बिलासपुर

अस्पतालों में अफरा-तफरी, ऑक्सीजन बेड जान बचाने के लिये जरूरी, पर एक के लिये चार कतार में
08-Apr-2021 5:27 PM (35)
अस्पतालों में अफरा-तफरी, ऑक्सीजन बेड जान बचाने के लिये जरूरी, पर एक के लिये चार कतार में

  रायपुर, दुर्ग की तरह बिलासपुर में भी संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा, एक दिन में करीब 600 मरीज, 15 की मौत  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर 8 अप्रैल।
रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव के बाद बिलासपुर भी कोरोना के मामलों में खतरनाक पर पहुंच गया है। बीते 24 घंटों में यहां 594 नए मरीजों का पता चला हैं। इस दौरान 15 लोगों की मौत हो गई। एक तरफ शाम के बाद शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल दिखाई दे रहा है वहीं दिन में लोगों की बाजार में भीड़ उमड़ रही है, जिससे संक्रमण लगातार बढ़ने की आशंका बनी हुई है। वेंटिलेंटर और ऑक्सीजन वाले बिस्तरों की निजी व सरकारी अस्पतालों में मारामारी मची हुई है। वैक्सीनेशन की रफ्तार आपूर्ति नहीं होने के कारण बार-बार प्रभावित हो रही है।

जिले में 594 नये संक्रमितों के मामले आने के बाद अब तक 26 हजार से अधिक पॉजिटिव सामने आ चुके हैं। एक सप्ताह के भीतर ही 2800 नये संक्रमित मिले हैं और इस दौरान 42 मरीजों की मौत हो गई है। यह पिछले साल के किसी भी आंकड़े से अधिक है। शहर के बसंत विहार, तोरवा, हेमूनगर, नेहरू नगर, नर्मदानगर, सरकंडा, जूना बिलासपुर, गोलबाजार इलाकों में नये मरीज मिले हैं। एनटीपीसी सीपत, एसईसीएल जैसे बाहरी इलाकों के अलावा मस्तूरी, बिल्हा, बेलगहना, सेंदरी, मल्हार आदि के ग्रामीण इलाकों से लगातार नये मरीजों के आने के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है।

सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में लगातार संक्रमित मरीज पहुंच रहे हैं। जिन मरीजों को जनरल बेड में रखा जाना है उनके लिये किसी तरह की व्यवस्था हो भी रही है पर वेंटिलेटर व ऑक्सीजन यूनिट वाले बिस्तरों की कमी बनी हुई है। निजी अस्पतालों में इसकी अनाप-शनाप कीमत वसूल की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि ऑक्सीजन या वेंटिलेटर बेड केवल मरीजों की गंभीर स्थिति को देखकर ही दिया जाये इसके लिये सिफारिश या अन्य किसी प्रकार का प्रलोभन पर काम नहीं किया जाये। संभागीय कोविड अस्पताल, अपोलो अस्पताल, आरबी हॉस्पिटल, महादेव हॉस्पिटल आदि निजी अस्पतालो में ये बेड फुल चल रहे हैं। जैसे ही कोई एक बेड खाली होता है इंतजार में चार छह मरीज होते हैं कि वह उन्हें मिल जाये। संभागीय कोविड अस्पताल में केवल 20 जनरल बेड खाली बचे हैं। यहां 25 और बिस्तरों की व्यवस्था करने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा जिले में एक हजार नये ऑक्सीजन बेड तैयार करने के लिये निर्देश स्वास्थ्य मंत्री ने दे रखा है, जिस पर काम अभी शुरू नहीं हुआ है।

वैक्सीन लगाने के बाद तबियत बिगड़ रही  
कोरोना संक्रमण के नये मामलों में कई ऐसे मरीज हैं जिन्होंने कोविड वैक्सीन का पहला डोज लिया है। वैक्सीन लगने के बाद बुखार आने पर लोगों ने इसे रियेक्शन माना और डॉक्टरों के पास नहीं पहुंचे। जब तीन—चार दिन बाद बुखार नहीं उतरा और ऑक्सीजन लेवल गिरने लग गया तो वे टेस्ट कराने लैब पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों की तबियत ज्यादा खराब हो रही है और उन्हें तत्काल ऑक्सीजन अथवा वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।

