रायपुर

प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियमों से ऑफलाइन और ऑनलाइन बाजार का सह-अस्तित्व बना रहेगा
30-Jul-2021 1:46 PM (63)
प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियमों से ऑफलाइन और ऑनलाइन बाजार का सह-अस्तित्व बना रहेगा

रायपुर, 30 जुलाई। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू, अमर गिदवानी, प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीडिय़ा प्रभारी संजय चौबे ने बताया कि केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियम निश्चित रूप से ई-कॉमर्स व्यवसाय को कुछ बड़ी कंपनियों के नापाक चंगुल से न केवल मुक्त करेंगे बल्कि बड़ी संख्यां में छोटी और बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को व्यापार के समान अवसर भी देते हुए ई-कॉमर्स परिदृश्य को बिल्कुल तटस्थ बना देंगे। 

कैट ने बताया कि इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन में एक बड़ी निर्णायक भूमिका भी निभायेगें वहीं यह नियम बाजार की दुकानों और ऑनलाइन व्यापार के सह-अस्तित्व के लिए भी एक सामंजस्यपूर्ण वातावरण भी बनाएंगे जिससे देश के आम ग्राहक को फायदा होगा। कैट ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल से ई-कॉमर्स नियमों को तत्काल लागू करने की पुरजोर मांग की। 
कैट ने बताया कि पिछले अनुभवों के आधार पर ई-कॉमर्स नियमों के कार्यान्वयन में देरी नहीं होनी चाहिए या किसी अन्य तंत्र को अब बीच में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि इस स्तर पर नियमों का कार्यान्वयन बहुत महत्वपूर्ण है। देश के ई-कॉमर्स व्यापार में कुछ बड़ी कंपनियों के क़ानून एवं नियमों के खिलाफ व्यापार करने के कारन देश भर में एक लाख से अधिक छोटी दुकानें बंद हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप अधिक बेरोजगारी भी हुई है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने कहा कि अमेजऩ एवं फ्लिपकार्ट द्वारा नीति और कानून के बार-बार उल्लंघन के मद्देनजर, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दोनों कंपनियों के खिलाफ कठोर टिप्पणियां करने और जल्द ही राखी से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन का अपहरण ये बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां न कर सकें, इस हेतु यह आवश्यक है, की ई-कॉमर्स के नियमों को जल्द से जल्द लागू किया जाए। जिससे एक  निष्पक्ष एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए एक समान स्तर का व्यापारिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

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