कोरिया

छिंदडांड़ के गोदामों में रखे खाद्यान्न की हो रही है जांच
09-Oct-2021 7:52 PM (38)
छिंदडांड़ के गोदामों में रखे खाद्यान्न की हो रही है जांच

दवाईयों के छिडक़ाव से आ रही है गोदाम में दुर्गंध-नान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बैकुंठपुर (कोरिया ), 9 अक्टूबर। कलेक्टर श्याम धावड़े के निर्देश पर एसडीएम के साथ खाद्य एवं औषधि ्विभाग की टीम की छापेमारी के बाद नागरिक आपूर्ति निगम निशाने पर है, चंूकि छिंदडांड स्थित गोदाम से बैकुंठपुर और सोनहत में खाद्यान सप्लाई किया जाता है, जिसे लेकर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन जांच के लिए आगे आया है। यह पहला मौका है जब कोरिया जिले के नगारिक आपूर्ति निगम के गोदामों में प्रशासन का छापा मार कर सरकारी चावल की सेम्पलिंग की गई कि गोदाम में रखा चावल खाने लायक है या नहीं, जांच मे यदि पॉजिटिव रिपोर्ट आई तो कार्रवाई तय है।

‘छत्तीसगढ़’ ने की पड़ताल

‘छत्तीसगढ़’़ ने नागरिक आपूर्ति निगम के बैकुंठपुर के छिंदडांड स्थित गोदाम पहुंचकर मामले की पड़ताल की। यहां दो गोदाम स्थित है। इस समय छिंदडांड के गोदाम नंबर 1 में 346 मीट्रिक टन एवं गोदाम नंबर 5 में 20 हजार क्विंटल चावल रखा हुआ है।  नागरिक आपूर्ति निगम के जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के आसपास ग्राम बडग़ांव में एक गोदाम है जिसमें 9 हजार मीट्रिक टन, वहीं डीएमओ का एक गोदाम है जिसमें 36 सौ टन, जमगहना में 11 सौ और जहां जांच की जा रही है छिंदडांड़ में 3 हजार टन खाद्यान रखा जाता है। सिर्फ छिंदडांड से 139 उचित मूल्य दुकानें जो बैकुंठपुर और सोनहत में आती है उन्हे यहां से खाद्यान भेजा जाता है।

1 अक्टूबर को भेजा गया है सैंपल

कलेक्टर श्याम धावड़ेे को सूचना मिली कि यहां से खराब किस्म का चावल उचित मूल्य दुकानों में सप्लाई की जा रही है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एसडीएम के साथ खाद्य निरीक्षक और खाद्य और औषधि के निरीक्षक की टीम के साथ छापामार कार्यवाही की गई, 1 अक्टूबर को सेंपल लेकर रायपुर जांच में भेजा गया है, वहीं उन्हें फिर बताया कि चावल को ढंक दिया गया है, इन दिनों पोस्ट मानसून प्रक्रिया के तहत मैलाथियान दवाई का छिडक़ाव किया जा रहा है, वहंीं अब जांच में गए सेंपल से ही मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी कि चावल खाने लायक है या नहीं। 

कैसे कीट पतंगों का किया जाता है नष्ट

‘छत्तीसगढ़’ उन गोदामों में पहुंचा जहां दुर्गंध आ रही है। नान के अधिकारियों की माने तो चावल को कीट पंतगों, चूहों से बचाने के लिए उसके रखरखाव को दो भागों में बांटा गया है, एक प्री मानसून और दूसरी पोस्ट मानसून, प्री मानसून के अंतर्गत रखे चावल को बारिश से पूर्व कीटों को नियंत्रित करने के लिए राज्य भंडार गृह निगम के निर्देशों और वहां के मुख्यालय से आई दवाईयोंं से उनका धुमरीकरण (फुमीगेशन) कराया जाता है, जिससे चावल में लग रहे कीटों को नष्ट करने में मदद मिलती है इससे चूहें भी मर जाते है।,

 इसके तहत गोदाम में रखे पूरे चावल को ढंक कर ऐसा बंद किया जाता है ताकि बाहरी हवा तक अंदर नहीं घुस पाए। इसकी समयवधि 15 मई से 30 जून तक होती है। वहीं पोस्ट मानसून की समयावधि 1 सितंबर से 30 अक्टूबर तक होती है। जिसमें भी प्री मानसून की तरह की प्रक्रिया कर चावल को कीट पतंगों और चूहो से बचाया जाता है। इसमें धुमरीकरण (फुमीगेशन) के अलावा हर 15 दिवस में मैलाथियान का छिडक़ाव किया जाता है जिससे गोदाम में काफी दुर्गध पैदा होती है। इससे बाहर के कीटों को भी नष्ट करने में मदद मिलती है।

पाले का रहता है रिकार्ड

खाद्यान्न की डंपिंग के समय छल्ली लगाने के दौरान जो चावल जमीन पर गिर जाता है उसको अपने कर्मचारियों से उठवा कर अलग बोरे में रखा जाता है, जिसे पाला कहते है और उस पाले का एक रिकार्ड रखा जाता है, जो ऑडिट में सम्मलित रहता है। भुगतान के पूर्व पाले के बोरे की साफ सफाई होती है और खाद्यान को वितरण योग्य बनाकर उसे शामिल डस्ट को हटाकर, सूपे से साफ करके दूसरे बोर मे रखा जाता है, उसके उपरांत गुणपत्ता निरीक्षक के द्वारा प्रमाणित करने के बाद उसे संबंधित दुकान में भेजा जाता है। हलांकि पाला बोरा कम संख्या में रहता है, इसलिए दुकानों में एक या दो बोरा जा पाता है।

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