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Date : 21-Feb-2020

राजिम में नागा साधुओं का शाही स्नान

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 21 फरवरी। राजिम माघी पुन्नी मेला के अंतिम दिवस महाशिवरात्रि पर नागा बाबाओं, साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों के साधुओं की शाही स्नान के लिए ऐतिहासिक शोभायात्रा संत समागम स्थल परिसर से सुबह 7.30 बजे निकली। इस शोभा यात्रा में समस्त नागा, साधु-संतों के साथ गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े, मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार लंगेह, ओएसडी एवं सदस्य राजिम मेला गिरीश बिस्सा के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।

शोभायात्रा संत समागम से शुभारंभ होकर श्रीकुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पीछे मार्ग से नेहरू बाल उद्यान होते हुए, राजिम पुल, पं. सुंदरलाल शर्मा चौक, गौरवपथ राजिम, व्हीआईपी मार्ग होते हुए मेला में बने शाही कुंड में पहुंचे। शोभायात्रा का स्वागत दोनों शहर नवापारा और राजिम में विभिन्न चौक चौराहों में फूलमालाओं बरसा कर किया गया। शोभायात्रा में विभिन्न चौक में अनेकों अस्त्र-शस्त्रों से लैस नागा बाबाओं, साधु-संतों का शौर्य प्रदर्शन करते हुए अखाड़े चलाते रहे। शोभायात्रा शाही कुंड के पास पहुंचा, जहां शस्त्र पूजन पश्चात सर्वप्रथम नागा बाबाओं ने कुंड में छलांग लगाई और शाही स्नान किया। इसी के साथ गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े भी अन्य अधिकारी के साथ कुंड में डुबकी लगाने के लिए उतर गए। शाही स्नान करने विभिन्न अखाड़ों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।


Date : 21-Feb-2020

निशान पूजा के बाद साधुओं का शौर्य प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ संवाददाता 
राजिम, 21 फरवरी।
राजिम माघी पुन्नी मेला में महाशिवरात्रि के पूर्व संध्या अखिल भारतीय श्री पंचहरि व्यासी महानिवार्णी अखाड़ा, निर्मोही अनि अखाड़ा, दिगंबर अखाड़ा के साधु संतो द्वारा निशान पूजा की गई। इसमें करीब 250 से अधिक साधु संत शामिल हुए। निशान, तफड़ा, मोहरी, ढोल आदि वा़़द्ययंत्रों की आवाज संतों में उत्साह भरने का काम कर रहे थे। तटम्बरी बाबा रतनपुर अपने पूरे शरीर पर बोरे के कपड़े पहने हुए थे। एक हाथ मे तलवार लिये शौर्य दिखाने मैदान में उतरे तो देखते ही देखते अखाड़ा से साधु एक एककर तलवार लाठी, भाला, बरछी, संकल जैसे हथियार लेकर अपनी अपनी कला का प्रदर्शन किया।  दो तलवार जब आपस में टकराये तो उनकी आवाज दूर तक जा छिटकी और लोग अपलप देखते ही रहे। लोहे से बनी पट्टा तलवार औजार को लेकर एक संत ने पैर उठाकर शानदार प्रदर्षन किया। पश्चात साधु एक दुसरे को रू. भेट कर उत्साहवर्धन बढ़ाते रहे। इससे यह बात स्पष्ट हो रही थी कि साधु संत न सिर्फ लोगों का सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं बल्कि समय आने पर देश की रक्षा के लिए हथियार उठने से भी परहेज नहीं करते थे। उल्लेखनिय है कि साधु संतों का ये शस्त्र धारण करने का कारण  है कि ये शिवजी की सेना है, जो विधर्मियों से धर्म की रक्षा करती थे।  निशान को पुष्पहार पहनाया गया तथा गुलाल, अक्षत, द्रव्य, व प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना की गई। संत सर्वेवेश्वरदास, श्यामुदास, दयाल दास, राधामोहन, दिव्यकांत दास, देवदास, नरेन्द्र दास, प्रकाश वैष्णव, सालिकराम दास, मोक्ष वैष्णव, संतोष वैष्णव, मनहरण वैष्णव, नारायण दास वैष्णव आदि उपस्थित थे।

 

 


Date : 21-Feb-2020

महाशिवरात्रि पर संगम में हजारों ने लगाई डुबकी 

राजिम, 21 फरवरी। हल्की गुलाबी ठंड के बीच महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को तडक़े बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने राजिम के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई और भोलेनाथ की पूजा की। धर्म के प्रति आस्था गुरूवार रात से ही देखने को मिल रही थी। भक्त सुबह 3 बजे के पहले से ही राजिम संगम की धार में डुबकी लगाने पहुंच गए थे।  तडक़े से लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुगणों ने पुण्य स्नान कर दीपदान किया। पश्चात दर्शनार्थियों की लम्बी लाईन श्री कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और श्री राजीव लोचन मंदिर, बाबा गरीब नाथ की ओर लग गई, श्रद्धालुगण भगवान के दर्शन करने लाईन में डटे अपनी बारी की इंतजार करते रहे। यह सिलसिला तडक़े तीन बजे के पहले से जारी रहा है। कई महिलाओं ने रेत का शिवलिंग बना कर बेल पत्ता, धतूरा फूल चढ़ाकर आरती की। 

 


Date : 20-Feb-2020

महुआ शराब के साथ ओडिशा का एक बंदी

मैनपुर, 20 फरवरी। पुलिस ने आज सुबह महुआ शराब के साथ ओडिशा के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। 
अमलीपदर थाना प्रभारी आरके साहू ने सूचना पर ग्राम सरगीपाली ओडिशा से सीमांचल बिस़ोई उर्फ सोढ़ी भारी मात्रा में अवैध रूप से हाथ भट्टी से बनी महुआ देशी शराब ओडिशा से वीजा पदर कुहीमाल जाने के मार्ग में बाइक को रोककर तलाशी ली तो बाइक के पीछे बंधे हुए तीन नग ट्यूब  के अंदर करीब 150 लीटर अवैध देशी महुआ शराब मिली। प्रत्येक ट्यूब  में 50-50 लीटर देशी महुआ शराब भरी हुई थी। जिला गरियाबंद अमलीपदर थाने की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 


