सामान्य ज्ञान

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17-Jun-2021 12:58 PM (20)

पिछोला झील राजस्थान राज्य के उदयपुर शहर की सबसे प्रसिद्ध झील है। यह काफी सुंदर झील है। 
इसके बीच में जग मन्दिर और जग निवास महल है जिनका प्रतिबिम्ब झील में पड़ता है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के अन्त में राणा लाखा के शासनकाल में एक बंजारे ने कराया था और बाद में राजा उदयसिंह ने इसे ठीक कराया। बादशाह बनने से पहले शाहजहां भी इस झील के महलों में आकर ठहरा था।
इस झील में स्थित दो टापुओं पर जग मंदिर और जग-निवास दो सुंदर महल बने हैं। अब इन महलों को एक पंच-सितारा होटल (लेक पैलेस होटल) में बदल दिया गया है। जिसे राजस्थान, उदयपुर के भूतपूर्व राणा भगवंत सिंह चलाते हैं।
 


17-Jun-2021 12:57 PM (21)

यूरोपीय फुटबॉल में चैंपियंस लीग, यूरोपीय चैंपियनशिप, सुपर कप और दूसरे प्रमुख मुकाबले कराने की जिम्मेदारी यूएफा नाम के संगठन की है। यूएफा नाम है यूरोप के फुटबॉल संघों के संगठन का, जिसका गठन 14 जून, 1954  को हुआ था। 
यूएफा फुटबॉल संघ फीफा के 6 महाद्वीपीय मंडलों में से एक है। इटली, फ्रांस और बेल्जियम जैसे देशों के प्रमुख फुटबॉल संगठनों के साथ विचार विमर्श के बाद यूएफा का गठन 15 जून 1954 को स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में हुआ था। 25 सदस्यों के साथ शुरुआत करने वाले यूएफा के इस समय 54 सदस्य हैं। बाद में कई एशियाई देश जैसे कजाकस्तान और इजराइल भी यूएफा में शामिल हो गए। सभी प्रमुख मुकाबलों से संबंधित मीडिया अधिकार, कार्यक्रम और पुरस्कारों के बारे में तय करना यूएफा के हाथ में ही है।
 

कौन थे निमि
पौराणिक आख्यानों के अनुसार निमि,  महाराज इक्ष्वाकु के पुत्र थे और महर्षि गौतम के आश्रम के समीप वैजयन्त नामक नगर बसाकर वहां का राज्य करते थे।
एक बार निमि जी एक सहस्त्र वर्षीय यज्ञ करने के लिये श्री वसिष्ठ जी को वरण किया। लेकिन उस समय श्री वसिष्ठ जी इन्द्र का यज्ञ कर रहे थे। तब निमि दूसरों से यज्ञ कराने लगे।  जब श्री वसिष्ठ जी को पता चला कि निमि दूसरों से यज्ञ करा रहे हैं तो इन्होंने शाप दे दिया कि ये शरीर से रहित हो जाएं। लोभ-वश वसिष्ठ जी ने श्राप दिया है ऐसा जानकर निमि  ने भी वसिष्ठ ऋषि को देह से रहित होने का श्राप दे दिया। जिसके कारण दोनों ही भस्म हो गए।
यज्ञ समाप्ति पर देवताओं ने प्रसन्न होकर निमि  को पुन: जीवित होने का वरदान दे रहे थे लेकिन नश्वर शरीर होने के कारण निमि  ने कहा मैं पलकों में निवास करूं, ऐसा वरदान मांगा। तभी से पलकें गिरने लगीं। ऋषियों ने एक विशेष उपचार से यज्ञ समाप्ति तक निमि का शरीर सुरक्षित रखा।  निमि के कोई सन्तान नहीं थी। इसलिए ऋषियों ने अरणि से उनका शरीर मन्थन किया, जिससे इनके एक पुत्र उत्पन्न हुआ।
जन्म लेने के कारण ‘जनक’, विदेह होने के कारण ‘बैदेह’ और मन्थन से उत्पन्न होने के कारण उसी बालक का नाम ‘मिथिल’ हुआ। उसी ने मिथिलापुरी बसाईं। इसी कुल में श्री शीरध्वज जनक के यहां आदि शक्ति सीता ने अवतार लिया था। 
 


17-Jun-2021 12:56 PM (27)

हमारे शरीर में धडक़ने वाला  मु_ी भर का दिल हर मिनट करीब 70 बार धक धक करता है और दिन भर में कम से कम 10 हजार लीटर खून पंप कर पूरे शरीर में पहुंचाता है। वह भी सारा जीवन।
हमारा दिल दो पंपों से बना है। दाहिना हिस्सा फेफड़े तक खून पहुंचाता है, जहां उसे ऑक्सीजन मिलता है। बायां हिस्सा उतना ही खून शरीर की धमनियों में डालता है। हर हिस्से का एक एट्रियम होता है और एक चैंबर। रक्त प्रवाह एक ही ओर होता है। दाहिने, बाएं आलिंद, निलय और धमनियों के बीच बना वॉल्व उसे वापस आने से रोकता है। दिल दरअसल मांसपेशी मात्र है, लेकिन एक विशेष तरह की। वह पैर और बांह की मांशपेशियों जैसा होता है। उसी तरह काम करता है लेकिन एक दूसरे से जुड़ा होता है और थकता नहीं। दिल की धडक़न को आप रोक नहीं सकते, क्योंकि वह स्नायु से नहीं चलता। विशेष मांसपेशियां नियमित रूप से करंट पैदा करती है जिसके कारण दिल फैलता और सिकुड़ता है।  ऐसा न होने पर कृत्रिम दिल लगाना पड़ता है।
दिल की धडक़न सामान्य न हो तो उसे आराम नहीं मिलता। तनाव में होने पर डिफीब्रिलेटर की मदद से उसकी उत्तेजना तोड़ी जाती है ताकि वह फिर से शरीर में खून पंप कर सके। मरीज का दिल बहुत धीरे धडक़ता हो तो कृत्रिम पेसमेकर से मदद मिलती है। 1958 में पहली बार किसी इंसान के शरीर में  पेसमेकर लगाया गया।  वह करंट पैदा करता है और दिल की मांसपेशियों तक पहुंचाता है। 
ओपन हर्ट सर्जरी के लिए दिल को रोक देना पड़ता है। 50 के दशक में डॉक्टरों ने लाइफ सपोर्ट सिस्टम का आविष्कार किया जो ऑपरेशन के दौरान दिल और फेफड़े का काम संभालता है। आधुनिक चिकित्सा में सीना खोले बिना दिल की जांच या ऑपरेशन संभव है। डॉक्टर धमनी से होकर कैथेटर दिल तक ले जाते हैं और कंट्रास्ट एजेंट डालकर दिल का टेस्ट करते हैं। दिल का वॉल्व खराब हो जाए तो नया लगाना पड़ता है। इसके लिए सूअर का या धातु का कृत्रिम वॉल्व उपलब्ध है। अब फोल्डिंग वॉल्व बन गये हैं जिन्हें कैथेटर के जरिए लगाया जाता है।ा
कोरोनरी नसें दिल की मांसपेशियों तक रक्त यानी खाना और ऑक्सीजन पहुंचाती है. कोई नस बंद हो जाए तो मांसपेशियां मर जाती हैं। बाइपास सर्जरी से रक्त प्रवाह को ठीक रखा जाता है। यदि दिल में खून पहुंचाने वाली नसें बंद हों तो डॉक्टर कैथेटर के जरिए वहां स्टेंट डाल कर बंद हिस्से को खोल देते हैं। धातु का यह खोल धमनी में सामान्य रक्त प्रवाह को संभव बनाता शोधकर्ता प्लास्टिक का दिल बना रहे हैं जिसे शरीर में लगाया जा सके। इसका बछड़े पर सफल टेस्ट हुआ है, लेकिन शरीर के जादुई अंग को प्लास्टिक से बदलना इतना आसान नहीं।
पहला हार्ट ट्रांसप्लांटेशन 1967 में हुआ। अब तो यह आम बात हो गई है। हर साल दुनिया भर में हृदय दान करने वालों से मिले हजारों दिलों को नया शरीर मिलता है। नई जिंदगी, दान में मिलने वाले दिल बहुत कम हैं। अगर दिल ठीक से काम नहीं कर रहा है तो मदद के लिए कृत्रिम दिल भी हैं। अपना दिल शरीर में रहता है और उसकी मदद एक पंप से होती है। 

हूंण जाति
हंूण मध्य एशिया की एक खानाबदोश जाति था। हूंणों ने पांचवीं  शताब्दी के मध्य  भारत पर पहला आक्रमण किया। 455 ई. में स्कंदगुप्त ने उन्हें आगे बढऩे से रोका, लेकिन बाद के आक्रमण में  500 ई. के लगभग हूंणों का नेता तोरमाण मालवा का स्वतंत्र शासक बनने में सफल हो गया।  उसके पुत्र ने पंजाब में स्यालकोट को अपनी राजधानी बनकर चारों ओर आतंक मचाया।  अंत में मालवा के राजा यशोधर्मा और बालादित्य ने मिलकर 528 ई. में उसे पराजित किया। पराजय के बाद भी हूंण भारत छोडक़र वापस मध्य एशिया नहीं गए। वे भारत में ही बस गए और उन्होंने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया।
 


