राष्ट्रीय

Posted Date : 19-Jan-2019
  • क्रिकेट मड़ई, ग्रैंड न्यूज विजेता-आईबीसी 24 उपविजेता
    छत्तीसगढ़ संवाददाता

     रायपुर, 19 जनवरी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर प्रेस क्लब की ओर से आयोजित क्रिकेट मड़ई के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में क्रिकेट के साथ सभी खेलों को बढ़ावा देने संकल्पित है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि आखिरी बॉल पर तो कांग्रेस ही छक्का मारती है। इतना ही नहीं, कांग्रेस अपनी पिच पर अभी 5 साल छक्का लगाती रहेगी। 
    रायपुर प्रेस क्लब द्वारा यहां गॉस मेमोरियल मैदान में आयोजित क्रिकेट मड़ई का शनिवार को समापन हुआ। इस दौरान मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री बघेल ने वहां मैदान में उतरकर खिलाडिय़ों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने दूसरी बॉल में छक्का मारते हुए बॉल को बाउंड्रीवॉल के बाहर पहुंचा दिया। खेल के समापन पर उन्होंने विजेता ग्रेंड न्यूज व उप विजेता आईबीसी 24 की टीम को पुरस्कृत किया। प्रेस क्लब की ओर से यह प्रतियोगिता पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी रही। प्रतियोगिता में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े संस्थानों की टीमों ने भाग लिया। 

     

     

     

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • राजीव भवन में झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ का सम्मान समारोह  
    छत्तीसगढ़ संवाददाता

     रायपुर, 19 जनवरी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश में झुग्गी बस्तियों की समस्याओं का भी समाधान करेगी, ताकि वहां रहने वाले गरीबों को कोई दिक्कत न हो। 
    प्रदेश कांग्रेस झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ द्वारा शनिवार को यहां राजीव भवन में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री बघेल का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि रायपुर समेत प्रदेश में हजारों छोटी-छोटी बस्तियां है। खासकर झुग्गी बस्तियों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जहां रहने वाले गरीब बिजली, पानी, सड़क व अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी यह समस्या जल्द दूर होगी। 
    कार्यक्रम की शुरूआत में प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमजद खान व अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। उन्होंने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रदेश में झुग्गी बस्तियों की समस्याएं अभी भी दूर नहीं हो पाई है। वहां रहने वाले गरीब आम समस्याओं के अलावा राशन कार्ड, स्मार्टकार्ड, पेंशन आदि के लिए भटक रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस सरकार में उनकी यह सभी समस्याएं दूर होंगी। कार्यक्रम में प्रकोष्ठ से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे। 

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • एसपी ने ली स्कूल संचालकों की बैठक, और कई दिशा निर्देश
    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 19 जनवरी। एसपी नीथू कमल ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रेडक्रास भवन में जिले के निजी स्कूल संचालकों की एक बैठक ली। बैठक में बढ़ते अपराधों को देखते हुए स्कूली बच्चों को लाने ले जाने वाले ऑटो चालकों की पूरी जानकारी पुलिस में देने कहा गया है। उन्हें स्कूल परिसर में मोबाइल-फेसबुक व उसमें खेले जाने वाले गेम से दूर रखने पर जोर दिया गया। 
    शहर एवं आसपास के क्षेत्र में बच्चों के साथ भी कई छोटे-बड़े अपराध होते रहे हैं। खासकर आधुनिकता और मोबाइल के जमाने में उनके साथ और कई छोटे-छोटे अपराध होने लगे हैं। जिला पुलिस प्रशासन ने स्कूली बच्चों के बीच किसी भी तरह का अपराध न हो और वे निडर होकर स्कूल आ-जा सके, इसे लेकर निजी स्कूल संचालकों की एक बैठक बुलाई थी। बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उन्हें कई दिशा निर्देश दिए गए। खासकर अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए।
    एसपी नीथू कमल ने 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा में बताया कि निजी स्कूलों में पढऩे वाले सैकड़ों बच्चे ऑटो या बस से स्कूल जाते हैं, लेकिन उन्हें उसकी ज्यादा जानकारी नहीं रहती। कई बार कोई हादसा या अपराध होने पर ऐसे वाहनों के चालक मौके का फायदा उठाकर फरार हो जाते हैं। इसे रोकने उन्होंने स्कूल संचालकों से वाहन चालकों की पूरी जानकारी पुलिस में उपलब्ध कराने कहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने स्कूल आने-जाने वालों की जानकारी भी वहां रजिस्टर में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह से बनी रहे। 
    उन्होंने बताया कि जिला पुलिस प्रशासन की ओर से समय-समय पर स्कूलों में बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी दी जाएगी, ताकि उन्हें सड़कों पर चलने में कोई दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालकों को बच्चों की सुरक्षा से संबंधित और कई दिशा निर्देश दिए गए हैं और उनसे कहा गया है कि वे उनके बताए निर्देशों का पालन करें। किसी भी तरह की गड़बड़ी पर पुलिस प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नगरीय निकाय रायपुर नगर पालिक निगम को केंद्र आवासन एवं नगरीय कार्य मंत्रालय द्वारा खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। शुक्रवार को घोषित अपने परिणाम में नगर पालिक निगम को ओडीएफ.  के लिए पूर्ण अंक भी प्रदान किए गए हैं। 
    महापौर प्रमोद दुबे व निगम आयुक्त रजत बंसल ने रायपुर नगर निगम की इस उपलब्धि के लिए सभी नागरिकों व संस्थाओं को बधाई देते हुए सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है । रायपुर शहर को खुले में शौच मुक्त शहर के रूप में गत दिवस ही लगातार तीसरी बार पुन: सूचीबद्ध किया गया था। ज्ञात हो कि ओडीएफ के कड़े  मापदंडों को पूरा करने रायपुर नगर निगम ने जमीनी स्तर पर मजबूत तैयारी की थी। शहर में 182 सामुदायिक शौचालयों और निजी शौचालयों का निर्माण किया गया एवं इनमें से 46 सामुदायिक शौचालयों को पूर्ण सुविधा युक्त बनाया गया। 
    इन शौचालयों में हैंड ड्रायर, एयर फ्रेशनर, दिव्यांग व बच्चों के उपयोग के लिए सुविधा युक्त छोटे वॉश बेसिन, सोप डिस्पेंसर,सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन सहित रोशनी, हवा, पानी इत्यादि की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। इन शौचालयों में न केवल नियमित रूप से केयर टेकर तैनात किए गए बल्कि कोई भी व्यक्ति सरलता से शौचालयों की जानकारी प्राप्त कर सकें इसके लिए गूगल लोकेटर से इन सभी शौचालयों को टैग किया गया है। सभी शौचालयों में जल-मल के  निकास की पर्याप्त व्यवस्था भी नगर निगम की टीम ने किया है। नगर निगम की तैयारियों का जायजा लेने के लिए गत 28 एवं 29 दिसंबर 2018 को केंद्रीय टीम  भी शहर पहुंची और इन शौचालयों का भ्रमण कर उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर रैंकिंग निर्धारित की। 
    महापौर ने प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय निकाय के तौर पर प्रतिष्ठित रायपुर नगर निगम को ओडीएफ   के रूप में चिन्हित किए जाने पर सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों- कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि रायपुर  को स्वच्छ, सुंदर व सुविधा संपन्न नगर  के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे। नगर निगम आयुक्त रजत बंसल ने ओडीएफ  और लगातार तीसरी बार खुले में शौच मुक्त शहर के रूप में रायपुर को चिन्हित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की पूरी टीम शहर के नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर अपने आने वाले दिनों में भी सर्वश्रेष्ठ शहर के रूप में विश्व स्तरीय पहचान  दिलाने कड़ी मेहनत करेंगे।          

