बीजापुर

मेट फूलमती के हाथों फल-फूल रही मनरेगा योजना
08-Oct-2021 8:36 PM (75)
मेट फूलमती के हाथों फल-फूल रही मनरेगा योजना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बीजापुर, 8 अक्टूबर। साधारण-सी नजर आने वाली 24 वर्षीय फूलमती पोयामी के हाथों में गांव के मनरेगा श्रमिकों को कार्य आबंटन और उनसे कार्य कराने की महती जिम्मेदारी है। वे पिछले 2 सालों से गांव में योजनान्तर्गत महिला मेट की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। यही कारण है कि जहाँ वर्ष 2019-20 में 211 मनरेगा परिवारों को 14 हजार 403 मानव दिवस का रोजगार मिल था, वह वर्ष 2020-21 में बढक़र 237 परिवारों द्वारा सृजित मानव दिवस 21 हजार 451 हो गया।

यह इनकी मेहनत का ही परिणाम है कि वर्तमान वर्ष 2021-22 के प्रथम छ:माही में 229 परिवारों को 9 हजार 685 मानव दिवस का रोजग़ार प्राप्त हो चुका है और अभी वित्तीय वर्ष की समाप्ति को पाँच माह से अधिक का समय बचा है। बीजापुर जिले के कोडोली गांव में मनरेगा की इस प्रगति के पीछे फूलमती का अपनी एक दास्तां है।

फूलमती की अल्प आयु में उनके सिर से पिता का हाथ उठ गया था। ऐसे में सात सदस्यों वाले बड़े परिवार की जिम्मेदारी उन पर और उनके बड़े भाई पर आन पड़ी थी। बारहवीं तक पढ़ाई कर चुकी फूलमती इन परिस्थितियों में गांव में ही रहकर रोजग़ार ढूंढ रही थीं, ताकि घर के सदस्यों का भी ध्यान रख सकें। इसके लिए वह गांव में मनरेगा योजना में चलने वाले कार्यों में मजदूरी करने जाती थी।

इसी दरम्यान पंचायत सचिव श्री राममूर्ति से उन्हें यह जानकारी मिली कि पढ़ी-लिखी लड़कियों को योजना में गोदी की नाप और कार्य कराने के लिए मेट रखा जाता है। ये जानकर उन्होंने मेट बनने का निर्णय लिया और साल 2019 से ग्राम रोजगार सहायक सुश्री कमलदई नाग के मार्गदर्शन में काम करना प्रारम्भ कर दिया। अपनी लगनशीलता के बलबूते वे थोड़े दिनों में ही मेट के काम में दक्ष हो गई।

महात्मा गांधी नरेगा के विभिन्न पहलुओं से मेटों को अवगत कराने और उनके उन्मुखीकरण के लिए जनपद पंचायत-भैरमगढ़ में दो-सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया था, जिसमें फूलमती ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे बताती हैं कि प्रशिक्षण से उनकी कार्य-कुशलता में वृद्धि हुई है। वे अब कार्यस्थल पर श्रमिकों का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर पाती हैं। साथ ही नागरिक सूचना पटल निर्माण और जॉब कार्ड अद्यतनीकरण के बारे में काफी कुछ जानने और सीखने को मिला। महात्मा गांधी नरेगा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने वाली फूलमती बीते दिनों को याद करते हुए बताती है कि उन्होंने योजना से मिले पारिश्रमिक में से 23 हजार रुपए जोडक़र रखे थे और जब घर की मरम्मत का काम चल रहा था, तब वे रुपए काम आ गए।

महिला सशक्तिकरण

ग्राम रोजगार सहायक और मेट, दोनों के महिला होने का फायदा गाँव की महिलाओं को हुआ। इनके मिलनसार व्यवहार के चलते महात्मा गांधी नरेगा में पिछले दो सालों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही है। वर्ष 2019-20 में 277 महिलाओं ने काम करते हुए 7 हजार 658 मानव दिवस, वर्ष 2020-21 में 329 महिलाओं ने 11 हजार 684 मानव दिवस और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021-22 में सितम्बर माह तक 268 महिलाओं ने 5 हजार 299 मानव दिवस का रोजग़ार प्राप्त किया।

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