कारोबार

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । आरबीआई के 100 रुपये का नया नोट लाने की घोषणा से देश में ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) बनाने और आपूर्ति करने वाली कंपनियों में घबराहट पैदा हो गई है। विमुद्रीकरण के बाद 2,000 रुपये, 500 रुपये और 200 रुपये के नए नोटों के साथ-साथ 50 रुपये और 10 रुपये के जो नए नोट आए हैं वे पहले की अपेक्षा आकार में छोटे हैं। उसी प्रकार बैंगनी रंग में आने वाला 100 रुपये का नोट भी चलन में मौजूद नीले रंग के 100 रुपये की नोट से आकार में छोटा है।  आरबीआई की घोषणा के अनुसार, मौजूदा नोट का आकार 157 मिलीमीटर लंबा और 73 मिलीमीटर चौड़ा है जबकि नया नोट 142 मीटर लंबा और 66 मीटर चौड़ा है। एटीएम उद्योग महासंघ के निदेशक वी. बालासुब्रमण्यन ने बातचीत में कहा, 100 रुपये के नए नोट के लिए अब देश के सभी 2,37,000 एटीएम को दोबार री-कैलिब्रेट (नये सिरे से दुरुस्त) करना होगा। इसमें काफी मशक्कत करनी पड़ेगी जिसमें समय के साथ-साथ लागत खर्च भी बढ़ेगा। 
    सभी एटीएम को 100 रुपये के नए नोट के लिए दुरुस्त करने में एटीएम ऑपरेटर को संबंधित बैंक की नकदी के मामलों की एजेंसी के अधिकारियों और मशीन विनिर्माता कंपनियों के इंजीनियरों की जरूरत होगी। बाला सुब्रमण्यन ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा, एक एटीएम को दुरुस्त करने में 20 मिनट का समय लगता है लेकिन इस काम में लॉजिस्टिक्स का काम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जैसे नकदी एजेंसी के अधिकारी और इंजीनियर का एक साथ होना। बहुत प्रयास करने के बाद भी एक दिन में 15 से 20 एटीएम को दुरुस्त किया जा सकता है। लिहाजा, समय लगने के साथ-साथ इसमें खर्च काफी ज्यादा हो जाता है।
    हिताची पेमेंट सर्विस के प्रबंध निदेशक लोनी एंटनी ने कैलिब्रेशन की पूरी प्रक्रिया में एक अरब रुपये खर्च का अनुमान लगाया है। उनके अनुसार, इस काम को पूरा करने में एक साल लग जाएगा। एंटनी ने कहा, 200 रुपये के नए नोट के लिए कैलिब्रेशन कार्य एक साल पहलें शुरू हुआ लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इस प्रकार 100 रुपये के नोट के लिए अगर योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं हुआ तो उससे भी अधिक समय लग सकता है। दुनिया में सबसे कम एटीएम का औसत भारत में ही है। यहां एक लाख की आबादी पर एटीएम का औसत 8.9 है जबकि ब्राजील में 119.6, थाइलैंड में 78, दक्षिण अफ्रीका में 60 और मलेशिया में 56.4 है। चीन में वर्तमान में 10 लाख एटीएम है और 2020 तक 15 लाख हो जाएगा। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । रेल का सफर और महंगा होने जा रहा है। ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को आईआरसीटीसी की वेबसाइट के अलावा कहीं और से बुक करने पर अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ेगा। 
    अगर आप रेलवे का टिकट पेटीएम, मोबिक्विक, मेकमाईट्रिप, यात्रा और क्लियरट्रिप आदि मोबाइल वॉलेट या वेबसाइट से करते हैं तो ज्यादा पैसा खर्च करने के लिए तैयार हो जाइये। अब इन वेबसाइट्स और मोबाइल वॉलेट से टिकट की बुकिंग पर 12 रुपये और अतिरिक्त कर देना होगा। 
    आईआरसीटीसी इसके अलावा कंपनियों से वार्षिक रखरखाव शुल्क भी वसूलती है। इसके अलावा वो 5 रुपये डिस्पले विज्ञापनों के और 15 रुपये का शुल्क कैशबैक पर भी इन कंपनियों से वसूलेगी। वहीं अगर कोई भी कंपनी अपनी वेबसाइट पर किसी थर्ड पार्टी के उत्पादों को बेचती है तो उससे 25 रुपये प्रति टिकट शुल्क वसूला लाया जाएगा। (अमर उजाला)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । अभी हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की रिपोर्ट से पता चला था कि मई महीने में आइडिया ने 2.5 मिलियन से ज्यादा ग्राहक गंवाए हैं और इसी बीच जियो, वोडाफोन और एयरटेल को टक्कर देने के लिए आइडिया ने नया प्लान पेश किया है। 
    इस प्लान में 112 दिनों की वैधता के साथ 10 जीबी डाटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलेगी। यह प्लान प्री-पेड यूजर्स के लिए है। इससे पहले आइडिया ने 227 रुपये का प्री-पेड प्लान बाजार में उतारा था जिसमें 28 दिनों की वैधता के साथ रोज 1.4 जीबी डाटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है।
