दंतेवाड़ा, 19 फरवरी। बस्तर संभाग का दंतेवाड़ा जिला कुदरत की नियामतों से नवाजा गया है। जिले में ऐतिहासिक नगरी बारसूर अपने प्राचीन मंदिरों, भव्य तालाबों और अद्भुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।
जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन स्थलों को विकसित करने के हर संभव प्रयास किया जा रहे हैं। जिससे जिले को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित किया जा सके।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने विभिन्न पर्यटन स्थलों का गुरुवार को जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्राम कुम्हाररास डेम, फरसपाल स्थित ढोलकल क्षेत्र, बारसूर के मुचनार परिसर, टूरिस्ट कॉटेज एवं जिप लाइन सहित अन्य प्रमुख स्थलों का जायजा लेकर निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने बताया कि डेम के आसपास एक समग्र पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इस योजना के अंतर्गत होमस्टे सुविधा, बोटिंग, आकर्षक कैंटीन, स्थानीय बांस एवं माटीकला आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी, सेल्फी प्वाइंट, नेचर ट्रेल तथा बच्चों के लिए मनोरंजन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हस्तशिल्प का भी अनुभव प्राप्त होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आराध्य देवी मां दन्तेष्वरी के दर्षन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए दूरगामी सोच के रूप में जिले के अन्य पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं को विकसित करना हमारा लक्ष्य रहेगा ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ जिले की अनूठी कला संस्कृति के अलावा साहसिक पर्यटन से भी श्रद्धालु रूबरू होगें। इस क्रम में स्थानीय स्तर पर युवाओं एवं महिला समूह को पर्यटन संबंधित प्रषिक्षण एवं संचालन की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। इसके साथ ही कलेक्टर ने फरसपाल स्थित ढोलकल पहाड़ी क्षेत्र एवं फरसपाल डेम में निर्माणाधीन पर्यटन निर्माण कार्यों को भी देखा। यहां उन्होंने ने विशेष रूप से साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था पर जोर दिया।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके। ग्रामीणों द्वारा कुम्हाररास क्षेत्र में क्षतिग्रस्त छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की मांग पर कलेक्टर ने जनपद सीईओ को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही बेहतर लाइटिंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी बल दिया गया। इसके अलावा कलेक्टर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुचनार घाट पहुंचकर नये पर्यटन सुविधाओं की संभावनाओं के संबंध में चर्चा किया।
बारसूर की जिप लाइन का निरीक्षण
कलेक्टर ने इसके साथ ही बारसूर के ऐतिहासिक जिप लाइन एवं पर्यटक कॉटेज का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिये।
इस पहल से न केवल जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। होमस्टे, हस्तशिल्प बिक्री, स्थानीय व्यंजन, गाइड सेवा एवं बोटिंग संचालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस दौरान डीएफओ रामकृष्णा रंगनाथ वाय, सीईओ जयंत नाहटा, वन विभाग, पर्यटन विभाग, सीईओ जनपद पंचायत तथा स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।