राजनीति

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20-Jul-2021 8:27 PM (43)

अरुण सिंह

मुंबई. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले मंगलवार को अपने उस बयान से पलटते नजर आए जिसमें वो लगातार कह रहे थे कि भविष्य में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा, 'मैंने कोई बयानबाज़ी नहीं की, सिर्फ अपनी पार्टी आगे बढ़ाने के लिए काम किया, यही काम एनसीपी करती है और यही काम शिवसेना भी करती है. सबको अपनी पार्टी आगे बढ़ाने का हक़ है.' उल्लेखनीय है कि शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस तीनों मिलकर महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार चला रहे हैं.

पटोले ने कहा, 'हमारी पार्टी महाराष्ट्र में क्यों नहीं सबसे बड़ी बनेगी? हमारा बेस रहा है महाराष्ट्र, उसको मज़बूत करना हमारा काम है. राहुल गांधी ने पार्टी को मज़बूत करने का प्लान दिया है.' इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि महाराष्ट्र में एमवीए सरकार 5 साल चलेगी और इसमें कोई दो राय नहीं है. पटोले ने बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के उतरेगी, जबकि आगामी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में पार्टी नेतृत्व फैसला करेगा चुनाव अकेले लड़ना है या गठबंधन में.

पिछले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पर परोक्ष हमला बोलते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने बीते 14 जुलाई को कहा था कि 2014 में उनकी पार्टी के साथ 'धोखा' किया गया था और वह अब उसी को ध्यान में रखकर 2024 के आम चुनाव की तैयारी कर रही है. पटोले ने यहां संवाददाताओं से यह भी कहा था कि उन्हें विपक्षी भाजपा को निशाना बनाने का दायित्व दिया गया था, शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा या शिवसेना को नहीं.

भविष्य में कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने की प्राय: बात करते रहने वाले पटोले ने कहा था, 'हमें (कांग्रेस) 2014 में धोखा दिया गया था. उसे ध्यान में रखते हुए हम अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं.' पटोले का इशारा महाराष्ट्र में 2014 के विधानसभा चुनाव में राकांपा के अकेले लड़ने के कदम की ओर था.
कांग्रेस के एक तबके का मानना है कि राकांपा के निर्णय से भाजपा को लाभ हुआ जिसने 122 सीट जीती थीं और सरकार बनाने का दावा किया था. (इनपुट भाषा से भी)(news18.com)


20-Jul-2021 3:59 PM (41)

अनूप कुमार

नई दिल्‍ली. संसद भवन  में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को स्थायी कमरा अलॉट किया गया है. ये वो कमरा है जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  का कमरा हुआ करता था. ये कमरा बीजेपी संसदीय दल के कार्यालय के ठीक बगल वाला कमरा नंबर 4 है. ये कमरा पिछले 2 सालों से किसी के उपयोग में नहीं था.

2004 में संसद भवन का कमरा नंबर 4 बतौर एनडीए अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को अलॉट किया गया था. हालांकि सेहत की वजह से अटल बिहारी बाजपेयी ने कभी इस कमरे का उपयोग नहीं किया. इसके बाद इस कमरे को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी के लिए अलॉट किया गया. लालकृष्ण आडवाणी संसद सत्र के दौरान लगातार इस कमरे से ही काम करते रहे. 2019 का लोकसभा चुनाव लालकृष्ण आडवाणी ने नहीं लड़ा, इसके बाद से ही ये कमरा खाली पड़ा हुआ था.

अब ये महत्वपूर्ण कमरा जेपी नड्डा को आवंटित किया गया है. यानी नड्डा का संसद भवन में ये स्थायी ठिकाना होगा. जेपी नड्डा 20 जनवरी 2020 को बीजेपी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए. इससे पहले अमित शाह बीजेपी के अध्यक्ष थे. संसद भवन में पार्टी और संसदीय दल के नेता को भी कमरे अलॉट किए जाते हैं और यही वजह है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को कमरा अलॉट किया गया है.

हालांकि इस कमरे से एक विवाद भी जुड़ा हुआ है. 2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद इस कमरे से लालकृष्ण आडवाणी का नाम हटा दिया गया था, जबकि अटल बिहारी बाजपेयी का नाम था. उस वक़्त ये कहा गया कि चूंकि उस वक़्त राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नेता किसी को नहीं चुना गया है, इसलिए नाम हटाया गया. हालांकि बाद में लालकृष्ण आडवाणी का नाम को फिर से लगा दिया गया था. इस कमरे का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि ये कमरा बीजेपी संसदीय दल के कमरे और पीएम आफिस से ज्यादा दूर नहीं है.(news18.com)

 


20-Jul-2021 3:57 PM (53)

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के रामपुर से सांसद आजम खान की तबीयत खराब है. उनका इस समय लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं, खबर आ रही है कि थोड़ी देर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मेदांता अस्पताल पहुंच रहे हैं. अखिलेश यादव अस्पताल में आजम खान की तबीयत का हाल जानने पहुंच रहे हैं. बता दें कि सीतापुर जेल में तबीयत बिगड़ने पर सोमवार को ही आजम खान को शिफ्ट कराया गया है. अखिलेश यादव दिल्ली में लोकसभा के सत्र में भाग लेने गए थे. सत्र बीच में छोड़कर ही वह लखनऊ लौट रहे हैं. अखिलेश लखनऊ पहुंचकर अमौसी एयरपोर्ट से सीधे मेदांता अस्पताल जाएंगे.

बता दें कि आजम खान पर 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला पर 40 से ज्यादा केस दर्ज हैं. जानकारी के अनुसार, अधिकतर मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, अब कुछ मुकदमों में ही जमानत मिलनी बाकी है.

दरअसल, आजम की तबीयत सोमवार को अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें जिला जेल से जिला अस्पताल भेजा गया. जहां से उनको फिर लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है. सीतापुर जिला अस्पताल के डॉक्टर डी लाल ने बताया कि सपा सांसद का ऑक्सीजन लेवल 88 तक पहुंच गया है. ऑक्सीजन लेवल कम होने के चलते उन्हें लखनऊ रेफर किया गया है.

UP: सीतापुर जेल से मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए गए आजम खान, सामने आई तस्वीर

आजम को बीती 13 जुलाई को लखनऊ के मेदांता अस्पताल से दोबारा सीतापुर जिला जेल में शिफ्ट किया गया था. उनका लखनऊ के मेदांता अस्पताल में करीब तीन महीने तक इलाज चला था. जेल में अचानक उनकी तबीयत फिर खराब हो गई. सांस लेने में तकलीफ होने पर उनको जिला अस्पताल भेजा गया. जहां से एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से उनको लखनऊ के मेदांता अस्पताल भेजा गया है. उनको सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है.

