बलौदा बाजार

आम जनता पर महंगाई की मार
22-Oct-2021 9:39 PM (33)
 आम जनता पर महंगाई की मार

पेट्रोल-डीजल-गैस सिलेंडर के साथ रोटी-कपड़ा-मकान भी महंगा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 22 अक्टूबर। बलौदाबाजार त्योहरों को लेकर जहां लोगों में खुशी का वातावरण बना हुआ है वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में उदासी भी छाई हुई है। पेट्रोल-डीजल के भाव में बढ़ोतरी का असर रोटी-कपड़ा और मकान पर पड़ रहा है। क्योंकि ट्रांसपोर्टरों महंगे होने से सब कुछ महंगा हो चुका है। अब जनता के उपयोग में आने वाले सभी वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि हुई है जिसकी वजह से इस त्यौहार सीजन में उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। शनिवार व रविवार को दरें स्थिर रहने के बाद बुधवार को कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो गई है। पेट्रोल 104.53 रुपये हो गया है वहीं डीजल 103.13 प्रति लीटर हो गया है।

पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतों का आम लोगों पर दूर तक असर पड़ रहा है जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के सामान महंगे होते जा रहे हैं। ताजा उदाहरण टमाटर, आलू, प्याज का है, जो दुगुने दाम पर बिक रहे हैं। सितंबर की बारिश के कारण लोकल सब्जियों की आवक में हो रही देरी के कारण अभी तक बेंगलुरु. नासिक से ही टमाटर. आलू-प्याज आ रहा है। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित थोक व्यापारी ने बताया कि हमारा धंधा सिमटकर 50 प्रतिशत ही रह गया है। पहले यहां टमाटर का 1 कैरेट का बेंगलुरु से भाड़ा 100 से 110 पड़ता था जो डीजल के भाव बढऩे के बाद हमें 160 पड़ रहा है। वहीं प्याज में भी हमें 80 प्रति बोरी पड़ रहा था अब 160 देने पड़ रहे हैं।

अक्टूबर में 15 रुपये और महंगा हुआ है सिलेंडर अब 980 में मिलेगा

इस माह से रसोई गैस की कीमत 15 रूपए और बढ़ गई है। सितंबर में 25 बढ़ी थी। 2020 के सितंबर तक 774 में मिलने वाले सिलेंडर के दाम 10 माह में ही 206 बढ़ गए हैं। बलौदाबाजार सहित पूरे जिले में 980 देने के बाद ही 14.2 किलोग्राम का एक घरेलू सिलेंडर मिल रहा है, जबकि सब्सिडी पहले की तरह 64 रूपए ही मिल रही है।

टैक्स घटाने सरकार तैयार नहीं इसलिए बढ़ रहे हैं दाम

पेट्रोल पंप संचालक, कर्मचारी वाहन मालिकों व जानकारों से चर्चा की कि आखिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा क्यों, बीच में स्थिरता बनी थी तब यह तथ्य सामने आया कि इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार जिम्मेदार है क्योंकि 100 का पेट्रोल भरवा आते हैं तो टैक्स के रूप में इन्हें केंद्र को 35-36 व राज्य सरकार को लगभग 23-24 रुपए मिलते हैं। इस तरह पेट्रोल-डीजल पर 58 रुपये प्रति लीटर टैक्स चुका रहे हैं।

शुक्ला पेट्रोल पंप संचालक आर्यन शुक्ला की मानें तो अभी राहत की उम्मीद नहीं है। रेट बढ़ते क्रम पर है। कुछ राज्यों में चुनाव होने की वजह से रेट थोड़े कम हो सकते हैं या स्थिरता बनी रहेगी।

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