राजनीति

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Date : 15-Oct-2019

मुंबई, 15 अक्टूबर । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर आखिर भारतीय जनता पार्टी ने भी मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया। संकल्प पत्र के नाम से जारी किए गए घोषणा पत्र के कवरपेज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की तस्वीर है। इस दौरान बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, सीएम दवेंद्र फडणवीस व अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मैनिफेस्टो का मुख्य केंद्र अर्थव्यवस्था को रखा गया है और ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। इसके साथ ही युवाओं को लुभाने के लिए फिर रोजगार का पासा फेंका गया है। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में पांच साल के कार्यकाल के दौरान 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया है। इसके साथ ही फडणवीस ने घोषणा की कि ज्योतिराव फुले, सावित्री फुले और सावरकर को भारत रत्न देने के संबंध में केंद्र सरकार से सिफारिश की जाएगी। घोषणा पत्र जारी करने से पहले बीजेपी ने अपना एक थीम सॉन्ग भी लॉन्च किया।
इस दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की राजनीति का मूल ही बदल दिया है। पांच साल पहले तक महाराष्ट्र भ्रष्टाचार वाला प्रदेश था, सीएम एक म्यूजिकल चेयर की तरह था। लेकिन आज यह एक करप्शन फ्री स्टेट है। प्रदेश में ट्रांसपेरेंसी और स्टेबिलिटी आई है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में महाराष्ट्र में 59 लाख लोगों को रोजगार मिला है।
घोषणा पत्र जारी करने के बाद सीमए फडणवीस ने कहा कि चुनावों के बा हम पीएमसी बैंक मु्द्दा केंद्र के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार से गुजारिश करेंगे कि खाताधारकों का रुपया जल्द से जल्द उन्हें वापस मिले। मैं खुद इस मसले को सुलझाने का प्रयास करुंगा।
दो दिन पहले ही बीजेपी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर घोषणा पत्र जारी किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जेपी नड्डा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला और मेनिफेस्टो कमेटी के प्रमुख ओपी धनखड़ समेत पार्टी के अन्य नेता मौजूद थे। बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो का टाइटल म्हारे सपने का हरियाणा रखा है।
घोषणा पत्र के लिए बीजेपी को करीब 1.70 लाख सुझाव मिले थे। बाद में एक समिति ने 200 सुझावों का चयन किया और उन्हें घोषणा पत्र में शामिल कर दिया। हरियाणा चुनाव के लिए कांग्रेस, जेजेपी और इनेलो ने पहले ही अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। कांग्रेस और जेजेपी ने शुक्रवार को ही अपना मेनिफेस्टो जारी कर दिया था, जबकि इनेलो ने शनिवार को अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया।(न्यूज18)
 


Date : 14-Oct-2019

रोहतक, 14 अक्टूबर । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर एक चुनावी रैली में बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। उनके इस बयान के बाद बवाल मच गया है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री खट्टर से तुरंत माफी मांगने को कहा है।
खट्टर ने अपने भाषण में कहा, ये लोग सारे देश में घूमने लगे कि कांग्रेस के लिए एक राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाए। घूमते-घूमते तीन महीने बीता दिए और तीन महीने बाद भी कौन बना। सोनिया गांधी। फिर वही गांधी परिवार, यानी खोदा पहाड़ निकली चुहिया, वो भी मरी हुई।
जानकर हैरानी होगी कि मुख्यमंत्री जी अपनी पार्टी की महिला उम्मीदवार के पक्ष में वोट मांग रहे थे लेकिन उसी मंच से एक दूसरी महिला पर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे। सिर्फ सोनिया ही नहीं सुनिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को उन्होंने पप्पू कहा।
खट्टर ने कहा, सेंटर में भी परिवारवाद वाली पार्टियां किस प्रकार तमाशा कर रही हैं आपको पता है और घर-घर में लड़ाई हो गई है। एक तो पप्पू और एक मम्मी, दोनों की अलग पार्टियां हो रही हैं। पहले पप्पू चौधरी था। लोकसभा चुनाव हारने के बाद बोला कि मैं नहीं रहता पार्टी का अध्यक्ष और राहुल बाबा ने अध्यक्षता छोड़ दी।
मनोहर लाल खट्टर के इस बयान पर कांग्रेस भडक़ गई। इसके बाद कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बयान जारी किया गया और उनसे माफी की मांग की गई।
कांग्रेस ने लिखा, बीजेपी के मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान न केवल अशोभनीय और निम्नस्तरीय है, बल्कि ये बीजेपी के महिला विरोधी चरित्र को भी दर्शाता है। हम मुख्यमंत्री के बयान की निंदा करते हुए उनसे अतिशीघ्र माफी की मांग करते हैं।(आजतक)
 


