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08-Jul-2020 2:40 PM

पूर्व एनसीआरटी डायरेक्टर बोले-बच्चों के पढऩे, समझने के हक छीने जा रहे

 

नई दिल्ली, 8 जुलाई। नेशनल एजुकेशन बोर्ड ने मंगलवार को कोरोनावायरस संकट के बीच 2020-21 के शिक्षा सत्र में  स्कूलों में कोर्स को 30 फीसदी कम करने की घोषणा की थी, जानकारी मुताबिक बोर्ड ने स्कूलों में लोकतांत्रिक अधिकार, फूड सिक्योरिटी, संघवाद, नागरिकता और निरपेक्षवाद जैसे अहम चैप्टर हटा दिए हैं। शिक्षा संस्थानों से जुड़े और इन विषयों के कई जानकारों और विशेषज्ञों ने बोर्ड के इस कदम का विरोध किया है।

क्या-क्या हटाया गया है?

बोर्ड ने कक्षा नौ से 12वीं तक के इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस विषयों को रिवाइज़ किया है, जिसमें कक्षा 11वीं के पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद और निरपेक्षवाद जैसे अध्यायों को 'पूरी तरह हटा' दिया गया है. 'Local Government' चैप्टर से बस दो यूनिट हटाए गए हैं. इसमें  'Why do we need Local Governments?' और 'Growth of Local Government in India' शामिल हैं. 

कक्षा 12वीं के पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से 'Security in the Contemporary World', 'Environment and Natural Resources', 'Social and New Social Movements in India' और 'Regional Aspirations' चैप्टर्स को तो पूरी तरह से हटा दिया गया है. 'Planned Development' चैप्टर से 'changing nature of India's economic development' और 'Planning Commission and Five Year Plans' यूनिट को हटा दिया गया है.

वहीं, भारत के विदेशी देशों से रिश्तों पर मौजूदा चैप्टर से इस सत्र के लिए 'India's Relations with its Neighbours: Pakistan, Bangladesh, Nepal, Sri Lanka, and Myanmar' टॉपिक को हटा दिया गया है. 

कक्षा नौवीं के पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से 'Democratic Rights' और 'Structure of the Indian Constitution' अध्यायों तक को हटा दिया गया है. वहीं, नौवीं कक्षा के ही इकोनॉमिक्स के सिलेबस से 'Food Security in India' चैप्टर को हटाया गया है. 

कक्षा 10वीं के बच्चों के सिलेबस से 'Democracy and Diversity', 'Caste, Religion and Gender' और 'Challenges to Democracy' के अध्याय गायब हैं.

जानकारों ने उठाए हैं सवाल

CBSE के इस कदम पर NCERT के पूर्व डायरेक्टर कृष्ण कुमार ने NDTV से कहा कि CBSE की किताबों से चैप्टर्स को हटाकर बच्चों के पढ़ने और समझने के अधिकार को छीना जा रहा है. उन्होंने कहा, 'सरकार ने जिन चैप्टरों को हटाने का फैसला किया है उसमे अंतर्विरोध है. आप Federalism के चैप्टर को हटाकर Constitution बच्चों को पढ़ाएं -- ये कैसे होगा? आप सोशल मूवमेंट्स के चैप्टर को हटाएं और History पढ़ाएं - ये कैसे होगा? History सोशल मूवमेंट से ही तो निकलती है.' ये पहल बच्चों में रटने की प्रकृति को बढ़ावा देगी. 

उन्होंने सवाल उठाया कि 'किसी भी चैप्टर को डिलीट करने की क्या ज़रूरत है? एग्ज़ाम पर आधारित शिक्षा व्यवस्था क्यों लागू करने की कोशिश हो रही है? एग्ज़ाम लेने के लिए CBSE की किताब से किसी चैप्टर को हटाना क्यों जरूरी है?' कृष्ण कुमार 2004 से 2010 के बीच NCERT के डायरेक्टर थे.

CBSE क़िताबों के सह-लेखक और पॉलिटिकल साइंटिस्ट सुहास पल्शिकर ने भी NDTV से बातचीत में इस कदम पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि 'किसी भी किताब का एक लॉजिक होता है. अगर किसी किताब का कोई हिस्सा हटाया ता है तो उस लॉजिक के साथ हिंसा होती है, वो उस लॉजिक के खिलाफ होता है. मैं समझता हूं कि कुछ चैप्टर्स डिलीट किए गए हैं जो डाइवर्सिटी (विविधता) के आइडिया से जुड़े हैं- जैसे जेंडर और फेडरलिज्म. डाइवर्सिटी किसी भी लोकतंत्र की आत्मा होती है. अगर डाइवर्सिटी से जुड़े चैप्टर हटाए जाते हैं तो डेमोक्रेसी की सोच को चोट पहुंचती है.' 

पलिश्कर ने कहा, 'स्कूली बच्चों पर बोझ कम करने के और भी अच्छे तरीके हो सकते हैं. ये तय हो सकता है कि एक किताब सिलेबस में हो जिसे पढ़ाया जाए और एक सप्लीमेंट्री माना जाए जिससे बच्चे अपनी स्वेच्छा से पढ़ें. मुझे नहीं पता कि चैप्टर्स को किनके कहने पर या सलाह पर हटाया गया है.'(khabar.ndtv.com)

(khabar.ndtv.com)


08-Jul-2020 2:02 PM

लखनऊ, 8 जुलाई । अमर दुबे विकास दुबे का सबसे करीबी था। अमर दुबे बुधवार सुबह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। बताया जा रहा है इसने भी कानपुर केस में विकास दुबे का साथ दिया था।
विकास दुबे अमर दुबे की अधिकांश सलाह मानता था। अमर को विकास का राइट हैंड बताया जा रहा है। यूपी के एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि अमर को हमीरपुर के पास मुठभेड़ में मार दिया गया है।
अमर दुबे को मुख्य आरोपी विकास दुबे का चचेरे भाई बताया जा रहा है। जिसे हमीरपुर में यूपी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने मार गिराया है। अमर भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। कानपुर कांड में आठ पुलिसकर्मियों को मारने में अमर दुबे का भी हाथ था। अमर ने छत से पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की थी।
इस मुठभेड़ में मौदहा इंस्पेक्टर मनोजशुक्ल व एस टी एफ सिपाही घायल हुए है जिन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एस पी हमीरपुर श्लोक कुमार ने बताया कि कानपुर में पुलिस कर्मियों की हत्या में शामिल अमर दुबे जो कि कुख्यात बिकास दुबे का नजदीकी है। जिसकी लोकेसन मौदहा के आसपास मिली थी। आज सुबह हमीरपुर पुलिस व एस टी एफ की चेकिंग के दौरान अमर दुबे ने पुलिस बल पर फायरिंग की।
अमर वह रायफलधारियों के साथ हमेशा विकास के साथ ही रहता था। जरूरत पडऩे पर विकास शूटरों का इंतजाम करता था। घटना वाले दिन भी विकास के घर पर ही असलहाधरियों के साथ घर मौजूद था। अमर के खिलाफ चौबेपुर थाने में पांच मुकदमे दर्ज हैं और 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। एसटीएफ ने तडक़े मुठभेड़ के दौरान अमर दुबे को मार गिराया। (livehindustan.com)
 

