राजनीति

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Date : 19-Nov-2019

नई दिल्लीा, 19 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर भाजपा और शिवसेना में चल रहे झगड़े के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नसीहत दी है। मोहन भागवत ने कहा है कि स्वार्थ खराब चीज होती है। भागवत ने कहा, आपस में झगडऩे से दोनों की हानि होती है। झगडऩे के बाद अब भी बंद नहीं हुए। स्वार्थ बहुत खराब बात है। अपने स्वार्थ को बहुत कम लोग छोड़ पाए। वहीं, दूसरी ओर शिवसेना ने एनडीए से बाहर करने का ऐलान करने पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है।
वहीं, महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बरकरार सस्पेंस के बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि अगले हफ्ते महाराष्ट्र में सरकार का गठन हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर करीब-करीब सहमति बन गई है। साथ ही बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का पहला टर्म शिवसेना को मिल सकता है, वहीं कांग्रेस का स्पीकर बन सकता है। इसके साथ ही मंत्रियों के चयन को लेकर खबर है कि तीन पार्टियों के विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रियों का चयन किया जाएगा। नई सरकार किसानों के एजेंडे को लागू करेगी। 
मंगलवार को शिवसेना ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक बार फिर इशारों में बीजेपी पर हमला बोला गया। उसमें लिखा गया है कि किस आधार पर, किसकी अनुमति से हृष्ठ्र में शिवसेना के नहीं होने की घोषणा की गई। हमें एनडीए से निकालने वाले तुम कौन? घोषणा करने वाले को शिवसेना का मर्म और एनडीए का कर्म-धर्म नहीं पता। एनडीए के जन्म और प्रसव पीड़ा को शिवसेना ने अनुभव किया है। भारतीय जनता पार्टी के बगल में भी कोई खड़ा नहीं होना चाहता था। जब एनडीए की नींव रखी गई तब आज के दिल्लीश्वर गुदड़ी में भी नहीं रहे होंगे। जिसने एनडीए की स्थापना की, उसे ही बाहर निकालने की नीच घोषणा की गई। 
इसके अलावा महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की बीच बढ़ती नजदीकियों का उदाहरण महानगरपालिका के महापौर चुनाव में देखने मिला जब कांग्रेस और एनसीपी ने मुम्बई और ठाणे महानगरपालिका में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे, जिसकी वजह से शिवसेना के प्रत्याशी दोनों जगह निर्विरोध जीत गए। शिवसेना से वर्ली के गांधी नगर इलाके की पार्षद किशोरी पेडनेकर एशिया के सबसे अमीर महानगरपालिका की अगली महापौर बन गई हैं। बीएमसी में महापौर के चयन के लिए सोमवार के दिन नामांकन करना था। बीजेपी नेता आशीष शेलार ने जहां सोमवार सुबह ट्वीट कर साफ कर दिया कि बीजेपी की ओर से इस चुनाव में कोई प्रत्याशी नहीं होगा तो वहीं सोमवार शाम पार्टी हाईकमान से बात कर कांग्रेस ने भी पर्चा नहीं भरा, जिसके कारण बीएमसी पर शिवसेना की पकड़ बनी रही।(एनडीटीवी) 
 


Date : 19-Nov-2019

इटावा, 19 नवंबर । इटावा में प्रगतिशील समाज पार्टी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि वे सपा से गठबंधन को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अब अखिलेश को भी इस बात के लिए मान जाना चाहिए। उनका कहना था कि कुछ भी हो मुख्यमंत्री तो अखिलेश ही बनेंगे। मैं कई बार कह चुका हूं मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है। 
अखिलेश मान जाएंगे तो 2022 में प्रदेश में सरकार भी बना लेंगे। उनका कहना था कि सैफई में नेताजी के जन्मदिन पर परिवार को एकजुट होकर इसे मनाना चाहिए। प्रसपा प्रदेशभर में 22 नवंबर को नेताजी मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाने जा रही है। इस मौके पर शिवपाल ने परिवार के सभी लोगों को आमंत्रित किया है।
इससे पहले भी शिवपाल यादव कई बार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को लेकर बयान दे चुके हैं। कुछ दिनों पहले शिवपाल यादव ने कहा था कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) का सपा में विलय नहीं होगा। जनता हमारी पार्टी को भाजपा का विकल्प मानने लगी है। उन्होंने कहा था कि सपा से गठबंधन का विकल्प जरूर खुला है। 
शिवपाल सिंह ने कहा था कि सांप्रदायिक शक्तियों को हराने के लिए सपा से गठबंधन हो सकता है। फिर उनका बयान आया कि उनकी बार-बार सपा में जाने की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, सपा में जाने का कोई सवाल ही नहीं है। शिवपाल ने यह भी कहा था कि वे अभी सपा के विधायक हैं लेकिन उन्हें सपा मुखिया ने विधायकों की किसी बैठक में नहीं बुलाया है।(अमर उजाला)
 


Date : 19-Nov-2019

मुंबई, 19 नवंबर । कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के बयान ने शिवसेना के अंदर चिंता बढ़ा दी है। पवार ने सोमवार को मुलाकात के बाद कहा था कि उन्होंने सोनिया गांधी के साथ न तो शिवसेना और न ही सरकार बनाने के बारे में बात की। पवार के इस बयान से शिवसेना के नेता के साथ-साथ कार्यकर्ता भी भ्रम की स्थिति में पहुंच गए हैं। बदली परिस्थिति में शिवसेना के नेता पर्दे के पीछे से कहने लगे हैं कि पार्टी के लिए यह अच्छा होगा कि वह एनसीपी से बातचीत छोड़ बीजेपी के साथ दोबारा सरकार बनाए। 
शिवसेना के एक विधायक ने कहा कि वह शरद पवार का बयान सुनकर सकते में है। शिवसेना विधायक ने कहा, हमारी पार्टी को इंतजार करना चाहिए और एनसीपी सुप्रीमो के साथ जाने से पहले 10 बार विचार करना चाहिए। उधर, शिवसेना के एक पदाधिकारी ने सवाल किया, यह किस तरह की राजनीति है? शिवसेना जैसी पार्टी जो 80 फीसदी सामाजिक सेवा और 20 प्रतिशत राजनीति करती है, के लिए यह बेहतर होगा कि वह एनसीपी-कांग्रेस से दूर रहे और बीजेपी के साथ हाथ मिला ले।
संजय राउत ने ट्वीट कर दिया सियासी संकेत 
उधर, इस पूरे मुद्दे को लेकर रोज ट्वीट करने वाले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, अगर जिंदगी में कुछ पाना हो तो तरीके बदलो इरादे नहीं। जय महाराष्ट्र। उनका ट्वीट इस बात के संकेत दे रहा है कि शिवसेना सरकार बनाने के लिए हर तरह के विकल्प पर कदम बढ़ाने को तैयार है। इससे पहले राउत ने शरद पवार के बयान पर कहा था, सरकार बनाने की जिम्मेदारी शिवसेना की नहीं थी। यह जिनकी जिम्मेदारी थी, वे भाग निकले हैं। लेकिन मुझे भरोसा है कि हम जल्दी ही सरकार बना लेंगे। अब तक सरकार बनाने का दावा करने वाले संजय राउत का अब जिम्मेदारी की बात कहना बताता है कि कहीं न कहीं कुछ पेच जरूर फंस गया है। 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने शिवसेना के साथ किसी मिनिमम कॉमन प्रोग्राम पर सहमति से ही इनकार कर दिया था। यही नहीं, उन्होंने सरकार गठन को लेकर शिवसेना को किसी तरह का भरोसा दिए जाने के सवाल पर भी चुप्पी साध ली थी। बाद में शरद पवार ने ट्वीट कर कहा, नई दिल्ली में आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीजी से भेंट कर महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में चर्चा की। आनेवाले समय में महाराष्ट्र की राजनितिक गतीविधियों पर हमारी नजर रहेगी। महागठबंधन के मित्र पक्षों को विश्वास में लेकर हम निर्णय करेंगे।
कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन नहीं करे शिवसेना'
दक्षिण मुंबई से एक शिवसेना के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि पार्टी को कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन नहीं करना चाहिए और अगर बीजेपी के साथ उसके रिश्ते सहज नहीं है तो उसे अकेले चलना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर बीजेपी नहीं तो शिवसेना को बिना अपने अजेंडे का त्याग किए अकेले जाना चाहिए। पार्टी अगर समान विचारधारा वाली पार्टी के साथ नहीं जाना चाहती है तो उसे अकेले लड़ाई लडऩी चाहिए। 
इस बीच शिवसेना के सूत्रों ने कहा है कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने संजय राउत को पर्दे के पीछे चल रही राजनीति पर वह नजर रखने को कहा। राउत ने सोमवार देर शाम पवार से मुलाकात की थी। राउत ने मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, मैंने पवार के साथ राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा नहीं की। हमने किसानों के मुद्दे पर बात की। उन्होंने दोहराया कि शिवसेना के नेतृत्व में सरकार बनेगी और राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए बीजेपी जिम्मेदार है। (टाईम्स न्यूज)
 

