राजनीति

03-Jul-2020 1:18 PM

3 माह इंतजार करते रहे सीएम

भोपाल, 3 जुलाई। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के बागी ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से सरकार बनाने के तीन महीने से भी ज्यादा समय गुजरने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को दूसरी बार अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार किया। इसमें बीजेपी ने पूर्व कांग्रेस नेता को उनके नौ मुख्य समर्थकों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर पुरस्कृत किया है।
 
सिंधिया गुट के 9 लोगों को गुरुवार को मंत्री बनाया गया। दो पहले ही मंत्री बन चुके थे। इनके अलावा कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने के लिए बीजेपी में जाने वाले 22 विधायकों में शामिल तीन अन्य पूर्व कांग्रेसी नेताओं को भी मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली है। हालांकि, मंत्रिपरिषद विस्तार के कुछ घंटों के भीतर ही बीजेपी में विरोध के सुर उठने लगे। इंदौर के विधायक रमेश मेंदोला, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विश्वासपात्र और मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया के समर्थकों ने अपने नेता को मंत्री नहीं बनाए जाने पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। 

सीएम चौहान को इसका अंदाजा पहले से भी था, शायद यही वजह रही कि उन्होंने दिल्ली में कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की आवश्यकता के बारे में पार्टी हाईकमान को समझाने की कोशिश दो दिनों तक की। इसके अलावा बुधवार देर रात तक भोपाल में भी बातचीत जारी रही। जब बात नहीं बनी तो अंत में, चौहान ने मंथन से जहर पीने के आरोप के माध्यम से अपनी निराशा व्यक्त की, जबकि किसी और को अमृत मिला। 

शिवराज सिंह चौहान ने 72 दिनों बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया। इसमें देरी हुई क्योंकि बीजेपी ने मंत्री पद के लिए चेहरे चुनने में सख्ती की। पार्टी ने अपने ही नेताओं पर कठोर रुख अपनाया जबकि, नए लोगों और कांग्रेस के विद्रोहियों को तवज्जो दी। इस दौरान सिंधिया ने अपने समर्थकों के लिए कड़ी मेहनत की।

गुरुवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सीएम चौहान समेत राज्य में कुल मंत्रियों की संख्या 34 हो गई है। हालांकि, पार्टी ने अभी भी कुछ सीटें खाली रखी हैं। लेकिन अलग-अलग गुटों की मांग और सिंधिया कैम्प के दबाव के आगे पार्टी ज्यादा सीट नहीं बचा सकी है। इसलिए अब जल्द कैबिनेट विस्तार की संभावना नहीं के बराबर है। 28 नए मंत्रियों में से 18 बीजेपी के हैं, जिनके पास कुल 203 सदस्यों वाली विधानसभा में  107 विधायक हैं, जबकि 22 पूर्व कांग्रेसी नेताओं के कैम्प से 14 मंत्री बनाए गए हैं। दो पहले ही 21 अप्रैल के विस्तार में जगह पा चुके थे। (jansatta.com)


28-Jun-2020 4:18 PM

पटना, 28 जून। बिहार में चुनाव की दस्तक के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव एक्टिव हो गए हैं। सियासी मैदान से दूर लालू ट्विटर के माध्यम से नीतीश कुमार पर सीधा निशाना साधा। लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री को साधते हुए एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में लालू ने बॉलीवुड के गाने का इस्तेमाल किया। लालू यादव ने लिखा कि पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो भेद खुद जाएगा. आरजेडी प्रमुख ने आगे लिखा कि नीतीश कुमार के पंद्रह साल, भ्रम और झूठ का काला काल।

उन्होंने इस ट्वीट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की है। इस तस्वीर में नीतीश कुमार अपने दल-बल के साथ इलाके का दौरा करते हुए नजर आ रहे हैं और उनके मुख पर एक कपड़ा है। लालू यादव चारा घोटाले मामले में सजायाफ्ता हैं और रांची के रिम्स में भर्ती हैं। बिहार में जारी चुनावी गहमा-गहमी के बीच लालू प्रसाद ट्विटर के जरिए नीतीश कुमार के खिलाफ आक्रमता बढ़ा दी है। वह इससे पहले भी सोशल मीडिया के जरिए  नीतीश पर निशाना साधते रहे हैं।

इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में सभी दल चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। पिछले दिनों नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा था कि वह नीतीश बनाम लालू राज के 15 सालों की चर्चा करें। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से करें कि लोगों को बताएं कि लालू राज में 15 सालों में कितना काम हुआ था और पिछले 15 सालों में नीतीश सरकार में क्या क्या काम किए गए। (https://khabar.ndtv.com)


11-Jun-2020 3:26 PM

नई दिल्ली, 11 जून। राज्यसभा चुनाव राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर उनकी सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। गहलोत ने आशंका जताई कि गुजरात और राजस्थान में राज्यसभा के चुनावों में इरादतन दो माह की देरी की गई, क्योंकि वे खरीद-फरोख्त पूरी नहीं नहीं कर पाए थे। विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते कांग्रेस ने बुधवार को राजस्थान के अपने विधायकों को एक रिसॉर्ट में पहुंचाया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने सीएम गहलोत के हवाले से कहा, चुनाव (राज्यसभा) यहां है। इसे दो महीने पहले कराया जा सकता था, लेकिन उन्होंने गुजरात और राजस्थान में खरीद और बिक्री को पूरा नहीं किया था, इसलिए उन्होंने इसमें देरी की। चुनाव अब होने जा रहे हैं और स्थिति जस की तस है।

मुख्यमंत्री ने विधायकों के साथ बुधवार रात हुई बैठक के बाद कहा कि आप कब तक हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल होकर राजनीति करेंगे। इसमें हैरानी नहीं होगी यदि कांग्रेस उन्हें आने वाले समय में झटका दे। जनता सब कुछ समझती है। इन विधायकों को शिव विलास रिसोर्ट में ठहराया गया है। उन्होंने बैठक को लाभदायक बताया और कहा कि सभी एकजुट है। इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि राज्य में उनकी पार्टी को गिराने का प्रयास किया जा रहा है। पाटी ने इसस संबंध में राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत दी है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके विधायकों और कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले निर्दलीयों को खरीदने की कोशिश की जा रही है।

राजस्थान विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक कांग्रेस नेता महेश जोशी ने एक पत्र में कहा, मुझे विश्वसनीय स्रोतों के माध्यम से पता चला है कि हमारे विधायकों और निर्दलीय विधायकों को लुभाने की कोशिश की जा रही है। पत्र में कहा गया है कि यह संविधान की भावना और निंदनीय कृत्य के खिलाफ है. ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें। पत्र में हालांकि सीधे तौर पर बीजेपी का नाम नहीं लिया गया है लेकिन इशारा इसी पार्टी की ओर है।
गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब राज्यसभा चुनावों के लिए 19 जून को मतदान होना है। राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें से दो कांग्रेस और एक बीजेपी के पक्ष में जाने की उम्मीद है। हालांकि बीजेपी ने एक के बजाय दो उम्मीदवारों को मैदान में उतरकर कांग्रेस में भितरघात या क्रॉस वोटिंग की अटकलों को बढ़ा दिया है।
 
राज्य विधानसभा में इस समय कांग्रेस के 107 विधायक हैं, इसमें पिछले साल बीएसपी से टूटकर कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायक शामिल हैं। कांग्रेस को 12 निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है. दूसरी ओर, बीजेपी के 72 विधायक हैं और साझेदारी और निर्दलीयों में छह का समर्थन उसे हासिल है। प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए आदर्श रूप से 51 प्रथम वरीयता वाले वोटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में कांग्रेस की राह आसान लग रही है। बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार के जीतने की संभावना उसी स्थिति में बन सकती है यदि पर्याप्त संख्या में कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग करें और निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के पक्ष में पाला बदल लें। (khabar.ndtv.com)


05-Jun-2020 10:23 PM

गांधीनगर, 5 जून। गुजरात में राज्यसभा की चार सीटों के लिए 19 जून को होने वाले चुनाव से पूर्व मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है और इसके एक और विधायक मोरबी विधानसभा सीट के प्रतिनिधि ब्रजेश मेरजा ने भी इस्तीफा दे दिया है।

