राजनांदगांव

कृषि विधेयक निरस्त करने की मांग, सौंपा ज्ञापन
24-Sep-2020 8:55 PM 5
कृषि विधेयक निरस्त करने की मांग, सौंपा ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजनांदगांव, 24 सितंबर। जिला किसान कांग्रेस राजनांदगांव अध्यक्ष महेन्द्र यादव एवं महापौर हेमा देशमुख ने बुधवार को कलेक्टर टीके वर्मा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर कृषि विधेयक 2020 किसानों के हित में नहीं होने के कारण निरस्त करने की मांग की।

उन्होंने ज्ञापन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा 3 कृषि विधेयक लाया गया है, जो किसानों के हित में नहीं है। इस कानून के लागू होने से किसानों को कार्पोरेट, पंूजीपति व बिचौलियों के शोषण का शिकार होने की प्रबल संभावना है। उन्होंने बताया कृषि उपपादन व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश 2020 में इस वन नेशन वन मार्केट की बात की जा रही है। खरीदी-बिक्री को स्वतंत्र किया जा रहा है, किन्तु यह प्रावधान नहीं किया गया है कि कोई भी उत्पाद का एमएसपी से कम में खरीदी-बिक्री नहीं होगा तथा एमएसपी से कम में खरीदने वाले के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं रखा गया है। कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी होना चाहिए। देश में 85 प्रतिशत लघु व मध्यम किसान है जो एक जिले से दूसरे जिले में अपनी उत्पाद नहीं बेच पाते तो एक राज्य से दूसरे राज्य कहां बेच पाएंगे। यह विधेयक किसानों के हित से ज्यादा बिचौलियों का हित दिखाई देता है। बाजार स्वतंत्र होने से मंडी खत्म हो जाएगा। जिससे किसानों का शोषण बढ़ेगा। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट सी 2 अनुसार लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का प्रावधान हो।

उन्होंने बताया कि कृषक मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश 2020 में कांट्रेक्ट फार्मिंग पर जोर दिया गया है। जिसमें कार्पोरेट व बड़ी-बड़ी कंपनी खेती करेगी व किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बनकर काम करेगा। जमीन किसान का होगा व पूरा नियंत्रण कंपनी का होगा। किसानों के फसल के मूल्य निर्धारण की कोई गारंटी विधेयक में नहीं दी गई है।

उन्होंने आगे बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन विधेयक 2020 में इस नए अध्यादेश के तहत आलू, प्याज, दलहन, तिलहन व तेल के भंडारण पर रोक को हटा दिया गया है। जिससे किसानों को कोई भी लाभ नहीं है। इससे कालाबाजारी व जमाखोरी बढ़ेगी। इस अध्यादेश से भी किसानों को नहीं, बल्कि बड़े कंपनियों को लाभ होने वाला है, क्योंकि 90 प्रतिशत किसानों के पास भंडारण की क्षमता नहीं होती। इस विधेयक का लाभ सिर्फ जमाखोरी व कालाबाजारी करने वाले बड़े कंपनी व पंूजीपतियों को होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान बिसराम वर्मा, नरेन्द्र वर्मा, चंद्रकुमार समेत अन्य लोग शामिल थे।

 

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