राजनीति

Previous12Next
Posted Date : 22-Apr-2018
  • यह पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं देश के प्रति वफादारी है
    पटना, 22 अप्रैल। भाजपा से नाराज चल रहे और पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि वह उन्हें निष्कासित कर दिखाए। साथ ही कहा कि क्रिया की प्रतिक्रिया होगी। पटना  में शनिवार को आयोजित अपने संगठन राष्ट्र मंच के एक अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर वे लोग (अपनी पार्टी) पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सोच रहे थे। वे इतने असहाय हैं और उनकी स्थिति इतनी दयनीय है कि इसके लिए मुहुर्त देख रहे थे। शत्रुघ्न ने कहा कि वे जब चाहें ऐसा निर्णय ले सकते हैं पर न्यूटन के तीसरे नियम को याद रखें कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
    शत्रुघ्न ने कहा कि भाजपा में उसे छोडऩे के लिए शामिल नहीं हुए थे और हमेशा कहता रहा हूं कि यह मेरी पहली और आखिरी पार्टी है लेकिन वे अगर मुझे छोडऩा चाहें तो छोड़ दें। उन्होंने कहा कि यह पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं देश के प्रति अपनी वफादारी है, हमें भी यह सिखाया गया है कि व्यक्ति से बड़ा दल होता और दल से बड़ा देश। शत्रुघ्न ने सभागार में मौजूद लोगों से पूछा कि वे जो कर रहे हैं क्या वह देश हित में नहीं है।
    उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश में बेरोजगारी बढ़ी और छोटे- छोटे व्यापार और कारखाना बंद हो गए तो उसके बारे में बात किया जाना जनहित में है या नहीं? इस अवसर पर उन्होंने तेजस्वी यादव की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यशवंत जब भाजपा के अध्यक्ष थे तभी उन्हें पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर पेश किया गया था और पूरे देश में मुझे सभाओं को संबोधित करने का अवसर प्राप्त हुआ। (भाषा)

    ...
  •  


Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर काम चुनाव को ध्यान में रखकर करते हैं तथा पिछले चार वर्षों में उनका हर दिन चुनावों की चिंता में ही बीता है।
    पार्टी महासचिव अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट को पोस्ट करते हुए ट्वीट किया, प्रधानमंत्री ने अब तक जितने झूठ बोले हैं उनमें यह तब सबसे बड़ा झूठ है। अब तक के कार्यकाल में उनका हर दिन चुनावों की चिंता में बीता है। उनके सभी भाषण और कार्यक्रम चुनाव से संबंधित होते हैं।
    उन्होंने कहा, काश, प्रधानमंत्री ने वोटों को ध्यान में रखे बिना कुछ किया होता। प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिवसीय लोकसेवा दिवस समारोह के समापन के मौके पर कहा था कि मैं चुनाव के लिए काम नहीं करता।Óमोदी ने यह भी कहा था कि कहा कि जन भागीदारी भारत जैसे देश में सफलता की आधारशिला है।
    गहलोत ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि लोगों में, बैंकिंग प्रणाली को लेकर यह विश्वास पैदा किया जाना चाहिए कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग नहीं होगा। कांग्रेस नेता ने कहा, लोगों में अपनी सरकार और बैकिंग प्रणाली को लेकर विश्वास पैदा होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा लोगों का विश्वास बनाए रखने में विफल रहे हैं।  (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल। तेलुगु फिल्मों के अभिनेता और अब राजनेता नंदमुरी बालाकृष्ण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। बालाकृष्ण ने नरेंद्र मोदी को गद्दार और नमकहराम कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अब भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ युद्ध करने का समय आ चुका है।
    नंदमुरी बालाकृष्ण अनंतपुर जिले के हिंदूपुर से विधायक हैं। वे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बहनोई भी हैं। शुक्रवार को वे विजयवाड़ा में थे जहां मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ 12 घंटे का उपवास रखा था। इस दौरान बालाकृष्ण ने भाजपा और मोदी सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। हालांकि वे बोलने की मर्यादा पार करते दिखे।
    बैंगलोर मिरर के मुताबिक बालाकृष्ण ने कहा, हमने सब्र के साथ चार साल तक इंतजार किया है और सभी विकल्पों (साम, दाम, और भेद) को आजमाया है। अब हमारे पास केवल दंड देने का विकल्प बचा है। हमें (मोदी सरकार और भाजपा को) तेलुगु लोगों की ताकत दिखाएंगे और उन्हें सबक सिखाएंगे। बालाकृष्ण ने कहा कि अब आंध्र के मुद्दे पर केंद्र से भीख नहीं मांगी जाएगी बल्कि सीधे जंग की जाएगी।
    खबर के मुताबिक बालाकृष्ण ने नरेंद्र मोदी पर आंध्र प्रदेश में घटिया राजनीति करने और उत्तर व दक्षिण भारत में दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मोदी, ये आपके लिए चेतावनी है। आप किसी बंकर में जाकर छुप सकते हैं लेकिन भारत माता आपको नहीं छोड़ेगी। अगर आप लोगों के बीच गए तो वे आपको मारेंगे और आप अपनी जिंदगी के लिए भागते फिरेंगे। बालाकृष्ण ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की भाजपा को आंध्र प्रदेश या दक्षिण भारत में कहीं भी एक सीट भी नहीं मिलेगी।  (डेक्कन क्रॉनिकल)