इससे पहले बुधवार की रात को भी दो कांग्रेस विधायकों करजण सीट के कांग्रेस विधायक अक्षय पटेल और कपराडा के जीतू चौधरी ने इस्तीफा दिया था। यह चुनाव पहले 26 मार्च को होने थे पर कोरोना संकट के कारण इन्हें टाल दिया गया था और अब इन्हे 19 जून को कराने की घोषणा की गयी है। इससे पहले मार्च में भी कांग्रेस के पांच विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद पार्टी ने बाकी विधायकों को राजस्थान के एक रिसॉर्ट में रखा था। इस तरह अब तक कुल आठ पार्टी विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं।

इन सीटों के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के तीन और कांग्रेस के दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। सामान्य अंकगणित के लिहाज से भाजपा केवल दो सीटें ही जीत सकती थी पर अब तीसरी सीट पर भी इसका पलड़ा भारी होता दिख रहा है। विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी ने आज बताया कि श्री मेरजा ने कल शाम व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर उन्हें अपने इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने विधायक से किसी भय, दबाव या लालच में ऐसा नहीं होने की पुष्टि की तथा चेहरे से मास्क हटवा कर उनकी पहचान खुद की थी। इस्तीफा पत्र पर उनके हस्ताक्षर का सत्यापन भी किया गया था। उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा देने की बात की थी।  182 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 103 और कांग्रेस के 65 विधायक (कुल आठ इस्तीफों के बाद) हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का एक विधायक है, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय एक (जिग्नेश मेवाणी) और इसके सहयोगी दल भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी के दो हैं।

जीत के लिए एक उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 35 मतों की जरूरत होगी। राजनीतिक प्रेक्षकों ने अभी भी कुछ और कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे की संभावना से इंकार नहीं किया है। भाजपा ने यह भी दावा किया है बीटीपी के विधायक भी उसके उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे।

इस बीच, कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर खरीदफरोख्त कर चुनाव जीतने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। पार्टी के विधायक पुंजाभाई वंश ने कहा कि श्री मेरजा कांग्रेस से नाराज नहीं थे। उधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि बिना स्पष्ट नेता या नीयत वाली कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और नेताओं की उपेक्षा के चलते ऐसा हो रहा है। श्री मेरजा ने कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य पद से भी त्यागपत्र दे दिया है।

इधर, कल इस्तीफा देने वाले श्री चौधरी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेताओं के रवैये से नाराज होकर ऐसा कदम उठाया है। कांग्रेस के एक नेता ने उन पर भाजपा से 50 करोड़ रूपये लेकर उसे चुनाव में मदद पहुंचाने की नीयत से ऐसा करने का आरोप लगाया है।

ाातव्य है कि इससे पहले मार्च में कांग्रेस विधायकों सर्वश्री मंगल गामित (सीट - डांग), प्रवीण मारू (गढड़ा), प्रद्युम्न ङ्क्षसह जाडेजा (अब्डासा), सोमा कोली पटेल (लींबडी) और जे वी काकड़यिा (धारी) ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। बदली हुई परिस्थितियों में होने वाले रोमांचक राज्यसभा चुनाव में अब भाजपा का पलड़ा खासा भारी लग रहा है। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे से अब जीत के लिए जरूरी अंकगणित बदल गया है।

इन चार सीटों में से तीन भाजपा तथा एक कांग्रेस के पास थीं पर पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सदन के बदले अंकगणित और कांग्रेस की बढ़ी हुई संख्या के चलते शुरूआत में दोनो पार्टियों ने दो दो प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी पर भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन यानी 13 मार्च की सुबह तीसरे प्रत्याशी के नाम की भी घोषणा कर चुनाव को बेहद रोचक बना दिया। भाजपा ने पहले रमिला बारा और अभय भारद्वाज को अपना प्रत्याशी बनाया था पर बाद में राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री नरहरि अमीन को अपना तीसरा उम्मीदवार घोषित कर दिया। श्री अमीन पाटीदार समुदाय के हैं और पहले कांग्रेस में थे। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतङ्क्षसह सोलंकी और राज्य के मंत्री तथा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिङ्क्षसह गोहिल को उम्मीदवार बनाया है।

ज्ञातव्य है कि बुधवार को त्यागपत्र देने वाले श्री चौधरी भी कथित तौर पर पार्टी से नाराज थे और पिछले मार्च में जब सभी विधायकों को जयपुर ले जाया गया था तब संपर्क विहिन हो गये थे। वह तब जयपुर जाने के लिए अन्य विधायकों के साथ हवाई अड्डे पर ही नहीं पहुंचे थे और तभी उनके इस्तीफे की अटकले लगायी गयी थीं। हालांकि वह बाद में जयपुर पहुंच गए थे। (वार्ता)


