राजनीति

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • भोपाल, 25 अप्रैल । मध्य प्रदेश प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने पीएम नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘मोदी चुनाव आयोग को जेब में लेकर चलते हैं’। उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा आयोग छोटे लोगों पर तो कार्रवाई करता है, लेकिन मोदी पर कार्रवाई क्यों नहीं करता है।
    उन्होंने कहा जब राहुल गांधी ‘चौकीदार चोर है’ बोलते हैं, तो चुनाव आयोग तुरंत आपत्ति जता देता है। लेकिन जब पीएम मोदी सर्जिकल स्ट्राइक और सेना के जवानों की शहादत पर वोट मांगते हैं, तो चुनाव आयोग कोई एक्शन नहीं लेता। आयोग छोटे-मोटे नेताओं पर 12 घंटे से लेकर 24 घंटे तक का बैन लगा देता है। लेकिन पीएम मोदी ने जब शहीदों को लेकर इमोशनल ब्लैक मेल किया तब कोई कार्रवाई नहीं की गई।
    कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा इंदौर में कांग्रेस के चुनावी कार्यालय के शुभारंभ के मौके पर पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में उनके अलावा तुलसी सिलावट, बाला बच्चन और जीतू पटवारी भी मौजूद थे। कांग्रेस के लोकसभा चुनाव के कार्यालय के उद्घाटन पर ये बड़ा कार्यक्रम रखा गया था। जिसमें 10 हजार लोगों को आमंत्रित किया गया था। (न्यूज18)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल। कई दिनों के कयास और तमाम अटकलों पर कांग्रेस पार्टी ने विराम लगाते हुए वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपने उम्मीदवार का एलान कर दिया है। इसके साथ ही ये साफ हो गया है कि पार्टी की महासचिव और राहुल गांधी की बहन वाराणसी से कांग्रेस की उम्मीदवार नहीं होंगी। कांग्रेस ने अजय राय को मोदी के खिलाफ अपना उम्मीदवार घोषित किया।
    जिस वाराणसी सीट से साल 2014 में मोदी ने जीत हासिल की थी। उसी सीट पर मोदी के सामने कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। 2014 में पीएम मोदी को कुल 5 लाख 81 हजार वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय को करीब 75 हजार वोट ही मिल पाए थे। अजय राय 2014 के चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे। जबकि दूसरे नंबर पर दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल रहे थे। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • संदीप कुमार सिंह 
    नई दिल्ली, 25 अप्रैल । राजधानी दिल्ली में भले ही लोकसभा की सिर्फ 7 सीटें हैं लेकिन देश की कुर्सी के साथ इन 7 सीटों का अजब सा संयोग जुड़ा हुआ है। पिछले 21 साल का चुनावी इतिहास ये बताता है कि इन 7 सीटों के दंगल में जिस भी दल ने दिल्ली वालों का दिल जीत लिया देश की कुर्सी उसे ही मिली। दिल्ली की सभी सातों सीटों पर एक साथ 12 मई को छठे चरण में वोट डाले जाएंगे।
    दिल्ली में आम तौर पर मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होता रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय है। राजधानी में लोकसभा की 7 सीटें ये हैं- नई दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली, चांदनी चौक और दक्षिण दिल्ली। 2014 में इन सातों सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई थी। बीजेपी को 46.4 फीसदी वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 15.1 और आम आदमी पार्टी को 32.9 फीसदी वोट मिले।
    1951 में जब देश में पहला चुनाव हुआ तो दिल्ली में लोकसभा की 4 सीटें थीं। 1967 में सीटें 7 हो गईं। लेकिन दिल्ली की सियासत में असली टर्निंग प्वाइंट 21 साल पहले 1998 में आया जब 7 में से 6 सीटें बीजेपी ने जीती। केवल एक सीट कांग्रेस के खाते में गई। दिल्ली का रण जीती बीजेपी की केंद्र में भी सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। 1999 में फिर से देश में चुनाव हुए। 13वीं लोकसभा के लिए हुए इस चुनाव में फिर बीजेपी ने सभी सातों सीटें जीत लीं। केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की फिर सरकार बनी।
    इसके बाद 2004 के चुनाव में कांग्रेस 6 सीट जीतने में कामयाब रही और बीजेपी के खाते में सिर्फ एक सीट आई। केंद्र की कुर्सी पर भी बदलाव हुआ। अटल सरकार की जगह केंद्र में डॉ। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनी। 2009 के चुनाव में दोबारा कांग्रेस को सफलता हाथ लगी और सभी 7 सीटें जीतने में वह कामयाब रही। इसी के साथ केंद्र में भी यूपीए-2 सरकार बनी। लेकिन 2014 में दिल्ली के मतदाताओं ने अपना जनाधार बदला और सभी सातों सीटें बीजेपी की झोली में डाल दिए। 2014 में दिल्ली का सियासी मिजाज बदला तो देश की कुर्सी पर भी बदलाव हुआ और केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनी।
    लंबे समय से दिल्ली में कांग्रेस बनाम बीजेपी की जंग होती आ रही थी। लेकिन आम आदमी पार्टी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 2014 में पहली बार आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में उतरी थी लेकिन कोई सीट नहीं जीत सकी। हालांकि आम आदमी पार्टी को 32.9 फीसदी वोट जरूर मिले थे। 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें आम आदमी पार्टी ने जीती थी। इस बार पार्टी सातों सीटों पर लड़ रही है। कांग्रेस और बीजेपी ने भी 7 सीटों का दांव जीतने के लिए पूरा दम लगा रखा है।
    1. नई दिल्ली- मीनाक्षी लेखी (वर्तमान सांसद)-बीजेपी, अजय माकन-कांग्रेस, ब्रजेश गोयल-आम आदमी पार्टी से।
    2. पूर्वी दिल्ली- गौतम गंभीर-बीजेपी, अरविंदर सिंह लवली-कांग्रेस, अतिशी मार्लेना-आम आदमी पार्टी।
    3. उत्तर पूर्वी दिल्ली- मनोज तिवारी (वर्तमान सांसद)-बीजेपी, शीला दीक्षित-कांग्रेस, दिलीप पांडे-आम आदमी पार्टी।
    4. चांदनी चौक- डॉ. हर्षवर्धन (वर्तमान सांसद)-बीजेपी, जय प्रकाश अग्रवाल-कांग्रेस, पंकज गुप्ता-आम आदमी पार्टी।
