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27-Jan-2021 8:14 AM 15

27 जनवरी 2021, 07:50 IST

दिल्ली में लाल क़िला समेत अन्य इलाक़ों में ट्रैक्टर रैली हिंसक होने के बाद जानकारी सामने आ रही है कि सरकार के पास पहले से ये इनपुट थे कि ट्रैक्टर रैली के दिल्ली में दाखिल होने के बाद हिंसा क्यों और कैसे हो सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है, जिसमें गृह मंत्रालय के अधिकारियों से बात की गई है.

ख़बर में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस समेत कई ख़ुफ़िया एजेंसियों ने अलग-अलग मौक़ों पर सरकार को स्पष्ट जानकारी दी थी कि अगर दिल्ली में ट्रैक्टर घुसने दिए गए तो क़ानून - व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है.

लेकिन तमाम आशंकाओं और जानकारियों के बाद भी राजनीतिक स्तर पर ये फ़ैसला किया गया, क्योंकि गृह मंत्रालय ने आकलन किया था कि अगर किसानों को दिल्ली आने से रोका गया, तो वे ज़्यादा आक्रामक हो सकते हैं.

लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियाँ सरकार को लगातार चेतावनी देती रहीं कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इसके क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं. ट्रैक्टर रैली के रूट को लेकर किसानों की सरकार के साथ सहमति बनने के बाद भी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने कहा था कि बैरिकेडिंग तोड़कर शहर के अंदर घुसने के प्रयास किए जा सकते हैं.


गृह मंत्रालय के अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा है कि इस बात की आशंका थी कि प्रदर्शनकारियों का एक समूह शहर में घुसने का प्रयास कर सकता है.

ये अधिकारी कहते हैं, "इसी वजह से टिकरी, सिंघु, नांगलोई, गाज़ीपुर समेत कई जगहों पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी. लोहे के बैरिकेड के साथ साथ सीमेंट के बैरिकेड इस्तेमाल किए गए थे. कहीं-कहीं पर ट्रेलर खड़े किए गए थे. गाज़ीपुर में सड़क रोकने के लिए एक सीमेंट से भरा कंटेनर रोड के बीचों-बीच रखा गया था लेकिन कुछ भी किसानों को रोक न सका."

इस ख़बर में ये भी बताया गया है कि जब किसान दिल्ली में घुस आए थे, तो दिल्ली पुलिस के पास ये इनपुट भी थे कि प्रदर्शनकारी राजपथ और लाल क़िले जा सकते हैं.

कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने ये भी बताया है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सोमवार को ही स्पष्ट रूप से बताया था कि कुछ असमाजिक तत्व पहले से तय रास्तों को छोड़कर नए रास्तों पर जाकर शांति व्यवस्था भंग कर सकते हैं.

साढ़े बाहर बजे दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच की ओर से सभी डीसीपी और वरिष्ठ अधिकारियों को एक संदेश भेजा गया था जिसमें लिखा था - "इनपुट मिले हैं कि किसानों के ट्रैक्टरों के साथ राजपथ, इंडिया गेट, लाल क़िला, रामलीला मैदान, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, गृह मंत्री आवास, मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल आवास पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता."

इंडियन एक्सप्रेस की ही एक अन्य ख़बर में बताया गया है कि दीप संधू नाम के एक फ़िल्म अभिनेता समेत कुछ अन्य लोगों ने किस तरह सिंघु बॉर्डर पर ट्रैक्टर रैली से कुछ घंटे पहले मंच पर क़ब्ज़ा जमा लिया था. इन लोगों ने ही सिंघु बॉर्डर पर 'अवर रूट, रिंग रोड' का नारा दिया था. (बीबीसी) 


27-Jan-2021 7:34 AM 11

Khariyat-Palak Jain

 

the golden notes

 

 


26-Jan-2021 11:21 AM 60

'छत्तीसगढ़' संवाददाता 
बिलासपुर, 26 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जवाब मांगा है कि ब्लॉक और जिला स्तर पर सांसदों, विधायकों का दफ़्तर क्यों नहीं बनाया गया है ताकि आम जन सुविधा के साथ अपना आवेदन उन्हें दे सकें।

पेन्ड्रा के मथुरा सोनी ने अधिवक्ता अच्युत तिवारी के माध्यम से पेश याचिका में कहा कि विधायक, सांसदों का कार्यालय जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नहीं होने से आम लोगों को परेशानी होती है। शासन की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था भी नहीं की गई है। लोगों को अपनी शिकायत, समस्या बताने में इसके चलते इंतजार करना पड़ता है।

याचिकाकर्ता की मांग की है कि न केवल ब्लॉक बल्कि वार्ड स्तर पर भी शिकायत लेने के लिये दफ्तर होने चाहिये।

चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू ने इस बारे में मुख्य सचिव को फरवरी माह के पहले सप्ताह तक जवाब पेश करने कहा है। 


26-Jan-2021 11:18 AM 103

'छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर/करगीरोड कोटा, 26 जनवरी। मायके आई बेटी ने पिता की हत्या मोबाइल गुमने की वजह से कर दी। मां ने लाश को गड्ढे में छुपाने में मदद की। बेलगहना पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

कंचनपुर के मृतक मंगलू धनुहार (58 वर्ष) की विवाहित बेटी दिव्या अपने पांच माह की बेटी के साथ रविवार को मायके पहुंची थी। यहां उसका मोबाइल फोन गुम हो गया। पुलिस के मुताबिक बेटी और उसके मृतक पिता दोनों शराब के नशे में थे। दिव्या ने मोबाइल फोन के बारे में पूछा। पिता ने कहा कि उसे पता नहीं। आरोपी बेटी दिव्या ने मृतक पर आरोप लगाया कि उसी ने मोबाइल फोन को गायब किया है। पिता से वह विवाद करने लगी। बहस बढ़ी और आरोपी दिव्या ने लाठी से अपने पिता पर हमला कर दिया। पास रखे पत्थर को भी उसके सिर पर दे मारा। उसने इतना मारा कि मौके पर ही पिता मंगलू धनुहार की मौत हो गई।

 बेलगहना चौकी प्रभारी दिनेश चंद्र ने बताया कि आरोपी दिव्या की इस हरकत को देखकर उसकी मां पुसइया बाई घबरा गये। रात में ही दोनों ने मिलकर उसके शव को घर के पास मिट्टी खोदी और दफना दिया। दफनाने के दौरान बगल में रहने वालों को इसकी भनक लग गई। उन्होंने पुलिस को ख़बर कर दी। पुलिस ने पड़ोसी परदेसिन बाई की शिकायत दर्ज की। इस बात की जानकारी मिलते ही आरोपी बेटी और मां फरार हो गईं। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और बारीडीह में एक रिश्तेदार के घर से दोनों को सोमवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया।

