राष्ट्रीय

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09-May-2021 9:41 PM (15)

शामली, 9 मई : यूपी के शामली जिले में शर्मनाक वाकया सामने आया है. यहां  नगरपालिका द्वारा कूड़ा गाड़ी में एक महिला का शव श्मशान ले जाया गया. बालामती की मौत कोविड से नहीं हुई,लेकिन कोविड की दहशत ऐसी है कि उन्हें कंधा देने को चार लोग नहीं मिले. उनके भाई प्रवास घर में अकेले थे.तीन और लोगों की ज़रूरत थी बहन की अर्थी को कंधा देने के लिए. मोहल्ले में आसपास के कई घरों में गए. कोई अर्थी को कांधा देने को तैयार नहीं हुआ. फिर उन्होंने नगर निगम को फ़ोन किया. नगर निगम ने कूड़ा गाड़ी में बालामती के शव को श्मशान पहुंचा दिया. लेकिन इस बीच किसी ने तस्वीर खींच कर वायरल कर दी.

यह तस्वीर दिल दहलाने वाली भी है और दिल दुखाने वाली भी।मामला शामली के जलालाबाद कस्बे के है।यहां डॉक्टर प्रवास नाम के एक ग़रीब बंगाली होम्योपैथिक डॉक्टर रहते हैं।बंगाल में उनकी बहन बालामती लंबे अरसे से बीमार थीं।चूंकि बालामती ग़ैर शादीशुदा थीं,लेहाज़ा उनकी देखभाल करने वाला परिवार नहीं था।प्रवास बहन को बंगाल से शामली लाये।यहां उनका इलाज भी करने की कोशिश की।लेकिन बचा नहीं सके।शनिवार की रात उनकी मौत हो गई.

रविवार को सुबह वह मोहल्ले में लोगों से मिन्नतें करते रहे कि ,"मेरी बहन की अर्थी को कांधा दे दो ,वो कोरोना से नहीं मरी है।" लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ. सबको यह लग रहा था कि आजकल ज़्यादातर लोग कोरोना से ही मर रहे हैं. हो न हो इसे भी कोरोना ही रह होगा. फिर भाई प्रवास ने नगरपालिका को फ़ोन कर बहन का शव शमशान पहुंचाने कहाऔर नगरपालिका ने उसे कूड़ागाडी में पहुंचा दिया.

शामली की डी एम जसजीत कौर ने एन डी टी वी को बताया कि उन्होंने वायरल तस्वीर देख कर इसकी जांच एस डी एम और एक ए सी एम ओ को दे दी है. उनका कहना है कि वह कोविड कंट्रोल रूम के नंबर का काफी प्रचार करवा रही हैं. उसमें यह भी बताया जा रहा है कि अगर एम्बुलेंस या शव वाहन की ज़रूरत हो तो उस नंबर पर सम्पर्क करें, लेकिन प्रवास ने नगर पालिका को फ़ोन कर दिया, जिन्होंने यह काम किया है. इसकी जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. (ndtv.com)


09-May-2021 9:31 PM (15)

नई दिल्ली, 9 मई : प्रख्यात मूर्तिकार राज्यसभा सांसद और पद्म विभूषण प्राप्तकर्ता रघुनाथ मोहपात्रा का निधन हो गया. उन्होंने एम्स भुवनेश्वर में अंतिम सांस ली. पिछले सप्ताह ही उनके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा सदस्य रघुनाथ मोहपात्रा के निधन पर रविवार को शोक जताया और कहा कि उन्हें पारंपरिक शिल्प को लोकप्रिय बनाने के लिए याद किया जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, 'सांसद श्री रघुनाथ मोहपात्रा जी के निधन से दुखी हूं. उन्होंने कला, वास्तुकला और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया. पारंपरिक शिल्प को लोकप्रिय बनाने में उनके योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा. मेरी संवदेना उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति है. ओम शांति.'


बता दें कि रघुनाथ मोहपात्रा का जन्म पुरी में हुआ था. मोहपात्रा को 1976 में पद्म श्री से नवाजा गया था. इसके बाद 2001 में पद्म भूषण और 2013 में पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया गया. (abplive.com)


09-May-2021 9:26 PM (17)

कोलकाता, 9 मई : पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री और राज्यपाल में ठन गई है. राज्यपाल जगदीप घनखड़ ने टीएमसी के चार नेताओं के खिलाफ सीबीआई केस चलाने की इजाजत दे दी है. खास बात ये है कि ये चारों नेता कल सोमवार को मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. जिन चार नेताओं के खिलाफ राज्यपाल ने सीबीआई केस चलाने की इजाजत दी है उसमें फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी का नाम शामिल है.

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों में शारदा स्कैम और नारदा स्कैम लगातार चल रहे हैं. इन मामलों की सीबीआई जांच भी कर रही है. अलग-अलग नेताओं के नाम इन मामलों में आए हैं. इन नेताओं के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाया जाए इसको लेकर राज्यपाल से अनुमति ली गई है.

कल बंगाल के मंत्रियों का शपथ
बता दें कि कल पश्चिम बंगाल में कुल 43 मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे. इसमें 24 कैबिनेट मंत्री, 10 स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) और 9 राज्य मंत्री होंगे. इस लिस्ट में पूर्व आईपीएस हुमायूं कबीर और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का नाम भी शामिल है.