    5. पश्चिमी दिल्ली- प्रवेश वर्मा (वर्तमान सांसद)-बीजेपी, महाबल मिश्रा-कांग्रेस, बलबीर जाखड़-आम आदमी पार्टी।
    6. उत्तर पश्चिम दिल्ली- हंसराज हंस-बीजेपी, राजेश लिलोथिया-कांग्रेस, गगन सिंह रंगा-आम आदमी पार्टी।
    7. दक्षिणी दिल्ली- रमेश बिधूड़ी (वर्तमान सांसद)-बीजेपी, विजेंदर सिंह-कांग्रेस, राघव चड्ढा-आम आदमी पार्टी।
    दिल्ली की इन 7 सीटों के लिए सियासी लड़ाई में इन तीन दलों के अलावा कई और दल तथा निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। तमाम दलों के कुल 349 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। लेकिन मुकाबला इन तीन दलों के बीच ही माना जा रहा है। नतीजे 23 मई को मतगणना के बाद ही आएंगे और तब पता चलेगा कि किस दल के एजेंडो, घोषणापत्र और वादों पर दिल्ली के वोटरों ने भरोसा किया। (आजतक)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ और उनके तीन प्रमुख अधिकारियों के स्विट्जरलैंड में ठहरने की व्यवस्था पर करीब 1.58 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम कमलनाथ एवं मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव एस आर मोहन्ती, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अशोक बर्नवाल और राज्य सरकार के औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग के प्रधान सचिव मोहम्मद सुलेमान ने स्विट्जरलैंड के दावोस में जनवरी, 2019 में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में हिस्सा लिया था। आरटीआई दस्तावेजों में बताया गया कि मध्यप्रदेश सरकार का प्रतिनिधिमंडल दावोस के विशेष व्यापार लाउंज में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुआ। हालांकि, राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि असल में करीब एक करोड़ रुपया ही खर्च किया गया।  
    पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया था और कमलनाथ शिवराज सिंह चौहान को हटाकर राज्य की गद्दी पर काबिज हुए थे। इस बार लोकसभा चुनाव में उनके बेटे नकुल नाथ भी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव विश्लेषण से जुड़ी शोध संस्था एडीआर की चौथे चरण के चुनाव में किस्मत आजमा रहे 928 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार नकुल नाथ ने अपने हलफनामे में 660 करोड़ रुपये से अधिक की चल अचल संपत्ति का खुलासा किया है। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार नाथ के पास 618 करोड़ रुपये की चल और 41 करोड़ रुपये अचल संपत्ति है। (भाषा)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । चुनाव आयोग ने तीन अलग-अलग वेबसाइट्स से ‘बाघिनी : बंगाल टाइग्रेस’ के ट्रेलर को हटाने का निर्देश दिया है। इस फिल्म को कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बायोपिक बताया जा रहा है।
    चुनाव आयोग के उपायुक्त सुदीप जैन ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि यह ट्रेलर ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हो। यह बायोपिक तीन मई को रिलीज होनी है। सुदीप जैन ने कहा कि बायोपिक को अभी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी नहीं मिली है।
    फिल्म के निर्देशक नेहल दत्ता ने इस फिल्म के ममता बनर्जी की बायोपिक होने से इनकार किया है। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि हालांकि यह फिल्म ममता बनर्जी की जीवन यात्रा से प्रेरित है।
    मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के तहत चुनाव आयोग ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर भी आचार संहिता लागू रहने तक रोक लगा दी थी।
    सुदीप जैन ने कहा कि पूर्व के फैसलों को देखते हुए बायोपिक या ऐसे किसी और ट्रेलर को मंजूरी नहीं दी जा सकती। इससे पहले बंगाल भाजपा ने ममता बनर्जी की कथित बायोपिक पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा था।
    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी के जीवन पर बनी बायोपिक फिल्म को देखकर फैसला करें कि क्या इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या नहीं।
    सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपना जवाब 22 अप्रैल तक एक सीलबंद लिफाफे में अदालत में जमा कराने को कहा था। चुनाव आयोग द्वारा फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ फिल्म के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
    चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • लखनऊ, 25 अप्रैल । अम्बेडकरनगर संसदीय सीट से अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मतदान के पहले ही आउट हो गई है। इस सीट पर चुनाव छठे चरण में होना है। बुधवार को हुई नामांकन पत्रों की जांच में शपथ पत्र में खामी के चलते कांग्रेस के उम्मेद सिंह निषाद उर्फ उमेद सिंह के साथ कुल आठ प्रत्याशियों का नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। उम्मेद सिंह निषाद का अम्बेडकरनगर सीट से नामांकन खारिज होने को साजिश बताते हुए कांग्रेस ने कहा है कि वह कोर्ट की शरण लेगी। आपको बता दें कि उम्मेद सिंह, फूलन देवी के पति है। बीजेपी ने अंबेडकर नगर से मुकुट विहारी वर्मा को टिकट दिया है जो यूपी के सहकारिता मंत्री हैं। वर्मा फिलहाल बहराइच के कैसर गंज से विधायक हैं। अंबेडकर नगर में करीब ढाई लाख कुर्मी वोटर हैं इससिए बीजेपी ने मुकुट विहारी वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं  सपा-बसपा गठबंधन की तरफ से रीतेश पांडेय चुनाव मैदान में हैं।
    लोकसभा के सामान्य निर्वाचन-2019 में छठवें चरण की अम्बेडकरनगर संसदीय सीट से अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मतदान के पहले ही आउट हो गई है। बुधवार को हुई नामांकन पत्रों की जांच में शपथ पत्र में खामी के चलते कांग्रेस के उम्मेद सिंह निषाद उर्फ उमेद सिंह के साथ कुल आठ प्रत्याशियों का नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए।
