राजनीति

Date : 25-Jun-2019

नयी दिल्ली, 24 जून। राजग सरकार को ‘‘ऊंची दुकान फीके पकवान’’ करार देते हुए विपक्ष ने लोकसभा में सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बड़े सेल्समैन’ हैं तथा राजग सरकार को अपनी प्रशंसा सुनने का ‘‘नशा’’ है, वहीं केंद्रीय मंत्री प्रताप चंद षडंगी ने कहा कि विपक्ष को जनादेश को स्वीकार करना चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए षडंगी ने अपने लगभग एक घंटे के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की और बीच-बीच में विपक्षी सदस्यों ने टोका-टोकी भी की। 
ओडिशा से पहली बार लोकसभा में पहुंचे षडंगी ने कहा कि जो वंदे मातरम को नहीं मानते क्या उन्हें भारत में रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि देश में ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले, केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री प्रताप चंद षडंगी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए कहा कि कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले पांच साल के कार्यकाल में किये गये कामकाज की सफलता को स्वीकार कर उनका अभिनंदन करना चाहिए और खुद को जनता द्वारा नकार दिये जाने पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
षडंगी ने कहा कि जनता ने भाजपा के लिए मतदान किया और साबित किया कि यह सरकार जो कहती है, वो करती है तथा जो कर सकती है, वही कहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सरकार बनने के बाद ही कहा था कि वह प्रधान सेवक हैं और यह सरकार गरीबों के लिए है। उन्होंने इस बात का पालन करके दिखाया है। 
चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बड़े सेल्समैन’ हैं तथा राजग सरकार को अपनी प्रशंसा सुनने का ‘‘नशा’’ है और वह अतीत की कांग्रेस सरकारों की उपलब्धियों को स्वीकार नहीं करना चाहती है। चौधरी ने यह भी दावा किया मौजूदा सरकार अतीत की कांग्रेस सरकारों की उपलब्धियों को स्वीकार नहीं करना चाहती है। 
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि संप्रग सरकार के समय आर्थिक विकास की दर आठ फीसदी से अधिक थी, जबकि इस सरकार में विकास दर छह फीसदी से नीचे आ गई और बेरोजगारी भी 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा, ‘‘राजग सरकार की नयी पहचान, ऊंची दुकान और फीका पकवान।’’ उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं के विवादित बयानों का हवाला दिया और कहा कि एक तरफ सरकार महात्मा गांधी का 150वां जन्मदिवस मनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के कुछ लोग बापू के हत्यारे गोडसे की तारीफ करते हैं। यह कैसा दोहरा मापदंड है? 
भाजपा की हिना गावित ने कहा कि हाल ही में सम्पन्न चुनाव में महिलाओं एवं युवाओं ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को निर्णायक समर्थन दिया है। द्रमुक के टी आर बालू ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केवल एक ‘कंपनी का विवरण’ लगता है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि जब तक गृह मंत्री (अमित शाह) पश्चिम बंगाल की सरकार को परामर्श भेजते रहेंगे तब तक उनकी पार्टी प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग नहीं लेगी। राय ने लोकसभा चुनावों के परिणामों पर संदेह जताते हुए कहा कि ईवीएम में छेड़छाड़ का हमारा आरोप बरकरार है और सरकार को चुनाव मतपत्रों से कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इतने महापुरुषों का उल्लेख किया गया लेकिन प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम नहीं लिया गया। इसमें एक भी बार धर्मनिरपेक्षता शब्द का उपयोग नहीं किया गया। (भाषा)
 


