राजनीति

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • दिल्ली के अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे यह कहते हुए शर्म आती है कि हमारे प्रधानमंत्री ऐसे लोगों को फॉलो करते हैं जो महिलाओं को गाली देते हैं। अगर मोदी और शाह दोबारा 2019 में वापस आ गए तो देश को बर्बाद कर देंगे। हमें इन लोगों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। 
    उन्होंने कहा कि जो काम 70 वर्षों में पाकिस्तान नहीं कर पाया वह 5 वर्षों में मोदी और शाह की जोड़ी ने कर दिया। अगर मोदी और शाह दोबारा लौट आए तो वे संविधान खत्म कर देंगे, चुनाव खत्म कर देंगे, लोकशाही खत्म कर देंगे, तानाशाही ले आएंगे। जिसके मन में भारत के लिए जरा सा भी प्रेम है वह तय कर ले कि इस जोड़ी को दोबारा नहीं आने देंगे। मोदी और अमित शाह जाने वाले हैं, देश के अच्छे दिन आने वाले हैं। 

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • कोलकाता, 19 जनवरी । लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पिच के रूप में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर ममता बनर्जी और विपक्ष बैटिंग करते नजर आएंगे। विपक्षी एकजुटता रैली के बहाने आज यानी शनिवार को कोलकाता में ममता बनर्जी अपनी ताकत दिखाएंगी। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर तृणमूल कांग्रेस की बड़ी रैली हो रही है, जिसमें पार्टी को उम्मीद है कि कम से कम 3 लाख लोग जुटेंगे। रैली में विपक्षी दलों के कई दिग्गज दिखेंगे। शुक्रवार को ही अखिलेश यादव कोलकाता पहुंच गए। वहीं कई दूसरे दलों के नेता भी पहुंच रहे हैं। ममता बनर्जी की आज होने वाली रैली में करीब 20 विपक्षी दलों के नेता पहुंच  रहे हैं। हालाकि इनमें कई नेताओं में कोई गठबंधन नहीं हुआ है। लेकिन वो एक मंच पर दिखेंगे। इन सबके निशाने पर बीजेपी है।  बीस विपक्षी दलों के एक मंच पर जुटान से लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले ऐसा लगने लगा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है। ममता बनर्जी की कोलकाता में होने वाली संयुक्त विपक्षी रैली में विपक्षी दलों से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, पूर्व बीजेपी नेता अरुण शौरी, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल आदि शामिल हो सकते हैं। 
    टीएमसी की विपक्षी एकजुटता रैली में एमके स्टालिन ने कहा मई महीने में होने वाला आगामी लोकसभा चुनाव देश का दूसरा स्वाधीनता संग्राम होगा। 
    प्रधानमंत्री कौन बनेगा बाद में देखा जाएगा, पहले हमें एकजुट होकर लडऩा है-फारुक अब्दुल्ला
    कोलकाता में टीएमसी की रैली में फारूक अब्दुल्ला ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया और कहा कि इसका इस्तेमाल खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में ईवीएम का इस्तेमाल बंद हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा बाद में देखा जाएगा, पहले हमें एकजुट होकर लडऩा है।
    टीएमसी की रैली में फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि देश में लोगों को बांटने का काम हो रहा है। सबको बांटने की कोशिश हो रही है। देश में आग लगी हुई है। इसे रोकने के लिए हमें कुर्बानी देनी होगी। मगर इस कुर्बानी के लिए लोगों से पहले हम नेताओं को आगे आना होगा। उन्होंने जम्मू कश्मीर की हालत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि मैं मुसलमान जरूर हूं मगर पहले भारतीय हूं।
    टीएमसी की रैली में फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि देश में लोगों को बांटने का काम हो रहा है। सबको बांटने की कोशिश हो रही है। देश में आग लगी हुई है। इसे रोकने के लिए हमें कुर्बानी देनी होगी। मगर इस कुर्बानी के लिए लोगों से पहले हम नेताओं को आगे आना होगा। उन्होंने जम्मू कश्मीर की हालत के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि मैं मुसलमान जरूर हूं मगर पहले भारतीय हूं। 
    देश की आजादी में सबसे ज्यादा कुर्बानी बंगाल के लोगों ने दी है- शरद यादव
    ममता बनर्जी की कोलकाता रैली में शरद यादव ने कहा कि देश की आजादी, किसान, व्यापार, खतरे में हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत की आजादी में जितनी कुर्बानी बंगाल ने दी है देश के किसी राज्य ने नहीं दी है। साल 2019 में केंद्र की सरकार को बंगाल की खाड़ी में बहाने का काम करेंगे। आपको एक बार फिर से आपको आगे आने होगा। इस सरकार को हटाना है, क्योंकि यह अघोषित इमरजेंसी है। 
    शरद यादव ने कहा कि नोटबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था कई साल पीछे चली गई है। उन्होंने कहा था कि दो करोड़ रोजगार देंगे लेकिन कितनों को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार हर संस्था को बर्बाद कर रही है। 
    कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी की रैली में शामिल हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमारी विपक्षी एकता इंद्रधनूष की तरह है। आज 22 पार्टियों का इंद्रधनुष बना है। रंग अलग होते हुए भी विपक्ष एक इंद्रधनुष है। उन्होंने कहा कि अब जनता की है यही पुकार, अब नहीं चाहिए मोदी सरकार। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि कोलकाता में भाजपा की रथयात्रा को अनुमति नहीं मिली। क्योंकि इसमें संदेह था कि इसमें जानमाल का नुकसान हो सकता था। उन्होंने कहा कि वोट विभाजन का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिलता है इसलिए यह जरूरी है कि इस मंच पर मौजूद नेताओं को वोट विभाजन को रोकना होगा। इसका परिणाम आप पहले देख चुके हैं, चाहे वो गोरखपुर हो या फिर फूलपुर हो। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ बीजेपी के गठबंधन पर मोदी सरकार पर हमला बोला और कहा कि घाटी में पीडीपी और बीजेपी का गठबंधन विश्व का सबसे अनैतिक गठबंधन।
    मोदी-शाह पर अप लोगों का ऐतबार नहीं रहा- अरुण शौरी
    अरुण शौरी ने कहा कि राफेल जैसा घोटाला किसी सरकार में नहीं हुआ। ऐसी झूठ बोलने वाली सरकार कभी नहीं आई। इस सरकार ने हर संस्था को बर्बाद करने की जिद पकड़ रखी है। मोदी-शाह से लोगों का ऐतबार उठ गया है। मोदी समझ गए हैं कि सत्ता से उनकी पकड़ हिल गई है। 
    पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि हम अकेले होकर लडग़ें तो मोदी सरकार को देश बर्बाद करने से नहीं रोक पाएंगे। अगर हम गुजरात में भी एक साथ मिलकर लड़े होते तो परिणाम कुछ और होते। ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी एकजुट होते तो और बेहतर होता। उन्होंने कहा कि बंगाल की शेरनी ने विपक्ष को एकजुट करने का काम लिया है।
    वो चाहते हैं हम मोदी को मुद्दा बनाएं, हम मुद्दे को मुद्दा बनाएंगे-यशवंत सिन्हा
    यशवंत सिन्हा ने रैली में कहा कि वे कहते हैं कि हम मोदी को हटाने के लिए एकसाथ आए हं। मगर मैं यहां बता दूं कि हम मोदी को हटाने के लिए नहीं हैं। यह प्रश्न एक व्यक्ति का नहीं है। यह एक सोच और विचारधारा का प्रश्न है। हम एक सोच और उस विचारधारा के विरोध में यहां एक_ा हुए हैं। पिछले 56 महीने में जो घाटा हुआ है, वह प्रजातंत्र को हुआ है। देश के किसी भी संस्थान को बर्बाद करने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। हम लोकशाही को बचाने के लिए इकत्रित हुए हैं। हमारे लिए मोदी मुद्दा नहीं, मुद्दे मुद्दा हैं। वो चाहते हैं हम मोदी को मुद्दा बनाएं, हम मुद्दे को मुद्दा बनाएंगे
    अच्छे दिन लाना है तो मोदी जी को भगाना है- आरएलडी नेता जयंत चौधरी
    कोलकाता में टीएमसी की विपक्षी एकता रैली को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि देश से चोरों को भगाना है। उन्होंने कहा कि अच्छे दिन लाना है तो मोदी जी को भगाना है। 
    टीएमसी की रैली में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल
    पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने विपक्षी एकजुटता रैली में कहा कि देश को बचाने के लिए विपक्ष एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि सुभाष बाबू (सुभाष चंद्र बोस) लड़े थे गोरों से, हम लड़ेंगे चोरों से। 
    झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन- क्षेत्रीय दल सांप्रदायिक ताकतों को जवाब देंगे, बीजेपी सरकार में दलितों और आदिवासियों का शोषण हुआ है। 
    कोलकाता में विपक्ष की रैली पर बोले मुख्तार अब्बास नकवी- ये सब थके हुए पिटे हुए पहलवान हैं जो अखाड़े में जाकर फिर किस्मत आजमाना चाहते हैं... (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । जेएनयू में देशविरोधी नारे लगाए जाने के मामले में कन्हैया कुमार समेत अन्य के खिलाफ बिना दिल्ली सरकार से मंजूरी लिए चार्जशीट दायर करने पर दिल्ली पुलिस को कोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक दिल्ली सरकार चार्जशीट दायर करने की मंदूरी नहीं देती, तब तक हम इस पर संज्ञान नहीं लेंगे। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट पर पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी और इस पर पुलिस ने कहा है कि वह दिस दिनों के भीतर मंजूरी ले लेगी। 
    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 9 फरवरी 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान कथित देशविरोधी नारे लगाए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। दरअसल, जेएनयू मामले में कन्हैया कुमार व अन्य के खिलाफ दायर चार्जशीट के लिए दिल्ली सरकार ने अब तक दिल्ली पुलिस को अनुमति नहीं दी है।