 


Date : 19-Nov-2019

नई दिल्ली, 19 नवंबर। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा है और राष्ट्रपति शासन की मियाद छह महीने की होती है। उससे पहले राज्य में नई सरकार बन जाएगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार शिवसेना के नेतृत्व में ही बनेगी और इसके लिए किसी की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है। जब उन्हें एनसीपी चीफ शरद पवार का वह बयान याद दिलाया गया जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार बनाने को लेकर सारे सवाल शिवसेना से किया जाए तो उन्होंने कहा, पवार साहब क्या गलत बोल रहे हैं? 
राउत ने कहा, सरकार शिवसेना ही बनाएगी। धीरे-धीरे सबकुछ पता चलेगा। राउत ने अपना दावा दोहराया कि सरकार बनेगी और उसका नेतृत्व शिवसेना ही करेगी। उन्होंने कहा, सरकार बनेगी और सदन में 170 (विधायकों) का बहुमत साबित होगा। उन्होंने कहा, अभी राष्ट्रपति शासन है। छह महीने के लिए लगा है। हमें जल्दी-से-जल्दी सरकार बनाने के लिए चर्चा करनी होगी।
शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस से शिवसेना संस्थापक बाला साहब ठाकरे की पुण्यतिथि 17 नवंबर तक ही सरकार गठन के लिए शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर देने की मांग की थी, लेकिन अब तक ऐसा कोई ऐलान नहीं हो सका है। इस बीच एनसीपी चीफ शरद पवार के बदले रुख ने शिवसेना के अंदरखाने उहापोह की स्थिति बढ़ा दी है। 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद पवार ने जो कहा, उससे शिवसेना के कई नेताओं की यह धारणा मजबूत होने लगी है कि एनसीपी और कांग्रेस के साथ जाने में उनकी पार्टी की भलाई नहीं है। पार्टी के अंदर दबी जुबान में बातें होने लगीं कि बीजेपी के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की संभावना टटोलनी चाहिए और अगर बीजेपी के साथ सरकार बनने की गुंजाइश नहीं बनती है तो शिवसेना को एकला चलो रे की नीति अपनानी चाहिए न। इन नेताओं को पवार के बयान से खासी बेचैनी हो रही है। 
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए शिवसेना के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर कोई सहमति नहीं बनी है। उन्होंने सरकार बनाने को लेकर कुछ भी साफ कहने से इनकार कर दिया और शिवसेना को भरोसा देने के सवाल पर बिल्कुल चुप्पी साध ली।  (नवभारतटाईम्स)
 

 


Date : 19-Nov-2019

नई दिल्ली, 19 नवंबर। महाराष्ट्र में चुनाव के नतीजे आए अब करीब एक महीना हो गया है लेकिन सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक उठापटक जारी है। शिवसेना को उम्मीद है कि एनसीपी-कांग्रेस उनके साथ आएगी और सरकार बन जाएगी। लेकिन पिछले 24 घंटे में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ऐसे दो बयान दिए हैं, जिनसे शिवसेना की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शरद पवार लगातार कह रहे हैं कि अभी महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है।
आज क्या कहा?
मंगलवार को जब शरद पवार संसद भवन पहुंचे तो मीडिया ने उनसे महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर सवाल दागा। इस पर शरद पवार ने अपने ही अंदाज में जवाब दिया और कहा कि मुझसे ये सवाल मत पूछो, जिनको सरकार बनानी है उनसे सवाल पूछो।
कल क्या कहा था?
सोमवार को जब शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने पहुंचे तो उम्मीद थी कि महाराष्ट्र में सरकार गठन पर छाए काले बादल अब छंट जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार ने कहा कि इस बैठक में सरकार गठन पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी ने साथ में चुनाव लड़ा था, इसलिए दोनों पार्टी के नेता आगे की रणनीति पर बात कर रहे हैं। लेकिन सरकार को लेकर पवार ने कहा था कि हमारे पास 6 महीने का समय है।
‘पवार को समझना आसान नहीं’
शरद पवार के इस बयान पर जब शिवसेना के संजय राउत से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि शरद पवार को समझने में कई जन्म लग जाएंगे। शिवसेना नेता बोले कि शरद पवार की अगुवाई में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे, जिसमें महाराष्ट्र के किसानों के मसले पर बात होगी। वहीं राउत ने दावा किया कि हम दिसंबर के पहले हफ्ते में सरकार बना लेंगे।
गौरतलब है कि भाजपा का साथ छोड़ एनसीपी-कांग्रेस से उम्मीद लगाई बैठी शिवसेना के लिए सरकार बनाने का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। लगातार कांग्रेस-एनसीपी में बैठकों का दौर चल रहा है , जिसकी वजह से गठबंधन पर कोई फैसला नहीं हो रहा है।
टल गई एनसीपी-कांग्रेस की बैठक
सोनिया गांधी और शरद पवार की बैठक में तय हुआ था कि दोनों पार्टी के नेता साथ में बैठकर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। ये बैठक मंगलवार को दिल्ली में ही होनी थी, लेकिन मंगलवार दोपहर तक बैठक टल गई। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज जयंती है इसलिए कांग्रेस नेता वहां पर व्यस्त हैं, इसी वजह से बैठक को टाल दिया गया। (आजतक)

 