Date : 25-Jun-2019

आशीष पांडेय  
आदिलाबाद, 25 जून। तेलंगाना के अदिलाबाद से बीजेपी सांसद सोयम बापू राव ने मुस्लिम युवकों को गला काटने की धमकी दी है। बीजेपी सांसद का आरोप है कि आदिवासी जिले में मुस्लिम युवक आदिवासी महिलाओं का उत्पीडऩ कर रहे हैं और वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। धमकी देने के मामले में अल्पसंख्यक नेताओं ने बीजेपी सांसद सोयम बाबू राव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
अल्पसंख्यक नेता साजिद खान ने अदिलाबाद एसीपी कंचा मोहन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। साजिद खान ने इस बयान को गलत बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सोयम बापू के बयान पर टीआरएस नेता एम. कृषक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की बात करते हैं लेकिन उन्हीं के सांसद विवादित बयान देकर तेलंगान में बीजेपी का रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोयम बापूराव इससे पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति और कांग्रेस में रह चुके हैं। साल 2004 में टीआरएस के टिकट पर बोथ सीट से चुनाव जीते लेकिन बाद में कांग्रेस में चले गए। 2018 में विधानसभा चुनाव में वे हार गए। बीजेपी ने उन्हें टिकट देने का आश्वासन दिया जिसके बाद उन्होंने इस साल मार्च महीने में बीजेपी ज्वॉइन कर ली। अदिलाबाद अनुसूचित जनजाति रिजर्व सीट है।
एक दिन पहले रविवार को करीमनगर से बीजेपी सांसद बांदी संजय और अदिलाबाद सांसद सोयम बापू राव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर के। चंद्रशेखर राव सरकार पर हमला बोला और कानून व्यवस्था की हालत को लचर बताया। दोनों नेताओं का आरोप था कि टीआरएस के नेता पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग कर बीजेपी नेताओं पर हमले बोल रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि दिनों दिन तेलंगाना में बीजेपी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ये हमले लोकसभा और पंचायत चुनावों के बाद बढऩे के आरोप लगाए गए।  (आजतक)
 

 


Date : 24-Jun-2019

लखनऊ 24 जून। लोकसभा चुनाव में गठबंधन की हार का ठीकरा समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर मढऩे के अगले दिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को सभी छोटे बड़े चुनाव अकेले दम पर लडऩे का एलान किया।
सुश्री मायावती ने ट््वीट कर कहा- वैसे भी जगजाहिर है कि सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरूद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया।
परन्तु लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है। अत: पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी।
उन्होंने एक अन्य ट््वीट में मीडिया की भूमिका पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा- बीएसपी की आल इण्डिया बैठक कल लखनऊ में ढाई घण्टे तक चली। इसके बाद राज्यवार बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा जिसमें भी मीडिया नहीं था। फिर भी बीएसपी प्रमुख के बारे में जो बातें मीडिया में फ्लैश हुई हैं वे पूरी तरह से सही नहीं हैं जबकि इस बारे में प्रेसनोट भी जारी किया गया था।
गौरतलब है कि बसपा की रविवार को हुई राष्ट्रीय बैठक में सुश्री मायावती ने एक देश एक चुनाव के मसले पर जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लिया था वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर आरोप लगाया था कि उन्होने मुसलमानो को टिकट देने में आपत्ति जतायी थी। उन्होंने कहा था कि सपा के शासनकाल में दलित और पिछड़ो पर हुई ज्यादती का खामियाजा भी गठबंधन की हार का सबब बना था। (वार्ता)
 


