‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 30 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के जंगल अब केवल शेर, तेंदुए या हिरणों की वजह से चर्चा में नहीं हैं, बल्कि अब पंखों वाली दुनिया भी इन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बलौदाबाजार जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार बर्ड सर्वे 2026 आयोजित होने जा रहा है, जो 16 से 18 जनवरी 2026 तक चलेगा।
बर्ड सर्वे के लिए देशभर से मिले 196 आवेदन
यह आयोजन केवल एक सर्वे नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में पक्षी संरक्षण, नागरिक विज्ञान और इको-टूरिज्म के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इस सर्वे को लेकर देशभर में जिस तरह का उत्साह देखने को मिला है, उसने वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों दोनों को चौंका दिया है।
बलौदाबाजार डीएफओ गणवीर धम्मशील ने बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 196 आवेदन मिले थे, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद 80 प्रतिभागियों को अंतिम रूप से सर्वे के लिए चुना गया है।
पहली बार बर्ड सर्वे, पहले ही राष्ट्रीय पहचान
अब तक बारनवापारा अभयारण्य में बटरफ्लाई मीट जैसे आयोजन लगातार होते रहे हैं, जिनके जरिए तितलियों की प्रजातियों पर अध्ययन किया जाता रहा है। लेकिन पक्षियों पर केंद्रित यह पहला औपचारिक और राष्ट्रीय स्तर का सर्वे है, जो बारनवापारा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह तथ्य अपने आप में महत्वपूर्ण है कि देशभर से आए इतने ज्यादा आवेदन यह संकेत देते हैं कि बारनवापारा अब केवल एक अभयारण्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का बर्डिंग हॉटस्पॉट (ऐसे स्थान जहां पक्षियां की कई प्रजातियां मिलती है) बनता जा रहा है।
12 राज्यों की भागीदारी, छत्तीसगढ़ सबसे आगे
चयनित 80 प्रतिभागियों में 36 प्रतिभागी छत्तीसगढ़ से हैं, जो यह दर्शाता है कि राज्य के भीतर भी बर्ड वॉचिंग और प्रकृति अध्ययन के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है, वहीं बाकी प्रतिभागी देश के 12 अन्य राज्यों से आ रहे हैं। विविध भौगोलिक और पारिस्थितिक पृष्ठभूमि से आए ये प्रतिभागी सर्वे को वैज्ञानिक दृष्टि से और भी समृद्ध बनाएंगे।
महाराष्ट्र-14, मध्यप्रदेश- 8, तेलंगाना- 7, कर्नाटक- 5, बिहार- 3, गुजरात-3, ओडिशा- 2, उत्तर प्रदेश - 2, पश्चिम बंगाल- 2, राजस्थान - 1, दिल्ली-1, आंध्र प्रदेश- 1, केरल - 1
वनमण्डलाधिकारी का संदेश
वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार गणवीर धम्मसील ने इस आयोजन को अभयारण्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा -बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है. यहां मिश्रित एवं साल वन, घासभूमियां और जल स्रोत मिलकर एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं. इस बर्ड सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य की प्रबंधन योजनाओं को बेहतर बनाने में सहायक होगा. खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण में, जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है. यह आयोजन संरक्षण और इको-पर्यटन, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बारनवापारा: पक्षियों का सुरक्षित आशियाना
बहुत कम लोग जानते हैं कि बारनवापारा अभयारण्य केवल बड़े वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास है. यहां का पक्षी विहार, घासभूमियां, जलाशय, साल वन और मिश्रित वन संरचना इसे पक्षी अध्ययन के लिए आदर्श बनाते हैं. यहां स्थानीय और प्रवासी दोनों तरह के पक्षी पाए जाते हैं. जलाशयों के आसपास जलपक्षी, खुले मैदानों में घासभूमि से जुड़े पक्षी और घने वनों में रहने वाली दुर्लभ प्रजातियां बारनवापारा को एक संपूर्ण बर्डिंग लैंडस्केप बनाती हैं.
सर्वे का उद्देश्य: गिनती नहीं, भविष्य की योजना
बर्ड सर्वे 2026 का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं है कि बारनवापारा में कितनी पक्षी प्रजातियां हैं, बल्कि इसका असली मकसद है-पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, स्थानीय स्तर पर एकत्र किए गए डेटा को वैश्विक मंच से जोडऩा, घटती या दुर्लभ प्रजातियों की पहचान, संरक्षण रणनीतियों के लिए ठोस आधार तैयार करना, स्थानीय समुदायों और युवाओं को संरक्षण से जोडऩा यह सर्वे नागरिक विज्ञान की भावना पर आधारित है, जहां विशेषज्ञ और सामान्य प्रकृति प्रेमी मिलकर संरक्षण की दिशा में काम करते हैं.
स्थानीय डेटा, वैश्विक मंच पर
इस सर्वे में एकत्र किया गया प्रत्येक डेटा द्गक्चद्बह्म्स्र जैसे वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि बारनवापारा की पक्षी विविधता को अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता, संरक्षण एजेंसियां और नीति निर्माता भी देख और समझ सकेंगे. यह डेटा भविष्य में वन प्रबंधन योजनाओं, जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों, शोध परियोजनाओं, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा.