राष्ट्रीय

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Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । जेल से जमानत पर रिहा होने के 106 दिन बाद गुरुवार को पी चिदंबरम ने दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फे्रंस की। उन्होंने गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जीडीपी लगातार घट रही है। आठ से गिरकर जीडीपी 4.5 पर आ गई है । ये सरकार के अच्छे दिन हैं। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि हम सौभाग्यशाली होंगे कि अगर साल के अंत तक जीडीपी 5 फीसदी को छू ले। 
चिदंबरम ने कहा, याद कीजिए डॉक्टर अरविंद सुब्रमण्मय ने इस सरकार के अंतर्गत विकास दर 5 फीसदी तक हो जाने को लेकर चेताया था। लेकिन जिस तरीके से इसे दिखाया जा रहा है उसमें संदेह है। वास्तव में ये 5 फीसदी नहीं है बल्कि इसमें और 1.5 फीसदी की कमी का अनुमान है।
चिदंबरम ने कहा प्रधानमंत्री अर्थव्यवस्था को लेकर खामोश हैं। उन्होंने इस मामले पर झांसा देने के लिए इसे अपने मंत्रियों पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अगर बीमारी की पहचान नहीं होगी तो इलाज भी गलत होगा। सही इलाज के लिए मर्ज की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
चिदंबरम ने वर्तमान सरकार और पूर्व में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच तुलना करते हुए कहा, 2004 और 2014 के बीच यूपीए ने 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। जबकि एनडीए ने 2016 तक लाखों लोगों को गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिया है। उन्होंने कहा,  अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर लाया जा सकता है, लेकिन यह सरकार ऐसा करने में असमर्थ है। मेरा मानना है कि कांग्रेस और कुछ अन्य दल अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर निकालने और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर हैं, लेकिन हमें बेहतर समय की प्रतीक्षा करनी होगी।
इससे पहले चिदंबरम संसद गए। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, सरकार संसद में मेरी आवाज को दबा नहीं सकती है। वह प्याज की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस सांसदों के विरोध में भी शामिल हुए। 
जमानत पर बाहर आए 74 वर्षीय चिदंबरम ने कहा, मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने का आदेश पारित किया। मैंने 106 दिनों के बाद आजादी की सांस ली। 
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चिदंबरम अदालत की अनुमति के बिना यात्रा नहीं कर सकते हैं और आवश्यकता पडऩे पर पूछताछ के लिए उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा। साथ ही उनके इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने, साक्षात्कार देने या गवाहों से संपर्क करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। अदालत ने यह देखते हुए कि आर्थिक अपराध प्रकृति में गंभीर हैं, यह भी कहा कि जमानत देना नियम है और इसके लिए इनकार करना अपवाद है। (एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने एनडीटीवी से खास बातचीत में अयोध्या मामले को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने इस मामले में पुनर्विचार याचिका डालने को लेकरकहा कि संविधान उन्हें इस बात का अधिकार देता है इसलिए पुनर्विचार याचिका डाली जा रही है। सबरीमला मामले में भी डाली गई थी। ओवैसी ने कहा, जब सुप्रीम कोर्ट अपने जजमेंट में कहता है कि 1949 में मूर्तियां रख दी गईं।  6 दिसंबर 1992 को ढांचा गिराए जाने की घटना को वह अपराध करार देता है। 1934 में हुए दंगों को अपराध बताता है। तो ये जगह हिंदुओं को कैसे मिल सकती है?
ओवैसी ने कहा कि बीजेपी आरएसएस खुद बाबर के समय को सांप्रदायिक तौर पर बेहद कू्रर मानते हैं। ऐसे में कैसे संभव है कि वहां मस्जिद में नमाज की इजाजत नहीं दी गई होगी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है राजीव धवन इस मामले को मजबूती से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे। 
उन्होंने कहा कि 5 एकड़ दे देना फैसला नहीं है। मुसलमान भले ही गरीब हो लेकिन इतना कमजोर नहीं कि 5 एकड़ जमीन न मिले तो मस्जिद नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि अभी अगर में बिहार के सबसे पिछड़े इलाके सीमांचल में जाकर भी मैं भीख मांगूगा तो 2 घंटे में पैसे मिल जाएंगे और मस्जिद बना लूंगा। ओवैसी ने कहा कि मेंरी लड़ाई पांच एकड़ की लड़ाई नहीं थी, मेरी लड़ाई मेरी मस्जिद की लड़ाई थी। 
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित 2.77 एकड़ भूमि को रामलला विराजमान को दे दी। पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी देने का आदेश दिया।वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अरशद मदनी गुट) ने शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय किया है।(एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । देश भर में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं और विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस ने आज संसद परिसर में प्याज की कीमतों को लेकर प्रदर्शन किया। जमानत मिलने के बाद आज संसद पहुंचे पूर्व वित्त मंत्री पी। चिदंबरम भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस सांसदों के साथ चिदंबरम ने पोस्टर लेकर बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया। 
प्याज की कीमतों को लेकर कांग्रेस सांसदों ने संसद में प्रदर्शन किया। उनके हाथों में महंगाई पर प्याज की मार, चुप क्यों है मोदी सरकार, कैसा है ये मोदी राज, महंगा राशन, महंगा प्याज जैसे पोस्टर लेकर पहुंचे थे। चिदंबरम भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। चिर-परिचित अंदाज में पूर्व वित्त मंत्री पारंपरिक परिधान में संसद पहुंचे और एक पोस्टर लेकर कांग्रेस सांसदों के साथ खड़े हुए। अन्य सांसद इस दौरान नारे भी लगा रहे थे, लेकिन पूर्व वित्त मंत्री मुस्कुराते हुए पोस्टर लेकर खड़े रहे। 
इससे पहले प्याज कीमतों को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद भी प्रदर्शन कर चुके हैं। आप सांसद संजय सिंह और सुशील गुप्ता ने केंद्र सरकार को प्याज की बढ़ती कीमतों के लिए जिम्मेदार ठहराया। आप सांसदों ने आरोप लगाया था कि गोदाम में प्याज सड़ गया, लेकिन केंद्र सरकार ने उसे कम कीमत पर लोगों तक पहुंचाने का काम नहीं किया। 
दिल्ली समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में प्याज की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। दिल्ली और एनसीआर में प्याज 80 रुपये से लेकर 100 रुपये तक मिल रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि प्याज की ज्यादातर फसल इस बार कई राज्यों में अतिवृष्टि के कारण खत्म हो गई, इस कारण कीमतें बढ़ी हैं। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 05-Dec-2019