गौरतलब है कि आजम खान सीतापुर जेल में सवा साल से बंद हैं. पिछले दिनों कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में एडमिट कराया गया था. इससे पहले आजम पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. जिसकी जांच अब तेज हो गई है.(news18.com)


20-Jul-2021 3:17 PM (45)

हरीश मलिक

जयपुर. तमाम अंतर्विरोधों के बीच पंजाब में चल रहे कैप्टन वर्सेज सिद्धू  के विवाद को कांग्रेस आलाकमान ने सुलझा लिया है. सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी के बाद माना जा रहा है कि अब कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव की तैयारी करेगी. अब सबकी नजर राजस्थान में काफी लंबे समय से चल रहे गहलोत बनाम पायलट  विवाद पर है. कांग्रेस अब इस सियासी विवाद  का भी जल्द पटाक्षेप करने के मूड में है.

पार्टी सूत्रों के मुताबि​क फिलहाल राजस्थान के मुख्यमंत्री में कोई बदलाव नहीं होगा. गहलोत मुख्यमंत्री बने रहेंगे. एआईसीसी संगठन में बदलाव होना है और उसी प्रक्रिया के तहत सचिन पायलट को राष्ट्रीय महासचिव बनाया जा सकता है. उन्हें राजस्थान का प्रभार भी दिया जा सकता है. इसके अलावा मंत्रिमंडल विस्तार भी जल्द होगा और उनमें उन्हें भी जगह मिलेगी, जिन्हें सचिन मंत्री बनाना चाहते हैं. उनके कितने समर्थक मंत्री बन सकते हैं, यह संख्या अभी निर्धारित नहीं हुई है.

राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल में आएंगे समर्थक
इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों, जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों में सचिन के समर्थकों को उचित प्र​तिनिधित्व दिया जाएगा. पार्टी आलाकमान का मानना है कि बोर्ड और निगमों में पायलट या गहलोत गुट को महत्व देने के बजाए पार्टी के आस्थावान कार्यकर्ताओं को इसमें जगह दी जाएगी. फिलहाल इस बदलाव के साथ पार्टी को एकजुट करने के प्रयास किए जा सकते हैं.

प्रशांत किशोर यहां भी कर सकते हैं मदद
सूत्रों के मुताबिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पंजाब के कैप्टन और सिद्धू मसले को ​सुलझाने में कांग्रेस आलाकमान की काफी मदद की है. पीके पहले से ही कैप्टन अमरिंदर सिंह के सलाहकार के रूप में काम कर ही रहे हैं. अब गहलोत और पायलट विवाद में भी वे अपनी ओर से कोई हल सुझा सकते हैं. ताकि इस विवाद का पटाक्षेप हो सके.

पंजाब सुलह के बाद अब राजस्थान पर नजर
पंजाब कांग्रेस के विवाद को हल करने के बाद कांग्रेस का अब पूरा ध्यान राजस्थान पर आ गया है. पार्टी अब इस विवाद को और लंबा नहीं खींचना चाहती. इसके लिए कोई ऐसा बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है, जिससे दोनों पक्ष मान जाएं. इस फार्मूले में दोनों ही पक्षों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाएगी.

एक साल से ज्यादा समय से चल रहा है विवाद
एक साल से ज्यादा समय से गहलोत वर्सेज पायलट का विवाद चल रहा है. इसके चलते पिछले साल जबर्दस्त सियासी संकट के आसार भी बने, लेकिन गहलोत चाणक्य नीति चलते हुए सियासी भंवर से पार हो गए. सचिन पायलट और उनके समर्थकों के हिस्से कुछ भी नहीं आया. त​ब से राजनीतिक नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार भी अटका ही हुआ है.(news18.com)


08-Jul-2021 9:38 PM (85)

चेन्नई, 8 जुलाई | तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष एल. मुरुगन के केंद्रीय मंत्रिपरिषद में पदोन्नत होने से उनके द्वारा खाली किए गए पार्टी पद के लिए तीव्र पैरवी शुरू हो गई है। हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने के. अन्नामलाई को तमिलनाडु इकाई के नए अध्यक्ष के रूप में नामित करने के लिए तेजी से कदम बढ़ाया है। कर्नाटक कैडर के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, अन्नामलाई ने अपने पैतृक करूर जिले में एक धर्मार्थ फाउंडेशन शुरू करने के लिए सिविल सेवा छोड़ दी। वह पिछले साल भाजपा में शामिल हुए और हाल ही में अरुवाकुरिची निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ा।


अन्नामलाई के मार्च, 2020 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मुरुगन ने यह सुनिश्चित किया कि हाल के चुनावों के बाद पार्टी राज्य विधानसभा में शून्य से चार तक पहुंचने में सक्षम थी।

वह एक जमीनी नेता भी साबित हुए और भाजपा की कमजोर उपस्थिति के बावजूद भगवान सुब्रमण्यम को बदनाम करने वाले करुप्पु कुट्टम से संबंधित नास्तिक समूहों का विरोध करने के लिए राज्य भर में वेत्रिवेल यात्रा निकालने में सक्षम रहे थे।

भाजपा की कमजोरियों के कारण वेत्रिवेल यात्रा जन आंदोलन नहीं बन सकी, लेकिन मुरुगन ने अपनी संगठनात्मक क्षमता को साबित किया और उन्हें पुरस्कृत किया गया। जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद हथियाने के लिए था, तो संभावितों के कई नामों पर चर्चा हो रही थी। एक थे राज्य इकाई के महासचिव के.टी. राघवन।

पेशे से वकील और राज्य भाजपा के पूर्णकालिक सक्रिय नेता राघवन को मुरुगन का समर्थन प्राप्त था। भाजपा और आरएसएस के साथ उनके मजबूत संगठनात्मक संबंधों और उनके सौम्य व्यवहार के लिए धन्यवाद, उन्हें एक प्रमुख दावेदार माना जाता था।(आईएएनएस)


05-Jul-2021 9:37 PM (120)

संदीप पौराणिक 

भोपाल, 5 जुलाई | मध्य प्रदेश के देवास जिले के नेमावर में पिछले दिनों एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या के मामले ने सियासत को गर्मा दिया है। इस हत्याकांड को लेकर आदिवासी समाज से लेकर कांग्रेस तक शिवराज सरकार पर हमलावर है, तो वहीं सरकार आरोपियों को सख्त सजा दिलाने की बात कह रही है। 

नेमावर में प्रेम प्रसंग के चलते एक ही परिवार के पांच लोगों की नृषंस हत्या कर शवों को गहरे गड्ढे में दफना दिया गया था। लगभग दो माह बाद राज खुला तब पुलिस शवों को बरामद करने के साथ आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफल हुई। उसके बाद से सामूहिक हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। अब तो राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि नेमावर तक पहुंचने लगे हैं। 

