राजनीति

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Posted Date : 19-Sep-2018
  • पणजी, 19 सितंबर । गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के एम्स में भर्ती होने के बाद राज्य की सियासत अचानक गरमा गई है। मंगलवार शाम को कांग्रेस के नेताओं ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात कर मांग की कि पर्रिकर सरकार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना चाहिए। दरअसल, गोवा के कांग्रेसी विधायक मौजूदा सरकार को बर्खास्त करने और वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए दावेदारी पेश करने की मांग कर रहे हैं।  
    राज्यपाल ने कांग्रेस के विधायकों को आश्वस्त किया है कि वह 3-4 दिनों में इस पर फैसला लेंगी। विपक्ष के नेता चंद्रकांत ने कहा कि हम पहले से ही सबसे बड़ी पार्टी हैं और हम सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब 62 साल के पर्रिकर अग्नाशय रोग के चलते दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हैं। 
    40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में कांग्रेस के 16 विधायक हैं और इनमें से 15 विधायकों ने राज्यपाल से मंगलवार शाम को मुलाकात की। इससे पहले सभी ने सोमवार को ही राज्यपाल को उनकी अनुपस्थिति में ज्ञापन सौंपा था। इसमें उन्होंने आग्रह किया था कि वह विधानसभा भंग नहीं करें, बल्कि वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए उनकी पार्टी को आमंत्रित करें। 
    उधर, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के प्रमुख विजय सरदेसाई ने मंगलवार को कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने फोन कर उनसे गोवा में 

    राजनीतिक हालात एवं स्थिरता सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा की। जीएफपी, बीजेपी की सहयोगी पार्टी है और राज्य में उसके तीन विधायक हैं। सरदेसाई ने बताया, राजनीतिक हालात का जायजा लेने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के यहां पहुंचने से पहले अमित शाह ने मुझे फोन किया। 
    गोवा कांग्रेस ने बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को चुनौती दी है कि वह असेंबली का सत्र बुलाए और विश्वास मत हासिल करे। मुख्य विपक्षी पार्टी का दावा है कि जिस पल मनोहर पर्रिकर की जगह नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी, बीजेपी के कई विधायक इस्तीफा दे देंगे। गोवा कांग्रेस के अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती जा रही क्योंकि बीजेपी पर्रिकर (62) की जगह नए नाम पर सहमति नहीं बना पा रही है। 
    एक बयान में उन्होंने कहा, हम बीजेपी को चुनौती देते हैं कि वह अपने 14 विधायकों की परेड कराए। जिस पल नए सीएम के नाम का ऐलान होगा, यह तय है कि बीजेपी के कई विधायक इस्तीफा दे देंगे। इस प्रकार से कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। ऐसे में उन्होंने बीजेपी सरकार से फ्लोर टेस्ट करने को कहा है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पूरी पार्टी की ही सेहत खराब हो चुकी है और गठबंधन सरकार अब अल्पमत में है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ज्यादा समय ले रही है, जिससे वह बहुमत खड़ा कर सके। 
    गोवा विधानसभा में 16 विधायकों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। उधर, बीजेपी के 14 विधायक हैं, और उसे गोवा फारवर्ड पार्टी के तीन और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के तीन विधायकों और एक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक तथा तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, यह नंबर गेम बीजेपी के तीन विधायकों का स्वास्थ्य खराब होने के कारण बिगड़ रहा है। पर्रिकर गंभीर रूप से पीडि़त हैं, शहरी विकास मंत्री फ्रांसिस डिसूजा न्यूयॉर्क में इलाज करा रहे हैं, जबकि बिजली मंत्री पांडुरंग मडकइकर कुछ महीनों से ब्रेनस्ट्रोक से पीडि़त हैं। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 19-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 19 सितंबर । गोवा में मनोहर पर्रिकर की जगह नया मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश चल रही है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक को पर्रिकर की जगह गोवा की कमान सौंपी जा सकती है। मनोहर पर्रिकर की सेहत ठीक नहीं है और वो दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। वहीं बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गोवा बीजेपी नेताओं की 11 बजे बैठक बुलाई है। मनोहर पर्रिकर की बीमारी के बाद वैकल्पिक इंतजामों पर चर्चा के लिए यह बैठक बुलाई गई है। गोवा में कांग्रेस के विधायकों ने मंगलवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात की और उन्हें बीजेपी सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने का निर्देश देने के लिए कहा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब 62 वर्षीय मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर अग्नाशय की बीमारी का इलाज कराने के लिए दिल्ली में एम्स में भर्ती हैं। 
    विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि राज्यपाल को विधानसभा का एकदिवसीय सत्र बुलाकर बहुमत साबित करवाना चाहिए। कावलेकर ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह अगले तीन-चार दिनों में इस मुद्दे पर उन्हें अवगत कराएंगी। 
    राज्यपाल के साथ बैठक के दौरान कांग्रेस विधायकों ने कहा कि 40 सदस्यीय विधानसभा में पर्रिकर के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास बहुमत से कम आंकड़े हैं और सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या है। सिन्हा के साथ मुलाकात के बाद कावलेकर ने संवाददाताओं से कहा, राज्य सरकार सदन में साबित करे कि उसके पास बहुमत है अन्यथा हम दिखाएंगे कि हमारे पास उनसे ज्यादा विधायक हैं। गोवा के 40 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 16 विधायक हैं। 
    गोवा फॉरर्वड पार्टी (जीएफपी), महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी), राकांपा और निर्दलियों के सहयोग से राज्य का शासन भाजपा चला रही है। विधानसभा में भाजपा के 14 विधायक, जीएफपी और एमजीपी के तीन-तीन सदस्य और राकांपा का एक सदस्य है। तीन निर्दलीय विधायक हैं। दिल्ली में रक्षा मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस की पहल से सत्ता हथियाने की उसकी बेचैनी झलकती है। उन्होंने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा, मुख्यमंत्री बीमार हैं। अन्यथा वह काम से अलग नहीं रहते। कांग्रेस को मुख्यमंत्री की बीमारी में अवसर दिखता है। यह दिखाता है कि बेचैनी (कांग्रेस के अंदर) का स्तर कितना है। वाकई मुझे इससे दुख होता है।
    कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल से यह भी अपील की कि विधानसभा भंग नहीं होने दें। राज्य में पिछले वर्ष फरवरी में विधानसभा चुनाव हुए थे। कावलेकर ने कहा, भाजपा के पास जब आवश्यक संख्या नहीं होती है तो उसकी आदत है कि सदन भंग करने की अनुशंसा कर देती है। राज्यपाल को गोवा में इस तरह का काम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए क्योंकि सदन में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस नेता ने कहा, हम डेढ़ वर्ष के अंदर एक और चुनाव नहीं चाहते हैं।(एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 19 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को कर्नाटक से 600 करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं। बीजेपी की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, कनार्टक, कांग्रेस के लिए एटीएम का काम कर रही है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस गैरकानूनी तरीके कर्नाटक से पैसे की उगाही कर रही है। संबित पात्रा ने एक आरटीआई से सामने आई जानकारियों का हवाला देते यह आरोप लगाए।
    उल्लेखनीय है कि मंगलवार को हिन्दी न्यूज चैनल एबीपी न्यूज ने इसका खुलासा किया था। एबीवी न्यूज ने यह दावा किया था कि कर्नाटक के मंत्री डी शिवकुमार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉण्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। जबकि शिवकुमार के सहयोगी अजनैया ने यह स्वीकार किया है वह खुद पैसे लेकर कांग्रेस के दफ्तर जा चुके हैं। अनजैया कर्नाटक सरकार की ओर से दिल्ली में नियुक्त किए गए एक अधिकारी हैं जो कर्नाटक सरकार के दिल्ली से संबंधित कामों को देखा करते है।
    संबित पात्रा ने भी कर्नाटक मंत्री डीके शिवकुमार का नाम कई बार लिया और उन्होंने अजनैया का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि खुद अजनैया यह स्वीकार चुके हैं कि वह दिल्ली के चांदनी चौक से पैसे लेकर कांग्रेस के 24 अकबर रोड स्थित दफ्तर जाते रहे हैं।
    हाल ही में कांग्रेस ने पार्टी के पास पैसे ना होने का जिक्र किया था। यहां तक राजस्थान चुनाव लडऩे के लिए पार्टी ने राजस्थान की जनता से चंदा देने की अपील भी की थी।
    अब बीजेपी ने आरोप लगाया है कि बैंगलोर व कर्नाटक के अन्य शहर से किलो के हिसाब से पैसा चांदनी चौक आता था और फिर चांदनी चौक से गाडिय़ों में पैसा भर-भरकर वो एआईसीसी के दफ्तर तक जाता था। (लोकमत)