    आइडिया के इस नए प्लान की कीमत 595 रुपये है और इसमें आपको एक ही बार 10 जीबी डाटा मिल जाएगा। 
    इसके अलावा इस प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग मिलेगी जिसमें लोकल, नेशनल और रोमिंग में भी आउटगोइंग शामिल हैं। साथ ही इस प्लान में 112 दिनों तक रोज 100 मैसेज मिलेंगे।
    यह प्लान फिलहाल आंध्र-प्रदेश, बिहार, असम, हरियाणा, राजस्थान, पूवोत्तर और उत्तर प्रदेश के पूर्व के यूजर्स के लिए उपलब्ध है। आप आइडिया की वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं कि आपके सर्किल में यह प्लान मौजूद है या नहीं।(अमर उजाला)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 22 जुलाई । केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में शनिवार को जीएसटी काउंसिल की 28वीं बैठक हुई। इसमें कई बड़े फैसले लिए गए। लेकिन काउंसिल का सबसे बड़ा फैसला सैनेटरी नैपकिन और घरेलू आइटम्स को लेकर रहा। हम आपको काउंसिल के 10 बड़े फैसले के बारे में बताते हैं। 
    1- जीएसटी काउंसिल की बैठक में सबसे बड़ा फैसला सैनेटरी नैपकिन को लेकर लिया गया।  अब तक 12 फीसदी के जीएसटी स्लैब में रखे गए सैनेटरी नैपकिन को टैक्स फ्री कर दिया गया है। यानी अब इस पर जीएसटी नहीं लगेगा।
    2- वहीं घरेलू उपयोग के 17 आइटम्स को 28 फीसदी जीएसटी स्लैब से हटा दिया गया है। इनमें वॉशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी (सिर्फ 25 इंच तक), वीडियो गेम, वैक्यूम क्लीनर, ट्रेलर, जूस मिक्सर, ग्राइंडर, शावर एंड हेयर ड्रायर, वॉटर कूलर, लीथियन आयन बैट्री, इलेक्ट्रॉनिक आयरन (प्रेस) जैसे आइटम्स शामिल हैं। अब इन आइटम्स को 18 फीसदी के स्लैब में रखा गया है। इस हिसाब से 10 फीसदी की कटौती है।   
    3 - जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। इसके मुताबिक अब 5 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले ट्रेडर्स को हर महीने रिटर्न भरने की जरूरत नहीं होगी। काउंसिल ने उनके लिए तिमाही रिटर्न भरने को मंजूरी दे दी है। हालांकि टैक्स पेमेंट मंथली होगी।  इससे करीब 93 फीसदी कारोबारियों को राहत होगी।
    4- जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइलिंग के प्रोसेस को और सरल कर दिया है। हालांकि पहले भी रिटर्न फाइलिंग की प्रोसेस में सुधार किया गया था लेकिन इसके बावजूद कारोबारियों की शिकायतें आ रही थीं।     
    5- पेंट, वॉल पुट्टी और वार्निश जैसी रंग रोगन वाली चीजों पर भी रेट 10 फीसदी कम किया गया है। इनपर अब 28 फीसदी की जगह 18 फीसदी टैक्स लगेगा।
    6- 1000 रुपये तक की कीमत वाले जूतों पर अब मात्र 5 फीसदी टैक्स वसूला जाएगा। मतलब अब जूते आपको सस्ते मिलेंगे। पहले सिर्फ 500 रुपये तक के फुटवियर को इस स्लैब में रखा गया था।
    7- पेट्रोल और डीजल को लेकर तो नहीं लेकिन पेट्रोलियम प्रोडक्ट में मिलाया जाने वाले एथेनॉल ऑयल को लेकर काउंसिल ने अहम फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक गन्ने तथा अन्य फसलों से तैयार होने वाले एथेनॉल ऑयल अब 5 फीसदी टैक्स के दायरे में आएगा। अभी तक इसपर 18 फीसदी जीएसटी था।  
    8- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर बांस और इसकी खेती को बढ़ावा देने का जिक्र करते रहते हैं। वहीं बांस आधारित फ्लोरिंग पर काउंसिल ने भी फैसला लिया है। इस आइटम्स अब 12 फीसदी का टैक्स लगेगा, जबकि हैंडीक्रॉफ्ट आइटम्स को भी अब 12 फीसदी जीएसटी के दायरे में रखा गया।   
    9- वहीं हैंडबैग, ज्वेलरी बॉक्स, पेंटिंग के लिए बनने वाला लकड़ी का बॉक्स, कांच के डिजाइनर ग्लास, डिजाइनर आईना और हाथों से बनाए गए लैंप को 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया है।
    10- आयातित यूरिया पर अब मात्र 5 फीसदी जीएसटी वसूला जाएगा।  इसके अलावा ट्रांसपोटर के सिरदर्द को कम करने के लिए जीएसटी नेटवर्क यानी के साथ आरएफआईडी टैग भी लाया जाएगा।(आज तक)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 21 जुलाई। देश का बैंकिंग उद्योग पहले से ही तमाम तरह की समस्याओं से जूझ रहा है। तिस पर एक नई समस्या उसके ऊपर आन पड़ी है। वह 100 रुपए के नए नोटों का मौद्रिक व्यवस्था में समावेश करने की। जानकारों की मानें तो इन नए नोटों से बैंकिंग उद्योग की परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही उस पर आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है। आरबीआई ने हाल में ही 100 रुपए के नए नोट जारी किए हैं