लाश का पंचनामा तहसीलदार शिवम् पांडेय की मौजूदगी में कराया गया है। दोनों आरोपी मां बेटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद जेल भेज दिये गये हैं।


26-Jan-2021 9:15 AM 100

NEWS18 MADHYA PRADESH, JANUARY 26

अरुण कुमार त्रिवेदी

इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ शहर का लगातार 30 सालों तक प्रतिनिधित्व करने वालीं पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन (Sumitra Mahajan) को देश के सबसे प्रतिष्ठित पद्म भूषण (Padma Bhushan) सम्मान से नवाजा जाएगा. 77 साल की सुमित्रा ताई ने इस सम्मान का असल हकदार इंदौर की जनता को बताया है. उन्होंने कहा कि इंदौर (Indore) की जनता के प्यार ने ही उन्हें लगातार 30 साल तक सिर माथे पर बिठाए रखा और उसी का परिणाम है कि आज इतना बडा़ सम्मान मुझे सामाजिक कार्य के क्षेत्र में मिला है. मैंने जो भी काम किया उसे इंदौर की जनता ने हमेशा सराहा, कभी निंदा नहीं की. मुझे पद्म भूषण क्यों मिला ये बहुत आश्चर्य की बात है. मैने ऐसा तो बहुत कुछ नहीं किया. हां प्रामाणिकता से जरूर काम करती रही और इंदौर की जनता ने लगातार 8 बार सांसद का चुनाव जितवा दिया और प्रधानमंत्री ने स्पीकर बनने का मौका दिया.

न्यूज 18 से बातचीत के दौरान उन्होने लोगों एक संदेश भी दिया कि जीवन में जो भी मौके मिले,कुछ करने का,उस समय जितना बने उतना अच्छा काम कर दें. हो सकता है उसका परिणाम आपको बाद में मिले. सालों साल से जो मैंने पार्टी के लिए काम किया था उसे पार्टी ने भी रिकॉगनाइज किया और कई महात्वपूर्ण पद दिए, लेकिन अब सरकार ने जो पुरस्कार दिया है ये बड़ी बात है. सुमित्रा महाजन मीरा कुमार के बाद लोकसभा स्पीकर का पद संभालने वाली दूसरी महिला रही हैं.

राजनीति में दर्ज है खास रिकॉर्ड

12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलुन में जन्मी सुमित्रा महाजन के पिता संघ के प्रचारक थे. 22 साल की उम्र में इंदौर में एडवोकेट रहे स्व. जयंत महाजन से उनका विवाह हुआ. वे खुद एडवोकेट भी हैं. ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन के राजनीतिक जीवन की शुरूआत 1980 के दशक में हुई जब वे इंदौर की उपमहापौर चुनी गईं. इसके बाद भाजपा ने उन्हें इंदौर-3 से विधानसभा का टिकट दिया, लेकिन कांग्रेस के महेश जोशी ने उन्हें हरा दिया. राजनीतिक जीवन में ये उनकी एकमात्र हार थी. 1989 में उन्होंने पूर्व मंत्री प्रकाशचंद्र सेठी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. इसके बाद जीत का सिलसिला शुरू हो गया. अपनी शिष्टता,सौम्यता और साफगोई के लिए प्रसिद्ध सुमित्रा महाजन के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे तोड़ना लगभग असंभव है. वे देश की एकमात्र महिला सांसद हैं, जो एक ही लोकसभा क्षेत्र से, एक ही पार्टी से लगातार 8 लोकसभा चुनाव जीतीं.


26-Jan-2021 9:03 AM 39

'छत्तीसगढ़' संवाददाता प्रदीप मेश्राम द्वारा 

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में मानपुर के दो अलग अलग अंदरूनी इलाकों में मुखबिरी के शक पर नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की हत्या कर दी। 

बीती रात कोहका कंदाडी में 70 बरस के इंद्रशाही मंडावी, व मोरारपानी मे 20 साल के नौजवान की जान ले ली है। 

बताया गया है कि वारदात के बाद नक्सलियों ने परचे फेंककर पुलिस की मुखबिरी करने पर ग्रामीणों को मौत के घाट उतारने की चेतावनी दी है.


26-Jan-2021 8:01 AM 30

Vande Mataram | Instrumental | Harmonica | Mouth Organ | Shailesh Mogre

 

 

Shailesh Mogre


26-Jan-2021 7:08 AM 36

इजराइल में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर लोगों का गुस्सा अभी भी बरकरार है. पीएम के खिलाफ साप्ताहिक प्रदर्शन के लिए यरुशलम में हजारों लोग जमा हुए और उनसे इस्तीफे की मांग की. इसके अलावा देश के अन्य इलाकों में भी चौराहों और पुलों पर कई छोटे-छोट प्रदर्शन हुए.

दरअसल, नेतन्याहू पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और तीन मामलों में रिश्वत लेने के आरोप हैं. ये मामले उनके अरबपति सहयोगियों और मीडिया क्षेत्र के दिग्गजों से जुड़े हुए हैं. हालांकि, नेतन्याहू इन सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरोप के साथ वह उचित तरीके से देश का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं. 

पिछले साल गर्मी के मौसम से ही प्रत्येक सप्ताह इन प्रदर्शनों का आयोजन किया जा रहा है खास तौर पर यरुशलम के एक चौराहे पर नेतन्याहू के आधिकारिक आवास के निकट विरोध प्रदर्शन का आयोजन होता है. सर्दी के मौसम में भले ही इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या कम हुई हो, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा. 

इजराइल में दो साल के भीतर मार्च में चौथी बार चुनाव होंगे और प्रधानमंत्री को अपनी लिकुड पार्टी के भीतर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कोरोना वायरस संकट से निपटने के सरकार के तरीकों की वजह से भी लोगों गुस्सा है. देश में तीसरी बार लॉकडाउन अब भी लागू है और बढ़ती संक्रमण दर के बीच लागू प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है. (news18)


26-Jan-2021 7:01 AM 49

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत याचिका पर सोमवार को आदेश सुरक्षित रख लिया. फ़ारूक़ी को अभी कुछ और दिन जेल में रहना होगा.

मुनव्वर फ़ारूक़ी को 1 जनवरी को इंदौर पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. उनके अलावा चार अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. इन सभी पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाया गया था.

मुनव्वर फ़ारूक़ी इंदौर के मुनरो कैफ़े में अपना कार्यक्रम करने के लिये आये थे. उसी दौरान हिंद रक्षक संगठन के नेताओं ने वहां पहुंच कर हंगामा कर दिया.