Date : 24-Jun-2019

नई दिल्ली, 24 जून । लोकसभा चुनाव से पहले जब सपा और बीएसपी के गठबंधन का ऐलान हो रहा था तो उस दिन मायावती और अखिलेश यादव के हावभाव को देखकर ऐसा लग रहा था कि अब यह दोनों पार्टियां मिलकर लंबे समय तक राजनीति करेंगी। अंकगणित भी उनके पक्ष में था और गोरखपुर-फूलपुर-कैराना के उपचुनाव में मिली जीत से उत्साह चरम पर था। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों ही नेता जमीनी हकीकत को भांप नहीं पाए और करारी हार का सामना करना पड़ गया। इस हार के साथ ही गठबंधन भी बिखर गया है। सपा को जहां 5 सीटें मिली हैं वहीं बीएसपी को 10 सीटें। एक तरह से देखा जाए तो बीएसपी को ज्यादा फायदा हुआ है क्योंकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी को एक भी सीट नहीं मिली थी। दूसरी ओर सारे समीकरणों को ध्वस्त करते हुए बीजेपी 62 सीटें कामयाब हो गई। इस हार के साथ ही बीएसपी सुप्रीमो मायावती सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर ले लिया और कहा कि सपा अपने कोर वोट यादवों का भी समर्थन नहीं पा सकी और यही वजह है कि उनकी पत्नी चुनाव हार गईं। इतना ही नहीं मायावती ने उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर होने वाले विधानसभा उप चुनाव में भी अकेले लडऩे का ऐलान कर डाला। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव से उनके रिश्ते पर व्यक्तिगत तौर पर अच्छे हैं। वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव अभी तक पूरी तरह से सधे और रक्षात्मक बयान दे रहे हैं। लेकिन रविवार को हुई बीएसपी की एक अहम बैठक में मायावती ने रही-सही कसर भी पूरी कर डाली और उन्होंने अपने बयान से जाहिर कर दिया कि उनकी नजर में अब अखिलेश यादव की कोई अहमियत नहीं है।
गठबंधन के चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने मुझे फोन नहीं किया। सतीश मिश्रा ने उनसे कहा कि वे मुझे फोन कर लें, लेकिन फिर भी उन्होंने फोन नहीं किया। मैंने बड़े होने का फर्ज निभाया और काउंटिग के दिन 23 तारीख को उन्हें फोन कर उनके परिवार के हारने पर अफसोस जताया।
तीन जून को जब मैंने दिल्ली की मीटिंग में गठबंधन तोडऩे की बात कही तब अखिलेश ने सतीश चंद्र मिश्रा को फोन किया, लेकिन तब भी मुझसे बात नहीं की। 
अखिलेश ने मिश्रा से मुझे मैसेज भिजवाया कि मैं मुसलमानों को टिकट न दूं, क्योंकि उससे और ध्रुवीकरण होगा, लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी। 
मुझे ताज कॉरिडोर केस में फंसाने में बीजेपी के साथ मुलायम सिंह यादव का भी अहम रोल था। अखिलेश की सरकार में गैर यादव और पिछड़ों के साथ नाइंसाफी हुई, इसलिए उन्होंने वोट नहीं किया। 
समाजवादी पार्टी ने प्रमोशन में आरक्षण का विरोध किया था इसलिए दलितों, पिछड़ों ने उसे वोट नहीं दिया।
बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को सलीमपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के विधायक दल के नेता राम गोविंद चौधरी ने हराया। उन्होंने सपा का वोट बीजेपी को ट्रांसफर करवाया, लेकिन अखिलेश ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। (एनडीटीवी)
 