Date : 20-Feb-2020

पर्व स्नान संग कल राजिम माघी पुन्नी मेला समापन

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 20 फरवरी। राजिम माघी पुन्नी मेला का समापन महाशिवरात्रि पर पर्व स्नान के साथ सम्पन्न होगा। इस अवसर पर सुबह 6  बजे साधु-संतों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। नागा साधुओं की अगुवाई में शौर्य प्रदर्शन करते हुए यह शोभायात्रा संत समागम से निकलकर नेहरू घाट, इंद्रिरा मार्केट, नेहरू पुल, फारेस्ट नाका, पं. सुंदरलाल शर्मा चौक होते हुए राजिम गौरवपथ में प्रवेश करेगी, पश्चात व्हीआईपी रोड होते हुए त्रिवेणी संगम पर बने कुंड में सभी संत-महात्मा स्नान करेंगे। शोभा यात्रा में विभिन्न वैष्णव अंखाड़ों के साधु-संत सभी अंखाड़ो के नागा अपनी पांरम्परिक वेश-भूषा एवं उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल होंगे। सभी अपनी नागा साधु-संत धर्म ध्वजा अपने अखाड़ो के धर्म (ध्वज) निषान उठाये चलेंगे। घोड़ा बघ्घी, ढोल नगाड़े के साथ शंखनाद करते वातावरण गुंजायमान होगा। साधु-संत अपने अस्त्रो के साथ मार्ग पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शोभायात्रा में शिरकत करेंगे। शोभायात्रा में विभिन्न अखाड़ों के नागा-साधु, महामंडलेश्वर, महात्मा शाही स्नान में मुख्य रूप से शामिल होंगे।


Date : 20-Feb-2020

नागा साधु कर्म को देते है महत्व, पुन्नी मेला आये अधिकांश साधु बी.ए., बी.एस.सी. पढ़े है

राजिम। चकाचौंध की दुनिया किसे नहीं लुभाता। वर्तमान परिवेश में हर कोई सुविधा भोगी हो गया हैं, लेकिन नागा साधुओं की अपनी अलग दुनिया हैं। वे भोलेनाथ के सच्चे भक्त है। जिस प्रकार लोककल्याण के लिए शिवजी ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष अपने कण्ठ में रख लिया। उसी भॉंति नागा साधु सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना को लेकर कार्य करते हैं।

उल्लेखनीय हैं कि राजिम माघी पुन्नी मेला में विभिन्न अखाड़ों से नागा साधु आए हुए हैं। अंगेठा जलाकर अधिकांश समय आग के ताप में बैठे रहते है। शरीर में शमसान भूमि की राख का लेपन किए हुए माया मोह से दूर एकदम नंगधडंग गुरू के हर बात को अनुशरण करते हुए लोगों को भभूत देकर मंगल कामना कर रहें हैं। जूना अखाड़ा के नागा बाबा विक्रमानंद सरस्वती ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लोग बहुत ही सीधे व व्यवहार कुशल हैं। ईश्वर की प्रति इनकी लगाव कुट-कुटकर भरी हुई हैं। मेला में शासन के द्वारा साधुओं के लिए अच्छी व्यवस्था की गई। यहां के सरकार धन्यवाद के पात्र हैं। संत कुविचार को साफ करने का काम करते हैं। जैसे सरकार साफ-सफाई पर खास ध्यान दे रही हैंं।

उत्तरप्रदेश से आए आवह्न अखाड़ा के महंत लालगिरि नागा बाबा ने बताया कि वे पहली बार राजिम माघी पुन्नी मेला आए हैं। यह स्थान मन को भा गया। छत्तीसगढ़ के सेवाभावी लोगों को देखकर गदगद हो गया हूॅं। लोगों में संतो के प्रति भक्ति भावना अधिक है। लोमषऋषि आश्रम के साथ ही कुलेश्वरनाथ महादेव का मंदिर जो सोढूर, पैरी और महानदी के संगम के बीच बना हुआ हैं यह अभूतपूर्व हैं। नागा बाबा भीमगिरि जो केदारनाथ से पहुंॅचे हैं। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन से साधु जीवन अच्छा लग रहा हैं। बचपन से हम घर छोड़ दिये थे। पहाड़ एवं गुफाओं में रहते हैं। संत-समागम के मौके पर हम आए हैं इनके बाद सीधे गुफाओं में चले जाएगें। हमारा उद्देश्य स्वच्छ वातावरण निर्मित करना हैं ताकि एक-दूसरे में स्नेह बना रहें। भीमगिरि बाबा ने अपने दोनों हाथों में डमरू लेकर बजा रहे थें। सर पर खुमरी लगाए हैं। लोग इस महात्मा का दर्शन अवश्य कर रहे हैं।

महंत जमुनागिरि (नेपाल) बताती हैं कि मुझे साध्वी बने 20 वर्ष हो गया इस अंतराल में भोलेनाथ की कृपा हैं। बता दे कि इनकी हाथों में उंगली नहीं हैं। लेकिन भोलेनाथ के प्रति आस्था प्रगाढ़ हैं। हरिद्वार के जगदम्बापुरी ने बताया कि संत महात्मा देश को धर्ममय बनाने का काम करते हैं तथा धर्म अनुशासन  का पाठ पढ़ाते हैं। साधु हमेशा भक्ति के रंग रगें होते है। भभूत लगाकर मोहमाया को त्याग देते हैं। नागा साधु दिगम्बर हैं उसे अपने शरीर का मोह नही रहता हैं। उन्होंने आगे बताया कि आज से 13 वर्ष पहले राजिम कुंभ में एक साधु से काफी प्रभावित हो गई और वृन्दावन धाम चले गए।