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने पहले मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई है, तो वहीं सोमवार को खुद कुछ कांग्रेस के नेताओं के साथ पीड़ित परिवार तक जा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान करते हुए पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। साथ ही आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण और पुलिस पर हीला-हवाली का आरोप भी लगाया।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के साथ नेमावर पहुंचे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि, "मप्र में आपराधिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि अपराधियों को भाजपा का संरक्षण हासिल है। महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है।" 

वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर शवों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। राज्य के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ अलगाववादी राजनीति कर समाज में भय फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। नेमावर हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने ही किया है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

डॉ. मिश्रा ने आगे कहा कि आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा। सरकार ने इस मामले में पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा भी दिया है।

वहीं आदिवासियों के जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) ने हत्याकांड पर विरोध दर्ज कराया। जयस प्रमुख डॉ हीरालाल ने हत्याकांड की सीबीआई जांच के साथ पीड़ित परिवार को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

नेमावर के सामूहिक हत्याकांड ने सियासत को गर्मा दिया है। सियासी अखाड़ा मालवा निमांड अंचल बनने के आसार बनने लगे हैं क्योंकि इस इलाके के आदिवासी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र जोबट और खंडवा लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने वाले हैं। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में इस हत्याकांड को लेकर निमांड-मालवा इलाके की सियासत और तेज हो तो अचरज नहीं होना चाहिए।  (आईएएनएस)


02-Jul-2021 11:15 AM (67)

लखनऊ, 2 जुलाई| लोकसभा चुनाव 2019 में सपा के साथ गठबंधन करने वाली बसपा मुखिया मायावती अब सपा पर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में सपा का छोटे दलों के साथ चुनाव लड़ना महालाचरी है। बसपा मुखिया मायावती ने शुक्रवार को अपने निशाने पर समाजवादी पार्टी को रखा है। बसपा मुखिया ने कहा कि समाजवादी पार्टी की घोर स्वार्थी, संकीर्ण व खासकर दलित विरोधी सोच एवं कार्यशैली आदि के कड़वे अनुभवों तथा इसकी भुक्तभोगी होने के कारण देश की अधिकतर बड़ी व प्रमुख पार्टियां चुनाव में इनसे किनारा करना ही ज्यादा बेहतर समझती हैं। यह तो सर्वविदित है।

मायावती ने कहा कि इसी कारण उत्तर प्रदेश के होने वाले विधानसभा के आमचुनाव अब यह पार्टी किसी भी बड़ी पार्टी के साथ नहीं बल्कि छोटी पार्टियों के गठबंधन के सहारे ही लड़ेगी। कहा कि समाजवादी पार्टी का ऐसा कहना व करना महालाचारी नहीं है तो और क्या है।

ज्ञात हो कि इंटरनेट मीडिया पर बेहद एक्टिव मायावती लगातार ट्विटर पर भाजपा, कांग्रेस तथा सपा पर हमला बोलती रहती हैं। पंजाब में विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन कर उतरने वाली मायावती ने उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में अकेले ही विधानसभा चुनाव लडने का एलान किया है। (आईएएनएस)


29-Jun-2021 8:47 AM (49)

कोलकाता, 29 जून| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर 'भ्रष्ट' होने का आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद, राज्यपाल ने सोमवार को राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह कई भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा, मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि 2,000 करोड़ रुपये के महामारी खरीद घोटाले की रिपोर्ट का क्या हुआ? मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया था कि इसमें अनियमितताएं थीं और उन्होंने एक जांच का आदेश भी दिया था। तत्कालीन मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को उस रिपोर्ट को पेश करना था, उसका क्या हुआ?

धनखड़ ने कहा, मैंने बंद्योपाध्याय से कई बार पूछा था कि वह मेरे पास कब आए थे। लेकिन कोई रिपोर्ट नहीं थी। मैंने उन्हें (बनर्जी) को कई बार लिखा है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं पूछना चाहता हूं कि पूछताछ का क्या हुआ जो उन्होंने खुद किया था। जांच का आदेश देना सब कुछ का अंत है। लोगों को यह जानने की जरूरत है कि वे लोग कौन थे जिन्होंने अनुचित लाभ लिया।

धनखड़ ने यह भी कहा कि गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) में न तो कोई चुनाव हुआ है और न ही कोई ऑडिट।

राज्यपाल ने कहा, हजारों करोड़ मंजूर किए गए हैं लेकिन कोई ऑडिट नहीं हुआ है। क्यों? यह लोगों का पैसा है और लोगों को पता होना चाहिए कि उनके पैसे का क्या हुआ। मैं सीएजी ऑडिट करूंगा क्योंकि यह मेरे संवैधानिक दायरे में आता है।

राज्यपाल ने अंडाल हवाई अड्डे के लिए ऋण देने की सरकार की नीति पर भी सवाल उठाया।

धनखड़ ने आरोप लगाया, मैंने उनसे (बनर्जी) पूछा है कि सरकार अंडाल हवाई अड्डे में अपनी इक्विटी क्यों बढ़ा रही है? वे ऐसे लोगों को कर्ज क्यों दे रहे हैं जबकि वे भुगतान नहीं कर रहे हैं? जब वे ब्याज का भुगतान नहीं कर रहे हैं तो ऋण क्यों दिया गया है? मैंने वही पूछा था अलापन बंद्योपाध्याय से सवाल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।"

राज्यपाल ने बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

उन्होंने कहा, पांच राज्यों में चुनाव हुए, लेकिन किसी अन्य राज्य में ऐसी हिंसा नहीं देखी गई, जैसी बंगाल में देखी गई। पूरी दुनिया इसका गवाह है। वे (तृणमूल कांग्रेस) इतने बड़े जनादेश के साथ आए हैं, लेकिन वे जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंट रहे हैं।

हालांकि, राज्यपाल ने कसम खाई कि वह हार नहीं मानेंगे।

धनखड़ ने कहा, मैं किसी के बहकावे में नहीं आऊंगा, चाहे जो भी हो। मैं केवल भारत के संविधान के सामने झुकूंगा। संविधान ने मुझे सशक्त बनाया है और मैं पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।  (आईएएनएस)


28-Jun-2021 12:42 PM (50)

नई दिल्ली,  28 जून : हरियाणा के मुस्लिम बहुल जिले नूंह मेवात में हिंदुओं पर अत्याचार और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये याचिका अखबारों की खबरों के आधार पर दाखिल की गई है. हम इस मामले पर सुनवाई नहीं करेंगे. इस जनहित याचिका में हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन, हिंदुओं की संपत्तियों की जबरदस्ती गैरकानूनी बिक्री और  हिंदू लड़कियों पर अत्याचार की एसआईटी से जांच कराए जाने की मांग की गई है. साथ ही केंद्र सरकार को नूंह मेवात में अर्धसैनिक बल तैनात करने का आदेश देने की मांग भी की गई है.

