खेल

Date : 26-Aug-2019

बासेल, 26 अगस्त ।  पीवी सिंधु की विश्व खिताबी सफलता के साथ-साथ मानसी जोशी ने भी भारतीय पैरा बैडमिंटन में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। मानसी जोशी ने बासेल में विश्व पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप के महिला एकल एसएल-3 फाइनल में हमवतन पारुल परमार को 21-12, 21-7 से हराकर खिताब जीता। मानसी ने 2011 में एक दुर्घटना में अपना बायां पैर गंवाया था। उसके आठ साल बाद फाइनल में उन्होंने तीन बार की विश्व चैंपियन परमार को शनिवार को पराजित किया। वह पुलेला गोपीचंद अकादमी में ट्रेनिंग करती हैं। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 14 पदक जीते, जिसमें तीन स्वर्ण और तीन रजत शामिल हैं। 
भारतीय पैरालंपिक समिति ने मानसी को इस जीत के लिए बधाई दी है। इस बीच प्रमोद भगत और मनोज सरकार ने पुरुष युगल एसएल 3-4 वर्ग के फाइनल में हमवतन नितेश कुमार और तरुण ढिल्लों को 14-21, 21-15, 21-16 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस चैम्पियनशिप में भगत का यह दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले उन्होंने पुरुष युगल एसएल 3-4 का खिताब भी जीता था। 
रविवार को प्रमोद भगत ने पुरुष सिंगल एसएल 3 के फाइनल में इंग्लैंड के डेनियल बैथल को 6-21, 21-14, 21-5 से हराकर स्वर्ण पदक जीता जबकि तरुण कोना को पुरुष सिंगल एसएल 4 के फाइनल में फ्रांस के लुकास मजूर से हार का सामना करना पड़ा। तरुण ने पहले गेम में 13-14 के स्कोर पर मैच छोड़ दिया। 
विश्व खिताब जीतना किसी सपने के सच होने जैसा
भारत की पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने पहला विश्व चैम्पियनशिप खिताब जीतने के बाद कहा कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। मैच जीतने के बाद जोशी ने कहा, मैंने बहुत कठिन ट्रेनिंग की है...मैंने एक दिन में तीन सेशन ट्रेनिंग की है। मैंने फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया था, इसलिए मैंने कुछ वजन भी कम किया और अपनी मांसपेशियों को बढ़ाया। मैंने जिम में अधिक समय बिताया, सप्ताह में छह सेशन ट्रेनिंग की।
जोशी ने कहा, मैंने अपने स्ट्रोक्स पर भी काम किया, मैंने इसके लिए अकादमी में हर दिन ट्रेनिंग की। मैं समझती हूं कि मैं लगातार बेहतर हो रही हूं और अब यह दिखना शुरू हो गया है। अपने सफर के बारे में बात करते हुए जोशी ने कह, मैं 2015 से बैडमिंटन खेल रही हूं। विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतना किसी सपने के सच होने जैसा होता है। जोशी ने बताया कि वह चलने के लिए अब नए वॉकिंग प्रोसथेसिस सॉकेट का उपयोग कर रही हैं। इससे पहले वह पांच साल से एक ही सॉकेट का इस्तेमाल कर रही थीं जिसके कारण वर्कआउट के दौरान उनकी रफ्तार धीमी हो रही थी।(लाइव हिन्दुस्तान)

 

 


Date : 26-Aug-2019

नई दिल्ली, 26 अगस्त।  भारतीय तीरंदाज कोमालिका बारी  ने रविवार (25 अगस्त) को विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप के रिकर्व कैडेट वर्ग के एक तरफा फाइनल में जापान की उच्च रैंकिंग वाली सोनोदा वाका को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। जमशेदपुर की टाटा तीरंदाजी अकादमी की 17 साल की खिलाड़ी कोमालिका अंडर-18 वर्ग में विश्व चैम्पियन बनने वाली भारत की दूसरी तीरंदाज बनीं। उनसे पहले दीपिका कुमारी ने 2009 में यह खिताब जीता था। विश्व तीरंदाजी से निलंबन लागू होने से पहले भारत ने अपनी आखिरी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक के साथ अभियान का समापन किया।

इस महीने की शुरुआत में विश्व तीरंदाजी ने भारत को निलंबित करने का फैसला किया था। जिसके हटने तक अब कोई भी भारतीय तीरंदाज देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। भारतीय तीरंदाजों ने इससे पहले शनिवार को मिश्रित जूनियर युगल स्पर्धा में स्वर्ण और शुक्रवार को जूनियर पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य जीता था।
पिता ने बेटी को तीरंदाज बनाने के लिए बेच दिया था घर
यह वाक्या 2016 की है। कोमालिका के पिता घनश्याम बारी बताते हैं कि हमने तो बिटिया को सिर्फ इसलिए तीरंदाजी सीखने के लिए भेजा था, ताकि वह फिट रहे, लेकिन हमें क्या पता था कि कोमालिका तीरंदाजी को अपना करियर बना लेगी। कभी होटल तो कभी एलआइसी एजेंट का काम करने वाले कोमालिका के पिता बताते हैं कि तीरंदाजी की दुनिया में बिटिया के बढ़ते कदम ने हमें आर्थिक परेशानी में डाल दिया। डेढ़ लाख से तीन लाख तक की धनुष कोमालिका को देना बस की बात नहीं थी, लेकिन तीरंदाजी की दुनिया में कोमालिका के बढ़ते कदम ने हमें घर बेचने पर मजबूर कर दिया।
अपनी बेटी 
पर गर्व है
घनश्याम बारी की मानें, तो इधर उन्होंने अपने घर का सौदा किया और उधर कोमालिका को टाटा आर्चरी एकडेमी में जगह मिल गई। एकेडमी में जगह मिलने के बाद कोमालिका को सारी सुविधा वहीं से मिलने लग गई और घर बेचने के बाद जो पैसे आए, वह मेरे पास ही रह गए। घनश्याम बारी कहते हैं कि घर बेचने का मलाल जरूर हुआ, लेकिन आज जब स्पेन से कोमालिका के कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बनने की खबर मिली, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि घर-द्वार तो बनते रहेंगे, अब तो पहली इच्छा यही है कि कोमालिका ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करे।
आंगनबाड़ी सेविका हैं मां
कोमालिका मां लक्ष्मी बारी आंगनबाड़ी सेविका हैं। दरअसल मां की पसंद को ध्यान में रखते हुए ही कोमालिका ने तीरंदाजी को अपनाया था। लक्ष्मी बारी कहती हैं कि हमने कोमालिका को तीरंदाजी सेंटर इसलिए भेजा था, क्योंकि इस खेल में कोई जोखिम नहीं है, लेकिन कोमालिका ने अपनी मेहनत से पूरे परिवार को इस खेल का मुरीद बना दिया। कोमालिका का छोटा भाई महेंद्र बारी भी अपनी दीदी की सफलता पर काफी खुश है।
2012 में की थी तीरंदाजी की शुरुआत
कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बननेवाली टाटा आर्चरी एकेडमी की तीरंदाज कोमालिका बारी ने 2012 में आइएसडब्ल्यूपी (तार कंपनी) तीरंदाजी सेंटर से अपने करियर की शुरुआत की थी।
तार कंपनी सेंटर के कोच सुशांतो पात्रो की मानें, तो 2012 में तार कंपनी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में समर कैंप का आयोजन किया गया था, जिसमें कोमालिका शिक्षा निकेतन की छात्रा के रूप में शामिल हुई थी। वह अपने चचेरे भाई राजकुमार बारी के साथ प्रतिदिन साइकिल पर सवार होकर अभ्यास के लिए आती थी। कोच के अनुसार एक महीने का समर कैंप तो खत्म हो गया, लेकिन कोमालिका ने अभ्यास जारी रखा और वह सेंटर की नियमित प्रशिक्षु बन गई।
2016 में टीएए में मिली जगह
तार कंपनी सेंटर में लगभग चार वर्षों के दौरान मिनी व सबजूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद कोमालिका को 2016 में टाटा आर्चरी एकेडमी (टीएए) में जगह मिल गई। टीएए पहुंचने के बाद द्रोणाचार्य पूर्णिमा महतो और धर्मेंद्र तिवारी जैसे दिग्गज प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में कोमालिका का सफर शुरू हुआ और महज तीन वर्षों के भीतर वह कैडेट वर्ल्ड चैंपियन के रूप में उभरकर सामने आ गई। कोमालिका अभी तक के करियर में लगभग डेढ़ दर्जन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी है। अब झारखंड की तीरंदाजी में उसे ओलंपियन दीपिका कुमारी के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है।
ओलंपियन दीपिका के बाद कोमालिका कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बननेवाली दूसरी तीरंदाज
टाटा आर्चरी एकेडमी की तीरंदाज कोमालिका बारी रिकर्व डिवीजन में भारत की दूसरी तीरंदाज है, जिसने कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। इससे पहले दीपिका कुमारी वर्ष 2009 में कैडेट वर्ल्ड चैपियन बनी थी। दीपिका ने अमेरिका के ऑग्डेन शहर में आयोजित कैडेट वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में यह उपलब्धि हासिल की थी। तब दीपिका भारत की पहली तीरंदाज थी, जिसने कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। मालूम हो कि अभी तक कैडेट वर्ल्ड चैंपियनशिप में झारखंड के तीरंदाजों ने भारत को पांच पदक दिलाए हैं। इसमें दो स्वर्ण, एक रजत व दो कांस्य पदक शामिल हैं।(लाइव हिन्दुस्तान)

