राजनीति

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Date : 22-Jan-2020

पटना, 22 जनवरी। जनता दल यूनाइटेड के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने गृह मंत्री अमित शाह पर उनके लखनऊ में दिए गए बयान को लेकर निशाना साधा है। अमित शाह ने मंगलवार को लखनऊ में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि सीएए के खिलाफ बेशक कितना भी प्रदर्शन कर लीजिए, यह वापस नहीं होगा। प्रशांत किशोर ने इसको लेकर बुधवार को ट्वीट करते हुए लिखा है कि नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत का संकेत नहीं है। 
प्रशांत किशोर ने अपने ट्वीट में लिखा है, नागरिकों की असहमति को खारिज करना किसी भी सरकार की ताकत का संकेत नहीं है। अमित शाह जी, अगर आप सीएए-एनआरसी का विरोध करने वालों की परवाह नहीं करते हैं, तो आप आगे क्यों नहीं बढ़ रहे और उस क्रोनोलॉजी के तहत सीएए और एनआरसी लागू करने की कोशिश क्यों नहीं करते।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध कर रहे विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए मंगलवार को उन्हें चुनौती दी कि जिसको विरोध करना है, करे लेकिन सीएए वापस नहीं होने वाला है। शाह ने सीएए के समर्थन में बंग्लाबाजार स्थित कथा पार्क में आयोजित विशाल जनसभा में कहा, इस बिल को लोकसभा में मैंने पेश किया है। मैं विपक्षियों से कहना चाहता हूं कि आप इस बिल पर सार्वजनिक रूप से चर्चा कर लो। यदि ये अगर किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकता है, तो उसे साबित करके दिखाओ।
साथ ही उन्होंने कहा था, देश में सीएए के खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं। सीएए में कहीं पर भी किसी की नागरिकता लेने का कोई प्रावधान नहीं है, इसमें नागरिकता देने का प्रावधान है। मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूं कि जिसको विरोध करना है करे, सीएए वापस नहीं होने वाला है। गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी है।
उन्होंने कहा, सीएए के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है कि इससे देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। मैं कहने आया हूं कि जिसमें भी हिम्मत है वह इस पर चर्चा करने के लिये सार्वजनिक मंच ढूंढ ले। हम चर्चा करने के लिये तैयार हैं। शाह ने कहा कि सीएए की कोई भी धारा मुसलमान तो छोड़ दें, किसी भी बाशिंदे की नागरिकता लेती हो तो बता दें।
इसके बाद कांग्रेस ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सत्ता के अहंकार में डूबकर बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को लखनऊ में धारा 144 लागू होने के बावजूद उनकी रैली पर सवाल उठाये। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक बयान में आरोप लगाया कि शाह सत्ता के गुरूर में डूबकर मर्यादा लांघ रहे हैं और तानाशाह की भाषा बोल रहे हैं। शाह द्वारा रैली में राहुल गांधी पर की गयी टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के खून में पाकिस्तान बहता है, तभी वह बात-बात में पाकिस्तान का जिक्र करते रहते हैं।
लल्लू ने कहा, प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एक तरफ जहां लखनऊ के घण्टाघर परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर धारा 144 का हवाला देकर विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर रही है, वहीं पूरी सुरक्षा के साथ देश के गृह मंत्री की रैली भी आयोजित करा रही है। क्या शाह के लिये धारा 144 को ताक पर रख दिया गया?  (एनडीटीवी)
 


Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी। जदयू के नेता पवन वर्मा ने पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को पत्र लिखकर दिल्ली में भाजपा के साथ जदयू के गठबंधन पर नाराजगी जताई है। पूर्व राज्यसभा सदस्य और जदयू के महासचिव ने अपने पत्र में नीतीश कुमार को भाजपा को लेकर उनकी निजी आशंकाओं की भी याद दिलाई।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य और जदयू के महासचिव पवन वर्मा ने पत्र में लिखा, ‘मैं अकेले में आपकी (नीतीश कुमार) स्वीकारोक्ति को याद कर रहा हूं कि भाजपा में वर्तमान नेतृत्व ने किस तरह से आपका अपमान किया। आपने कई बार कहा कि भाजपा देश को खतरनाक स्थिति में ले जा रही है।’ सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पत्र में पवन वर्मा ने कहा, ‘आपने जैसा मुझे बताया, ये आपके निजी विचार थे कि भाजपा संस्थानों को नष्ट कर रही है और देश के अंदर लोकतांत्रिक एवं सामाजिक ताकतों को पुनर्गठित करने की जरूरत है। इस कार्य के लिए आपने पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकार को नियुक्त किया।’ वर्मा ने बिहार के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ‘एक से अधिक अवसरों पर आपने भाजपा-आरएसएस गठबंधन को लेकर आशंकाएं जाहिर की हैं।’
पवन वर्मा ने आगे कहा, ‘अगर ये आपके वास्तविक विचार हैं तो मैं समझ नहीं पाया कि जदयू कैसे बिहार के बाहर भाजपा से गठबंधन कर रहा है जबकि अकाली दल जैसे भाजपा के पुराने सहयोगियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। खासकर ऐसे समय में जब भाजपा ने सीएए-एनपीआर-एनआरसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर सामाजिक विभाजनकारी एजेंडा चला रखा है।’पवन वर्मा ने कहा कि जदयू को अपने गठबंधन का दायरा विस्तारित करने और दिल्ली चुनावों के लिए भाजपा से हाथ मिलाने से वह ‘काफी बेचैन’ हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि नीतीश कुमार विचारधारा को स्पष्ट करें।
जदयू ने पवन वर्मा के दावों पर प्रतिक्रिया नहीं दी। पवन वर्मा से पहले जदयू नेता प्रशांत किशोर भी भाजपा की सीएए और एनआरसी को लेकर आलोचना कर चुके हैं। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार भाजपा के समर्थन के बावजूद इशारों में केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। (सत्याग्रह ब्यूरो)
 


