राजनीति

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Posted Date : 26-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 26 अप्रैल । क्या भारतीय जनता पार्टी के सबसे ताकतवर शख्स माने जाने वाले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को भी राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे की जिद के सामने झुकना पड़ रहा है? खबरों की मानें तो बीते एक हफ्ते में बीजेपी अध्यक्ष शाह राजस्थान के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं कर सके हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन नामों पर शाह विचार कर रहे हैं, उन्हें अध्यक्ष बनाने पर राजे रजामंद नहीं हैं। अगर ऐसा है तो बीजेपी की राजनीति में यह दुर्लभ मौका ही होगा, जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के फैसले को पार्टी के अंदर ही किसी ने वीटो करने की कोशिश की हो।
    राजस्थान में इसी साल के आखिर तक चुनाव होने हैं। द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, वसुंधरा राजे के धुर समर्थक माने जाने वाले अशोक परनामी ने राज्य बीजेपी अध्यक्ष पद से 18 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, शाह ने राज्य में पार्टी की अगुआई करने की जिम्मेदारी गजेंद्र सिंह शेखावत को देने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, राजे के पुरजोर विरोध की वजह से अभी तक शेखावत के नाम का ऐलान नहीं हो सका है। एक बीजेपी नेता ने कहा, भरोसा नहीं होता कि ऐसा हुआ है। हम यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर में किसकी चलेगी?
    शेखावत एक राजपूत नेता हैं। राजे ने उनके विरोध में यह दलील दी है कि शेखावत को अध्यक्ष बनाने से जाट वोटर नाराज हो सकते हैं। राजे एक ऐसा चेहरा चाहती हैं, जो जातिगत पहचान के दायरे में न आता हो। कुछ पिछले अध्यक्ष परनामी जैसा, जो सिंधी पंजाबी हैं और जिनकी आबादी राज्य में काफी कम है। माना जा रहा है कि राजे ने श्रीचंद कृपलानी का नाम आगे बढ़ाया है। कृपलानी भी सिंधी पंजाबी हैं और राजस्थान सरकार में मंत्री हैं। 
    सूत्रों के मुताबिक, शाह को नहीं लगता कि चुनाव से पहले कृपलानी पार्टी को सियासी जंग के लिए तैयार कर पाएंगे। वहीं, पार्टी के अंदरखाने में चर्चा है कि राजे किसी ऐसे नेता को अध्यक्ष बनवाना चाहती हैं जो उनके प्रभाव में काम करे और केंद्रीय आलाकमान से सीधे निर्देश लेकर काम न करे।
    शाह ने शेखावत का नाम राजपूत फैक्टर को ध्यान में रखकर बढ़ाया था। उन्हें लगता है कि इससे राजपूत समुदाय में अच्छा संदेश जाएगा। माना जा रहा है कि राजपूत फिलहाल बीजेपी से नाराज चल रहे हैं। बता दें कि बीजेपी को हाल ही में राज्य में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। कई केंद्रीय नेताओं ने इस हार की वजह राजपूतों के गुस्से को बताया था। वहीं, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर एक अन्य केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के नाम पर भी अटकलें जारी हैं। सूत्रों के मुताबिक, दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मेघवाल पर भी राजे की सहमति नहीं है। बीच का रास्ता निकालने के तौर पर महासचिव भूपेंद्र यादव के नाम की भी अटकलें हैं। पार्टी नेताओं को लगता है कि यादव पर शाह और राजे दोनों की सहमति बन सकती है।(जनसत्ता)

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Posted Date : 26-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 26 अप्रैल। कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिग्गज नेता कमलनाथ को मध्यप्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, 29 अप्रैल की जनाक्रोश रैली से पहले कई राज्यों में इस प्रकार के बदलाव देखने के मिल सकते हैं।
    पार्टी महासचिव अशोक गहलोत की ओर से जारी एक चि_ी में बताया गया है कि कमलनाथ को मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी साल के अंत में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। कमलनाथ के पास इस समय हरियाणा और पंजाब का प्रभार है।
    अर्से से अटका पड़ा मध्य प्रदेश का फैसला आखिर राहुल ने कर लिया गया है। पहले ही दिग्विजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता कमलनाथ के हक में राय दे चुके हैं। लेकिन मामला अब तक लटका हुआ था, जिस पर अब जाकर मुहर लगने वाली हैं। कमलनाथ के मध्य प्रदेश जाने की सूरत में उनकी जगह हरियाणा का भी नया प्रभारी नियुक्त किया जाएगा।
    सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह और सिंधिया की सियासी अदावत ने भी राहुल को कमलनाथ के हक में आखिरकार फैसला करने को मजबूर कर दिया। अपनी नर्मदा यात्रा से पहले ही दिग्विजय ने सिंधिया और कमलनाथ की मौजूदगी में राहुल से साफ कह दिया था कि, वैसे तो किसी को चेहरा बनाने की जरूरत नहीं है। सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ाएं और सरकार बनने पर बाद में राहुल फैसला कर लें।
    लेकिन जब राहुल ने जोर देकर पूछा कि, पहले किसी को चुनना हो तो राय बताइए। इस पर दिग्विजय ने जवाब दिया कि, सिंधिया के पास आगे वक्त है, लेकिन कमलनाथ का अंतिम मौका है। इसलिए कमलनाथ हों और वो होते हैं तो मेरा पूरा समर्थन रहेगा। (आज तक)