याचिका में कहा गया- हिन्दू दहशत में जीने को मजबूर
रंजना अग्निहोत्री और चार अन्य ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिए दाखिल याचिका में कोर्ट से कहा है कि हरियाणा के नूंह मेवात में रह रहे हिंदुओं की दशा खराब है. उनके जीवन व स्वतंत्रता, धार्मिक आजादी आदि मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाए. इसमें कहा गया है कि नूंह मेवात में मुस्लिम बहुतायत में हैं और उनका दबदबा है. वे लगातार हिंदुओं के जीवन और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं. राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस कानून का इस्तेमाल करने में नाकाम रहे हैं, इस कारण हिंदू दहशत में जीने को मजबूर हैं .

याचिका में कहा गया- 431 में से 103 गांव पूरी तरह हिन्दू विहीन, 82 गांवों में हिन्दुओं के सिर्फ चार-पांच परिवार
याचिका में कहा गया है कि नूंह मेवात में करीब 431 गांव हैं, जिनमें से 103 गांव पूरी तरह हिंदू विहीन हैं. 82 गांवों में सिर्फ चार-पांच हिंदू परिवार हैं और मेवात में उनकी आबादी तेजी से घटी है. इससे जनसंख्या का स्वरूप बदल रहा है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा होगा.  कहा गया है कि वहां बड़ी संख्या में हिंदुओं को उनके घरों से बेदखल किया गया.  हिंदुओं विशेषकर दलितों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया. हिंदू महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार हुआ.

याचिका में मांग की गई है कि पलायन कर गए हिंदुओं को वहां फिर बसाया जाए. पिछले 10 साल में हिंदुओं की संपत्तियों की ज़बरदस्ती या दबाव में मुसलमानों के पक्ष में हुई सेल डीड रद्द की जाएं. अवैध कब्जा किए गए सभी मंदिर और अंत्येष्टि स्थलों को उनकी पूर्वस्थिति में बहाल किया जाए.  हत्या, दुष्कर्म, अपहरण के सभी मामलों की जांच के आदेश दिए जाएं। पीडि़त परिवारों को मुआवजा दिलाया जाए . (ndtv.in)
 


27-Jun-2021 8:39 PM (153)

सैयद मोजिज इमाम जैदी

नई दिल्ली, 27 जून | पिछले साल कांग्रेस पार्टी के अनुभवी नेता अहमद पटेल के निधन के बाद, गांधी परिवार को उनकी जगह भर पाने में मुश्किल हो रही है। अहमद पटेल को राजनीतिक पैंतरेबाजी से लेकर गठबंधन सहयोगियों से समर्थन हासिल करने तक हर चीज में कुशलता हासिल थी। संकट में, पटेल को पार्टी के मामलों पर अंतिम शब्द माना जाता था। जब से राहुल गांधी ने कमान हाथ में लेनी शुरू की तो वह हाशिए पर चले गए। अपने अंतिम दिनों में उन्हें कांग्रेस का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।


एआईसीसी में फेरबदल की चर्चा जल्द ही हो सकती है, क्योंकि एक नई टीम ने पार्टी मामलों का कामकाज संभाला है और कई लोग उत्तर प्रदेश के बाहर प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए एक उन्नत रोल की उम्मीद कर रहे हैं। फिर भी, पार्टी के लोग यह देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि गांधी परिवार तक पहुंचने के लिए नया सूत्रधार कौन होगा।

एक समय में, वी. जॉर्ज ऐसे ही एक पॉइंटमैन थे। उन्होंने राजीव गांधी के साथ निजी सचिव के रूप में और बाद में सोनिया गांधी के साथ काम किया, लेकिन पटेल के उदय के बाद उन्हें दरकिनार कर दिया गया था।

जॉर्ज ने अर्जुन सिंह के साथ, एम.एल. फोतेदार, शीला दीक्षित और नटवर सिंह ने सोनिया गांधी को सीताराम केसरी के स्थान पर पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए राजी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो उस समय पार्टी प्रमुख थे।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी में मौजूदा असहमति महत्वपूर्ण मुद्दों पर संचार और परामर्श प्रक्रिया की कमी के कारण है। देर से, सोनिया गांधी ने तंत्र को पुनर्जीवित किया और हाल ही में जम्मू और कश्मीर पर बैठक की अध्यक्षता की।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जॉर्ज की वापसी पार्टी और गांधी परिवार के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि वह पार्टी के अंदरूनी साजि़शों के बारे में सब जानते हैं और पार्टी के मामलों को चलाने के लिए उत्प्रेरक हो सकते हैं। वह राजीव गांधी के दिनों से पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को भी जानते हैं और खासतौर पर ऐसे लोगों को जो पार्टी के कामकाज से नाखुश हैं।

वह उन तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं और गांधी परिवार को पार्टी और बाहर के नए घटनाक्रमों के बारे में सूचित कर सकते हैं - ऐसे मामले जो सार्वजनिक डोमेन में नहीं हैं।

जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक, जिनके पास यशपाल कपूर और आर.के. धवन, राजीव गांधी, वी. जॉर्ज और बाद में सोनिया गांधी थे, कांग्रेस अध्यक्षों का निजी कर्मचारियों के माध्यम से काम करने का इतिहास रहा है, लेकिन वे दिन थे जब पार्टी एक मजबूत ताकत थी। यह अब बदली हुई स्थिति है।

राहुल गांधी के लिए काम करने वाले लोग अक्सर सार्वजनिक व्यवहार और नौकरशाहों की तरह काम करने में सूक्ष्म ²ष्टिकोण अपनाने की क्षमता दिखाते हैं। बीच का रास्ता अपनाना जरूरी है। वर्तमान राजनीतिक परि²श्य में, कांग्रेसियों को लगता है कि वे पार्टी की योजनाओं से बाहर हो गए हैं। तथाकथित जी -23 द्वारा उठाए गए मुद्दे, जो अब 22 हो गए हैं, प्रासंगिक हैं और उसे कई लोगों की मौन स्वीकृति है। यह टीम राहुल की कमजोरी है जिसे मामलों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने और नेतृत्व को समय पर सलाह देने की जरूरत है।

राहुल गांधी कोविड के मोर्चे पर सक्रिय रहे हैं और सरकार को सलाह दे रहे हैं लेकिन राजनीतिक रूप से परिणाम व्यर्थ थे क्योंकि हाल के चुनाव परिणाम पार्टी के लिए उत्साहजनक नहीं थे।