     

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Posted Date : 19-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 19 सितंबर । केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने  पश्चिम बंगाल के आसनसोल में दिव्यांगों के एक कार्यक्रम में एक शख्स को टांग तोड़ डालने की धमकी दे डाली। दिव्यांगों को व्हीलचेयर तथा अन्य आवश्यक उपकरण दान करने की खातिर आयोजित किए गए शिविर में आमंत्रित बाबुल सुप्रियो जनता में से किसी शख्स से किसी बात पर नाराज हो गए, और बोले, क्यों हिल रहे हो...? प्लीज बैठ जाओ...
    मंत्री का विवादास्पद बयान तब आया, जब शख्स लगातार और बार-बार हिल-डुलकर उनका ध्यान बंटाता रहा। बताया जाता है, मंत्री ने उस वक्त गुस्से में आकर उस शख्स से कहा, आपको क्या हुआ है....? कोई दिक्कत है....? मैं आपकी एक टांग तोड़ सकता हूं, और बैसाखी दे सकता हूं...इसके बाद बाबुल सुप्रियो ने अपने सुरक्षाधिकारियों से उस शख्स की टांग तोड़कर बैसाखी थमा देने के लिए कहा, अगर वह अपनी जगह से हिले। 
    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब गायक से राजनेता बने बाबुल ने इस तरह का विवादास्पद बयान दिया हो। इसी साल मार्च में आसनसोल में ही रामनवमी समारोह के दौरान सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हुए इलाकों का दौरा करने गए थे, और वहां उन्होंने प्रदर्शन कर रही भीड़ को खाल खिंचवा देने की धमकी दी थी।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • आगरा, 18 सितंबर। राजस्थान के राजसमंद में पिछले साल दिसंबर में पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मुस्लिम मजदूर मोहम्मद अफराजुल को कैमरे के सामने पीट-पीटकर मार देने का आरोपित शंभूलाल रैगर अगले साल लोकसभा चुनाव लड़ सकता है। उसे उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना (यूपीएनएस) आगरा से टिकट दे सकती है। इस पार्टी के मुताबिक रैगर ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।
    यूपीएनएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जानी ने बताया, शंभूलाल रैगर जोधपुर जेल में रहते हुए ही चुनाव लड़ेंगे। मैं उनके साथ लंबे समय से संपर्क में हूं और मुझे खुशी है कि उन्होंने आगरा से उम्मीदवार बनने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इस बारे में हम जल्द औपचारिक ऐलान करेंगे। हमें आगरा संसदीय सीट के लिए एक हिंदू चेहरे की जरूरत थी। उनसे बेहतर अभी कोई विकल्प हमें नजर नहीं आता। आगरा सीट से अभी भारतीय जनता पार्टी के नेता रामशंकर कठेरिया सांसद हैं। कठेरिया राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष हैं।
    जानी से जब पूछा गया कि क्या गंभीर अपराध के आरोपित से संबंध रखना उनके लिए सहज होगा? तो इस पर उन्होंने, देश में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, राजा भैया जैसे लोग चुनाव लड़ सकते हैं, जिन पर कहीं ज्यादा गंभीर आरोप हैं। शाहबुद्दीन जैसे चुनाव लड़ सकते हैं तो फिर रैगर क्यों लड़ सकते। उन्हें तब तक तो निर्दोष ही माना जाएगा जब तक उनके खिलाफ आरोप साबित न हो जाएं। हालांकि यह भी गौर करने की बात है कि जानी खुद भी ऐसे ही भड़काऊ मामलों में गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। उन्होंने 2016 में अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को जान से मारने की धमकी दी थी। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • भोपाल, 18 सितंबर। भोपाल में रोड शो के साथ आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया है। इस मौके पर पार्टी ने जो पोस्टर लगाए हैं उनमें राहुल गांधी को शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए दिखाया गया है। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौटे हैं। ग्यारह पुजारियों के मंत्रोच्चार के बाद राहुल गांधी ने भोपाल में लालघाटी चौराहे से अपना रोड शो शुरू किया। 15 किलोमीटर लंबा यह रोड शो शहर के दशहरा मैदान तक जाएगा। यहां राहुल गांधी अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करेंगे। प्रदेश कांग्रेस की मीडिया प्रभारी शोभा ओझा के मुताबिक इस सभा में राहुल गांधी को सुनने पूरे प्रदेश से करीब 15,000 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद है।
    हालांकि भाजपा ने इन पोस्टरों पर हमलावर रुख अपनाते हुए इसे सॉफ्ट हिंदुत्व करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, देश में जब भी कहीं चुनाव होते हैं वह मंदिरों के फेरे लगाना शुरू कर देते हैं। राहुल गांधी की भोपाल यात्रा में एक सॉफ्ट हिंदुत्व एजेंडा झलकता है। लेकिन जनता बहुत होशियार है और उनके इस शिव भक्त के रूप को अच्छे से समझती है।  (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • मुंबई, 18 सितंबर। मुंबई प्रादेशिक कांग्रेस समिति (एमआरसीसी) के अध्यक्ष संजय निरूपम ने कहा है कि इस पद पर उनके बने रहने या हटाए जाने का फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी करेंगे। सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए खुद को राहुल गांधी का वफादार बताते हुए संजय निरूपम ने कहा है, एमआरसीसी अध्यक्ष का पद सौंपते हुए राहुल गांधी ने मुझ से मुंबई के लोगों के मुद्दों को उठाने के लिए कहा था। उनके निर्देशों का पालन करते हुए मैं हर दूसरे दिन मुंबई की गलियों में यहां के लोगों के बीच पहुंचता हूं। उन्होंने आगे कहा, जब तक मेरे पास मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी रहेगी मैं ऐसा करता रहूंगा।
    संजय निरूपम का यह बयान रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक के मद्देनजर आया है। इस बैठक में महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के महासचिव मल्लिकार्जुन खडग़े से मुलाकात करके संजय निरूपम को इस पद से हटाने और यह जिम्मेदारी पार्टी सांसद मुरली देवड़ा को दिए जाने की मांग की थी। बताया जा रहा है कि नेतृत्व में बदलाव संबंधी यह मांग आगामी लोक सभा व राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए की गई है। संजय निरूपम के प्रति असंतोष जताने वाले इन नेताओं का यह भी कहना है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन के लिए पार्टी को अनुभवी व युवा चेहरे की जरूरत है। इस लिहाज से मुरली देवड़ा उपयुक्त विकल्प साबित होंगे। (एएनआई)

