खेल

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20-Jun-2021 2:37 PM (8)

 

नई दिल्ली. महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का जलवा संन्यास के 8 साल भी कायम है. लिटिल मास्टर तेंदुलकर को 21वीं सदी का सबसे महान टेस्ट बल्लेबाज चुना गया है. मास्टर ब्लास्टर को श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी कुमार संगकारा से कड़ी टक्कर मिली. सचिन और संगकारा को बराबर अंक मिले थे लेकिन ज्यूरी के सदस्यों भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में ज्यादा वोट किया. भारत और न्यूजीलैंड के बीच जारी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के आधिकारिक प्रसारणकर्ता स्टार स्पोर्ट्स ने इसकी घोषणा शनिवार की. स्टार स्पोर्ट्स ने डब्ल्यूटीसी फाइनल से पहले टेस्ट क्रिकेट में 21वीं सदी का सबसे महान खिलाड़ी चुनने की एक अनूठी पहल की थी.

स्टार स्पोर्ट्स की ओर से बल्लेबाज, गेंदबाज, ऑलराउंडर और कप्तान चार श्रेणियों में एक खिलाड़ी को चुना जाएगा. बल्लेबाज कैटेगरी में सचिन तेंदुलकर, स्टीवन स्मिथ, कुमार संगकारा और जैक कैलिस शामिल थे. गेंदबाजी में मुथैया मुरलीधरन, शेन वॉर्न, डेल स्टेन और ग्लेन मैक्ग्रा का नाम है. ऑलराउंडर श्रेणी में जैक कैलिस, बेन स्टोक्स, एंड्रयू फ्लिंटॉफ और रविचंद्रन अश्विन में से किसी एक को चुना जाएगा. कप्तान श्रेणी में स्टीव वॉ, ग्रीम स्मिथ, रिकी पोंटिंग और विराट कोहली को नामित किया गया है. स्टार स्पोर्ट्स ने इसके लिए 50 सदस्यीय ज्यूरी भी गठित की है.

ज्यूरी में सुनील गावस्कर, इयान बिशप, हरभजन सिंह, शेन वॉटसन, स्कॉट स्टाइरिस, गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ दुनिया भर के वरिष्ठ खेल पत्रकार, विश्लेषक और एंकर भी शामिल हैं.

इंटरनेशनल क्रिकेट में सचिन के नाम ढेरों रिकॉर्ड दर्ज है. इस बल्लेबाज ने 200 टेस्ट मैच में 51 शतक की बदौलत 15921 रन बनाए हैं. वह क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. सचिन के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक दर्ज है. वहीं टेस्ट क्रिकेट में 45 शतकों के साथ जैक कैलिस 13289 रन बनाकर तीसरे नंबर पर है. 38 शतक जड़ने वाले कुमार संगकारा ने 134 टेस्ट मैचों में 12400 रन बनाए हैं.

सचिन तेंदुलकर ने 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. उन्होंने मात्र 17 साल 107 दिन की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में अपना पहला शतक जड़ा था. साल 2002 में विजडन पत्रिका ने उन्हें डॉन ब्रैडमैन के बाद सबसे बेहतरीन टेस्ट बल्लेबाज और विवियन रिचर्ड्स के बाद सबसे बढ़िया वनडे बल्लेबाज चुना था.(news18.com)


20-Jun-2021 2:25 PM (14)

 

नई दिल्ली. भारत और न्यूजीलैंड के बीच साउथैम्पटन में विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल खेला जा रहा है. पहला दिन बारिश में धुलने के बाद दूसरे दिन न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाजी का न्यौता दिया. तेज गेंदबाजों के अनुकूल विकेट और कंडीशंस पर दोनों भारतीय ओपनर शुभमन गिल और रोहित शर्मा ने शानदार शुरुआत की. दोनों ने पहले विकेट के लिए 62 रन जोड़े. शुभमन भले ही 28 रन बनाकर निल वैगनर की गेंद पर आउट हो गए. लेकिन उन्होंने जिस अंदाज में शॉर्ट और स्विंग होती गेंदों का सामना किया, उससे पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर काफी खुश हैं.

गावस्कर ने गिल की खेल की समझ और मिजाज की तारीफ की. उन्होंने कहा कि गिल के पास बड़ा खिलाड़ी बनने के सभी गुण मौजूद हैं.

गावस्कर ने स्टार स्पोर्ट्स पर कॉमेंट्री के दौरान कहा कि सिर्फ पहले शतक की बात है, अगर गिल ऐसा करने में सफल हो जाते हैं, तो फिर आगे वो भारत के लिए कई शतक लगा सकते हैं. इस पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि किसी भी बल्लेबाज के लिए पहला शतक हमेशा मुश्किल होता है. क्योंकि अर्धशतक से लेकर तीन अंकों के आंकड़े तक पहुंचने का सफर आसान नहीं होता है. बल्लेबाज 70-80 रन बनाने के बाद ऐसा समझता है कि उसकी आंखें पूरी तरह जम गई. इसके बाद बल्लेबाजों के खिलाफ शॉट्स खेलना शुरू कर देता है. कई बार इसी चक्कर में अपना विकेट गंवा देता है. शुभमन को बस एक शतक की दरकार है, इसके बाद तो उन्हें रोकना आसान नहीं.

गिल-रोहित को शॉर्ट गेंदों से नहीं डराया जा सकता: हुसैन
रोहित और शुभमन ने जिस तरह से न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों के खिलाफ पारी की शुरुआत की. उसकी सिर्फ गावस्कर ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर ने भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि मुझे याद नहीं इन दोनों से पहले कब किसी भारतीय ओपनिंग जोड़ी ने शॉर्ट गेंदों को इतने बेहतर ढंग से खेला हो. इन दोनों को शॉर्ट गेंदों से डराया नहीं जा सकता है. ये तकनीकी रूप से काफी मजबूत हैं. विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के बाद भारत को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलनी है. ऐसे में गिल के लिए ये पारी आत्मविश्वास बढ़ाने वाली होगी.

गिल ने टेस्ट में तीन अर्धशतक लगाए हैं
बता दें कि 21 साल के गिल ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट में डेब्यू किया था. उन्होंने इस टेस्ट की पहली पारी में 45 और दूसरी में 35 रन बनाकर अपनी छाप छोड़ी थी. इसी दौरे पर हुए ब्रिसबेन टेस्ट की दूसरी पारी में गिल ने 91 रन बनाए थे और टीम की जीत की नींव रखी थी. गिल ने अब तक 7 टेस्ट में 378 रन बनाए हैं. वो अब तक तीन अर्धशतक लगा चुके हैं. (news18.com)


20-Jun-2021 2:25 PM (14)

 

नई दिल्‍ली. भारतीय कप्‍तान विराट कोहली को टेस्‍ट क्रिकेट में आज यानी 20 जून को 10 साल पूरे हो गए हैं. कोहली इस समय इंग्‍लैंड दौरे पर है और न्‍यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्‍ड टेस्‍ट चैंपियनशिप के ऐतिहासिक फाइनल में बिजी हैं. उनकी नजर बतौर कप्‍तान पहली आईसीसी ट्रॉफी जीतने पर है. उन्‍होंने 20 जून 2011 को वेस्‍टइंडीज के खिलाफ टेस्‍ट क्रिकेट में डेब्‍यू किया था. जानें कप्‍तान कोहली के करियर की 10 बड़ी बातें

91 टेस्‍ट मैचों में उनके नाम 7 हजार 490 रन है, जिसमें उनका सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन नाबाद 254 रन का रहा. कोहली के नाम 27 शतक और 25 अर्धशतक है.

विराट कोहली आईसीसी के सभी बड़े इवेंट टी20 वर्ल्‍ड कप, वर्ल्‍ड टेस्‍ट चैंपियनशिप, वर्ल्‍ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं.

उन्‍होंने 2011 में वेस्‍टइंडीज के खिलाफ चौथे टेस्‍ट मैच में अपने टेस्‍ट करियर का पहला अर्धशतक जड़ा था. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्‍मण से सजी टीम में कोहली छठे नंबर पर बल्‍लेबाजी करने आए थे और 52 रन की पारी खेली. उन्‍होंने लगातार दो अर्धशतक जड़कर मैच ड्रॉ करवाने में अहम योगदान दिया.

कोहली को पहले टेस्‍ट शतक के लिए ज्‍यादा इंतजार नहीं करना पड़ा. उन्‍होंने अपने 8वें टेस्‍ट मैच में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ मेडन टेस्‍ट शतक जड़ा.

कोहली टेस्‍ट क्रिकेट में सबसे ज्‍यादा रन बनाने वाले छठे भारतीय खिलाड़ी हैं. बतौर कप्‍तान भी उनके नाम सबसे ज्‍यादा रन हैं. बतौर कप्‍तान 60 टेस्‍ट में उन्‍होंने 5 हजार 392 रन जड़े, जिसमें 20 शतक शामिल है.

