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Posted Date : 26-Apr-2018
  • न छात्र, न नौकरी मिल रही

    नई दिल्ली, 26 अप्रैल । देश के सौ से ज्यादा मैनेजमेंट संस्थानों ने स्वैच्छिक समापन के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) में आवेदन किया है। इस प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में छात्र पढऩे के लिए नहीं आ रहे और जिन छात्रों को डिग्री-डिप्लोमा मिल चुका है उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के जरिये नौकरियां नहीं मिल रही हैं।
    रिपोर्ट के मुताबिक अगर इन 101 संस्थानों की स्वैच्छिक समापन की अपील स्वीकार कर ली गई तो इनके बंद होने से 10 हजार सीटें खत्म हो जाएंगी। इनके अलावा कुछ संस्थानों ने केवल मैनेजमेंट कोर्स के समापन की अपील की हुई है। अगर उनका आवेदन भी मंजूर हुआ तो मैनेजमेंट की 11 हजार और सीटें नहीं रहेंगी। भारत में एआईसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त 3 हजारमैनेजमेंट संस्थान हैं जहां एमबीए डिग्री और पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा कराए जाते हैं।
    एआईसीटीई के डेटा से पता चलता है कि कुल 101 मैनेजमेंट संस्थानों ने स्वैच्छिक समापन के लिए लिखित अपील की है। इनमें से ज्यादातर संस्थान उत्तर प्रदेश (37) के हैं। दूसरे नंबर पर कर्नाटक और महाराष्ट्र हैं। वहां 10-10 संस्थानों ने स्वैच्छिक समापन के लिए एआईसीटीई को लिखा है। खबर के मुताबिक ज्यादातर आवेदनों को स्वीकार किया जा सकता है। साल 2016-17 और 2015-16 में भी क्रमश: 76 और 66 मैनेजमेंट संस्थान इसी तरह समाप्त कर दिए गए थे। बता दें कि ये दोनों ही साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे नहीं थे।
    हाल के वर्षों में ये मैनेजमेंट संस्थान अधिकतर छात्रों को नौकरी नहीं दिलवा पाए हैं। साल 2016-17 में मात्र 47 प्रतिशत (करीब डेढ़ लाख) एमबीए ग्रेजुएट छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के जरिये नौकरियां मिल पाई थीं। यह आंकड़ा उससे पिछले साल के मुकाबले चार प्रतिशत कम था। यानी 2015-16 में 51 प्रतिशत छात्रों को नौकरियां मिली थीं। वहीं, पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा करने वाले छात्रों को नौकरी मिलने में 12 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। एआईसीटीई के पूर्व अध्यक्ष एसएस मंथा बताते हैं कि अलग-अलग विषयों की पढ़ाई करने के बाद नौकरियां नहीं मिलना एक गंभीर समस्या है और मैनेजमेंट भी इससे प्रभावित है।हिंदुस्तान टाईम्स)

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Posted Date : 26-Apr-2018
  • वॉशिंगटन, 26 अप्रैल। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कोयला जैसे ईंधन की कीमतें इस साल 20 फीसदी तक बढऩे की उम्मीद है तथा इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। विश्वबैंक ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत जैसे देशों पर इन जिंसों की कीमतें बढऩे का विपरीत प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि ये इन वस्तुओं के भारी आयात पर निर्भर हैं। विश्व बैंक ने मंगलवार को अप्रैल कमोडिटी बाजार परिदृश्य जारी किया।
    ईंधन की कीमतों में वृद्धि का उसका ताजा अनुमान अक्टूबर में जारी पिछले अनुमानों से 16 फीसदी ऊंचा है। बैंक ने कहा कि उपभोक्ताओं की मजबूत मांग और तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती से 2018 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 65 डॉलर प्रति रहने का अनुमान है, जो 2017 के 53 डॉलर प्रति बैरल से अधिक है। धातु की कीमतें इस साल नौ फीसदी अधिक रहने की उम्मीद जतायी गयी है। इसी तरह, बुवाई का रकबा कम रहने से खाद्य जिंसों औ र कच्चे माल समेत कृषि वस्तुओं की कीमतों में दो फीसदी से अधिक की तेजी रहने की उम्मीद है।
    विश्वबैंक के कार्यवाहक मुख्य अर्थशास्त्री एस देवराजन ने कहा कि वैश्विक वृद्धि और मांग में तेजी अधिकांश वस्तुओं की कीमतें बढऩे और उससे पहले के पूर्वानुमान के पीछे का महत्वपूर्ण कारक है। विश्वबैंक ने कच्चे तेल की कीमतें 2019 में औसतन 65 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, अप्रैल 2018 के बाद तेल की कीमतों में नरमी आने का अनुमान है।  (एजेंसी)