     

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 18 सितंबर। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कांग्रेस को लेकर बड़ा बयान दिया है। आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बदौलत देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में में एक आंदोलन खड़ा हुआ। उस वक्त कांग्रेस से जुड़कर देश की आजादी में योगदान देने वाले त्यागी महापुरूषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है। संघ के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए यहां आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण के पहले दिन मोहन भागवत ने संघ की शुरुआत और उसके कामकाज के तरीके को लेकर विस्तार से जानकारी दी और कहा कि संघ के जैसा संगठन दुनिया में दूसरा नहीं है। भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली की जानकारी देने के साथ ही उन मसलों पर भी राय रखी। जिन्हें लेकर अक्सर उस पर सवाल उठाए जाते हैं।
    संघ प्रमुख ने करीब डेढ घंटे के संबोधन में यह साफ किया कि उनका संगठन अपना प्रभुत्व नहीं चाहता। उन्होंने कहा, अगर संघ के प्रभुत्व के कारण कोई बदलाव होगा तो यह संघ की पराजय होगी । हिन्दू समाज की सामूहिक शक्ति के कारण बदलाव आना चाहिए। भाजपा पर रिमोट कंट्रोल से नियंत्रण और संघ में महिलाओं की कम भागीदारी को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी मोहन भागवत ने स्थिति स्पष्ट की। भागवत ने अपने संबोधन में सरकार या किसी संगठन का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, संघ का स्वयंसेवक क्या काम करता है, कैसे करता है, यह तय करने के लिये वह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा, संघ केवल यह चिंता करता है कि वह गलती न करे।
    सरकार और संघ के बीच समय-समय पर होने वाली समन्वय बैठकों का परोक्ष तौर पर जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक इसलिये होती है कि स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में अलग अलग क्षेत्रों में काम करते हैं । ऐसे में उनके पास कुछ सुझाव भी होते हैं। वे अपने सुझाव देते हैं, उस पर अमल होता है या नहीं होता इससे उन्हें मतलब नहीं। संघ में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर भागवत का कहना था कि डॉ. हेडगेवार के समय ही यह तय हुआ था कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के लिए संघ के समानांतर कार्य करेगी। उन्होंने साफ किया कि इस सोच में बदलाव की जरूरत यदि पुरुष व महिला संगठन दोनों ओर से महसूस की जाती है तो विचार किया जा सकता है अन्यथा यह ऐसे ही चलेगा। 
    क्या कहा कांग्रेस के बारे में
    भागवत ने कहा कि कांग्रेस के रूप में देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरूषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है। विषय पर तीन दिवसीय चर्चा सत्र के पहले दिन सरसंघचालक ने कहा कि 1857 के बाद देश को स्वतंत्र कराने के लिये अनेक प्रयास हुए, जिनको मुख्य रूप से चार धाराओं में रखा जाता है । कांग्रेस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक धारा का यह मानना था कि अपने देश में लोगों में राजनीतिक समझदारी कम है। सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है, लोग कम जानते हैं और इसलिये लोगों को राजनीतिक रूप से जागृत करना चाहिए । भागवत ने कहा, और इसलिये कांग्रेस के रूप में बड़ा आंदोलन सारे देश में खड़ा हुआ।     उन्होंने कहा कि इस धारा का स्वतंत्रता प्राप्ति में एक बड़ा योगदान रहा है।
    सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में योजनाएं कम नहीं बनी, राजनीति के क्षेत्र में आरोप लगते रहते हैं, उसकी चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन कुछ तो ईमानदारी से हुआ ही है। सरसंघचालक ने कहा कि देश का जीवन जैसे जैसे आगे बढ़ता है, तो राजनीति तो होगी ही और आज भी चल रही है। सारे देश की एक राजनीतिक धारा नहीं है। अनेक दल है, पार्टियां हैं। इसके विस्तार में जाए बिना उन्होंने कहा, अब उसकी स्थिति क्या है, मैं कुछ नहीं कहूंगा। आप देख ही रहे हैं।
    भागवत ने कहा, हमारे देश में इतने सारे विचार हैं,लेकिन इन सारे विचारों का मूल भी एक है और प्रस्थान बिंदु भी एक है। विविधताओं से डरने की बात नहीं है, विविधताओं को स्वीकार करने और उसका उत्सव मनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता का विचार ही मूल बिंदु है और इसलिये अपनी-अपनी विविधता को बनाए रखें और दूसरे की विविधता को स्वीकार करें। 
    भागवत ने इसके साथ ही संयम और त्याग के महत्व को भी रेखांकित किया। सरसंघचालक ने कहा कि संघ की यह पद्धति है कि पूर्ण समाज को जोडऩा है और इसलिये संघ को कोई पराया नहीं, जो आज विरोध करते हैं, वे भी नहीं । संघ केवल यह चिंता करता है कि उनके विरोध से कोई क्षति नहीं हो ।  भागवत ने कहा, हम लोग सर्व लोकयुक्त वाले लोग हैं, मुक्त वाले नहीं। सबको जोडऩे का हमारा प्रयास रहता है, इसलिये सबको बुलाने का प्रयास करते हैं । उन्होंने कहा कि आरएसएस शोषण और स्वार्थ रहित समाज चाहता है। संघ ऐसा समाज चाहता है जिसमें सभी लोग समान हों। समाज में कोई भेदभाव न हो। युवकों के चरित्र निर्माण से समाज का आचरण बदलेगा। व्यक्ति और व्यवस्था दोनों में बदलाव जरूरी है। एक के बदलाव से परिवर्तन नहीं होगा।विज्ञान भवन में हो रहे इस कार्यक्रम में सोमवार को कुछ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फिल्मकार मधुर भंडारकर, अन्नू कपूर, मनीषा कोइराला जैसे बालीवुड के कलाकार भी मौजूद थे।  (भाषा)

