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सुपेबेड़ा में किडनी के एक और मरीज की मौत, अब तक 64

Posted Date : 13-Jun-2018

छत्तीसगढ़ संवाददाता
देवभोग, 13 जून। गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लाक  के सुपेबेड़ा में किडनी मरीजों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज एक महिला ने दम तोड़ दिया। 
अब मौत का आंकड़ा बढ़कर 64 हो गया है।  दो सौ से ज्यादा लोग अभी भी इस बीमारी से पीडि़त है।
राजधानी रायपुर से 250 किमी दूर गरियाबंद जिले के अंतिम छोर में बसे  सुपेबेड़ा  की पहचान किडनी  पीडि़त गांव के रूप में बन गई है।  महिला काफी लंबे समय से बीमार थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर प्रशासन सही समय पर ध्यान देता और महिला को समय पर इलाज मिलता को महिला की जान बचाई जा सकती थी।
अब तक की रिपोर्ट में दूषित पानी को किडनी की बीमारी का कारण बताया गया है। जिला प्रशासन ने दावा किया है कि सुपेबेड़ा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कर दी गई है लेकिन जिला प्रशासन के दावे केवल कागजों तक ही सीमित है। जमीनी हकीकत ये है कि आज भी सुपेबेड़ा के लोग दूषित पानी पीने  मजबूर हैं। 
सुपेबेड़ा के हालात इतने गंभीर हो गए है कि गांव में 15 दिन में एक नया मरीज सामने आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। परेशान ग्रामीणों ने प्रदेश से अलग होने तक की मांग शासन से की थी,दिल्ली और रायपुर के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने गांव पहुंचकर बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया। 
रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में सुपेबेड़ा के नाम से 5 बिस्तर का एक अलग विभाग भी बनाया। लेकिन मेकाहारा में भी ग्रामीणों को सही इलाज नहीं मिला। हालात ये है कि लोग अब इलाज के लिए मेकाहारा जाना ही नहीं चाहते।
स्वास्थ्य प्रशासन दो साल बाद भी सुपेबेड़ा में फैसली इस बीमारी के सही कारणों का पता लगाने में नाकाम साबित हुआ है।  

सुपेबेड़ा में मौतों पर सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण-पुनिया
प्रदेश कांगे्रस प्रभारी पीएल पुनिया ने दिल्ली रवाना होने के पूर्व यहां सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा में कहा है कि सुपेबेड़ा (गरियाबंद)में एक के बाद एक मौतों का सिलसिला जारी है। एक और की मौत दुर्भाग्य की बात है। राज्य सरकार की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है। शुद्ध पेयजल का इंतजाम करना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने यूपीए सरकार के समय एक विशेष कार्यक्रम चलाया था, जो समस्याग्रस्त गांवों के लिए पानी की व्यवस्था करता था। सुपेबेड़ा भी समस्याग्रस्त गांवों में से है। सुपेबेड़ा के लिये शुद्ध पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। न तो केंद्र सरकार ने सुपेबेड़ा की सुधबुध ली हैं और न राज्य सरकार ने जवाबदेही तय की है। 




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