महासमुन्द

देवनागरी की सफलता और संभावनाएं तथा महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की अनिवार्यता पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी
23-Oct-2021 6:44 PM (43)
देवनागरी की सफलता और संभावनाएं तथा महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की अनिवार्यता पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 23 अक्टूबर। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई के हिन्दी विभाग तथा राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना मंच के संयुक्त तात्वावधान में सार्वदेशिक लिपि देवनागरी की सफलता और संभावनाएं तथा महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की अनिवार्यता विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रायोजक नागरी लिपि परिषद् नई दिल्ली थे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. शैलचन्द्रा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. अनसूया अग्रवाल प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हिन्दी शा  महाप्रभु वल्लभाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय महासमुंद ने किया।

डॉ. अग्रवाल ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज की इस शोध संगोष्ठी में एक ओर जहां हम राष्ट्र की पहचान सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व भाषा पर चर्चा करेंगे वहीं दूसरी ओर समाज की सर्वाधिक महत्वपूर्ण शक्ति नारी पर बात होगी। पूर्णिमा कौशिक ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुये कार्यक्रम के उद्धेश्यों पर प्रकाश डाला।

समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. प्रभु चौधरी राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने देव नागरी लिपि की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया देवनागरी केवल हिन्दी की लिपि नहीं है अपितु हिन्दी की अठारह सहयोगी बोलियों की भी लिपि है। यह सार्वदेशिक लिपि है। अपनी वैज्ञानिकता के कारण अन्र्तराष्ट्रीय लिपि बनने की योग्यता भी हैं। डॉ. दीपक शर्मा मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई ने कहा कि इस तरह संगोष्ठी के आयोजन से समसामयिक विषयों को समझने व जानने का नया आयाम मिलता है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा भारत के संविधान में जब हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया व उसकी लिपि देवनागरी रखी गई यह संस्कृत की एकमात्र लिपि है। प्राचीन ब्राम्ही लिपि से देवनागरी का विकास हुआ नागरी लिपि से ही राजस्थानी, महाजनी, गुजराती, मराठी, नेपाली आदि लिपि लिखी जाती है। यह सार्वदेशिक लिपि है इसमें अन्र्तराष्ट्रीय लिपि बनने की योग्यता हैं।

प्रथम सत्र संगोष्ठी का विषय महिला सशक्तिकरण और शिक्षा की अनिवार्यता रखा गया। मुख्य  वक्ता डॉ. निशा जोशी योगाचार्य इंदौर, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, शशांक राव, पूजा शर्मा, योग्यता वैष्णव, निर्मला सिंह, निशा जोशी, गोपाल राम ने अपने शोध पत्र पढ़े। नेहा नाहटा व सीमा निगम ने बताया कि लोगों को जगाने के लिये नारी को शिक्षित होना जरूरी है। डॉ. शैल चंन्द्रा ने बताया नारी इस धरती की अभिन्न अंग है अगर एक अंग विकृत हो जाय तो जीवन अधूरा हो जाता है। अलग-अलग सूचनाओं समाचारों की कटिंग का उदाहरण देते हुये अपनी बात कही। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. रचना पाण्डेय स.प्रा. शिक्षा विभाग व भुनेश्वरी जायसवाल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जय भारतीय ने ने किया।

द्वितीय संत्र का विषय सार्वदेशिक लिपि देवनागरी सफलता और संभावनायें रखा गया जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. डी.पी. देशमुख कला परंपरा संस्थान के अध्यख ने नागरी लिपि के प्रारंपरिक स्वरूप उद्भव व विकास पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधीर शर्मा विभागाध्यक्ष हिन्दी कल्याण महाविद्यालय सेक्टर 7 भिलाई थे। इस कार्यक्रम में डॉ. अनसूया को राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके अतिरिक्त समारोह में डॉ. मुक्ता कौशिक, डॉ. शैलचन्द्रा, पूर्णिमा कौशिक, सीमा निगम, डॉ. दीपिका सुतोदिया, डॉ. शिवा लोहारिया, डॉ. हंसा शुक्ला का भी राष्ट्रीय सम्मान किया गया। इस मौके पर डॉ. आशीष नायक को नागरी लिपि परिषद प्रदेश संयोजक का नियुक्ति पत्र दिया। 

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