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Posted Date : 25-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने स्वयंसेवकों के लिए एक नया मशविरा जारी किया है। इसमें सभी से कहा गया है कि वे अनुसूचित जाति के लोगों के लिए 'दलितÓ शब्द का इस्तेमाल न करें। जहां तक संभव हो इससे परहेज करें। पहचान उजागर न करने की शर्त पर आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी इसकी पुष्टि करते हैं।
    आरएसएस नेतृत्व का मानना है कि 'दलितÓ शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक है। साथ ही यह गुलामी की मानसिकता का प्रतीक भी है। इसीलिए समाज के संबंधित वर्गों के लिए इसकी जगह 'अनुसूचित जातिÓ शब्द का इस्तेमाल करना ही उचित है। ऐसे ही आदिवासियों के लिए भी 'अनुसूचित जनजातिÓ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यही वजह है कि संघ के स्वयंसेवकों को इस बाबत मशविरा दिया गया है।
    विश्व हिंदू परिषद के नए कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार भी इसकी पुष्टि करते हैं। यहां बताते चलें कि पिछले हफ्ते सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भी सभी राज्य सरकारों और सरकारी विभागों को ऐसा ही मशविरा जारी किया था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से इस बाबत जारी निर्देश की पृष्ठभूमि में दिए गए इस मशविरे में भी कहा गया था कि अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के लिए अब 'दलितÓ शब्द इस्तेमाल न करें।
    सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के दलित चिंतक डी श्याम बाबू इस बारे में बताते हैं, दलित शब्द असल में मराठी भाषा का शब्द है। इसका मतलब है- पीडि़त और शोषित। इसके इस्तेमाल को लोकप्रियता दिलाने में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की सबसे अहम भूमिका रही। हालांकि संविधान में इस शब्द का कहीं जिक्र नहीं है। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 24-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के सालाना जलसे में सलमान खुर्शीद ने एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए कह दिया कि कांग्रेस पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हैं।बयान पर पार्टी की फजीहत होने के बाद सलमान ने फौरन सफाई दे दी है। उन्होंने कहा कि ये मेरी पर्सनल राय थी। कांग्रेस पार्टी का सदस्य होने के नाते मैंने बचाव किया था। मैंने खून के दाग पार्टी नहीं, मैंने अपने हाथ पर लगे होने की बात कही थी।
    छात्र आमिर मिंटोई ने खुर्शीद से दंगों और बाबरी मसजिद पर सवाल किया तो आयोजकों ने छात्र को रोकने की कोशिश की। लेकिन सलमान खुर्शीद ने कहा कि इन्हें सवाल करने दीजिए। हालांकि ये राजनीतिक प्रश्न है। इसके बाद छात्र ने सवाल किया कि 1948 में एएमयू एक्ट में पहला संशोधन हुआ। उसके बाद 1950 में प्रेसिडेंशल ऑर्डर जिसमें मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छीना गया। 
    इसके बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मुजफ्फरनगर आदि में मुसलमानों का नरसंहार हुआ। इसके अलावा बाबरी मस्जिद के दरवाज़े खुलना, बाबरी मस्जिद में मूर्तियों का रखना और फिर बाबरी मस्जिद की शहादत हुई, ये सब कांग्रेस की सरकार में हुआ। इन सारी घटनाओं का हवाला देते हुए आमिर ने खुर्शीद से पूछा कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो धब्बे हैं, इन धब्बों को आप किन अल्फाजों से धोएंगे?
    इसके जवाब में खुर्शीद ने माना कि हां कांग्रेस के दामन पर खून के धब्बे हैं। इसी वजह से आप हमसे कह रहे हैं अब आप पर कोई वार करे तो उसे हमें बढ़कर रोकना चाहिए। हम ये धब्बे दिखाएंगे कि तुम समझो कि ये धब्बे अब तुम पर न लगें। तुम वार इन पर करोगे तो धब्बे तुम पर लगेंगे। हमारे इतिहास से आप कुछ सीखें-समझें। आप अपना हश्र ऐसा  न करें कि आज से 10 साल बाद कोई एएमयू आए तो आप जैसा सवाल पूछने वाला कोई न मिले।
    खुर्शीद की इस स्वीकारोक्ति पर तुरंत भाजपा ने घेरना भी शुरू कर दिया है। भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भिवंडी से लेकर भागलपुर तक और मेरठ से मलियाना तक कांग्रेस और कांग्रेस के सेक्युलरिज्म के सियासी सूरमाओं ने निर्दोष लोगों की हत्याओं को अपनी आंखों से देखा है। कांग्रेस के शासन काल में 5000 दंगों का श्रृंखलाबद्ध इतिहास रहा है।  अब अगर ये दंगों के इतिहास पर माफी मांग रहे हैं तो ये कहा जा सकता है कि देर आए दुरुस्त आए।  लेकिन कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रोटियां दंगों की आड़ में सेंकी है, इस शर्मनाक इतिहास पर देश की जनता उन्हें माफ़ नहीं करेगी। बटाला हाउस एनकाउंटर पर उन्होंने क्या कहा था, देश की जनता ये जानती है। देखना है कि सलमान खुर्शीद किसकी तरफ से माफी मांग रहे हैं।
    वहीं भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर सिर्फ मुसलमानों नहीं बल्कि सिखों का भी खून लगा है। कांग्रेस के दामन पर किसी एक धर्म नहीं बल्कि हर धर्म का खून का धब्बा लगा है। वहीं संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस ने भारत की पंथनिरपेक्ष छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।(आजतक)