 


08-Jul-2020 1:57 PM

नई दिल्ली, 8 जुलाई। भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी हैं, जो किसी काम से एनओआरआई वीजा पर पाकिस्तान गए, लेकिन लॉकडाउन के चलते अब वो वहां फंस गए हैं। एनओआरआई वीजा ‘नो आब्जेक्शन टू रिटर्न टू इंडिया’। 
भारत की तरफ से ये वीजा ऐसे पाकिस्तानियों को जारी किया जाता, जिन्होंने किसी भारतीय नागरिक से शादी की हो और भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे हों। वे जब संबंधियों से मुलाकात या किसी और काम के लिए पाकिस्तान जाते हैं तो उन्हें एनओआरआई वीजा दिया जाता है। 
पाकिस्तान की अफ्शा सैफ ने भारतीय नागरिक आहिल सैफ से शादी की। वे आठ साल से भारत में रह रही थीं। फरीदाबाद एफआरआरओ से एनओआरआई वीजा मिलने के बाद वे अपने मायके कराची गईं। लॉकडाउन लग जाने के बाद विदेशी यात्रा प्रतिबंधों के कारण वे वहीं फंसकर रह गई हैं। जबकि, गृह मंत्रालय की तरफ से 12 जून को जारी मेमोरेंडम में जिन विदेशी नागरिकों को वापस आने की छूट दी गई है उनमें वे भी शामिल हैं जिन्होंने भारतीय से शादी की है।
अफ्शा सैफ  के साथ उनके दो छोटे बच्चे हैं जो जन्म के आधार पर भारत के नागरिक हैं और उनके पास भारतीय पासपोर्ट हैं। इन्होंने एक वीडियो जारी कर भारत सरकार से लौटने देने की गुहार लगाई है। ऐसे करीब 500 लोग हैं जो इस तरह पाकिस्तान गए और वहां फंस गए हैं।
पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग सूत्रों का कहना है कि 748 भारतीय वापस लौट चुके हैं। 114 भारतीय 9 जुलाई को लौट रहे हैं। इनके अलावा 70-80 और भारतीय नागरिक पाकिस्तान में और हैं जिनकी वापसी की कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद एनओआरआई वीजा वालों की वापसी पर काम होगा। (khabar.ndtv.com)
 


08-Jul-2020 1:28 PM

नई दिल्ली, 8 जुलाई (भाषा)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जताई। साथ ही आर्थिक सुनामी के लिए चेताने की बात कहते हुए बीजेपी और मीडिया द्वारा मजाक उड़ाए जाने का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, लघु और मध्यम उद्यम नष्ट हो गए हैं। बड़ी कंपनियां गंभीर तनाव की स्थिति में हैं। बैंक संकट में हैं। मैंने महीनों पहले कहा था कि एक आर्थिक सुनामी आ रही है और देश की इस सच्चाई के बारे में चेताने पर भाजपा और मीडिया ने मेरा मजाक उड़ाया था।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट के अनुमानों की पृष्ठभूमि में एक दिन पहले यानी मंगलवार को दावा किया था कि सरकार का आर्थिक कुप्रबंधन लाखों परिवारों को बर्बाद करने वाला है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। राहुल गांधी ने देश की आर्थिक विकास दर में गिरावट के पूर्वानुमान से जुड़ी कुछ खबरें शेयर करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, भारत का आर्थिक कुप्रबंधन एक त्रासदी है जो लाखों परिवारों को बर्बाद करने वाला है। इसे अब मौन रहकर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उधर, सरकार ने सोमवार को कहा कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। कोरोना वायरस संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को पुनरूद्धार एवं वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिये अनुकूल नीतिगत उपायों के साथ आने वाले समय में और तेजी से पुनरूद्धार की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की जून में जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वृद्धि दर शून्य से नीचे 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह अप्रैल, 2020 में जारी आईएमएफ के अनुमान के मुकाबले 6.4 प्रतिशत अंक कम है।


08-Jul-2020 1:23 PM

बलिया (यूपी), 8 जुलाई।  उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मनियर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी (पीसीएस) मणि मंजरी राय की मौत के मामले में उनके पिता जय ठाकुर राय ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बेटी की हत्या कर कमरे में शव लटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह आत्महत्या कर ही नहीं सकती। लगातार उसकी परिवार वालों से बात हो रही थी। किसी तरह के तनाव में नहीं थी। बेटी को लगातार परेशान किया जा रहा था।

उन्होंने कुछ अधिकारियों, ठेकेदारों की ओर इशारा किया। पिता का कहना है कि लगातार इस बारे में वह कहती थी। रविवार को उससे बात हुई तो उसने बताया कि शनिवार को उसका ड्राइवर हटा दिया गया था। वह खुद गाड़ी लेकर आने जाने लगी थी। फर्जी भुगतान को लेकर उसे लगातार परेशान किया जा रहा था। 
इसे लेकर काफी शिकायतें कर रही थी लेकिन इसके बाद भी उसे कोई तनाव नहीं था। पिता ने कहा कि उनको बेटी के कमरे में भी नहीं जाने दिया गया। रात में केवल बॉडी दिखाई गई। इस मामले की शासन जांच कराए और हमें न्याय दे। (amarujala)


08-Jul-2020 12:58 PM

नई दिल्ली, 8 जुलाई (एजेंसी)। गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन समेत गांधी परिवार से जुड़े तीन ट्रस्टों में वित्तीय लेनदेन में तथाकथित गड़बड़ी की जांच के लिए अंतरमंत्रालय समिति का गठन किया है। प्रवर्तन निदेशालय के विशेष निदेशक इस समिति के प्रमुख होंगे। अंतरमंत्रालय समिति राजीव गांधी फाउंडेशन के साथ राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की भी जांच करेगी। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया है कि मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया गया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी।

बताया जा रहा है कि इस जांच में मनी लॉड्रिंग एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट, विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 एक्ट के नियमों के उल्लंघन की जांच की जाएगी। 