05-Jun-2020 9:23 PM

गांधीनगर, 5 जून। गुजरात में राज्यसभा की चार सीटों के लिए 19 जून को होने वाले चुनाव से पूर्व मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को झटके लगने का सिलसिला जारी है और इसके एक और विधायक मोरबी विधानसभा सीट के प्रतिनिधि ब्रजेश मेरजा ने भी इस्तीफा दे दिया है।

इससे पहले बुधवार की रात को भी दो कांग्रेस विधायकों करजण सीट के कांग्रेस विधायक अक्षय पटेल और कपराडा के जीतू चौधरी ने इस्तीफा दिया था। यह चुनाव पहले 26 मार्च को होने थे पर कोरोना संकट के कारण इन्हें टाल दिया गया था और अब इन्हे 19 जून को कराने की घोषणा की गयी है। इससे पहले मार्च में भी कांग्रेस के पांच विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद पार्टी ने बाकी विधायकों को राजस्थान के एक रिसॉर्ट में रखा था। इस तरह अब तक कुल आठ पार्टी विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं।

इन सीटों के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के तीन और कांग्रेस के दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। सामान्य अंकगणित के लिहाज से भाजपा केवल दो सीटें ही जीत सकती थी पर अब तीसरी सीट पर भी इसका पलड़ा भारी होता दिख रहा है। विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी ने आज बताया कि श्री मेरजा ने कल शाम व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर उन्हें अपने इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने विधायक से किसी भय, दबाव या लालच में ऐसा नहीं होने की पुष्टि की तथा चेहरे से मास्क हटवा कर उनकी पहचान खुद की थी। इस्तीफा पत्र पर उनके हस्ताक्षर का सत्यापन भी किया गया था। उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा देने की बात की थी।  182 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के 103 और कांग्रेस के 65 विधायक (कुल आठ इस्तीफों के बाद) हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का एक विधायक है, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय एक (जिग्नेश मेवाणी) और इसके सहयोगी दल भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी के दो हैं।

जीत के लिए एक उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 35 मतों की जरूरत होगी। राजनीतिक प्रेक्षकों ने अभी भी कुछ और कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे की संभावना से इंकार नहीं किया है। भाजपा ने यह भी दावा किया है बीटीपी के विधायक भी उसके उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे।

इस बीच, कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर खरीदफरोख्त कर चुनाव जीतने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। पार्टी के विधायक पुंजाभाई वंश ने कहा कि श्री मेरजा कांग्रेस से नाराज नहीं थे। उधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि बिना स्पष्ट नेता या नीयत वाली कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और नेताओं की उपेक्षा के चलते ऐसा हो रहा है। श्री मेरजा ने कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य पद से भी त्यागपत्र दे दिया है।

इधर, कल इस्तीफा देने वाले श्री चौधरी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेताओं के रवैये से नाराज होकर ऐसा कदम उठाया है। कांग्रेस के एक नेता ने उन पर भाजपा से 50 करोड़ रूपये लेकर उसे चुनाव में मदद पहुंचाने की नीयत से ऐसा करने का आरोप लगाया है।

ाातव्य है कि इससे पहले मार्च में कांग्रेस विधायकों सर्वश्री मंगल गामित (सीट - डांग), प्रवीण मारू (गढड़ा), प्रद्युम्न ङ्क्षसह जाडेजा (अब्डासा), सोमा कोली पटेल (लींबडी) और जे वी काकड़यिा (धारी) ने सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। बदली हुई परिस्थितियों में होने वाले रोमांचक राज्यसभा चुनाव में अब भाजपा का पलड़ा खासा भारी लग रहा है। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे से अब जीत के लिए जरूरी अंकगणित बदल गया है।

