रायपुर

लक्षण दिखने के 24 घंटों भीतर कोरोना जांच कराने पर रिकवरी संभावना ज्यादा-डॉ. पांडा
05-Mar-2021 5:29 PM 30
लक्षण दिखने के 24 घंटों भीतर कोरोना जांच  कराने पर रिकवरी संभावना ज्यादा-डॉ. पांडा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 5 मार्च।
मेडिकल कालेज रायपुर के पल्मोनरी मेडिसीन विशेषज्ञ डॉ.आरके पांडा का कहना है कि कोरोना संक्रमण रोकने का सबसे आसान उपाय है। जैसे ही सर्दी, खांसी, बुखार आदि कोई भी लक्षण दिखे, तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं और खुद से कभी सर्दी, खांसी की दवाई न लें। चिकित्सक की सलाह से ही कोई भी दवाई लें। उन्होंने कहा कि लोग कई बार लापरवाही से या डर से भी जांच कराने से बचते हैं जो कि घातक साबित होता है।

उन्होंने बताया कि ऐसे कई प्रकरण राज्य स्तरीय डेथ आडिट रिव्यू में सामने आते हैं, जब स्वयं दवाई कर या अप्रशिक्षित डाक्टरों से इलाज कराने का परिणाम भयावह होता है। रायपुर टाटीबंध की 54 वर्ष की महिला को 31 जनवरी से बुखार कफ की शिकायत थी। उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, स्थानीय क्लिनिक से इलाज कराती रहीं। 6 फरवरी को सांस फूलने पर निजी अस्पताल गई, जहां उन्हें कोरोना टेस्ट की सलाह दी गई। 7 फरवरी को जांच में वह पाजिटिव पाई गई और उच्च चिकित्सा संस्थान में भर्ती हुई। उन्हें अन्य कोई बीमारी भी नहीं थी, लेकिन जांच में देर से उनकी हालत पहले ही बिगड़ चुकी थी और हर संभव इलाज के बाद भी 19 फरवरी को उनकी मृत्यु हो गई।

इसी प्रकार जांजगीर जिले के 63 साल के पुरूष, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी। 9 फरवरी से कफ, बुखार आ रहा था, लेकिन जब 13 फरवरी को सांस फूलने लगी तब ही अस्पताल में भर्ती हुए। कोरोना पाजिटिव पाए जाने पर इलाज कराया गया लेकिन, तमाम प्रयासों के बाद भी 22 फरवरी को उनकी मृत्यु हो गई। विशेषज्ञ बार -बार कह रहे हैं कि लक्षण दिखने के 24 घंटों के भीतर ही यदि कोरोना जांच कराई जाए तो रिकवरी की संभावनाएं 94 प्रतिशत से अधिक है।

बुजुर्गों का अधिक ध्यान रखें-डॉ. सुंदरानी 
मेकाहारा के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.ओपी सुंदरानी ने बताया कि अभी 60 वर्ष से अधिक मरीजों की मृत्यु अधिक हो रही है, इसलिए युवाओं को अपने बुजुर्ग परिजनों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्दी, बुखार, थकावट, गंध न आना आदि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराना चाहिए। यदि मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो तुरंत अस्पताल जाएं और तब तक पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन स्तर नापते रहें। 95 प्रतिशत से कम होने पर चिकित्सक के पास तुरंत जाएं। इस बीच कुछ सीधे लेटें, जिससे फेफड़ों में हवा ठीक से जा सके।
 

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