    दिल्ली कोर्ट ने कहा कि आपके पास लीगल डिपार्टमेंट की मंजूरी नहीं है, तो फिर बिना मंजूरी के आपने चार्जशीट फाइल क्यों की? इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि हम दस दिनों के भीतर इसकी मंजूरी ले लेंगे। दरअसल देशद्रोह के मामले में सीआरपीसी के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार मंजूरी नहीं दे देती, तब तक कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान नहीं ले सकता। 
    दरअसल, देशद्रोही मामले में दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अनुमति लेनी होती है और यह दिल्ली सरकार का लॉ डिपार्टमेंट देता है। इतना ही नहीं, अनुमति लेने के लिए फाइल एलजी के पास भी जाती है। अगर परमिशन नहीं मिली तो चार्जशीट पर कोर्ट संज्ञान नहीं लेगा। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जिस दिन चार्जशीट पेश की उसी दिन परमिशन के लिए अप्लाई किया था।  
    दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट सेक्शन-124ए, 323, 465,471, 143, 149, 147, 120 बी के तहत  पेश की गई है। चार्जशीट में कुल 10 मुख्य आरोपी बनाए हैं जिसमें कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य हैं। चार्जशीट में मुख्य आरोपी कन्हैया कुमार, अनिर्बान भट्टाचार्य, उमर खालिद, सात कश्मीर छात्र और 36 अन्य लोग हैं। चार्जशीट के मुताबिक कन्हैया कुमार ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे। गवाहों के हवाले से चार्जशीट में बताया गया है कि कन्हैया कुमार ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे। पुलिस को कन्हैया का भाषण देते हुए एक वीडियो भी मिला है। इसके साथ ही कहा गया है कि कन्हैया को पूरे कार्यक्रम की पहले से जानकारी थी। चार्जशीट में जिन सात कश्मीरी छात्रों के नाम हैं, उनसे पूछताछ हो चुकी है।
    कन्हैया कुमार,उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्रों के नाम कॉलम नंबर 11 में रखे गए हैं। कॉलम नंबर 11 का मतलब ये होता है कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और इन पर केस चलाया जा सकता है। बाकी 36 लोगों के नाम कॉलम नंबर 12 में रखा गया है जिनमें डी राजा की बेटी अपराजिता और शहला राशिद भी शामिल हैं। कॉलम नंबर 12 का मतलब ये हैं कि ये आरोपी तो हैं लेकिन जांच में पुलिस को इनके खिलाफ सबूत नहीं मिले। कोर्ट चाहे तो इन्हें समन कर सकता है। देशद्रोह,दंगा भडक़ाना, अवैध तरीके से इकठ्ठा होना और साजिश के आरोप में पेश होगी चार्जशीट कुल 46 आरोपी हैं। 
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस मामले में सबूत के तौर पर  घटना के वक्त के कई वीडियो फुटेज, जो सीबीआई की सीएफएसएल में जांच के लिए भेजे गए थे और जिसके नमूने  पॉजिटिव पाए गए थे, इसके अलावा मौके पर मौजूद कई लोगों के बयान, मोबाइल फुटेज, फेसबुक पोस्ट, बैनर पोस्टर शामिल हैं। वहीं जेएनयू प्रशासन, एबीवीपी के छात्र, सिक्योरिटी गार्ड, और कुछ अन्य छात्र को भी इसमें गवाह बनाया गया है।  इस मामले करीब 30 और लोग संदिग्ध पाए गए थे। लेकिन उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले थे। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । कर्नाटक में सियासी घमासान अभी थमा नहीं है। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को अब भी डर है कि कहीं बीजेपी ऑपरेशन लोटस को सफल कराने के लिए उनके विधायक न तोड़ दें। इसलिए कांग्रेस ने एहतियातन बीजेपी की तर्ज पर ही अब बड़ा कदम उठाया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की साझा सरकार भले ही बच गई हो लेकिन कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को फिलहाल बाहरी बेंगलूरु के एक रिसॉर्ट में रखने का फैसला किया है, जब तक बीजेपी के सभी विधायक गुरूग्राम से वापस कर्नाटेक न लौट आएं। शनिवार की सुबह कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने गुरुग्राम में डेरा जमाए सभी भाजपा विधायकों को वापस बुलाया है।
    दरअसल, अब कांग्रेस ने अपने विधायकों को भाजपा के हमले से बचाने के लिए रिसॉर्ट ले जाने की रणनीति अपनाई है। कर्नाटक में कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी अपने विधायकों को भाजपा के हमले से बचाने के लिए एक रिसार्ट ले जा रही है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गठबंधन सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आगामी लोकसभा चुनावों में तीन या चार सीटें ही मिलने का डर है।    
    सिद्धरमैया ने कहा कि हमारे सभी विधायक एक साथ रहेंगे। हम वहां सूखे की स्थिति पर चर्चा करेंगे। हमारे सभी विधायक, सांसद और मंत्री एक स्थान पर रहेंगे... जब तक जरूरी होगा, हम रहेंगे। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि हम पार्टी के मुद्दों के बारे में चर्चा करेंगे...भाजपा के हमले से बचने के लिए। हम सूखा, लोकसभा चुनाव के बारे में भी चर्चा करेंगे। 
    कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कम से कम आठ विधायकों ने पाला बदलने का वादा किया था। सूत्रों ने कहा कि इससे बचने के लिए विधायकों को शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट ले जाया जाया गया। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद सभी 75 विधायकों को बस में भर कर बाहरी बेंगलुरु के एक रिसोर्ट ले जाया गया। बीजेपी विधायकों की गुरुग्राम से वापसी तक ये सभी विधायक वहीं रहेंगे। लेकिन जब विधायक दल के नेता सिद्धहरमैय्या से पूछा गया कि अब वो ऐसा क्यो कर रहे हैं तो उन्होंने बीजेपी नेता येदियुरप्पा की भाषा में जवाब दिया।  
    सिद्धारमैया ने हालांकि, इस बारे में कहा कि हम लोग विधायकों को लोक सभा चुनावों की स्ट्रेटेजी तैये करने के लिए रिसोर्ट जा रहे हैं। बता दें कि गरुग्राम से वापस लौटने के बाद येदियुरप्पा ने भी यही कहा था कि वो गुरुग्राम में अपने विधयकों के साथ लोकसभा चुनावों की रणनीति तय कर रहे थे। उधर बेंगलुरु में शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 4 बागी विधायकों के इलावा सभी मौजूद थे। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • पटना, 19 जनवरी । कभी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे राम कृपाल यादव को लेकर राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने विवादास्पद बयान दिया है। लालू यादव की बेटी मीसा भारती ने राजद से अलग हुए और फिलहाल मोदी सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव को लेकर कहा कि जब वह बीजेपी में शामिल हो रहे थे, तब उनका मन उनके हाथ काटने का हुआ था। 
    राष्ट्रीय जनता दल की नेता और राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव को लेकर कहा कि जैसे ही मुझे मुझे पता चला कि राम कृपाल यादव राजद छोडक़र बीजेपी में शामिल होने वाले हैं, उस वक्त मेरा मन किया कि उनके हाथ काट दूं।
    पटना के बिक्रम इलाके में 16 जनवरी को एक जनसभा को संबोधित करते हुए मीसा भारती ने कहा कि वह (राम कृपाल यादव) चारा काटा करते थे। हमारे मन में उनके लिए काफी सम्मान था। हालांकि, यह सम्मान तब खत्म हो गया, जब उन्होंने सुशील मोदी से हाथ मिला लिया। उस वक्त मुझे ऐसा महसूस हुआ था कि उसी चारा काटने वाली मशीन में उनके हाथ डालकर काट दूं। मीसा भारती ने आगे कहा कि मैं अब जीत के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। साल  2014 में मुझे तैयारी करने का मौका नहीं मिला था। 
    केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव प्रारंभ में राष्ट्रीय जनता दल के नेता थे। इन्हें एक समय लालू यादव का काफी करीबी माना जाता था। हालांकि, 2014 में सीट को लेकर उन्होंने राजद से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वह पाटलीपुत्र लोकसभा सीट से लड़े और मीसा भारती को हराया था। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की विपक्षी दलों की रैली का समर्थन करने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर शुक्रवार को भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि यह स्वभाविक है कि बहनजी के छोडऩे के बाद वह दीदी को याद करेंगे। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में शनिवार को भाजपा के खिलाफ होने वाली इस रैली में 20 से अधिक विपक्षी दलों के नेताओं के शरीक होने की उम्मीद है। भाजपा की इस टिप्पणी में संभवत: बहनजी का जिक्र बसपा प्रमुख मायावती और दीदी का जिक्र पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए किया गया है।    
    केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि रैली से भगवा पार्टियों के प्रतिद्वंद्वियों के बारे में यह खुलासा होता है कि वे अपने बूते मुकाबला नहीं कर सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या ममता को राहुल के समर्थन पत्र से विपक्ष की मजबूती प्रदर्शित होती है, स्मृति ईरानी ने जवाब दिया, जब बहनजी ने उन्हें छोड़ दिया, तब यह स्वभाविक है कि वह दीदी (ममता) को याद करेंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के हाल ही में गठबंधन की घोषणा किए जाने की ओर संभवत: इशारा करते हुए यह कहा।  (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • अंग्रेजी पत्रिका आउटलुक ने अपने ताजा अंक में लालू प्रसाद यादव को 2019 का एक ऐसा किंगमेकर बताते हुए कवर स्टोरी की है, जो शायद रंगमंच पर नजर नहीं आएगा...