इन चार सीटों में से तीन भाजपा तथा एक कांग्रेस के पास थीं पर पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सदन के बदले अंकगणित और कांग्रेस की बढ़ी हुई संख्या के चलते शुरूआत में दोनो पार्टियों ने दो दो प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी पर भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन यानी 13 मार्च की सुबह तीसरे प्रत्याशी के नाम की भी घोषणा कर चुनाव को बेहद रोचक बना दिया। भाजपा ने पहले रमिला बारा और अभय भारद्वाज को अपना प्रत्याशी बनाया था पर बाद में राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री नरहरि अमीन को अपना तीसरा उम्मीदवार घोषित कर दिया। श्री अमीन पाटीदार समुदाय के हैं और पहले कांग्रेस में थे। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतङ्क्षसह सोलंकी और राज्य के मंत्री तथा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिङ्क्षसह गोहिल को उम्मीदवार बनाया है।

ज्ञातव्य है कि बुधवार को त्यागपत्र देने वाले श्री चौधरी भी कथित तौर पर पार्टी से नाराज थे और पिछले मार्च में जब सभी विधायकों को जयपुर ले जाया गया था तब संपर्क विहिन हो गये थे। वह तब जयपुर जाने के लिए अन्य विधायकों के साथ हवाई अड्डे पर ही नहीं पहुंचे थे और तभी उनके इस्तीफे की अटकले लगायी गयी थीं। हालांकि वह बाद में जयपुर पहुंच गए थे। (वार्ता)


02-Jun-2020 10:15 PM

भोपाल, 2 जून। एमपी से राज्यसभा की 3 सीटों के लिए 19 जून को वोटिंग होगी। कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद 2 सीटें बीजेपी के खाते में जाती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस ने भी 2 उम्मीदवार उतारे। दिग्विजय सिंह प्राथमिक सीट से हैं, तो उनकी जीत अभी तक पक्की मानी जा रही है। लेकिन बदले सियासी हालात में अब उन्हें लेकर संशय बरकरार है। पार्टी उपचुनाव को देखते हुए एमपी में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। साथ ही पार्टी के अंदर से ही यह आवाज उठ रही है कि फुल सिंह बरैया को राज्यसभा भेजा जाए।

दरअसल, कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा के लिए जब 2 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था, तब प्रदेश में सरकार थी। उस वक्त तक यह तय था कि कांग्रेस 2 सीटें निकाल सकती हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोडऩे के बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया। उसके बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं। अभी के हालात में 2 सीट पर बीजेपी की जीत पक्की है। वहीं, राज्यसभा चुनाव के बाद एमपी में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। 24 में से 16 सीट ग्वालियर-चंबल संभाग में हैं।

पिछड़ सकते हैं दिग्गी

कांग्रेस के हाथ से सत्ता जाने के बाद चुनावों का समीकरण बदल गया है। चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी के अंदर से ही दलित चेहरे को राज्यसभा में भेजने की मांग उठने लगी है। साथ ही दिग्गी विरोधी खेमा यह मांग करने लगे हैं कि बरैया को राज्यसभा भेज बीजेपी का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। बरैया के पक्ष में लॉबिंग कर रहे नेताओं का तर्क है कि उन्हें राज्यसभा भेज में आरक्षित वर्ग के वोटों का लाभ ले सकते हैं। अगर पार्टी इस पर राजी हो गई तो दिग्विजय सिंह राज्यसभा नहीं पहुंच पाएंगे।

ये हैं चर्चा

ग्वालियर-चंबल इलाके में आरक्षित वर्गों का वोट काफी है। बरैया समर्थकों के तर्क पर दिग्गी खेमा ने भी जवाब दिया है। दिग्विजय सिंह के लोगों का कहना है कि राज्यसभा इन्हें ही भेजा जाए। फुल सिंह बरैया को उपचुनाव में पार्टी किसी सीट से उम्मीदवार बनाए। इससे भी आरक्षित वर्ग के वोट पार्टी के पक्ष में आएंगे। वहीं, मीडिया से बात करते हुए फुल सिंह बरैया ने कहा कि जब तक निर्वाचन नहीं हो जाता तब तक वे मुकाबले में हैं। कांग्रेस ने मुझे उम्मीदवार बनाया है।

बदल गया है समीकरण

दरअसल, एमपी में 23 मार्च तक कांग्रेस की सरकार थी। सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ की सरकार चली गई। सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कांग्रेस के पास विधायकों की संख्या 121 थी। वहीं, बीजेपी के पास 107 विधायक थे। तत्कालीन समीकरण के हिसाब से कांग्रेस को राज्यसभा की 2 सीटें मिल रही थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा देकर समीकरण बदल दिया है। ऐसे में अब कांग्रेस 1 ही सीट जीत सकती है। बदले हालत में पार्टी को ही तय करना है कि राज्यसभा कौन जाएगा। (navbharattimes)