Date : 24-Jun-2019

बिकेश तिवारी  
नई दिल्ली, 24 जून । बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने चंद दिन पहले तक अपने गठबंधन सहयोगी रहे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर मुसलमानों को टिकट देने से मना करने का आरोप लगाया है। मायावती ने कहा है कि अखिलेश ने मुझे संदेश भिजवाया कि मुसलमानों को ज्यादा टिकट नहीं दूं। इसके पीछे धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण होने का तर्क दिया गया। हालांकि मैंने उनकी बात नहीं मानी।  
मायावती के इस बयान से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की सियासत में मुसलमान सियासी विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। खुद को मुसलमानों की हितैषी बताती रही समाजवादी पार्टी सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या सपा वास्तव में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुसलमानों की भागीदारी की विरोधी है? सपा के अध्यक्ष ने आखिर मायावती से मुसलमानों को ज्यादा टिकट न देने के लिए क्यों कहा, सियासी गलियारों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीति से जुड़े लोगों के साथ ही राजनीति के जानकार और गैर राजनीतिक व्यक्ति भी अपने-अपने हिसाब से बसपा सुप्रीमो के इस वक्तव्य की व्याख्या कर रहे हैं। कोई अखिलेश को कठघरे में खड़ा कर रहा है तो कोई इसे मायावती की सियासी माया बता रहा है। सबके अपने-अपने तर्क भी हैं।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 2014 और 2017 का चुनाव परिणाम नहीं भूल पाए होंगे। राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी कहते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में तब भाजपा के प्रचार अभियान की अगुवाई कर रहे प्रधानमंत्री पद के तत्कालीन उम्मीदवार (अब प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी अपने संबोधनों में खुलकर कहा करते थे कि चुनाव में हार मंजूर है, लेकिन तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करूंगा। तब मोदी की लहर में ऐसा पहली बार हुआ जब लोकसभा में प्रदेश के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य था। तिवारी ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश के नारे, काम बोलता है, पर भाजपा का रमजान में बिजली मिलेगी तो दीपावली पर भी, कब्रिस्तान और श्मशान के मुद्दे भारी पड़े थे। ऐसे में अखिलेश का वोटों के धु्रवीकरण से भयभीत होना लाजमी भी है।
मायावती सपा प्रमुख द्वारा मुसलमानों को ज्यादा टिकट देने से मना किए जाने और इसे न मानने का दावा कर स्वयं को मुस्लिम हितैषी सिद्ध करने की कोशिश कर रही हैं, दूसरी तरफ आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। लोकसभा चुनावों के ही पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सोशल इंजीनियरिंग की माहिर मानी जाने वाली मायावती मुसलमानों को लुभा दलित-मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश पहले से ही करती रही हैं।
हाल ही में संपन्न 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने 10 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। बसपा से छह और सपा से चार मुस्लिम चेहरे चुनावी रणभूमि में ताल ठोक रहे थे। इनमें से दोनों ही दलों के तीन-तीन, कुल छह उम्मीदवार चुनाव जीत कर संसद पहुंचने में सफल रहे।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ, जब बसपा ने सपा से अधिक मुसलमानों को टिकट दिया। बसपा ने 2014 में 19, 2009 में 14 और 2004 में 20 मुस्लिमों पर दांव लगाया था, जबकि सपा ने 14, 11 और 12 मुसलमानों को ही टिकट दिया था।
मायावती की अखिलेश के साथ दोस्ती करने के पीछे सबसे बड़ी वजह मुस्लिम मतदाता रहे। सूबे का मुस्लिम मतदाता बसपा से ज्यादा सपा को तवज्जो देता रहा है। मायावती ने मुस्लिमों को अपने पाले में लाने के लिए कई तरह का प्रयोग किया। इसके बाद भी मुस्लिम मतदाता बसपा की तुलना में सपा को ही ज्यादा अहमियत देते रहे। ऐसे में लोकसभा चुनाव में दोनों के बीच गठबंधन हुआ तो बसपा ने सीट बटवारें में उन सीटों को लिया जो मुस्लिम और दलित समीकरण से जीती जा सकती हैं। 38 सीटें में 24 सीटें ऐसी थीं, जिन पर दलित मुस्लिम और बसपा कैडर का पूर्व चुनावों में प्रभाव देखा गया था। इसका फायदा भी मायावती को मिला और 38 सीटों में 10 सीटें जीतने में सफल रहीं। 
राजनीति के जानकारों की मानें तो देश के सबसे बड़े सूबे की चार दफे मुख्यमंत्री रहीं मायावती उत्तर प्रदेश की राजनीति का मोह नहीं छोड़ पा रहीं। चुनाव से पूर्व गठबंधन के समय यह तय हुआ था कि माया केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहेंगी, वहीं अखिलेश प्रदेश की राजनीति में। माया को यह भरोसा है कि उनके बेस वोटर दलित के साथ मुस्लिमों का साथ मिल जाए तो वह पांचवी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं। ठीक वैसे ही, जैसे 2007 में वह ब्राम्हण-दलित समीकरण के सहारे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर कर भी  चुकी हैं। (आजतक)
 