Date : 19-Nov-2019

नई दिल्ली, 19 नवंबर । महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है। शिवसेना ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। जब शिवसेना को संसद में विपक्ष की सीट दी गई तो अब सामना के जरिए पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधा है और पूछा है ‘हमें एनडीए से निकालने वाले तुम कौन?’
सामना के संपादकीय में लिखा है, ‘दिल्ली के भाजपा नेताओं ने किस आधार पर और किसकी अनुमति से यह घोषणा की? यात्रा में जल्दबाजी दुर्घटना को निमंत्रण देती है’ इस प्रकार की जल्दबाजी इन लोगों के लिए ठीक नहीं है।
तीखे तेवरों के साथ लेख में लिखा गया है कि जिसने ये घोषणा की है उसे शिवसेना का मर्म और एनडीए का कर्म-धर्म नहीं पता है। तुम सभी के जन्म पर शिवसेना ने नाश्ता किया है। जब बीजेपी के साथ कोई खड़ा नहीं होना चाहता था, तब जनसंघ के दीये में शिवसेना ने तेल डाला।
लेख में लिखा गया है कि आज ‘एनडीए’ का प्रमुख या निमंत्रक कौन है इसका उत्तर मिलेगा क्या? शिवसेना को बाहर निकालने का निर्णय किस बैठक में और किस आधार पर लिया गया। ये सारा मामला इतनी हद तक क्यों गया? इस पर ‘एनडीए’ के सहयोगी दलों की बैठक बुलाकर चर्चा के बाद निर्णय हुआ है क्या?
शिवसेना ने निशाना साधते हुए कहा कि छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र से लिया गया पंगा तुम्हारा तंबू उखाड़े बिना नहीं रहेगा। बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर में राष्ट्रद्रोही और पाकिस्तानियों के गीत गानेवाली महबूबा मुफ्ती के साथ सत्ता के लिए निकाह करनेवाली भाजपा ने ‘एनडीए’ की अनुमति ली थी क्या?
शिवसेना ने पूछा कि पाकिस्तान समर्थकों को ‘एनडीए’ की बैठक में सम्मान देकर कुर्सी देते समय अनुमति ली थी क्या? नरेंद्र मोदी का विरोध करनेवाले और मोदी पर कठोर टिप्पणी करनेवाले नीतीश कुमार की कमर पर फिर से ‘एनडीए’ की लंगोट पहनाते समय तुमने हमसे अनुमति ली थी क्या।
गौरतलब है कि सोमवार को संसद में शिवसेना की बैठने की सीट भी बदल गई है। राज्यसभा में अब शिवसेना सत्ता पक्ष नहीं बल्कि विपक्ष के साथ बैठेगी, शिवसेना अब सदन में एनसीपी के साथ बैठेगी। लोकसभा में शिवसेना के 18 और राज्यसभा में 3 सांसद हैं, जो कि अब विपक्ष का हिस्सा बनेंगे।(आजतक)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर। महाराष्ट्र में चुनाव नतीजे आए तीन हफ्तों से ज्यादा वक्त गुजर गया है, लेकिन सरकार गठन की तस्वीर अबतक साफ नहीं हो पाई है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार दिख रही है, लेकिन एनसीपी और कांग्रेस का आपसी समीकरण अबतक ट्रैक पर नहीं आ पाया है। कांग्रेस नेताओं के बयान भी इस ओर इशारा कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने बेहद सधे शब्दों में कहा कि हम ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस एक साथ आ सकते हैं या नहीं। चव्हाण ने कहा है कि सोमवार को शिवसेना और कांग्रेस नेताओं की एक बैठक है। चव्हाण के मुताबिक इस बैठक में ये तय किया जाएगा कि दोनों पार्टियां एक साथ आगे बढ़ सकती भी हैं या नहीं।
चव्हाण दिल्ली में सोमवार को प्रस्तावित एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात का जिक्र कर रहे थे। लेकिन सरकार गठन की इतनी कोशिशों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का ऐसा बयान इस संभावित गठबंधन पर सवाल खड़े करता है। बता दें कि सोमवार शाम 4 बजे सोनिया गांधी और शरद पवार एक बार फिर से मिल रहे हैं। इस मुलाकात में गठबंधन की शर्तों, स्वरूप और इसके आकार पर एक बार फिर से चर्चा होगी।
कांग्रेस-एनसीपी नेताओं के बयान से भी इस मुलाकात की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है। चव्हाण के अलावा एनसीपी नेता नवाब मलिक ने भी कहा है कि शरद पवार और सोनिया गांधी सोमवार को मिलेंगे और एक वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। यानी कि एनसीपी-कांग्रेस के बीच इतनी मुलाकातों और चर्चाओं के बाद भी अबतक सरकार गठन की संभावनाएं ही तलाशी जा रही हैं।
इधर शिवसेना नेता संजय राउत भी राज्य में नवंबर में सरकार बनती नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने खुद कहा है कि अलग-अलग विचारधारा की पार्टियों को एक साथ आने में वक्त लग रहा है, इसलिए सरकार बनाने में देरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में दिसंबर तक सरकार बनेगी। राउत ने दावा किया कि दिसंबर में 170 विधायकों के समर्थन से शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनेगी। राउत ने कहा, दिसंबर के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र में सरकार बन जाएगी, बीजेपी ने हमें धोखा दिया है, जो सबके सामने कहा था अब उस से मुकर गए हैं, महाराष्ट्र में अब नेता तो क्या जनता भी बीजेपी के साथ नहीं है।
रविवार को एनसीपी कोर कमेटी की बैठक हुई थी। इस बैठक में शिवसेना को समर्थन से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई। इस बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने दावा किया कि चुनाव पूर्व बीजेपी से जुडऩे वाले कई विधायक एक बार फिर से पार्टी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि मेरिट के आधार पर ऐसे नेताओं को एनसीपी में वापस लिया जा सकता है।
एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने भी इस बात पर जोर दिया कि सरकार बनाने में कुछ वक्त लग सकता है  क्योंकि एनसीपी की पहली प्राथमिकता स्थिर सरकार बनाने की है। खुद शरद पवार भी सरकार गठन में वक्त लगने की बात कह चुके हैं।
यानी संजय राउत और जयंत पाटिल के बयानों से जहां यह साफ लग रहा है कि सरकार गठन होने जा रहा है, लेकिन इसमें वक्त लगने वाली है। जबकि कांग्रेस नेता पृथ्वीराज का बयान अब भी कांग्रेस के पशोपेश को जाहिर कर रहा है। (आजतक)
 


Date : 18-Nov-2019

नई दिल्ली, 18 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर खींचतान के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार सोमवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने पहुंचे हैं। इस मुलाकात से पहले मीडिया से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि शिवसेना और बीजेपी साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी। अब शिवसेना और बीजेपी को अपना रास्ता तय करना है।
सरकार बनाने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे यहां नहीं रहते हैं, वो मुंबई में रहते हैं। मैं आज सोनिया गांधी से शाम 5 बजे मिल रहा हूं। आज की बैठक में शिवसेना को समर्थन देने सहित तमाम मुद्दों पर चर्चा किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि सोनिया गांधी और शरद पवार की मीटिंग में महाराष्ट्र में ठोस फैसला लिए जाने के आसार हैं।
एनसीपी कोर कमेटी की रविवार को पुणे में बैठक में हुई। बैठक के बाद एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि पार्टी प्रमुख शरद पवार सोमवार को सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे। मंगलवार को कांग्रेस और एनसीपी के नेता सभी मुद्दों का हल निकालेंगे।
नवाब मलिक ने कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन खत्म होना जरूरी है और एक सरकार का गठन जल्द से जल्द होना चाहिए। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार गठन पर सोनिया गांधी के साथ बैठक के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
इससे पहले पार्टी सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा था कि रविवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और एनसीपी चीफ शरद पवार के बीच महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर फैसला हो सकता है लेकिन यह बैठक नहीं हुई। इस बैठक के स्थगित होने के बाद ही एनसीपी की कोर समिति की बैठक हुई।(आजतक)
 


Date : 17-Nov-2019

मुंबई, 17 नवंबर । शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति सभा में पहुंचे शिवसेना सांसद संजय राउत ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ट्वीट पर दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि कोई उन्हें स्वाभिमान और समझदारी न सिखाए। समझदारी दिखाते हुए ही शिवसेना सरकार बनाएगी और सीएम भी शिवसेना का होगा। 
राउत ने शिवाजी पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा हमें कोई हिंदुत्व क्या है और स्वाभिमान क्या है, यह न समझाए। समझदारी इनसे सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब को वचन दिया था, वह जल्द पूरा होगा। जल्द ही शिवसेना का मुख्यमंत्री यहां आएगा। संजय राउत के अलावा कई बड़े नेता शिवाजी पार्क में बालासाहेब को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। (नवभारत टाईम्स)
 


