सरगुजा

सरगुजा पैलेस में स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने की पूजा-अर्चना
16-Oct-2021 10:43 PM (62)
सरगुजा पैलेस में स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने की पूजा-अर्चना

सरगुजा व प्रदेश के खुशहाली की कामना, मिलने वालों का लगा तांता

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

अम्बिकापुर,16 अक्टूबर। शुक्रवार को जिलेभर में विजयादशमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। दशहरा के मौके पर रघुनाथ पैलेस में भी विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। सरगुजा महाराज टीएस सिंहदेव व उनके उत्तराधिकारी आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने सरगुजा पैलेस परिसर में देवी-देवताओं के साथ ही, अश्व, गज, शस्त्र व ढोल नगाड़ों की पूजा की व शहर, सरगुजा व पूरे प्रदेश के शांति, खुशहाली व सुख-समृद्धि की कामना की।

 विजयादशमी के मौके पर वर्षों से चली आ रही परम्परा के तहत श्री सिंहदेव ने जनता से मुलाकात की, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण आम लोगों के लिए पैलेस के दरवाजे बंद रहे। लोगों ने कोठी घर में श्री सिंहदेव से मुलाकात की।

इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि दशहरा का त्यौहार पुरातन काल से मनाया जाता रहा है। यह नए फसल का समय होता था और उस समय पुरानी व्यवस्थाएं रही होंगी। हम अपने त्यौहारों को देखे तो ये किसी समय, व्यवस्था व प्रकृति से जुड़ा होता है। बाद में जैसे-जैसे धार्मिक व्यवस्थाओं का विकास हुआ तो रामायण काल में भगवान श्री राम ने रावण का वध किया और उस वध के साथ जुड़ी असत्य पर सत्य, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में हम इस विजयादशमी त्यौहार को मनाते आ रहे हंै।

उन्होंने कहा कि आज यह मानते है कि भगवान राम की गाथाओं के आधार पर समाज ने शासकों के लिए भी ये विशेष दिन मनोनीत किया कि जो भी शासक रहते थे वे अपने कार्य क्षेत्र में अपने क्षेत्र की जनता के लिए भी पूजा-अर्चना करते थे। इस लिए आज भी अश्व, गज, शस्त्र, की पूजा देवी देवताओं के साथ की गई। इस पूजा में सभी समुदायों की भागीदारी भी पुरातन समय से चली आ रही है।

उन्होंने बताया कि संधि पूजा के दिन फाटक पूजा होती है जो अनुसूचित जनजाति के लोग ही करते है और पैलेस के दरवाजे तब तक नही खुलते है जब तक पूजा पूरी ना हो जाए। पूजा के बाद उनकी अनुमति से ही महाराजा या राज परिवार के लोग पैलेस व अपने घर में प्रवेश करते है। ये परम्परा दशकों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि शस्त्र वार करने के लिए नही बल्कि जनता की रक्षा के लिए होते है। आप अपने नागरिकों के रहने के लिए बेहतर स्थिति बनाए और यही सोच इन त्यौहारों के साथ जुड़ी रही। उन्होंने कहा कि परम्परागत लोग ये मानने लगे कि दशहरा के दिन राजा का दर्शन शुभ होता है और जो आज भी इस परंपरा को मानते है वो मिलने के लिए आते है। पुराने समय से चली आ रही व्यवस्थाएं है और आज के समय में इसका जो भी स्वरूप बनता है और जो मान्यताएं है उसके अधीन इस परम्परागत त्यौहार को मनाया जाता है। इस दौरान पादप औषधि बोर्ड के अध्यक्ष बाल कृष्ण पाठक, जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता सहित अन्य मौजूद थे।

प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भी उतना ही महत्व

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भी इस त्यौहार व आज के दिन का उतना ही महत्व है, जितना पहले हुआ करता था। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भी जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह समय होता है कि वे पुरानी प्रथाओं से सीख लें कि इन प्रथाओं के पीछे का असल मकसद क्या था। हर जन प्रतिनिधि को प्रत्येक वर्ष अपने क्षेत्र के नागरिकों के लिए प्रयास करते रहना है और इसमें सफलता कितनी मिलती है, वो मायने नही रखता लेकिन अगर मन से प्रयास कर रहे है तो वही सब कुछ है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भी आज का दिन एक दूसरे का ख्याल रखना, एक दूसरे के बीच में स्नेह भाव उत्पन्न करना, सुरक्षा, रक्षा की भावना को व्यापक रूप देना मिलजुल कर त्योहार मनाना है।

कोठी घर में आमजनों से की मुलाकात

विजयादशमी के मौके पर टीएस सिंहदेव ने राज परिवार की परंपरा के अनुरूप कोठीघर में बैठकर लोगों से मुलाकात की। इस दौरान लोग अपनी ओर से भेंट स्वरूप भी सामग्री लेकर पहुंचे थे, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। हालांकि मंत्री श्री सिंहदेव प्रतिवर्ष पैलेस में ही लोगों से मुलाकात करते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस बार पैलेस आम जनता के लिए बन्द रहे। इसे लेकर लोगों में थोड़ी मायूसी भी थी, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि यह भी एक बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि कोरोना संक्रमण काल में लोगों को इससे बचाना भी जरूरी है। लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। इस लिए यह निर्णय इस बार लिया गया है।

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