    अम्बेडकरनगर लोकसभा सीट पर 20 प्रत्याशियों ने नामजदगी का पर्चा भरा है। कलेक्ट्रेट के जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय कक्ष 39 में बुधवार को रिटर्निंग अधिकारी सुरेश कुमार ने नामांकन पत्रों की जांच की। इस दौरान सामान्य प्रेक्षक आईएएस उदय प्रकाश सिंह भी मौजूद रहे। जांच में आठ पर्चे खारिज किए गए। सभी आठ पर्चे खारिज होने का कारण नामांकन पत्रों के अभिलेखों में कमी होना बताया गया है। इनमें कांग्रेस के उम्मेद निषाद के साथ अपना दल बलिहारी के इन्द्रजीत, निर्दल पुष्पा अनिल, डा। लाल बहादुर मौर्य, नागेश्वर प्रसाद, फतेह बहादुर, गुलाम किवरिया और कमलेश शामिल हैं। नाम वापसी शुक्रवार को सुबह 11 बजे से शाम तीन बजे तक होगी। मतदान 12 मई को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगी। मतगणना 23 मई को होगी। नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया सम्पन्न हो जाने के बाद विधि मान्य प्रत्याशियों की संख्या 12 रह गई है। 
    कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेद सिंह निषाद ने नामांकन पत्र खारिज करने को डीईओ की साजिश बताया है। उम्मेद निषाद ने कहा कि डीईओ की आयोग से शिकायत करेंगे। साथ ही कहा कि न्यायालय की शरण में भी जाएंगे। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल को एक सेट में और 23 अप्रैल को दो सेट में पर्चा पूरी तरह से वैध दाखिल किया था। जिलाध्यक्ष सैयद मेराजुद्दीन किछौछवी ने कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को आयोग और उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। आठ प्रत्याशियों का नामांकन पत्र खारिज होने को कई उम्मीदवारों ने भी साजिश बताया है। 
    लोकसभा चुनाव के छठे चरण में उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच हुई। इस जांच में कुल 129 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र विभिन्न खामियों के चलते खारिज कर दिये गये। सबसे ज्यादा 25 प्रत्याशियों के पर्चे फूलपुर लोस सीट पर खारिज किये। इसी क्रम में संतकबीर नगर सीट पर 27 उम्मीदवारों में से 20 के नामांकन निरस्त किये गये। भदोही सीट पर भी 32 उम्मीदवारों में से 20 के पर्चे निरस्त किये गये। प्रतापगढ़ और जौनपुर सीट पर नामांकन खारिज होने का पूरा ब्यौरा देर शाम तक नहीं मिल सका था। अब इन 14 सीटों पर कुल 204 उम्मीदवार मैदान में रह गये हैं। शुक्रवार 26 अप्रैल नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। इन लोस सीटों पर 12 मई को मतदान होगा। ।
    लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण के लिये उत्तर प्रदेश की 13 लोस सीटों पर नामांकन दाखिले की प्रक्रिया जारी है। बुधवार को चन्दौली लोस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय और गाजीपुर सीट पर बसपा के उम्मीदवार अफजाल अंसारी ने नामांकन दाखिल किए। बुधवार को इन 13 लोस सीटों पर कुल 16 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किये। गोरखपुर सीट पर सपा के रामभुआल ने नामांकन दाखिल किया। बांसगांव सीट पर बसपा के सदल प्रसाद ने पर्चा भरा। अब तक इन 13 सीटों पर कुल 41 उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं। इन 13 सीटों पर 29 अप्रैल तक नामांकन दाखिल किये जाएंगे। 30 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 2 मई नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। जबकि मतदान 19 मई को होगा। (लाइव हिंदुस्तान)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • विदिशा, 25 अप्रैल । शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि अगर वह महिषासुर मर्दनी हैं, तो दिग्विजय सिंह को भी क्यों नहीं श्राप दे देतीं हैं। वह पर्चा ही नहीं भर पाएंगे और चुनाव की नौबत ही नहीं आएगी। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा महिषासुर जैसी भाषा का प्रयोग लोकतंत्र का सूचक नहीं है।

    दिग्विजय सिंह आज नामांकन से पहले जगद्गुरु  शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस मौके पर दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी मौजूद थीं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि जो सच्चे हृदय से आता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने कहा ‘अगर प्रज्ञा ठाकुर महिषासुर मर्दिनी हैं तो चुनाव की जरूरत क्या है। अगर आपने हेमंत करकरे को श्राप देकर मारा, वैसे ही दिग्विजय सिंह को भी मार दीजिए। चुनाव का पर्चा ही ना भर पाएं’
    शंकराचार्य ने पूछा कि ‘आप बताइए गौ मांस का भारत से निर्यात बंद होगा कि नहीं ? नोटबंदी से हुआ नुकसान कैसे पूरा होगा? किसान की ख़ुदकुशी कैसे रूकेगी? नर्मदा-गंगा का कैसे संरक्षण होगा? चुनाव के अहम मुद्दे ये होने चाहिए न कि अमर्यादित भाषा। (न्यूज18)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • बेगूसराय, 25 अप्रैल । अपने भडक़ाऊ और साम्प्रदायिक भाषणों के कारण हमेशा चर्चा के केंद्र में रहने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपना पुराना तेवर फिर अख्तियार कर लिया है। बेगूसराय से एनडीए के उम्मीदवार गिरिराज सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने मंच से मुस्लिम समुदाय के लोगों को चेतावनी दी है कि अगर कब्र के लिए तीन हाथ जगह चाहिए तो इस देश में वंदेमातरम गाना होगा और भारत माता की जय कहना होगा।
    गिरिराज के अनुसार अगर तुम ऐसा नहीं कर पाओगे तो देश तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा। गिरिराज सिंह ने बुधवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान अन्य बातों की चर्चा करने के अलावा कहा कि कुछ लोग बिहार की धरती को रक्तरंजित करना चाहते हैं, सांप्रदायिक आग फैलाना चाह रहे हैं, लेकिन भाजपा जब तक है न बिहार में ऐसा होगा और न बेगूसराय की धरती पर वे ऐसा होने देंगे।
