राजनीति

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • जयपुर, 22 जुलाई । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि राजस्थान के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में पार्टी एक बार फिर सरकार बनायेगी और 2019 में नरेन्द्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। 
    शाह ने शनिवार को जयपुर के तोतूका भवन में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि राजस्थान में एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की परम्परा इस बार टूटने जा रही है। उन्होंने कहा कि वसुन्धरा राजे की सरकार ने राजस्थान में बहुत काम किया है। भामाशाह योजना, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान और गौरव पथ जैसी कई योजनाओं को देशभर में यश मिला है।    
    उन्होंने कहा, कांग्रेस नकारात्मक राजनीति कर अफवाहें फैलाने का काम कर रही है। यह लोकतंत्र पर अघोषित हमला है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश से अपना जुड़ाव महसूस नहीं कर सकते। कांग्रेस भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकती। कांग्रेस का सगठनात्मक ढांचा खत्म हो गया है। अब तो कांग्रेस में भ्रष्टाचारियों को जमघट बचा है। उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, कनार्टक जब तक नहीं जीत लेते तब तक हमारी जीत पूरी नहीं है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि हम विधानसभा चुनावों में पिछली बार से भी अधिक सीटें जीतेंगे। पिछली जीत से भी इस बार की जीत बड़ी होगी। हम लोकसभा चुनाव में सभी 25 सीटें जीतकर एक बार फिर नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाएंगे।    
    एक अन्य बैठक में शाह ने जयपुर के राज मंदिर सिनेमा घर में सोशल मीडिया सेल के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में सोशल मीडिया की हमारी टीम ही भाजपा को जीत दिलाएगी। राजस्थान की महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में लड़ा जायेगा और चुनाव के बाद वही मुख्यमंत्री बनेंगी।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • माया ने पार्टी से निकाला

    नई दिल्ली, 22 जुलाई । बसपा प्रमुख मायावती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रति 'अनर्गलÓ बयानबाजी करने वाले अपने करीबी और पार्टी के उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सिंह को दो दिन पहले यह बयान देने के तुरंत बाद अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी के सभी पदों से हटा दिया था। पार्टी प्रमुख की अध्यक्षता में शनिवार को यहां हुई बसपा नेताओं की राष्ट्रीय बैठक में यह फैसला किया गया। 
    बैठक के बाद पार्टी की ओर जारी बयान के अनुसार जयप्रकाश सिंह की 'अनर्गलÓ बयानबाजी को बसपा के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुये उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत यह फैसला किया गया। साथ ही पार्टी प्रमुख ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को किसी भी दल के नेता अथवा व्यक्ति के खिलाफ और पार्टी की रणनीति के बारे में इस तरह की अनधिकृत बयानबाजी करने बचने की सख्त हिदायद दी।
    बताया जा रहा है कि जयप्रकाश सिंह हाल ही में कई बयान दिये थे, जिसकी वजह से उनकी छुट्टी हुई है। बसपा की ओर से जारी प्रेस रिलीज में जयप्रकाश सिंह के निष्कासन के पीछे सिर्फ यह बताया जा रहा है कि उन्होंने पीएम मोदी को गब्बर सिंह कहा था। बता दें कि हाल ही में उन्होंने यह भी बयान दिया था कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि उनकी मां सोनिया गांधी भारतीय मूल की नहीं हैं। 
    सूत्रों के अनुसार बैठक में इस साल के अंत में तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिये पार्टी की तैयारियों का भी जायजा लिया गया। बैठक में बसपा के तीनों राज्यों के पार्टी संयोजक और प्रदेश इकाइयों के नेता भी मौजूद थे। इस दौरान मायावती ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति पर विचार विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार मायावती ने कहा कि तीनों राज्यों में बसपा चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के अनुसार बैठक में तय किया गया गया कि चुनाव में गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला अन्य दलों के साथ बातचीत के बाद बसपा प्रमुख करेंगी।