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • अंबिकापुर-पेंड्रारोड में पारा 6-7 पर, मरीज भी बढ़े

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 19 जनवरी। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से कड़ाके की ठंड लगातार जारी है और उत्तरी छत्तीसगढ़ में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर लोग ठंड से बचाव में लगे हैं, इसके बाद भी ठंड से प्रभावित सैकड़ों मरीज अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि तापमान में थोड़ा उतार-चढ़ाव महीने के अंत तक लगातार बना रहेगा। आने वाले दो-तीन दिनों में उत्तरी छत्तीसगढ़ में बदली-बारिश की स्थिति भी बन सकती है। 
    प्रदेश में कड़ाके की ठंड की एक बार फिर से वापसी हो गई है। रात के साथ दिन में भी ठंडक बनी हुई है और लोग गर्म कपड़ों का सहारा लेकर चलने लगे हैं। ठंड से  पीडि़त सैकड़ों मरीज सरकारी-निजी अस्पतालों तक पहुंचकर इलाज करा रहे हैं और वहां के मेडिसिन, हड्डी रोग विभाग में भीड़ बढ़ गई है। गांव-देहात और बस्तियों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय बाद हड्डी कपाने वाली ठंड पड़ रही है। उसकी चपेट में आकर लोग बीमार भी पड़ रहे हैं और कई लोगों की जान भी जा रही है। 
    मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार सुबह अंबिकापुर में सबसे कम 6.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। पेंड्रारोड-7.7, बिलासपुर-10.0, जगदलपुर-10.1 व रायपुर 13.3 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से तीन से चार डिग्री कम है। मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में उत्तर भारत से बर्फीली ठंडी हवा आ रही है, जिसके चलते प्रदेश के तापमान में गिरावट आने लगी है, लेकिन आने वाले एक-दो दिनों में तापमान में थोड़ी सी वृद्धि होगी। इसके बाद फिर से गिरने लगेगा और सर्दी और ज्यादा बढ़ जाएगी। 
    मौसम वैज्ञानिक पीएल देवांगन का कहना है कि हफ्ते में एक बार उत्तर में बर्फबारी हो जा रही है। अभी एक पश्चिमी विक्षोभ भी आ रहा है, जिसके प्रभाव से दो-तीन दिन में बदली-बारिश जैसी स्थिति बन सकती है। इस समय तापमान थोड़ा ज्यादा रहेगा, लेकिन उसके छंटते ही फिर से ठंड बढ़ जाएगी। तापमान में उतार-चढ़ाव का यह क्रम माह के अंत तक बना रहेगा और उत्तरी छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं शीतलहर जैसी स्थिति भी बन सकती है। 

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • रायपुर, 19 जनवरी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संवेदनशीलता से ग्रोथ हारमोंस डिफिशिएंसी की समस्या से जूझ रहे एक ढाई वर्ष के बालक को इलाज के लिए संजीवनी कोष से मदद मिलेगी। 

    राज्य अतिथि गृह पहुना में जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम धुरकोट (विकासखंड डबरा) से आए अजय कुमार टंडन ने  मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें बताया कि उनके 2 वर्ष 4 माह का बेटा रिमोन टंडन ग्रोथ हॉरमोन डिफिशिएंसी की समस्या से जूझ रहा है। डॉक्टरों ने बताया है कि रिमोन का इलाज 15 वर्ष तक की आयु तक होगा। उसके इलाज पर हर माह लगभग बीस हजार रूपए खर्च होंगे। उन्होंने अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री से मदद का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने अजय टंडन की समस्या को सहानुभूतिपूर्वक सुना और बच्चे के इलाज के लिए संजीवनी कोष से मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने उनके आवेदन को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने आम जनता से मुलाकात के दौरान गंभीर बीमारियों से पीडि़त 14 जरूरतमंद मरीजों को संजीवनी कोष से इलाज के लिए स्वीकृृति प्रदान की।

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 19 जनवरी। सरकार बदलते ही प्रदेश में नई खनन नीति की मांग जोर पकडऩे लगी है। बताया गया कि पिछली सरकार की नीतियों के चलते पंचायतों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था और प्रदेश में रेत माफिया हावी हो गए। कांग्रेस के विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर नई नीति बनाने की मांग करेंगे, क्योंकि पिछली सरकार की नीति से न तो पंचायतों को फायदा हुआ और न ही सरकार को। बल्कि भ्रष्टाचार को खूब बढ़ावा मिला। 
    प्रदेश में दर्जनों छोटे-बड़े नदी-नाले हैं और वहां से रेत खनन का काम लगातार जारी है। पीट पास के माध्यम से ठेकेदार वहां से रेत निकालने का काम करते हैं। रेत खनन को पंचायतों में आय का एक बड़ा जरिया माना जाता है। पिछली सरकार में यह काम तेजी के साथ चला, पर पंचायतों को फायदा नहीं मिला। पर्यावरण विभाग के नाम पर मिलने वाली राशि का भी वहां कोई रिकॉर्ड नहीं है। रेत माफिया, अफसरों के साथ मिलीभगत कर रेत खनन का काम करते रहे। इससे सरकार को भारी नुकसान पहुंचने के साथ पंचायतों के खाते में भी कोई राशि नहीं पहुंची। 
    लोगों का कहना है कि रेत खनन से पंचायतों को नुकसान के साथ ही भारी वाहनों से गांवों की सड़कें भी बदहाल हुई हैं। लोगों का वहां से आना-जाना मुश्किल हो गया है। कहीं-कहीं हादसों का डर भी बना हुआ है। इसकी शिकायत वे सभी शासन-प्रशासन में लगातार करते रहे, पर रेत माफिया पर लगाम नहीं लग पाया। भूपेश सरकार से उन्हें काफी उम्मीद है कि यह सरकार रेत माफियाओं पर लगाम कसने के साथ ही पंचायतों की आय बढ़ाने की दिशा में कुछ पहल करेगी। नदी-नालों से जुड़े पंचायतों के प्रतिनिधि जल्द ही पंचायत मंत्री व मुख्यमंत्री से मिलकर नई व्यवस्था की मांग करेंगे। 
    कांग्रेस विधायक, पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू का 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा करते हुए कहना है कि प्रदेश में जारी खनन नीति का लगातार विरोध हुआ है। वे खुद इस मुद्दे को समय-समय पर विधानसभा में उठाते रहे हैं। इतना ही नहीं, भष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलकर इस नीति में बदलाव की मांग भी करते रहे,  पर कोई बदलाव नहीं किया गया। लिहाजा रेत खनन के नाम पर प्रदेश में भ्रष्टाचार हावी रहा। रेत माफिया, अफसरों के साथ मिलकर पंचायतों और सरकार को चूना लगाते रहे। 
    उनका कहना है कि प्रदेश में नई खनन नीति जरूरी है और यह नीति बननी चाहिए। वे इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर चर्चा करेंगे और नई खनन नीति बनाने का आग्रह करेंगे, ताकि सरकार को और ज्यादा नुकसान न हो। उनका कहना है कि पंचायतों में आमदनी का यह एक बड़ा जरिया है, इसके बाद भी पिछली सरकार इस ओर नजरअंदाज कर बैठी रही। उनके विरोध का कोई असर नहीं हुआ। आज एक-एक कर पिछली सरकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्हें भरोसा है कि उनकी सरकार रेत माफिया के साथ अफसरों पर भी लगाम कसेगी। 