Date : 20-Jan-2020

कोलकाता, 20 जनवरी । पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर सीट से भाजपा सांसद सौमित्र खान ने रविवार को उन सभी मशहूर हस्तियों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ‘कुत्ता’ करार दिया जो सीएए का विरोध कर रहे हैं।
खान ने संवाददाताओं से कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के बारे में तथ्यों को जानने के बावजूद प्रख्यात लोग अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। जो लोग ऐसा कर रहे हैं वे ममता बनर्जी के कुत्ते हैं।
लोकसभा चुनावों से पहले 2019 में तृणमूल कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए खान बिष्णुपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यही लोग कामदूनी और पार्क स्ट्रीट में हुए सामूहिक बलात्कार पर चुप रहे और बम विस्फोट की घटनाओं पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के विरोध में राज्य के अभिनेताओं, निर्देशकों और संगीतकारों ने रैलियों में हिस्सा लिया। सीएए और एनआरसी के खिलाफ एक वीडियो में भी वे एक साथ दिखे और कहा कि केंद्र सरकार अगर नागरिकता पर फिर से सबूत मांगती है तो वे कोई दस्तावेज नहीं दिखाएंगे।
पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शनिवार को कहा था, ‘इन दिनों पश्चिम बंगाल में कई बुद्धिजीवी हैं जो लोगों को दिन भर ज्ञान देते हैं और हंगामा करते हैं। माकपा ने इन लोगों को सडक़ों पर लाकर बुद्धिजीवी बनाया और अब दीदीमोनी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने उन्हें पैदा करने की फैक्टरी लगा ली है।’
इससे पहले दिलीप घोष ने कहा था कि असम और उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार ने इन प्रदर्शनकारियों को ‘कुत्तों’ की तरह मारा था। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को उत्तर प्रदेश और असम की तरह गोली मार दी जाएगी।
प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं की ओर से आ रहे इन आपत्तिजनक बयानों पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता सुबोध सरकार ने कहा, ‘यह भाजपा की वास्तविक भाषा है। अब लोगों को निर्णय करना है।’(भाषा)
 


Date : 17-Jan-2020

शंकर अर्निमेष 
नई दिल्ली, 17 जनवरी। झारखंड में भाजपा की हार और महाराष्ट्र में सत्ता से बेदखल होने की गूंज दिल्ली में सुनाई देने लगी है। दिल्ली में चुनाव होने हैं। भाजपा दबाव में है। भाजपा के मुखर सहयोगी मांग कर रहे हैं कि उनको विधानसभा सीटों में उचित हिस्सा मिले।
लंबे समय से भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) छह सीटों पर नजर गड़ाए हुए है। 2015 के चुनाव में चार सीटों पर अकाली दल ने चुनाव लड़ा था। जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) जिसने पिछले साल भाजपा से गठबंधन किया था वो दिल्ली में कम से कम एक दर्जनभर विधानसभा सीटों के लिए टिकट मांग रही है।
दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जेजेपी, जिसने हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने में मदद की थी, पीछे हटने के मूड में नहीं है। पार्टी अपनी मांगें पूरी ना होने पर 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की धमकी दे रही है।
जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने कहा, ‘हमने दिल्ली का चुनाव लडऩे का फैसला किया है। हम हरियाणा से सटे क्षेत्रों में उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे। ‘गेंद अब भाजपा के पाले में है। अगर भाजपा हमें सम्मानजनक सीटें देती है, तो यह दोनों पार्टियों के लिए अच्छा रहेगा। अन्यथा, हम अगले दो से तीन दिनों में उम्मीदवारों को उतर देंगे।’
जेजेपी उन सीटों पर नजर गड़ाए हुए है जहां पर जाटों की संख्या उचित तादात में है। जैसे-नजफगढ़, मुंडका, महिपालपुर, महरौली, नांगलोई, बदरपुर, देवली और छतरपुर। पार्टी ने उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के लिए पहले ही पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
जेजेपी के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, ‘हमारे पास दिल्ली में खोने के लिए कुछ नहीं है। अगर हम दो सीटें जीतते हैं तो भी यह पार्टी के लिए एक बोनस होगा लेकिन अगर हम अकेले लड़ते हैं, तो यह भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है।’
भाजपा की दिल्ली इकाई ने अभी तक जेजेपी के साथ गठबंधन पर फैसला नहीं किया है, लेकिन झारखंड में लगे झटके जहां पर पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा था, भाजपा का एक वर्ग ऐसा है जो हरियाणा के संगठन को चार से पांच सीटें देने का इच्छुक है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हम इस बार सावधान हैं और सीटों की मांग के हिसाब से जेजेपी की ताकत को समझ रहे हैं।’ ‘लेकिन हरियाणा के कुछ नेता दुष्यंत की मांगों के विरोध में हैं। उनका मानना है कि अगर हम दिल्ली में सीटें देते हैं, तो इससे दुष्यंत को हरियाणा में और भी मजबूती मिलेगी।’
भाजपा के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक अकाली दल भी अधिक सीटों पर नजर गड़ाए हुए है। दोनों दलों ने 2015 के विधानसभा चुनाव एक साथ लड़े थे, जिसमें अकालियों ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
राजौरी गार्डन, कालकाजी, हरिनगर और शाहदरा के अलावा, अकाली दल अब मोती नगर और रोहताश नगर चाहती है।
पिछले चुनावों में अकाली उम्मीदवारों में से दो ने भाजपा के निशान पर चुनाव लड़ा था। जबकि राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा और हरिनगर में अवतार सिंह ने अकाली दल के चुनाव चिन्ह पर, वहीं कालकाजी में हरमीत सिंह और शाहदरा में जितेन्द्र पाल भाजपा के सिंबल पर लड़े थे। हालांकि, अकालियों ने 2019 हरियाणा विधानसभा चुनाव अलग से लड़ा था और उन्होंने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) का समर्थन किया था।
दिल्ली के भाजपा प्रभारियों में से एक ने दिप्रिंट को बताया कि बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं किया गया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘सीटों के लिए अनुचित मांग पूरी नहीं की जाएगी। अकालियों की चुनावी ताकत पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है। सीटों के बंटवारे का फैसला करते समय हमें इसे ध्यान में रखना होगा।’
भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में दिल्ली में बहुत ही आकर्षक स्थिति नहीं है। इस परिदृश्य में भाजपा चिंतित हो जाती है कि जब झारखंड में सीटों के बटवारें को अंतिम रूप देने की बात आती है, जहां सुदेश महतो के नेतृत्व वाले ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के साथ पार्टी के इंकार के कारण कम से कम पांच सीटों पर खामियाजा भुगतना पड़ा।
एनडीए के अन्य सहयोगी दल जैसे राम विलास पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और जेडी (यू) भी दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ रही है। एलजेपी पहले ही चुनाव के लिए 15 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। (दिप्रिंट)
 