     

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 18 सितंबर। भारत-पाकिस्तान के बीच करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने के लिए भारत की तरफ से पहल किए जाने को लेकर पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ मुलाकात की थी। अकाली दल नेता और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने दावा किया है कि इस मुलाकात में नवजोत सिंह सिद्धू को सुषमा स्वराज से कई मुद्दों पर झाड़ सुनने को मिली।
    हरसिमरत कौर के मुताबिक सुषमा स्वराज ने सिद्धू से कहा कि इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दी गई अनुमति का उन्होंने गलत इस्तेमाल किया। उस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू वहां के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के गले लगे थे। तब भाजपा और दूसरे दलों के अलावा खुद कांग्रेस के नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उनकी आलोचना की थी।
    सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात में सुषमा स्वराज ने सिद्धू से यह भी कहा कि उन्हें इस संवेदनशील मुद्दे का 'राजनीतिकरणÓ करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरसिमरत कौर बादल की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर का मुद्दा पहले ही उनके संज्ञान में लाया जा चुका है।
    करतारपुर कॉरिडोर को सिख श्रद्धालुओं के लिए काफी अहम माना जाता है क्योंकि इसके खुलने से सिख समुदाय के लोग पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब तक आसानी से दर्शन के लिए पहुंच सकेंगे। खास बात यह भी है कि यह दोनों गुरुद्वारे दोनों देशों की सीमा के करीब ही स्थित है और सीमा से इसकी दूरी चंद मिनटों की है। लेकिन इस कॉरिडोर को खोले जाने को लेकर भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे की तरफ से आधिकारिक पहल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 18-Sep-2018
  • पटना, 18 सितंबर। लोकसभा चुनाव में सभी दलों ने अधिक से अधिक सीटों को लेकर कवायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में बिहार में आरजेडी-कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की 40 में से 20 सीटें मांगकर महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मांझी ने आगामी लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर तैयारी होने का सोमवार को दावा किया। 
    मांझी को कहा, रविवार को हुई पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी सदस्यों की राय थी कि पार्टी लोकसभा चुनाव में कम से कम 20 और विधानसभा में 120 सीटों पर लड़े। उन्होंने इन सीटों पर जीत का दावा करते हुए कहा कि पार्टी इन पर काफी मजबूत स्थिति में है। इधर, मांझी के इस दावे के बाद महागठबंधन के नेताओं के उस दावे की कलई खुल गई है, जिसमें कहा जा रहा है कि महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कोई समस्या नहीं है। 
    कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा, लोकतंत्र में कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार करने के लिए पार्टी अधिक सीटों की मांग करती है। इसमें कोई परेशानी नहीं है। महागठबंधन की रणनीति बिहार की सभी 40 लोकसभा सीटों पर विजयी होने की है। वहीं, आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, मांझी के बयान को गलत तरीके से देखा जा रहा है। मांझी महागठबंधन के बड़े नेता हैं। सभी पार्टी की यह आकांक्षा रहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़े। 
    महागठबंधन में शामिल सभी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक साथ बैठेंगे और सीटों का बंटवारा होगा। बीजेरी नेता और विधायक नितिन नवीन ने कहा, मांझी ही लालू की नैया डुबोएंगे। एक विधायक की पार्टी होने के बावजूद मांझी की मांग महागठबंधन में दबाव बनाने की है। (आईएएनएस)

     

     