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Posted Date : 24-Apr-2018
  • बैंगलुरू, 24 अप्रैल। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। इस बात की काफी संभावना है कि दोनों दलों में से किसी को भी बहुमत के लायक सीटें न मिलें। टाईम्स नाउ और वीएमआर के ओपिनियन पोल से यह बात निकल कर आ रही है। इसमें कांग्रेस को 31 सीटों का नुकसान और भाजपा को 49 सीटों की बढ़त दिखाई गई है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की जेडीएस इस बार किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है।
    सर्वे के मुताबिक 224 विधानसभा सदस्यों वाले कर्नाटक में कांग्रेस को इस बार 91 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा उससे केवल दो सीटें पीछे रह सकती है और उसे 89 सीटें मिल सकती हैं। यानी दोनों ही पार्टियां सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 सीटें नहीं ला पाएंगी। अगर सर्वे सही साबित हुआ तो फिर इस स्थिति में जेडीएस दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके मुताबिक जेडीएस को 40 सीटें मिलने की संभावना है।
    वहीं, वोट शेयर की बात करें तो कांग्रेस को पिछली बार के मुकाबले इस बार दो प्रतिशत ज्यादा वोट मिल सकते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में उसे 36.6 प्रतिशत वोट मिले थे। इस साल उसे 38.6 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है। वहीं, भाजपा के वोट प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ओपिनियन पोल के मुताबिक उसे 20 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। पिछली बार उसे 15 प्रतिशत वोट मिले थे।
    इसके अलावा मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार की बात करें तो मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 46 प्रतिशत लोगों की पसंद के साथ सबसे ऊपर हैं। दूसरे नंबर पर भाजपा के बीएस येदियुरप्पा हैं। उन्हें 32 प्रतिशत लोगों ने मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद किया है।  (टाईम्स नाउ)

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल। सीताराम येचुरी ने कहा कि तीसरा मोर्चा बनाने का अगर एकमात्र उद्देश्य सिर्फ सत्ता में आना है तो इस मोर्चे के सफल होने की संभावना काफी कम है। उन्होंने यह बात एक बार फिर माकपा महासचिव चुने जाने के बाद कही। पार्टी की 22 वीं कांग्रेस के समापन पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे मोर्चे का आधार और इसके गठन की नीति मजबूत होनी चाहिए और यह जन आंदोलनों से ही निकलना चाहिए। अगरे ऐसा होता है तब जाकर ही यह देश के लिए एक नया और ठोस विकल्प बन पाएगा।
    लिहाजा तीसरा मोर्चा बनाते समय इस बात का ध्यान रखा बेहद जरूरी है। येचुरी ने कहा कि अगर सिर्फ सत्ता में आने ही अगर एक मात्र उद्देश्य हुआ तो इससे किसी को कुछ खास नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने उनसे बात की थी और गैरकांग्रेस , गैरभाजपा मोर्चा लाने की इच्छा जताई थी और इस पर मेरी राय मांगी थी। (भाषा)

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • चेन्नई, 23 अप्रैल । अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने रविवार को मंजूर किए गए अध्यादेश में सिर्फ 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किए जाने पर हैरानगी जताते हुए कहा कि क्या 14, 15 और 16 साल की लड़कियां बच्चे नहीं हैं। हासन ने यह भी कहा कि परिवारों को अपने लड़कों को जिम्मेदार बनाना चाहिए। मक्कल निधि मैअमÓ (एमएनएम) प्रमुख हासन ने यूट्यूब के जरिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए यह कहा।
    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश को मंजूरी देकर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा सहित कठोर दंड के प्रावधान का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। हासन ने एक सवाल के जवाब में कहा, आप तय करेंगे कि मुझे क्या होना चाहिए... मुख्यमंत्री या विपक्षी नेता।
    जाति प्रथा के उन्मूलन पर उन्होंने कहा कि यह एक रोग है और इसका खात्मा होना चाहिए। जाति आधारित भेदभाव गरीबी का एक कारण है। जाति का फौरन उन्मूलन नहीं हो सकता। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर इसमें बदलाव की अपील की। उन्होंने ग्राम स्वराज को एक संभावना बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी एक गांव को पहले ही गोद ले चुकी है तथा और भी गांवों को गोद लेगी।(भाषा)

     