रेमडेसिवर की शॉर्टेज, मुनाफाखोरी  
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन लेबल घटने के साथ-साथ फेफड़ों में निमोनिया जमने की शिकायत आ रही है। ऐसे गंभीर मरीजों को तत्काल रेमडेसिवर इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। जिले में इसकी सप्लाई या तो सिर्फ सरकारी है या बड़े निजी अस्पतालों में। मेडिकल स्टोर्स में यह उपलब्ध नहीं है। आपूर्ति की कमी के कारण यह स्थिति बनने की बात कही गई है। रेमडेसिवर की जमाखोरी व मुनाफाखोरी रोकने के लिये प्रशासन ने इसे सिर्फ आधार कार्ड, कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट व डॉक्टर की सिफारिश के आधार पर वितरित करने का निर्देश दिया है। हालांकि इस इंजेक्शन की कीमत 900 रुपये है पर इसे 4 से 5 हजार रुपये में एमआरपी बदलकर बेचा जा रहा है।

वैक्सीनेशन पर बार-बार रुकावट
45 से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोविड वैक्सीनेशन की मंजूरी मिलने के बाद वैक्सीनेशन सेंटर्स में भीड़ उमड़ी हुई है। पर वैक्सीन की कमी के कारण बार-बार इसमें रुकावट आ रही है। जिले में सोमवार को वैक्सीन खत्म होने के कगार पर पहुंचने के बाद 1 लाख डोज भेजने की मांग की गई थी लेकिन बुधवार को दोपहर 33 हजार डोज आये। बुधवार को 13 हजार व गुरुवार दोपहर दो बजे तक 7 हजार वैक्सीन लगाये जा चुके हैं। वैक्सीन की यह नई खेप कल तक चलने का अनुमान है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वैक्सीन की कमी पूरे राज्य में बनी हुई है। आपूर्ति में संतुलन बनाने की वजह से मांग के अनुरूप पूरा वैक्सीन नहीं भेजा जा रहा है। बुधवार को लगाये गये 13 हजार डोज में 8 हजार 45 से 60 साल के बीच उम्र वाले ही अधिक हैं। 230 लोगों ने दूसरा डोज लिया है।  

एमपी-सीजी के बसों पर रोक
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच बस परिवहन पर रोक लगाने के कारण बिलासपुर से निकलने वाली तथा रायपुर से आने वाली 20 बसों का परिचालन बंद हो गया है। जो लोग व्यापार या रिश्तेदारी में आये हैं उन्हें अब अन्य साधनों की व्यवस्था करके लौटना और आना पड़ रहा है। इसके लिये उन्हें कोविड निगेटिव का रिपोर्ट रखना जरूरी किया गया है। गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले की सीमा मध्यप्रदेश से जुड़ी हुई है। यहां की करीब एक दर्जन बस सेवायें प्रभावित हुई हैं। इसके चलते लोग टैक्सी, मिनी बस, जीप आदि में मुख्य मार्ग को छोड़कर गावों के रास्ते से मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं। इन वाहनों में कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ रही हैं।

दिन में भीड़, रात में सड़कें सूनी
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिलासपुर में भी रायपुर और दुर्ग की तरह लॉकडाउन की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल यहां शाम 7 बजे दुकानों को तथा 9 बजे होटलों को बंद करने का आदेश दिया गया है। इसके चलते शाम के बाद जहां सड़कें सूनी हो रही है वहीं लोग बाजार में अतिरिक्त खरीदी के लिये निकल रहे हैं। सब्जी बाजार में व शहर के प्रमुख बाजार गोलबाजार, सदरबाजार, शनिचरी, बृहस्पति में लोगों ने पुलिस के डर से मास्क जरूर पहना हुआ है पर सोशल डिस्टेंस की वे धज्जियां उड़ा रहे हैं। पुलिस लगातार गश्त कर रही है। दुकानदारों को सैनेटाइजर और मास्क रखने कहा गया है। मास्क के बगैर आने वाले ग्राहकों को सामान नहीं देने कहा गया है। बुधवार को करीब एक हजार लोगों पर मास्क नहीं पहनने के कारण जुर्माना लगाया गया।

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