    ...
  •  


Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । लंबे समय से बीजेपी से नाराज चल रहे सीनियर लीडर और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ दी है। वह लंबे समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे। यशवंत सिन्हा ने कहा अपने फैसले का ऐलान करते हुए कहा, मैं बीजेपी के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करने का ऐलान करता हूं। 
    साल 1998 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री थे। यही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 1990 से 1991 तक चली सरकार में भी वह वित्त मंत्री थे। 
    सिन्हा ने कहा कि मैं आज के बाद किसी दल के साथ नहीं रहूंगा न ही किसी भी राजनीतिक दल से कोई रिश्ता नहीं रहेगा। आज देश में लोकतंत्र खतरे में है जिन लोगों ने लोकतंत्र को खतरे में डाला उन ताकतों को हम मटियामेट कर देंगे। उन्होंने कहा कि पटना मेरा शहर है। आज से चार साल पहले ही मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं। मैंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया है।
    ऐसे में कुछ लोगों ने समझा कि मेरा दिल भी धड़कना बंद कर दिया है लेकिन जब देश की बात आएगी तो मैं बढ़ चढ़कर भाग लूंगा। देश के सवाल पर ही मैंने राष्ट्र मंच का निर्माण किया है और ये मंच राजनितिक मंच नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश की हालात चिंताजनक है ऐसे में अगर आज हम चुप रहे तो आनेवाले पीढियां दोष देंगी।
    यशवंत ने कहा कि बिहार ने बड़े आंदोलन पैदा किये हैं। केंद्र सरकार पर यशवंत सिन्हा ने हमला करते हुए कहा कि संसद का बजट सत्र इतना छोटा कभी नहीं रहा है लेकिन भारत सरकार ने नियोजित ढंग से संसद को नहीं चलने दिया। गुजरात चुनाव के कारण सत्र को छोटा कर दिया गया। सत्र नहीं चलने से सरकार बहुत खुश थी। 
    इस अधिवेशन में भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, शरद यादव एवं जदयू के असंतुष्ट नेता उदय नारायण चौधरी भी शिरकत करने वाले हैं।
    कार्यक्रम में कांग्रेस, राजद, आम आदमी पार्टी एवं सपा समेत भाजपा-जदयू के असंतुष्ट नेताओं को भी बुलाया गया है। यशवंत सिन्हा इससे पहले भी लगातार बीजेपी पर हमला बोलते रहे हैं ऐसे में पटना में उनकी अगुवाई में बुलाई गई यह बैठक भविष्य के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य को लेकर काफी अहम मानी जा रही है।
    यही नहीं मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले और जीएसटी लागू करने के तरीके को लेकर भी उन्होंने तीखा हमला बोला था। 
    सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्टप्त मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा। शनिवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा ने यह फैसला लिया है।(नवभारत टाईम्स)

    ...
  •  


Posted Date : 20-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 20 अप्रैल। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी नेता एसवीई शेखर वेंकटरमण द्वारा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट से लोगों में गुस्सा है, जिसमें उन्होंने उस महिला पत्रकार का अपमान किया है, जिसने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा गाल थपथपाए जाने का कड़ा विरोध किया था। इस मामले में राज्यपाल महिला पत्रकार लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम से माफी मांग चुके हैं, लेकिन एसवीई शेखर वेंकटरमण ने अपने पेज पर पोस्ट किया कि दरअसल, राज्यपाल को उस महिला को छूने के बाद अपने हाथ फिनाइल से धोने चाहिए थे...।
    हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को अपने फेसबुक पेज से डिलीट कर दिया, लेकिन उन्होंने सभी महिला पत्रकारों को अपमान करने वाली अपनी पोस्ट के लिए माफी नहीं मांगी।
    चेन्नई के पत्रकार शेखर वेंकटरमण तथा भाजपा राष्ट्रीय सचिव एच राजा के खिलाफ पार्टी के राज्य मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। एच राजा पर भी पत्रकारों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है।
    अब डिलीट की जा चुकी पोस्ट में कहा गया था कि महिला पत्रकार का उद्देश्य राज्यपाल तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करना था...इतना ही नहीं, शेखर वेंकटरमण की पोस्ट में यहां तक कहा गया था, हालिया शिकायतों से जाहिर है, वे (पत्रकार) रिपोर्टर और एंकर तब तक नहीं बन सकती हैं, जब तक वे बड़े लोगों के साथ सो न लें... अनपढ़ बेवकूफ भद्दे लोग... तमिलनाडु मीडिया में मोटे तौर पर यही हैं... यह महिला भी अपवाद नहीं है...
    इस पोस्ट में सेक्स-फॉर-डिग्री घोटाले को लेकर सवाल खड़े करने के लिए भी मीडिया को निशाने पर लिया गया था, जिसमें एक कॉलेज प्रोफेसर पर आरोप लगा था कि वह छात्राओं पर बेहतर नंबरों तथा पैसे के लिए अधिकारियों के साथ संबंध बनाने का दबाव डाल रही थी। उसी प्रोफेसर ने राज्यपाल से ताल्लुक होने का दावा किया था, जिन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर देकर इसका खंडन किया था। जब लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यपाल से इस बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने जवाब देने की जगह लक्ष्मी का गाल थपथपा दिया था।
    शेखर वेंकटरमण द्वारा शेयर की गई पोस्ट में कहा गया था, यूनिवर्सिटियों से ज़्यादा यौन शोषण तो मीडिया में होता है... और यही लोग अब गवर्नर से सवाल कर रहे हैं...
    78-वर्षीय गवर्नर ने भी महिला पत्रकार से माफी मांगते वक्त अजीबोगरीब तर्क दिया था। उन्होंने कहा था, मुझे (आपका) सवाल अच्छा लगा... इसलिए, तारीफ करने के उद्देश्य से मैंने उस तरह आपका गाल थपथपाया था, और आपको अपनी पोती सरीखा समझा था...दादाजी की तरह गाल थपथपाने वाले दावे को नाकबूल करते हुए लक्ष्मी ने कहा कि उन्हें माफी मंज़ूर है, भले ही वह उनके तर्क से सहमत नहीं हैं।
    इससे पहले, लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम ने गुस्से में ट्वीट किया था, कई बार अपना चेहरा धोया है... अब भी उस एहसास से छुटकारा नहीं मिला है... श्रीमान गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित, मैं इतना ज्यादा आंदोलित और गुस्से में हूं...।  (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 20-Apr-2018
  • बैंगलुरू, 20 अप्रैल । कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चरण में मतदान होना है और उससे पहले सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। यहां तक कि राजनीतिक विरोधियों से भी हाथ मिलाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी और जनता दल-सेकुलर (जद-एस) के बीच कुछ सीटों पर हुआ गोपनीय समझौता इसकी पुख्ता मिसाल हैं।
    सूत्रों के अनुसार, दो अहम सीटों पर दोनों दलों के बीच गोपनीय समझौता हुआ है। ये हैं- चामुंडेश्वरी और वरुणा। इनमें से चामुंडेश्वरी से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि वरुणा से उनके बेटे यतींद्र को कांग्रेस ने टिकट दिया है। चामुंडेश्वरी जद-एस के लिए कितनी प्रतिष्ठापूर्ण है इसका अंदाज इससे ही लग सकता है कि उसकी ओर से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को खुली चुनौती दी गई थी कि उनमें हिम्मत है तो वे यहां से चुनाव लड़ कर दिखाएं। जद-एस की चुनौती मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर चुके हैं।
    लिहाजा अब बताया जाता है कि जद-एस ने भी चामुंडेश्वरी में सिद्धारमैया को हराने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए उसने भाजपा के साथ रणनीतिक समझौता किया है। इसके तहत भाजपा चामुंडेश्वरी में जद-एस की मदद कर सकती है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस सीट पर न सिर्फ कमजोर प्रत्याशी उतार सकती है बल्कि जीत के लिए भी ज्यादा जोर नहीं लगाएगी। बदले में जद-एस इसी तरह की मदद भाजपा प्रत्याशी को वरुणा में देगी। वरुणा से सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र से मुकाबले के लिए भाजपा बीएस येद्दियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र को उतार सकती है।
    यहां यह भी बता दें कि चामुंडेश्वरी की तरह वरुणा सीट भी सिद्धारमैया के लिए उतनी ही अहम है। वे 2013 के चुनाव में इसी सीट से जीतकर मुख्यमंत्री बने थे। संभवत: इसी के मद्देनजर भाजपा और जद-एस ने उन्हें इन दोनों सीटों पर मिलकर घेरने की योजना बनाई है। भाजपा और जद-एस के सूत्र नाम न छापने की शर्त पर इस रणनीतिक समझौते की पुष्टि करते हैं। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव भी मानते हैं, हां, हमारे पास खबर है कि दोनों विपक्षी पार्टियों ने इन दो सहित कुछ सीटों पर रणनीतिक साझेदारी की है। लेकिन वे फिर भी सफल नहीं होंगी। (हिंदुस्तान टाईम्स)