    उसके बाद गिरिराज ने राष्ट्रीय जनता दल के दरभंगा से उम्मीदवार अब्दुल बारी सिद्दिकी के एक तथाकथित वक्तव्य की चर्चा करते हुए कहा कि आरजेडी के उम्मीदवार दरभंगा में कहते हैं कि वंदे मातरम मैं नहीं बोलूंगा। बेगूसराय में भी कुछ लोग आकर बड़े भाई का कुरता और छोटे भाई का पायजामा पहनकर भ्रमण कर रहे हैं। लेकिन मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि जो वंदे मातरम नहीं गा सकता, जो भारत की मातृभूमि को नमन नहीं कर सकता वो इस बात को याद रखें कि अरे गिरिराज के नाना-दादा सिमरिया घाट में गंगा नदी के किनारे मरे, उसी भूमि पर कोई कब्र नहीं बनाया लेकिन तुम्हें तो तीन हाथ जगह चाहिए। तुम ऐसा नहीं कर पाओगे तो देश तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा।
    इसके बाद गिरिराज ने अपना भाषण खत्म कर दिया लेकिन निश्चित रूप से भाषण का यह अंश चौंकाने वाला था। हालांकि जानकारों का मानना है कि गिरिराज इस बार जब नीतीश कुमार के साथ मंच पर होते हैं तब वे सबका साथ सबका विकास और सांप्रदायिक सद्भाव कायम रखने की बातें करते हैं लेकिन जब वे अपने मंच पर और अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने बोल रहे होते हैं तो मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाने पर रखने से नहीं चूकते।
    इसका दूसरा कारण ये भी बताया जा रहा है कि बेगूसराय में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण उन्हें इस बात का अंदाजा हो गया है या उनकी यह सोची समझी रणनीति का हिस्सा है कि जब तक सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होगा तब तक उनकी जीत का रास्ता आसान नहीं होगा। इसलिए उन्होंने जानबूझकर वंदे मातरम, भारत माता की जय और कब्रिस्तान और कब्र के लिए जमीन का मुद्दा छेड़ा है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । भारतीय जनता पार्टी से टिकट न मिलने के बाद सांसद उदित राज ने बड़ा फैसला किया है। अपनी नाराजगी जाहिर करने के बाद उदित राज ने कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया है। गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उदित राज का पार्टी में स्वागत किया।
    उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट से 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले उदित राज को इस बार मौका नहीं दिया गया है। बुधवार को बीजेपी प्रत्याशियों की सूची में नाम न आने के बाद से ही उदित राज विरोधी मूड में नजर आ रहे थे। यहां तक कि उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर नाम के आगे से चौकीदार शब्द भी हटा दिया था।
    हालांकि, बुधवार को सूची में नाम आने से पहले ही उदित राज ने यह मुद्दा उठाना शुरू कर दिया था। उदित राज ने 22 अप्रैल को ट्वीट कर लिखा था कि अमित शाह, अरुण जेटली समेत कई नेताओं से बातचीत की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही है। उदित राज ने यह भी लिखा था कि वह उम्मीद करते हैं कि बीजेपी दलितों को धोखा नहीं देगी।
    इसके बाद बुधवार को ही बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया और उत्तर पश्चिम सीट से मशहूर गायक हंसराज हंस को प्रत्याशी बना दिया। टिकट कटने के बाद उदित राज ने सार्वजनिक तौर पर अपना गुस्सा जाहिर किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनकी अरविंद केजरीवाल से बात हुई है, जिन्होंने कहा था बीजेपी टिकट नहीं देगी। इसके अलावा उदित राज ने यह भी बताया था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार संसद में उनसे कहा था कि वो गलत पार्टी में है।
    अब जबकि उदित राज को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया है तो उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इसके साथ ही उन्होंने ट्विटर हैंडल पर अपने नाम के आगे लगा चौकीदार शब्द भी हटा लिया है। हालांकि, उन्होंने गुरुवार सुबह टिकट कटने के बाद भी ऐसा किया था, लेकिन पांच घंटे बाद फिर से नाम के आगे चौकीदार लिख लिया था। अब जबकि उदित राज औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हिस्सा बन गए हैं, तो उन्हें नरेंद्र मोदी के मैं भी चौकीदार अभियान से खुद को अलग कर लिया है।
    हालांकि, एक तथ्य ये भी है कि दिल्ली में सात सीटों पर हो रहे लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन की मियाद 23 अप्रैल को ही खत्म हो गई है। दूसरी तरफ उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट से कांग्रेस राजेश लिलौथिया को प्रत्याशी बना दिया है। ऐसे में ये बात तो स्पष्ट है कि अब उदित राज के पास अपनी इस सीट से चुनाव लडऩे का मौका नहीं बचा है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस उन्हें किसी अन्य राज्य से चुनाव लड़ाती है। (आजतक)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • कुबूल अहमद  
    नई दिल्ली, 24 अप्रैल । लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 117 सीटों पर मतदान पूरा हो गया। तीसरे चरण में करीब 66.4 फीसदी मतदान हुए. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर 70.11 फीसदी वोटिंग हुई थी। इस तरह से करीब 4 फीसदी कम वोट पड़े हैं। पिछले तीन चरणों में कुल 302 सीटों पर मतदान के साथ आधा से ज्यादा चुनाव का सफर पूरा हो गया है। इस बार को लोकसभा चुनाव में वोटिंग ट्रेंड को राजनीतिक दल अपने-अपने नफा और नुकसान के नजरिए से देख रहे हैं। लेकिन मतदाताओं की खामोशी उन्हें बेचैन कर रही है।
    तीसरे चरण में सबसे ज्यादा वोटिंग असम में 80.75 फीसदी हुई है। जबकि सबसे कम जम्मू-कश्मीर में 12.86 फीसदी मतदान हुआ है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर 61.40 फीसदी मतदान रहा, जो कि 2014 की तुलना में 0.4 फीसदी कम रहा। तीसरे चरण के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गृह राज्य गुजरात की सभी 26 सीटों पर 63.73 फीसदी वोटिंग हुई।