कौन-कौन नेता बनेंगे कैबिनेट मंत्री?
टीएमसी नेता अमित मित्रा, पार्थ चटर्जी, सुब्रत मुखर्जी, साधन पाण्डे, ज्योतिप्रिय मल्लिक, ब्रात्य बसु, बंकिम चंद्र हाजरा, अरूप विश्वास, मलय घटक, डॉ मानस भुइयां, सोमेन महापात्र, उज्ज्वल विश्वास, अरूप राय, फिरहाद हकीम, रथीन घोष, डॉ शशि पांजा, चंद्रनाथ सिंह, शोभनदेव चटोपाध्याय, पुलक राय, गुलाम रब्बानी, विप्लव मित्र, जावेद खान, सपन देबनाथ और सिद्दिकुल्ला चौधरी कैबिनेट मंत्री बनेंगे.

इन नेताओं को स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री)
इसके अलावे बेचाराम मन्ना, सुब्रत साहा, हुमायूं कबीर, अखिल गिरि, चंद्रिमा भट्टाचार्य, रत्ना दे नाग, संध्यारानी टुडू 32, बुलु चिक बराई, सुजीत बोस और इंद्रनील सेन को स्वतंत्र प्रभार (राज्य मंत्री) की जिम्मेदारी मिलेगी.

किन-किन नेताओं को राज्य मंत्री की जिम्मेदारी?
वहीं दिलीप मंडल, अखरूज्जमां, शिउली साहा, श्रीकान्त महतो, जसमीन शबीना, वीरवाहा हांसदा, ज्योत्सना मंडी, मनोज तिवारी और परेश चन्द्र अधिकारी राज्य मंत्री बनेंगे. (abplive.com)


09-May-2021 9:11 PM (14)

बागपत, 9 मई : यूपी के बागपत ज़िले में पुलिस ने कफन चोरों का एक गिरोह पकड़ लिया है. इस गिरोह में सात लोग हैं. कफन चोरों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि यह लोग शव को ओढाई गयी सफेद चादरें, साड़ियां और मरने वाले के जो कपड़े घर वाले शमशान लेकर जाते थे, उन्हें चुरा कर बेच देते थे. इनके पास से 520 सफेद चादरें, 127 सफेद कुर्ते, 52 सफेद साड़ियां और दूसरे कपड़े बरामद हुए हैं. इलाके के सर्किल अफसर आलोक सिंह ने मीडिया को बताया कि नई सफेद चादरों, कुर्तों और साड़ियों को यह लोग धो कर और प्रेस कर ग्वालियर की किसी कंपनी का लेबल लगा कर दुबारा बाजार में बेच देते थे.

पता चला है कि बागपत ज़िले के बड़ौत कस्बे के कुछ कपड़ा व्यापारियों ने कफन चोरों से व्यापारिक डील कर रखी थी. इन्हें एक दिन की चोरी के एवज में 300 रुपये मिलते थे. इसमें पकड़े गए 3 लोग एक ही परिवार के हैं.

पुलिस के मुताबिक इन्होंने बताया है कि यह लोग पिछले दस साल से कफन चोरी के कारोबार से जुड़े हुए हैं. लेकिन चूंकि यह लोग कोरोना महामारी के दौरान यह काम कर रहे हैं इसलिए पुलिस ने इनके ऊपर चोरी की दफ़ाओं के साथ-साथ महामारी अधिनियम भी लगा कर जेल भेजा है. (ndtv.com)


09-May-2021 8:48 PM (46)

-राज द्विवेदी

सिंगरौली. सिंगरौली जिले में दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है. एक पिता को अपने बेटी का शव खाट पर लेकर 25 किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा. विकास के दावे के बीच सिस्टम की अनदेखी की इस शर्मनाक तस्वीर को देखकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. पूरा मामला निवास पुलिस चौकी क्षेत्र के गड़ई गांव का हैं. हालांकि पुलिस का कहना है कि मृतका के गांव से पीएम कराने एवं वापस गांव छोड़ने के लिए पराई पुलिस द्वारा वाहन की व्यवस्था की गई.

पीड़ित धिरूपति की 16 वर्षीय नाबालिग बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों ने घटना की पुलिस चौकी में दी लेकिन पुलिस प्रशासन से सहयोग नहीं मिला. इस बीच पिता बेटी का शव खाटपर लेकर पोस्टमार्टम कराने के लिए 25 किलोमीटर जाने के लिए मजबूर हुआ. पीड़ित को नहीं शव वाहन मिला नहीं. निवास पुलिस ने कोई संजीदगी नहीं दिखाई. आखिरकार पिता को कलेजे के टुकड़े के शव को खाट पर लेकर 25 किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ा. पीड़ित ने कहा कि पुलिस ने सहयोग नहीं किया, शव वाहन बुलाने पर भी नहीं आया, अब कितनी देर तक गुहार लगाते इसलिए मजबूरी में शव को इसी तरह लेकर आ गए.