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 23 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कोर्ट में नहीं जाने का ऐलान करने वाले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल पर अब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पलटवार किया है। स्वामी ने कहा कि सिब्बल के कोर्ट पेश न होने से किसे फर्क पड़ता है। स्वामी ने यहां तक कह दिया कि सिब्बल को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में चले जाना चाहिए। वहां उनके लिए जगह है।
    स्वामी ने कहा कि विपक्ष के महाभियोग के प्रस्ताव पर उपराष्ट्रपति ने दरियादिली दिखाते हुए दो दिन तक इस पर विचार किया। विपक्ष के नोटिस को तो उसी दिन कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए था।
    कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट में अरसे से प्रैक्टिस कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा है कि अगर जस्टिस दीपक मिश्रा रिटायरमेंट तक पद पर बने रहते हैं तो वे उनकी कोर्ट में पेश नहीं होंगे।
    आज उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने महाभियोग के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि महाभियोग लाने के लिए 50 सांसदों की जरूरत होती है, जो हमने पूरा किया। राज्यसभा चेयरमैन प्रस्ताव की मेरिट तय नहीं कर सकते हैं। अब ये लड़ाई सीधे तौर पर लोकतंत्र को बचाने वाले और लोकतंत्र को खारिज करने वालों के बीच में है। (आज तक)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • यह पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं देश के प्रति वफादारी है
    पटना, 22 अप्रैल। भाजपा से नाराज चल रहे और पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि वह उन्हें निष्कासित कर दिखाए। साथ ही कहा कि क्रिया की प्रतिक्रिया होगी। पटना  में शनिवार को आयोजित अपने संगठन राष्ट्र मंच के एक अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर वे लोग (अपनी पार्टी) पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सोच रहे थे। वे इतने असहाय हैं और उनकी स्थिति इतनी दयनीय है कि इसके लिए मुहुर्त देख रहे थे। शत्रुघ्न ने कहा कि वे जब चाहें ऐसा निर्णय ले सकते हैं पर न्यूटन के तीसरे नियम को याद रखें कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
    शत्रुघ्न ने कहा कि भाजपा में उसे छोडऩे के लिए शामिल नहीं हुए थे और हमेशा कहता रहा हूं कि यह मेरी पहली और आखिरी पार्टी है लेकिन वे अगर मुझे छोडऩा चाहें तो छोड़ दें। उन्होंने कहा कि यह पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं देश के प्रति अपनी वफादारी है, हमें भी यह सिखाया गया है कि व्यक्ति से बड़ा दल होता और दल से बड़ा देश। शत्रुघ्न ने सभागार में मौजूद लोगों से पूछा कि वे जो कर रहे हैं क्या वह देश हित में नहीं है।
    उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश में बेरोजगारी बढ़ी और छोटे- छोटे व्यापार और कारखाना बंद हो गए तो उसके बारे में बात किया जाना जनहित में है या नहीं? इस अवसर पर उन्होंने तेजस्वी यादव की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यशवंत जब भाजपा के अध्यक्ष थे तभी उन्हें पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर पेश किया गया था और पूरे देश में मुझे सभाओं को संबोधित करने का अवसर प्राप्त हुआ। (भाषा)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर काम चुनाव को ध्यान में रखकर करते हैं तथा पिछले चार वर्षों में उनका हर दिन चुनावों की चिंता में ही बीता है।
    पार्टी महासचिव अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट को पोस्ट करते हुए ट्वीट किया, प्रधानमंत्री ने अब तक जितने झूठ बोले हैं उनमें यह तब सबसे बड़ा झूठ है। अब तक के कार्यकाल में उनका हर दिन चुनावों की चिंता में बीता है। उनके सभी भाषण और कार्यक्रम चुनाव से संबंधित होते हैं।
    उन्होंने कहा, काश, प्रधानमंत्री ने वोटों को ध्यान में रखे बिना कुछ किया होता। प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिवसीय लोकसेवा दिवस समारोह के समापन के मौके पर कहा था कि मैं चुनाव के लिए काम नहीं करता।Óमोदी ने यह भी कहा था कि कहा कि जन भागीदारी भारत जैसे देश में सफलता की आधारशिला है।
    गहलोत ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि लोगों में, बैंकिंग प्रणाली को लेकर यह विश्वास पैदा किया जाना चाहिए कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग नहीं होगा। कांग्रेस नेता ने कहा, लोगों में अपनी सरकार और बैकिंग प्रणाली को लेकर विश्वास पैदा होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा लोगों का विश्वास बनाए रखने में विफल रहे हैं।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल। तेलुगु फिल्मों के अभिनेता और अब राजनेता नंदमुरी बालाकृष्ण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। बालाकृष्ण ने नरेंद्र मोदी को गद्दार और नमकहराम कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि अब भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ युद्ध करने का समय आ चुका है।
    नंदमुरी बालाकृष्ण अनंतपुर जिले के हिंदूपुर से विधायक हैं। वे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बहनोई भी हैं। शुक्रवार को वे विजयवाड़ा में थे जहां मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ 12 घंटे का उपवास रखा था। इस दौरान बालाकृष्ण ने भाजपा और मोदी सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। हालांकि वे बोलने की मर्यादा पार करते दिखे।
    बैंगलोर मिरर के मुताबिक बालाकृष्ण ने कहा, हमने सब्र के साथ चार साल तक इंतजार किया है और सभी विकल्पों (साम, दाम, और भेद) को आजमाया है। अब हमारे पास केवल दंड देने का विकल्प बचा है। हमें (मोदी सरकार और भाजपा को) तेलुगु लोगों की ताकत दिखाएंगे और उन्हें सबक सिखाएंगे। बालाकृष्ण ने कहा कि अब आंध्र के मुद्दे पर केंद्र से भीख नहीं मांगी जाएगी बल्कि सीधे जंग की जाएगी।
    खबर के मुताबिक बालाकृष्ण ने नरेंद्र मोदी पर आंध्र प्रदेश में घटिया राजनीति करने और उत्तर व दक्षिण भारत में दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मोदी, ये आपके लिए चेतावनी है। आप किसी बंकर में जाकर छुप सकते हैं लेकिन भारत माता आपको नहीं छोड़ेगी। अगर आप लोगों के बीच गए तो वे आपको मारेंगे और आप अपनी जिंदगी के लिए भागते फिरेंगे। बालाकृष्ण ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की भाजपा को आंध्र प्रदेश या दक्षिण भारत में कहीं भी एक सीट भी नहीं मिलेगी।  (डेक्कन क्रॉनिकल)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । लंबे समय से बीजेपी से नाराज चल रहे सीनियर लीडर और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बीजेपी छोड़ दी है। वह लंबे समय से बीजेपी से नाराज चल रहे थे। यशवंत सिन्हा ने कहा अपने फैसले का ऐलान करते हुए कहा, मैं बीजेपी के साथ अपने सभी संबंधों को समाप्त करने का ऐलान करता हूं। 
    साल 1998 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री थे। यही नहीं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 1990 से 1991 तक चली सरकार में भी वह वित्त मंत्री थे। 
    सिन्हा ने कहा कि मैं आज के बाद किसी दल के साथ नहीं रहूंगा न ही किसी भी राजनीतिक दल से कोई रिश्ता नहीं रहेगा। आज देश में लोकतंत्र खतरे में है जिन लोगों ने लोकतंत्र को खतरे में डाला उन ताकतों को हम मटियामेट कर देंगे। उन्होंने कहा कि पटना मेरा शहर है। आज से चार साल पहले ही मैं सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुका हूं। मैंने चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर लिया है।
    ऐसे में कुछ लोगों ने समझा कि मेरा दिल भी धड़कना बंद कर दिया है लेकिन जब देश की बात आएगी तो मैं बढ़ चढ़कर भाग लूंगा। देश के सवाल पर ही मैंने राष्ट्र मंच का निर्माण किया है और ये मंच राजनितिक मंच नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश की हालात चिंताजनक है ऐसे में अगर आज हम चुप रहे तो आनेवाले पीढियां दोष देंगी।
    यशवंत ने कहा कि बिहार ने बड़े आंदोलन पैदा किये हैं। केंद्र सरकार पर यशवंत सिन्हा ने हमला करते हुए कहा कि संसद का बजट सत्र इतना छोटा कभी नहीं रहा है लेकिन भारत सरकार ने नियोजित ढंग से संसद को नहीं चलने दिया। गुजरात चुनाव के कारण सत्र को छोटा कर दिया गया। सत्र नहीं चलने से सरकार बहुत खुश थी। 
    इस अधिवेशन में भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, शरद यादव एवं जदयू के असंतुष्ट नेता उदय नारायण चौधरी भी शिरकत करने वाले हैं।
    कार्यक्रम में कांग्रेस, राजद, आम आदमी पार्टी एवं सपा समेत भाजपा-जदयू के असंतुष्ट नेताओं को भी बुलाया गया है। यशवंत सिन्हा इससे पहले भी लगातार बीजेपी पर हमला बोलते रहे हैं ऐसे में पटना में उनकी अगुवाई में बुलाई गई यह बैठक भविष्य के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य को लेकर काफी अहम मानी जा रही है।
    यही नहीं मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले और जीएसटी लागू करने के तरीके को लेकर भी उन्होंने तीखा हमला बोला था। 
    सिन्हा ने इसी साल 30 जनवरी को राष्टप्त मंच के नाम से एक नए संगठन की स्थापना की थी। तब उन्होंने कहा था कि यह संगठन गैर-राजनीतिक होगा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेगा। शनिवार को कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यशवंत सिन्हा ने यह फैसला लिया है।(नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 20-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 20 अप्रैल। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी नेता एसवीई शेखर वेंकटरमण द्वारा सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट से लोगों में गुस्सा है, जिसमें उन्होंने उस महिला पत्रकार का अपमान किया है, जिसने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा गाल थपथपाए जाने का कड़ा विरोध किया था। इस मामले में राज्यपाल महिला पत्रकार लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम से माफी मांग चुके हैं, लेकिन एसवीई शेखर वेंकटरमण ने अपने पेज पर पोस्ट किया कि दरअसल, राज्यपाल को उस महिला को छूने के बाद अपने हाथ फिनाइल से धोने चाहिए थे...।
