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Posted Date : 15-Nov-2018
  • अदिति श्रीवास्तव/समिधा शर्मा
    नई दिल्ली/मुंबई, 15 नवम्बर। फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल द्वारा कथित गंभीर व्यक्तिगत दुव्र्यवहार की एक स्वतंत्र जांच में पता चला है कि बंसल और महिला के बीच संबंध तो थे, लेकिन आपसी सहमति पर आधारित। ब्लूमबर्ग ने मामले से वाकिफ दो अनाम व्यक्तियों के हवाले से यह खबर दी थी। 36 वर्षीय बंसल ने मंगलवार को फ्लिपकार्ट के चेयरमैन एवं ग्रुप सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के पीछे फ्लिपकार्ट के नए मालिक वॉलमार्ट की साजिश का भी अंदेशा जताया जा रहा है। 
    ऑनलाइन बुकस्टोर से 2007 में फ्लिपकार्ट के सफर की शुरुआत करने वाले सचिन बंसल और बिन्नी बंसल को देश की अर्थव्यवस्था के नए ध्वज-वाहक के रूप में स्टार्टअप को मुख्यधारा में लाने का श्रेय दिया जाता है। फ्लिपकार्ट ने अपने निवेशकों की पूंजी में जो अभूतपूर्व बढ़ोतरी की, उसका देश के स्टार्टअप ईकोसिस्टम पर गहरा असर हुआ। इससे भारतीय स्टार्टअप्स में दुनिया-जहां के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। चंडीगढ़ के रहने वाले सचिन और बिन्नी की सफलता ने इंटरनेट उद्यमियों की एक नई पीढ़ी को प्रेरणा भी दी। 
    इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सचिन बंसल के फ्लिपकार्ट से जाने के बाद अब गलत बर्ताव के गंभीर आरोप में फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ पद से बिन्नी बंसल के इस्तीफे से युवा उद्यमियों के मनोबल और स्टार्टअप इंडस्ट्री के सेंटीमेंट पर बुरा असर पड़ सकता है। फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट के खरीदने के बाद कंपनी में अपनी भूमिका को लेकर नाखुश सचिन बंसल मई में कंपनी से अलग हो गए थे। सचिन और बिन्नी के साथ काम करने वाले और वॉलमार्ट के निवेश पहले फ्लिपकार्ट में पैसा लगाने वाले एक शख्स ने बताया, ऐसी स्थिति से ग्लोबल इनवेस्टर्स को लेकर आशंकाएं बढ़ती हैं।
    एक स्टार्टअप के फाउंडर ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि फ्लिपकार्ट से सचिन और बंसल की विदाई से उद्यमियों में अनिश्चितता बढ़ेगी। एक अन्य स्टार्टअप के संस्थापक ने बताया, मैं अपनी कंपनी शुरू करने के वक्त से सचिन और बिन्नी को आदर्श माना है। बिन्नी के इस्तीफे ने फ्लिपकार्ट डील के बाद बने खुशनुमा माहौल को खत्म कर दिया है। बिन्नी के इस्तीफे पर वॉलमार्ट ने एक बयान में कहा कि बिन्नी के खिलाफ आरोपों की जांच हो रही है। अभी तक आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन कुछ मामलों में उनकी गलती सामने आई है। इसमें खासतौर से पारदर्शिता को लेकर चूक है।
    बिन्नी ने एंप्लॉयीज को लिखी ईमेल में आरोपों को सिरे से नकारा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा, फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ पद से अलग होने के लिए सही समय के बारे में सोच रहे थे और उनकी योजना वॉलमार्ट के साथ डील पूरी होने के बाद कुछ और तिमाहियों तक कंपनी में अपनी मौजूदा भूमिका में बने रहने की थी। वॉलमार्ट के साथ के करीब 6 महीने बाद बिन्नी के इस्तीफे ने फ्लिपकार्ट के कर्मचारियों के बीच कई सवालों को खड़ा कर दिया है। 
    इकनॉमिक टाईम्स ने करीब आधा दर्जन फ्लिपकार्ट एंप्लॉयीज से बात की। उन सबने कहा कि वह इस खबर को सुनकर हैरान हैं। कंपनी के एक सीनियर प्रॉडक्ट मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, वॉलमार्ट के साथ डील के बाद कंपनी में हो रहे बदलावों के बीच उनका इस्तीफा परेशान करने वाला है। कर्मचारी उनसे बदलाव के दौर में कंपनी के साथ बने रहने की उम्मीद कर रहे थे।  (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 15 नवम्बर। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अगर आपका अकाउंट है तो आपके लिए ये खबर बेहद अहम है। बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी में कहा गया है कि 1 दिसंबर के बाद कोई भी ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसों का लेन-देन नहीं कर पाएंगे। मतलब साफ है कि ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट बंद हो जाएगा। बैंक ये कदम आरबीआई की ओर से जारी नियमों के बाद उठा रहा है।
    क्या है मामला-एसबीआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी जानकारी दी है। इसके मुताबिक अगर आप अभी एसबीआई इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आप ने अभी तक अपना मोबाइल नंबर बैंक के साथ रजिस्टर नहीं किया है, तो 1 दिसंबर तक करवा लें।
    ब्लॉक हो जाएगी इंटरनेट बैंकिंग सर्विस-बैंक ने कहा है कि अगर आप ने 1 दिसंबर, 2018 तक यह काम नहीं निपटाया, तो आपकी इंटरनेट बैंकिंग ब्लॉक हो जाएगी। एसबीआई ने कहा है कि इसके बाद आप इंटरनेट बैंकिंग के जरिये लेन-देन नहीं कर पाएंगे।
    ऐसे करें अपडेट-एसबीआई ने कहा है कि आपको मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए ब्रांच में जाना होगा। यहां अपना मोबाइल नंबर जल्द से जल्द रजिस्टर करवा लें। ताकि आपको किसी भी सुविधा से वंचित न रहना पड़े।
    क्यों करना होगा ये काम-अपने बैंक खाते के साथ मोबाइल नंबर अपडेट करना इसलिए भी जरूरी है ताकि आपको हर लेन-देन की जानकारी मिलती रह सके। इससे किसी भी संभावित धोखाधड़ी से बचने में भी मदद मिलती है। मोबाइल नंबर अपडेट करना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि यह आपके लिए फायदेमंद भी है। तो जल्द से जल्द अपना मोबाइल नंबर अपने बैंक अकांउट से लिंक करवा दीजिए। (न्यूज 18)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 14 नवम्बर । टेलीकॉम इंडस्ट्री में डाटा वॉर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। दो साल पहले रिलायंस जियो के लॉन्च के बाद से ही डाटा वॉर देखे को मिला है। हालांकि, इस डाटा वॉर में यूजर्स को बड़ा फायदा हुआ है। आलम यह है कि मुफ्त कॉलिंग से लेकर फ्री डाटा की जंग में हर कंपनी अपने यूजर्स को बेस्ट ऑफर देने में जुटी हैं। यही वजह है कि पिछले दो साल में टेलीकॉम इंडस्ट्री में कई बदलाव देखने को मिले हैं। मर्जर से लेकर कंपनियों के बंद होने तक के पीछे डाटा वॉर ही है।