लखनऊ, 5 दिसंबर । बीते दिनों हैदराबाद में महिला डॉक्टर की हत्या ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। अब इसी तरह के मामले को उन्नाव में अंजाम देने की कोशिश की गई। यहां के बिहार थाना क्षेत्र के हिंदू भाटन खेड़ा गांव में दुष्कर्म पीडि़ता को गुरुवार सुबह पेट्रोल डालकर जलाने का प्रयास किया गया। पीडि़ता की हालत लगातार बिगड़ पर जाने पर उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।
दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक, जमानत पर छूट कर आए दो आरोपियों ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर दुष्कर्म पीडि़ता को जिंदा जलाने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने युवती को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेजा, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया।
एसपी उन्नाव विक्रांत वीर ने मीडिया को बताया कि युवती की हालत गंभीर है। उसने बयान में आरोपियों के नाम बताए हैं। पुलिस ने आरोपी हरिशंकर त्रिवेदी, शुभम त्रिवेदी और एक अन्य को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी फरार है। पुलिस सभी की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। दो नामज़द आरोपी गैंगरेप मामले में हाल ही में जेल से छूटकर आए हैं। एसपी ने बताया, ‘रेप मामले में कोर्ट के आदेश पर रायबरेली में केस दर्ज किया गया था। युवती को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है।’
जानकारी के मुताबिक मार्च में युवती के साथ दुष्कर्म हुआ था। इसके बाद दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। युवती इसी मामले की पैरवी के लिए गुरुवार को रायबरेली जा रही थी। सुबह चार बजे के करीब गांव के बाहर खेत में दोनों आरोपी व उसके तीन साथियों ने उसके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीडि़ता को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
पुलिस के मुताबिक, गंभीर रूप से झुलसी पीडि़ता ने अपने बयान में दोनों आरोपियों का नाम लिया है। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। एसपी विक्रांत वीर के मुताबिक पीडि़ता ने मार्च में दो लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें एक की गिरफ्तारी की गई थी। आज की घटना में पीडि़ता ने पांच लोगों के नाम लिए जिनमें से तीन को घटना की सूचना मिलने के बाद गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी दो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमों को लगाया गया है।
वहीं यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। पीडि़ता को जलाया गया है। उसे बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। उसे लखनऊ रेफर किया गया है। पुलिस सभी की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। हमने पीडि़ता का स्टेटमेंट भी लिया है जो केस में बहुत महत्वपूर्ण होगा।(दिप्रिंट)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। हालांकि कई विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
नागरिकता संशोधन विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय के उन लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है, जिन्होंने देश में छह साल गुजार दिए हैं, लेकिन उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।
विपक्षी दल इसे भाजपा की विचारधारा से जुड़े महत्वपूर्ण आयाम का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें शरणार्थी के तौर पर भारत में रहने वाले गैर मुसलमानों को नागरिकता देने का प्रस्ताव किया गया है। इनमें से ज्यादातर लोग हिंदू हैं। उनका कहना है कि इसके माध्यम से उन्हें उस स्थिति में संरक्षण प्राप्त होगा जब केंद्र सरकार देशव्यापी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की योजना को आगे बढ़ाएगी।
वहीं, केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि सरकार सभी के हितों और भारत के हितों का ध्यान रखेगी। उन्होंने कुछ वर्गों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि लोग देश के हित में इसका स्वागत करेंगे।
माना जा रहा है कि सरकार इसे अगले दो दिनों में संसद में पेश करेगी और अगले सप्ताह इसे पारित कराने के लिए आगे बढ़ाएगी।
मालूम हो कि यह विधेयक इस साल जनवरी में लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भाजपा सांसदों से कहा था कि यह बिल सरकार के लिए शीर्ष प्राथमिकता है, ठीक उसी तरह जैसे अनुच्छेद 370 था।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की है।
नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर विरोध जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बुधवार को कहा कि इससे संविधान का मूलभूत सिद्धांत कमतर होता है।
थरूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि विधेयक असंवैधानिक है, क्योंकि विधेयक में भारत के मूलभूत विचार का उल्लंघन किया गया है। जो यह मानते हैं कि धर्म के आधार पर राष्ट्र का निर्धारण होना चाहिए। इसी विचार के आधार पर पाकिस्तान का गठन हुआ था।’
उन्होंने कहा कि हमने सदैव यह तर्क दिया है कि राष्ट्र का हमारा वह विचार है जो महात्मा गांधी, नेहरूजी, मौलाना आजाद, डॉ. आंबेडकर ने कहा कि धर्म से राष्ट्र का निर्धारण नहीं हो सकता।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम के ‘इनर लाइन परमिट’ (आईएलपी) क्षेत्रों और पूर्वोत्तर की छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों को नागरिकता संशोधन विधेयक से बाहर रखा गया है।
इसका मतलब यह है कि नागरिकता संशोधन विधेयक का लाभ उठाने वालों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी लेकिन वे अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम में बस नहीं पाएंगे। मौजूदा भारतीय नागरिकों पर भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
असम, मेघालय और त्रिपुरा का एक बड़ा हिस्सा छठी अनुसूची क्षेत्रों के तहत आने की वजह से इस विवादास्पद विधेयक के दायरे से बाहर रहेगा।
मालूम हो कि पूर्वात्तर के कई राज्यों में इन दिनों नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध हो रहा है। विधेयक लाए जाने के बाद से असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में इस विधेयक का जोरदार विरोध हो रहा है। पूर्वोत्तर में कई संगठनों ने इस विधेयक का यह दावा करते हुए विरोध किया है कि वह क्षेत्र के मूलनिवासियों के अधिकारों को कमतर कर देगा।
नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में बीते दो दिसंबर को असम के कॉटन विश्वविद्यालय और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रसंघों ने विश्वविद्यालय परिसर में भाजपा और आरएसएस नेताओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाते हुए विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।(भाषा)