    हालांकि बाद में उन्होंने इस पोस्ट को अपने फेसबुक पेज से डिलीट कर दिया, लेकिन उन्होंने सभी महिला पत्रकारों को अपमान करने वाली अपनी पोस्ट के लिए माफी नहीं मांगी।
    चेन्नई के पत्रकार शेखर वेंकटरमण तथा भाजपा राष्ट्रीय सचिव एच राजा के खिलाफ पार्टी के राज्य मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। एच राजा पर भी पत्रकारों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है।
    अब डिलीट की जा चुकी पोस्ट में कहा गया था कि महिला पत्रकार का उद्देश्य राज्यपाल तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करना था...इतना ही नहीं, शेखर वेंकटरमण की पोस्ट में यहां तक कहा गया था, हालिया शिकायतों से जाहिर है, वे (पत्रकार) रिपोर्टर और एंकर तब तक नहीं बन सकती हैं, जब तक वे बड़े लोगों के साथ सो न लें... अनपढ़ बेवकूफ भद्दे लोग... तमिलनाडु मीडिया में मोटे तौर पर यही हैं... यह महिला भी अपवाद नहीं है...
    इस पोस्ट में सेक्स-फॉर-डिग्री घोटाले को लेकर सवाल खड़े करने के लिए भी मीडिया को निशाने पर लिया गया था, जिसमें एक कॉलेज प्रोफेसर पर आरोप लगा था कि वह छात्राओं पर बेहतर नंबरों तथा पैसे के लिए अधिकारियों के साथ संबंध बनाने का दबाव डाल रही थी। उसी प्रोफेसर ने राज्यपाल से ताल्लुक होने का दावा किया था, जिन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर देकर इसका खंडन किया था। जब लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यपाल से इस बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने जवाब देने की जगह लक्ष्मी का गाल थपथपा दिया था।
    शेखर वेंकटरमण द्वारा शेयर की गई पोस्ट में कहा गया था, यूनिवर्सिटियों से ज़्यादा यौन शोषण तो मीडिया में होता है... और यही लोग अब गवर्नर से सवाल कर रहे हैं...
    78-वर्षीय गवर्नर ने भी महिला पत्रकार से माफी मांगते वक्त अजीबोगरीब तर्क दिया था। उन्होंने कहा था, मुझे (आपका) सवाल अच्छा लगा... इसलिए, तारीफ करने के उद्देश्य से मैंने उस तरह आपका गाल थपथपाया था, और आपको अपनी पोती सरीखा समझा था...दादाजी की तरह गाल थपथपाने वाले दावे को नाकबूल करते हुए लक्ष्मी ने कहा कि उन्हें माफी मंज़ूर है, भले ही वह उनके तर्क से सहमत नहीं हैं।
    इससे पहले, लक्ष्मी सुब्रह्मण्यम ने गुस्से में ट्वीट किया था, कई बार अपना चेहरा धोया है... अब भी उस एहसास से छुटकारा नहीं मिला है... श्रीमान गवर्नर बनवारीलाल पुरोहित, मैं इतना ज्यादा आंदोलित और गुस्से में हूं...।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 20-Apr-2018
  • बैंगलुरू, 20 अप्रैल । कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चरण में मतदान होना है और उससे पहले सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। यहां तक कि राजनीतिक विरोधियों से भी हाथ मिलाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी और जनता दल-सेकुलर (जद-एस) के बीच कुछ सीटों पर हुआ गोपनीय समझौता इसकी पुख्ता मिसाल हैं।
    सूत्रों के अनुसार, दो अहम सीटों पर दोनों दलों के बीच गोपनीय समझौता हुआ है। ये हैं- चामुंडेश्वरी और वरुणा। इनमें से चामुंडेश्वरी से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि वरुणा से उनके बेटे यतींद्र को कांग्रेस ने टिकट दिया है। चामुंडेश्वरी जद-एस के लिए कितनी प्रतिष्ठापूर्ण है इसका अंदाज इससे ही लग सकता है कि उसकी ओर से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को खुली चुनौती दी गई थी कि उनमें हिम्मत है तो वे यहां से चुनाव लड़ कर दिखाएं। जद-एस की चुनौती मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर चुके हैं।
    लिहाजा अब बताया जाता है कि जद-एस ने भी चामुंडेश्वरी में सिद्धारमैया को हराने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए उसने भाजपा के साथ रणनीतिक समझौता किया है। इसके तहत भाजपा चामुंडेश्वरी में जद-एस की मदद कर सकती है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस सीट पर न सिर्फ कमजोर प्रत्याशी उतार सकती है बल्कि जीत के लिए भी ज्यादा जोर नहीं लगाएगी। बदले में जद-एस इसी तरह की मदद भाजपा प्रत्याशी को वरुणा में देगी। वरुणा से सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र से मुकाबले के लिए भाजपा बीएस येद्दियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र को उतार सकती है।
    यहां यह भी बता दें कि चामुंडेश्वरी की तरह वरुणा सीट भी सिद्धारमैया के लिए उतनी ही अहम है। वे 2013 के चुनाव में इसी सीट से जीतकर मुख्यमंत्री बने थे। संभवत: इसी के मद्देनजर भाजपा और जद-एस ने उन्हें इन दोनों सीटों पर मिलकर घेरने की योजना बनाई है। भाजपा और जद-एस के सूत्र नाम न छापने की शर्त पर इस रणनीतिक समझौते की पुष्टि करते हैं। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव भी मानते हैं, हां, हमारे पास खबर है कि दोनों विपक्षी पार्टियों ने इन दो सहित कुछ सीटों पर रणनीतिक साझेदारी की है। लेकिन वे फिर भी सफल नहीं होंगी। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 19-Apr-2018
  • राकेश मोहन चतुर्वेदी
    नई दिल्ली, 19 अप्रैल । राजस्थान और मध्य प्रदेश में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी ने दोनों राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदलकर नया दांव चला है। असल में इन चुनावी राज्यों में संगठन के आंतरिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं में जोश की कमी को दूर करने के लिए बीजेपी हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्षों को बदलने का फैसला किया है। इसके अलावा दोनों राज्यों में मौजूदा सरकार से असंतोष को भी इसके जरिए साधने की कोशिश की गई है। मध्य प्रदेश में जबलपुर के सांसद और लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर हाईकमान ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी एक तरह से नियंत्रित करने का फैसला लिया है।
    मध्य प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार चौहान को शिवराज का करीबी माना जाता था। इसके अलावा बीजेपी राजस्थान और आंध्र प्रदेश में भी जल्दी ही नए अध्यक्ष नियुक्त करने वाली है। यही नहीं कई और राज्यों में भी ऐसे ही फैसले हो सकते हैं। आंध्र प्रदेश के स्टेट चीफ के. हरिबाबू ने भी मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि बुधवार को नंद कुमार चौहान और राजस्थान के अशोक परनामी ने इस्तीफा दे दिया। 
    खासतौर पर राजस्थान में बीजेपी वसुंधरा राजे पर नियंत्रण करने की कोशिश में है और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे ही चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अशोक परनामी का इस्तीफा लिया गया है। हालांकि वसुंधरा राजे कैंप के लिए परनामी को पद से हटाया जाना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। परनामी, चौहान और हरिबाबू को बीजेपी अब अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति में जगह देने वाली है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के प्रदेश अध्यक्षों को मुख्यमंत्री का सरपरस्त माना जाता रहा है, जो आमतौर पर स्वतंत्र स्टैंड नहीं लेते थे। ऐसे में हाईकमान ने संगठन को सीएम की छत्रछाया से बाहर निकालते हुए नए अध्यक्षों की नियुक्ति का फैसला लिया है, जो स्वंतत्र रूप से फैसले ले सकें। 
    मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिर तक चुनाव होने हैं। मध्य प्रदेश की चुनावी राजनीति में जातिगत समीकरण खासे हावी रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने ठाकुर नेता नंद कुमार चौहान को हटाकर ओबीसी लोध नेता राकेश सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम शिवराज सिंह चौहान खुद पिछड़ी जाति के हैं और इस फैसले से पार्टी ने ओबीसी बिरादरियों को लुभाने के संकेत दिए हैं। 
    मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रहे नरेंद्र सिंह तोमर राजपूत समुदाय से आते हैं। बीजेपी हाईकमान विधानसभा चुनाव में उन्हें कैंपेन कमिटी का चीफ बना सकता है। इसके जरिए पार्टी जातीय संतुलन साधने का काम करेगी। 
    राजस्थान में बीजेपी सांसद ओम बिड़ला और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मीणा समुदाय के किसी नेता को भी इस बार मौका दिया जा सकता है। इसी तरह आंध्र प्रदेश में कापू समुदाय के नेता को मौका दिया जा सकता है या फिर एनटी रामाराव की बेटी डी. पुरंदेश्वरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके जरिए बीजेपी तेदेपा के मुखिया चंद्रबाबू नायडू से मुकाबला करेगी, जो पुरंदेश्वरी के पति हैं। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 18-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 18 अप्रैल। बीजेपी शासित दो राज्यों में पार्टी की ओर से बड़े बदलाव किए गए हैं। राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष अशोक परनामी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं राकेश सिंह को बीजेपी ने मध्य प्रदेश का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
    राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष अशोक परमानी ने किस वजह से इस्तीफा दिया है इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेज दिया है। हालांकि इस पद से इस्तीफे के बाद बीजेपी अध्यक्ष ने सांसद अशोक परनामी, नंद कुमार सिंह चौहान और डॉ. के हरिबाबू (आंध्र प्रदेश) को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य नियुक्त किया है। 
    वहीं पार्टी की ओर से राकेश सिंह को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राकेश सिंह जबलपुर से बीजेपी के सांसद हैं  और लोकसभा में पार्टी के चीफव्हिप (मुख्य सचेतक) हैं। राकेश सिंह जबलपुर से तीसरी बार सांसद चुनकर आए हैं। उन्होंने नंद कुमार सिंह चौहान का स्थान लिया जो इस पद पर साल 2014 से कार्यरत थे। बीजेपी महासचिव अरुण सिंह ने पार्टी में इस संगठनात्मक नियुक्ति की जानकारी दी।
    मध्य प्रदेश में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष में बदलाव की पहल ऐसे समय में की गई है जब इसी वर्ष राज्य विधानसभा का चुनाव होना है। सूत्रों ने बताया कि भोपाल में मंगलवार की रात प्रदेश बीजेपी की एक महत्वपूर्ण बैठक में राकेश सिंह के नाम को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के संगठन महामंत्री राम लाल मौजूद थे। (आज तक)

