कोरिया

नलकूप खनन की अनुदान राशि साल भर बाद भी नहीं मिली, ब्याज सहित देने की मांग
13-Jun-2021 9:23 PM (87)
नलकूप खनन की अनुदान राशि साल भर बाद भी नहीं मिली, ब्याज सहित देने की मांग

बैकुंठपुर, 13 जून। कोरिया जिले के कृषि विभाग द्वारा किसान समृद्धि योजनांतर्गत किसानों के द्वारा कराये गये नलकूप खनन का अनुदान राशि आहरित कर लिये जाने के एक वर्ष बाद भी किसानों को नहीं दी गयी है। जिसे लेकर एक किसान ने उप संचालक कृषि बैकुंठपुर को पत्र लिखकर नलकूप खनन की अनुदान राशि शीघ्र प्रदान किये जाने की मांग की है, अन्यथा की स्थिति में न्यायालय की शरण लेने का उल्लेख किया है। 

शिकायत के अनुसार शहर से लगे ग्राम जामपारा निवासी रामलाल सिंह ने 18 मार्च 2021 को दिये अपने शिकायत में बताया था कि उसके द्वारा नलकूप खनन कराया गया है जिसका अनुदान की राशि उसे अभी तक नहीं हुआ। उक्त खनन के लिए वर्ष 2019-20 में राशि स्वीकृत की गयी है जिसे विभाग द्वारा आहरित भी कर लिया गया है लेकिन अनुदान की राशि लाभांवित कृषकों को अब तक नहीं प्रदान की गयी है। 

शिकायत में यह भी बताया गया है कि ेेकृषि विभाग द्वारा उक्त योजना की राशि 20 मार्च 2020 को ही आहरित कर ली गयी है लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी लाभांवित कृषकों को अनुदान राशि नहीं दी गयी। 

जानकारी के अनुसार उक्त योजना अंतर्गत उस दौरान ग्राम सरभोका के पतंगलाल, रघुवीरपुर के छोटेलाला, दर्रीटोला के अनंत कुंज के साथ जामपारा के रामलाल  को अनुदान राशि दिया जाना था, जिसके लिए दो किश्त में क्रमश: 25 हजार व 18 हजार रूपये नलकून खनन का अनुदान राशि दिया जाना था, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय राशि आहरित किये हो जाने के बाद भी लाभांवित कृषकों को नलकून खनन अनुदान की राशि नहीं दी गयी। जिसे लेकर किसान परेशान हंै और उप संचालक कृषि को आवेदन देकर शीघ्र ही अनुदान राशि दिये जाने की मांग की।

किसान रामलाल सिंह ने दुबारा 20 जून 2021 को उपसंचालक कृषि को पत्र लिखकर अपने 18 मार्च 2021 को लिखे पत्र की याद दिलाते हुए कहा कि उसके द्वारा अनुदान राशि की मांग की थी, परन्तु अब तक सरकार द्वारा जारी किया गया अनुदान उन तक नहीं पहुंच पाया है, जबकि कृषि संचालक के आदेश क्रमांक किसान समृद्धि/ 2019-20/4068 एवं 4060 दिनांक 02 मार्च 2020 के तहत अनुदान आहरित कर लिया गया।  
ऐसे में उन्हें उनके अनुदान राशि के साथ ब्याज राशि सहित प्रदान करें, नहीं तो उन्हें न्यायालय की शरण लेनी होगी।

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