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Posted Date : 25-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 25 अप्रैल । कैश की किल्लत के बीच बैंकों की लंबी छुट्टी आने वाली है। महीने के आखिर में बैंक लगातार तीन दिन बंद रहेंगे। इसका सीधा असर एटीएम सेवाओं से लेकर बैंकिंग सर्विसेज पर पड़ सकता है। बैंक 28 से 30 अप्रैल तक लगातार 3 दिन बंद रहेंगे। ऐसे में एक बार फिर से लोगों को नकदी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। पिछले दिनों करीब 8 राज्य दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, झारखंड, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में नकदी का संकट रहा। एटीएम में कैश नहीं होने की शिकायतें मिली थीं।
    28 अप्रैल को महीने का चौथा शनिवार होने से बैंकों में छुट्टी रहेगी, सितंबर 2015 से ये व्यवस्था लागू है। 29 अप्रैल को इतवार के चलते बैंक बंद रहेंगे। इसी तरह 30 अप्रैल को सरकार की ओर से बुद्ध पूर्णिमा पर अवकाश घोषित है, इससे सभी बैंक बंद रहेंगे। बुद्ध पूर्णिमा का यह अवकाश कोषागारों के लिए भी होता है। इस तरह शुक्रवार यानी 27 अप्रैल तक ही एटीएम में कैश डाला जा सकेगा। वैसे भी इन दिनों एटीएम में क्षमता से काफी कम कैश ही चल रहा है। तीन दिन छुट्टी होने की वजह से शुक्रवार के बाद एटीएम में कैश नहीं डाला जाएगा। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल। पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर जल्दी ही टाटा समूह के साथ नई पारी शुरू करने वाले हैं। वैसे सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें ऐसा करने से पहले अगले साल जनवरी तक (एक साल के कूलिंग ऑफ पीरियड के दौरान) इंतजार करना था। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से उन्होंने इस नियम से रियायत मांगी जो उन्हें मिल भी गई। इसके बाद माना जा रहा है कि वे किसी भी वक्त टाटा समूह ज्वाइन कर सकते हैं। वहां उन्हें कंपनी मामलों का वैश्विक प्रमुख बनाया गया है।
    टाटा समूह की ओर से जयशंकर की नियुक्ति की घोषणा सोमवार को की गई। कंपनी ने इस बाबत बयान जारी किया। इसमें बताया गया, जयशंकर सीधे कंपनी प्रमुख एन चंद्रशेखरन को रिपोर्ट करेंगे। अपनी नई भूमिका के तहत वे टाटा समूह के वैश्विक कंपनी मामलों और अंतरराष्ट्रीय रणनीति के लिए जिम्मेदार होंगे। टाटा संस के सभी अंतरराष्ट्रीय कार्यालय अब आगे से जयशंकर को ही रिपोर्ट करेंगे। इस नियुक्ति पर कंपनी प्रमुख चंद्रशेखरन ने कहा, उनका (जयशंकर का) समृद्ध अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों का ज्ञान टाटा समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। खास तौर पर इसके मद्देनजर कि हम अपने ब्रांड को वैश्विक पटल पर और मजबूती देना चाहते हैं।
    जयशंकर भारतीय विदेश सेवा के 1977 बैच के अधिकारी रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। विदेश सेवा में अपने कार्यकाल के दौरान जयशंकर सिंगापुर, चीन और अमेरिका जैसे देशों में भारत के राजदूत भी रहे। भारत के विदेश सचिव के पद से वे जनवरी 2018 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डॉक्ट्रेट की डिग्री ली है। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 24-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इंग्लैंड के केंद्रीय बैंक के गवर्नर पद के लिए मुख्य दावेदारों में शामिल हो सकते हैं। इंग्लैंड की सरकार को अगले साल से बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) के लिए नया गवर्नर नियुक्त करना है और इसके लिए जिन अर्थशास्त्रियों के नाम पर विचार हो सकता है उनमें रघुराम राजन भी हैं। वे फिलहाल यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।
    फिलहाल बीओई के गवर्नर कनाडा के मार्क कार्ने हैं। वे बीओई के पहले ऐसे गवर्नर हैं जो किसी दूसरे देश से ताल्लुक रखते हैं। उनका कार्यकाल जून 2019 में खत्म हो जाएगा। इसे देखते हुए यूके चांसलर फिलिप हैमंड ने नए गवर्नर की तलाश शुरू कर दी है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगला गवर्नर भी कोई विदेशी हो सकता है।
    फाइनेंशियल टाईम्स ने अपने एक विश्लेषण के बाद बीओई के गवर्नर पद के लिए संभावित प्रतियोगियों की लिस्ट तैयार की है। इसमें रघुराम राजन के अलावा भारतीय मूल की श्रृति वडेरा भी शामिल हैं। वे ब्रिटिश बैंक सैंटेंडर यूके की प्रमुख हैं और पूर्व में ब्रिटेन की व्यापार मंत्री भी रही हैं। इसी साल जुलाई में बीओआई के गवर्नर पद के लिए विज्ञापन निकाला जा सकता है।  (टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • मुंबई, 23 अप्रैल: शेयर बाजार में आज टीसीएस के शेयरों में 2 प्रतिशत का उछाल आया और इसी के साथ कंपनी का बाजार मूल्य 100 बिलियन डॉलर के पार हो गया. इस ऊंचाई पर पहुंचने वाली टीसीएस पहली भारतीय कंपनी बन गई है. शुक्रवार के बाद सोमवार को भी टीसीएस के शेयरों में तेजी देखी गई और यह 3476.75 रुपये पर पहुंच गया. इसके साथ ही कंपनी का  बाजार मूल्य 6,64,918 करोड़ रुपये हो गया. बता दें कि शुक्रवार को भी कंपनी के शेयरों में करीब 7 प्रतिशत का उछाल देखा गया था. इस उछाल के साथ कंपनी के निवेशकों को करीब 40,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.
    वहीं आज बाजार में भारतीय रुपया डॉलर की तुलना में कुछ कमजोर हुआ. शुक्रवार को 66.12 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में सोमवार को 66.18 रुपये प्रति डॉलर का मूल्य रहा है.
    मार्च में समाप्त हुए तिमाही में कंपनी को मिले तमाम ऑडर की वजह से कंपनी ने अभी तक का सबसे बड़ा मुनाफा कमाया. गुरुवार को बाजार में कारोबार के समाप्त होने के बाद टीसीएफ ने मुनाफे की घोषणा की थी.  वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने 6,925 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जोकि 4.6 फीसदी की सालाना तथा 5.8 फीसदी की तिमाही वृद्धि दर है.
    शुक्रवार को ही टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ( टीसीएस ) का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 100 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया था. कंपनी के शेयर में 6.76 प्रतिशत का जोरदार उछाल आया. इससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 6.2 अरब डॉलर की वृद्धि हुई.  आईटी क्षेत्र की यह कंपनी 100 अरब डॉलर का बाजार पूंजीकरण हासिल करने वाली पहली सूचीबद्ध भारतीय कंपनी बनने की राह पर बढ़ गई थी. आज कंपनी ने यह हासिल कर लिया.
    कंपनी के शेयर में जोरदार तेजी के बीच उसका बाजार पूंजीकरण 41,300.92 करोड़ रुपये बढ़कर 6,52,082.92 करोड़ रुपये (98.8 अरब डॉलर ) पर पहुंच गया.
    इस साल 24 जनवरी को टीसीएस का बाजार पूंजीकरण छह लाख करोड़ रुपये के पार निकला था. बंबई शेयर बाजार में कंपनी का आज शेयर 6.76 प्रतिशत चढ़कर 3,406.40 रुपये पर पहुंच गया. दिन में कारोबार के दौरान यह एक समय 7.22 प्रतिशत चढ़कर 52 सप्ताह के उच्चस्तर 3,421.25 रुपये पर पहुंचा था.  शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी का शेयर 6.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,402.45 रुपये पर बंद हुआ. (ndtv)