05-May-2020

कांग्रेस के बाद अब माया का भी किराए का ऑफर 

नई दिल्ली, 5 मई। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से गांव जा रहे मजदूरों के किराए को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी किराए का ऑफर दिया है, जबकि रेलवे ने सोमवार को ही साफ कर दिया था कि रेलवे की ओर से 85 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है और 15 फीसदी किराए का भुगतान राज्य सरकारों को करना है।

बसपा अध्यक्ष मायावती ने लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों से उन्हें वापस लाने के लिए किराया वसूले जाने की निंदा करते हुए कहा कि अगर सरकारें मजदूरों का किराया देने में आनाकानी करती हैं तो बसपा इन मजदूरों को भेजने में योगदान करेगी। 

मायावती ने मंगलवार को किए गए ट्वीट में कहा, "यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों को ट्रेनों और बसों आदि से भेजने के लिए उनसे किराया भी वसूल रही हैं। सभी सरकारें यह स्पष्ट करें कि वे उन्हें भेजने के लिए किराया नहीं दे पाएगी। यह बसपा की मांग है।''

मायावती ने आगे कहा, "ऐसी स्थिति में बसपा का यह भी कहना है अगर सरकारें प्रवासी मजदूरों का किराया देने में आनाकानी करती हैं तो फिर वह अपने सामर्थ्यवान लोगों से मदद लेकर उनको भेजने की व्यवस्था करने में अपना थोड़ा योगदान जरूर करेगी।"

कांग्रेस ने योगी को लिखा
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों का विवरण मांगा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों का किराया प्रदेश कांग्रेस कमेटी वहन करेगी। उन्होंने मजदूरों से आग्रह किया कि वह निश्चिंत होकर घर लौटे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निदेर्ष पर प्रदेश कांग्रेस उनके रेल टिकट का खर्च वहन करेगी।

अखिलेश ने साधा निशाना
उधर, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि प्रदेश के हजारों लोग फंसे हैं। अन्य प्रांतों में फंसे यहां के श्रमिकों का सही आंकड़ा भी नहीं है। अब दूसरे राज्यों की सरकारों द्वारा यूपी वालों की उपेक्षा किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। अपने उत्तर प्रदेश में भी अब प्रशासन उदासीन हो चला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा राज में भ्रष्टाचार भी कहां थम रहा है। रेलवे ने यात्रियों से कमाया पैसा प्रधानमंत्री के कोष में दान किया। फिर वही पैसा वसूलने के लिए भूखे प्यासे और जैसे-तैसे अपने घर लौट रहे गरीब श्रमिकों से 50 रूपया सरचार्ज लगा किराया लिया जा रहा है। आपदाकाल में भी गरीब का शोषण भाजपा मॉडल है। कामगारों और श्रमिकों के साथ सरकार जो दुर्व्यवहार कर रही है उससे देश के आत्मसम्मान को धक्का लग रहा है।(एजेंसियां)


16-Apr-2020

अभी मोदी से नहीं, कोरोना से लडऩे का वक्त, एक होकर लड़ेगा हिंदुस्तान तभी जीतेगा-राहुल

नई दिल्ली, 16 अप्रैल। देश में जारी कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फे्रंस के जरिए प्रेस कॉन्फे्रंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह आलोचना का वक्त नहीं है लिहाजा वह सरकार को रचनात्मक सुझाव दे रहे हैं। राहुल ने कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है, अगर हिंदुस्तान एक होकर लड़ा तो इस वायरस को हरा देंगे। अगर हम बंट गए तो वायरस जीत जाएगा, इसलिए सभी एकजुट हो। उन्होंने सरकार को टेस्टिंग बढ़ाने और गरीबों, किसानों व उद्योगों को प्रोटेक्शन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन कोरोना वायरस का इलाज नहीं है। 

राहुल ने टेस्टिंग की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लॉकडाउन वायरस का कोई हल नहीं है। यह सिर्फ एक पॉज बटन है। हमें रणनीति बनानी होगी। टेस्टिंग बढ़ानी होगी और रणनीतिक तौर पर इसका इस्तेमाल करना होगा। अगर कोरोना वायरस से लडऩा है तो टेस्टिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना होगा। हमें उन इलाकों में भी टेस्टिंग करनी होगी जहां केस नहीं हैं। 