 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । आतंकी फंडिंग में जांच का सामना कर रही कंपनी से 10 करोड़ रुपये चंदा लेने के बाद बीजेपी एक नए विवाद में घिरने जा रही है। आरोप है कि बीजेपी ने प्राइवेट कंपनियों से चंदा लेने के एवज में उन्हें सरकारी ठेके दिलवाए हैं। नए विवाद के मुताबिक गुजरात की कंस्ट्रक्शन कंपनी क्यूब कन्स्ट्रक्शन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने बीजेपी को साल 2012-13 और 2017-18 के बीच तीन किश्तों में कुल 55 लाख रुपये डोनेशन दिए हैं। बाद में इसी कंपनी को गुजरात की बीजेपी सरकार ने वडोदरा रेलवे स्टेशन के पास पश्चिम रेलवे के कम्प्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली परिसर के लिए पट्टे पर जमीन दी। यह कंपनी पहले वडोदरा में ही स्थित थी। बाद में इसका विस्तार कई शहरों में हुआ।
द क्विंट ने कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से लिखा है कि गुजरात की बीजेपी सरकार ने इस कंपनी को कई कंस्ट्रक्शन ठेके दिए हैं, जिनमें गुजरात औद्योगिक विकास निगम, गुजरात फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी, सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुजरात शहरी विकास निगम और गुजरात शिक्षा विभाग से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं।
ऐसा नहीं है कि इस कंपनी ने सिर्फ गुजरात सरकार से ही ठेका हासिल किया हो बल्कि केंद्र सरकार के तहत आने वाली कंपनी महारत्न कंपनी ओएनजीसी, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और इसरो से भी ठेके प्राप्त किए हैं। इतना ही नहीं कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन बीजेपी के बड़े नेताओं द्वारा किया गया है। एक प्रोजेक्ट का उद्घाटन तो खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने किया है। एक प्रोजेक्ट का उद्घाटन अमित शाह ने किया है। तस्वीरों में उनके साथ गुजरात के सीएम विजय रुपाणी, पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल भी दिखाई दे रही हैं। क्यूब कंस्ट्रक्शन कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक इसके सीएमडी संजय शाह हैं। 1996 में कंपनी ने अपना कारोबार शुरू किया था।
इसके अलावा अन्य दो ऐसी कंपनियों के बारे में भी पता चला है जिन्होंने बीजेपी को डोनेशन दिया है और उन्हें सरकारी ठेके मिले हैं। इनमें से एक गुजरात की कंपनी केआर शिवानी है, जिसे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट के तहत वडोदरा रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग सर्विस बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन का काम मिला है। इस कंपनी ने साल 2012-13 के दौरान बीजेपी को 2 लाख रुपये का चंदा दिया था।
एक अन्य ठेकेदार धनजी के पटेल हैं जिन्होंने बीजेपी को 2017-18 में 2.5 लाख रुपये का चंदा दिया है। इस कंपनी को भी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट के तहत वतवा से साबरमती-डी केबिन के बीच विविध निर्माण कार्य का ठेका मिला है। इनके अलावा एक अन्य कंपनी रचना इंटरप्राइजेज को भी वडोदरा के नजदीक लाइन नंबर 14,15 और 16 में ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन का ठेका दिया गया है। इसी नाम से मिलती एक कंपनी ने बीजेपी को कई बार चंदे दिए हैं लेकिन यह साफ नहीं हो सका है कि ठेका हासिल करने वाली और चंदा देनेवाली कंपनी एक ही है। बीजेपी को चंदा देने वाली कंपनियों का विवरण खुद पार्टी ने चुनाव आयोग को सौंपा है।(जनसत्ता)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । संसद में शीतकालीन सत्र के 13वें दिन एक बार फिर प्याज पर चर्चा की गई। देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के जेब भारी कर दी है। लगातार महंगी हो रही प्याज सरकार के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में एक सांसद ने प्याज के दाम में बढ़ोतरी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सवाल किया। इस पर वित्त मंत्री ने मजाकिया लहजे में कहा कि प्याज की बढ़ती कीमतों से व्यक्तिगत तौर पर उनपर कोई खास असर नहीं पड़ा है, क्योंकि उनका परिवार प्याज-लहसुन जैसी चीजों को खास पसंद नहीं करता है।
सीतारमण के इस बयान की सोशल मीडिया में जमकर आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा- मैं बहुत ज्यादा प्याज-लहसुन नहीं खाती इसलिये चिंता न करें। मैं ऐसे परिवार से आती हूं, जिसे प्याज की कोई खास परवाह नहीं है। प्याज पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने देश में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिये कई कदम उठाये हैं जिनमें इसके भंडारण से जुड़े ढांचागत मुद्दों का समाधान निकालने के उपायम शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के पहले बैच पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘प्याज के भंडारण से कुछ ढांचागत मुद्दे जुड़े हैं और सरकार इसका निपटारा करने के लिये कदम उठा रही है।’’ उन्होंने कहा कि खेती के रकबे में कमी आई है और उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन सरकार उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिये कदम उठा रही है।