महंत उमागिरि माई गुरू माता ने बताया कि गेरवा वस्त्र पहनने से आदमी साधु नहीं बनता। हृदय के अंदर ईश्वर का वास होना जरूरी हैं। शरीर को रंगने की अपेक्षा आत्मा को रंगे। इन्होंने दावा कि जिनके बाल बच्चे नहीं हैं वे हमारे आश्रम में आए तो उनकी मुरादे अवश्य पुरी होती है। जय बाबा मोहनराय गुफा में जिस भावना के साथ जायेगा। वैसा ही कार्य होगा। इनके गुफा में 24 किलों की ज्योत प्रतिदिन जलती है। सैकड़ों विदेशी शिष्या है। साध्वी पूर्णिमा जूना आखाड़ा से है। अभी इनकी उम्र 30 वर्ष है। बी.ए. फाइनल की है यू.पी. से वह बताती है कि मैं चौथी पीढ़ी हूॅ जिन्हें साध्वी बनने का अवसर ईश्वर ने दी है। आश्रम में रहकर शिक्षा देने का काम करती हूॅ। यहॉ के प्रमुख मंदिर राजीवलोचन भगवान का दर्शन करने के बाद मुझे ऐसा लगा कि भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में साक्षात् है। मंदिरों में उत्कीर्ण कला-नक्काशी इतिहासकारों, कलानुरागियों के लिए कौतुहल का विषय है।

महंत सत्यगिरी (उत्तराखंड) पहली बार राजिम माघी पुन्नी मेला आये है इनकी उम्र 96  वर्ष है किन्तु शरीर से कहीं नही लगता कि सौ वर्ष के नजदीक है। 1943 में इन्होंने बी.एस.सी. पास किया तथा कामाख्या देवी मंदिर में जाकर दीक्षा ली। इनका कहना है कि कर्म सबसे बड़ा है लोग पैसे के पीछे भागते है। कर्म ऐसा करों कि पैसा अपके पीछे आयेगा। इन्हें बंगला, हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, नागा, मणिपुरी, चाइनीज समेत 17 भाषाओं का ज्ञान है। वे राजिम संगम से बहुत प्रभावित है।


Date : 20-Feb-2020

पुन्नी मेला आए अधिकांश साधु बीए, बीएससी पढ़े हैं

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 20 फरवरी। राजिम पुन्नी मेला आए अधिकांश साधू बीए-बीएससी पढ़े हैं। उल्लेखनीय हैं कि राजिम माघी पुन्नी मेला में विभिन्न अखाड़ों से नागा साधु आए हुए हैं। जूना अखाड़ा के नागा बाबा विक्रमानंद सरस्वती ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लोग बहुत ही सीधे व व्यवहार कुशल हैं। ईश्वर की प्रति इनकी लगाव कुट-कुटकर भरी हुई हैं। मेला में शासन के द्वारा साधुओं के लिए अच्छी व्यवस्था की गई। यहां के सरकार धन्यवाद के पात्र हैं। संत कुविचार को साफ करने का काम करते हैं। जैसे सरकार साफ-सफाई पर खास ध्यान दे रही हैंं।

उत्तरप्रदेश से आए आवह्न अखाड़ा के महंत लालगिरि नागा बाबा ने बताया कि वे पहली बार राजिम माघी पुन्नी मेला आए हैं। यह स्थान मन को भा गया। छत्तीसगढ़ के सेवाभावी लोगों को देखकर गदगद हो गया हूॅं। लोगों में संतो के प्रति भक्ति भावना अधिक है। लोमषऋषि आश्रम के साथ ही कुलेश्वरनाथ महादेव का मंदिर जो सोढूर, पैरी और महानदी के संगम के बीच बना हुआ हैं यह अभूतपूर्व हैं। नागा बाबा भीमगिरि जो केदारनाथ से पहुंॅचे हैं। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन से साधु जीवन अच्छा लग रहा हैं। बचपन से हम घर छोड़ दिये थे। पहाड़ एवं गुफाओं में रहते हैं। संत-समागम के मौके पर हम आए हैं इनके बाद सीधे गुफाओं में चले जाएगें। हमारा उद्देश्य स्वच्छ वातावरण निर्मित करना हैं ताकि एक-दूसरे में स्नेह बना रहें। भीमगिरि बाबा ने अपने दोनों हाथों में डमरू लेकर बजा रहे थें। सर पर खुमरी लगाए हैं। लोग इस महात्मा का दर्शन अवश्य कर रहे हैं।

महंत जमुनागिरि (नेपाल) बताती हैं कि मुझे साध्वी बने 20 वर्ष हो गया इस अंतराल में भोलेनाथ की कृपा हैं। बता दे कि इनकी हाथों में उंगली नहीं हैं। लेकिन भोलेनाथ के प्रति आस्था प्रगाढ़ हैं। हरिद्वार के जगदम्बापुरी ने बताया कि संत महात्मा देश को धर्ममय बनाने का काम करते हैं तथा धर्म अनुशासन  का पाठ पढ़ाते हैं। साधु हमेशा भक्ति के रंग रगें होते है। भभूत लगाकर मोहमाया को त्याग देते हैं। नागा साधु दिगम्बर हैं उसे अपने शरीर का मोह नही रहता हैं। उन्होंने आगे बताया कि आज से 13 वर्ष पहले राजिम कुंभ में एक साधु से काफी प्रभावित हो गई और वृन्दावन धाम चले गए।