    उन्होंने प्रदेश इकाईयों को ब्लॉक स्तर पर पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत बनाने का निर्देश दिया। साथ ही पार्टी के प्रदेश नेताओं को भविष्य में संभावित गठबंधन और चुनावी रणनीति से जुड़े किसी भी मुद्दे पर मीडिया में बयानबाजी करने से बचने की स्पष्ट हिदायद भी दी गयी है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लडऩे की संभावनायें टटोल रहे हैं। इसके मद्देनजर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के साथ बसपा नेतृत्व की रणनीतिक चर्चाओं का शुरुआती चरण पूरा हो चुका है। इस बीच छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी गठित कर चुके राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साथ भी हाल ही में मायावती की मुलाकात हो चुकी है। समझा जाता है कि बसपा प्रमुख ने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष गठबंधन होने की स्थिति में तीनों राज्यों में मिलकर चुनाव लडऩे की शर्त रखी है। (भाषा)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई । संसद में पीएम मोदी की अगुवाई में भले ही एनडीए ने अविश्वास प्रस्तावकी बाजी जीत ली हो लेकिन उसके सामने कई चुनौतियां सामने खड़ी होने जा रही हैं। लोकसभा चुनाव से पहले आये इस अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष ने सरकार की दुखती रगों पर हाथ रखा है। राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाकर साफ छवि वाली मोदी सरकार पर सवाल खड़े किये हैं और यह पहली बार था कि जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में इतना आक्रामक और तथ्यों के साथ भाषण दिया है। वहीं कई विपक्षी दल एक साथ आये और बैंकिग घोटाला, रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जिन मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है वो लोकसभा चुनाव में भी एजेंडा होंगे। 
    विपक्ष संसद में लगातार बेरोजगारी, भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहा है। मोदी सरकार इन दोनों ही मोर्चों पर कुछ खास नहीं कर पाई है। सरकार की ओर से जो भी आंकड़े पेश किये जाते हैं वो हकीकत कोसों दूर नजर आते हैं। दूसरी ओर राफेल डील और बैंकिंग घोटाले के मुद्दों पर भी मोदी सरकार घिरी हुई नजर आती है। देश में विदेशी सौदों को हमेशा से ही शक नजर देखा जाता रहा है क्योंकि कई घोटाले इनसे जुड़कर सामने आ चुके हैं। मोदी सरकार बार इस डील को लेकर सफाई दे रही है और फ्रांस सरकार की ओर से भी बयान आया है लेकिन विपक्ष जनता के बीच जरूर ले जायेगा। दूसरी ओर बैंकिग घोटाले के आरोपी नीरव मोदी, विजय माल्या एनडीए के शासनकाल के समय ही फरार हुये हैं। 
    अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के कई बड़े दल सदन में संयुक्त रूप से मोदी सरकार के सामने खड़े हुये। एसपी, एनसीपी के सदस्यों ने राहुल गांधी को भाषण के दौरान पूरा समर्थन दिया। विरोधी दलों की इसी ताकत को समझते हुये कांग्रेस यूपीए का कुनबा बढ़ाने में जुटी है। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के लोकसभा उपचुनाव में एकजुटता ने ही बीजेपी को हरा दिया था।  
    2014 से अब राहुल गांधी में बड़ा बदलाव आ चुका है। अब वह सीधे पीएम मोदी पर प्रहार करते हैं और आक्रामक शैली में सवाल-जवाब करते हैं। उनके भाषणों में पहले से ज्यादा पैनापन है और वह गुजरात चुनाव में भी बीजेपी के लिये मुश्किल खड़ी कर चुके हैं। अब उनके कई सवालों का बीजेपी के पास सीधा कोई जवाब नहीं है फिर चाहे वह बेरोजगारी, बैंकिग घोटाला, गोरक्षा के नाम पर हिंसा जैसे मुद्दे ही क्यों न हों।
    कभी बीजेपी की सबसे निकट सहयोगी रही शिवसेना अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग से दूर रही। इतना ही नहीं उसने राहुल गांधी के भाषण की तारीफ भी की है। इससे साफ जाहिर है कि महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में शिवसेना इस बार बीजेपी के लिये बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 20 जुलाई । भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने-लेने के मसले पर उसकी सहयोगी शिवसेना की दुविधा जारी है। ताजा मिसाल शुक्रवार को लोकसभा में आ रहे विश्वास प्रस्ताव की है। शिवसेना ने पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लाए जा रहे इस प्रस्ताव का विरोध करने की घोषणा कर दी थी। अपने सांसदों के लिए इस बाबत व्हिप भी जारी कर दिया था। लेकिन गुरुवार देर शाम इसे वापस ले लिया।
    खबरों के मुताबिक लोक सभा में शिवसेना के मुख्य सचेतक और सांसद चंद्रकांत खैरे ने व्हिप जारी किया था। इसमें पार्टी के सभी सांसदों से लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उपस्थित रहने तथा सरकार के समर्थन में मतदान करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन यह व्हिप जारी होने के कुछ घंटों बाद खैरे ने ही मीडिया को इसे वापस लेने की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया, हमने व्हिप जारी किया था। लेकिन फिर उसे वापस ले लिया। हम इस बारे (प्रस्ताव के समर्थन या विरोध) में अब शुक्रवार को ही फैसला करेंगे।
    इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन लगाया था। उनसे सरकार का समर्थन करने का आग्रह किया था। इसके बाद शिवसेना ने फैसले की घोषणा की थी लेकिन बाद में इससे पलट गई। ऐसे में अब यह देखना रोचक होगा कि वह शुक्रवार को सदन में क्या रुख अख्तियार करती है। गौर करने लायक है कि शिवसेना के भाजपा से रिश्ते काफी समय से नरम-गरम चल रहे हैं। इसी वजह से वह महाराष्ट्र में अगला चुनाव अकेले लडऩे की घोषणा भी कर चुकी है। (सत्याग्रह)
     

