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महाराष्ट्र गन्ना फैक्ट्री में ढाई माह से बंधक 12 मजदूर छुड़वाए
31-Oct-2020 11:00 PM 32
महाराष्ट्र गन्ना फैक्ट्री में ढाई माह से बंधक 12 मजदूर छुड़वाए

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
पिथौरा, 31 अक्टूबर।
स्थानीय एक संस्था के सहयोग से प्रशासन द्वारा कोई 12 मजदूरों को महाराष्ट्र की एक गन्ना फैक्ट्री से सकुशल छुड़वा कर आज उनके घर पहुंचा दिया गया। ज्ञात हो कि अगस्त के पहले सप्ताह में जब कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था उस समय समीप के बलौदा बाजार जिले के दूरस्थ एवं पिथौरा शहर से मात्र 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम चरौदा के मजदूरों के सामने पेट भरने का संकट था, जिसके चलते ग्राम के 22 मजदूर अपने एक परिचित के बुलावे पर महाराष्ट्र के पुणे के करीब एक गन्ना फैक्ट्री में काम करने गए थे परंतु वहां फैक्ट्री मालिक की प्रताडऩा एवं बंधक बनाकर काम कराने से परेशान मजदूरों ने पिथौरा के एक संगठन को मोबाइल लगा कर अपनी व्यथा सुनाई थी।

मजदूरों के अनुसार वे रोजी-रोटी की तलाश में महाराष्ट्र के गन्ना फैक्ट्री में काम करने गए थे जहाँ फैक्ट्री के मालिक ने मजदूरी मांगने पर न सिर्फ उन्हें बंधक बनाया बल्कि बिना मजदूरी दिए मारपीट करते हुए जान से मार देने की भी धमकी देता रहा, जिससे सभी मजदूर डरे सहमे थे। लिहाजा वे किसी तरह जान बचाकर अपने घर वापस लौटना चाह रहे थे। करीब ढाई महीने से बंधक बने सभी मजदूरों को पिथौरा एवं पुणे क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्था एवं महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र के एक अधिकारी की मदद से सभी मजदूरों को बंधन से छुड़वाकर सकुशल उनके घर वापस भेज दिया गया।

घटना के संबंध में बताया जाता हैकि बारनवापारा क्षेत्र के ग्राम चरौदा निवासी लीलावती विश्वकर्मा जो आठवीं तक पढ़ी है रोजी-रोटी की तलाश में आज से करीब ढाई महीने पहले अपने 3 महीने के दूधमुंहे बच्चे एवं पति तथा माता-पिता के साथ महाराष्ट्र के एक गन्ना फैक्ट्री जो कि पुणे जिले के चौकुला कस्बा के समीप पड़वी नामक स्थान पर संचालित है। वहां इस लालच से काम करने चली गई थी जहां उन्हें 12000 महीने पगार मिलेगा। किंतु वहां जाकर उन्हें पता चला कि वहां उन्हें 15 घंटे तक लगातार काम करने पड़ेंगे। इतना ही नहीं उन्हें रोजी के हिसाब से मजदूरी मिलेगी ।

बताया जा रहा है कि बलौदा बाजार जिले के करीब 8 से 10 मजदूर पूर्व से ही उक्त स्थान पर काम करने के लिए गए हुए थे उन्हीं के बताए अनुसार गन्ना फैक्ट्री के मालिक अक्षय गायकवाड अपने किसी आदमी को भेजकर यहां से और मजदूर लाने कहा था। लॉकडाउन समाप्ति के बाद गरीबी और तंगहाली की जीवन जी रहे बारनवापारा क्षेत्र के ग्राम चरौदा से 6 लीलावती विश्वकर्मा 23 वर्ष सुशीला विश्वकर्मा 42 वर्ष लक्ष्मण विश्वकर्मा 45 वर्ष पिंकी विश्वकर्मा 18 वर्ष भारती विश्वकर्मा 17 वर्ष, सोनाखान के समीप ग्राम अर्जुनी से 4 टिकेश्वर बढिय़ा 17 वर्ष अशोक बरिहा 20 वर्ष नंद कुमार विश्वकर्मा 19 वर्ष  एवं अनुसूया विश्वकर्मा 22 वर्ष तथा भोकलुडीह से शशि कुमार सिदार 33 वर्ष एवं कैलाशगढ़ से वीर नारायण विश्वकर्मा 27 वर्ष कुल 12 लोग 1 अगस्त को फैक्ट्री के संचालक के द्वारा मुहैया कराए गए वाहन छोटे हाथी के माध्यम से काम करने के लिए ग्राम से गये थे।