Date : 17-Nov-2019

अनिल जैन
नई दिल्ली, 17 नवंबर । महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तीन सप्ताह तक अनिश्चिता के माहौल में चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस की साझा सरकार बनना तय हो गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिव सेना और कांग्रेस के साथ आने की घटना को मीडिया का एक बडा हिस्सा और कई राजनीतिक विश्लेषक एक अजूबे की तरह देख रहे हैं। 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले चले घटनाक्रम में भी जब शिव सेना और कांग्रेस के साथ आने की चर्चाएं चल रही थीं, तब भी टेलीविजन चैनलों पर कई राजनीतिक विश्लेषक और टिप्पणीकार हैरानी जता रहे थे।
सभी का कहना था कि अगर कांग्रेस और शिव सेना साथ आते हैं तो यह भारतीय राजनीति में अनोखी घटना मानी जाएगी और इससे अभूतपूर्व अवसरवाद की मिसाल कायम होगी। अपने उग्र हिंदुवादी तेवरों के लिए जानी जाने वाली शिव सेना द्वारा बीजेपी से अपना करीब 30 साल पुराना नाता तोडक़र एनसीपी और कांग्रेस हाथ मिलाने की घटना राजनीतिक विश्लेषकों से इतर कई आम लोगों को भी हैरान कर रही है।
मगर सवाल है कि क्या वाकई शिवसेना और कांग्रेस राजनीतिक तौर पर एक-दूसरे के लिए वैसे ही अछूत हैं, जैसा कि उन्हें समझा जा रहा है?
यह सही है कि बीजेपी और शिव सेना का साथ तीन दशक से भी ज़्यादा पुराना है। 1980 और 1990 के दशक में जब कोई भी पार्टी बीजेपी से हाथ मिलाने में हिचकिचाती थी और देश में गठबंधन की राजनीति दौर भी शुरू नहीं हुआ था, तब शिव सेना ही वह पार्टी थी जिसने बीजेपी के साथ महाराष्ट्र में गठबंधन कर उसका च्अछूतोद्धारज् किया था।
इन तीन दशकों के दौरान दोनों पार्टियों ने लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा के लगभग सभी चुनाव मिलकर लड़े और केंद्र तथा राज्य सरकार में भी साझेदारी की।
सिर्फ 2014 का विधानसभा चुनाव ही दोनों पार्टियों ने अलग-अलग लड़ा था लेकिन चुनाव के कुछ समय बाद शिव सेना बीजेपी के साथ सरकार में साझेदार हो गई थी।
इस बार का चुनाव भी दोनों पार्टियों ने मिलकर लड़ा था। उनके गठबंधन को बहुमत भी हासिल हुआ लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों का रिश्ता टूट गया, जिसके चलते विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी सरकार नहीं बना सकी।
इस सबके बावजूद राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरण के तहत अब शिव सेना और कांग्रेस के साथ आने में हैरानी या ताज्जुब जैसी कोई बात नहीं है।
पिछले तीन दशक तक भले ही शिवसेना का बीजेपी से गठबंधन रहा हो, मगर महाराष्टप्त की राजनीति में कांग्रेस और शिवसेना के सहयोगपूर्ण रिश्तों का इतिहास इससे भी पुराना है और यह उतना पुराना है, जितनी शिवसेना की कुल उम्र है। पिछले तीन दशक की ही बात करें तो ऐसे कई मौके आए हैं जब शिवसेना ने बीजेपी के साथ रहते हुए भी उसकी राजनीतिक लाइन से हटकर फ़ैसले किए और राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस का समर्थन किया।
बहुत पहले की नहीं, बल्कि 2012 की ही बात करें तो राष्ट्रपति पद के चुनाव में शिवसेना ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था, जबकि बीजेपी ने उनके खिलाफ पीए संगमा को एनडीए का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था।
शिवसेना के समर्थन का शुक्रिया अदा करने खुद प्रणब मुखर्जी शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे से मिलने उनके निवास पर पहुंचे थे। इससे पहले 2007 में भी शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल को समर्थन दिया था। उस चुनाव में तत्कालीन उपराष्ट्रपति और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे भैरोसिंह शेखावत बीजेपी नीत एनडीए के उम्मीदवार थे। राष्ट्रपति पद के दोनों चुनावों में शिवसेना का समर्थन लेने से कांग्रेस ने कोई परहेज नहीं किया।
यही नहीं, शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने 1975 में इंदिरा गांधी सरकार के लगाए आपातकाल का और फिर 1977 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस का समर्थन किया था। 1977 में मुंबई के मेयर के चुनाव में कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा को जिताने में भी बाल ठाकरे ने अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि शिव सेना को इन चुनावों में कांग्रेस का समर्थन करने की राजनीतिक कीमत भी चुकानी पडी।
1978 में महाराष्ट्र विधानसभा और बंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) के चुनाव में शिव सेना को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए तो बाल ठाकरे खुद बंबई के राजभवन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए थे। उन्होंने न सिर्फ आपातकाल का समर्थन किया था बल्कि उसे उन्होंने श्रीमती गांधी का साहसिक कदम बताते हुए उन्हें बधाई भी दी थी।
हालांकि आपातकाल का समर्थन करने की पेशकश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सर संघचालक मधुकर दत्तात्रय उर्फ बाला साहब देवरस ने भी की थी, लेकिन उनकी पेशकश सशर्त थी। उनकी शर्त थी कि यदि सरकार संघ पर लगाया गया प्रतिबंध हटा लेती है और संघ के गिरफ़्तार स्वयंसेवकों को रिहा कर देती तो संघ किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहते हुए श्रीमती इंदिरा गांधी के बीस सूत्रीय तथा संजय गांधी के पांच सूत्रीय कार्यक्रम का समर्थन करेगा। यह और बात है कि श्रीमती गांधी ने देवरस की यह पेशकश मंजूर नहीं की थी।
असल में कांग्रेस ने पिछले पांच-छह दशक के दौरान इसी तरह शिव सेना का इस्तेमाल किया। यानी जाहिर तौर पर शिव सेना की कट्टर हिंदुवादी और मराठी मानुष की नीति का विरोध भी किया और जब जरूरत पड़ी तब उसका सहयोग भी लिया।
बाल ठाकरे ने शिव सेना की स्थापना 1960 के दशक के मध्य में की थी। यह वह दौर था जब फायरब्रांड समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस को मुंबई का बेताज बादशाह कहा जाता था। महानगर की तमाम छोटी-बडी ट्रेड यूनियनों के वे नेता हुआ करते थे और उनके एक आह्वान पर पूरा महानगर बंद हो जाता था, थम जाता था।
महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में भी मजदूर संगठनों का नेतृत्व उसी दौर में 1967 के लोकसभा चुनाव में 35 वर्षीय जॉर्ज ने मुंबई में कांग्रेस के अजेय माने जाने वाले दिग्गज नेता एसके पाटिल को हराकर उनकी राजनीतिक पारी समाप्त कर दी थी।
चूंकि महाराष्ट्र तब भी एक औद्योगिक राज्य था और पूरे राज्य में समाजवादी तथा वामपंथी मजदूर संगठन बहुत मजबूत हुआ करते थे। औद्योगिक राज्य होने की वजह से सरकार को नियमित रूप से मजदूर संगठनों से जूझना होता था। जिस समय बाल ठाकरे ने शिव सेना की स्थापना की उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक हुआ करते थे और बाल ठाकरे से उनकी काफी नजदीकी थी।
कहा जाता है कि मुंबई के कामगार वर्ग में जॉर्ज के दबदबे को तोडऩे के लिए वसंत राव नाइक ने शिव सेना को खाद-पानी देते हुए बाल ठाकरे का भरपूर इस्तेमाल किया। इसी वजह से उस दौर में शिव सेना को कई लोग मजाक में वसंत सेना भी कहा करते थे।
आपातकाल के बाद जॉर्ज जब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए तो उन्होंने मुंबई में समय देना कम कर दिया। उसी दौर में मुंबई में मजदूर नेता के तौर दत्ता सामंत का उदय हुआ। शुरुआती दौर में तो जॉर्ज के नेतृत्व वाली यूनियनों के दबदबे को कम करने के लिए कांग्रेस ने भी दत्ता सामंत को खूब बढ़ावा दिया, लेकिन जब वे भी टेक्सटाइल मिलों में हड़ताल और मजदूरों के प्रदर्शन के जरिए जब महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार के लिए सिरदर्द बनने लगे तो कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने उनका भी इलाज बाल ठाकरे की मदद से ही किया।
सिर्फ वसंतराव नाइक ही नहीं, बल्कि उनके बाद शंकरराव चह्वाण, वसंतदादा पाटील, शरद पवार, अब्दुल रहमान अंतुले, बाबा साहेब भोंसले, शिवाजीराव पाटील निलंगेकर आदि कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने भी समय-समय पर महाराष्ट्र और मुंबई की राजनीति में बाल ठाकरे का अपने लिए भी और कांग्रेस के लिए भी भरपूर इस्तेमाल किया। शरद पवार से तो उनकी दोस्ती जगजाहिर ही रही।
ऐसा नहीं कि सिर्फ बाल ठाकरे कांग्रेस की मदद ही किया करते थे। वे कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों से बाकायदा अपनी मदद की राजनीतिक क़ीमत वसूल करते थे। यह कीमत होती थी विधानसभा और विधान परिषद में अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कराने के रूप में भी और इससे इतर दूसरे स्तरों पर भी।
उसी दौर में और उसके बाद भी महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में कई जगह कांग्रेस के जिला स्तर के नेताओं ने शिवसेना के साथ तालमेल करते हुए जिला परिषद, नगर पालिका और नगर निगमों में बोर्ड का गठन भी किया। उस पूरे दौर में तो बाल ठाकरे पर उनके भडक़ाऊ बयानों और भाषणों को लेकर कई मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन पुलिस उन्हें कभी छू भी नहीं पाई। ऐसा सिर्फ कांग्रेस से उनके दोस्ताना रिश्तों के चलते ही हुआ।
1980 के दशक के अंत में बीजेपी के साथ गठबंधन होने से पहले तक शिव सेना और कांग्रेस के दोस्ताना रिश्ते जारी रहे। इसलिए यह कहना बेमतलब है कि कांग्रेस और शिव सेना एक दूसरे के लिए राजनीतिक तौर पर अछूत रहे हैं और अब उनके साथ आने से कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता या शिवसेना की हिंदूवाद मराठी मानुष पर आसमान टूट पड़ेगा।(बीबीसी)
 