    बैंकिंग उद्योग के जानकारों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक 100 रुपए के नए नोटों को देश की मौद्रिक व्यवस्था में समावेशित करने से इस क्षेत्र पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पडऩे वाला है। वह इसलिए क्योंकि नए नोट पुराने नोटों से सिर्फ रंग-रूप में ही नहीं आकार-प्रकार में भी पूरी तरह अलग हैं। लिहाजा अब देश भर में मौजूद लगभग 2.4 एटीएम को तकनीकी तौर पर फिर से इन नए नोटों के लिए तैयार करना होगा। इस प्रक्रिया को रीकैलिब्रेशन कहते हैं।
    जानकार बताते हैं कि 100 रुपए के नए नोटों के लिए रीकैलिब्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने में लगभग एक साल या इससे ज्यादा का वक्त भी लग सकता है। यानी इस दौरान आम जनता को भी कहीं-कुछ परेशानी होने से इंकार नहीं किया जा सकता। इतना वक्त लगने का कारण ये भी है कि अभी 200 रुपए के नोटों के लिए ही रीकैलिब्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इन 200 रुपए के नोटों के लिए भी मशीनों को तैयार करने में बैंकिंग उद्योग लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है।
    यही नहीं नवंबर 2016 में जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद किए थे तब भी बैंकिंग उद्योग को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा था। तब सरकार ने 500 और 2,000 रुपए के नए नोट जारी किए थे जो पहले के नोटों की तुलना में आकार-प्रकार में अलग थे। इनके लिए भी एटीएम रीकैलीब्रेशन की प्रक्रिया में बैंकिंग उद्योग 110 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। इस तरह 300 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ बैंकिंग उद्योग इसी प्रक्रिया में उठा रहा है। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • सत्याग्रह ब्यूरो
    अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनकी बेटी श्वेता बच्चन नंदा के एक टीवी विज्ञापन से एक बैंक यूनियन के लोग नाराज हैं। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) नाम की इस यूनियन का कहना है कि कल्याण ज्वेलर्स के इस विज्ञापन के जरिए अमिताभ बच्चन और श्वेता ने बैंककर्मियों की नकारात्मक छवि पेश की है। यूनियन ने विज्ञापन को 'घिनौनाÓ बताया है। उसने विज्ञापन में अमिताभ की भूमिका पर भी टिप्पणी की है। एआईबीओसी की तरफ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, (विज्ञापन में) बच्चन यह कहकर अपनी ईमानदारी का प्रदर्शन कर रहे हैं कि ईमानदारी तब नहीं दिखानी चाहिए जब कोई आपको देख रहा हो, बल्कि हमें तब भी ईमानदार होना चाहिए जब आपको कोई न देख रहा हो। लेकिन अमिताभ बच्चन शायद इस बात से अनजान थे कि स्क्रीन पर ऐसा करते हुए उन्होंने तमाम बैंककर्मियों का मजाक उड़ाया है।
    एआईबीओसी ने इस मामले में कल्याण ज्वेलर्स के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की धमकी दी है। यूनियन के मुख्य सचिव सौम्य दत्ता के मुताबिक इस विज्ञापन को अपमान करने वाले तरीके से बनाया गया है और यह अपने व्यावसायिक लाभ के लिए बैंकिंग व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करता है। दत्ता ने कहा है, हम कल्याण ज्वेलर्स के प्रबंधन और अमिताभ बच्चन से नाराज हैं। उन्होंने अपने फायदे के लिए बैंकों की नकारात्मक छवि पेश की है। हम इसे सभी बैंकों को बदनाम करने वाला विज्ञापन मानते हैं। यूनियन ने कल्याण ज्वेलर्स से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है, साथ ही कहा है कि अगर कंपनी ने जरूरी कदम नहीं उठाए तो उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
    उधर, यूनियन की नाराजगी पर कल्याण ज्वेलर्स की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। एआईबीओसी को लिखे पत्र में उसने कहा है, हम बैंककर्मियों की नकारात्मक छवि पेश किए जाने से जुड़ी आपकी भावना समझते हैं। लेकिन हम यहां आधिकारिक रूप से बताना चाहते हैं कि यह (विज्ञापन) पूरी तरह काल्पनिक था और हमारा यह दिखाने का कोई इरादा नहीं था कि सभी बैंक कर्मचारी एक जैसे होते हैं।
    क्या है विज्ञापन में?