क्या है राजीव गांधी फाउंडेशन?
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विजन और सपनों को पूरा करने के लिए उनके नाम से इस फाउंडेशन की शुरुआत 21 जून 1991 को की गई थी। राजीव गांधी फाउंडेशन की वेबसाइट पर बताया गया है कि 1991 से 2009 तक फाउंडेशन ने स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक, महिला एवं बाल विकास, अपंगता सहयोग, शारीरिक रूप से निशक्तों की सहायता, पंजायती राज, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन आदि क्षेत्रों में काम किया। 2010 में फाउंडेशन ने शिक्षा क्षेत्र पर फोकस करने का फैसला किया। संघर्ष से प्रभावित बच्चों को शैक्षणिक मदद, शारीरिक रूप से निशक्त युवाओं की गतिशीलता बढ़ाने और मेधावी भारतीय बच्चों को कैंब्रिज में पढऩे हेतु वित्तीय सहायता आदि जैसे कार्यक्रम फाउंडेशन की ओर से चलाए जाते हैं। 

कौन हैं ट्रस्टी?
राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, सुमन दुबे, राहुल गांधी, डॉ. शेखर राहा, प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन, डॉक्टर अशोक गांगुली, संजीव गोयनका और प्रियंका गांधी वाड्रा भी फाउंडेशन के ट्रस्टी हैं।

बीजेपी का आरोप है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2005-2008 के बीच पीएम राहत कोष से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा ट्रासंफर किया गया। बीजेपी का कहना है कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने कई कॉर्पोरेट से भारी पैसा लिया। बदले में सरकार ने कई ठेके दिए। बीजेपी का कहना है कि यूपीए शासन में कई केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सेल, गेल, एसबीआई आदि पर राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा देने के लिए दबाव बनाया गया। देश की जनता इसका कारण जानना चाहती है। 

पीएम राहत कोष से फंड ट्रांसफर का आरोप
बीजेपी का आरोप है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2005-2008 के बीच पीएम राहत कोष से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा ट्रासंफर किया गया। बीजेपी का कहना है कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने कई कॉर्पोरेट से भारी पैसा लिया। बदले में सरकार ने कई ठेके दिए। बीजेपी कहा कि यूपीए शासन में कई केंद्रीय मंत्रालयों के साथ सेल, गेल, एसबीआई आदि पर राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा देने के लिए दबाव बनाया गया। देश की जनता इसका कारण जानना चाहती है। 


08-Jul-2020 12:32 PM

मरीजों में मंत्री, विधायक, पुलिसकर्मी, पत्रकार और मेडिकल स्टाफ

रांची, 8 जुलाई। झारखण्ड में एक दिन में कोरोना का बड़ा विस्फोट हुआ है। बीते 24 घंटे में राज्य के अलग अलग 12 जिलों में कोरोना वायरस के संक्रमण कोविड-19 के 141 नए मरीज मिले हैं। इन मरीजों में मंत्री, विधायक, पुलिसकर्मी, पत्रकार और मेडिकल स्टाफ भी शामिल हैं। 141 नए पॉजिटिव मिलने के साथ ही राज्य में कुल पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढक़र 3018 हो गया है। एक दिन में इतना ज्यादा मरीज मिलने का ये अब तक सबसे बड़ा आंकड़ा है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के मिलने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

झारखंड सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के मुताबिक देवघर में 3, धनबाद में 25, पूर्वी सिंहभूम में 44, गढ़वा में 1, हज़ारीबाग में 6, कोडरमा में 7, लातेहार में 1, लोहरदगा में 3, पलामू में 2, रामगढ़ में 28, रांची में 20, सिमडेगा में 1 पॉजिटिव मिले। वहीं सूबे के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है।  इसके बाद से मंत्री के संपर्क में आए लोगों को होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। उनके सैंपल की जांच भी की जाएगी।

बीते मंगलवार को मिले नए 141 कोरोना पॉजिटिव में मिलिट्री हॉस्पिटल के 10, मेदांता के 02, रिम्स आइसोलेशन वार्ड के 03, हिंदपीढ़ी थाने के 02, महिला थाने के 02, आरआरबी के एक, धनबाद में अलग अलग संस्था से जुड़े 21 पत्रकार में कोविड-19 का संक्रमण मिला है। राज्य में आज मिले 141 कोरोना पॉजिटिव के बाद एक्टिव केस की संख्या बढक़र 892 हो गयी है। वहीं 2104 कोरोना पॉजिटिव ठीक हुए हैं। आज धनबाद के दो कोरोना पॉजिटिव की मौत के बाद यह राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या बढक़र 22 हो गयी है। (hindi.news18.com)


08-Jul-2020 12:18 PM

इरप्पा नाइक ने 20 बरसों तक पैसे जमा किए ताकि वह गरीब बच्चों के लिए निशुल्क स्कूल खोल सकें।

-अनूप कुमार सिंह

इरप्पा नाइक का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे। दो जून की रोटी का जुगाड़ भी बहुत मश्किल से हो पाता था ऐसे में पढ़ाई के बारे में सोचने का सवाल ही नहीं था। घर चलाने के लिए इरप्पा के दो बड़े भाइयों को भी मजबूर होकर पढ़ाई छोडऩी पड़ी।
 
द बेटर इंडिया से बात करते हुए नायक कहते हैं, मेरे दादा (बड़े भाई) बहुत ही होनहार छात्र थे लेकिन घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बीच में ही अपनी पढ़ाई छोडऩी पड़ी। हालांकि फिर भी उन्होंने मुझे पढ़ाया और स्कूल की फीस भरने के लिए उन्होंने एक्स्ट्रा शिफ्ट में मजदूरी की। जब नाइक 10वीं क्लास में थे तब एक दिन उन्होंने तय किया कि वह अपने भाई के निस्वार्थ मेहनत का कर्ज चुकाने के लिए जरूर कुछ करेंगे। वर्ष 2000 में उन्होंने महाराष्ट्र के मिराज शहर के बाहरी इलाके में गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए एक निशुल्क स्कूल खोलकर उस वादे को पूरा किया।

51 वर्षीय नाइक ने बताया कि मेरे भाई ने गरीबी को आड़े नहीं आने दिया और मेरी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया। यह जीवन की एक ऐसी सीख थी जिसे मैंने हमेशा याद रखा। 10वीं की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही मैंने यह ठान लिया था कि अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद मैं गरीब और वंचित बच्चों को पढ़ाऊंगा।

नाइक अपने फैसले पर अडिग रहे और वह पिछले 20 वर्षों में पहली से दसवीं क्लास तक के 500 बच्चों को पढ़ा चुके हैं। इनमें से ज़्यादातर छात्र दैनिक मजदूरी करने वालों और कचरा बीनने वालों के बच्चे हैं।