    दिवाली के मौके रिलायंस जियो ने एक धमाकेदार प्लान पेश किया था। इस प्लान का फायदा अब भी यूजर्स उठा सकते हैं। क्योंकि, यह प्लान अभी भी जियो ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। कंपनी ने इसे जियो दिवाली धमाका नाम दिया है। खास बात यह है कि जियो के इस प्लान पर यूजर्स को 100 फीसदी का कैशबैक भी ऑफर किया गया है। मतलब यह कि पूरे एक साल के लिए अगर आप यह प्लान लेते हो तो इसकी कीमत के मुताबिक पूरा कैशबैक आपको मिल सकता है।
    क्या है प्लान- जियो के इस प्लान की कीमत 1699 रुपए है। प्लान की वैधता एक साल है। एक साल के लिए यूजर्स को मुफ्त कॉलिंग के अलावा फ्री डाटा मिलेगा। प्लान में यूजर्स को रोजाना 1.50 जीबी डाटा दिया जा रहा है। इस तरह पूरे साल के लिए कुल डाटा 547.5जीबी डाटा दिया जा रहा है।
    कैसे मिलेगा कैशबैक- जियो ने अपने इस प्लान पर यूजर्स को 100 फीसदी कैशबैक का भी ऑफर पेश किया है। प्लान पर ऑफर कैशबैक रिलायंस डिजिटल कूपन के रूप में मिलेगा। जिसे यूजर्स माय जियो ऐप के जरिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कूपन अपने आप यूजर की ऐप में सेव होगा। इसका इस्तेमाल रिचार्ज के लिए कर सकते हैं। कैशबैक के रूप में मिले ये कूपन सिर्फ 31 दिसंबर 2018 तक ही वैध होंगे। इस कैशबैक का इस्तेमाल यूजर्स रिलायंस डिजिटल स्टोर पर भी कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए यूजर्स को कम से कम 5,000 रुपए की खरीदारी करनी होगी।
    और क्या-क्या मिलेगा- 1699 रुपए के पैक में 365 दिनों वॉयस कॉल पूरी तरह फ्री रहेगी। इसके अलावा रोजाना 100 एसएमएस और माय जियो ऐप का सब्सक्रिप्शन फ्री है। आपको बता दें, जियो का दिवाली धमाका ऑफर 18 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ही मान्य होगा। (जी बिजनेस)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • रिलायंस जियो ने जब से टेलिकॉम सेक्टर में एंट्री की है, तब से अन्य टेलिकॉम कंपनियों के बीच टेंशन बढ़ गई है। जियो ने रोजाना नए और आकर्षक प्लान्स के जरिए अपना कस्टमर बेस काफी बढ़ा लिया है, और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते अन्य टेलिकॉम कंपनियों ने भी कई बेहतरीन प्लान्स लॉन्च किए हैं। जियो, एयरटेल और वोडाफोन के 8 बेस्ट प्लान्स ...
    एयरटेल का 199 रुपये का प्लान-इस प्लान की वैधता 28 दिनों की है और इसमें प्रति दिन 1.4 जीबी डेटा, 100 मुफ्त एसएमएस और अनलिमिटेड कॉल्स का फायदा मिलेगा।
    एयरटेल 249-इस प्लान की वैधता भी 28 दिनों की है, लेकिन इसमें प्रति दिन 2 जीबी डेटा मिलता है। इसके अलावा इसमें अनिलिमिटेड कॉल्स और रोजाना 100 मुफ्त एसएमएस की सुविधा भी है।
    वोडाफोन का 255 प्लान-28 दिनों की वैलिडिटी वाले इस प्लान में अनलिमिटेड कॉल्स, प्रतिदिन 100 मुफ्त एसएमएस मिलता है। साथ ही इसमें रोजाना 2जीबी डेटा मिलता है। वहीं 209 रुपये के प्लान में रोजाना 1.5 जीबी डेटा मिलता है। इसकी वैधता 28 दिनों की है, जिसमें अनिलिमिटेड कॉल्स और प्रतिदिन 100 एसएमएस मिलते हैं। और 199 का प्लान की वैधता भी 28 दिनों की है, जिसमें रोजाना 1.4 जीबी डेटा मिलता है। साथ में अनलिमिटेड कॉल्स और प्रतिदिन 100 मुफ्त एसएमएस भी इस प्लान में मिलते हैं।
    जियो 149- इस प्लान में 28 दिनों के लिए 1.5जीबी डेटा, अनलिमिटेड कॉल्स और प्रतिदिन 100 मुफ्त एसएमएस मिलते हैं। जियो 198 प्लान की भी वैलिडिटी 28 दिनों की है, लेकिन इसमें प्रतिदिन 2जीबी डेटा मिलता है। साथ ही अनलिमिटेड कॉल्स और रोजाना 100 मुफ्त एसएमएस मिलते हैं। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 14 नवम्बर। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को पेट्रोल के दाम में 13 पैसे जबकि डीजल के रेट में 12 पैसे की कमी देखी गई। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 77.43 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है जबकि डीजल 72.19 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
    मुंबई में भी पेट्रोल की गिरती कीमतों के चलते लोगों ने राहत की सांस ली है। मुंबई में बुधवार को पेट्रोल 82.94 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है जबकि डीजल 75.64 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
    चेन्नई में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखी गई है। चेन्नई में पेट्रोल 13 पैसे की कमी के बाद  80.42 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है जबकि डीजल 76.30 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में बुधवार को पेट्रोल की कीमत 79.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है जबकि डीजल 74.05 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
    कच्चे तेल के बड़े एक्सपोर्टर सऊदी अरब ने तेल के उत्पादन में कटौती करने का ऐलान किया है। दिसंबर से सऊदी अरब 50 लाख बैरल प्रति दिन की कटौती करेगा। इस फैसले के तुरंद बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम 2 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं। इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अन्य देश में उत्पादन में कटौती करते है तो कच्चा तेल फिर से महंगा हो जाएगा। लिहाजा भारत में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें फिर से बढऩे लगेंगी।  (न्यूज 18)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • आपके हाथ में जल्द 75 रुपये का सिक्का आने वाला है। केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ओर से पहली बार तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 75 रुपये का स्मारक सिक्का यानी कोमेमोरेटिव कॉइन जारी करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
    नोटिफिकेशन के अनुसार, 75 रुपये के इस सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा। इसमें 50 फीसदी चांदी, 40 फीसदी तांबा और 5-5 फीसदी निकल व जिंक धातु होगी। सिक्के पर सेल्युलर जेल के पीछे तिरंगे को सलामी देते नेताजी सुभाष चंद्र बोस का चित्र बना होगा। पोर्ट्रेट के नीचे 75 अंक का मतलब 'वर्षगांठÓ होगा। सिक्के पर देवनागरी और अंग्रेजी में 'प्रथम ध्वजारोहण दिवसÓ लिखा होगा।
    सुभाष चंद्र बोस ने पोर्ट ब्लेयर में 30 दिसंबर, 1943 को पहली बार तिरंगा फहराया था, 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहाराया था और बोस द्वारा गठित आजाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर स्मारक पट्टिका का अनावरण भी किया था। (न्यूज 18)