    इस विज्ञापन में एक बुजुर्ग (अमिताभ बच्चन) अपनी बेटी (श्वेता नंदा) के साथ किसी पेंशन संबंधी काम के लिए बैंक में आता है। बैंक के लोग इस बाप-बेटी को एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर भेजते रहते हैं। फिर उन्हें बैंक मैनेजर के पास जाने को कहा जाता है। बैंक मैनेजर को बुजुर्ग की पासबुक देखकर पता चलता है कि उसके खाते में अतिरिक्त पैसा आ गया है। इस पर वह बुजुर्ग को इस पैसे से पार्टी करने की बात कहता है। लेकिन बुजुर्ग ऐसा करने से इंकार करते हुए बैंक मैनेजर को ईमानदारी का पाठ पढ़ाता है।

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 20 जुलाई। आरबीआई ने एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के अनुसार, एलआईसी भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के पास जाने से पहले आरबीआई के पास गया था। बताया जाता है कि आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी तक बेचने के लिए कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत होगी। फिलहाल 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के फंसे हुए कर्ज (एनपीए) से जूझ रहे इस बैंक में सरकार की 85.96 और एलआईसी की 7.98 फीसदी हिस्सेदारी है। अखबार को सूत्रों ने बताया है कि एलआईसी को नियामकीय नियमों को पूरा करने के लिए अन्य बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम करनी पड़ सकती है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 20 जुलाई। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो का 'मानसून हंगामाÓ आज से शुरू हो रहा है। इस ऑफर के तहत उपभोक्ता अपने पुराने फीचर फोन को महज 501 रुपए में बदलकर नया जियोफोन पा सकते हैं। कंपनी ने जारी बयान में बताया कि इसकी शुरुआत 20 जुलाई की शाम पांच बजकर एक मिनट से होगी। इसके तहत ग्राहक 501 रुपए में किसी भी कंपनी का पुराना फीचर फोन नये जियोफोन के मौजूदा माडल से बदल सकेंगे। कंपनी ने कहा कि नये जियोफोन में उपभोक्ता फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे लोकप्रिय मोबाइल एप का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस फोन में उपभोक्ताओं को गूगल मैप्स की भी सुविधा उपलब्ध होगी। कंपनी ने कहा कि ये सारे एप 15 अगस्त से उपलब्ध होंगे। किसी भी फीचर फोन में इस तरह के एप पहली बार उपलब्ध होंगे।
    कंपनी ने कहा कि नया जियोफोन वॉयस कमांड समर्थित है। इस सुविधा से पहली बार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे उपभोक्ताओं को भी सहुलियत होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस फोन का एलान इस महीने 41वीं एजीएम में किया था। इसके फीचर्स एजीएम में आकाश अंबानी और ईशा अंबानी ने दिखाए थे।
    इस 501 रुपए के ऑफर के बाद अब जियो फोन प्रभावी तौर पर फ्री नहीं रहेगा। अगर आप एक्सचेंज से नया जियो फोन खरीदते हैं तो आपको कोई रिफंड नहीं मिलेगा। अगर आपको अपना पैसा वापस चाहिए तो आपको 1500 रुपए देकर ही जियो फोन खरीदना होगा। इसके लिए एक्सचेंज ऑफर मान्य नहीं है।जियो के नए फोन का रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। आप जियो की वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन इस फोन के लिए कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपना नाम, फोन नंबर, ईमेल आईडी और एरिया का पिन कोड देना होगा। (भाषा)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • मुंबई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक स्तर पर गिरा और फिर सुधरकर कारोबार करने लगा. आज रुयया एक डॉलर के मुकाबले 69.12 रुपये तक पहुंच गया था और फिर कुछ सुधर को 69 रुपये से कम पर चला गया. इससे पहले गुरुवार को भी रुपया 43 पैसे टूटकर 69.05 पर बंद हुआ. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन की अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर उत्साहजनक टिप्पणी से डॉलर के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के साथ रुपये में यह गिरावट आयी थी. किसी एक दिन में 29 मई के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट रही थी. इससे पहले, 28 जून को रुपया 69.10 के रिकार्ड न्यूनतम स्तर तक चला गया था. 
    अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया शुरूआती कारोबार में बैंकों तथा आयातकों की अमेरिकी करेंसी की भारी मांग के बीच गिरावट के साथ गुरुवार को 68.72 पर पहुंच गया था. बाद में यह 69.07 तक चला गया. अंत में यह 43 पैसे या 0.63 प्रतिशत टूटकर 69.05 पर बंद हुआ था. कारोबारियों के अनुसार अमरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन के बयान तथा घरेलू स्तर पर संसद में पेश अविश्वास प्रस्ताव जैसे कारणों से रुपये में गिरावट आयी थी. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल ने अमेरिकी संसद के समक्ष दिये बयान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती की बात कही है. इससे ब्याज दर में वृद्धि की संभावना बनी है. हालांकि, उन्होंने इसमें धीरे - धीरे वृद्धि का संकेत दिया है. (एनडीटीवी)

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Posted Date : 20-Jul-2018

  •  सारी दुनिया जीतने वाले सिकंदर महान का जन्म 20 जुलाई ईसा पूर्व 356 में हुआ था।  प्राचीन ग्रीस के उत्तर में मौजूद मैसेडोनिया के इस राजा ने पेला में आंखें खोली और 16 साल की उम्र तक अरस्तू से ज्ञान अर्जित किया। अपना तीसवां जन्मदिन मनाने तक सिकंदर ने दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था जिसका विस्तार भूमध्यसागर से लेकर हिमालय तक था। जंग के मैदान में सिकंदर अविजित रहे और इतिहास उन्हें सबसे सफल कमांडर मानता है।
     सिकंदर ने अपने पिता फिलिप द्वितीय की हत्या के बाद मैसेडोनिया की गद्दी संभाली थी और विरासत में उन्हें एक मजबूत साम्राज्य और अनुभवी सेना मिली थी। सिकंदर ने सेना के विस्तार की अपनी पिता की योजनाओं को आगे बढ़ाया। ईसा पूर्व 334 में सिकंदर ने पहला धावा बोला और फिर अगले 10 सालों तक चले विजय अभियान के पूरा होने तक उसकी सेना भारत तक जा पहुंची थी। आज भी दुनिया भर की सेनाएं सिकंदर की रणनीतियों और तौर तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। महज 32 साल की उम्र में ही सिकंदर की बीमारी से मौत हो गई थी। 
    समझदार चाकू
    वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आधुनिक चाकू बनाया है जो कैंसर की सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। लंदन के इम्पीरियल कॉलेज की टीम ने इस  समझदार  चाकू को बनाया है। शोधकर्ताओं को आशा है कि इससे कैंसर सर्जरी के दौरान ट्यूमर की कोशिकाएं शरीर में छूटने के खतरे और समस्याओं को दूर किया जा सकता है। कई बार यही कोशिकाएं फिर से ट्यूमर को जन्म देने लगती हैं। विज्ञान पत्रिका  ट्रांसलेशनल मेडिसिन  में प्रकाशित आरंभिक परिणामों के अनुसार  आई नाइफ़ ऑपरेशन के दौरान कैंसर उत्तकों की सही-सही पहचान कर पाने में सक्षम था। अब इस उपकरण का चिकित्सीय परीक्षण हो रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि क्या यह वास्तव में लोगों की जान बचाने में सहायक होगा।  इम्पीरियल कॉलेज की टीम ने ऑपरेशन में काम आने वाले चाक़ू में कुछ तकनीकी सुधार किए हैं। इस नए चाकू में कोशिका को काटने के लिए ऊष्मा का प्रयोग किया जाता है। दुनिया भर के अस्पतालों में इस तरह के सर्जिकल चाकू का प्रयोग होता रहा है। अब इस चाकू (आई नाइफ़) की ऊष्मा से कट रही कोशिका के धुंए से सर्जन जान सकेंगे कि कोशिका में कैंसर है या नहीं। इस चाकू में तकनीकी रूप से उन्नत  मास स्पेक्टोमीटर  लगा है जो इसकी नाक की तरह काम करता है। यह स्वस्थ और कैंसर वाले धुएं के अंतर बता देता है। 
     

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • अहमदाबाद, 19 जुलाई : काले धन से संबंधित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नकदी रखने की सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने का सुझाव केंद्र सरकार को दिया है। एसआईटी ने पहले 20 लाख रुपये तक कैश रखने देने की सिफारिश की थी। 
    एसआईटी के प्रमुख जस्टिस (सेवानिवृत्त) एम बी शाह ने आज यहां कहा कि एसआईटी ने यह सिफारिश भी की है कि जब्ती के दौरान संबंधित सीमा से ज्यादा पाई जाने वाली राशि को सरकारी कोषागार में जमा कराया जाना चाहिए। नई सिफारिशें तब आईं जब पूर्व की सिफारिशों में नकद राशि के रूप में 15 लाख और 20 लाख रुपये तक रखने देने की सीमा को काफी कम पाया गया। 
    मौजूदा नियमों के अनुसार, दोषी व्यक्ति 40 प्रतिशत इनकम टैक्स और जुर्माने का भुगतान कर जब्त राशि को वापस पा सकता है। सिफारिशें तब आईं जब हाल में देशभर में टैक्स अधिकारियों की छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। इनकम टैक्स अधिकारियों ने 16 जुलाई को राजमार्ग निर्माण से जुड़ी एक कंपनी और इसकी सह कंपनियों के 20 परिसरों पर छापेमारी कर 160 करोड़ रुपये की नकदी और 100 किलोग्राम सोना जब्त किया था।