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Posted Date : 17-Sep-2018
  • रांची, 17 सितंबर । भाजपा के एक सांसद ने कार्यकर्ताओं का घोर अपमान किया है। सांसद निशिकांत दुबे ने एक कार्यकर्ता से अपना पैर धुलवाया और धुले हुए पैर का पानी उसे पीने दिया। मामला झारखंड के गोड्डा से है जहां से निशिकांत दुबे बीजेपी के सांसद हैं। गोड्डा के कनभारा में रविवार को कार्यकर्ता पवन साह ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का पैर धोकर पी लिया। ये तब हुआ जब निशिकांत दुबे पुल का शिलान्यास करते पहुंचे थे। हैरत की हद पार करने वाली बात ये है कि सांसद ने पैर धोनेवाली फोटो फेसबुक पर डाल रखी है।
    निशिकांत दुबे वो सांसद हैं जिनको 2018 का बेस्ट सांसद चुना गया है। हैरत में डालने वाली बात ये है कि निशिकांत दुबे को अपने किए पर अफसोस नहीं हो रहा है। ऐसे मामले पर चौतरफा आलोचना के बाद वो तो कार्यकर्ता का महिमामंडन कर रहे हैं और भगवान कृष्ण से अपने इस हरकत की तुलना करके इसे सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
    इससे जुड़े पोस्ट में उन्होंने लिखा है, आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कायकर्ता समझ रहा हूं, बीजेपी के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की खुशी में हजारों के सामने पैर धोया और उसको अपने वादे पुल की खुशी में शामिल किया, काश यह मौका मुझे एक दिन माता-पिता के बाद मिले, मैं भी कार्यकर्ता खासकर पवन जी का चरणामृत पियूं। जय भाजपा जय भारत।
    विवाद के बाद किया एक और पोस्ट
    पोस्ट पर विवाद शुरू हुआ तो दुबे फिर उसी तस्वीर के साथ दूसरी पोस्ट डाली और लिखा, अपनों में श्रेष्ठता बांटी नहीं जाती। कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ। उन्होंने जनता के सामने कसम खाई था और उनको ठेस ना पहुंचे इसलिए उनका सम्मान किया। फिर पांच घंटे बाद पोस्ट को एडिट कर चरणामृत पीने की बात हटा दी। (एबीपी न्यूज)

     

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Posted Date : 16-Sep-2018
  • नीतीश कुमार बोले, वह भविष्य हैं
    पटना, 16 सितंबर । चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राजनीति में एंट्री लेने का ऐलान कर दिया है और आज वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में जेडीयू में शामिल हुए। प्रशांत किशोर के जदयू में शामिल होने की खबरों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने उन्हें भविष्य बताया है। एनडीटीवी से नीतीश कुमार ने कहा, मैं आपको कहता हूं, प्रशांत किशोर भविष्य हैं।
    इससे पहले प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने पर केसी त्यागी ने कहा कि आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा करें, उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की है, हम पार्टी में उनका स्वागत करेंगे। बता दें कि इससे पहले  प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर खुद इस बात की तस्दीक कर दी है कि वह अब पूरी तरह से राजनीति में आ गये हैं। प्रशांत किशोर ने रविवार की सुबह ट्वीट कर कहा- बिहार से नई यात्रा शुरू करने के लिए काफी उत्साहित हूं।
    वह अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बिहार से करने जा रहे हैं। प्रशांत किशोर आज पटना में जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार की मौजूदगी में जनता दल यूनाइटेड में विधिवत रूप से शामिल हुए। खुद बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलवाएंगे। खास बात यह है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहली बार जनता दल यूनाइटेड की कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होंगे। पिछले हफ्ते एनडीटीवी ने खबर दी थी कि प्रशांत किशोर राजनीति में आ सकते हैं और अब से वह किसी भी राजनीतिक दल की रणनीतिक तौर पर मदद नहीं करेंगे। 
    माना जा रहा है कि नीतीश कुमार दो महीने पहल ही अनौपचारिक रूप से पार्टी के नेताओं को इस बात से अवगत करा चुके थे कि प्रशांत किशोर अब जदूय का दामन थामेंगे और अपने अनुभवों से चुनावों नीतीश को जीताने की भूमिका भी निभाएंगे।  ऐसा कहा जाता है कि वह नीतीश कुमार ही हैं, जिन्होंने प्रशांत किशोर को कुर्ता-पायजामा पहनाया। पहली बार जब कुर्ता पायजामा प्रशांत ने पहना था, तभी कायास लगा लिये गये थे, कि प्रशांत अगर राजनीति में आएंगे तो उनका पड़ाव नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ही होगा। 
    प्रशांत किशोर 2014 में भारतीय जनता पार्टी, 2015 में राजद-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के लिये काम कर चुके हैं। एक समय चुनाव में जीत की गारंटी बन चुके प्रशांत किशोर उस समय चर्चा में आए थे जब 2014 के चुनाव प्रचार में बीजेपी के प्रचार को उन्होंने मोदी लहर में बदल दिया था।  उसके बाद उनके बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मतभेद की खबरें आईं और उन्होंने साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (आरजेडी+जेडीयू+कांग्रेस) के प्रचार की कमान संभाल ली और इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा। 
    हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद भी ऐसी खबरें आईं कि नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के बीच कुछ मतभेद चल रहा है। हालांकि, प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार के साथ उनके पुराने मतभेद अभ खत्म हो गये हैं। 
    इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभाल ली और पूरी पार्टी उन्हीं की बनाई रणनीति पर काम करने लगी। लेकिन कांग्रेस के नेताओं के साथ उनकी पटरी नहीं खा सकी और नतीजों में भी पार्टी बुरी तरह से हार गई। 
    चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब तक राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक सलाहकार और रणनीतिकार की भूमिका में रहे हैं। प्रशांत कुमार इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी नाम का संगठन चलाते हैं जो चुनाव में पार्टियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करती है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 15-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 15 सितंबर। कांग्रेस पार्टी ने वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, राजीव गौड़ा और पवन खेड़ा को तीन चुनाव समितियों का संयोजक नियुक्त किया है। ये चुनावी समितियां विशेष रूप से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तैयार की गई हैं। सूत्रों के अनुसार, जयराम रमेश को चुनावी तैयारियों की कोर समूह का संयोजक, राजीव गौड़ा को चुनाव घोषणा पत्र समिति का संयोजक और पवन खेड़ा को प्रचार समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। फिलहाल पार्टी ने इन नामों की घोषणा नहीं की है। तीनों नेताओं को 2019 के आम चुनावों के लिए पार्टी का घोषणा पत्र बनाने के साथ-साथ पार्टी के लिए विशेष योजनाएं और रणनीति बनाने का काम भी सौंपा गया है।
    इस कोर समूह में अहमद पटेल, पी चिदंबरम, एके एंटनी, मल्लिकार्जुन खडग़े, गुलाम नबी आजाद, रणदीप सुरजेवाला शामिल समेत आठ सदस्य होंगे, जिनका नेतृत्व जयराम रमेश करेंगे। यह समिति पार्टी के चुनावी अभियान से संबंधित सभी रणनीतियों पर फैसला लेगी। जयराम रमेश इससे पहले भी 2004, 2009 और 2014 में लोक सभा चुनावों की समितियों में रह चुके हैं। राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के अनुसंधान विभाग के प्रमुख राजीव गौड़ा हर राज्य की विशेष जानकारियां जुटाएंगे जिनका प्रयोग राहुल गांधी अपने भाषणों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरने में करेंगे। इसके साथ ही राजीव गौड़ा घोषणा पत्र बनाने की समिति के भी प्रमुख रहेंगे। उनके साथ समिति में वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम, जयराम रमेश, कुमारी सैलजा, सलमान खुर्शीद, शशि थरूर समेत 19 सदस्य और होंगे।
    इसके साथ ही कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार सैम पित्रोदा भी घोषणा पत्र तैयार करने वाली समिति की मीटिंग में हिस्सा लेंगे। दिसंबर, 2017 के गुजरात और मई, 2018 में कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में भी सैम पित्रोदा ने इस काम में अहम भूमिका निभाई थी। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी का प्रचार अभियान संभाला था। लोक सभा चुनाव में भी वे 13 सदस्यीय प्रचार समिति का नेतृत्व करेंगे, जिसमें वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला, प्रमोद तिवारी, रणदीप सुरजेवाला, प्रवीण चक्रवर्ती और कुछ अन्य नेता शामिल हैं। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी किसी भी समिति का हिस्सा नहीं रहेंगे, लेकिन वे हर समिति की बैठक में मौजूद रहेंगे। राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय से के राजू उनका प्रतिनिधित्व करेंगे और मीटिंग के बारे में राहुल गांधी को रिपोर्ट देंगे। के राजू पहले कांग्रेस के एससी-एसटी मोर्चा के प्रमुख थे। इस साल उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 15-Sep-2018
  • बेंगलुरु, 15 सितंबर । कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए शुक्रवार को दावा किया कि वह उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही कुछ भाजपा के कुछ सरगनाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे लोग सरकार गिराने के लिए कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों को रिश्वत देने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस में आंतरिक असंतोष के बाद प्रदेश में कांग्रेस और जद (एस) के विधायकों का स्वागत करने के लिए रिसोर्ट तैयार होने संबंधी मीडिया में आयी खबरों के बीच कुमारस्वामी ने दृढ़तापूर्वक कहा कि वह सरकार के समक्ष आयी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
    कुमारस्वामी ने कहा, चाहे वह रिसोर्ट अथवा कुटिया तैयार रखें, मैं सबकुछ के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा, मौजूदा समय में पैसे का भुगतान अग्रिम के तौर पर किया जा रहा है। मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहूंगा। आपको इसके बारे में बाद में पता चल जाएगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ सरगना हैं जो उनकी सरकार को गिराने में लग गए हैं। कुमारस्वामी ने कहा, क्या मुझे पता नहीं है ? क्या मैं चुप रहूंगा? क्या मुझे नहीं मालूम है कि पैसे कहां से एकत्र किये जा रहे हैं, और धन को एकत्र करने के पीछे सरगना कौन है। मैने कानूनी कार्रवाई के लिए आवश्यक उपायों को पहले से ही शुरू कर दिया है। मैं एक मजबूत और स्थिर सरकार देने के लिए हर निर्णय करूंगा। किसी का नाम लिये बगैर कुमारस्वामी ने कहा कि एक सरगना ने पत्नी और बेटे की हत्या के लिए एक कॉफी प्लांटर को उकसाया था जबकि दूसरे ने नौ साल पहले नगर निगम कार्यालय में आग लगा दी थी।
    उन्होंने दावा किया कि सरकार गिराने के लिए यही लोग पैसे एकत्र कर रहे हैं। यह पूछने पर कि सरकार गिराने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, कुमारस्वामी ने कहा कि जो कुछ हो रहा है उससे वह फिलहाल प्रभावित नहीं हो रहे हैं और बिल्कुल शांतिप्रद महसूस कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि वह सरकार गिरने के बारे में एक के बाद एक समय सीमा निर्धारित करते हैं । उन्होंने कहा, नयी समय सीमा सोमवार को है। यह बढ़ कर दो अक्तूबर हो जाएगी और उसके बाद दशहरा। मुझे लगता है कि यह समय सीमा बढ़ती रहेगी। दूसरी तरफ, भाजपा ने मुख्यमंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी कभी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं रही है। (भाषा)
     