 


Date : 26-Aug-2019

छत्तीसगढ़ संवाददाता
अभनपुर, 26  अगस्त। रायपुर में आयोजित 15वें छत्तीसगढ़ स्तरीय यूथ एथलीट चैंपियनशिप में अभनपुर की कन्या शाला उचच्तर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा सानिया सिन्हा ने 600 मीटर की दौड़ में 2 मिनट में पूरी कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 

 

 

 

 


Date : 26-Aug-2019

नई दिल्ली, 26 अगस्त । आईसीसी वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के प्वॉइंट टेबल में टीम इंडिया टॉप पर पहुंच गई है। वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में भारत ने 318 रनों से जीत दर्ज कर वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप का शानदार आगाज किया। भारत और श्रीलंका दोनों के खाते में 60-60 प्वॉइंट्स हैं। हालांकि भारत इस पोजिशन पर ज्यादा देर नहीं रह पाएगा। वहीं इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरा एशेज टेस्ट जीता और चौथे नबंर पर है। 
आईसीसी वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप में छह टीमों ने अपना सफर शुरू कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड तीन-तीन टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जबकि भारत और वेस्टइंडीज ने अभी एक-एक टेस्ट मैच खेला है। वहीं श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच दो मैचों की सीरीज का एक मैच हो चुका है और दूसरे टेस्ट का आज आखिरी दिन है। 
ऑस्ट्रेलिया के खाते में एक जीत, एक ड्रॉ और एक हार है, वहीं इंग्लैंड के खाते में भी एक हार, एक ड्रॉ और एक जीत के बाद 32 प्वॉइंट्स हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि आईसीसी वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के प्वॉइंट्स का क्या सिस्टम है-
दरअसल वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के प्वॉइंट सिस्टम के मुताबिक दो मैचों की सीरीज में जीतने पर 60 प्वॉइंट्स, टाई होने पर 30 प्वॉइंट्स और ड्रॉ के 20 प्वॉइंट्स मिलेंगे, जबकि हारने पर एक भी प्वॉइंट नहीं होगा। कितने भी मैचों की सीरीज हो हारने वाली टीम को कोई प्वॉइंट नहीं मिलेगा। वहीं तीन मैचों की सीरीज में जीतने पर 40 प्वॉइंट्स, टाई होने पर 20 प्वॉइंट्स और ड्रॉ होने पर 13 प्वॉइंट्स होंगे। चार मैचों की सीरीज में जीतने वाली टीम को 30 प्वॉइंट्स, टाई होने पर 15 प्वॉइंट्स और मैच ड्रॉ होने पर 10 प्वॉइंट्स होंगे। जबकि पांच मैचों की सीरीज में जीतने पर 24 प्वॉइंट्स, टाई होने पर 12 प्वॉइंट्स और ड्रॉ होने पर आठ प्वॉइंट्स होंगे। (टाई और ड्रॉ होने पर दोनों टीमों के एक जैसे प्वॉइंट्स मिलेंगे।)(लाइव हिन्दुस्तान)
 


Date : 26-Aug-2019

एंटीगा, 26 अगस्त ।  जीत के बाद कप्तान विराट कोहली ने अजिंक्य रहाणे की तारीफ की। साथ ही उन्होंने युवा फास्ट बोलर जसप्रीत बुमराह को टेस्ट चैंपियनशिप में तुरुप का इक्का बताया। सभी कॉमेंट्स देखैंअपना कॉमेंट लिखेंकोहली ने कहा, जब हम पिछली बार भी यहां (वेस्ट इंडीज में) खेले थे तो नतीजे हमारे लिए अच्छे रहे थे।  कोहली ने बतौर कप्तान विदेशी धरती पर 12वीं जीत हासिल की। वह विदेशी धरती पर सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 27वीं टेस्ट जीत हासिल कर सबसे सफल भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के रेकॉर्ड की भी बराबरी कर ली। 

कोहली ने पहली पारी में 81 और दूसरी पारी में 102 रनों की शतकीय पारी खेलने वाले अजिंक्य रहाणे की खुलकर तारीफ की। कोहली ने कहा कि रहाणे ने दोनों पारियों में बहुत अच्छी बल्लेबाजी की। उन्होंने कहा, हमें मेहनत करनी पड़ी। मैच में कम से कम तीन या चार बार हमें वापसी करनी पड़ी। कोहली ने कहा कि इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और बुमराह एक बोलिंग यूनिट के तौर पर बहुत अच्छी बोलिंग कर रहे हैं। टीम कॉम्बिनेशन के बारे में कप्तान ने कहा कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई खिलाड़ी कैसे एक से ज्यादा स्किल में माहिर है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध संसाधनों का प्रबंधन और टीम के रूप में सेटल महसूस करना है। टीम चयन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर हमेशा कई राय होंगी। (नवभारत टाईम्स)

 

 


Date : 26-Aug-2019

नई दिल्ली, 26 अगस्त । बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली पी वी सिंधु ने खिताबी जीत के बाद कहा कि इस बार वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार थीं। ओलम्पिक रजत पदक विजेता सिंधु ने रविवार को बीडब्ल्यूएफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी जापान की नोजोमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से हराकर चैम्पियनशिप में पहली बार स्वर्ण पदक जीत लिया।
सिंधु इससे पहले इस टूर्नामेंट में लगातार दो बार (2017 और 2018) फाइनल में हारी थीं। लेकिन, इस बार उन्होंने इस गतिरोध को तोड़ा और बैडमिंटन में पहली भारतीय वर्ल्ड चैम्पियन बन गईं। सिंधु ने इस जीत के बाद आईएएनएस से कहा, इस बार मैं अपना खास देने के लिए तैयार थी। लेकिन मैंने इस मुकाबले को भी वैसे ही खेला, जैसा कि मैं पिछले मैच में खेली थी। मैंने केवल यही सोचा था कि यह मैच भी मेरे लिए केवल एक मैच की तरह ही है।
इस जीत के साथ ही सिंधु विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। वह इससे पहले बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वर्ष 2017 और 2018 में रजत तथा 2013 व 2014 में कांस्य पदक जीत चुकीं हैं और उनके पांच पदक हो गए हैं।
उन्होंने कहा, हां, मैंने सोचा कि यह फाइनल है और इमसें मुझे अच्छा करने की जरूरत है। लेकिन मैंने वैसा ही खेल का प्रदर्शन किया है, जैसा कि मैं क्वार्टर और सेमीफाइनल में खेली थी। मैंने हर चीज के लिए तैयारी की थी। जैसा कि आपको पता है कि जापानी खिलाडिय़ों के खिलाफ हमेशा मुकाबला लंबा होता है, इसलिए मैं इसकी पहले से ही तैयारी करके आई थी।
यह पूछे जाने पर कि कैरोलिना मारिन और टॉप सीड अकाने यामागुची के बाहर होने से आपके लिए स्वर्ण पदक जीतना आसान हो गया, उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता है कि ऐसा है क्योंकि टॉप 10-15 खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलना एक जैसा ही है। यह इस चीज पर निर्भर करता है कि कौन उस दिन अच्छा खेलता है और मैच जीतता है।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि ताई जू यिंग और ओकुहारा जैसे खिलाड़ी भी शानदार खिलाड़ी हैं, इसलिए इनके खिलाफ मुकाबला आसान नहीं होता है। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि यह इस चीज पर निर्भर करता है कि कौन उस दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। सिंधु ने जहां एक ओर इस खिताब को अपनी मां और हर भारतीय को समर्पित किया तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने इसके लिए अपने कोचों को भी धन्यवाद दिया।
सिंधु ने कहा, मैं अपनी नई कोच किम के साथ पिछले कुछ समय से काफी अच्छी तैयारी कर रही थी। उसके बाद मेरे खेल में काफी सुधार हुआ है। इसके लिए मैं अपने कोच का भी धन्यवाद देती हूं। इसके अलावा मेरे फिटनेस कोच श्रीकांत को भी मैं धन्यवाद देना चाहूंगी। उन्होंने कहा, टोक्यो ओलम्पिक अब ज्यादा दूर नहीं है, लेकिन मुझे मैच दर मैच आगे बढऩा है। ओलम्पिक क्वालीफिकेशन अभी जारी है और मुझे उम्मीद है कि मैं इसमें अच्छा करूंगी। लेकिन अभी मैं इस जीत का जश्न मनाना चाहती हूं।(आजतक)