    इसके अलावा केरल की सभी 20 सीटों पर 73.69 फीसदी वोट पड़े हैं। इसी के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और शरद यादव सहित कई दिग्गजों के किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो गया है।
    लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 117 सीटों पर 66.44 फीसदी वोटिंग हुई है। इन सीटों पर 2014 में 70.11 फीसदी और 2009 में 61.8 फीसदी मतदान हुआ था। वोटिंग ट्रेंड को देखें तो 2014 में वोट फीसदी में बढ़ोत्तरी हुई तो वहीं 2019 में कमी आई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पास 63, कांग्रेस के पास 16, बीजेडी के पास 6, सीपीएम के पास 8, एनसीपी 4, सपा के पास 3, आरजेडी के पास 2 और अन्य के पास 15 सीटें थी।  2009 के नतीजे को देखें तो बीजेपी के पास 44, कांग्रेस के पास 38, बीजेडी के पास 5, सीपीएम के पास 6 एनसीपी के पास 3 और अन्य के पास 21 सीटें थी।
    बता दें कि देश की कुल 543 लोकसभा सीटों के लिए सात चरण में चुनाव हो रहे हैं। इनमें से तीन चरण का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी के साथ 302 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है. पहले चरण की 91, दूसरे चरण की 95 और तीसरे चरण की 117 सीटों पर वोटिंग हुई है। इनमें जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट भी शामिल हैं, जहां तीन चरण में चुनाव होने हैं।
    लोकसभा चुनाव के लिए 11 अप्रैल को पहले चरण की 20 राज्यों की 91 सीटों पर करीब 60 फीसदी लोगों ने वोट डाला।  2014 में इन्हीं 91 सीटों पर 70.79 फीसदी मतदान हुए थे। ये पिछली बार की तुलना में करीब 10 फीसदी कम है। पहले चरण की जिन 91 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 32 सीटें जीतने में सफल रही थी। जबकि कांग्रेस के पास महज 7 सीटें जीती थी। इसके अलावा 16 सीटें टीडीपी के पास, 11 टीआरएस, 9 सीटें वाईएसआर कांग्रेस, 4 सीटें बीजेडी और 12 सीटें अन्य दलों ने जीती थी। ऐसे में 10 फीसदी कम वोटिंग मोदी के लिए बेचैनी का सबब बनेगी या फिर विपक्ष के लिए एक बार और झटका साबित होगी।
    लोकसभा चुनाव के लिए 18अप्रैल को दूसरे चरण के 12 राज्यों की 95 सीटों पर करीब 68 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। इन 95 सीटों पर 2014 में 65 फीसदी वोटिंग पड़ी थी। पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में 3 फीसदी अधिक वोट पड़े हैं। जबकि 2009 के चुनाव में 62.49 फीसदी वोट पड़े थे।
    दूसरे चरण की जिन 95 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हो चुकी है, इन्हीं सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 27 सीटें जीतने में सफल रही थी. जबकि एनडीए के पास 64 सीटें थी। वही, कांग्रेस के पास महज 12 सीटें जीती थी। इसके अलावा 4 सीटें बीजेडी, 2 सीटें जेडीएस, 2 सीटें आरजेडी, 1 सीटें टीएमसी, एक जेडीयू और 6 सीटें अन्य को मिली थी। वहीं बीजेपी की सहयोगी एआईएडीएमके के पास 36 सीटें और शिवसेना के पास 4 सीटें थी।
    लोकसभा चुनाव 2019 में तीन चरण का चुनाव पूरा हो गया है आर चार चरणों में 241 सीटों पर वोटिंग होनी है। इसका मतलब साफ है कि आधे से ज्यादा सीटों पर चुनाव का सफर पूरा हो चुका है। पहले चरण की वोटिंग कम होने के बाद बाकी तीन चरणों में वोटिंग फीसदी में इजाफा हुआ है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के वोटिंग ट्रेंड में सियासी पार्टियां अपने-अपने पक्ष में बता रही हैं। (आजतक)

     

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(रू) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि यह खेदजनक है कि लेफ्ट को बिहार के महागठबंधन में जगह नहीं दी गई। उन्होंने कहा- इस बात का पछतावा है कि हमें महागठबंधन में जगह नहीं मिली। वामपंथ और राजद का बहुत पुराना रिश्ता है, दोनों ने धर्मनिरपेक्षता के लिए मिलकर लड़ाई लड़ी है। बेगूसराय में हम अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बाकी जगहों पर हम महागठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। क्योंकि हमें बीजेपी को हराना है। सीताराम येचुरी जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जो बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर बीजेपी नेता गिरिराज सिंह और राजद उम्मीदवार तनवीर हसन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि इस चुनाव में एक ही मुद्दा है, वह है मोदी को हराना।उन्होंने कहा- पहले पांच साल में, हर किसी के लिए एक बहुत गंभीर स्थिति आ गई है, जीवन की स्थिति दयनीय है। हमें बीजेपी को हराना है। बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं। तीन चरण के मतदान हो चुके हैं। अन्य सीटों पर 29 अप्रैल, छह मई, 12 और 19 मई को मतदान होगा। वोटों की गिनती 23 मई को होगी।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • मुंबई, 24 अप्रैल । राजद्रोह कानून हटाने के कांग्रेस के चुनावी वादे को लेकर राहुल गांधी की आलोचना करते हुए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि ऐसे लोगों को चुनाव नहीं लडऩे देना चाहिए। शिवसेना उम्मीदवार श्रीकांत शिंदे के लिए मुंबई के समीप कल्याण में एक रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि विपक्ष केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक हिंदुत्व संगठन को बाहर करने में ही इच्छुक है।
    उन्होंने कहा, ‘‘जो कोई राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल है उसे बख्शा नहीं जाए। उन्हें फांसी पर लटका दिया जाए।’’
    इसी तरह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक अन्य रैली में कहा कि भाजपा और शिवसेना अगर आपस में लड़ते रहते और एक साथ नहीं आती, तो दोनों पार्टियां देश की दुश्मन बन जाती।