महंत उमागिरि माई गुरू माता ने बताया कि गेरवा वस्त्र पहनने से आदमी साधु नहीं बनता। हृदय के अंदर ईश्वर का वास होना जरूरी हैं। शरीर को रंगने की अपेक्षा आत्मा को रंगे। इन्होंने दावा कि जिनके बाल बच्चे नहीं हैं वे हमारे आश्रम में आए तो उनकी मुरादे अवश्य पुरी होती है। जय बाबा मोहनराय गुफा में जिस भावना के साथ जायेगा। वैसा ही कार्य होगा। इनके गुफा में 24 किलों की ज्योत प्रतिदिन जलती है। सैकड़ों विदेशी शिष्या है। साध्वी पूर्णिमा जूना आखाड़ा से है। अभी इनकी उम्र 30 वर्ष है। बी.ए. फाइनल की है यू.पी. से वह बताती है कि मैं चौथी पीढ़ी हूॅ जिन्हें साध्वी बनने का अवसर ईश्वर ने दी है। आश्रम में रहकर शिक्षा देने का काम करती हूॅ। यहॉ के प्रमुख मंदिर राजीवलोचन भगवान का दर्शन करने के बाद मुझे ऐसा लगा कि भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में साक्षात् है। मंदिरों में उत्कीर्ण कला-नक्काशी इतिहासकारों, कलानुरागियों के लिए कौतुहल का विषय है।

महंत सत्यगिरी (उत्तराखंड) पहली बार राजिम माघी पुन्नी मेला आये है इनकी उम्र 96  वर्ष है किन्तु शरीर से कहीं नही लगता कि सौ वर्ष के नजदीक है। 1943 में इन्होंने बी.एस.सी. पास किया तथा कामाख्या देवी मंदिर में जाकर दीक्षा ली। इनका कहना है कि कर्म सबसे बड़ा है लोग पैसे के पीछे भागते है। कर्म ऐसा करों कि पैसा अपके पीछे आयेगा। इन्हें बंगला, हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, नागा, मणिपुरी, चाइनीज समेत 17 भाषाओं का ज्ञान है। वे राजिम संगम से बहुत प्रभावित है।


Date : 20-Feb-2020

आदिवासी सम्मेलन में प्रेमसाय शामिल

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 20 फरवरी। राजिम माघी पुन्नी मेला के 11वें दिन आज राजिम में विशाल आदिवासी सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आदिमजाति, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण एवं शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में आने के लिए शिक्षा को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि बिना शिक्षा के कोई भी समाज विकास नहीं कर पायेगा। श्री टेकाम ने कहा कि हमारी सरकार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कि अगुवाई में स्थानीय संस्कृति और रिति-रिवाजों को सहेजने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज में जो कमियां है उसे शिक्षा से ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने आदिवासियों को सामूहिक वनाधिकार पत्र के लिए मांग करने का सुझाव दिया। श्री टेकाम ने कहा कि हमारी सरकार ने आदिवासियों के हित के लिए समर्थन मूल्य पर 8  लघुवनोपजों की खरीद को बढ़ा कर 22 कर दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि शराब बंदी की ओर सरकार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। उसमें समाज को भी आगे आना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने जनप्रतिनिधि भी भागीदारी निभायेंगे। सम्मेलन में राजिम विधायक अमितेष शुक्ल ने अध्यक्षता की एवं सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी धु्रव, विषिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थी। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति स्मृति ठाकुर, उपाध्यक्ष संजय नेताम, जिलापंचायत सदस्य श्रीमति लोकेश्वरी नेताम, नगरपंचायत अध्यक्ष श्रीमति रेखा सोनकर, धनेश्वरी नेताम, भरत दीवान, बैसाखुराम साहू, जनक धु्रव, गणेश धु्रव, मोहित धु्रव, कलेक्टर श्री श्याम धावड़े, पुलिस अधिक्षक एम.आर. आहिरे एवं आदिवासी विकास के सहायक आयुक्त एल.आर. कुर्रे मौजुद थे।

सम्मेलन को राजिम विधायक अमितेष शुक्ल ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के साथ उनके परिवार का पहले से नाता है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में गुंडाधुर और शहिद वीरनारायण सिंह जैसे वीर आदिवासियों का योगदान को नहीं भूलाया जा सकता। श्री शुक्ल ने कहा कि आदिवासियों का पीले रंग का पगड़ी और गमछा उनके सहज, सरल और अध्यात्म के प्रति विश्वास को दर्शाता है। सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी धु्रव ने कहा कि आजादी के बाद ही आदिवासियों के विकास के लिए नियम और कानुन बनाये गये। यहा तक कि संविधान मे भी प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि आज आदिवासियों को दिए गए अधिकार और सुविधाओं के कारण ही यहॉ तक पहुंच पायी है। डॉ. धु्रव ने आदिवासी समाज को नशे से दूर रहने कि अपील की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में समाज में ठोस निर्णय लेना होगा। समारोह को कमिश्नर श्री जी.आर. चुरेन्द्र ने भी संबोधित किया उन्होंने कहा कि सरकार जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और समाज को मिल कर आपसी वाद-विवाद सुलझाना चाहिए। सम्मेलन की शुरूआत शहिद वीरनारायण सिंह के छायाचित्र में पुष्प अर्पित कर किया गया। इस मौके पर राज्य गीत अरपा पैर के धार का गायन भी किया गया। सम्मेलन में अंर्तजातीय विवाह प्रोत्साहन योजनार्गत 4 जोड़ो को ढाई-ढाई लाख रूप्ये का चेक वितरण, 5 किसानों को सब्जी मिनी कीट एवं बाड़ी विकास योजनांर्गत 2 किसानों को मुंग मिनी कीट वितरण किया गया।

शिक्षा मंत्री श्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने लोक खेल का आनंद लिया

मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सम्मेलन समाप्ति पश्चात विभागीय प्रदर्शिनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाये गये प्रदर्शिनी के संबंध में जानकारी ली। मंत्री टेकाम ने लोक खेल लंगड़ी दौड़, गेड़ी, भौंरा खेल का आनंद लिया। यहां से मंत्री मुख्यमंच में पहुंचकर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखा। मंत्री ने भगवान श्री राजीव लोचन के दर्शन कर प्रदेश के खुशहाली की कामना किया।