 

 

 


Date : 26-Aug-2019

लंदन, 26 अगस्त । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा बल्लेबाज जेमिमाह रॉड्रिग्स ने इंग्लैंड में चल रही किया विमेंस सुपर लीग के मुकाबले में धमाकेदार नाबाद शतक जमाया। 18 साल की रॉड्रिग्स ने सिर्फ 58 गेंदों में 17 चौके व एक छक्के की मदद से नाबाद 112 रन बनाए। रॉड्रिग्स ने किया विमेंस सुपर लीग में सबसे तेज शतक जमाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उनकी पारी की बदौलत यॉर्कशायर डायमंड्स ने आखिरी गेंद पर सदर्न वाइपर्स को चार विकेट से मात दी। 
वाइपर्स ने पहले बल्लेबाजी की और निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट खोकर 184 रन बनाए। जवाब में यॉर्कशायर ने अंतिम गेंद पर 6 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल किया। जेमिमाह को शानदार शतकीय पारी खेलने के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।
वाइपर्स ने पहले बल्लेबाजी की और उसके ओपनर्स ने शानदार शुरुआत दिलाई। विराट कोहली को शादी का प्रस्ताव देकर सुर्खियां बटोरने वाली इंग्लैंड की बल्लेबाज डेनियल याट ने 20 गेंदों में 42 रन की धमाकेदार पारी खेलकर वाइपर्स के बड़े स्कोर की नींव रखी। कप्तान सूजी बेट्स ने इस लय को जारी रखते हुए 47 रन की पारी खेली। वाइपर्स ने इस तरह 20 ओवर में चार विकेट खोकर 184 रन बनाए। 
लक्ष्य का पीछा करने उतरी डायमंड्स की शुरुआत बेहद खराब रही। उसके ओपनर्स लॉरेन विनफील्ड और ऑस्ट्रेलिया की एलिसा हिली जल्दी-जल्दी डगआउट लौट गईं। तब युवा रॉड्रिग्स ने जिम्मेदारी उठाई और मुकाबला रोचक बना दिया। भारतीय महिला बल्लेबाज ने होनी आर्मीटेज के साथ तीसरे विकेट के लिए 90 रन की साझेदारी की। वाइपर्स के गेंदबाजों पर जेमिमाह पूरी तरह हावी नजर आ रही थीं। हालांकि, आर्मीटेज के आउट होने के साथ यह साझेदारी टूटी और यॉर्कशायर को इसके बाद जल्द ही दो तगड़े झटके लगे। 
रॉड्रिग्स ने हिम्मत नहीं हारी और एक छोर संभालते हुए अपना आक्रामक खेल जारी रखा। फिर लेघ कासपरेक के रूप में रॉड्रिग्स को एक भरोसेमंद जोड़ीदार मिली। दोनों ने तेजी से 49 रन की साझेदारी की। रॉड्रिग्स और कासपरेक की साझेदारी की मदद से यॉर्कशायर डायमंड्स को अंतिम ओवर में 10 रन की जरूरत थी। कासपरेक (12) आउट होकर डगआउट लौटीं। 
वाइपर्स की तरफ से आखिरी ओवर करने कप्तान सूजी बेट्स आईं। रॉड्रिग्स ने अपना शतक पूरा करने के साथ ओवर में पहले 9 रन बनाए। फिर लिंसे स्मिथ ने मैच विजयी रन बनाए और रोमांचक मुकाबले में यॉर्कशायर को जीत दिलाई। हालांकि, रॉड्रिग्स के शतक के बावजूद यॉर्कशायर डायमंड्स की टीम सेमीफाइनल में पहुंच नहीं पाई। दरअसल, यॉर्कशायर को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए बोनस अंक की जरूरत थी। अगर वह 16 ओवर में 186 रन बनाती तो सेमीफाइनल में पहुंच जाती। मगर यॉर्कशायर अंतिम गेंद पर जीती।
यॉर्कशायर डायमंड्स की कप्तान लॉरेन विनफील्ड ने मैच के बाद भारतीय महिला बल्लेबाज की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा, जेमिमाह रॉड्रिग्स ने अविश्वसनीय पारी खेली। वह इस स्पर्धा में दिन प्रतिदिन बेहतर होती गईं। पिछले तीन से चार मुकाबलों में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में गजब का सुधार दिखाया है। मुझे उनकी आज की पारी लाजवाब लगी। इतनी कम उम्र में वह कमाल का प्रदर्शन कर रही हैं। जेमिमाह हमेशा सवाल करती रहती है। उसका क्रिकेट के लिए दिमाग शानदार हैं और उसके पास सभी शॉट्स मौजूद हैं। उसे पाकर हम सभी खुश हैं।
उन्होंने आगे कहा, हमने देखा है कि कड़े मुकाबलों में जेमिमाह ने अच्छी पारियां खेली हैं। वह हमारे लिए फिनिशर की भूमिका भी निभाती हैं। हम हमेशा घबराए हुए होते हैं और वो ऐसे में शांत दिखती है। यह अविश्वसनीय पारी है।(टाईम्स नाऊ)
 


Date : 26-Aug-2019

आदेश कुमार गुप्त
नई दिल्ली, 26 अगस्त । स्टार महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और भारत के लिए स्विट्जरलैंड का बासेल शहर तब यादगार और एतिहासिक बन गया जब रविवार को सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। पांच फुट दस इंच की सिंधु ने अपनी कामयाबी से बैडमिंटन की दुनिया में अपने कद को आसमानी ऊंचाई दे दी। 
उन्होंने फाइनल में जापान की नोजुमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से मात दी। इस जीत के साथ उन्होंने नोजुमी के हाथों दो साल पहले फाइनल में मिली हार का हिसाब भी चुका दिया।
इस टूर्नामेंट में वो शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखने में कामयाब रहीं। सिंधु को पहले दौर में बाई मिली। दूसरे दौर में उन्होंने चीन ताइपे की पाई यू पो को 21-14, 21-15 से हराया। तीसरे दौर में सिंधु ने नौवी वरीयता हासिल अमरीका की झांग बेईवेन को 21-14, 21-6 से मात दी।
लेकिन इसी बीच भारत की एक और स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल डेनमार्क की मिआ ब्लिचफैड से 21-15, 25-27, 12-21 से हार गई। तब इस चैंपिचनशिप में भारत के पदक जीतने की उम्मीदों को गहरा धक्का लगा।
लेकिन क्वार्टर फाइनल में सिंधु ने दूसरी वरीयता हासिल चीन ताइपे की ताई ज़ू यिंग को 12-21, 23-21, 21-19 से हराकर बड़ा उलटफेर किया और शान से सेमीफाइनल में जगह बनाई।
सेमीफाइनल में भी सिंधु की कामयाबी का सिलसिला जारी रहा। इस मैच में उन्होंने चौथी वरीयता हासिल चीन की चेन यू फेई को बेहद आसानी से 21-7, 21-14 से हराया।
लेकिन फाइनल ऐसा एकतरफा होगा ऐसा तो शायद सिंधु ने भी नहीं सोचा होगा। पांचवी वरीयता हासिल सिंधु के सामने जापान की तीसरी वरीयता हासिल नोजुमी ओकूहारा कही नहीं टिकीं।
फाइनल में सिंधु के प्रदर्शन पर खेल पत्रकार राकेश राव कहते है, 33 साल के अपने खेल पत्रकार जीवन में मैंने ऐसा नहीं देखा कि किसी एक खिलाड़ी ने इस अंदाज में विश्व चैंपियनशिप जीती हो।
दरअसल पीवी सिंधु ने अपनी पुरानी कमियों को ध्यान में रखकर और उससे उबरकर फाइनल खेला। सिंधु ने इस साल कोई खिताब भी नहीं जीता था, इसलिए उनसे उम्मीद भी कम थी। लेकिन जब उन्होंने दूसरी वरीयता हासिल ताई ज़ू यिंग को हराया तो उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। और फाइनल में तो उन्होंने बहुत तेज गेम खेला। उन्होंने ओकूहारा को लम्बी रैली खेलने का मौका ही नहीं दिया। इसके अलावा अपनी लंबाई का लाभ उठाते हुए सिंधु ने बेहद तेज स्मैश लगाकर ओकूहारा को हैरान और परेशान किए रखा। सिंधु ने अपने खेल से शानदार और दमदार जीत हासिल की।
पीवी सिंधु इससे पहले साल 2013 और 2014 में कांस्य पदक और साल 2017 और 2018 में रजत पदक जीत चुकी है। इस तरह विश्व चैंपियनशिप में उनके खाते में केवल स्वर्ण पदक की कमी थी जो अब पूरी हो गई है।(बीबीसी)
 