सिंगरौली पुलिस ने दी सफाई

सिंगरौली पुलिस ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये खबर भ्रामक है. सिंगरौली पुलिस अधीक्षक ऑफिस से जारी बयान के मुताबिक, घटना की सूचना मिलने पर चौकी प्रभारी निवास अरुण सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर 6 मई को पहुंचे थे. शव को पोस्टमार्टम के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निवास लाया गया और पोस्टमार्टम के उपरांत शव को ट्रैक्टर के माध्यम से गांव पहुंचाया गया. सीएसपी देवेश पाठक ने कहा, "मृतका के गांव गौरापनी से 4 किमी दूर जंगल में स्थित घटना स्थल तक वाहनों के आवागमन हेतु कोई मार्ग उपलब्ध न होने के कारण शव को ग्राम गौरापनी तक क्षेत्र के परंपरागत तरीके से खाट में रखकर लाया गया. इसके बाद मृतका के गांव से पीएम कराने एवं वापस गांव छोड़ने के लिए पराई पुलिस द्वारा वाहन की व्यवस्था की गई." (news18.com)
 


09-May-2021 8:45 PM (23)

 

-शहजाद राव

बागपत. देश में कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां चंद पैसों की खातिर कोरोना संक्रमित मुर्दों के कफन उतारकर उन्हें बाजार में ब्रांडेड कंपनी का टैग लगाकर बेचा जा रहा था. इससे न सिर्फ बेचने वाले बल्कि खरीदने वाले लोगों तक कोरोना के खतरे की एक लम्बी चेन तैयार हो गई थी. पुलिस ने एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो शमशान घाट व कब्रिस्तान से कोरोना संक्रमित मुर्दों के कफन व कपड़े चोरी करता था. पुलिस ने इस गिरोह के पास से बड़ी संख्या में मुर्दों को उढ़ाकर श्मशान घाट कब्रिस्तान लाई जाने वाली चादरों सहित कपड़े, और नामी कंपनियों के स्टीकर बरामद किए हैं.

कोरोना की दूसरी लहर से लोग जहां अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं, वहीं दूसरी कुछ ऐसे लोग हैं, जो कोरोना संक्रमण से मरे हुए लोगों के कफन पर भी व्यापार कर रहे हैं. जनपद की बड़ौत कोतवाली पुलिस ने साथ ऐसे 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है जो शमशान और कब्रिस्तान में दीवार फांदकर मुर्दों के कपड़े और कफन चोरी किया करते थे. जिसके बाद उन पर ब्रांडेड कंपनियों का यह लोग स्टीकर लगा देते और उन्हें महंगे दामों पर बेच दिया करते थे. जिससे लोगों में कोरोना संक्रमण भी फैल रहा था.

दरअसल, गिरोह के इन लोगों का काम व्यापारियों तक चोरी के कफन और कपड़े पहुंचाने का होता था. जिसके बाद खरीदने वाले व्यापारी उन पर बड़ी-बड़ी कंपनियों का स्टीकर चिपका देते थे. पुलिस ने ऐसे व्यापारियों को भी गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने पकड़े गए अभियुक्तों के पास से 520 मुर्दों की चादर, 127 कुर्ते, 140 सफेद कमीज सहित महिलाओं के भी कपड़े बरामद किए हैं. जिनमे कोरोना संक्रमित मुर्दो के कपड़े और कफन शामिल हैं. इसके अलावा पुलिस ने ब्रांडेड कम्पनी के पैकिंग रिबन और स्टीकर भी अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामद किए हैं. (news18.com)


09-May-2021 8:31 PM (14)

मऊ में एक निजी अस्पताल के लैब तकनीशियन ने पानी की टंकी से कूदकर आत्महत्या कर ली। लोग वहां पर वीडियो बनाते रहे।  प्रेम प्रसंग की आशंका जताई जा रही है।  (abplive.com)


09-May-2021 3:01 PM (24)

 

-नितिन गोस्वामी

चंदौली (वाराणसी). कोरोना महामारी इन दिनों लोगों पर बंपर संकट बनकर टूट रही है. बहुत से लोग ऐसे में जो संक्रमण की डर की वजह से अपनों से दूर हो रहे हैं. ऐसे में मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए आगे तक नहीं आ रहे हैं. यूपी के चंदौली में इस तरह का मामला सामने आया है. जहां अपनों के ठुकराने पर यूपी पुलिस मसीहा बनकर सामने आई और शव का अंतिम संस्कार किया.

पूरा मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर गांव का है. जहां ज्योत्सना उपाध्याय का शनिवार को संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया. जो कि पिछले कई बीमार चल रही थी. लेकिन शनिवार को कोरोना काल में हुई मौत के चलते लोगों ने अंतिम संस्कार करना तो दूर दरवाजे पर भी नहीं गए. वहीं वृद्ध पति जयशंकर पत्नी की मौत और परिस्थितियों से असहाय नजर आए. जब अपनोंं ने मुंह मोड़ लिया, तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम डायल 112 पर फोन किया. घटना के बाबत जानकारी देते हुए मदद मांगी.

इस कोरोना काल में यूपी पुलिस ने एक बार फिर संवेदनशीलता दिखाई. सूचना के बाद तत्काल सदर कोतवाल अशोक मिश्रा पूरे दल बल के साथ मौके पर पहुंचे, और घंटों से घर में पड़े वृद्ध के शव को बाहर निकाला. जिसके बाद बॉडी को प्लास्टिक से कवर करते हुए सील किया. पुलिस की इस पहल को देख इक्का दुक्का ग्रामीण भी आगे आये. यहीं नहीं पुलिस ने जवानों ने वृद्ध महिला के अर्थी को कंधा देते हुए शव वाहन की मदद से बलुआ घाट पर भेजवाया.
दरअसल, मृतका ज्योत्सना और जयशंकर उपाध्याय का कोई संतान नहीं था. एक कच्चे मकान में छोटी सी दुकान के सहारे आजीविका चलाते थे.लेकिन ऐसे समय में जब अपनों ने मुंह मोड़ लिया.तो पुलिस फरिश्ता बनकर आई अंतिम संस्कार कराया. चुकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं तो पुलिस ने अपनी तरफ से अंतिम संस्कार में आने खर्च के लिए आर्थिक सहायता के साथ ही घाट पर समुचित व्यवस्था कराई. (news18.com)


