ठगों ने भिलाई, दुर्ग, रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को बनाया निशाना
- संतोष मिश्रा
भिलाई नगर, 28 मार्च (छत्तीसगढ़' संवाददाता) । अगर आपके फेसबुक मैसेंजर पर राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा या किसी अन्य बड़े पुलिस अधिकारी की फोटो वाली आईडी से मैसेज आए कि उनके किसी 'सीआरपीएफ मित्र' का तबादला हो गया है और वह अपना कीमती घरेलू सामान सस्ते में बेचना चाहते हैं, तो रुक जाइए...! यह मदद का संदेश नहीं, बल्कि आपकी गाढ़ी कमाई लूटने का एक बिछाया हुआ जाल है।
कैसे बुना जाता है ठगी का जाल?
साइबर ठगों ने एसपी अंकिता शर्मा और दुर्ग एएसपी सुखनंदन राठौर जैसे अधिकारियों की फर्जी फेसबुक आईडी बनाई है।
ठगी का तरीका बेहद शातिर है-
विश्वास जीतना: ठग पुलिस अधिकारी की डीपी का उपयोग कर लोगों को मैसेज भेजते हैं। इसमें लिखा होता है कि उनका एक दोस्त 'संतोष कुमार' (सीआरपीएफ ऑफिसर) ट्रांसफर होने के कारण अपना नया सामान (एलईडी टीवी, एसी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, सोफा सेट आदि) मात्र 95 हजार से 1 लाख के बीच बेचना चाहता है।
फर्जी दस्तावेजों का खेल: व्हाट्सएप पर संतोष कुमार नामक व्यक्ति सीआरपीएफ की वर्दी में अपनी फोटो और सामान की तस्वीरें भेजता है। वह दावा करता है कि सामान केवल 3 महीने पुराना है।
लुभावना ऑफर: ठग झांसा देते हैं कि सीआरपीएफ की गाड़ी से सामान आपके घर तक 'फ्री डिलीवरी' किया जाएगा। भरोसा दिलाने के लिए ट्रक में सामान लोड होने की फर्जी तस्वीरें भी भेजी जाती हैं।
टैक्स और गेट पास के नाम पर वसूली: सौदा तय होते ही ठग असली खेल शुरू करते हैं। वे कहते हैं कि "कंसाइनमेंट फीस" या "गेट पास" के नाम पर 40 हजार 500 ऑनलाइन जमा करने होंगे, जिसे बाद में कुल रकम में काट लिया जाएगा। एक बार पैसे ट्रांसफर होने के बाद ठग गायब हो जाते हैं।
जब अधिकारी ही बन जाए 'गारंटर'
इस फ्रॉड की सबसे खतरनाक बात यह है कि जब पीड़ित को संदेह होता है, तो एसपी की फर्जी आईडी से मैसेज आता है कि "संतोष मेरा भरोसेमंद दोस्त है, आप फिक्र न करें।" एक आईपीएस अधिकारी के नाम पर भरोसा कर लोग आसानी से अपनी जेब ढीली कर देते हैं।
इन संकेतों से पहचानें ठगों को-
भाषा की गलतियां: मैसेज में 'Second Hand' को 'Scand Hand' या 'Urgent' को 'Arjent' लिखा जाना।
सस्ता सामान: ₹3-4 लाख का सामान अगर कोई ₹90,000 में दे रहा है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है।
सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट का दबाव: डिलीवरी से पहले किसी भी तरह की फीस (गेट पास, आर्मी टैक्स आदि) की मांग करना।
वर्दी का प्रदर्शन: असली सैन्य या पुलिस अधिकारी कभी भी सोशल मीडिया पर व्यापार करने के लिए अपनी वर्दी का प्रदर्शन नहीं करते।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि एआई और सोशल मीडिया के दौर में अपराधी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। यदि आपको ऐसा कोई मैसेज प्राप्त होता है, तो तुरंत उस प्रोफाइल को ब्लॉक करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
याद रखें: कोई भी पुलिस अधिकारी या सेना का जवान इस तरह फेसबुक पर सामान नहीं बेचता। आपकी जागरूकता ही साइबर ठगों का सबसे बड़ा इलाज है।
इस संबंध में 'छत्तीसगढ़Ó ने राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा से मोबाइल पर बात करने की कोशिश की, पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
वहीं दुर्ग एएसपी सुखनंदन राठौर ने इस मामले में बताया कि अफसरों की डीपी लगा कर सायबर ठगी के हजारों मामले हुए हैं। शिकायतें मिलती हैं तो सायबर टीम द्वारा तफ्तीश की जाती है साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है कि सायबर ठगों से सावधान रहते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आए मैसेज या लुभावने ऑफर या मदद के लिए ऑनलाइन रूपयों का लेन-देन कतई न करें। परीचित व्यक्ति की डीपी देख कर उनकी बातों में आने से बेहतर है कि उनसे प्रत्यक्ष बात कर लें।