17-Jun-2021 12:51 PM (25)
आजकल दिल और किडनी के ट्रांसप्लांट आम बात हैं लेकिन जब डॉक्टरों ने ऐसा पहली बार किया, तो चिकित्सा जगत में धूम मच गई।
वर्ष 1950 में  शिकागो में 49 साल की रूथ टकर के गुर्दे खराब हो चुके थे। टकर अस्पताल के बिस्तर पर मौत का इंतजार नहीं करना चाहती थीं। डॉक्टर रिचर्ड लॉलर की टीम ने फिर तय किया कि वे एक मृत महिला के शरीर से एक किडनी लेंगे और उसे टकर के शरीर में ट्रांसप्लांट करेंगे। टकर के पास एक ही गुर्दा बचा था और उसकी हालत भी काफी खराब थी। उस समय डॉक्टरों के पास भी इन्फेकशन रोकने के लिए अच्छी दवाइयां नहीं थीं, लेकिन गुर्दा उन्होंने फिर भी ट्रांसप्लांट किया। टकर का शरीर गुर्दे को सही तरह अपना नहीं पाया लेकिन डॉक्टरों ने किसी तरह गुर्दे को टकर के शरीर में नौ महीनों तक रखा। उनका दूसरा गुर्दा तब तक ठीक हो गया और उनकी जिंदगी पांच साल और बढ़ गई।   हालांकि उनकी मौत उनके गुर्दे की वजह से नहीं, बल्कि दिल की बीमारी से हुई।
चार साल बाद वर्ष 1954 में पहली बार दो जिंदा लोगों के बीच किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। बॉस्टन के डॉक्टरों ने रिचर्ड हेरिक को बचाने के लिए उसके जुड़वा भाई रोनल्ड से एक गुर्दा लिया, क्योंकि वे जुड़वा थे, तो उनके शरीर भी एक जैसे थे और गुर्दे को शरीर ने स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं की। इस काम के लिए डॉक्टर जोसेफ मरे को 1990 में नोबल चिकित्सा पुरस्कार से नवाजा गया था। 
 
भारत में साक्षरता प्रतिशत
जनगणना साक्षरता पुरुषों में महिलाओं में 
1951 18.33 27.16 8.86
1961 28.3 40.40 15.35
1971 34.45 45.96 21.97
1981 43.57 56.38 29.76
1991 52.21 64.13 39.29
2001 64.84 75.26 53.67
2011 73.0 80.09 64.06
 

17-Jun-2021 12:50 PM (18)

1. सर्वोदय योजना का प्रारूप किसके द्वारा तैयार किया गया था?
(अ) आर्देशिर दलाल (ब) एम.एन. राय (स) श्री मन्न नारायण (द) जयप्रकाश नारायण
2. द्वितीय पंचवर्षीय योजना में सर्वाधिक परिव्यय किस भाग पर किया गया था? 
(अ) उद्योग (ब) भारी उद्योग (स) ऊर्जा (द) परिवहन एवं संचार
3. किस पंचवर्षीय योजना के दौरान देश में तीन लौह इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए थे?
(अ) प्रथम (ब) द्वितीय (स) तृतीय (द) चतुर्थ
4. भारतीय संविधान में प्रस्तावना को संविधान सभा द्वारा कब ग्रहण किया गया?
(अ)सम्मेलन के प्रथम दिन (ब)जिस दिन मौलिक अधिकारों को ग्रहण किया गया (स)जिस दिन राज्य के नीति-निदेशक तत्वों को पारित किया गया (द) जब संविधान के संपूर्ण मसौदे को मंजूरी दी गई
5. निम्रलिखित में से किस विवाद के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का मुख्य आधार है?
(अ)ए.के. गोपालन बनाम मद्रास सरकार (ब) बेरूबारी संघ से संबंधित मामले में (स) सज्जन सिंह बनाम राजस्थान सरकार (द) केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार
6. राज्य की सुरक्षा के लिए क्या मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं? 
(अ)हां (ब)नहीं (स) कभी नहीं (द) उपरोक्त कोई नहीं
7. धु्रवों पर क्षोभमण्डल किस ऊंचाई तक विद्यमान है?
 (अ) 5 किमी तक (ब) 10 किमी तक (स) 8 किमी तक (द) 18 किमी तक
8. एक बायोगैस बेहतर काम करेगा यदि?
(अ)40अंश सेंटीग्रेट के लगभग की वायवीय (एयरोविक)स्थिति में हो (ब)40अंश सेंटीग्रेट अवायवीय स्थिति के तहत हो (स) 45अंश सेंटीग्रेट के लगभग की वायवीय स्थिति मेें हो (द)इनमें से कोई नहीं 
9. बायोगैस के प्रमुख तत्व क्या हैं?
(अ)मीथेन व कार्बन डाइऑक्साइड (ब)एथीलीन व कार्बन डाइऑक्साइड (स)मीथेन व कार्बन मोनोक्साइड (द)इनमें से कोई नहीं 
10. रोलेण्ड-गेरॉस स्टेडियम किसके लिए जाना जाता है? 
(अ)पिछला विश्व कप फुटबॉल फाइनल वहां खेला गया था (ब) यूनान (ग्रीस)में पिछले ओलंपिक खेलों का एक स्टेडियम (स)फ्रेंच अंतर्राष्ट्रीय टेनिस ओपन टूर्नामेंट यहां खेला जाता है (द)ऑस्टे्रलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट यहां खेला जाता है
11. निम्रलिखित महिलाओं में से कौन-सी भारतीय नौसेना की प्रथम वाइस एडमिरल बनी है?
(अ)कंवलजीत दयोल (ब) कंचन चौधरी भट्टाचार्य (स) पद्मावती बंद्योपाध्याय (द)पुनीता अरोड़ा
12. पटाखे में लाल रंग किसकी उपस्थिति के कारण दिखाई देता है?
(अ)मैग्रेशियम (ब) बेरियम (स) स्ट्रोनशियम (द) सोडियम।
13. निम्र में से किसमें नाइट्रोजन की मात्रा सर्वाधिक होती है?
(अ)यूरिया (ब) अमोनियम सल्फेट (स) सोडियम नाइट्रेट (द) अमोनियम क्लोराइड
14. कैथोड किरणें किस प्रकार की होती हैं?
(अ)एक्स किरणों के समान (ब)वाय किरणों के समान (स)इलेक्ट्रॉन के समान (द) प्रोट्रॉन के समान
15. टेस्टोस्टीरॉन किसमें पाया जाता है?
(अ)पुरूषों में (ब) स्त्रियों में (स)पशुओं में (द) दोनों में से किसी में नहीं
16. हाइड्रोजन वर्ण क्रम में सबसे पहले किस श्रेणी की खोज हुई?
(अ) लाइमन की (ब) बामर की (स) पाश्चन की (द) फुंड की
17. किसी उत्पति-माध्यम में अकेली कोशिका से पैदा होने वाली कोशिकाएं कहलाती है?
(अ) हेण्लॉइड (ब) होमोप्लॉइड (स) क्लोन (द) पुत्री कोशिकाएं
18. किसकी गंध से मच्छर भगाने वाली अच्छी औषधि तैयार की जा सकती है?
(अ)नीम (ब) चावल की भूसी (स) सिंकोना (द) तुलसी
19. मानचित्र पर बनाई गई वे रेखाएं जो समुद्र से बराबर ऊंचाई वाले स्थानों को 0िमलाते हैं, क्या कहलाती हैं?
(अ) आइसोबार (ब) आइसोथर्म (स) आइसोटोप (द) कंटूर
20. मानचित्र का वर्षा का वितरण दिखाने के लिए किस रेखा का प्रयोग किया जाता है?
(अ) आइसोहाइट (ब) आइसोथर्म (स) आइसोबार (द) आइसोहेलाइन
21. सामान जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएं कौन सी हैं?
(अ)आइसोप्रैक्ट (ब) आइसोडोपेन (स) आइसोटैक (द) आइसोपाइक्निक
22. महासागरीय एवं सागरीय भागों में लवणता की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?
(अ)आइसोबाथ (ब) आइसोहेल (स) आइसोसैलाइन (द) आइसोहैलाइन
23. निम्नलिखित में से कौन सा शहर नीली एवं सफेद नील के संगम पर स्थित है?
(अ) काहिरा (ब) बगदाद (स) खारतूम (द) अंकारा
24.भारत वर्ष में भर्तृहरि किस भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार हुए  हैं?
(अ) देवनागरी (ब) संस्कृत (स) फारसी (द) उर्दू
25. अकबर के शासन काल में वित्त मंत्री को क्या कहा जाता था?
(अ)वजीर (ब) मिर्जा बेग (स)आमिल (द) अमलगुजार
26. वाल्मीकि अंबेडकर आवास योजना किस के द्वारा चलाई जा रही है?
(अ) राज्य सरकार (ब) केन्द्र सरकार (स) हुडको (द) इनमें से कोई नहीं 
27. भारत के संविधान में निर्धारित किए गए अनुसार लोकसभा में सदस्यों की संख्या अधिकतम हो सकती है?
(अ) 547 (ब) 545 (स) 552 (द) इनमें से कोई नहीं