    दिलीप मंडल, वरिष्ठ पत्रकार

    इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चमचमाते टर्मिनल-3 में एक स्टोर की मैगजीन शेल्फ पर सजी एक इंग्लिश मैगजीन का कवर किसी को भी चौंका सकता है। आउटलुक पत्रिका ने अपने कवर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की तस्वीर छापी है और शीर्षक दिया है- 'एबसेंटी किंगमेकर।Ó इस शीर्षक के नीचे लिखा है कि नया कोटा लाए जाने के बाद पुराने मंडल मसीहा 2019 के चुनाव में चौंका सकते हैं।
    ये कवर स्टोरी इस बुनियाद पर लिखी गई है कि 70 साल की उम्र में तमाम बीमारियों को झेलते हुए भी लालू यादव प्रासंगिक बने हुए हैं। कैद के दौरान वे खराब स्वास्थ्य के कारण अस्पताल में हैं, जहां उनसे मिलने देश के बड़े-बड़े विपक्षी नेता आते हैं। साथ ही कोटा को लेकर राजनीति करने में वे माहिर हैं और केंद्र सरकार ने अनरिजर्व कटेगरी के गरीबों को आरक्षण देकर एक तरह से खेल को जाति की पिच पर पहुंचा दिया है। जेल से ही वे पार्टी को चला रहे हैं और नीतियां बना रहे हैं।
    पत्रिका का ये भी मानना है कि उन्हें जमानत मिल सकती है, क्योंकि पार्टी अध्यक्ष होने के नाते वे ही उम्मीदवारों के फॉर्म पर साइन करने के लिए अधिकृत हैं। हालांकि लालू यादव को जमानत मिल पाना न्यायपालिका पर निर्भर करता है और यह कतई जरूरी नहीं है कि चुनावों के दौरान लालू यादव बाहर रहें। लेकिन पत्रिका का मानना है कि अगर वे कैद में रहते हैं, तो भी वे राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करेंगे। अगर लालू यादव बाहर आते हैं और जनसभाओं को संबोधित करते हैं तो ये उनकी पार्टी की ताकत को बढ़ाएगा, क्योंकि वे जबर्दस्त वक्ता हैं और जनता से जुडऩे की कला उन्हें आती है।
    जिस नेता का मृत्युलेख कई-कई बार लिखा जा चुका है और जिसे राजनीति का चूका हुआ खिलाड़ी बताया जाता है, उस नेता के बारे में देश की एक प्रमुख पत्रिका, जो किसी भी तरह से लालू यादव की समर्थक नहीं है, का लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कवर स्टोरी लाना एक महत्वपूर्ण बात है।
    इस पत्रिका ने लालू यादव के राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना जताते हुए जो तर्क दिए हैं, उसके परे देखें तो कुछ और बातें नोट करने लायक हैं। लालू यादव भारतीय राजनीति के उन चंद किरदारों में से एक हैं, जिन्होंने बीजेपी से कभी समझौता नहीं किया। चूंकि बीजेपी तीन बार केंद्र में सत्ता में आ चुकी है, इसलिए अलग अलग समय में अलग अलग दल उसके साथ गठबंधन बना चुके हैं या बीजेपी को समर्थन दे चुके हैं। इन दलों की लिस्ट लंबी है। उनमें बसपा, डीएमके, एआईएडीएमके, तेलुगू देशम, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल, अकाली दल, जेडीयू, जेडीएस, एलजेपी, आरएलएसपी, अपना दल, शिव सेना वगैरह शामिल हैं।
    सपा ने कभी सीधे बीजेपी से हाथ नहीं मिलाया, लेकिन बीजेपी के विधानसभा अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी की मदद से यूपी में सरकार जरूर चलाई है। जिन दलों का बीजेपी से सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं रहा, उनमें कांग्रेस, वामपंथी दल और आरजेडी ही प्रमुख हैं। यहां लालू कई और नेताओं से अलग नजर आते हैं। इसलिए किसी भी सेकुलर गठबंधन में लालू प्रसाद यादव की प्रतिष्ठा होती है। ये प्रतिष्ठा नेताओं से लेकर आम जनता तक के स्तर पर है। लालकृष्ण आडवाणी के राम रथ को बिहार में रोकने और आडवाणी को गिरफ्तार करने, नजरबंद कर लेने के कारण भी लालू यादव की इज़्जत है।
    बीजेपी से किसी भी कीमत पर हाथ न मिलाने के कारण बीजेपी भी लालू यादव को सच्चे दुश्मन की तरह लेती है। उन्हें बर्बाद करने के लिए कोई कसर बीजेपी ने नहीं छोड़ी है। उनके पीछे सीबीआई लगा दी गई है। हाईकोर्ट ने जब ये कहा कि लालू यादव के खिलाफ सरकारी खजाने से पैसे निकालने के षडय़ंत्र में शामिल होने के मुकदमे अलग अलग नहीं चल सकते, तो सीबीआई उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। केंद्रीय जांच एजेंसियां लालू यादव के परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ मुकदमे चला रही है, और उनका जीना मुश्किल कर दिया गया है।
    मोदी लहर में बिहार में हार गई बीजेपी
    इससे लालू यादव और उनके परिवार की परेशानी बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। बाकी कई दलों के नेताओं ने जब सीबीआई से बचने के लिए सरकार के आगे घुटने टेक दिए, तब लालू यादव बीजेपी से भिड़ते रहे। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आरक्षण की समीक्षा करने के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना लिया।
    जब देश में तथाकथित मोदी लहर चल रही थी और लोकसभा चुनाव में एनडीए बिहार की 40 में से 31 सीट जीत चुका था, उसके एक साल बाद हुए चुनाव में लालू और नीतीश की जोड़ी ने बीजेपी को चारों खाने चित कर दिया। हालांकि बाद में नीतीश कुमार ने पलटी मार दी, लेकिन वह अलग कहानी है। तीन राज्यों में हाल के विधानसभा चुनाव से पहले, बिहार ही वह राज्य था, जहां नरेंद्र मोदी का विजयी रथ किसी ने रोक दिया था। जाहिर है कि लालू यादव जानते हैं कि बीजेपी को कैसे रोका जा सकता है। धर्म की राजनीति को वे जाति की राजनीति से काट सकते हैं। इसलिए भी जरूरी है कि अगले लोकसभा चुनाव में लालू यादव पर नजर बनाए रखें। और भी कई लोग ऐसा कर रहे हैं। 
    (दिप्रिंट)