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • भोपाल, 20 जुलाई । सपा के मुखिया व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि आगामी आम चुनाव के बाद देश को नया प्रधानमंत्री मिलेगा। उन्होंने यह बात एक सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए कही है। गुरुवार को भोपाल में एक प्रेस वार्ता के दौरान उनसे पूछा गया था कि क्या आगामी आम चुनाव में उनकी पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन करेगी। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि देश की जनता केंद्र में एक नई सरकार के गठन की इच्छा रखती है। साथ ही जनता एक नया प्रधानमंत्री भी चाहती है।
    खबरों के मुताबिक अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि देश को यदि उत्तर प्रदेश से नया प्रधानमंत्री मिलता है तो यह प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात होगी। इसके अलावा बीते काफी समय से राज्यसभा में लंबित तीन तलाक विधेयक से जुड़े सवाल पर भी अखिलेश यादव बचाव की मुद्रा में दिखे। इस पर उनका कहना था कि सदन में जब यह विधेयक चर्चा के लिए आएगा तो पत्रकारों को सपा के रुख की जानकारी मिल जाएगी।
    अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी दलों के गठबंधन के पक्ष में है। उत्तर प्रदेश में हाल के उपचुनाव का हवाला देते हुए उन्होंंने कहा कि कांग्रेस ने सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सहयोग दिया था जिससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यहां चार सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इस बीच उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, 'उत्तर प्रदेश में कदम रखते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उन्हें गंगा मां ने बुलाया है। मोदी ने गंगा की सफाई से जुड़े जो वादे किए वे गलत साबित हुए हैं। जो लोग गंगा को धोखा दे सकते हैं वे आम लोगों को भला कैसे छोड़ेंगे?Ó
    इस दौरान सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर धर्म की राजनीति करने के आरोप भी लगाए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन शक्तियों की लड़ाई 'सामाजिक न्यायÓ को लेकर है सपा उनके साथ है। उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि प्रदेश की मौजूदा सरकार उन परियोजनाओं की आधारशिला रख रही है जिनका शिलान्यास प्रदेश की पूर्व सपा सरकार पहले ही कर चुकी है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • पटना, 19 जुलाई। बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने जमानत पर रिहा आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर राजनीतिक मुलाकात का आरोप लगाते हुए उनकी जमानत रद्द कराने की मांग सीबीआई से की है। कोर्ट ने चारा घोटाला के चार मामलों में सजा काट रहे लालू यादव को राजनीतिक कार्यों से अलग रहने की शर्त पर इलाज कराने के लिए जमानत दी थी। 
    सुशील मोदी ने आरजेडी प्रमुख पर आरोप लगाया कि चारा घोटाला के चार मामलों में सजायाफ्ता लालू को राजनीतिक कार्यों से अलग रहने की शर्त पर केवल इलाज के लिए जमानत मिली थी, लेकिन वह लगातार शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी प्रमुख ने पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत से बात की और उसके बाद तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के तीन सांसदों ने उनसे मुलाकात कर राजनीतिक चर्चाएं की। इस आधार पर सीबीआई को लालू की जमानत तत्काल रद्द करानी चाहिए। 
    बीजेपी नेता ने कहा कि लालू से कल मुलाकात करने वाले टीडीपी सांसदों ने स्वीकार किया था कि उन लोगों ने हालचाल पूछने के नाम पर लालू से भेंट की और संसद के मानसून सत्र में संभावित अविश्वास प्रस्ताव (आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ) पर उनकी पार्टी का समर्थन मांगा। 
    सुशील ने कहा कि टीडीपी और आरजेडी दोनों दलों ने लालू से राजनीतिक बातचीत की पुष्टि कर यह साबित किया है कि इन्हें जमानत की शर्तों का पालन करने की कोई परवाह नहीं है। यह अदालत की अवमानना का मामला भी है। उन्होंने कहा कि चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता होने के कारण लालू के चुनाव लडऩे पर पहले ही रोक लग चुकी है। सीबीआई को लालू की सेहत और उनकी राजनीतिक गतिविधियों की समीक्षा कर तुरंत फैसला लेना चाहिए। (भाषा)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 19 जुलाई । मोदी सरकार ने एसटी/एससी एक्ट को मजबूत बनाए रखने की बात कही है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में कहा, हम इस कानून को कमजोर नहीं होने देंगे। किसी भी संगठन या व्यक्ति के द्वारा एसटी/एससी एक्ट के तहत मिले अधिकारों को छीना नहीं जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि 2015 में सरकार ने इस अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव भी किए।
    राजनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस कानून के तहत आने वाले मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था भी की है। उन्होंने बताया कि ऐसी 194 अदालतें बनाई गई हैं। उनके मुताबिक इससे सजा की दर में सुधार होगा।