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Posted Date : 15-Sep-2018
  • भोपाल, 15 सितंबर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर एक बार फिर से निशाना साधा है। उन्होंने सलाह भी दी कि पेट्रोल के दाम घटाने के लिए सरकार को शराब पर टैक्स बढ़ा देना चाहिए।
    कमलनाथ ने कहा कि पेट्रोल के दाम घटाने के लिए सरकार को हरसंभव कोशिश करनी चाहिए कि जनता को महंगाई से राहत मिले। इसके लिए शराब पर भी टैक्स बढ़ाना चाहिए। और हर उस चीज पर टैक्स बढ़ा दे सरकार जिससे शराब के दाम घट जाए। पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटा है, लेकिन मध्य प्रदेश में आसमान छू रहा है।
    भोपाल में हुए दूसरे शेल्टर होम रेप केस पर बोलते हुए कमलनाथ ने कहा कि अपराधियों को बीजेपी का संरक्षण मिलता है। इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में हर घंटे कोई ना कोई ऐसे केस होते हैं, जिनमें महिला अपराध सामने आता है।
    बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इनके आंख-कान नहीं चलते सिर्फ मुंह चलता है। पच्चीस सितंबर को होने वाला महाकुंभ नही सरकारी महाकुंभ है। बीजेपी समझ गई है कि जनता ने नकार दिया है। अब शासकीय कमर्चारी ही दबाब में मदद कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि इस बात की शिकायत हम चुनाव आयोग में करेंगे।
    कमलनाथ ने यह भी बताया कि कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट 10 से 12 दिन में पहली लिस्ट जारी हो जाएगी। हमारा लक्ष्य है कि वोट का बंटवारा या विभाजन न हो, बस जनता का हित हो। (न्यूज 18)

     