    ...
  •  


Posted Date : 19-Apr-2018
  • राकेश मोहन चतुर्वेदी
    नई दिल्ली, 19 अप्रैल । राजस्थान और मध्य प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी ने दोनों राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदलकर नया दांव चला है। असल में इन चुनावी राज्यों में संगठन के आंतरिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं में जोश की कमी को दूर करने के लिए बीजेपी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्षों को बदलने का फैसला किया है। इसके अलावा दोनों राज्यों में मौजूदा सरकार से असंतोष को भी इसके जरिए साधने की कोशिश की गई है। मध्य प्रदेश में जबलपुर के सांसद और लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर हाईकमान ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी एक तरह से नियंत्रित करने का फैसला लिया है।
    मध्य प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार चौहान को शिवराज का करीबी माना जाता था। इसके अलावा बीजेपी राजस्थान और आंध्र प्रदेश में भी जल्दी ही नए अध्यक्ष नियुक्त करने वाली है। यही नहीं कई और राज्यों में भी ऐसे ही फैसले हो सकते हैं। आंध्र प्रदेश के स्टेट चीफ के. हरिबाबू ने भी मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि बुधवार को नंद कुमार चौहान और राजस्थान के अशोक परनामी ने इस्तीफा दे दिया। 
    खासतौर पर राजस्थान में बीजेपी वसुंधरा राजे पर नियंत्रण करने की कोशिश में है और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे ही चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अशोक परनामी का इस्तीफा लिया गया है। हालांकि वसुंधरा राजे कैंप के लिए परनामी को पद से हटाया जाना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। परनामी, चौहान और हरिबाबू को बीजेपी अब अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति में जगह देने वाली है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेश अध्यक्षों को मुख्यमंत्री का सरपरस्त माना जाता रहा है, जो आमतौर पर स्वतंत्र स्टैंड नहीं लेते थे। ऐसे में हाईकमान ने संगठन को सीएम की छत्रछाया से बाहर निकालते हुए नए अध्यक्षों की नियुक्ति का फैसला लिया है, जो स्वंतत्र रूप से फैसले ले सकें। 
    मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिर तक चुनाव होने हैं। मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति में जातिगत समीकरण खासे हावी रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने ठाकुर नेता नंद कुमार चौहान को हटाकर ओबीसी लोध नेता राकेश सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद पिछड़ी जाति के हैं और इस फैसले से पार्टी ने ओबीसी बिरादरियों को लुभाने के संकेत दिए हैं। 
    मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रहे नरेंद्र सिंह तोमर राजपूत समुदाय से आते हैं। बीजेपी हाईकमान विधानसभा चुनाव में उन्हें कैंपेन कमिटी का चीफ बना सकता है। इसके जरिए पार्टी जातीय संतुलन साधने का काम करेगी। 
    राजस्थान में बीजेपी सांसद ओम बिड़ला और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मीणा समुदाय के किसी नेता को भी इस बार मौका दिया जा सकता है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में कापू समुदाय के नेता को मौका दिया जा सकता है या फिर एनटी रामाराव की बेटी डी. पुरंदेश्वरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके जरिए बीजेपी तेदेपा के मुखिया चंद्रबाबू नायडू से मुकाबला करेगी, जो पुरंदेश्वरी के पति हैं। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 18 अप्रैल। बीजेपी शासित दो राज्यों में पार्टी की ओर से बड़े बदलाव किए गए हैं। राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष अशोक परनामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं राकेश सिंह को बीजेपी ने मध्य प्रदेश का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
    राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष अशोक परमानी ने किस वजह से इस्तीफा दिया है इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेज दिया है। हालांकि इस पद से इस्तीफे के बाद बीजेपी अध्यक्ष ने सांसद अशोक परनामी, नंद कुमार सिंह चौहान और डॉ. के हरिबाबू (आंध्र प्रदेश) को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य नियुक्त किया है। 
    वहीं पार्टी की ओर से राकेश सिंह को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राकेश सिंह जबलपुर से बीजेपी के सांसद हैं  और लोकसभा में पार्टी के चीफव्हिप (मुख्य सचेतक) हैं। राकेश सिंह जबलपुर से तीसरी बार सांसद चुनकर आए हैं। उन्होंने नंद कुमार सिंह चौहान का स्थान लिया जो इस पद पर साल 2014 से कार्यरत थे। बीजेपी महासचिव अरुण सिंह ने पार्टी में इस संगठनात्मक नियुक्ति की जानकारी दी।
    मध्य प्रदेश में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष में बदलाव की पहल ऐसे समय में की गई है जब इसी वर्ष राज्य विधानसभा का चुनाव होना है। सूत्रों ने बताया कि भोपाल में मंगलवार की रात प्रदेश बीजेपी की एक महत्वपूर्ण बैठक में राकेश सिंह के नाम को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के संगठन महामंत्री राम लाल मौजूद थे। (आज तक)