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । भाजपा ने आगामी लोक सभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान में नरेंद्र मोदी की अहम भूमिका तैयार की है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी मई में चुनाव खत्म होने तक करीब 300 तक चुनावी रैलियों को संबोधित कर सकते हैं। इसकी शुरुआत एक हफ्ते पहले हो चुकी है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते करीब पांच साल में शुरू की गई सभी परियोजनाओं का उद्घाटन चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले करना चाहते हैं। इस उद्घाटन कार्यक्रम के बाद वे वहां एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे अपने मोबाइल एप के जरिए भी अलग-अलग तबकों के साथ बातचीत करेंगे। (अमर उजाला)

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • समीरात्मज मिश्र

    प्रयागराज से, 19 जनवरी । कुंभ क्षेत्र में जगह-जगह धार्मिक प्रवचन, कीर्तन, आरती और भक्ति में सराबोर श्रद्धालुओं का आवागमन ये बता देता है कि रेत की धरती पर तंबुओं का बसा ये यह शहर एक आध्यात्मिक नगरी है।
    डेढ़ महीने तक चलने वाले इस कुंभ में आने वाला हर व्यक्ति इसी अध्यात्म का ही सुख लेने आता है। लेकिन जगह-जगह राजनीतिक दलों से जुड़े संगठनों के शिविर और नेताओं के होर्डिंग्स कई बार अचरज में डालते हैं कि आखिर इनका यहां क्या काम है?
    कुंभ मेले के सेक्टर 14 में विश्व हिन्दू परिषद के शिविर से लौट रहे झारखंड के रहने वाले मुदित पोद्दार से जहां हमारी मुलाकात हुई, ठीक उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा कट आउट और उसके सामने एक महात्मा जी के साथ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की तस्वीर लगा हुआ बैनर टँगा था।
    मुदित पोद्दार का कहना था कि जब सारा आयोजन सरकार ही करा रही है तो सरकार के पोस्टर-बैनर लगने ही चाहिए। हालांकि आगे उन्होंने ये भी कहा कि मुझे नहीं लगता है कि ये किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए होगा। यहां दूर-दूर से आदमी आस्था के कारण आता है, राजनीति और दूसरी चीजों को अपने घर पर रखकर आता है।
    विश्व हिन्दू परिषद के कार्यालय में जाने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा वो खुद भी परिषद से जुड़े हुए हैं। वीएचपी के विशालकाय परिसर से लगा हुआ मुख्य सड़क पर ही एक छोटा सा शिविर भी था जिसमें अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का डिजाइन रखा हुआ था। कुछ लोग उसे भी देख रहे थे और देखकर वापस आ रहे थे।
    उन्हीं में से एक कौशांबी के रहने वाले राम सुमेर अपने परिवार के साथ आए थे। कहने लगे कि लग रहा है यही ढांचा देखते ही जीवन बीत जाएगा, असली मंदिर नहीं देखने को मिलेगा। राम सुमेर ने बताया कि उनकी उम्र करीब अस्सी साल है, सरकारी नौकरी से रिटायर्ड हैं और रिटायरमेंट के बाद लगभग हर साल दीपावली के आस-पास अयोध्या जाते हैं। उन्हें इस बात की उम्मीद थी कि मौजूदा राजनीतिक हालात में राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा, लेकिन अब वो नाउम्मीद हैं।
    चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि लगभग हर राजनीतिक दल के यहां हर साल शिविर लगते हैं। ये पूछने पर कि ऐसा क्यों होता है, वो झल्लाहट के साथ बोले कि पता नहीं क्या होता है, हम तो आज तक कभी वहां गए नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि नेताओं के शिविर में रामायण और गीता का पाठ तो होता नहीं होगा, राजनीति ही बतियाई जाती होगी।
    राम सुमेर के साथ चल रहे उनके भतीजे दिनेश कुमार बेहद दार्शनिक अंदाज में कहने लगे कि कई शिविर ऐसे भी हैं जो हैं तो महात्मा जी लोगों के नाम के, लेकिन वहां प्रवचन के दौरान भी कुछ ऐसी बातें की जाती हैं जिससे आप को ये पता चल जाए कि उनके हिसाब से चुनाव में वोट किसे देना है, या फिर कौन सी पार्टी ऐसी है जो हिन्दू हितों की बात करती है ?
    दिनेश ने न तो महात्मा जी का नाम बताया और न ही ये बताया कि महात्मा जी जिस पार्टी के लिए परोक्ष रूप से प्रचार कर रहे हैं, उनके हिसाब से वो पार्टी कौन सी है। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि आप पत्रकार हैं, सब समझ रहे हैं। वहीं सेक्टर 11 में कांग्रेस सेवा दल के शिविर के बाहर कुछ लोग आपस में बातचीत में कर रहे थे। कांग्रेस सेवादल से पहले जुड़े रहे दुर्गेश दुबे बताते हैं कि ये सब प्रचार प्रसार के लिए है, कुछ लोग सेवा भाव के नाम पर भी शिविर लगाते हैं और यहां आए श्रद्धालुओं की सेवा करते भी हैं लेकिन इसका राजनीति से कोई मतलब नहीं है। यहां कोई राजनीतिक कार्यक्रम इत्यादि तो होते नहीं है। ऐसे में कोई क्या फायदा लेगा।
    लेकिन दुर्गेश दुबे की बात को काटते हुए विवेक पांडेय कहने लगे कि राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश तो अपने ढंग से नेता लोग करते ही हैं। उनके शिविरों में कोई पहुंच भर जाए, अपने ढंग से उसे समझाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कोई राजनीतिक लाभ नहीं होता होगा, ऐसा लगता नहीं है।
    दरअसल, कुंभ मेला परिसर में लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े शिविर दिख जाते हैं। सेक्टर 8, 11, 12 इत्यादि में कहीं भारतीय जनता पार्टी का, कहीं समाजवादी पार्टी का, कहीं कांग्रेस सेवादल का तो आम आदमी पार्टी का शिविर भी यहां देखा जा सकता है। कुंभ में राहुल गांधी की प्रस्तावित यात्रा को देखते हुए सेवादल और दूसरे फ्रंटल संगठन पूरे जोर-शोर से इस कोशिश में लगे हैं कि राहुल गांधी के सॉफ्ट हिन्दुत्व की जमकर ब्रांडिंग कर सकें।
    हालांकि इन कैंपों में लोग श्रद्धालुओं के लिए प्राथमिक चिकित्सा, खोए हुए लोगों को परिवार से मिलाना, कल्पवासियों की मदद जैसे कार्य करते हैं। मसलन, राशन वितरण में कोई समस्या हो तो या फिर उन्हें किसी अन्य परियोजना से लाभ दिलाने में उनकी मदद करना, भटकने वाले लोगों को सही गंतत्व्य तक पहुंचाना, कुंभ में भीड़ मैनेजमेंट में सहयोग देना आदि भी शामिल हैं।
    यही नहीं, कुंभ के पहले शाही स्नान के दौरान तीन केंद्रीय मंत्रियों के संगम स्नान की खबरें भी चर्चा में रहीं। इसके अलावा अन्य दलों के लोग भी यहां आते हैं। ये अलग बात है कि मेला परिसर में कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होता है लेकिन राजनीतिक दलों की कोशिश होती है कि वो अपने प्रचार-प्रसार में कोई कमी न छोड़ें।
    यूपी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार और इस समय भारतीय जनता पार्टी से निगम पार्षद रतन दीक्षित कहते हैं कि ये इतना बड़ा प्लेटफॉर्म है कि राजनीतिक दल इसे अपने लिए इस्तेमाल करने से चूक कैसे सकते हैं। दूसरी ओर, साल 2019 भी है, लोकसभा चुनाव मेला खत्म होते ही शुरू होने वाले हैं। राज्य सरकार ने इतनी ब्रांडिंग की है तो श्रेय लेने में पीछे कैसे हटेगी। सिर्फ बीजेपी ही नहीं, ये सभी दलों की कोशिश होती है। बीजेपी चूंकि केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार में है तो उसके पोस्टर-बैनर ज्यादा दिख रहे हैं।
    इलाहाबाद में वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्र कहते हैं कि जिस तरह से आज मोदी और योगी की तस्वीरें दिख रही हैं, बीजेपी के नेताओं की दिख रही हैं, उसी तरह से पिछले कुंभ में समाजवादी पार्टी के नेताओं और तत्कालीन सरकार से जुड़े मंत्रियों के होर्डिंग्स से जगहें पटी हुई थीं। सरकार में रहने वाली पार्टी यह फायदा तो उठाती ही है। लेकिन इससे यहां आने वाले लाखों-करोड़ों लोग उससे प्रभावित होकर उन्हें वोट दे देंगे, ऐसा शायद ही होता हो।
    पहले शाही स्नान के दौरान संगम नोज पर जहां शाही स्नान होता है और अखाड़ों के संत जिस रास्ते से आते हैं, उसके दोनों ओर प्रधानमंत्री के कटआउट और मुख्यमंत्री योगी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, अन्य कैबिनेट मंत्रियों और दूसरे नेताओं के बैनर लगे हुए थे। तमाम अभी भी हैं और कुछ नए भी लग रहे हैं। तमाम साधु-संतों ने अपनी तस्वीरों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तस्वीर छाप रखी है।
    हालांकि राजनीतिक दलों के लोगों का कहना है कि वो लोग शिविर इसलिए भी लगाते हैं ताकि उनकी पार्टी से जुड़े बाहर के जो लोग आ रहे हैं, वो स्थानीय स्तर पर किसी परेशानी की स्थिति में उनसे संपर्क कर सकते हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कोई राजनीतिक कार्यक्रम तो यहां नहीं होता लेकिन अक्सर भंडारा करना, पैंफलेट बांटना और लोगों की मदद करने जैसे काम सीधे तौर पर राजनीतिक लाभ के मकसद से ही किए जाते हैं। हां, मिलता कितना है, ये देखने वाली बात है।
    बहरहाल, राजनीतिक दलों को लाभ हो या न हो लेकिन चुनावी साल में लाखों-करोड़ों की भीड़ में प्रचार प्रसार का मौका छोडऩा भला कौन चाहेगा। (बीबीसी)

