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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं का धरना, ज्ञापन
15-Feb-2021 6:21 PM 20
 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं का धरना, ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बैकुंठपुर, 15 फरवरी।
छत्तीसगढ़ ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ ने ब्लॉक स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर परियोजना अधिकारी को मांगों का ज्ञापन सौंपा।
खडग़वां परियोजना के सामने क्षेत्र की सैकड़ों कार्यकर्ता और सहायिकाओं में धरना दिया। उनका कहना है कि सरकार ने चुनाव के समय जो वादा किया था वो पूरा करे और उनकी मांगों को गंभीरता पूर्वक विचार कर लागू करे। जिसके बाद सभी ने परियोजना अधिकारी को सचिव महिला बाल विकास के नाम ज्ञापन सौंपा। 
उन्होंने बताया कि 19 फरवरी को जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौपेंगे। 

क्या है मांगे
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।  शिक्षाकर्मी जो पहले पंचायत के अधीन थे, उन्हे नीति निर्धारित कर (छ.ग.) सरकार द्वारा उन्हे शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों की भाँति छ.ग. में भी कम से कम 11000/- मासिक मानदेय स्वीकृत किया जाए। काँग्रेस पार्टी के चुनावी जन-घोषणापत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में उन्नयन करने की घोषणा की गई है। दो वर्ष के बाद भी वायदा पूरा नहीं किया गया है, वादा पूरा करे सरकार। समूह बीमा, मासिक पेंशन के लिए नीति निर्धारित कर इसका लाभ दिया जाये। ऑगनबाड़ी केन्द्रो में कार्यकर्ताओ के पद पर सहायिकाओं को लिए जाने के लिए वर्तमान में 25 प्रतिशत का बन्धन रखा गया है. परियोजना कार्यालयों में पद रिक्त होते ही विज्ञापन निकाल दिया जाता है जिसके कारण एक-दो पद में प्रतिशत की पूर्ति नहीं होने के कारण सहायिकाओं को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है और जिस केन्द्र में कार्यकर्ता का पद रिक्त हुआ है, वहाँ की सहायिका उसके योग्य है, तो पर भी वहाँ उसकी भर्ती न होकर सीधी भर्ती से कार्यकर्ता की पूर्ति की जा रही है जो विचारणीय है। इसके लिए 25 प्रतिशत के बन्धन को समाप्त किया जाए और कार्यकर्ताओं के रिक्त पदों पर सहायिकाओं को नि:शर्त लिया जाए। ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया है लेकिन धुलाई भत्ता नहीं दिया जाता है. कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का धुलाई भत्ता 500/ -प्रतिमाह समान रुप से दिया जाए।  महिला एवं बाल विकास के अन्तर्गत कार्यरत् पर्यवेक्षकों के लिए भी ड्रेस कोड़ निर्धारित किया जाए। जब कार्यकर्ता सहायिका स्थानीय महिला हैं, उसके बावजूद भी उनका ड्रेस कोड़ है तो पर्यवेक्षकों के लिए क्यों नहीं हो सकता, लागू किया जाए।
 

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