आयोजक और कॉमेडियन को उसके बाद थाने ले जाया गया. तभी से मुनव्वर फ़ारूक़ी जेल में हैं और कई बार उन्होंने ज़मानत के लिये आवदेन किया है.

सोमवार को न्यायमूर्ति रोहित आर्य की सिंगल बेंच ने कहा, "आप अन्य लोगों की धार्मिक भावनाओं का अनुचित लाभ क्यों उठाते हैं. आपकी मानसिकता में ऐसा क्या है? आप अपने व्यवसाय के उद्देश्य के लिए यह कैसे कर सकते हैं?"

मुनव्वर फ़ारूक़ी की तरफ़ से हाज़िर हुये वकील विवेक तन्खा ने कहा, "उन्होंने इस मामलें में कोई अपराध नहीं किया है. उसे ज़मानत दी जानी चाहिये."

'ऐसे लोगों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए'

न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने कहा, "ऐसे लोगों को बख़्शा नहीं जाना चाहिए. योग्यता के आधार पर इस आदेश को सुरक्षित रखूंगा."

फ़ारूक़ी के साथ जो चार अन्य को गिरफ़्तार किया गया था उनका नाम एडविन एनथोनी, प्रखर व्यास, प्रीयम व्यास और नलिन यादव है.

फ़ारूक़ी के कार्यक्रम में भाजपा की विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ भी पहुँचे थे. गौड़ ने कहा था कि वो और उनके साथ वाले शो में गये थे और इस दौरान फ़ारूक़ी ने अभद्र टिप्पणी की थी. गौड़, हिंद रक्षक संस्था के संयोजक भी हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, "कार्यक्रम के दौरान किसी भी तरह से दूरी नहीं बना कर रखी गई थी और कोविड की गाइडलाइन का पालन नही किया जा रहा था."

गौड़ और उनके साथियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने इस दौरान फ़ारूक़ी और उनके साथ वालों के साथ मारपीट भी की थी लेकिन गौड़ ने इससे इनकार किया है.

ज़मानत मिलने के बाद भी मुश्किलें कम नहीं

वहीं अदालत में सोमवार को मौजूद एक वकील ने याचिका का विरोध करते हुये कहा, "मुनव्वर फ़ारूक़ी ने कई ऐसे वीडियो पोस्ट किए हैं जो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं जिनमें हिंदू देवी देवताओं पर टिप्पणियां की गईं हैं."

उन्होंने आगे कहा कि इसकी वजह से दूसरे कॉमेडियन भी इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं.

हाईकोर्ट में पिछले हफ़्ते भी मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत पर सुनवाई नहीं हो पायी थी, क्योंकि पुलिस अदालत में केस डायरी ही नहीं ला पाई थी. इससे पहले पाँच जनवरी को सत्र न्यायालय ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी.

लेकिन मुनव्वर फ़ारूक़ी को ज़मानत मिलने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं होंगी. उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस ने काफ़ी पुराने एक मामले में प्रोडक्शन वारंट जारी किया है. पिछले सप्ताह प्रयागराज पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट को सीजेएम कोर्ट इंदौर और इंदौर सेंट्रल जेल के अधिकारी को प्रस्तुत किया.

जानकारी के मुताबिक़, 19 अप्रैल 2020 को पेशे से वकील और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रता आशुतोष मिश्रा ने मुनव्वर फ़ारूक़ी के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज कराया था.

इसमें उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया गया था. उन पर आरोप है कि सोशल मीडिया पर मौजूद उनके एक वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं और गोधरा ट्रेन कांड में शिकार हुये लोगों का मज़ाक़ उड़ाया गया था.

फ़ारुक़ी पर मामला दर्ज हो जाने के नौ माह तक प्रयागराज पुलिस ने कुछ भी नहीं किया. लेकिन इंदौर का मामला सामने आने के बाद प्रयागराज पुलिस हरकत में आ गई है.

यही वजह है कि उनके क़रीबियों का मानना है कि इंदौर में राहत मिलने के बाद भी फ़ारूक़ी को आगे भी उत्तर प्रदेश की जेल में वक़्त गुज़ारना पड़ेगा. (bbc)


26-Jan-2021 6:50 AM 186

"आपकी बेटी छह महीने से ज़्यादा ज़िंदा नहीं रहेगी. इसके लिए भारत में कोई इलाज नहीं है. तीरा का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने हमें पहले दिन यही कहा था."

पाँच महीनों की तीरा के पिता मिहिर कामत ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए ये बात कही.

पिछले कुछ दिनों से तीरा का मुंबई के एसआरसीसी अस्पताल में इलाज चल रहा है.

मिहिर कामत ने बताया, "जन्म के समय इसकी आवाज़ बहुत तेज़ थी. जन्म के बाद जब वो रोयी तो वेटिंग रूम तक आवाज़ पहुँच गयी थी. उसका दिमाग़ तेज़ था और आम बच्चों की तुलना में थोड़ी लंबी भी थी. तीर की तरह लंबी, इसलिए इसका नाम तीरा रखा."

जन्म के बाद तीरा घर आ गई और सब कुछ ठीक था. लेकिन जल्दी ही स्थिति बदलने लगी. मां का दूध पीते वक़्त तीरा का दम घुटने लगता था. शरीर में पानी की कमी होने लगती थी. एक बार तो कुछ सेकेंड के लिए उसकी साँस थम गई थी.

इसके बाद टीकाकरण के दो बूंदों के वक़्त भी तीरा का दम जब घुटने लगा तब माता-पिता को ख़तरे का अंदाज़ा हुआ.

डॉक्टरों ने बच्ची को न्यूरोलॉजिस्ट से दिखाने को कहा. न्यूरोलॉजिस्ट ने पाया कि बच्ची एसएमए टाइप 1 से पीड़ित है. नाम से अंदाज़ा नहीं लगता है कि बीमारी कितनी ख़तरनाक है.

प्रोटीन बनाने वाला जीन

दरअसल इंसानों के शरीर में एक जीन होता है, जो प्रोटीन बनाता है और इससे मांसपेशियां और तंत्रिकाएं जीवित रहती हैं. लेकिन तीरा के शरीर में यह जीन मौजूद नहीं था.

इस वजह से उनका शरीर प्रोटीन नहीं बना पा रहा था. इसके चलते तीरा के शरीर की तंत्रिकाएं निर्जीव होने लगी थीं. दिमाग़ की मांसपेशियां भी कम सक्रिय हो रही थीं और निर्जीव होती जा रही थीं.