    जस्टिस शाह ने कहा, 'जब्त की जा रही राशि को देखिए, 160 करोड़ रुपये...177 करोड़ रुपये...।' उन्होंने कहा, 'जब्त की जा रही राशि की मात्रा इतनी ज्यादा है कि अब हमारा मत है कि 20 लाख रुपये तक रखने देने की सीमा काम नहीं करेगी।' 
    जस्टिस शाह ने पूर्व में नकद राशि के रूप में 15 लाख रुपये तक रखने देने की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में उन्होंने इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये तक कर दिया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2014 में एसआईटी का गठन किया था। सरकार को एसआईटी लगातार काले धन रोधी कदमों का सुझाव देती रही है। (पीटीआई)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 19 जुलाई । भारतीय रेलवे ने उन 70,000 उम्मीदवारों को फिर से आवेदन करने का मौका दिया है, जिनका पिछला आवेदन फोटो अपलोड करने में आई खामी की वजह रद्द कर कर दिया था। इन सभी को इसके लिए 20 जुलाई तक का वक्त दिया गया है। रेलवे मंत्रालय की मानें तो सहायक लोको पायलट और तकनीकी पदों के लिए मिले 48 लाख आवेदनों में से 1.33 लाख को कई वजहों से खारिज कर दिया गया। इनमें 1.27 लाख फोटो अपलोड करने में हुई गलती के चलते खारिज हुए। (हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 19 जुलाई। देश के पांच बड़े राज्यों में बीते साल 900 करोड़ रुपये के कपास के हानिकारक बीज बेचे गए हैं। ये राज्य पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश हैं। पीएमओ की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इस बीज को कपास की खेती के कुल रकबे के 15 फीसदी हिस्से में लगाया गया है। हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के कार्यकारी निदेशक डॉ.रामू ने हर्बिसाइड टॉलरेंट नाम के इस बीज को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस बीज को स्वीकृति नहीं दी गई है। उने मुताबिक किसान इसे बिल पर नहीं खरीदते इसलिए उन्हें खराब फसल का मुआवजा भी नहीं मिल पाता। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में राज्यों को इस बीज को नष्ट करने को कहा है। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 19 जुलाई। उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिलायंस फाउंडेशन के प्रस्तावित जिओ इंस्टीट्यूट को पहले ही साल में फीस के तौर पर 100 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद जताई गई है। इस आकलन के मुताबिक संस्थान में पहले साल लगभग 1,000 छात्र-छात्राएं दाखिला ले सकते हैं। उनकी ट्यूशन और छात्रावास फीस मिलाकर यह राजस्व हासिल हो सकता है।
    जिओ इंस्टीट्यूट की वित्तीय योजना का मसौदा अपने पास होने का दावा किया है। इसके मुताबिक पहले साल जिओ इंस्टीट्यूट सबसे ज्यादा 300 सीटें नेचुरल साइंस के कोर्स के लिए उपलब्ध कराएगा। इसके बाद इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के लिए 250 मैनेजमेंट एवं एंटरप्रेन्योरशिप के लिए 125, लॉ के लिए 90, स्पोर्ट्स साइंस के 80, मीडिया एंड जर्नलिज्म के लिए 60, तथा परफॉर्मिंग आर्ट और अर्बन प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के लिए 50-50 सीटें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस तरह कुल लगभग 1,205 सीटें होंगी।
    संस्थान पहले साल लगभग 38 करोड़ रुपए छात्रवृत्ति के तौर पर बांटेगा। इस तरह पहले साल उसकी आय लगभग 62 करोड़ रुपए रह जाएगी। संस्थान ने इसी हिसाब से अगले 15 साल की वित्तीय योजना तैयार की है। संस्थान के पहले साल में जहां तक खर्च का ताल्लुक है तो वह लगभग 154 करोड़ रुपए आने का अनुमान है। इनमें से 93 करोड़ रुपए स्टाफ की तनख्वाह आदि पर खर्च होगा। रिलायंस फाउंडेशन का दावा है कि इस संस्थान के लिए दुनिया के शीर्ष 500 वैश्विक शिक्षण संस्थानों से शिक्षकों को लाया जाएगा।
    जिओ इंस्टीट्यूट देश का पहला संस्थान है जिसे अभी सिर्फ कागजों पर होने के बावजूद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 'प्रतिष्ठित दर्जाÓ देने की मंशा जता दी है। इसके अलावा जिन अन्य पांच संस्थानों को यह दर्जा देने को फैसला हुआ है वे सब पहले से संचालित हैं।  (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 18 जुलाई। सरकारी बैंकों को उनकी पतली माली हालत से उबारने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। फिलहाल पांच सरकारी बैंकों के लिए 11,336 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद मंजूर की गई है।
