बस्तर

पांच साल में दलहन के रकबे में तीन गुना हुई वृद्धि
26-Nov-2020 2:25 PM 37
पांच साल में दलहन के रकबे में तीन गुना हुई वृद्धि

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 25 नवम्बर। बस्तर जिले में दलहन फसलों के रकबे में पिछले पांच सालों में लगभग तीन गुना की वृद्धि हुई है। कृषि विभाग द्वारा कृषकों को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के माध्यम से प्रोत्साहित कर जिले में दलहनी फसलों के क्षेत्र में वृद्धि हेतु अनवरत प्रयास किये जा रहे हैं ।विभागीय आकड़ों के अनुसार जिले में दलहन का क्षेत्र 2015-16 में 2874 हेक्टेयर था, जो कि वर्ष 2019-20 में बढक़र 7199 हेक्टेयर हो गया है। वर्ष 2020-21 हेतु विभाग द्वारा दलहन के क्षेत्र में वृद्धि करते हुए 8350 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले में दलहन फसलों में मुख्य रूप से चना उड़द एवं मूंग की खेती प्रमुखता से की जाती है।

बस्तर जिले के अन्तर्गत अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने के कारण जिले के कृषकों द्वारा धान फसल की खेती प्रमुखता से की जाती है, जिसके कारण बस्तर जिले की मृदा नत्रजन तत्व की कमी भी देखी जा रही है। तकनीकी ज्ञान के अभाव एवं विपणन की सुचारू व्यवस्था न होने से कृषक दलहनी फसलों की खेती से दूरी बनाते हैं। कृंिष विभाग द्वारा किसानों के आय में वृद्धि और मृदा की उर्वरता के लिए दलहनी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

विकासखण्ड बकावण्ड के ग्राम कोलावल के कृषक विष्णुभारती द्वारा कृषि विभाग के अन्तर्गत संचालित आत्मा योजनान्तर्गत राज्य के बाहर शैक्षणिक भ्रमण एवं जिले में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर एवं विभागीय अमलों से समन्वय स्थापित कर पारंपरिक धान के साथ-साथ दलहनी फसलों की खेती 1.85 हेक्टर सिंचित क्षेत्र में प्रारंभ करते हुए लाभ प्राप्त किया गया। कृषक द्वारा वर्ष 2016 में कृषि विभाग द्वारा संचालित किसान समृद्धि योजना से नलकूप खनन एवं सौर सुजला योजना से सिंचाई पंप स्थापित कर अनुदान प्राप्त करते हुए द्विफसलीय क्षेत्र में विस्तार दलहनी फसल के माध्यम से प्रारंभ किया गया।

कृषक द्वारा वर्ष 2018-19 में 1.86 हेक्टेयर क्षेत्र में धान एवं 2.75 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का का उत्पादन करते हुए 60 हजार 290 रूपये लाभ अर्जित किया गया एवं 0.84 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द उत्पादन करते हुए 40 हजार 300 लाभार्जन किया गया वर्ष 2019-20 में उसी क्षेत्र से धान 39 क्विंटल हेक्टेयर एवं मक्का 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन से एक लाख 20 हजार 500 लाभार्जन एवं उड़द 0.84 हेक्टेयर से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त कर 57 हजार लाभ अर्जित किया गया है। कृषक द्वारा तकनीकी विधि यथा राइजोबियम, रोगनाशी द्वारा बीजोपचार, कतार बोनी, उर्वरक प्रबंधन कीटव्याधि प्रबंधन एवं सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग प्रमुखता से किया गया। कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2017-18 में आत्मा योजनान्तर्गत दलहन उत्पादन हेतु उत्कृष्ठ विकासखण्ड स्तरीय कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जिससे ग्राम के अन्य कृषक प्रेरित होकर बेहतर प्रदर्शन हेतु प्रयासरत हैं।

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