कोहली सबसे ज्‍यादा टेस्‍ट शतक लगाने वाले चौथे भारतीय हैं. उनके नाम 27 टेस्‍ट शतक हैं. सचिन तेंदुलकर 51, राहुल द्रविड़ 36 और सुनील गावस्‍कर 34 शतक के साथ उनसे आगे हैं.

कोहली सबसे ज्‍यादा दोहरे टेस्‍ट शतक जड़ने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं. उन्‍होंने अभी तक 7 दोहरे टेस्‍ट शतक जड़े हैं.

कोहली के नाम दो बार एक कैलेंडर साल में सबसे ज्‍यादा टेस्‍ट रन बनाने का भी रिकॉर्ड है. 2018 में उन्‍होंने 1322 रन और 2016 में 1215 रन बनाए थे

कोहली भारत के सबसे सफल टेस्‍ट कप्‍तान हैं. उन्‍होंने 60 में से 34 मैच जीते हैं. उनका जीत का प्रतिशत 59.01 हैं. जीत के प्रतिशत के मामले में वह सिर्फ रिकी पोंटिंग से पीछे हैं. पोंटिंग का प्रतिशत 62.33 है.

टॉस मे मामले में अक्‍सर की अनलकी रहने वाले कोहली चार सीरीज में सभी टॉस भी जीते चुके हैं. दो बार साउथ अफ्रीका के खिलाफ (2016-17 और 2019-20), श्रीलंका (2017), और न्‍यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में उन्‍होंने सभी टॉस जीते. (news18.com)


20-Jun-2021 12:35 PM (19)

ब्रिस्टल, 20 जून| भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने खेल के सबसे लंबे प्रारूप की कठोरता के अभ्यस्त होने में मदद करने के लिए और अपनी टीम के लिए और अधिक टेस्ट मैच खेलने की वकालत की है। भारतीय टीम ने स्नेह राणा (नाबाद 80) और तानिया भाटिया (नाबाद 44) के बीच नौवें विकेट के लिए हुई 99 रनों की अविजित साझेदारी के दम पर यहां काउंटी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन शनिवार को मैच को ड्रॉ करा दिया।

इंग्लैंड ने दूसरे दिन नौ विकेट पर 396 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी जबकि भारत की पहली पारी आज पहले सत्र में 231 रनों पर सिमट गई । इससे इंग्लैंड को 165 रनों की बड़ी बढ़त हासिल हुई, जिसके बाद उसने भारत को फोलोऑन खेलने पर मजबूर कर दिया।

मिताली ने मैच के बाद कहा, " पांच दिवसीय टेस्ट होना एक अच्छा विचार है लेकिन (पहले) हमें वास्तव में नियमित रूप से टेस्ट मैच शुरू करने होंगे।"

भारतीय महिला टीम करीब सात साल बाद अपना पहला टेस्ट मैच खेल रही थी। टीम ने पिछले पांच दशक में केवल 36 टेस्ट मैच खेले हैं। भारतीय टीम ने 2010 से 2020 तक केवल दो ही टेस्ट मैच खेले हैं।

मिताली ने कहा, " एक सीरीज में एक टेस्ट मैच का होना महत्वपूर्ण है और फिर इसे पांच दिनों तक ले जाएं। मैं पांच दिवसीय टेस्ट के साथ भी ठीक हूं, लेकिन मैं एक सीरीज में पहले एक टेस्ट मैच करना पसंद करूंगा और फिर इसे वहां से ले जाऊंगा।"

भारतीय महिला क्रिकेट टीम को अब इंग्लैंड के साथ वनडे और टी 20 सीरीज खेलनी है। (आईएएनएस)


19-Jun-2021 9:50 PM (37)

ब्रिस्टल, 19 जून | भारतीय महिला टीम ने यहां काउंटी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन शनिवार को अपनी दूसरी पारी में चायकाल तक आठ विकेट पर 243 रन बना लिए हैं और उसे अब तक 78 रन की बढ़त हासिल हो चुकी है। चायकाल के समय स्नेह राणा 63 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 27 और तानिया भाटिया 10 गेंदों पर तीन रन बनाकर नाबाद हैं। 


इंग्लैंड की ओर से सोफी एकल्सटन ने अब तक चार जबकि नैटली सीवर ने दो और कैथरीन ब्रंट तथा हीटर नाइट ने एक-एक विकेट लिए हैं। 

इससे पहले, भारतीय टीम ने लंच के बाद तीन विकेट पर 171 रन से आगे खेलना शुरू किया। लेकिन टीम ने जल्दी जल्दी अपने विकेट गंवा दिए। पूनत राउत ने 39, कप्तान मिताली राज ने चार, हरमनप्रीत कौर ने 8, पूजा वस्त्रकर ने 12 और शिखा पांडे ने 18 रन बनाए। 

इससे पहले, इंग्लैंड ने दूसरे दिन नौ विकेट पर 396 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी जबकि भारत की पहली पारी आज पहले सत्र में 231 रनों पर सिमट गई और इससे इंग्लैंड को 165 रनों की बड़ी बढ़त हासिल हुई, जिसके बाद उसने भारत को फोलोऑन खेलने पर मजबूर कर दिया।(आईएएनएस)


19-Jun-2021 8:37 PM (34)

ब्रिस्टल, 19 जून | फोलोऑन खेलने को मजबूर हुई भारतीय महिला टीम ने यहां काउंटी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन शनिवार को अपनी दूसरी पारी में लंच तक तीन विकेट पर 171 रन बना लिए हैं। भारतीय टीम ने इस तरह फोलोऑन उतार दिया है और अब वह छह रन आगे गई है। लंच के समय पूनम राउत 83 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से 39 रन बनाकर नाबाद हैं। दीप्ति शर्मा के टीम के 171 के स्कोर पर आउट होते ही लंच की घोषणा कर दी गई, जिन्होंने 168 गेंदों पर आठ चौकों की बदौलत 54 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। दीप्ति और राउत के बीच तीसरे विकेट के लिए 167 गेंदों पर 72 रनों की साझेदारी हुई। 

इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम की ओर से सोफी एकल्सटन ने अब तक दो और नैटली सीवर ने एक विकेट लिया है। 

इससे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने कल के स्कोर एक विकेट पर 83 रन से आगे खेलना शुरू किया। शेफाली वर्मा ने अपनी पारी को 55 रन और दीप्ति शर्मा ने 18 रन से आगे खेलना शुरू किया। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 70 रनों की साझेदारी की। 

शेफाली को एकल्सटन ने ब्रंट के हाथों कैच कराया। शेफाली ने 83 गेंदों पर 11 चौके और एक छक्के की मदद से 63 रनों की शानदार पारी खेली। उनके अलावा स्मृति मंधाना ने आठ रनों का योगदान दिया। 

इंग्लैंड ने दूसरे दिन नौ विकेट पर 396 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी जबकि भारत की पहली पारी आज पहले सत्र में 231 रनों पर सिमट गई और इससे इंग्लैंड को 165 रनों की बड़ी बढ़त हासिल हुई, जिसके बाद उसने भारत को फोलोऑन खेलने पर मजबूर कर दिया। (आईएएनएस)


19-Jun-2021 4:50 PM (28)

ब्रिस्टल, 19 जून | इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम की बाएं हाथ की स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन का मानना है कि भारत की विस्फोटक बल्लेबाज शेफाली वर्मा के खिलाफ गेंदबाजी करना बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कोई नहीं जानता है कि क्या होने वाला है। फोलोऑन खेल रही भारतीय महिला टीम ने यहां काउंटी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मुकाबले के तीसरे दिन शुक्रवार को बारिश से बाधित दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में एक विकेट पर 83 रन बना लिए और वह अभी 82 रन पीछे चल रही है।

इंग्लैंड ने दूसरे दिन नौ विकेट पर 396 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी जबकि भारत की पहली पारी आज पहले सत्र में 231 रनों पर सिमट गई और इससे इंग्लैंड को 165 रनों की बड़ी बढ़त हासिल हुई, जिसके बाद उसने भारत को फोलोऑन खेलने पर मजबूर कर दिया। शेफाली ने पहली पारी में 96 रन बनाए थे जबकि दूसरी पारी में वह 55 रनों पर नाबाद हैं। 

सोफी ने तीसरे दिन की खेल समाप्ति के बाद कहा, " यह हमेशा दिलचस्प होता है जब मैं और शेफाली खेल के किसी भी प्रारूप में खेलते हैं। जब टी20 की बात आती है, तो मुझे लगता है कि वह वास्तव में उच्च श्रेणी की है, इसलिए उनके खिलाफ गेंदबाजी करना वाकई दिलचस्प है।"