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 14 नवम्बर। साठ सेवानिवृत्त अधिकारियों ने कैग को पत्र लिखकर उस पर नोटबंदी और राफेल सौदे पर ऑडिट रिपोर्ट को जान-बूझकर टालने का आरोप लगाया है ताकि अगले साल चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार की किरकिरी नहीं हो।
    पूर्व अधिकारियों ने एक पत्र में कहा है कि नोटबंदी और राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर ऑडिट रिपोर्ट लाने में अस्वाभाविक और अकारण देरी पर चिंता पैदा हो रही है और रिपोर्ट संसद के शीत सत्र में पटल पर रखी जानी चाहिए।
    पत्र में कहा गया है कि समय पर नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर ऑडिट रिपोर्ट जारी करने में देरी को पक्षपातपूर्ण कदम कहा जाएगा और इससे संस्थान की साख पर संकट पैदा हो सकता है।
    नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। नोटबंदी पर मीडिया की खबरों का संदर्भ देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि तत्कालीन नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक शशि कांत शर्मा ने कहा था कि ऑडिट में नोटों की छपाई पर खर्च, रिजर्व बैंक के लाभांश भुगतान तथा बैंकिंग लेन-देन के आंकड़ों को शामिल किया जाएगा।
    पत्र में कहा गया है, इस तरह की ऑडिट रिपोर्ट पर पिछला बयान 20 महीने पहले आया था लेकिन नोटबंदी पर वादे के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
    पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों में पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलियो रिबेरो, पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी से सोशल एक्टिविस्ट बनीं अरुणा रॉय, पुणे के पूर्व पुलिस आयुक्त मीरन बोरवंकर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, इटली में पूर्व दूत केपी फेबियन समेत अन्य पूर्व अधिकारी हैं। पत्र में दावा किया गया है कि ऐसी खबरें थीं कि राफेल सौदे पर ऑडिट सितंबर 2018 तक हो जाएगा लेकिन संबंधित फाइलों का कैग ने अब तक परीक्षण नहीं किया है।
    पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि टू जी, कोयला, आदर्श, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले पर कैग की ऑडिट रिपोर्ट से तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यों के बारे में जनधारणा प्रभावित हुई थी और विभिन्न हलकों से इसे सराहना मिली थी।
    उन्होंने कहा है, लेकिन, ऐसी धारणा बनाने का आधार बढ़ रहा है कि कैग मई 2019 के चुनाव के पहले नोटबंदी और राफेल सौदे पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में जान-बूझकर देरी कर रहा है ताकि मौजूदा सरकार की किरकिरी न हो। पत्र में कहा गया है, नोटबंदी और राफेल सौदे को लेकर समय पर ऑडिट रिपोर्ट पेश करने में कैग की नाकामी को पक्षपातपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा सकता है और इस महत्वपूर्ण संस्था की साख पर संकट पैदा हो सकता है। (भाषा)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 14 नवम्बर । ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक बिन्नी बंसल ने कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। बिन्नी बंसल पर 'व्यक्तिगत दुव्र्यवहारÓ के गंभीर आरोप लगे थे, साथ ही कंपनी की तरफ से ही इस मामले को लेकर उनके खिलाफ जांच कराई जा रही थी।
    इस बीच बिन्नी बंसल के इस्तीफे को लेकर फ्लिपकार्ट की पैतृक कंपनी वॉलमार्ट ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, बिन्नी बंसल ने कंपनी के सीईओ पद से तुरंत प्रभाव के साथ अपना इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन पर लगे व्यक्तिगत दुर्व्यवहार के आरोपों की फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट ने स्वतंत्र रूप से जांच कराई थी। हालांकि खुद पर लगे आरोपों का बिन्नी बंसल ने खंडन किया था। इस बयान में आगे कहा गया है, हालांकि इस जांच में बंसल के खिलाफ दर्ज शिकायतों को सही साबित करने वाले सबूत नहीं हैं। लेकिन उनके कुछ निर्णयों में पारदर्शिता का अभाव जरूर पाया गया था जिसके मद्देनजर कंपनी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
    इससे पहले इसी साल नौ मई को अमरीकी मूल की वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदते हुए इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था। उस अधिग्रहण के बाद फ्लिपकार्ट के एक अन्य सह-संस्थापक सचिन बंसल ने यह कंपनी छोड़ दी थी जबकि बिन्नी बंसल इसके साथ जुड़े रहे थे। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 13 नवम्बर । राफेल डील को लेकर मचे सियासी बवाल के बीच इस फाइटर जेट को बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपियर ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है। ट्रैपियर ने एक इंटरव्यू में इस डील को लेकर राहुल के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। एएनआई को दिए इंटरव्यू में ट्रैपियर ने कहा, मैं झूठ नहीं बोलता। मैं पहले जो भी कहा और अब कह रहा हूं वह सच और सही है। उन्होंने कहा कि दसॉ-रिलायंस जॉइंट वेंचर (जेवी) के ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट को लेकर पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का बयान सही नहीं था। 
    राहुल गांधी ने 2 नवंबर को दसॉ सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दसॉ ने अनिल अंबानी की कंपनी को 284 करोड़ रुपये दिए और अंबानी ने उसी पैसे से जमीन खरीदी। दसॉ के सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए राहुल ने तंज कसा था कि दसॉ केवल मोदी को बचा रही है और जांच होगी, तो पीएम नहीं टिक पाएंगे।
    ट्रैपियर से जब पूछा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि दसॉ रिलायंस ग्रुप को ऑफसेट पार्टनर चुनने को लेकर झूठ बोल रहा है तो उन्होंने कहा, मेरी छवि झूठ बोलने वाले व्यक्ति की नहीं है। मेरी पॉजिशन पर आकर आप झूठ बोलने का रिस्क नहीं ले सकते। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2 नवंबर को आरोप लगाया था कि दसॉ ने नुकसान झेल रही अनिल अंबानी की कंपनी में 284 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। उन्होंने कहा था, यह साफ है कि दसॉ सीईओ झूठ बोल रहे हैं। यदि इस मामले में जांच होती है तो मोदी को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
    अपने इंटरव्यू में ट्रैपियर ने कहा उनका कांग्रेस पार्टी के साथ डील करने का पुराना अनुभव है। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा की गई इस टिप्पणी से वह दुखी हैं। ट्रैपियर ने कहा, हमारा कांग्रेस पार्टी के साथ लंबा अनुभव है। हमारी 1953 में भारत के साथ हुई डील भारत के पहले पीएम नेहरू के साथ थी। हम लंबे समय से भारत के साथ काम कर रहे हैं। हम किसी पार्टी के लिए काम नहीं करते हैं। हम भारतीय वायु सेना और भारत सरकार को फाइटर जेट जैसे रणनीतिक प्रॉडक्ट सप्लाई करते हैं। यह सबसे ज्यादा जरूरी है।
    जब उनसे रिलायंस को ही ऑफसेट पार्टनर चुनने के पीछे के कारणों पर दबाव देकर पूछा गया, जबकि रिलायंस के पास फाइटर जेट बनाने का कोई अनुभव नहीं है। ट्रैपियर ने साफ किया कि इसमें निवेश किया गया पैसा सीधे तौर पर रिलायंस को नहीं जाएगा, बल्कि यह एक जॉइंट वेंचर को जाएगा। दसॉ भी इसका हिस्सा है। 
    उन्होंने कहा, हम रिलायंस में पैसा नहीं लगा रहे हैं। यह पैसा जॉइंट वेंचर में लगाया जाएगा। जहां तक इस डील की बात है, मेरे पास इंजिनियर्स और वर्कर्स हैं, जो इसे लेकर काफी आगे हैं। वहीं दूसरी तरफ, हमारे पास रिलायंस जैसी भारतीय कंपनी है, जो इस जॉइंट वेंचर में पैसा लगा रही है और वह ये अपने देश को विकसित करने के लिए कर रहे हैं। इसलिए कंपनी यह भी जान सकेगी कि एयरक्राफ्ट कैसे बनाए जाते हैं।
    सरकार के बनाए गए नियमों के मुताबिक, इस डील में रिलायंस 51 प्रतिशत पैसा लगाएगा और दसॉ को 49 प्रतिशत पैसा लगाना है। उन्होंने बताया, हमें एक साथ 800 करोड़ रुपये 50:50 के अनुपात में लगाने हैं। कुछ समय के लिए काम शुरू करने और कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए हमने पहले ही 40 करोड़ रुपये लगाए हैं, लेकिन यह 800 करोड़ रुपये तक बढ़ेगा। इसका मतलब है कि दसॉ को आने वाले 5 सालों में 400 करोड़ रुपये लगाने हैं।
    ट्रैपियर ने कहा कि ऑफसेट के लिए दसॉ के पास 7 साल हैं। ट्रैपियर ने कहा, पहले 3 साल के दौरान, हम इस बात की जानकारी नहीं देंगे कि हम किसके साथ काम कर रहे हैं। हमनें पहले 30 कंपनियों के साथ अग्रीमेंट किया है, जो कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक 40 प्रतिशत ऑफसेट हिस्सा है। इसमें रिलायंस का हिस्सा 10 प्रतिशत है। बाकी का 30 प्रतिशत दसॉ और अन्य कंपनियों के बीच है।
    ट्रैपियर ने राफेल की कीमत को लेकर भी मोदी सरकार के दावे की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एयरक्राफ्ट 9 प्रतिशत सस्ता है। उन्होंने कहा, जब आप 18 फ्लाइवे की कीमत से तुलना करते हैं तो 36 का दाम भी वही है। 36, 18 का दोगुना है। इसलिए यह रकम भी दोगुनी होनी चाहिए थी। क्योंकि यह गवर्नमेंट टु गवर्नमेंट डील है, इसलिए कीमत पर मोल-भाव हुआ। मुझे इसकी कीमत 9 प्रतिशत कम करनी पड़ी।
    जब ट्रैपियर से एचएएल के साथ शुरुआती अग्रीमेंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यदि पूर्व की 126 एयरक्राफ्ट डील आगे बढ़ती तो वह एचएएल (हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड) और मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस के साथ काम करने में भी कोई परेशानी नहीं होती। उन्होंने कहा, क्योंकि 126 एयरक्राफ्ट की डील सहजता से नहीं हुई और भारत सरकार को फ्रांस से तुरंत 36 एयरक्राफ्ट डील करनी पड़ी। इसके बाद मैंने रिलांयस के साथ काम जारी रखने का फैसला किया। यहां तक कि एचएएल ने भी पिछले कुछ दिन पहले कहा था कि वे इस ऑफसेट का हिस्सा होने में रूचि नहीं रखते हैं। इसके बाद मैंने और रिलायंस ने नई प्राइवेट कंपनी में निवेश करने का फैसला लिया
    दसॉ के सीईओ ने बताया कि इस डील के लिए हम कई अन्य कंपनियों के साथ भी बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, बिल्कुल हम लोग टाटा या अन्य किसी बड़े घराने के साथ जा सकते थे। उस समय दैसॉ को इसके लिए आगे बढऩे का फैसला नहीं दिया गया था। साल 2011 में टाटा भी अन्य फ्लाइंग कंपनियों के साथ बात कर रहे थे। इसके बाद हम लोगों ने रिलायंस के साथ आगे बढऩे का फैसला किया। क्योंकि उनके पास कई बड़े इंजिनियरिंग प्रॉजेक्ट को पूरा करने का अनुभव है।
    दसॉ के सीईओ ने कहा कि इस एयरक्राफ्ट में सभी जरूरी उपकरण हैं, लेकिन हथियार और मिसाइल नहीं। उन्होंने बताया, हथियारों को अन्य कॉन्ट्रैक्ट के तहत भेजा जाएगा। लेकिन हथियार को छोड़कर विमान के साथ सब कुछ दसॉ द्वारा भेजा जाएगा। (एएनआई)