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Posted Date : 23-Apr-2018
  • देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति की पेरेंट कंपनी सुज़ुकी ने इंडोनेशिया इंटरनेशनल मोटर शो में नई अर्टिगा को पेश किया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इस कार को इंडोनेशिया के साथ ही भारत में जल्द ही लॉन्च करने का मन बना चुकी है. अर्टिगा को भारत का सबसे किफायती मल्टीपरपज़ व्हीकल (एमपीवी) माना जाता है.

    लुक्स के मामले में दूसरी पीढ़ी की यह अर्टिगा पहले से ज्यादा बोल्ड नज़र आने के साथ काफी हद तक टोयोटा इनोवा से प्रभावित दिखती है. इस कार की अंडरपिनिंग कंपनी की ही- स्विफ्ट, डिज़ायर और बलेनो से ली गई है. जहां कार के फ्रंट में नई क्रोम ग्रिल का इस्तेमाल इसे पहले से ज्यादा आकर्षक बनाता है वहीं प्रोजेक्टर हैडलैंप इसे नएपन का अहसास देते हैं. नए फॉग लैंप्स के साथ गाड़ी की रियर साइड में लगे एल आकार के टेल लैंप्स भी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. इस कार का बंपर भी बिल्कुल नया दिया गया है.

    परफॉर्मेंस के लिहाज से देखें तो अर्टिगा-2018 में 1.5 लीटर का के15बी डीओएचसी, वीवीटी पेट्रोल इंजन दिया गया है जो कि 104 बीएचपी की अधिकतम पॉवर के साथ 138 एनएम का टॉर्क उत्पन्न करने में सक्षम है. इस इंजन को 5-स्पीड मैनुअल और 4-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियाबॉक्स से लैस किया गया है.

    मारुति-सुज़ुकी ने अर्टिगा को इंडोनेशिया और भारत के बाजार में सबसे पहले 2012 में उतारा था. अपनी शुरुआत से ही यह कार शानदार प्रदर्शन करने में सफल रही है. कंपनी की मानें तो फरवरी 2018 तक अर्टिगा की 6,76,000 यूनिट बेच दी गई हैं जो कि सेगमेंट के लिहाज से एक सम्मानजनक आंकड़ा है.

    महिंद्रा एक्सयूवी 500 का नया अवतार

    भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस सप्ताह एक्सयूवी 500 का नया अवतार लॉन्च किया है. बाजार में ह्युंडई क्रेटा के आने के बाद एक्सयूवी की बिक्री खासी प्रभावित हो रही थी जिसे देखते हुए इस कार को अपडेट करना बेहद जरूरी था. महिंद्रा ने नई एक्सयूवी500 को डीज़ल और पेट्रोल दोनों वेरिएंट में पेश किया है. इसके अलावा कार के एक्सटीरियर और इंटीरियर में भी खासे बदलाव किए गए हैं जिसमें 2.2-लीटर का 4-सिलेंडर वाला दमदार एमहॉक 155 डीज़ल इंजन सबसे अहम है. यह इंजन 155 बीएचपी की अधिकतम पॉवर पैदा करने में सक्षम है जबकि इस कार में लगा पेट्रोल इंजन 138 बीएचपी की पॉवर के साथ 320 एनएम का पीक टॉर्क पैदा करता है. इन दोनों इंजनों को 6-स्पीड सिंक्रोमैश मैनुअल गियरबॉक्स के साथ 6-स्पीड ऑटोमैटिक यूनिट से लैस किया गया है.


    फीचर्स की बात करें तो महिंद्रा ने नई एक्सयूवी 500 में बड़े प्रोजैक्टर हैडलैंप्स, इंटीग्रेटेड एलईडी डेटाइम रनिंग लाइट, 18-इंच के अलॉय व्हील्स और डुअल-टोन कलर के साथ 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है. यह इंफोटेनमेंट सिस्टम जीपीएस, यूएसबी और ब्ल्यूटूथ से कनेक्ट किया जा सकता है. इसके साथ ही महिंद्रा ने एक्सयूवी500 में एंड्रॉइड ऑटो भी दिया है. एक्सयूवी500-2018 में इलैक्ट्रिक सनरूफ, पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप, कीलेस एंट्री और रेन सेंसिंग वाइपर्स जैसी खूबियां भी देखने को मिलती हैं. इसके साथ ही कार में पूरी तरह ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, डुअल एयरबैग, एबीएस और ईबीडी स्टैंडर्ड और टॉप मॉडल के साथ 6 एयरबैग दिए गए हैं. इस गाड़ी की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत 12.32 लाख रुपए रखी गई है.

    नई बजाज पल्स

    बजाज मोटर्स ने कभी देश में स्पोर्ट्स बाइक का पर्याय बन चुकी पल्सर 150 का बिल्कुल नया वर्जन लॉन्च किया है. इस बाइक को ट्विन डिस्क ब्रेक्स के साथ आकर्षक डिज़ाइन और नई कलर स्कीम के साथ बाजार में उतारा गया है. पल्सर-2018 150 ट्विन डिस्क वेरिएंट की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत 78,016 रुपए रखी गई है जबकि बाजार में बाइक के मौजूदा सिंगल डिस्क ब्रेक वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 73,626 रुपए है. नई बजाज पल्सर 150 ट्विन डिस्क वेरिएंट तीन डुअल टोन कलर्स - ब्लैक ब्ल्यू, ब्लैक रैड और ब्लैक क्रोम में उपलब्ध होगी. डुअल डिस्क ब्रेक के अलावा बजाज ने नई पल्सर 150 में स्प्लिट सीट, लंबा व्हीलबेस और चौड़े टायर दिए हैं.