टी20 रैंकिंग की नंबर वन गेंदबाज ने कहा, " आप कभी नहीं जानते कि वह (शेफाली) क्या करने वाली है, आप कभी नहीं जानते कि वह शॉट खेलने वाली है या चूकने वाली। इसलिए उनके खिलाफ गेंदबाजी करना वास्तव में दिलचस्प है और मेरे लिए यह काफी अच्छा मुकाबला है।" 

सोफी ने कहा कि जब वह शेफाली को गेंदबाजी कर रही होती हैं, तो उनके दिमाग में एक ही चीज चलती है कि यह 'मेरी सर्वश्रेष्ठ गेंद' है। 

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मैं सिर्फ अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंद फेंकती हूं और अपनी गति बदलती हूं इसलिए जब मैं एक टेस्ट मैच में आती हूं तो यह मेरी सर्वश्रेष्ठ गेंद को लंबे समय तक फेंकने की कोशिश करने जैसा होता है। लेकिन जब शेफाली की बल्लेबाजी होती है तो मुझे लगता है कि वह कोशिश करती है और आर्म बॉल का इस्तेमाल करती है, इसिलए मैं थोड़ी गति बदल लेती हूं।"  (आईएएनएस)


19-Jun-2021 4:14 PM (28)

 

नई दिल्ली. आजाद भारत के महान धावकों में शुमार और फ्लाइंग सिख कहे जाने वाले मिल्खा सिंह दुनिया से विदा हो गए. 91 वर्षीय सिंह ने शुक्रवार रात अंतिम सांस ली. वे कोविड-19 के चलते हुई परेशानियों का सामना कर रहे थे. साल 2013 में आई फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' ने नई पीढ़ी को मिल्खा सिंह के संघर्ष से सफलता तक की कहानी से रूबरू कराने में बड़ी भूमिका निभाई. उनके निधन पर फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चेयरमैन प्रसून जोशी ने उन्हें याद किया है. वे कहते हैं कि फिल्म लिखने के दौरान उन्होंने ना केवल सिंह, बल्कि खुद को भी जाना है.

प्रसून जोशी ने एक वीडियो शेयर कर फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह से मुलाकात और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए हैं. उन्होंने कहा, 'मिल्खा सिंह जी के निधन का समाचार बहुत ही दुखद है. मैं अभी उनसे दो महीने पहले ही मिला था और मैं उनको कह रहा था कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भाग मिल्खा भाग लिखने का अवसर मिला और मैंने यह फिल्म लिखी.'

प्रसून जोशी इस दौरान फिल्म से जुड़ी बातों को याद करते हुए बताते हैं, 'इस फिल्म को लिखने के दौरान मैंने उन्हें जाना. उनको ही नहीं बल्कि उनके बहाने खुद को भी जाना, उनसे बहुत कुछ सीखा और मैंने कोशिश की कि उनकी, उनके जीवन की और उनके जीवन की जो यात्रा है, उन्हें शब्दों में पिरोकर फिल्म के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत कर सकूं.'

दिग्गज धावक के जीवन पर तैयार फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' के गीतों ने कई लोगों को प्रोत्साहित किया होगा. जोशी बताते हैं, 'एक गीत मैंने लिखा था. जिंदा है, तो प्याला पूरा भर ले, कंचा फूटे चूरा कांच कर ले, जिन्दगी का ये घड़ा ले, एक सांस में चढ़ा ले, हिचकियों में क्या है मरना, पूरा मर ले. शायद कहीं यह मिल्खा सिंह जी का जीवन के प्रति रुख था, उससे ही यह गीत प्रेरित था.' जोशी ने सिंह के साथ ट्विटर पर एक तस्वीर भी शेयर की है.

जोशी ने अपने पसंदीदा गीत को लेकर भी बात की. CBFC के चेयरमैन ने कहा, 'जो चीज, इस गीत की मुझे बहुत प्रिय है और मुझे लगता है कि मिल्खा सिंह जी की जो सकारात्मक ऊर्जा थी, यह उसे बताता है. वह है दांत से काट ले बिजली तार, चबा ले तांबे की झंकार, फूंक दे खुद को ज्वाला-ज्वाला, बिन खुद जले ना होए उजाला.' खास बात है कि इस फिल्म के लिए सिंह ने केवल एक रुपये लिए थे. फिल्म में सिंह का मुख्य किरदार फरहान अख्तर ने निभाया था. जबकि, उनके कोच की भूमिका में क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह थे.

1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 1960 को रोम ओलंपिक्स के चैंपियन दिवंगत मिल्खा सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई बड़े राजनेताओं और खेल जगत से जुड़े लोगों ने भी श्रद्धांजलि दी है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फ्लाइंग सिख को राजकीय सम्मान के साथ विदाई देने का ऐलान किया है. इसके साथ ही पंजाब में एक दिन के राजकीय शोक की भी घोषणा की गई है. (news18.com)


19-Jun-2021 2:45 PM (35)

-रेहान फ़ज़ल

91 साल के मिल्खा सिंह का निधन 18 जून,2021 को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में कोविड संक्रमण से ठीक होने के बाद की मुश्किलों के चलते हो गया. वे भारत के सबसे मशहूर एथलीट रहे हैं.

1929 में अविभाजित भारत में जन्मे मिल्खा सिंह की कहानी जीवटता की कहानी है.

ऐसा शख़्स जो विभाजन के दंगों में बाल-बाल बचा, जिसके परिवार के कई सदस्य उसकी आंखों के सामने क़त्ल कर दिए गए, जो ट्रेन में बेटिकट सफ़र करते पकड़ा गया और जेल की सज़ा सुनाई गई और जिसने एक गिलास दूध के लिए सेना की दौड़ में हिस्सा लिया और जो बाद में भारत का सबसे महान एथलीट बना.

1960 के रोम ओलंपिक में विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के बावजूद मिल्खा सिंह भारत के लिए पदक नहीं जीत पाए और उन्हें चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा.

जब मिल्खा ने बर्तन धोए और सड़कों पर सोए

'यह दौड़ तुम्हें बना देगी या बर्बाद कर देगी'
मिल्खा सिंह ने पहली बार विश्व स्तर पर अपनी पहचान तब बनाई, जब कार्डिफ़ राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड होल्डर मैल्कम स्पेंस को 440 गज की दौड़ में हराकर स्वर्ण पदक जीता.

उस पूरी रात मिल्खा सिंह सो नहीं सके. अगले दिन 440 यार्ड की दौड़ का फ़ाइनल चार बजे था. सुबह मिल्खा ने अपनी नसों को आराम देने के लिए टब में गर्म पानी से स्नान किया, नाश्ता किया और दोबारा कंबल ओढ़कर सोने चले गए. दोपहर उनकी नींद खुली.

उन्होंने खाने में सूप का एक कटोरा और डबल रोटी की दो स्लाइस लीं. जानबूझकर उन्होंने ज़्यादा इसलिए नहीं खाया कि कहीं इसका असर उनके प्रदर्शन पर न पड़े. मिल्खा उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, ''एक बजे मैंने कंघा किया और अपने लंबे बालों के जूड़े को सफ़ेद रुमाल से कवर किया.''

''एयर इंडिया के अपने बैग में मैंने अपने स्पाइक्ड जूते, एक छोटा तौलिया, एक कंघा और ग्लूकोज़ का एक पैकेट रखा. फिर मैंने ट्रैक सूट पहना, अपनी आंखें बंद की और गुरु नानक, गुरु गोविंद सिंह और भगवान शिव को याद किया.''

मिल्खा सिंह को उस दिन का एक-एक क्षण याद है. ''मेरी टीम के साथी बस में मेरा इंतज़ार कर रहे थे. जब मैं अपनी सीट पर बैठा तो उन्होंने मुझसे मज़ाक किया कि मिल्खा सिंह आज ऑफ़ कलर लग रहा है. एक ने पूछा क्या बात है? आज आप ख़ुश क्यों नहीं लग रहे? मैंने उनका कोई जवाब नहीं दिया लेकिन मेरा मन थोड़ा सा हल्का हो गया.''

मिल्खा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें नर्वस देखकर उनके कोच डॉक्टर हावर्ड उनकी बग़ल में आकर बैठ गए और बोले, ''आज की दौड़ या तो तुम्हें कुछ बना देगी या फिर बर्बाद कर देगी. अगर तुम मेरी टिप्स का पालन करोगे, तो तुम माल्कम स्पेंस को हरा दोगे. तुममें ऐसा कर पाने की क्षमता है.''

छठी लेन में थे भारत के मिल्खा सिंह
मिल्खा कहते हैं कि इससे उनकी थोड़ी हिम्मत बढ़ी. स्टेडियम पहुंचकर वह सीधे ड्रेसिंग रूम गए और फिर लेट गए. लगा कि हल्का सा बुख़ार चढ़ गया है. तभी डॉक्टर हावर्ड फिर आए. उन्होंने उनकी पीठ और पैरों की मसाज की. फिर कहा, "मेरे बच्चे, तैयार होना शुरू करो. एक घंटे में तुम्हारी दौड़ शुरू होने वाली है."