सीतारमण ने कहा कि प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिये मूल्य स्थिरता कोष का उपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में 57 हजार मीट्रिक टन का बफर स्टाक बनाया गया है। इसके अलावा मिस्र और तुर्की से भी प्याज आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और राजस्थान के अलवर जैसे क्षेत्रों से दूसरे प्रदेशों में प्याज की खेप भेजी जा रही है।(भाषा)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजद्रोह मामले में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के लिए आप सरकार को निर्देश देने से बुधवार को इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने कहा कि वह इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दे सकती और यह दिल्ली सरकार पर निर्भर है कि वह मौजूदा नियमों, नीति, कानून और तथ्यों के अनुसार यह फैसला लें कि मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी दी जाए या नहीं।
अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता पूर्व भाजपा विधायक नंद किशोर गर्ग की प्राथमिकी में कुछ निजी हित हैं।
याचिका में गंभीर प्रकृत्ति के आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए दिशा निर्देश देने की मांग की गई है जिसमें बतौर आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति शामिल हैं।
इस पर अदालत ने कहा कि मौजूदा नियमों के अलावा ऐसे दिशा निर्देश जारी करने के लिए सरकार को निर्देश देने की कोई वजह नजर नहीं आती। उसने कहा कि इस पर विभिन्न अदालतों ने पर्याप्त संख्या में फैसले दे रखे हैं।
वकील शशांक देव सुधी के जरिए दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुमार का मामला सरकार के निरुत्साहपूर्ण रुख को दिखाता है क्योंकि वह आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से पूर्व आवश्यक मंजूरी पत्र देने में नाकाम रही।
पुलिस ने कुमार और पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत अन्यों के खिलाफ अदालत में 14 जनवरी को आरोपपत्र दायर करते करते दावा किया था कि वे नौ फरवरी 2016 को एक कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में एक रैली का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने राष्ट्र विरोधी नारे लगाए थे। (भाषा)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा था कि उन्हें जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के इशारे पर उनके वकील एजाज मकबूल द्वारा इस मामले से हटा दिया गया है।
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने मंगलवार रात को स्पष्टीकरण दिया कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन अब भी अयोध्या मामले में उनके वकील हैं।
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पैरवी करने वाले राजीव धवन ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया पर लिखा था कि वे अयोध्या मामले दायर पुनर्विचार याचिका या इस मामले से किसी तरह से नहीं जुड़े हैं क्योंकि उन्हें ‘बर्खास्त’ कर दिया गया है।
इसके बाद मंगलवार देर शाम जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जमीयत ने बताया कि इस मामले में कुछ गलतफहमी हुई है और वे धवन से माफी मांगेंगे। वहीं जमीयत के कानूनी सलाहकार शाहिद नदीम ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा कि वे ऐसी बेवकूफी करने की सोच भी नहीं सकते।
नदीम ने यह भी लिखा कि जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी धवन से मिलेंगे और इस गलतफहमी को दूर करेंगे। नदीम ने यह भी लिखा कि केस को लेकर वे हमेशा धवन के कर्जदार रहेंगे।
इससे पहले धवन ने दिन में यह भी लिखा था, ‘मुझे सूचित किया गया है कि मदनी के इशारे पर मुझे इस मामले से हटा दिया गया है क्योंकि मैं अस्वस्थ हूं। यह पूरी तरह बकवास है। उन्हें मुझे हटाने के लिए अपने एओआर एजाज मकबूल को निर्देश देने का अधिकार है जो उन्होंने निर्देशानुसार किया है। लेकिन इसके लिए बताई जा रही वजह दुर्भावना से भरी और झूठी है।’
यह खबर सामने आने के बाद मुस्लिम पक्षकारों ने कहा था कि वे चाहते हैं कि धवन केस से जुड़े रहें और उन्हें हटाने का फैसला उनका नहीं बल्कि जमीयत का था। इसके बाद धवन ने कहा था कि मैं चाहूंगा कि मुस्लिम पक्षकारों को पहले अपने मतभेद सुलझाने चाहिए।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एजाज मकबूल ने कहा कि अयोध्या मामले में दायर पुनर्विचार याचिका में धवन का नाम इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि वे उपलब्ध नहीं थे। मकबूल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘यह कहना गलत है कि धवन साहब का नाम केस से इसलिए हटाया गया कि वे बीमार थे।
मामला बस इतना है कि मेरे मुवक्किल (जमीयत उलेमा-ए-हिंद) खुद यह याचिका दाखिल करना चाहते थे। इस पर धवन साहब द्वारा ही काम होना था। मैं याचिका में उनका नाम इसलिए नहीं दे सका क्योंकि वे उपलब्ध नहीं थे। यह कोई बड़ी बात नहीं है।’ (द वायर)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । लोकसभा में एक सवाल के जवाब में मानव संसाधन और विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि साल 2018-19 में देश के 26 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं।
साल 2016 से अब तक अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने देश भर में 128 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद किए हैं। बीते हफ्ते यह जानकारी लोकसभा में मानव संसाधन और विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दी।
गुजरात से आने वाले लोकसभा सांसद मनसुखभाई वसावा ने सरकार से बीते तीन सालों में देश में खुले और बंद किए गए इंजीनियरिंग कॉलेज की जानकारी मांगी थी। इसके उत्तर में मंत्री ने बताया ने कि शैक्षणिक सत्र 2018-19 में देश में 26 कॉलेज बंद हुए। इससे पहले 2017-18 में यह आंकड़ा 46 और 2016-17 में 56 था।