Date : 16-Jan-2020

मुंबई, 16 जनवरी । शिवसेना सांसद संजय राउत के बयान पर महाराष्ट्र में शिवसेना की सहयोगी पार्टी कांग्रेस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संजय राउत ने बयान दिया था कि उस समय 1960 से 1980 तक मुंबई के कमिश्नर की नियुक्ति अंडरवर्ल्ड करता था। उनके इस बयान पर बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है उन्होंने कहा है कि क्या कांग्रेस उस समय अंडरवल्र्ड के भरोसे चुनाव जीतती थी, क्या कांग्रेस को अंडरवल्र्ड से फाइनेंस मिलता था। संजय राउत ने खुलासा किया है कि उस समय 1960 से 1980 तक मुंबई के कमिश्नर की नियुक्ति अंडरवल्र्ड करता था क्या यह सच है? कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिेए।
गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस, शिवसेना और राकपा ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाया है।शिवसेना नेता संजय राउत लगातार अपने बयानों के लेकर चर्चाओं में रहते हैं बुधवार को उन्होंने कहा था कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह कट्टर राष्ट्रवादी हैं लेकिन उन्हें यह तथ्य समझना चाहिए कि देश में लोकतंत्र है। शिवसेना से राज्यसभा के सदस्य मीडिया समूह लोकमत की ओर से आयोजित पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। लोगों के साथ साक्षात्कार के दौरान उनसे कुछ लोकप्रिय नेताओं के गुण बताने और उन्हें कुछ सलाह देने को कहा गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में राउत ने कहा कि वह बहुत मेहनती व्यक्ति हैं। मेरे पास उनका सलाह देने का अधिकार नहीं है। वह प्रधानमंत्री हैं।(एनडीटीवी)
 

 


Date : 16-Jan-2020

पुणे, 16 जनवरी । शिवसेना सांसद संजय राउत ने बुधवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में पुराने डॉन करीम लाला से मिली थीं।
राउत ने यहां लोकमत मीडिया समूह के पुरस्कार समारोह के दौरान एक साक्षात्कार में यह दावा किया। करीम लाला, मस्तान मिर्जा उर्फ हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार मुंबई के शीर्ष माफिया सरगनाओं में थे जो 1960 से लेकर अस्सी के दशक तक सक्रिय रहे।
राउत ने कहा, ‘वे (अंडरवल्र्ड) तय करते थे कि मुंबई का पुलिस आयुक्त कौन बनेगा, मंत्रालय (सचिवालय) में कौन बैठेगा।’
उन्होंने दावा किया कि हाजी मस्तान के मंत्रालय में आने पर पूरा मंत्रालय उसे देखने के लिए नीचे आ जाता था। इंदिरा गांधी पाइधोनी (दक्षिण मुंबई में) में करीम लाला से मिलने आती थीं।
राउत की पार्टी ने पिछले साल महाराष्ट्र में राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनायी है।
राउत ने मुंबई में अंडरवल्र्ड के दिनों को याद करते हुए कहा कि दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे गैंगस्टर महानगर और आस-पास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते थे।
शिवसेना के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘वे अंडरवल्र्ड के दिन थे। बाद में, हर कोई (डॉन) देश छोडक़र भाग गया। अब ऐसा कुछ नहीं है।’
राउत ने दावा किया कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम सहित कई गैंगस्टरों की तस्वीरें खींची। शिवसेना नेता ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एक बार दाऊद इब्राहिम को फटकार लगाई थी।
संपर्क करने पर राज्य कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह इंदिरा गांधी के बारे में राउत की वास्तविक टिप्पणियां पढऩे के बाद ही टिप्पणी करेंगे।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने शिवसेना पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, यह विडंबना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीतिक दुकान चलानेवाली शिवसेना उनके वंशजों से वंशज होने का सबूत मांग रही है। यह इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक उदंडता है।
संजय निरुपम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि बेहतर होगा कि शिवसेना के मि।शायर दूसरों की हल्की-फुल्की शायरी सुनाकर महाराष्ट्र का मनोरंजन करते रहें। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के खिलाफ दुष्प्रचार करेंगे तो उन्हें पछताना पड़ेगा। कल उन्होंने इदिराजी के बारे में जो बयान दिया है वो वापस ले लें।(भाषा)
 


Date : 16-Jan-2020

कोलकाता, 16 जनवरी। नागरिकता संशोधन एक्ट के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग जारी है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के द्वारा बीते दिनों दिए गए बयान पर अभी बवाल खत्म ही नहीं हुआ था कि उन्होंने एक और बयान दिया है। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी वाले उनका परिचय पाकिस्तानी के तौर पर करवाते हैं, आज मैं कहना चाहता हूं कि हां मैं, पाकिस्तानी हूं।
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में कांग्रेस नेता ने कहा, ‘मुझे पाकिस्तानी कहकर बुलाया जाता है, आज मैं कहना चाहता हूं कि हां, मैं पाकिस्तानी हूं। आप जो करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं। आज हमारे देश में कोई सही बात नहीं कह सकता है, क्योंकि अगर आप सच कहते हो तो आपको देशद्रोही कह दिया जाता है।’
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘ज्आज हम कहां रह रहे हैं? हमें वही करने को कहा जाता है जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। हमें ये स्वीकार नहीं है। ये देश नरेंद्र मोदी, अमित शाह के बाप का नहीं है। हिंदुस्तान किसी के बाप की संपत्ति नहीं है। उन दोनों को ये बात समझना चाहिए। वो आज हैं लेकिन कल नहीं होंगे।’।
गौरतलब है कि अधीर रंजन चौधरी के इससे पहले भी एक बयान पर भी बवाल हो चुका है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के ष्ठस्क्क देवेंद्र सिंह के आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि अगर देवेंद्र सिंह, देवेंद्र खान होता तो संघ की ट्रोल आर्मी इस मसले को अभी तक काफी उछाल देती। अधीर रंजन के इस बयान पर भी काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद कांग्रेस ने खुद को इस बयान से अलग किया था।
इससे पहले भी अधीर रंजन चौधरी के कई बयान बवाल की वजह बन चुके हैं, जैसे कि उनके द्वारा लोकसभा के अंदर जम्मू-कश्मीर के मसले को अंतरराष्ट्रीय बताना हो। बीजेपी की ओर से इस मुद्दे पर भी बवाल किया गया था। इसके अलावा अधीर रंजन चौधरी एक बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को घुसपैठिया बता चुके हैं। (आजतक)
 


