राजनांदगांव

नांदगांव में अक्टूबर में हर सौ, जांच में 8 फीसदी पॉजिटिव, रिकवरी रेट 88 फीसदी, मौतें 10
29-Oct-2020 8:50 PM 25
नांदगांव में अक्टूबर में हर सौ, जांच में 8 फीसदी पॉजिटिव, रिकवरी रेट 88 फीसदी, मौतें 10

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

राजनांदगांव, 29 अक्टूबर। अक्टूबर का महीना कोरोना बीमारी के संक्रमण के लिहाज से लोगों के लिए काफी राहत भरा साबित हुआ है। अगस्त-सितंबर की तुलना में अक्टूबर के महीने में स्वास्थ्य विभाग के 100 लोगों की जांच के पीछे मात्र 8 लोग ही कोरोना से ग्रसित मिले हैं। वहीं मौतों की संख्या में भी काफी गिरावट दर्ज की गई है।

अक्टूबर माह में मात्र 10 लोगों की इस बीमारी से जान चली गई। वहीं सितंबर महीने में ही 50 से 60 लोगों को कोरोना ने अपनी जद में लेते हुए जान ले ली। सितंबर माह में जिस तरह से ताबड़तोड़ मौत हुई उससे लोगों में दहशत कायम हो गया था। अक्टूबर महीने में कोरोना की रफ्तार भी घटी है।

बताया जा रहा है कि जिले में भले ही रोज नए मरीज मिले रहे हैं, लेकिन रिकवरी रेट भी तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में कोरोना से स्वस्थ होने की रिकवरी रेट 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कोरोना से राजनांदगांव जिले में 100 लोगों की मृत्यु हुई है। अगस्त-सितंबर माह में ही सर्वाधिक मौतें हुई है। जिसमें कई नामचीन हस्तियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। भाजपा नेत्री शोभा सोनी से लेकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कन्हैयालाल अग्रवाल के अलावा टिंकू बैद व पत्रकार पूरन साहू जैसे चर्चित लोग मौत के मुंह में समा गए।

बीते 8 माह में कोरोना ने अपना व्यापक असर दिखाया है। बताया जा रहा है कि वैश्विक महामारी अभी तक थमी नहीं है। ठंड के मौसम में इस बीमारी के तेजी से पैर पसारने की आशंका को देखकर बार-बार लोगों को सचेत किया जा रहा है। इसके बावजूद लोग बेपरवाही के साथ भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में बिना मास्क लगाए घूमते दिख रहे हैं। इस बीच स्वास्थ्य महकमे के लिए अक्टूबर का महीना तनाव कम करने वाला साबित हुआ है।

बढ़ते रिकवरी रेट के साथ स्वास्थ्य जांच में नए मरीजों के संख्या में भी काफी कमी आई है। हर 100 लोगों की जांच में मात्र 8 लोग ही संक्रमित मिल रहे हैं। जिससे स्वास्थ्य विभाग का दबाव भी कम हुआ है। अक्टूबर महीने में मात्र 10 लोगों को ही अपनी जान गंवानी पड़ी है। अगस्त-सितंबर के महीने में हालात बेकाबू हो गए थे।

इन दोनों महीनों की तुलना में अक्टूबर ने कोरोना को एक तरह से सीमित कर दिया है। माना जा रहा है कि लोगों ने अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी कई उपाय किए हैं। वहीं इसके वायरस के मारक क्षमता भी कमजोर हुई है। कुल मिलाकर धीरे-धीरे नए मरीजों की संख्या में घट रही है। वहीं मौतों की संख्या में भी कमी आई है।

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