काम और स्कूल के बीच भागदौड़
साल 1987 में नाइक ने सांगली जिले के वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा किया। नाइक परिवार के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि थी। बेशक, नाइक के माता-पिता को उनसे एक अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी की उम्मीद थी और वह उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे।

नौकरी के साथ-साथ वह अपने क्षेत्र के आसपास के बच्चों को पढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनकी बस्ती में कक्षा चलाने के लिए कोई जगह नहीं मिली। उन्होंने बताया कि स्कूल बनाने के सपने को तब पंख लगे जब मैं एक सरकारी ठेकेदार के रूप में काम कर रहा था। अच्छे क्लासरूम और यूनिफॉर्म के साथ ही मुझे स्कूल को रजिस्टर करने के लिए परमिशन की भी जरूरत थी। इसलिए मैंने अपना सपना पूरा करने के लिए पैसे बचाने शुरू कर दिए। उनके माता-पिता ने भी पूरा साथ दिया। पैसे इक_ा हो जाने के बाद उन्होंने शहर के बाहरी इलाके में एक छोटी सी जमीन खरीदी और दस कक्षाओं (हर ग्रेड के लिए एक कक्षा) का निर्माण कराया।

एक स्थानीय विधायक की मदद से उन्होंने अपने स्कूल को महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड में रजिस्टर कराया और 20 बच्चों के साथ ‘क्रांतिवीर उमाजी नाइक हाई स्कूल’ नाम से मराठी-माध्यम स्कूल शुरू किया।

बच्चों की जिंदगी में बदलाव
नाइक के लिए बच्चों के माता-पिता को घर से इतनी दूर स्कूल में उन्हें पढऩे भेजने के लिए मनाना काफी मुश्किल काम था। लेकिन उन्होंने इस समस्या का भी हल निकाला और स्कूल बस की व्यवस्था करके एक ड्राइवर नियुक्त किया जो रोजाना बच्चों को स्कूल लाता और छोड़ता था। लेकिन एक और समस्या थी। नाइक ने आगे बताया,

अधिकांश माता-पिता ने खराब आर्थिक स्थिति के कारण अपने बच्चों को मुफ्त स्कूल में भेजने से मना कर दिया। कुछ बच्चे कंस्ट्रक्शन साइट पर अपने माता-पिता के साथ काम करने जाते थे। वे आजीविका के लिए अपने बच्चों से काम कराते थे और बाल श्रम जैसे गैरकानूनी काम को नजऱअंदाज करते थे।

तब उन्होंने अपना उदाहरण देकर बच्चों के अभिभावकों को समझाया कि कैसे इतनी गरीबी में उन्होंने पढ़ लिख कर नौकरी पाई। इसके बाद कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया।

बच्चों की संख्या बढऩे पर उन्होंने ग्यारह शिक्षकों को काम पर रखा। तीन साल पहले तक (जब उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी थी), उन्होंने अपनी सारी तनख्वाह लगा दी थी।

वर्तमान में राज्य शिक्षा विभाग तीन शिक्षकों के वेतन का भुगतान करता है जबकि बाकी शिक्षकों को नाइक तनख्वाह देते हैं। स्कूल विभाग छात्रों को मिड-डे मील भी देता है जिससे उनकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाता है। नाइक बच्चों के यूनिफॉर्म और स्टेशनरी जैसे अन्य खर्चे भी उठाते हैं। उन्होंने हाल ही में स्कूल के खर्चों को पूरा करने के लिए अपने परिवार की जमीन का एक हिस्सा बेच दिया। वह कहते हैं, स्कूल चलाने के लिए हम 50,000 रुपये हर महीने खर्च करते हैं। जब से मैंने अपनी नौकरी छोड़ी है, चीज़ें काफी मुश्किल हो गईं हैं। वह शिक्षा विभाग से अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने की योजना पर काम कर रहें हैं। वह नहीं चाहते कि उनके छात्रों को पैसे के लिए शिक्षा से समझौता करना पड़े।

अंत में वह कहते हैं, मेरे 200 छात्रों ने दसवीं बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और उच्च शिक्षा के लिए छोटे-छोटे व्यवसायों में लगे हैं। इससे मुझे स्कूल चलाने के लिए बहुत ताकत मिलती है और उम्मीद है कि मेरा स्कूल उनका जीवन बदल सकता है।

यदि आप नाइक को स्कूल चलाने में मदद करना चाहते हैं, तो बैंक खाते में सहायता राशि भेजकर योगदान कर सकते हैं –
क्रांतिवीर उमाजी नायक शिक्षा प्रसारक
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
खाता संख्या : 20144935260
IFSC: MAHB0000235
आप इस नंबर पर इरप्पा नाइक से संपर्क कर सकते हैं : 9545262849
मूल लेख : गोपी करेलिया
संपादन : अर्चना गुप्ता
(hindi.thebetterindia)


08-Jul-2020 9:27 AM

उत्तरप्रदेश 8 जुलाई। कानपुर मुठभेड़ में घायल गोला क्षेत्र के बेलवपार पाठक गांव के दारोगा सुधाकर पाण्डेय को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इस समय वह लखनऊ स्थित अपने आवास पर हैं। मंगलवार की देर शाम फोन पर बात करने पर मुठभेड़ की आंखों देखी दास्तां सुनाते हुए बताया कि शातिर बदमाश विकास दुबे के चक्रव्यूह में पुलिस फंस गई थी। वह लोग कुछ समझ पाते तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मौत बिल्कुल सामने खड़ी थी। उनकी बातों में अपने आठ साथियों के खोने का गम साफ महसूस हो रहा था।

सुधाकर पाण्डेय ने बताया कि मौत से जंग जीतकर जल्दी ही गांव आ रहा हूं। उन्होंने आगे पूछने पर बताया कि विकास दूबे को हम लोगों के गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। उसने रास्ते में जेसीबी खड़ा करा दिया और गांव में बिजली की आपूर्ति बाधित करवा दी। इस सबसे अंजान हम लोग अगल-बगल के थानों से फोर्स लेकर सीओ के नेतृत्व में दबिश देने पहुंचे। पुलिस टीम में लगभग ढाई दर्जन लोग थे। रात के करीब एक बजे हम लोग विकास दुबे के गांव पहुंचे तो देखे रास्ते में जेसीबी खड़ी मिली। हम लोग ने अपने वाहन उसके घर से 500 मीटर दूर खड़ा किया और सीओ के पीछे चल दिए। 