Date : 22-Jun-2019

नई दिल्ली, 22 जून । गृह मंत्री अमित शाह ने योग दिवस पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट को लेकर उन पर हमला बोला है। शाह ने कहा कि यह सुरक्षा बलों का अपमान है। दरअसल राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट के जरिए बीजेपी के ‘न्यू इंडिया’ पर तंज कसा था।
अमित शाह ने लिखा, कांग्रेस नकारात्मकता के साथ खड़ी है। आज उनकी नकारात्मकता दिखी कि उन्होंने ट्रिपल तलाक को साफ तौर पर समर्थन किया। अब वे योग दिवस का मजाक उड़ा रहे है और हमारे सुरक्षाबलों का अपमान कर रहे हैं। उम्मीद करता हूं कि सकारात्मकता के भाव की जीत होगी। ये मुश्किल से मुश्किल चुनौती से उबरने में मदद कर सकती है।
वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, राहुल गांधीजी आपके पूरे सम्मान के साथ बताना चाहता हूं कि ये भारतीय सेना के अहम सदस्य हैं। देश की सुरक्षा में इनका अहम योगदान होता है। जब कोई हमारी सेना का अपमान करता है तो यही प्रार्थना की जा सकती है कि हे भगवान सद्बुद्धि दे।
राहुल गांधी ने एक तस्वीर ट्वीट कर योग दिवस का मजाक उड़ाया है। राहुल गांधी ने आर्मी डॉग यूनिट की एक तस्वीर शेयर की है। इस तस्वीर में जवानों के साथ कुत्ते भी योग करते हुए दिख रहे हैं। राहुल ने तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है ‘न्यू इंडिया’। राहुल गांधी के इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना भी हो रही है।
राहुल गांधी के इस ट्वीट को लेकर बीजेपी के अन्य नेता भी उनकी आलोचना करते दिखे। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा के जरिए राहुल गांधी के इस ट्वीट पर जवाब दिया गया है। उन्होंने ट्वीट किया-हर डॉग सिर्फ एक पीडी नहीं है जो केवल गांधी परिवार के लिए ट्वीट करे। ये सिर्फ डॉग्स नहीं हैं। ये वो हैं जो हमारे भारत के लिए लड़ते हैं। उन्हें सलाम
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी ट्वीट पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, जब अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस कर रहे हैं तब इस तरह का कांग्रेस के जरिए ट्वीट करना कांग्रेस की मानसिकता, उनकी हताशा और जनता से कितने कटे हैं यह दर्शाता है। इसीलिए इस पर कोई ज्यादा टिप्पणी करने की जरूरत नहीं। हर कोई अपने लेवल पर सही कमेंट करता है। (एबीपी न्यूज)
 


Date : 21-Jun-2019

बेंगलुरु, 21 जून । लोकसभा चुनाव में तुमकुरु से मिली हार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच डी देवेगौड़ा ने अपने एक बयान में कर्नाटक विधानसभा के लिए मध्यावधि चुनाव की संभावना के संकेत दिए हैं। 
श्री देवेगौड़ा ने शुक्रवार को पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपने आवास पर एक योग कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस में इस बात को लेकर संशय बढ़ रहा है कि यदि पार्टी जेडीएस के साथ रहेगी तो कर्नाटक में उसका जनाधार कमजोर हो सकता है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार बनाने के लिए वह कांग्रेस के दरवाजे पर नहीं गए थे। उन्होंने खुलासा किया, मैंने कांग्रेस नेताओं को गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने के लिए मल्लिकार्जुन खडग़े के नाम का सुझाव दिया था , किंतु उन्होंने मेरे बेटे एच डी कुमारस्वामी के लिए जोर डाला। (वार्ता)
 

 


Date : 20-Jun-2019

नई दिल्ली, 20 जून । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि आज भी उनका वही रुख है कि राफेल विमान सौदे में चोरी हुई है। संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद, बाहर आते हुए गांधी ने संसद भवन में यह टिप्पणी की। अभिभाषण के बारे में पूछे जाने पर गांधी ने कहा, मेरा रुख आज भी वही है कि राफेल विमान सौदे में चोरी हुई है। (एनडीटीवी)
 