तीनों साल में सबसे अधिक 26 कॉलेज तेलंगाना में बंद हुए हैं, वहीं इस साल बंद हुए कॉलेजों की सर्वाधिक संख्या उत्तर प्रदेश (5) में है। इसके बाद राजस्थान में 4 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 10,361 संस्थानों में 37 लाख से ज्यादा इंजीनियरिंग सीट उपलब्ध हैं। इनमें से केवल 10 लाख सीटें भरी हैं। साल 2017 में एआईसीटीई ने घोषणा की थी कि बीते पांच सालों से जहां 30 फीसदी से भी कम सीटों पर एडमिशन हुआ है, उसे बंद कर दिया जाएगा।
इसके बाद इस साल की शुरुआत में एक परामर्श समिति द्वारा एआईसीटीई को सलाह दी गई थी कि वे शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए साल 2020 में कोई नए कॉलेज न खोले। इसके बाद बीते अक्टूबर महीने में मानव संसाधन और विकास मंत्री ने बताया था कि इस सलाह को मान लिया गया है।
मंत्री ने बताया था कि 2020 सत्र में देश में न कोई नया इंजीनियरिंग कॉलेज खुलेगा और न ही बीटेक के किसी भी कोर्स में कोई सीट बढ़ाई जाएंगी। इसके साथ ही जिन कॉलेजों का प्रदर्शन खऱाब रहा है या जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है, उन्हें बंद किया जाएगा।
बीते हफ्ते उन्होंने सदन में भी बताया कि देश में नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस साल देश में अब तक 84 इंजीनियरिंग कॉलेज खोले गए हैं। इसके साथ ही यह जानकारी भी दी गई कि देश में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों की कंपनियों को मंजूरी दी गई है।(द वायर)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । चलते-फिरते, आते-जाते, सोते-जागते हम मोबाइल का लगातार इस्तेमाल करने लगे हैं। आज मोबाइल से हमारा जीवन चल रहा है और मोबाइल बैटरी से। जब कभी भी मोबाइल की बैटरी खत्म होती है, तो लगता है कि मानो जिंदगी ठहर गई। आज हम पान, बीड़ी और सिगरेट तक खरीदने के लिए डिजिटल पेमेंट करने लगे हैं।
लिहाजा एयरपोर्ट, स्टेशनों, होटल, पब्लिक टॉयलेट, शॉपिंग सेंटर और अन्य जगहों पर मोबाइल चार्जिंग की सुविधा के लिए यूएसबी पोर्ट लगे होते हैं। आप इससे अपना मोबाइल जोड़ते हैं और बैटरी चार्ज करने लगते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा करना कितना सुरक्षित है?
लेकिन क्या आपने सोचा है कि मोबाइल चार्जर ना ले जाने के झंझट से मुक्ति और फायदेमंद लगने वाले ये यूएसबी पोर्ट हमारी निजता के लिए कितना बड़ा ख़तरा हैं।
सार्वजनिक जगहों पर बड़े पैमाने में उपलब्ध इन यूएसबी पोर्ट का इस्तेमाल साइबर अपराधी हमारे सबसे संवेदनशील डेटा को चुराने के लिए कर सकते हैं। इससे बचने के लिए बाजार में कथित यूएसबी डेटा ब्लॉकर्स लाए गए हैं, जिन्हें यूएसबी कंडोम का नाम दिया गया है।
ये कंडोम वास्तविक कंडोम की तरह लेटेक्स नहीं होते हैं, लेकिन यह आपको सामान रूप से सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह आपको जूस जैकिंग से बचाते हैं।
जूस जैकिंग एक तरह का साइबर अटैक है, जिसमें सार्वजनिक यूएसबी पोर्ट के जरिए आपके मोबाइल को संक्रमित किया जाता है और आपके मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल कर दिया जाता है, जो आपकी निजी जानकारी को साइबर अपराधी तक पहुंचाने में सक्षम होते हैं।
इस बारे में नवंबर के शुरुआती सप्ताह में ल्यूक सिसक ने चेतावनी दी थी। ल्यूक अमरीक में लॉस एंजिल्स काउंटी के अभियोजक के कार्यालाय में सहायक हैं।
यूएसबी कंडोम छोटे यूएसबी एडॉप्टर की तरह होते हैं, जिनमें इनपुट और आउटपुट पोर्ट होते हैं। यह एडॉप्टर मोबाइल को पावर सप्लाई तो करता है लेकिन डेटा एक्सचेंज को पूरी तरह रोक देता है।
यूएसबी कंडोम अमरीकी बाजारों में 10 डॉलर में उपलब्ध हैं और यह इतना छोटा होता है कि आप इसे कहीं भी ले जा सकते हैं। भारत में यह 500 से 1000 रुपए में ऑनलाइन उपलब्ध है।
ल्यूक के अनुसार इस तरह के साइबर हमले के परिणाण विनाशकारी हो सकते हैं। वो चेतावनी देते हुए कहते हैं, एक फ्री बैटरी चार्जिंग आपके बैंक खाते को खाली कर सकता है। अगर साइबर क्रिमिनल मालवेयर इंस्टॉल कर देते हैं तो ये आपके फोन ब्लॉक कर सकते हैं और पासपोर्ट और घर के पते जैसी संवेदनशील जानकारियां चुरा सकते हैं।
आईबीएम की साइबर सिक्योरिटी रिपोर्ट के अनुसार मालवेयर कंप्यूटिंग पावर को हाईजैक कर सकते हैं और आपका मोबाइल धीमा काम करने लगेगा। रिपोर्ट में संवेदनशील डेटा चोरी होने के ख़तरों पर भी बात की गई है। साइबर विशेषज्ञ भी लोगों को यूएसबी कंडोम का इस्तेमाल की सलाह देते हैं।(बीबीसी)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को रोका जा सकता था अगर तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव ने इंद्र कुमार गुजराल की सलाह मान ली होती।
वह बुधवार को दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल की 100 वीं जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा, जब 84 के दंगे हुए तो वो गुजराल) उस वक्त के गृह मंत्री नरसिम्हा राव के पास उसी शाम को गए और उनसे कहा कि स्थिति बहुत नाज़ुक है सरकार जितनी जल्दी सेना को बुला ले उतना ही ठीक होगा। अगर वह सलाह मान ली गई होती तो 1984 में हुए नरसंहार को रोका जा सकता था।(अमर उजाला)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को फ्री वाई-फाई की की घोषणा कर दी है। केजरीवाल ने बताया कि 16 दिसंबर से दिल्ली में फ्री वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। इस योजना की शुरुआत में 100 वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाए जाएंगे। अगले छह महीनों में इनकी संख्या बढ़ाकर 11 हजार तक की जाएगी। इस योजना पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
 