साँस लेने से लेकर भोजन चबाने तक, मस्तिष्क की मांसपेशियों से संचालित होता है. तीरा के शरीर में यह सब नहीं हो रहा था. ऐसी स्थिति को एसएमए यानी स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉपी कहते हैं. यह कई प्रकार का होता है और इसमें टाइप 1 सबसे गंभीर होता है.

13 जनवरी को तीरा को एसआरसीसी अस्पताल, मुंबई में साँस लेने में तकलीफ़ के चलते दाख़िल कराया गया. तीरा के एक फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया था, इसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया.

मिहिर कामत ने बताया, "वह अभी वेंटिलेटर पर है. अभी ठीक है. लेकिन लंबे समय तक उसे वेंटिलेटर पर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखने से ट्यूब में संक्रमण का ख़तरा होता है. अभी उसे सीधे फ़ीड कराते हैं."

भारत में उपलब्ध नहीं इलाज

तीरा की देखभाल करने के अलावा प्रियंका और मिहिर के सामने बेटी के इलाज का ख़र्चा उठाने की भी चुनौती है.

पहली मुश्किल तो यही है कि इस बीमारी के इलाज के लिए शरीर में उस जीन को रीलीज किया जाता है, लेकिन यह इलाज भारत में कहीं भी उपलब्ध नहीं है.

मिहिर कामत बताते हैं. "इसके अलावा तीरा की स्थिति भी नाज़ुक है. उसे कहीं बाहर ले जाना भी मुमकिन नहीं है. ऐसे में जो भी करना होगा वह भारत में ही करना होगा."

यही वजह है कि इस बीमारी में असर करने वाले एक ख़ास इंजेक्शन को अमेरिका से मँगाने की कोशिश की जा रही है. इस इंजेक्शन की क़ीमत पर आपको भले यक़ीन नहीं हो लेकिन सच यही है कि यह 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन है.

उम्मीद की किरण

मिहिर एक आईटी सर्विस कंपनी में काम करते हैं जबकि प्रियंका एक फ्रीलांस इलेस्ट्रेटर हैं. दोनों इस इंजेक्शन की क़ीमत सुनकर सन्नाटे में आ गए थे.

लेकिन कुछ दिनों के बाद इन लोगों ने एक इंटरनेशनल न्यूज़ चैनल पर एक ख़बर देखी जिसमें लोग कनाडा में ऐसी मुश्किल बीमारियों के इलाज के लिए क्राउडफ़ंडिंग का इस्तेमाल कर रहे थे. इस ख़बर से मिहिर और प्रियंका को भी उम्मीद दिखी.

मिहिर ने बताया, "पहले तो काफ़ी मुश्किल लग रहा था. डॉक्टरों ने तो कह दिया था कि बेटी छह महीने से ज़्यादा नहीं बचेगी, क्योंकि भारत में कोई इलाज ही नहीं है. मैंने अपनी पत्नी को पहले दिन ही बता दिया था. मैंने कहा कि अगर तुम रोना चाहती हो तो अभी रो लो क्योंकि आगे लंबा संघर्ष है."

मिहिर ने बताया, "मैंने अपने जीवन में कभी 16 करोड़ रुपये नहीं देखे. लेकिन हमने सोचा कि शुरुआत करनी चाहिए. कनाडा जैसे देशों में लोग क्राउडफ़ंडिंग करके पैसे जुटा लेते हैं. एक शख़्स को ऐसा करते देख हम लोगों को भरोसा हुआ कि ऐसा किया जा सकता है."

माता-पिता दोनों ने सोशल मीडिया पर तीरा की स्टोरी शेयर की. इसके बाद उन्होंने तीरा फ़ाइट्स एसएमए करके इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज बनाया. इस पर वे तीरा के स्वास्थ्य के बारे में लगातार जानकारी देते हैं. लोगों से मदद की अपील करते हैं.

उन्होंने तीरा के इलाज के लिए पैसे जुटाने के लिए अभियान भी चलाया है.

मिहिर ने बताया, "लोग हमारी कहानी सुनते हैं. उन्हें हमारी कहानी उनकी अपनी लगती है. हमने लोगों को हर दिन का अपडेट बताना शुरू किया है. लोगों को लगता है कि ये उनकी अपनी बेटी, भतीजी है. लोगों ने मदद भी की. शूटिंग लोकेशन से एक कारपेंटर ने मदद भेजी. बड़े लोगों की मदद भले नहीं मिली हो लेकिन छोटे-छोटे गांवों से लोग मदद भेज रहे हैं."

कई दूसरे लोगों ने भी तीरा के लिए मदद जुटाने की अपील की है. वहीं दूसरी ओर गंभीर बीमारी से पीड़िता तीरा अपनी बड़ी-बड़ी आंखों के साथ हमेशा मुस्कुराती नज़र आती है.

कई लोगों की मदद से पैसा जमा हो रहा है और लगभग 16 करोड़ रूपये जमा हो गए हैं. लेकिन 16 करोड़ रुपये तो इंजेक्शन की क़ीमत है. इसके अलावा दूसरे ख़र्चे भी हैं.

डॉक्टरों ने अमेरिका से इंजेक्शन मँगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, हालांकि इसमें वक़्त लगेगा. इंजेक्शन की क़ीमत के अलावा कामत परिवार के सामने दूसरी चुनौतियां भी हैं.

मिहिर ने बताया, "पहली बात तो यही है कि हम ये भुगतान कैसे करेंगे. इतनी बड़ी रक़म है. हममें से किसी ने कभी इतनी बड़ी रक़म का भुगतान नहीं किया है. क्या हमें इसके भुगतान के लिए ट्रांसफ़र शुल्क देना होगा? क्या डॉलर एक्सचेंज के पैसे देने होंगे? हमारे पास इन सबका कोई जवाब नहीं है."

मिहिर इसके साथ ही कहते हैं, "दुर्लभ दवाईयों को कस्टम शुल्क से बाहर रखा जाता है. लेकिन हमें नहीं मालूम है कि यह दवाई जीवन रक्षक दवाईयों की सूची में शामिल है या नहीं. क्या हमें इसके लिए जीएसटी का भुगतान करना होगा? अगर हमें 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी का भुगतान करना पड़ा तो वह भी एक बड़ी रक़म होगी."

मिहिर कामत ने बताया, "पैसे जमा करना बेहद मुश्किल है. लेकिन हम लोग कर रहे हैं. लेकिन अगर हमें सरकार थोड़ी मदद करके टैक्स में राहत दे दे तो हमारे अलावा दूसरे सभी प्रभावित परिवारों की मदद हो जाएगी. इसके अलावा देश भर में जीन थेरेपी की शुरुआत भी होनी चाहिए."