Date : 15-Jan-2020

नई दिल्ली, 15 जनवरी। देश की राजधानी दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इसके बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई है। टिकट कटने के बाद बदरपुर से आप के मौजूदा विधायक एनडी शर्मा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरेंगे। शर्मा ने इसके साथ ही दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरेाप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सिसोदिया ने उनसे 10 करोड़ रुपये मांगे थे, जिसे उन्होंने देने से इनकार कर दिया।
बदरपुर से आप के मौजूदा विधायक एनडी शर्मा ने इस्तीफे की घोषणा करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभी आरोप भी लगाए हैं। शर्मा ने कहा, मनीष सिसोदिया ने मुझे अपने आवास पर बुलाया था। उन्होंने कहा कि राम सिंह (आप की ओर से बदरपुर से प्रत्याशी) 20 से 21 करोड़ रूपये देकर आपके क्षेत्र (बदरपुर) से टिकट चाहते हैं। सिसोदिया ने मुझसे 10 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके बाद मैं पैसे देने से इनकार करते हुए वहां से (सिसोदिया के आवास) चला आया।
मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक के बाद दिल्ली की सभी 70 सीटों पर आप ने अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया था। सीएम अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से तो डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पटपडग़ंज सीट से चुनाव लड़ेंगे। मीडिया को जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बताया था कि बैठक में 46 सिटिंग विधायकों को टिकट देने का फैसला किया गया है, जबकि 9 सीटों पर नए चेहरे उतार रहे है। सिसोदिया के मुताबिक, 15 सिटिंग एमएलए को रिप्लेस किया गया है। इस बार 6 महिलाओं की जगह 8 महिलाओं को टिकट दिया गया है। सिसोदिया ने बताया कि 46 सिटिंग विधायक हैं, 15 सिटिंग एमएल का टिकट काटा गया है। (न्यूज18)

 


Date : 15-Jan-2020

नई दिल्ली, 15 जनवरी। देश की राजधानी दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। इसके बाद पार्टी में बगावत शुरू हो गई है। टिकट कटने के बाद बदरपुर से आप के मौजूदा विधायक एनडी शर्मा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरेंगे। शर्मा ने इसके साथ ही दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरेाप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सिसोदिया ने उनसे 10 करोड़ रुपये मांगे थे, जिसे उन्होंने देने से इनकार कर दिया।
बदरपुर से आप के मौजूदा विधायक एनडी शर्मा ने इस्तीफे की घोषणा करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभी आरोप भी लगाए हैं। शर्मा ने कहा, मनीष सिसोदिया ने मुझे अपने आवास पर बुलाया था। उन्होंने कहा कि राम सिंह (आप की ओर से बदरपुर से प्रत्याशी) 20 से 21 करोड़ रूपये देकर आपके क्षेत्र (बदरपुर) से टिकट चाहते हैं। सिसोदिया ने मुझसे 10 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके बाद मैं पैसे देने से इनकार करते हुए वहां से (सिसोदिया के आवास) चला आया।
मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक के बाद दिल्ली की सभी 70 सीटों पर आप ने अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया था। सीएम अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से तो डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पटपडग़ंज सीट से चुनाव लड़ेंगे। मीडिया को जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बताया था कि बैठक में 46 सिटिंग विधायकों को टिकट देने का फैसला किया गया है, जबकि 9 सीटों पर नए चेहरे उतार रहे है। सिसोदिया के मुताबिक, 15 सिटिंग एमएलए को रिप्लेस किया गया है। इस बार 6 महिलाओं की जगह 8 महिलाओं को टिकट दिया गया है। सिसोदिया ने बताया कि 46 सिटिंग विधायक हैं, 15 सिटिंग एमएल का टिकट काटा गया है। (न्यूज18)

 


Date : 15-Jan-2020

तरुण कृष्णा 
नई दिल्ली, 15 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस से दो कदम आगे रहते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने लोकसभा की सभी 70 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। खास बात ये है कि इसमें पार्टी के कई ऐसे चहेते नेता शामिल हैं जिन्हें लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में करारी हार का सामना करना पड़ा था।
लोकसभा में धूल चाटने वाले जिन उम्मीदवारों पर पार्टी ने दांव लगाया है उनमें राघव चड्डा को रजिंदर नगर, आतिशी को कालकाजी और दिलीप पांडे को तिमारपुर से मैदान में उतारा गया है। हालांकि, 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए दिल्ली से लडऩे वाले बृजेश गोयल, पंकज गुप्ता और बलवीर सिंह जाखड़ को इस चुनाव में जगह नहीं मिल पाई।
दिल्ली में सात लोकसभा सीटें और इन सातों पर आप ने अपने उम्मीदवार उतारे थे जिन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ऊपर दिए गए छह नामों के अलावा गुग्गन सिंह नाम के आप के लोकसभा प्रत्याशी ने हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया।
पार्टी ने इस बार 23 पुराने उम्मीदवारों का पत्ता काटने के अलावा आठ महिलाओं और पार्टी में कांग्रेस से शामिल होने वाले छह लोगों को टिकट दिया है। आप के मुखिया दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी सीट नई दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। मीडिया को दी गई जानकारी में बताया गया है कि इस लिस्ट पर पार्टी की पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (पैक) ने मुहर लगाई है।
पार्टी ने अपने सभी मंत्रियों को भी मैदान में उतारा है और इनकी भी सीटों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये फैसला इस ओर इशारा करता है कि पार्टी को इस बात का भरोसा है कि उनके मंत्रियों ने अच्छा काम किया है और वोटर दोबारा से उन्हें उनकी सीट से जितवाने में नहीं हिचकेंगे।
जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा के दौरान विवादों में घिरे आमनातुल्ला खान को भी ओखला से टिकट दिया गया है। पार्टी के मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, कैलाश गहलोत, राम निवास गोयल, राजेंद्र पाल गौतम, गोपाल राय, दिनेश मोहनिया, सौरभ भारद्वाज और राखी बिडलान जैसे अहम नेताओं की सीट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पार्टी के विवादित नेता सोमनाथ भारती भी मालवीय नगर की सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। टिकट की घोषणा के बाद आप प्रमुख केजरीवाल ने ट्वीट करके सभी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए आत्ममुग्धता से बचने को कहा। उन्होंने सबको कड़ी मेहनत करने की सलाह देते हुए ये भी कहा कि लोगों को पार्टी और उम्मीदवारों पर बहुत भरोसा है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान हल्के लहजे में कहा कि पार्टी के प्रत्याशियों की लिस्ट खरमास की वजह से नहीं जारी की गई। बिहार में खरमास के दौरान कोई नया काम नहीं किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान नये कामों को करने से अपशकुन होता है।
उन्होंने कहा कि अब जब खरमास उतरने वाला है तो पार्टी जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। वहीं कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक पार्टी दो से तीन दिन में अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। दिल्ली का चुनाव 8 फरवरी को होना है और नतीजों की घोषणा 11 फरवरी को होगी। (दिप्रिंट)
 


