राजनांदगांव

सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को किया जाएगा डिजिटल
23-Jun-2024 4:13 PM
सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पूरी  प्रक्रिया को किया जाएगा डिजिटल

नए कानून के संबंध में नागरिकों को होनी चाहिए जानकारी- एसपी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव 23 जून। सांसद संतोष पाण्डेय एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल की उपस्थिति में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में 1 जुलाई 2024 को लागू होने वाले नये कानून के संबंध में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को जानकारी दी गई। 

कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि 1 जुलाई 2024 से नये कानून लागू हो रहे हैं। इसके संबंध में अधिकारियों के साथ ही नागरिकों को जानकारी होना चाहिए। एक जुलाई से भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 प्रभावी होंगे।

पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से तीन नये कानून लागू होंगे। भारतीय दण्ड संहिता एवं कानून की दिशा में यह एक व्यापक परिवर्तन है। इन कानूनों के संबंध में अधिकारियों एवं नागरिकों को जानकारी होना चाहिए। नये कानून में आरोपियों के लिए नये प्रावधान किए गए हैं। सभी के लिए आवश्यक है कि स्वयं भी इन कानूनों को समझें तथा दूसरों को भी जागरूक करें। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से कानून लागू होने के बाद कोई भी अपराध होने पर नये कानून के अंतर्गत घटना या अपराध पंजीबद्ध होगा। इसके अंतर्गत अपराधों के लिए न्याय व्यवस्था अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि निर्धारित समय में उनका निराकरण हो सके। इसी तरह पुलिस एवं न्यायालय के लिए तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिंक रिपोर्ट समय पर देना होगा। इसमें पीडि़त पक्ष, आरोपी पक्ष सभी को फायदा होगा। सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। एफआईआर की प्रक्रिया, एफआईआर के निर्णय सभी डिजिटल फार्म में होंगे। सामाजिक-आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से सभी नागरिक अलग-अलग स्थानों में रहते हंै। ऐसी स्थिति में दस्तावेज डिजिटल होने से फायदा मिलेगा।

 श्री  गर्ग ने कहा कि ई-एफआईआर के लिए फोन, ई-मेल, व्हाट्सएप के माध्यम से अपराध घटित होने की सूचना दे सकते हंै। अब इसके लिए जवाबदेही तय हो जाएगी। प्रार्थी को संबंधित थाने में जाकर हस्ताक्षर कर एफआईआर दर्ज करानी होगी। थाना प्रभारी या विवेचक को जांच की जरूरत लगने पर एसडीओपी या सीएसपी की लिखित अनुमति के बाद जांच होगी। झूठी शिकायत से बचने के लिए तीन दिवस में पुलिस अधिकारी जांच करेंगे तथा गंभीर मुद्दा होने पर एफआईआर दर्ज होगी तथा विधिवत प्रकरण की विवेचना की जाएगी। यह महत्वपूर्ण है कि डिजिटल फार्म में शिकायतों को लेने से धीरे-धीरे विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने जीरो-एफआईआर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पहले प्रार्थी को संबंधित थाने में ही एफआईआर दर्ज करनी होती थी, लेकिन अब जीरो एफआईआर अंतर्गत प्रार्थी को बड़ी सुविधा प्रदान की गई है और किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज की जा सकती है। जांच करने के लिए एसडीओपी एवं सीएसपी लिखित में जांच करने के निर्देश देंगे। 14 दिवस में इसका निराकरण करना होगा। ज्यादातर अपराधों में समय पर चालान पेश होते हैं। उन्होंने बताया कि 90 दिवस से ज्यादा होने पर विवेचक को इसके संबंध में कारण बताना होगा और विवेचक की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। प्रकरणों के निराकरण के लिए नये कानूनों में टाईम फ्रेम किया गया है, जो महत्वपूर्ण है।

 

 

 

 

 इस अवसर पर विधायक खुज्जी  भोलाराम साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गीता घासी साहू, वनमंडलाधिकारी  आयुष जैन, अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर  इंदिरा नवीन प्रताप सिंह तोमर, डिप्टी कलेक्टर अमीय श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि भारतीय दण्ड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता 2023 को अधिसूचित किया गया है। भारतीय दण्ड संहिता की 511 धाराओं के स्थान पर अब 358 धाराएं है तथा 23 अध्याय के स्थान पर 20 अध्याय हैं। भारतीय न्याय संहिता 2023 अंतर्गत संशोधन करते हुए 190 से अधिक छोटे एवं बड़े बदलाव किए गए हैं। 41 अपराधों में सजा बढ़ाई गई है। 83 अपराधों में अर्थदण्ड की सजा बढ़ाई गई है। कुल 33 अपराधों में कारावासों की सजा बढ़ाई गई है। वही 6 अपराधों में सजा के रूप में सामुदायिक सेवा लायी गई है। भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत सामुदायिक सेवा को भी दण्ड के प्रकार के रूप में शामिल किया गया है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अंतर्गत दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 को अधिसूचित किया गया है। दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की 484 धाराओं के स्थान पर अब 531 धाराएं हैं तथा 37 अध्याय के स्थान पर 39 अध्याय है। इसके अंतर्गत 360 से अधिक बड़े एवं छोटे बदलाव पेश किए गए है। 9 अनुभाग जोड़े गए हैं। कुल 39 नये उप अनुभाग जोड़े गए हैं तथा कुल 49 प्रावधान स्पष्टिकरण जोड़े गए है। 39 स्थानों पर ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रानिक माध्यम शुरू किए गए है। 45 प्रावधानों में समय सीमा का उल्लेख किया गया है तथा पुरानी प्रक्रिया संहिता के कुल 15 प्रावधान हटाए गए हंै। इसके अंतर्गत 3 वर्ष से कम के अपराध में तथा 60 वर्ष से ज्यादा के अपराधी की वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की पुर्वानुमति से गिरफ्तारी की शुरूआत की गई है। 15 वर्ष से कम या 60 वर्ष से अधिक अथवा मानसिक एवं शारीरिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों को थाने में नहीं बुलाया जा सकेगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनिमय 1872 के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को अधिसूचित किया गया है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की 167 धाराओं के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम 170 धारायें है एवं 11 अध्याय के स्थान पर 12 अध्याय है। इसके अंतर्गत 45 से अधिक बड़े और छोटे बदलाव किए गए है। कुल 24 प्रावधानों में संशोधन किए गए है। कुल 2 नयी धाराएं और 10 नयी उपधाराएं जोड़ी गई हैं। कुल 5 नये स्पष्टीकरण जोड़े गए है। कुल 1 नया प्रावधान जोड़ा गया है। कुल 11 धाराएं और उपराधाएं हटा दी गई हंै। कुल 5 स्पष्टीकरण हटा दिये गए हैं। एक दृष्टांत हटा दिया गया है। एक अनुसूची जोड़ी गई है।

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