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Posted Date : 18-Apr-2018
  • अगरतला, 18 अप्रैल । त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब का कहना है कि इंटरनेट महाभारत के दिनों में भी हुआ करता था। एक जनसभा को संबोधित को करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि भारत काफी पुराने समय से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है। महाभारत के दिनों में संजय दृष्टिहीन थे, लेकिन वह युद्ध में होने वाली सभी घटनाओं को धृतराष्ट्र को सुना रहे थे। यह इंटरनेट और तकनीक से ही संभव हुआ था। बिप्लब देब ने आगे कहा कि उस समय सैटेलाइट भी हुआ करती थी।
    त्रिपुरा के नए सीएम चुने गए बिप्लब देब को मुख्यमंत्री बने एक माह पूरा हो गया है। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया है, जिससे देश में हर व्यक्ति की इस तक पहुंच हुई है। पीएम मोदी के सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने की तारीफ करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि मोदी लोगों के बीच फेसबुक, व्हाटसएप और ट्विटर के इस्तेमाल के लिए भी जाने जाते हैं। बिप्लब देब ने विभिन्न राज्यों के सीएम द्वारा सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट करने की तारीफ भी की।
    बिप्लब देब ने ये बातें अगरतला के प्रगना भवन पीडीएस सिस्टम के एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। त्रिपुरा के नवनियुक्त सीएम ने आगे कहा कि हम लोग की संस्कृति और सभ्यता काफी पुरानी है और हम पुराने समय से ही टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई भारतीयों के बड़ी बड़ी टेक कंपनियों में काम करने की बात कहते हुए बिप्लब देब ने कहा कि कई बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट आदि के पीछे भी भारतीय हैं, जहां वो लोग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं। सीएम ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह एक ऐसे देश में पैदा हुए, जो तकनीक के क्षेत्र में इतना आगे है।
    बिप्लब देब का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पिछले दिनों भाजपा के केन्द्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा था कि चाल्र्स डार्विन की उत्पत्ति की थ्योरी गलत है और इसे बदले जाने की जरुरत है। सत्यपाल सिंह ने कहा कि जब से मनुष्य इस धरती पर देखा गया है, वह हमेशा से ही मनुष्य ही था। जैसा कि कहा या लिखा गया है कि एक एप धीरे-धीरे मनुष्य में तब्दील हुआ, यह गलत है।(जनसत्ता)

