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13-May-2021 10:45 PM (27)

   कल से शुरू होगी कार्रवाई   

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर 13 मई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेलों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एक बार फिर कैदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर छोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ में इस पर कार्रवाई कल शुक्रवार से शुरू हो जाएगी। इस बार रिहाई के दायरे में धारा 307 के आरोपियों को भी लिया गया है। अनुमान है कि प्रदेश के विभिन्न जेलों में बंद करीब 7 हजार कैदियों को इसका लाभ मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिन पहले अपने एक फैसले में ऐसे विचाराधीन कैदी जिनकी अधिकतम सजा 7 साल संभावित है उन्हें 90 दिन तक की अंतरिम जमानत देने के लिए कहा है। इसके अलावा कुछ श्रेणी के कैदी जो इनसे अधिक लंबी सजा के चलते जेल में बंद हैं उन्हें राज्य सरकार पैरोल पर रिहा कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों से यह भी कहा है कि जिन मामलों में किसी आरोपी को सात साल से कम सजा होनी है उनको जेल भेजने के बजाय जमानत देने पर विचार किया जाये।

राज्य विधिक सहायता प्राधिकरण द्वारा सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश के परिपालन में सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विधिक सहायता समितियों को पत्र जारी किया है। 12 मई को जारी किए गए पत्र में कैदियों की रिहाई के लिए बनाई गई हाई पावर कमिटी के गाइडलाइन का ब्यौरा देते हुए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा गया है।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत मिश्रा के निर्देश पर अवर सचिव द्वारा जारी इस पत्र में बताया गया है कि ऐसे कैदी जो कम से कम 15 दिन से जेल में बंद हैं और ट्रायल पर हैं और उनकी सजा 7 साल से कम है उसे रिहा किया जा सकता है। ऐसे वृद्ध जिनकी उम्र 60 से अधिक है और विचाराधीन मामलों में 3 माह से ज्यादा जेल में है और अभी अधिकतम सजा 10 साल की है उनको भी अंतरिम जमानत दी जा सकती है। इसी तरह से धारा 307 आईपीसी के अंतर्गत 6 माह से अधिक समय तक निरुद्ध विचाराधीन कैदियों को भी जिसमें पांच 7 साल से सजा कम हो उनको भी रिहा किया जा सकता है। ऐसे कैदी जिन पर 304 बी के तहत मामला दर्ज है और 6 माह से अधिक समय से जेल में हैं, यदि उनके विरुद्ध और कोई गंभीर अपराध दर्ज नहीं है तो उन्हें भी रिहा किया जा सकता है।

यह स्पष्ट किया गया है कि एसिड अटैक, रेप, भ्रष्टाचार के आरोपियों, देश विरोधी गतिविधियों, दंगे आतंक और भ्रष्टाचार के मामले में लिप्तता के मामलों में यह लाभ नहीं दिया जाएगा। पैरोल पर रिहाई के लिए सरकार की गाइडलाइन है। उस पर सरकार को कार्रवाई करनी है। पैरोल का लाभ एक साल की सजा पूरी होने के बाद किसी कैदी को दी जाती है। पिछले साल मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए आरोपियों को जमानत देने की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुरू की थी, जिसे बाद में निचली अदालतों ने भी लागू किया। एक अनुमान के अनुसार इस साल भी बड़ी संख्या में कैदियों को लाभ मिलेगा और इनकी संख्या 7 हजार से अधिक हो सकती है। 


13-May-2021 10:35 PM (166)

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 13 मई। राज्य में आज रात 09.00 बजे तक 9121 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें सबसे अधिक 721 रायगढ़ जिले से हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के इन आंकड़ों के मुताबिक आज रात तक 25 जिलों में सौ-सौ से अधिक कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। 

आज कुल 195 मौतें हुई हैं। इनमें सिर्फ कोरोना-मौतें 92 हैं। आज प्रदेश में कुल 67 हजार टेस्ट हुए हैं और कुल दस हजार मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हुए हैं।

राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दुर्ग 278, राजनांदगांव 252, बालोद 250, बेमेतरा 144, कबीरधाम 220, रायपुर 655, धमतरी 196, बलौदाबाजार 622, महासमुंद 296, गरियाबंद 251, बिलासपुर 433, रायगढ़ 721, कोरबा 462, जांजगीर-चांपा 583, मुंगेली 445, जीपीएम 230, सरगुजा 472, कोरिया 383, सूरजपुर 535, बलरामपुर 426, जशपुर 394, बस्तर 267, कोंडागांव 100, दंतेवाड़ा 69, सुकमा 59, कांकेर 295, नारायणपुर 31, बीजापुर 498, अन्य राज्य 3 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।


13-May-2021 9:53 PM (81)

-जितेंद्र शर्मा

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गैस पीड़ित अस्पताल में कोरोना पीड़ित महिला से वार्ड ब्वॉय के दुष्कर्म की एक महीने पुरानी घटना पर पुलिस ने धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी वार्ड ब्वॉय संतोष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. लेकिन दुष्कर्म की घटना की जानकारी मौत होने के बाद भी पुलिस ने महिला के परिजनों को नहीं दी. इस घटना के बाद ही महिला की ज्यादा तबीयत बिगड़ी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर ले जाया गया, जहां पर दूसरे दिन उसकी मौत हो गई. इसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गई है.

महिला से दुष्कर्म के पहले संतोष ने की थी छेड़छाड़

इससे पहले भी संतोष ने एक महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दिया था. बता दें कि दूसरी महिला के छेड़छाड़ से पहले उसने एक और महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दिया था. वह भी कोरोना पॉजिटिव थी. उसने 4 अप्रैल को अस्पताल के रूम नंबर 4 की एक महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना को अंजाम दिया था. वह महिला के जांघ पर इलाज करने के नाम पर हाथ फेर रहा था, जब महिला ने चिल्लाया तो वह वहां रखे मॉनिटर को चेक करने लगा. वहां से चला गया था, जिसके बाद वहां की नर्स को महिला ने जानकारी दी और नर्स ने पुलिस को पुलिस ने छेड़छाड़ के तहत मामला दर्ज निशातपुरा थाने में कर लिया था.

6 अप्रैल को दूसरी महिला को बनाया अपना शिकार
आरोपी संतोष ने 6 अप्रैल की सुबह दूसरी महिला के साथ भी ऐसा ही किया. इलाज करने के नाम पर उसने महिला के साथ ज्यादती की कोशिश की और उसे इलाज और चेकअप करने के नाम पर उसके प्राइवेट अंग से छेड़छाड़ करने लगा और फिर उसे बोला कि बाथरूम में ले जाकर उसका चेकअप करेगा. उसके बाद महिला को बाथरूम में ले जाकर उसने महिला के प्राइवेट अंग से छेड़छाड़ की. महिला ने विरोध किया तो वह उसे फिर बेड पर छोड़ कर चला गया. इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया गया. इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई.

इस पूरे मामले में महिला ने जानकारी नर्स को भी दी थी. जिसके बाद नर्स ने पुलिस बुलाकर मामला दर्ज कराया था. धारा 376 के तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया. महिला की अचानक तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई. हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस के आला अधिकारी भी अभी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इस पूरे मामले में बयान भी दिया है कि जो तथ्य छूटे उन पर जांच कराई जाएगी.

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ घटना को बताया शर्मनाक

मध्यप्रदेश के भोपाल में अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित महिला के साथ दुष्कर्म व छेड़छाड़ की घटना बेहद शर्मनाक ? बड़ा ही शर्मनाक कि पीड़ित महिला की मौत हो गयी और कार्यवाही की बजाय, अस्पताल प्रबंधन व पुलिस ने इस पूरे मामले को दबाये रखा? इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. क्या बहन- बेटियां अब अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं हैं? ऐसी घटनाएं मानवता व इंसानियत पर कलंक और प्रदेश को देशभर में शर्मशार करने वाली हैं. ऐसे तत्वों व दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये सरकार तत्काल आवश्यक कदम उठाये.

मंत्री सारंग ने कहा- मामले की करेंगे जांच

इस पूरे मामले में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मामला संवेदनशील है और जो भी आरोपी उसे कड़ी सजा दिलाएंगे. उन्होंने कहा है कि पुलिस ने मामले में FIR भी दर्ज की कार्यवाही कर आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया है. परंतु परिजनों को क्यों नहीं बताया अभी जांच का विषय है. इस पर हम और मीडिया में छपी खबर के अनुसार जो भी तथ्य बाकी रह गए हैं, उस पर जांच कराएंगे. (news18.com)


13-May-2021 9:52 PM (44)

 

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविशील्ड वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए समय अंतराल 12 से 16 हफ्ते रखने के कोविड वर्किंग ग्रुप की सलाह को स्वीकार लिया है. ऐसे में जिन लोगों ने कोविशील्ड वैक्सीन की पहली खुराक ली है, अब ये 12 से 16 हफ्ते के अंतराल पर वैक्सीन की दूसरी डोज ले सकेंगे. कोविड पर पैनल- राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने यह भी कहा कि गर्भवती महिलाएं अपने लिए वैक्सीन चुन सकती हैं और गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के बाद कभी भी वैक्सीन लगवा सकती हैं. पैनल ने कहा कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित रहे हैं, वे 6 महीने के बाद ही टीकाकरण करवाएं.

बता दें कि एनटीएजीआई ने कोविड-19 रोधी कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतर बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने की सिफारिश की थी. कोवैक्सिन की खुराकों के बीच अंतराल में किसी तरह के बदलाव की अनुशंसा नहीं की गई है. समूह ने कहा है कि गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को कोई भी टीका लगवाने का विकल्प दिया जा सकता है. समूह ने कहा है कि गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 का कोई भी टीका लगवाने का विकल्प दिया जा सकता है और स्तनपान करवाने वाली महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद किसी भी समय टीका लगवा सकती हैं.

अभी कोविशील्ड की दो खुराकों के बीच का अंतराल चार से आठ हफ्ते हैं. यह अनुशंसा ऐसे समय में की गई है जब कई राज्यों ने टीकों की कमी की बात कही है. घरेलू स्तर पर टीकों की आपूर्ति की कमी और बढ़ती मांग के बीच दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना समेत कई राज्यों ने कोरोना वायरस रोधी टीकों की खरीद के लिए वैश्विक निविदा आमंत्रित करने का फैसला किया है.

एनटीएजीआई की हालिया बैठक के बाद आए ये सुझाव टीकाकरण को देखने वाले कोविड-19 संबंधी राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह को भेजे जाएंगे. समूह ने कोविड टीकाकरण से पहले टीका लगवाने आए लोगों की नियमित रैपिड एंटीजन जांच करवाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया. एनटीएजीआई ने यह भी कहा है कि जो लोग कोविड-19 से पीड़ित रह चुके हैं और जांच में उनके सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, उन लोगों को स्वस्थ होने के बाद छह महीने तक टीकाकरण नहीं करवाना चाहिए.
एनटीएजीआई ने कहा है कि स्तनपान करवाने वाली सभी महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद कभी भी टीका लगवा सकती हैं. वर्तमान के टीकाकरण प्रोटोकॉल में कहा गया है कि चूंकि अभी तक के क्लिनिकल ट्रायल में गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को शामिल नहीं किया गया है, अत: उन्हें टीका नहीं लगाया जाना चाहिए.