    खबरों के मुताबिक केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को पंजाब नेशनल बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, आंध्र बैंक, इलाहाबाद बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के लिए यह आर्थिक मदद मंजूर की। इनमें से पंजाब नेशनल बैंक को सबसे ज्यादा 2,816 करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। यह बैंक पिछले काफी समय से नीरव मोदी से जुड़े घोटाले की वजह से चर्चा में है। आभूषणों का कारोबार करने वाले नीरव मोदी ने इस बैंक से करीब 14,356 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। लेकिन उसे चुकाए बिना ही देश से भाग गया।
    बहरहाल पंजाब नेशनल बैंक के बाद सरकार की ओर से सबसे ज्यादा 2,555 करोड़ रुपए कॉरपोरेशन बैंक को दिए जाएंगे। इसके अलावा इंडियन ओवरसीज बैंक को 2,157 करोड़, आंध्र बैंक को 2,019 करोड़ और इलाहाबाद बैंक को 1,790 करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी। हालांकि सूत्रों की मानें तो इस मदद से सरकारी बैंकों को थोड़ा ही सहारा मिलेगा क्योंकि इस वक्त वे लगभग 10 लाख करोड़ रुपए के एनपीए (वह कर्ज जिसके चुकाए जाने की संभावना नहीं है) की विकराल समस्या से जूझ रहे हैं। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • 2000, 500, 200, 50, 10 के नोट के बाद अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही 100 रुपए का नोट भी बदलने वाला है। नए नोट का रंग बैगनी होगा और इस पर वैश्विक धरोहर में शामिल गुजरात की ऐतिहासिक रानी की बाव की झलक देखने को मिलेगी। 100 रुपये के नए नोट बाजार में आने के बाद पुराने नोट भी चलन में रहेंगे। इस नोट के डिजाइन को अंतिम रूप मैसूर की उसी प्रिंटिंग प्रेस में दिया गया, जहां 2000 के नोट की छपाई होती है।
    दिखने में यह नोट 100 रुपये के मौजूदा नोट से छोटा और 10 रुपये के नोट से बड़ा होगा। सौ के नए नोट की छपाई का काम बैंक नोट प्रेस देवास में शुरू हो चुका है। खबर में बताया गया कि मैसूर में जो शुरुआती नमूने छापे गए थे, उनमें विदेशी स्याही का उपयोग हुआ था। देवास में देशी स्याही का उपयोग के चलते नमूने से रंग मिलान में आई परेशानी को भी हल कर लिया गया है।
    खबरों के मुताबिक, 100 का नया नोट अगस्त के आखिर तक बाजार में आ सकता है। नोट की खासियत यह है कि यह होशंगाबाद के सिक्योरिटी पेपर मिल के स्वदेशी पेपर और स्याही पर छप रहा है। नए नोट के बारे में देवास प्रेस नोट प्रबंधन की तरफ से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। (न्यूज 18)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 17 जुलाई । भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने डेटा सुरक्षा को लेकर अहम टिप्पणी की है। ट्राई ने कहा है कि डेटा पर केवल उपभोक्ता का अधिकार है। उसका यह भी कहना है कि उपभोक्ताओं को डिजिटल दुनिया में मौजूद उनकी हर निशानी को खत्म करने का अधिकार मिलना चाहिए। प्राधिकरण ने कहा है कि निजी कंपनियों द्वारा डेटा इक_ा किया जाना उनके अधिकार से परे है। ट्राई ने केंद्र सरकार को भेजी गई सिफारिशो में निजी कंपनियों पर डेटा इक_ा करने पर रोक लगाने की भी मांग की है। इसके अलावा उसने मौजूदा डेटा संरक्षण कानून पर भी अपना असंतोष जाहिर किया है। प्राधिकरण का कहना है कि यह कानून पर्याप्त नहीं है। ट्राई ने उपभोक्ताओं के डेटा का गलत इस्तेमाल होने की भी आशंका जाहिर की। (अमर उजाला)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बोर्ड ने सोमवार को डूबते कर्ज़ के बोझ से दबे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आईडीबीआई में निवेश के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. इसके बाद अब आईडीबीआई में 51 फीसदी हिस्सेदारी एलआईसी की हो जाएगी.

    ख़बरों के मुताबिक एलआईसी बोर्ड के फैसले के बारे में देश के आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने घोषणा की. सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम एलआईसी अब इस निवेश से संबंधित प्रस्ताव सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) को सौंपेगा. वहां से मंज़ूरी मिलने के बाद निवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. वैसे आईडीबीआई बैंक में अब भी 10.8 फ़ीसदी हिस्सेदारी एलआईसी के पास है. लेकिन इसमें उसकी 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी हो जाने के बाद आईडीबीआई अब एलआईसी का सहायक उपक्रम हो जाएगा.