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • भूपेश का ट्वीट-जीत का श्रेय सेनापति को, तो हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर क्यों?

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 19 जनवरी। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से भाजपा में असंतोष फूट पड़ा है। राज्य पर्यटन बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष और भाजपा प्रवक्ता केदारनाथ गुप्ता ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि जनता ने उन्हें हराया जो लोकतंत्र के नकाब में तानाशाह थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी भाजपा में मचे घमासान पर ट्वीट किया कि जीत का श्रेय सेनापति को, तो हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर क्यों?  इससे परे प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के सदस्य डॉ. शिवनारायण द्विवेदी ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है। 
    प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़े जाने का चौतरफा विरोध हो रहा है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता केदारनाथ गुप्ता ने फेसबुक पर टिप्पणी की है और प्रदेश की सरकार-संगठन के बड़े नेताओं पर इशारों-इशारों में निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि जनता ने उन्हें हरा दिया, जो लोकतंत्र के नकाब में तानाशाह थे। अब कार्यकर्ताओं की बारी है। संगठन के तानाशाहों को लोकतांत्रिक बनाने की। उल्लेखनीय है कि गुप्ता पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के नजदीकी माने जाते हैं और कवर्धा विधानसभा सीट के प्रभारी भी बनाए गए थे। 
    मुख्यमंत्री ने भाजपा में चल रहे घमासान पर ट्वीट किया है कि जब जीत का श्रेय सेनापति को, तो हार का ठीकरा कार्यकर्ताओं पर क्यों? माफ कीजिएगा !ये आपका अब कोई आंतरिक मामला नहीं रहा। क्योंकि किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं के अपमान का मतलब है- लोकतंत्र पर सीधा प्रहार करना। और जब लोकतंत्र खतरे में हो, तो हम तटस्थ कैसे रह सकते हैं?
    प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा था कि कार्यकर्ताओं ने मेहनत नहीं की और इस वजह से हार का सामना करना पड़ा। श्री कौशिक की टिप्पणी का पार्टी के भीतर विरोध हो रहा है और कार्यकर्ता सोशल मीडिया में इसके खिलाफ कड़ी टिप्पणी कर रहे हैं। हालांकि श्री कौशिक ने इसको लेकर सफाई भी दी है, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश कार्य समिति के सदस्य डॉ. शिवनारायण द्विवेदी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे में हार का कोई समीक्षा नहीं करने और इसका ठीकरा कार्यकर्ताओं पर फोड़े जाने को प्रमुख कारण बताया है। 
    डॉ. द्विवेदी ने प्रदेश अध्यक्ष श्री कौशिक को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश भाजपा संगठन ने कुछ ही पदाधिकारियों को आमंत्रित कर हार की समीक्षा करने की औपचारिकता निभाई, जबकि वे खुद प्रदेश कार्यसमिति  के सदस्य है, लेकिन उनके साथ अन्य अनेक पदाधिकारियों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया। 
    बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष द्वारा यह बयान दिया गया कि चूंकि पार्टी कार्यकर्ताओं ने ठीक ढंग से काम नहीं किया। इसलिए पार्टी की करारी हार हुई है। पार्टी अध्यक्ष का यह बयान निश्चित रूप से कार्यकर्ताओं का मनोबल को गिराने वाला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा को प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाया जा रहा है। लोकसभा चुनाव में पराजित नेता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जबकि निष्ठावान लोगों को मुख्य धारा से अलग रखे जाना इसका परिचायक है। 
    डॉ. द्विवेदी ने झीरम कांड की एसआईटी जांच कराने का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई की इस जांच से षडय़ंत्रकारी बेनकाब होंगे और शहीद व घायल हुए लोगों के परिवार को न्याय मिल पाएगा। डॉ. द्विवेदी ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर इस कांड की जांच में कोई गंभीरता प्रदर्शित नहीं करने का आरोप लगाया है। 