    बजाज ऑटो के मुताबिक पल्सर 150 ट्विन डिस्क वेरिएंट की आवाज़ में भी सुधार किया गया है. इस मौके पर बजाज ऑटो के मोटरसाइकल बिजनेस के प्रेसिडेंट एरिक वास का कहना था, ‘नई पल्सर 150 की स्टाइल और डिज़ाइन को ज्यादा आकर्षक बनाते हुए युवाओं की पसंद के फीचर्स इसमें जोड़े गए हैं.’

    परफॉर्मेंस के लिहाज से देखें तो बजाज ने इस बाइक के इंजन में कोई बदलाव नहीं किया है. 149.5 सीसी क्षमता वाला यह इंजन 14.85 बीएचपी पॉवर और 12.5 एनएम का अधिकतम टॉर्क उत्पन्न करने में सक्षम है. आंकड़ों की मानें तो हर महीने पल्सर की औसतन 35 हजार यूनिट बिकती हैं. अब नए अवतार के पेश होने पर बजाज को पल्सर की बिक्री में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. (सत्याग्रह)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल। सीरिया पर अमेरिका के मिसाइल हमलों से कच्चे तेल की कीमतें और बढऩे की आशंका है। वहीं सोना और आर्गेनिक जीरे के दाम भी चढ़े हैं। सीरिया ऑर्गेनिक जीरे का उत्पादन करने वाला दुनिया का प्रमुख देश है। उसके जीरे की मांग कई देशों में रहती है। हालांकि भारत में जीरे का उत्पादन इस वर्ष बीते साल की तुलना में बेहतर है फिर भी कीमतें बढ़ रही हैं। मंडियों में जीरे का भाव 16 हजार रुपए प्रति क्विंटल को पार कर गया है और मई तक इसमें और बढ़ोतरी की आशंका है। सीरिया से नया जीरा मई अंत तक ही आ पाएगा। इस बीच सोने के दाम (32 हजार के पार) में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है जबकि क्रूड ऑयल में चार डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हुई है।
    भारत में डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने के कारण दोहरी मार पड़ रही है। चूंकि भारत कच्चे तेल का दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, जिसकी खरीदी डॉलर में की जाती है। डॉलर के मंहगा होने के कारण डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल के भाव बीते साढ़े चार साल में सर्वाधिक हो गए हैं। रूस और सऊदी अरब का उत्पादन घटाना भी बहुत बड़ा कारण है। सीरिया पर अमेरिका-रूस टकराव और अमेरिका-चीन आयात शुल्क विवाद गहराता है तो ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव तीन माह में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास तक पहुंच सकता है। हालांकि बीते चार वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन सर्वोच्च स्तर पर है लेकिन अगर अमेरिका व रूस के बीच टकराव बढ़ा है तो क्रूड के भाव और चढ़ेंगे। अप्रैल की शुरुआत से लेकर पेट्रोल के दाम अब तक 50 पैसे बढ़ चुके हैं। डीजल में भी करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। इस साल के शुरुआत 4 महीने में पेट्रोल के दाम करीब 4 रुपए बढ़ चुके हैं। वहीं, डीजल के कीमतें 5-6 रुपए तक बढ़ चुकी हैं। ये किसी भी साल में होने वाली सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। 
    14 अप्रैल को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर सीरिया की राजधानी दमिश्क के कई जगहों पर मिसाइलें दागी थीं। सीरिया के पूर्वी गोता के डौमा में कथित रूप से सीरिया द्वारा रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका ने पहले ही असद सरकार को चेतावनी दी थी। इस हमले में बच्चों सहित 75 लोग मारे गए थे। इस चेतावनी के बाद सीरिया के खिलाफ मिसाइल हमला किया गया। इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि हवाई हमलों ने सीरिया के रासायनिक हथियारों के भंडार को करारी चोट पहुंचाई, लेकिन अभी देखना है कि सीरिया कैसे जवाब देता है। इसकी जांच शुरू हो चुकी है।  (जी न्यूज)