09-May-2021 3:00 PM (88)

 

-उमाशंकर भट्ट

देवरिया. पंचायत चुनाव के बाद देवरिया जिले में एक रहस्यमय बिमारी ने पैर पसारना शुरु कर दिया है और लोग तड़प-तड़प कर मर रहे है, अभी तक दो गांवों में पिछले 15 दिनों में 32 लोगों की मौत हुई है. बताया जा रहा है कि सभी की बुखार और सांस फुलने की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई. मामला रुद्रपुर ब्लाक के बैदा गांव भागलपुर ब्लॉक के अण्डिला गांव का है. बैदा गांव में 12 तो अण्डिला गांव में 20 लोगों की मौत हो चुकी है. चौंकाने वाली नट यह है कि जिले का स्वास्थ्य महकमा अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है.

न्यूज़ 18 की टीम जब अण्डिला गांव पहुंची तो पता चला कि इस गांव मे महज 15 दिनों में 20 लोगों की मौत हुई है. सभी मृतकों में एक ही प्रकार के लक्षण है. सभी के सांस लेने मे समस्या आ रही है और तेज बुखार हो रहा है. मृतकों के परिजनों का कहना है कि जब वह अस्पताल मरीज को लेकर जाते है तो वहां आक्सीजन की भारी किल्लत होती है. जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पताल के वेड फुल है. 20 मौतों के बाद भी जिले का स्वास्थ्य महकमा अभी तक जांच के लिए नहीं पहुंचा है. लगातार हो रही मौतों से लोगों में दहशत है और गांव में सन्नाटा पसरा है.

अभी तक नहीं पहुंची मेडिकल टीम य

ही हाल  रुद्रपुर ब्लाक के बैदा गांव का है. यहां भी लोग घरों से निलने से कतरा रहे है. वजह यह है कि इस गांव में भी पिछले सात दिनों में 12 मौत हो चुकी है और यह सभी मौत आक्सीजन की कमी से हुई है.इस गांव के कई लोग मौत के मुहाने पर खड़े हैं. यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर है. गोरखपुर जनपद की सीमा से सटा है, लेकिन इस गांव मे आज तक कोई मेडिकल टीम नहीं पहुंची है. नवजवान, महिलाएं और बुजुर्ग सांस फुलने की बीमारी के चलते तड़प-तड़प के मर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के कान इस गांव का मातम नही सुनाई दे रहा है.
परिजनों में दहशत

न्यूज़-18 की टीम के साथ इस गांव के कई मृतक के परिजनों ने दहशत का माहौल साझा किया. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन तक गुहार लगाई गयी लेकिन किसी ने भी इस गांव की सुध नही ली. एक सप्ताह के अंदर 12 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बात की जानकारी गांव के प्रधान और सीएचसी के डॉक्टरों ने दी है.न्यूज़ 18 के पास वह कागज भी है जिसमे 12 मौत का जिक्र किया गया है.

डीएम ने कही जांच की बात

जब इस मामले पर डीएम आशुतोष निरंजन से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी है और आज गांव मे एक स्वास्थ्य टीम भेज कर जांच करायी जायेगी. लेकिन कैमरे पर बोलने से उन्होंने इनकार कर दिया।ऐसे में आप समझ सकते है कि जिले के जिम्मेदार किस प्रकार से बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रहे है. (news18.com)


09-May-2021 3:00 PM (37)

जम्मू. सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में रविवार को आतंकवादियों के एक ठिकाने पर छापा मारा और 19 हथगोले बरामद किए. सुरक्षा बलों ने साथ ही ग्रेनेड हमलों से सीमावर्ती जिले में शांति भंग करने की आतंकवादी योजना को भी नाकाम कर दिया. एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि अभियान के दौरान किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया. यह अभियान सुरनकोट के फगला इलाके में सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से चलाया था.

आतंकवादियों द्वारा एनएच 144ए (जम्मू-पुंछ राजमार्ग) पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाए जाने की सटीक सूचना के आधार पर राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस ने फगला इलाके में संयुक्त अभियान चलाया. प्रवक्ता ने कहा, ‘दोनों एजेंसियों ने प्राकृतिक गुफा जैसे ठिकाने में छिपाकर रखे ग्रेनेड का भारी जखीरा बरामद किया. कुल 19 हथगोले बरामद किए गए हैं.’

उन्होंने बताया कि ग्रेनेड के बरामद होने से पुंछ में शांति को बाधित करने की साजिश नाकाम हो गई. प्रवक्ता ने कहा, ‘इस ठिकाने का पर्दाफाश होने से सुरक्षाबलों पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम हो गई। सेना और पुलिस ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और क्षेत्र में स्थिरता कायम करने की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए अपने साहस को एक बार फिर साबित किया है.’

जम्मू क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में विस्फोटकों की बरामदगी का यह दूसरा बड़ा मामला है. सुरक्षाबलों ने शनिवार को डोडा जिले के चकरांदी गांव से हथियार और विस्फोटकों का भारी जखीरा बरामद किया था. (news18.com)


09-May-2021 2:56 PM (26)

नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में नशे के बड़े कारोबार का पर्दाफाश हुआ है. दिल्ली पुलिस ने अफगानिस्तान के एक दंपति को गिरफ्तार कर उनके पास से 125 किलोग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की है. जब्त की गई हेरोइन की कीमत 860 करोड़ रुपये बताई गई है. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आरोपियों की पहचान 48 वर्षीय मोहम्मद शफी और 36 साल की तरीना के रूप में हुई है. यह दोनों अफगानिस्तान के कंधार के निवासी हैं.

