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विलंब से मानसून वापसी, 1975 और 2010 का तोड़ सकती है रिकार्ड
19-Oct-2020 10:15 PM 43
 विलंब से मानसून वापसी, 1975 और 2010 का तोड़ सकती है रिकार्ड

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

अम्बिकापुर, 19 अक्टूबर। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी सामान्यत: 17 सितम्बर से प्रारम्भ होती है। इस वर्ष 11 दिन विलम्ब से विदाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

मानसून 2020 इस बार 28 सितम्बर को लौटना प्रारम्भ किया। 28 सितम्बर से लौटते हुए 6 अक्टूबर को देश के उत्तरी और उत्तर पश्चिमी हिस्सों से विदाई के बाद मानसून की वापसी की प्रक्रिया रुक गई है। लगातार बंगाल की खाड़ी में अवदाब क्षेत्र के निर्मित होने से मानसून की वापसी में रुकावट आयी है।

मौसम वैज्ञानिक अक्षय मोहन भट्ट ने बताया कि इस समय एक नया अवदाब क्षेत्र पुन: जन्म ले रहा है जो मानसून की वापसी को बाधित करके रखेगा। माना जा रहा है कि इस समय हिन्द महासागर में ला नीना का प्रभाव है जिससे अक्टूबर में भी हलचल नहीं थमा है और लगातार मौसमी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।

भारत मौसम विज्ञान ने मानसून की वापसी की प्रक्रिया पर सन 1975 से दृष्टि रखना प्रारम्भ किया था। वर्ष 1975 से आज तक सबसे विलम्ब से मानसून की वापसी 2010 में 26 अक्टूबर और 2011 में 24 अक्टूबर को हुई थी। जो स्थिति वर्ष 2020 में बन रही है वह विलम्ब से मानसूनी वापसी के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ सकती है। संभावित सिस्टम झारखंड और बिहार को भी 22 से 24 अक्टूबर के बीच हल्की से मध्यम वर्षा दे सकता है। हालांकि उत्तरी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश पर इसका प्रभाव नहीं दिखेगा।

मानसून वापसी के कुछ आंकड़े पर नजर डाले तो वर्ष 2007 में 30 सितम्बर,2008 में 29 सितम्बर,2009 - में 25 सितम्बर,2010 में 27 सितम्बर,2011 में 23 सितम्बर,2012 में 24 सितम्बर, 2013 में 9 सितम्बर, 2014 में 23 सितम्बर,2015 में 4 सितम्बर,2016 में 15 सितम्बर,2017 में 27 सितम्बर,2018 में 29 सितम्बर,2019 में 9 अक्टूबर को वापसी होना प्रारम्भ हो गया था।इस वर्ष 2020 में मानसून की वापसी 28 सितम्बर से प्रारंभ हो गई थी लेकिन लगातार बंगाल की खाड़ी में अवदाब क्षेत्र के निर्मित होने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी की सीमा पिछले 6 अक्टूबर से यथावत बनी हुई है। इस समय वापसी की सीमा फैजाबाद, फतेहपुर, नवगांव,राजगढ़, रतलाम,वल्लभ विद्यानगर पोरबंदर से गुजर रही है।

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