सही जवाब- 1. (द) जयप्रकाश नारायण, 2.(द) परिवहन एवं संचार, 3.(ब) द्वितीय,  4.(द) जब संविधान के संपूर्ण मसौदे को मंजूरी दी गई, 5.(द) केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार, 6.(अ)हां, 7.(स) 8 किमी तक, 8.(ब)40 अंश सेंटीग्रेट अवायवीय स्थिति के तहत हो, 9. (ब) एथीलीन व कार्बन डाइऑक्साइड, 10.(स)फ्रेंच अंतर्राष्ट्रीय टेनिस ओपन टूर्नामेंट यहां खेला जाता है,11.(अ)कंवलजीत दयोल, 12.(स) स्ट्रोनशियम, 13.(अ) यूरिया, 14.(स) इलेक्ट्रॉन के समान, 15.(अ) पुरूषों में, 16.(ब) बामर की, 17.(स) क्लोन, 18.(द) तुलसी, 19.(द) कंटूर, 20.(अ) आइसोहाइट, 21.(द) आइसो पाइक्निक, 22.(द) आइसोहैलाइन, 23.(स) खारतूम, 24.(ब)संस्कृत, 25.(अ) वजीर, 26.(ब) केन्द्र सरकार, (स) 552 ।
 


16-Jun-2021 2:05 PM (124)

चीन में उसके अपने ही लोग भड़कने लगे हैं. दरअसल वहां युवा काम के लंबे-लंबे घंटों से परेशान हैं और सप्ताह के 6 दिन रोजाना 12 घंटे काम के विरोध कर रहे हैं. चीन सरकार इस अभियान की पहुंच रोकने के लिए सेंसरशिप में लगी है. वैसे चीन दुनिया का पहला या अकेला देश नहीं, जहां कर्मचारियों के काम के घंटे खिंचते हैं. यूरोपीय संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकनॉकमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के एक सर्वे में पता चला कि मैक्सिको में आधिकारिक तौर पर काम के घंटे सबसे ज्यादा हैं.

इस देश में साल में 2127 घंटे काम
OECD की रैंकिंग में अधिकतम काम के लिए मैक्सिको सबसे ऊपर रहा. यहां सालभर में एक कर्मचारी औसतन 2127 घंटे काम करता है. ज्यादा काम के बाद दोहरी मार ये कि यहां पर कंपनियां अपने लोगों को छुट्टियां भी कम देती है. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां सालभर में 10 सवैतनिक छुट्टि्यां हैं. 26.6% कर्मचारी काम के लंबे घंटों की शिकायत लगातार करते आ रहे हैं, हालांकि इसपर कोई सख्त नियम नहीं बन सका.

दूसरे नंबर पर कोस्टा रिका 
मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका भी इसी श्रेणी में है. यहां सालभर में कर्मचारी लगभग 2060 घंटे काम करते हैं. पहले इस श्रेणी में दक्षिण कोरिया आता था. लेकिन वहां पर साल 2018 में सरकारी नियम बनाकर काम के घंटों को कम किया गया. हालांकि कम करने के बाद भी वहां हफ्ते में 52 घंटे काम देना होता है. बता दें कि विकसित मुल्कों में इसी देश में काम के घंटे सबसे लंबे हैं.

रूसी लोगों में भी काम की धुन 
रूस भी काम के लंबे-लंबे घंटों के लिए जाना जाता है. वैसे वहां पर सप्ताह में 40 घंटे ही काम का नियम है. और अगर कोई ओवरटाइम करना चाहे तो उसे भी 50 घंटे से ज्यादा समय देने की इजाजत नहीं. इसके बाद भी वर्कोहलिक रूसी आबादी घर से काम करती है ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा सके. रूस में वैसे छुट्टियां भी ठीक-ठाक हैं. वहां पब्लिक हॉलिडे के अलावा साल की 28 छुट्टियां मिलनी तय हैं.

काम के घंटे घटाने की बात कई देशों में 
इसकी बड़ी वजह ये है कि ज्यादा काम से थके कर्मचारी परिवार पर ध्यान नहीं दे पाते. इससे देशों में जन्मदर भी तेजी से घटी. जैसे दक्षिण कोरिया में इसका असर तेजी से दिखा और 3 दशकों के भीतर ये देश बुजुर्गों का देश बनने की श्रेणी में खड़ा है.

तनाव और अवसाद भी लंबे काम के घंटों से उपजता है
मिसाल के तौर पर चीन को ही लें तो इसी साल वहां की मुख्य ई-कॉमर्स कंपनी Pinduoduo में काम के बहुत दबाव के कारण दो कर्मचारियों की मौत हो गई. रात में डेढ़ बजे तक काम के बाद एक कर्मचारी एकाएक गिर गया और वहीं उसकी मौत हो गई थी. इसपर हल्ला मचने से पहले से दबा दिया गया. खुद चीन में अलीबाबा के संस्थापक ने देर तक काम की वकालत करते हुए इसे बढ़ावा दिया था.

जापान में अलग ही ट्रेंड चलता रहा 
अनुशासन के लिए जाने जाते देश जापान में लोग काम की अपनी सनक के लिए भी जाने जाते हैं. यहां के ज्यादातर कर्मचारी इसलिए छुट्टी नहीं लेते हैं कि इस दौर में कंपनी को कोई नुकसान न हो जाए. लोगों में काम की आदत एडिक्शन बन चुकी है. वे दिन के औसतन 16 घंटे काम करते हैं.

जबरन भेजा जा रहा लीव पर 
लगातार काम करने की हद ये है कि वहां हर कर्मचारी को साल में 10 पेड लीव मिलती हैं. लेकिन वे छुट्टियां नहीं लेते. तो अब वहां की सरकार ने एक तरीका ये निकाला कि कर्मचारियों को साल में एक निश्चित समय के लिए जबर्दस्ती छुट्टी पर भेजा जाने लगा. इससे तनाव भी घटेगा और उत्पादकता भी बढ़ेगी.

साल 2020 में कोरोना के पीक पर भी कंपनियों ने ये कदम उठाया. उन्होंने कर्मचारियों के काम में घंटों में लगभग 20 प्रतिशत कटौती कर दी ताकि वे फैमिली के साथ समय बिता सकें. यही नहीं, हरेक कर्मचारी को लगभग 940 डॉलर की रकम दी ताकि वो खाली समय में मनोरंजन कर सके. (news18.com)


16-Jun-2021 2:04 PM (119)

 

जापान उन देशों की कतार में आगे हैं, जहां आबादी घट रही है. ठीक यही हाल वहां के शाही परिवार का है. दरअसल राजकुमारियों के बाहरी लोगों से शादी करने के कारण रॉयल फैमिली में उत्तराधिकारी का संकट पैदा हो गया. ये बात अब राजकुमारी माको के साथ भी दिख रही है. माको सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं. उनके प्रेमी केई कोमुरो को भी तस्वीरों में साथ देखा जाता है. दोनों लंबे समय से शादी टाल रहे हैं क्योंकि आम नागरिक से शादी करने पर माको से राजकुमारी की पदवी छिन जाएगी. ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं.

बड़ी बहनों ने की शाही परिवार से अलग शादियां
जापान की जापानी राजकुमारी अयोको ने अपने शाही अधिकार और भारी-भरकम संपत्ति ठुकराकर एक आम शख्स से शादी कर ली. ये एक ही दशक के भीतर जापान के राजपरिवार को लगा दूसरा धक्का था. बता दें कि अयोको से पहले उनकी बड़ी बहन नोरिको ने भी साल 2014 में शाही परिवार से बाहर शादी की थी. मौजूदा राजकुमारी माको इन्हीं बहनों में सबसे छोटी हैं.

बार-बार शादी टालने को मजबूर
माको भी साल 2017 में अपनी शादी का लगभग एलान कर चुकी थीं लेकिन राजपरिवार के दबाव में उन्हें पीछे हटना पड़ा. इसके बाद माना गया था कि साल 2020 में वे फैसला लेंगी, हालांकि इस साल भी उन्होंने शादी से इनकार कर दिया. इसके पीछे ये डर बताया जा रहा है कि राजकुमारी अगर राज परिवार से बाहर किसी से जुड़ती हैं तो उन्हें शाही शानोशौकत छोड़नी होगी.

