राजनांदगांव

भाजयुमो जिलाध्यक्ष की दौड़ में दर्जनभर युवा
25-Nov-2020 2:13 PM 105
भाजयुमो जिलाध्यक्ष की दौड़ में दर्जनभर युवा

28 को प्रदेश अध्यक्ष के सामने होगा शक्ति प्रदर्शन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 25 नवंबर।
भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के आगामी 28 नवंबर को प्रस्तावित दौरे से पहले जिलाध्यक्ष बनने के इच्छुक दावेदारों में सियासी उठापटक चल रही है। वैसे तो संगठन में अध्यक्ष बनने को लेकर दावेदारों की लंबी फेहरिश्त है। सियासी उठापटक के बीच प्रदेश अध्यक्ष साहू के सामने अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों जोरदार शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी है। करीब आधा दर्जन नाम ऐसे हैं, जिनकी सक्रियता के कारण उनके दावेदारी को संगठन में खास महत्व मिल सकता है। अध्यक्ष बनने के लिए युवा दावेदार वरिष्ठ नेताओं से भी राजनीतिक एप्रोच लगा रहे हैं। 

सत्ता से बाहर होने के बाद भाजपा अपने युवा विंग को मजबूत करने के इरादे से हाल ही में 35 वर्ष से अधिक उम्र के युवाओं के लिए उम्र की बंदिशें लगा दी है। जिसके चलते कई दावेदार अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हो गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रबल दावेदारों में भाजयुमो के जिला महामंत्री आलोक श्रोती की गिनती हो रही है। वह लगातार भाजयुमो की राजनीति में अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं।

नांदगांव शहर भाजयुमो अध्यक्ष पद पर भी उन्होंने लंबे समय तक कार्य किया है। इसके बाद उन्हें भाजयुमो का जिला महामंत्री बनाया गया। इसी तरह मोनू बहादुर भी एक दमदार दावेदार माने जा रहे हैं। उनके पास भी युवाओं की बड़ी फौज है। अध्यक्ष की दौड़ में सरपंच संघ के अध्यक्ष लोमेश वर्मा की भी मजबूत दावेदारी सामने आई है। एक और दावेदार ऋषिदेव चौधरी भी अध्यक्ष की दौड़ में है। वह भी युवाओं को लेकर संगठन के कार्यक्रमों में बढ़-चढक़र भाग ले रहे हैं। 

बताया जा रहा है कि भाजयुमो के जिलाध्यक्ष  की नियुक्ति में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह और जिलाध्यक्ष मधुसूदन यादव की राय बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी दावेदार तीनों से बराबर संपर्क बनाए हुए हैं।

माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू के समक्ष दावेदार राजनीतिक ताकत दिखाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। बताया जा रहा है कि भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के साथ नांदगांव के वरिष्ठ नेताओं की भी एक बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में नए अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा हो सकती है। भाजपा में कुछ वरिष्ठ नेता अपने पसंद के आधार पर अध्यक्ष बनाने की कवायद भी कर रहे हैं। कुल मिलाकर दावेदारों के लिए अध्यक्ष पद हथियाना राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। 

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