 


Date : 05-Dec-2019

नीरज प्रियदर्शी
बक्सर (बिहार), 5 दिसंबर । हैदराबाद में एक लडक़ी के साथ रेप और फिर जला कर मार देने की घटना को अभी हफ्ते भर भी नहीं बीते थे कि बिहार के बक्सर जिले में एक महिला से रेप के बाद गोली मारकर जलाने की खबर आई।
बक्सर पुलिस के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार 2 दिसंबर की रात 19-23 साल की एक महिला का अधजला शव इटाढ़ी थाना के अंदर कुकुढ़ा गांव से मिला। मीडिया की खबरों में दावा किया जा रहा था कि महिला के साथ रेप के बाद उसकी जला कर हत्या कर दी गई।
इस महिला का शरीर काफी जल चुका था। दोनों पैरों में मोजे के साथ सैंडिल केवल बचे रह गए थे। शव की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। बुधवार की सुबह जब हम बक्सर के कुकुढ़ा गांव में घटनास्थल के पास पहुंचे तब वहां शाहाबाद रेंज के डीआईजी और बक्सर के एसपी फॉरेंसिक टीम को लेकर दलबल के साथ पहुंचे थे।
जिस जगह पर महिला की हत्या की गई थी, वह सुनसान खेतों के बीच का इलाक़ा था। सबसे नज़दीक का गांव कुकुढ़ा और सवनापुर था। दोनों की दूरी कम से कम डेढ़ किमी थी।
सबसे पहला आश्चर्य इस बात पर आया कि खेतों में दिनदहाड़े पराली जलाई जा रही थी। पूरा बक्सर प्रशासन वहां मौजूद था।
बीते दिनों में बिहार में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बिहार सरकार की ओर से पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा इसके लिए कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है, पुलिस के अफसर मौजूद लोगों से पूछताछ करते। मेटल डिटेक्टर से अगल-बगल के खेतों की जांच चल रही थी। फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के लोग महिला के जले हुए अवशेषों से सैंपल इकट्टा कर रहे थे।
थोड़ी देर में पुलिस के अधिकारी और फॉरेंसिक विभाग की टीम घटनास्थल से सैम्पल्स लेकर लौट गई। गांव के पांच-छह लोगों को भी अपने साथ पूछताछ के लिए लेकर गई।
शाहाबाद रेंज के डीआईजी राकेश राठी ने बृहस्पतिवार को बीबीसी को बताया, कल देर रात महिला के शव कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आयी है। रिपोर्ट में रेप का जिक्र नहीं है। रेप को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। अब जब फोरेंसिक विभाग की रिपोर्ट आएगी तभी हत्या के कारणों के बारे में पता लग सकेगा। अभी तक हमें कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। हालांकि डीआईजी राकेश ने भले पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले ये कहा कि रिपोर्ट में रेप को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
लेकिन सदर अस्पताल में पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर बीएन चौबे ने दो दो बार मीडिया को बयान दिया है, जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया है, दुष्कर्म की बात नकारी नहीं जा सकती। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि महिला के शरीर के मह्त्वपूर्ण हिस्से जो पोस्टमार्टम के लिए जरूरी थे वो पहले से जल गए थे। इसलिए जरूरी नहीं कि पोस्टमार्टम से रेप की पुष्टि हो।
डॉ बीएन चौबे ने बीबीसी से कहा, जिस तरह ये वारदात हुई है और जैसी बॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए आई थी, उससे लगता है कि ये किसी एक आदमी द्वारा किया गया नहीं है। वारदात में एक से ज़्यादा लोग रहे होंगे। जहां तक बात पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की है तो जिस हालत में हमें शव मिला था, उसके पोस्टमॉर्टम के जरिए रेप या गैंगरेप साबित नहीं हो पाएगा। बहुत बुरी तरह जली थी लाश। हमने विसरा भी जांच के लिए लिया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि हो पाएगी। लेकिन मैं फिर भी कहूंगा कि जैसी यह वारदात है, उससे रेप या गैंगरेप से इनकार नहीं किया जा सकता।
बक्सर से लौटते समय बुधवार देर शाम को स्थानीय मीडियाकर्मियों से ऐसा सुनने को मिल रहा था कि मीडिया में बयान देने वाले डॉक्टर पर अब बयान बदलने के दबाव डाला जा रहा है। डॉक्टर से दोबारा संपर्क नहीं हो सका।
हमनें डीआईजी से यह सवाल किया तो वे कहते हैं, पुलिस की जांच रिपोर्ट्स के आधार पर होती है। किसी के बयान के आधार पर नहीं।  पुलिस और फॉरेंसिक विभाग की टीम के चले जाने के बाद घटनास्थल और उसके आसपास की जगह देखकर कहा जा सकता था कि एक सामान्य व्यक्ति जिसे उस जगह पर महिला के जलाने की खबर नहीं हो, उसके लिए ये फर्क करना मुश्किल था कि किस जगह पर पराली जली है और किस जगह पर महिला।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि जिस खेत में महिला को जलाया गया था, उसके मालिक कुकुढ़ा गांव के ही रहने वाले हैं। हालांकि ये ग्रामीण पुलिस के डर और पूछताछ के भय से अपना नाम नहीं बता रहे थे।
कुकुढ़ा गांव के ही रहने वाले गोविंद पटेल ने बताया, रात में इस तरह हादसा हुआ कि किसी को पता नहीं चल पाया। एक तरफ खेतों में पराली जल रही थी तो लोग अपने-अपने खेतों में शाम को ही आग लगाकर घर आ गए थे। बोरिंग चलाने वाले भी बोरिंग चालू कर चले जाते हैं सोने। कुछ लोग जो पटवन (सिंचाई) कर रहे थे, उनको गोली की आवाज सुनाई दी थी, मगर वे डर के मारे इधर नहीं आए। यह बहुत सुनसान इलाका है। अगर जलाया भी गया तो किसी को कैसे पता चलेगा, यहां तो पराली भी जल ही रही थी।
एक बुजुर्ग श्यामलाल जो पास के गांव से घटना के बारे में पता चलने पर देखने आए थे, कहते हैं, जिस तरह से किया गया है किसी को कुछ पता नहीं चल पाएगा। कोई ये कहने भी नहीं आ रहा कि हमारी बेटी थी। ऐसा लगता है किसी ने अपने ही घर की बेटी को मार दिया है और अब निश्चिंत है।
श्यामलाल की बातें हमें एक अलग पहलू की ओर इशारा कर रही थीं, वो ये कि यह एक ऑनर किलिंग का मामला भी हो सकता है। क्योंकि अभी तक किसी ने शव पर दावा नहीं किया है। जबकि घटना को हुए 72 घंटे से भी अधिक का वक्त हो चला है।
घटनास्थल का मुआयना करने और लोगों से बात करने के बाद एक बात पक्की हो गई थी कि वारदात उन्हीं लोगों ने की है जो उस इलाके के सूनेपन से वाकिफ थे। खेतों और पगडंडियों का रास्ता जानते थे। और ये भी जानते थे कि पराली जलने की आड़ में कुछ भी जलाया जा सकता है। लेकिन सवाल ये है कि पुलिस आखिर हत्यारों को पकड़ेगी कैसे? सबूत के तौर पर उसे केवल एक इस्तेमाल किया हुआ कारतूस, अधजला शव और उसके अवशेषों के सिवा कुछ नहीं मिला?
डीआईजी राठी बीबीसी से कहते हैं, यह बात तो सही है कि हमें सबूत के तौर पर बहुत कम चीजें हाथ लगी हैं। मगर जांच के कई तरीके होते हैं। उसी में से एक तरीके पर हमलोग काम कर रहे हैं।
डीआईजी आगे बताते हैं, डीआईओ जांच हो रही है। उस रात उस स्पेसिफिक लोकेशन में जो भी मोबाइल नंबर एक्टिवेटेड थे, हमलोग उनका पता लगा रहे हैं। हालांकि अभी तक तो कुछ भी संदेहास्पद नहीं मिला है, लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि हम बहुत जल्द हत्यारों को पकड़ लेंगे।
आखिर में एक ही बात रह जाती है कि जिनकी बेटी थी वो सामने क्यों नहीं आ रहे?
बक्सर के स्थानीय पत्रकार मंगलेश तिवारी कहते हैं, उस इलाके में इसके पहले भी महिलाओं को मारने, काटने और जलाने की खबरें आई हैं। लेकिन आजतक उनमें से किसी का पता नहीं लग सका कि वो महिला कौन थी किसी ने दावा ही नहीं किया। अब इसे शर्म कहें या भय, मगर यहां ऐसा होता रहा है।(बीबीसी)
 