Date : 17-Nov-2019

नई दिल्ली/मुंबइ, 17 नवंबर । महाराष्ट्र की सियासत में लगातार गरमाहट बनी हुई है। अब तक सरकार गठन पर तस्वीर साफ नहीं हुई है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस तीनों ने मिलकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना लिया है। सभी पार्टियां उसपर विचार कर रही हैं। इस बीच खबर है कि आज शाम 4 बजे पुणे में एनसीपी नेताओं की बैठक होनी है। इस बैठक में 21 नेता शामिल होंगे और बैठक की अध्यक्षता शरद पवार करेंगे। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने बताया है कि इस बैठक में महाराष्ट्र के मौजूदा हालात पर पार्टी की रणनीति पर चर्चा होगी। इस बैठक के बाद पवार दिल्ली रवाना होंगे। हालांकि उन्होंने साफ किया है कि पवार की दिल्ली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से कोई बैठक तय नहीं है, ऐसे में किसी बैठक के रद्द होने का सवाल ही नहीं है। आपको बता दें कि कल ही नवाब मलिक ने कहा था कि पवार दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलेंगे। 
मलिक ने बताया है कि मंगलवार यानी 19 नवंबर को कांग्रेस और एनसीपी नेताओं के बीच बैठक होनी है। जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि सरकार गठन में कांग्रेस शामिल होगी या नहीं। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद के बीच बीजेपी से तनातनी के बाद शिवसेना अब राज्यसभा में विपक्ष में बैठी नजर आ सकती है। जानकारी के मुताबिक शिवसेना से रिश्ते बिगडऩे के बाद राज्यसभा में सांसदों की बैठने की व्यवस्था में बदलाव देखे जा सकते हैं। शिवसेना के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि राज्यसभा में हम विपक्ष में बैठेंगे। शिवसेना ने संसद के 18 नवम्बर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को दिल्ली में होने वाली एनडीए घटक दलों की बैठक में शिवसेना के हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। 
संजय राउत ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि एनडीए घटक दलों की मीटिंग 17 नवंबर को बुलाई गई है। हमने पहले ही तय किया था कि बैठक में बैठने के बजाय हम महाराष्ट्र के विकास को तरजीह देंगे। हमारे सांसद ने केंद्र सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। संजय राउत ने कहा कि आज की एनडीए और पुरानी एनडीए में बड़ा अंतर है। लाल कृष्ण आडवाणी, जैसे पुराने नेता अब पार्टी में सक्रिय नहीं हैं। हालांकि भाजपा और शिवसेना दोनों ने गठबंधन तोडऩे की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं की है।लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आपने अब तक एनडीए से अलग होने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है तो क्या आपके इस फैसले के बाद ऐसा माना जाए कि आप एनडीए का हिस्सा नहीं है तो इस सवाल के जवाब में संजय राउत ने कहा कि आप ऐसा कह सकते हैं इसमें कोई समस्या नहीं है। आज की एनडीए और पुरानी एनडीए में अंतर है।(एनडीटीवी) 
 


Date : 17-Nov-2019

नई दिल्ली/मुंबई, 17 नवंबर। महाराष्ट्र में सरकार गठन पर रस्साकसी जारी है। शिवसेना और बीजेपी की राहें जुदा होने के बाद कांग्रेस,एनसीपी और शिवसेना के साथ आने की चर्चा थी, लेकिन अभी तक तीनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। खबर है कि महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ संभावित गठबंधन पर चर्चा के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के बीच आज (रविवार को) होने वाली बैठक टल गई है। अब यह बैठक सोमवार को होगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, बैठक सोनिया गांधी के आवास पर होगी, जिसमें महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने पर केंद्रित वार्ता होने की संभावना है।  
पार्टी सूत्रों ने कहा कि चुनाव पूर्व गठबंधन साझेदार कांग्रेस और राकांपा ने शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार कर लिया है। सूत्रों ने संकेत दिया कि बैठक के दौरान तीन पार्टियों के बीच विभागों के बंटवारे और सरकार के लिए फॉर्मूले पर चर्चा होगी। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि सबसे पुरानी पार्टी चाहती है कि शिवसेना अपनी कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा को ढक ले और कुछ मुद्दों पर धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाए। उन्होंने यह भी कहा कि राकांपा चाहती है कि कांग्रेस इस सरकार का हिस्सा बने।  
आज शाम 4 बजे पुणे में एनसीपी नेताओं की बैठक भी होनी है। इस बैठक में 21 नेता शामिल होंगे और बैठक की अध्यक्षता शरद पवार करेंगे। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने बताया है कि इस बैठक में महाराष्ट्र के मौजूदा हालात पर पार्टी की रणनीति पर चर्चा होगी। इस बैठक के बाद पवार दिल्ली रवाना होंगे। नवाब मलिक ने ये भी बताया है कि मंगलवार यानी 19 नवंबर को कांग्रेस और एनसीपी नेताओं के बीच बैठक होनी है। जिसमें इस बात पर चर्चा होगी कि सरकार गठन में कांग्रेस शामिल होगी या नहीं। (आईएएनएस)
 