    ...
  •  


Posted Date : 18-Apr-2018
  • अगरतला, 18 अप्रैल । त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब का कहना है कि इंटरनेट महाभारत के दिनों में भी हुआ करता था। एक जनसभा को संबोधित को करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि भारत काफी पुराने समय से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है। महाभारत के दिनों में संजय दृष्टिहीन थे, लेकिन वह युद्ध में होने वाली सभी घटनाओं को धृतराष्ट्र को सुना रहे थे। यह इंटरनेट और तकनीक से ही संभव हुआ था। बिप्लब देब ने आगे कहा कि उस समय सैटेलाइट भी हुआ करती थी।
    त्रिपुरा के नए सीएम चुने गए बिप्लब देब को मुख्यमंत्री बने एक माह पूरा हो गया है। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया है, जिससे देश में हर व्यक्ति की इस तक पहुंच हुई है। पीएम मोदी के सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की तारीफ करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि मोदी लोगों के बीच फेसबुक, व्हाटसएप और ट्विटर के इस्तेमाल के लिए भी जाने जाते हैं। बिप्लब देब ने विभिन्न राज्यों के सीएम द्वारा सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट करने की तारीफ भी की।
    बिप्लब देब ने ये बातें अगरतला के प्रगना भवन पीडीएस सिस्टम के एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। त्रिपुरा के नवनियुक्त सीएम ने आगे कहा कि हम लोग की संस्कृति और सभ्यता काफी पुरानी है और हम पुराने समय से ही टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई भारतीयों के बड़ी बड़ी टेक कंपनियों में काम करने की बात कहते हुए बिप्लब देब ने कहा कि कई बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट आदि के पीछे भी भारतीय हैं, जहां वो लोग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं। सीएम ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह एक ऐसे देश में पैदा हुए, जो तकनीक के क्षेत्र में इतना आगे है।
    बिप्लब देब का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पिछले दिनों भाजपा के केन्द्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा था कि चाल्र्स डार्विन की उत्पत्ति की थ्योरी गलत है और इसे बदले जाने की जरुरत है। सत्यपाल सिंह ने कहा कि जब से मनुष्य इस धरती पर देखा गया है, वह हमेशा से ही मनुष्य ही था। जैसा कि कहा या लिखा गया है कि एक एप धीरे-धीरे मनुष्य में तब्दील हुआ, यह गलत है।(जनसत्ता)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 17 अप्रैल । एनडीए सरकार के दो मंत्रियों रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने न्यायपालिका में आरक्षण की वकालत कर मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोनों मंत्रियों ने हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग की है। मंत्रियों का कहना है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए इन्हें मौका मिलना चाहिए। वहीं राम विलास पासवान तो न्यायपालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करने की भी बात कर रहे हैं।
    केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा, उनकी मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन शुरू करने का सही समय है। उन्होंने पटना में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, मैं लोजपा प्रमुख की हैसियत से बोल रहा हूं कि हमें न्यायापालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए। पासवान ने बिहार में निचली और उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण लाने के लिए नीतीश कुमार सरकार की तारीफ भी की।
    वहीं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आजादी के बाद अपवाद ही रहा होगा कि एक आधे जज एससी/एसटी या ओबीसी जज बने हों। उन्होंने कहा कि इसका कारण है जजों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है उसमें एससी/एसटी या ओबीसी छोड़ दीजिए गरीब सवर्ण नौजवान भी चाहे की अपनी मैरिट के दम पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जज बन जाए तो बहुत मुश्किल है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, आजादी के बाद जितने भी लोग अब तक जज हुए हैं उनके परिवार में कोई जज रहा होगा, जमींदार रहा होगा या फिर राजनीतिक पृष्ठभूमि रही होगी। (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 17-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 17 अप्रैल। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र राज्य में 16 रैलियों को संबोधित करने वाले हैं। वह भी आठ दिनों के भीतर। शुरूआत 29 अप्रैल से हो सकती है। खबर है कि इस दिन मोदी दक्षिण कर्नाटक के कोलार और रायचूर में दो रैलियों को संबोधित कर सकते हैं।
    एक मई को प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां बेल्लारी और बेलगावी में होंगी। इसके बाद तीन मई को चामराजानगर और उडुपी में। फिर पांच मई को जमखंडी और बेंगलुरू में, छह मई को कलबुर्गी और हुबली में, सात मई को शिवमोगा और तुमकुरू तथा इसके अगले दिन मेंगलुरू और बेंगलुरू में उनकी रैलियां हो सकती हैं। बताया जाता है कि नौ मई को भी प्रधानमंत्री दो रैलियां करने वाले हैं। लेकिन इनकी जगहें अभी तय नहीं हैं।
    कर्नाटक विधानसभा के लिए 12 मई को वोट डाले जाने हैं। जबकि 15 मई को नतीजों का ऐलान होगा। इस चुनाव के लिए भाजपा अब तक 154 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। जबकि कांग्रेस ने कुल 224 में से 218 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने अभी जिन सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं उनमें वरुणा और चामुंडेश्वरी सीटें भी शामिल हैं। चामुंडेश्वरी से कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जबकि वरुणा से उनके बेटे यतींद्र चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि वरुणा से भाजपा अपने मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी बीएस येद्दियुरप्पा के पुत्र बीवाइ विजयेंद्र को चुनाव लड़ा सकती है।  (डेक्कन क्रॉनिकल)