अधिकारियों ने कहा कि बरामद की गई 125.840 किलो हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 860 करोड़ रुपये बताई गई है. पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) उर्जिवा गोयल ने कहा कि पुलिस को शुक्रवार को गुप्त सूचना मिली थी कि दो लोग कार में हेरोइन लेकर वजीराबाद से ख्याला की ओर जाएंगे. इसके बाद जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ लिया गया.

पुलिस ने कहा कि हेरोइन प्लास्टिक के सात थैलों में रखी हुई थी. उन्होंने कहा कि आरोपी मोहम्मद शफी ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वो हेरोइन वजीराबाद से ख्याला ले जा रहा था, जिसके बाद उसे पंजाब भेजा जाता. (भाषा से इनपुट) 

(news18.com)


09-May-2021 8:33 AM (40)

 

-सुनील नवप्रभात

देहरादून. टीकाकरण में भी उत्तराखंड में प्रभावशाली लोगों का दबदबा देखने को मिल रहा है. पूरे उत्तराखंड में 18 से 44 साल की उम्र के लोग बेसब्री से वैक्सीनेशन का इंतजार कर रहे हैं. उत्तराखंड में शनिवार शाम को कोविशील्ड वैक्सीन की एक लाख डोज मिली हैं. अब जाकर हेल्थ डिपार्टमेंट 10 मई यानि सोमवार से राज्य में 18 से 44 साल के लोगों का वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने जा रहा है. लेकिन, खानपुर से BJP के विवादास्पद विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के 25 साल के बेटे कुंवर दिव्य प्रताप सिंह को ये वैक्सीन पांच दिन पहले ही पांच मई को लगाई जा चुकी है.

बड़ा सवाल ये है कि जब राज्य के 18 से 44 साल के 50 लाख लोग वैक्सीन लगने का इंतजार कर रहे हों, ऐसे में विधायक पुत्र को दून हॉस्पिटल में वैक्सीन लगने के लिए पात्र न होने के बावजूद कैसे लगा दी गई. इस मामले में सीएमओ देहरादून ने दून हॉस्पिटल से बातचीत की है और मामले की पूरे रिपोर्ट मांगी है.

बता दें कि शनिवार को उत्तराखंड में 24 घंटे में कोरोना के 8390 नए केस सामने आये हैं. वहीं कोरोना से 118 मरीजों की मौत हो गई है. जबकि 4771 मरीज ठीक हो गए हैं. अब राज्य में कुल एक्टिव केस 71 हजार के पार हो गए हैं. शनिवार को प्रदेश में मिले कुल नए मामलों में देहरादून में सबसे ज्यादा 3430 नए केस मिले हैं. वहीं हरिद्वार-812, ऊधमसिंह नगर-1159, नैनीताल-636 केस मिले हैं. जबकि अल्मोड़ा-247, बागेश्वर-237, चमोली-175, चंपावत-322 केस पाये गए हैं. पौड़ी-203, टिहरी-424, उत्तरकाशी-266 और पिथौरागढ़-208, रुद्रप्रयाग-271 में नए केस मिले हैं. (news18.com)


09-May-2021 8:23 AM (23)

नई दिल्ली, 8 मई| भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड ने असम और तमिलनाडु में विधायक दल के नेता के चयन के लिए पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त किए हैं। असम में जीत के बाद भाजपा की सरकार बनने जा रही है। ऐसे में जो विधायक दल का नेता होगा, वही मुख्यमंत्री बनकर राज्य की कमान संभालेगा। असम में विधायक दल का नेता चुनने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह को नियुक्त किया गया है, जबकि तमिलनाडु में भाजपा के कुल चार विधायक इस बार जीते हैं। तमिलनाडु में विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। दोनों राज्यों में कल होने वाली विधायक दल की बैठक में भाजपा संसदीय बोर्ड से नियुक्त ऑब्जर्वर हिस्सा लेंगे।  (आईएएनएस)
 


09-May-2021 8:22 AM (26)

नई दिल्ली, 8 मई| दिल्ली सरकार की टीकाकरण नीति पर सवाल उठाते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि कोरोना महामारी से बचाव का एक मात्र उपाय टीकाकरण है, लेकिन अरविंद केजरीवाल के पास इसको लेकर कोई नीति नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा, "केंद्र सरकार द्वारा अपनाए गए गलत नीति के कारण आज देश में टीके की भारी कमी है ऐसे में सभी दिल्लीवासी को आने वाले समय में टीका लगाने का एक मात्र उपाय है कि दिल्ली सरकार आरोप- प्रत्यारोप की जगह टीके को लेकर ग्लोबल टेंडर जारी करें।"

"दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रेस वार्ता में 3 करोड़ से भी अधिक टीके डोज की मांग रखी, लेकिन आज के हालात अनुसार यह आने वाले कुछ समय तक मुमकिन नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में दिल्ली सरकार को ग्लोबल टेंडर जारी कर टीका खरीदने चाहिए।"