छत के ऊपर से चलने लगीं गोलियां
इसकी पल-पल की वह निगरानी कर रहा था। जैसे ही पुलिस गांव पहुंची बिजली चली गई। अभी हम लोग उसके गेट पर पहुंचने वाले थे कि छत के ऊपर से ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। करीब 35 से 40 लोगों ने पुलिस टीम को घेर कर हमला कर दिया था। जब तक हम लोग ऊपर देखे तब तक कई लोगों को गोली लग चुकी थी और उनकी वर्दी खून से भीगी जा रही थी, जो जहां जगह पाया वह वहीं छिपकर फायर करने की सोचने लगा लेकिन ऊपर आती गोलियों के बौछार के सामने किसी की एक नहीं चली। ऐसे में लगा कि अब मौत निश्चित है आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। 

आंख के पास लग गई गोली
इसी दौरान हमारे भी आंख के पास गोली लग गई। साथ गया कांस्टेबल एक शौचालय में छिप गए। वह शौचालय को निशाना बनाकर गोलियां चलाते रहे। शौचालय में भी अपने को सुरक्षित न पाकर किसी तरह वाहन की ओर भागा तब तक थानाध्यक्ष बिठुर कौशलेंद्र प्रताप सिंह और चार अन्य जवान घायल हो गए। उन्होंने बताया कि कुछ ही मिनट में बदमाशों ने सैकड़ों राउंड गोलियां पुलिस टीम के ऊपर चला दी। गोलियां चलते ही पुलिस टीम ने मौके पर मोर्चा संभाला लेकिन बदमाशों ने अंधेरे का लाभ उठाया। गांव के लोगों ने भी पुलिस का साथ नहीं दिया। ग्रामीणों ने साथ दिया होता तो इतनी बुरी स्थिति न होती। पुलिस टीम में छह लोग घायल हुए थे जिसमें केवल सुधाकर ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुए हैं।(livehindustan)


08-Jul-2020 8:59 AM

उत्तरप्रदेश 8 जुलाई। कानपुर कांड में जांच के दायरे में आए एसटीएफ के डीआईजी अनंतदेव तिवारी का योगी सरकार ने मंगलवार को तबादला कर दिया। साथ ही दो अन्य अधिकारियों को भी इधर से उधर किया गया है।

गौरतलब है कि गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुंडों की फायरिंग में शहीद हुए 8 पुलिस अफसरों में शामिल सीओ देवेंद्र मिश्र का पत्र सोमवार को उनकी बेटी ने पुलिस को घर में रखी फाइल से निकालकर दिया था। इसके बाद सोमवार को ही सीओ कार्यालय को सील कर दिया गया था। इस मामले में तत्कालीन एसएसपी अनंतदेव तिवारी पर सवाल उठ रहे थे कि जब सीओ ने उन्हें पत्र लिखकर विकास दुबे और निलंबित थानेदार विनय तिवारी की साठगांठ की पोल खोली थी तब उन्होंने दोनों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। इसके बाद देर शाम योगी सरकार ने अनंत देव तिवारी समेत चार आईपीएस का तवादला कर दिया।

सीओ देवेंद्र मिश्र के पत्र को लेकर तत्कालीन एसएसपी और मौजूदा डीआईजी (एसटीएफ ) अनंतदेव तिवारी जांच के घेरे में हैं। सोमवार को यह पत्र सीओ की बेटी ने ही घर में मिली फाइल से निकालकर दिखाया था। यह पत्र फिलहाल किसी रिकार्ड में नहीं है। शक है कि इसे गायब कर दिया गया है। इसके बाद आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह को मंगलवार सुबह बिल्हौर स्थित सीओ कार्यालय जांच के लिए भेजा गया। उन्होंने दस्तावेजों का निरीक्षण किया। कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ भी की।


इस बीच, फॉरेंसिक टीम ने सीओ का कंप्यूटर सील करके लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा है, ताकि कंप्यूटर की हार्डडिस्क से यह पता लगाया जा सके कि यह पत्र इस कंप्यूटर से टाइप हुआ था या नहीं।

उधर, शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा के स्वजन वायरल पत्र को लेकर स्थानीय पुलिस के दावों से आहत है। उनका कहना है कि पुलिस में गंभीरता का अभाव नजर आ रहा है, साथ ही मामले की जांच में शामिल डीआईजी (एसटीएफ ) को भी कठघरे में खड़ा करते हुए नैतिकता के आधार पर जांच टीम से हटाए जाने की मांग भी उठाई थी।

बलिदानी सीओ देवेंद्र मिश्रा के बड़े साढू कमलाकांत ने मंगलवार को मीडिया के सामने आकर कहा कि वायरल पत्र से स्पष्ट हो गया है कि तत्कालीन एसएसपी एवं मौजूदा एसटीएफ -डीआईजी अनंतदेव तिवारी ने पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया था। इससे उनकी सत्य्निष्ठा सवालों के घेरे में है और जांच के बाद ही पता चलेगा कि वह दोषी हैं या नहीं।

उन्होंने आगे कहा, "कोई भी व्यक्ति खुद अपनी जांच नहीं कर सकता। न्याय का सामान्य सा सिद्धांत है कि जिन लोगों पर संदेह होता है उन्हें जांच से दूर रखा जाता है। खुद संदेह के दायरे में आया व्यक्ति क्या जांच करेगा। सही जांच कमेटी का चयन किया जाना चाहिए, वरना ऐसे लोग तो सच पर धूल डाल देंगे।"
स्थानीय पुलिस के रिकार्ड में उस पत्र के न होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पुलिस के रिकार्ड में उस पत्र का न होना चिंता का विषय है, कहीं कुछ गड़बड़ है, जिसकी जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "अगर मान भी लें कि शहीद पुलिसकर्मियों का पत्र अधिकारियों तक नहीं पहुंचा तो अब पत्र सामने आने के बाद पुलिस अफसर क्या कार्रवाई कर रहे हैं। गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस को उसका सुराग भी नहीं मिल पा रहा है, जबकि पिछले कुछ दिनों से ताबड़तोड़ कई जगह छापेमारी जारी है।"

अपराधी विकास दुबे पांच दिन बाद भी गायब है। यूपी पुलिस की तमाम टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं। पुलिस ने मंगलवार 5को उसके कई ठिकानों पर दबिश भी दी। उसके गांव में मौजूद हर घर को खंगाला गया है। (navjiwan)


07-Jul-2020 7:55 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई। केरल में सोना तस्करी का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। विदेश से आए 30 किलो सोने ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। विपक्षी दल मुख्यमंत्री विजयन पर सवाल उठा रहे हैं तो कई शक्तिशाली अधिकारियों पर पर गाज गिर गई है। केरल सरकार ने तस्करी केस में नाम आने की वजह से सूचना प्रौद्योगिकी सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एम शिवशंकर का तबादला कर दिया। सोमवार को सरकार ने इस केस में आरोपी सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार स्वपना सुरेश की सेवा समाप्त कर दी थी। कथित तौर पर वह प्रधान सचिव की करीबी हैं और अभी फरार चल रही हैं।