हावर्ड पिछले कई दिनों से मिल्खा के हर प्रतिद्वंद्वी की तकनीक का जायज़ा ले रहे थे.

पहली हीट के दौरान वो रात में खाने के बाद उनके कमरे में आकर उनके पलंग पर बैठकर अपनी टूटी-फूटी हिंदी में बोले थे, ''मिल्खा हम स्पेंस को 400 मीटर दौड़ते देखा. वो पहला 300 मीटर स्लो भागता और लास्ट हंडरेड गज में सबको पकड़ता. तुम्हें 400 मीटर नहीं दौड़नी है, 350 मीटर दौड़नी है. समझो कि इतनी लंबी ही रेस है.''

मिल्खा बताते हैं, ''440 यार्ड की दौड़ के फ़ाइनल का पहला कॉल तीन बजकर 50 मिनट पर आया. हम छहों लोग स्टार्टिंग लाइन पर जाकर खड़े हो गए. मैंने अपने तौलिये से अपने पैरों का पसीना पोंछा. मैं अपने स्पाइक के फीते बांध ही रहा था कि दूसरी कॉल आई. मैंने अपना ट्रैक सूट उतारा. मेरी वेस्ट पर भारत लिखा हुआ था और उसके नीचे अशोक चक्र बना था. मैंने कुछ लंबी-लंबी सांसें ली और अपने साथी प्रतियोगियों को विश किया.''

इंग्लैंड के साल्सबरी पहली लेन में थे. इसके बाद थे दक्षिण अफ़्रीका के स्पेंस और ऑस्ट्रेलिया के केर, जमैका के गास्पर, कनाडा के टोबैको और छठी लेन में थे भारत के मिल्खा सिंह.

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत पूरे कर पाएगा 500 पदक?

सिर्फ़ आधा फ़ीट का फ़र्क
जैसे ही स्टार्टर ने कहा - ऑन यॉर मार्क, मिल्खा ने स्टार्टिंग लाइन के पीछे अपना बांया पैर किया, दाहिने घुटने को बाएं पैर के समानांतर किया और दोनों हाथों से धरती को छुआ.

गोली दाग़ते ही मिल्खा इस तरह भागे जैसे ततैयों का एक झुंड उनके पीछे पड़ा हो. उनको हावर्ड की दी हुई नसीहत याद थी. पहले 300 मीटर्स में उन्होंने अपना सब कुछ झोंक दिया.

मिल्खा सबसे आगे दौड़े चले जा रहे थे और जब स्पेंस ने देखा कि मिल्खा बिजली की गति से दौड़ रहे हैं, तो उन्होंने उनसे आगे निकलने की कोशिश की, लेकिन भाग्य मिल्खा सिंह के साथ था.

मिल्खा याद करते हैं, ''मैंने सफ़ेद टेप को उस समय देखा जब दौड़ ख़त्म होने में 50 गज शेष रह गए थे. मैंने वहां तक स्पेंस से पहले पहुंचने के लिए पूरा दम लगा दिया. जब मैंने टेप को छुआ तो स्पेंस मुझसे सिर्फ़ आधा फ़ीट पीछे था. अंग्रेज़ पूरी ताकत से चिल्ला रहे थे - कम ऑन सिंग, कम ऑन सिंग. टेप छूते ही मैं बेहोश होकर मैदान पर ही गिर पड़ा.''

मिल्खा सिंह को स्ट्रेचर से डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उनको ऑक्सीजन दी गई. जब उन्हें होश आया, तब जाकर उन्हें अहसास होना शुरू हुआ कि उन्होंने कितना बड़ा कारनामा अंजाम दिया है.

उनके साथियों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया. उन्होंने तिरंगे को अपने जिस्म पर लपेटा और पूरे स्टेडियम का चक्कर लगाया. यह पहला मौका था जब किसी भारतीय ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था.

मिल्खा सिंह
जब विजयालक्ष्मी पंडित दौड़ती हुई आईं और गले लग गईं
जब इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ ने मिल्खा सिंह के गले में स्वर्ण पदक पहनाया और उन्होंने भारतीय झंडे को ऊपर जाते देखा तो उनकी आखों से आंसू बह निकले.

उन्होंने देखा कि वीआईपी इन्क्लोजर से एक छोटे बालों वाली, साड़ी पहने एक महिला उनकी तरफ़ दौड़ी चली आ रही हैं. भारतीय टीम के प्रमुख अश्वनी कुमार ने उनका परिचय करवाया. वह ब्रिटेन में भारत की उच्चायुक्त विजयलक्ष्मी पंडित थीं.

मिल्खा सिंह याद करते हैं, ''उन्होंने मुझे गले लगाकर मुबारकबाद दी और कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संदेश भिजवाया है कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद वह इनाम में क्या लेना चाहेंगे? मेरी समझ नहीं आया कि मैं क्या मांगूं. मेरे मुंह से निकला कि इस जीत की खुशी में पूरे भारत में छुट्टी कर दी जाए. मैं जिस दिन भारत पहुंचा पंडित नेहरू ने अपना वादा निभाया और पूरे देश में छुट्टी घोषित की गई.''

फ़्लाइंग सिख बनने की कहानी
1960 में मिल्खा सिंह के पास पाकिस्तान से न्योता आया कि वह भारत-पाकिस्तान एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लें. टोक्यो एशियन गेम्स में उन्होंने वहां के सर्वश्रेष्ठ धावक अब्दुल ख़ालिक को फ़ोटो फ़िनिश में 200 मीटर की दौड़ में हराया था.

पाकिस्तानी चाहते थे कि अब दोनों का मुक़ाबला पाकिस्तान की ज़मीन पर हो. मिल्खा ने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया क्योंकि विभाजन के समय की कई कड़वी यादें उनके ज़हन में थीं जब उनकी आंखों के सामने उनके पिता को क़त्ल कर दिया गया था.

मगर नेहरू के कहने पर मिल्खा पाकिस्तान गए. लाहौर के स्टेडियम में जैसे ही स्टार्टर ने पिस्टल दागी, मिल्खा ने दौड़ना शुरू किया. दर्शक चिल्लाने लगे-पाकिस्तान ज़िंदाबाद..अब्दुल ख़ालिक ज़िंदाबाद..ख़ालिक, मिल्खा से आगे थे लेकिन 100 मीटर पूरा होने से पहले मिल्खा ने उन्हें पकड़ लिया था.

इसके बाद ख़ालिक धीमे पड़ते गए. मिल्खा ने जब टेप को छुआ तो वह ख़ालिक से करीब दस गज आगे थे और उनका समय था 20.7 सेकेंड. ये तब के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी थी. जब दौड़ ख़त्म हुई तो ख़ालिक मैदान पर ही लेटकर रोने लगे.

मिल्खा उनके पास गए. उनकी पीठ थपथपाई और बोले, ''हार-जीत तो खेल का हिस्सा है. इसे दिल से नहीं लगाना चाहिए.''

दौड़ के बाद मिल्खा ने विक्ट्री लैप लगाया. मिल्खा को पदक देते समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति फ़ील्ड-मार्शल अय्यूब खां ने कहा, ''मिल्खा आज तुम दौड़े नहीं, उड़े हो. मैं तुम्हें फ़्लाइंग सिख का ख़िताब देता हूं.'' (bbc.com)


19-Jun-2021 2:18 PM (27)

 

नई दिल्‍ली. भारत के महान धावक फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्‍खा सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. अपने करियर में बड़ी से बड़ी और मुश्किल से मुश्किल रेस जीतने वाले मिल्‍खा से हार गए. वह जिंदगी की रेस में भी जीत के लगभग करीब पहुंच चुके थे, मगर 91 साल का ये महान एथलीट जीतते जीतते रोम ओलिंपिक की तरह हार गया और एक बार फिर कभी न भुला पाने वाला दर्द भी दे गया. भारत ने अपना महान खिलाड़ी खो दिया है.