मिहिर का यह भी मानना है कि जब तक कंपनियां इन दवाईयों को भारत नहीं लाएंगी, प्रभावित बच्चों को इलाज नहीं मिल पाएगा. इसके लिए उन्हें विदेश जाना होगा. वहां जाना, रहना और प्रवासी के तौर पर जाने की अनुमति लेना, इन समस्याओं को दूर करने की ज़रूरत है.

बॉम्बे हॉस्पिटल, मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल सूर्या ने बताया, "एसएमए चार तरह की स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉपी में एक है. इनमें पहला सबसे गंभीर है. यह छह महीने तक के बच्चों में पाया जाता है. इसमें तंत्रिकाएं निर्जीव हो जाती हैं. दिमाग़ को कोई जानकारी नहीं मिलती. मस्तिष्क की मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं और आख़िर में काम करना बंद कर देती हैं. ऐसे में बच्चे का बचना मुश्किल होता है. आज भी इसका कोई इलाज नहीं है."

"हालांकि इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका में 2019 में ज़ोल्गेनस्मा थेरेपी को अनुमति मिली. यह इलाज दो साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाती है. हालांकि इसके ज़रिए पूरे नुक़सान को ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ हद तक बच्चा ठीक हो जाता है, कुछ प्रभाव लौट आते हैं."

"इस इंजेक्शन को देने के बाद शरीर में तंत्रिकाओं का निर्जीव होना बंद हो जाता है. कमज़ोर मांसपेशियों को दिमाग़ से फिर संकेत मिलने लगते हैं और वे धीरे-धीरे मज़बूत होने लगते हैं. बच्चा बड़ा होकर चलने फिरने लायक़ हो जाता है. यह इलाज काफ़ी महंगा है लेकिन प्रभावी है."

तीरा अभी महज़ पाँच महीने की है, उनका तंत्रिका तंत्र पूरी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है लेकिन उसकी मांसपेशियां काफ़ी कमज़ोर हो गई हैं, लेकिन अभी वह हिल डुल सकती है.

मिहिर ने बताया, "यह इंजेक्शन एक बार ही देना होता है. अगर समय से इंजेक्शन मिल जाए तो तीरा की मांसपेशियां मज़बूत हो जाएंगी. शरीर प्रोटीन बनाना शुरू कर देगा और वह एक सामान्य ज़िंदगी जी पाएगी. ठीक से खा पाएगी और साँस ले पाएगी."

देशभर में एसएमए मरीज़ों की स्थिति

अल्पना शर्मा के बेटे को एसएमए टाइप 2 2013 में हुआ था. उनके बेटे के इलाज में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मदद की थी. 2014 के बाद से अल्पना ने भारत में एसएमए पीड़ित बच्चों के लिए क्योर एसएमए फ़ाउंडेशन बनाया. यह संस्थान एसएमए पीड़ित बच्चों की मदद करता है.

अल्पना शर्मा ने बीबीसी मराठी से कहा, "एसएमए का कुछ ही इलाज उपलब्ध है. महंगा होने के चलते सभी बच्चों को वह मिल भी नहीं पाता. कई दवा कंपनियां अपने कारपोरेट सोशल रिस्पांस्बिलिटी में इन दवाओं को उपलब्ध कराती हैं, लेकिन वहां से इसका मिलना लकी ड्रा हासिल करने जैसा है. जबकि हर किसी को जीने का अधिकार है. कोई भी मां-बाप बच्चे को अपनी आंखों के सामने मरता नहीं देखना चाहता. हम सरकार से इस दिशा में पहल करने की माँग करते हैं."

"अगर ये कंपनियां इलाज को भारत में ले भी आएं तो भी लोग उसका ख़र्च नहीं उठा पाएंगे. इसके लिए सरकार को पहल करनी होगी. अभी तीरा के माता-पिता संघर्ष कर रहे हैं. देश भर में ऐसे कई माता-पिता होंगे."

तीरा का जन्म अगस्त महीने में कोविड लॉकडाउन के दौरान हुआ था. कोविड के चलते माता-पिता को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है.

मिहिर ने बताया, "हमलोग देखते हैं कि तीरा को तकलीफ़ हो रही है. लेकिन उसे बचाने के लिए यह ज़रूरी है. जब वह तकलीफ़ में होती है तो हमलोग भी तकलीफ़ में होते हैं. लेकिन इसका कोई निदान नहीं है. यह तब तक चलेगा जब तक उसे ज़रूरी इलाज नहीं मिल जाए. लेकिन हम दुनिया को बताना चाहते हैं कि उम्मीद बाक़ी है."

मिहिर ने यह भी कहा, "हम उम्मीदों को ज़िंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं. अगर मौक़ा मिले तो बच्चे के जीवन के लिए उसे गंवाना नहीं चाहिए. दुनिया भर में लोग ऐसा कर रहे हैं. हमलोगों ने निश्चिय कर लिया है कि उसकी तकलीफ़ को दूर करने वाला इंजेक्शन उसे लगवा कर रहेंगे." (bbc)


26-Jan-2021 6:38 AM 80

मेक्सिको के 'ला प्रेन्सा' नाम के अखबार ने एक हैरान करने वाले मामले को रिपोर्ट किया है. मेक्सिको के एक शहर में एक महिला ने अपने पति पर चाकू से इसलिए हमला कर दिया क्योंकि महिला ने पति के मोबाइल में उसकी और एक कम उम्र की महिला की साथ में कुछ अंतरंग तस्वीरें देख लीं. बाद में पता चला कि वो महिला कोई और नहीं वो खुद है!

सुनने में ये खबर थोड़ी कंफ्यूजिंग लग सकती है मगर ये चौंकाने वाला मामला मेक्सिको के सोनोरा का है. इस मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ लोगों ने पुलिस को तब फोन कर के बुलाया जब उन्होंने अपने पड़ोस के घर में घरेलू हिंसा की आवाजें सुनीं. रिपोर्ट के मुताबिक लियोनोरा नाम की महिला ने अपने पति जुआन (Juan) पर जलन के कारण चाकू से हमला कर दिया. उसने अपने पति के फोन में एक कम उम्र की महिला के साथ पति की कुछ अंतरंग तस्वीरें देख ली थीं जिसके बाद वो आग-बबूला हो उठी. उसने जलन और गुस्से में चाकू उठाया और पति पर हमला बोल दिया. उसने पति को सफाई में कुछ कहने का मौका ही नहीं दिया और पति को अपशब्द देते हुए चाकू चलाना शुरू कर दिया.