Date : 26-Aug-2019

एंटीगा, 26 अगस्त । जसप्रीत बुमराह ने अपनी कमाल की गेंदबाजी से फैंस के लिए सुपर संडे बना दिया। उन्होंने भारत-वेस्टइंडीज के बीच एंटीगा टेस्ट के चौथे दिन खतरनाक गेंदबाजी स्पेल डाला और एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। बुमराह ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजी क्रम की धज्जियां उड़ाते हुए 8 ओवर में 4 मेडन सहित केवल 7 रन देकर 5 विकेट झटके। भारतीय तेज गेंदबाज ने टेस्ट में चौथी बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया और इसकी मदद से विराट सेना ने विदेश में सबसे बड़ी टेस्ट जीत हासिल की। भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को पहले टेस्ट में 318 रन के विशाल अंतर से मात देकर दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाई। सीरीज का दूसरा टेस्ट 30 अगस्त से किंग्सटन में खेला जाएगा।
जसप्रीत बुमराह ने रविवार को एक ऐसा कारनामा किया, जो दिग्गज गेंदबाज वसीम अकरम, कपिल देव, वकार यूनिस, हरभजन सिंह और अनिल कुंबले भी नहीं कर सके। बुमराह ने अब तक जितने भी विदेशी दौरे किए, उसमें एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया। हाल ही में बुमराह ने सबसे तेज 50 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी बनाया था। 
2018 में टेस्ट डेब्यू करने वाले बुमराह चार देशों (ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज) में पहली बार दौरा करने गए और एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया। बुमराह ऐसा कारनामा करने वाले भारत के पहले तेज गेंदबाज हैं। जसप्रीत बुमराह अब तक सभी विदेशी दौरों पर टेस्ट की एक पारी में पांच विकेट लेने वाले भारतीय तेज गेंदबाज बन गए हैं। यही नहीं, बुमराह एशिया के भी पहले गेंदबाज बने, जिन्होंने इन चारों देशों में टेस्ट की एक पारी में पांच विकेट लेने का कमाल किया। महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम, वकार यूनिस, कपिल देव, हरभजन सिंह, अनिल कुंबले और मुथैया मुरलीधरन भी बुमराह जैसा कमाल नहीं कर सके। बुमराह ने सिर्फ 11 टेस्ट में ही यह अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया। 
बहरहाल, बुमराह ने वेस्टइंडीज के क्रैग ब्रेथवेट, जॉन कैंपबेल, डैरेन ब्रावो, शाई होप और कप्तान जेसन होल्डर को अपना शिकार बनाया। भारतीय तेज गेंदबाज ने पांच में से चार बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड किया। उन्होंने कैंपबेल, ब्रावो, होप और होल्डर को क्लीन बोल्ड किया। इसी के साथ बुमराह टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में चार बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड करने वाले पहले भारतीय तेज गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले 2019 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ भी बुमराह ने चार बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड किया था और ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय तेज गेंदबाज बने थे।
बुमराह ने वेस्टइंडीज को पारी के दूसरे ही ओवर में पहला झटका दिया। उन्होंने क्रैग ब्रेथवेट को विकेटकीपर रिषभ पंत के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद बुमराह ने टी टाइम से पहले 3.3 ओवर किए, जिसमें तीन विकेट झटके। 20 मिनट के ब्रेक के बाद भी बुमराह का कमाल जारी रहा और उन्होंने 4.3 ओवर में अगले दो विकेट लेकर अपना पंजा (5 विकेट) पूरा किया। 
वैसे, वेस्टइंडीज की दूसरी पारी को सस्ते में समेटने का श्रेय बुमराह के साथ दो अन्य तेज गेंदबाजों (इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी) को भी जाता है। इशांत शर्मा ने बुमराह का बखूबी साथ निभाया और तीन विकेट झटके। शमी भी पीछे नहीं रहे और जल्दी-जल्दी दो विकेट जल्दी गिराए। इस तिकड़ी के दमदार प्रदर्शन के कारण वेस्टइंडीज की टीम दूसरी पारी में 27 ओवर भी पूरे नहीं खेल सकी और ऑलआउट हो गई।(टाईम्स नाऊ)
 


Date : 25-Aug-2019

बासेल, 25 अगस्त। भारत की 24 वर्षीय पीवी सिंधू ने रविवार को भारतीय बैडमिंटन इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय लिखा। स्विटजरलैंड के बासेल में आयोजित बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप 2019 के फाइनल मुकाबले में उन्होंने जापान की निजोमी ओकुहारा को 21-7, 21- 7 से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। लगातार तीसरी बार विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाली पीवी सिंधू ने ओकुहारा से दो साल पहले 2017 के विश्व चैंपियनशिप फाइनल में मिली हार का हिसाब भी चुकता कर लिया। इस खिताबी जीत के साथ सिंधू वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गईं। उनसे पहले और कोई भारतीय ऐसा नहीं कर सका था।
पहले गेम की शुरुआत 22 शॉट्स की रैली के साथ हुई लेकिन पहली सर्विस में ही सिंधू ने प्वाइंट गंवा दिया। इसके बाद शानदार वापसी करते हुए सिंधू ने लगातार 8 अंक बटोरे और 8-2 की बढ़त हासिल कर ली। ओकुहारा के पास सिंधू के आक्रामक खेल का कोई जवाब नहीं था। ब्रेक तक सिंधू ने 11-2 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद भारतीय स्टार ने अपना शानदार खेल जारी रखा और लगातार अंक बटोरती गईं और 16-2 से बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद ओकुहारा ने वापसी की कोशिश की लेकिन नाकाम रहीं और पहला गेम सिंधू ने 16 मिनट में 21-7 से अपने नाम कर लिया। 
दूसरे गेम में भी सिंधू ने शानदार शुरुआत करते हुए 2 अंक बटोरे। इसके बाद ओकुहारा ने उन्हें चुनौती देने और वापसी की कोशिश की लेकिन सिंधू के शानदार शॉट्स का उनके पास कोई जवाब नहीं था। सिंधू ने जापानी खिलाड़ी पर लगातार दबाव बनाए रखा और मिड गेम ब्रेक में 11-4 के साथ 7 अंक की बढ़त हासिल कर ली। यहां से ओकुहारा का वापसी कर पाना मुश्किल नजर आ रहा था। टूर्नामेंट में तीसरी वरीयता प्राप्त 24 वर्षीय ओकुहारा सिंधू को चुनौती दे पाने में नाकाम रहीं। अंत में सिंधू ने 21-7 से दूसरा गेम जीतकर विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम कर लिया। 
साल 1983 में प्रकाश पादुकोण ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। वो विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। इसके 30 साल बाद सिंधू ने विश्व चैंपियनशिप में भारत के पदक से सूखे को ग्वांग्जू में साल 2013 में खत्म किया था। सिंधू विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं थीं। इसके बाद 2014 में उन्होंने एक बार फिर कांस्य पदक जीता और वल्र्ड चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। इसके बाद  साल 2016 में जकार्ता में आयोजित वल्र्ड चैंपियनशिप में साइना नेहवाल ने रजत पदक हासिल किया। वो वल्र्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने और रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
सिंधू और ओकुहारा के बीच इस मुकाबले से पहले कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। दोनों के बीच फाइनल मुकाबले से पहले 15 बार भिड़ंत हुई थी। जिसमें 8 बार बाजी सिंधू के और 7 बार जापानी खिलाड़ी के हाथ लगी थी।  
सिंधू का फाइनल तक का सफर अच्छा रहा है। पांच मैचों में उन्होंने केवल एक गेम गंवाया। उन्हें क्वार्टरफाइनल मुकाबले में चीनी ताईपे की खिलाड़ी ताई जू यिंग के खिलाफ जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। 1 घंटा 11 मिनट तक चले मुकाबले को सिंधू ने 12-21, 23-21, 21-19 के अंतर से जीत हासिल की। इस मुकाबले के अलावा अन्य सभी में जीत 45 मिनट से भी कम समय में मिली। पहले दौर में सिंधू को बाई मिला था। 
साल 2016 में रियो ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम करने के बाद पीवी सिंधू के खेल में जबरदस्त सुधार आया और वो 2017 और 2018 में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचीं। 2017 में जापान की निजोमी ओकुहारा ने उनका विश्व चैंपियन बनने का सपना तोड़ दिया। इसके बाद 2018 में रियो ओलंपिक के फाइनल में सिंधू को मात देने वाली स्पेनिश खिलाड़ी कैरोलीन मरीन से पार नहीं पा सकीं।
लगातार तीसरी बार फाइनल में पहुंचकर सिंधू सिल्वर लाइन पार कर स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब हो ही गईं। विश्व चैंपियनशिप में सिंधू के नाम एक स्वर्ण, दो रजत और 2 कांस्य सहित कुल पांच पदक हो गए हैं। इससे पहले सिंधू ने अपने करियर में कई बड़ी उपलब्धि हासिल की थीं। लेकिन रियो ओलंपिक से लेकर अब तक वो बड़ी स्पर्धाओं में रजत पदक ही अपने नाम कर सकी थीं। विश्व चैंपियनशिप को छोड़ दिया जाए तो साल 2018 में आयोजित राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के खिताबी मुकाबलों में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में हमवतन साइना नेहवाल के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। वहीं जकार्ता पालेमबांग एशियाई खेलों चीनी ताईपेई की तीई जू यिंग ने उन्हें स्वर्ण पदक नहीं जीतने दिया।   (टाईम्स नाऊ)