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • इंदौर, 19 जनवरी । भैय्यू महाराज आत्महत्या मामले में पुलिस ने तीन लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। इनमें भैय्यूजी का भरोसेमंद सेवादार विनायक, ड्राइवर शरद और एक महिला शामिल है। तीनों के खिलाफ धारा 306,120 बी, और 384 के अंतर्गत के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार की गयी युवती, भैय्यूजी पर शादी के लिए दबाव बना रही थी।
    दोपहर में भैय्यू महाराज की पत्नी आयुषी ने डीआईजी दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने एक व्यक्ति की शिकायत की थी और इस प्रकरण से जुड़ी अहम जानकारी पुलिस को दी थी। तभी से 3 लोगों के खिलाफ कार्रवाई होने का अनुमान लगाया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को कुछ संदिग्ध ऑडियो क्लिप हाथ लगे हैं। एक युवती का बात करते हुए ऑडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें आयुषी के बारे में बात की जा रही है। उस क्लिप में कोई युवती आयुषी को हटाने की बात कह रही है। ऑडियो वायरल होने के बाद आयुषी शिकायत करने पहुंची थीं।
    डॉ आयुषी ने डीआईजी दफ्तर में जब बयान दिया उस वक्त पुलिस अधीक्षक और क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी मौजूद थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आयुषी के कुछ दिन पहले तिलक नगर थाने पर बयान हुए थे। उसके बाद आज वो कुछ अहम जानकारी देने डीआईजी दफ्तर पहुंची थीं। (न्यूज 18)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • कोच्चि, 19 जनवरी । सबरीमाला मंदिर में महिलाओं (रजस्वला उम्र की) की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया था, जिसके तहत हर उम्र वर्ग की महिलाओं को मंदिर में जाने की अनुमति दी गई थी। पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार ने मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने के तमाम जतन किए, जिसके चलते उसे विरोध का भी सामना करना पड़ा। अब केरल सरकार ने स्वीकार किया है कि अब तक सबरीमाला में 51 महिलाओं ने प्रवेश किया है। 
    केरल सरकार के मुताबिक, 16 नवंबर 2018 के बाद से अब तक सबरीमाला मंदिर में कुल 44 लाख दर्शनार्थियों ने दर्शन किए। राज्य सरकार का दावा है कि इन दर्शनार्थियों में 51 महिलाएं शामिल थीं। एक तरफ पिनराई विजयन की सरकार जहां मंदिर में महिलाओं की एंट्री के लिए प्रयास करती रही, वहीं तमाम दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा महिलाओं की एंट्री का विरोध भी किया गया। 
    दक्षिणपंथी संगठनों के इस विरोध प्रदर्शन के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा महिला दीवार बनाई गई। केरल के सीएम पिनराई विजयन के मुताबिक, यह महिला दीवार 620 किलोमीटर लंबी थी, जोकि महिलाओं के हक के लिए आयोजित की गई थी। (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • सतना, 19 जनवरी । बस में सवार एक महिला की खिडक़ी से गर्दन बाहर निकालते ही हादसा हो गया। उसने पास ही बैठी महिला से कुछ देर पहले ही सीट बदली थी। जैसे ही महिला ने उल्टी करने के लिए सिर बाहर निकाला, वैसे ही सिर कटकर बाहर गिर पड़ा। यह घटना शुक्रवार की है।
    सतना से छतरपुर जा रही बस में बैठी बुजुर्ग महिला की दर्दनाक तरीके से मौत हो गई। पन्ना के साइंस कॉलेज के सामने बिजली के खंभे से टकराने के कारण महिला का सिर कट गया।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छतरपुर से पन्ना होते हुए सतना जा रही यात्री बस में छतरपुर जिले के बक्सवाहा की रहने वाली 50 साल की आशारानी खरे सतना जा रही थी। वह खिडक़ी पर ही बैठी थी। पन्ना पहुंचकर बस ने जैसे ही टर्न लिया, वैसे ही आशारानी ने अपनी गर्दन खिडक़ी से बाहर निकाली। सडक़ किनारे बगल में लगे खंबे से गर्दन जा टकराई और चलती बस में एक झटके से सिर, धड़ से अलग होकर बस के बाहर गिर गया। (आज तक)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • मंदसौर, 19 जनवरी । मध्य प्रदेश में मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने मामले में मनीष बैरागी नाम के एक युवक को नामजद आरोपी बनाया है। मनीष बैरागी को बीजेपी कार्यकर्ता बताया जा रहा है। साथ ही आरोपी मनीष बैरागी मृत बीजेपी नेता का करीबी भी बताया जा रहा है। लेकिन बीजेपी ने आरोपी के बीजेपी कार्यकर्ता होने की खबर का खंडन किया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री बंशीलाल गुर्जर ने कहा है कि कोई दुपट्टा पहन ले, किसी के साथ तस्वीर खींचवाले, इससे वह भाजपा का कार्यकर्ता नहीं हो जाता। मनीष नाम का व्यक्ति कभी भी भाजपा में किसी पद पर नहीं रहा है।
    पुलिस का कहना है कि हत्या मनीष बैरागी नाम के व्यक्ति ने की है, जो प्रहलाद का बहुत करीबी रहा है। पुलिस ने हालांकि यह नहीं कहा कि मनीष बैरागी भाजपा का कार्यकर्ता है। मनीष बैरागी के कार्यालय के बाहर बीजेपी का झंडा लगा होना बताया जा रहा है। लेकिन बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया का कहना है कि मनीष बैरागी चुनाव प्रचार सामग्री का व्यापार करता था। उसने कांग्रेस और बीजेपी दोनों के झंडे लगा रखे थे।
    घटना को देखते हुए मंदसौर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। जगह-जगह पुलिस पार्टियां भेजी गई है और हत्यारे की तलाश कर रही है। गुरुवार देर रात उज्जैन रेंज के आईजी राकेश गुप्ता भी मंदसौर पहुंचे थे और पुलिस अधिकारियों से घटनाक्रम के बारे में बातचीत की। सीएसपी ने बताया कि मनीष बैरागी की तलाश पुलिस कर रही है और जगह-जगह पार्टी बनाकर भेजी जा रही है।
    बीजपी नेता प्रहलाद की अंतिम यात्रा में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी शामिल हुए। (न्यूज 18)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • पटना, 19 जनवरी । बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ थाना के बदुरा गांव में शुक्रवार को सुबह एक लडक़ी की कथित हत्या के बाद आक्रोशित लोगों ने थाने में खड़े वाहनों में आग लगा दी। इस आगजनी में थाना और वहां खड़े कई वाहन जल गए। कई पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बेहतर इलाज के लिए वाराणसी भेज दिया गया है। बदुरा गांव और आसपास के इलाके में तनाव है।
    कैमूर जिले के रामगढ़ में शुक्रवार को ग्रामीणों ने जमकर बवाल किया। सैकड़ों की संख्या में डंडे लेकर आए उपद्रवियों ने रामगढ़ थाने को चारों तरफ से घेर लिया और धावा बोल दिया। उन्होंने थाने में रखे सारे कागजात फाड़ दिए, गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ की और एक दर्जन से अधिक गाडिय़ों में आग लगा दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की।
    घटना की सूचना मिलते ही मोहनिया डीएसपी रघुनाथ सिंह और भभुआ डीएसपी अजय प्रसाद के नेतृत्व में आधा दर्जन से अधिक थानों की पुलिस, दंगा नियंत्रण वाहन, फायर ब्रिगेड की गाड़ी और पुलिस लाइन से एक बस भरकर पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में लेकर लोगों को समझाने का प्रयास किया।
    इस बवाल के पीछे एक घटना है जो दो दिन पहले हुई थी। रामगढ़ थाना क्षेत्र के बड़ौरा गांव की दलित नाबालिग लडक़ी सीएसपी संचालक के पास पैसा निकालने के लिए गई थी। नेट स्लो होने का बहाना करके संचालक ने पैसा नहीं दिया। उसके बाद बच्ची को अगवा करके उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में रामगढ़ थाने ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इसके बाद शुक्रवार को ग्रामीणों ने सुबह से ही थाने की घेराबंदी कर आगजनी शुरू कर दी। उपद्रवी तत्वों द्वारा किए गए पथराव में मोहनिया डीएसपी रघुनाथ सिंह, मोहनिया सर्किल इंस्पेक्टर विंध्याचल और सैफ के जवान को गंभीर चोटें आईं। लोगों ने इन चारों को डंडों से भी जमकर पीटा।
    लडक़ी के परिजनों का कहना था कि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी। जब तक हम लोगों की मांगों को नहीं माना जाएगा तब तक आक्रोश जारी रहेगा। उनकी मांग है कि 48 घंटे के अंदर आरोपी की गिरफ्तारी हो, पीडि़त परिवार के एक परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए और पच्चीस लाख रुपये मुआवजा मिले।