Date : 20-Feb-2020

महाशिवरात्रि पर होगा भूतेश्वरनाथ का अभिषेक

छत्तीसगढ़ संवाददाता

गरियाबंद, 20 फरवरी। महाशिवरात्रि पर गरियाबंद जिला मुख्यालय से 3 किमी दूर स्थित मरौदा गांव में घने जंगलों के बीच शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। यह शिवलिंग भूतेश्वरनाथ के नाम से प्रसिद्ध है। कल कई श्रद्धालु पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे। यह विश्व का एकमात्र सबसे बड़ा ऐसा शिवलिंग है जो प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। महाशिवरात्रि पर भूतेश्वरनाथ समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी व भंडारे का आयोजन किया जाता है।

जानकारों का कहना है कि कई साल पूर्व जब जमींदारी प्रथा चल रही थी तब पारागांव में रहने वाले शोभासिंह नाम के जमींदार यहां पर खेती किया करते थे। एक दिन जब शोभा सिंह शाम को अपने खेत में गए तब उन्होंने खेत के पास एक विशेष आकृतिनुमा टीले से सांड के चिल्लाने और शेर के दहाडऩे की आवाज सुनी। वो तुरंत वापस आ गए और ये बात गांव वालों को बताया।

ग्रामवासियों ने सांड अथवा शेर की आसपास खोज की। परंतु दूर-दूर तक उनको न शेर मिला और न ही सांड। तभी से टीले के प्रति लोगों की श्रद्वा बढऩे लगी और लोग इसकी पूजा शिवलिंग के रूप में करने लगे। यहां के लोगों का कहना है कि पहले इस टीले का आकार छोटा था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई एवं गोलाई बढ़ती गई जो आज भी जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत्त जलहरी भी दिखाई देती है। जो धीरे-धीरे जमीन के ऊपर आती जा रही है।

यही स्थान भूतेश्वरनाथ, भकुर्रा महादेव के नाम से जाना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि भगवान शंकर-पार्वती ऋषि मुनियों के आश्रमों में भ्रमण करने आए थे, तभी यहां शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए।


Date : 19-Feb-2020

दैवेभो कर्मचारियों को 7 माह से वेतन नहीं, ज्ञापन

गरियाबंद। लोक स्वास्थ्य़़ यांत्रिकी विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से उनकी माली खराब हो गई है। जिसको लेकर दैवेभो कर्मचारियों ने विभाग के कार्यपालन अभियंता को लंबित भुगतान संबंधी आवेदन सौंपते हुए वेतन राशि जल्द़ से जल्द़ प्रदाय करने गुहार लगाई है।

विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में लोक स्वास़्थ्य़ यांत्रिकी विभाग अंतर्गत लगभग  50 दैवेभो कर्मचारी कार्यरत हैं। जो कि विभाग में लंबे समय से विभिन्ऩ पदों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दैवेभो कर्मचारियों ने बताया कि लोक स्वास्थ्य़ यांत्रिकी विभाग में कार्यरत कर्मचारियों का विगत सात महीना से वेतन अप्राप्त़ है। जिससे कि उनकी माली हालत बिगड़ती जा रही है।

बताया कि डिवीजन में कार्यरत दैवेभो कर्मचारियों को हर महीने वेतन दिया जा रहा है, लेकिन सब डिवीजन में काम कर रहे कर्मचारी जिसमें भंडारगृह में चौकीदार, ड्राइवर एवं कार्यालय में कम्प्य़ूटर आपरेटर और जिला प्रयोगशाला में लेब सहायक, हेल्पऱ सहित अन्य़ लोगों का भुगतान विगत सात महीनों से लंबित है।

उन्होंने बताया कि इतने लंबे समय से वेतन नहीं मिलने से पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। बताया कि परिवार के पालन-पोषण एवं बच्चों की पढ़ाई लिखाई और उनकी स्कूल की फीस में बहुत सी समस्याएं सामने आ रही है। इस विषय को लेकर दैवेभो कर्मचारियों ने विभाग के कार्यपालन अभियंता एवं एसडीओ को लंबित भुगतान जल्द़ से जल्द़ करने आवेदन सौंपते हुए आग्रह किया है।

 आवेदन सौंपने वालों में द्धारिका सिन्हा, भुवनेश्वऱ सिन्हा, राजेश कुमार, किशोर कुमार, जितेन्द्र कुमार, ऋषि कुमार देवदास, भानुप्रताप, देवेश्वऱ सिन्हा, रोहित सिन्हा, द्धारिका साहू, उत्तम़ कुमार, श्याम वर्मा, लाला यादव, लोमश तारक, देवानंद शर्मा, तीरथराम साहू, नरेश्वऱ, अर्जुन सिंह सहित दैवेभो कर्मचारी उपस्थित थे।

फिलिप एक्का, कार्यपालन अभियंता- विभाग में आबंटन का दिक्कत़ है। आबंटन प्राप्त़ होते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इस संबंध में शासन को अवगत कराया गया है। कहा कि कंटीवेशन में राशि भुगतान की देरी की वजह से ऐसा होता है, जैसे ही राशि प्राप्त़ होते भुगतान कर दिया जाता है।

 

 


Date : 19-Feb-2020

राउत नाचा ने दर्शकों को झूमने पर किया मजबूर

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 19 फरवरी। राजिम माघी पुन्नी मेला में कुलेश्वरनाथ मंदिर के पीछे सांस्कृतिक मंच में छत्तीसगढ़ी लोक कला विधा की छठा मंच पर उतर आई, एक से बढक़र एक प्रस्तुति कलाकारों ने दी। सिंधौरी के हेमंत यादव के राउत नाचा के टीम ने पॉव में घुंघरू कमर में करधनी, रंग-बिरंगे लाठी लेकर दोहा कहते हुए थिरकना शुरू किया तो उपस्थित दर्शक भी झुमने के लिये मजबूर हो गये। छतौना के संतोष जोशी के पंथी दल ने मादर की थाम पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया।