    इससे पहले कांग्रेस सदस्य शमशेर सिंह ढिल्लो ने आरोप लगाया था कि बीते चार साल में अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अत्याचार के मामले बढ़े हैं। इस पर गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए इस आरोप को गलत बताया। (भाषा)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • मुंबई, 18 जुलाई। महाराष्ट्र में दूध उत्पादक किसानों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में आयी शिवसेना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। शिवसेना ने कहा अगर सरकार बुलेट ट्रेन जैसी महंगी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर सकती है तो वह दूध खरीद मूल्य में बढ़ोत्तरी क्यों नहीं कर सकती है।
    राज्य के किसान संगठनों ने दूध के खरीद मूल्य में प्रति लीटर पांच रुपये की वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया है। प्रदर्शन सोमवार सुबह शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी महाराष्ट्र के कई जिलों में दूध के टैंकरों की आवाजाही रोक रहे हैं।
    शिवसेना ने कहा, आंदोलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसे राजू शेट्टी (किसान नेता) ने शुरू किया है। किसान न तो किसी क्षेत्र विशेष और ना ही किसी जाति या राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं। तीन हजार से अधिक किसानों ने बीते चार साल में अपना जीवन खत्म कर लिया है। इनमें से ज्यादातर लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वोट दिया था।
    पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामनाÓ के संपादकीय में लिखा, पिछले साल किसानों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए हड़ताल की थी, जो कि सरकार के लिए लज्जा की बात है। अब डेयरी किसानों के मौजूदा आंदोलन को दबाने के बजाय राज्य को यह सोचना चाहिए कि वह उन्हें कैसे राहत देना है।
    उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार आंदोलन तोडऩे की कोशिश कर रही है वहीं दूसरी ओर वह जय किसान के नारे लगा रही है। पार्टी ने कहा, सरकार ने दूध खरीद दर 27 रुपये प्रति लीटर तय कर रखा है लेकिन अब भी इसे महज 16-18 रुपये की दर से खरीदा जा रहा है।
    संपादकीय में कहा गया, गोवा, कर्नाटक की सरकारें दूध किसानों को पांच रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देती हैं। तो अगर महाराष्ट्र के किसान भी ऐसी ही राहत की मांग करते हैं, तो इसमें गलत क्या है? सरकार बुलेट ट्रेन, समृद्धि कॉरिडोर और मेट्रो रेल परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
    इसके अलावा सामना में लिखा गया, सरकार बुलेट ट्रेन के लिए कर्ज तक ले रही है लेकिन वह पांच रुपये खरीद मूल्य बढ़ाने की इच्छा नहीं रखती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि उत्पाद के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में इजाफा करने की घोषणा की लेकिन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणनवीस को यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि क्या महाराष्ट्र के किसानों को भी यह लाभ मिलेगा या नहीं। किसानों ने मोदी को सत्ता में लाने के लिए वोट दिया लेकिन अब वही किसान भ्रमित और परेशान हैं।
    मालूम हो कि बीते सोमवार को महाराष्ट्र में दूध उत्पादक किसानों और दूध संघों ने दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार को आंदोलन शुरू किया था।
    खरीद मूल्य में पांच रुपये की वृद्धि और दूध से बनने वाले उत्पादों (बटर और पाउडर) पर जीएसटी हटाने की अपनी मांग पूरी कराने के लिए आंदोलनकारी और दूध संघ मुंबई और पुणे में दूध आपूर्ति ठप करने की कोशिश की और दूध सड़कों पर गिराकर अपना रोष प्रकट किया।
    स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की ओर से इस आंदोलन की अगुवाई की जा रही है। आंदोलनकारियों ने पुणे, नासिक, अहमदनगर, बुलढाना, जलगांव और अन्य जगहों में दूध के टैंकरों का आवागमन बाधित किया और कुछ टैंकरों का दूध सड़कों पर गिरा दिया।
    संगठन के एक कार्यकर्ता ने बताया था कि पुणे-सोलापुर मार्ग पर दूध के छह टैंकरों की आवाजाही रोकी गई और कुछ जगहों पर दूध के पैकेट फेंके गए। उन्होंने बताया कि संगठन के सदस्यों ने पुणे में कई जगहों पर मुफ्त में दूध बांटा।  (भाषा)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 18 जुलाई। कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर के 'हिंदू पाकिस्तानÓ वाले बयान पर घमासान जारी है। मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा, भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भापयुमो) के लोगों ने मुझे पाकिस्तान चले जाने को कहा। मैं पूछता हूं कि ऐसा कहने वाले ये लोग आखिर होते कौन हैं? क्या मैं हिंदू नहीं हूं? क्या मुझे इस देश में रहने का हक नहीं है? क्या इन (भाजपा) लोगों ने हिंदुत्व में तालिबान की शुरुआत कर दी है?
