राजनांदगांव

पुलिस दखल से खाप पंचायत ने लौटाया जुर्माना
29-Sep-2020 2:26 PM 4
पुलिस दखल से खाप पंचायत ने लौटाया जुर्माना

संपत्ति खरीदी-बिक्री गलत बताकर खरीददार और मालिक से ऐंठी थी रकम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 29 सितंबर।
राजनांदगांव जिले के अंदरूनी इलाकों में खाप पंचायत के जरिये संपत्ति और सामाजिक मामलों में बहिष्कार के बल पर उत्पीडऩ के मामले बढ़ रहे हैं। हाल ही में खैरागढ़ क्षेत्र के गातापार इलाके में एक जमीन खरीदी-बिक्री के मामले में दर्जनभर गांव के प्रमुखों द्वारा कथित रूप से मोटी रकम बतौर जुर्माना लिए जाने का मामला सामने आया है। 

मामला यह है कि चंपाबाई लोधी नामक एक महिला ने लछना पंचायत के एक ग्रामीण बिरेश पटेल को अपनी पुश्तैनी खेत को कानूनी रूप से बिक्री किया। खेती की खरीदी-बिक्री किए जाने के बाद महिला के ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा संपत्ति पर हक जताने के लिए खैरागढ़ तहसीलदार के समक्ष आपत्ति दर्ज की थी। कानूनी दस्तावेजों और साक्ष्य के आधार पर तहसीलदार ने सीधे चंपाबाई को ही मालिकाना हक दिया। इसके बाद महिला ने खेत को बेच दिया। खेत बेचने की खबर के बाद लछना पंचायत में 12 गांव के प्रमुखों ने एक लंबी बैठक में यह फैसला लिया कि खरीदी-बिक्री पूरी तरह से वैध नहीं है। 

इस मामले में प्रमुखों ने संपत्ति की मालिक चंपाबाई, खरीददार बिरेश पटेल, लछना पंचायत के सरपंच कमलेश वर्मा समेत बिक्री के दौरान गवाह रहे फुदुकराम वर्मा पर जहां 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। वहीं एक और गवाह राम्हू से 7 हजार रुपए लिए गए। पंचायती फरमान से हड़बड़ाए पीडि़तों के गिड़गिड़ाने के बाद रकम को आधा कर दिया गया। यानी 50-50 के बजाय 25-25 हजार रुपए लिए गए।  

बताया जा रहा है कि पंचायती फरमान को लागू करने के लिए प्रमुखों ने सीधे सामाजिक बहिष्कार किए जाने की धमकी दी। जिसके कारण पीडि़तों के होश उड़ गए। हाल ही के दिनों में गातापार क्षेत्र में कुछ और मामलों में भी जबरिया प्रमुखों द्वारा घरेलू मसलों को लेकर रकम वसूली की गई है। खासबात यह है कि दंड भोगने वालों में सरपंच भी शामिल है। चंपाबाई  ने इस मामले में एसपी डी. श्रवण से मिलकर अपनी व्यथा को सामने रखा।

बताया जा रहा है कि सामाजिक उत्पीडऩ के मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए एसपी ने सीधे खैरागढ़ एसडीओपी जीसी पति को मामले की छानबीन करने का निर्देश दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पंचायती हुक्म जारी करने वाले दर्जनभर लोगों को तलब किया। इसके बाद पीडि़तों से ऐंठे गए रकम को पुलिस की दखल के चलते वापस करना पड़ा। 

बताया जा रहा है कि पीडि़तों से वसूली गई राशि को पेशेवर तरीके से प्रमुखों ने आपस में बांट लिया। ग्रामीण इलाकों में सामाजिक बहिष्कार व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से भी जुड़ा रहता है। लिहाजा डर के कारण पंचायती हुक्म को मानने के लिए ग्रामीण मजबूर रहते हैं। इस संबंध में राजनंादगांव एसपी डी. श्रवण ने ‘छत्तीसगढ़’ से कहा कि शिकायत के आधार पर पीडि़तों के साथ न्याय किया गया है। उनसे वसूले गए रकम को वापस दिलाया गया है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिस हमेशा तत्पर है।

इस बीच पुलिस के त्वरित कदम उठाने से अंदरूनी इलाकों में चल रहे कथित खाप पंचायतों पर रोक लगने की उम्मीद जगी है। यह मामला एक तरह से कतिपय प्रमुखों के निजी हितों से भी जुड़ा हुआ है। 

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