ऐसे लोग जिन्हें टीके की पहली खुराक लग चुकी है और दूसरी खुराक लगने से पहले यदि वे संक्रमित हो जाते हैं तो उन्हें ठीक होने के बाद अगली खुराक लगवाने से पहले चार से आठ हफ्ते इंतजार करना चाहिए. (news18.com)


13-May-2021 9:45 PM (30)

 

-Ravishankar Singh

नई दिल्ली. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने आरोप लगया है कि देश में वैक्सीन बना रही दोनों कंपनियां सीरम संस्थान और भारत बायोटेक 16-16 हजार करोड़ रुपए मुनाफा कमा रही है. जैन ने यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन के साथ बैठक में कहा. जैन ने कहा है कि दोनों कंपनियों को मुनाफा कमाने का बहुत ज्यादा अवसर दिया जा रहा है. कोविशील्ड केंद्र सरकार को 150 रुपए में वैक्सीन दे रही है, जबकि राज्य को 300 और प्राइवेट को 400 रुपए में दे रही है. वहीं, कोवैक्सीन इससे भी महंगी कीमत में वैक्सीन दे रही है. जब कंपनी को 150 रुपए में भी फायदा हो रहा है तो सभी के लिए वैक्सीन की कीमत 150 रुपए ही होनी चाहिए. जैन ने कहा कि एक राष्ट्र-एक टेंडर पॉलिसी बनाकर केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय बाजार से वैक्सीन खरीद कर सभी राज्य को दे. अलग-अलग राज्य को ग्लोबल टेंडर करने से हमारे देश की बदनामी होगी. इसलिए वैक्सीन बना रहीं दोनों कंपनियों से फार्मूला लेकर दूसरी कंपनियों को साझा किया जाए ताकि यथा शीघ्र देश की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां कितना मुनाफा कमा रही है?

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर हम मान लेते हैं कि केंद्र सरकार को 150 रुपए में दी जा रही वैक्सीन में कंपनी को 10 रुपए का भी मुनाफा है तो कोविशील्ड हर महीने 6 करोड़ वैक्सीन बनाती है. अगर आधी वैक्सीन भी केंद्र सरकार को देनी होती है यानी कि 3 करोड़ वैक्सीन केंद्र सरकार को देनी है तो कंपनी का मुनाफा करीब 30 करोड़ रुपए हो गया.

अलग-अलग रेट पर जैन ने क्या कहा

जैन ने कहा कि कोविशील्ड अब वही वैक्सीन जो केंद्र सरकार को 150 रुपए में देती है उसे राज्य सरकारों को 300 रुपए में दे रही है, जबकि वैक्सीन की कीमत एक ही होनी चाहिए. कंपनी ने राज्य सरकार को जो 300 रुपए की वैक्सीन दी, उसमें से 160 रुपए का मुनाफा हुआ. इसके अलावा कंपनी इसी वैक्सीन को प्राइवेट को 400 रुपए में देती है. अगर हम वैक्सीन बनाने का कुल लागत 140 रुपए भी मान लें तो यहां कंपनी को 260 रुपए का फायदा हो रहा है यानी कंपनी को एक महीने के उत्पादन पर 960 करोड़ रुपए का मुनाफा हो रहा है. इसी तरह कंपनी को औसतन 160 करोड़ रुपए प्रति एक करोड़ वैक्सीन पर मुनाफा हो रहा है.

देश को 200 करोड़ वैक्सीन की जरुरत

जैन ने कहा कि हमने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से कहा है कि देश के अंदर 18 साल से ज्यादा उम्र के करीब 100 करोड़ लोग हैं. इनके लिए करीब 200 करोड़ वैक्सीन चाहिए. एक कंपनी से करीब 100 करोड़ वैक्सीन लेंगे और दूसरी कंपनी से 100 करोड़ वैक्सीन लेंगे. यानी कि एक कंपनी का कुल मुनाफा करीब 16 हजार करोड़ रुपए बनेगा. यह मैं बहुत कम करके बता रहा हूं. वहीं, वैक्सीन बनाने वाली जो दूसरी कंपनी कोवैक्सीन है वह तो कोविशील्ड से भी महंगे दाम में वैक्सीन दे रही है. कोविशील्ड का दाम का रेट 150, 300 और 400 रुपए है, जबकि कोवैक्सीन का दाम शायद 150, 400 और 600 रुपए है. ऐसे में कोवैक्सीन को कोविशील्ड से भी अधिक मुनाफा होगा.

वैक्सीन की कीमत सभी के लिए एक सामान हो- जैन

जैन ने बताया कि उन्होंने एक अन्य अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार के लिए वैक्सीन की जो कीमत 150 रुपए रखी गई है, वहीं कीमत सभी के लिए रखी जाए. क्योंकि, कंपनी को 150 रुपए में भी मुनाफा है. जब कंपनी को 150 रुपए में भी मुनाफा हो रहा है तो वैक्सीन की 300, 400 और 600 रुपए कीमत किस लिए है? इसका कोई लॉजिक नहीं बन रहा है. इस आपदा के समय में सिर्फ कंपनी को लाभ देने के लिए इतना बड़ा मौका नहीं दिया जा सकता है.

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि उन्होंने पहला मुद्दा यह उठाया कि जो वैक्सीन विदेशों से खरीदनी है. इस पर मैंने उनसे कहा कि वैक्सीन खरीदने के लिए अलग-अलग राज्य को ग्लोबल टेंडर करने की बजाय केंद्र सरकार को सभी राज्यों की तरफ से इकट्ठे खरीदनी चाहिए. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार के अंदर दिल्ली, यूपी, कर्नाटक, केरल और अलग अलग राज्य जाएंगे तो इससे हमारे देश की बदनामी होगी. हमें पूरे देश को एक मानते हुए जो भी वैक्सीन खरीदनी है तो वह केंद्र सरकार को सबके लिए एक साथ खरीदनी चाहिए. (news18.com)


13-May-2021 9:44 PM (113)

 

busiनई दिल्ली. सोना खरीदने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. सोना खरीदने वाले अक्षय तृतीया को शुभ मानते हुए इस दिन सोने की खूब खरीदारी करते हैं. लेकिन कोरोनावायरस के चलते 2 सालों से लॉकडाउन के बीच पड़ने वाली अक्षय तृतीया पर ज्वेलरी  का कारोबार पूरी तरीके से ठप हाे गया है.

इस दिन एक अनुमान के मुताबिक करीब 10,000 करोड रुपए का कारोबार होता है. लेकिन लगातार 2 सालों से लॉकडाउन के बीच पड़ने वाली अक्षय तृतीया के दिन व्यापार बंद होने की वजह से इस कारोबार को करीब 20,000 करोड रुपए का नुकसान पहुंचने का अनुमान है.