    शशि थरूर की तरफ से यह बयान केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित उनके कार्यालय पर भाजयुमो के कार्यकर्ताओं की तरफ से तोडफ़ोड़ किए जाने और वहां कालिख पोते जाने की घटना के बाद आया है। वे स्थानीय पुलिस के पास इस तोडफ़ोड़ की शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इसी बीच शशि थरूर ने एक ट्वीट में यह भी लिखा था, मौजूदा समय में देश की राजनीति रसातल में पहुंच गई है। देश की सत्तारूढ़ पार्टी की बर्बरता माफी लायक नहीं है।

    इससे पहले बीते हफ्ते एक विवादित बयान देते हुए शशि थरूर ने कहा था कि अगर आगामी आम चुनाव के बाद देश में फिर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का गठन होता है तो भारत 'हिंदू पाकिस्तानÓ में बदल जाएगा। उनका यह भी कहना था कि देश का संविधान भी अपनी मौजूदा स्थिति में नहीं रहेगा और भाजपा के लोग इसे भी बदल डालेंगे। उनके इस बयान की चौतरफा निंदा हुई थी। यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस ने भी उनके इस बयान से किनारा कर लिया था। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 18 जुलाई। अधिकारों की जंग को लेकर दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल मामले में फिलहाल सुनवाई टल गई है। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से पेश पी चिदंबरम ने कहा कि दिल्ली सरकार इस वक्त लकवाग्रस्त है और ना वो अफसरों का ट्रांसफर कर सकती है ना नियुक्ति कर सकती है। अफसर दिल्ली सरकार की बात नहीं मान रहे। ऐसे में संविधान पीठ के फैसले के क्या मायने हैं। सुप्रीम कोर्ट इन सभी मुद्दों पर जल्द सुनवाई करे। वहीं उपराज्यपाल की तरफ से हलफनामा दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का वक्त भी मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 26 जुलाई तय की है। 
    दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग समेत अन्य मसलों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। होम मिनिस्ट्री ने 21 मई को नोटिफिकेशन जारी किया था नोटिफिकेशन के तहत एलजी के जूरिडिक्शन के तहत सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड से संबंधित मामले को रखा गया है। इसमें ब्यूरेक्रेट के सर्विस से संबंधित मामले भी शामिल हैं। केंद्र सरकार का 23 जुलाई 2015 का नोटिफिकेशन जारी किया था।
    केंद्र सरकार द्वारा 23 जुलाई 2014 को जारी किए गए नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी है। नोटिफिकेशन के तहत दिल्ली सरकार के एग्जेक्युटिव पावर को लिमिट किया गया है और दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्रांच का अधिकार क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधिकारियों तक सीमित किया गया था। इस जांच के दायरे से केंद्र सरकार के अधिकारियों को बाहर कर दिया गया था।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कर्नाटक की जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार पर निशाना साधा है। सोमवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में अरुण जेटली ने लिखा, कर्नाटक में इन दोनों दलों का गठबंधन अवसरवादिता की राजनीति से प्रेरित है। इसके अलावा नरेंद्र मोदी को बाहर रखने के लिए तैयार इस गठबंधन का न तो कोई सकारात्मक एजेंडा है और न ही यह राज्य की जनता की भलाई के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसीलिए आज इस गठबंधन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
    अरुण जेटली ने इस पोस्ट में आगे लिखा कि कर्नाटक में असमान विचारधारा का गठबंधन बनाकर कांग्रेस इस प्रदेश में आज वही सब कुछ कर रही है जो वह पूर्व के वर्षों में चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल के साथ केंद्र की राजनीति के दौरान पहले ही कर चुकी है। उन्होंने आगामी आम चुनाव के लिए कांग्रेस की विपक्षी दलों के महागठबंधन की कवायद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बेमेल विचारधाराओं से मिलकर बनने वाले इस गठबंधन का कांग्रेस को कोई फायदा मिलने वाला नहीं है और यह पूरी तरह असफल साबित होगा।
    इस दौरान अरुण जेटली ने यह भी कहा कि देश को नरेंद्र मोदी जैसे शक्तिशाली नेता की जरूरत है न कि एचडी कुमारस्वामी जैसे ट्रैजडी किंग की। जेटली ने यह बात बीते हफ्ते शनिवार को हुई एक घटना के आधार पर कही है। बीते शनिवार को जेडीएस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में अपने संबोधन के दौरान कुमारस्वामी रो पड़े थे। तब उन्होंने इस गठबंधन को लेकर अपनी नाखुशी जताई थी और यह भी कहा था कि इस गठबंधन के लिए उन्हें जहर का घूंट पीना पड़ा है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 17 जुलाई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय जनतायुवा मोर्चा (भाजयुमो) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शशि थरूर के मुताबिक भाजपा के युवा नेताओं की इस इकाई के कुछ 'असभ्यÓ कार्यकर्ताओं ने सोमवार को उन्हें जान से मार डालने की धमकी दी। शशि थरूर के मुताबिक उनके संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम स्थित कार्यालय में तोडफ़ोड़ करने के साथ वहां की दीवारों और दरवाजों पर कालिख भी पोत दी गई। साथ ही, इन लोगों ने उनके दफ्तर पर इसे 'हिंदू पाकिस्तानÓ का कार्यालय बताने वाला बैनर टांग भी दिया।
    जब उनके कार्यालय में यह घटना हुई तो उस वक्त शशि थरूर वहां नहीं थे। घटना की जानकारी मिलने पर उन्होंने स्थानीय पुलिस के पास इसकी शिकायत दर्ज कराई। शशि थरूर ने एक ट्वीट जारी करते हुए इसे, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर किया गया हमला बताया है।
    इसी दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए शशि थरूर ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि जो कुछ उनके कार्यालय में हुआ उससे यही लगता है कि भाजपा ने हिंदू राष्ट्र का सपना छोड़कर हिंसा और बर्बारता का रास्ता अख्तियार कर लिया है। उनके मुताबिक इस घटना पर अगर सवाल पूछा जाए तो ज्यादातर हिंदू यही कहेंगे कि ऐसे संघी गुंडे उनका प्रतिनिधित्व नहीं करते।
    उधर, भाजयुमो की राज्य इकाई के अध्यक्ष रेनजीत चंद्रन ने शशि थरूर के दिल में पाकिस्तान के प्रति विशेष प्रेम का दावा करते हुए कहा, 'एक सांसद के तौर पर थरूर को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण फैलाने वाला बयान नहीं देना चाहिए। हिंदू पाकिस्तान जैसा बयान उन्होंने प्रसिद्धि पाने के लिए दिया है। इस बयान को वापस लिया जाना चाहिए। ऐसा न होने पर उनके खिलाफ हमारा लोकतांत्रिक विरोध जारी रहेगा।