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • मुंबई, 13 नवम्बर। खुदरा महंगाई दर के मोर्चे पर ग्राहकों को राहत मिलती दिखाई दे रही है। अक्टूबर 2018 में देश में खुदरा महंगाई 0.39 प्रतिशत घटकर 3.31 प्रतिशत के स्तर पर आ गई। सितंबर में यह 3.70 प्रतिशत थी। वहीं सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की विकास दर 4.5 प्रतिशत रही जो पिछले चार माह के न्यूनतम स्तर पर है। सितंबर 2017 के बाद खुदरा महंगाई अब तक के निचले स्तर पर है। उस समय यह 3.28 प्रतिशत थी। अक्टूबर 2017 में यह 3.58 प्रतिशत रही थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) अक्टूबर में नकारात्मक 0.86 प्रतिशत रहा, जो सितंबर से 0.51 प्रतिशत अधिक है। खुदरा महंगाई में गिरावट प्रमुख तौर पर फल, प्रोटीन वाले उत्पाद तथा खाने पीने की वस्तुओं के दाम घटने से आई है।
    सीएसओ की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में खाद्य वस्तुओं के दाम 0.86 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। सितंबर में इनकी कीमतों में करीब 0.51 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई थी। आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में सब्जियां 8.06 प्रतिशत सस्ती हुईं, जबकि सितंबर में इनकी कीमतों में 4.15 प्रतिशत की कमी आई थी। औद्योगिक उत्पादन में सितंबर महीने में 4.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। मुख्य रूप से खनन क्षेत्र के खराब प्रदर्शन तथा पूंजीगत सामान के कमजोर उठाव से औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर पर असर पड़ा। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार औद्योगिक वृद्धि दर सितंबर 2017 में 4.1 प्रतिशत थी। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 13 नवम्बर । केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक (आरबीआई) में टकराव की बढ़ती खबरों के बीच संस्था के मुखिया उर्जित पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। यह मुलाकात बीते हफ्ते हुई। इसमें ब्याज दरों से लेकर फंसे हुए कर्ज यानी एनपीओ को लेकर प्रावधानों तक उन तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई जो दोनों पक्षों के बीच विवाद का विषय बने हुए हैं। अखबार के मुताबिक उर्जित पटेल वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मिले हैं। बीते कुछ समय से केंद्र और आरबीआई के बीच टकराव की खबरें गर्म हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि इससे परेशान उर्जित पटेल इस्तीफा भी दे सकते हैं। (टाईम्स ऑफ इंडिया)