मुख्यमंत्री पी विजयन के कार्यालय की ओर से जारी संक्षिप्त बयान में कहा गया, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एम शिवशंकर का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर किया जा रहा है, उनकी जगह आईएएस पीर मोहम्मद लेंगे। एम शिवशंकर राज्य सरकार के बेहद प्रभावशाली नौकरशाह माने जाते थे।

रविवार को तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीमा शुल्क अधिकारियों ने भारी मात्रा में सोना बरामद किया था। यह सोना यूएई के वाणिज्य दूतावास के लिए आए बैगों में भरा हुआ था। हवाई अड्डे के सूत्रों ने बताया कि सोना शौचालयों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से भरे बैग में रखा हुआ था। तस्करी के आरोप में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वाणिज्य दूतावास के एक पूर्व कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। पूर्व कर्मचारी को हिरासत में लेने के बाद जांच के लिए कोच्चि ले जाया गया है। आरोपी को जब यह पता चला कि उसके सामान की जांच होगी तो उसने सीमा शुल्क अधिकारियों को धमकी भी दी। इस बीच जय हिंद टेलीविजन चैनल ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कथित रूप से हवाई अड्डे पर यूएई के वाणिज्य दूतावास के पूर्व कर्मचारी की मदद करने की कोशिश की थी।

मुख्यमंत्री पी. विजयन ने आरोपी महिला अधिकारी की नियुक्त से जुड़े कारकों की जानकारी नहीं है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने किसी भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के साथ कभी कोई संवाद नहीं किया और राज्य की जनता यह जानती है। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल नहीं बच पाएंगे।

केरल में विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य के आयकर विभाग की महिला (वाणिज्य दूतावास की एक पूर्व कर्मचारी) ‘राजनयिक बैग से 30 किलोग्राम सोने की तस्करी में शामिल है। आयकर विभाग मुख्यमंत्री के पास है और उसके अगुवा विजयन के प्रधान सचिव एम शिवशंकर थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नितला ने यह आरोप लगाते हुए इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की कि मुख्यमंत्री कार्यालय ‘अपराधियों का अड्डा’ बन गया है। भाजपा प्रमुख के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि सीमाशुल्क अधिकारियों को इस जब्ती के शीघ्र बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आया था। (न्यूजरूमपोस्ट)


07-Jul-2020 7:18 PM

नई दिल्ली 7 जुलाई (एजेंसी)। हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री केयर्स फंड के तहत मिलने वाले वेंटिलेटर पर सवाल खड़े किए गए थे। अब वेंटिलेटर बनाने वाली संस्था की ओर से राहुल गांधी को जवाब दिया गया है और सभी आरोपों को नकारा गया है। इसके साथ ही AgVa के मालिक, प्रोफेसर दिवाकर वैश ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए कहा कि आप डॉक्टर नहीं हैं लेकिन मैं उन्हें डेमो देना चाहता हूं।

पीएम केयर्स फंड के तहत AgVa हेल्थकेयर वेंटिलेटर बना रही है। इसके को-फाउंडर प्रोफेसर दिवाकर वैष ने कहा है कि उनके वेंटिलेटर पर जो सवाल खड़े किए जा रहे हैं, वो निराधार हैं। क्वालिटी के आधार पर उनका वेंटिलेटर हर मानक पर खरा उतरता है।

प्रोफेसर दिवाकर ने कहा कि हमारे वेंटिलटर करीब 5 से दस गुना तक सस्ते हैं, एक वेंटिलेटर की कीमत 10-15 लाख तक होती है। लेकिन हमारे वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ लाख रुपये तक है। इन प्रोडक्ट्स में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का जाल काम करता है, क्या वो लोग (विरोध करने वाले) स्वदेशी प्रोडक्ट को बढ़ावा नहीं देंगे।

प्रोफेसर दिवाकर ने कहा कि कुछ लोगों को टेक्निकल चीजों की बात पता नहीं थी और वो मार्केटिंग से थे, उन्होंने इसपर सवाल किया। अब राहुल गांधी जी को ये बात पता नहीं होगी, क्योंकि वो डॉक्टर तो है नहीं.. इसलिए उन्होंने इसे रिट्वीट कर दिया।

कांग्रेस नेता ने इन वेन्टिलेटरों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगते हुए कहा था कि देश के कई प्रतिष्ठित अस्पताल, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि अग्वा कंपनी ने बेकार और दोयम दर्जे के वेंटिलेटर सप्लाई किए हैं, जिसमें गड़बड़ी करके यह दिखाया जाता है कि ऑक्सीजन सप्लाई इतनी हो रही है और जबकि होती नहीं है। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि पीएम केयर्स की अपारदर्शिता के कारण देश की जनता के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है और लोगों के पैसे का इस्तेमाल घटिया क्वॉलिटी के उत्पाद खरीदने में किया जा रहा है।


07-Jul-2020 7:06 PM

 रायपुर 07 जुलाई 2020 । सड़क दुर्घटना पीड़ितों कि मदद के लिए आगे आने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के अनुक्रम में आज दिनांक 07 जुलाई 2020 को छत्तीसगढ़ यातायात पुलिस प्रमुख श्री आर. के. विज भारतीय पुलिस सेवा ने श्री अखिलेख द्विवेदी एवं श्री धु्रव जांगड़े को प्रषंसा पत्र देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि दिनांक 03 जुलाई 2020 को सांयः 19.15 बजे कृषि विष्वविद्यालय, रायपुर के सामन राष्ट्रीय राजमार्ग (पूल के उपर में) एक व्यक्ति को घायल अवस्था में औंधे मुंह पड़ा देखकर वाहन चालक ख्वाजा सलीम ने यातायात रोक कर घायल व्यक्ति को सड़क किनारे लाने का प्रयास किया। इस दौरान मीडिया कर्मी श्री अखिलेख द्विवेदी एवं श्री धु्रव जांगड़े भी पहुंचे, सब मिलकर घायल को सड़क किनारे लेकर आये एवं हाईवे पेट्रोल वाहन को दूरभाष पर सूचित करने पर थोड़ी देर में हाईवे पेट्रोल वाहन में पहुंचे कर्मचारियों ने घायल व्यक्ति को मेकाहारा अस्पताल ले जाकर उपचार कराया।

 इस बात की प्रबल संभावना थी कि कोई भी वाहन पुल के उपर सड़क में पड़े घायल व्यक्ति को रौंद सकता था या अचानक सड़क में पड़े घायल को देखकर बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पूल की रेली से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता था।