राहुल पंजाब के मोर्चे पर भी सक्रिय रहे हैं और लोगों से मिलते रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री के साथ बैठक से परहेज करना गलत सोच और रणनीति माना गया। यह सच है कि पंजाब के नेताओं से बात करना एक अच्छी पहल थी, लेकिन राजस्थान को छोड़ना सचिन पायलट के समर्थकों के साथ अच्छा नहीं रहा। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वी. जॉर्ज की वापसी, अगर ऐसा होती है, तो पार्टी में कम्युनिकेशन गैप से जुड़ी कुछ समस्याओं का अंत हो सकता है। (आईएएनएस)


23-Jun-2021 8:06 AM (96)

नई दिल्ली, 23 जून | पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद, राहुल ने राज्य इकाई में तनाव को कम करने के लिए कदम बढ़ाया। सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने राज्य को अत्यधिक महत्व दिया है, वह उन हितधारकों से मिलते रहते हैं, जो उनसे समय मांगते हैं।

राहुल गांधी से मिले कुछ विधायकों ने कहा कि उन्होंने राज्य के मुद्दों पर बात की है। मुख्यमंत्री की आलोचना करने वाले उन विधायकों में शामिल परगट सिंह ने कहा, अगर सीएम मेरे द्वारा उठाए गए मुद्दों को हल करने के लिए तैयार हैं, तो मामला सुलझ जाएगा।

सूत्रों ने कहा कि इस बीच, अमरिंदर सिंह ने निशाना बनाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि कुछ व्यक्तियों के कारण अनुचित दबाव बनाया जाता है।

हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, जो तीन सदस्यीय पैनल के प्रमुख हैं, जिन्हें राज्य पार्टी इकाई में गुटबाजी को हल करने के अलावा चुनाव की तैयारी के लिए बड़ा आदेश मिला है, ने कहा : सभी ने कहा है कि वे एक साथ चुनाव लड़ेंगे और पार्टी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट है।

सूत्रों का कहना है कि पैनल ने राज्य में राजनीतिक स्थिति और नवजोत सिंह सिद्धू से जुड़े मुद्दों और इस मुद्दे को हल करने के संभावित तरीके पर भी चर्चा की।

हालांकि सिद्धू मुख्यमंत्री पर हमले से बाज नहीं आ रहे हैं, उन्होंने मुद्दों के जल्द समाधान पर जोर दिया है। प्रदेश प्रभारी हरीश रावत ने कहा है कि मामला सोनिया गांधी के पास है और उन्होंने सिद्धू के बयानों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

खड़गे के अलावा केंद्रीय पैनल में रावत और जेपी अग्रवाल शामिल हैं। (आईएएनएस)


22-Jun-2021 1:09 PM (112)

-यतेंद्र शर्मा

नई दिल्‍ली. पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं. दरअसल बीजेपी की सांसद संघमित्रा मौर्य ने उन पर संसद में दाखिल किए गए हलफनामे में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है. बीजेपी सांसद ने इस संबंध में लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर नुसरत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां के खिलाफ यह शिकायत बुधवार को उनके उस दावे के बाद आई है, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि कारोबारी निखिल जैन के साथ उनकी शादी कानूनी नहीं बल्कि लिव-इन-रिलेशनशिप है क्योंकि तुर्की में हुई उनकी शादी को भारतीय कानून के अनुसार मान्यता नहीं मिली है.

नुसरत जहां ने अपने बयान में यह दावा भी किया था कि चूंकि यह अंतरधार्मिक विवाह था, लिहाजा इसे भारत में विशेष विवाह अधिनियम के तहत मान्यता की जरूरत है, जो अभी नहीं मिली है. कानून के अनुसार यह विवाह नहीं बल्कि लिव-इन-रिलेशनशिप है.

लोकसभा स्‍पीकर को लिखे पत्र में बीजेपी सांसद ने कहा है, 'नुसरत जहां की ओर से मीडिया को दी गई हालिया जानकारी से यह बात जाहिर होती है कि उन्‍होंने जानबूझकर लोकसभा सचिवालय को गलत जानकारी प्रदान की. यह जानबूझकर झूठी और भ्रामक जानकारी देकर अपने मतदाताओं को धोखा देने और संसद और उसके माननीय सांसदों की छवि खराब करने के समान है.'

पत्र में कहा गया है, 'नुसरत जहां का यह बयान प्रभावी रूप से उनकी लोकसभा सदस्यता को गैर-कानूनी रूप में प्रस्तुत करता है.' उल्लेखनीय है कि अभी तक नुसरत के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की गई थी. (news18.com)


22-Jun-2021 1:07 PM (135)

 

-यतेंद्र शर्मा

नई दिल्‍ली/लखनऊ. उत्‍तर प्रदेश में बीजेपी चुनावी मोड में आ गई है. यही कारण है कि मीटिंग दर मीटिंग मंथन का दौर शुरू हो चुका है. वैसे तो अगले साल 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ होने हैं, लेकिन बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश की अहमियत इससे समझी जा सकती है कि बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष ने महज 15 दिनों में यूपी में अपना दूसरा दौरा शुरू कर दिया है.

पुरानी कहावत है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है, इसलिए शायद यही कारण है कि बीजेपी आलाकमान ने पूरी तरह से यूपी पर फोकस कर दिया है. यही नहीं, साथ ही संघ भी अब मैदान में सामने आ गया है. यूपी के सिंहासन पर फिर से काबिज होने के लिए ऐसे रोडमैप पर काम हो रहा है जिस पर पूरा संघ परिवार एकजुट नजर आये. जबकि रविवार रात ही संघ के सर सरकार्यवाह और बीजेपी मामलों के प्रभारी डॉ.कृष्ण गोपाल लखनऊ पहुंच गये थे. सोमवार सुबह एक महत्वपूर्ण मीटिंग लखनऊ में संघ के निराला नगर कार्यालय में हुई जिसमें डॉ. कृष्ण गोपाल के साथ बीएल संतोष, सुनील बंसल, राधामोहन सिंह और स्वतंत्र देव सिंह मौजूद थे.

संघ ने दिया जीत का मंत्र!
सूत्रों की मानें तो इस मीटिंग में संघ के सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने जीत का मंत्र देते हुए कहा,'जीत के रोडमैप का सबसे अहम पहलू है कि सभी अलग अलग जिम्मेदारियों के साथ काम करते हुए एक ही दिशा में आगे बढ़ें.' यानी उन्होंने साफ निर्देश दिया कि चुनावी बेला में बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओं का स्वर एक रहना चाहिए और जो नेतृत्व फैसला ले उसी दिशा में काम करना है. वहीं, संघ के इस निर्देश को अभी हाल ही में बीजेपी के कई नेताओं द्वारा दिये गये उन बयानों के आधार पर देखा जा रहा है जिसमें सीएम योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व पर संशय जताया गया है.