    इससे पहले बीते हफ्ते शशि थरूर ने कहा था कि साल 2019 के आम चुनाव के बाद केंद्र में अगर दोबारा भाजपा की सरकार बनती है तो इस स्थिति में भारत 'हिंदू पाकिस्तानÓ बन जाएगा। हालांकि उनके इस बयान की भाजपा के दिग्गज नेता पहले ही अपनी-अपनी तरह से आलोचना कर चुके हैं। साथ ही कांग्रेस पार्टी उनके इस बयान से किनारा करते हुए अपने नेताओं को सोच-समझकर बोलने की नसीहत भी दे चुकी है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 17 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी दो दिन पहले ही कांग्रेस पर मुस्लिम पुरुषों की पार्टी होने का आरोप लगाया था। अब संभवत: इसी आरोप के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि सरकार अगर संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाती है तो कांग्रेस बिना शर्त उसका समर्थन करने को तैयार है।
    खबरों के मुताबिक राहुल गांधी ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इसी मानसून सत्र में सरकार यह विधेयक पेश कर उसे पारित कराए। ताकि इसी साल के अंत में जिन राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव हैं, वहां महिलाओं को उनके हक की जगह मिल सके। बताते चलें कि इस साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम की विधानसभाओं के लिए चुनाव होना है। इनमें से मिजोरम को छोड़कर तीनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और कांग्रेस यहां उसके सीधे मुकाबले में है।
    राहुल ने पत्र में लिखा है, 'आपने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) तमाम रैलियों में कहा है कि आप महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने, उनके सशक्तिकरण के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। ऐसे में आपकी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए क्या यह बेहतर तरीका नहीं होगा कि आप संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करें? इसके लिए आगामी संसद सत्र से बेहतर समय क्या हो सकता है? अगर आप इस मामले में देरी करते हैं तो महिला आरक्षण को आने वाले आम चुनाव में लागू करना मुश्किल हो जाएगा।Ó
    उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक नौ मार्च 2010 को राज्य सभा में पारित हो गया था। लेकिन वह लोक सभा में भाजपा के विरोध की वजह से अटक गया। उनके मुताबिक कांग्रेस इस विधेयक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर आज भी कायम है। लेकिन लगता है भाजपा के मन में इसे लेकर कोई दूसरा विचार भी है। हालांकि इसके बावजूद आज मौका है जब हम इस मसले पर साथ खड़े हो सकते हैं। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 17 जुलाई। बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू (जनता दल-एकीकृत) के प्रमुख नीतीश कुमार ने उम्मीद जताई है कि राज्य में एनडीए के सभी घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे का मसला एक महीने में सुलझ जाएगा। उनके मुताबिक भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस बाबत विस्तृत योजना पर काम कर रहा है।
    12 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पटना में नाश्ते और फिर रात्रिभोज पर हुई मुलाकात के बाद नीतीश की इस मामले में यह पहली प्रतिक्रिया है। उन्होंने अपने लोकसंवाद कार्यक्रम से इतर मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत में साफ कहा, सीटों के बंटवारे का मसला जल्द ही हल हो जाएगा। और जब मैं जल्द कह रहा हूं तो इसका मतलब तीन-चार हफ्तों से है। यानी एक महीने के आसपास की समयावधि माननी चाहिए।
    उन्होंने कहा, पहले उनकी तरफ से प्रस्ताव आने दीजिए। मैं उम्मीद करता हूं कि इस प्रस्ताव का एनडीए के अन्य घटक दल (रामबिलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी) भी स्वागत करेंगे। हालांकि उनसे जब यह पूछा गया कि शाह से मुलाकात के दौरान इस मसले पर उनकी क्या बातचीत हुई? तो नीतीश ने साफ कहा, यह व्यक्तिगत बातचीत थी। इसलिए उसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
    पिछले साल जेडीयू के एनडीए में फिर शामिल होने के बाद अब 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए गठबंधन के सभी घटक दलों को सीटों के बंटवारे के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल बिहार की 40 में से 22 लोक सभा सीटें भाजपा के पास हैं। लोक जनशक्ति पार्टी के पास छह और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के पास तीन सीटें हैं। जबकि जेडीयू पिछले लोक सभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें ही जीत सकी थी। लेकिन अब वह 15 सीटों की मांग कर रही है। (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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Posted Date : 16-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 16 जुलाई । शिवसेना यूं तो बीते लंबे समय से अपनी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रही है लेकिन इस बार उसने अपनी इस परंपरा से उलट काम किया है। उसने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ समर्थन मांगने गए टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) सांसदों को बैरंग लौटा दिया है। टीडीपी संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार के खिलाफ फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इसीलिए वह विभिन्न विपक्षी दलों को अपने साथ जोडऩे की कोशिश कर रही है।
    टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कहने पर पार्टी के दो सांसद- टी नरसिम्हन और पी रवींद्र बाबू रविवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिलने मुंबई गए थे। उन्होंने इस बाबत ठाकरे से मुलाकात का वक्त भी मांगा। पर ठाकरे ने उन्हें वक्त नहीं दिया। ठाकरे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने इसकी पुष्टि की है कि शिवसेना प्रमुख ने टीडीपी सांसदों से मुलाकात नहीं की है। हालांकि उनके इस रुख का कोई कारण अब तक सामने नहीं आया है।
    वैसे शिवसेना का यह रुख इन तथ्यों के मद्देनजर दिलचस्प है कि केंद्र और राज्य में भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने के बावजूद दोनों दलों के संबंध अच्छे नहीं हैं। शिवसेना महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव अकेले लडऩे का ऐलान कर चुकी है। हालांकि अब तक उसने भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) छोड़ा नहीं है। 