Date : 13-Oct-2019

मुंबई, 13 अक्टूबर । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलगांव से अपने धमाकेदार चुनाव प्रचार का आगाज करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला। अनुच्छेद 370, 35ए, तीन तलाक जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों को घेरते हुए पीएम ने चुनौती दी कि अगर कांग्रेस समेत विरोधियों में हिम्मत है तो वे अपने चुनावी घोषणापत्र में यह लिखकर दिखाएं कि वे इस ऐतिहासिक फैसले को पलट देंगे। मोदी ने कहा कि ये विपक्ष के घडिय़ाली आंसू हैं। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कांग्रेस पर पड़ोसी देश की भाषा बोलने का भी आरोप लगाया। पीएम ने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि नए भारत का नया जोश दुनिया देख रही है और मजबूती से सुन भी रही है। 
पीएम ने कहा कि आज मैं विरोधियों को चुनौती देता हूं कि अगर आपमें हिम्मत है तो इस चुनाव में स्पष्ट स्टैंड लेकर सामने आएं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विषय में अनाप-शनाप बातें करने वाले लोग अगर आपमें हिम्मत है तो इस चुनाव में और आने वाले चुनावों में भी घोषणापत्र में ऐलान करें कि वे 370 और 35ए को वापस लाएंगे। उन्होंने कहा कि विरोधियों में हिम्मत है तो ऐलान करें कि 5 अगस्त के निर्णय को बदल देंगे वर्ना ये घडिय़ाली आंसू बहाना बंद करें। 
पीएम ने कहा कि 5 अगस्त को आपकी भावना के अनुरूप बीजेपी-एनडीए सरकार ने अभूतपूर्व फैसला लिया, जिसके बारे में सोचना तक पहले असंभव लगता था। एक ऐसी स्थिति जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गरीब, बहन-बेटियों, दलितों, शोषितों के विकास की संभावनाएं नहीं के बराबर थीं। आज जब हम वाल्मीकि जयंती मना रहे हैं। 70 वर्षों में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में रहने वाले वाल्मीकि समुदाय के लोगों को मानवाधिकारों से भी वंचित रखा गया था। 
उन्होंने कहा कि उस स्थिति में केवल अलगाववाद का विस्तार हो रहा था। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमारे लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, भारत का मस्तक है। वहां का समूचा जीवन, कण-कण भारत की सोच और शक्ति को मजबूत करता है। आस-पड़ोस की नापाक शक्तियों की गिद्ध दृष्टि से जम्मू-कश्मीर की शांति भंग होने और वहां खून-खराबा रोकने के लिए हमने सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम उठाए। 
मोदी ने कहा कि तीन तलाक पर कांग्रेस समेत तमाम दलों ने कोशिश की लेकिन हमने मुस्लिम माताओं-बहनों को जो वादा किया था, उसे निभाया। मैं इसमें भी विरोधी दलों को चुनौती देता हूं कि आपमें हिम्मत है तो घोषणा करें कि फिर से तीन तलाक का कानून लाएंगे।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लेकिन विरोधी ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि तीन तलाक के कारण सिर्फ मुस्लिम माताओं-बहनों को ही हक नहीं मिला, मुस्लिम पुरुषों को भी यह उचित लगा क्योंकि वे पिता और भाई भी हैं। उन्होंने कहा कि भाई और पिता के नाते मुस्लिम पुरुषों को यह कानून सही लगता है। 
कांग्रेस, एनसीपी पर अटैक, पड़ोसी देश की भाषा बोल रहे 
पीएम ने कहा कि 40 साल से जो असामान्य परिस्थिति थी उसे सामान्य बनाने में 4 महीने भी नहीं लगेंगे लेकिन आज दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि देश के कुछ राजनीतिक दल और नेता राष्ट्रहित में लिए गए निर्णय पर राजनीति करने में जुट गए हैं। ये दल आपके वोट लेने के लिए आपके बीच में चक्कर काट रहे हैं। आप पीछे कुछ महीनों में कांग्रेस और हृष्टक्क के बयान देख लीजिए, मेल-मुलाकातों को देख लीजिए। जम्मू-कश्मीर को लेकर जो देश सोचता है, उससे एकदम उल्टा इनकी बातों में दिखता है, इनकी सोच और व्यवहार में दिखता है। भारत की कम, पड़ोसी देश के लोगों की भाषा के साथ ऐसा लग रहा है कि इनका बड़ा तालमेल है। यह देश की भावनाओं के साथ खड़े रहने में संकोच कर रहे हैं। 
दुनिया को दिख रहा नए भारत का नया जोश
पीएम ने कहा कि नए भारत का नया जोश दुनिया को दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि आप भी अनुभव करने लगे हैं पर पहले ऐसा होता था क्या? यह मोदी के कारण नहीं आप लोगों के वोट के कारण हो रहा है। आपने जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर एक निर्णायक जनादेश दिया है, उसने भारत की छवि में चार चांद लगाए हैं। इसी जनादेश का परिणाम है कि आज भारत की आवाज दुनिया की हर बड़ी ताकत मजबूती से सुन रही है। विश्व का हर देश, हर क्षेत्र आज भारत के साथ खड़ा दिखता है। भारत के साथ मिलकर आगे बढऩे के लिए उत्साहित है। 
चुनौतियों को दे रहे चुनौती
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भारत को पुरस्कृत किया जा रहा है, सम्मान दिया जा रहा है। इसमें आपसभी का त्याग, तपस्या और जोश शामिल है। आज नया भारत अपने वर्तमान को मजबूत तो कर ही रहा है, खुद को भविष्य के लिए तैयार भी कर रहा है। महाराष्ट्र सहित पूरे भारत की भावनाओं के अनुसार चुनौतियों को चुनौती देने का हम प्रयास कर रहे हैं। जो बातें दशकों से चली आ रही थीं, आज हम सामने से उससे टकराने का मन बना लिए हैं। 
फडणवीस की थपथपाई पीठ 
पीएम ने आगे कहा कि मैं महाराष्ट्र और हरियाणा की माताओं-बहनों से विशेष आग्रह करना चाहता हूं कि लोकसभा चुनाव में मतदान करके आपने पुरुषों की बराबरी कर ली लेकिन विधासभा चुनाव में माताएं-बहनें पुरुषों से भी आगे निकलनी चाहिए। पीएम ने कहा कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस दूसरे ही सीएम हैं जो पूरे समय तक सीएम रहे वर्ना इससे पहले कई सीएम बदल जाते थे। भ्रष्टाचार, सामाजिक सद्भाव, भाई-भतीजावाद, विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने सीएम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सड़क से लेकर सिंचाई, किसान हो या कारोबार हर क्षेत्र में सरकार सफल हुई है। थके हुए साथी एक दूसरे के लिए सहारा तो बन सकते हैं लेकिन महाराष्ट्र के युवाओं के सपनों को पूरा करने का माध्यम नहीं बन सकते हैं। 
इससे पहले पीएम ने मराठी में अपने भाषण की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में 13 से 18 अक्टूबर के बीच 9 जनसभाओं को संबोधित करेंगे। रविवार को पीएम मोदी की दो सभाओं के बाद 16 अक्टूबर को अकोला, पनवेल, पारतुर, 17 अक्टूबर को पुणे, सातारा, परली में रैलियां होंगी। मुंबई में 18 अक्टूबर को पीएम की महारैली होगी। (नवभारत टाईम्स)


Date : 13-Oct-2019

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। लोकसभा में करारी हार के बाद से ही कांग्रेस में अंतर्कलह का दौर जारी है। चुनाव परिणाम सामने आते ही राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष पद छोड़कर चले गए थे। अपनी हार का आंत्मचिंतन कर पाने में असमर्थ पार्टी अपने ही नेताओं पर टीका टिप्पणियां करते नजर आते रहते हैं, अब ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए पार्टी नेताओं को एक खुला खत लिखा है। 
सलमान खुर्शीद ने कहा है कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं और उन्हें वापस से कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बन जाना चाहिए। ऐसा उन्होंने तब कहा जब इसके पहले उन्होंने बोला था कि पार्टी अपने लोकसभा चुनाव के हार का सामना करने में सक्षम नहीं थी क्योंकि चुनाव के बाद उनके नेता चले गए थे।
खुर्शीद की इस टिप्पणी पर पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा उन पर भड़क गए थे और कहा था कि लोगों को इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए इसके बदले उन्हें बीजेपी सरकार की गलतियां और असफलताओं को उजागर करना चाहिए। सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार को इसी पर फेसबुक पर एक लंबा चोड़ा पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि मैं आश्चर्यचकित हूं कि लोग मुझे इस तरह का लेक्चर दे रहे हैं जिनके पास व्यक्तिगत विश्वास और पॉलिटिकल रणनीति का बहुत थोड़ा ज्ञान है। 
इसलिए एक बार जब मैं उन्हें यहां बता देता हूं कि मुझे विश्वास है और विश्वास है व्यक्तिगत पसंद के बारे में निष्ठा है। मैं व्यक्तिगत आभार और देश के इतिहास और भारतीय लोकतंत्र में उनके योगदान के लिए गांधी परिवार का समर्थन करता हूं। मुश्किल वक्त में रणनीतिक चुप्पी समझदारी है लेकिन एक बेहतर भविष्य के लिए बोलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सलमान खुर्शीद ने फेसबुक पर लिखे एक लंबे चोड़े पोस्ट में ये बातें कही।  
उन्होंने आगे कहा कि केवल मरी हुई मछली ही पानी के उपर तैर सकती है। कांग्रेस बीजेपी की तरह नहीं है और कभी हो भी नहीं सकती। पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद आगे लिखते हैं कि जब हमारे प्रवक्ता बीजेपी पर सवाल उठाते हैं तो ऐसे में उन्हें ये याद रखना चाहिए कि इससे पहले हमें अपने अंदरुनी कलह पर भी ध्यान देना होगा।
आखिर में हमारे विरोधी और मीडिया उनके ही पक्ष में होंगे लेकिन मुझे विश्वास है कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं, उन्हें वापस से पार्टी अध्यक्ष बन जाना चाहिए ताकि सोनिया गांधी का उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहे। उन्होंने आगे कहा कि लिबरल पार्टियां बीजेपी की इस जीत के बाद स्वकेंद्रित हो गई हैं। यह दुखद है कि लोगों के पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है। 
जब हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहे हैं हमें भयमुक्त बनना होगा, लेकिन ये त्याग के बिना नहीं होगा। प्रतीकवाद से निकलकर सत्याग्रह की तरफ बढऩे का समय आ गया है। 
उन्होंने अपने बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर विवादित बनाने के लिए भी कुछ मीडिया समूहों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि चीजों से पीछा छुड़ाकर भाग जाना एक बेहद आसान रास्ता है लेकिन जिस तरह से मीडिया सच्चाई का गला घोंट रही है उससे लोकतंत्र के विनाश की शुरुआत जरूर हो रही है। (टाईम्स नाऊ)