Date : 25-Aug-2019

नई दिल्ली, 25 अगस्त । ओलिंपिक्स, वल्र्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स। इन चार मेगा इवेंट में भारतीय स्टार शटलर पीवी सिंधु ने विमिंस सिंगल्स बैडमिंटन के फाइनल में जगह बनाई है, लेकिन एक बार भी वह अपनी झोली में गोल्ड डालने में कामयाब नहीं हो पाईं। फाइनल में जाकर चूकने वालीं सिंधु के पास आज अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीतने का एक और मौका होगा, जब वह वल्र्ड चैंपियनशिप के फाइनल में कोर्ट पर उतरेंगी। 
सिंधु ने शनिवार को ऑल इंग्लैंड चैंपियन चेन यु फेइ पर सीधे गेम में मिली जीत से लगातार तीसरी बार वल्र्ड चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया। सिंधु ने इस प्रतिष्ठित टूर्नमेंट के पिछले दो चरण में लगातार सिल्वर मेडल हासिल किए, इसके अलावा उनके नाम दो ब्रॉन्ज मेडल भी हैं। हैदराबादी खिलाड़ी ने 40 मिनट तक चले सेमीफाइनल में चीन की दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी चेन यु फेइ को 21-7, 21-14 से शिकस्त दी।
चौबीस साल की इस भारतीय खिलाड़ी को खिताब के लिए जापान की नाओमी ओकुहारा से भिड़ेगी। ओकुहारा ने थाइलैंड की 2013 की वल्र्ड चैंपियन रतचानोक इंतानोन को 17-21, 21-18, 21-15 से सेमीफाइनल में शिकस्त दी। साल 2017 में इस टूर्नमेंट के फाइनल में सिंधु और ओकुहारा के बीच खिताबी टक्कर हो चुकी है। एक घंटे 50 मिनट तक चले उस मैराथन भिड़ंत में ओकुहारा ने बाजी मारी थी। 
शनिवार के सिंधु ने सेमीफाइनल चीन की चेन यू फेइ को सीधे गेम में मात देने के बाद कहा, मैं खुश हूं कि मैं चीन की खिलाडिय़ों को हराने में कामयाब हो पा रही हूं। दरअसल, महिला एकल वर्ग में जो शीर्ष 15 खिलाड़ी हैं उनका स्तर एकसमान है। हर खिलाड़ी का अपना खेलने का तरीका होता है, खासकर चीनी खिलाडिय़ों के खिलाफ हमें बहुत तैयारी के साथ जाना होता है।
सिंधु ने कहा, चेन यू फेइ आपको चकमा दे सकती हैं और उनके पास बेहतरीन स्ट्रोक्स भी हैं। वह शानदार फॉर्म में चल रही हैं, इसलिए मैं बहुत अच्छी तैयारी के साथ मुकाबले में उतरी थी। आजकल ऐसा हो गया कि हम हर टूर्नामेंट में एक-दूसरे का सामना कर रहे हैं, इसलिए हमें सभी का गेम पता है। आप एक स्पष्ट रणनीति के साथ कोर्ट पर नहीं उतर सकते, आपको मौके के मुताबिक रणनीति बनाकर खेलना होता है।
सिंधु ने कहा, मैं बहुत खुश हूं, लेकिन फाइनल अभी बाकी है। फाइनल मुकाबला आसान नहीं होगा, लेकिन मुझे अच्छी तैयारी करनी होगी। हर मैच में आपको मानसिक रूप से तैयार होकर उतरना होता है और मैं ऐसा ही करूंगी।(एजेंसियां)
 


Date : 25-Aug-2019

एंटिगा, 25 अगस्त। भारतीय टेस्ट टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे का बल्ला वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट में जमकर रन उगल रहा है। पहली पारी में 81 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को 297 रन के स्कोर तक पहुंचाने वाले रहाणे ने दूसरी पारी में भी शामदार प्रदर्शन करते हुए अर्धशतक जड़ दिया। शनिवार को एंटिगा टेस्ट के तीसरे दिन कैरेबियाई टीम को पहली पारी में 222 रन पर ढेर करने के बाद टीम इंडिया ने 81 रन के स्कोर पर तीन विकेट गंवा दिए थे। ऐसे में बल्लेबाजी करने उतरे रहाणे ने कप्तान विराट के साथ शानदार साझेदारी कर दिन का खेल खत्म होने तक भारत को 185/3 रन के स्कोर तक पहुंचा दिया। 
पहली पारी के फॉर्म को दूसरी पारी में बरकरार रखते हुए रहाणे ने पहले तो विराट कोहली के साथ 124 गेंद में अर्धशतकीय साझेदारी पूरी की और टीम इंडिया को 100 रन के पार पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने अपने जाने पहचाने अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 19 वां अर्धशतक पूरा किया। रहाणे ने टेस्ट करियर में एक मैच की दोनों पारियों में चौथी बार अर्धशतक जडऩे का कारनामा कर दिखाया। विदेशी सरजमीं पर ऐसा उन्होंने साल 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ साउथैम्पटन में जबकि घर पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2015 में दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर किया था। इसके बाद उनके बल्ले से ऐसा प्रदर्शन देखने को नहीं मिला था। 
रहाणे ने अपनी दो अर्धशतकीय पारियों के साथ एक बार फिर ये साबित कर दिया कि विदेशी सरजमीं पर उनका कोई सानी नहीं है। वो विदेशी सरजमीं पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। रहाणे अब तक टेस्ट करियर में खेले 57 मैच की 97 पारियों में 41.63 की औसत से 3622 रन बनाए हैं। जिसमें 9 शतक और 19 अर्धशतक शामिल हैं। इनमें से 35 टेस्ट विदेशी सरजमीं पर खेलते हुए उन्होंने 45.96 की औसत से 2482 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 15 अर्धशतक घर के बाहर आए हैं।
रहाणे के एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक 
बनाम दक्षिण अफ्रीका, डरबन 2013
बनाम इंग्लैंड, साउथैम्पटन 2014
बनाम दक्षिण अफ्रीका, दिल्ली 2015
बनाम वेस्टइंडीज, नॉर्थ साउंड एंटिगा 2019  (टाईम्स नाऊ)


Date : 24-Aug-2019

बेंगलुरू, 24 अगस्त ।  आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलने वाले ऑलराउंडर कृष्णप्पा गौतम ने शुक्रवार को गेंद और बल्ले दोनों से धमाकेदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच में ऐसा डबल धमाल किया जिसे टी-20 इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कहा जा सकता है। बावजूद इसके गौतम को विश्व क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक्स में जगह नहीं मिल सकी। गौतम ने एक ही मैच में पहले तो बल्लेबाजी करते हुए 56 गेंद में 134 रन की नाबाद पारी खेली। इसके बाद गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 15 रन देकर 8 विकेट भी झटके और 2 कैच भी लपके। उनके इस प्रदर्शन को करिश्मा ही कहा जा सकता है। कुल मिलाकर ऐसा लग रहा था कि गौतम शिवमोग्गा लॉयंस के खिलाफ अकेले मैच खेल रहे थे।