     

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • दिलनवाज पाशा

    कोलकाता, 19 जनवरी । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बुलावे पर आज देशभर में विपक्षी पार्टियों के नेता यूनाइटेड इंडिया रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। इस साल मई में होने वाले आम चुनावों से पहले इसे बड़ी मोदी विरोधी रैली माना जा रहा है।
    पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार के अलावा बगावदी तेवर रखने वाले बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व केंद्रीय अंत्री अरुण शौरी, डीएमके नेता एमके स्टालिन रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं।
    कोलकाता में मौजूद बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के लाखों समर्थक भी इस रैली में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं। ममता बनर्जी इस रैली के जरिए विपक्षी एकता के अलावा अपनी ताकत का अहसास भी कराना चाहती हैं। और यही वजह है कि इस रैली में भारी भीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
    ममता बनर्जी ने इस रैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंत की शुरुआत कहा है, लेकिन भाजपा इसे थके हुए नेताओं का जमावड़ा मान रही है।
    पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष ने बीबीसी से कहा,ये पहली बार नहीं है जब इस तरह की रैली पश्चिम बंगाल में हुई है। लेफ्ट फ्रंट ने भी इसी तरह सभी को बुलाया था लेकिन आज वो कहां हैं। ये सिर्फ बीजेपी के विरोध में और मोदी के डर की वजह से एक साथ आए हैं।
    वो कहते हैं कि ये सब सिर्फ अपना अस्तित्व बचाने के लिए यहां जुट रहे हैं, देश के लोगों पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे-ऐसे नेताओं को लाकर शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा है जिनका अपने प्रदेश में कोई समर्थन नहीं हैं। रिजेक्टेड और रिटायर्ड नेताओं का जमावड़ा किया जा रहा है।
    इस रैली में जहां देश भर की विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता मंच पर होंगे वहीं दो नेताओं की गैर मौजूदगी खलेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रैली में शामिल होने के लिए मल्लिकार्जुन खडग़े को भेजा है वहीं मायावती भी स्वयं उपस्थित रहने के बजाए अपना प्रतिनिधि भेज रही हैं।
    राहुल गांधी और मायावती की गैर मौजूदगी से कई सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि क्या एक मंच पर प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार एक साथ नहीं दिखना चाहते?
    कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक कहती हैं कि प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर कांग्रेस की राय स्पष्ट है। प्रधानमंत्री पद का दावा वही करे जिसे सबसे ज्यादा जनसमर्थन मिले। हम ये भी मानते हैं कि सभी बड़े राजनीतिक दलों का नेतृत्व कर रहे लोगों की अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं भी हैं और हम उनका सम्मान करते हैं। लेकिन अंतिम फैसला जनता ही करेगी।
    चुनावों से पहले बन रहे गठबंधनों में कांग्रेस की भूमिका के सवाल पर वो कहती हैं कि हम हर प्रदेश की परिस्थिति को देखते हुए गठबंधन करेंगे। कहीं चुनाव से पहले गठबंधन होगा तो कहीं चुनाव के बाद। गठबंधन आज की राजनीति की हकीकत है इसे कोई नकार नहीं सकता।
    दूसरी ओर मायावती के इस रैली में न पहुंचने के भी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया कहते हैं कि उनकी पार्टी भी इस रैली में शामिल हो रही हैं। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या मायावती अपने आप को विपक्ष की ओर प्रधानमंत्री पद की दौड़ में आगे दिखाने के लिए रैली में नहीं पहुंच रही हैं तो उन्होंने कहा कि इस देश को संभालने के लिए हमारी पार्टी, देश के दलितों, गरीबों, पिछड़ों और सभी धर्मों के लोगों की सबसे चहेती नेता इस समय मायावती ही हैं।
    वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री पद की इच्छा कोई भी रख सकता है, इसमें कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन कोलकाता में इस समय विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुनने के लिए नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी को कैसे हराया जाए इसके लिए जुट रहे हैं।
    हाल के महीनों में आए कई राजनीतिक परिणामों और किसानों और बेरोजगारों के मुद्दों के प्रखर होने से देश का राजनीतिक माहौल बदला है। इस बदले माहौल में कोलकाता में ममता बनर्जी के आह्वान पर बुलाई गई रैली से क्या गठबंधन का कोई नया सूत्र निकलता है ये देखने की बात होगी। (बीबीसी)

