सूरजपुर

राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने  ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक
राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक
29-Jun-2020 10:10 PM

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिश्रामपुर, 29 जून।
कोयला खनन क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी देने के साथ ही कोयला खदानों के निजीकरण एवं केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों द्वारा दो से चार जुलाई तक घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र में सफल बनाने के लिए संयुक्त बैठक हुई। पांचों मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से क्षेत्र की कोयला खदानों में विरोध प्रदर्शन के लिए गेट मीटिंग कर कोयला मजदूरों को एकजुट करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

कोयला खनन क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी देने के बाद से ही श्रमिक संगठनों द्वारा केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ हल्ला बोला जा रहा है। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र में बीएमएस समेत एटक, एचएमएस, सीटू एवं इंटक यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से कोल इंडिया के अस्तित्व को खतरा बताते हुए कोयला खदानों में लगातार गेट मीटिंग कर कोयला मजदूरों को केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों से अवगत कराते हुए दो जुलाई से प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने की अपील की जा रही है। 
कोयला खदानों में गेट मीटिंग के दौरान बीएमएस के कंपनी समन्वयक एवं आइआर प्रभारी मजहरूल हक अंसारी ने कोयला मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा एक के बाद एक मजदूर विरोधी निर्णय लेकर कोल इंडिया के निजीकरण का रास्ता साफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 में प्राइवेट खदानों को पब्लिक सेक्टर बनाते हुए राष्ट्रीयकृत किया गया था। उसके बाद वर्ष 1991 से ही केंद्र सरकार द्वारा कोयला खदानों को बेचने की साजिश की जा रही है।

 कोयला मजदूरों की एकता का ही परिणाम है कि वर्ष 2000 का संशोधन विधायक बिल राज्यसभा में आज भी लंबित है। वहीं अब मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल माइनिंग के जरिए कोल इंडिया को कमजोर करने की साजिश करते हुए निजीकरण का रास्ता प्राप्त किया जा रहा है। उन्होंने कोयला मजदूरों से कहा कि कोयला मजदूरों की एकजुटता से ही सरकार के मंसूबों पर पानी फेरा जा सकता है।

एटक के एसईसीएल अध्यक्ष अजय विश्वकर्मा ने मोदी सरकार को कर्पोरेट घरानों की कठपुतली बताते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी देने के साथ ही श्रम कानूनों में बदलाव एवं सीएमपीडीआइएल को कोल इंडिया से अलग करने की साजिश के जरिये कोल इंडिया को सुनियोजित ढंग से निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। कोयला मजदूरों की एकजुटता से ही केंद्र सरकार को फैसला वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है। 

एचएमएस नेता देवेंद्र मिश्रा समेत इंटक नेता अमरजीत सिंह एवं सीटू नेता जेपी पांडेय ने भी मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर हल्ला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार कमर्शियल माइनिंग की मंजूरी को लेकर कोल इंडिया को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में है। मोदी सरकार लगातार मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। 

मजदूर नेताओं ने कोयला मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया का अस्तित्व खतरे में है और कोल इंडिया का अस्तित्व बचाने हमें एकजुट होकर दो जुलाई से घोषित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को बिश्रामपुर क्षेत्र में अभूतपूर्व रूप से सफल बनाना है। 

कोयला खदानों में गेट मीटिंग करने वालों में श्रमिक नेता सुजीत सिंह, महेंद्र लांडेय, राजेश सिंह, अशोक सिंह समेत हीरालाल, पंकज गर्ग, अभय प्रकाश सिन्हा, दीप सिंह, प्रेमचंद सिंह, परमजीत सिंह, अरविंद सिंह, रामचंद्र जायसवाल, ललन सोनी, डीएस सोढ़ी, सुनील गर्ग के नाम प्रमुख हैं।

 

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