     

    ...
  •  


Posted Date : 16-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 16 अप्रैल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने कहा कि यदि अयोध्या में राम मंदिर फिर से नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी। भागवत ने पालघर जिले के दहानू में विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
    आरएसएस प्रमुख ने कहा, भारत में मुस्लिम समुदाय ने राम मंदिर नहीं तोड़ा, भारतीय नागरिक ऐसी चीजें नहीं कर सकते। भारतीयों का मनोबल तोडऩे के लिए विदेशी ताकतों ने मंदिरों को तोड़ा, लेकिन आज हम आजाद हैं हमें उसे फिर से बनाने का अधिकार है जिसे नष्ट किया गया था, क्योंकि वे सिर्फ मंदिर नहीं थे बल्कि हमारी पहचान के प्रतीक थे। 
    भागवत ने कहा, यदि (अयोध्या में) राम मंदिर फिर से नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी। इसमें कोई शक नहीं कि मंदिर वहीं बनाया जाएगा जहां वह पहले था। और इसके लिए किसी भी लड़ाई के लिए हम तैयार हैं। राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद उच्चतम न्यायालय में है।
    आरएसएस प्रमुख ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए उन्हें देश के कई हिस्सों में हुई हालिया जातिगत हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। भागवत ने कहा, जिनकी दुकानें बंद हो गईं (जो चुनाव में हार गए) वे अब लोगों को जाति के मुद्दों पर लडऩे के लिए उकसा रहे हैं।
    इससे पहले विश्व हिंदू परिषद के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिवम् कोकजे ने अपनी जिम्मेदारी संभालते ही मंदिर निर्माण को लेकर बयान दिया था। रविवार को उन्होंने कहा था कि विहिप अपने एजेंडे पर कायम है।
    विष्णु सदाशिव कोकजे ने राम मंदिर पर कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर शीघ्र बनेगा। कोकजे ने कहा कि संतों की अगुवाई में भगवान राम का भव्य मंदिर शीघ्र ही न्यायालय के आदेश या कानून बनाकर शीघ्र किया जाएगा और उन्हें पूरा विश्वास है कि वह अपने दायित्व को निभाने में पूरी तरह से कामयाब रहेंगे। (आज तक)

     

    ...
  •  


Posted Date : 15-Apr-2018


  • नई दिल्ली, 15 अप्रैल । केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा सांसद के नए कार्यकाल के लिए रविवार को शपथ ली। जेटली ने संसद में राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के कक्ष में शपथ ली।अरुण जेटली के अलावा भाजपा के अनंत कुमार, राज्य में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी शपथ ली। 
    यांजेटली को दो अप्रैल को सदन का नेता नियुक्त किया गया था लेकिन वह खराब स्वास्थ्य की वजह से शपथ नहीं ले सके थे। वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। किडनी संबंधित बीमारियों से जूझ रहे जेटली को छह अप्रैल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था।  
    गौरतलब है कि 65 साल के जेटली को शुक्रवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स ) में भर्ती किया गया था। वहां दो दिन तक चली जांच पड़ताल के बाद कल उनका डायलिसिस किया गया। उन्हें घर पर नियम-परहेज के साथ रहने की सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है। (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 15-Apr-2018

  • सागर, 15 अपै्रल। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार इन दिनों किसानों का सम्मान करने निकली है। कार्यक्रम का नाम है किसान सम्मान यात्रा। दमोह में भी भाजपा विधायक उमादेवी खटीक किसानों से मिलने निकलीं लेकिन उन्होंने किसानों के सवालों का ऐसा जवाब दिया कि बवाल मच गया। हटा विधानसभा क्षेत्र के बिलाई गांव में विधायक उमा देवी खटीक से जब किसानों ने विकास पर सवाल पूछा तो उन्होंने भड़क कर जवाब दिया कि अभी चुनाव नहीं है, मैं यहां वोट मांगने नहीं आई हूं जो करना है कर लेना।
    दरअसल हटा विधायक उमा देवी खटीक बिलाई में बीजेपी के महत्वाकांक्षी किसान सम्मान कार्यक्रम के तहत किसानों का सम्मान करने गई थीं। यहां लोगों ने उनसे विधानसभा क्षेत्र में विकास ने होने की बात कही तो वे भड़क गईं। गुस्से में विधायक ने कहा कि वे अभी वोट मांगने नहीं आई हैं, अभी चुनाव नहीं है ग्रामीणों को जो करना है कर लें वे स्वतंत्र हैं। 
    ग्रामीणों का कहना है कि दस साल से हटा से विधायक उमा देवी चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में केवल दो बार आई हैं और क्षेत्र में विकास भी नहीं हुआ है। इसीलिए ग्रामीणों में उनके प्रति गुस्सा है। जब विधायक भीड़ पर भड़कीं तो वहां मौजूद किसी शख्स ने मोबाइल से ये वीडियो बना लिया। 
    जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विधायक के सुर बदलने लगे। वीडियो को देख उमा देवी ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों को विकास के बारे में ही बता रही थीं, लेकिन जब लोग चिल्लाने लगे तो उन्होंने ये सब कहा। इसके साथ ही विधायक ने ये भी कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा उसमें कुछ भी गलत नहीं है।  (भोपाल समाचार)

