रायगढ़

दिव्यांग की चित्रकला से प्रभावित हो रहे लोग
17-Jan-2021 6:04 PM 25
दिव्यांग की चित्रकला से प्रभावित हो रहे लोग

दक्षिण की फिल्म स्टार ने सोशल मीडिया में की प्रशंसा

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायगढ़, 17 जनवरी
। यंू तो सृष्टि के रचनाकार ने हर किसी के हाथों में किसी न किसी तरह का कला सम्माहित कर भेजा है। ऐसे ही एक चित्रकार हाथों से दिव्यांग होकर भी अपने रचनाकार अपने हाथों से मनमोहक चित्रकारी कागजो में उकेर रहा है। आलम यह है कि अर्जुन जिस ख्याति कलाकर की तश्वीर को बनाकर उसे शोसल मीडिया में शेयर कर रहा है उसे देखकर वह कलाकार दांतो तले उंगली चबाने को मजबूर होकर मंत्र मुग्ध होकर खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं।

जिले में राष्ट्रीय स्तर में उभरते हुए कलाकर के रूप में वर्षो पहले रायगढ़ कोतरारोड रहवासी अर्जुन दास मानिकपुरी पिता मोहन दास मानिकपुरी का पदार्पण हुआ है। अर्जुन पढ़ाई में मेधावी भले ही अपने मित्रों की तुलना में कम था, लेकिन वह कालाकारी में स्कूल भर के छात्र छात्राओं को पीछे छोड़ देता था अर्जुन वर्तमान में चित्रकारी से अपनी कला का मुजायरा दिखा रहा है जिसमें जिस किसी की भी वह चित्र कागजों में उकेर रहा है वह अपनी तश्वीरो को देखकर अचंभित हो रहा है। आर्टिस्ट अर्जुन रंगोली एवं चित्रकारी का काल दूसरे लोगो को ट्रेनिंग देकर भी सीख रहे हैं। उनका मानना है कि कल हर किसी के हाथों में है, लेकिन लक्ष्य को सामने रखकर जुनून के साथ किया जाए तो वह निश्चित ही सफल होते हैं यह चित्रकारी की कला भी हौसले व धैर्य का कार्य है। 

कीर्ति सुरेश अपनी तस्वीर देख हुई अचंभित  
दक्षिण भारतीय फिल्म में अदाकारा कीर्ति सुरेश ख्यातिप्राप्त है कीर्ति अपने अदाकारी का जलवा बिखेर कर अपनी एक अलग मुकाम हासिल की है। जिसमें उसे वर्ष 2019 में 66 वें राष्ट्रीय पुरुस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया था। जिसे देखते हुए पखवाड़े भर पहले चित्रकार अर्जुन ने कीर्ति सुरेश की 3 तस्वीर को कागजो में उकेरा था और उस कला को इंटरनेट मीडिया इंस्टाग्राम में टैग कर पोस्ट किया था जब कीर्ति ने अपनी तश्वीर को देखी तो वह अचंभित हो गई और अपने पोस्ट में बेस्ट विशेष लॉस्ट आफ लव अमेजिंग ( शुभकामनाएं और बहुत सारा प्यार और अद्भुत) लिखकर कलाकार की तारीफ किए।  

चाचा को देखकर मिली प्रेरणा कक्षा चौथी से बनाने लगा चित्र 
चित्र कालकर अर्जुन ने बताया कि वह जब तीसरी कक्षा में था तो अपने चाचा जयप्रकाश मानिकपूरी को छाया चित्र को कागजो में दीवाल मे उकेरते हुए देखा करता था और कला को घण्टो खड़े रहकर निहारता था। तभी से वह इस कला में जाने की ठान लिया और कक्षा चौथी से ड्रॉइंग बनाना चालू किया और तब से लेकर अब निरंतर बना रहे हैं।
 

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