देश के ज्वेलरी व्यापार के शीर्ष संगठन आल इण्डिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोरा ने कहा कि इस वर्ष देश भर के ज्वेलरी व्यापारियों ने अक्षय तृतीया पर अच्छे व्यापार की बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी. लेकिन लॉकडाउन होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है. ऐसा लगता है कि कल का अक्षय तृतीया और ईद का दिन भी सोने के व्यापारियों के लिए कुछ खास व्यापार नहीं होगा.

अरोरा ने बताया कि वर्ष 2019 में देश सिर्फ अक्षय तृतीया पर ही लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के सोने की बिक्री की गई थी किन्तु 2020 में अक्षय तृतीया पर मई माह में लॉकडाउन में सोने की बिक्री शगुन के रूप में केवल 5 प्रतिशत यानी लगभग 500 करोड़ के आसपास ही हुई थी.
लगातार दो साल लॉकडाउन में अक्षय तृतीया का त्यौहार आने के कारण देश के ज्वेलरी व्यापार की कमर ही टूट गई है. इन हालातों में व्यापार अब दोबारा कैसे संभलेगा, इसकी चिंता ज्वेलरी व्यापारियों को ज्यादा सताए जा रही है.

वहीं, 1 जून से देश में सोने की ज्वेलरी पर अनिवार्य रूप से हॉलमार्किंग करना होगा जिसके लिए ज्वेलरी व्यापारी अभी तैयार नहीं है. हॉलमार्किंग का ढांचा भी तैयार नहीं हुआ है. कैट एवं आईआईजेजीएफ दोनों ने केंद्र सरकार से इस तारीख को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है.

कन्फेडरशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की पिछले वर्ष भी लॉकडाउन के कारण अक्षय तृतीया के दिन ज्वेलरी व्यापारी कोई व्यापार नहीं कर पाए थे. इस साल भी लॉकडाउन के चलते देश के अधिकतर राज्यों में लॉकडाउन के कारण ज्वेलरी दुकानें बंद है. (news18.com)


13-May-2021 9:37 PM (48)

नई दिल्ली. रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-V अगले हफ्ते से भारतीय बाजार में मौजूद होगी. 14 मई यानी कल देश में स्पूतनिक की दूसरी खेप आ जाएगी. इससे पहले एक मई को डेढ़ लाख वैक्सीन डोज की पहली खेप भारत में आई थी. नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके. पॉल ने बताया-हम आशा करते हैं कि अगले हफ्ते तक स्पूतनिक भारतीय बाजार में आ जाएगी. भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डी करेगी.

स्पूतनिक भारत में तीसरी वैक्सीन होगी. इससे पहले 16 जनवरी से देश में शुरू हुए वैक्सीनेशन कार्यक्रम के दौरान अब तक सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता रहा है. इनमें भी कोविशील्ड का प्रतिशत ज्यादा रहा है. अब स्पूतनिक-V भी आ गई है.

किस वैक्सीन एफिकेसी रेट है सबसे ज्यादा

स्पूतनिक -V ने तीसरे फेज के ट्रायल में मजबूत प्रतिरोधक क्षमता दिखाई है. नतीजों में 91.6% एफिकेसी रेट सामने आया है. वहीं कोविशील्ड की एफिकेसी रेट करीब 70 फीसदी है और दूसरे डोज के बाद यह 90 फीसदी तक जा सकता है. भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन का तीसरे फेज के ट्रायल में एफिकेसी रेट 81 फीसदी रहा था.
तीनों वैक्सीन हैं प्रभावी, किसी का भी डोज लिया जा सकता है

हालांकि वैक्सीन के एफिकेसी रेट को ही प्रभावशीलता का एकमात्र पैमाना नहीं माना जाता. भारत में अब तक एक्सपर्ट्स और सरकारें जोर देकर कहती रही हैं कोविशील्ड या कोवैक्सीन में से किसी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. दोनों ही वैक्सीन कोरोना वायरस के खतरे को कमजोर करने में समान रूप से प्रभावशाली हैं.

वैक्सीन की कमी संबंधी समस्या का किया जाएगा अंत

डॉ. वीके पॉल ने आज यह भी जानकारी दी है कि देश में अगले कुछ महीने के भीतर वैक्सीन उत्पादन में बहुत तेजी लाई जाएगी. अगस्त से दिसंबर महीने के बीच में 216 करोड़ वैक्सीन डोज भारत के पास मौजूद होंगे. ये डोज विभिन्न कंपनियों की वैक्सीन के होंगे. (news18.com)


13-May-2021 9:32 PM (16)

रायपुर, 13 मई। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम के पूरक परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिया गया है l
परीक्षा परिणाम इस प्रकार है-


13-May-2021 8:03 PM (38)

 

बेंगलुरू: केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने जानना चाहा है कि क्या सरकार में बैठे लोगों को टीके के उत्पादन में नाकामी की वजह से खुद को फांसी पर लटका लेना चाहिए? गौड़ा ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से कहा, 'अदालत ने अच्छी मंशा से कहा है कि देश में सबको टीका लगवाना चाहिए. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अगर अदालत कल कहती है कि आपको इतने (टीके) देने हैं और यह अगर न बन पाए, तो क्या हमें खुद को फांसी पर लटका लेना चाहिए?' टीके की किल्लत के सवालों पर केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कार्रवाई योजना पर जोर दिया और कहा कि इसके निर्णय किसी भी राजनीतिक लाभ या किसी अन्य कारण से निर्देशित नहीं होते हैं.

कोरोना से जंग में भारत को मिलेगी मजबूती, अगले सप्ताह बाजार में आ सकती है स्पूतनिक वैक्सीन

उन्‍होंने कहा कि सरकार अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करती आ रही है और उस दौरान कुछ कमियां सामने आई हैं. मंत्री ने जानना चाहा, 'व्यावहारिक रूप से, कुछ चीजें जो हमारे नियंत्रण से परे हैं, क्या हम उसका प्रबंधन कर सकते हैं?' उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ काम कर रही है कि एक या दो दिन में चीजें सुधरें और लोगों को टीका लगे.गौड़ा के साथ मौजूद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने दावा किया कि अगर व्यवस्था समय पर नहीं की जाती तो चीज़ें बदतर हो सकती थीं.रवि ने कहा, 'यदि पहले से उचित व्यवस्था नहीं की गई होती तो मौतें 10 गुना या 100 गुना ज्यादा होतीं.' रवि ने कहा, 'लेकिन कोरोना वायरस के अकल्पनीय प्रसार के कारण हमारी तैयारी विफल रही.'