     

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Posted Date : 11-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 11 नवम्बर। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक इंटरव्यू में अपने बारे में बताया है। उन्होंने इस इंटरव्यू में यह भी बताया है कि कैसे चेन्नई में पले बढ़े हैं। इस इंटरव्यू में उन्होंने पहले की अपनी स्थिति के बारे में भी बताया है।
    उन्होंने इंटरव्यू में कहा है, मेरी लाइफ सिंपल रही है जो अभी की दुनिया के मुकाबले काफी बेहतर थी। हम एक मामूली घर में रहते थे जिसे किराए पर भी लगाया गया था। हम कमरे के फर्श पर सोते थे। मैं जब बड़ा हो रहा था तो सूखा पड़ा था जो काफी चिंताजनक था। यहां तक कि आज भी मैं बेड के पास पानी की बॉटल रखे बिना नहीं सोता हूं। दूसरे घरों में रेफ्रिज़्रेटर थे, लेकिन बाद में हमारे यहां आया जो हमारे लिए बड़ी बात थी।
    बचपन में सुंदर पिचाई के पास पढऩे का काफी टाइम था। उन्होंने कहा है, मैं जब मौका मिलता है पढ़ता हूं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पहले सुंदर पिचाई ने आईआईटी खडग़पुर से पढ़ाई की है। स्टैनफोर्ड में उन्होंने मेटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमएस किया है। उन्होंने कहा कि तब कंप्यूटर और लैब्स का ऐक्सेस मिलना उनके लिए बड़ी बात हुआ करती थी।
    सुंदर पिचाई ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसलवेनिया के वॉर्टन स्कूल से एमबीए भी किया है। उन्होंने 2004 में सर्च इंजन गूगल ज्वाइन किया और तब वो गूगल क्रोम ब्राउजर डेवेलप करने वाली टीम का हिस्सा थे। दस साल बाद उन्हें प्रोडक्ट इंचार्ज बनाया गया जिसमें सर्च, ऐड और एंड्रॉयड शामिल थे। साल 2015 में उन्हें गूगल का सीईओ बनाया गया और पिछले साल गूगल की पेरेंट कंपनी ऐल्फाबेट के बोर्ड में भी उन्हें जगह दी गई।
    उन्होंने इंटरव्यू में यह भी बताया है कि उनका बेटा 11 साल का है और वो इथिरम (क्रिप्टोकरेंसी) माइन करता है और पैसे कमाता है। उसे इस बात की समझ हो रही है कि दुनिया कैसा काम कर रही है कैसे चीजें चल रही हैं।  (न्यूयॉर्क टाईम्स)