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में करीब 1.5 करोड़ लोग हैं, जो 18 साल से ऊपर के उम्र के हैं। इन 1.5 करोड़ लोगों के लिए करीब 3 करोड़ वैक्सीन के डोज की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "अगर हमें अगले तीन महीने में सभी को वैक्सीन लगा देना है, तो 80 से 85 लाख वैक्सीन की डोज प्रतिमाह में हमें जरूरत पड़ेगी और 80 से 85 लाख वैक्सीन प्रतिमाह लगाने के लिए हमें प्रतिदिन तीन लाख डोज लगानी पड़ेगी।"

अनिल कुमार के अनुसार, दिल्ली में टीकाकरण पर केजरीवाल झूठ बोल गुमराह कर रहे हैं कि रोजाना 1 लाख टीका लगाए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि पिछले कुछ दिनों में टीके लगाने की रफ्तार में कमी हुई है।

उन्होंने कोविन पोर्टल व दिल्ली सरकार के द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन के हवाले से कहा कि 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू होने के बाद से मात्र 2 दिन ही 1 लाख से अधिक टीके लगे।

अनिल कुमार ने कहा कि जिस रफ्तार से टीकाकरण हो रहे उस रफ्तार से अगले वर्ष तक भी 18 वर्ष से अधिक उम्र के वैध नागरिकों का टीकाकरण संभव नहीं होगा। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जिनमें ज्यदातर स्कूल जाते हैं, उनके लिए टीके का कोई अता पता नहीं है, तीसरे लहर में इन्हें प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

उन्होंने केजरीवाल सरकार से टीका केंद्र बढ़ाने व टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, वहीं कोविन पोर्टल पर पंजीकृत होने के बाद ज्यादातर दिल्लीवासी को टीके लगाने के दिन नहीं मिल पा रहे हैं।  (आईएएनएस)


09-May-2021 8:21 AM (20)

मुंबई, 8 मई | महाराष्ट्र में पहला कोविड मामला सामने आने के ठीक 14 महीनों के बाद शनिवार को कोरोना मामलों की कुल संख्या 50 लाख को पार कर गई। महाराष्ट्र में 9 मार्च, 2020 को दो कोविड-19 मामले सामने आए थे, जिसके बाद राज्य में कोरोना का प्रकोप जारी रहा और अब 9 मई 2021 को यहां कोरोना के मामले 50 लाख से भी अधिक हो चुके हैं। प्रदेश में संक्रमण की वजह से 75,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यहां शनिवार को यह जानकारी दी।

शुक्रवार को जहां 898 लोगों की मौत हुई थी, वहीं शनिवार को इस संख्या में कुछ कमी देखने को मिली और राज्य में 864 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके साथ ही अब प्रदेश में संक्रमण की वजह से जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या 75,277 हो गई है, जो देश में सबसे अधिक है।

राज्य में शनिवार को 53,605 नए मामले दर्ज किए गए। यहां 18 अप्रैल को सबसे अधिक 68,631 मामले सामने आए थे, जिसके मुकाबले अब मामलों में कुछ कमी जरूर देखने को मिली है। शनिवार को नए मामलों के बाद राज्य में कुल कोरोना मामलों की संख्या बढ़कर 50,53,336 हो चुकी है।

मुंबई की स्थिति में पहले के मुकाबले कुछ सुधार देखने को मिला है। यहां अब नए संक्रमणों के मामले 5,000 के स्तर से नीचे दर्ज किए जा रहे हैं। शनिवार को यहां 2,664 नए मामले सामने आए, जिसके बाद शहर में अब तक कुल मामलों की संख्या 673,235 हो गई है।

मुंबई जहां शुक्रवार को 71 लोगों की मौत हुई थी, वहीं शनिवार को यहां 62 लोगों ने अपनी जान गंवाई। देश की वाणिज्यिक राजधानी में संक्रमण की वजह से अब तक कुल 13,713 लोग दम तोड़ चुके हैं।

राज्य में मृत्युदर 1.49 प्रतिशत दर्ज की गई है। यहां फिलहाल सक्रिय मामलों की संख्या 628,213 है।

शनिवार को 82,266 लोग पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर लौट गए। राज्य में ठीक होने वालों की कुल संख्या 43,47,592 तक पहुंच गई है। (आईएएनएस)
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09-May-2021 7:59 AM (24)

नई दिल्ली, 9 मई| सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार को एक पैनल का गठन किया, जो दिल्ली सरकार द्वारा मेडिकल ऑक्सीजन के वितरण, इसे की गई आपूर्ति और प्रभावकारिता की जांच करेगा। ऑडिट पैनल में एम्स प्रमुख रणदीप गुलेरिया को भी शामिल किया गया है। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और एम.आर. शाह की पीठ ने कहा : एनसीटीडी के लिए ऑडिट को अंजाम देने के लिए ऑडिट उप-समूह में डॉ. रणदीप गुलेरिया, प्रोफेसर और प्रमुख पल्मोनरी मेडिसिन और नींद विभाग, एम्स संदीप बुधिराज, शामिल होंगे। इसमें नैदानिक निदेशक और निदेशक, आंतरिक चिकित्सा, मैक्स हेल्थकेयर और केंद्र सरकार और जीएनसीटीडी (दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार) के प्रत्येक आईएएस अधिकारी, संयुक्त सचिव के पद से नीचे नहीं, शामिल होंगे।

शीर्ष अदालत ने जोर दिया कि ऑडिट आयोजित करने का उद्देश्य हर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र को प्रदान की गई ऑक्सीजन की आपूर्ति के संबंध में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो आपूर्ति आवंटित की गई है, वे अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं, उन्हें वितरण नेटवर्क के माध्यम से अस्पतालों में उपलब्ध कराया जा रहा है।