Date : 20-Jun-2019

नई दिल्ली, 20 जून । ब्रिटेन स्थित चर्चित रैपर हार्ड कौर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की आलोचना करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। हार्ड कौर का असली नाम तरन कौर ढिल्लन है।
वाराणसी में वकील शशांक शेखर द्वारा आईपीसी सेक्शन 124ए (देशद्रोह), 153 (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 500 (मानहानि) और 505 (भडक़ाने की कोशिश) और आईटी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज कराया गया है।
नवभारत टाइम्स ने लिखा है कि कि शेखर आरएसएस के सदस्य हैं। कौर के फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज पर आदित्यनाथ को ‘रेपमैन’ और हेमंत करकरे की मौत के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए पोस्ट लिखा गया है। करकरे 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे।
शेखर ने अपनी शिकायत में कहा कि वो कौर की टिप्पणियों की वजह से काफी ज्यादा आहत हुए हैं। अमर उजाला ने एक पुलिस निरीक्षक के हवाले से लिखा, इस मामले की जांच अपराध शाखा के निगरानी सेल को सौंपी जा रही है।
मालूम हो कि हार्ड कौर बॉलीवुड के विभिन्न गानों में अपने पंजाबी रैप गायकी के लिए जानी जाती हैं। यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ राजद्रोह कानून लगाया जा रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार कहा गया है कि ऐसा करना इस कानून का दुरुपयोग है।
हाल ही में, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जोर देकर कहा कि उन लोगों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप को रद्द किया जाना चाहिए जिन्होंने सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना की थी। (टाइम्स ऑफ इंडिया)

 


Date : 19-Jun-2019

नई दिल्ली, 19 जून।  लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कराने सहित अन्य मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद भवन परिसर में बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया। 'एक देश एक चुनाव' समेत कई मद्दों पर हुई इस सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता पीए मोदी ने की। संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को बैठक में बुलाया गया था। दोपहर बाद शुरू हुई बैठक में राजग के घटक दल शिवसेना के अध्यक्ष राज ठाकरे पार्टी का स्थापना दिवस होने के कारण शामिल नहीं हो सके। 
बैठक में मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार, आरपीआई अध्यक्ष रामदास अठावले और अपना दल अध्यक्ष आशीष पटेल भी शामिल हुये। 
गैर राजग दलों में बीजद के अध्यक्ष नवीन पटनायक, एआईएमाईएम के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी, पीपीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेशनल कान्फ्रेंस अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी भी शामिल हुये। 
सूत्रों के अनुसार बैठक के पांच सूत्री एजेंडे में 'एक देश एक चुनाव' और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अलावा संसद के दोनों सदनों में कामकाज का स्तर बढ़ाने, आजादी की 75वें सालगिरह पर नया भारत बनाने की कार्ययोजना और विकास की दौड़ में शामिल चुनिंदा जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा शामिल है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बसपा और सपा सहित अन्य गैर राजग दलों ने 'एक देश एक चुनाव' के मुद्दे पर असहमति जताते हुये बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। 
बैठक के एजेंडे में पहला मुद्दा संसद के दोनों सदनों में कामकाज को बढ़ाने का है। दूसरा मुद्दा 'एक देश एक चुनाव' है। एजेंडे में तीसरे स्थान पर आजादी के 75 साल पूरे होने पर नये भारत के निर्माण की कार्ययोजना और चौथे स्थान पर 150वीं गांधी जयंती के आयोजन की रूपरेखा शामिल किया है। बैठक के एजेंडे का पांचवां मुद्दा विकास की दौड़ में शामिल किए गये चुनिंदा आकांक्षी जिलों में विकास कार्यो पर चर्चा शामिल है। (लाइव हिंदुस्तान)


Date : 18-Jun-2019

नई दिल्ली, 18 जून। कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक इतिहास की लगातार दो शर्मनाक हार झेली हैं। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हैं, तो वहीं कार्यकर्ता सोच रहे हैं कि आखिर इस स्थिति से कैसे बाहर निकला जाए। इधर लोकसभा का सदन भी शुरू हो गया है। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ता ने एक पोस्टर निकाला है, जिसमें यूपीए चेयरपर्सन और पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की तुलना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से की गई है।