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Posted Date : 10-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 10 नवम्बर । इस साल जुलाई से सितंबर की तिमाही में अमरीका को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार बन गया। शोध कंपनी कैनालिस के एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक साल की तीसरी तिमाही में भारत में 4.04 करोड़ स्मार्टफोन की बिक्री हुई। वहीं 10.06 करोड़ स्मार्टफोन की बिक्री के साथ चीन पहले स्थान पर रहा। अमरीका में इस अवधि में चार करोड़ स्मार्टफोन बिके। 
    कैनालिस ने कहा कि जुलाई-सितंबर, 2018 के दौरान दुनियाभर में सालाना आधार पर स्मार्टफोन की बिक्री में 7.2 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। इस अवधि में दुनिया भर में 34.89 करोड़ स्मार्टफोन की बिक्री हुई। कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह लगातार चौथा साल है, जब स्मार्टफोन की बिक्री में कमी आयी है।
    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने इस तिमाही में अमरीका को पीछे छोडक़र दूसरा स्थान हासिल किया है पर दोनों ही देशों को कमजोर सीजन के प्रदर्शन के कारण झटका लगा है। कैनालिस की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 के बाद ये सबसे खराब तिमाही है।
    टॉप 10 में से 7 बाजारों में सालाना आधार पर बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। सिर्फ इंडोनेशिया ने 13.2 फीसदी, रूस ने 11.5 फीसदी और जर्मनी ने 2.4 फीसदी की तेजी दर्ज की। सैमसंग ने सबसे ज्यादा 20.4 फीसदी फोन बेचे। इसके बाद हुवई ने 14.9, एप्पल ने 13.4 फीसदी, शाओमी ने 9.6 फीसदी और ओप्पो ने 8.9 फीसदी स्मार्टफोन बेचे।  (भाषा)

     

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Posted Date : 09-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 9 नवम्बर । पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर बृहस्पतिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार किया और कहा कि अर्थव्यवस्था की तबाही वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है तथा इसके घाव गहरे होते जा रहे हैं।
    सिंह ने एक बयान में यह भी कहा कि मोदी सरकार को अब ऐसा कोई आर्थिक कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो।
    उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में त्रुटिपूर्ण ढंग से और सही तरीके से विचार किए बिना नोटबंदी का कदम उठाया था। आज उसके दो साल पूरे हो गए। नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो कहर बरपा, वह अब सबके सामने है। नोटबंदी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, पेशे या संप्रदाय का हो।
    सिंह ने कहा, अक्सर कहा जाता है कि वक्त सभी जख्मों को भर देता है लेकिन नोटबंदी के जख्म-दिन-ब-दिन और गहरे होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के मझोले और छोटे कारोबार अब भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।
    पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट आई, उसके और भी असर देखे जा रहे हैं। छोटे और मंझोले कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया। अर्थव्यवस्था लगातार जूझती दिखाई पड़ रही है जिसका बुरा असर रोजगार पर पड़ रहा है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। बुनियादी ढांचे के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, नोटबंदी के कारण रुपये का स्तर गिरा है जिससे वृहद आर्थिक आंकड़े भी प्रभावित हुए हैं।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थाी जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे। उधर, कांग्रेस पार्टी गुरुवार को नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नोटबंदी लागू कर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए माफी मांगने की मांग की है।
    उधर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि नोटबंदी से औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ और कर आधार भी बढ़ा। इससे सरकार के पास गरीबों के हित में काम करने और बुनियादी ढांचे का विकास करने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए।  (भाषा)

     

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Posted Date : 06-Nov-2018
  • ट्रिपल धमाका और  लकी ड्रॉ आकर्षण का केन्द्र रहे

    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    रायपुर, 6 नवम्बर। धनतेरस के मौके पर लक्ष्मी इलेक्ट्रॉनिक्स में मोबाइल की तिगुनी खरीदी हुई। ट्रिपल धमाका के साथ-साथ लकी ड्रॉ ग्राहकों के आकर्षण का केन्द्र रहा। 

    संचालक राजेश वासवानी ने बताया कि उम्मीद से ज्यादा ग्राहकों ने मोबाइल खरीदा। सैमसंग, ओपो, एप्पल और विवो के 6 हजार से 1 लाख 50 हजार के मोबाइल की बिक्री जबरदस्त रही। ट्रिपल धमाका, लकी ड्रॉ की योजनाओं से खासा रिस्पांस मिला।

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Posted Date : 06-Nov-2018
  • डुकाटी भारत में अपनी सुपर बाइक बनाने के लिए काफी प्रसिद्व है। हर बाइकर की पहली पसंद मानो डुकाटी ही है फिलहाल आपको बता दें,मिलान में EICMA मोटर शो के दौरान डुकाटी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक साइकिल को पेश कर दिया है। जिसका कंपनी ने नाम MIG-RR रखा है।
    इस साइकिल को डुकाटी कंपनी ने Thok Ebikes के साथ मिलकर बनाया है। बता दें, कि Thok इलेक्ट्रिक माउंटेन बाइक बनाने के लिए मशहुर है। जिस कारण इस साइकिल में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं जो इसे अलग बनाते हैं। साइकिल की खास बात यह है कि यह इंड्यूरो रेसिंग से इंपायर्ड है। 

    फीचर्स की बात करें तो इस साइकिल में इसमें 29 इंच का फ्रंट व्हील दिया गया है। जो किसी भी रास्ते पर आसानी से चलने में सक्षम है। साइकिल के रियर में 27.5 इंच का व्हील दिया गया है। इस इलेक्ट्रिक साइकिल में 250 वॉट की Shimano Steps E8000 मोटर कंपनी ने दी है। जो कि 70Nm का टॉर्क जनेरेट करती है। इसके साथ ही इसमें 504-Wh की बैटरी भी दी गई है (अमर उजाला)