Date : 14-Jan-2020

नई दिल्ली, 14 जनवरी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने खुदरा मुद्रास्फीति की दर के 7।35 फीसदी तक पहुंच जाने को लेकर मंगलवार को भाजपा सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने गरीब की जेब काटकर उसके पेट पर लात मारने का काम किया है। प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, सब्जियां, खाने पीने की चीजों के दाम आम लोगों की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। जब सब्जी, तेल, दाल और आटा महंगा हो जाएगा तो गरीब खाएगा क्या? प्रियंका ने आरोप लगाया, ऊपर से मंदी की वजह से गरीब को काम भी नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार ने तो जेब काट कर पेट पर लात मार दी है।
गौरतलब है कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर दिसंबर, 2019 में जोरदार तेजी के साथ 7.35 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं अधिक है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी की वजह से खुदरा मुद्रास्फीति में उछाल आया है।
वहीं, खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था के लिए और भी मुश्किलें खड़ी करने वाली और इसके चलते रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दर में कटौती करने से रुक जाएगा। विशेषज्ञों ने सोमवार को चेताया कि भारत के लिए एक ही समय पर आर्थिक गतिविधियों में ठहराव और उच्च मुद्रास्फीति की स्थित में फंसने का खतरा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की भारी महंगाई के बीच उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर में उछल कर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के विश्लेषकों ने कहा, करीब से देखने पर पता चलता है कि मुद्रास्फीति में उछाल अस्थायी प्रकृति का या किसी विशेष कारक की वजह से है। अगर इसे सिर्फ शोर माना जाये तो भी क्या आरबीआई इसे नजरअंदाज कर सकता है? जवाब है नहीं।
उन्होंने चेताया, नरम पड़ती आर्थिक वृद्धि के साथ जरूरत से ज्यादा ऊंची मुद्रास्फीति, मुद्रास्फीति जनित ठहराव का खतरा बढ़ाती है। मुद्रास्फीति जनित नरमी एक ऐसी स्थिति में है, जहां बेरोजगारी चरम पर और मांग पैदा नहीं होने के साथ मुद्रास्फीति लगातार ऊंची बनी रहे।
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा कि उसे उम्मीद है कि जनवरी में मुद्रास्फीति में तेजी से सुधार होगा लेकिन आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति अगली कुछ द्विमासिक बैठकों में नीतिगत दर को उसी स्तर पर बरकरार रखेगी। निजी क्षेत्र के येस बैंक के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उन्हें 2020 की अंतिम तिमाही तक नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद नहीं है। (भाषा)
 


Date : 13-Jan-2020

नई दिल्ली, 13 जनवरी । बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को विवादित बयान देते हुए कहा कि जो भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, उसे भाजपा शासित राज्यों की तरह गोली मार देनी चाहिए। बंगाल के नाडिया जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गोली मारने और लाठी चार्ज करने के आदेश नहीं देने पर आलोचना की। उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून का विरोध करने वाले द्वारा रेलवे संपत्ति और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नुकसान पहुंचाने वालों पर गोली चलाने और लाठीचार्ज करने का आदेश देना चाहिए था। 
न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में घोष के हवाले से लिखा है, उन्हें क्या लगता है कि वे जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वह उनके पिता की है? सार्वजनिक संपत्ति करदाताओं की है। आप यहां आएंगे, हमारा खाना खाएंगे, यहां रहें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं। क्या यह आपकी जमींदारी है? हम? तुम पर लाठियां चलाएंगे, गोली मारकर तुम्हें जेल में डाल देंगे।
साथ ही उन्होंने कहा, दीदी (ममता बनर्जी) की पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया, जिन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, क्योंकि वे उनके वोटर हैं। यूपी, असम और कर्नाटक में हमारी सरकार ने ऐसे लोगों को कुत्तों की तरह मारा है। साथ ही उन्होंने इसे सही करार दिया है। 
साथ ही बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने राज्य में बंगाली हिंदुओं के हितों को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान करने को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत में दो करोड़ मुस्लिम घुसपैठिए हैं। उन्होंने कहा, सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही एक करोड़ घुसपैठिए हैं और ममता बनर्जी उन्हें बचाने की कोशिश कर रही हैं।
मोदी सरकार ने शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल को संसद में पेश किया था। दोनों सदनों से इसे पारित करवा लिया गया। राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद प्रस्तावित संशोधन कानून में जोड़ दिए गए। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने में सहूलियत दी गई है।(एनडीटीवी)
 


Date : 12-Jan-2020

भारती जैन
नई दिल्ली,
12 जनवरी (नवभारतटाईम्स)। वर्ष 2018-19 में बीजेपी की कुल आय बढ़कर 2,410 करोड़ रुपये हो गई जो 2017-18 के 1,027 करोड़ रुपये से 134 फीसदी ज्यादा है। सत्ताधारी दल ने चुनाव आयोग को सौंपी 2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। इन 2,410 करोड़ रुपये में 1,450 करोड़ रुपये सिर्फ चुनावी बॉन्ड्स से मिले थे। साल 2017-18 में बीजेपी ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स से 210 करोड़ रुपये की आमदनी घोषित की थी। बीजेपी ने 1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2019 तक आमदनी और खर्च का जो हिसाब दिया, उसके मुताबिक उसे फी और सब्सक्रिप्शंस से 1.89 करोड़ रुपये, स्वेच्छा से योगदान के मद में 2,354 करोड़ रुपये (इलेक्टोरल बॉन्ड्स से मिली रकम भी शामिल है), बैंकों से मिले ब्याज से 54 करोड़ रुपये जबकि अन्य मदों से 24 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। स्वेच्छा से योगदान में कई मदों से पैसे आए, इनमें आजीवन सहयोग निधि से 24.64 करोड़ रुपये, मोर्चाओं से योगदान 68 करोड़ रुपये, बैठकों से हुई आमदनी 93 करोड़ रुपये, इलेक्टोरल बॉन्ड्स से मिली रकम 1,450.89 करोड़ रुपये और अन्य मदों से प्राप्त धन 867.87 करोड़ रुपये है। 
बीजेपी ने बताया कि उसने 2018-19 में 1,005 करोड़ रुपये खर्च किए जो 2017-18 में हुए 758 करोड़ रुपये के खर्च से 32 फीसदी ज्यादा है। 2018-19 में पार्टी ने 792.4 करोड़ रुपये चुनावों एवं सामान्य प्रचार पर खर्च किए थे। इस मद में उसने 2017-18 में 567 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 
वहीं, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को सौंपी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि उसे 2018-19 में 918 करोड़ रुपये की आय हुई जो एक वर्ष पहले 199 करोड़ रुपये की आमदनी से 361 फीसदी ज्यादा है। पार्टी ने 2018-19 में 470 करोड़ रुपये का खर्च घोषित किया। कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड्स से 383 करोड़ रुपये मिले थे जो 2017-18 में मिले महज 5 करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा है। 
कांग्रेस की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, उसे 2018-19 में इलेक्टोरल बॉन्ड से 383 करोड़ रुपये, कंपनियों से 20.62 करोड़ रुपये, इलेक्टोरल ट्रस्टों और फाउंडेशनों से 94.6 करोड़ रुपये जबकि अन्य दानदाताओं से 2.38 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। पार्टी ने बताया कि 2018-19 में उसका चुनावी खर्च करीब 309 करोड़ रुपये रहा जिसमें 57 लाख रुपये चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर जबकि प्रचार पर 78 करोड़ रुपये का हुआ खर्च शामिल है। 