Date : 12-Oct-2019

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर । पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली के चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधानसभा पहुंची अलका लांबा शनिवार को कांग्रेस में लौट आयीं।
कांग्रेस के पार्टी मामलों के दिल्ली के प्रभारी पी सी चाको की मौजूदगी में सुश्री लाम्बा ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) से राजनीति शुरू करने वाली सुश्री लाम्बा 2015 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुई और चांदनी चौक से विधायक चुनी गईं थी।
सुश्री लाम्बा ने ट््वीट कर कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘आज कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पहुंच कर श्री पी सी चाको, जिला चांदनी चौक अध्यक्ष उस्मान जी, जिला आदर्श नगर अध्यक्ष ङ्क्षजदलजी तथा अन्य नेताओं की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस सदस्य बनने पर गर्व महसूस कर रही हूं।’’
पिछले माह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर पार्टी में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी और श्रीमती गांधी के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद वह पार्टी में लौट आयीं। 
कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आम आदमी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी पर हमला किया और कहा,‘‘ दोनों दल मिलकर एक दूसरों को कवर दे रहे हैं, महिला सुरक्षा के वादे पर दिल्ली के लोगों ने इन दोनों को सत्ता सौपी.. छह साल बाद भी दिल्ली बेहाल। ’’(वार्ता)

 


Date : 11-Oct-2019

गुना, 11 अक्टूबर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी और गहरी होती जा रही है। कर्जमाफी पर दिग्विजय सिंह के भाई के बाद अब गुना से पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सवाल उठाए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने माना कि उनकी सरकार का किया हुआ कर्जमाफी का वादा पूर्णतया पूरा नहीं हुआ है। इससे पहले दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने कहा था कि राहुल गांधी को किसानों से माफी मांगनी चाहिए। 
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, सरकार का जो कर्जमाफी का वादा था वह पूरा नहीं हो पाया है। किसानों का सिर्फ 50 हजार रुपये तक का कर्ज माफ हुआ है जबकि हमने 2 लाख रुपये तक के कर्जमाफी का वादा किया था। इसलिए सरकार को किसान का पूरा कर्जमाफ करने की दिशा पर काम करना चाहिए।
इससे पहले पिछले महीने वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने अपनी सरकरा पर निशाना साधते हुए कहा था कि किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं हो पाया है। उन्होंने यह भी कहा था कि राहुल गांधी को किसानों से माफी मांगनी चाहिए और बताना चाहिए कि कर्ज माफ करने में अभी और कितना वक्त लगेगा। 
कांग्रेस के अंदर उठ रही बागी आवाज पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि कांग्रेस को आत्म अवलोकन की जरूरत है और पार्टी की आज जो स्थिति है, उसका जायजा लेकर सुधार करना समय की मांग है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद द्वारा कांग्रेस पार्टी की खराब स्थिति की बात कहने पर पूछे गये सवाल के जवाब में सिंधिया ने पहले तो कहा कि वह किसी के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन यह सही बात है कि कांग्रेस को आत्म अवलोकन की जरूरत है। पार्टी की जो स्थिति है, उसमें जायजा लेकर सुधार करना चाहिए और यह समय की मांग है।’  (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 10-Oct-2019

मुंबई, 10 अक्टूबर। महाराष्ट्र चुनाव की मुनादी हो चुकी है और सभी पार्टियों की तैयारियां जोरों पर हैं, मगर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शिवसेना को बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र में शिवसेना में टिकट बंटवारे से कई पार्षद और कार्यकर्ता नाराज हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र के 26 शिवसेना पार्षदों और करीब 300 कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा भेजा है। आगामी महाराष्ट्र चुनाव में सीट बंटवारे से ये पार्षद और कार्यकर्ता नाराज बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट् में 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे।
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को एक ही चरण में चुनाव कराने की घोषणा की है। मतों की गिनती 24 अक्टूबर को होगी। लोकसभा चुनाव 2019 में भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता में वापसी के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल नौ नवंबर को खत्म हो रहा है।
साल 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा की 288 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 122 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। भाजपा ने पहली बार महाराष्ट्र में इतनी सीटें हासिल की थीं। वहीं, कांग्रेस 42 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई। इसके अलावा, शिवसेना 63 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रहने वाली पार्टी थी। शरद पवार की राकांपा को 41 सीटें मिली थीं।
2014 में 63.08 प्रतिशत वोट डाले गए थे। कुल 52691758 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। जिसमें 28383004 पुरुष, 24308397 महिला और 357 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल थे। पिछले विधानसभा चुनाव में 63.08 प्रतिशत वोट डाले गए थे। (लाईव हिन्दुस्तान)
 


Date : 09-Oct-2019

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद छोडऩे पर टिप्पणी की तो बीजेपी ने उसे लपकने में कोई देर नहीं की। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस द्वारा हार स्वीकार कर लेने के रूप में पेश किया। पात्रा ने टाईम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खुर्शीद के बयान वाली खबर के साथ किए ट्वीट कहा कि अब कांग्रेस के पास न नेता है, न नीति और न ही नीयत। 
बीजेपी प्रवक्ता ने लिखा, खुर्शीद मानते हैं कि राहुल गांधी छोड़ गए और सोनिया गांधी सिर्फ फौरी इंतजाम देख रही हैं। इसका मतलब है कि कांग्रेस में कोई नेता, नीति और नीयत नहीं बचा है।
पात्रा ने खुर्शीद के इस बयान को महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की डांवाडोल स्थिति का इजहार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस ने दोनों राज्यों में अपनी पराजय स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा, तो आखिरकार कांग्रेस ने आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए मतदान से पहले ही हार मान ली है!
गौरतलब है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे को पहली बार किसी कांग्रेसी नेता ने छोड़ जाना कहा। खुर्शीद ने कहा, हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे नेता ही छोड़ गए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस फैसले के कारण पार्टी हार के बाद जरूरी आत्मनिरीक्षण भी नहीं कर पाई। कांग्रेस को लेकर चर्चा करते हुए पार्टी के सीनियर नेता ने कहा, हम विश्लेषण के लिए भी एकजुट नहीं हो सके कि हम लोकसभा चुनाव में क्यों हारे। हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हमारे नेता ने हमें छोड़ दिया।
वैसे तो बीजेपी राहुल के इस्तीफे पर लगातार चुटकी लेती रही है, लेकिन कांग्रेस के अंदर से राहुल के छोड़ जाने जैसी बात पहली बार सामने आई है, वह भी सलमान खुर्शीद जैसे वरिष्ठ और अनुभवी पार्टी नेता की ओर से। ऐसे में चुनावों से पहले राहुल के विदेश दौरे पर जाने को लेकर निशाना साध रही बीजेपी को एक और बड़ा मौका हाथ लग गया है। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 09-Oct-2019

