महासमुन्द

आधे से अधिक स्ट्रोक्स जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है-डॉ. परदल
29-Oct-2020 8:05 PM 23
आधे से अधिक स्ट्रोक्स जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है-डॉ. परदल

महासमुन्द में हर साल 50 से 70 मामले 

विश्व स्ट्रोक दिवस आज 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुन्द, 29 अक्टूबर।
आज विश्व स्ट्रोक दिवस पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर के परदल न जानकारी दी है कि महासमुन्द में हर साल ब्रेन अटैक के 50 से 70 मामले आते हैं। यह बीपी में ज्यादा उतार-चढ़ाव की वजह से आता है। इसलिए मरीज को बीपी कंट्रोल में रखना चाहिए। वहीं ब्रेन स्ट्रोक होने वाले मरीज को चार घंटे के अंदर अगर इलाज मिल जाए को रिकवरी जल्दी होती है। ज्यादा देर तक स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए स्ट्रोक के प्रति अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल लगभग 1.70 करोड़ लोग स्ट्रोक्स की समस्या का सामना करते हैं। जिसमें से 60 लाख लोग तो मर जाते हैं। वहीं 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है जबकि विकलांगता होने का यह तीसरा प्रमुख कारण है। इतना गंभीर होने के बावजूद भी कम से कम आधे से अधिक स्ट्रोक्स को लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया है कि जब रक्त वाहिका नलिकायें किसी रुकावट या रिसाव के कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो ऐसी स्थिति को स्ट्रोक कहते हैं। इसको ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है। स्ट्रोक्स के लगभग आधे से ज्यादा मामले उच्च रक्तचाप से जुड़े होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन शैली अपना कर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने जानकारी दी है कि लगभग 5 में से 1 स्ट्रोक मोटापे से जुड़ा होता है। चार में से एक से ज्यादा स्ट्रोक के मामले उच्च कोलेस्ट्रॉल से जुड़े होते हैं। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। किसी व्यक्ति द्वारा दोनों हाथों को उठाने पर एक हाथ का न उठ पाना या गिर जाना, किसी व्यक्ति द्वारा साधारण शब्द बोलने पर उसकी आवाज में लडखड़़ाहट होना जैसा कोी लक्षण है तो एम्बुलेंस के लिए आपातकालीन नंबर पर कॉल जरूर कॉल करना चाहिए।
 

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