बंधक से छूटे मजदूरों के अनुसार किसी तरह सभी मजदूर जंगलों के बीच संचालित गन्ना फैक्ट्री में पहुंचे तो वहां उनके रहने के लिए मकान नहीं था। पीने के लिए डबरी का पानी का उपयोग करना पड़ता था सभी मजदूर से फैक्ट्री मालिक का मैनेजर दबाव बनाकर 15 से 16 घंटे तक काम करवाता था तथा उन्हें बताया जाता था कि जिस दिन काम नहीं करोगे उस दिन का मजदूरी नहीं दिया जाएगा। इस तरह ढाई महीने में उन्हें महीने भर ही काम करवाया गया और सभी मजदूरों के हिसाब में यह बताया गया कि खुराकी और घर से फैक्ट्री तक के जाने वाले वाहन का खर्चा भी इनके मजदूरी में से ही काट लिया गया तथा उन्हें बताया गया कि इसके बावजूद उनके ऊपर 18000 रुपये कर्ज है। तथा 18000 को छूटने के लिए उन्हें रोककर और काम कराया जाता रहा।

बंधक बने सभी मजदूर स्थिति को देखते हुए घबरा गए और किसी तरह उन्होंने पिथौरा क्षेत्र में काम करने वाले एक स्वयंसेवी संस्था दलित आदिवासी मंच की संचालिका राजिम तांडी से फोन से संपर्क कर अपनी आप बीती बताई और उन्हें किसी तरह छुड़ा लेने की गुहार लगाई। सूचना मिलने के बाद राजिम तांडी के द्वारा महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्था प्रमुखों से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया तथा मजदूरों के बारे में उन्हें जानकारी दी।

वहां के स्वयंसेवी संस्था के द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति से अवगत करवा कर वहां के एसडीएम के साथ मौके पर पहुंचकर सभी मजदूरों से मुलाकात की। मजदूरों की शिकायत सही पाए जाने पर वहां के अधिकारी ने मजदूरों को उनके ढाई महीने के मजदूरी का भुगतान करवाया तथा शासन के व्यय से उन्हें सकुशल उनके गांव तक वापस भेजने की भी व्यवस्था की गई।

जान से मार देने की भी धमकी
बंधक बने मजदूरों ने किसी तरह मोबाइल से वीडियो बनाकर आपबीती बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी तथा उक्त वीडियो को अपने परिचितों एवं रिश्तेदारों को भेजा गया था जिसके आधार पर यह मामला स्वयंसेवी संस्था तक पहुंचा था और महाराष्ट्र क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्था सहित प्रशासनिक हलकों में भी पहुंचा था इससे बौखलाए फैक्ट्री के मालिक के द्वारा मजदूरों को जान से मार देने की बात के साथ लगातार धमकाया जा रहा था कि वीडियो किसने बनाकर वायरल किया है गुस्से में एक महिला मजदूर के मोबाइल को पटक कर तोड़ दिया गया था।

सभी मजदूरों से दबाव बनाकर अपने पक्ष में भी एक वीडियो बनवाकर अपने पास सुरक्षित रख लिया ताकि किसी तरह के प्रशासनिक दांवपेच में न फंसे। मालिक के रवैया को देखकर सभी मजदूर डरे सहमे किसी तरह अपनी जान बचाना मुनासिब समझकर घर या जंगल में छुपे हुए थे।

बहरहाल स्वयंसेवी संस्था एवं प्रशासनिक अधिकारियों के पहल पर छत्तीसगढ़ के बार नयापारापारा क्षेत्र के बंधक बने 12 मजदूरों को सकुशल वापस लाने में सफलता मिली है।

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