पटना, 9 अक्टूबर । उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और अन्य लोगों सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता पटना के प्रतिष्ठित गांधी मैदान में दशहरा समारोह के आयोजन में नहीं पहुंचे, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि थे। उपमुख्यमंत्री के लिए नामित कुर्सी उत्सव के दौरान खाली रह गई। उप मुख्यमंत्री मोदी के अलावा, इस कार्यक्रम में स्थानीय भाजपा विधायक, भाजपा के मंत्रियों और अन्य प्रतिष्ठित भाजपा नेताओं की अनुपस्थिति देखी गई।
राज्य सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, वरिष्ठ नौकरशाह, पटना के जिलाधिकारी और अन्य अधिकारी गांधी मैदान में समारोह के दौरान मौजूद थे। 
जेडीयू नेता अजय आलोक ने भी ट्विटर पर बीजेपी से पूछा कि क्या हो गया? कोई गांधी मैदान में रावण वध में नहीं आया? रावण वध नहीं करना था क्या? 
सरकार के कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं का शामिल ना होना ऐसे समय में सामने आया है, जब पटना बाढ़ के बाद दोनों दलों के कुछ नेताओं के बीच बयानबाजी हुई। कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं की गैरमौजूदगी से ये भी सवाल उठने खड़े हो जाएंगे कि क्या भाजपा और जेडीयू गठबंधन में सब सही नहीं है?
बाढ़ के बाद केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि राज्य प्रशासन राजधानी शहर में बाढ़ की स्थिति के कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ताली सरदार को, तो गाली भी सरदार को। इस पर जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, वह (गिरिराज सिंह) नीतीश कुमार की पैरों की धूल के बराबर भी नहीं हैं। कोई भी जब-तब सिर्फ महादेव का नाम जप कर नेता नहीं बन जाता है।
जेडीयू के अन्य प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पटना में संकट के लिए भाजपा कहीं ज्यादा जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, जदयू-भाजपा गठबंधन जब से राज्य में शासन कर रहा है, तब से शहरी विकास विभाग हमारी गठबंधन सहयोगी के पास है। पटना के मेयर भाजपा के हैं और जिले की दो लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व भी भाजपा के नेता करते हैं। शहर के सभी विधानसभा क्षेत्र 1990 के दशक से ही भाजपा का गढ़ हैं।(टाईम्स नाऊ)
 


Date : 07-Oct-2019

मुंबई, 7 अक्टूबर । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का गठबंधन कांग्रेस-एनसीपी के गठजोड़ को चुनौती दे रहा है। हालांकि, बीजेपी-शिवसेना बराबर सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन शिवसेना को उम्मीद है कि 24 अक्टूबर को उनके गठबंधन की सरकार आएगी और तय एजेंडे के तहत सरकार में उसे बराबर की भागीदारी मिलेगी। सरकार में हिस्सेदारी पर शिवसेना की तरफ से सीएम पद की मांग भी उठती रही है। इस बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का आदित्य ठाकरे के सीएम या डिप्टी सीएम बनने पर बयान सामने आया है।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सामना को दिए इंटरव्यू में बीजेपी के साथ गठबंधन से लेकर अपने बेटे आदित्य ठाकरे की सीएम और डिप्टी सीएम पद की दावेदारी को लेकर भी जवाब दिए हैं। ठाकरे परिवार से पहली बार चुनाव लडऩे का इतिहास बनाने जा रहे आदित्य पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनके चुनाव में उतरने का मतलब यह नहीं है कि वो तुरंत सीएम या डिप्टी सीएम बन जाएंगे।
ठाकरे के इस बयान से पहले पार्टी के सीनियर नेता संजय राउत की तरफ से ऐसे बयान आते रहे हैं जिसमें वो सीधे तौर पर शिवसेना के लिए सीएम पद की मांग करते रहे हैं और आदित्य की नेतृत्व क्षमता को सामने रखते रहे हैं। हाल ही में संजय राउत ने कहा था कि अगर आदित्य ठाकरे युवाओं का नेतृत्व कर सकते हैं तो वह सरकार को भी लीड कर सकते हैं। इतना ही नहीं, संजय राउत इस बात को लेकर भी अडिग नजर आए हैं कि ठाकरे परिवार का सदस्य सरकार में शामिल होता है तो उसके लिए डिप्टी सीएम नहीं, बल्कि सीएम का पद होगा।
संजय राउत भले ही गठबंधन सरकार में सीएम पद का सवाल उठाते रहे हों, लेकिन उद्धव ठाकरे ने कहा है कि आदित्य विधानसभा का तजुर्बा लेना चाहते हैं, उन्हें इसमें काफी रूचि है। आदित्य के लिए शिवसेना से उठने वाली आवाज के विपरीत ठाकरे ने साफ कहा है कि चुनाव लडऩे का मतलब यह नहीं है कि वो तुरंत सीएम या डिप्टी सीएम बन जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वो शिवसेना का सीएम बनाने वाले अपने पिता (बालासाहेब ठाकरे) को दिए गए वचन को पूरा नहीं कर देते तब तक शांत नहीं बैठेंगे।
बहरहाल, उद्धव ठाकरे ने अपने ताजा बयान से बेटे की दावेदारी पर चल रही चर्चा को जरूर नया मोड़ दे दिया है।(आजतक)

 


Date : 05-Oct-2019

दिल्ली, 5 अक्टूबर। हरियाणा कांग्रेस में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद से तंवर गुट हुड्डा गुट से नाराज चल रहा है। इसके चलते कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फे्रंस की। इस दौरान उन्होंने हुड्डा गुट पर जमकर निशाना साधा। तंवर ने बताया कि उन्होंने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चि_ी लिख कांग्रेस की सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है।
इस दौरान तंवर ने कहा कि मैं साधारण परिवार से राजनीति में आया हूं। मैंने आम लोगों को विधानसभा चुनाव के लिए तैयार किया है। पांच साल उन्होंने विपक्ष की भूमिका निभाई, लेकिन अब टिकट बंटवारे में उनकी अनदेखी देखी हुई। उन्होंने कहा कुछ लोगों को नई लीडरशिप बर्दाश्त नहीं। उन्होंने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिन लोगों ने कांग्रेस को कमजोर किया उनको टिकट क्यों?
तंवर ने कहा कि हाईकमान नए लोगों को टिकट देना चाहता था, लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा होने नहीं दिया। कई बार हारे हुए लोगों को फिर से टिकट दी गई। टिकट बेचने को लेकर तंवर ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो आलाकमान को रिपोर्ट दूंगा। अगर कांग्रेस हारी तो जिन्होंने चुनाव की जिम्मेदारी ली, वही लोग हार के जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा कांग्रेस अब हुड्डा कांग्रेस बनकर रह गई है। (न्यूज18)

 