    शिवसेना के लोकसभा उम्मीदवार राजन विचारे के लिए वोट की अपील करते हुए ठाणे जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि मौजूदा सरकार ने सीमा पर जवानों को मजबूत किया और उन्होंने पूछा कि विपक्ष क्यों सर्जिकल और हवाई हमलों पर सवाल कर रहा है। ठाकरे ने कहा, ‘अगर हम (भाजपा-शिवसेना) लड़ते रहते तो हम अपने ही देश के दुश्मन बन जाते। (भाषा)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल । चौकीदार चोर वाले बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें अफसोस जताने के बाद भी कम होती नहीं दिख रही हैं। राहुल गांधी की टिप्पणी के खिलाफ बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने अवमानना याचिका दायर की, जिस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मीनाक्षी लेखी की तरफ से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया राहुल गांधी ने अपने बयान पर सिर्फ खेद जताया है, माफी नहीं मांगी है। जिसके बाद कोर्ट ने राहुल गांधी को अवमानना नोटिस जारी कर दिया।
    राफेल डील में गड़बड़ी के आरोप वाली पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है। राहुल ने यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दिया था। वो अपने भाषणों में पीएम मोदी को चौकीदार बताते हुए उन पर चोरी का इल्जाम लगाते रहे हैं। लेकिन कोर्ट ने भी मान लिया कि चौकीदार चोर है वाले बयान पर आपत्ति के बाद राहुल को नोटिस भेजा गया था। जिस पर राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए बताया कि उन्हें अपने बयान पर अफसोस है।
    हालांकि, राहुल के इस जवाब से बीजेपी नाखुश दिखी। बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने इस संबंध में कोर्ट में अपील की जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। लेखी की तरफ पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि राहुल ने माफी नहीं मांगी है, अफसोस जताया है। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अभी तक उन्होंने राहुल गांधी का जवाब नहीं पढ़ा है। इसक बाद सीजेआई ने मीनाक्षी लेखी के वकील को कहा कि आप पढ़ के बताइए।
    इस पर मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि राहुल गांधी ने अपनी टिप्पणी पर खेद जताया है। राहुल गांधी ने माना है कि उन्होंने गलती की है, लेकिन राहुल गांधी ने अपने बयान पर केवल खेद जताया है माफी नही मांगी है।
    इस दौरान सीजेआई ने मुकुल रोहतगी से ये भी पूछा कि चौकीदार कौन है? इस पर मुकुल रोहतगी ने बताया, राहुल गांधी ने पूरे देश को कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी, चौकीदार, चोर हैं।
    वहीं, दूसरी तरफ राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि राहुल गांधी ने खेद जताया है, लेकिन जानबूझकर कर ये मामला उठाया जा रहा है क्योंकि अभी लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं।
    बहरहाल, सुनवाई के बाद कोर्ट ने राहुल गांधी को अवमानना नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही अवमानना केस की सुनवाई के लिए मंगलवार (30 अप्रैल) का दिन तय किया। इसी दिन राफेल विवाद पर दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। (आजतक)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल । दिल्ली की उत्तर पश्चिमी सीट से टिकट कटते ही बीजेपी सांसद उदित राज ‘चौकीदार’ से डॉक्टर बन गए। दोपहर में उत्तर पश्चिमी सीट से सूफी सिंगर हंस राज हंस के नाम का ऐलान होते ही उदित राज ने अपने ट्विटर हैंडल में नाम के आगे से चौकीदार हटा लिया। इससे पहले जब पीएम मोदी ने ट्विटर पर अपने नाम के आगे चौकीदार लगाया तो सभी बीजेपी नेताओं के साथ-साथ समर्थकों में भी नाम के आगे चौकीदार लगाने की होड़ मच गई थी।  
    पिछले कई दिनों से उदित राज को टिकट मिलने पर संशय था। बीजेपी ने दिल्ली की 7 में से 6 सीटों पर टिकट का ऐलान कर दिया, लेकिन अंतिम वक्त तक उदित राज की सीट पर पत्ते नहीं खोले। अब नामांकन की समय सीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले बीजेपी ने जैसे ही हंस राज हंस के नाम का ऐलान किया, वैसे ही उदित राज ने ट्विटर पर अपना नाम बदल लिया। अब वे फिर से डॉक्टर उदित राज हो गए हैं।
    इससे पहले सुबह ही उन्होंने बीजेपी को खुली धमकी दी थी कि अगर अगर बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो वे पार्टी छोड़ देंगे। इसके साथ ही वे आज ही नामांकन फॉर्म भरेंगे। उन्होंने कहा कि मैं किस पार्टी में जाऊंगा, इसका खुलासा बाद में करूंगा।
    आज तक से बातचीत में उदित राज ने कहा था कि पार्टी मुझे छोड़ रही है। देशभर में मेरा संगठन है, मैं दलित चेहरा हूं। अरविंद केजरीवाल ने मुझे पहले ही आगाह करते हुए बता दिया था कि बीजेपी मुझे टिकट नहीं देगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी एक बार संसद में कहा था कि आप गलत पार्टी में हैं।
    उन्होंने कहा कि मैं किस पार्टी में जाऊंगा, इसका बाद में खुलासा करूंगा। अभी मैंने अपने समर्थकों को बुलाया है। माना जा रहा कि उदित राज अब बीजेपी छोड़ सकते हैं।  
    अपना टिकट कटने की आशंका के चलते ही उदित राज ने अपनी पार्टी से उम्मीदवारी को लेकर संशय समाप्त करने को कहा था। पार्टी की ओर से कोई संकेत न मिलने पर उदित रज ने साफ कर दिया है कि पार्टी उन्हें टिकट नहीं देती है तो वह बीजेपी को अलविदा कह देंगे।  
    अपनी इंडियन जस्टिस पार्टी का बीजेपी में विलय करने वाले उदित राज का राजनीतिक जीवन काफी दिलचस्प रहा है। उत्तर प्रदेश के रामनगर में जन्मे उदित राज ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्थित छ्वहृ से पढ़ाई पूरी की है। अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के अधिकारों को लेकर सक्रिय रहने वाले उदित राज कॉलेज के समय से ही मुखर रहे हैं।