 


Date : 05-Dec-2019

रीवा, 5 दिसंबर । मध्य प्रदेश के रीवा में यात्रियों से भरी एक बस और ट्रक के बीच टक्कर हो गई है। इस भीषण दुर्घटना में बस में सवार 15 लोगों की मौत हो गई है जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जानकारी के मुताबिक ये हादसा गुरुवार सुबह लगभग छह बजे हुआ। बस के अंदर अभी भी कई लोग फंसे हुए हैं। हादसे की सूचना मिलते ही वहां पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंच गई है और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। घायलों को बस से निकालकर इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया गया है।
बताया जा रहा है कि बस में 45 से ज्यादा यात्री सवार थे। घायल यात्रियों के मुताबिक चालक बस को तेज रफ्तार से चला रहा था। इस दौरान गुड़ बायपास पर वो अपना नियंत्रण खो बैठा और बस की सामने से आ रहे ट्रक से टक्कर हो गई। दुर्घटना में बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए जिससे ड्राइवर और वहां बैठे यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई।(न्यूज18)
 


Date : 05-Dec-2019

पटना, 5 दिसंबर । बिहार के बक्सर जिले में एक युवती से कथित तौर पर रेप के बाद गोली मारने और उसे जलाने का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। बक्सर के पुलिस उपाधीक्षक सतीश कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि आज सुबह (लगभग 6 बजे) लडक़ी के जले हुए शरीर को इटाढ़ी से बरामद किया है। बता दें कि बक्सर बिहार की राजधानी पटना से करीब 100 किलोमीटर दूर है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों की सूचना के बाद हमने लडक़ी का शव बरामद किया जो कमर से ऊपर तक जली हुई है। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में ऐसा मालूम होता है कि लडक़ी की हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि घटना सोमवार रात की है। उन्होंने कहा कि पीडि़ता की पहचान और उम्र का अभी पता नहीं चल सका है। उन्होंने कहा, लडक़ी नाबालिग है या बालिग, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा।
पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि सबूतों को नष्ट करने के इरादे से जलाए जाने से पहले लडक़ी के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। पीडि़ता के सिर में गोली लगी थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मौके से एक खाली कारतूस भी बरामद किया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सैकड़ों ग्रामीण सुबह घटनास्थल पर एकत्र हुए, लेकिन उनमें से कोई भी लडक़ी की पहचान नहीं कर सका, क्योंकि वह कमर से ऊपर बुरी तरह से जली हुई थी। हाल ही में हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक युवती की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी और उसे जला दिया गया था। इस घटना को लेकर पूरे देश में गम और गुस्सा है। मामले की गूंज संसद से सडक़ तक सुनाई पड़ रही है।(एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

लखनऊ, 5 दिसंबर । उन्नाव में एक रेप पीडि़ता आरोपियों ने जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की है। लडक़ी को गंभीर हालात में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर रैफर किया गया है। लडक़ी उन्नाव की रहने वाली है, जिसके साथ रायबरेली में रेप हुआ था, वहीं पर केस चल रहा है। गुरुवार सुबह जब वह केस की सुनवाई के लिए रायबरेली के लिए घर से निकली तो आरोपी ने अपने साथियों के साथ उसके ऊपर केरोसिन छिडक़कर आग लगा दी। पीडि़ता ने पांच आरोपियों के नाम बताए हैं, इनमें से 3 को पकड़ लिया गया है। वहीं, 3 आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस फरार आरोपियों को पकडऩे की कोशिश कर रही है।(एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

नई दिल्ली, 5 दिसंबर । साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने विनम्र व्यवहार के लिए सुर्खियों में रहते हैं। साउथ इंडिया में रजनीकांत को लोग भगवान का रूप मानते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक फैन की इच्छा को पूरा करते हुए उसे अपने घर बुलाया और मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने फैन को कई तोहफे भी दिए। दरअसल, प्रणव बालसुब्रमण्यम का जन्म बिना हाथों के हुआ था।
हालांकि, इसके बाद भी उन्हें उनके सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक पाया। वह अपने पैरों से पेंटिंग करते हैं और आर्टिस्ट हैं। इसके अलावा वह सेल्फी लेना, दूसरों से हाथ मिलाना और लिखने जैसे काम भी अपने पैरों से करते हैं। कुछ वक्त पहले उन्होंने रिएलिटी शोज में जीती हुई चीजें केरल में आई बाढ़ के वक्त मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दी थी। 
टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रणव ने हाल ही में तमिल की एक साप्ताहिक पत्रिका, आनंद विकटन, को दिए एक इंटरव्यू में रजनीकांत से मिलने की इच्छा जताई थी। इसके बाद जब रजनीकांत को इस बारे में पता चला तो उन्होंने प्रणव को अपने घर पर बुलाया और उससे मुलाकात की। 
इस दौरान प्रणव ने थलाईवा को एक पेंटिंग भी गिफ्ट की जिसे उसने खुद बनाया था। रजनीकांत के प्यार भरे अंदाज को देखकर उनके फैन्स काफी खुश हुए और उन्होंने ट्वीट्स करते हुए सुपरस्टार की तारीफ भी की। (एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