अदालतों द्वारा कोरोना वायरस के मुद्दे पर सरकार की खिंचाई करने पर रवि ने कहा, 'न्यायाधीश सब कुछ जानने वाले नहीं होते हैं. हमारे पास जो कुछ भी उपलब्ध है, उसके आधार पर तकनीकी सलाहकार समिति यह सिफारिश करेगी कि कितना (टीकों का) वितरण किया जाना है. उनकी रिपोर्ट के आधार पर हम निर्णय करेंगे.' कर्नाटक में कोरोना वायरस के चिंताजनक हालात हैं और रोज़ाना 40-50 हजार मामले आ रहे हैं. इसी के साथ टीके की मांग भी कई गुना बढ़ गई है.राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, राज्य की ओर से तीन करोड़ टीके खरीदने के लिए ऑर्डर दिया गया और दो टीका निर्माताओं को भुगतान भी कर दिया गया.बहरहाल, केवल सात लाख खुराक ही राज्य पहुंची.कई टीकाकरण केंद्रों के सामने लोग कतारबद्ध खड़े होते हैं लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ता है. (ndtv.in)


13-May-2021 8:02 PM (30)

-अनिन्दिता सान्याल

नई दिल्ली: कोरोना से जंग में भारत को मजबूती मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने आज कहा कि कोरोना की रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी अगले सप्ताह से बाजार में उपलब्ध हो सकती है. केंद्र ने कहा कि राज्यों में टीके की कमी गहराने की वजह से टीकाकरण अभियान को कुछ प्रतिबंध के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. महाराष्ट्र सहित कई राज्य वैक्सीन की आपूर्ति के लिए ग्लोबल टेंडर जारी कर रहे हैं.

नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि स्पुतनिक-वी के अगले हफ्ते बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि रूस से जो सीमित आपूर्ति हुई है, उसकी बिक्री अगले सप्ताह शुरू होगी."

डॉ. पॉल ने कहा कि आगे वैक्सीन की आपूर्ति होती रहेगी और इसका उत्पादन जुलाई में शुरू होगा. उन्होंने कहा कि इस अवधि में स्पुतनिक-वी की अनुमानित 15.6 करोड़ खुराक उपलब्ध होगी.

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को ट्वीट किया कि स्पुतनिक वी की 1.5 लाख खुराक पहले ही भारत पहुंच चुकी है और आरडीआईएफ ने थोक उत्पादन के लिए स्थानीय भारतीय कंपनियों के साथ समझौता किया है.

इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड्स, इटली, फ्रांस और रूस के वैज्ञानिकों के एक समूह ने तीसरे चरण के अध्ययन के परिणामों पर चिंता व्यक्त की है. वहीं, रूसी वैज्ञानिकों ने कहा है कि उनका डेटा स्पष्ट और पारदर्शी मानकों, नियामक समीक्षा पर खरा उतरता है.

बिहार-यूपी में गंगा में मिले शवों से संबंधित मामले पर SC में याचिका दाखिल
आशीष कुमार भार्गव

नई दिल्ली: बिहार और उत्‍तर प्रदेश में गंगा नदी में मिले शवों का मामला सुप्रीम कोर्ट  पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल की गई है, इसमें बिहार के बक्सर और यूपी के गाजीपुर और उन्नाव में गंगा में मिले शवों के मामलों की जांच विशेष जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई है. साथ ही कहा गया है कि इस मामले की आगे जांच के लिए सभी शवों को निकाला जाए और फिर उनका पोस्टमार्टम कराया जाए. वकील प्रदीप कुमार यादव ने इस मामले में दोषियों पर कार्यवाही करने में नाकाम प्राधिकारियों पर भी कार्यवाही करने की मांग की है.

प्रदीप और अन्य द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि गंगा नदी में लगभग 100 शवों को बरामद किया गया है, इनमें 71 बिहार के बक्सर में और 30 को यूपी में निकाला गया. शीर्ष अदालत 100 गरीब व्यक्तियों की मृत्यु के लिए जांच का आदेश दे. इसके साथ ही मृत्यु का कारण जानने के लिए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाए. याचिका में कहा गया है कि अपने चेहरे को बचाने के लिए प्रशासन ने वास्तविक पोस्टमार्टम किए बिना झूठी कार्रवाई की है ऐसे में शीर्ष अदालत जांच करने और दोषियों को सजा देने के लिए SIT का गठन करे. (ndtv.in)


13-May-2021 7:59 PM (23)

 

उत्तर प्रदेश और बिहार में बहने वाली गंगा नदी में कई शव बरामद किए जाने की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार ने स्वत: संज्ञान लिया है. एनएचआरसी ने गुरुवार को बिहार और यूपी के मुख्य सचिवों के साथ ही केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय को नोटिस भेजते हुए चार हफ्ते के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा है.

एनएचआरसी का केन्द्र और बिहार-यूपी को नोटिस

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले लोगों के मुताबिक नरही इलाके के उजियार, कुल्हड़िया और भरौली घाट पर कम से कम 52 लाशें बहती हुई दिखाई दी हैं. इसी तरह गंगा नदी में लाशों के बहने की खबर बिहार से भी मिली है. बयान में एनएचआरसी ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रशासनिक अधिकारी जनता को जागरूक करने और गंगा नदी में अधजली या बिना जली लाशों को बहाने से रोकने में असफल हुए हैं.

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की बीघापुर पाटन तहसील में गंगा नदी के बक्सर घाट पर दफनाये गये कई शव कथित रूप से बरामद होने पर, जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिये है. एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी. इन दफनाये गये शवों की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया.