39 गेंद में जड़ा शतक -कर्नाटक प्रीमियर लीग में बेल्लारी टस्कर्स के लिए खेलते हुए कृष्णप्पा गौतम ने शिवमोग्गा लॉयंस के खिलाफ ये धमाका किया। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान पहले तो 39 गेंद में शानदार शतक जड़ा। ये केपीएल इतिहास का सबसे तेज शतक रहा। इसके बाद इस पारी को आगे बढ़ाते हुए वह अंत में 59 गेंद में नाबाद 134* रन बनाकर नाबाद रहे। जो कि केपीएल इतिहास की सबसे बड़ी पारी भी है।
पारी में जड़े 13 छक्के-इस पारी के दौरान गौतम का स्ट्राइक रेट 239.29 का रहा। उन्होंने पारी में 7 चौके और 13 छक्के जड़े। इसके साथ ही केपीएल के एक मैच में सबसे ज्यादा छक्के जडऩे का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हो गया। उन्होंने बाउंड्री के जरिए कुल 106 रन जोड़े। यह भी केपीएल में एक रिकॉर्ड है। उनकी इस शानदार शतकीय पारी की बदौलत बेल्लारी की टीम ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 203 रन का स्कोर खड़ा किया।
4 ओवर में झटके 8 विकेट-इसके बाद 203 रन के लक्ष्य का बचाव करने उतरी बेल्लारी टस्कर्स के लिए जब गौतम गेंदबाजी करने उतरे तो उन्होंने बल्ले के बाद गेंद से भी नया इतिहास रच दिया। गौतम ने 4 ओवर के अपने स्पेल में 15 रन देकर 8 विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने हैट्रिक भी ली। अपने इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत गौतम अपनी टीम को 70 रन के अंतर से जीत दिलाने में भी सफल रहे। शिवमोग्गा लॉयंस  की टीम 16.3 ओवर में 133 रन बनाकर ढेर हो गई। 
ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद नहीं मिली रिकॉर्ड बुक्स में जगह -इससे पहले कोई एक खिलाड़ी एक टी-20 मैच में ऐसा रिकॉर्डतोड़ ऑलराउंड प्रदर्शन नहीं कर सका । इस धमाकेदार प्रदर्शन के बावजूद भी गौतम के इस प्रदर्शन को टी-20 रिकॉर्ड्स में जगह नहीं मिल पाएगी। क्योंकि राज्य की टी-20 लीग्स को आधिकारिक तौर पर टी-20 मैच का दर्जा नहीं मिला है। इसलिए उनके इस प्रदर्शन को अन्य टी-20 लीग में शामिल किया जाएगा। अगस्त की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी कॉलिन एकरमेन टी-20 के इतिहास में एक मैच में सात विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने थे। गौतम के इस अद्भुत प्रदर्शन के बाद भी उनका रिकॉर्ड कायम रहेगा। (टाईम्स नाऊ)


Date : 24-Aug-2019

नार्थ साउंड (एंटीगा), 24 अगस्त । जसप्रीत बुमराह सबसे कम मैचों में 50 टेस्ट विकेट हासिल करने वाले तेज भारतीय गेंदबाज बने। बुमराह ने डेरेन ब्रावो (18) को पगबाधा आउट करके अपना 50वां विकेट लिया। यह उनका 11वां टेस्ट मैच है और इस तरह से उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजों में इस मुकाम पर सबसे तेज पहुंचने के वेंकटेश प्रसाद और मोहम्मद शमी (दोनों 13 टेस्ट मैच) के पिछले रेकार्ड को तोड़ दिया है। 
भारत की ओर से इशांत शर्मा ने 42 रन देकर विंडीज के पांच बल्लेबाजों को पविलियन की राह दिखाई है। दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक वेस्ट इंडीज ने 8 विकेट पर 189 रन बना लिए थे और वह भारत से 108 रन पीछे है। 
भारत की तरफ से सबसे कम मैचों में 50 विकेट लेने का रेकार्ड अब भी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (नौ मैच) के नाम पर है। उनके बाद लेग स्पिनर अनिल कुंबले (दस मैच) तथा नरेंद्र हिरवानी, ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और बुमराह (तीनों 11 मैच) का नंबर आता है। (नवभारत टाईम्स)

 


Date : 23-Aug-2019

एंटीगा, 23 अगस्त । अजिंक्य रहाणे जब बल्लेबाजी करने आए उस समय भारत का स्कोर तीन विकेट पर 25 रन था। वेस्ट इंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में उनकी टीम संकट में थी। ऐसे समय पर उन्होंने 81 रनों की पारी खेलकर टीम को मुश्किल से निकाला। रहाणे भले ही शतक नहीं बना पाए लेकिन टीम के लिए उपयोगी पारी खेलने की उन्हें खुशी है। दो साल पहले रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में सेंचुरी लगाई थी लेकिन गुरुवार को उससे चूकने को लेकर उन्हें मलाल नहीं है। रहाणे का कहना है कि वह स्वार्थी नहीं हैं। 

रहाणे जानते थे कि शतक से चूकने का सवाल उनसे जरूर पूछा जाएगा। उन्होंने अपना आखिरी शतक श्रीलंका के खिलाफ 2017 में बनाया था। दिन का खेल समाप्त होने तक भारत का स्कोर छह विकेट पर 203 रन था। रहाणे ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, जब तक मैं क्रीज पर होता हूं तब तक सिर्फ टीम के बारे में सोचता हूं, मैं स्वार्थी नहीं हूं। तो हां, मुझे शतक से चूकने का कोई दुख नहीं है क्योंकि मुझे लगता है कि इस विकेट पर 81 रनों की पारी भी काफी थी और हम अब इस टेस्ट में ठीकठाक पोजिशन पर हैं। 
शतक बनाना अच्छा होता लेकिन परिस्थिति के अनुसार खेलना ज्यादा मायने रखता है। रहाणे ने कहा, जब तक मैं टीम के लिए योगदान कर कर रहा हूं यह ज्यादा मायने रखता है। हां, मैं अपने शतक के बारे में सोच रहा था लेकिन जिस परिस्थिति- 25 रन पर तीन विकेट- जरा मुश्किल थी। और जैसा मैंने कहा, मैं सिर्फ टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहता था। मैं अपने शतक के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं था क्योंकि परिस्थिति के अनुसार खेलते हुए अपने आप बन जाता।
31 वर्षीय इस बल्लेबाज ने कुछ महीने इंग्लिश काउंटी हैम्पशर के लिए क्रिकेट खेला। उन्होंने काउंटी के लिए सात मैच खेलते हुए एक शतक और एक हाफ सेंचुरी लगाईं। मुंबई के इस बल्लेबाज को लगता है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्या काउंटी में खेलने का उन्हें फायदा मिला है अथवा नहीं लेकिन बेशक इससे कुछ अच्छी बैटिंग प्रैक्टिस मिल गई। 
रहाणे ने कहा, देखिए, काउंटी के लिए खेलना महत्वपूर्ण होता है। जब मेरा चयन विश्व कप की टीम के लिए नहीं हुआ तब मैंने काउंटी के लिए खेलने का फैसला किया। मैं उन दो महीनों को इस्तेमाल करना चाहता था और इस दौरान मैंने सात काउंटी मैच खेले। मैं अपनी बल्लेबाजी के कुछ क्षेत्रों पर काम करना चाहता था। 
रहाणे ने गेंद को शरीर के करीब खेलने की तकनीक पर काम किया। इससे सीमिंग विकेट पर उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला। उन्होंने कहा, जब आप इंग्लैंड में ड्यूक बॉल से खेलते हैं तो आपको शरीर के नजदीक खेलना पड़ता है। मैं नंबर तीन पर बल्लेबाजी कर रहा था और किस्मत से मुझे नई गेंद खेलने को मिल रही थी। उन दो महीनों का मैंने बहुत अच्छा इस्तेमाल किया लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि काउंटी में खेलने का मुझे क्या फायदा हुआ। लेकिन वहां जाकर थोड़ी प्रैक्टिस करना मेरे लिए अच्छा रहा। 
मैच के नजरिये से देखें तो रहाणे और केएल राहुल के बीच हुई 68 रनों की साझेदारी काफी महत्वपूर्ण रही। रहाणे ने कहा, उन परिस्थितियों में सकारात्मक रहना बहुत जरूरी था। पूरे दिन उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। उन हालात में राहुल के साथ साझेदारी बहुत जरूरी थी। हम बहुत आगे की नहीं सोच रहे थे। हमारा लक्ष्य सिर्फ एक गेंद के बारे में सोचकर खेलना था। (नवभारत टाईम्स)

 