    उदित राज 1988 में भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुने गए और दिल्ली में आयकर विभाग में उपायुक्त, संयुक्त और अतिरिक्त उपायुक्त के पदों पर अपनी सेवाएं दीं। हिंदू धर्म की जाति व्यवस्था के आलोचक उदित राज ने 2001 में बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। अपनी राजनीतिक सोच को मूर्त रूप देने के लिए 24 नवंबर 2003 को सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर उन्होंने इंडियन जस्टिस पार्टी का गठन किया था। (आजतक)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • पटना, 23 अप्रैल । बिहार की पटना साहिब सीट से कांग्रेस प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा का पार्टी में ही विरोध शुरू हो गया है। शत्रुघ्न सिन्हा को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव का, दलाल, बताते हुए कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से उनकी (शत्रुघ्न) उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की।
    कांग्रेस प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सिन्हा को आरजेडी के इशारे पर कांग्रेस उम्मीदवार बनाया गया और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा, पार्टी नेता शक्ति सिंह गोहिल और कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह द्वारा इस सीट को बेच दिया गया।
    विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शत्रुघ्न ने लखनऊ में कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद कृष्णम के खिलाफ प्रचार किया है। कोई स्टार प्रचारक ही अपने प्रत्याशी के खिलाफ कैसे प्रचार कर सकता है। यह पार्टी की आचार संहिता का उल्लंघन है। कार्यकर्ताओं ने शत्रुघ्न के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, कांग्रेस प्रवक्ता एचके वर्मा ने आशंका जताई कि कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों द्वारा उनकी पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में भेजा गया था। कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी का विरोध नहीं कर रहा है।
    इससे पहले, रविवार को शत्रुघ्न सिन्हा को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में उस समय घेर लिया गया था, जब एक बैठक को संबोधित करने के दौरान उन्होंने कहा था कि जब मैं किसी के साथ दोस्ती करता हूं तो मैं अपनी वफादारी नहीं बदलता।
    शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद हैं और 2014 में वह बीजेपी के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीते थे। इस बार वह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। वहीं, उनकी पत्नी पूनम सिन्हा उत्तर प्रदेश के लखनऊ सीट पर कांग्रेस के खिलाफ समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी हैं। (आजतक)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • मुंबई, 23 अप्रैल। एक्टर संजय दत्त भले ही राजनीति से दूर होंगे लेकिन अपनी बहन और कांग्रेस उम्मीदवार प्रिया दत्त को पूरा सपोर्ट कर रहे हैं। संजय दत्त ने सोमवार को मुंबई में प्रिया के चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। बहन के साथ खड़े होकर संजय दत्त ने जनता से वोट की अपील की। 
    संजय दत्त अपने परिवार के बेहद करीब हैं। जब प्रिया दत्त बांद्रा कलेक्टर ऑफिस में लोकसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भरने गई थीं। उस वक्त संजय दत्त अपनी फिल्म कलंक के प्रमोशन और शूटिंग से टाइम निकालकर प्रिया के साथ गए थे। 
    प्रिया दत्त नामांकन से पहले बप्पा के दरबार में आशीर्वाद लेने पहुंची थीं। इसके बाद प्रिया दत्त अपने भाई संजय दत्त के घर पहुंचीं थीं। 
    साल 2019 में प्रिया दत्त कांग्रेस के टिकट पर मुंबई नॉर्थ सेंट्रल से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। प्रिया दत्त का मुकाबला मौजूदा सांसद पूनम महाजन से है। वहीं बसपा ने भी इस सीट पर इमरान मुस्तफा खान को मैदान में उतारा है। प्रिया ने नामांकन के दिन एक इमोशनल पोस्ट लिखकर एक तस्वीर भी साझा की थी, उन्होंने लिखा, उस दिन को याद कर रही हूं जब पिता, स्व। श्री सुनील दत्त जी, ने 1984 में अपने पहले चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरा था। यह परिवार के लिए एक बड़ा दिन था क्योंकि पिताजी पहले कभी राजनीति से जुड़े नहीं थे।
    सुनील दत्त के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को बेटी प्रिया दत्त आगे बढ़ा रही हैं। साल 2014 के चुनाव में प्रिया दत्त चुनाव हार गयी थीं। (आजतक)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • मुंबई, 23 अप्रैल । हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता शाहरुख खान ने कहा है कि भारत में विविधतापूर्ण होना अच्छी बात है, लेकिन विभाजनकारी नहीं। कांग्रेस नेता और वृत्त चित्र निर्माता यास्मीन किदवई ने सोमवार को एक वीडियो क्लिप साझा किया था। उसी में शाहरुख खान ने ‘भारत के विचार’ विषय पर बोलते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश की विविधतापूर्ण संस्कृति की तुलना सुंदर चित्र से की जिसमें सभी रंग सौहार्दपूर्ण तरीके से एक साथ मौजूद हैं।
    किदवई की 29 सेकंड की क्लिप में खान ने कहा, ‘विविधतापूर्ण होना अच्छी बात है, विभाजनकारी होना (अच्छी बात) नहीं है। जिस तरह से कला का कोई धर्म नहीं होता, मुझे लगता है कि हमारे देश का कोई धर्म नहीं है और वे सभी एकसाथ मिल गए हैं।’ उधर, कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल पर भी इस वीडियो को साझा किया है। ट्वीट में कहा गया कि शाहरुख खान भी वही बात कह रहे हैं जो कांग्रेस पार्टी कई साल से कह रही है कि भारत एक राष्ट्र है जिसका गुण इसकी विविधता है। (पीटीआई)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के लिए आखिरी सेकंड तक तैयार रहने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि वह बीजेपी को हराने के लिए दिल्ली में 4+3 के फॉम्र्यूले पर आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने को आखिरी सेकंड तक तैयार रहेंगे लेकिन अरविंद केजरीवाल को हरियाणा में तालमेल की शर्त छोडऩी होगी।  