सिकुड़ रहा है राजपरिवार
राजकुमारियों के बाहरी लोगों से शादी करने के कारण रॉयल फैमिली में उत्तराधिकारी का संकट पैदा हो गया है. परिवार में अब 18 सदस्य बाकी हैं. इनमें से 6 राजकुमारियों ने शाही परिवार के भीतर कोई वर न मिलने के कारण शादी नहीं की. हो सकता है कि जल्द ही ये भी किसी आम जापानी नागरिक से शादी कर लें. ऐसे में जापान के राजपरिवार में केवल 12 सदस्य बाकी रहेंगे.

पुरुष सत्ता है शाही घराने पर
असल में जापान के प्राचीन राजपरिवार में सिर्फ पुरुषों को ही राजगद्दी पर बिठाया जाता रहा है लेकिन अब परिवार छोटा होते जाने के कारण हो सकता है कि महिला वारिस पर भी विचार होने लगे. हालांकि ये भी तभी हो सकता है, जब आम लोगों से शादी करने वाली राजकुमारियों से शाही पहचान न छीनी जाए. ऐसे में वे या तो खुद गद्दी की वारिस बन सकती हैं या फिर उनके बच्चों को यह अधिकार मिल सकता है. हालांकि जापान में मजबूत पदों पर बैठे रुढ़िवादी लोग इसके खिलाफ हैं और इसी वजह से साल 2017 से इस बात पर केवल बहस ही हो रही है.

बाहरी लड़के से जुड़ने पर छोड़नी होती है पदवी
बता दें कि इंपीरियल हाउस लॉ के अनुसार अगर कोई प्रिंसेज किसी बाहरी आदमी से शादी करती है तो उससे शाही पदवी छीन ली जाती है. साथ में उसे अपना भविष्य खुद बनाने के लिए एक रकम दे दूी जाती है ताकि वो किसी किस्म की कोई उम्मीद न रखे. राजकुमारी अयोको को लगभग सवा मिलियन डॉलर दिए गए थे.

प्रिंस के लिए नहीं है ये नियम
दूसरी तरफ जापान के राजकुमार के लिए ये नियम लागू नहीं होता. वे किसी भी लड़की से शादी कर सकते हैं और महल में आने वाली लड़की भी शाही परिवार का हिस्सा हो जाती है. इस शादी से हुई पुरुष संतान को वारिस माना जाता है. जबकि लड़की संतान को सारी शानोशौकत तो मिलती है लेकिन परिवार के उत्तराधिकारी का दर्जा नहीं.

दो दशक तक परिवार में नहीं जन्मी नर संतान
अब हुआ ये कि साल 1965 से 2006 तक जापान के राज परिवार में एक भी लड़के का जन्म नहीं हुआ. यानी पूरे 41 साल ढेर सारी राजकुमारियां तो थीं लेकिन राजकुमार एक भी नहीं. साल 2006 में राजकुमार हिसाहितो का जन्म हुआ. इसके साथ ही राज परिवार को एक तरह से तसल्ली हुई कि उनका वारिस आ चुका है. हालांकि अब लगातार बात हो रही है कि क्या जापान के शाही खानदान को नियमों को बदलने की जरूरत है. (news18.com)


16-Jun-2021 2:03 PM (121)

 

इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल कर नफ्ताली बेनेट नए प्रधानमंत्री बने लेकिन दो दिनों तक भी शांति नहीं रह सकी. असल में बेनेट ने यहूदियों को यरुशलम में विवादित फ्लैग मार्च की इजाजत दे दी और मंगलवार को ये जुलूस निकला भी. आतंकी संगठन हमास में इसे लेकर खलबली मची है और वे धमकियां दे रहे हैं कि मार्च निकालकर यहूदियों ने शांति तोड़ी. वैसे मार्च ऑफ फ्लैग हमेशा से ही हमास को भड़काता रहा है.

किस बात पर है इजरायल और हमास में झगड़ा
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच पिछले महीने ही 11 दिनों तक खुली लड़ाई के बाद सीजफायर हो सका. लेकिन लगता है कि ये संघर्षविराम ज्यादा नहीं चलने वाला है. इसकी वजह वो मार्च है, जो दक्षिणपंथी यहूदियों ने निकाला. टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक हमास के प्रवक्ता अब्द अल-लतीफ कनौ ने एक बयान में कहा कि फ्लैग मार्च एक विस्फोटक है जिससे यरुशलम और अल-अक्सा मस्जिद में तनाव की आग भड़केगी.

वैसे हर साल ही इस मार्च के दौरान फिलिस्तीन और इजराइल के बीच तनाव बढ़ जाता है. इसके पीछे दरअसल मार्च का इतिहास है, जो हमास को परेशान करता है.

इजरायल ने अकेले हराया था अरब मुल्कों को 
साल 1967 में अरब देशों के साथ इजरायल का भयंकर युद्ध चला था. 5 दिनों तक चले इस युद्ध में इजरायल ने भारी तबाही मचाते हुए मिस्र, जॉर्डन और सीरिया की सेनाओं को हिला दिया. युद्ध में जीत के साथ ही इजरायल को यरुशलम पर कब्जा मिल सका, जो कि यहूदियों के लिए दुनिया में सबसे पवित्र जगह है. उन्होंने तुरंत इसे अपनी राजधानी घोषित कर दिया. नतीजा ये हुआ कि भारी संख्या में फलस्तीनी यहां से निकलने लगे.

जीत की याद में हर साल इजरायल में फ्लैग मार्च 
ये दिन हर साल तिथि के मुताबिक बदलता रहता है. लेकिन सवाल वहीं का वहीं है कि आखिर इसपर फिलिस्तीन और अरब देश क्यों भड़कते हैं. इसकी एक वजह तो मनोवैज्ञानिक है. इस दिन जुलूस को देखकर अरब देशों की हार की याद ताजा हो जाती है कि कैसे इजरायल ने अकेले इतने देशों को हरा दिया था.

जुलूस का रूट भी विवाद का हिस्सा
दरअसल मार्च में हजारों यहूदी युवा और हर उम्र के लोग यरुशलम के उन इलाकों से गुजरते हैं, जहां मुस्लिम आबादी बसती है. वे वहां से होकर वेस्टर्न वॉल जाते हैं, जिसे वे दुनिया की शुरुआत की जगह मानते हैं. मुस्लिम-बहुल इलाकों से मार्च निकलने पर वहां के लोगों को अपनी दुकानें बंद करनी होती हैं. साथ ही घरों के भीतर रहना होता है. ये बात उन्हें अखरती है और स्थानीय व्यापारी काफी समय से मार्च का विरोध करते रहे हैं.

मार्च देखकर बेदखली की याद आती है 
फिलिस्तीनी इससे उकसावे वाला मार्च मानते हैं. उनके मुताबिक जुलूस का बड़ा हिस्सा जान-बूझकर भड़काऊ नारे लगाता है और हार के साथ फलस्तीनियों की बेदखली की याद दिलाता है. बता दें कि पूर्वी यरुशलम पर कब्जे के बाद अस्सी की शुरुआत में इजरायल ने एक कानून बनाया, जिसके तहत पश्चिमी और पूर्वी यरुशलम को एक घोषित किया गया. इसके बाद पूर्वी यरुशलम में रहने वाली मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा पलायन कर गया.

आज भी अरब मुल्क मानते हैं कि पूर्वी यरुशलम फलस्तीनियों का है और उसे आजाद करना चाहते हैं. यही हमास का भी इरादा है. मार्च के दौरान ये सारी बातें सतह पर आ जाती हैं और लगभग हर साल ही छिटपुट भिड़ंत होती रही.

बेनेट ने लिया था फैसला 
इस साल ये मार्च 10 मई को निकलने वाला था लेकिन हिंसा की खबरों के बीच इसे स्थगित करना पड़ा. लेकिन बेनेट प्रशासन ने सत्ता में आते ही इसकी अनुमति दे दी और मार्च हो भी गया. वैसे बता दें कि नए पीएम बेनेट को बेंजामिन नेतन्याहू से भी ज्यादा सख्त और धार्मिक माना जाता है, जो फिलिस्तानी के अलग अस्तित्व से ही इनकार करते हैं. ऐसे में इंटरनेशनल जगत में ये चर्चा भी हो रही है कि आने वाले समय में अरब मुल्कों से इजरायल की आर-पार हो सकती है. (news18.com)


16-Jun-2021 2:02 PM (112)

कोरोना महामारी फैलाने के आरोपों में घिरा चीन अब एक नए विवाद में फंस गया. हांगकांग के पास चीन के एक परमाणु प्लांट में कुछ दिनों पहले रिसाव की खबर आई लेकिन चीन इस जानकारी को सीक्रेट रख रहा था. माना जा रहा है कि प्लांट से लीकेज बढ़ने पर हालात काफी खतरनाक हो सकते हैं. उस प्लांट में एक फ्रांसीसी कंपनी भी हिस्सेदार है इसलिए अब अमेरिका और फ्रांस मामले की जांच में जुटे हैं.