Date : 12-Jan-2020

नई दिल्ली, 12 जनवरी (न्यूज18)। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नेताओं की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाने का दौर भी शुरू हो गया है। इसी बीच दिल्ली बीजेपी के ट्विटर हैंडल से एक अजीबोगरीब वीडियो जारी किया गया है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आम आदमी पार्टी का खलनायक बताया गया है। बीजेपी ने अनिल कपूर की सुपरहिट फिल्म नायक के कुछ हिस्सों को फोटो शॉप पर एडिट करते हुए ट्वीट किया है। खास बात यह है कि भाजपा ने नायक फिल्म के एडिटेड उस हिस्से को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली में हुई हिंसा से जोड़ा है।
बीजेपी ने फिल्म के उस हिस्से को ट्वीट किया है, जिसमें अनिल कपूर, अमरीश पुरी का इंटरव्यू लेते हैं। वीडियो में अमरीश पुरी के चेहरे की जगह पर अरविंद केजरीवाल का फेस जोड़ा गया है। साथ ही फिल्म के अन्य कैरेक्टर्स की जगह पर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के चेहरे को दिखाया गया है।
भड़की हिंसा को दिखाया जाता है ऑडियो को भी एडिट किया गया है। ऑडियो को एडिट कर फिल्म के उस अंश को सीएए के खिलाफ दिल्ली में भड़की हिंसा के साथ जोड़ा गया है। अनिल कपूर द्वारा पूछे गए प्रश्नों को संपादित कर जामिया में भड़की हिंसा को दिखाया जाता है। आप इस वीडियो में भीड़ को बसों में आग लगाते हुए देख सकते हैं। साथ ही विधायक अमानतुल्ला खान को सीएए प्रोटेस्टर के बीच भाषण देते हुए देखा जा सकता है। बीजेपी ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया गया है। 
8 फरवरी को चुनाव और 11 को नतीजे
 दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव होना है। वहीं, 11 फरवरी को चुनाव के नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग ने इसी हफ्ते प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि दिल्ली में चुनाव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। चुनाव में 90 हजार कर्मचारियों की जरूरत होगी। दिल्ली में कुल 1।46 करोड़ मतदाता हैं। बुजुर्ग मतदाता पोस्टल बैलेट से मतदान में हिस्सा ले सकेंगे। चुनाव की घोषणा होते ही दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी को खत्म होगा। नियमानुसार उससे पहले ही चुनाव संपन्न कराकर नई विधानसभा का गठन करना होगा।


Date : 12-Jan-2020

पटना, 12 जनवरी (लाइव हिन्दुस्तान)। इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में अभी भले ही देर हो, मगर राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही सीटों की दावेदारी ने विपक्षी दलों के महागठबंधन की उलझनें बढ़ा दी हैं। ऐसा नहीं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) इससे बचा हुआ है, यहां भी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेेपी) ने 43 सीटों पर दावेदारी ठोककर सीट बंटवारे से पहले ही झमेला खड़ा कर दिया है।
एनडीए के मुख्य घटक दल एलजेपी ने स्पष्ट कहा है कि विधानसभा चुनाव में उसे 43 सीटें चाहिए। एलजेपी सांसद और दलित सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने कहा कि उनकी पार्टी साल 2015 में भी 43 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। सीटों के बंटवारे में एलजेपी को इस बार भी इतनी ही सीटों की दरकार है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के छोटे भाई पारस ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट सौ फीसदी रहा है।
उधर, विपक्षी दलों के महागठबंधन में भी सीटों के दावेदारी को लेकर दल एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हैं। महागठबंधन में प्रमुख घटक दल लालू प्रसाद की आरजेडी ने 243 विधानसभा सीटों में से 150 सीटों पर दावा ठोक दिया है। आरजेडी के विधायक विजय प्रकाश ने कहा कि राजद 150 सीटों पर चुनाव लडऩे के मूड में है। उन्होंने कहा कि वैसे तैयारी तो 243 सीटों पर है, मगर एक सिद्धांत वाली पार्टियां साथ आती हैं, तब आरजेडी को 150 सीटें तो चाहिए ही। 
महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी 85 सीटों पर दावा ठोक दिया है। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी  विधानसभा चुनाव में 85 सीटें जीत सकने की स्थिति में है। उन्होंने कहा, हम सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव नहीं जीत सकते, लेकिन 85 सीटों पर जीत सकते हैं या समर्थन देकर किसी को जिताया जा सकता है।
(बाकी पेजï 5 पर)
पांच साल पूर्व 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 41 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और इनमें से 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, आरजेडी और जेडीयू के हिस्से में 101-101 सीटें आई थीं। आरजेडी 80 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरा था। वहीं, 71 सीटें हासिल करने वाला जेडीयू लगभग 20 माह बाद ही महागठबंधन से अलग हो गया था और बीजेपी के साथ बिहार में सरकार बना ली थी।
कांग्रेस भी झारखंड चुनाव परिणाम से उत्साहित होकर महागठबंधन में सीटों को लेकर दबाव बना रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रवींद्रनाथ मिश्रा ने कहा कि बिहार में जनता कांग्रेस के प्रति भरोसा रख रही है, साथ ही बिहार में कांग्रेस का जनाधार तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 100 सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी में है और जिस तरह से माहौल बन रहा है, उसमें 100 सीटें गठबंधन में पाने में कांग्रेस को कोई कठिनाई नहीं होगी। विपक्षी दलों के महागठबंधन में फिलहाल आरजेडी, कांग्रेस और हम के अलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी शामिल है।
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने सीट बंटवारे के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मीडिया में बयानबाजी से सियासी फैसले नहीं लिए जाते। हर पार्टी की अपनी मांग होती है। समय से पहले इस पर बोलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समय पर सब कुछ तय हो जाता है। बहरहाल, सभी दल अपने महागठबंधन के रणनीतिकारों पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत सीट बंटवारे को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, अब चुनाव के समय देखना होगा कि कौन पार्टी कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारती है। 