इमर्जेंसी सिचुएशन है, मिलकर लडऩा होगा
कांग्रेस नेता ने कहा कि जो हुआ वह हो गया लेकिन अब इमर्जेंसी सिचुएशन है। अब आगे देखते हैं और मिलकर हिंदुस्तान यूनाइट होकर कोरोना से लड़े। इससे देश को भी फायदा होगा। रणनीतिक तौर पर काम करें। लॉकडाउन हुआ तो बात बनी नहीं बल्कि पोस्टपोन हुई है। रिसोर्सेज को स्टेट के हाथ दीजिए। राज्यों को जीएसटी दीजिए। मुख्यमंत्रियों और जिलों के प्रशासन से खुलकर बात कीजिए और उनकी जो जरूरतें हैं उन्हें पूरा कीजिए। जिले स्तर पर कार्रवाई हो, निचले स्तर पर कार्रवाई हो। 

लॉकडाउन से बात नहीं बनी बल्कि टली है
लॉकडाउन हुआ तो बात बनी नहीं बल्कि पोस्टपोन हुई है। रिसोर्सेज को स्टेट के हाथ दीजिए। राज्यों को जीएसटी दीजिए। मुख्यमंत्रियों और जिलों के प्रशासन से खुलकर बात कीजिए और उनकी जो जरूरतें हैं उन्हें पूरा कीजिए। 

कोरोना के खिलाफ टेस्टिंग बड़ा हथियार
एक बार बीमारी शुरू हो गई तो सभी देशों ने टेस्टिंग किट मंगानी शुरू कर दी। इसलिए कमी स्वाभाविक है। लेकिन हमें कोई न कोई तरीका निकालना पड़ेगा। टेस्टिंग को बढ़ाना ही होगा। अगर आप कोविड से लडऩा चाहते हैं तो बिना टेस्टिंग के यह संभव नहीं है। अगर आप नॉन हॉटस्पॉट्स में जांच ही नहीं कर रहे हैं तो आप कामयाब नहीं हो सकते। इसे रणनीति बनाकर करना होगा। वायरस के खिलाफ टेस्टिंग एक बड़ा हथियार है। 
फूड सेफ्टी सुनिश्चित कीजिए। गोदामों में अनाज पड़े हुए हैं। जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं, उन्हें भी राशन दीजिए। न्याय योजना को अपनाइए। गरीबों के खाते में डायरेक्ट पैसे भेजिए। छोटे और लघु उद्योगों के लिए सरकार पैकेज तैयार करे ताकि रोजगार न छिनें। कंपनियों के लिए प्रोटेक्शन तैयार कीजिए। 

तत्काल कार्रवाई की जरूरत, देरी पड़ेगी भारी
लॉकडाउन के बाद एग्जिट स्ट्रैटिजी क्या होगी, हॉस्पिटल को रैम्प अप कैसे करेंगे....इसकी तैयारी हो। कार्रवाई में देरी नहीं बल्कि तत्काल होनी चाहिए। हॉटस्पॉट्स और नॉन हॉटस्पॉट्स में अभी सरकार सिर्फ पहले वाले क्षेत्रों में टेस्टिंग पर जोर दे रही है। जब तक कोई इलाका हॉटस्पॉट नहीं बनता तब तक वहां टेस्टिंग तेज नहीं हो रही। इस रणनीति को बदलने की जरूरत है। 

देश पर वित्तीय दबाव बढऩे वाला है
राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से देश पर वित्तीय दबाव बढऩे वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से इसके लिए तैयारी रखनी चाहिए। फूड एक बड़ी समस्या बनने वाली है। गोदाम भरे पड़े हैं लेकिन गरीबों के पास खाने को नहीं है। गरीबों तक अनाज दीजिए। किसानों को प्रोटेक्शन की जरूरत है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोटेक्शन की जरूरत है। 

अपनी 100 क्षमताओं को अभी मत झोकिए। अगर अभी झोक दिया और 3 महीने तक स्थिति नहीं सुधरी तब हालात खराब हो जाएंगे। हेल्थ के मोर्च पर आपने अभी पॉज बटन दबाया है, जैसे ही पॉज बटन को हटाएंगे तब बीमारी तेजी से फैलेगी। वित्तीय संरक्षण, लोगों को फूड सिक्यॉरिटी, उद्योगों के प्रोटेक्शन और फाइनैंशल पैकेज देना होगा। 