 उल्लेखनीय है कि सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्षी सहित कोई भी बाईस्टैडर या गुडसेमेरिटन किसी घायल व्यक्तियों को निकटतम अस्पताल में लेकर जा सकता है तथा उस बाईस्टैडर या गुडसेमेरिटन को तुरंत जाने की अनुमति दे दी जायेगी उन्हें किसी प्रकार से  परेषान नहीं किया जायेगा। पुलिस को सूचना देने अथवा आपातकालिन सेवाओं हेतु फोन काॅल करता है उसे फोन पर अथवा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना नाम और व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा।

 


07-Jul-2020 7:00 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई । सीबीआई के बाद अब ईडी ने भी जीवीके ग्रुप पर शिकंजा कस दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को मुंबई हवाई अड्डे के विकास में 800 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितता के मामले में मुंबई एयरपोर्ट, जीवीके ग्रुप, उसके अध्यक्ष डॉ. जीवीके रेड्डी, उनके बेटे जीवी संजय रेड्डी और कई अन्य के खिलाफ खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। एंटी मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी जल्द ही कंपनियों के खातों की जांच शुरू करेगी और मनी लॉन्ड्रिंग का पता लगाने के लिए फंड ट्रांसफर करेगी। इसमें जांच के दौरान संपत्ति अटैच भी की जा सकती है।

पीएमएलए (प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ईडी की जांच 27 जून को दर्ज सीबीआई की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें 13 लोगों का नाम रेड्डी और उनके बेटे संजय रेड्डी, एमआईएएल (मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) और कई कंपनियों को शामिल किया गया था, जिन्हें एयरपोर्ट पर ठेका दिया गया था। सीबीआई ने पिछले हफ्ते मुंबई और हैदराबाद में जीवीके के परिसर की भी तलाशी ली थी। 

सीबीआई ने 800 करोड़ रुपये की अनियमितता के मामले में जीवीके ग्रुप के चेयरमैन जीवीके रेड्डी और उनके बेटे संजय रेड्डी के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनके अलावा सीबीआई इस मामले में मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ-साथ अन्य कंपनियों के कई अधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। इन सभी लोगों पर 705 करोड़ रुपये की अनियमितता और साल 2012 से लेकर 2018 के बीच सरकारी खजाने को क्षति पहुंचाने का आरोप  है। जीवीके ग्रुप ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और कुछ विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई थी। इसमें जीवीके के 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर हैं।(livehindustan)

 


07-Jul-2020 6:46 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई । कोरोना महामारी के चलते देशभर के सभी स्कूल मार्च के महीने से बंद हैं। स्कूलों के लंबे समय तक बंद रहने से स्टूडेंट्स की पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। पढ़ाई में हुए इस नुकसान के मद्देनजर छात्रों के दबाव को कम करने के लिए सीबीएसई अकेडमिक ईयर 2020-2021 के लिए स्कूल के सिलेबस को 30 फीसदी कम कर दिया गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इस बात की जानकारी दी है। एचआरडी मंत्री ने ट्वीट में लिखा, देश और दुनिया में पनपे हालातों के मद्देनजर सीबीएसई पाठ्यक्रम को संशोधित करने और कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए कोर्स के दबाव को कम करने की सलाह दी गई थी। मुख्य कॉन्सेप्ट्स को जारी रखते हुए सिलेबस को 30 फीसदी तक कम करने का निर्णय लिया गया है। 

पिछले महीने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कोविड-19 से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सभी क्लासेस के लिए सिलेबस कम करने की सलाह दी थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मीटिंग के दौरान उन्होंने सिलेबस 30 से 50 फीसदी सिलेबस कम करने पर भी बात की थी।

वहीं, हाल ही में काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एक्जामिनेशन बोर्ड ने 2020-21 सत्र के लिए आईसीएसई व आईएससी बोर्ड परीक्षाओं के सिलेबस में 25 फीसदी की कटौती कर दी है।(ndtv)

 


07-Jul-2020 6:19 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई । डीजल के दाम सात दिन के विराम के बाद मंगलवार को फिर बढ़ गए, जबकि पेट्रोल की कीमत लगातार आठवें दिन स्थिर रही।

देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत आज 80.43 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रही। यह 27 अक्टूबर 2018 के बाद का उच्चतम स्तर है। डीजल का मूल्य 25 पैसे बढक़र 80.78 रुपये प्रति लीटर के नये रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमत क्रमश: 82.10 रुपये, 87.19 रुपये और 83.63 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रही। डीजल का भाव कोलकाता में 25 पैसे बढक़र 75.89 रुपये, मुंबई में 22 पैसे बढक़र 79.05 रुपये और चेन्नई में 19 पैसे की वृद्धि के साथ 77.91 रुपये प्रति लीटर पर हो गया।(वार्ता)


07-Jul-2020 6:18 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई। मंगलवार सुबह तडक़े जम्मू कश्मीर के पुलवामा के गोसू इलाके में मुठभेड़ शुरू हुई।  कश्मीर जोन पुलिस ने कहा- पुलिस और सुरक्षा बल ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। यहां एक आतंकी को ढेर कर दिया गया है। इस बीच मुठभेड़ में तीन सुरक्षा कर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान घर से कूदने की कोशिश करते समय गोली लगने से एक आतंकवादी के मारे जाने की भी संभावना है। हालांकि उसका शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है।

अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने पुलवामा के गूसू गांव में घेराबंदी कर तलाश अभियान शुरू किया था। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों के सुरक्षा बल पर गोलीबारी करने से अभियान मुठभेड़ में तब्दील हो गया। अधिकारी ने बताया कि शुरुआती गोलीबारी में तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार (4 जुलाई) को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन के दो आतंकवादी मारे गए, जबकि सेना का एक जवान घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर में कुलगाम जिले के आरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया। (livehindustan.com)


07-Jul-2020 6:17 PM

कानपुर, 7 जुलाई । कानपुर के चौबेपुर स्थित बिकरु गांव में बीते शुक्रवार को 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में फरार अपराधी विकास दुबे को अभी तक नहीं पकड़ा जा सका है। हालांकि विकास दुबे और उसके गैंग के द्वारा 8 पुलिस वालों की हत्या के आरोप में पुलिस ने तीन और लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह इस कांड में अब तक 4 लोग गिरफ्तार हो गए हैं। गिरफ्तार हुए तीन लोगों के नाम सुरेश वर्मा, क्षमा दुबे और रेखा अग्निहोत्री है।

विकास दुबे की रिश्तेदारी में आने वाली बहू क्षमा दुबे, बदमाशों का हौसला बढ़ाने वाला और पुलिस के छिपने की जानकारी देने वाला सुरेश वर्मा और घरेलू सहायिका रेखा, जो हरिशंकर अग्निहोत्री की पत्नी है, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस आने की सूचना रेखा ने ही बदमाशों को दी थी।