    ...
  •  


Posted Date : 14-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 14 अप्रैल । विश्व हिंदू परिषद् (वीएचपी) में आज 52 साल बाद पहली बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। ऐसे में सबकी नजर प्रवीण तोगडिय़ा पर है। दरअसल वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष तोगडिय़ा और बीजेपी-आरएसएस के बीच संबंध इन दिनों काफी खराब हैं।
    चुनाव से पहले तोगडिय़ा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद में चुनाव करोड़ों लोगों के लिए दुखद और आघात की घटना है। यह सामाजिक, धार्मिक संगठन है, 52 साल में चुनाव नहीं हुआ और आज राजनीतिक चुनाव थोपा जा रहा है। थोपने का कारण है या तो वीएचपी टूट जाए या हिंदुओं की परिषद सरकारी परिषद बन जाए।
    उन्होंने कहा, 80 साल के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। यंग इंडिया में वीएचपी का अध्यक्ष इतनी उम्र का होगा? बीजेपी की ओर से वह गवर्नर भी रह चुके हैं। विष्णु सदाशिव कोकजे वीएचपी का नेतृत्व करेंगे! उन्हें चुनने के लिए चुनाव हो रहा है। कार्यकर्ता के विवेक पर विश्वास है कि वह हिंदुत्व विचारधारा को पराजित नहीं होने देंगे। हालांकि यह सब चुनाव में तय होगा।
    एबीपी न्यूज के मास्टर स्ट्रोक शो में प्रवीण तोगडिय़ा ने कहा, संघ परिवार में 75 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट होता है। आडवाणीजी का रिटायरमेंट हुआ और वीएचपी में 80 साल का शख्स चुनाव लड़े यही आश्चर्य है, 61 साल के राघव रेड्डी हैं। उन्हें चुना जाए। परिवर्तन होता है। मिल बैठकर इसे तय करें। चुनाव पक्रिया पर रेड्डी जी सवाल उठा चुके हैं।
    तोगडिय़ा ने कहा कि चुनाव का परिणाम जो भी आएगा। लेकिन हम अपने संकल्प को आगे बढ़ाते रहेंगे। मोदी सरकार का वादा पूरा नहीं होता है तो फिर हम जनता के बीच निकलेंगे।
    तोगडिय़ा ने अयोध्या में राम मंदिर के मसले पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं ने जिनको सत्ता में लाने का काम किया। ताकि वह हिंदुओं की इच्छा पूरी करेंगे। लेकिन नहीं हुआ।
    उन्होंने कहा, हम 32 साल से वही बात कर रहे हैं जो आज कर रहे हैं। चार साल पहले जब मैं बोलता था कि राम मंदिर, गौरक्षा, कश्मीर में हिंदुओं की वापसी, धारा 370 पर संसद के माध्यम से कानून बनाया जाए तब इन्हें अच्छा लगता था। क्योंकि तब सरकार मनमोहन सिंह की थी। हमारे बोलने से सत्ताधारी मनमोहन सिंह की सरकार को नुकसान हो रहा था। विपक्ष में उनको फायदा हो रहा था। आज जब हम वही बात उठा रहे हैं तो उन्हें लगता है कि हम उनका विरोध कर रहे हैं।
    तोगडिय़ा ने पूछा बीजेपी ने वादे किये थे कि संसद में काननू लाकर मंदिर बनाने के वादे किये थे, किसानों की पूर्ण कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था। क्या चुनावी वादे को छोड़ दिया जाए?
    1982 में आरएसएस, वीएचपी, बीजेपी ने मिलकर राम मंदिर का संकल्प लिया। जनसमर्थन मिला और बहुमत मिला। बीजेपी ने पालमपुर के अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर कहा कि बहुमत मिलने पर राम मंदिर बनाएंगे। हमने चार साल में तीन बार राम मंदिर के मसले पर बिठा कर कहा कि राम मंदिर पर टाइम तय करें। तब भी मुझे कहते थे कि संसद में कानून बनाएंगे। लेकिन छह महीने से कह रहे हैं कि संसद में कानून बनाने की बात करना बंद कर दो। तो हमने कहा कि मैं पद पर रहूं या नहीं मैं अपनी बात नहीं छोड़ूंगा।
    सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी आये। लेकिन 1993 के कानून को देखें तो राम मंदिर के बगल में मस्जिद भी बनेगी। देश में बाबरी मस्जिद बनी तो दंगे होंगे। हिंसा फैल जाएगी। क्या फिर से राम मंदिर के लिए हिंदू जान देगा। ऐसा अब नहीं हो सकता। कितनी बार वह जान देगा।
    तोगडिय़ा ने कहा, 2002 की घटना अयोध्या से लौट रहे 58 कारसेवकों को जलाने की वजह से हुई। जिन्होंने जिंदा जलाया उन्होंने ही दंगों का बीज बोया। अगर कोई हनुमान की पूंछ जलाता है और लंका दहन हो जाता है तो इसके लिए हनुमान जिम्मेदार नहीं हैं। आग लगाने वाला जिम्मेदार है।
    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, 1972 से मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा था। साल 2002 के दंगों में 300 हिंदू पुलिस की गोलियों से मारा गया। सिर्फ मुसलमान नहीं मरे। पचासहजार हिंदू जेल गये। आज भी सैकड़ों जेल में हैं। सत्ता तो आपको (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) मिली।
    चुनाव में क्या होगा स्टैंड?
    प्रवीण तोगडिय़ा ने 2019 में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लडऩे के सवाल पर कहा, अगर प्रवीण तोगडिय़ा को मुख्यमंत्री बनना होता तो 2001 में ही मुख्यमंत्री बन गया होता। हमने समाज को जगाया है। वह अपना वादा पूरा करें। करते हैं तो अच्छा। वरना हिंदुओं की इच्छा पूर्ति के लिए हम निकलेंगे।
    मेरे बड़े भाई, गुजराती में मोटे भाई (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी)। जो 1972 से मेरे घर में आते थे, स्कूटर पर बैठते थे, खाते थे। इमरजेंसी में अंधेरे में दो प्रकाश अटल बिहारी-जय प्रकाश जैसे नारे दिवारों पर लिखते थे। उनको (मोदी) मैंने पत्र लिखा। मैंने उनके वादे याद दिलाए।
    तोगडिय़ा ने कहा कि एफडीआई, आधार, किसान कर्जमाफी, मनरेगा, राम मंदिर सभी मसलों पर मोदी सरकार ने यू-टर्न लिया। मजदूरों के खिलाफ काननू लाए गए। लाखों मजदूर सड़क पर आ गए।
    तोगडिय़ा ने कहा, जो भी मांग है रोजगार, मंदिर, किसान कर्जमाफी जैसे मुद्दे पूरे नहीं हुए तो मैं मोदी जी के साथ खड़ा नहीं रहूंगा। मैं जनता के बीच रहूंगा। मैं चाहूंगा कि सरकार वादे पूरे करे और हमें जनता के बीच जाने का मौका न मिले। अगर हम जनता के बीच गए तो कौन-कहां होगा यह भारत की जनता तय करेगी। (एबीपी न्यूज)