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Posted Date : 22-Apr-2018
  • - अभय शर्मा
    नई दिल्ली, 22 अप्रैल। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ा फैसला लेते हुए आधार को बैंक अकाउंट से जोडऩा अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नियमों में किए गए इस बदलाव की जानकारी शुक्रवार को जारी एक नए सर्कुलर में दी है। हालांकि, उसने यह भी साफ किया है कि यह नया नियम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही लागू किया जाएगा।
    केंद्रीय बैंक ने जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय में रहने वाले लोगों को इस नियम से छूट दी है। नए दिशा-निर्देश के अनुसार इन क्षेत्रों में जो लोग आधार और आधार पंजीयन आवेदन संख्या नहीं देते हैं, बैंक उनसे पहचान और पते के लिए आधिकारिक तौर पर वैध दस्तावेज (ओवीडी) और हालिया फोटो मांग सकते हैं। इसके अलावा जो लोग भारत के रहने वाले नहीं हैं या जो आधार हासिल करने के पात्र नहीं हैं, उनसे भी आधार नहीं मांगा जाएगा।
    पहले बैंकों में केवाईसी (नो योर कस्टमर) के लिए खाताधारक का एक हालिया फोटो, पैन कार्ड की कॉपी और पते के सबूत के लिए ओवीडी मांगा जाता था। लेकिन, जून 2017 में केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2018 तक बैंक खाते से आधार जोडऩा अनिवार्य कर दिया था। हालांकि, पिछले महीने सरकार के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी थी।  (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । देश में पेट्रोल की कीमत बीते 55 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं है। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के मुताबिक शुक्रवार को प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 74.08 रुपये रही, जो सितंबर 2013 के बाद की सबसे ऊंची दर है। वहीं, कोलकाता में प्रति लीटर पेट्रोल की खुदरा कीमत 76.78 रुपये, चेन्नई में 76.85 रुपये और मुंबई में 81.93 रुपये पहुंच गई। वहीं, डीजल की कीमत में भी प्रति लीटर चार पैसे का इजाफा हुआ है।
    एनडीटीवी के मुताबिक अकेले अप्रैल महीने में ही प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत में 50 पैसे, जबकि डीजल की कीमत में 90 पैसे से ज्यादा का इजाफा हुआ है। वहीं, 2018 की शुरुआत से अब तक प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत चार रुपये, जबकि डीजल की कीमत पांच से छह रुपये तक बढ़ चुकी है।
    पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढऩे की वजह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल का दाम बढऩा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ोतरी का भारत में तत्काल असर पडऩे की वजह भारतीय तेल कंपनियों द्वारा बीते साल अपनाई गई रोजाना दाम तय करने की व्यवस्था है। इससे पहले पिछले 15 साल से 15 दिन पर पेट्रोल और डीजल का दाम तय करने की व्यवस्था लागू थी। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 21 अप्रैल । नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को जाली नोट मिलने के मामले में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। साथ ही, संदिग्ध लेन-देन में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। नोटबंदी के बाद संदिग्ध जमाओं पर आई पहली रिपोर्ट के हवाले से यह बात कही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों में साल 2016-17 में संदिग्ध लेन-देन में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा जाली नोट पाए जाने के मामले भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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Posted Date : 21-Apr-2018
  • मुंबई, 21 अप्रैल। आरबीआई ने केवाईसी गाइडलाइंस में परिवर्तन किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को बैंकों और वित्त कंपनियों द्वारा ग्राहक से वित्तीय व्यवहार में आधार को प्रमुखता दी है। आरबीआई ने अन्य ऑफिशियली वैध दस्तावेजों के प्रयोग से संबंधित उन सेक्शन्स में सुधार किए हैं, जिनके नियमों के तहत बैंक ग्राहक के पते और उसकी पहचान के लिए प्रूफ के तौर पर उपयोग करते हैं। आरबीआई ने कहा है कि नए मानदंड आधार पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के तहत तय किए गए हैं।
    सर्कुलर में लेन-देन में सावधानी रखने के लिए आरबीआई से विनियमित संस्थानों को ग्राहकों से आधार नंबर, पैन या इनकम टैक्स नियमों के तहत परिभाषित फार्म नं. 60 लेना होगा। ये नियम आधार के लिए योग्य सभी नागरिकों पर लागू है।
    नए मानदंडों में पहले का एक सेक्शन शामिल नहीं है, जो राज्य सरकार या राजपत्र अधिसूचना द्वारा जारी किए गए विवाह प्रमाण पत्र की एक प्रति को अनुमति देता है। ये व्यक्ति के मौजूदा नाम में आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज की प्रमाणित प्रति के साथ नाम में परिवर्तन का संकेत देता है और पते और पहचान का सबूत है। इसका अर्थ यही है कि आधार ही एक मात्र केवाईसी के लिए पहचान का प्रमाण होगा। इससे ये आसान नहीं होगा कि खाताधारक रिश्तेदार के पते पर खुद का रहना दिखाकर अपना बैंक अकाउंट बैंक में बनाए रख सके।
    आरबीआई ने एक सर्कुलर में कहा कि नॉम्र्स में बदलाव इसलिए किए गए हैं, क्योंकि सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग के कानून में बदलाव किया है। सरकार के कानून में ये बदलाव जून 2017 को प्रकाशित गैजेट नोटिफिकेशन में सामने आया था। इसके आधार पर हालाकि, अभी ये साफ नहीं है कि अब आरबीआई नई गाइडलाइन का पालन कब से लागू होगा।
    पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न सेवाओं के लिए 31 मार्च तक आधार को लिंक करने की अनिवार्यता थी, लेकिन संवैधानिक पीठ का आधार की मान्यता पर फैसला आ गया। इसमें बैंकों और टेलिकॉम सर्विसेस के साथ अन्य सरकारी योजनाओं में आधार को लिंक करने की समय सीमा हटा दी गई ।
    आधार के मामले में जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय के लोगों को आधार की अनिवार्यता से छूट दी गई है। अभी ये साफ नहीं है कि बैंक कैसे ऐसे कस्टमर के साथ नए सर्कुलर सुधार के साथ गाइडलाइंस केे नियमों का पालन कर सकेंगे। इससे पहले 25 फरवरी 2016 के कई निर्देशों का पालन भी कैसे होगा। (इंडिया.कॉम)

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Posted Date : 20-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 20 अप्रैल। देश की सबसे बड़ी साफ्टवेयर निर्यातक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्च, 2018 में समाप्त चौथी तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ 4.4 प्रतिशत बढ़कर 6,904 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। कंपनी के निदेशक मंडल ने शेयरधारकों को एक पर एक के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने की सिफारिश की है।
    टीसीएस ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह जानकारी दी है। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने 6,608 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। टाटा समूह की इस कंपनी का समूह के मुनाफे में उल्लेखनीय हिस्सा होता है। तिमाही के दौरान टीसीएस की आय या कारोबार 8.2 प्रतिशत बढ़कर 32,075 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 29,642 करोड़ रुपए रहा था।
    टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक राजेश गोपीनाथन ने कहा, सभी उद्योग खंडों में डिजिटल की भारी मांग तथा बड़े बदलाव वाले करार हासिल होने की वजह से चौथी तिमाही हाल के वर्षों में हमारी सबसे अच्छी तिमाही रही है। इससे हम नए वित्त वर्ष की शुरुआत विश्वास के साथ कर सकेंगे। इस दौरान कंपनी की आमदनी में डिजिटल आय का योगदान 23.8 प्रतिशत रहा। पूरे वित्त वर्ष 2017-18 में टीसीएस का शुद्ध लाभ 1.7 प्रतिशत घटकर 25,826 करोड़ रुपए पर आ गया। वहीं वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की आमदनी 4.3 प्रतिशत बढ़कर 1.23 लाख करोड़ रुपए रही। मार्च, 2018 के अंत तक टीसीएस के कर्मचारियों की संख्या 3,94,998 थी। आईटी सेवाओं में कर्मचारियों द्वारा कंपनी छोडऩे की दर 11 प्रतिशत रही।   (पंजाब केसरी)

