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बस्तर के अनाजों को कुकीज के रूप में मिली नई पहचान
28-Nov-2020 2:45 PM 36
बस्तर के अनाजों को कुकीज के रूप में मिली नई पहचान

बस्तर के रागी, कोदो, कुटकी, महुआ, काजू, इमली आदि से बनाया जा रहा स्वादिष्ट और स्वास्थवर्धक कुकीज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

जगदलपुर, 26 नवम्बर। महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से बस्तर के रागी, कोदों, कुटकी, महुआ, काजू, इमली से  स्वादिष्ट और स्वास्थवर्धक खाद्य सामाग्री का निर्माण और विक्रय किया जा रहा है। जगदलपुर जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुदाल गांव की जय मां काली स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित आमचो बस्तर बेकरी में रागी, कोदो, कुटकी, महुआ, काजू, इमली आदि से कुकीज और अन्य उत्पाद का निर्माण महिलाओं के द्वारा किया जा रहा है। समूह की महिलाओं के द्वारा बाजार में उपलब्ध कुकीज से हटकर बस्तर के रागी, कोदो, कुटकी, महुआ, काजू, इमली आदि से कुकीज का भी निर्माण किया जा रहा है, जो कि स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थवर्धक एवं पोषक तत्वों से भरपूर है।

रागी, कोदो, कुटकी, काजू और महुआ में पोषक तत्वों की प्रचूरता होती है, जो शरीर के लिए आवश्यक तत्वों की पूर्ति करते है। ये पोषक तत्व रक्तचाप, खून की कमी, लिवर से संबंधित बीमारियों, मोटापे, हृदय, स्नायु तंत्र, त्वचा, बालों, आंखों, पेट के रोगों में लाभदायक होते है। कोरोना महामारी में उक्त उत्पादों से बने कुकीज इसलिए भी महत्वपूर्णं है क्योंकि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते है। इसके अलावा समूह द्वारा कोकोनट, चॉकलेट, जीरा, मिल्क, शुगर फ्री, नमकीन, हनी आदि कुकीज का भी निर्णय किया जा रहा है, साथ ही अनेक तरह के खाखरा, केक, महुआ और इमली चॉकलेट का भी निर्माण करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 एनआरएलएम के द्वारा महिला समूह द्वारा बनाए जा रहे उत्पाद के लिए प्रयास किया जा रहा है कि निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले कच्चा माल कोदो, कुटकी, रागी, रेड राइस, इमली, महुआ आदि स्थानीय समूहों और बाजार से क्रय किया जाए जिस से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अन्य ग्रामीणों को भी लाभ पहुँच सके। इन कुकीज को बाजार में अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है, जिससे समूह के हौसले बुलंद है। वर्तमान में 10 प्रकार के कुकीज को लॉन्च किया गया है।

कुदाल गांव, बस्तर की जय माँ काली महिला स्व-सहायता समूह को फूड प्रोसेसिंग एवं बेकरी का प्रशिक्षण दिया गया है। जिस में कुकीज के अलावा खाकरा, केक, चॉकलेट एवं अन्य उत्पाद बनाने का भी प्रशिक्षण दी जा रही है। कोरोना काल में महिलाओं के आजीविका के लिए जिला प्रशासन के इस प्रयास से महिलाओं के आमदनी में वृद्धि हो रही है।

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