राजिम की कुंती साहू की महिला मण्डलीय ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा की। बेमचा महासमुंद के चन्द्रिका भारती ने पंडवानी पर महाभारत की कथाओं का वर्णन किया। बेलटुकरी के देवलाल साहू ने रामधुनी से श्रोताओं को बांधे रखा। नारी धमतरी के रामकुमार यादव ने मुख मुरली बजाए........  झन जा राधा होबे लाले लाल... की प्रस्तुति अमीट छाप छोड़ी। जामगांव के हेमा साहू की लोक नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ी गीतो पर नृत्य कर खूब तालियॉ बटोरी। धुमा के दिलीप कुमार साहू ने नाचा गम्मत प्रस्तुत किया।

खुटेरी रायपुर के वेदप्रकाश ने जगराता पर देवी भजनो का आगाज किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज सेन ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या पर दर्शकगण उपस्थित होकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुत्फ उठाते रहे।


Date : 19-Feb-2020

लोक संगीत मेरे रग-रग में बसा - कविता वासनीक

छत्तीसगढ़ संवाददाता

राजिम, 19 फरवरी। राजिम माघी पुन्नी मेला के मुख्य मंच पर कविता वासनीक ने अपनी पुत्री हिमानी वासनीक के साथ छत्तीसगढ़ के लोकरंग की सभी छटाओं को लोक गीत के माध्यम से दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया। जिसे अपार जनसमूह ने ताली बजाकर स्वीकार करते हुए उनका प्रोत्साहन किया। 

चर्चा के दौरान कविता वासनीक ने बताया कि संगीत उनका बचपन से ही रूझान था। उन्होंने संगीत की कोई विधिवत शिक्षा दीक्षा नही ली। अपनी मां का साथ देने- हिमानी वासनीक ने बताया कि वे गंधर्व विद्यालय शास्त्रीय संगीत मे गायन की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि अपनी मां को गाते हुये देखकर उनके मन मे गायन की रूझान बढ़ा। गीत-संगीत ने विरासत मिला हैं। लोक कला उनके रग-रग में बसा। कविता वासनीक ने अपनी बेटी के साथ अपने चिरपरिचित अंदाज में अपने कई गीत गाकर दर्षकों की वाहवाही बटोरी। 

 

 


Date : 19-Feb-2020

छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विकृत न करें-जोशी बहनें

छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजिम, 19 फरवरी।
राजिम माघी पुन्नी मेला के मुख्य मंच पर जोशी बहनों ने अपने कई प्रसिद्ध लोक गीत गाकर दर्शकों के बीच धूम मचा दी। मंच पर जोशी बहनों आते ही दर्षक दीर्घा से सास गारी देथे कि आवाज से गूूॅंज उठाया। जोशी बहनों ने दर्शकों की मांग पूरी करते हुये उनके पसंद के छत्तीसगढ़ी लोक गीत गाये। 

चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि मैं सरकार सहित मंत्री ताम्रध्वज साहू का आभार व्यक्त करना चाहूॅगी कि दो साल के अन्तराल के बाद मुझे उनके सहयोग से राजिम मेला में आकर पुन: आप लोगों से मिलने का तथा अपनी प्रस्तुति देने का अवसर दिया। इस बार कलाकारों के सम्मान के लिये जिस प्रकार से व्यवस्था कि गई है उसके लिये भी मैं शासन प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करती हूं। उन्होंने बताया कि लीला साउंड सर्विस रायपुर द्वारा पहला एलपी रिकार्ड किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी के पइया लागू गीत को इतना पसंद किया गया कि अमेरिका की एक कंपनी द्वारा उन्हें एक ग्रामोफोन भेंट किया गया। ये और बात है कि उस समय परिस्थितियों वश उसे बेचना पड़ा। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करती हुई कहा छत्तीसगढ़ की संस्कृति को लोगो के सम्मुख उनके बीच उसकी सच्चाई को रखे। उसे विकृत न करें। 

 


Date : 19-Feb-2020

लोक संगीत मेरे रग-रग में बसा - कविता वासनीक

छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजिम, 19 फरवरी।
राजिम माघी पुन्नी मेला के मुख्य मंच पर कविता वासनीक ने अपनी पुत्री हिमानी वासनीक के साथ छत्तीसगढ़ के लोकरंग की सभी छटाओं को लोक गीत के माध्यम से दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया। जिसे अपार जनसमूह ने ताली बजाकर स्वीकार करते हुए उनका प्रोत्साहन किया। 

चर्चा के दौरान कविता वासनीक ने बताया कि संगीत उनका बचपन से ही रूझान था। उन्होंने संगीत की कोई विधिवत शिक्षा दीक्षा नही ली। अपनी मां का साथ देने- हिमानी वासनीक ने बताया कि वे गंधर्व विद्यालय शास्त्रीय संगीत मे गायन की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि अपनी मां को गाते हुये देखकर उनके मन मे गायन की रूझान बढ़ा। गीत-संगीत ने विरासत मिला हैं। लोक कला उनके रग-रग में बसा। कविता वासनीक ने अपनी बेटी के साथ अपने चिरपरिचित अंदाज में अपने कई गीत गाकर दर्षकों की वाहवाही बटोरी। 


Date : 19-Feb-2020

राउत नाचा ने दर्शकों को झूमने पर किया मजबूर

छत्तीसगढ़ संवाददाता
राजिम, 19 फरवरी।
राजिम माघी पुन्नी मेला में कुलेश्वरनाथ मंदिर के पीछे सांस्कृतिक मंच में छत्तीसगढ़ी लोक कला विधा की छठा मंच पर उतर आई, एक से बढक़र एक प्रस्तुति कलाकारों ने दी। सिंधौरी के हेमंत यादव के राउत नाचा के टीम ने पॉव में घुंघरू कमर में करधनी, रंग-बिरंगे लाठी लेकर दोहा कहते हुए थिरकना शुरू किया तो उपस्थित दर्शक भी झुमने के लिये मजबूर हो गये। छतौना के संतोष जोशी के पंथी दल ने मादर की थाम पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। 