सीएम योगी के नेतृत्‍व बीजेपी लड़ेगी चुनाव
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी आलाकमान ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा जायेगा. इसके बाद भी बीजेपी के नेताओं द्वारा बयानबाजी की जा रही है. इस पर लगाम लगाने के निर्देश संघ-बीजेपी की मीटिंग में दिये गये, क्योंकि नेतृत्व को चिंता है कि यदि इसी तरह की बयानबाजी होती रही तो कैडर और जनता में भ्रम की स्थिति बनी रहेगी, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. वहीं, दूसरी तरफ ये भी दलील दी गई कि पिछड़े वोटों को पार्टी के लिए एकजुट करने के लिए वरिष्ठ नेताओं द्वारा ये बयान एक रणनीति के तहत दिये गये थे. इसके अलावा मीटिंग में यूपी के हर मुद्दे और सियासी पहलू पर चर्चा की गई.

इसके अलावा संघ और बीजेपी की इस मीटिंग के बाद शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी एक अहम मीटिंग हुई, जिसमें सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर मंथन किया गया. यही नहीं, बीजेपी के रूठे हुए कार्यकर्ताओं पर फोकस करने की रणनीति बनाई गई है.

(news18.com)


22-Jun-2021 1:07 PM (121)

अंबेडकरनगर. यूपी के अंबेडकरनगर में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर सियासी दल शतरंज की बिसात पर अपने-अपने मोहरे बिछा रहे हैं. समाजवादी पार्टी ने अजीत यादव के रूप में अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, तो बीजेपी ने भी साधू वर्मा का नाम करीब तय कर लिया है, लेकिन अपने ही गढ़ में बसपा जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी ढूढ़ने में नाकाम दिख रही है, जोकि कभी नीले दुर्ग के रूप में पहचान रखता था.

कभी अंबेडकरनगर में बसपा के टिकट पर जिला पंचायत अध्‍यक्ष का चुनाव लड़ने की मारामारी रहती थी, वहां आज पार्टी को प्रत्‍याशी नहीं मिल रहा है. इस बार बसपा के समर्थन से 8 सदस्य निर्वाचित हुए हैं, लेकिन पार्टी अपना प्रत्याशी लड़ाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है. यही नहीं, प्रत्‍याशी न मिलने की वजह से स्‍थानीय नेताओं के साथ बसपा की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, बसपा नेता जिस होटल व्यवसायी को अध्यक्ष बनान चाहते थे, उसके पंचायत चुनाव हारने से सारा खेल गड़बड़ा गया है.

टिकट बंटवारे ने बिगाड़ा बसपा का खेल!
बसपा का गढ़ माने जाने वाले अंबेडकरनगर में यूपी पंचायत चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर भी काफी बवाल मचा था. यही नहीं, इस बात से आहत होकर तत्कालीन बसपा विधानमंडल दल नेता लाल जी वर्मा ने पंचायत चुनाव से अपनी पत्नी का नाम वापस ले कर टिकट लौटा दिया था. हालांकि इसके बाद मायवती ने उन्‍हें पार्टी से निलंबित कर दिया है. इसके अलावा प्रभारी जोनल कोऑर्डिनेटर घनश्याम खरवार टिकट बंटवारे में जिताऊ लोगों को तरजीह देने में असफल रहे तो कई निर्दलीय लड़कर चुनाव जीतने में सफल हो गए.

क्या नीला दुर्ग ढह रहा है!
अंबेडकरनगर जिला बसपा और मायावती की राजनीति का केंद्रबिंदु रहा है. इस वजह से इसे यूपी की राजनीति में नीले दुर्ग के रूप में पहचान हासिल है. यही नहीं, 2017 में भाजपा की लहर के बाद भी जिले की पांच में से तीन सीटों पर बसपा का ही कब्जा रहा. इसके अलावा बसपा यहां सभी पांच विधानसभा सीटों से लेकर लोकसभा और जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर एक साथ कब्‍जा कर चुकी है. हालांकि पिछले कुछ सालों में पार्टी में बडे़ नेताओं के बीच छिड़ी जंग की वजह से नीले दुर्ग में दीमक लग गई है. वहीं, हाल ही में बसपा ने लाल जी वर्मा और रामअचल राजभर को भी पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया है. जबकि पार्टी की रीढ़ समझे जाने वाले पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त को पहले ही पार्टी ने किनारा कर लिया था.

यही नहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती अंबेडकरनगर से लोकसभा चुनाव लड़ती रही हैं. सबसे पहले वह 1989 में बिजनौर लोकसभा सीट जीत कर संसद में पहुंची थीं. इसके उन्‍होंने बाद 1998, 1999 और 2004 में अकबरपुर (वर्तमान में अंबेडकरनगर) सीट से चुनाव जीता. यही नहीं, 2009 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने यहां बाजी मारी है. (news18.com)


22-Jun-2021 8:03 AM (139)

मुंबई/नई दिल्ली, 21 जून | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार एक बड़ी पहल के तहत मंगलवार से 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता के लिए कदम उठाएंगे। पार्टी के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि पहले दौर में पवार मंगलवार शाम नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के अन्य प्रमुख विशेषज्ञों से मुलाकात करेंगे।

राजनीतिक नेताओं में तृणमूल कांग्रेस के यशवंत सिन्हा, जद-यू के पूर्व नेता पवन वर्मा, आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह, नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के फारूक अब्दुल्ला, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी. राजा और अन्य शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा, न्यायमूर्ति ए. पी. सिंह (सेवानिवृत्त), जावेद अख्तर, के.टी.एस. तुलसी, करण थापर, आशुतोष, ए. मजीद मेमन, वंदना चव्हाण, एस.वाई. कुरैशी, के.सी. सिंह, संजय झा, सुधींद्र कुलकर्णी, कॉलिन गोंसाल्वेस, घनश्याम तिवारी और प्रीतिश नंदी सहित अन्य भी शामिल हो सकते हैं।

इससे पहले शरद पवार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से दस दिनों में दूसरी बार मुलाकात की। चर्चा यह है कि किशोर-पवार की मुलाकात अगले आम चुनावों के मद्देनजर और समान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट करने के उद्देश्य से बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती है।

हालांकि विपक्षी दलों की बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर पर प्रधानमंत्री की बैठक की पृष्ठभूमि में है। 15 विपक्षी दलों को निमंत्रण दिया गया है, लेकिन उनमें से कुछ ने अब तक भागीदारी की पुष्टि की है। कांग्रेस ने अभी तक बैठक के लिए हां नहीं कहा है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस बैठक में शामिल होगी या नहीं। सोमवार दोपहर तक कांग्रेस की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन 7 दलों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है।

विपक्षी दलों की बैठक से पहले राकांपा ने मंगलवार सुबह अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी।(आईएएनएस)


21-Jun-2021 12:32 PM (93)

 

-अनामिका सिंह

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों से पहले सरकार से संगठन तक कील कांटे दुरूस्त करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों तेजी से घटनाक्रम आगे बढ़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चिंताओं में घिरी पार्टी में मई के महीने से शुरू हुआ मंथनों का दौर लगातार जारी है और अब केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष का लखनऊ आने का कार्यक्रम भी इस सियासी गुणा गणित के तौर पर तय हुआ है. बीएल संतोष सोमवार से तीन दिन लखनऊ में मौजूद रहेंगे. इस दौरान वह सरकार के मंत्रियों से लेकर संगठन के पदाधिकारियों के साथ 2022 के चुनाव की रणनीति तय करेंगे. हांलाकि बीएल संतोष का एक ही महीने में दूसरी बार राजधानी लखनऊ का रूख करना अलग-अलग तरह की चर्चाओं को हवा दे रहा है.