Date : 17-Nov-2019

नई दिल्ली/मुंबई, 17 नवंबर । शिवसेना 18 नवम्बर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व रविवार को दिल्ली में होने वाली राजग घटक दलों की बैठक में शामिल नहीं होगी। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने यहां पत्रकारों से कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से औपचारिक रूप से बाहर आना अब एक औपचारिकता रह गया है और उन्हें पता चला है कि शिवसेना के सांसद अब विपक्षी सांसदों के साथ बैठेंगे।
शिवसेना ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा राज्य में खरीद-फरोख्त में लिप्त होने की है। राउत ने कहा, मुझे पता चला है कि (राजग घटक दलों की) बैठक 17 नवम्बर को हो रही है। महाराष्ट्र में जिस तरह के घटनाक्रम हो रहे हैं, उसे देखते हुए हमने पहले ही बैठक में भाग लेने के खिलाफ फैसला कर लिया था। हमारे मंत्री ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या अब शिवसेना के राजग से बाहर आने की औपचारिक घोषणा होनी ही बाकी बची है तो राउत ने कहा आप ऐसा कह सकते हो। ऐसा कहने में कोई समस्या नहीं है।ज्ज् राउत ने यह भी कहा कि हमें पता चला है कि हमारे सांसदों के सदन में बैठने की जगह बदल दी गई है, जिसका अर्थ है कि शिवसेना के सांसद अब संसद में विपक्षी सांसदों के साथ बैठेंगे।
राउत ने कहा कि शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस महाराष्ट्र में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर आम सहमति पर पहुंच गयी हैं और दिल्ली में इस पर चर्चा की कोई जरूरत नहीं है। राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की रविवार (17 नवंबर) को दिल्ली में बैठक हो सकती है जिसमें सीएमपी और शिवसेना के साथ गठबंधन बनाने के अन्य तौर-तरीकों पर चर्चा हो सकती है।
इससे पूर्व दिन में शिवसेना के मुखपत्र च्सामनाज् में राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल के बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा गया। पाटिल ने शुक्रवार (15 नवंबर) को कहा था कि निर्दलीय विधायकों के समर्थन से उनकी पार्टी की संख्या 288 सदस्यीय सदन में 119 हो गई है और जल्द ही सरकार बनाई जायेगी। भाजपा के विधायकों की संख्या 105 है। मुखपत्र में कहा गया है जिनके पास 105 सीटें थीं, उन्होंने पहले राज्यपाल से कहा था कि उनके पास बहुमत नहीं है। अब वे कैसे यह दावा कर रहे है कि केवल वे ही सरकार बनायेंगे। खरीद-फरोख्त की उनकी मंशा अब उजागर हो गई है।
किसी भी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किये जाने के बाद 12 नवम्बर को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। भाजपा के साथ अपना गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना समर्थन के लिए कांग्रेस-राकांपा गठबंधन के पास पहुंची थी। शिवसेना ने 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में 56 सीटें जीती थी। भाजपा ने 288 सदस्यीय सदन में सबसे अधिक 105 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और राकांपा ने क्रमश: 44 और 54 सीटों पर विजय हासिल की थी। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के हवाले से कहा गया है कि भाजपा सरकार बनायेगी। भाजपा ने शनिवार (16 नवंबर) को यहां अपने पराजित उम्मीदवारों के साथ बैठक की। इसके बाद चंद्रकांत पाटिल ने पत्रकारों को बताया कि फड़णवीस ने विश्वास जताया है कि पार्टी सरकार बनायेगी।(लाइव हिंदुस्तान)
 


Date : 16-Nov-2019

कुमार अभिषेक
लखनऊ, 16 नवंबर। लखनऊ कैंट के सीओ को धमकी देने  के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्री स्वाति सिंह को तलब किया है। सीओ को धमकाने के मामले में सीएम योगी ने मंत्री स्वाति सिंह को 5 कालिदास पर बुलाया है। साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने डीजीपी से पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह का कथित ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह लखनऊ कैंट की सीओ डॉ। बीनू सिंह को धमकाती हुई सुनाई दे रही हैं। वीडियो वायल होने पर सीएम योगी ने स्वाति सिंह को फटकार लगाई, साथ ही मंत्री के व्यवहार पर नाराजगी भी जताई।
वायरल ऑडियो में स्वाति सिंह, सीओ पर एक महशूर बिल्डर के खिलाफ एफआईआर की जांच की वजह से गुस्से में थीं। ऑडियो में स्वाति सिंह मामले की बात आगे तक नहीं जाने और बिल्डर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का दबाब बना रही है।
ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑडियो में मंत्री स्वाति सिंह सीओ से यह भी कहती सुनाई दे रही हैं कि यहां काम करना है तो एक दिन बैठ लीजिए। (आज तक)
 


Date : 16-Nov-2019

मुंबई, 16 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार बनाने की शिवसेना की कोशिशें सफल होती तो दिख रही हैं और सरकार बनने की स्थिति में उसका मुख्यमंत्री भी बनता दिखाई दे रहा है, बावजूद इसके शिवसेना की एक इच्छा अधूरी रहने वाली है। शिवसेना चाहती थी कि 17 नबंवर को राज्य में सरकार का गठन हो जाए, ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है। इस लिहाज से ये दिन शिवसैनिकों के लिए काफी अहम है।
शिवसैनिकों की इस ख्वाहिश को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के बयान से झटका लगा है। शरद पवार ने कहा है कि सरकार बनाने में अभी वक्त लगेगा। शरद पवार ने समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन में अभी देर लगेगी। शरद पवार शुक्रवार को नागपुर में थे। यहां पर कांग्रेस विधायक नितिन राउत के घर पर उन्होंने ये बातें कही थी।
शिवसैनिक बने सीएम, बाला साहेब का सपना
बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना लगातार कहती आ रही है कि ये बाला साहेब का सपना था कि एक दिन एक शिवसैनिक महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनेगा। उद्धव ठाकरे कह चुके हैं कि उन्होंने बाला साहेब से वादा किया है कि एक दिन शिवसेना का सीएम होगा। इस वादे का हवाला देकर शिवसेना बीजेपी पर दबाव बना रही थी। हालांकि, बीजेपी के साथ उसकी डील नाकाम हो गई, तब शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी की ओर रुख किया।
कल फिर होगी सोनिया-शरद की मुलाकात
महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनाने के लिए तीनों दलों के बीच कई बार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बात हो चुकी है। लेकिन सियासत के इन तीन संभावित दोस्तों का आधार इतना विरोधाभासों से भरा है कि एक मुद्दा सुलझाते ही दूसरा खड़ा हो जाता है। इन तीनों दोस्तों के बीच एक दूसरे पर अविश्वास करने के कई कारण हैं तो एक दूसरे के बीच अनर्गल बयानबाजी का कड़वा इतिहास भी है। इस वजह से कई राउंड की बातचीत के बावजूद सरकार गठन का मामला डेड एंड में फंसा है। इस बीच शरद पवार रविवार को एक बार फिर से सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात में एक बार फिर से सरकार गठन की डील की शर्तों पर मंथन होगा।
इन तीनों दलों को सरकार गठन के लिए एक लाइन में लाना कितना मुश्किल है इसका अंदाजा कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी मल्लिकार्जुन खडग़े के उस बयान से लगाया जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेस अकेले मुद्दे नहीं सुलझा सकती है, दोनों नेताओं को साथ बैठना ही पड़ेगा। यहां पर दूसरे नेता से खडग़े का तात्पर्य शरद पवार से था। खडग़े ने एएनआई से कहा, सिर्फ कांग्रेस चीजें तय नहीं कर सकती है, एनसीपी चीफ शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रविवार को एक साथ बैठेंगे, इस दौरान आगे की कार्रवाई पर चर्चा होगी, ये लोग तय करेंगे कि समस्याएं कैसे सुलझाई जाएं, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई हो पाएगी।  
बीजेपी को अब भी उलटफेर का यकीन
इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद किनारे पड़ चुकी बीजेपी ने अब तक उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। शुक्रवार को बीजेपी ने कहा कि हमारे पास सबसे ज्यादा विधायक हैं हम राज्य को एक स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि बिना बीजेपी के महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं बन सकती। चंद्रकांत पाटील ने बीजेपी के पास 119 विधायकों के समर्थन का दावा किया, इसमें 105 बीजेपी के विधायक हैं जबकि 14 निर्दलीय के समर्थन का दावा उन्होंने किया है।
सरकार गठन के लिए 145 विधायक जरूरी
महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 विधायक हैं। यहां सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 105 सीटें आई हैं। जबकि शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं, एनसीपी के विधायकों की संख्या 54 है तो कांग्रेस के 44 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। अन्य विधायकों की संख्या 29 है। (आज तक)