Date : 10-Jan-2020

नई दिल्ली, 10 जनवरी । बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के जेएनयू पहुंचने के बाद शुरू हुआ विवाद शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में बीजेपी नेता गोपाल भार्गव का दीपिका पादुकोण को लेकर एक बयान सामने आया है। मध्य प्रदेश में बीजेपी के नेता गोपाल भार्गव ने दीपिका पादुकोण का नाम लिए बगैर ही कहा कि हिरोइन को तो अपना डांस करना चाहिए मुंबई में बैठ के। जेएनयू में क्यों जाना चाहिए था उसको, भार्गव ने कहा कि मेरे समझ में नहीं आ रहा, इस प्रकार के दर्जनों लोग हो गए हैं जो एक्टिविस्ट, आर्टिस्ट कहलाते हैं।
गोपाल भार्गव से पहले केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गजेंद्र शेखावत भी दीपिका पादुकोण के जेएनयू जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। गजेंद्र शेखावत ने कहा कि न सिर्फ फिल्म कलाकार बल्कि कई राजनीतिक दलों के नेता भी भारतीय सभ्यता और देवी-देवताओं का अपमान कर चुके हैं। यह उन लोगों के साथ खड़े होते हैं जो आतंकवादियों के लिए नारे बोलते हैं, देश को तोडऩे वाले नारे बोलते हैं। उन्होंने कहा कि यह तबका, अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं, और, भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह, जैसे लोगों के साथ खड़ा होकर, खुद को प्रगतिवादी मानता है। देश अब ऐसे लोगों को पहचान चुका है।
जेएनयू हिंसा के बाद फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के कैंपस जाकर आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात के बाद बीजेपी पार्टी के समर्थकों ने उनकी फिल्म, छपाक, का बहिष्कार का ऐलान किया है।(एनडीटीवी)
 


Date : 06-Jan-2020

नई दिल्ली, 6 जनवरी । बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी बीजेपी और नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। रविवार को जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव पवन कुमार वर्मा ने पार्टी प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा। इस पत्र में बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की एक घोषणा पर उन्होंने कड़ा ऐतराज़ जताया है।
सुशील कुमार मोदी ने भी रविवार सुबह अपने ट्विटर अकाउंट से समाचारपत्रों की कुछ कतरनें शेयर की थीं। अखबारों की ये सभी कतरनें सुशील मोदी के एक बयान से जुड़ी हैं जिनमें सुशील मोदी के हवाले से लिखा है कि बिहार में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर का काम 12 से 28 मई तक चलेगा।
पवन वर्मा ने कहा कि यह पूरी तरह से एकतरफा घोषणा है। पूर्व राजनयिक पवन वर्मा ने कहा कि सीएए-एनपीआर-एनआरसी लोगों को आपस में बाँटने वाले हैं।
नीतीश कुमार के नाम लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा है, संयुक्त रूप से सीएए-एनआरसी हिन्दू और और मुसलमानों को बाँटने और सामाजिक अस्थिरता पैदा करने की सीधी कोशिश है। इसके अलावा यह उन भारतीयों के लिए भी मुसीबत है जो गरीब हैं, हाशिए पर हैं और मुश्किल स्थिति में जी रहे हैं।
वर्मा ने लिखा है, मैं पूरी तरह से हैरान हूँ कि उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एकतरफा घोषणा कर दी कि बिहार में 12 मई से 28 मई तक एनपीआर का काम चलेगा। जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार एनआरसी की शुरुआत एनपीआर से कर रही है। एनपीआर एनआरसी का पहला चरण है। आपने कहा है कि बिहार में एनआरसी की जरूरत नहीं है। इसी को देखते हुए आप यह भी कहिए कि संशोधित एनपीआर भी नहीं चलेगा।
पवन वर्मा ने कहा कि सिद्धांत की राजनीति को छोटी अवधि के फायदे के लिए क़ुर्बान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, आइडिया ऑफ इंडिया के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को मैं जानता हूँ और आप इसे लेकर भी कदम उठाएंगे।
नीतीश कुमार एनआरसी को लेकर लगभग चुप रहे हैं। नीतीश की चुप्पी से जेडीयू में एक किस्म की दुविधा भी साफ दिखती है।
कोई नेता इसके समर्थन में बोलता है तो कोई खिलाफ में। देश भर के मुसलमानों की तरह बिहार में भी मुसलमानों के बीच सीएए और एनआरसी को लेकर चिंताएं हैं। बिहार में 16 फीसदी मुसलमान हैं और ये नीतीश कुमार को भी वोट करते रहे हैं।
पवन वर्मा ने अपने पत्र में लिखा है, आप हमेशा सेक्युलर इंडिया के साथ रहे हैं। यही कारण है कि मैं आपसे अपील कर रहा हूँ कि विभाजनकारी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पार्टी के रुख़ पर फिर से विचार करें। मैंने पहले भी इसे लेकर अनुरोध किया था। लेकिन इसे अनसुना कर दिया गया। मुझे इसे लेकर बहुत निराशा हुई थी।
जेडी(यू) ने राज्यसभा में नारगिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था। उस वक्त भी पवन कुमार वर्मा ने नीतीश कुमार से इस पर दोबारा सोचने के लिए कहा था लेकिन पार्टी ने उनकी सलाह को अनसुना कर दिया था।
इस बिल के समर्थन में राज्यसभा में बोलते हुए जेडीयू सासंद आरसीपी सिंह ने कहा था, इस बिल पर विपक्षी पार्टियों के रुख़ से मैं हैरान हूँ। देश भर में अजीब तरह का माहौल बनाया जा रहा है। बिल में इस देश के अल्पसंख्यकों के बारे में कोई बात ही नहीं है। यह बिल पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों की नागरिकता के लिए है। इससे पहले नागरिकता देने के लिए पहले भी बिल पास हुए हैं।(बीबीसी)

 