Date : 04-Oct-2019

अतुल पुरोहित
भोपाल,  4 अक्टूबर(छत्तीसगढ़)। बीजेपी की दिग्गज नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भले ही बीते दिनों हिमालय जाकर मौन धारण करने का ऐलान किया हो लेकिन एमपी में बढ़ती उनकी सक्रियता ने फिर नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। 
हाल ही में गांधी की 150 वीं जयंती पर भोपाल में निकाली गई संकल्प यात्रा में उनकी मौजदूगी ने इस ओर संकेत दिए हंै। इसके पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की वीडियो कॉन्फें्रसिंग, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा और पार्टी कार्यालय से लेकर मैदान तक उमा भारती की मौजूदगी चर्चा का विषय रही ।
एक बार फिर अटकलों का दौर शुरू हो गया है, कि उमा एमपी में एंट्री कर सकती है। प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में उनकी इस सक्रियता से काफी खलबली मची हुई है कि उमा भारती बीते कुछ वर्षो में इतनी सक्रिय कभी नजर नहीं आईं, जितनी इस बार नजर आ रही हैं। 
दरअसल, झाबुआ उपचुनाव के बाद नगरीय निकाय और संगठन चुनाव होना है, ऐसे में उमा की मध्यप्रदेश से बढ़ती नजदीकियों को इससे जोडक़र देखा जा रहा है। चूंकि विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद से ही बीजेपी में नेतृत्व को लेकर असमंजस दिखाई दे रहा है, वहीं अंदरुनी कलह भी जारी है। नेताओं के बयानों से हाईकमान पहले से ही नाराज चल रहे हंै, इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की मप्र में सक्रियता से चर्चा चल पड़ी कि वे यहां अपनी जमीन तलाश रही हैं। 
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि उमा के वर्चस्व को देखते हुए पार्टी आने वाले दिनों में उमा को बड़ा पद दे सकती है, इससे दिग्गज नेताओं की भी और बेचैनी बढ़ गई।
वहीं राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो वर्तमान समय में बीजेपी में शिवराज के अलावा एक भी ऐसा नेता नहीं, जिसके नाम पर सभी एक हो जाएं। पार्टी हाईकमान चौहान को राज्य की राजनीति से दूर रखना चाहता है, 
इसीलिए उन्हें सदस्यता अभियान का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया है। इस स्थिति में उमा भारती को लगता है कि पार्टी में आ रही रिक्तता को भरने में वह सफल हो सकती हैं, यही कारण है कि वह राज्य की राजनीति में सक्रिय हो चली हैं।

 


Date : 04-Oct-2019

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। बीजेपी ने 21 अक्टूबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सात उम्मीदवारों की चौथी सूची शुक्रवार को जारी कर दी जिसमें वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से और कैबिनेट मंत्री विनोद तावड़े का टिकट काट दिया है। पार्टी ने उत्तर महाराष्ट्र में मुक्ताईनगर विधानसभा सीट से एकनाथ खड़से की बेटी रोहिणी को टिकट दिया है। रोहिणी खड़से को खड़ा करने का फैसला यह दिखाता है कि पार्टी उनके पिता को शांत करने में सफल हो गयी है। वह 1991 से मुक्ताईनगर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। एकनाथ खड़से महाराष्ट्र में सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं लेकिन देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री रहते हुए अनियमितताओं के आरोपों के बाद से वो हाशिये पर चल रहे थे। उन्हें 2016 में राजस्व मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उन्हें फडणवीस ने मंत्रिमंडल में वापस भी नहीं लिया। 
पार्टी सूत्रों ने बताया कि खड़से को यह साफ बता दिया गया है कि उन्हें इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। खड़से (67) ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इस सप्ताह मुक्ताईनगर सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया था। पार्टी ने कैबिनेट मंत्री तावड़े का टिकट भी काट दिया और बोरीवली सीट से सुनील राणे को खड़ा किया है। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा और शिवसेना अहम घटक दल हैं। राज्य में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। 288 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख चार अक्टूबर है जबकि पांच अक्टूबर को इनकी जांच होगी। नामांकन सात अक्टूबर तक वापस लिया जा सकता है।(भाषा)
 


Date : 03-Oct-2019

मुंबई, 3 अक्टूबर । महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 के लिए सियासी घमासान चरम पर है। सभी पार्टीयों ने लगभग अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इन सबके बीच सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) ने पश्चिमी महाराष्ट्र के फलटण विधानसभा क्षेत्र से दीपक निकालजे को मैदान में उतारा है जो जेल में बंद अंडरवल्र्ड डॉन छोटा राजन के भाई हैं। इस घटना के सामने आने के बाद सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है।
केंद्रीय मंत्री की है पार्टी : राज्य में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा, शिवसेना और अन्य छोटे सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे के तहत केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के नेतृत्व वाली आरपीआई को छह सीटें दी गई हैं। अठावले ने बुधवार को मुंबई में उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की। जिनमें छोटा राजन के भाई दीपक निकालजे का नाम भी शामिल है।
आरपीआई का बयान : पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘इस बार उन्होंने (छोटा राजन के भाई) फलटण से चुनाव लडऩे की इच्छा जाहिर की क्योंकि वह उस इलाके से आते हैं और उनका वहां अच्छा संपर्क है।’’ अन्य पांच सीटें जहां से आरपीआई के उम्मीदवार होंगे, वे हैं सोलापुर जिले के मालशिरस, नांदेड़ जिले के भंडारा और नयगांव, परभणी में पाथरी और मुंबई में मानखुर्द-शिवाजी नगर हैं।
पहले भी लड़ा था चुनाव : कई वर्षों से आरपीआई से जुड़े निकालजे ने इससे पहले भी पार्टी के टिकट पर मुंबई के चेंबूर से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन तब वह हार गये थे। फिलहाल वह इस बार अपनी जीत को काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं।(जनसत्ता)

 


Date : 03-Oct-2019

करनाल, 3 अक्टूबर। हरियाणा विधानसभा चुनाव के जरिए सत्ता पर काबिज होने के लिए सभी पार्टियां जीतोड़ मेहनत कर रही हैं। एक तरफ जहां बीजेपी सत्ता को बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस की कोशिश सत्ता में वापसी की है। इस बीच जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने 30 उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी की है। इस सूची में करनाल से जेजेपी ने बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव को सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि तेज बहादुर लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ एसपी प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। हालांकि बाद में उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था। 
उधर, कांग्रेस के अंदर चल रहे घमासान के बीच पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। बुधवार रात जारी इस लिस्ट में 84 प्रत्याशियों के नाम हैं। पार्टी ने केवल एक मौजूदा विधायक को छोडक़र बाकी सभी को टिकट दिया है। कांग्रेस की केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी सूची के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा गढ़ी सांपला किलोई सीट से और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कैथल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। 
वहीं, बुधवार देर रात बीजेपी ने दूसरी लिस्ट जारी कर दी। इसमें कैबिनेट मंत्री राव नरबीर और विपुल गोयल को जगह नहीं मिली है। रेवाड़ी से सुनील मुसेपुर को प्रत्याशी बनाया गया है। गुडग़ांव में उमेश अग्रवाल को झटका लगा है। यहां से सुधीर सिंगला मैदान में हैं। पलवल से सीएम के सचिव दीपक मंगला को पार्टी ने मैदान में उतारा है। इससे पहले दिनभर राव नरबीर को रेवाड़ी से टिकट मिलने की चर्चा होती रही। 
हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के 2,923 मतदान केंद्रों की पहचान संवेदनशील और 83 की अतिसंवेदनशील के तौर पर की गई है। राज्य में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं और चार अक्टूबर तक सभी सीटों पर नामांकन प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 03-Oct-2019