पुलिस को दी गई पति की गवाही के अनुसार, जुआन ने खुद को बड़ी मुश्किल से चाकुओं के वार से बचाया जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो सकते थे. उन्होंने अपनी पत्नी के गुस्से को शांत कर जानने की कोशिश की कि वो क्यों उनपर हमला कर रही हैं. लियोनोरा ने जुआन को फोन की तस्वीरें दिखाईं. तब जुआन ने उन्हें बताया कि तस्वीर में उनके साथ दिख रही महिला लियोनोरा ही हैं.

जुआन ने अपनी पत्नी और फिर पुलिस को इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने अपनी पत्नी लियोनोरा और उनकी कुछ पुरानी फोटोज को एक पुराने इमेल से खोजा था. ये तस्वीर उस वक्त की थी जब दोनों की शादी नहीं हुई थी और दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे थे. तब दोनों ने अपनी कुछ अंतरंग तस्वीरें खींची थीं. ये तस्वीरें जुआन के एक पुराने इमेल में थीं. वहां से निकालकर उन्होंने तस्वीरों को अपने मोबाइल में सेव कर लिया. उन तस्वीरों में लियोनोरा काफी पतली थीं और यंग भी थीं. उस वक्त वो काफी मेकअप किया करती थीं. मगर वक्त के साथ उनके वजन और रूप-रंग में इतना परिवर्तन आया कि वो खुद को ही नहीं पहचान पाईं.

लियोनोरा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और अब जेल में रह कर वो अदालत के फैसले का इंतजार कर रही हैं. उनपर घरेलू हिंसा का आरोप लगा है. अगर उन्हें दोषी पाया गया तो उन्हें जेल में वक्त बिताना पड़ेगा. (news18)


26-Jan-2021 6:35 AM 23

दलियान. चीन के लिओनिंग प्रांत में स्थित एक गैस पाइपलाइन में रिसाव होने के कारण विस्फोट हो गया. यह घटना सोमवार सुबह की है. ग्लोबल टाइम्स की एक खबर के मुताबिक इस विस्फोट में दो लोगों की मौत और करीब 8 लोग घायल हो गये हैं. जबकि गैस कंपनी के तीन लोग लापता हैं. मौके पर फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियां आ चुकी हैं और आग बुझाने का काम जारी है. फिलहाल पुलिस भी मौके पर पहुंच घटना की जांच कर रही है. (news18)


26-Jan-2021 6:33 AM 35

नई दिल्ली, 26 जनवरी | कांग्रेस तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीत की उम्मीद कर रही है, जहां वह द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतरेगी। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी तमिलनाडु पर विशेष ध्यान दे रहे हैं और वह 10 दिनों में दो बार दक्षिणी राज्य की यात्रा कर चुके हैं और फरवरी में फिर से राज्य का दौरा करने की उम्मीद है। राहुल गांधी राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) पर लगातार हमलावर हैं। अपने एक भाषण में कांग्रेस नेता ने कहा, प्रधानमंत्री एक भाषा, एक संस्कृति और एक राष्ट्र कहते हैं। क्या तमिल भारतीय भाषा नहीं है? क्या तमिल इतिहास भारतीय इतिहास नहीं है?

भाजपा पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने अपने एक अन्य भाषण में कहा, आपके साथ यहां रहना मेरे लिए एक सम्मान की बात है। जब भी मैं तमिलनाडु आता हूं, तो मैं आपके उत्साह और आपके जीवन जीने के तरीके से प्रभावित होता हूं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक गैर-भाजपा शासित राज्य में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष पर हमला करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ईडी और सीबीआई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की जांच क्यों नहीं कर रहे हैं? मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को इसके बदले क्या दिया? यह प्रमुख सवाल है।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी का तमिलनाडु सरकार पर रिमोट कंट्रोल है, लेकिन राज्य के लोग बैटरी को अपने रिमोट कंट्रोल से निकालकर फेंक देंगे।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु चुनाव पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसे पूरी उम्मीद है कि द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन चुनावों में अपना परचम लहराएगा।

--आईएएनएस


26-Jan-2021 6:31 AM 26

प्रयागराज, 26 जनवरी | उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया है और अपर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ के 30 सितंबर 20 के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को प्रशासक नियुक्त करके 28 फरवरी तक बोर्ड का चुनाव कराकर चार्ज सौंपने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि 30 सितंबर का आदेश रद होने से इस दौरान लिए गए फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने नसीमुद्दीन व अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का चुनाव पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के पहले करा लिया जाना चाहिए। एक अप्रैल, 2020 को कार्यकाल समाप्त हो गया।

कोविड-19 के प्रकोप के कारण छह माह के लिए कार्यकाल बढ़ाया गया। इसके बाद भी चुनाव न कराकर कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है। ऐसा करने का राज्य सरकार को अधिकार नहीं है।

याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में छह सौ से कम वोटर हैं। ऐसे में शारीरिक दूरी मानक का पालन करते हुए चुनाव कराया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को बोर्ड के कार्यकाल बढ़ाने की अधिकारिता नहीं है। ऐसी आपात आवश्यकता नहीं थी, जिससे कार्यकाल बढ़ाना अपरिहार्य था। वहीं, सरकार का कहना था कि कोरोना संक्रमण के चलते डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने जिसे नहीं माना और चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड कार्यकाल 30 सितंबर, 2020 को दूसरी बार खत्म हो गया था, जिसे जुफर फारूकी के नेतृत्व में छह महीने का विस्तार दे दिया गया था। इससे पहले यूपी सरकार ने एक अक्टूबर से छह माह का विस्तार दिया था। कोरोना संक्रमण के कारण सुन्नी वक्फ बोर्ड का चुनाव नहीं कराए जा सके थे।

--आईएएनएस


26-Jan-2021 6:29 AM 32

पटना, 26 जनवरी | बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के सोमवार को जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष तथा बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात के बाद अब तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि सिंह जदयू नेता चौधरी को पुराना मित्र बता रहे हैं। लोजपा के मटिहानी क्षेत्र से लोजपा के विधायक राजुकमार सिंह सोमवार को मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की और दोनों के बीच लंबी चर्चा हुई। मुलाकात के बाद सिंह ने पत्रकारों को इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकालने की नसीहत देते हुए चौधरी को पुराना मित्र बता दिया।

िंसंह ने हालांकि एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि वे राजग में हैं। बिहार में राजग के नीतीश कुमार नेता हैं और दिल्ली में नरेंद्र मोदी नेता हैं। लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना किए जाने संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि चिराग पासवान क्या बोलते हैं और नीतीश कुमार को लेकर क्या टिप्पणी करते हैं इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में बिहार में बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक जमां खां जदयू में शामिल हो गए हैं। इसके बाद लोजपा के एकमात्र विधायक सिंह के जदयू नेता चौधरी से मिलने के बाद चर्चा का राजनीतिक बाजार गर्म है।

बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू को 43 सीटें मिली थी, लेकिन जमां खां के जदयू में शामिल हो जाने के बाद जदयू के विधायकों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है।

सिंह बिहार चुनाव में बेगूसराय के मटिहानी सीट से चुनाव जीते हैं। उन्होंने जदयू के विधायक रहे बोगो सिंह को हराया था। बिहार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है।

--आईएएनएस


26-Jan-2021 6:28 AM 35

तिरुवनंतपुरम. केरल में कडक्कावूर के पास 35 वर्षीय महिला द्वारा अपने ही नाबालिग बेटे का कथित तौर पर यौन शोषण करने के मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दिव्या गोपीनाथ करेंगी. पुलिस ने यह जानकारी दी. गोपीनाथ तिरुवनंतपुरम की पुलिस उपायुक्त हैं. इस बाबत पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने सोमवार को आदेश जारी किए. आरोपी महिला ने दावा किया था कि वह निर्दोष है. उसके विरक्त पति एवं उसकी दूसरी पत्नी ने झूठे मामले में फंसाया है. हाल ही में महिला को केरल उच्च न्यायालय ने जमानत प्रदान की थी. महिला को पोक्सो अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था.

वहीं एक अन्‍य केस में केरल की एलडीएफ सरकार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमान चांडी के खिलाफ चल रहे सोलर घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की है. इस मामले में चांडी के अलावा पांच अन्य लोग भी नामजद हैं और इनके खिलाफ इस चर्चित सोलर घोटाले में यौन उत्पीड़न के आरोप हैं.

हालांकि, अब सीबीआई की तिरुवनंतपुरम यूनिट को आठ साल पुराने इस मामले को अपने हाथ में लेने का निर्णय करना है. इस घोटाले में जिन लोगों के नाम शामिल हैं वे हैं चांडी के अलावा कांग्रेस सांसद और राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके अदूर प्रकाश, हिबी ईडन, कांग्रेस विधायक और राज्य में मंत्री रह चुके एपी अनिल कुमार, बीजेपी के वर्तमान उपाध्यक्ष एपी अब्दुल्लाकुट्टी जो घोटाले के समय कांग्रेस के विधायक थे. दिलचस्प यह है कि शुक्रवार को चांडी को संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की चुनाव समिति का संयोजक नियुक्त किया गया. कांग्रेस ने केरल सरकार के इस निर्णय को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया और चांडी ने कहा कि वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं. (news18)


26-Jan-2021 6:26 AM 31

पटना. जनता दल युनाइटेड (JDU) ने विरोधियों को जबाब देने के लिए अपने मासिक पत्र 'जेडीयू संधान' का लोकार्पण किया है. इस नए मासिक मुख्यपत्र के जरिए पार्टी हर महीने विरोधियों के उठाए गए सवालों का मजबूती से जबाब देगी. महाराष्ट्र की शिवसेना के मुख्यपत्र सामना की तर्ज पर जेडीयू ने सोमवार को अपने मुख्यपत्र का लोकार्पण किया. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने पटना (Patna) में जेडीयू के मुख्यपत्र का लोकार्पण किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि विचार की धार जितनी मजबूत होगी पार्टी उतनी ही मजबूत होगी. इस पत्र के जरिए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं तक बात पहुंचाई जाएगी.

वर्तमान में जेडीयू का यह मासिक पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में निकाला जाएगा. आरसीपी सिंह ने आने वाले दिनों में हिंदी और अंग्रेजी के साथ भोजपुरी, मैथली और अंगिका में भी मुख्यपत्र निकाले जाने की बात कही. हिंदी में मुख्यपत्र का संपादन डॉ. वरुण ने किया है जबकि अंग्रेजी में इसका संपादन डॉ. विमलेंदु ने किया है. इस मौके पर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, प्रो. रामबचन राय सहित कई लोग मौजूद रहे.

विरोधियों के आरोपों-गलतबयानी का जबाब देगी JDU की मासिक पत्रिका

अपने मुख्यपत्र 'जेडीयू संधान' के जरिए जेडीयू न सिर्फ पार्टी की गतिविधियों और कार्यक्रर्मो को लोगों तक ले जाएगी बल्कि विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे गलतफहमियों को भी दूर करने का काम करेगी. साथ ही पार्टी के बारे में की जाने वाली गलत बयानी का भी जेडीयू मजबूती से जबाब देगी.

इस मासिक पत्रिका के जरिए सरकार की योजनाओं को आम जन तक प्रमुखता से पहुचांने का काम करेगी. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बिहार सरकार लोगों के लिए जो लगातार काम कर रही है, 'जेडीयू संधान' के जरिए उन कामों को जनता तक पहुंचाने का काम किया जाएगा. (news18)


26-Jan-2021 6:24 AM 34

नई दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर और जर्मनी की पर्सनल केयर कंपनी सीबामेड एक बार फिर आमने सामने हैं. इस बार दोनों के बीच विज्ञापनों पर तकरार हुई है. जर्मनी की स्किन केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी सीबामेड अपने साबुनों की तुलना हिंदुस्तान लीवर के डब (Dove)और दूसरे नहाने वाले साबुनों से करने की रणनीति से पीछे हटने से इनकार कर दिया है. यानी इस थीम के आधार पर सीबामेड ने अपने नए पेड कंटेंट की शुरुआत भी कर दी है.

मनी कंट्रोल से बातचीत करते हुए सीबामेड के जनरल काउंसिल और वाइस प्रेसीडेंट लीगल के संदीप के राठौड़ ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ऐसे तुलनात्मक विज्ञापनों के पक्ष में है. इनके पीछे वैज्ञानिक तथ्य हैं. राठौड़ के मुताबिक बॉम्बे हाईकोर्ट की राय है कि इस तरह के तुलानात्मक विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को सही जानकारियां मिलेंगी. कोर्ट की राय है कि इस तरह के विज्ञापनों में प्रतिद्वंदी कंपनियों के नाम के नाम का जिक्र करने से कोई नुकसान नहीं है. लेकिन ऐसे विज्ञापनों में नेगेटिव भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. संदीप ने आगे कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए हम Dove is not perfect ना कहकर Sebamed is perfect कहने की रणनीति अपना सकते हैं.