    ...
  •  


Posted Date : 13-Apr-2018
  • बैंगलुरू, 13 अप्रैल। कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लडऩे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रस्ताव को कांग्रेस ने ठुकरा दिया है। यही नहीं उनके जैसे अन्य सभी नेताओं को भी पार्टी ने टका सा जवाब दे दिया है जो दो सीटों से लडऩे की तैयारी कर रहे थे। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
    सूत्रों के मुताबिक 12 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दो सीटों- चामुंडेश्वरी (मैसुरु जिला) और बादामी (बागलकोट जिला) से चुनाव लडऩा चाहते थे। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें दो में से किसी एक सीट को चुनना होगा। सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। लिहाजा सिद्धारमैया से कहा गया है कि वे इससे पहले ही अपने विकल्प के बारे में पार्टी नेतृत्व को बता दें।
    यही नहीं पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह मशविरा भी दिया है कि चूंकि उन्हें एक ही सीट से लडऩे की इजाजत है इसलिए वे अपने लिए कोई सुरक्षित ढूंढ लें क्योंकि चामुंडेश्वरी में वे मुश्किल में फंस सकते हैं। यहां वोक्कालिगा और लिंगायत मतदाताओं की तादाद काफी ज्यादा है। इसलिए यहां चुनावी संघर्ष तगड़ा और नजदीकी हो सकता है। जबकि बादामी सीट पर कुरुबा समुदाय के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। चूंकि मुख्यमंत्री खुद इसी समुदाय से आते हैं इसलिए यह सीट उनके लिए सुरक्षित रहेगी। हालांकि सीट का चुनाव उन्हें खुद करना है।
    सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री ही नहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वरा और कुछ अन्य नेता भी दो सीटों से चुनाव लडऩा चाहते थे। लेकिन पार्टी ने उन सभी के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं ताकि अन्य नेताओं को भी चुनाव लडऩे का मौका दिया जा सके। बताया जाता है कि पार्टी के इस रुख के बाद परमेश्वरा सहित अधिकांश नेता एक सीट से चुनाव लडऩे को तैयार हो गए हैं। परमेश्वरा कोरतागेरे सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं जहां से वे 2013 में हार गए थे। वे संभवत: बेंगलुरू की पुलकेशीनगर सीट से चुनाव में उतरने का विचार छोड़ रहे हैं।  (डेक्कन हेराल्ड)

    ...
  •  


Posted Date : 13-Apr-2018
  • खंडवा , 13 अप्रैल । जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की एक बच्ची से सामूहिक बलात्कार और फिर उसकी हत्या पर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह ने एक विवादास्पद बयान दिया है। खंडवा से सांसद नंदकुमार सिंह ने कहा कि इस घटना में पाकिस्तान का हाथ है और इसका मकसद लोगों में फूट डालना है। आरोपितों के पक्ष में जुलूस निकालने वालों और उसमें जय श्रीराम के नारे लगाने वालों के बारे में उन्होंने कहा कि यह भी पाकिस्तान के एजेंटों ने किया होगा। उन्होंने कहा, कश्मीर में तो एक फीसदी भी हिंदू नहीं है। वहां तो बेचारा हिंदू मुंह भी नहीं खोल पाता। वो क्या नारे लगाएगा।
    गिरफ्तार सभी आठों हिंदू
    उल्लेखनीय है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। गिरफ्तार सारे ही लोग हिंदू हैं। सांजीराम, स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, प्रवेश कुमारू, सांजीराम का नाबालिग भतीजा और सांजीराम का बेटा विशाल जंगोत्रा। (सत्याग्रह)

     