क्या हो रहा है चीन में
चीन के गुआंगदोंस प्रांत में ताइशन न्‍यूक्लिर पावर प्‍लांट से रेडियोएक्टिव रिसाव की खबर डरा रही है. सीएनएन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक अब अमेरिका में बाइडन प्रशासन देख रहा है कि कहीं रिसाव ज्यादा तो नहीं हो रहा. अगर ऐसा होता है तो भारी तबाही मच सकती है. इससे न केवल वहां की आबादी, बल्कि रेडियोएक्टिव तत्वों के कारण हवा के विषैले होने पर पड़ोसी देशों तक असर जा सकता है.

क्या होता है, जब शरीर में रेडियोएक्टिव तत्व चले जाएं 
ये ऐसे तत्व हैं, जिसके संपर्क में आते ही कुछ ही दिनों के भीतर स्वस्थ से स्वस्थ इंसान दम तोड़ देता है क्योंकि ये सीधे खून से प्रतिक्रिया करते हैं. इसके अलावा धीमी गति से क्रिया करने पर भी ये स्किन, बोन या ब्लड कैंसर जैसी घातक बीमारियां देते हैं.

बच्चों में थायरॉइड कैंसर का खतरा 
लाइव साइंस वेबसाइट पर मिली जानकारी के मुताबिक रेडियोएक्टिव तत्व कोशिकाओं पर ही हमला नहीं करते, बल्कि शरीर के अलग-अलग अंगों पर घातक असर डालते हैं. जैसे रेडिएक्टिव आयोडिन को थायरॉइड ग्लैंड अवशोषित कर लेती है. इससे थायरॉइड कैंसर हो जाता है. बच्चों पर ये खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि उनकी थायरॉइड ग्लैंड वयस्कों से 10 गुनी छोटी होती है.

रक्तस्त्राव से हो सकती है मौत 
इसके अलावा रेडिएशन सिकनेस भी होती है, जो हवा में मौजूद रेडिएशन या पानी के जरिए पहुंचने वाले रेडियोएक्टिव तत्वों के कारण होती है. ये अक्सर जानलेवा होती है क्योंकि इसमें तत्व सीधे शरीर में पहुंचकर हर अंग पर असर डालते हैं. इसके लक्षणों में नाक, कान, मुंह से खून आना या फिर आंतरिक ब्लीडिंग भी शामिल है.

खतरा सैकड़ों-हजारों सालों तक रहता है
रेडियोधर्मी कचरे के साथ दूसरी बड़ी समस्या है कि ये पूरी तरह से खत्म नहीं हो सकते. कचरे के स्रोत के आधार पर, रेडियोधर्मिता कुछ घंटों से सैकड़ों सालों तक रह सकती है, जिसके बाद इसका घातक असर कम होता है. यही वजह है कि इसके खतरे के आधार पर ठोस और तरल कचरे का निपटान अलग तरह से होता आया है. ठोस को सावधानी से ऐसी जगह पर और इस प्रकार से गाड़ा जाता है कि उससे निकलने वाली हानिकारक विकिरण व अन्य कण कम से कम हानि पहुंचा सकें और उसमें कोई रिसाव न हो.

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे 
रेडियोधर्मी तत्वों के लीकेज के कारण होने वाला खतरा हवा-हवाई नहीं, बल्कि पूर्व में ऐसे हादसे हो चुके हैं. यूक्रेन के चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा स्टेशन में साल 1986 में विस्फोट हुआ था. इसके बाद आनन-फानन प्लांट समेत आसपास के इलाकों को खाली करवा दिया गया. हालांकि इसके बाद हजारों लोग ऐसी बीमारियां लेकर आए, जो इन तत्वों के कारण हुईं.

जापान के फुकुशिमा प्लांट की भी खूब चर्चा रही
दशकभर पहले जबर्दस्त सुनामी के बाद फुकुशिमा परमाणु संयंत्र तबाह हो गया था. इसके बाद से वहां 10 लाख टन से ज्यादा रेडियोएक्टिव पानी जमा है. इसे समुद्र में बहाने की बात हुई. संयंत्र से पानी समुद्र में छोड़ने के पीछे आगामी टोक्यो ओलंपिक खेल हैं. खेल की जगह फुकुशिमा से लगभग 60 किलोमीटर दूर है. ऐसे में दुनियाभर से आए खिलाड़ियों को किसी दुर्घटना का डर हो सकता है. इसी डर को खत्म करने के लिए जापान सरकार रेडियोएक्टिव पानी को समुद्र में बहाने का फैसला लिया.

सरकारी आश्वासन के बाद भी चिंता 
सरकार ने कहा कि विषैले तत्वों को बहाने के पहले पानी को साफ किया जाएगा. सरकारी दावों के मुताबिक ये इतना साफ होगा कि उसमें रेडिएशन बाकी नहीं रहेगा. लेकिन इसपर पड़ोसी देश डरे हुए हैं. चिंता है कि रेडियोएक्टिव तत्व अगर बहते हुए उनके देश पहुंच गया तो नतीजे घातक होंगे.

जापानी मछुआरे हो जाएंगे तबाह 
बाहरी दुनिया तो छोड़िए, खुद जापान के मछुआरे भी पानी छोड़ने का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे उनका व्यापार ठप हो जाएगा. बता दें कि पहले से ही जापान में समुद्री जानवरों को नुकसान पहुंचाने के कारण जापानी मछुआरे कुख्यात रहे. कड़े नियमों के साथ काफी मुश्किल से उन्होंने अपनी छवि बदली. इसके बाद भी काफी सारे देश फुकुशिमा से आने वाली मछलियां या दूसरा सी-फूड नहीं खरीदते हैं. अब रेडियोएक्टिव पानी बहाने से न केवल समुद्री जंतुओं को नुकसान होगा, बल्कि मछुआरों का काम बंद हो जाएगा क्योंकि कोई भी उनके पास से जहरीले सी-फूड नहीं खरीदना चाहेगा. (news18.com)


16-Jun-2021 8:54 AM (25)

-ललित मौर्य 

इस वर्ष मई का औसत तापमान बीसवीं सदी के औसत से 0.81 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है

इस वर्ष मई का महीना इतिहास का छठा सबसे गर्म मई का महीना था। इस वर्ष मई का औसत तापमान बीसवीं सदी के औसत से 0.81 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है। जो इसे मई 2018 के साथ संयुक्त रूप से इतिहास का छठा सबसे गर्म मई का महीना बनाता है। यह जानकारी एनओएए के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन द्वारा जारी की गई है। वहीं यदि जनवरी से मई के औसत तापमान को देखें तो वो इसे इतिहास का आठवां सबसे गर्म वर्ष बनाता है।

इस बार मई के महीने की तुलना बीसवीं सदी के औसत तापमान से करें तो यह 45वां मौका है जब लगातार मई का तापमान 20वीं सदी के औसत तापमान से ज्यादा है। वहीं यह लगातार 437 वां महीना है जब तापमान बीसवीं सदी के औसत तापमान से ज्यादा है।

वहीं यदि क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो एशिया में यह दूसरा सबसे गर्म मई का महीना है। वहीं एशिया में रिकॉर्ड के अनुसार मई 2020 अब तक का सबसे गर्म मई का महीना है। जबकि मई 2021 अफ्रीका का छठा सबसे गर्म मई है। वहीं यूरोप और उत्तरी अमेरिका में क्रमशः 2004 और 2011 के बाद सबसे ठंडा मई का महीना रिकॉर्ड किया गया है।

यदि मार्च से मई के तीन महीनों का औसत वैश्विक तापमान देखें तो यह औसत से 0.82 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया था। जिसके चलते यह दुनिया का आठवां सबसे गर्म मौसम बन गया है। यदि उत्तरी गोलार्ध को देखें तो इस बार वहां छठा सबसे गर्म वसंत का मौसम रिकॉर्ड किया गया था, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में अब तक की 11वीं सबसे गर्म शरद ऋतु रिकॉर्ड की गई थी।

जनवरी से मई के तापमान के आधार पर आठवां सबसे गर्म वर्ष है 2021

यदि जनवरी से मई के तापमान को देखें तो यह रिकॉर्ड का आठवां सबसे गर्म वर्ष है, जब वैश्विक औसत तापमान सदी के औसत तापमान से 0.77 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है। वहीं यदि अफ्रीका की बात करें तो इस वर्ष जनवरी से मई का औसत तापमान इसे रिकॉर्ड का तीसरा सबसे गर्म वर्ष बनाता है। इससे पहले अफ्रीका में 2016 में तापमान सबसे ज्यादा था उसके बाद 2010 दूसरा सबसे गर्म वर्ष था। इसी तरह अब तक के आंकड़ों के अनुसार 2021 एशिया के लिए आठवां और दक्षिण अमेरिका के लिए नौंवा सबसे गर्म वर्ष है।

