अपने पुराने फूस के घर में ही रहना पड़ता है। निराश होकर नायक ने अपना पद्मश्री तमगा भेड़ों के झोपड़े में टांग दिया है।
नायक के बेटे आलेख जो खुद एक मजदूर हैं, कहते हैं कि उनके पिता से किए गए वादे पूरे नहीं किए गए। उनसे रोड बनाने का वादा किया गया था, और नहर को खराब होने से बचाने का वादा किया गया था। लेकिन ये अधूरे ही रह गए। वे कहते हैं कि उनके पिता इस बात से भी निराश हैं कि लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता सत्य प्रकाश नायक इसका आरोप राज्य की नवीन पटनायक सरकार पर लगाते हैं। वे कहते हैं कि नवीन सरकार की किसानों को लेकर लाई गई योजनाएं बेकार साबित हुई हैं। उन्होंने कहा, नवीन पटनायक सरकार ने किसानों के लिए कालिया योजना शुरू की। लेकिन उनका प्रशासन उस किसान के लिए कुछ नहीं कर सका जिसने सिंचाई के लिए नहर खोदी। ये निराशाजनक है।
स्थानीय प्रशासन खुद को इस बारे में अनभिज्ञ बताता है। किओनझार के जिला कलेक्टर आशीष ठाकरे कहते हैं कि वे इस बारे में पता करेंगे कि नायक अपना सम्मान क्यों लौटाना चाहते हैं। उन्होंने नायक की परेशानियों पर सुनवाई की बात कही। (न्यूजप्लेटफॉर्म)
 


Date : 25-Jun-2019

जयपुर, 25 जून। कुछ साल पहले तक लेखराज भील को जेईई-मेन परीक्षा के बारे में कुछ भी पता नहीं था, लेकिन इस साल वह राजस्थान के अपने आदिवासी गांव से यह परीक्षा पास करने वाला पहला छात्र बन गया है। 
झालावाड़ के मोगायबीन भीलन गांव के 18 वर्षीय इस लडक़े के लिए सफलता की यह राह आसान नहीं रही, उसे कड़ी मेहनत करने के साथ कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। उसके माता-पिता मनरेगा के मजदूर हैं, यहां तक कि वह यह भी नहीं जानते कि इंजीनियर होता कौन है। लेखराज की सफलता से खुश उसके पिता मंगीलाल ने कहा, ‘‘मैं तो यह जानता भी नहीं था कि इंजीनियर क्या होता है। मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था कि मेरा बेटा स्नातक करेगा। अब मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि वह हमारे भील समुदाय और इस गांव में पहला इंजीनियर बनने जा रहा है।
मंगीलाल और उसकी पत्नी सरदारी बाई, जो खुद अनपढ़ हैं, ने आशा व्यक्त की कि उनका बेटा परिवार की स्थिति को बेहतर करेगा और उन्हें मजदूरी भी नहीं करनी पड़ेगी। वहीं लेखराज ने भी कहा, ‘‘उन्होंने (माता-पिता) परिवार को पालने के लिए कड़ी मेहनत की है। मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर उनकी सेवा करना चाहता हूं।
लेखराज ने कहा कि वह अपने गांव के बच्चों के बीच पढ़ाई के महत्व के बारे में जागरुकता फैलाएंगे, जहां ज्यादातर लोग निरक्षर हैं और मजदूरी का काम करते हैं। उनके शिक्षक जसराज सिंह गुज्जर ने कहा कि लेखराज पढ़ाई में काफी अच्छा है। उसने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 93.83 प्रतिशत अंक लाकर झालावाड़ जिले में टॉप किया था। तब राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस उपलब्धि के लिए उसे एक लैपटॉप दिया था। (भाषा)

 


Date : 25-Jun-2019

हरियाणा, 25 जून। हरियाणा में भाजपा के एक नेता की कार ने एक होम गार्ड को सडक़ पर कई मीटर तक घसीटा। घटना राज्य के रेवाड़ी की है। यहां सोमवार को भाजपा नेता सतीश खोड़ा की कार गलत दिशा में चल रही थी। होम गार्ड जब कार रोकने की कोशिश में उसके बोनट पर चढ़ा तो ड्राइवर उसे 200 से 300 मीटर घसीट कर ले गया। इसके बाद गार्ड और ड्राइवर में बहस हो गई। एनडीटीवी के मुताबिक घटना के समय भाजपा नेता सतीश खोड़ा कार में मौजूद थे।
वहीं, इंडिया टुडे के मुताबिक घटना को लेकर होम गार्ड अधिकारी मोनू यादव ने कहा, ‘मैंने कार रोकी। लेकिन ड्राइवर ने कहा कि यह सतीश खोड़ा की कार है। जब मैंने कहा कि आप गलत दिशा में गाड़ी चला रहे हैं तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया।’ उधर, ड्राइवर ने अपनी गलती मानते हुए कहा, ‘मैं कार को गलत दिशा में ले गया था। तभी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने मुझे रोका। मैंने उनसे विनती की, लेकिन वे नहीं माने। इस बीच मैंने कार आगे बढ़ा दी। उसके साथ ड्राइवर भी 300 मीटर तक घिसटता गया। मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूं।’
 


Date : 24-Jun-2019

नयी दिल्ली, 24 जून । उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार से 120 से अधिक बच्चों की मौत पर बिहार सरकार को सोमवार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने अधिवक्ता मोहन प्रताप और शिव कुमार त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। 
न्यायालय ने बिहार सरकार को  दिमागी बुखार पर नियंत्रण पाने के लिए उठाये गये कदमों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
पीठ के एक सदस्य ने कहा, ‘‘बिहार सरकार को नोटिस जारी किया गया है। राज्य सरकार की रिपोर्ट के बाद मामले की सुनावायी की जायेगी।’’
याचिकाकर्ताओं ने  मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार  से बच्चों की मौत को रोकने के  लिए संबद्ध अधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने को लेकर शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। (वार्ता)
 


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