4 बार के एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट मिल्‍खा सिंह ने अपने करियर में कई खिताब जीते, मगर आज भी उनकी एक हार की चर्चा पूरी दुनिया भर में होती है. वो हार जिसका दर्द आज भी देश नहीं भुला पाया. मिल्‍खा सिंह ने 1956, 1960 और 1964 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था. 1960 रोम ओलिंपिक का नाम आते ही मिल्‍खा सिंह की 400 मीटर की फाइनल रेस की यादें ताजा हो जाती है.
मिल्‍खा सिंह से थी गोल्‍ड की उम्‍मीद

हर किसी को उम्‍मीद थी कि मिल्‍खा गोल्‍ड मेडल जीतेंगे, मगर वो चौथे स्‍थान पर रहे. जबकि इस रेस में कई रिकॉर्ड टूट गए थे. वह सेकंड के कुछ हिस्‍से से ओलिंपिक मेडलिस्‍ट बनने से चूक गए. रोम ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह पांचवी हीट में दूसरे स्‍थान पर रहे थे. क्‍वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी दूसरे स्‍थान पर रहे थे. 1960 में 400 मीटर का फाइनल दो दिन बाद हुआ. इन दो दिनों में मिल्‍खा थोड़े से दबाव में भी आ गए थे. फाइनल रेस में कार्ल कॉफमैन पहली लेन, अमेरिका के ओटिस डेविस दूसरी लेन, मिल्‍खा सिंह पांचवीं लेन और जर्मनी का एथलीट छठी लेन थे.
200 मीटर तक लीड कर रहे थे मिल्‍खा

मिल्‍खा करीब 200 मीटर तक लीड कर रहे थे. मगर तभी उनके मन में ख्‍याल आया कि वह काफी तेज दौड़ रहे हैं और हो सकता है कि वह रेस पूरा नहीं पाएं. बीसीसी को काफी समय पहले एक इंटरव्‍यू में मिल्‍खा सिंह ने बताया था कि इसी वजह से उन्‍होंने अपनी गति को थोड़ा कम किया था और एक बार पीछे मुड़कर देख लिया था. इसके बाद उन्‍होंने देखा कि तीन चार खिलाड़ी उनसे आगे निकल गए हैं. उन्‍होंने उनसे आगे निकलने की कोशिश की, मगर तब बहुत देर हो गई थी.

फोटो फिनिश से हुआ फैसला
भारत के हाथ से उसी समय मेडल भी फिसल गया था. यह बहुत नजदीकी रेस थी. शुरुआती चार स्‍थानों का फैसला फोटो फिनिश से हुआ. सेकंड के सौवे हिस्‍से से डेविस ने कॉफमैन को पीछे छोड़कर गोल्‍ड जीता. कई बार कॉफमैन दूसरे और स्‍पेंस तीसरे स्‍थान पर हे. मिल्‍खा सिंह 45.73 के साथ चौथे स्‍थान पर रहे. इसी के साथ भारत को कभी न भुला पाने दर्द मिल गया.

(news18.com)


19-Jun-2021 2:11 PM (32)

 

नई दिल्‍ली. भारत के महान धावक मिल्‍खा सिंह एक महीने तक कोरोना संक्रमण से जूझने के बाद अब इस दुनिया में नहीं रहे. पद्म श्री मिल्खा सिंह 91 वर्ष के थे. उनके परिवार में उनके बेटे गोल्फर जीव मिल्खा सिंह और तीन बेटियां हैं. उन्होंने शुक्रवार रात 11. 30 पर आखिरी सांस ली. इससे पहले उनकी पत्नी और भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर ने भी कोरोना संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया था. तीन बार के ओलिंपियन और चार बार एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट रह चुके मिल्‍खा सिंह की रफ्तार पूरी दुनिया ने देखी. उन्‍होंने भारतीय खेल प्रेमियों को जश्‍न मनाने के लिए कई यादगार मौके दिए थे.

1947 में भारत- पाकिस्‍तान के बंटवारे का मंजर देखने वाले मिल्‍खा ने उस दर्द को भी झेला. मगर उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी और अपने जज्‍बे के दम पर तीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया. ये उनकी हिम्‍मत और जज्‍बा ही था कि बंटबारे के दर्द को भूलकर वह पाकिस्‍तान गए और वहां के स्‍टार खिलाड़ी को हराया. इसके बाद पाकिस्‍तान के तानाशाह माने जाने वाले जनरल अयूब खान भी उनके कायल हो गए और उन्‍हें फ्लाइंग सिख की उपाधि दी.

पहले ठुकरा दिया था निमत्रंण
1960 में मिल्‍खा सिंह के पास पाकिस्‍तान के लाहौर शहर में दौड़ने का निमंत्रण आया और इसके साथ ही उनकी आंखों के सामने बंटवारे का मंजर फिर से घूमने लगा. घाव फिर हरे हो गए. लाशों से भरी ट्रेनें उनकी आंखों के सामने फिर दौड़ने लगी और इसी वजह से उन्‍होंने लाहौर में दौड़ने के लिए मना कर दिया था. मगर जैसे ही ये खबर तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को मिली, उन्‍होंने मिल्‍खा सिंह से बात करके उन्‍हें समझाया और लाहौर जाने के लिए राजी किया.

मिल्‍खा सिंह ने एक बार फिर पाकिस्‍तानी जमीं पर कदम रखा और रेस के लिए खुद को तैयार किया. उनका सामना स्‍टार खिलाड़ी अब्‍दुल खालिद से था. भारतीय स्‍टार ने पाकिस्‍तानी खिलाड़ी को उसी के घर में, उसी के दर्शकों के सामने हरा दिया. मिल्‍खा की रफ्तार के कायल जनरल अयूब खान भी हो गए और उन्‍होंने उन्‍हें मेडल पहनाते हुए फ्लाइंग सिख का खिताब दिया.

चार बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा ने 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में था जिसमें वह 400 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रहे थे. उन्होंने 1956 और 1964 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. उन्हें 1959 में पद्म श्री से नवाजा गया था.

(news18.com)


19-Jun-2021 8:38 AM (21)

नई दिल्ली. भारत और इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम के बीच ब्रिस्टल में खेले जा रहे एकलौते टेस्ट मैच में शेफाली वर्मा ने इतिहास रचा. शेफाली डेब्यू टेस्ट की दोनों पारियों में अर्धशतक जड़ने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बन गईं. शेफाली की दमदार बल्लेबाजी के दम पर टीम इंडिया ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में एक विकेट पर 83 रन बनाये. बारिश ने दूसरे सत्र में खलल डाला और इसी के कारण तीसरे सत्र का खेल नहीं हो सका.

पहली पारी में 96 रन बनाकर शतक से महज चार रन से चूकने वाली शेफाली 11 चौकों से 55 रन बनाकर खेल रही हैं जबकि दूसरे छोर पर डेब्यू कर रही एक अन्य बल्लेबाज दीप्ति शर्मा 18 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं.शेफाली दोनों पारियों में 50 से अधिक रन बनाने वाली भारत की पहली महिला बल्लेबाज भी बन गयी हैं. इन दोनों ने 20 ओवरों तक इंग्लैंड की गेंदबाजों का डटकर सामना किया और लंच के बाद के सत्र में 54 रन जोड़े, जब बारिश के कारण चाय के सत्र में विलंब हुआ.लंच के बाद का सत्र बारिश के कारण 30 मिनट देर से शुरू हुआ था.इंग्लैंड ने दूसरे सत्र में इन दोनों खिलाड़ियों को आउट करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. दूसरी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना सुबह के सत्र में आठ रन पर आउट हो गयी थीं.

आखिरी दिन होगा दिलचस्प मुकाबला
भारतीय टीम चार दिन के मैच में अब भी 82 रन से पिछड़ रही है जबकि उसके नौ विकेट बाकी हैं जिससे शनिवार को अंतिम दिन का खेल दिलचस्प बन जायेगा. भारतीय महिला टीम सुबह के सत्र में पहली पारी में 231 रन पर सिमट गयी थी.इंग्लैंड ने पहली पारी नौ विकेट पर 396 रन पर घोषित की थी और भारत उससे 165 रन से पिछड़ रहा था जिससे मेजबानों ने उसे फॉलोऑन दिया.

दूसरे दिन 17 वर्षीय शेफाली और मंधाना (78) ने भारत को शानदार शुरुआत दी थी लेकिन उसने इसके बाद जल्दी जल्दी पांच विकेट खो दिये थे.भारत ने शुक्रवार को सुबह पांच विकेट पर 187 रन से खेलना शुरू किया.उसने इसी स्कोर पर दो खिलाड़ियों के विकेट गंवा दिये.दीप्ति एक छोर पर डटी थी लेकिन दूसरे छोर पर विकेट गिरते गये. भारत ने इस तरह 21.2 ओवर में पांच विकेट गंवाकर रात के स्कोर में 44 रन जोड़े.
दीप्ति ने नाबाद 29 और पूजा वस्त्राकर ने 12 रन का योगदान किया.इन दोनों ने नौंवे विकेट के लिये 33 रन की भागीदारी की लेकिन टीम को फॉलोऑन से नहीं बचा सकीं. भारत को इंग्लैंड की स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन और हीथर नाइट की जोड़ी को खेलने में सबसे ज्यादा परेशानी हुई.एक्लेस्टोन ने 88 रन देकर चार विकेट अपने नाम किये जबकि हीथर नाइट को दो विकेट मिले.कैथरीन ब्रंट, नटाली स्किवर, आन्या श्रबसोल और केट क्रास ने एक एक विकेट हासिल किया.