इसी तरह यदि आर्कटिक में जमा बर्फ की बात करें तो नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर के अनुसार पिछले महीने मई में आर्कटिक के लगभग 243,000 वर्ग मील हिस्से पर बर्फ जमा थी जोकि क्षेत्रफल में करीब सोमालिया के बराबर है। गौरतलब है कि पिछले 43 वर्षों के इतिहास में यह नौंवा ऐसा मौका है जब मई के महीने में इतने कम क्षेत्र में बर्फ जमा है।

उत्तरी गोलार्ध में इस बार मई के महीने में बर्फ का आवरण औसत से 10.8 लाख वर्ग मील कम था जोकि रिकॉर्ड के अनुसार तीसरा सबसे कम बर्फ का आवरण है। इससे पहले मई 2010 और मई 2012 में इतने कम क्षेत्र में बर्फ जमा थी। वहीं उत्तरी अमेरिका में बर्फ का आवरण 11वां सबसे छोटा है। इसी तरह यूरेशिया में भी यह पांचवा मौका है जब बर्फ का आवरण इतना कम है।

मई में दर्ज किया गया औसत तापमान एक बार फिर यह इशारा करता है कि दिन-प्रतिदिन वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है। इस बारे में हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने भी इसका खुलासा किया है कि इस बात की 40 फीसदी सम्भावना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाएगी। (downtoearth.org.in/hindistory)


15-Jun-2021 12:43 PM (36)

दुनिया की आबादी जुलाई 2013 में  7.2 अरब हो जाएगी और इस सदी के पूरा होते-होते धरती पर 10.9 अरब इंसान होंगे। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार  इंसानों की तादाद सबसे ज्यादा विकासशील देशों में बढ़ेगी।
संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया की आबादी पर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है। संयुक्त राष्ट्र ने आंकड़े जुटाने के अलग-अलग मॉडलों के आधार पर कहा है कि अगली सदी की शुरूआत तक धरती पर इंसानों की तादाद 16.6 अरब तक भी जा सकती है या फिर घट कर 6.8 अरब तक भी आ सकती है। दोनों ही मामलों में दुनिया के गरीब इलाकों में आबादी का बहुत तेजी से बढऩा तय है।    
गरीब देशों में रहने वाले लोगों की संख्या इस समय 89.9 के करीब है संयुक्त  राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक इन देशों में 1.8 अरब लोग होंगे। साल 2100 तक लोगों की तादाद 1.28 अरब तक पहुंचने के आसार हैं।  हालांकि दुनिया भर में आबादी बढऩे की रफ्तार कम हुई लेकिन यह रिपोर्ट हमें बता रही है कि कुछ विकासशील देश, खासतौर से अफ्रीका में यह अब भी बहुत तेजी से बढ़ रही है।
विकसित देशों में स्थिति इससे बिल्कुल अलग रहेगी वहां इस सदी के आखिर तक आबादी में मोटे तौर पर ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। उम्मीद की जा रही है कि 1.25 अरब की मौजूदा आबादी मामूली बढ़त के साथ 1.28 अरब तक जाएगी। रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि विकसित देशों में अगर गरीब देशों से प्रवासी नहीं आए तो बहुत से देशों की आबादी घटेगी। वर्ष 2013 से 2050 तक के लिए इसका हर साल के लिए औसत 24 लाख बताया गया है। 
रिपोर्ट ने दुनिया में बुजुर्गों की बढ़ती तादाद की ओर भी ध्यान दिलाया है। इस समय दुनिया की आबादी में 23 फीसदी लोग बूढ़े हैं। आबादी में उनकी हिस्सेदारी 2050 तक बढ़ कर 32 फीसदी होने की उम्मीद है। 60 साल से ज्यादा उम्र वाले लोग दुनिया में 2100 तक 3 अरब हो जाएंगे। विकासशील देशों में रहने वाले बुजुर्ग 2050 तक दोगुने से ज्यादा हो जाएंगे और 2100 तक तीन गुने। इंसानों की औसत आयु भी बढ़ रही है। 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की संख्या अगली सदी तक बढ़ कर 83 करोड़ हो जाएगी। फिलहाल इतनी उम्र वाले बुजुर्ग दुनिया में 12 करोड़ हैं जो 2050 तक 39.2 करोड़ हो जाएंगे। इनमें से 68 फीसदी बुजुर्ग 2050 तक विकासशील देशों में होंगे।
हैरान करने वाली बात यह है कि आबादी भले ही बढ़ रही हो लेकिन इंसानों की प्रजनन दर दुनिया भर में घट रही है। इनमें सबसे ज्यादा कमी विकसित देशों में आने का अनुमान लगाया गया है। मौजूदा 4.53 बच्चे प्रति महिला से घट कर 2050 में 2.87 पर पर पहुंच जाएगी। सदी का अंत होते-होते इसके और घट कर 1.93 पर पहुंचने का अनुमान है। कम प्रजनन दर वाले देशों में चीन, अमेरिका, ब्राजील, रूस, जापान और वियतनाम सबसे ऊपर हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2028 तक भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होगा। उस वक्त दोनों देशों के पास करीब 1.45 अरब की आबादी होगी। भारत इसके बाद के दशकों में भी आबादी बढ़ाता रहेगा और करीब 1.6 अरब तक जाएगा। इसके बाद आबादी घटनी शुरू होगी और अगली सदी आते आते यह घट कर 1.5 अरब तक पहुंच जाएगी। उधर चीन की आबादी 2030 तक घटनी शुरू होगी 2100 तक घट कर 1.1 अरब रह जाएगी।


15-Jun-2021 12:42 PM (41)

रॉस द्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर के निकट स्थित एक द्वीप है। यह द्वीप ब्रिटिश वास्तुशिल्प के खंडहरों के लिए प्रसिद्ध है। रॉस द्वीप 200 एकड़ में फैला हुआ है। फीनिक्स उपसागर से नाव के माध्यम से चंद मिनटों में रॉस द्वीप पहुंचा जा सकता है। सुबह के समय यह द्वीप पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है।
 


15-Jun-2021 12:41 PM (36)

अमेरिकी शहर रुशह्य Los Angeles  का पूरा नाम है -El Pueblo de Nuestra Señora la Reina de los Ángeles del Río de Porciúncula  । इस स्पैनिश नाम का मतलब है इस छोटे खंड के फरिश्तों की रानी हमारी स्वामिनी का शहर। रुशह्य Los Angeles के कई उच्चारण हैं - लॉस ऐंजलस, लॉस ऐंजलिस, लॉस ऐंगलस, लॉस ऐंजलीज़, लॉस ऐंजिलीज, लॉस ऐंगलीज़। लगता है, जिसको जैसा मन आया, उच्चारण चला दिया। अगर आपको कोई एक नाम चुनने में दिक्कत आ रही है तो रु्र ही बोलिए ।

 


15-Jun-2021 12:39 PM (28)

राजमहल एक ऐतिहासिक नगर है, जो झारखंड राज्य, पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा है। यह गंगा नदी के पश्चिम में स्थित है। यह नगर राजमहल पहाडिय़ों में हैं, जो गंगा नदी से 190 किमी उत्तर-दक्षिण में लगभग दुमका तक फैली हैं। ये 567 मीटर तक ऊंची उठती हैं और यहां पर सोरिया पहाडिय़ा लोगों का वास है। घाटियों में संथाल जनजाति द्वारा खेती की जाती है।
बंगाल के सूबेदार मु$गल सेनापति मानसिंह ने तेलियागढ़ दर्रे और गंगा नदी पर सामरिक नियंत्रण के लिए 1995-1596 में इस जगह को अपनी राजधानी के रुप में चुना.। 1608 में बंगाल की राजधानी डक्का वर्तमान ढाका) स्थानांतरित हो गई, लेकिन अस्थायी तौर पर 1639 से 1660 के बीच राजमहल ने अपनी प्रशासनिक स्थिति को वापस हासिल कर लिया। नगर में ऐतिहासिक महत्त्व की अकबर मस्जिद (निर्माण-लगभग 1600 ई.) और बंगाल के नवाब मीर $कासिम का महल है। 
 

बैरन द्वीप
बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय है ज्वालामुखी है। यह द्वीप लगभग 3 किमी. में फैला है। यहां का ज्वालामुखी 28 मई 2005 में फटा था। तब से अब तक इससे लावा निकल रहा है।
बैरन द्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग 500 किलोमीटर उत्तर पूर्व में बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
 