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 5 नवम्बर । केंद्रीय सूचना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची जारी नहीं करने को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर उर्जित पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही सीआईसीने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और आरबीआई से कहा है कि पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के द्वारा बैड लोन पर लिखे गए लेटर को सार्वजनिक किया जाए। 
    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, 50 करोड़ रुपये से अधिक के विलफुल लोन डिफॉल्टर्स के नामों की घोषणा से आरबीआई के इंकार से नाराज सीआईसीने पटेल से पूछा है कि तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के फैसले के बाद आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की वजह से आप पर क्यों ना अधिकतम पेनल्टी लगाई जाए? नोटिस का जवाब उर्जित पटेल को 16 नवंबर से पहले देना है। 
    सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा, कि इस मामले में सीपीआईओ को सजा देने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि उन्होंने टॉप अथॉरिटीज के निर्देशों पर काम किया। उन्होंने कहा कि आयोग इसके लिए आरबीआई गवर्नर को जिम्मेदार मानता है और इसलिए उन्हें नोटिस दिया गया है। 
    सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें उन्होंने जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के नाम का खुलासा करने को कहा था। सीआईसी ने उल्लेखित किया है कि पटेल ने गत 20 सितंबर को सीवीसी में कहा था कि सतर्कता पर सीवीसी की ओर से जारी दिशानिर्देश का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देना और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनों में समग्र सतर्कता प्रशासन को बेहतर बनाना है। 
    सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा, आयोग का मानना है कि आरटीआई नीति को लेकर जो आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर कहते हैं और जो उनकी वेबसाइट कहती है उसमें कोई मेल नहीं है। जयंती लाल मामले में सीआईसी के आदेश की सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुष्टि किए जाने के बावजूद सतर्कता रिपोर्टों और निरीक्षण रिपोर्टों में अत्यधिक गोपनीयता रखी जा रही है।
    उन्होंने आरबीआई के संतोष कुमार पाणिग्रही की इन दलीलों को भी खारिज कर दिया कि सूचना के अधिकार कानून की धारा 22 उनके द्वारा उद्धृत उन विभिन्न कानूनों को दरकिनार नहीं करती जो जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा करने से रोकते हैं और इसलिए आरबीआई को खुलासे के दायित्व से मुक्त कर दिया जाना चाहिए। 
    आचार्युलू ने कहा कि पाणिग्रही की यह दूसरी दलील भी आधारहीन है कि मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक जनहित याचिका उन्हें खुलासा करने से रोकेगी क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित ऐसा कोई अंतरिम आदेश पेश नहीं किया जो जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा करने से रोकता है या जो सीआईसी के सामने सुनवाई के खिलाफ हो। 
    इससे पहले सितंबर में भी सीआईसी ने बैंक लोन के विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी फाइनैंस मिनिस्ट्री, मिनिस्ट्री फॉर स्टैटिस्टिक्स ऐंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन और आरबीआई को सार्वजनिक करने के लिए कहा था। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने कहा था कि किसान मामूली रकम पर डिफॉल्ट करते हैं तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाते हैं। वहीं, 50 करोड़ से ज्यादा पर डिफॉल्ट करने वालों को छूट दे दी जाती है। 
    उन्होंने कहा था कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा लोन का डिफॉल्ट करने वालों को वन टाइम सेटलमेंट के नाम पर ब्याज माफी और कई तरह की दूसरी सुविधाएं और बड़ी रियायतें दी जाती हैं और इज्जत बचाने के लिए उनके नाम भी पब्लिक से छिपाए जाते हैं। आयोग ने कहा कि 1998 से 2018 के बीच 30,000 से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की क्योंकि वे कर्ज चुका पाने में नाकाम रहने के कारण शर्मिंदा थे। (पीटीआई)