हरमनप्रीत सस्ते में निपटीं
भारत ने दिन का पहला रन 20 गेंद खेलने के बाद बनाया, लेकिन तब तक उन्होंने दो विकेट गंवा दिये थे जिसमें उप कप्तान हरमनप्रीत कौर का अहम विकेट भी शामिल था. दिन के दूसरे ओवर में इंग्लैंड ने रिव्यू लिया और हरमनप्रीत रात के चार रन के स्कोर में एक भी रन जोड़ने से पहले आउट हो गयीं.उन्हें एक्लेस्टोन की गेंद पर LBW आउट दिया गया. तानिया भाटिया दो ओवर बाद छह गेंद खेलकर पवेलियन लौटी.उन्हें भी एक्लेस्टोन ने आउट किया.इसके बाद इंग्लैंड की इस गेंदबाज ने स्नेह राणा (02) को टर्न लेती गेंद पर आउट किया जिससे भारत का स्कोर आठ विकेट पर 197 रन हो गया. इंग्लैंड ने 80 गेंद के बाद नयी गेंद ली और भारतीय पारी इसके 1.2 ओवर बाद पूजा वस्त्राकर (12) और झूलन गोस्वामी के आउट होने से समाप्त हुई. (news18.com)


19-Jun-2021 8:33 AM (25)

लंदन, 18 जून| चार बार की ग्रैंड स्लैम विजेता और विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान की खिलाड़ी जापान की नाओमी ने इस महीने होने वाले विंबलडन ओपन टेनिस टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया है। विंबलडन का आयोजन इस साल 28 जून से होना है। 23 वर्षीय ओसाका भले ही विंबलडन से हट गई हैं, लेकिन उन्होंने शुक्रवार को पुष्टि करते हुए बताया कि वह 23 जुलाई से होने वाले टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेंगी।

ऑल इंग्लैंड क्लब ने बयान जारी कर कहा, "ओसाका इस साल विंबलडन में हिस्सा नहीं लेंगी। वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना चाहती हैं। ओसाका ओलंपिक में हिस्सा लेंगी और वह अपने घरेलू दर्शकों के बीच खेलने के लिए उत्साहित हैं।"

ऑस्ट्रेलियन ओपन और यूएस ओपन की विजेता रहीं ओसाका पहले राउंड के मुकाबले के बाद इस साल फ्रेंच ओपन से हट गई थीं।

ऑल इंग्लैंड क्लब ने कहा, "ओसाका को हम सभी इस साल विंबलडन में मिस करेंगे लेकिन हम उनका फैसला समझ सकते हैं। हम अगले साल उनका विंबलडन में स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं।" (आईएएनएस)


19-Jun-2021 8:22 AM (57)

चंडीगढ़, 19 जून| महान धावक मिल्खा सिंह ने शुक्रवार रात अंतिम सांस ली। वह 91 साल के थे और कोविड-19 के खिलाफ एक मजबूत लड़ाई के बाद विजेता के रूप में सामने आए थे। बुधवार को उनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया था। मिल्खा को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। मिल्खा परिवार ने एक बयान जारी कर इस महान धावक के निधन की पुष्टि की।

पूर्व एथलीट, जिसे 'फ्लाइंग सिख' नाम से भी माना जाता है, को एक सप्ताह तक मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के बाद ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट के बाद 3 जून को पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था।

मिल्खा ने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता में चार बार स्वर्ण पदक जीता है और 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था। हालांकिक, 91 वर्षीय को 1960 के रोम ओलंपिक के 400 मीटर फाइनल में उनकी एपिक रेस के लिए याद किया जाता है।

उन्होंने 1956 और 1964 के ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है और उन्हें 1959 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

बीते 13 जून को ही मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का कोरोना के कारण निधन हो गया था। सिंह के परिवार में तीन बेटियां डॉ मोना सिंह, अलीजा ग्रोवर, सोनिया सांवल्का और बेटा जीव मिल्खा सिंह हैं। गोल्फर जीव, जो 14 बार के अंतरराष्ट्रीय विजेता हैं, भी अपने पिता की तरह पद्म श्री पुरस्कार विजेता हैं।

उनके निधन के बाद मिल्खा सिंह के परिवार ने भी एक बयान जारी किया।

पारिवारिक बयान में कहा गया है, उन्होंने बहुत संघर्ष किया लेकिन भगवान के अपने तरीके हैं और शायद यह सच्चा प्यार और साथ था कि हमारी मां निर्मल जी और अब पिताजी दोनों का निधन हो गया है।

परिवार ने कहा, हम पीजीआई में डॉक्टरों के बहादुर प्रयासों और दुनिया भर से और खुद से मिले प्यार और प्रार्थना के लिए उनके आभारी हैं। हम आपको धन्यवाद देते हैं।

मिल्खा तब लोकप्रिय हुए जब उन्होंने 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में 45.6 सेकंड का समय निकालकर चौथा स्थान हासिल किया। उस समय तक, यह एक व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने के लिए एक भारतीय एथलीट के सबसे करीब था।

बाद में, निश्चित रूप से, पी.टी. ऊषा 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों में 400 मीटर दौड़ में एक कांस्य पदक से चूक गईं। उसने 55.42 सेकेंड का समय निकाला और केवल 0.01 सेकेंड से कांस्य पदक से चूक गई।

दशकों बाद मिल्खा सिंह पर बॉलीवुड फिल्म बनी।

पीजीआईएमईआर के बयान में कहा गया, प्रोफेसर जगत राम, निदेशक पीजीआईएमईआर ने इस 'सबसे प्रतिष्ठित' खेल आइकन के दुखद निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की, जिन्हें मैदान पर और बाहर उनकी असाधारण उपलब्धियों और उनके प्यारे और मानवीय व्यक्तित्व के लिए याद किया जाएगा।  (आईएएनएस)


19-Jun-2021 8:20 AM (52)

नई दिल्‍ली. भारत के महान धावक फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्‍खा सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. अपने करियर में बड़ी से बड़ी और मुश्किल से मुश्किल रेस जीतने वाले मिल्‍खा से हार गए. वह जिंदगी की रेस में भी जीत के लगभग करीब पहुंच चुके थे, मगर 91 साल का ये महान एथलीट जीतते जीतते रोम ओलिंपिक की तरह हार गया और एक बार फिर कभी न भुला पाने वाला दर्द भी दे गया. भारत ने अपना महान खिलाड़ी खो दिया है.

4 बार के एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट मिल्‍खा सिंह ने अपने करियर में कई खिताब जीते, मगर आज भी उनकी एक हार की चर्चा पूरी दुनिया भर में होती है. वो हार जिसका दर्द आज भी देश नहीं भुला पाया. मिल्‍खा सिंह ने 1956, 1960 और 1964 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था. 1960 रोम ओलिंपिक का नाम आते ही मिल्‍खा सिंह की 400 मीटर की फाइनल रेस की यादें ताजा हो जाती है.
मिल्‍खा सिंह से थी गोल्‍ड की उम्‍मीद

हर किसी को उम्‍मीद थी कि मिल्‍खा गोल्‍ड मेडल जीतेंगे, मगर वो चौथे स्‍थान पर रहे. जबकि इस रेस में कई रिकॉर्ड टूट गए थे. वह सेकंड के कुछ हिस्‍से से ओलिंपिक मेडलिस्‍ट बनने से चूक गए. रोम ओलिंपिक में मिल्‍खा सिंह पांचवी हीट में दूसरे स्‍थान पर रहे थे. क्‍वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी दूसरे स्‍थान पर रहे थे. 1960 में 400 मीटर का फाइनल दो दिन बाद हुआ. इन दो दिनों में मिल्‍खा थोड़े से दबाव में भी आ गए थे. फाइनल रेस में कार्ल कॉफमैन पहली लेन, अमेरिका के ओटिस डेविस दूसरी लेन, मिल्‍खा सिंह पांचवीं लेन और जर्मनी का एथलीट छठी लेन थे.
200 मीटर तक लीड कर रहे थे मिल्‍खा

मिल्‍खा करीब 200 मीटर तक लीड कर रहे थे. मगर तभी उनके मन में ख्‍याल आया कि वह काफी तेज दौड़ रहे हैं और हो सकता है कि वह रेस पूरा नहीं पाएं. बीसीसी को काफी समय पहले एक इंटरव्‍यू में मिल्‍खा सिंह ने बताया था कि इसी वजह से उन्‍होंने अपनी गति को थोड़ा कम किया था और एक बार पीछे मुड़कर देख लिया था. इसके बाद उन्‍होंने देखा कि तीन चार खिलाड़ी उनसे आगे निकल गए हैं. उन्‍होंने उनसे आगे निकलने की कोशिश की, मगर तब बहुत देर हो गई थी.