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Posted Date : 19-Apr-2018
  • बेंगलूरु, 19 अप्रैल। ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने भारत में एंड्रोयड उपकरणों के लिए इंटरनेट नाम से वेब ब्राउजर पेश कर दिया है। यह ब्राउजर बेहद तेजी से काम करता है और उपयोगकर्ता के डिवाइस पर बहुत ज्यादा स्टोरेज भी नहीं लेता है। कंपनी ने दावा किया है कि यह ब्राउजर किसी अन्य ब्राउजर जैसे निजी डेटा का संग्रहण नहीं करता है। मार्च से ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध इस ब्राउजर को अब तक 100 से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है। एमेजॉन ने इस ब्राउजर के लॉन्च की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं की है और इससे जुड़ी खबर सबसे पहले बुधवार को टेकक्रंच द्वारा दी गई थी।
    प्ले स्टोर पर इस ब्राउजर के विवरण में लिखा है, इंटरनेट ब्राउजर प्रतिस्पर्धी ब्राउजर्स की तुलना में हलका है। इसका मतलब है कि इसमें अपनी पसंदीदा वेबसाइटों से नए वीडियो और म्यूजिक डाउनलोड करने के लिए अधिक स्टोरेज उपलब्ध है। इसमें नए फीचर और अपडेट नियमित रूप से आते हैं। इससे उपयोगकर्ता को अपने डेटा प्लान के हिसाब से इनहें डाउनलोड करने के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलती है। एमेजॉन ने खबर लिखे जाने तक इंटरनेट ब्राउजर के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है।
     इंटरनेट का आकार महज 2 एमबी का है जिससे यह भारत में लॉन्च हुए गूगल और फेसबुक जैसे ऐप के समान ही है।  एमेजॉन इस ब्राउजर के लिए जिन बड़े फीचर्स पर विचार कर रही है, उनमें एक है निजता। कंपनी ने दावा किया है कि यह ब्राउजर किसी अन्य ब्राउजर जैसी अनुमति नहीं मांगता है और निजी डेटा एकत्रित नहीं करता है। (बिजनेस स्टैंडर्ड)

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Posted Date : 19-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 19 अप्रैल । केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने ऑटो, टैक्सी और ई रिक्शा चालकों को बड़ी राहत दी है। मंत्रालय के फैसले के मुताबिक अब ऑटो, टैक्सी और ई रिक्शा चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब निजी लाइट मोटर व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस होने पर भी कमर्शियल वाहन चला सकेंगे। हालांकि ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों के अभी भी अलग ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होगी।
    परिवहन मंत्रालय ने दिल्ली समेत सभी राज्यों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसके मुताबिक जिन वाहनों का वजन 7,500 किलो या इससे कम है तो इन्हें चलाने के लिए कमर्शियल लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। मंत्रालय ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2007 में दिए गए एक आदेश के बाद लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2007 में कहा था कि गाड़ी का बीमा वाहन श्रेणी से संबंधित होता है, इसका लाइसेंस से कोई संबंध नहीं है।
    परिवहन मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, इससे कमर्शियल लाइसेंस बनाने में हो रहा बड़े स्तर का भ्रष्टाचार खत्म होगा। राज्यों को कर्मिशयल वाहनों के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने होंगे। कर्मिशियल ड्राइविंग लाइसेंस निजी लाइट मोटर व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस बनने के बाद ही बनता है। (एबीपी न्यूज)

