बस्तर

निगम की सामान्य सभा में हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे
26-Nov-2020 9:15 PM 51
निगम की सामान्य सभा में हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे

  विपक्ष ने जनता की समस्याओं को सदन पर नहीं रखने देने लगाया आरोप  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 26 नवम्बर। गुरुवार को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा हंगामेदार रही। विपक्ष के हंगामे के बीच महापौर सफीरा साहू ने अपना पहला बजट पेश किया। विपक्ष के हंगामे के बीच सभापति कविता साहू ने सदन में बहुमत के आधार पर बजट को पास किया। लेकिन विपक्ष नियमानुसार बजट पारित नहीं होने और सभापति पर कांग्रेस पार्टी के सभापति के रूप में कार्य करने का आरोप लगाया।

पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। विपक्ष ने सत्ता पक्ष द्वारा बहुमत की दादागिरी दिखाते हुए बजट पर चर्चा नहीं कराए जाने और जनता की समस्याओं को सदन पर नहीं रखने देने आरोप लगाया और सत्ता पक्ष द्वारा प्रदेश के मुखिया के निर्देशों को नहीं मानने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री द्वारा पार्षदों को लिखे पत्र और बजट की कॉपी को फाड़ कर सदन से बाहर निकल गए।

 सामान्य सभा की बैठक शुरू होते ही जब महापौर बजट पेश करने लगी तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया और पूरा बजट हंगामे के बीच पेश हो पाया। महापौर द्वारा पेश किया गया घाटे का बजट है। बजट में 2020 21 के लिए  अनुमानित राजस्व आय 6465.15 लाख राजस्व व्यय 6524.39 लाख रुपये अर्थात आय से अधिक व्यय बताया गया है। इसी तरह पूंजीगत प्राप्तियां 17334.58 लाख रुपए और पूंजीगत व्यय 1700646.85 लाख रुपए दर्शाया गया है जिससे पूंजीगत प्राप्ति के अतिरिक्त 312.28 लाख रुपए का पूंजीगत व्यय  हो रहा है। इस तरह से कुल 371.5 लाख रुपए का घाटा बजट में दर्शाया गया है।

बजट व समस्याओं पर चर्चा न होते हुए दोनों दलों में बहश शुरू हो गई जिस पर निगम अध्यक्ष लगातार मुद्दे की बात करने की बात कहती रही पर ऐसा नहीं होता देख बहुमत के आधार पर निगम अध्यक्ष ने बजट को मान्य घोषित कर दिया, जिससे नाराज भाजपा पार्षदों ने बीच सदन में बजट की कॉपियों को फाडक़र नारेबाजी शुरू कर दी जिसको देखते हुए प्रश्नकाल के बिना ही निगम सभापति ने सभा स्थगित कर दी।

नेताप्रतिपक्ष संजय पांडे ने कहा कि बहुमत के आधार पर बजट को कांग्रेस सरकार ने मान्य घोषित करा दिया और विपक्ष की आवाज भी नही सुनी क्योंकि बजट पर चर्चा करने से कांग्रेस की अनियमिताओं की पोल खुल जाती और जनता के सामने इनका असली चेहरा उजागर हो जाता।

 आरोपो का जवाब देते हुए महापौर ने कहा कि विपक्ष का काम सिर्फ आरोप लगाना होता है और अगर वे पूरा बजट सुन्नते तो उन्हें पता लगता कि वे जो आरोप लगा रहे है वो सरासर गलत है। सभी जनहित के मुद्दों को हमने बजट में रखा है केवल विपक्ष में है इस लिए हंगामा करने और जनता के बजट को गलत बताना और उसे फाडऩा जनता का अपमान है।

सभापति कविता साहू ने अपने पर लगे आरोपों को गलत बताया और कहा कि विपक्ष पहले से ही विरोध करने का मन बनाकर सदन में आई थी और बीच सदन में बजट को फाडऩा सदन का अपमान है। इस पर कारवाई होनी चाहिए। सभापति द्वारा सदन में प्रश्नकाल के पूर्व बजट पेश किए जाने के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि सदन का संचालन पूर्ववत होना चाहिए।

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