 


Date : 16-Nov-2019

प्रफुल्ल मारपकवर/सुजीत महामूलकर 

मुंबई, 16 नवंबर । कांग्रेस और एनसीपी उद्धव ठाकरे को ही महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती हैं। कई सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने शिवसेना को भी कह दिया है कि वे उद्धव के अलावा उनकी पार्टी से कोई भी दूसरा चेहरा गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं चाहते हैं। दोनों दलों की तरफ से इस भावना का इजहार तब हुआ है जब कहा जा रहा है कि मातोश्री में शिवसेना के दिग्गज नेता सुभाष देसाई या फिर अपने विधायक दल के नेता और ठाणे के क्षत्रप एकनाथ शिंदे को सीएम उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने पर विचार हो सकता है। 
शिवसेना सार्वजनिक तौर पर कह चुकी है कि उसके पास मुख्यमंत्री के एक से ज्यादा उम्मीदवार हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि पार्टी की आम राय है कि ठाकरे ही सरकार की अगुआई करें। एक पार्टी विधायक ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि पार्टी के अंदर भी (ठाकरे के सिवा) किसी दूसरे नेता को एकमत से स्वीकार नहीं किया जा सकेगा। 
आदित्य ठाकरे पर सहमति की कितनी गुंजाइश 
वहीं, एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने हमारे सहयोगी अखबार से कहा, कांग्रेस और एनसीपी नेताओं ने बातचीत के दौरान शिवसेना को कह दिया कि (सरकार की) स्थिरता के लिए उद्धव को सीएम चुना जाना चाहिए। गठबंधन के सहयोगी इस बात पर अड़ सकते हैं, भले फॉर्म्युला ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का हो या फिर पूरे पांच साल का। कहा जा रहा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे खुद ही सीएम बनना नहीं चाहते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि पार्टी के दूसरे दिग्गज या फिर पहली बार विधायक चुने गए 29 वर्षीय आदित्य ठाकरे पर आम सहमति नहीं बन पाएगी। इनमें कोई भी गठबंधन के दोनों दलों को भी स्वीकार नहीं होंगे। 
इसलिए भी सबसे पसंदीदा हैं उद्धव 
कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण एवं पृथ्विराज चव्हाण और एनसीपी के दो पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार एवं छगन भुजबल इस बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। पूरी संभावना है कि गठबंधन सरकार में इन सबको नए मुख्यमंत्री के साथ बेहद करीबी से काम करना होगा। इस कारण भी उद्धव सर्वोच्च पसंदीदा उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं। पार्टी लीडरशिप कांग्रेस-एनसीपी पर दबाव बना रही है कि वे 17 नवंबर तक शिवसेनाके सीएम कैंडिडेट को समर्थन देने का ऐलान कर दें। उस दिन बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है। 
शिंदे और देसाई भी 
जब एकनाथ शिंदे को शिवसेना की तरफ से महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों का नेता चुना गया तो कयास लगाए जाने लगे कि उन्हें ही सीएम कैंडिडेट के तौर पर भी आगे किया जाएगा। वहीं सुभाष देसाई उनसे वरिष्ठ हैं और पार्टी के पुराने नेता हैं। वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ नई सरकार के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) तय करने वाली समिति में भी शामिल थे। 
शिवसेना के अंदर की आवाज 
उधर, शिवसेना नेता और विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरे ने टीओआई से कहा कि वह उद्धव को ही सीएम के तौर पर देखना चाहती हैं क्योंकि वह (उद्धव) दो दशकों से पार्टी का सफल संचालन कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी प्रेजिडेंट की खासियतों का बखान करते हुए कहा, उनका हर तरह के मुद्दे पर ध्यान रहता है और वह हरेक मुद्दे का तार्किक समाधान निकालते हैं। वह चाहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मसला हो या फिर किसानों की दयनीय हालत का। प्लास्टिक बैन से लेकर शिक्षा में सुधार को लेकर भी उनकी अपनी सोच है। वह शिव सैनिकों की पहली पसंद हैं। (नवभारत टाईम्स)


Date : 16-Nov-2019

नई दिल्ली, 16 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार बनाने की खींचतान के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य में सरकार बनाने को लेकर एक बड़ा दिया है। उन्होंने कहा कि चीजों को लेकर हमारा विजन क्लियर है। हम सिर्फ सरकार बनाने के लिए ही काम नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस और उससे जुड़ी हुई संस्थाएं राष्ट्र निर्माण के लिए काम करती रही हैं। नीतिन गडकरी सीधे तौर पर महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने आगे कहा कि हमारे लिए विचारधारा बेहद जरूरी है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी व्यक्तिगत संबंध भी हैं।
इससे पहले नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर कहा था कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है। कभी-कभी लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजे बिल्कुल इसके विपरीत आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह महाराष्ट्र की तुलना में दिल्ली की राजनीति से अधिक संबंधित हैं। नितिन गडकरी ने यह बात महाराष्ट्र आने के बाद की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कही। शिवसेना ने महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ अपना वर्षों पुराना नाता तोड़ दिया है और वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत में है। हालांकि नितिन गडकरी ने इस बात से इंकार किया कि एक गैर बीजेपी सरकार के आने से फडणवीस द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हमारे लोकतंत्र में सरकारें बदलती हैं लेकिन प्रोजेक्ट्स बिना किसी समस्या के चलते रहते हैं।
 इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसकी सरकार आती है। यह सकारात्मक नीतियों और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा जो पहले ही लॉन्च किए जा चुके हैं।(एनडीटीवी)

 


Date : 16-Nov-2019

मुंबई, 16 नवंबर । महाराष्ट्र में सरकार गठन की गहमागहमी के बीच शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी पर शायराना अंदाज में तंज किया है। शिवसेना नेता संजय राउत ने ट्वीट किया है कि यारों नए मौसम ने ये एहसान किया है, याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते। राउत का यह ट्वीट ऐसे वक्त में आया है जब शिवसेना बीजेपी से 30 साल पुराना रिश्ता खत्म कर चुकी है और अब प्रतिद्वंदी रही कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने जा रही है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को घोषित किए गए थे। लेकिन उसके बाद मुख्यमंत्री पद पर बीजेपी और शिवसेना में रार हो गई। शिवसेना जहां ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद बांटना चाह रही थी। वहीं बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं हुई। इसके बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए और शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कवायद में जुट गई।
हालांकि इससे पहले भी कई बार संजय राउत बीजेपी पर हमला बोल चुके हैं। गुरुवार को उन्होंने बीजेपी से कहा था कि वह उन्हें डराने या धमकाने की कोशिश न करें और शिवसेना को अपना राजनीतिक रास्ता चुनने दे। राउत ने कहा था कि हम मरने और लडऩे को तैयार हैं। लेकिन जबरदस्ती या धमकी की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राउत बीजेपी चीफ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीते लोकसभा चुनाव से पहले बंद दरवाजों के पीछे सत्ता के बंटवारे के फॉर्मूले पर की गई टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे।
राउत ने कहा, मैंने सुना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि देवेंद्र फडणवीस ही महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री होंगे।यहां तक कि सेना भी बार-बार दोहरा रही है कि उनका मुख्यमंत्री ही शपथ लेगा। वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि मुख्यमंत्री के पद के साथ ही सेना को 50-50 की सत्ता-साझेदारी मिलने की बात हुई थी।
लेकिन शाह और फडणवीस ने इसे खारिज कर दिया और ठाकरे को झूठा बता कर उन पर बीजेपी के साथ गठबंधन खत्म करने का आरोप लगा दिया। राउत ने कहा था, आपने बंद दरवाजे के पीछे लिए गए फैसलों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी क्यों नहीं दी? चुनाव परिणाम आने तक साझेदारी से मना करने के लिए आप अब तक चुप क्यों रहे? उन्होंने कहा था कि बीजेपी हमेशा से बंद दरवाजों के पीछे लिए गए फैसलों को जनता के सामने लाने से मना करती है, लेकिन अगर उन्होंने अपने शब्द और वादे पूरे किए होते, तो मामला कभी भी खुलकर सामने नहीं आता।(आज तक)