    अलबत्ता टीडीपी जरूर केंद्र द्वारा आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा न दिए जाने की वजह से एनडीए छोड़ चुकी है। और अब वह इस पर विपक्षी दलों का समर्थन जुटा रही है।(द एशियन एज)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • जयपुर, 15 जुलाई । राजस्थान की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले ही राज्य की सभी 200 सीटों पर जीत हासिल करेगी। राजस्थान विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल अगले साल की 20 जनवरी को खत्म हो रहा है। इसी को लेकर शनिवार को सचिन पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुलाकात भी की। राहुल गांधी के साथ हुई इस मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने कहा, अगर बीते चार बार के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही देखने को मिला है। आगामी विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा। लेकिन मुझे इस बात का पूरा विश्वास है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी राज्य की सभी 200 सीटों पर जीत हासिल करेगी।
    इस दौरान सचिन पायलट से जब राजस्थान में कांग्रेस के सहयोगी दलों के मुद्दे पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस अकेले अपने दम पर ही भाजपा को हराने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लडऩे के बारे में फिलहाल दूसरे दलों के साथ पार्टी की बातचीत नहीं हुई है।
    सचिन पायलट ने आगे कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता 'मेरा बूथ मेरा गौरवÓ अभियान के तहत राजस्थान के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोगों के साथ संपर्क करने में जुटे हुए हैं। उनके मुताबिक प्रदेश की जनता को पार्टी के साथ जोडऩे के लिए यह अभियान विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक जारी रखा जाएगा। (एएनआई)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कल लाहौर में हुई गिरफ्तारी के बहाने कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से जारी एक ट्वीट में लिखा है, भ्रष्टाचार के आरोप में नवाज शरीफ को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम जानना चाहते हैं कि इस गिरफ्तारी पर उनके प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी का क्या कहना है। इस ट्वीट के साथ कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात की एक तस्वीर भी शेयर की है।
    इस ट्वीट पर भाजपा ने भी कांग्रेस पर करारा पलटवार करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्रीजी ही क्या देश का हर आदमी इस पर यही कह रहा है कि...भारत में जो भी नेता बेल पर घूम रहे हैं, उन्हें भी जेल में जाना ही है! भाजपा ने कांग्रेस के इस ट्वीट के जवाब में एक ट्वीट करते हुए उसके उन नेताओं पर तंज कसा है जो जमानत पर बाहर हैं। इससे पहले नरेंद्र मोदी भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कह चुके हैं कि इस पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता इन दिनों 'बेलÓ पर बाहर हैं और ऐसे में लोग कांग्रेस को अब बेल गाड़ी कहने लगे हैं।
    उधर, शुक्रवार की देर शाम को लाहौर के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर ही नवाज शरीफ व उनकी बेटी मरियम शरीफ को गिरफ्तार कर लिया गया था। वे दोनों कल ही लंदन से स्वदेश पहुंचे थे। इससे पहले बीते हफ्ते शुक्रवार को पाकिस्तान की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में इन दोनों को ही जेल की सजा सुनाने के साथ इन पर जुर्माना लगाया था।

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 15 जुलाई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार पर एक बार फिर से दर्द छलका है। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने एक बार फिर से गठबंधन की सरकार की मजबूरियों को सार्वजनिक मंच से सबके सामने रखा और इस दौरान उनके मजबूरियों के आंसू भी छलके। अभी कर्नाटक में नई सरकार के बने ज्यादा दिन भी नहीं भी हुए हैं कि कुमारस्वामी ने एक बार फिर से स्वीकार किया कि वह इस गठबंधन वाली सरकार से खुश नहीं हैं। 
    कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे सीएम कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान सरेआम रोते हुए कहा कि आप सब मुझे बधाई देने के लिए बुके के साथ खड़े हैं। आप सभी को लग रहा होगा कि आपका भाई मुख्यमंत्री बन गया है और इससे आप सभी खुश हैं। मगर मैं इससे खुश नहीं हूं। मैं गठबंधन की सरकार के दर्द को जानता हूं। मैं अपना दर्द बिना बांटे हुए पी रहा हूं। जो किसी जहर से ज्यादा कुछ नहीं है। मैं इस हालात से खुश नहीं हूं। 
    आगे उन्होंने कहा कि मैं नीलकंठ की तरह बन गया हूं, और जो इस सरकार के दर्द को भी निगल लिया है। कुमारस्वामी बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में यह बोल रहे थे। 
    इससे पहले भी कुमारस्वामी ने राज्य में जद (एस) को बहुमत नहीं मिलने का जिक्र करते हुए कहा था, मुझे इस बात का भी दुख है कि आवाम ने मुझमें भरोसा नहीं जताया है। उन्होंने कहा, हमलोग पांच साल के लिए स्थायी सरकार देंगे। हम जनता के लिए काम करेंगे। हम यहां अपना व्यक्तिगत हित साधने नहीं आए हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि न तो वह और न ही देवेगौड़ा परिवार कभी सत्ता के लिए लालायित रहा है। उन्होंने कहा कि उनलोगों का अधिकतर राजनीतिक जीवन विपक्ष में ही व्यतीत हुआ है।
    बीते दिनों पूर्ण बजट पेश करते हुए सीएम कुमारस्वामी ने राज्य में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार का पहला बजट पेश करते हुए करीब 34 हजार करोड़ रुपये का किसानों का कर्ज माफ कर दिया। जिसके तहत हर किसानों के दो लाख तक के कर्ज माफ किए जाएंगे। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । भारत-पाकिस्तान बंटवारे के जिम्मेदारों में से एक मोहम्मद जिन्ना की तस्वीर को लेकर एक बार फिर नये सिरे से विवाद शुरू हो गया है। पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा है कि अगर कोलकाता में विक्टोरिया मेमोरियल हो सकता है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में जिन्ना की तस्वीर में क्या बुराई है?