उन्नाव में घाट पर दफनाये गये शवों के बरामद होने की खबर

उन्नाव के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया, 'इस मामले की जानकारी मिलने के बाद उप जिलाधिकारी स्तर के एक अधिकारी को जांच के लिये मौके पर भेजा गया है और वह शीघ्र ही पूरे मामले की रिपोर्ट देंगे.' उन्होंने बताया कि बक्सर घाट कई जिलों की सीमा पर स्थित है और यह रायबरेली, फतेहपुर उन्नाव को जोड़ता है, वहां पर कई जिलों के लोग आकर परंपरागत तरीके से अंतिम संस्कार करते हैं. अधिकारी ने बताया, ‘‘मुझे सूचना मिली है कुछ लोगों द्वारा रेत के नीचे शवों को दबाया गया है. सूचना मिलने के बाद तत्काल उप जिलाधिकारी को भेजा गया है. जो भी स्थिति है उसको देखते हुए सम्मानजनक जो भी कार्यवाही है वो करवायेंगे, इस तरह की स्थिति दोबारा ना हो इसके लिये भी कड़े निर्देश दिए गये हैं.’’

उप जिलाधिकारी (एसडीएम) बीघापुर दया शंकर पाठक ने बताया, ‘‘जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ मौके पर जाकर मैने निरीक्षण किया है, कहीं कोई शव खुले में पड़ा नहीं दिखाई दिया. दफनाए गये शवों की संख्‍या को लेकर भी उन्‍होने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.’’ इस घाट के पास रहने वाले ग्रामीणों का कहना था कि गुरुवार सुबह से ही किसी को भी शव दफनाने नहीं दिया जा रहा है, सभी को दाह संस्‍कार के लिए कहा जा रहा है. (abplive.com)


13-May-2021 7:58 PM (28)

भारत में एक मई से ही कोरोना वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरुआत हो गई. केन्द्र सरकार की तरफ से 18 से 44 साल के लोगों को वैक्सीन के योग्य मानकर उन्हें टीका लगाने की इजाजत दे दी गई. लेकिन विडंबना ये है कि अभी तक कई राज्यों में यह शुरू नहीं किया जा सका है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कोरोना वैक्सीन की देश में भारी किल्लत. लेकिन, भारत में कोरोना वैक्सीन की इस कमी को दूर करने के लिए अब विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित वैक्सीन निर्माता विदेशी कंपनियों को जल्द से जल्द लाइसेंस देने का फैसला किया गया है.

विदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों को जल्द आयात लाइसेंस

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वी.के. पॉल ने गुरुवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, कोई भी वैक्सीन जिसे डब्ल्यूएचओ और एफडीओ ने प्रमाणित किया है उसे भारत में लाई जा सकती है. एक से दो दिन के भीतर आयात लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा. वीके पॉल ने बताया कि अभी कोई भी लाइसेंस लंबित नहीं है.

अगले हफ्ते से मिलने लगेगी स्पुतनिक

वीके पॉल ने आगे बताया कि नई पॉलिसी बनाई गई क्योंकि राज्यों को फ्लेक्सिबिलिटी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि सभी को वैक्सीन मिलेगी. इस डेटा के बाद किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि स्पुतनिक वैक्सीन रूस से आ गई है और यह अगले हफ्ते से मिलनी शुरू हो जाएगी.

इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फेंस के दौरान कहा कि देश में 24 राज्य शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां 15% से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट है. 5-15% पॉजिटिविटी रेट 8 में है। 5% से कम पॉजिटिविटी रेट 4 में है. उन्होंने कहा कि  देश में 12 राज्य ऐसे हैं जहां 1 लाख से भी ज्यादा सक्रिय मामले हैं. 8 राज्यों में 50,000 से 1 लाख के बीच सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है. 16 राज्य ऐसे हैं जहां 50,000 से भी कम सक्रिय मामलों की संख्या बनी हुई है. (abplive.com)


13-May-2021 7:26 PM (63)

रायपुर, 13 मई। कोविड के खिलाफ लड़ाई के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जो कोविड पीड़ितों के कुछ आंसू पोंछ सकेगा।कोविड के निर्मम प्रहार के चलते जिन बच्चों का सब कुछ छीन गया है, अब छत्तीसगढ़ सरकार उनका संबल बनने जा रही है,और न केवल उनकी शिक्षा का दायित्व उठायेगी बल्कि उनके भविष्य को संवारने की हर संभव कोशिश भी करेगी। सरकार की इस संवेदनशील पहल को अमली जामा पहनाया जाएगा छत्तीसगढ़ महतारी दुलार योजना के माध्यम से। यह योजना इस वित्तीय वर्ष से लागू की जाएगी। 

ऐसे बच्चे जिन्होंने अपने माता-पिता को इस वित्तीय वर्ष के दौरान कोरोना के कारण खो दिया है, उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च अब छत्तीसगढ़ सरकार उठाएगी। साथ ही पहली से आठवीं तक के ऐसे बच्चों को 500 रुपये प्रतिमाह और 9 वीं से 12 वीं तक के बच्चों को 1000 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति भी राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। शासकीय अथवा प्राईवेट किसी भी स्कूल में पढ़ाई करने पर ये बच्चे इस छात्रवृत्ति के लिये पात्र होंगे। 

इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है ऐसे बच्चे जिनके परिवार में रोजी-रोटी कमाने वाले मुख्य सदस्य की मृत्यु कोरोना से हो गई है, तो उन बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि ये बच्चे राज्य में प्रारंभ किए गए स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश हेतु आवेदन देते हैं तो उन्हें प्राथमिकता से प्रवेश दिया जायेगा और उनसे किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जायेगी।

कोरोना महामारी ने न जाने कितने घरों में अंधेरा कर दिया है और न जाने कितने बच्चों के सिर से उनके मा-बाप का सहारा छीन लिया है। मुख्यमंत्री श्री बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जरूरतमंदों को हर तरह का सहारा मुहैया कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री की यह संवदेनशील पहल इन बेसहारा बच्चों के बेहतर भविष्य निर्माण में काफी सहायक होगी।