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश में सोनिया गांधी  की रायबरेली सीट ही कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती रही है। इस बार हुए लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने यहां बहुत खराब प्रदर्शन करते हुए भी 1 लाख के अंतर से बीजेपी प्रत्याशी दिनेश सिंह को हराया है। लेकिन पिछली बार की तुलना में कांग्रेस की जीत का अंतर घट गया है। दरअसल कांग्रेस की हालत यहां पर 2017 में हुई विधानसभा चुनाव से ही खराब होती दिख रही थी। लोकसभा सीट में पांच विधानसभा सीटें हैं जिनमें से दो कांग्रेस, दो बीजेपी और एक समाजवादी पार्टी के पास थी। बीजेपी रायबरेली में सोनिया के गढ़ को ध्वस्त करना चाहती है। इसके पहले उसने गांधी परिवार के बहुत करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के एमएलए दिनेश सिंह को बीजेपी  ज्वाइन करवाई थी। दिनेश सिंह के छोटे भाई अवधेश सिंह रायबरेली की हरचंदपुर सीट से कांग्रेस विधायक हैं। उनके बड़े भाई के बीजेपी में जाने के बाद वे भी बीजेपी के साथ ही माने जा रहे हैं।
लेकिन क्षेत्र की इन सभी राजनीतिक उठापटक के बाद भी कांग्रेस के पास एक तुरुप का पत्ता था ऐसा था जो जिले के सभी बाहुबलियों पर अकेले पड़ा था। वह थे रायबरेली सदर से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अखिलेश सिंह। मौजूदा सदर विधायक अदिति सिंह उन्हीं की बेटी हैं। अखिलेश सिंह रायबरेली सदर से अजेय विधायक रहे हैं। उनको हराने के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर कई बार लगाया लेकिन सफल नही हो पाई। इसके बाद अखिलेश सिंह को कांग्रेस में शामिल कराया गया। कांग्रेस को इसका फायदा मिला और लोकसभा चुनाव में अखिलेश सिंह के रसूख के चलते रायबरेली में सदर से कांग्रेस के एकतरफा वोटें मिलती थीं जो सोनिया गांधी की जीत का अंतर बहुत ज्यादा बढ़ा देती थीं। लेकिन कुछ दिन पहले ही बीमारी के चलते अखिलेश सिंह का निधन हो गया।
अखिलेश सिंह के रहने पर जिले में उनके प्रतिद्वंदी अदिति सिंह पर हावी होने की कोशिश करते दिखे। कुछ दिन पहले ही रायबरेली लखनऊ रोड पर अदिति सिंह पर एक कथित हमले की भी घटना हुई। इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी और इस घटना का प्रियंका गांधी ने भी विरोध किया। इस घटना के बाद अदिति सिंह को भी समझ आ गया कि जिले के बदलते समीकरणों के बीच यहां की राजनीति को दिल्ली के नेताओं को भरोसे नहीं थामा जा सकता है। 
अदिति सिंह जिनको राजनीति में लाने का सबसे बड़ा हाथ प्रियंका गांधी  का माना जाता है, उन्हीं से खुली बगावत का ऐलान कर दिया। 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन लखनऊ में प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस का मार्च था जिसको लेकर कांग्रेस ने ह्विप भी जारी किया था। वहीं दूसरी ओर योगी सरकार की ओर से 36 घंटे तक चलने वाला विधानसभा सत्र बुलाया गया जिसका समूचे विपक्ष ने बायकॉट किया। लेकिन अदिति सिंह ने अपनी पार्टी की ह्विप को नजरंदाज कर विधानसभा सत्र में हिस्सा लिया। जब इस पर उनसे सवाल किया गया तो सीधा कोई जवाब देने के बजाए उन्होंने कहा, मुझे जो ठीक लगा वो मैंने किया। पार्टी का क्या निर्णय होगा मुझे नहीं मालूम। मैं पढ़ी-लिखी युवा एमएलए हूं। विकास का मुद्दा बड़ा मुद्दा है। यही गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।
मौजूदा समय रायबरेली की 5 विधानसभा सीटों में से दो कांग्रेस, दो बीजेपी और एक समाजवादी पार्टी के पास थी। लेकिन दिनेश सिंह के बीजेपी में जाने के बाद से उनके भाई जो कि हरचंदपुर से विधायक हैं वो भी एक तरह से बीजेपी में ही माने जाते हैं। यानी चार विधायक पहले से ही बीजेपी के खाते में हैं। अदिति सिंह के जाने पर विधायकों की संख्या 5 हो जाएगी। इस लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर देखते हुए ऐसा लगता है कि अदिति सिंह का बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा। (एनडीटीवी)
 