फोटो फिनिश से हुआ फैसला
भारत के हाथ से उसी समय मेडल भी फिसल गया था. यह बहुत नजदीकी रेस थी. शुरुआती चार स्‍थानों का फैसला फोटो फिनिश से हुआ. सेकंड के सौवे हिस्‍से से डेविस ने कॉफमैन को पीछे छोड़कर गोल्‍ड जीता. कई बार कॉफमैन दूसरे और स्‍पेंस तीसरे स्‍थान पर हे. मिल्‍खा सिंह 45.73 के साथ चौथे स्‍थान पर रहे. इसी के साथ भारत को कभी न भुला पाने दर्द मिल गया.(news18.com)


18-Jun-2021 10:31 PM (37)

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल के पहले दिन का खेल बारिश की वजह से रद्द हो गया. पहले दिन एक भी गेंद नहीं फेंकी गई.

बीसीसीआई ने ये जानकारी देते हुए बताया है कि शनिवार को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 10.30 बजे खेल शुरू होगा.

ये मैच इंग्लैंड के साउथैम्पटन में खेला जा रहा है. आईसीसी ने टेस्ट चैंपियनशिप का आयोजन पहली बार किया है. (bbc.com)


18-Jun-2021 6:49 PM (25)

बेंगलुरु, 18 जून | हॉकी इंडिया ने आगामी टोक्यो ओलंपिक खेलों 2020 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए बहुप्रतीक्षित 16 सदस्यीय पुरुष हॉकी टीम की शुक्रवार को घोषणा कर दी। 


टीम में 10 से अधिक खिलाड़ी ऐसे हैं, जो ओलंपिक में पदार्पण करेंगे। इस टीम में अनुभवी गोलकीपर पीआर श्रीजेश और मिडफील्डर मनप्रीत सिंह के साथ-साथ ओलंपिक खेल चुके अन्य खिलाड़ियों में हरमनप्रीत सिंह, रूपिंदर पाल सिंह, सुरेंद्र कुमार और मनदीप सिंह शामिल हैं।

अनुभवी बीरेंद्र लाकड़ा को भी टोक्यो 2020 के लिए टीम का हिस्सा बनने का एक उपयुक्त अवसर मिला। लाकड़ा घुटने में चोट के कारण 2016 रियो ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे। 

इसके अलावा, अमित रोहिदास, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, सुमित नवोदित फॉरवर्ड शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह और ललित कुमार उपाध्याय टीम में शामिल हो रहे हैं। (आईएएनएस)

टीम चयन पर बोलते हुए, मुख्य कोच ग्राहम रीड ने कहा, "16 खिलाड़ियों का अंतिम चयन करना आसान प्रक्रिया नहीं रही है क्योंकि खिलाड़ियों के इस समूह में बहुत सारी गुणवत्ता और महत्वाकांक्षा है। सभी एथलीटों का प्रदर्शन स्तर एक इष्टतम स्तर पर है । इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वे एक साथ अच्छा काम करते हैं। वे जानते हैं कि ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का क्या मतलब है। अब हम उसी तीव्रता के साथ प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और हमारा लक्ष्य टोक्यो में एक सामूहिक इकाई के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।"

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में 11 पदक जीते हैं जिनमें आठ स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। हालांकि, भारत ने 41 साल पहले ओलंपिक में पदक जीता था। 

ओलंपिक की तैयारियों को देखते हुए भारतीय टीम ने इस साल यूरोप और अर्जेटीना का दौरा किया था। मनप्रीत सिंह के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने एफआईएच प्रो लीग मुकाबले में ओलंपिक चैंपियन अर्जेटीना को हराया था।

भारतीय पुरुष टीम को पूल-ए में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अजेर्टीना, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्पेन और मेजबान जापान के साथ रखा गया है। यह टूर्नामेंट 23 जुलाई से 5 अगस्त तक टोक्यो में होगा।

भारतीय टीम : 

गोलकीपर : पी आर श्रीजेश

डिफेंडर : हरमनप्रीत सिंह, रुपिंदर पाल सिंह, सुरेंद्र कुमार, अमित रोहिदास, बीरेंद्र लकड़ा

मिडफील्डर : हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, सुमित

फारवर्ड : शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, मनदीप सिंह।


18-Jun-2021 1:50 PM (37)

यूरो कप 2020 में इस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खिलाड़ियों के बीयर बोतलों की हटाने का मामला बेहद चर्चा में है. स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद फ्रांस के मिडफील्डर पॉल पोग्बा को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीयर की बोतलों को हटाते हुए देखा गया. जिसके बाद विवाद काफी आगे बढ़ चुका है.

एक ओर इस घटना पर कुछ लोगों ने खिलाड़ियों की आलोचना की है, तो कुछ ने खिलाड़ियों के कदम की सराहना की है. अब इस मामले में UEFA का बयान आ चुका है. UEFA ने यूरो कप में भाग ले रहीं सभी 24 टीमों को चेतावनी दे दिया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रायोजक कंपनियों की ड्रिंक्स की बोतलों को हटाना बंद कर दें.

रोनाल्डो, पॉल पोग्बा और मैनुअल लोकाटेली ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपनी सीट पर बैठने पहले कैमरे के सामने आ रही प्रायोजकों की सभी बोतलों को हटा दिया. यूरो 2020 के टूर्नामेंट निदेशक मार्टिन कालेन ने कहा कि यूएफा (यूरोपीय फुटबॉल संघों के संघ) ने इस संबंध में टीमों को सूचित किया है. कालेन ने कहा, यह महत्वपूर्ण है क्योंकि टूर्नामेंट और यूरोपीय फुटबॉल के लिये प्रायोजकों के राजस्व महत्वपूर्ण हैं.

कालेन ने साफ कर दिया कि टूर्नामेंट के नियमों में यूएफा के प्रायोजकों को किये गये वादों का अनुपालन करना जरूरी है. हालांकि उन्होंने धर्म के कारण आपत्ति करने वाले खिलाड़ियों के मामले में थोड़ी रियायत की बात की और कहा, वैसे में मामलों में बोतलों की जरूरत नहीं है.

रोनाल्डो ने मैच के पहले आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कोका कोला की दो बोतलों को हटाकर उनकी जगह एक पानी की बोतल रख दी, जो भी एक ड्रिंक कंपनी के ब्रांड की थी. रिपोर्ट के अनुसार रोनाल्डो के ऐसा करने से कोका कोला के शेयरों में गिरावट दर्ज की गयी. इधर रोनाल्डो के ऐसा करने के दूसरे ही दिन पोग्बा ने भी वैसा ही किया. हालांकि पोग्बा मुस्लिम हैं और वह एल्कोहल नहीं पीते, उन्होंने यूरो 2020 की अधिकारिक बीयर प्रायोजन हेनेकेन की हरी बोतल पर आपत्ति जतायी थी. (prabhatkhabar.com)


18-Jun-2021 1:13 PM (36)

नई दिल्ली. दो साल पहले खेले गए वनडे विश्व कप में इंग्लैंड पहली बार चैम्पियन बना. न्यूजीलैंड के खिलाफ हुआ फाइनल मुकाबला टाई रहा. इसके बाद पहली बार सुपर ओवर खेला गया और ये भी टाई रहा. इसके बाद विजेता का फैसला बाउंड्री काउंट नियम से हुआ, जिसे विवाद के बाद हटा दिया गया. 2019 के विश्व कप में इंग्लैंड की जीत के हीरो कप्तान ऑयन मॉर्गन रहे थे. उन्होंने कप्तानी के साथ अपने बल्ले से भी कई मौकों पर टीम को जीत दिलाई थी. इस टूर्नामेंट में मॉर्गन ने एक खास रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था. उन्होंने मैनचेस्टर में अफगानिस्तान के खिलाफ एक मैच में 71 गेंद पर 148 रन की पारी खेली थी.

मॉर्गन ने इस पारी में 17 छक्के लगाए थे. यानी 17 गेंद में 102 रन ठोक डाले थे. इसके अलावा उन्होंने चार चौके भी लगाए थे. यानी 148 रन में से अकेले 118 रन सिर्फ चौकों और छक्कों से ही पूरे किए थे. उनकी इस पारी की बदौलत इंग्लैंड ने मैच में 6 विकेट के नुकसान पर 397 रन बनाए थे. मॉर्गन के अलावा जो रूट ने 88 और जॉनी बेयरस्टो ने भी 90 रन बनाए थे. 2015 के बाद से इंग्लैंड ने सातवीं बार वनडे में 375 रन का आंकड़ा पार किया था. इस मैच में इंग्लैंड के बल्लेबाजों की ओर से कुल 25 छक्के लगे, जो वनडे में सबसे ज्यादा थे.

इंग्लैंड के 397 रन के जवाब में अफगानिस्तान ने 8 विकेट के नुकसान पर 247 रन बनाए. मेजबान टीम ने 150 रन से ये मुकाबला जीता था. 148 रन की पारी खेलने वाले मॉर्गन मैन ऑफ द मैच चुने गए थे.