Date : 23-Aug-2019

तरुण वर्मा
नई दिल्ली, 23 अगस्त । बल्लेबाजी कोच के रूप में राठौर संजय बांगड़ की जगह ले सकते हैं।बल्लेबाजी कोच के लिए मार्क रामप्रकाश भी शॉर्टलिस्ट किए गए हैं।विक्रम राठौड़ ने अपने करियर में 6 टेस्ट और 7 वनडे मैच खेले हैं।
एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय सीनियर चयन समिति ने विक्रम राठौड़ को भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाजी कोच के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज राठौड़ अब संजय बांगड़ की जगह ले सकते हैं जबकि भरत अरुण और आर। श्रीधर का अपने पद पर बने रहना लगभग तय है।
बल्लेबाजी कोच पद के लिए राठौड़ के अलावा मार्क रामप्रकाश भी शॉर्ट लिस्ट किए गए हैं, लेकिन राठौड़ पहली पसंद माने जा रहे हैं। पचास वर्षीय विक्रम राठौड़ ने 1996 से 1997 के बीच भारत के लिए 6 टेस्ट और 7 वनडे मैच खेले हैं। राठौड़ ने 7 वनडे मैचों में 193 रन और 6 टेस्ट मैचों में 131 रन बनाए थे।
कुल मिलाकर विक्रम राठौड़ को 13 इंटरनेशनल मैचों का अनुभव है। ऐसे में अगर वह टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच बनते हैं तो वह विराट और रोहित जैसे खिलाडिय़ों को बैटिंग के गुर सिखाएंगे। विराट कोहली की बात करें तो वह 387 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं, जबकि रोहित शर्मा खुद 341 इंटरनेशनल मैचों का अनुभव रखते हैं।
विक्रम राठौड़ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 146 मैचों में 49।66 की औसत से 11473 रन बनाए हैं। लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 99 मैच खेलते हुए तकरीबन 3000 रन बनाए। साल 2003 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लिया था। पंजाब के इस पूर्व खिलाड़ी ने कुछ समय तक ओडिशा में वाइजैग विक्टर्स टीम की कोचिंग भी की थी।
विक्रम राठौड़ कुछ साल पहले 2016 तक संदीप पाटिल की अगुवाई वाली सीनियर चयन समिति के सदस्य थे। राठौड़ ने इससे पहले एनसीए बल्लेबाजी सलाहकार और अंडर-19 बल्लेबाजी कोच पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका आवेदन रोककर रखा गया था क्योंकि उनके रिश्तेदार आशीष कपूर अंडर-19 चयन समिति के अध्यक्ष हैं।
चयन समिति ने अपने बीसीसीआई मुख्यालय में टीम का सपोर्ट स्टाफ चुनने के लिए उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया। एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय सीनियर चयन समिति में प्रसाद के अलावा, शरणदीप सिंह, गगन खोड़ा और जतिन परांजपे शामिल थे, जबकि देवांग गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये इसमें हिस्सा लिया।
समिति ने बल्लेबाजी कोच पद के लिए 14 उम्मीदवारों, गेंदबाजी कोच के लिए 12, फील्डिंग कोच के लिए 9, फिजियोथेरेपिस्ट पद के लिए 16, स्ट्रेंथ और कंडिशनिंग कोच पद के लिए 12 और एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजर पद के लिए 24 उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया।
चार दिवसीय यह साक्षात्कार सोमवार को शुरू हुआ और यह गुरुवार तक चला। चयन समिति ने गेंदबाजी कोच के लिए अरुण के अलावा पारस म्हाम्ब्रे और वेंकटेश प्रसाद को शॉर्टलिस्ट किया है, लेकिन माना जा रहा है कि अरुण अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा फील्डिंग कोच के लिए श्रीधर के अलावा अभय शर्मा और टी। दिलीप के नामों की शॉर्टलिस्ट किया गया है, लेकिन यहां भी श्रीधर के अपने पद पर बने रहने की उम्मीद है।
अरुण का गेंदबाजी कोच बने रहना पहले से ही तय था। वहीं फील्डिंग कोच आर। श्रीधर के भी टीम के साथ बने रहने की संभावनाएं थी। पूर्व बल्लेबाज प्रवीण आमरे ने भी बल्लेबाजी कोच के लिए आवेदन दिया था, लेकिन राठौड़ चयनकर्ताओं की पहली पसंद माने जा रहे हैं।(आज तक)

 

 


Date : 23-Aug-2019

नई दिल्ली, 23 अगस्त। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में कप्तान विराट कोहली ने स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा को प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया। रोहित शर्मा के प्लेइंग इलेवन में ना होने से प्रशंसक काफी नाराज हुए।
इस मैच में विराट कोहली ने रोहित शर्मा को मौका नहीं दिया तो ट्विटर पर फैंस ने कोहली को जमकर लताड़ लगाई है। 
कप्तान कोहली के इस फैसले के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या आपसी मतभेद के चलते विराट ने रोहित को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा। बता दें कि रोहित शर्मा शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। फैंस का कहना है कि कोहली रोहित से जलते हैं और वह उनसे बदला लेना चाहते हैं। रोहित शर्मा ने टेस्ट सीरीज से पहले खेले गए प्रैक्टिस मैच में शानदार 68 रन बनाए थे। रोहित के इस प्रदर्शन को नजरअंदाज करते हुए विराट ने उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया।
कप्तान विराट कोहली ने रोहित शर्मा की जगह हनुमा विहारी को प्राथमिकता दी है। भारतीय कप्तान के इस फैसले से प्रशंसक काफी नाराज लग रहे हैं। वल्र्ड कप 2019 सेमीफाइनल में हार के बाद से ही रोहित और विराट के बीच आपसी मतभेद की खबरें सामने आई थीं।
वेस्टइंडीज दौरे के लिए रवाना होने से पहले विराट कोहली ने साफ किया था कि टीम इंडिया में अगर ऐसा कुछ होता तो हम नबर वन टीम नहीं होते। विराट कोहली ने पत्रकारों को टीम के ड्रेसिंग रूम में आने को भी कहा था। कोहली के मुताबिक अगर रोहित और उनके बीच ऐसा झगड़ा होता तो टीम कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती। 
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने रोहित शर्मा से पहले युवा हनुमा विहारी को प्राथमिकता दी है। भारतीय कप्तान के इस फैसले से प्रशंसक काफी नाराज लग रहे हैं और ट्विटर पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का मानना है कि रोहित शर्मा को वनडे की तरह टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभानी चाहिए। रोहित भारत की टेस्ट टीम में अजिंक्य रहाणे के साथ मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हैं और गांगुली का कहना है कि यह बहुत जरूरी है कि रोहित इंग्लैंड एंड वेल्स में हुए विश्व कप के अपने शानदार फॉर्म को जारी रखें। (आज तक)

 

 


Date : 23-Aug-2019

लीड्स, 23 अगस्त । क्रिकेट इतिहास की सबसे पुरानी प्रतिद्वंद्विता एशेज सीरीज के नाम से जानी जाती रही है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच की ये टक्कर दशकों से जारी है और आज भी दोनों देशों के खिलाड़ी इस सीरीज को अपने करियर में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। इन दिनों ये टक्कर जारी है और इस बार एक खिलाड़ी ने अपना खास सपना पूरा कर लिया है। नाम है- जोफ्रा आर्चर। इस ऑलराउंडर ने लीड्स में शुरू हुए तीसरे एशेज टेस्ट के पहले दिन गेंद से ऐसा धमाल मचाया कि ऑस्ट्रेलियाई टीम बेहाल हो गई।
लीड्स (हेडिंग्ले) में गुरुवार को शुरू हुए तीसरे एशेज टेस्ट में इंग्लैंड की टीम पहले गेंदबाजी करने उतरी थी। पहले मैच में अपनी रफ्तार से विकेटों के साथ-साथ स्टीव स्मिथ को घायल करने के लिए चर्चा में रहे जोफ्रा आर्चर ने गुरुवार को कहर ढा दिया। उन्होंने पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के 6 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। आर्चर ने 17.1 ओवर किए जिस दौरान उन्होंने कुल 45 रन लुटाते हुए 6 विकेट झटके। इस दौरान आर्चर ने तीन मेडन ओवर भी किए। आर्चर की गेंदों का शिकार ये खिलाड़ी बने- डेविड वॉर्नर, मार्कस हैरिस, मैथ्यू वेड, जेम्स पैटिंसन, पैट कमिंस और नाथन ल्योन।
जोफ्रा आर्चर ने 10 दिन पहले लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान अपनी एक इच्छा जाहिर की थी। ट्विटर पर काफी एक्टिव रहने वाले इस दिग्गज ने लिखा था कि मैं हॉनर्स बोर्ड पर अपना नाम चाहता हूं। जाहिर है कि क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स के हॉनर्स बोर्ड पर उन सभी दिग्गजों के नाम मौजूद हैं जिन्होंने यहां किसी भी मैच या पारी में खास कमाल किया है। जोफ्रा आर्चर लॉर्ड्स के हॉनर्स बोर्ड पर तो अपना नाम लिखवाने से इस बार चूक गए लेकिन लीड्स के मैदान के बोर्ड पर उनका नाम अब जरूर दर्ज हो जाएगा।
जोफ्रा आर्चर जिस रफ्तार से लगातार गेंदें फेंक रहे हैं, उसी रफ्तार से उनका करियर सभी अड़चनें पार करता हुआ आगे बढ़ा है। उनका जन्म वेस्टइंडीज में हुआ था, वो अंडर-19 क्रिकेट भी वेस्टइंडीज की तरफ से ही खेले। उनके पिता इंग्लैंड से थे और मां वेस्टइंडीज से। वो अपने पिता के जरिए इंग्लैंड के नागरिक तो बन गए लेकिन इंग्लिश टीम से खेलने के लिए वहां के नियम को पूरा करन था, जो कि इंग्लैंड में कम से कम 7 साल रहने के बाद ही पूरा होता था। खैर, आर्चर की किस्मत बुलंद थी, ईसीबी ने अपने नियम बदल दिए, आर्चर की विश्व कप से ठीक पहले इंग्लैंड टीम में एंट्री हुई, वो विश्व कप में खेले भी और जमकर धमाल मचाया। उन्होंने विश्व कप 2019 के 11 मैचों में 20 विकेट लिए। वो सूची में तीसरे नंबर पर रहे और एक विश्व कप में किसी इंग्लिश खिलाड़ी द्वारा सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भी तोड़ डाला जो कि महान इयन बॉथम के नाम दर्ज था। अब आर्चर क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में अपने करियर को रफ्तार दे रहे हैं। वो भी क्या खूब अंदाज में।(टाईम्स नाऊ)
 