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Posted Date : 19-Apr-2018
  • मुंबई, 19 अप्रैल । एटीएम ऑपरेटर्स ने एटीएम ट्रांजैक्शन के लिए हायर इंटरचेंज रेट की मांग उठाई है, जिससे वह हाल ही में आरबीआई के सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करने में सक्षम बन सके। फिलहाल सभी बैंक दूसरे बैंकों के कस्टमर से अपने बैंक का एटीएम प्रयोग करने पर हर बार कैश निकालने पर 15 रुपये और दूसरे नॉन कैश ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये लेते हैं, जो 5 ट्रांजेक्शन के बाद हर बैंक ग्राहक को देना पड़ता है। अगर यह मांग मान ली गई तो बैंक के कस्टमर्स को दूसरे बैंक के एटीएम का प्रयोग करने पर ज्यादा चार्ज देना पड़ सकता है।
    कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (सीएटीएमआई) ने मांग की है कि एटीएम से ट्रांजैक्शन करने पर चार्ज कम से कम 3 रुपये से 5 रुपये बढऩा चाहिए, जिससे एटीएम ऑपरेटर्स बढ़ती महंगाई में अपनी लागत निकाल सकें। सीएटीएमआई के निदेशक के श्रीनिवास ने कहा कि हाल ही में आरबीआई ने काफी सख्त गाइडलाइंस जारी की है, जिससे एटीएम सर्विस प्रोवाइडर्स की कुल लागत में बढ़ोतरी होगी। 
    आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को जुलाई से कैश मैनेजमेंट संबंधी गतिविधियों के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ इस व्यवस्था में न्यूनतम मानक लागू करने चाहिए। इसमें एटीएम सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए 300 कैश वैन का बेड़ा, एक ड्राइवर, 2 रक्षक और कम से सम 2 गनमैन रखे जाने का निर्देश आरबीआई ने दिया है। कैश वाहन जीपीएस ले लैस होने चाहिए। 
    जियो फेसिंग मैपिंग के साथ इसकी निगरानी रखी जा सके और किसी इमर्जेंसी की हालत में यह नजदीकी पुलिस स्टेशन का संकेत दे सके। सीएटीएमआई आरबीआई और एनपीसीआई से बातचीत कर रही है। उसे उम्मीद है कि इंटरचेंज रेट को बढ़ाने का मुद्दे पर प्राथमिकता के आधार पर विचार-विमर्श करना चाहिए। (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 18-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 18 अप्रैल । देश के कई हिस्सों में एटीएम खाली होने और यहां नकदी की कमी होने की खबरों के बीच मंगलवार को सरकार ने घोषणा की है कि वह पांच सौ रुपये के नोटों की छपाई पांच गुना तक बढ़ाएगी।
    वित्त मंत्रालय में सचिव एससी गर्ग ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा है, हम हर दिन करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य के पांच सौ रुपये के नोट छापते हैं। लेकिन अब हमने यह संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। कुछ दिनों के बाद हम रोजाना करीब 2500 करोड़ रुपये मूल्य के पांच सौ रुपये के नोटों की आपूर्ति करेंगे।
    इससे पहले सोमवार को पूर्वी महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात से एटीएम खाली होने की शिकायतें आई थीं। वहीं मंगलवार को देश के कई दूसरे हिस्सों से भी ऐसी खबरें आने के बाद इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान आया है। उन्होंने कहा है, देश में पर्याप्त मात्रा में नकदी है और चिंता जैसी कोई बात नहीं है। जेटली ने इस बाबत ट्वीट करके बताया है, सरकार ने स्थिति की समीक्षा की है। कुछ एटीएम में नकदी न होने की दिक्कत को हल करने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा। जहां तक बैंकों की बात है तो उनके पास पर्याप्त से अधिक नकदी मौजूद है।(आईएएनएस)

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Posted Date : 18-Apr-2018
  • देविना गुप्ता
    दुनिया में गोल्ड के दूसरे सबसे बड़े आयातक भारत में अप्रैल के महीने में अक्षय तृतीया त्योहार की वजह से सोने की मांग में बढ़त देखी जाती है.
    लेकिन अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस साल की अक्षय तृतीया पर सोने की कीमतें सबसे ज़्यादा बढ़ सकती हैं.
    बीते 11 अप्रैल को 24 कैरेट सोने की कीमत 31,524 रुपये प्रति दस ग्राम का आंकड़ा पार कर गई थी.
    हालांकि, 17 अप्रैल को सोने की कीमत में थोड़ी गिरावट देखी गई. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक़ खरीदार लगातार सोना खरीदना जारी रखेंगे.
    कमोडिटीज़ एंड करेंसी रिसर्च फर्म निर्मल बंग के प्रमुख कुणाल शाह कहते हैं, "मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता, भूराजनीतिक संकट से जुड़ी अनिश्चितताएं और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई के बढ़ने से जुड़ी आशंकाओं के चलते मार्च 2018 के अंत तक सोना वैश्विक स्तर पर $1450 पर खरीदा जाएगा लेकिन मार्च 2019 से पहले ये $1600 का स्तर छू लेगा."
    सोने को हमेशा ही निवेश के लिहाज से एक बढ़िया विकल्प माना जाता है. ये वैश्विक अनिश्चितताओं का साल है, अमरीका चीन के साथ ट्रेड वॉर करने की धमकी दे रहा है, सीरिया में तनाव बढ़ रहा है.
    ऐसे में निवेशक अपना पैसा किसी अन्य जगह पर लगाने को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं. और इस तरह वे सोने में निवेश करने का फ़ैसला कर रहे हैं जिससे दुनिया भर में सोने की कीमतें बढ़ रही हैं. इससे भारत जैसे देश भी प्रभावित होंगे.
    भारत में कैसी है सोने की स्थिति
    भारत में नोटबंदी और जीएसटी आने के बाद सोने की मांग कम हुई थी.
    मार्च में सोने का आयात $2.4 बिलियन पर पिछले साल के मुक़ाबले 40 फीसदी तक घट गया था.
    इसकी वजह से इस इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ा था. लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अब सोने की मांग में उछाल आ सकता है.
    क्योंकि बेहतर मॉनसून के चलते किसानों की आमदनी बेहतर हुई है जिससे इस त्योहारों के मौसम में सोने की मांग बढ़ सकती है.
    इस देश में सोने की कुल मांग का दो-तिहाई हिस्सा ग्रामीण भारत से आता है.
    अक्षय तृतीया के अवसर पर
    बीते कुछ सालों में अगर सोने की कीमतों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि ये 2018 इस लिहाज़ से सबसे महंगा साल हो सकता है.
    साल 2010 में जब अक्षय तृतीया 16 मई को पड़ा था तब आप दस 24 ग्राम कैरेट सोना 18,167 रुपये प्रति दस ग्राम की दर में खरीद सकते थे.
    लेकिन बीते साल ये दाम बढ़कर 29,890 रुपये प्रति दस ग्राम की दर हो गया.
    28 अप्रैल, 2017 - 28,861 रुपये
    9 मई, 2016 - 29,860 रुपये
    21 अप्रैल, 2015- 26,938 रुपये
    2 मई, 2014- 28,865 रुपये
    13 मई, 2013 -26,829 रुपये
    24 अप्रैल, 2012- 28,852 रुपये
    6 मई, 2011- 21,736 रुपये
    16 मई, 2010- 18,167 रुपये
    सोना खरीदने का सही समय
    इसमें अच्छी बात ये है कि अगर आपने पहले सोना खरीदा होता तो आपको अपनी संपत्ति में बढ़त देखने को मिलती.
    ऐसे में सवाल ये है कि क्या ये सोना खरीदने का सही समय है. इस मसले पर विशेषज्ञ बंटे हुए हैं.
    कॉमट्रेंड्ज़ रिसर्च के निदेशक ग्नानसेकर त्यागराजन बताते हैं, "30 हज़ार रुपये के आंकड़े पर लोगों के बीच सोना बेचने की धारणा होती है लेकिन अब कीमतें स्थिर हो रही हैं."
    "मेरा मानना है कि इस साल के अंत तक सोने की कीमतें ऊपर चढ़ेंगी. इसलिए इस अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना ठीक हो सकता है क्योंकि अब यहां से कीमतें ऊपर ही जाएंगी."
    वहीं, एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज़ की वंदना भारती ने बीबीसी को बताया है, "इस समय बाजार का माहौल अलग है, ऐसे में मैं कुछ महीने इंतज़ार करने की सलाह देती हूं, सितंबर और अक्टूबर खरीदारी के लिए बेहतर समय हो सकता क्योंकि कीमतों में 5-6 फीसदी की गिरावट हो सकती है." (बीबीसी)