 राशिद खान विश्व कप के सबसे महंगे गेंदबाज बने थे
इस मुकाबले में अफगानिस्तान की ओर से अंतररराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज राशिद खान की जमकर धुनाई हुई थी. उनके 9 ओवर में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने कुल 110 रन ठोके थे. उनके खिलाफ इंग्लिश बल्लेबाजों ने कुल 11 छक्के भी जड़े थे. राशिद ने 12.22 से ज्यादा के इकोनॉमी रेट से रन दिए. वो विश्व कप इतिहास के सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए थे.

वनडे की बात करें, तो सबसे ज्यादा रन देने के मामले में राशिद तीसरे स्थान पर हैं. किसी एक वनडे में सबसे ज्यादा रन देने का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के माइक लुईस के नाम है. उन्होंने 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 10 ओवर में 113 रन दिए थे. इसके बाद पाकिस्तान के वहाव रियाज हैं. उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 2016 में नॉटिंघम वनडे में 10 ओवर में 110 रन लुटाए थे. (news18.com)


18-Jun-2021 1:13 PM (34)

 

-विमल कुमार

दुनिया भर के क्रिकेट जानकारों का ध्यान शुक्रवार से शुरु होने वाले वर्ल्ड टेस्ट टैंपियनशिप के फाइनल पर टिकी हुई है. टेस्ट क्रिकेट के साल के इतिहास में पहली बार बादशाह का ऐलान होगा. भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के लिए ये एक ऐतिहासिक लम्हा है, क्योंकि इन दोनों कुछ साल पहले तक भी चैंपियन टेस्ट टीम के तौर पर नहीं माना जाता था. पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान और मौजूदा समय में पाकिस्तान क्रिकेट की आवाज़ माने जाने वाले रमीज़ राजा का मानना है कि दबाव पूरी तरह से भारत पर होगा- ''देखिये, अगर आप दुनिया के किसी भी मुल्क के क्रिकेट प्रेमी से पूछेंगे तो वो भारत के समर्थक के तौर पर आपको दिखेंगे. कीवी टीम सबसे लोकप्रिय चार टीमों में भी नहीं होगी. जब तक वो जीतते नहीं है तब तक उनकी हेडलाइन नहीं बनती है, लेकिन भारत की धूम हर समय रहती है.''

राजा की बात का समर्थन उनके साथी कॉमेंटेटर और न्यूज़ीलैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ डैनी मॉरिसन भी करते हैं. ''देखिये, क्रिकेट के मायने भारत के लिए बिलकुल अलग है, क्योंकि अरब से ज़्य़ादा आबादी वाले मुल्क को ये खेल जोड़ता है जबकि हमारे यहां रग्बी नंबर वन खेल है. विराट कोहली की अगुवाई में भारतीय टीम ने दिखाया है कि वो घर के साथ साथ विदेश में भी टेस्ट मैच जीतने का माद्दा रखते हैं और इसलिए मैं उन्हें जीत का प्रबल दावेदार मानता हूं. लेकिन, न्यूज़ीलैंड टीम ने भी पिछले कुछ सालों में शानदार खेल दिखाया है और इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे मज़बूत माने जाने वाले मुल्कों को पछाड़कर वो फाइनल में पहुंची है और भारत की ही तरह उनकी कामयाबी का मंत्र भी लाजवाब गेंदबाज़ी आक्रमण है.''

''ये मैं निश्चित तौर पर मानूंगा कि हमारा मौजूदा अटैक इतिहास का सबसे बेहतरीन आक्रमण है. विविधता के लिहाज से तेज़ गेंदबाज़ी के मामले में शायद हम भारत से बीस भी हों, लेकिन स्पिन डिपार्टमेंट में टीम इंडिया कीवी से काफी आगे दिख रही है. ख़ासकर, अश्विन और जडेजा जो बेहतरीन स्पिनर होने के साथ साथ अच्छे बल्लेबाज़ भी हैं.'' ऐसा मानना है कि मॉरिसन का जो फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में बैठकर टीवी पर इस मैच का लुत्फ उटाने की प्लानिंग कर रहें हैं.
वहीं, दूसरी तरफ एक न्यूट्रल समीक्षक के तौर पर राजा सोचते हैं कि दोनों टीमों की असली ताकत इनकी गेंदबाज़ी आक्रमण में क्वॉलिटी वाले स्विंग और तेज़ गेंदबाज़ों की मौजूदगी है, लेकिन भारत के पास मैच पलटने वाले खिलाड़ी ज़्यादा हैं. ''भारत के पास ऋषभ पंत के तौर पर एक ऐसा जोशीला खिलाड़ी है जिसकी उम्र महज 23 साल की है और जो हैरतअंगेज शॉट्स खेलता है. और इसमें अगर थोड़ा सा जवानी का तड़का लगा दिया जाए और दिलचस्प अंदाज़ में बात करने का हुनर तो वो उसे एक एक्स फैक्टर वाला खिलाड़ी बना देती है जो भारत के लिए एक बड़ी बात है.''

लेकिन, क्या ये मुकाबला दोनों टीमों के कप्तानों के बीच का भी निजी मुकाबला साबित हो सकता है, क्योंकि कोहली और विलियमसन अपनी टीमों के सबसे अहम बल्लेबाज़ है. ''कोहली तो कोहली हैं बिलकुल विवियन रिचर्ड्स की तरह. उनका एक अलग ख़ौफ रहता है गेंदबाज़ों पर लेकिन ऐसा नहीं है कि विलियमसन साधारण है. बल्कि वो भी बड़ी चतुराई से रन बनाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता है.'' ऐसा रमीज राजा मानते हैं. एक बात तो मॉरिसन को अपने देश की टीम में अच्छी लगती है और वो ये कि अब एक टीम के तौर पर बाकि दुनिया में इन्होंने काफी सम्मान हासिल किया है.

WTC Final : टीम इंडिया कैसे जीतेगी न्यूजीलैंड से 'फाइनल', विराट कोहली ने बता दिया गेम प्लान''निश्चित तौर ऐसा पहली बार है कि न्यूजीलैंड की टीम एक अंडरडॉग यानी कि छुपे रुस्तम नहीं देखा माना जा रहा है. उनके पास एक ट्रेंट बोल्ट, टिम साउदी, मैट हेनरी, नील वैगनर और काइल जेमिसन के तौर पर ऐसा गेंदबाजी आक्रमण है जो इससे पहले एक साथ कभी भी न्यूजीलैंड इतिहास में देखेन को नहीं मिला था. हमारे समय में 2-3 ही टॉप क्लास गेंदबाज़ एक साथ प्लेइंग इलेवन में हुआ करते थे.'' भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड की जमीं पर टेस्ट सीरीज 2007 में जीती थी और उसके बाद से 2011, 2014 और 2018 में लगातार तीन टेस्ट सीरीज़ में वो इंग्लैंड में हार का सामना करके लौटें हैं. कीवी टीम भी नई सदी में एक भी टेस्ट सीरीज़ इंग्लैंड में नहीं जीती थी, लेकिन टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से ठीक पहले ही उन्होंने कमाल दिखाया और जीत के सूखे को तोड़ा.

''देखिये, क्रिकेट एक मज़ेदार खेल है. आप चाहे कितना भी आकलन कर लें पासा कुछ मिनटों में भी पलट जाता है. आपको याद है ना 2019 के वन-डे वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में सिर्फ पहले आधे घंटे में भारत की मशहूर बैटिंग लाइन-अप ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी.'' मज़ाकिया लेकिन चेतावनी वाले लहज़े में मौरिसन बोलते हैं.

पिछले साल 2 टेस्ट की सीरीज़ में न्यूजीलैंड ने कोहली की टीम को धूल चटाया था. भारतीय टीम के लिए गेंदबाज़ों के लिए बेहद मददगार हालात वाले मैचों में तीन दिन टिकना भीमुश्किल हो रहा था. लेकिन, जानकार इस बात से बेफिक्र हैं. ''देखिये, जिस तरह से भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराया उससे शायद ही किसी के मन में ये शक हो कि कोहली की टीम चैंपियन बनने लायक नहीं. लेकिन, दूसरा सच ये भी है कि अगर कोई उन्हें चुनौती दे सकता है तो वो यही मौजूदा कीवी टीम है,'' ये कहतें हैं पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राजा.

चलते चलते मॉरिसन भी ये जोडना नहीं भूलते हैं कि कोहली के पास कप्तान के तौर पर एक भी बड़ी ट्रॉफी नहीं है और ऐसे में दबाव उन पर ज़्यादा होगा. ''हम तो महज 50 लाख की आबादी वाले देश हैं, जहां पर क्रिकेट इतना बड़ा खेल नहीं है लेकिन भारत के लोगों को कोहली से इस ट्रॉफी की बहत ज़्यादा उम्मीदें होंगी.''
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

ब्लॉगर के बारे में
न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं. (news18.com)


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