Date : 06-Jan-2020

नयी दिल्ली, 6 जनवरी । कांग्रेस ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार रात हुई हिंसा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया तथा आरोप लगाया कि इस तरह से सरकार प्रायोजित हिंसा कर विश्वविद्यालयों में डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा, ‘‘दुनिया में भारत की छवि एक उदार लोकतांत्रिक देश की है। मोदी-शाह के गुंडे विश्वविद्यालयों में तोडफ़ोड़ कर रहे है और अपने उज्ज्वल भविष्य की तैयारियों में जुटे छात्रों में भय पैदा किया जा रहा है।’’
श्रीमती वाड्रा ने कहा कि एम्स में भर्ती जेएनयू के घायल छात्रों ने उन्हें बताया कि डंडों तथा हथियारों से लैस गुंडों ने परिसर में घुसकर उपद्रव मचाया जिसमें कई छात्रों को गहरी चोटें आयी है। एक छात्र ने यह तक कहा कि पुलिस ने उसे कई किक मारी है।
बाद में कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने पत्रकारों से कहा कि जेएनयू में कल रात सरकार प्रायोजित हिंसा हुई जो मोदी-शाह के इशारे पर हुई है। उन्होंने कहा कि इस हमले में छात्रों को ही नहीं बल्कि अध्यापकों को भी पीटा गया जिसमें प्रोफेसर सावंत शुक्ल, प्रो सुचित्रा सेन, प्रो अतुल सूद, प्रो एस मजूमदार सहित कई लोग घायल हो गये।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि उन्होंने तीन घंटे तक चले ङ्क्षहसा के इस मंकार को नजदीक से देखा है। उन्होंने कहा कि हमलावर ‘वामपंथियो को मारो’ जैसी बातें कर रहे थे।  श्री राज ने दावा किया कि उनके पास घटना का वीडियो भी है।(वार्ता)
 


Date : 05-Jan-2020

मुम्बई, 5 जनवरी ।  महाराष्ट्र सरकार में विभागों के आवंटन का ऐलान रविवार सुबह हो गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी के नेता अजित पवार को वित्त मंत्रालय और प्लानिंग मंत्रायल का कार्यभार सौंपा गया है। वहीं एनसीपी के ही अनिल वसंतराव देशमुख को गृहमंत्री बनाा गया है, जबकि उद्धव ठाकरे के बेटे शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे पर्यटन और पर्यावरण का कार्यभार संभालेंगे।
शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे ने मुंबई में आरे कॉलोनी के पेड़ों को काटे जाने का मुखर विरोध किया था। एनसीपी के ही छगन भुजबल को उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय सौंपा गया है। धनंजय मुंडे को सामाजिक न्याय मंत्रालय का कर्यभार दिया गया है। नवाब मलिक को अल्पसंख्यक विकास मंत्रालय सौंपा गया है। वहीं शिवसेना के एकनाथ शिंदे को शहरी विकास मंत्रालय दिया गया है, जबकि सुभाष देसाई को उद्योग और खनन के साथ-साथ मराठी भाषा का मंत्रालय दिया गया है।
कृषि मंत्रालय का काम देखने का जि़म्मा दादाजी दगडू भुसे को और जल विभाग गुलाबराव पाटिल को मिला है।
कांग्रेस नेता बालासाबेह थोराट को राजस्व विभाग और अशोक चव्हाण को पीडब्ल्यूडी विभाग का कार्यभार मिला है।
योशमति ठाकुर महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाई गई हैं।
इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कैबिनेट मंत्रियों और उनके प्रस्तावित पोर्टफ़ोलियो की लिस्ट सौंपी थी जिन पर उन्होंने रविवार को मुहर लगाई थी। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और 30 दिसंबर को कैबिनेट का विस्तार हुआ था।
विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी महाराष्ट्र में सरकार बनने में काफ़ी देर हुई थी और कई नाटकीय घटनाक्रम के बाद आखिरकार उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि सरकार बनने के बाद भी कैबिनेट विस्तार में बहुत देरी हुई थी क्योंकि विभागों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही थी। (बीबीसी)

 


Date : 04-Jan-2020

मुंबई/नई दिल्ली, 4 जनवरी । महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार में महज एक महीने बाद ही बड़ी टूट सामने आई है। उद्धव ठाकरे सरकार के कैबिनेट विस्तार के महज 5 दिन बाद ही शिवसेना कोटे से मंत्री बने अब्दुल सत्तार ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उद्धव ठाकरे सरकार में राज्य मंत्री के तौर पर शामिल किए गए अब्दुल सत्तार की मांग थी कि उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर का रैंक दिया जाए। अभी सीएम उद्धव ठाकरे ने सत्तार का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। माना जा रहा है कि उन्हें उनकी पसंद का मंत्रालय देकर मनाया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, सत्तार महाराष्ट्र कैबिनेट विस्तार के बाद से ही नाराज चल रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उन्हें राज्य मंत्री की शपथ दिलवा दी गई। इससे नाराज सत्तार ने मंत्री पद ही छोड़ दिया, हालांकि वह अब भी शिवसेना के विधायक हैं।
कांग्रेस छोड़ शिवसेना में आए थे अब्दुल सत्तार
अब्दुल सत्तार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना में शामिल हुए थे। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान सत्तार को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने के आरोप में निष्कासित कर दिया था। कांग्रेस ने जालना और औरंगाबाद में जिन लोगों को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया था, उनसे सत्तार नाखुश थे। उन्होंने औरंगाबाद लोकसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार हर्षवर्धन जाधव को अपना समर्थन दिया था। इसके बाद तब सिल्लोड विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार को कांग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया था।
जिला परिषद चुनाव को लेकर भी नाराज हैं अब्दुल सत्तार
मराठवाड़ा में औरंगाबाद के जमीनी नेता के रूप में अब्दुल सत्तार की पहचान रही है। इन दिनों महाराष्ट्र में जिला परिषद के चुनाव हो रहे हैं और जिला परिषद अध्यक्ष पद पर अब्दुल सत्तार अपने उम्मीदवार को जिताना चाहते हैं। हालांकि, महाविकास अघाड़ी सरकार में शामिल शिवसेना, एनसीपी और काग्रेंस में सहमति बनी है कि जिला परिषद अध्यक्ष का पद कांग्रेस को दिया जाए। सत्तार अघाड़ी के इस फैसले से भी नाराज हैं।
मनाने को कोशिशें तेज, उद्धव ने सीनियर नेता को भेजा
अब्दुल सत्तार नहीं चाहते कि औरंगाबाद में कोई कांग्रेसी जिला परिषद का अध्यक्ष बने। औरंगाबाद जिला परिषद में शिवसेना के पास इतना संख्या बल है कि वह अपना अध्यक्ष बना सकती है। खबर है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मराठवाड़ा के बड़े नेता अर्जुन खोतकर को अब्दुल सत्तार को मनाने के लिए भेजा है।(नवभारत टाईम्स)
 


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