इसके पहले बीएल संतोष 31 मई से 2 जून तक मैराथन बैठकें कर पार्टी आलकमान को यूपी की रिपोर्ट सौंप चुके हैं. जबकि इस बीत तेजी के साथ पार्टी के भीतर घटनाक्रम आगे भी बढ़ा रहा है, क्योंकि बीएल संतोष की लखनऊ में हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दो दिनों का दिल्ली दौरा कर प्रधानमंत्री मोदी समेत गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात कर चुके हैं. इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा, लेकिन राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस बाबत कोई जानकारी नहीं मिल पायी है. इस बीच केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष के लखनऊ दौरे को कई मायनों में अहम माना जा रहा है.

हांलाकि पार्टी की तरफ से बीएल संतोष के लखनऊ दौरे को लेकर दी गयी जानकारी के मुताबिक, संगठन मंत्री बीएल संतोष पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें करके पार्टी की तरफ से प्रारंम्भ किये पोस्ट कोविड सेंटर, टीककरण जनजागरण अभियान और अन्य सेवा कार्यों की समीक्षा कर मार्गदर्शन करेंगे. जबकि सूत्र ये बता रहे है कि बीएल संतोष के पिछले दौरे के बाद जिस तरीके से प्रदेश संगठन के प्रकोष्ठ और मोर्चों के पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई, ठीक वैसे ही इस दौरे के बाद भी 2022 के चुनाव को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है.

पिछली बार केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष के दौरे का क्या हुआ असर
बीएल संतोष के पिछले दौरे के दौरान कई पदाधिकारियों ने निगम और आयोगों में खाली पदों को भरने का मुद्दा साथ ही अधिकारियों के साथ सामंजस्य ना होने का मुद्दा उठाया था. जिसके बाद बड़े पैमाने पर अफसरों के तबादले के साथ-साथ पिछले दिनों बुधवार को अनुसूचित जाति और अनुसुचित जनजाति आयोग के गठन के बाद कल उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग का गठन किया गया. पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष इसी आयोग के उपाध्यक्ष रहे जसंवत सैनी को बनाया गया है जो पार्टी में लंबे समय से अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. अब बीएल संतोष के दूसरी बार लखनऊ आने की खबर से बड़े बदलाव की सुगबुगाहट से इनकार नहीं किया जा सकता. (news18.com)


20-Jun-2021 12:37 PM (69)

-अजय कुमार 

पटना, 20 जून| बिहार में चिराग पासवान ने जून के तीसरे सप्ताह में ही अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिति खो दी थी। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस ने स्वर्गीय रामविलास पासवान द्वारा स्थापित पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

घटनाओं की समग्र श्रृंखला अन्य राजनीतिक दलों और व्यक्तिगत नेताओं के लिए एक सबक हो सकती है, जो नकारात्मक राजनीति के जरिये अपना नफा-नुकसान देखने की कोशिश करते हैं।

चिराग पासवान की राजनीति में नकारात्मकता पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान सामने आई जब उन्होंने अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इससे उनकी कोशिश जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी । उस वक्त उन्होंने खुले तौर पर भाजपा का समर्थन करने के साथ ही खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था।

चिराग पासवान को जदयू को नुकसान पहुंचाने के अपने एक सूत्रीय एजेंडे के कारण एनडीए छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि बीजेपी और जदयू दोनों एनडीए का हिस्सा हैं। चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से ज्यादातर जदयू के खिलाफ थे।

लोजपा ने अपने गेमप्लान के मुताबिक साल 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू को सिर्फ 43 सीटें मिलीं, जबकि 2015 के चुनावों में इसके सीटों की संख्या 69 थीं। इस तरह के ²ष्टिकोण ने चिराग पासवान को और अधिक आहत किया क्योंकि साल 2020 के चुनावों में उनकी पार्टी ने सिर्फ एक ही सीट पर जीत हासिल की थी। सिर्फ एक सीट जीतने का प्रबंधन किया। बाद में मटिहानी निर्वाचन क्षेत्र से जीते लोजपा के इकलौते विधायक राज कुमार सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से हाथ मिला लिया था।

पशुपति कुमार पारस ने विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान की नकारात्मक राजनीति की ओर इशारा करते हुए कहा, "2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हम संसदीय चुनाव की तरह एनडीए के तहत चुनाव लड़ना चाहते थे। चिराग ने इसका विरोध किया और विधानसभा चुनाव में अकेले जाने का फैसला किया और सिर्फ एक ही सीट जीत सके। पार्टी का राजनीतिक रूप से सफाया हो गया है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता उनके फैसले से नाराज हैं।"

लोजपा में राजनीतिक अशांति के बीच चिराग पासवान ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि जदयू नेता उनके खिलाफ काम कर रहे हैं और पार्टी को तोड़ रहे हैं। राजद ने भी जदयू पर इसी तरह के आरोप लगाए थे। राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा, "चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस के बीच विभाजन के पीछे नीतीश कुमार हैं।"

इसका जवाब देते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.सी.पी. सिंह ने कहा कि चिराग पासवान वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया है।

सिंह ने कहा, "चिराग पासवान ने हाल के दिनों में बहुत सारी गलतियां की हैं। बिहार के लोग और उनकी अपनी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जो कुछ भी उन्होंने किया उससे खुश नहीं थे। अब पार्टी में दरार इसका परिणाम है।"  (आईएएनएस)

 


15-Jun-2021 5:19 PM (234)

 

चंडीगढ़. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी ने अभी से इसके लिए अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में भाजपा ने मंगलवार को चुनावी राज्य में संभावित गठबंधन और पार्टी द्वारा लक्ष्य निर्धारित करने को लेकर विचार-विमर्श किया. प्रदेश के आगामी चुनाव में भाजपा बिना शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के मैदान में अपनी किस्मत आजमाएगी. हाल ही में कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के चलते शिअद ने भाजपा के साथ अपना 23 साल पुराना साथ छोड़ दिया था.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा राज्य के चुनाव प्रभारी दुष्यंत गौतम के साथ मंगलवार शाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के दौरान पंजाब में नए राजनीतिक गठबंधनों और समीकरणों को लेकर चर्चा हो सकती है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) संग शिअद के गठबंधन के बाद, भाजपा 117 विधानसभा सीटों वाले राज्य में बदली जातीय और राजनीतिक समीकरणों पर ध्यान दे रही है. (news18.com)