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Posted Date : 16-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 16 अप्रैल । साल 2016 में नोटबंदी के बाद जारी 2000 रुपये के नोट के कालेधन में तब्दील होने की आशंका पैदा हो गई है। खबर के मुताबिक बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट में आने वाली रकम में इसकी संख्या में लगातार कमी आ रही है। मार्च, 2018 में बैंकों की करेंसी चेस्ट की बैलेंसशीट के मुताबिक 2000 रुपये के नोटों की संख्या कुल जमा रकम की केवल 10 फीसदी रह गई है। 
    यह स्थिति इनके कुल जारी करेंसी में हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी होने के बाद की है। 
    बताया जाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने करीब सात लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2000 रुपये के नोट जारी किए हैं। जुलाई, 2017 तक बैंकों में जमा रकम में इनकी हिस्सेदारी 35 फीसदी थी। इसके बाद नवंबर, 2017 में यह घटकर 25 फीसदी रह गई थी।(सत्याग्रह)

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Posted Date : 14-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 14 अप्रैल। देश के कई इलाकों में एटीएम में कैश की किल्लत को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने आरबीआई से स्थिति की समीक्षा करने और जल्द इसका समाधान निकालने को कहा है। हालांकि आरबीआई का कहना है कि एटीएम में कैश भरने के लिए बैंकों को पर्याप्त कैश उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के एक उच्चाधिकारी के अनुसार जिन राज्यों में एटीएम में कैश की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं, उनमें छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में किल्लत ज्यादा है। आरबीआई के जरिए बैंकों से कहा गया है कि वह इन शहरों में एटीएम में तेजी से कैश डालने और जो एटीएम खराब है, उनको दुरुस्त करने की रफ्तार तेज करें। उम्मीद है कि एटीएम में कैश की किल्लत की समस्या का समाधान जल्द हो जाएगा।
    सूत्रों के अनुसार कई राज्यों में एटीएम में कैश की किल्लत को लेकर कई कारण सामने आ रहे हैं। सरकार ने फाइनैंशल रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल लाने की लाने की बात की थी। हालांकि इस बिल को वापस ले ले लिया गया। इस बिल में इस बात का प्रावधान है कि अगर कोई बैंक किसी कारणवश वित्तीय संकट में फंस जाता है तो जमाकर्ताओं के पैसे से उसका पुनरुद्धार किया जाएगा।
    बिल के अनुसार जमाकर्ताओं की 1 लाख रुपये तक जमाराशि को छेड़ा नहीं जाएगा, बाकी राशि का इस्तेमाल बैंक के पुनरुद्धार में किया जाएगा। इससे लोगों में घबराहट फैल गई थी। तब भी लोगों ने एटीएम से ज्यादा कैश निकालना शुरु कर दिया। अब पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद लोगों को लग रहा है कि कई बैंक वित्तीय संकट में फंस सकते हैं। ऐसे में वे पहले की तुलना में एटीएम में ज्यादा निकाल रहे हैं और इससे एटीएम जल्द खाली हो रहे हैं। 
    सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय ने आरबीआई को 2000 रुपये के नोट प्रिटिंग कम करने और छोटे नोटों की प्रिटिंग बढ़ाने को कह रखा है। इसके साथ एटीएम में भी 2000 रुपये के नोट की बजाय छोटे नोट ज्यादा डालने के लिए आरबीई को कहा गया है। ऐसे में एटीएम में डाले गये करंसी नोट की कुल वैल्यू कम हो रही है। इससे एटीएम जल्द खाली हो रहे हैं। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने अपनी स्टडी में पाया है कि बैंकों के कुल एटीएम में 15 फीसदी एटीएम खराब हैं। बड़े शहरों में तो खराब एटीएम को जल्द ठीक कर दिया जाता है, मगर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में इसको ठीक करने में समय लगता है। 
    सरकार अब डिजिटल इंडिया को प्रमोट कर रही है। इसके चलते बैंकों, विशेष रूप से सरकारी बैंकों ने नए एटीएम लगाने की संख्या में 30 से 40 फीसदी की कमी की है। एक सरकारी बैंक के उच्चाधिकारी का कहना है कि नए एटीएम को लेकर पॉलिसी सख्त हो गई है। लोगों को ऑनलाइन और कार्ड से पेमेंट करने के लिए प्रमोट किया जा रहा है। ऐसे में नए एटीएम लगाने की रफ्तार को धीमा कर दिया गया है। इसका नेगेटिव असर एटीएम में कैश किल्लत के रूप में सामने आ रहा है। 
    आरबीआई का कहना है कि नोटबंदी के 4 दिन पहले 17.74 लाख करोड़ रुपए नोट चलन में थे। अभी कुल 18.04 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन में हैं। दो सौ रुपये के नये नोट चलन में आने से एटीएम में उसको डालने में आ रही परेशानी भी कैश किल्लत का एक कारण हो सकता है।  (नवभारत टाईम्स)

     

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