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । लोकसभा के आगामी चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी (आप) ने कांग्रेस के साथ किसी तरह के गठजोड़ की संभावनाओं से इंकार किया है। खबरों के मुताबिक इसे लेकर आप की दिल्ली इकाई के संयोजक गोपाल राय ने कहा है, हमने जहर का घूंट पीकर देशहित में कांग्रेस के साथ समझौता करने पर विचार किया था। लेकिन कांग्रेसी नेताओं के हाल के बयानों से लगता है कि इस पार्टी के लिए उसका अहंकार देशहित से ऊपर है।
    गोपाल राय ने कहा, समान सोच रखने वाले फारुख अब्दुल्ला, एमके स्टालिन, चंद्रबाबू नायडू, ममता बनर्जी जैसे नेताओं ने आप से कांग्रेस के साथ गठजोड़ करने की अपील की थी। वैचारिक मतभेदों को भुलाकर हमने इसकी कोशिश भी की। लेकिन कांग्रेस के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह व शीला दीक्षित के आप विरोधी बयानों को देखते हुए हमने अब अपना इरादा बदल दिया है।
    गोपाल राय का यह भी कहना है कि उनकी पार्टी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और गोवा की सभी संसदीय सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। साथ ही वह इन राज्यों में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। माना जा रहा है कि आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जल्दी ही प्रत्याशियों के नामों की घोषणा भी कर सकते हैं।
    इस बीच कांग्रेस की दिल्ली इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी खुद कांग्रेस के साथ गठबंधन की इच्छुक थी। इसके लिए वह लगातार कांग्रेस का पीछा भी कर रही थी। हालांकि गोपाल राय के बयान पर शीला दीक्षि?त ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और आप के बीच चुनावी गठबंधन को लेकर पार्टी हाईकमान ही कोई फैसला करेगा। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 19 जनवरी । चुनाव आयोग आगामी मार्च के पहले सप्ताह में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। आयोग के सूत्रों ने शुक्रवार को यह संकेत दिया है। लोकसभा चुनाव के साथ कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं।
    मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल आगामी तीन जून को खत्म होगा। बताया जा रहा है कि इसके मद्देनजर आयोग ने चुनाव किस महीने में और कितने चरण में कराए जाएं, यह तय करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। सिक्किम विधानसभा का कार्यकाल आगामी मई तथा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल आगामी जून में पूरा हो रहा है।
    इसके अलावा जम्मू-कश्मीर विधानसभा पिछले साल नवंबर में भंग की गई थी। नयी विधानसभा के गठन की छह महीने की निर्धारित अवधि इस साल मई में पूरी होने से पहले राज्य में चुनाव कराना अनिवार्य है। जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने का फैसला हालांकि राज्य में पुख्ता सुरक्षा इंतजामों की पुष्टि पर ही निर्भर है।
    आयोग ने 2004 में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की 29 फरवरी को चार चरण में, 2009 में दो मार्च को पांच चरण में और 2014 में पांच मार्च को नौ चरण में कराने की घोषणा की थी। पिछले तीनों लोकसभा चुनाव अप्रैल से मई के दूसरे सप्ताह तक संपन्न करा लिये गये।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • पणजी, 19 जनवरी । गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि ‘कुछ नेताओं को दूसरों की बदौलत पद मिल जाते हैं और उन्हें पद पर बनाए रखने की कुछ मजबूरियां होती हैं, चाहे भले ही वे अच्छा काम करें या नहीं करें।’ राज्यपाल ने गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा आयोजित महिला नेतृत्व संगोष्ठी में ‘पाथवेज टू रिजिलिएंट’ विषय पर बोलने के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ‘एक्सिडेंटल लीडर’ को आसीन करते समय यह नहीं सोचा गया कि वह मुद्दों, विषयों की बारीकियों को समझता है या नहीं और ऐसा करने के पीछे सिर्फ कुछ मजबूरियां होती हैं।
    हालांकि, उन्होंने मनमोहन सिंह का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पूर्व प्रधानमंत्री पर बनी बायोपिक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ विवादों में हैं और सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच वाक्युद्ध छिड़ गया है।
    सिन्हा ने कहा, कई प्रकार के नेता होते हैं, उनमें से कुछ ‘एक्सिडेंटल’ भी हैं और दूसरों की बदौलत पद पर काबिज हो जाते हैं। उन्होंने मौजूद लोगों से कहा, उन्हें (नेता) बनाया जाता है और कुछ काम करने के लिए कहा जाता है। वह कितना काम कर सकते हैं, काम हुआ या नहीं, उनमें काबिलियत है या नहीं, उसने मुद्दों के समझा या अध्ययन किया या नहीं...इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसा करने के पीछे सिर्फ कुछ मजबूरियां होती हैं।
    उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में वह किस विषय पर वह बोलेंगी, इस पर उन्होंने विचार किया और चिंतन किया कि कितने तरह के नेता होते हैं।
    राज्यपाल ने कहा, सुबह जब मैं ध्यान कर रही थी तो महसूस किया कि कुछ नेता ‘एक्सिडेंटल’ हैं। वे अचानक (नेता) बने हैं। एक्सिडेंटल नेता...हालांकि, राज्यपाल ने कहा कि यहां तक कि अचानक पद पर काबिज कर दिए जाने के बाद एक नेता भी अंतत: नेतृत्व की स्थिति में आने के बाद अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग हो जाता है।
    उन्होंने कहा कि एक नेता को संवेदनशील होना चाहिए और अगर उस शख्स में दूसरों की पीड़ा को समझने की काबिलियत नहीं है तो फिर वह सफल नेता नहीं बन सकता। फिल्म ‘द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू द्वारा लिखी गई किताब पर आधारित है। ग्यारह जनवरी को फिल्म रिलीज होने के बाद से ही कांग्रेस कार्यकर्ता कुछ राज्यों में इसका विरोध कर रहे हैं। फिल्म में मनमोहन सिंह की भूमिका में अभिनेता अनुपम खेर हैं। (आईएएनएस)

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • रांची, 19 जनवरी  । झारखंड में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की रूप-रेखा करीब-करीब तय होता दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में विपक्षी पार्टियों ने विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन को अपना नेता चुना है। साथ ही, कांग्रेस की अगुवाई में लोक सभा के चुनावी दंगल में उतरने की बात भी कही गई है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक विपक्षी दलों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है। बताया जाता है कि इस महागठबंधन में इन दोनों पार्टियों के साथ बाबू लाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा, राजद और लेफ्ट दल भी शामिल होंगे। वहीं, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का एलान किया है। (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 18 जनवरी । बीजेपी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उन्हें अपनी पार्टी में सम्मान नहीं मिला। वे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की कोलकाता में शनिवार को होने वाली रैली में हिस्सा लेंगे। उन्होंने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय नेता बताया।   
    सिन्हा ने गुरुवार को बताया कि वह राष्ट्र मंच के प्रतिनिधि के तौर पर रैली में हिस्सा लेंगे। इस राजनीतिक समूह की शुरुआत बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने की थी जिसका समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा भी करते हैं। अभिनेता और नेता सिन्हा केंद्र की बीजेपी सरकार के कई निर्णयों को लेकर उसका विरोध करते रहे हैं जिसमें नोटबंदी भी शामिल है। वह इन निर्णयों को वन मैन शो बताते रहे हैं।    