राजिम की कुंती साहू की महिला मण्डलीय ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा की। बेमचा महासमुंद के चन्द्रिका भारती ने पंडवानी पर महाभारत की कथाओं का वर्णन किया। बेलटुकरी के देवलाल साहू ने रामधुनी से श्रोताओं को बांधे रखा। नारी धमतरी के रामकुमार यादव ने मुख मुरली बजाए........  झन जा राधा होबे लाले लाल... की प्रस्तुति अमीट छाप छोड़ी। जामगांव के हेमा साहू की लोक नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ी गीतो पर नृत्य कर खूब तालियॉ बटोरी। धुमा के दिलीप कुमार साहू ने नाचा गम्मत प्रस्तुत किया। खुटेरी रायपुर के वेदप्रकाश ने जगराता पर देवी भजनो का आगाज किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज सेन ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या पर दर्शकगण उपस्थित होकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का लुत्फ उठाते रहे।

 


Date : 19-Feb-2020

 शिक्षा से ही समाज में फैली कुरीतियों और रूढि़वादी विचार दूर-मुरलीधर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
 गरियाबंद, 19 फरवरी।
विगत दिनों डड़सेना सिन्हा समाज तहसील राजिम-पाण्डुका का वार्षिक सम्मेलन ग्राम कसेरूडीह में आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि मार्केटिंग सोसायटी किसान राईस मिल गरियाबन्द अध्यक्ष एवं डड़सेना सिन्हा समाज जिला गरियाबन्द के पूर्व जिलाध्यक्ष मुरलीधर सिन्हा, अध्यक्षता रामलाल सिन्हा मण्डलेश्वर राजिम, विशेष अतिथि विनोद सिन्हा पूर्व जिलामंत्री, प्रीतम सिन्हा, कमल सिन्हा थे । 

 मुरलीधर सिन्हा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिन्हा समाज पिछले दो दशकों में काफी विकास किया है किन्तु शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी पिछड़े हुये हैं, क्योंकि शिक्षा से ही समाज में फैले कुरीतियों और रूढि़वादी विचारों को दूर किया जा सकता है इसलिए आने वाले नई पीढ़ी को उच्च शिक्षा औऱ तकनीकी शिक्षा की ओर ध्यान देने की जरूरत है और इसके साथ ही अपने बच्चों को गुणवान के साथ-साथ संस्कारवान बनाने की जरूरत है। 

मण्डलेश्वर रामलाल सिन्हा ने अपने साल भर समाज में किये कार्यों का विवरण बताया और संगठित होकर समाज को मजबूत करने का आह्वान किया। समाज के प्रमुख रामगुलाम सिन्हा ने भी अपने विचार व्यक्त किया। 

इस अवसर पर समाज के प्रमुख डोमार सिन्हा, महेश सिन्हा, अवधराम सिन्हा, शिवकुमार सिन्हा, नर्मदा सिन्हा, महिला मंच से बेदबाई सिन्हा, तोराबाई सिन्हा, बिसरीबाई सिन्हा सहित बड़ी संख्या में सामाजिक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे सम्मेलन में साहू समाज के प्रतिनिधि तिजम साहू ग्रामीण अध्यक्ष, लोकनाथ साहू, सदाराम साहू , लालाराम साहू ने समाज की प्रगति के लिये आशीर्वाद दिये ।

 


Date : 19-Feb-2020

130 बोरा अवैध धान खरीदा, सडक़ परसुली के लेखापाल, समिति प्रबंधक सहित तीन परएफआईआर 
छत्तीसगढ़ संवाददाता 
 गरियाबंद, 19 फरवरी। 
गरियाबंद विकासखंड के ग्राम सडक़परसुली में अवैध धान विक्रय के मामले में संबंधितों के विरूद्ध गरियाबंद के नायब तहसीलदार गरियाबंद, कुसुम प्रधान ने एफआईआर दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि उनके एवं खाद्य निरीक्षक गरियाबंद रितु मौर्य को अनुविभागीय अधिकारी (रा.) गरियाबंद द्वारा अनावेदकों के विरूद्ध प्रथम सूचना दर्ज कराने हेतु आदेशित किया गया है। 

जानकारी के अनुसार 13 फरवरी को जिलापंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी विनय लंगेह द्वारा धान उपार्जन केन्द्र सडक़ परसूली का औचक निरीक्षण किया गया। मौके पर नायब तहसीलदार कुसुम प्रधान भी मौजूद थी। जांच के दौरान भूमि स्वामी सरस्वती सिन्हा के पुत्र गौरव सिन्हा निवासी सडक़ परसुली, कमल साहू निवासी ग्राम हरदी. कोसलेश सिन्हा फड़ प्रभारी, भागवत राम साहू कम्प्यूटर आपरेटर, भुवन लाल सिन्हा प्रभारी समिति प्रबंधक सडक़ परसुली का कथन लिया गया। 

सरस्वती सिन्हा द्वारा धारित भूमि रकबा 1.71 हेक्टेयर का स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण पंचनामा के आधार पर उक्त भूमि में खरीफ फसल धान का पैदावार किया जाना नहीं पाया गया। जिसकी पुष्टि में 16 फरवरी को हुए पंचनामा के आधार पर किया गया।  विपणन वर्ष 2019-20 हेतु पंजीयन के आधार पर धान विक्रय हेतु 11 फरवरी को गौरव सिन्हा द्वारा समिति प्रबंधक से टोकन प्राप्त कर धान विक्रय हेतु 13 फरवरी को धान उपार्जन केन्द्र सडक़ परसुली में 130 बोरा (52 क्विंटल) धान लाया गया था। भूमिस्वामी के द्वारा लाया गया धान स्वयं का नहीं होने के संदेह के आधार विक्रय तौल पत्रक नहीं दिये जाने के निर्देश नायब तहसीलदार गरियाबंद, कुसुम प्रधान ने समिति प्रबंधक को दिये गये। साथ ही जांच हेतु इस प्रकरण को लिए जाने पर जांच की कार्रवाई में पाया गया कि उक्त भूमि रकबा 1.7120 हेक्टेयर पर खरीफ फसल धान का फसल नहीं लिया जाना पाया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में इनका पंजीयन क्रमांक टीएफ 4401930101062 है।