15-Jun-2021 12:38 PM (35)
राजा हरि सिंह जम्मू और कश्मीर के अंतिम राजा थे। वे 1925 में राजगद्दी पर बैठे। राजा हरि सिंह ने दूसरे विश्व युद्ध में इम्पीरियल वॉर कैबिनेट के सदस्य रहे। लेकिन भारत के बंटवारे के बाद सभी रियासतों के शासकों को यह विकल्प दिया गया कि वे पाकिस्तान में शामिल हों भारत में या विशेष परिस्थितियों में आज़ाद रहें।
 राजा हरि सिंह ने तीसरा विकल्प चुना लेकिन जब अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान से क़बाइलियों का हमला हुआ तो उन्होंने भारत सरकार से मदद मांगी। इस मदद के बदले उन्होंने भारत में शामिल होना स्वीकार कर लिया.। भारतीय सेना क़बाइलियों को रोका लेकिन जो हिस्सा उनके क़ब्ज़े में आ चुका था उसे ख़ाली करवाने की अनुमति उन्हें नहीं मिली। सन 1951 में जम्मू कश्मीर के भारत के एक राज्य बन जाने पर राजा हरि सिंह की सत्ता समाप्त हो गई. 
सन 1964 में उनके पुत्र करन सिंह को सद्रे रियासत और राज्य का गवर्नर बनाया गया। भारत एक गणतंत्र है और अब वहां कोई राजा नहीं है लेकिन पुराने राज घराने अब भी हैं जिनके बहुत से सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं। 
 
 
प्रमुख संगठनों के मुख्यालय
संगठन मुख्यालय
विश्व व्यापार संगठन जेनेवा
अमरीकी राज्यों का संगठन वांिशंगटन डी.सी
अरब लीग टयूनिश
परम्पर आर्थिक सहायता परिषद (कोमेकान) मास्को
वल्र्ड काउंसिल आफ चर्चेंज जेनेवा
अफ्रीकी आर्थिक आयोग आदिस अबाबा
पश्चिमी एशिया आर्थिक आयोग   बगदाद
गैट जेनेवा
एमनेस्टी इंटरनेशनल लंदन
एशियाई विकास बैंक मनीला
दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्टï्रों का संघ जकार्ता
नाटो ब्रुसेल्स
अफ्रीकी एकता संगठन आदिस अबाबा
चोगम (राष्ट्रमंडलीय राष्टï्राध्यक्ष सम्मेलन) स्ट्रांसबर्ग
पेट्रोलियम उत्पादक देशों का संगठन वियाना
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन पेरिस
यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ जेनेवा
रेडक्रास जेनेवा
सार्क काठमाण्डु
संयुक्त राष्टï्र पर्यावरण कार्यक्रम नैरोबी
इंटरपोल पेरिस
संयुक्त राष्टï्र शरणार्थी उच्चायोग जेनेवा
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी वियाना
संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन वियाना
विश्व वन्य जीव संरक्षण कोष ग्लाड (स्विटजरलैंड)
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी लुसाने
यूरोपीय कामन मार्कट जेनेवा
 

15-Jun-2021 12:36 PM (27)

1. अल्माटी बांध किस नदी पर स्थित है?
(अ) गोदावरी (ब) कृष्णा (स) कावेरी (द) नर्मदा
2. हीराकुंड बांध निम्नलिखित में से किस नदी पर बनाया गया है?
(अ) गंगा (ब) यमुना (स) महानदी (द) ब्राह्मणी
3. गांधी सागर, जवाहर सागर तथा प्रताप सागर बांध किस नदी पर निर्मित है?
(अ) नर्मदा (ब) तापी (स) चंबल (द) कृष्णा
4. निम्नलिखित में से कौन भारतीय मानसून को प्रभावित नहीं करता है?
(अ)एलनिनो (ब)जेटस्ट्रीम (स) तिब्बत का पठार (द) गल्फस्ट्रीम
5. भारत में सर्वाधिक वर्षा किस मानसून से होती है?
(अ) दक्षिण-पूर्वी मानसून (ब) दक्षिण-पश्चिम मानसून (स) उत्तर-पूर्वी मानसून (द) उत्तर-पश्चिम मानसून
6. निम्नलिखित में से किस राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा नहीं होती है?
(अ) राजस्थान (ब) तमिलनाडु (स) कर्नाटक (द) पंजाब
7. तमिलनाडु के तटीय भागों में जाड़ों में वर्षा की प्राप्ति किससे होती है?
(अ) उत्तर-पूर्वी मानसून से (ब) दक्षिण-पश्चिम मानसून से (स) स्थलीय एवं सागरीय समीर से (द) बंगाल की खाड़ी के चक्रवात से
8. दक्षिण-पश्चिम मानसून निम्नलिखित में से किस प्रदेश में सर्वप्रथम प्रवेश करता है?
(अ) तमिलनाडु (ब) महाराष्ट्र (स) गोवा (द) केरल
9. मानसूनी जलवायु की प्रमुख विशेषता क्या है?
(अ) मूसलाधार एवं पर्वतीय वर्षा (ब) मूसलाधार एवं चक्रवातीय वर्षा (स) मूसलाधार एवं संवाहनिक वर्षा (द)वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन
10. भारत में वर्षा का औसत कितना है?
(अ) 98 सेमी (ब) 118 सेमी (स) 128 सेमी (द) 138 सेमी
11. भारत के उत्तरी मैदानों में शीतकाल में वर्षा होती है?
(अ) पश्चिमी विक्षोभ से (ब)बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा से (स) अरब सागर की मानसूनी शाखा से (द) लौटते मानसून से
12. भारत में पाया जाने वाला अधिकांश लौह अयस्क किस प्रकार का है?
(अ)हेमेटाइट (ब)मैग्नेटाइट (स) सीडेराइड (द) लिमोनाइट
13. भारत का सर्वाधिक जस्ता उत्पादक राज्य है?
(अ) महाराष्ट्र (ब) राजस्थान (स) झारखंड (द) उड़ीसा
14. ब्राजील में विस्तृत कहवा की बागाती को कहते हैं?
(अ) फजेडास (ब) ट्रासिल (स) कोरिल्ज (द) एस्टेंसियस
15. म्यांमार औद्योगिक दृष्टिï से पिछड़ा हुआ है, क्योंकि?
(अ) कृषि से सुगम जीविका (ब) विषय भूमि सतह (स) सीमित स्थानीय बाजार (द) लौह खनिज एवं कोयले की कमी
16. अटलांटिक महासागरीय भागों में कॉनर्वेशनल झंझावत कहलाते हैं?
(अ) हरिकेन (ब) टाईफून (स) साइक्लोन, चक्रवात (द) टोरनेडो
17. निम्नलिखित में से किस देश के लोगों को मेगयार के नाम से जाना जाता है?
(अ) हंगरी (ब) स्लोवाकिया (स) ऑस्ट्रिया (द) रोमानिया
18. परंपरागत चारागाही खानाबदोशी वाली जीवनशैली का क्षेत्र है?
(अ) दक्षिण अफ्रीका वेल्ड्स (ब) मंगोलिया के स्टैपी (स) कनाडा के प्रेयरीज (द) ऑस्ट्रेलियन डाउंस
19. निम्नलिखित में से कौन सा देश संघनित दुग्ध के निर्यात में अग्रणीय है?
(अ) भारत (ब) बेलजियम (स) इटली (द) नीदरलैण्ड्स
20. एंफीबिया का क्या अर्थ होता है?
(अ) पानी में रहना (ब) दो जीवन होना (स) शल्कधारी (द)शल्क रहित होना
21. कतरनिया घाट मगरमच्छ अभ्यारण्य कहां स्थित है?
(अ) विशाखापत्तनम, आंध्रप्रदेश (ब) औरंगाबाद, महाराष्टï्र (स)बहराइच, उत्तरप्रदेश (द) देहरादून, उत्तरांचल
22. व्याघ्र दर्शन के लिए सबसे अच्छा स्थान भारत के किस व्याघ्र रिजर्व को माना जाता है?
(अ) रणथंभौर व्याघ्र अभयारण्य, राजस्थान (ब)कान्हा राष्टï्रीय उद्यान, मध्यप्रदेश (स) मनास व्याघ्र रिजर्व, असम (द) इनमें से कोई नहीं
23. कुत्ते क्यों हांफते हैं?
(अ) उनमें स्वेद ग्रंथि नहीं होती है, इसलिए मुंह के जरिए पानी को वाष्पीकृत करने के बाद वे ठंडे होते हैं (ब) यह वेदना की अभिव्यक्ति है (स) किसी मुश्किल व्यायाम के बाद भरपूर हवा मुंह में भरने के लिए (द) अधिक से अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए
24. रूप विज्ञान (मॉर्फोलॉजी) क्या है?
(अ)मृत जीव के ऊतकों का अध्ययन (ब) जीवों पर औषधि के प्रभाव का अध्ययन (स)सजीवों की आकृति का अध्ययन (द) उपर्युक्त सभी
25. भारतीय पैंगोलिन किसे कहते हैं?
(अ) फेलिडी परिवार की जंगली बिल्ली (ब) चींटी खाने वाला मिरमीकोफैगिडी परिवार का शल्कदार जीव (स) हिस्ट्रीसिडी परिवार का सेही (द) पानी में रखनेवाला ऊदबिलाव 
26. भारत में अधिकतम एवं न्यूनतम जनसंख्या के घनत्व वाले प्रदेश क्रमश: हैं?
(अ) उत्तरप्रदेश एवं अरुणाचल प्रदेश (ब) पश्चिम बंगाल एवं अरुणाचल प्रदेश (स) उत्तरप्रदेश एवं सिक्किम (द) पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम
27. भारत के संविधान के 44 वें संशोधन द्वारा निम्नलिखित अधिकार को मौलिक अधिकार की श्रेणी को हटा दिया गया?
(अ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (ब) संवैधानिक उपचार (स) संपत्ति (द) धर्म की स्वतंत्रता

