धमतरी

किसानों पर काला कानून थोपने जा रही है मोदी सरकार-डॉ. लक्ष्मी ध्रुव
23-Sep-2020 7:54 PM 6
किसानों पर काला कानून थोपने जा रही है मोदी सरकार-डॉ. लक्ष्मी ध्रुव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नगरी, 23 सितंबर। मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने 'छत्तीसगढ़’ से चर्चा करते हुए बताया कि आज पूरा देश वैश्विक कोरोना महामारी के संकटकाल से गुजर रहा है, ऐसे समय केन्द्र की मोदी सरकार आपदा को अवसर में बदलते हुए किसानों के शोषण के लिए 3 अध्यादेश लाई है जो किसानों के हित में नहीं है। मोदी जी ने किसानों की आय दुगुनी का वादा किया था लेकिन मोदी सरकार के 'काले’ कानून किसान-खेतिहर मजदूर का आर्थिक शोषण करने के लिए बनाए जा रहे हैं। ये 'जमींदारी’ का नया रूप है और मोदी जी के कुछ ‘मित्र’ नए भारत के 'जमींदार’ होंगे।

जब से केन्द्र में मोदी सरकार बनी है पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से कार्य किया जा रहा है। पहले नोटबंदी और जीएसटी को गलत तरीके से लागू कर देश की आम जनता की कमर तोड़ दी। उसके बाद अचानक लॉकडाउन लगा कर लाखों लोगों का रोजगार छीन लिया। आज देश की जनता को मदद करने की बजाय केन्द्र की भाजपा सरकार अन्नदाता किसान भाइयों के ऊपर अपना काला कानून थोपने जा रही है।

15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ में शासन करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी किसानों के साथ बहुत अन्याय किया। धान का बोनस देने की बात कर किसान भाइयों के साथ धोखेबाजी की, जिसका परिणाम आज हम सब के सामने है।

मैं तो यही कहूंगी कि केन्द्र की मोदी सरकार को छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार से सीख लेनी चाहिए। जिन्होंने किसानों को उनकी मेहनताना हक देते हुए धान का समर्थन मूल्य 2500 रू. प्रति क्विंटल दे रही हैं। हमारी सरकार का केन्द्र बिन्दु किसान है। किसानों को आर्थिक मजबूती देने कृषि ऋण का कर्जा माफ, सिंचाई टैक्स माफ, 2500 रू. प्रति समर्थन मूल्य किया गया है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार गांव, गरीब, किसान, मजदूर, वनवासियों, आदिवासियों के हित में जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं।

विधायक ने कहा कि केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है। इससे मंडी का ढांचा खत्म होगा, जो किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए लाभप्रद नहीं है। अधिकांश कृषक लघु सीमांत है, इससे किसानों का शोषण बढ़ेगा। उनमें इतनी क्षमता नहीं कि राज्य के बाहर जाकर उपज बेच सके। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।

 डॉ. ध्रुव ने आगे कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए संशोधन से आवश्यक वस्तुओं के भंडारण एवं मूल्य वृद्धि के विरूद्ध कार्यवाही करने में कठिनाई होगी। कान्ट्रैक्ट फार्मिंग से निजी कंपनियों को फायदा होगा। सहकारिता में निजी क्षेत्र के प्रवेश से बहुराष्ट्रीय कंपनियां, बड़े उद्योगपति सहकारी संस्थाओं पर कब्जा कर लेंगे और किसानों का शोषण होगा।

चर्चा के अंत में विधायक डॉ. ध्रुव ने कहा कि किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने जा रही केन्द्र की मोदी सरकार जिसका मैं पुरजोर विरोध करती हूं। मैं और हमारी कांग्रेस पार्टी किसानों भाइयों के साथ है। हम किसानों का शोषण नहीं होने देंगे।

 

 

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