    पुलिस ने आधा दर्जन उपद्रवी तत्वों को चिन्हित कर हिरासत में ले लिया। मोहनिया डीएसपी की पहल पर हालात सुधर गए थे और शांति हो गई थी लेकिन शरारती तत्व बाद में उपद्रवी तत्वों को छोडऩे की मांग करने लगे। मोहनिया डीएसपी ने उनसे कहा कि जांच कराई जाएगी। जो दोषी होंगे उन पर कार्रवाई होगी और जो दोषी नहीं होंगे उनको रिहा किया जाएगा। इस बात पर शरारती तत्व भडक़ उठे और उन्होंने पुलिस पर हमला बोल दिया।
    इसके बाद सारे पुलिस बैकफुट पर हो गई और उपद्रवियों ने जमकर उत्पात किया। मोहनिया बक्सर रोड के रामगढ़ चौक के पास जमकर आगजनी की गई। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । एनजीओ इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (आईसीसीडब्लू) की तरफ से वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए 20 बच्चे इस बार गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा नहीं बन पाने से मायूस हैं। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि एनजीओ पर कुछ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं और दिल्ली हाईकोर्ट में इसकी जांच चल रही है। मंत्रालय की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार ने अपने नए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार अवॉर्ड शुरू किए गए हैं, जिसके लिए पहले से ही 26 बच्चे चुने जा चुके हैं। 
    इस बार भारत पुरस्कार के लिए दो बच्चों का चुनाव किया गया है, जिसमें एक 8 साल की गुरुगा हिमा प्रिया और 14 साल के सौम्यदीप जाना हैं। दोनों जम्मू के रहने वाले हैं। दोनों को यह पुरस्कार पिछले साल हथियारबंद आतंकवादियों के साथ बहादुरी से सामना करने के लिए दिया जाएगा। जानिए इनकी कहानी- 
    गुरुगा हिमा प्रिया, भारत अवॉर्ड, उम्र- 8 साल 
    10 फरवरी 2018 को हथियारबंद आतंकियों ने जम्मू के सुंजवन सैन्य कैंप में हमला बोला था। इसमें 20 भारतीयों की मौत हुई थी जबकि 20 घायल हुए थे। प्रिया उस वक्त अपनी मां के साथ घर पर सो रही थी। हमला होने के बाद दोनों ने खुद को घर के अंदर बंद कर लिया। आतंकियों ने उनके आंगन में एक ग्रेनेड फेंका जिसमें प्रिया घायल हो गई लेकिन उसने आतंकियों को लंबे समय तक बातचीत में मशगूल रखा और आतंकियों से खुद को अपनी मां और दो छोटी बहनों को बचाने में सफल रही। उस वक्त प्रिया के पिता घर पर नहीं थे जो पेशे से हवलदार हैं। 
    वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए बच्चे
    सौम्यदीप जाना, भारत अवॉर्ड, उम्र -13 साल 
    सुंजवन आर्मी स्टेशन में आतंकी हमले के दौरान सौम्यदीप ने अपनी मां और बहन को एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से ताला लगा दिया। आतंकियों ने घर का मुख्य दरवाजा तोडऩे की कोशिश की लेकिन सौम्यदीप ने स्टील के बक्से से बैरिकेडिंग कर दी। बौखलाए आतंकियों ने एक ग्रेनेड फेंककर एके 56 राइफल से फायरिंग कर दी। इस वजह से सौम्यदीप घायल हो गया और तीन महीने तक कोमा में रहा। उनका बायां हिस्सा पैरालाइज्ड है। घटना के चलते उनके देखने और सुनने की शक्ति भी क्षीण हो गई। लेकिन चेहरे पर मुस्कान लिए वह कहते हैं, मुझे मेरे परिवार के लिए यह करना था। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता था। 
    नितिषा नेगी, गीता चोपड़ा अवॉर्ड (मरणोपरांत), उम्र-15 साल 
    अंडर 17 फुटबॉल टीम की सदस्य के रूप में नितिषा पसिफिक स्कूल गेम्स के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थीं। जहां 10 दिसंबर 2017 को एक बीच में टूर्नामेंट के बाद सागर की बड़ी लहर कुछ लोगों को बहा ले गई। नितिषा ने अपनी दोस्त को पानी में फंसा हुआ देखा। यह देखकर वह पानी में कूद गई और अपनी दोस्त को बचाने में सफल रही लेकिन वह खुद पानी में बह गई और उसकी मौत हो गई। 
    गोहिल जयराज सिंह, संजय चोपड़ा अवॉर्ड, उम्र- 6 साल 
    गुजरात के 6 साल गोहिल जयराज अपने दोस्त को मौत के मुंह से खींच लाने में कामयाब रहे। उस वक्त अपने दोस्त के साथ खेल रहे थे जब एक तेंदुए ने उसके दोस्त पर हमला कर दिया। अपने दोस्त को खतरे में देखकर गोहिल ने पत्थर उठाया और तेंदुए पर फेंक दिया लेकिन तेंदुए ने पकड़ नहीं छोड़ी। इसके बाद गोहिल ने अपनी खिलौना कार तेदुंए की तरफ फेंकी जिसकी आवाज सुनकर तेंदुए भाग गया। 
    मुस्कान और सीमा, बाबू गैधानी अवॉर्ड, उम्र- 17 और 14 साल 
    हिमाचल प्रदेश की दो दोस्त मुस्कान और सीमा को स्कूल जाने के रास्ते कुछ युवक रोज छेडख़ानी करते थे। उन पर भद्दे कमेंट भी पास करते थे। जब ये आए दिन की घटना हो गई तो उनको सबक सिखाने के लिए दोनों ने कराटे क्लास जॉइन की। इसके बाद दोनों ने उसी जगह जाकर उन युवकों की जमकर पिटाई की। वे उन शोहदों को पुलिस स्टेशन लेकर गईं और एफआईआर दर्ज करवाई। 
    कैमिलिया कैथी, बापू गैधानी अवॉर्ड, उम्र- 12 साल 
    मेघालय की बहादुर बच्ची कैमिलिया ने बहादुरी दिखाते हुए मानसिक रूप से अस्वस्थ बड़े भाई की जान बचाई थी। छह जुलाई 2017 को जब वह अपने आई तो देखा कि घर में आग लगी हुई है। कैमिलिया ने बताया कि उनकी चाची चीखते हुए घर से बाहर आई। इससे पहले हम कुछ समझ पाते मेरा भाई अंदर चला गया। मैंने उसे बाहर बुलाया लेकिन वहां कई लोग चीख रहे थे इसलिए वह सुन नहीं पाया। मैं उसके पीछे अंगर भागी और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आग के चलते कैमिलिया का पूरा घर ध्वस्त हो गया। कैमिलिया को अफसोस है कि वह गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा नहीं बन सकेगी। 
    अनिका जैमिनी, बापू गैधानी अवॉर्ड, उम्र- 8 साल 
    राजस्थान की अनिका ने छोटी सी उम्र में ही जान की बाजी खेलकर किडनैपर्स से खुद को बचा लिया। अनिका उस वक्त अपने घर के पास में थी जबकि कुछ किडनैपर्स ने उस पर चाकू से हमला कर दिया लेकिन फिर भी अनिका खुद को बचाने में कामयाब रही।  (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • बिहार शरीफ, 19 जनवरी । बिहार में नालंदा जिले के सुदूरवर्ती इस्लामपुर थाना अंतर्गत बरडीह गांव में बुधवार की रात चोरी के आरोप में तीन लोगों की ग्रामीणों ने बुरी तरह पिटाई कर दी जिससे उनमें से दो लोगों की मौत हो गई जबकि एक अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है।
    पुलिस ने बताया कि मृतकों में इस्लामपुर थाना अंतर्गत माली टोला गांव निवासी अजय कुमार (32) और लोहारटोली निवासी मोहम्मद सद्दाम (28) हैं। उन्होंने बताया कि अजय की वारदात स्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि सद्दाम की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई।
    अहमद ने बताया कि अजय का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और उस पर 7 अन्य आपराधिक मामले पूर्व से ही दर्ज हैं जबकि सद्दाम पटना के बख्तियारपुर में एक आपराधिक मामले में पूर्व में जेल जा चुका है।
    उन्होंने बताया कि बुरी तरह पिटाई से गंभीर रूप से घायल बुढा नगर निवासी संतु कुमार का इलाज पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जारी है। आरोप है कि इस्लामपुर थाना अंतर्गत बरडीह गांव निवासी मृत्युंजय कुमार और मिथिलेश प्रसाद के घरों का ताला तोडक़र ये तीनों चोरी की नियत से बुधवार रात घरों में घुस गये थे। आहट मिलने पर आसपास के ग्रामीण जाग गए और तीनों को पकडक़र उनकी लाठी एव डंडे से पीटकर तथा ईंट एवं पत्थरों से हमला कर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।  (भाषा)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • चंद्रग्रहण अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है। इस दौरान राहु-केतु के नॉडल पाइंट्स की सीधी रेखा में सूर्य-पृथ्वी-चंद्रमा आते हैं। 21 जनवरी को साल 2019 का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। इस बार चंद्रमा की स्वयं की राशि कर्क में यह ग्रहण बन रहा है। कर्क जलीय राशि है। अत: जल तत्व में हलचल अवश्यंभावी है। नदी झील समुद्र सरोवर के अतिरिक्त जीवों में मौजूद तीन-चौथाई जल की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है।