13-May-2021 6:47 PM (212)

सरकार के वित्त विभाग ने सभी विभागोें को जारी किया आदेश

रायपुर, 13 मई। कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय व्यय में गत वर्ष की तरह ही वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी मितव्ययता बरतने का निर्णय लिया है परंतु इस दौरान न तो लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले सीधी भर्ती के पद एवं अनुकम्पा नियुक्ति के पदों के साथ जो भर्ती प्रक्रिया जारी है उस पर कोई रोक नही होगी। इसी तरह पदोन्नति-क्रमोन्नति के फलस्वरूप मिलने वाले एरियर्स और वेतनवृद्धि पर कोई रोक नही लगायी गई है। इस संबंध में राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा बीते 26 अप्रैल को सभी विभागों को आदेश जारी किया गया है। 

वित्त विभाग द्वारा मितव्ययिता के संबंध में आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि गत वर्ष जारी मूल मितव्ययिता निर्देश 12/2020 की कंडिका-2.1 में लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले सीधी भर्ती के पद एवं अनुकम्पा नियुक्ति के पदों को छोड़कर शेष सभी सीधी भर्ती के पदों को भरने के पूर्व वित्त विभाग से अनुमति प्राप्त करने के निर्देश जारी किये गये थे। इसे बाद में वित्त निर्देश 13/2020 द्वारा शिथिल करते हुए यह स्पष्ट किया गया था कि ऐसे प्रकरणों में जहां भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, भर्ती प्रकिया जारी रखी जा सकती है किन्तु नियुक्त आदेश जारी करने के पूर्व वित्त विभाग की सहमति प्राप्त की जाए। उक्त निर्देश का संदर्भ इस वर्ष जारी मितव्ययिता निर्देश में भी दिया गया है अतः यह शिथिलीकरण निर्देश इस वर्ष भी प्रभावशील रहेगा।

इसी तरह गत वर्ष जारी मूल मितव्ययिता निर्देश 12/2020 की कंडिका 2.2 में पदोन्नति-क्रमोन्नति के फलस्वरूप एरियर्श की राशि वित्त विभाग के आगामी आदेश तक विलम्बित रखे जाने के निर्देश थे। इसे बाद में वित्त निर्देश 18/2020 के द्वारा आंशिक रूप से शिथिल करते हुए पदोन्नति एवं क्रमोन्नति के फलस्वरूप देय एरियर्स की राशि एकमुश्त नगद रूप से सेवानिवृत्ति/मृत्यु के प्रकरणों में शासकीय सेवक अथवा उनके परिवार, जैसी स्थिति हो को दिए जाने के निर्देश दिए गए थे। इस निर्देश का संदर्भ इस वर्ष जारी मितव्ययिता आदेश दिनांक 26.04.2021 में भी दिया गया है। अतः स्पष्ट है कि यह शिथिलीकरण आदेश इस वर्ष भी प्रभावशील है तथा पदोन्नति-क्रमोन्नति पर कोई रोक नही लगाई गयी है।

वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि गत वर्ष जारी मूल मितव्ययिता निर्देश 12/2020 की कंडिका-2.9 में 01 जुलाई 2020 एवं 01 जनवरी 2021 को देय वार्षिक वेतन वृद्धि आगामी वर्ष तक विलम्बित रखे जाने के निर्देश जारी किये गय थे, जिसे बाद में वित्त निर्देश 19/2020 के माध्यम से शिथिल किया गया था। चूंकि गत वर्ष जारी निर्देश में विशिष्ट दिनांक को देय वेतन वृद्धि विलम्बित रखने के निर्देश थे, जिन्हें बाद में शिथिल किया गया है। अतः इस वर्ष जारी मितव्ययिता आदेश में 01 जुलाई 2021 एवं 01 जनवरी 2022 को देय वार्षिक वेतन वृद्धि रोके जाने या विलम्बित रखने के कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।


13-May-2021 6:37 PM (48)

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कसडोल, 13 मई।
नगर तथा इलाके में आज शाम को अचानक अंधड़, तेज बारिश के साथ गर्जना से कई पेड़ धराशायी हो गए।

13 मई की शाम 4 बजे अचानक आंधी-तेज बारिश हुई, जिसस कई घरों के छप्पर उड़े। नगर कसडोल के हृदय स्थल बजरंग चौक के एक पीपल की शाखा टूटकर बिजली तार में गिरकर सडक़ पर आ गई। इसके ही आगे समलाई चौक में एक 100 साल के पुराने पेड़ की बड़ी सी शाखा टूटकर दो घरों को नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र में और नुकसान का पता नहीं चला है।


13-May-2021 6:34 PM (30)

कांकेर, 13 मई। कल बीएसएफ कैंप में समर्पण करने वाले नक्सल दंपत्ति कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। दोनों को कांकेर के कोरोना अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस के अनुसार उत्तर बस्तर माओवादी संगठन के सदस्य नक्सल दंपत्ति अर्जुन ताती एवं लक्ष्मी पद्दा संगठन छोडक़र पुलिस के संपर्क में आए। जिला कांकेर के प्रतापपुर एरिया कमेटी अंतर्गत मेडकी एलओएस सदस्य के रूप में पहचान किया गया। बताया जाता है कि नक्सली दंपत्ति अर्जुन ताती एवं लक्ष्मी पद्दा बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण संगठन छोडक़र पुलिस के पास पहुंचे।

जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के पश्चात उनको कोमल देव अस्पताल कांकेर में भर्ती किया गया। दोनों नक्सल सदस्यों के स्वास्थ्य ठीक होने के पश्चात उनसे आत्मसमर्पण से संबंधित कार्रवाई करते हुए अग्रिम पूछताछ की जाएगी।