    शत्रुघ्न सिन्हा से यह पूछे जाने पर कि लोकसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी क्या प्रधानमंत्री बनेंगीं, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनाने का फैसला चुनाव में संख्या से होता है, तय लोग और नेता करते हैं। वे (ममता) श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाली श्रेणी की नेत्री हैं। वे सिर्फ एक क्षेत्रीय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय नेता हैं।
    शत्रुघ्न सिन्हा ने मुंबई से फोन पर बताया, राष्ट्र मंच की तरफ से मैं कार्यक्रम में हिस्सा लूंगा...। उन्होंने रैली में शामिल होने को उचित ठहराते हुए कहा, बीजेपी के कुछ नेता भी आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करते हैं। अभी तक पार्टी के प्रति मेरी वफादारी पर सवाल नहीं किए जा सकते हैं। मैं बीजेपी में तब शामिल हुआ जब यह दो सांसदों की पार्टी थी और मैंने हमेशा इसे मजबूत करने के लिए काम किया है। (भाषा)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • मुंबई, 18 जनवरी । शिवसेना ने अपने संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को लेकर कहा है कि अगर वे नहीं होते तो हिंदुओं को नमाज पढऩी पड़ती। पार्टी ने आज शिवाजी स्मारक के निर्माण को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए यह बात कही। उसने पूछा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने में असफल क्यों रही।
    पार्टी ने कहा, कुछ लोग पूछते हैं कि छत्रपति शिवाजी और बालासाहेब ठाकरे के स्मारक का क्या इस्तेमाल है? छत्रपति शिवाजी महाराज नहीं होते तो पाकिस्तान की सीमा तुम्हारी दहलीज तक आ गई होती और बालासाहेब ठाकरे नहीं होते तो हिंदुओं को भी नमाज पढऩी पड़ती। शिवसेना ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर शिवाजी स्मारक का निर्माण रोक दिया है। उसने कहा कि यह बार-बार हो रहा है जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सरकार स्मारक बनाने को लेकर गंभीर है।
    शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में सवाल किया, क्या अदालत स्मारक के निर्माण के बीच आ रही है या यह कोई और है जो नहीं चाहता कि यह बने तथा वह न्यायपालिका को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है? पार्टी ने कहा कि 3600 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर सरकार शुरुआत से गंभीर नहीं थी। उसने अदालत में शिवाजी स्मारक के निर्माण का मुद्दा अटकाने को ‘शर्मनाक’ बताया।
    महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा के सहयोगी दल ने कहा कि गुजरात में नर्मदा नदी के किनारे बिना किसी पर्यावरणीय या तकनीकी मुद्दे के सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का सफलतापूर्वक निर्माण किया गया। उसने कहा कि सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन किया और इसी तरह तीन तलाक का मुद्दा हल किया, जबकि अयोध्या में राम मंदिर और मुंबई में शिवाजी स्मारक के निर्माण का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • कोलकाता, 18 जनवरी । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में शनिवार को मोदी सरकार के खिलाफ मेगा रैली कर रही हैं। लोकसभा चुनावों से पहले इसे विपक्ष के एकजुट होने और केंद्र सरकार को सत्ता से बेदखल करने की हुंकार के तौर पर देखा जा रहा है। रैली में 19 क्षेत्रीय दलों ने अब तक समर्थन का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी रैली को नैतिक समर्थन देने का ऐलान करते हुए टीएमसी सुप्रीमो को पत्र लिखा है।  
    कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में ममता को दीदी का संबोधन देते हुए मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष में अपना समर्थन दिया है। बंगाल में ममता समर्थकों के बीच दीदी के उपनाम से लोकप्रिय हैं। ज्यादातर अन्य दलों के नेता भी ममता के लिए इसी संबोधन का प्रयोग करते हैं। चि_ी में राहुल ने लिखा कि बंगाल की जनता हमेशा ही जनविरोधी ताकतों के साथ खड़ी रही है। मोदी सरकार के खिलाफ इस वक्त पूरे देश में आक्रोश है और टीएमसी के इस प्रयास का कांग्रेस पार्टी पूरा समर्थन करती है। कांग्रेस की तरफ से रैली में मल्लिकार्जुन खडग़े शामिल होंगे। 
    तल्ख अंदाज में केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना करनेवाली ममता बनर्जी ने रैली से पहले भी जोरदार हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि यह रैली लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के लिए मृत्यु-नाद की मुनादी होगी। भगवा पार्टी के कुशासन के खिलाफ संयुक्त लड़ाई का संकल्प है। बीजेपी के कुशासन के खिलाफ यह संयुक्त भारत रैली होगी। यह बीजेपी के लिये मृत्युनाद की मुनादी होगी... आम चुनाव में भगवा पार्टी 125 से अधिक सीटें नहीं जीत पाएगी। राज्य की पार्टियों द्वारा जीती गयी सीटों की संख्या भाजपा की तुलना में अधिक होगी।
    देश में आम चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन के लिए ममता ने विशाल रैली का अयोजन किया है जिसमें उनके लाखों समर्थकों के शामिल होने की संभावना है। बीजेपी विरोधी मुख्यमंत्रियों में अरविंद केजरीवाल, एच कुमारस्वामी, एन चंद्रबाबू नायडू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, डीएमके के एम के स्टालिन, बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के अलावा अन्य नेताओं के शामिल होने की संभावना है। 
    ममता बनर्जी के साथ मंच पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, एनसीपी नेता शरद पवार, आरएलडी नेता चौधरी अजीत सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और झारखंड विकास मोर्चा के प्रमुख बाबूलाल मरांडी भी मौजूद रहेंगे। 
    रैली में शामिल होने वाले नेताओं के लिए बंगाल की मुख्यमंत्री ने विशेष चाय पार्टी का भी आयोजन किया है। ममता ने खुद इस चाय पार्टी आयोजन की जानकारी देते हुए कहा, ‘बैठक के बाद विपक्षी नेताओं के लिए एक चाय पार्टी का आयोजन किया जाएगा। हम चाय पीएंगे और विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।’  (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • देहरादून, 18 जनवरी । एक ओर आरएसएस ने राम मंदिर निर्माण की नई तारीख बताई है तो दूसरी ओर अब कांग्रेस ने इसे लेकर नया दावा पेश किया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा है कि जब कांग्रेस सत्ता में आएगी, तभी राम मंदिर बनेगा। 
    हरीश रावत ने कहा, मर्यादा का उल्लंघन करने वाले पापी हैं बीजेपी वाले, जो मर्यादा को नष्ट करेंगे वे मर्यादा पुरुषोत्तम के भक्त नहीं हो सकते। हम मर्यादा स्थापित करने वाले लोग हैं, संविधान का आदर करने वाले लोग हैं। कांग्रेस जब सत्ता में आएगी, तभी राम मंदिर बनेगा।
    वहीं आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा था, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 2025 तक होगा। मंदिर बने यह हमारी इच्छा है, 2015 तक पूरा होना चाहिए, यह हमारी इच्छा है। अब सरकार को तय करना है। उन्होंने कहा कि अगर आज मंदिर का निर्माण शुरू होता है तो 5 वर्ष तक पूरा हो जाएगा। 
    इससे पहले गुरुवार को भैयाजी जोशी ने प्रयागराज में कहा, 1952 में सोमनाथ मंदिर की स्थापना के साथ देश गति से आगे बढ़ा, 2025 में राम जन्मभूमि के ऊपर मंदिर बनने के बाद फिर इस दिशा को और गति प्राप्त होने वाली है। उन्होंने कहा, राम मंदिर राष्ट्र की चेतना का केंद्र है। करोड़ों करोड़ लोगों की श्रद्धा का केंद्र है, विश्वास का केंद्र है मंदिर तो हजारों हैं। और इस अयोध्या के मंदिर निर्माण के बाद देश अगले 150 सालों के लिए पूंजी प्राप्त करेगा।  (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • समीरात्मज मिश्र