सही जवाब- 1.(ब) कृष्णा, 2.(स) महानदी, 3.(स) चंबल, 4.(द) गल्फस्ट्रीम, 5.(ब)दक्षिण-पश्चिम मानसून, 6.(ब) तमिलनाडु, 7.(अ) उत्तर-पूर्वी मानसून से, 8.(द) केरल, 9.(द)वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन,10.(ब)118 सेमी,11.(अ)पश्चिमी विक्षोभ से, 12.(अ) हेमेटाइट, 13.(ब) राजस्थान, 14.(अ) फजेडास, 15.(अ) कृषि से सुगम जीविका, 16.(अ) हरिकेन, 17.(अ) हंगरी, 18.(अ) दक्षिण अफ्रीका वेल्ड्स, 19.(द) नीदरलैण्ड्स, 20.(ब) दो जीवन होना, 21.(स)बहराइच, उत्तरप्रदेश, 22.(ब)कान्हा राष्टï्रीय उद्यान, मध्यप्रदेश, 23.(अ) उनमें स्वेद ग्रंथि नहीं होती है, इसलिए मुंह के जरिए पानी को वाष्पीकृत करने के बाद वे ठंडे होते हैं, 24.(स)सजीवों की आकृति का अध्ययन, 25.(ब) चींटी खाने वाला मिरमीकोफैगिडी परिवार का शल्कदार जीव, 26.(ब) पश्चिम बंगाल एवं अरुणाचल प्रदेश, 27.(स) संपत्ति।
 


14-Jun-2021 12:38 PM (24)

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य अफ्रीका महाद्वीप के मध्य में स्थित देश है, जिसका कुछ भू-भाग अंध महासागर से मिलता है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह देश अफ्रीका महाद्वीप का तीसरा सबसे बड़ा देश है।
पड़ोसी देश कांगो गणराज्य से भिन्नता के लिए इस देश को अक्सर डीआर कांगो, डीआरसी या फिर राजधानी किंसासा के नाम पर कांगो-किंसासा के नाम से पुकारा जाता है। कांगो नाम कांगो नदी के नाम पर पड़ा है, जिसे जाएर नदी के नाम से भी जाना जाता है। कांगो भले ही मध्य अफ्रीका में बसा हो, लेकिन दक्षिण अफ्रीकी विकास समुदाय (एसएडीसी) नामक संगठन की बदौलत दक्षिणी अफ्रीका से आर्थिक और क्षेत्रीय रूप से जुड़ा हुआ है। इसकी सीमाएं उत्तर में मध्य अफ्ऱीकी गणराज्य और सूडान, पूर्व में यूगांडा, रवांडा और अंगोला, पश्चिम में कांगो गणराज्य लगी हुई हैं। पूर्व में तंगानयिका झील इस देश को तंजानिया से अलग करती है।
राजधानी (और सबसे बड़ा शहर)-किंसासा
राजभाषा-फ्रांसीसी

 


14-Jun-2021 12:38 PM (28)

ईसरो नेवीगेशन सेंटर (आईएनसी) बेंगलूरू के ब्यालालू में स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईएसडीएन) परिसर में स्थापित किया गया। 28 मई को ही इसका उद्घाटन किया गया है। 
 ईसरो नेवीगेशन सेंटर, इंडियन रीजनल नेवीगेशन प्रणाली (आई आर एन एस एस), जो कि भारत में ही विकसित एक स्वतंत्र नेवीगेशन उपग्रह प्रणाली है, की एक प्रमुख इकाई है।  ईसरो नेवीगेशन सेंटर  आई आर एन एस एस के प्रचालन का प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करेगा।  आईएनसी समय सम्बंधित सूचनाएं, नेवीगेशन संदेशों के सृजन एवं निगरानी और भू-सुविधाओं, जिनमें आई आर एन एस एस के प्रसार स्टेशन शामिल हैं, के प्रति जवाबदेह है। आईएनसी विभिन्न नेवीगेशन सम्बंधी कार्यों के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।
आई आर एन एस एस को सात उपग्रह नेटवर्क लांच करने हैं। इनके माध्यम से उपयोगकर्ता को किसी वस्तु या स्थिति की सटीक जानकारी उपलब्ध हो पाएगी।  इन सभी उपग्रहों को पृथ्वी की सतह से 36 हजार किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया जाना है। आई आर एन एस एस का प्रभाव क्षेत्र समूचे भारत एवं आस-पास तक विस्तार किया जाना है।
आई आर एन एस एस के अधीन देश भर में स्थापित प्रसार स्टेशन होंगे। ये सभी स्टेशन आई आर एन एस एस के उपग्रहों के कक्षा निर्धारण एवं नेवीगेशन संकेतों की निगरानी करेंगे।

 मुण्डकोपनिषद
मुण्डकोपनिषद, एक उपनिषद है, जो अथर्ववेदीय शौनकीय शाखा से सम्बन्धित है। इसमें अक्षर-ब्रह्म  का विशद विवेचन किया गया है। इसे मन्त्रोपनिषद नाम से भी पुकारा जाता है। इसमें तीन मुण्डक हैं और प्रत्येक मुण्डक के दो-दो खण्ड हैं तथा कुल चौंसठ मन्त्र हैं। 
मुण्डक  का अर्थ है- मस्तिष्क को अत्यधिक शक्ति प्रदान करने वाला और उसे अविद्या-रूपी अन्धकार से मुक्त करने वाला। इस उपनिषद में महर्षि अंगिरा ने शौनक को परा-अपरा  विद्या का ज्ञान कराया है। 
 


14-Jun-2021 12:37 PM (29)

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। संगठन ने वर्ष 1997 में यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। इसका मकसद यह था कि किसी भी व्यक्ति को रक्त की जरूरत पडऩे पर उसके लिए उसे पैसे देने की जरूरत ना पड़े।
 विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्ल लेण्डस्टाइनर नामक विख्यात ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और भौतिकीविद की याद में उनके जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के तौर पर मनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है। लेकिन 75 लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाता है। यानी कऱीब 25 लाख यूनिट ख़ून के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं। भारत की आबादी सवा अरब है, जबकि रक्तदाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं है। 
भारत में कुल रक्तदान का केवल 49 फीसदी रक्तदान स्वेच्छिक होता है। राजधानी दिल्ली में तो स्वैच्छिक रक्तदान केवल 32 फीसदी है। दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं पर फिर भी एक लाख यूनिट ख़ून की कमी है। 
 


14-Jun-2021 12:36 PM (21)

हर्षचरित बाणभट्ट का ऐतिहासिक महाकाव्य है। बाण ने इसे आख्यायिका कहा है। आठ उच्छवासों में विभक्त इस आख्यायिका में बाणभट्ट ने स्थाण्वीश्वर के महाराज हर्षवर्धन के जीवन-चरित का वर्णन किया है।
आरंभिक तीन उच्छवासों में बाण ने अपने वंश तथा अपने जीवनवृत्त सविस्तार वर्णित किया है।  हर्षचरित की वास्तविक कथा चतुर्थ उच्छवास से आरम्भ होती है।   इसमें हर्षवर्धन के वंश प्रवर्तक पुष्पभूति से लेकर सम्राट हर्षवर्धन के ऊर्जस्व चरित्र का उदात्त वर्णन किया गया है। हर्षचरित  में ऐतिहासिक विषय पर गद्यकाव्य लिखने का प्रथम प्रयास है। इस ऐतिहासिक काव्य की भाषा पूर्णत: कवित्वमय है।
हर्षचरित  शुष्क घटना प्रधान इतिहास नहीं, प्रत्युत विशुद्ध काव्यशैली में उपन्यस्त वर्णनप्रधान काव्य है।  बाण ने ओज गुण और अलंकारों का सन्निवेश कर एक प्रौढ़ गद्यकाव्य का स्वरूप प्रदान किया है। इसमें वीररस ही प्रधान है। करुणरस का भी यथास्थान सन्निवेश किया गया है। हर्षचरित  तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक परिवेशों और धार्मिक मान्यताओं पर प्रकाश डालता है।


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