ज्ञात हो कि 12 मई को जिला कांकेर के कामतेड़ा बीएसएफ कैंप थाना कोयलीबेड़ा में एक महिला एवं एक पुरुष पुलिस से संपर्क कर अपना परिचय अर्जुन ताती एवं लक्ष्मी पद्दा के रूप में बताते हुए आत्मसमर्पण किया था। कांकेर कलेक्टर चंदन कुमार के द्वारा आत्मसमर्पित नक्सल दंपत्ति के कोरोना का उचित इलाज हेतु कोविड-19 ताल कांकेर में दिशा-निर्देश दिया गया।

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दंपत्ति का स्वागत करते हुए उचित इलाज के निर्देश दिए हैं।


13-May-2021 6:25 PM (59)

रायपुर, 13 मई।  कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के उस बयान पर कि सीजी वैक्सीन एप में सीएम की तस्वीर होगी, इस पर पलटवार करते हुए सांसद सुनील सोनी ने कहा कि सरकार ने जानबूझकर वैक्सीन का ऑर्डर नहीं दिया, क्योंकि एप तैयार नहीं हुआ था, और सीएम की तस्वीर नहीं लगी थी।  

श्री सोनी के कहा कि सरकार की इच्छा पूरी हो चुकी है। अब तो वैक्सीन का ऑर्डर दे देना चाहिए। बहुत हो चुकी है राजनीतिl सरकार के पास एक हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। ऐसे में बिना देरी के दोनों कंपनियों को वैक्सीन का ऑर्डर देना चाहिए ताकि अगले तीन -चार महीने में 18 प्लस के लोगों को वैक्सीन लग सके, और कोरोना से सुरक्षित रह सके। 


13-May-2021 6:21 PM (22)

   मरीजों से संवाद के लिए सीखी गोंडी  

रायपुर 13 मई। नारायणपुर की अंशु नाग अबूझमाड़ इलाके में गत सात सालों से बतौर नर्स अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनकी मां भी नर्स थी और अब रिटायर हो चुकी हैं। मां को लगन से सबकी सेवा करते देख और लोगों से मिले सम्मान और प्यार को देखकर उन्होने भी इसी पेशे को अपनाया। यहां के स्थानीय आदिवासियों का इलाज सही तरीके से करने  एवं उनसे संवाद के लिए गोंडी बोली भी सीखी। जब उनकी मां शीला, शासकीय सेवा में थी तब नारायणपुर शहर में अधिकांश प्रसव (डिलीवरी) उन्ही के हाथों हुआ करते थे। लोगों में इतना विश्वास होता था कि अमीर-गरीब सभी परिवार प्रसव के लिए इनके पास ही आते थे। 

अब उनकी बेटी कुतुल, कोहकामेटा समेत दर्जनों गांव के ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही कोविड वैक्सीन भी लगाती हैं। अंशु ने तीन बार मौत को सामने देखा, उनके सामने ही तीन बार आईईडी बम फटा और जवान भी शहीद हुए लेकिन निडरता के साथ वे सेवा करती रहीं। वे कीचड़ से सने रास्तों के बीच, कमर से ऊपर तक‌ भरे नदी-नालों को पार कर माड़ के गांवों में पहुँचकर स्वास्थ्य सेवा दे रही हैं। 

कोरोना वायरस से जब वह संक्रमित हुई तो होम आइसोलेशन में रहकर अपनी रिटायर्ड नर्स मां की देखरेख में स्वस्थ होकर फिर से अबूझमाड़ के लोगों का दर्द साझा करने में जुट गई है। अंशु ने बताया कि पिछड़ेपन की वजह से ग्रामीणों में जागरूकता की कमी है, जिसकी वजह से अंदरूनी इलाकों में महिलाओं और बच्चों को विशेष देखरेख की आवश्यकता है। अंशु का मानना है कि जीवन में जितना हो सके अच्छा काम करना है और वे उसी सेवा भाव से जुटी रहती हैं।


13-May-2021 6:12 PM (36)

रायपुर 13 मई। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं की दिनांक 24.05.2021 से 15.06.2021 तक आयोजित होने वाली
परीक्षा स्थगित कर दी गई है।

छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के सचिव प्रोफेसर व्ही के गोयल ने बताया कि राज्य में वर्तमान में  कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए कई जिलों में लॉकडाउन किया गया है। अतः वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आगामी निर्णय समयानुसार लिया जायेगा।


13-May-2021 5:59 PM (29)

 

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी है कि देश के 187 जिलों में कोरोना के नए मामलों में कमी आई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने बताया है कि बीते दो सप्ताह से लगातार 187 जिलों में नए मामलों में कमी आती दिख रही है.

नीति आयोग ने सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया है कि अब तक देश में कोरोना वैक्सीन के करीब 18 करोड़ डोज लगाए जा चुके हैं. अमेरिका में ये संख्या 26 करोड़ है. भारत का दुनिया में तीसरा नंबर है. जानकारी दी गई है कि पूरी दुनिया में हमारे देश में 13 प्रतिशत वैक्सीन लग चुकी है. दूसरी वेव के आने के बाद भी 17 करोड़ का मार्ग हमने सबसे मुश्किल समय में पूरा कर के दिखाया. अभी 35.6 करोड़ वैक्सीन प्रोक्योर की जा चुकी है. भारत सरकार ने 12 करोड़ डोज को प्रोक्योर किया है. 16 करोड़ डोज राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों ने प्रोक्योर किए हैं.

45 से ऊपर के एक तिहाई लोगों को हम सुरक्षा प्रदान कर चुके

वीके पॉल ने कहा- 'हमें खुशी है कि 45 से ऊपर के एक तिहाई लोगों को हम सुरक्षा प्रदान कर चुके हैं. 45 से ज्यादा उम्र के लोगों की मौत का प्रतिशत 88 है. आप समझ सकते हैं कि इस उम्र की जनसंख्या में कोरोना से मौत का रिस्क किस स्तर तक कम हुआ है.'
संक्रमण के नए मामलों से ज्यादा रिकवर होने वालों की संख्या

बता दें इससे पहले बुधवार को भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि देश के कई प्रभावित राज्यों में अब नए मामलों में कमी आने लगी है. अगर पूरे देश की बात करें तो नए संक्रमितों से ज्यादा संख्या रिकवर होने वाले मरीजों की हो चुकी है. (news18.com)