    एक इंटरव्यू में हामिद अंसारी ने कहा, यूनिवर्सिटी में ये पहले से परंपरा रही है। वहां स्टूडेंट यूनियन मशहूर लोगों को सम्मानित करता रहा है। पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी को सम्मान दिया गया था। उसके बाद मोरारजी देसाई, मदर टेरेसा और खान अब्दुल गफ्फार खान को सम्मानित किया गया और तस्वीर लगाई गई। जिन्ना को भी सम्मानित किया गया और उनकी तस्वीर लगाई गई। जिन्ना 1938 में वहां गये थे। उनकी तस्वीर वहां होने में क्या बुराई है? अगर विक्टोरिया मेमोरियल हो सकता है तो यहां जिन्ना की तस्वीर क्यों नहीं हो सकती है? हमारी परंपरा भवनों और तस्वीरों पर हमला करने की नहीं रही है।
    मई में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। तब अलीगढ़ लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सतीश गौतम ने एएमयू कुलपति को चि_ी लिखकर पूछा था कि जिन्ना की तस्वीर हॉल में क्यों लगी है?
    जिसके बाद हिंदूवादी संगठनों ने यूनिवर्सिटी के पास विरोध प्रदर्शन किया था और इसी दौरान भीड़ हिंसक हो गई थी। पुलिस को गई राउंड गोलियां चलानी पड़ी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विवाद के बीच कहा था कि जिन्ना ने हमारे देश का बंटवारा किया, भारत में जिन्ना का महिमामंडन बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। योगी ने कहा था कि उन्होंने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। 

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । राज्यसभा के लिए चार नए सदस्य मनोनीत किए गए हैं। जिसमें आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा, किसान नेता राम शकल, मूर्तिकार रघुनाथ महापात्र और क्लासिकल डांसर सोनस मानसिंह के नाम हैं। इन चारों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मनोनीत किया है।
    दरअसल फिलहाल 245 सदस्यीय राज्यसभा में चार सीटें खाली थीं, जो राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होने थे। अब केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन सदस्यों को राज्यसभा सदस्यता के लिए मनोनीत किया है।
    पिछले कुछ दिनों से तमाम चेहरों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन सरकार ने इन चार नामों का चुनाव कर राष्ट्रपति के पास भेजा था जिस पर कोविंद ने अपनी मुहर लगा दी है। बता दें कि राकेश सिन्हा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के तौर पर जाने जाते हैं और तमाम न्यूज चैनलों पर सरकार और आरएसएस का पक्ष रखते रहे हैं। 
    सोनल मानसिंह मशहूर नृत्यांगना हैं और पद्म विभूषण, पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हैं। जबकि रघुनाथ महापात्रा ओडिशा जाने-माने मूर्तिकार हैं। महापात्रा पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित हैं। रामशकल जाने-माने किसान नेता हैं। राकेश सिन्हा संघ के विचारक हैं और मीडिया तथा सोशल मीडिया मंचों पर प्रखरता के साथ भाजपा और संघ का पक्ष रखने के लिए जाने जाते हैं। राकेश सिन्हा ने संघ संस्थापक डॉ.हेडगेवार की जीवनी लिखी है जिसे भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने प्रकाशित किया है। उनकी राजनीतिक पत्रकारिता नमक पुस्तक काफी लोकप्रिय हुआ है।
    इस साल राज्यसभा की जो सीटें खाली हुई है वो फिल्म, खेल, सामाजिक कार्य और कानून से जुड़े हैं। यूपीए सरकार ने फिल्म से रेखा, खेल से सचिन तेंदुलकर, सामाजिक क्षेत्र से अनु आगा और कानून से के पराशरन को मनोनीत कराया था। अब इन्हीं चारों की जगह पर राष्ट्रपति ने ये नए चेहरे मनोनीत किए।(आज तक)

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