15-Jun-2021 5:17 PM (287)

-रवि एस नारायण

पटना. लोजपा में टूट के बाद अब कांग्रेस के संभावित बिखराव की खबर से बिहार की सियासत गरमाई हुई है. जेडीयू के नेता और मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस डूबती हुई नाव है और कांग्रेस के कई नेता जेडीयू के संपर्क में हैं. समय आने पर सबकुछ जल्द सामने आ जायेगा. बता दें कि लोजपा में हुई बड़ी टूट में भी जेडीयू की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. अब जेडीयू ने कांग्रेस नेताओं के समपर्क में होने की बात कहकर हड़कंप मचा दिया है. माना जा रहा है कि जेडयू ने अब मिशन पंजा शुरू कर दिया है जिसके तहत जेडीयू के कुछ कद्दावर नेताओं को कांग्रेस के विधायकों को साथ लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

सूत्रों से यही खबर सामने आ रही है कि जेडीयू ने मिशन पंजा के तहत अपना काम शुरू कर दिया है. सूत्रों की जानकारी के मुताबिक आधा दर्जन कांग्रेस नेताओं की बारी-बारी से बैठक जेडीयू नेताओं के साथ हो चुकीं है. जेडीयू के कई नेता कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं से मुलाकात हो रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस के 10 विधायक जेडीयू के समपर्क में हैं. बता दें कि कांग्रेस की विधानसभा में 19 सीटें हैं. कांग्रेस से टूटकर जेडीयू में मिलने के लिए कम से कम 13 विधायकों का साथ होना जरूरी है. इंतजार 13 विधायकों के साथ का है.

कांग्रेस में बैठकों का दौर शुरू
गौरतलब है कि कांग्रेस में टूट की खबर समय समय पर आती रही है, लेकिन यह अंजाम तक नहीं पहुंच पायी है. पर  लोजपा में टूट के बाद जेडीयू नेता के दावे को कांग्रेस आलाकमान हल्के में नहीं लेना चाहते. सूत्रों की जानकारी के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस वरिष्ठ नेता अशोक राम को जिम्मेदारी सौंपी है कि वो कांग्रेस विधायकों से हर दिन संपर्क में रहें और गतिवीधियो पर नजर रखें. इधर कांग्रेस के भीतर अनऑफिशियल बैठकों का दौर भी शुरू है. सभी को एकजुट रहने की बात कही जा रही है.

कांग्रेस किसी भी संभावित टूट से कर रही इंकार
जेडीयू के कांग्रेस विधायकों के सम्पर्क में होने की बात को कांग्रेस सिरे से नकार रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा का कहना है कि जीतनराम मांझी और मुकेश साहनी ने जिस तरीके से तेवर दिखाये हैं उसे देखते हुए जेडीयू का यह स्टंट मैनेजमेंट है जिसके तहत इज अफवाह फैलाई जा रही है. कांग्रेस का कोई विधायक टूटने वाला नहीं.(news18.com)


15-Jun-2021 9:27 AM (202)

कोलकाता, 14 जून| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने हार को स्वीकार नहीं किया है और अब वह राज्य को बांटने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री की आलोचना ऐसे समय में सामने आी है, जब भाजपा के कई सांसदों और विधायकों ने केंद्र सरकार से उत्तर बंगाल को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का अनुरोध करने का फैसला किया है।

ममता ने कहा, हमने कभी भी उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच अंतर नहीं किया है। पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल है और राज्य के इन दो हिस्सों में कोई अंतर नहीं है। हमने बंगाल के दोनों हिस्सों को समान महत्व देने की कोशिश की है और उन्हें समान रूप से विकसित किया है।

बनर्जी ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मैं यह भी कहना चाहूंगी कि कुछ मामलों में उत्तर बंगाल में दक्षिण बंगाल की तुलना में अधिक विकास हुआ है। हम केंद्र को किसी भी तरह से राज्य को विभाजित करने की अनुमति नहीं देंगे।

मुख्यमंत्री का आरोप भाजपा विधायकों और सांसदों की रविवार शाम को हुई एक बैठक के बाद सामने आया है, जिसमें केंद्र से पांच जिलों - कूच बिहार, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की अपील करने का फैसला किया था।

बैठक में मौजूद एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, इस क्षेत्र में चीन और बांग्लादेश से बहुत घुसपैठ हुई है और कोई भी सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों को भी इस स्थिति के कारण सुरक्षा कवच लेना पड़ता है। ऐसे में हम केंद्र से अपील करेंगे कि उत्तर बंगाल के इन जिलों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।

इस कथित साजिश के पीछे भाजपा के केंद्रीय नेताओं का हाथ होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा हार स्वीकार नहीं कर सकती और इसलिए वह कूचबिहार, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग को बेचने की कोशिश कर रही है। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे। भाजपा को बांटो और राज करो की इस नीति को बंद कर अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।

कश्मीर में भाजपा की नीति का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा, उन्होंने कश्मीर में जो किया वह यहां करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीर में क्या हो रहा है? क्या यह लोकतंत्र है? आप किसी को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं। आप नेताओं को नजरबंद रखते हैं और लोगों की आवाज दबाते हैं। क्या वे यहां भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं? हम इसकी अनुमति कभी नहीं देंगे।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, भाजपा लंबे समय से ऐसा करने की कोशिश कर रही है और चुनाव प्रचार के दौरान भी उसने कहा था कि अगर वह सत्ता में आई तो वह उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल को बांट देगी।

टीएमसी नेता ने कहा, अब जब उन्हें लोगों ने खारिज कर दिया है, तो वे अपनी योजना को गोल चक्कर में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक खतरनाक संकेत है और हम सभी को इस अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और विरोध करना चाहिए।

उन्होंने कहा, हम उत्तर बंगाल की स्थिति से डरे हुए हैं। चीन कुछ अन्य पड़ोसी देशों के साथ देश की संप्रभुता को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है और इस क्षेत्र में कोई भी सुरक्षित नहीं है।

वहीं इस मुद्दे पर उत्तर बंगाल से भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हमारे पास 2.28 करोड़ लोगों का समर्थन है और हम एक आंदोलन शुरू करेंगे ताकि उत्तर बंगाल केंद्र शासित प्रदेश बन सके। केवल केंद्र सरकार ही लोगों को बचा सकती है और हम केंद्र से इस पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध करेंगे। (आईएएनएस)


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