सबसे जरूरी बात माइंडसेट की है। जीत के ऐलान के माइंडसेट में नहीं आइए। समय से पहले जीत का ऐलान करना बहुत घातक साबित हो सकता है। 

कंपलीट लॉकडाउन पूरी तरह से संभव ही नहीं
कंपलीट लॉकडाउन पूरी तरह से संभव ही नहीं है। प्रवासी मजदूरों की समस्या बहुत गंभीर है। कुछ लोग उन्हें घर भेजने की सलाह दे रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें जहां हैं वहीं रहने देने की सलाह दे रहे हैं। सरकार को बेहतर फैसला लेना होगा। आप किसी को दोष नहीं दे सकते। 

मोदी से कहां कमी रह गई के सवाल पर 
जिस दिन कोविड को हिंदुस्तान ने हरा दिया, उस दिन बताऊंगा कि कमी कहां रह गई। आज मैं कंस्ट्रक्टिव सजेशन देना चाहता हूं, तू-तू-मैं-मैं नहीं करना चाहता। इसमें सबको मिलकर एक साथ लडऩा होगा। मैं नरेंद्र मोदी से बहुत बातों में असहमति रखता हूं लेकिन यह लडऩे का वक्त नहीं है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगर हम एकजुट होकर काम करने में कामयाब हुए तो भारत इसे आसानी से हरा देगा। अगर एक दूसरे से हम लडऩा शुरू कर देंगे तो हार जाएंगे। 

प्रवासी मजदूरों की समस्या पर 
सरकार को एक्सपर्ट्स से बात कर कदम उठाने चाहिए। गोदामों में रखे अनाज को बांटा जाना चाहिए। जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं, उन्हें भी राशन मिलना चाहिए। सरकार को हर गरीब को 10 किलो गेहूं, 10 किलो चावल और 1 किलो चीनी हर महीने जरूर देनी चाहिए। 

स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले के सवाल पर 
टेस्टिंग से किसी का नुकसान नहीं होने वाला है। टेस्टिंग से बीमारी के बारे में सूचना मिलती है और इसे बड़े पैमाने पर करना चाहिए। बीमारी के खिलाफ हिंदुस्तान को एक होना पड़ेगा। जाति, धर्म, उम्र सबको भूलकर एक होना पड़ेगा। बुजुर्गों को ज्यादा खतरा है। हिंदुस्तान में डायबिटीज, हार्ट की बीमारियां, फेफड़े आदि की समस्याएं बहुत हैं। सभी उम्र वालों में इस तरह की समस्याएं हैं। ऐसे लोगों को प्रोटेक्शन देना बहुत जरूरी है। टेस्टिंग बहुत जरूरी है। यूरोप और अमेरिका में यह सिर्फ बुजुर्ग लोगों की बीमारी है लेकिन हिंदुस्तान में यह सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है। 

बातचीत से आगे जाने की जरूरत है। पैसे लगाने की जरूरत है। मुख्यमंत्रियों से बात करने की जरूरत है। प्रवासी मजदूरों को लेकर सरकार ने कई गलतियां की। अगर रणनीति बनाई गई होती तो ऐसी स्थिति नहीं होती। राज्यों को सभी प्रवासी मजदूरों का ध्यान रखना चाहिए। 

राज्यों, मुख्यमंत्रियों को और ज्यादा अधिकार देने की जरूरत
दुनिया में भारत के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है, जिसने इतने ज्यादा प्रवासी मजदूरों के बावजूद लॉकडाउन किया। आपको मुख्यमंत्रियों को और ज्यादा अधिकार देने की जरूरत है। केंद्र को मेन नैशनल सिस्टम को कंट्रोल करने की जरूरत है लेकिन राज्यों को अपने क्षेत्रों को लेकर फैसला लेने का अधिकार होना चाहिए। राहुल ने कहा कि लॉकडाउन को रणनीतिपूर्वक खोलना चाहिए। इसके लिए राज्यों को आक्रामक ढंग से टेस्टिंग करनी पड़ेगी। (नवभारतटाईम्स)