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Posted Date : 15-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 15 सितंबर। राजद नेता तेजस्वी यादव ने फिर कहा है कि बड़े भाई तेज प्रताप के साथ उनका कोई मतभेद नहीं है। बीते मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की एक अहम बैठक में तेज प्रताप यादव की गैर हाजिरी और फिर गुरुवार को पार्टी में अपनी 'अहम भूमिकाÓ बताए जाने वाले तेजस्वी यादव के बयान के बाद दोनों भाइयों के बीच अनबन की खबरों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया था।
    आगामी आम चुनाव की तैयारियों को लेकर इसी हफ्ते मंगलवार को राबड़ी देवी की अध्यक्षता में आरजेडी की कोर समिति की एक बैठक हुई थी। इस बैठक में तेजस्वी यादव तो मौजूद थे पर तेज प्रताप यादव इसमें नहीं शामिल हुए थे। बाद में उनकी अनुपस्थिति का बचाव करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा था कि मथुरा यात्रा से लौटने के बाद तेज प्रताप थकान महसूस कर रहे थे इसलिए वे इस बैठक में नहीं शामिल हो पाए थे। खबरों के मुताबिक तेज प्रताप यादव ने पार्टी की पिछली कुछ बैठकों से भी अपनी दूरी बनाई हुई थी।
    इस बीच तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव के साथ अनबन की अटकलों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ के लोगों को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही खुद को 'बलरामÓ और तेजस्वी को 'कृष्णÓ बताते हुए उन्होंने आपस में किसी तरह के मतभेद से भी इनकार किया। इससे पहले गुरुवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान सवालिया लहजे में तेज प्रताप ने यह भी कहा था, 'आरजेडी से कोई कैसे मुझे हाशिये पर पहुंचा सकता है जबकि खुद मेरे पिता पार्टी के मुखिया हैं?Ó
    उधर, लालू प्रसाद यादव के जेल भेजे जाने के बाद पार्टी नेतृत्व का काम तेजस्वी यादव ही संभाल रहे हैं। इसके अलावा 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी और जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) गठबंधन की जीत के बाद तेजस्वी यादव को बिहार का उप मुख्यमंत्री का पद भी सौंपा गया था। उस फैसले के बाद यही अंदाजा लगाया गया था कि तेज प्रताप से छोटा होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी बना सकते हैं।
    तेजस्वी और तेज प्रताप यादव के बीच अनबन की अटकलों ने हाल में तब और जोर पकड़ा जब 10 अगस्त को पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर किए गए भारत बंद का तेजस्वी यादव ने तो समर्थन किया लेकिन तेज प्रताप यादव ने इससे अपनी दूरी बनाई। इसके अलावा तेजस्वी यादव ने हाल ही में जहां एससी-एसटी एक्ट का समर्थन करने की बात कही थी तो पार्टी विचारधारा से इतर जाते हुए तेज प्रताप ने सवर्ण गरीबों को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में विचार दिया था।
    इस बीच आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि तेज प्रताप और तेजस्वी के मतभेद बीच अनबन की खबरों पर विराम नहीं लगता तो आगामी आम चुनाव पर इसका विपरीत असर दिख सकता है। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी दोनों भाइयों का एकजुट होकर काम करना जरूरी है।  (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 14-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 14 सितंबर। जब एक तरफ शराब कारोबारी विजय माल्या और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की मुलाकात का मामला सुर्खियों में हैं तभी कांग्रेस के बागी नेता शहजाद पूनावाला ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर इसी तरह का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के 13,600 करोड़ रुपए से अधिक की कर्ज धोखाधड़ी करने वाले नीरव मोदी से सितंबर 2013 में राहुल गांधी दिल्ली के इंपीरियल होटल में मिले थे। राहुल ने वहां नीरव मोदी के परिवार के शादी समारोहों में हिस्सा लिया था।
    खबरों के मुताबिक शहजाद पूनावाला ने यह भी कहा है कि अगर जेटली और माल्या के बीच हुई मुलाकात के गवाह कांग्रेस के नेता पीएल पूनिया हैं तो मैं राहुल गांधी और नीरव मोदी की मेल-मिलाप का साक्षी हूं। मैं अपने इस दावे की सच्चाई के लिए पवित्र कुरान की कसम उठा सकता हूं। लाई डिटेक्टर टेस्ट से भी गुजरने को तैयार हूं। इस मुलाकात का रिकॉर्ड एसपीजी (विशेष सुरक्षा दस्ता) के पास भी होगा। वहां से भी इसकी सच्चाई पता की जा सकती है। वहीं अगर राहुल गांधी में हौसला है और वे कर सकें तो मेरा दावा झूठा साबित कर के दिखाएं।
    शहजाद ने यह भी कहा कि राहुल और नीरव के बीच यह मुलाकात उसी दौरान हुई जब मामा-भांजे (मेहुल चौकसी और मोदी) को गलत तरीके कर्ज बांटा जा रहा था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अगर आज विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन-महागठबंधन की तैयारी कर रहे हैं, वे अगर माल्या जैसे आर्थिक अपराधियों के दावों पर यकीन कर रहे हैं तो इसकी पुख्ता वजह है। ये वजह है कि जब से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानूनÓ लागू किया है, तभी से भगोड़े और देश छोड़कर भागने की तैयारी में बैठे लोग परेशान हो गए हैं।
    वैसे यह पहला मौका नहीं है जब शहजाद पूनावाला ने सीधे राहुल गांधी पर हमला किया है। वे इससे पहले बतौर कांग्रेस अध्यक्ष उनके चुनाव को भी खुली चुनौती दे चुके हैं। हालांकि इसके बावजूद कांग्रेस ने उनके बयानों को कभी ज्यादा गंभीरता से लिया नहीं है। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 14-Sep-2018
  • पीयूष त्रिपाठी
    पटना, 14 सितंबर। बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बेटी ने भी अब पिता के खिलाफ चुनाव लडऩे की इच्छा जताई है। गुरुवार को पासवान की बेटी आशा पासवान ने ऐलान किया कि अगर उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से टिकट मिलता है, तो वह हाजीपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लडऩे के लिए तैयार हैं। बता दें कि पासवान इसी लोकसभा सीट से निर्वाचित होते रहे हैं। 
    एलजेपी प्रमुख पर केवल अपने बेटे और जमुई सांसद चिराग पासवान को बढ़ावा देने और खुद की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आशा पासवान ने अपने पिता पर जमकर हमला बोला। आशा ने पासवान पर लड़कियों से हमेशा भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा, मुझे तवज्जो नहीं दी गई, जबकि चिराग को एलजेपी संसदीय दल का नेता बना दिया गया। अगर आरजेडी मुझे टिकट देती है, तो मैं हाजीपुर से चुनाव लड़ूंगी।
    आशा रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी की दो बेटियों में से एक हैं। पासवान की दूसरी पत्नी रीना पासवान से चिराग और एक बेटी है। पासवान ने 1981 में राजकुमारी को तलाक देने के बाद 1983 में रीना से शादी की थी। 
    आशा पटना में अपने पति अनिल साधु के साथ रहती हैं, जोकि एलजेपी की दलित सेना के प्रदेश अध्यक्ष थे। पासवान से मतभेदों के बाद इसी साल मार्च में उन्होंने एलजेपी से इस्तीफा देकर आरजेडी जॉइन की थी। साधु ने भी बुधवार को कहा था कि वह अपने ससुर के खिलाफ हाजीपुर से चुनाव लडऩा चाहते हैं। 
    पासवान के दामाद अनिल साधु ने कहा, अगर आरजेडी ने मुझे या मेरी पत्नी आशा पासवान को टिकट दिया, तो निश्चित रूप से हम पासवान परिवार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगे। अनिल ने पासवान पर खुद के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा, उन लोगों ने (पासवान परिवार) केवल मेरी बेइज्जती नहीं की है, बल्कि एससी/एसटी (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) का भी अपमान किया है। दलित उनके बंधुआ मजदूर नहीं हैं।
    2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में अनिल साधु ने एलजेपी के टिकट पर मुजफ्फरपुर की बोचहा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी थी। साधु इसी साल मार्च में तेजस्वी यादव की एक जनसभा के दौरान आरजेडी में शामिल हुए थे। आरजेडी का दामन थामते हुए अनिल ने पासवान पर दलितों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया था। 
    बिहार में एलजेपी का एनडीए के साथ गठबंधन है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी ने राज्य की 40 में से 6 सीटों पर कामयाबी हासिल की थी। राज्य में इस बार सीटों के बंटवारे पर एनडीए के अंदर तस्वीर साफ नहीं है। जेडीयू के अलावा आरएलएसपी ने भी ज्यादा सीटों की डिमांड को लेकर बीजेपी पर दबाव बनाया हुआ है।  (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 14-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 14 सितंबर। विजय माल्या को लेकर छिड़ी सियासी जंग में बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान पर निशाना साधा है। पार्टी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का बचाव करते हुए कहा कि भगोड़ा बिजनेसमैन माल्या एक अपराधी है और उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल ने जेटली से इस्तीफा मांगने के राहुल के सवाल पर कहा कि माल्या को लोन देने के लिए नियमों के विरुद्ध जाकर पूर्व की यूपीए सरकार द्वारा दबाव बनाया गया।
    गोयल ने सवाल किया, माल्या को इस तरह से लाभ क्यों पहुंचाया गया राहुल गांधी को इसका जवाब देना चाहिए। आखिर माल्या को किन संबंधों का लाभ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि माल्या को नियम-कानूनों को दरकिनार कर लोन दिया गया। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देना चाहिए।  
    भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने के दावे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को जेटली पर माल्या के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि जेटली को यह बताना चाहिए कि यह सब उन्होंने खुद से किया या इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑर्डर आया था।
    जेटली के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए गांधी ने यह भी दावा किया कि इस मामले में वित्त मंत्री और सरकार झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई जेटली माल्या की 15-20 मिनट की मुलाकात के साक्षी हैं और जेटली को देश को बताना चाहिए कि माल्या को भगाने के लिए क्या डील हुई थी।  (एजेंसी)