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • बेंगलुरु, 19 जनवरी । कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विधानसभा चुनाव के सात महीने बाद भी हार नहीं मानी है। भले ही वह राज्य में सरकार ना बना पाए हों लेकिन उन्होंने कोशिश करना नहीं छोड़ा है। उन्हें पूरा विश्वास है कि वह सत्ता में जरूर आएंगे और इस विश्वास के पीछे हैं उनके ज्योतिषी। येदियुरप्पा के ज्योतिषी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि अभी उनके सीएम बनने की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। इसलिए, राज्य बीजेपी अध्यक्ष डटे हुए हैं। साथ ही, एक सीनियर कांग्रेस नेता ने भी येदियुरप्पा में ऑपरेशन लोटस जारी रखने का भरोसा जताया है।  
    कई नेताओं की तरह येदियुरप्पा भी ज्योतिष में विश्वास करते हैं। सूत्रों की मानें तो केरल के एक ज्योतिषी ने उन्हें बताया है कि 15 जनवरी के बाद उनके सितारे उनके पक्ष में होने वाले हैं और उन्हें सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता है। वहीं, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के टॉप नेताओं के साथ भी येदियुरप्पा की बातचीत जारी है।
    सूत्रों के मुताबिक पूर्व सीएम को किसी सीनियर कांग्रेस नेता का भी समर्थन मिला हुआ है जो नहीं चाहते कि गठबंधन सरकार सुचारू रूप से चल सके। शायद यही वजह है कि अपने खेमे में आए कुछ कांग्रेस विधायकों के वापस चले जाने से भी येदियुरप्पा को ऑपरेशन लोटस के सफल होने का पूरा भरोसा है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक यह वरिष्ठ नेता काफी समय से इसमें जुटे हैं। वह कई महीनों से परेशानियां पैदा भी कर रहे हैं और उन्हें सुलझा भी रहे हैं। वह अपने समर्थकों को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। 
    गुरुग्राम के एक लग्जरी होटेल में 14 जनवरी से रुके एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने बताया कि किसी को नहीं पता, क्या हो रहा है। हालांकि, उनका कहना है, मुझे ऐसा लग रहा है कि शनिवार (19 जनवरी) को कुछ होने वाला है। उन्होंने पूर्व उप मुख्यमंत्री केएस ईश्वरप्पा के इसमें शामिल ना होने की बात भी कही। कहा जा रहा है कि बीजेपी नेता 19-19-19 की बात कर रहे हैं, यानी 19 जनवरी 20-19 को दूसरी पार्टियों के 19 विधायकों को अपने पाले में किया जाएगा। होटेल में रुके एक दूसरे नेता का कहना है कि येदियुरप्पा बेंगलुरु से कोई इशारा होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें यह नहीं पता कि यह इशारा कौन देगा। 
    सभी का ध्यान अब सिद्धारमैया की अध्यक्षता में शुक्रवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की विशेष बैठक पर हैं। कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को चेतावनी दी है कि जो लोग बैठक में नहीं आए उनके खिलाफ ऐंटी-डिफेक्शन कानून लगाया जाएगा। बेंगलुरु में इसके लिए विधायक भवन के कमरों पर नोटिस भी लगा दिए गए हैं। कांग्रेस स्पीकर से शिकायत कर उन्हें डिस्क्वॉलिफाइ करने की मांग करने से पहले ही ऐसे विधायकों को नोटिस देने की तैयारी में है जो बैठक में शामिल नहीं होंगे। इस तरह से ये विधायक बीजेपी में शामिल नहीं हो सकेंगे और स्पीकर के पास उन्हें डिस्क्वॉलिफाइ करने का विकल्प रहेगा। 
    सिद्धारमैया अपने सपॉर्टर रमेश जारकीहोली से भी पार्टी के साथ आने के लिए बातचीत कर रहे हैं। एक ओर जहां कांग्रेस को भरोसा है कि शुक्रवार की बैठक में सभी विधायक पहुंचेंगे, येदियुरप्पा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, देखते हैं कितने (विधायक) शुक्रवार को होने वाली बैठक में शामिल होते हैं।
    यह भी कहा जा रहा है कि मुख्य मंत्री कुमारस्वामी इस बैठक से खुश नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक वह मुंबई गए विधायकों को वापस लाने की कोशिश कर रहे थे और बैठक से उनके प्लान पर असर पड़ा है। इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस विधायक बी नागेंद्र, रमेश जारकीहोली, महेश कुमटल्ली और आर शंकर अवैध खनन मामले में कोर्ट के सामने पेश होने मुंबई से बेंगलुरु वापस आए। इस दौरान नागेंद्र ने कहा कै वह पार्टी में हैं और उसी में रहेंगे। (बेंगलुरु मिरर)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • इंदौर, 19 जनवरी । भय्यूजी महाराज खुदकुशी मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके खास सेवादार विनायक दुधाले, शरद देशमुख और ब्लैकमेल करने की आरोपी युवती पलक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
    तीनों आरोपियों पर भय्यूजी महाराज के आर्थिक और मानसिक शोषण का आरोप है। पुलिस ने धारा 306 आत्महत्या के लिए प्रेरित करने, 120 बी और 384 अवैध वसूली के तहत मामला दर्ज किया है। इंदौर के तेजाजी नगर थाने में मामला दर्ज हुआ है। आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
    गत वर्ष 12 जून को भय्यूजी महाराज ने संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में कई तरह के आरोप लगाए जाते रहे। महाराज की हत्या की आशंका जताते हुए गुरु भक्तों ने सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में इसे खुदकुशी माना और शुक्रवार को उक्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खतरनाक परिणाम होंगे