Date : 22-Aug-2019

नॉर्थ साउंड, 22 अगस्त। भारतीय टीम पहली विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के शुरूआती मुकाबले में गुरुवार को जब वेस्टइंडीज के सामने उतरेगी तो कप्तान विराट कोहली सटीक टीम संयोजन को लेकर जीत के साथ आगाज करना चाहेंगे। भारत अगर यह मैच जीतता है तो बतौर कप्तान कोहली की 27वीं टेस्ट जीत होगी और वह महेंद्र सिंह धोनी की बराबरी कर लेंगे। इस मैच में शतक जमाने पर वह बतौर कप्तान 19 टेस्ट शतक के रिकी पॉटिंग के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे।
कोहली, चेतेश्वर पुजारा, केएल राहुल और रोहित शर्मा के रहते भारतीय टीम कागजों पर मजबूत लग रही है लेकिन जेसन होल्डर की अगुवाई वाली कैरेबियाई टीम को हलके में नहीं लिया जा सकता। इंग्लैंड को इसका अनुभव हो चुका है जिसे इस साल की शुरूआत में वेस्टइंडीज की जीवंत पिचों पर 1-2 से पराजय झेलनी पड़ी। एंटीगा के सर विवियन रिचडर्स स्टेडियम की विकेट भी तेज गेंदबाजों के लिए मददगार है।
 कोहली ने पहली विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के बारे में कहा, 'लोग ऐसी बातें कर रहे हैं कि टेस्ट क्रिकेट प्रासंगिक नहीं रह गया है या खत्म हो रहा है। मेरा तो यह मानना है कि प्रतिस्पर्धा दुगुनी बढ़ गई है। खिलाडिय़ों को चुनौती का सामना करके जीत का प्रयास करना चाहिये। उन्होंने कहा, अब मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी होंगे और टेस्ट मैच रोमांचक हो जायेंगे। यह सही समय पर लिया गया सही फैसला है।
यहां पिछले टेस्ट में इंग्लैंड की टीम 187 और 132 रन पर आउट हो गई थी लेकिन वह दूसरा समय था। कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री की चिंता का सबब केमर रोच और शेनोन गैब्रियल से मिलने वाली नयी गेंद की चुनौती होगा। पिच में गति और उछाल होने पर कोहली चार विशेषज्ञ गेंदबाजों को लेकर उतर सकते हैं। ऐसे में आर अश्विन और कुलदीप यादव के बीच एकमात्र स्पिनर की जगह के लिये होड़ होगी। तीन तेज गेंदबाजों की जगह जसप्रीत बुमराह, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी लेंगे। 
बल्लेबाजी संयोजन दुरूस्त करना कोहली के लिए माथापच्ची का काम होगा। हार्दिक पंड्या उपलब्ध होते तो कोहली ऐसी स्थिति में रोहित या अजिंक्य रहाणे में से एक को बाहर रख सकते थे। वैसे टेस्ट क्रिकेट में वेस्टइंडीज के हालिया रिकॉर्ड को देखते हुए वह अतिरिक्त बल्लेबाज को लेकर उतर सकते हैं। हरी भरी पिच होने पर कोहली पांच गेंदबाजों को भी उतार सकते हैं जिसके मायने हैं कि मुंबई के दोनों बल्लेबाजों में से एक का चयन होगा और रविंद्र जडेजा हरफनमौला के रूप में खेलेंगे।
यह भी देखना होगा कि मयंक अग्रवाल के साथ पारी का आगाज कौन करता है। के एल राहुल विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया में हनुमा विहारी को उतारा गया। अब कमोबेश आसान तेज आक्रमण के सामने उसे मौका नहीं देना ज्यादती होगी। 
वेस्टइंडीज के पास शाई होप, जॉन कैंपबेल और शेमरॉन हेटमायर के रूप में तीन प्रतिभाशाली युवा हैं। भारत के खिलाफ 2016 की श्रृंखला के दौरान चेस ने पूरा दिन अश्विन को छकाया था जब वेस्टइंडीज पारी की हार की कगार पर था। डेरेन ब्रावो 52 टेस्ट में 3500 रन बना चुके हैं।
दोनों टीमें इस प्रकार हैं -
भारत - विराट कोहली (कप्तान), मयंक अग्रवाल, केएल राहुल, चेतेश्वर पुजारा, हनुमा विहारी, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, रिषभ पंत, कुलदीप यादव, रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, रिद्धिमान साहा।
वेस्टइंडीज - जेसन होल्डर (कप्तान) क्रेग ब्रेथवेट, डेरेन ब्रावो, शामार ब्रूक्स, जॉन कैंपबेल, रोस्टन चेस, रकहीम कार्नवाल, शेन डॉउरिच, शेनन गैब्रियल, शेमरॉन हेटमायर, शाइ होप, कीमो पॉल, केमर रोच।  (भाषा)

 


Date : 22-Aug-2019

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजनांदगांव, 22 अगस्त। राजनांदगांव द्वारा आयोजित की जा रही 3री स्व. प्रभाकर वर्मा हॉकी प्रतियोगिता में बुधवार को दो सेमीफाइनल मैच खेला जिसमे पहला सेमीफाइनल स्मार्ट हॉकी अकादमी विरुद्ध हॉकी दुर्ग के मध्य खेला गया। 
दोनों टीमों के मध्य रोमांचकारी मैच दर्शकों को देखने को मिला किन्तु मैच के 8वें मिनट में स्मार्ट हॉकी अकादमी रायपुर के अमीद खान ने गोल कर 0 के मुकाबले के गोल की बढ़त बना ली जिसके एवज में हॉकी दुर्ग ने कई प्रयास किए किन्तु उन्हें किसी भी प्रकार की कोई सफलता हासिल नहीं मिल पाई लगातार गोल करने के प्रयास में लगी रही। हॉकी दुर्ग को मैच के 55 वें मिनट में पेनल्टी कार्नर मिला जिसे हॉकी दुर्ग के गोलू ने गोल कर 1-1 की बराबरी पर ला दिया निर्धारित टाइम में दोनों ही टीम 1-1 की बराबरी रही और इस मैच का फैसला शूट आउट से किया गया जिसमें भी दोनों टीमो के बीच रोमाच से भरा रहा और यह मैच स्मार्ट हॉकी अकादमी ने 3 के मुकाबले 4 गोल से जीत दर्ज कर फाइनल में अपना स्थान पक्का किया।
दूसरा सेमीफाइनल पैंथर्स क्लब राजनांदगांव विरुद्ध यूथ क्लब राजनांदगांव के मध्य खेला जिसमे पैंथर्स क्लब राजनांदगांव ने अच्छे खेल का प्रदर्शन करते हुए मैच के 14वें मिनट में सुखदेव निर्मलकर ने गोल किया व मैच के 17वें मिनट में मनीष यादव ने गोल का 0 के मुकाबले 2 गोल की बढ़त बना ली थी मैच के मध्यंतर तक स्कोर 2.0 ही रही मैच के मध्यांतर के बाद पैंथर्स क्लब ने मैच के 32 वे ं मिनट में मनीष यादव मैच के 38वें मिनट म सुखदेव निर्मलकर व मैच के 42 वे मिनट फिर से मनीष यादव ने गोल कर 0 के मुकाबले 5 गोल की बढ़त बना ली थी जिसके एवज में मैच के 44वें मिनट में यूथ क्लब के नवीन यादव ने गोल किया और यह मैच पैंथर्स क्लब राजनांदगांव ने 1 के मुकाबले 5 गोल जीत दर्ज कर फाइनल में अपना स्थान पक्का किया।
मैच के निर्णायक किशोर धीवर, अभिनव मिश्रा, दिलीप रावत तथा तकनीकी अधिकारी के रूप में कृष्णा कुमार यादव, एमण्रवि रॉव उपस्थित थे।
सेमीफाइनल में प्रमुख रूप से वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी कुतुबुदिन सोलंकी, रायपुर के वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी नाजिर अहमद,  छत्तीसगढ़ हॉकी के अध्यक्ष एरिो? अंसारी, कोतवाली थाना के टी.आई.एलेक्सजेंडर कीरो, हॉकी कोच भूषण सॉव, राजकुमार साहू, संजू पटेल, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।