     

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Posted Date : 17-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 17 अप्रैल । एनडीए सरकार के दो मंत्रियों रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने न्यायपालिका में आरक्षण की वकालत कर मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दोनों मंत्रियों ने हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग की है। मंत्रियों का कहना है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का न्यायालयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए इन्हें मौका मिलना चाहिए। वहीं राम विलास पासवान तो न्यायपालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करने की भी बात कर रहे हैं।
    केंद्रीय मंत्री और राजग के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान ने कहा, उनकी मांग पर जोर देने के लिए आंदोलन शुरू करने का सही समय है। उन्होंने पटना में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर दलित सेना के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा, मैं लोजपा प्रमुख की हैसियत से बोल रहा हूं कि हमें न्यायापालिका में आरक्षण हासिल करने के लिए आंदोलन शुरू करना चाहिए। पासवान ने बिहार में निचली और उच्च न्यायिक सेवाओं में आरक्षण लाने के लिए नीतीश कुमार सरकार की तारीफ भी की।
    वहीं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आजादी के बाद अपवाद ही रहा होगा कि एक आधे जज एससी/एसटी या ओबीसी जज बने हों। उन्होंने कहा कि इसका कारण है जजों की नियुक्ति की जो प्रक्रिया है उसमें एससी/एसटी या ओबीसी छोड़ दीजिए गरीब सवर्ण नौजवान भी चाहे की अपनी मैरिट के दम पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जज बन जाए तो बहुत मुश्किल है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, आजादी के बाद जितने भी लोग अब तक जज हुए हैं उनके परिवार में कोई जज रहा होगा, जमींदार रहा होगा या फिर राजनीतिक पृष्ठभूमि रही होगी। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 17-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 17 अप्रैल। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र राज्य में 16 रैलियों को संबोधित करने वाले हैं। वह भी आठ दिनों के भीतर। शुरूआत 29 अप्रैल से हो सकती है। खबर है कि इस दिन मोदी दक्षिण कर्नाटक के कोलार और रायचूर में दो रैलियों को संबोधित कर सकते हैं।
    एक मई को प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां बेल्लारी और बेलगावी में होंगी। इसके बाद तीन मई को चामराजानगर और उडुपी में। फिर पांच मई को जमखंडी और बेंगलुरू में, छह मई को कलबुर्गी और हुबली में, सात मई को शिवमोगा और तुमकुरू तथा इसके अगले दिन मेंगलुरू और बेंगलुरू में उनकी रैलियां हो सकती हैं। बताया जाता है कि नौ मई को भी प्रधानमंत्री दो रैलियां करने वाले हैं। लेकिन इनकी जगहें अभी तय नहीं हैं।
    कर्नाटक विधानसभा के लिए 12 मई को वोट डाले जाने हैं। जबकि 15 मई को नतीजों का ऐलान होगा। इस चुनाव के लिए भाजपा अब तक 154 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। जबकि कांग्रेस ने कुल 224 में से 218 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने अभी जिन सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं उनमें वरुणा और चामुंडेश्वरी सीटें भी शामिल हैं। चामुंडेश्वरी से कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जबकि वरुणा से उनके बेटे यतींद्र चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि वरुणा से भाजपा अपने मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी बीएस येद्दियुरप्पा के पुत्र बीवाइ विजयेंद्र को चुनाव लड़ा सकती है।  (डेक्कन क्रॉनिकल)