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 5 नवम्बर। भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में बड़ा घाटा हुआ है। संयुक्त आधार पर जोड़े गए इस घाटे का आंकलन 1,009 करोड़ रुपए किया जा रहा है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने 2,482.78 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। बता दें कि लंबे समय तक घरेलू वाहन सेगमेंट में पिछडऩे के बाद टाटा मोटर्स बीते दो साल में हैचबैक टिआगो, सेडान टिगोर और सबकॉम्पैक एसयूवी नेक्सन की मदद से वह स्थान हासिल करने में सफल होती दिखी थी जिसकी वह हकदार है। लेकिन अपनी ब्रिटिश इकाई जगुआर लैंडरोवर (जेएलआर) के कमजोर प्रदर्शन की वजह से कंपनी को यह नुकसान झेलना पड़ा है।
    बताया जा रहा है कि जेएलआर के प्रमुख बाजार 'चीनÓ में चल रहे उतार-चढ़ाव के चलते वहां कंपनी की रीटेल बिक्री 44 फीसदी घटकर 21,096 यूनिट तक पहुंच गई। वहीं वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 13 प्रतिशत गिरकर 1,29,887 वाहन पर ही सिमट गया। हालांकि इस दौरान टाटा मोटर्स को लिए घरेलू बाजार 'भारतÓ से बड़ी राहत मिली है जहां कंपनी 33 फीसदी बढ़त के साथ 17,759 करोड़ रुपए का व्यापार करने में सफल रही जिसमें उसे 109 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। इसके लाभ के पीछे बाजार से मिल रही शानदार प्रतिक्रिया के साथ 2016 में लागू की गई लागत में कटौती जैसी रणनीतियों ने भी बराबर की भूमिका निभाई है।  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 5 नवम्बर । दमदार बाइक बनाने के लिए पहचानी जाने वाली रॉयल एनफील्ड ने अक्टूबर महीने में 70,000 से अधिक बाइकों की बिक्री कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हालांकि पिछले साल से तुलना करें तो इस आंकड़े के साथ कंपनी की बिक्री सिर्फ एक प्रतिशत बढ़ पाई है। जानकारों का कहना है कि यदि रॉयल एनफील्ड की एक फैक्ट्री में कर्मचारियों की हड़ताल न हुई होती तो उत्पादन बढऩे से पिछले महीने कुल बिक्री में पच्चीस हजार यूनिट तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। इसके अलावा अक्टूबर में कंपनी की सिर्फ 407 बाइकें ही निर्यात होने की वजह से भी यह आंकड़ा आगे नहीं बढ़ पाया। इसकी प्रमुख वजह के तौर पर कंपनी का पूरा ध्यान अपनी दो नई पेशकश 'इंटरसेप्टर 650Ó और 'कॉन्टीनेंटल जीटी 650Ó के निर्माण पर होना बताया जा रहा है।
    रॉयल एनफील्ड ने अपनी सबसे दमदार इन दो बाइकों को पिछले महीने वैश्विक स्तर पर लॉन्च कर दिया है। बाजार में लंबे समय से इन बाइकों का इंतजार किया जा रहा था। कंपनी ने यूएस बाजार में इंटरसेप्टर के लिए 5799 डॉलर यानी करीब 4.20 लाख रुपए और कॉन्टीनेंटल जीटी के लिए 5999 डॉलर यानी तकरीबन 4.35 रुपए की शुरुआती कीमत तय की है। इन बाइकों की कीमत इनकी कलर स्कीम के हिसाब से तय की गई है जो अधिकतम 6749 डॉलर यानी 4.90 लाख रुपए तक जाती है। फीचर्स के लिहाज से देखें तो इन बाइकों के फ्रंट व्हील में टेलिस्कोपिक फोर्क व 320 एमएम का डिस्क ब्रेक और रियर व्हील के साथ गैस चार्ज्ड ट्विन शॉक सस्पेंशन व 240 एमएम का डिस्क ब्रेक लगाया गया हैं। दोनों बाइकों के साथ स्टैंडर्ड तौर पर दिया गया एंटी ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) चलते समय इन्हें बेहतरीन संतुलन देता है।
    जैसा कि नाम से स्पष्ट है कंपनी ने इन दोनों बाइकों में 650 (648) सीसी का इंजन दिया है जो एयरकूल्ड, एसओएचसी और फ्यूल इंजेक्टेड पैरेलल-ट्विन जैसी खूबियों से लैस है। यह इंजन 7250 आरपीएम पर 47 बीएचपी की अधिकतम पॉवर के साथ 5250 आरपीएम पर 52 एनएम का पीक टॉर्क पैदा कर सकता है। साथ ही इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स से जोड़ा गया है जो स्लिप-असिस्ट क्लच के साथ आता है। कंपनी का दावा है कि इंटरसेप्टर-650 और कॉन्टिनेंटल जीटी-650 163 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम होने के अलावा कंपनी की अब तक की सबसे तेजरफ्तार बाइक हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत में भी ये दोनों बाइकें जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएंगी। साथ ही इस बात की भी संभावना है कि भारतीय बाजार को ध्यान में रखते हुए इन बाइकों की कीमत घटाकर पेश की जा सकती है। जानकारों का कहना है कि भारत में ये देसी दमदार बाइकें बीएमडब्ल्यू जी-310आर, केटीएम 390 ड्यूक और कावासाकी निन्जा-300 को कड़ी टक्कर देंगी। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • नई दिल्ला, 5 नवंबर । भारत का गैर बैंकिंग सेक्टर (एनबीएफसी) और हाउसिंग फायनेंस कंपनियां (एचएफसी) गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही हैं। लिक्विडिटी क्रच (फंड की कमी) के कारण हालात और भी खराब हो हो गए हैं। आर्थिक मामलों के विभाग ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। डीईए का कहना है कि यदि आने वाले 6 सप्ताह में बाजार में (डेट मार्केट) पर्याप्त पैसों की आपूर्ति नहीं की गई तो कई नॉन-बैंकिंग फायनेंस और हाउसिंग फायनेंस कंपनियों के सामने डिफॉल्ट होने का खतरा पैदा हो जाएगा। डीईए ने अपने पत्र में इस स्थिति से बचने के लिए बाजार में अविलंब अतिरिक्त फंड मुहैया कराने की बात कही है। डीईए ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को 26 अक्टूबर को चि_ी लिखी थी। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर लिजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के डिफॉल्ट घोषित होने के बाद वित्तीय स्थायित्व पर पडऩे वाले प्रभावों की चर्चा की गई है। 
    आईएल एंड एफएस 91, 000 करोड़ रुपये का लोन चुकता करने में विफल रही थी, जिसके बाद वित्तीय स्थायित्व को बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा था। केंद्र ने आईएल एंड एफएस के बोर्ड को भंग कर नया बोर्ड भी गठित कर दिया है। डीईए ने स्पष्ट शब्दों में मौजूदा वित्तीय स्थिति को कमजोर करार दिया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में इस पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि पैसों की किल्लत को दूर न करने से आर्थिक विकास पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ेगा। कंपनी मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास है।
    दिसंबर तक चुकाना है लोन- कंपनी मामलों के मंत्रालय को लिखे पत्र में डीईए ने कहा कि यह स्थिति ऐसे समय उत्पन्न हुई है जब भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर सामने आया है। डीईए के मुताबिक, एनबीएफसी और एचएफसी को दिसंबर, 2018 के अंत तक तकरीबन 2 लाख करोड़ रुपये का लोन चुकता करना है। आर्थिक मामलों के विभाग का मानना है कि अगर फंड जुटाने की रफ्तार अक्टूबर के पहले हाफ की तरह ही रही तो साल के अंत तक 1 लाख करोड़ रुपये का गैप आ जाएगा। डीईए के अनुसार, अक्टूबर के पहले हाफ में अगस्त की तुलना में फंड जुटाने की दर 68 प्रतिशत (महज 20,000 करोड़ रुपये) तक कम रही। इसके अलावा कंपनी मामलों के मंत्रालय को यह भी बताया गया है कि जनवरी-मार्च 2019 की अवधि में 2।7 लाख करोड़ रुपये भी चुकाने हैं। डीईए ने लिखा, अतिरिक्त फंड न मिलने की स्थिति में 6 सप्ताह के अंदर कई एनबीएफसी और एचएफसी  डिफॉल्ट के कगार पर आ जाएंगी। इससे बेहतर उत्पादन करने वाले सेक्टर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
    आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच टकराव की वजह- जोखिम वाले कर्ज (एनपीए) की समस्या को देखते हुए आरबीआई ने लोन देने और वसूली के मानक बेहद सख्त कर दिए हैं। इसके कारण बैंकिंग सेक्टर भी सतर्क हो गया है और कर्ज देने में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। खासकर कमजोर वित्तीय स्थिति वाले बैंकों के लिए कर्ज देना और कठिन हो गया है। आरबीआई ने लोन देने और उसकी वसूली में कोताही बरतने वाले सरकारी क्षेत्र के कई बैंकों को पीसीए (प्रॉम्प्ट करेक्टिव मेजर) की श्रेणी में डाल दिया है। ऐसे में इन बैंकों के लिए कर्ज देना आसान नहीं रह गया है, लिहाजा बाजार में लिच्ििडटी क्रंच की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे एनबीएफसी और एचएफसी के सामने गंभीर आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मोदी सरकार चाहती है कि आरबीआई बाजार में पर्याप्त फंड मुहैया कराने के लिए और उपाय करे। साथ ही कमजोर वित्तीय स्थिति वाले बैंकों को लोन देने में ढील दी जाए। (जनसत्ता)

     

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