    नहीं, निश्चित रूप से मैंने कभी नहीं सोचा था, मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मेरे जीवन में मुझपर देशद्रोह का आरोप लगेगा, द सिटिजन को दिये एक साक्षात्कार में हिरेन गोहेन ने बताया।
    अपने 80 साल के जीवन में शिद्दत से बौद्धिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले प्रोफेसर गोहेन के खिलाफ कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई एवं पत्रकार कार्यकर्ता मंजीत महंत के साथ असम सरकार ने विविदास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में आयोजित एक सभा में मौजूद रहने के लिए देशद्रोह का मुकदमा लाद दिया। फिलहाल गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने इन तीनों को जमानत दे दी है।
    प्रोफेसर गोहेन ने कहा कि वे तो दरअसल उस सभा में जबरदस्त रूप से नाराज युवाओं को शांत करने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपने भाषण में, मैंने इस विधेयक पर सरकार से नाराज युवाओं पर लगाम कसने की कोशिश की।
    अपने साहित्यिक कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कैंब्रिज के इस विद्वान ने कहा कि नागरिकता विधेयक एक राष्ट्र के तौर पर भारत के लिए एक खतरा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का लक्ष्य राज्य एवं नागरिकता के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को ध्वस्त करना है। वे सभी विविधताओं को नष्ट करते हुए और सबों पर एक बेहद ही अश्लील और साधारण विचारों वाली संस्कृति को थोपते हुए, इसे एक हिन्दू समरूपता की ओर वापस मोडऩा चाहते हैं। यह बुनियादी रूप से आत्माविहीन संस्कृति है। हम दरअसल भारत के उस विचार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसे हम सभी चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी भारतवासी को इसे समझना चाहिए और हमारे साथ खड़ा होना चाहिए।
    प्रोफेसर गोहेन ने कहा कि दबाव में खुद न्यायिक व्यवस्था थोड़ा लडख़ड़ा रही है और यह चिंता का विषय है। उन्होंने चेताया कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक एक ऐसी आग लगा रही है, जो समूचे असम को जला देगी। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम के बेहद ही खतरनाक परिणाम होंगे।
    इस विद्वान ने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि उन्हें इसका अहसास है या नहीं और उन्होंने यह सब जानबूझ कर किया है या नहीं, लेकिन इसका परिणाम ऐसा होने वाला है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा।
    आजादी के बाद से लेकर अब तक सभी सरकारों द्वारा देशद्रोह के इस अधिनियम को समाप्त करने की अनिच्छा के बारे में पूछे जाने पर प्रोफेसर गोहेन ने इससे सहमति जतायी। उन्होंने कहा कि बेशक यह सच है। यह बेहद शर्मनाक है कि ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के लिए लडऩे वाले लोगों ने देशद्रोह के कानून को जारी रखा और अपेक्षाकृत अधिक लोकतांत्रिक रोशनी में इसके प्रावधानों के बारे में हस्तक्षेप और व्याख्या करने का जिम्मा सर्वोच्च न्यायालय पर छोड़ दिया गया।
    उन्होंने आगे जोड़ा कि अगर कांग्रेस और विपक्ष पार्टियां सत्ता में आती हैं और अपने होश नहीं खोती हैं, तो उनका पहला कार्य देशद्रोह कानून को खत्म करना होना चाहिए। इस बीच, पूरे असम में नागरिकता विधेयक के खिलाफ विरोध जोर पकड़ता जा रहा है। संगीतकार और कलाकार भी अब इसके विरोध में सड़कों पर उतर पड़े हैं। पड़ोसी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यक के तौर पर रहने वाले हिन्दुओं को भारत की नागरिकता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा लाये गये इस संशोधन विधेयक की वजह से असम गण परिषद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ लिया। अब वह राज्य की सरकार में हिस्सेदार नहीं रही और इस विधेयक के खिलाफ बढ़ते आक्रोश के साथ खड़ी है। हिरेन गोहेन एवं अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे ने इस नाराजगी और हवा दी है।
    कोलकाता के प्रेसीडेंसी कालेज से स्नातक रहे प्रोफेसर गोहेन ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से स्वर्ग का अंत और सत्रहवीं शताब्दी का संकट (पैराडाइज लॉस्ट एंड सेवेंटीन्थ सेंचुरी क्राइसिस) विषय पर शोध किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहा गया। कैंब्रिज से लौटकर उन्होंने एक प्रोफेसर के तौर पर गुवाहाटी विश्वविद्यालय में अपना योगदान दिया और वे असम के एक सम्मानित व चेहते हस्ती हैं। उन्होंने असमिया साहित्य के अध्ययन के लिए आलोचना के नये एंग्लो-अमरीकन विचारों और तरीकों का समावेश किया और कई किताबें लिखी हैं, जिनमें चार खंडों के संस्मरण शामिल हैं। (द सिटिजन)