    ...
  •  


Posted Date : 12-Apr-2018
  • जम्मू, 12 अप्रैल। कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में दाखिल आरोपपत्र से इस बात का खुलासा हुआ है कि बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, गैंगरेप और हत्या इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान मंदिर के सेवादार को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
    मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 15 पृष्ठों के दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक, बच्ची को जनवरी में एक हफ्ते तक कठुआ के रासना गांव में देवीस्थान मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था। उससे छह लोगों ने गैंगरेप किया था। बच्ची को नशीली दवा देकर रखा गया था। उसकी हत्या से पहले दरिंदों ने उसे बार-बार हवस का शिकार बनाया था।
    इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सांझी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, मित्र परवेश कुमार उर्फ मन्नू, राम का किशोर भतीजा और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा शामिल हुए। आरोपपत्र में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्त भी नामजद हैं, जिन्होंने राम से चार लाख रुपये लिए।
    इसके बाद इस केस से जुड़े अहम सबूत नष्ट किए। एक किशोर आरोपी की भूमिका के बारे में पुलिस ने अलग आरोपपत्र दाखिल किया। सभी आठ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। आरोपपत्र में कहा गया है कि बच्ची का शव बरामद होने से छह दिन पहले 11 जनवरी को किशोर ने अपने चचेरे भाई जंगोत्रा को फोन किया था और मेरठ से लौटने को कहा था।
    उसने उससे कहा था कि यदि वह मजा लूटना चाहता है, तो आ जाए। आरोपी किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ चुका है। किशोर की मेडिकल जांच से जाहिर होता है कि वह वयस्क है, लेकिन अदालत ने अभी तक रिपोर्ट का संज्ञान नहीं लिया है। खजुरिया ने बच्ची का अपहरण करने के लिए किशोर को लालच दिया। उससे कहा कि वह बोर्ड परीक्षा पास करने में उसकी मदद करेगा।
    इसके बाद उसने परवेश से योजना साझा कर उसे अंजाम देने में मदद मांगी, जो राम और खजुरिया ने बनाई थी। जंगोत्रा अपने चचेरे भाई का फोन आने के बाद मेरठ से रासना पहुंचा और किशोर और परवेश के साथ बच्ची से बलात्कार किया, जिसे नशीली दवा दी गई थी। राम के निर्देश पर बच्ची को मंदिर से हटाया गया। उसे खत्म करने के लिए पास के जंगल में ले गए।
    जांच के मुताबिक, खजुरिया भी मौके पर पहुंचा और उनसे इंतजार करने को कहा, क्योंकि वह बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ फिर से बलात्कार करना चाहता था। बच्ची से एक बार फिर सामूहिक बलात्कार किया गया और बाद में किशोर ने उसकी हत्या कर दी। इसमें कहा गया है कि किशोर ने बच्ची के सिर पर एक पत्थर से दो बार प्रहार किया।
    इसके बाद उसके शव को जंगल में फेंक दिया। वाहन का इंतजाम नहीं हो पाने के चलते नहर में शव को फेंकने की उनकी योजना नाकाम हो गई थी। शव का पता चलने के करीब हफ्ते भर बाद 23 जनवरी के सरकार ने यह मामला अपराध शाखा को सौंपा जिसने एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी द्वारा की जांच में चौंका देने वाले खुलासे होने लगे थे।
    आरोपपत्र में कहा गया है कि जांच में यह पता चला कि जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही आरोपी सांझी राम ने रासना इलाके से बकरवाल समुदाय को हटाने का फैसला कर लिया था, जो उसके दिमाग में कुछ समय से चल रहा था। राम ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को चार लाख रुपये तीन किश्तों में दिए थे, ताकि सबूत नष्ट किया जा सके।
    जांच में इस बारे में ब्योरा दिया गया है कि आरोपी पुलिस अधिकारियों ने मृतका के कपड़े फारेंसिक प्रयोगशाला में भेजने से पहले उसे धोकर किस तरह से अहम सबूत नष्ट किए और मौके पर झूठे साक्ष्य बनाए। आरोपी राम रासना, कूटा और धमयाल इलाके में बकरवाल समुदाय के बसने के खिलाफ था। वह हमेशा ही अपने समुदाय के लोगों को उनके खिलाफ करता था।  (आजतक)

     

    ...
  •  


Posted Date : 11-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 11 अप्रैल। लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने लोकपाल चयन समिति की बैठक में एक बार फिर शामिल होने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाया है। मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि इसका एकमात्र मकसद लोकपाल चयन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की राय को अलग से रखना है। उनका आगे कहना था कि सरकार इस बात से अवगत है कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम में भागीदारी के अधिकारों, प्रक्रिया में सलाह और मतदान के बगैर विशेष आमंत्रित के लिए कोई प्रावधान नहीं है। मल्लिकार्जुन खडग़े ने मोदी सरकार पर इस बारे में देश को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। (नवभारत टाईम्स)

    ...
  •  


Posted Date : 11-Apr-2018
  • मैनपुरी, 11 अप्रैल। समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सपा और बसपा के गठबंधन को अच्छी कोशिश करार देते हुए कहा कि एक साथ आये इन दोनों दलों को अब लोकसभा चुनाव में कोई रोक नहीं सकेगा।
    यादव ने किशनी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सपा और बसपा का गठबंधन अच्छी कोशिश है। यह पहल जारी रहनी चाहिये। दोनों के एक होने से लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा।
    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के पास जो नीतियां हैं, वे देश की किसी पार्टी के पास नहीं हैं। उन्होंने सभा में सपा का सहयोग करने के लिये बसपा को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में महंगाई और भ्रष्टाचार साथ-साथ चल रहे है। महिलाएं समझदार हैं। वे समझ रही है कि किसे वोट देना है।
    वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलासा किया है कि इस गठजोड़ के लिए पहल उन्होनें की और वो गठबंधन के वास्ते दो कदम पीछे हटने को भी तैयार हैं। बीएसपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे का फैसला दोहराते हुए अखिलेश ने बीजेपी से सबक लेने की बात कही। अखिलेश कहा था कि 2019 में भी सपा-बसपा साथ मिलकर लड़ेगी। 
    अखिलेश ने कहा कि 2019 में बीएसपी-सपा साथ लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मायावती ने गठजोड़ के खिलाफ कुछ नहीं कहा है। मैंने गठजोड़ की पहल की। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पार्टियों के गठजोड़ को नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का आशीर्वाद है। इसके आने वाले दिनों में होने वाले एमएलसी चुनावों पर भी अखिलेश यादव ने बात की। उन्होंने कहा कि वे एमएलसी चुनाव नहीं लड़ेंगे। (एनडीटीवी)

    ...
  •  




Previous12Next