सीबामेड ने 8 जनवरी को शुरू किया था एड कैंपन

सीबामेड ने 8 जनवरी को एक विज्ञापन अभियान शुरू किया था . इसमें कंपनी के उत्पादों की पीएच (pH) वैल्यू की तुलना HUL के डब, पीयर्स, लक्स और यहां तक रिन डिटर्जेंट बार से की गई थी. इस विज्ञापन के खिलाफ HUL ने बॉम्बे हाईकोर्ट  में याचिका दाखिल की गई है. इस याचिका की सुनवाई करते हुए बॉम्बे HC से सीबामेड को कुछ राहत मिली थी. जिसमें कुछ बदलावों के साथ इन विज्ञापनों को जारी रखने की मंजूरी दे दी गई थी. इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए संदीप ने का कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सीबामेड नहाने वाले साबुन की तुलना कपड़े धोने वाले साबुन से नहीं करता है. इस चीज को ध्यान में रखते हुए सेबमेड अब अपने नए विज्ञापन में HUL के डब जैसे साबुन से कर रहा है. सेबमेड की रणनीति कुछ बदलावों के साथ अपने इस विज्ञपन अभियान को जारी रखने की है.

सीबामेड का बचाव, लोगों को करना चाहते हैं जागरूक

विज्ञापन मेंे नकारात्मक पक्ष दिखाने के आरोपों पर सीबामेड ने कहा कि वे ग्राहकों को pH वैल्यू को लेकर जागरूक करना चाहते हैं. (pH वैल्यू किसी प्रोडक्ट में एसिड की मात्रा बताता है. कम पीएच का मतबल है कि कि किसी साबुन में एसिड की मात्रा कम है.) इस तरह का तुलनात्मक विज्ञापन ग्राहकों के मन में pH वैल्यू के प्रति जागरूकता पैदा करने का सरल तरीका है. वहीं मनी कंट्रोल ने HUL से बातचीत की कोशिश की. लेकिन उनकी तरफ से ईमेल पर कोई जवाब नहीं आया है. (news18)


26-Jan-2021 6:21 AM 34

जहानाबाद. बिहार के जहानाबाद में अपराधी बेखौफ हैं. सोमवार की शाम यहां के नगर थाना क्षेत्र के इरकी गांव में महिला टीचर की बदमाशों ने लूटपाट के दौरान हत्या कर दी. मृतक की पहचान सुल्तान हैदर काजमी की पत्नी नुजहत फातिमा के रूप में की गई है. हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है. लेकिन, घर में बिखरे सामान से अंदेशा जताया जा रहा है कि लूटपाट की गई है और विरोध जताने के कारण लुटेरों ने उनकी हत्या कर दी होगी. महिला के हाथ और पांव बंधे हुए थे और यहां-वहां कपड़े बिखरे पड़े थे.

स्थानीय लोगों ने बताया कि नुजहत फातिमा मूल रूप से पाली थाना क्षेत्र के अलीनगर पाली गांव की रहने वाली थी. वो वर्तमान में परसबिगहा थाना क्षेत्र के मलवालिया गांव में प्राथमिक विद्यालय में पोस्टेड थीं. हाल ही में उन्होंने इरकी में नया घर बनवाया था और उसमें अकेली रह रही थीं. उनका पूरा परिवार झारखंड की राजधानी रांची में रहता है. वारदात के वक्त वो घर में अकेली थीं. इसलिए यह आशंका जताई जा रही है कि अपराधी उनके घर में घुसे होंगे और उन्होंने उन्हें बंधक बना लिया होगा. इसके बाद घर में लूटपाट की और नुजहत फातिमा के विरोध जताने पर उनकी हत्या कर दी गई.

वारदात की सूचना मिलने के बाद एसडीपीओ अशोक कुमार पांडे और नगर थाना अध्यक्ष रवि भूषण पूरे दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने वहां का मुआयना कर पूरे मामले की जानकारी ली. घर का कोई भी सदस्य यहां नहीं होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है. सरेशाम हुई इस घटना से आस-पास के लोगों में डर और दहशत का माहौल है. पुलिस अपराधियों की पहचान के लिए डॉग स्क्वायड और घटनास्थल से साक्ष्य (सबूत) जुटाने के लिए एफएसएल की टीम बुला रही है. पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. (news18)


26-Jan-2021 6:19 AM 25

लिस्बन. पुर्तगाल के मध्यमार्गीय-दक्षिणपंथी उदारवादी राष्ट्रपति मार्केलो रेबेलो डी सोसा चुनाव जीत गए हैं. इसके साथ ही एक बार फिर वह देश के राष्ट्रपति होंगे. पुर्तगाल में राष्ट्रपति चुनाव के लिए रविवार को मतदान हुआ था. जानकारी के मुताबिक उन्हें 61.5 प्रतिशत मत मिल चुके हैं. जबकि चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोटों की जरूरत होती है. मशहूर टेलीविजन हस्ती रहे 72 वर्षीय सोसा लगातार 60 फीसदी या इससे अधिक लोगों की पसंद बने रहे हैं. पुर्तगाल में राष्ट्र प्रमुख के पास विधायी शक्तियां नहीं होने के बावजूद देश को चलाने में उनकी प्रभावशाली भूमिका होती है. विधायी शक्तियां संसद एवं सरकार के पास ही होती हैं.

पुर्तगाल में चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल करने होते हैं. मगर कोरोना के चलते मतदान के प्रतिशत में कमी दर्ज की गई है. प्रशासन ने मतदान केंद्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी की थी और साथ ही वोटिंग के घंटों को भी बढ़ाया था ताकि भीड़ न हो. इसके अलावा वोटरों को अपने साथ पैन और सैनिटाइजर भी लाने को कहा गया था. मार्सेलो रेबेलो डी सोसा मार्च, 2016 में राष्ट्रपति चुने गए थे. इस बार पहले से ही उनकी जीत तय मानी जा रही थी. पुर्तगाल के टेलीविजन की जानी-मानी हस्ती माने जाने वाले सोसा प्रोफेसर होने के साथ-साथ संविधान व प्रशासनिक कानून के भी विशेषज्ञ हैं. कहा जाता है कि वह सिर्फ 4-5 घंटे ही सोते हैं और रोज दो किताबें पढ़ते हैं.

सात लोग थे दौड़ में शामिल

पुर्तगाल के राष्ट्रपति की दौड़ में सात लोग शामिल थे. मगर सोसा ने एक बार फिर से बाजी मार ली. हालांकि चुनावों से पहले ही कहा जा रहा था कि उन्हें 60 फीसदी से ज्यादा वोट मिल सकते हैं. उनके बाद दूसरे नंबर पर रहने वाली एना गोमेज को महज 14.80 फीसदी वोट मिलने की ही बात कही गई थी. (news18)


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