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी। राजद्रोह के आरोप में आखिरी बार किस अपराधी को कसूरवार ठहराया गया था?

    इस सवाल के जवाब पर आने से पहले जेएनयू राजद्रोह कांड में दायर किए गए दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर गौर करते हैं। दिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य पर राजद्रोह करने का आरोप लगाया है।
    चार्जशीट में और भी अभियुक्तों के नाम हैं और आरोपों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है। जैसे- जानबूझकर क्षति पहुंचाना, धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी, अवैध तौर पर जनसभा करना, बलवा और आपराधिक साजिश को अंजाम देना।
    आरोपों को लेकर उमर खालिद ने कहा है कि हमने अभी तक चार्जशीट नहीं देखी है और जो भी कुछ मीडिया में चल रहा है, वो सच है तो हम इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन करते हैं। और हम कानूनी ढंग से इन्हें चुनौती देंगे। चार्जशीट में इनके अलावा 36 नामों की एक और लिस्ट है जिनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
    कन्हैया कुमार के खिलाफ दिल्ली पुलिस कुछ सबूत जुटाने का दावा कर रही है। इन्हीं सबूतों की बुनियाद पर ये चार्जशीट दायर की गई है। पुलिस जिन सबूतों का दावा कर रही है, उसके मुताबिक- प्रत्यक्षदर्शियों ने कन्हैया कुमार को जेएनयू में आयोजित एक अवैध सभा में देशविरोधी नारे लगाते हुए देखा।
    एक निजी समाचार चैनल से मिले 30 मिनट की फुटेज से इसकी तस्दीक होती है कि कन्हैया वहां मौजूद थे। वो सभा गैरकानूनी थी क्योंकि जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी से इसकी आधिकारिक इजाजत नहीं ली गई थी।
    मुख्य आयोजक उमर खालिद और अनिर्बान ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के बहाने इसकी इजाजत ली थी जो बाद में राष्ट्रविरोधी गतिविधि में बदल गई। ये सोची समझी सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। सभा में देशविरोधी नारे लगाए जा रहे थे जिससे सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए अन्य छात्रों को भी उकसाया गया।
    जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी और अन्य सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि सभा में 15 से 20 छात्र मौजूद थे जो राष्ट्रविरोधी नारे लगा रहे थे और कन्हैया कुमार इस सभा की अगुवाई कर रहे नेताओं में से एक थे।
    पुलिस के इन आरोपों का पता बीबीसी को चार्जशीट के कुछ पन्नों से हुआ है, करीब 1200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है।
    चार्जशीट में क्या है?
    दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की अपील की है। हालांकि आरोप पत्र में कुल 36 लोगों के नाम हैं, लेकिन बाकी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही गई है। कोर्ट चाहे तो उन्हें समन भेज सकता है। आरोप पत्र के साथ कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फुटेज और अन्य दस्तावेजों को बतौर सबूत पेश किया गया है।
    दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता और जेएनयू छात्रसंघ नेता शहला राशिद का नाम भी शामिल किया गया है। इसके अलावा जेएनयू प्रशासन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों, सुरक्षाकर्मियों समेत कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई है।
    सवाल जिनके जवाब नहीं...
    बीबीसी से बातचीत में कन्हैया कुमार ने चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार इलेक्शन मोड में है। नेशनल से लेकर एंटीनेशनल जैसी हर चीज आजमाई जा रही है। नौ फरवरी, 2016 की इस घटना के तीन साल बाद दायर की गई इस चार्जशीट की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के एक दूसरे के लगातार संपर्क में थे और उनके मोबाइल फोन का लोकेशन जेएनयू था। उमर खालिद ने मैसेज पर कन्हैया कुमार को जेएनयू के साबरमती ढाबे पर आने के लिए कहा। इन बातों से राजद्रोह के आरोप कैसे मजबूत हो जाते हैं?
    नामजद गवाहों के बयानों और वीडियो फुटेज के हवाले से ये जरूर कहा गया है कि कन्हैया कुमार उस सभा में मौजूद थे लेकिन वे किस तरह से सभा की अगुवाई कर रहे थे या फिर वे किस तरह के राष्ट्रविरोधी बयान या नारे लगा रहे थे, इस पर रोशनी नहीं डाली गई है। कन्हैया इस सभा के आयोजक नहीं थे। ये बात खुद पुलिस ने मानी है लेकिन घटना में उनकी किस तरह की भूमिका थी, इस बारे में तस्वीर ज्यादा साफ नहीं है।
    साजिश की कहानी
    दिल्ली के वसंतकुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर नंबर 110/2016 के मामले में दायर चार्जशीट में जेएनयू के सुरक्षाकर्मियों के अलावा एबीवीपी के छात्र नेताओं की गवाहियां दर्ज हैं। सबूतों के नाम पर इनके अलावा ईमेल, एसएमएस और वीडियो फुटेज का हवाला भी दिया गया है।
    चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है कि जेएनयू की उस शाम अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम से पहले उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य भारत के कब्जे से कश्मीर की आजादी पर ईमेल के जरिए बात कर रहे थे। वे कानून के द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा फैलाने की कोशिश कर रहे थे। भारत तेरे टुकड़े होंगे...और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी, जंग रहेगी जैसे नारे लगने से उनके इरादों का साफ पता चलता है।
    पुलिस के ये दावे वीडियो फुटेज के हवाले से किए गए हैं लेकिन कन्हैया कुमार क्या नारे लगा रहे थे, इस बारे में अभी तक किसी ठोस वीडियो सबूत की बात अभी तक सामने नहीं आई है। खुद कन्हैया कुमार ने कहा कि सबूत की सच्चाई ये है कि जिस वीडियो के सही होने की बात कही जा रही है, उसी वीडियो को जेएनयू की हाई लेवल कमेटी ने भी सही होने का दावा किया था। लेकिन जेएनयू की हाई लेवल कमेटी ने एक भी ऐसा वीडियो पेश नहीं किया जिसमें जेएनयू का कोई विद्यार्थी देश के खिलाफ कोई नारा लगा रहा हो।
    अब वापस लौटते हैं उसी शुरुआती सवाल पर कि राजद्रोह के आरोप में आखिरी बार किस अपराधी को कसूरवार ठहराया गया था?
    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से 2016 के बीच राजद्रोह के आरोप में 179 लोग गिरफ्तार किए गए लेकिन सजा केवल दो लोगों को हुई। कन्हैया कुमार के केस की चार्जशीट में पुलिस ने जिन सबूतों की बुनियाद पर मुकदमे की नींव रखी है, उसके बारे में आखिरी फैसला अदालतें ही करेंगी। और इस मुकदमे को अभी अदालत की कई तारीखों से गुजरना है।  (बीबीसी)

     

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