ये पोस्टर प्रयागराज कांग्रेस के कार्यकर्ता हसीब अहमद ने छपवाया है। पोस्टर में सोनिया गांधी को झांसी की रानी दर्शाया गया है। उनके अलावा पोस्टर में राहुल-प्रियंका-राजीव-इंदिरा गांधी, प्रमोद तिवारी और कुछ अन्य नेताओं की तस्वीर है। तस्वीर पर जो लिखा है वह भी खास है।
इसमें लिखा गया है, 'चमक उठी सन 91 में वो तलवार पुरानी है, खूब लड़ी मर्दानी वो तो इंदिरा, राजीव की रानी हैÓ। आपको बता दें कि हसीब अहमद, प्रयागराज के कार्यकर्ता हैं और पोस्टर बॉय के तौर पर ही जाने जाते हैं। अक्सर उनके द्वारा बनाए गए पोस्टर मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहते हैं।
फिर चाहे प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस में लाने की मांग हो, राहुल गांधी को भावी प्रधानमंत्री बताना हो या फिर ऐसी कई मांगें जिन्हें कार्यकर्ता पूरी करवाना चाहते हैं। हाल ही में हसीब ने राहुल गांधी को एक खुला खत भी लिखा था। राहुल गांधी जब अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़ गए थे, तब उन्होंने एक खत जारी कर लिखा था कि राहुल की अगुवाई में पार्टी आगे बढ़ी है और जमकर लड़ी है। इसलिए अगर उन्होंने इस्तीफा दिया तो कई कार्यकर्ता आत्महत्या कर लेंगे।
कांग्रेस को लगातार 2 बार लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। 2014 के चुनाव में 44 तो इस बार सिर्फ 52 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस के पास इतने नंबर भी नहीं है कि उसे लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद मिल सके। पिछली लोकसभा में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। (आजतक)


Date : 18-Jun-2019

नई दिल्ली, 18 जून। भाजपा के दो बार के सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के अध्यक्ष पद के लिए राजग के प्रत्याशी होंगे। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। राजस्थान में कोटा-बूंदी संसदीय सीट से जीतने वाले बिड़ला नामित होने पर आसानी से अध्यक्ष बन जाएंगे क्योंकि सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है।
लोकसभा स्पीकर पद के लिए बीजेपी के ओम बिड़ला की उम्मीदवारी के बारे में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि हमने कांग्रेस से बात की है, उन्होंने प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए हैं, लेकिन वे विरोध नहीं किया। मैंने गुलाम नबी आजाद से मुलाकात की है।
लोकसभा स्पीकर पद के लिए बीजेपी के ओम बिड़ला की उम्मीदवारी के बारे में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री, परिवहन मंत्री ने प्रस्तावित किया। बीजेडी, शिवसेना, एनपीपी, एमएनफ, अकाली दल, एलजेपी, वाईएसआरसीपी, जेडीयू, एआईएडीएमके तथा अपना दल ने प्रस्ताव पर दस्तखत कर दिए हैं।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि हमने कांग्रेस से बात की है। उन्होंने अभी तक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन वो इसका विरोध भी नहीं करेंगे। मैंने गुलाब नबी आजाद से मुलाकात की है।
एनपीपी, मिजो नेशनल फ्रंट, लोक जनशक्ति पार्टी, वाईएसआरसीपी, जेडीयू, एआईएडीएमके, अपना दल आदि ने ओम बिड़ला को अपना समर्थन दिया।
बीजेपी सांसद ओम बिड़ला 57 वर्षीय हैं और राजस्थान से तीन बार विधायक और दो बार सांसद रहे हैं। ओम बिड़ला आज दोपहर 12 बजे नामांकन दाखिल करेंगे। एएनआई के अनुसार, ओम बिड़ला को बीजू जनता दल का साथ मिला है।
जब इस बारे में ओम बिड़ला से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं एक कार्यकर्ता के रूप में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष से मुलाकात करने गया था।
वहीं, ओम बिड़ला की पत्नी ने इस बारे में कहा कि यह हमारे लिए गर्व करने का समय है। हम उन्हें चुने जाने के लिए पूरी कैबिनेट के आभारी हैं। (एजेंसी)