Date : 14-Nov-2019

मुंबई, 14 नवंबर। महाराष्ट्र में मचे सियासी घमासान के बीच शिवसेना नेता संजय राउत का बड़ा बयान आया है। संजय राउत ने कहा है कि बीजेपी ने चुनाव से पहले रोटेशन सीएम की बात कही थी। इसके लिए राउत ने बाला साहेब की कसम खाई है। संजय राउत ने कहा कि जिस कमरे से बाला साहेब ने हमेशा हिंदुत्व को आशीर्वाद दिया, उस कमरे से हमेशा बाला साहेब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देते रहे।
संजय राउत ने कहा कि बाला साहेब के कमरे में बैठकर उद्धव ठाकरे और अमित शाह ने महाराष्ट्र की राजनीति पर चर्चा की थी। हमारे लिए वह कमरा मंदिर है। अगर कोई कहता है कि रोटेशनल सीएम पर बात नहीं हुई तो ये मंदिर, बाला साहेब और महाराष्ट्र का अपमान है। हम झूठ नहीं बोलेंगे, बाला साहेब की कसम खाकर। अगर आप इनकार कर रहे हैं तो बताइए बंद कमरे के अंदर क्या बात हुई थी।
राउत ने कहा कि इस बार हम पिछड़े नहीं हट रहे हैं। हमने कभी राजनीति को बिजनेस नहीं बनाया। यदि बैठकों में चर्चा नरेंद्र मोदी से होती, तो ऐसा नहीं होता। संजय राउत ने कहा, हर सभा में नरेंद्र मोदी कहते रहे फडणवीस सीएम होंगे। हर सभा में उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमारा सीएम होगा, ऐसे में अमित शाह उस समय चुप क्यों थे। अब वे कुछ और कह रहे हैं, यह नैतिकता नहीं है।
राउन ने कहा, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। हालांकि, अमित शाह और उद्धव ठाकरे के बीच बैठक में क्या कुछ चर्चा हुई यह बंद कमरे की बात है और हमें लगता है कि बैठक में हुई चर्चा की पूरी जानकारी मोदी जी को नहीं दी गई। अब अमित शाह कह रहे हैं कि कि बंद कमरे में हुई बैठक की जानकारी को सभी से नहीं बताया जा सकता। हम कहते हैं कि महाराष्ट्र के लोगों को मूर्ख मत बनाओ। अमित शाह अपनी बातों पर कायम रहे।
संजय राउत ने कहा, मोदी जी प्रधानमंत्री हैं और हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने बालासाहेब के साथ अलग व स्पेशल रिश्ता साझा किए हैं।  कुछ लोग चाहते हैं कि उद्धव और मोदी जी के बीच अच्छा रिश्ता टूट जाए और इसलिए मैं यह सारी जानकारी आपके सामने रख रहा हूं। अब अमित शाह स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि असल में क्या चर्चा हुई थी, लेकिन उन्हें हमें धमकी नहीं देनी चाहिए। (आजतक)

 


Date : 14-Nov-2019

मुंबई, 14 नवंबर। महाराष्ट्र में सियासत की धुरी माने जाने वाला मातोश्री (शिवसेना प्रमुख का निवास) इन दिनों नेताओं के चहल-पहल और बनते बिगड़ते समीकरणों से दूर हो गया है। कभी बाला साहब ठाकरे यहां से महाराष्ट्र के अलावा देश की राजनीति में भी अपना दखल रखते थे। बड़े-बड़े नेता उनसे मिलने मातोश्री में ही आते थे। लेकिन अब महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा भूचाल आया है कि शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे को सियासी उलझन को सुलझाने के लिए मुंबई के होटलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ठाकरे परिवार से मुख्यमंत्री  बनाने की चाहत में उन्हें अब मातोश्री के बाहर पैर रखना पड़ रहा है। इसके साथ ही शिवसेना और बीजेपी का दशकों पुराना रिश्ता भी अब करीब-करीब टूटता नजर आ रहा है।
उद्धव ने मातोश्री से बाहर कदम रखने के साथ ही कई होटलों के चक्कर काटे। होटल रंग शारदा और रिट्रीट मलाड, जहां शिवसेना की विधायकों की रखा गया था, वहां तो वो आधी रात को भी पहुंचे। सूत्रों के अनुसार सरकार बनाने की चाह में उद्धव होटल ताज लैंड जा कर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मिले, वहीं होटल ट्राइडेंट बांद्रा में जाकर वो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से भी मिले लेकिन इस पूरे समय में कोई भी मातोश्री नहीं पहुंचा।
एक जमाने में ठाकरे परिवार को किंग मेकर कहा जाता था। लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि उद्धव ठाकरे किंग मेकर से किंग बनने की राह पर चल पड़े हैं। इसी फेर में वो अब कांग्रेस और एनसीपी के सियासी दांव-पेंच में पडक़र बीजेपी से भी नाता तोडऩे में लगे हैं। लेकिन किंग की कुर्सी तक पहुंचने की राह अभी भी आसान नहीं लग रही है। कांग्रेस और एनसीपी के पुराने आपसी पेंच इतने हैं कि उन्हें सुलझाने में काफी समय लगेगा। इसका यह साफ मतलब है कि महाराष्ट्र में सरकार इतनी आसानी से और जल्दी नहीं बन सकेगी। ऐसे में किंग की कुर्सी को लेकर भी असमंजस बना रहेगा।
बीजेपी और शिवसेना के बीच जिस दौरान ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री वाले फॉर्मूले को लेकर खींचतान चल रही थी, उस दौरान एनसीपी ने शिवसेना को सरकार बनाने का प्रलोभन दिया। साथ ही कह दिया था कि पांच साल के लिए सीएम शिवसेना का ही हो सकता है। हालांकि शरद पवार ने कभी भी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। अब खबर है कि कांग्रेस और एनसीपी ने भी ढाई-ढाई साल के सीएम की शर्त शिवसेना के सामने रख दी है। यदि कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना की मिलीजुली सरकार बनती भी है तो किंग की कुर्सी तो उद्धव के हाथ में सिर्फ ढाई साल के लिए ही आती दिखेगी।
कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को छह दिन बाद जयपुर से वापस महाराष्ट्र बुला लिया है और उन्हें उनके गांव भेज दिया गया है। लेकिन बताया जा रहा है कि इससे पहले उनसे एनसीपी के समर्थन वाले पत्र पर दस्तखत करवा लिया गया है। वहीं अब खबर ये भी है कि कांग्रेस-एनसीपी की बैठक के दौरान ही किसी बात पर अजीत पवार नाराज हो गए और बीच में उठकर वहां से चले गए। ऐसे में अभी सरकार बनने में कुछ और समय दिखाई दे रहा है। इधर चोट खाई बीजेपी भी पुरजोर कोशिश में है कि सरकार बनाने के लिए आखिरी दांव तक चलाया जाए। (न्यूज18)
 


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