    लखनऊ से, 18 जनवरी । उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के बाद ये गठबंधन प्रदेश की राजनीति की चर्चा का मुख्य विषय बन गया है लेकिन इस चर्चा के दौरान एक खास युवक ने सबका ध्यान खींचा है, और वो युवक हैं बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश।
    पिछले कुछ दिनों से मायावती के साथ और उन्हीं के आस-पास आकाश मायावती की छाया की तरह दिखाई पड़ते हैं। मौका चाहे सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के वक्त प्रेस वार्ता का हो, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव से मायावती की मुलाकात का हो, किसी सार्वजनिक रैली या सभा का हो या फिर मंगलवार को मायावती के जन्म दिन का, आकाश हर जगह उनके साथ खड़े मिलते हैं।
    कौन हैं आकाश?
    आकाश मायावती के भाई आनंद के बेटे हैं और बताया जा रहा है कि इस वक्त वो हर समय उनके साथ रहकर राजनीति की बारीकियां सीख रहे हैं।
    हालांकि उन्होंने लंदन से मैनेजमेंट में पढ़ाई की है लेकिन जानकारों के मुताबिक, मायावती जिस तरह से उन्हें हर वक्त अपने साथ रखती हैं, उससे इसमें संदेह नहीं होना चाहिए कि वो अपने भतीजे को राजनीति में जल्द ही उतारना चाहती हैं।
    बहुजन समाज पार्टी के नेता आकाश के बारे में कुछ भी बताने से साफ इंकार कर देते हैं लेकिन नाम न बताने की शर्त पर एक बड़े नेता ने इतना जरूर कहा, फिलहाल बहनजी भतीजे आकाश को बसपा में युवा नेता के तौर पर स्थापित करने में लगी हैं और उसे पार्टी की अहम जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही हैं। लेकिन अभी वो सिर्फ उनके साथ दिखते भर हैं, राजनीतिक फैसले बहनजी खुद ही लेती हैं।
    हालांकि बसपा में कोई युवा फ्रंटल संगठन नहीं है, बावजूद इसके पार्टी में और चुनावों में युवाओं की भागीदारी बढ़-चढ़कर देखी जाती है। जानकारों के मुताबिक, बीएसपी में युवा संगठन की जरूरत सभी नेता महसूस करते हैं लेकिन इस बारे में कोई खुलकर नहीं बोलता।
    यही नहीं, पिछले कुछ चुनावों में बीएसपी की हार के पीछे युवाओं का पार्टी से न जुडऩा भी बताया जा रहा है जबकि उसी दौरान सहारनपुर में भीम आर्मी जैसे युवाओं के आकर्षित करने वाले संगठन तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और बीएसपी के लिए कब चुनौती बन जाएं, कहा नहीं जा सकता।
    वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, आकाश को आगे करने के पीछे मायावती की दलित युवाओं को पार्टी की ओर लुभाने की भी हो सकती है। ऐसा करके वो दलित युवाओं के बीच उभरने वाले अन्य संगठनों की धार को कुंद करने की कोशिश करेंगी। कुछ दिन पहले पार्टी पदाधिकारियों की एक बैठक में मायावती ने प्रदेश भर से आए नेताओं का परिचय आकाश से कराया था।
    उस वक्त मायावती ने अपनी पार्टी के लोगों को आकाश के बारे में यही बताया था कि वो उनके भाई आनंद का बेटा है और लंदन से एमबीए करके लौटा है। उस वक्त मायावती ने ये भी कहा था कि आकाश आगे से पार्टी का काम देखेगा, लेकिन अभी तक पार्टी में उन्हें आधिकारिक रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
    सार्वजनिक रूप से आकाश को लोगों ने सहारनपुर में शब्बीरपुर हिंसा के दौरान देखा था। सहारनपुर के वरिष्ठ पत्रकार रियाज हाशमी बताते हैं, उस वक्त जब मायावती शब्बीरपुर आई थीं तो आकाश उनके साथ था। तब तक लोगों को उसके बारे में पता नहीं था लेकिन उस समय ये बात स्पष्ट हो गई कि ये बहनजी का भतीजा है। आकाश मायावती के साथ ही था, हर तरफ जिज्ञासा की दृष्टि से देख रहा था, वो बहनजी के तौर-तरीकों, को काफी गंभीरता से देख रहा था।
    रियाज हाशमी बताते हैं कि उसी समय ये तय हो गया था कि लंदन से पढ़ा-लिखा आकाश अब बहनजी की राजनीति में भी मदद करेगा और फिर बाद में मायावती ने पार्टी नेताओं को सीधे तौर पर ये बात बता भी दी थी।
    लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि पार्टी के युवाओं, खासकर पढ़े-लिखे और उच्च शिक्षित वर्ग को लुभाने के लिए मायावती और उनकी पार्टी आकाश का बेहतर इस्तेमाल कर सकती हैं। उनके मुताबिक, मायावती आकाश को भी पार्टी का कुछ वैसा चेहरा आगे चलकर प्रोजेक्ट कर सकती हैं, जैसा कि सपा में अखिलेश यादव हैं। हालांकि आकाश को अभी कोई बड़ी जिम्मेदारी मायावती नहीं देने वाली हैं, पर आगे चलकर तो ऐसा करेंगी ही। हालांकि मायावती पहले राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ थीं और भाई आनंद के अलावा उनके किसी रिश्तेदार या परिवार के किसी अन्य सदस्य की कभी बीएसपी में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कोई दखल भी देखने को नहीं मिला है। लेकिन भाई आनंद के प्रति उनका लगाव शुरू से रहा।
    बीएसपी के एक नेता बताते हैं, आनंद को बहनजी ने पार्टी में उपाध्यक्ष जैसा अहम पद भले दिया था लेकिन ये भी कह रखा था कि वो कभी विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बनेगा। इससे साफ है कि परिवारवाद का बहनजी न सिर्फ विरोध करती हैं बल्कि खुद पर भी लागू करती हैं। हालांकि आनंद इस वक्त बीएसपी के संगठन में भी किसी पद पर नहीं हैं लेकिन उनके बेटे आकाश जिस तरह से मायावती के साथ पार्टी की बैठकों, मुलाकातों इत्यादि में सक्रिय हैं, उसे देखते हुए राजनीतिक गलियारों में उन्हें मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जाने लगा है। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 18-Jan-2019
  • शुरैह नियाजी
    भोपाल से, 18 जनवरी । सडक़ों पर इधर-उधर बड़ी तादाद में नजर आने वाली गायों के लिए मध्यप्रदेश में बुधवार को एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई।
    प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है और अब वह भी भाजपा की राह पर चलकर गायों को लेकर काफी संवेदनशील नजर आ रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही कहा था कि वह च्किसी भी सूरत में गौ माता को सडक़ों पर नहीं देखना चाहते हैं। यही वजह है कि अब सरकार के विभिन्न महकमों ने इसकी शुरुआत की है कि सडक़ों पर गाय और अन्य मवेशी नजर ना आएं।
    मध्यप्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने नगर निगम को हिदायत दी थी कि इस अभियान के बाद अगर सडक़ों पर गाय नजर आती हैं तो निगम अमले के खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी। लाखन सिंह यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक सडक़ों पर अब मवेशी नजर नहीं आने चाहिए, इसलिये यह अभियान छेड़ा गया है।
    वहीं, राजधानी भोपाल में नगर निगम अमला मवेशियों को पकडऩे के लिए लग गया है। भोपाल के महापौर अलोक शर्मा ने बताया कि हमनें आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए कारवाई शुरू कर दी है। इसके लिए कई टीमें बनाई गई हैं। साथ ही नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं। पशुओं को पकडक़र गोशाला ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार ने कुछ स्थान भी चिन्हित किए हैं ताकि वहां पर भी गायों को रखा जा सके।
    हालांकि, इस मामले पर अब राजनीति भी प्रदेश में तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि उन्होंने गायों के लिए हर संभव काम किया। लेकिन गायों को आवारा कहने पर भी भाजपा को आपत्ति है। प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय कहते हैं कि इसके लिए अगर सरकार कुछ करती है तो यह अच्छी बात है लेकिन सरकार को इस काम में दिखावा नहीं करना चाहिए। वहीं गायों को आवारा कहना भी गलत है।
    कांग्रेस प्रवक्ता सरकार का बचाव करते हुए कहते हैं कि सरकार गायों को लेकर गंभीर है और गायों के संरक्षण के लिए सही काम करेगी जो अभी तक पिछली सरकार ने नहीं किया। काग्रेंस प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि हमारी सरकार गौ माता की रक्षा करेगी और उनका विस्थापन किया जाएगा। गांवों में सरकार ने गोशाला खोलने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि गायों के सडक़ों पर आने से जनहानि भी होती है और नुकसान भी। इसलिए यह कदम उठाया जाना जरूरी है।
    लेकिन, भोपाल जैसे शहर में ही दावा किया जा रहा है कि पांच हजार से भी ज्यादा मवेशी सडक़ों पर घूम रहे हैं। लिहाजा इन्हें कांजी हाउस और गोशाला में पहुंचाना भी आसान काम नहीं है। हालांकि, निगम दावा कर रहा है कि यह काम वह आसानी से कर लेगा। भोपाल नगर निगम कमिश्नर कहते हैं कि हमारे पास 1500 आवारा मवेशियों को रखने की जगह है। हमने जो सर्वे कराया है, उसके मुताबिक 3000 आवारा मवेशी हैं। लेकिन, हमें सही आंकड़ा आगे पता चलेगा। इनके लिए व्यवस्था की जा रही है। लेकिन, प्रदेश के दूसरे स्थानों में हालत बहुत ही ज्यादा खराब है। प्रदेश के कई हाइवे ऐसे हैं जिन पर गायों का डेरा देखा जा सकता है। इसकी वजह से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
    वहीं, गायों को लेकर सरकार के कदम को विश्लेषक राजनीतिक नजर से भी देख रहे है। चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में कांग्रेस ने कई वादे गायों के लेकर किए थे। कांग्रेस के बारे में माना जा रहा था कि वह हिंदुओं से दूर होती जा रही है। इसी वजह से कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में ऐसे कई वादे किए थे ताकि हिंदुओं को करीब ला सके।
    विश्लेषक मनोज कुमार कहते हैं कि  गायों को लेकर यह एक बड़ी समस्या तो है। यह पूरे प्रदेश में देखी जा सकती है लेकिन यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि इसका फायदा लोकसभा चुनाव में उठाया जा सके। इससे कांग्रेस को हिंदुओं को अपने करीब लाने का मौका मिलेगा।
    मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने वादा किया था कि प्रदेश सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में गोशाला खोलेगी और चिन्हित क्षेत्रों में गौ अभ्यारण्य बनाएगी। इनके संचालन और रख रखाव के लिए सरकार अनुदान देगी।
    साथ ही गोशाला में गोबर, कण्डा और गौ मूत्र और अन्य वस्तुओं का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन करवाने का भी वादा था। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर गौ वंश के संरक्षण और देखभाल के लिये अस्थायी शिविर की व्यवस्था, दुर्घटना में घायल गायों का उपचार और मृत गायों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने का भी वादा किया गया था। कांग्रेस ने गौ संरक्षण अधिनियम को लागू करने और इस अधिनियम में विवादित धाराओं के संशोधन की अनुशंसा का भी वादा किया था।
    गायों की समस्या ने किसानों को भी परेशान करके रखा है। प्रदेश के विदिशा और सीहोर जिलों में पिछले साल गायों से परेशान किसानों ने प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि गायों की बढ़ती तादाद की वजह से उनकी फसलें खराब हो रही हैं।
    किसान अर्जुन मेवाड़ा कहते हैं कि जिस तरह से इनकी तादाद बढ़ रही है उसकी वजह से हमारे लिए अपनी फसल को बचा कर रख पाना मुश्किल हो रहा है। इनका झुंड कभी भी खेतों में घुस जाता है और फसलों को खराब कर देता है। इस समस्या का हल कर पाना उतना आसान नहीं है जितना सरकार बात कर रही है। अधिकारी खुद मानते है कि स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। दूध न देने वाली गायों को लोग सडक़ों पर छोड़ रहे है जिन्हें संभाल पाना प्रशासन के लिए मुमकिन नहीं है।
    अगले चंद महीनों में लोकसभा चुनाव होने हैं इसलिए सरकार को यह मुद्दा कुछ खास नजर आ रहा है और यही वजह है कि पूरा अमला इसमें जुट गया है। (बीबीसी)

     

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