     

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Posted Date : 16-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 16 अप्रैल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने कहा कि यदि अयोध्या में राम मंदिर फिर से नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी। भागवत ने पालघर जिले के दहानू में विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
    आरएसएस प्रमुख ने कहा, भारत में मुस्लिम समुदाय ने राम मंदिर नहीं तोड़ा, भारतीय नागरिक ऐसी चीजें नहीं कर सकते। भारतीयों का मनोबल तोडऩे के लिए विदेशी ताकतों ने मंदिरों को तोड़ा, लेकिन आज हम आजाद हैं हमें उसे फिर से बनाने का अधिकार है जिसे नष्ट किया गया था, क्योंकि वे सिर्फ मंदिर नहीं थे बल्कि हमारी पहचान के प्रतीक थे। 
    भागवत ने कहा, यदि (अयोध्या में) राम मंदिर फिर से नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी। इसमें कोई शक नहीं कि मंदिर वहीं बनाया जाएगा जहां वह पहले था। और इसके लिए किसी भी लड़ाई के लिए हम तैयार हैं। राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद उच्चतम न्यायालय में है।
    आरएसएस प्रमुख ने विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए उन्हें देश के कई हिस्सों में हुई हालिया जातिगत हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। भागवत ने कहा, जिनकी दुकानें बंद हो गईं (जो चुनाव में हार गए) वे अब लोगों को जाति के मुद्दों पर लडऩे के लिए उकसा रहे हैं।
    इससे पहले विश्व हिंदू परिषद के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिवम् कोकजे ने अपनी जिम्मेदारी संभालते ही मंदिर निर्माण को लेकर बयान दिया था। रविवार को उन्होंने कहा था कि विहिप अपने एजेंडे पर कायम है।
    विष्णु सदाशिव कोकजे ने राम मंदिर पर कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर शीघ्र बनेगा। कोकजे ने कहा कि संतों की अगुवाई में भगवान राम का भव्य मंदिर शीघ्र ही न्यायालय के आदेश या कानून बनाकर शीघ्र किया जाएगा और उन्हें पूरा विश्वास है कि वह अपने दायित्व को निभाने में पूरी तरह से कामयाब रहेंगे। (आज तक)

     

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