    राहुल ने कहा कि दिल्ली के लिए 4+3 का फॉम्र्यूला खुद केजरीवाल ने ही दिया था। शुरू में हमारी पार्टी के लोग इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे, फिर जब हमने उनको राजी किया, तब केजरीवाल ने हरियाणा की शर्त जोड़ दी। हरियाणा की शर्त हमें मंजूर नहीं। यह पूछे जाने पर कि क्या नाम वापसी की समय सीमा तक भी गठबंधन की उम्मीद रखी जाए? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हम तो आखिरी सेकंड तक की बात कह रहे हैं। जिस वक्त अरविंद केजरीवाल हरियाणा की शर्त छोड़ देंगे, उसी वक्त गठबंधन हो जाएगा। 

    प्रियंका गांधी के मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लडऩे की संभावना पर राहुल ने कहा कि इस बारे में पार्टी का फैसला हो चुका है, लेकिन फैसला क्या हुआ, इस पर हम अभी सस्पेंस बनाकर रखना चाहते हैं। यूपी में महागठबंधन के साथ अपने रिश्तों पर राहुल ने कहा कि हम तो वहां भी गठबंधन चाहते थे लेकिन वे लोग ही तैयार नहीं हुए। हमें चुनाव तो लडऩा ही है लेकिन हमने प्रियंका से कहा है कि यूपी में जहां भी कांग्रेस के उम्मीदवार कमजोर हैं, वहां एसपी-बीएसपी उम्मीदवारों को नुकसान नहीं होना चाहिए। हमारा लक्ष्य बीजेपी को हराना है। जहां भी और जिस भी तरीके से बीजेपी को हराना होगा, हम हराएंगे। प्रधानमंत्री से जुड़े अपने चर्चित नारे के बारे में राहुल ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट का बहुत सम्मान करते हैं, हम उसे लेकर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन वह नारा लोगों के दिल में घर कर चुका है। हमने जो नारा दिया है, उसमें सचाई है। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल। मशहूर अभिनेता सनी देओल आज बीजेपी में शामिल हो गए हैं। सनी ने कुछ दिन पहले बीजेपी चीफ अमित शाह से पुणे एयरपोर्ट पर मुलाकात की थी। इस तस्वीर के वायरल होने के बाद से ही ऐसी खबरें थीं कि सनी बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक सनी पंजाब के गुरदासपुर से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। 
    सनी के पिता धर्मेंद्र भी बीजेपी के टिकट पर बीकानेर से सांसद रह चुके हैं। सनी ने निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। निर्मला ने सनी देओल की फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी छवि राष्ट्रवाद के प्रतीक की रही है। 
    सनी ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा, मेरे पापा अटलजी के साथ जुड़े थे, आज मैं यहां नरेंद्र मोदी जी से जुडऩे आया हूं। मैं चाहता हूं कि आगे 5 साल भी वहीं रहें। हमें और आगे जाना है। जो यूथ हैं उन्हें मोदी जैसे लोगों की जरूरत है। इस परिवार से जुडक़र मैं जो कर सकता हूं वह जरूर करूंगा। हर वक्त काम करके दिखाऊंगा।
    पंजाब में बीजेपी-शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन रूप में चुनाव लड़ रही है और सूत्रों के अनुसार गुरदासपुर सीट से गठबंधन की ओर से संयुक्त रूप से सनी देओल को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। सनी देओल की मां हेमा मालिनी के अलावा उनके पिता धर्मेंद्र भी साल 2004 में राजस्थान की बीकानेर सीट से सांसद रह चुके हैं। 
    चुनाव चाहे लोकसभा के हों या राज्यसभा या विधानसभा के, किसी त्योहार से कम नहीं होते। हर बार ऐसी यादें भी रह जाती हैं जो चुनावी इतिहास के पन्नों पर दर्ज हो जाती हैं।  (नवभारतटाईम्स)

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Posted Date : 23-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल । दिल्ली की नॉर्थ-वेस्ट सीट से बीजेपी ने सिंगर हंसराज हंस को टिकट दिया है। इस सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद उदित राज का टिकट काट दिया है। बताया जा रहा है कि हंसराज हंस आज ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे। हंसराज हंस ने 2016 में बीजेपी ज्वॉइन किया था।

    सोमवार तक बीजेपी ने दिल्ली की सात में से छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों का ऐलान किया था। उत्तर-पश्चिम सीट को लेकर संशय बरकरार था। इस सीट से बीजेपी के सांसद उदित राज ने कहा था कि पार्टी इस संशय को दूर करे। अगर पार्टी मुझे टिकट नहीं देगी तो मैं पार्टी छोड़ दूंगा। उदित राज की इस धमकी को दरकिनार करते हुए बीजेपी ने हंस राज हंस को प्रत्याशी बना दिया है।
    सिंगर हंसराज हंस ने अपने सियासी सफर की शुरुआत जनवरी, 2009 में शिरोमणी अकाली दल से की थी। वग जालंधर सीट से चुनाव भी लड़े थे, लेकिन हार गए थे। 18 दिसंबर, 2014 को हंसराज हंस ने अकाली दल छोडक़र फरवरी, 2016 में कांग्रेस ज्वॉइन कर लिया है। हालांकि, थोड़े दिन बाद हंसराज हंस का कांग्रेस से मोह भंग हो गया और 10 दिसंबर 2016 को उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन कर लिया।
    दिल्ली में बीजेपी ने अपने दो मौजूदा सांसदों का टिकट काटा है। चांदनी चौक से डॉ. हर्षवर्धन, उत्तरी पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी, पश्चिमी दिल्ली से प्रवेश वर्मा, दक्षिणी दिल्ली से रमेश बिधुड़ी, नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी, पूर्वी दिल्ली से गौतम गंभीर और अब उत्तर पश्चिम से हंसराज हंस को प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी ने पूर्वी दिल्ली से सांसद महेश गिरि और उत्तर पश्चिम से सांसद उदित राज का टिकट काट दिया है।
    टिकट कटने के बाद उदित राज ने ट्विटर पर अपने नाम के आगे से चौकीदार हटा दिया है। उन्होंने लिखा, मेरे टिकट का नाम देरी होने पर पूरे देश में मेरे दलित समर्थकों में रोष है और जब मेरी बात पार्टी नहीं सुन रही तो आम दलित कैसे इंसाफ पायेगा। (आजतक)

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