बलौदा बाजार

धान खरीदी में देरी, फसल सुरक्षा को ले किसान चिंतित, अर्ली वेरायटी की कटाई शुरू
29-Oct-2020 7:20 PM 28
धान खरीदी में देरी, फसल सुरक्षा को ले किसान चिंतित, अर्ली वेरायटी की कटाई शुरू

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कसडोल, 29 अक्टूबर। तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में जल्द पकने वाली खरीफ फसल धान पक कर तैयार है जिसकी कटाई शुरू हो गई है। राज्य सरकार 1 दिसम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का निर्णय लिया गया है। ऐसे में धान मिजाई के बाद धान की हिफाजत 1 माह तक कर पाने पर किसानों नें चिंता जताई है।

कसडोल तहसील क्षेत्र के 230 ग्रामों में कृषि विकास खण्ड कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार करीब 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ फसल धान की खेती हुई है, जिसमें कमोवेश 18 से 20 हजार हेक्टे. कृषि भूमि में हल्के किस्म की जल्द पकने वाली धान की खेती का अनुमान है। कसडोल क्षेत्र में असिंचित रकबा कृषि भूमि की अधिकता है ।जिससे जल्द पकने वाली फसल से प्राय: सभी गांव कुछ न कुछ प्रभावित हैं। धान कटाई का काम शुरू हो गया है जिसकी सप्ताह भर के भीतर व्यापक कटाई होने की संभावना है। इसके साथ ही देर से पकने वाली धान की बालियां निकल चुकी हैं। उक्त धान की कटाई के बाद यह धान कटना शुरू हो जाएगा।

क्षेत्र के मैदानी क्षेत्र के ग्राम बहेराभांठा असनीद हटौद धौराभांठा कोसमसरा सेमरिया माली डीह नवापारा नारायणपुर टेमरी दर्रा मोहतरा कोट कटगी खैरा बैजनाथ सर्वा मलदा छेछर आदि कसडोल सिरपुर मार्ग के बोरसी बगार परसदा पुटपुरा घिरघोल बलदाकछार औरइ आदि 50 ग्रामों में असिंचित भूमि पर हल्के धान की कही 25 तो कहीं 30से 40 प्रतिशत भूमि में खेती हुई है। कसडोल तहसील क्षेत्र के सोनाखान भुसडीपाली नावागांव कंजिया देवतराई चिखली अर्जुनी महराजी पंचायतों के 30 गांव में 40 से 50 प्रतिशत कृषि भूमि में जल्द पकने वाली फसल की कटाई शुरू हो गई है। इसी तरह राजादेवरी क्षेत्र के 42 गांव में काफी तादाद में जल्द पकने वाली धान की खेती हुई है। जंगल क्षेत्र बारनवापारा के चरौदा गबौद आमगांव ढेबी मोहदा मुड़पार भिभोरि खुदमुड़ी पंचायतों में भी धान कटाई का काम शुरू हो गया है ।

प्रदेश सरकार द्वारा उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी प्रारम्भ करने का फैसला किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। विपक्षी दलों और किसान मजदूर महासंघ प्रतिनिधि मंडल द्वारा भी मंत्री रविंद्र चौबे तथा मुख्य मंत्री से 1 नवम्बर से खरीदी की मांग की गई थी। लघु एवं सीमांत किसानों के पास एक माह तक धान संग्रह कर रखने की समस्या है।

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