यूपी, 5 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के मेरापुर गांव के मछुआरा सुघर निषाद के करतब को देख आस-पास के लोग हैरान हैं। वह नदी में कूदकर सिर्फ दोनों हाथों में ही नहीं, बल्कि मुंह में दबाकर भी जिंदा मछली पकड़ लेते हैं। यह हुनर उनकी जिंदगी में रोटी कमाने का जरिया है। बड़े-बड़े मछुआरे नदी में जाल डालकर भी जब मछलियों को पकड़ पाने में नाकाम साबित होते हैं। ऐसी स्थिति में भी सुघर पानी के अंदर जाकर एक बार में तीन मछलियां तक अपने दोनों हाथों और मुंह से पकड़ कर ले आते हैं।
सुघर ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में बताया कि यह कला उसने अपने पिता शिवप्रसाद से सीखी है। उनके यहां मछली बेचने का ही काम होता है। सुघर ने कहा, बचपन में जब पिता नदी में मछली पकडऩे जाते थे तो मुझे ले जाते थे। वह भी नदी में हाथों से मछली पकड़ते थे। उनकी यह कला मैंने बड़े ध्यान से सीखी है। ज्यादा पैसे न होने के कारण सुघर ने महज कक्षा पांच तक ही पढ़ाई की है।
सुघर ने बताया, यह कोई जादू नहीं है। इसमें सिर्फ ध्यान देना पड़ता है। पानी में देर तक सांस रोके हुए मछली के पीछे जाना पड़ता है। उसके बाद मछली खुद अपने आप पकड़ में आ जाती है। उन्होंने बताया कि मछली पकडऩे के लिए पानी के अंदर मछली की तरह ही चलना पड़ता है। निषाद ने बताया कि मछली के ऊपर हाथ रखते ही वह रुक जाती है। इस क्रिया-कलाप के दौरान मछलियों ने सुघर को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।
सुघर ने बताया कि वह नहाते समय ही हाथ और मुंह से मछली पकड़ते हैं। यह उनका शौक है। वह लोगों के कहने पर उनकी पसंद की मछलियां भी नदी से निकाल देते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी रोजी-रोटी का यही जरिया है। वह रोज 10 से 15 किलो तक मछलियां पकड़ते हैं, जिससे हजार-दो हजार की कमाई हो जाती है। परिवार बड़ा है, इसीलिए वह ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की कोशिश करते हैं। तैराकी और गोताखोरी की इस अनोखी प्रतिभा के कारण यमुना नदी में जब कभी कोई डूब जाता है तो प्रशासन के अधिकारी इस युवक की मदद लेते हैं। सुघर कई लोगों की जान बचा चुके हैं।
सुघर के इस अदांज को देखकर लोग बॉलीवुड सुपर स्टार ऋतिक रोशन की फिल्म, कृष, के किरदार कृष्णा से उनकी तुलना करने लगे हैं। लोग बड़े गौर से उसके हुनर को देखने नदी पर जाते हैं। 24 वर्षीय सुघर की इस प्रतिभा की तारीफ करते हुए लोग उसे बुंदेलखंड का फिशरमैन उपाधि देने लगे हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 05-Dec-2019

शिमला, 5 दिसंबर। हैदराबद में डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप-मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। इस घटना के विरोध में आए दिन देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग काफी गम और गुस्से में हैं। इसके बावजूद रेप के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन देश के लगभग हर हिस्से से रेप कोई न कोई खबर आ ही जाती है। ताजा हिमाचल प्रदेश के शिमला शहर का है। यहां कुल्लू जिले में बुधवार को 10 साल की एक लडक़ी के साथ उसके एक रिश्तेदार ने कथित रूप से बलात्कार किया। कुल्लू के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि जब लडक़ी स्कूल जा रही थी तब उसके साथ यह वारदात हुई। 
उन्होंने बताया कि लडक़ी के बयान के आधार पर महिला थाने में भारतीय दंड संहिता और पोक्सो की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सिंह ने बताया कि इस वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। वह दसवीं का छात्र है और 18 साल से कम उम्र का है। पुलिस अधिकारी के अनुसार पीडि़ता का कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में मेडिकल परीक्षण किया गया है और रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। सिंह ने कहा कि मामले की जांच जारी है। 
इससे पहले बिहार के सासाराम में भीड़ ने एक पांच बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में एक अधेड़ की जमकर पिटाई हुई थी, बाद में आरोपी को पुलिस को सौप दिया गया था। इस मामले के बारे में रोहतास थाना अध्यक्ष बिजेंद्र प्रताप सिंह ने वारदात की पुष्टि करते हुए बताया था कि दुष्कर्म के आरोपी से पूछताछ करने के बाद सोमवार को उसे जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया था कि पीडि़त बच्ची की चिकित्सकीय जांच व दंडाधिकारी के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए उसे डेहरी भेजा गया। वहीं पीडि़त बच्ची के चीखने पर पड़ोसी वहां पहुंचे और भुईयां की पिटाई कर दी। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया था। 
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के थाना सीबीगंज क्षेत्र के एक गांव में दो साल की बच्ची के साथ पड़ोसी ने कथित तौर पर बलात्कार किया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र पांडेय ने मामले के बारे में बताया था कि गांव के निवासी एक व्यक्ति की दो साल की बेटी सोमवार की शाम घर के बाहर खेल रही थी। तभी गांव में रहने वाला यादराम वहां पहुंचा और बच्ची को चिप्स दिलाने के बहाने साथ ले गया। काफी देर तक बच्ची नहीं दिखी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी बीच किसी ने बताया कि बच्ची को यादराम साहू उर्फ बाबा ले गया था। (भाषा)
 


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