Date : 01-Oct-2019

जुनैद काटजू 
श्रीनगर, 1 अक्टूबर । ‘मेरे भाई उमर और पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ भारत सरकार ने जिस तरह का बर्ताव किया है और जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा जिस तरह से समाप्त कर दिया गया है, उसके बाद वे छला हुआ महसूस कर रहे हैं।’। यह कहना है कि सफिया अब्दुल्ला का।
सफिया अब्दुल्ला परिवार की वो पहली सदस्य हैं, जिन्होंने 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करने और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दोनों नेताओं की हिरासत के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है।
द वायर को दिए गए एक खास इंटरव्यू में सफिया अब्दुल्ला खान ने 15 सितंबर को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत अपने पिता फारूक अब्दुल्ला की गिरफ्तारी पर भी हताशा प्रकट की और बताया कि उस रात 11.30 बजे उन्हें इस क्रूर कानून के तहत उनकी गिरफ्तारी के आदेश के बारे में बताया गया।
सफिया ने बताया, ‘वे सोए हुए थे, जब मजिस्ट्रेट और उनके साथ आए अन्य अधिकारियों ने उन्हें जगाया। उन्होंने पहले उनकी सेहत के बारे में पूछा और उसके बाद उन्हें एक सरकारी पत्र सौंपा जिसमें उनकी गिरफ्तारी के आधारों का स्पष्टीकरण दिया गया था।
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में श्रीनगर के सांसद फारूक अब्दुल्ला पीएसए के तहत गिरफ्तार किए गए सबसे प्रभावशाली नाम हैं। यह कानून अधिकारियों को ‘पहली बार अपराध करने वालों’ को बिना ट्रायल के तीन महीने तक हिरासत में लेने का अधिकार देता है।
सोमवार 16 सितंबर को तीन बार मुख्यमंत्री रहे अब्दुल्ला के गुप्कर रोड स्थित आवास को जेल घोषित कर दिया गया। 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता और नेशनल कॉन्फे्रंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला ने टिम्बर तस्करी से निपटने के लिए पीएसए लागू किया था।
हालांकि, बीते सालों में इस कानून का इस्तेमाल अलगाववादी नेताओं और कार्यकर्ताओं, पत्थरबाजों और आतंकवादियों के खिलाफ किया गया है। यह पहली बार है जब पीएसए का इस्तेमाल राज्य के एक बड़े कद के ‘मुख्यधारा के’ यानी भारत समर्थक नेता के खिलाफ किया गया है।
पांच अगस्त को गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर की स्वायत्त हैसियत के साथ ही भारतीय संघ के तहत राज्य के तौर पर इसके दर्जे के समाप्ति की घोषणा के तत्काल बाद फारूक अब्दुल्ला को नजरबंद कर लिया गया था। हालांकि, संसद में शाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को हिरासत में नहीं लिए जाने का दावा किया था।
सफिया अपने पिता के घर के बगलवाले घर में रहती हैं, लेकिन उन्हें अगले दिन सुबह अपने पिता पर पीएसए लगाए जाने की जानकारी मिली, जब वे अपने दो बच्चों को स्कूल छोडऩे के लिए बाहर निकलीं।
उन्होंने बताया, ‘मैं अपने अपने बच्चों को आर्मी स्कूल पहुंचाने के लिए घर से निकलने वाली थी, जब मैंने कुछ कर्मचारियों को बाहर देखा, लेकिन तब तक मुझे पूरा माजरा समझ में नहीं आया था। जब मैं वापस आयी और पूछा कि क्या हुआ है, तब मुझे बताया गया कि मेरे पिता पर पीएसए लगा दिया गया है।’
सफिया ने बताया कि उन्होंने तत्काल ही घर में दाखिल होने की कोशिश की ‘लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई।’
नम आंखों से सफिया ने कहा, ‘यह मेरे बेहद घबराहट भरा क्षण था। मैंने अधिकारियों से दरख्वास्त की कि कम से कम इंटरकॉम से मेरे पिता से बात करवा दें। उनकी आवाज सुनते ही मैं रोने लगी।’
सफिया ने बताया कि इसके बाद वे अपने भाई और नेशनल कॉन्फे्रंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मिलने हरि निवास में बनाई गई जेल में गईं। ‘उमर को अधिकारियों से (पीएसए लगाए जाने के बारे में) पता लगा था। यह उसके लिए भी हैरान करने ने वाली खबर थी।’
फारूक अब्दुल्ला की खराब सेहत के मद्देनजर सफिया को मेडिकल देखभाल के लिए उनके पिता से मिलने की इजाजत दी गई, मगर यह इंतजाम करने के लिए उन्हें शहर भर के चक्कर लगाने पड़े। सफिया ने कहा कि उन्हें अपने पिता से मिलने के लिए श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी से इजाजत लेनी पड़ी।
सफिया ने बताया, ‘मैंने डीसी ऑफिस से संपर्क किया, लेकिन मुझे बताया गया कि वे सचिवालय में हैं। आखिरी बार मैं अपने दादा (शेख अब्दुल्ला) के साथ सचिवालय गयी थी। इस बार जब मैं वहां गयी, तब मुझे इस बात की थोड़ी भी जानकारी नहीं थी कि मुझे किससे मिलना है।’
उन्होंने कहा, अपने बचपन के घर को जेल में बदलते हुए देखना काफी डरावना था। मैंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि मुझे अपने ही घर में दाखिल होने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत होगी। लेकिन इन तकलीफों ने मुझे मजबूत बनाया है। आज मुझे यह एहसास होता है कि मैं शेख अब्दुल्ला की पोती हूं।’
पीएसए के तहत फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देने के सवाल पर सफिया ने कहा कि आने वाले दिनों में परिवार इस पर फैसला करेगा। ‘हम लोग (परिवार) कई वकीलों के संपर्क में हैं। फिलहाल हमारे सामने उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।’
जिस आधार पर उनके पिता पर पीएसए लगाया गया है, उसे ‘हास्यास्पद’ बताते हुए सफिया ने कहा कि उन्हें (फारूक अब्दुल्ला) जो कागज दिए गए, उसमें 2017 के बाद के उनके राजनीतिक भाषणों की अखबारी कतरनें शामिल थीं।
सफिया ने कहा कि जिस तरह से केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया है, उसके बाद उनके भाई और पिता को लग रहा है कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है।
उन्होंने बताया, ‘आम लोगों की गालियां खाने के बावजूद उमर और फारूक साहब हमेशा भारत सरकार के साथ खड़े रहे। अपने पूरे जीवन में वे ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ के पक्ष में खड़े रहे। वे हमेशा भारत के संविधान के दायरे में कश्मीर समस्या के समाधान के पक्ष में खड़े रहे। आज उनके साथ जैसा सुलूक किया गया है, उसके बाद उन्हें लग रहा है कि उनके साथ धोखा हुआ है। यह कश्मीरियों की पहचान से जुड़ा हुआ मसला है।’
अब्दुल्ला पिता-पुत्र के अलावा, मुख्यधारा के जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया है, उनमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता मोहम्मद सागर, मुबारक गुल, नासिर असलम वानी और सैयद अखून, जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आए शाह फैसल शामिल हैं।
कुल मिलाकर सभी स्तरों पर हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या 4,000 से ज्यादा होने का अनुमान है। सरकार ने गिरफ्तारियों के आंकड़े को साझा करने से इनकार कर दिया है। केंद्र के कदम के खिलाफ प्रतिरोध के तौर पर सफिया ने अपने घर के मुख्य दरवाजे के सामने काला झंडा लगा दिया है।(द वायर)

 


Date : 29-Sep-2019

हैदराबाद, 29 सितंबर। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और हैदराबाद क्रिकेट संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहम्मद अजहरुद्दीन के तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में जाने की अटकलें तेज हैं। इस बीच शनिवार को उन्होंने पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री केटीआर से बुद्ध भवन में मुलाकात की। अजहर के साथ एचसीए पैनल के अन्य सदस्य भी केटीआर से मुलाकात में शामिल रहे। ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस से लोकसभा सांसद रह चुके अजहर अब कांग्रेस छोड़कर टीआरएस में जा सकते हैं। 
बताया जा रहा है कि यह महज एक औपचारिक मुलाकात थी और मंत्री केटीआर ने एचसीए के अध्यक्ष अजहरुद्दीन और अन्य सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। हालांकि इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा हो रही है और तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं।
अजहरुद्दीन को शुक्रवार को ही एचसीए का अध्यक्ष चुना गया है। इस पद के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने भी माना कि उनके तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने की अफवाहें जोरों पर हैं। अभी तक एचसीए को लेकर प्रमुख भूमिका निभानेवाले पूर्व सांसद जी। विवेक ने अजहरुद्दीन को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया है। दूसरी तरफ अजहरुद्दीन के समर्थकों में चर्चा है कि समय आने पर अजहरुद्दीन टीआरएस में शामिल हो सकते हैं। 
अजहरुद्दीन का कांग्रेस से नाता करीब 10 साल पुराना है। वह 2009 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद सीट से सांसद चुने गए। उन्होंने बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह को करीब 50 हजार वोटों से हराया। वर्ष 2014 में राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अजहरुद्दीन को पार्टी की तेलंगाना इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। (एजेंसियां)