 इस प्रकार यह स्पष्ट है कि सरस्वती सिन्हा निवासी सडक़ परसुली में दर्ज भूमि रकबा 1.71हे0 भूमि पर खरीफ फसल धान का फसल नहीं लिया गया और उक्त रकबा का खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में पंजीयन कराकर उक्त पंजीयन के आधार पर 130 बोरा, 52 क्विंटल धान अवैध रूप से विक्रय करते हुए गौरव सिन्हा नवासी सडक़ परसुली वर्तमान में लेखापाल के पद पर जिला आबकारी विभाग गरियाबंद में कार्यरत है, उनके सहयोगी कमल साहू ग्राम हरदी तथा समिति प्रबंधक भुवन लाल सिन्हा ने शासन द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य में धान क्रय किये जाने के प्रावधानों का छलपूर्वक लाभ लेने की नीयत से धान क्रय कर बेच रहा था। जिससे शासन को आर्थिक क्षति इनके द्वारा पहुंचाया गया। उक्त 130 बोरा (52 क्विंटल) धान को धान उपार्जन केन्द्र सडक़ परसुली में जमा कराया गया है। जिसका लिखित प्रतिवेदन प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज किये जाने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

 

 


Date : 18-Feb-2020

राजिम माघी पुन्नी मेला, प्रस्तुति ने मन मोहा

नवापारा-राजिम। राजिम माघी पुन्नी मेला में मुख्यमंच पर सोमवार को आकाशवाणी और दूरदर्शन पर गाने वाले छत्तीसगढ़ी गायक सुनील तिवारी ने चल जाबो गा राजिम लोचन के गांव के माध्यम से राजीव लोचन का वंदना किया। इसके तोला गोहारत हव वो दाई वो...... गीतो की श्रृखला मे अगली प्रस्तुति भोला रिसागे ओ दाई भोला ला....मंदिर देवाला पोताय हे.... ‘‘छत्तीसगढ़ के करो बखान......जय गंगान’’ इस गीत ने छत्तीसगढ़ में गाय जाने वाले गीतों में से है। उन्होंने गीतों के माध्यम से मेला में उपस्थित दर्शनार्थियों को बांधे रखा।

इन कार्यक्रमों के पूर्व गजेन्द्र साहू ने शानदार डंडा नृत्य की प्रस्तुति दी। इस नृत्य को देख दर्शक काफी रोमांचित हुए। इसके बाद ओमकार द्वारा आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी वेशभूषा में आए कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक धनेन्द्र साहू, गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े सह पत्नि सहित उपस्थित थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी मोहित मोंगरे, पुरूषोत्तम चन्द्राकर आदि थे। कार्यक्रम का संचालन रूपा साहू भिलाई, लता बेला मोंगरे ने किया।  


Date : 18-Feb-2020

राजकीय पशु मादा वन भैंसा की मौत

छत्तीसगढ़ संवाददाता

मैनपुर, 18 फरवरी। दो दिनों से बीमार चल रही मादा वन भैंसा की मौत देर रात को हो गई। आशा नामक मादा वन भैंसा की मौत से वन विभाग चिंतिंत है। मिली जानकारी के अनुसार राजकीय पशु मादा वन भैंसा आशा की मौत उदंती अभ्यारण्य  के संरक्षण संवर्धन केंद्र में हुई। बता दें कि आशा ने 7 नर वन भैंसों को जन्म दिया है। वहीं वन विभाग ने बताया कि एक अन्य वन भैंसा प्रिंस भी आंखों की तकलीफ से बीमार चल रहा है, जिसका इलाज जारी है।

 


Date : 18-Feb-2020

महानदी आरती में नमामि गंगे महानदी ब्रोशर का विमोचन योगीराज स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद जी महराज, कलेक्टर श्याम धावड़े द्वारा किया गया

राजिम, 18 फरवरी। सोमवार को महानदी आरती में नमामि गंगे महानदी ब्रोशर का विमोचन योगीराज स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद जी महराज, महंत जालेश्वर महाराज, साध्वी प्रज्ञा भारती, पूर्व कृषिमंत्री चंद्रशेखर साहू, गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े द्वारा किया गया। ब्रोशर में महानदी के महत्ता, इसकी सहायक नदी उत्तर शिवनाथ, हंसदेव, बोरई, मांड, केलो, ईव दक्षिण में पैरी, सोढ़ूर, जोक, सुरंगी, तेल, सिलयारी, दूध, लात, नदियों का संगम राजिम में नहानदी पैरी सोढ़ूर, शिवरीनारायण में महानदी, शिवनाथ, जोंक, चंद्रपुर में महनदी, मांड, लात एवं सतयुग में महानदी, नीलोत्पला, द्वापर में चित्रोत्पला तथा अन्य नाम के अलावा महानदी के सम्बंध में भीष्म पर्व में वर्णन सम्बंधित विभिन्न लेख से जानकारी दी गई है। 

इसके प्रस्तोता पूर्व कृषिमंत्री चंद्रशेखर साहू, सांदीपनि आश्रम के प्रधान आचार्य डॉ. रमाकांत महाराज नवागांव है। विमोचन अवसर पर अशोक राजपूत, टास्कफोर्स सदस्य लीलाराम साहू, विक्रम मेघवानी, साधना सौरज, छाया राही, तनु मिश्रा, पूर्णिमा चंद्राकर, संतोषी कंसारी, मुकुंद मेश्राम आदि उपस्थित थे। 


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