     

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Posted Date : 13-Sep-2018
  • नई दिल्ली, 13 सितंबर । वित्त मंत्री अरुण जेटली और अपनी मुलाकात को लेकर भगोड़े विजय माल्या के लंदन कोर्ट के बाहर दिये गये बयान के बाद भारत में सियासी माहौल गरमा गया है। विजय माल्या के बयान के बाद कि वह भागने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला था, को लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है। विजय माल्या और अरुण जेटली की मुलाकात पर राहुल गांधी ने कहा कि कल अरुण जेटली ने कहा कि विजय माल्या से अनौपचारिक रुप से मिले। दरअसल, अरुण जेटली झूठ बोल रहे हैं, सरकार झूठ बोल रही है। राहुल गांधी ने अरुण जेटली पर पलटवार करते हुए कहा कि अरुण जेटली जी लंबे ब्लॉग लिखते हैं पर इसके बारे में कभी नहीं लिखा। मगर हम सबूत लाए हैं। पूनिया जी बताएंगे इस मुलाकात के बारे में, 15-20 मिनट की मीटिंग थी।
    राहुल गांधी ने माल्या और जेटली की मुलाकात के सबूत के तौर पर पीएल-पुनिया पेश किया। इसके बाद पीएएल पुनिया ने कहा कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और विजय माल्या को संसद के सेंट्रल हॉल में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए देखा था। उन्होंने कहा कि यह बात उस दिन की सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद साबित हो सकती है। 
    मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वित्त मंत्री भगोड़े से मिलता है। पर एफएम न तो सीबीआई को बताता है न किसी एजेंसी को। अरुण जेटली बताएं कि अपने आप किया या फिर ऊपर से आदेश आया। ये ओपन एंड शट केस है। वे साफ बताएं और इस्तीफा दें। एक अपराधी बताता है कि वह भागने वाला है पर वित्त मंत्री सीबीआई को बताते नहीं।
    राहुल ने कहा कि जेटली से ही मिलने आया था माल्या और जेटली के सलाह मशविरे के बाद ही वह विदेश भागा। राहुल ने कहा कि आखिर उन्होंने पुलिस को अलर्ट क्यों नहीं किया।  राहुल गांधी ने कहा कि अरुण जेटली ढाई साल तक चुप्पी साधे रहे, ढाई साल तक रहस्य बनाये रहे। संसद में बहस भी हुई लेकिन जेटली जी ने कहीं भी इसका जिक्र नहीं किया । 
    राहुल ने कहा कि सवाल ये है कि वित्त मंत्री भगोड़ों से बात करते हैं। भगोड़ा, वित्त मंत्री से कहता है कि मैं अब लंदन जाने वाला हूं। लेकिन वित्त मंत्री ने सीबीआई, ईडी या पुलिस को नहीं बताया। क्यों?(एनडीटीवी)

     

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