Date : 29-Sep-2019

मुंबई, 29 सितंबर। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर हो रही देरी के बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और अंतिम निर्णय की घोषणा जल्द ही की जाएगी। उद्धव ने कहा कि वह एक शिवसैनिक को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने का अपने पिता और शिवसेना के पूर्व प्रमुख दिवंगत बाल ठाकरे से किया वादा पूरा करेंगे। उद्धव के इस बयान से गठबंधन पर पेच फंसने की सुगबुगाहट तेज हो गई है क्योंकि शाह पहले ही देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद का चेहरा बता चुके हैं और फडणवीस सेना को डेप्युटी सीएम का पद ऑफर कर चुके हैं। 
ठाकरे यहां बांद्रा में रंग शारदा ऑडिटोरियम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उद्धव ने कहा कि वह चाहते हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र में सत्ता में आए। उन्होंने कहा, मैंने बालासाहेब से वादा किया था कि मैं एक शिवसैनिक को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाऊंगा। मैंने यह वादा पूरा करने की प्रतिज्ञा की है। मैं महाराष्ट्र में सत्ता चाहता हूं, लिहाजा मैंने सभी 288 सीटों के टिकट के दावेदारों को बुलाया है। मैं सभी निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करना चाहता हूं। अगर गठबंधन होता है तो शिवसेना, बीजेपी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करेगी लेकिन शिवसेना के उम्मीदवारों को भी बीजेपी का समर्थन मिलना चाहिए।
कार्यकर्ताओं से पार्टी और सहयोगी दलों के प्रति निष्ठावान रहने का आह्वान करते हुए उद्धव ने कहा कि कि मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि जिन क्षेत्रों (विधानसभाओं) में शिवसेना को चुनाव लडऩा है वहां हमारी पूरी चुनावी तैयारी हो। एनसीपी नेता अजित पवार पर कटाक्ष करते हुए उद्धव ने कहा, मैं राजनीति छोड़कर किसानी नहीं करूंगा। मैं शिवसैनिक के रूप में काम करूंगा। अजित पवार ने शुक्रवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। (भाषा)


Date : 27-Sep-2019

भोपाल, 27 सितंबर। मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप सेक्स कांड ने वहां की राजनीतिक में भूचाल ला दिया है। इस कांड की सूई राज्य के कई नौकरशाहों और सफेदपोश नेताओं के इर्दगिर्द ही घूमती नजर आ रही है। सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी के बीच अब इस बवंडर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
कांग्रेस ने इस हनी ट्रैप कांड के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को जिम्मेदार बताया है। कांग्रेस ने कहा है कि शिवराज के शासनकाल में ही यह शुरू हुआ जिसका शिकार खुद वहां के दिवंगत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके बाबूलाल गौर बने।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, बीजेपी नेताओं ने सत्ता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपने ही मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को हनी ट्रैप का शिकार बनाया। यादव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हनी ट्रैप के सरगना हैं जबकि श्वेता जैन के संरक्षण में यह सब फल-फूल रहा था।
उन्होंने कहा, शिवराज सरकार के अनेक मंत्री हनी ट्रैप कारोबार में हिस्सेदार रहे और बीजेपी सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर को पद से हटाने के लिए हनी ट्रैप का इस्तेमाल किया गया था।
शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए यादव ने कहा, मध्य प्रदेश के मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों का काला चेहरा उजागर हो गया है। राज्य की जनता के सामने शिवराज सिंह चौहान का कड़वा सच उजागर हो गया हैं। बीजेपी को एमपी की जनता से माफी मांगनी चाहिए। इस सारे मामले की जानकारी एसटीएफ प्रमुख को भी दी जाएगी।
ऐसे हुआ हनी ट्रैप का खुलासा
दरअसल बीते सप्ताह इंदौर पुलिस ने दो महिलाओं और उनके वाहन चालक को गिरफ्तार किया था। ये महिलाएं नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह का वीडियो बनाने के बाद उसे ब्लैकमेल कर उससे तीन करोड़ रुपये मांग कर रही थीं। मांगी गई रकम की पहली किश्त के तौर पर 50 लाख रुपये वे लेने आईं तो पकड़ी गईं।
उसके बाद कई नेताओं के तार इस कांड से जुड़ते चल गए और बीते सात दिनों में इस कांड से जुड़ी जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली है। साथ ही इस बात का अहसास करा रही है कि राज्य में बीते कई वर्षो में करोड़ों के ठेके उन लोगों के हाथ लग गए, जिन्होंने महिलाओं का भरपूर इस्तेमाल किया।
इस मामले की जांच अब एसआईटी (विशेष जांच टीम) को सौंप दी गई है। इसके साथ ही सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल बीजेपी के नेताओं के नाम इस हनीट्रैप सेक्स कांड से जुडऩे लगे हैं। अभी तक किसी भी नेता पर पुलिस ने तो उंगली नहीं उठाई है, मगर गलियारों में चर्चा यही है कि हनीट्रैप सेक्स कांड की महिलाओं से नेताओं के रिश्ते रहे हैं।
दूसरे राज्यों तक फैली हुई है जड़
हनी ट्रैप सेक्स कांड की कहानी राज्य की सीमाओं को लांघकर दूसरे राज्यों की ओर बढ़ रही है। महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से तार जुडऩे लगे हैं। नौकरशाहों और सफेदपोशों के बीच इस गिरोह की महिलाओं की घुसपैठ की बात सामने आने लगी है। कुछ दिन पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का वीडियो वायरल हो चुका है। वहीं पुलिस के हाथ कई वीडियो और ऑडियो क्लिपिंग भी लगी हैं, जो अफसरों और नेताओं के इनके जाल में फंसने की ओर इशारा कर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने कहा, हनीट्रैप सेक्स कांड पूरी तरह चारित्रिक पतन से जुड़ा हुआ है, यह घोटाला व्यापमं का पार्ट-2 है, जिसमें बड़े कारोबारी, नौकरशाह, राजनेता, मीडिया जगत के लोग जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह जांच सक्षम अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव शमी को सौंपी है, उनकी जांच के बाद दूसरी किसी जांच की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।
बीजेपी ने की सीबीआई जांच की मांग
वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर चुके हैं। बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता डॉ। दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, मगर सरकार जांच को अपनी मर्जी के अनुसार दिशा देने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बीजेपी की सीबीआई जांच की मांग पर यह कहकर तंज कस चुके हैं कि बीजेपी के लोग व्यापमं की तरह सीबीआई के जरिए इस मामले की जांच को प्रभावित करना चाहते हैं।
कई नेता-अफसरों का करियर हो सकता है बर्बाद
पुलिस के हाथ जो सुराग हाथ लगे हैं, वे इस बात का खुलासा करते हैं कि हनीट्रैप सेक्स कांड में सिर्फ पांच महिलाएं नहीं हैं, बल्कि उनके गिरोह के सदस्य छोटे जिलों तक फैले हुए हैं, जिनका समय-समय पर अपने तरह से उपयोग किया जाता था।
पहले संबंधित नेता अथवा अफसर को खुश करके ठेका या दूसरे काम मंजूर कराए जाते थे और जिससे यह काम नहीं हो पाता था उसे ब्लेकमैल करने की धमकी देकर रकम वसूली जाती थी। इतना ही नहीं बड़े अफसरों की पोस्टिंग में भी ये महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती थीं।
सूत्रों का दावा है कि अगर जांच सही हुई और राजनीतिक दखल नहीं रहा, तो कई ऐसे नेताओं और अफसरों के चेहरे बेनकाब होंगे, जिनका अपने-अपने क्षेत्र में करियर अभी बहुत लंबा है और वे वर्तमान में भी प्रमुख पद पर हैं। जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से जुड़े नेता बड़ी संख्या में हैं, पुलिस के हाथ 100 से ज्यादा वीडियो और 200 से ज्यादा ऐसे फोन नंबर लग गए हैं, जो सियासी तूफान खड़ा कर सकते हैं। (आजतक)


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