    ख़बरों की मानें तो एलआईसी आगे से आईडीबीआई को अपनी अधीनस्थ निजी वित्तीय संस्था के तौर पर संचालित करने की तैयारी में है. हालांकि इस सौदे को अभी आईडीबीआई बोर्ड की मंज़ूरी मिलना बाकी है. पर सूत्रों की मानें तो यह कोई अड़चन नहीं है क्योंकि आईडीबीआई को अपनी माली हालत सुधारने के लिए पूंजी की सख़्त ज़रूरत है. इस सौदे से आईडीबीआई के लगभग 13,000 करोड़ रुपए हासिल हो सकते हैं. दूसरी तरफ एलआईसी को भी देश में 2,000 शाखाओं वाली बैंकिंग संस्था का मालिक़ाना हक़ मिल रहा है.

    ख़बरों के मुताबिक आईडीबीआई बैंक पर डूबते कर्ज़ का बोझ बढ़कर बीते मार्च तक लगभग 55,000 करोड़ रुपए हो चुका है. उसने वित्तीय वर्ष 2018-19 में 8,238 करोड़ रुपए के शुद्ध घाटे का अनुमान भी जताया है.(सत्याग्रह)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • पटना, 15 जुलाई। बिहार में शुरू की गई एक नवोन्मेषी और लागत प्रभावी पेयजल परियोजना से प्रदेश के लोगों को दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी मिलेगा। परियोजना के तहत लोगों को 50 पैसे में एक लीटर पीने का पानी मुहैया करवाने का वादा किया गया है। सुलभ इंटरनेशनल ने दरभंगा में शनिवार को सुलभ जल नाम से इस परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना में तालाब के गंदे पानी को स्वच्छ पेयजल में बदला जाएगा।
    सामाजिक संगठन ने एक विज्ञप्ति में कहा, एक दशकों पहले सुलभ इंटरनेशनल द्वारा बिहार में ही सुलभ शौचालय की संकल्पना की नींव पड़ी थी जिसका प्रसार देशभर में हुआ। आज (शनिवार) एक नवोन्मेषी परियोजना की नींव रखी गई जिसके तहत दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी महज 50 पैसे में एक लीटर मुहैया करवाया जाएगा।
    संगठन ने कहा, सुलभ जल शुद्धिकरण के विविध चरणों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह नदी या तालाब जैसे जलाशयों से स्वच्छ व सुरक्षित जल मुहैया करवाएगा। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने दरभंगा नगर निगम परिसर स्थित हरिबोल तालाब में परिजयोजना की नींव रखी। पाठक ने कहा, परियोजना जल्द शुरू की जाएगी। दिसंबर तक यह चालू हो जाएगी।
    इस परियोजना पर करीब 20 लाख रुपये की लागत आएगी और इसमें 8,000 लीटर पेयजल रोजाना निकाला जाएगा जिसकी लागत नाममात्र होगी। उन्होंने कहा, स्थानीय लोग और एनजीओ इसका रखरखाव कार्य संभालेंगे। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना चलेगी। इसमें रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
    प्रायोगिक परियोजना पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नादिया जिलों में सुलभ और एक फ्रांसीसी संगठन के साथ शुरू की गई थी जो सफल रही। (आईएएनएस)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । भारतीय जीवन बीमा निगम के आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने का विरोध कर रहे बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। बैंक कर्मचारियों ने कहा है कि वह एलआईसी और आईडीबीआई डील के विरोध में सोमवार से 6 दिन की हड़ताल पर जाएंगे।
    दरअसल आईडीबीआई बैंक ने रेग्युलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकरी दी। बैंक के कर्मचारी इस डील के अलावा वेतन बढ़ोतरी न होने को लेकर विरोध कर रहे हैं।
    इसकी वजह से आशंका जताई जा रही है कि अगर इनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो ये लोग सोमवार से 6 दिनों की हड़ताल करेंगे। इस दौरान बैंकिंग सेवाएं लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
    आईडीबीआई ने रेग्युलेटरी फाइलिंग में बताया, बैंक को अधिकारियों के एक धड़े से नोटिस मिला है। इसमें उन्होंने 16 जुलाई से 21 जुलाई तक हड़ताल पर जाने की बात कही है। आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का मुद्दा नवंबर, 2012 से अटका पड़ा हुआ है।  पिछले साल भी कर्मचारियों  ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी। हालांकि बाद में ऐसा नहीं किया गया क्योंकि मैनेजमेंट ने उनकी मांगें पूरी करने का वादा किया था।
    ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने एलआईसी और आईडीबीआई डील को लेकर विरोध जताया है। (आज तक)

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