पीठ ने यह स्पष्ट किया कि ऑडिट का उद्देश्य डॉक्टरों द्वारा उनके रोगियों का इलाज करते समय लिए गए निर्णयों की जांच करना नहीं है।

पीठ ने कहा कि केंद्र जब तक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन नहीं करता है, तब तक ऑक्सीजन के आवंटन की मौजूदा प्रथा जारी रहेगी।

केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि मेडिकल ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए दिल्ली सरकार सहित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा कई मांगें अवास्तविक थीं।  (आईएएनएस)


09-May-2021 7:57 AM (57)

मुंबई. महाराष्ट्र में म्यूकोरमाइकोसिस (कवक संक्रमण) से कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है. ये लोग कोविड-19 को मात दे चुके थे, लेकिन काले कवक की चपेट में आ गए. राज्य में ऐसे लगभग 200 मरीजों का उपचार चल रहा है. चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के प्रमुख, डॉक्टर तात्याराव लहाने ने कहा कि म्यूकोरमाइकोसिस के मामले बढ़ रहे हैं.

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब तक उपचार करानेवाले ऐसे 200 मरीजों में से आठ की म्यूकोरमाइकोसिस, जिसे काला कवक भी कहा जाता है, की वजह से मौत हो गई है. ये लोग कोविड-19 से बच गए थे, लेकिन कवक संक्रमण ने उनकी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला किया जो जानलेवा साबित हुआ.’’

जानिए कितना खतरनाक है ये फंगस

डॉक्टरों का मानना है की यह फंगस पिछले वेव में था पर इस बार यह ज्यादा खतरनाक है. अगर यह फंगस मरीज के दिमाग तक पहुंच गया तो मरीज को बचना काफी मुश्किल होता है. इसके लक्षण है आंखों में जलन, सर दर्द, आधे चेहरे पर सुजन आना, नाक बंद होना, साईनस की तकलीफ. आंखों से चेहरे से ही यह फंगस दिमाग तक पहुंचता है.

कैसे होता है ये इंफेक्शन

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने शुक्रवार को कहा था कि म्यूकोरमाइकोसिस रोग म्यूकर नाम के कवक की वजह से होता है जो नम सतहों पर पाया जाता है.

उन्होंने यह भी कहा था कि जब कोविड-19 मरीज को ऑक्सीजन प्रणाली पर रखा जाता है तो उसमें वायु को नम रखनेवाला जलयुक्त उपकरण लगा होता है, ऐसी स्थिति में मरीज के कवक संक्रमण की चपेट में आने का जोखिम बढ़ जाता है.

डॉक्टर लहाने ने कहा कि कवक संक्रमण की बीमारी के बारे में पहले से ही पता है, लेकिन इसके मामले कोविड-19 संबंधी जटिलताओं की वजह से बढ़ रहे हैं जिसमें स्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल कई बार रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा देता है और कुछ दवाओं का परिणाम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के रूप में निकलता है. (news18.com)


08-May-2021 10:01 PM (21)

चंडीगढ़, 8 मई | पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कहा कि लॉकडाउन के उल्लंघन की इजाजत किसी को नहीं है। इस समय महामारी के कारण गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य में सप्ताहांत में तालाबंदी और अन्य प्रतिबंधों के उल्लंघन की अनुमति दी किसी भी कीमत पर नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को कुचलने का कोई सवाल ही नहीं है। केंद्र के इन कानूनों का उनकी सरकार विरोध करती है। 

मुख्यमंत्री ने बीकेयू (एकता उग्राहन) और बीकेयू (एकता दकौंडा) के नेताओं से आग्रह करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उनकी शुक्रवार की टिप्पणी का कोई और मतलब न निकालें। उन्होंने कहा, "किसानों की जिंदगी दांव पर है, उन्हें बचाना हमारी प्राथमिकता है और उन्हें बचाना हर पंजाबी की जि़म्मेदारी है।"

सप्ताहांत के बंद का विरोध करने के संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान के बीच, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक से सभी सप्ताहांत प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने और किसी भी कीमत पर किसी को भी उल्लंघन की अनुमति नहीं देने को कहा था।

किसान नेताओं की दुकानदारों से अपील के बावजूद, शनिवार को राज्य में बड़े पैमाने पर दुकानें बंद रहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो किसान संगठनों के नेताओं ने उनके बयान के बारे में गलतफहमी पैदा की और उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रही किसानों की हलचल के बारे में उनके इरादों पर संदेह जताया।

अमरिंदर ने कहा, "मेरी सरकार किसानों के हितों के खिलाफ कैसे जा सकती है, जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए विधानसभा में संशोधन कानून लाने वाली देश की पहली राज्य सरकार है? जहां तक केंद्रीय कानूनों का सवाल है, उनके खिलाफ उनकी सरकार का रुख स्पष्ट और सुसंगत है।"

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह देखते हुए कि राज्य की स्थिति बेहद विकट है, यह राजनीति खेलने का समय नहीं है, बल्कि हमारी सारी ऊर्जाओं को हर इंसान के जीवन की रक्षा करने में लगाना है।"

मुख्यमंत्री ने किसानों को कोविड संकट से निपटने में राज्य सरकार को सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों का जीवन और सुरक्षा उनकी सरकार के लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने दोहराया कि वह कोविड संकट के बीच पंजाबियों के जीवन को खतरे में डालने की अनुमति किसी को नहीं देंगे।  (आईएएनएस)