चालीस थानों की पुलिस विकास की तलाश में जुटी है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं है। इस मामले में कई पुलिसवाले भी शुरू से ही संदेह के घेरे में हैं। इन पुलिस वालों पर विकास दुबे के लिए जासूसी करने का आरोप लग रहा है। ड्यूटी पर लापरवाही के आरोप में अब चौबेपुर थाने में तैनात दो सब इंस्पेक्टर, एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। चौबेपुर के थाना इंचार्ज विनय तिवारी को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। (khabar.ndtv.com)


07-Jul-2020 6:16 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई । एलएसी पर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच बीती देर रात भारतीय वायुसेना के जवानों ने ऑपरेशन करते हुए अपना जौहर दिखाया है। एयरफोर्स के जवानों ने चिनूक, मिग-29, अपाचे सहित अन्य आधुकनिक तकनीक वाले फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर नाइट ऑपरेशन किया।

भारत-चीन सीमा के पास एक फॉरवर्ड एयर बेस में वरिष्ठ फाइटर पायलट ग्रुप कैप्टन ए राठी ने कहा कि नाइट ऑपरेशन अचानक होता है। भारतीय वायुसेना किसी भी परिस्थिति में आधुनिक प्लेटफार्म और अपने उत्साही जवानों की मदद से ऑपरेशन के पूरी तरह से प्रशिक्षित और तैयार है।

भारतीय वायु सेना का एएन-32 परिवहन विमान उत्तराखंड के चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर लैंड कराया गया। इसके अलावा भारत-चीन सीमा के पास एक फॉरवर्ड एयरबेस पर चिनूक हेलीकॉप्टर से रात में ऑपरेशन किया गया। (livehindustan.com)


07-Jul-2020 5:55 PM

मध्य्प्रदेश, 7 जुलाई । पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, दिल्ली और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्टस कम्पनी लिमिटेड के बीच हुए अनुबंध के बाद 99 गांवों के लगभग 55 हजार लोगों पर विस्थापन का खतरा बढ़ गया है। इनमें लगभग 50 गांव आदिवासियों के हैं, जहां लगभग 30 हजार आदिवासी रह रहे हैं। 

दरअसल, पिछले दिनों पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, दिल्ली और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्टस कम्पनी लिमिटेड, मध्यप्रदेश के बीच 22 हजार करोड़ का अनुबंध हुआ है। इसमें नर्मदा घाटी की कुल 12 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें चार जल विद्युत और 8 बहुद्देश्यीय (जल विद्युत और सिंचाई दोनों) योजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से राज्य को 225 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी।

अब तक राज्य सरकार 4 परियोजनाओं की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाई है। इन 4 परियोजनाओं की वजह से लगभग 55 हजार ग्रामीण प्रभावित होंगे, जबकि अभी आठ परियोजनाओं की डीपीआर तैयार नहीं हुई, जिसका असर बाद में दिखाई देगा।

ध्यान रहे कि मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी परियोजना 1980 के दशक से शुरू हुई थी, जिसके अंतर्गत 29 बड़े बांधों को बनाया जाना था। अब तक इनमें से आठ का निर्माण हो चुका है। और इनमें से लगभग 625 गांव के 96,500 परिवार विस्थापित हुए यानी लगभग 4,82,500 ग्रामीण अब तक विस्थापित हो चुके हैं।

यहां सबसे बड़ा सवाल है कि राज्य सरकार अब तक इन हजारों परिवारों का तो ठीक से पुनर्वास कर नहीं पाई है, ऐसे में नए 55 हजार और ग्रामीणों को विस्थापित कर कैसे उनका पुनर्वास होगा।
इस संबंध में बरगी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा कहते हैं कि 03 मार्च, 2016 के विधानसभा सत्र में विधायक जितेंद्र गहलोत द्वारा नर्मदा नदी पर 29 बड़े बांध की योजना सबंधी पूछे गए सवाल के जवाब में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखित जवाब दिया था कि राघवपुर, रोसरा, बसनिया, अपर बुढनेर आदि परियोजना नए भू-अर्जन अधिनियम से लागत में वृद्धि होने, डूब क्षेत्र में वनभूमि आने के कारण निरस्त की गई है।

वह कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने जब इन योजनाओं को निरस्त करने की बात बकायदा विधानसभा में कही है तो ऐसे में इन परियोजनाओ को नए सिरे से किस आधार पर अनुबंध किया गया है। सबसे बड़ी बात है कि राज्य सरकार इस प्रकार के अनुबंध लॉकडाउन के दौरान किया है। ताकि इसका विरोध न हो सके।

नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर कारपोरेशन द्वारा इन 12 परियोजनाओं में से एक बसानिया जल विद्युत परियोजना के अध्ययन में बताया गया है कि 2,256 हैक्टेयर सघन जंगल, 6,033 हैक्टेयर खेती की जमीन और 50 जल स्त्रोत खत्म हो जाएंगे। यह अध्ययन तो सीधे तौर पर विस्थापित होने वाले 50 आदिवासी गांवों का है।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि इसके अतिरिक्त इस परियोजना के पूरा होने के बाद उसके आसपास के लगभग सात किलोमीटर की परिधि में आने वाले 34 और गांवों के सघन जंगल 4,774, कृषि भूमि 3,860 हेक्टेयर और कुल 66 जल स्त्रोत अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।

नर्मदा घाटी में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 29 बड़े बांध प्रस्तावित हैं, इसमें बरगी, तवा, बारना, इंदिरा सागर(पुनासा), ओंकारेश्वर, महेश्वर, मटियारी, हालोन बांध का निर्माण हो चुका है। हालोन बांध से मंडला एवं बालाघाट जिले के अधिकतर विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।

बरगी बांध के उपर बुढनेर,राघवपुर, रोसरा और बसानिया बांध बनना बाकी है। भारत सरकार और मध्यप्रदेश के बीच हुए अनुबंध के अन्तर्गत डिंडोरी और मंडला जिले के राघवपुर, रोसरा एवं बसनिया बांध से 65 मेगावाट जल विद्युत परियोजना बनाया जाना प्रस्तावित है।

इन तीनों विद्युत परियोजनाओं से 8,367 हैक्टर क्षेत्र में बसे किसानों को विस्थापित किया जाएगा। इन तीन परियोजनाओं पर पूर्व में कुल लागत 1,283.12 करोड़ अनुमानित थी, लेकिन अब इसकी लागत दोगुना से ज्यादा आंकी जा रही है।(downtoearth)


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