08-May-2021 9:59 PM (16)

नई दिल्ली, 8 मई | कोविड-19 फैसिलिटी या अस्पताल में भर्ती के लिए कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट दिखाना अब अनिवार्य नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। कोरोना काल में अस्पताल में भर्ती होने में हो रही दिक्कतों के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐलान किया है कि अब किसी भी कोविड हेल्थ सुविधा में भर्ती होने के लिए कोविड-19 पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी। मंत्रालय ने कोरोना मरीजों के भर्ती होने की राष्ट्रीय नीति में कुछ बदलाव किए हैं।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि एक संदिग्ध मामला सीसीसी, डीसीएचसी या डीएचसी के संदिग्ध वार्ड में भर्ती किया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने निर्देश दिया है किसी भी स्थिति में मरीज को इलाज से वंचित नहीं रखा जाएगा, जिसमें ऑक्सीजन या जरूरी दवाएं भी शामिल हैं। किसी और शहर के अस्पताल में मरीज को ले जाने पर भी उन्हें भर्ती करने से मना नहीं किया जा सकता। 

यानी अगर मरीज के पास उस शहर के होने का कोई पहचान पत्र नहीं है तो भी उन्हें भर्ती होने से नहीं रोका जा सकता।

यह निर्देश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को जारी किया गया है।

मंत्रालय ने ये भी कहा है कि अस्पताल में बेड जरूरतमंद के हिसाब से दिए जाएं। जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, उन्हें नियमों का पालन करते हुए छुट्टी दी जा सकती है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर होना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जिन व्यक्तियों को अस्पताल में भर्ती होने की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें भर्ती न रखा जाए।

यह आदेश केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सरकारी अस्पतालों के साथ ही सभी निजी अस्पतालों में भी लागू होंगे। (आईएएनएस)


08-May-2021 9:44 PM (30)

नई दिल्ली, 8 मई | सुप्रीम कोर्ट ने देश में ऑक्सीजन आवंटन को कारगर बनाने के लिए शनिवार को गठित 12-सदस्यीय नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) को निर्देश दिया है कि प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऑडिट आयोजित करने के लिए उप-समूह बनाया जाए, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि केंद्र द्वारा आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच रही है या नहीं। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और एम. आर. शाह की एक पीठ ने कहा, ऑडिट आयोजित करने का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराई गई ऑक्सीजन आपूर्ति के उचित वितरण के लिए जवाबदेही को सुनिश्चित करना है।

नेशनल टास्क फोर्स के संदर्भ की शर्तों पर विस्तार करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि यह चिकित्सा ऑक्सीजन की आवश्यकता, उपलब्धता और वितरण के आधार पर पूरे देश के लिए आकलन और सिफारिशें करेगा।

भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक 12-सदस्यीय नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) का गठन किया है। यह टास्क फोर्स पूरे देश के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता, उपलब्धता और वितरण के आधार पर मूल्यांकन करने का काम करेगी।

टास्क फोर्स का उद्देश्य है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मेडिकल ऑक्सीजन का आवंटन वैज्ञानिक, तर्कसंगत और न्यायसंगत आधार पर हो।

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और एम. आर. शाह की एक पीठ ने कहा, एक आम सहमति बन गई है कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मेडिकल ऑक्सीजन का आवंटन वैज्ञानिक, तर्कसंगत और न्यायसंगत आधार पर किया जाए। इसी समय, लचीलेपन के लिए उन आपात स्थितियों के कारण अप्रत्याशित मांगों को पूरा करने की अनुमति देनी चाहिए, जो आवंटित क्षेत्रों के भीतर उत्पन्न हो सकती हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा, यह आवश्यक है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चिकित्सा ऑक्सीजन आवंटित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के भीतर एक प्रभावी और पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए एक नेशनल टास्क फोर्स (राष्ट्रीय कार्य बल) गठित करने पर सहमति व्यक्त की है। इस टास्क फोर्स को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऑक्सीजन के वैज्ञानिक आवंटन के लिए एक कार्यप्रणाली तैयार करने के साथ अन्य चीजों का काम सौंपा जाएगा।

उप-समूहों द्वारा ऑडिट निर्धारित करेगा कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटित आपूर्ति संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश तक सही प्रकार से पहुंच रही है या नहीं। 

यह अस्पतालों, स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों और अन्य के लिए आपूर्ति वितरण में वितरण नेटवर्क की प्रभावकारिता, उपलब्ध स्टॉक, पारदर्शिता और जवाबदेही आदि की निगरानी करने का काम करेगा।

पीठ ने कहा कि इस टास्क फोर्स की स्थापना से निर्णय लेने वालों को इनपुट प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

पीठ ने कहा, महामारी के संभावित भविष्य के पाठ्यक्रम पर वर्तमान समय में विचार किया जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य की अनुमानित आवश्यकताओं को वर्तमान में वैज्ञानिक रूप से मैप किया जा सकता है और प्राप्त अनुभवों के प्रकाश में इसे संशोधित किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टास्क फोर्स अभी और भविष्य के लिए पारदर्शी और पेशेवर आधार पर महामारी की चुनौतियों का सामना करने के लिए इनपुट और रणनीति प्रदान करेगी। टास्क फोर्स वैज्ञानिक, तर्कसंगत और न्यायसंगत आधार पर राज्यों को ऑक्सीजन के लिए कार्यप्रणाली तैयार करेगी। (आईएएनएस)


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