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Date : 17-Jan-2020

मुक्तांगन भ्रमण कर युवाओं ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को साझा किया, भ्रमण के माध्यम से गुजरात के युवाओं को छत्तीसगढ़ की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर प्राप्त हुआ

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 17 जनवरी। नेहरू युवा केंद्र रायपुर द्वारा 15 दिवसीय युवा आदान प्रदान कार्यक्रम के तहत इन दिनों छग एवं गुजरात की संस्कृति का आदान प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की संस्कृति साझा की जा रही है।

कार्यक्रम की 11 वीं कड़ी में विगत दिवस प्रतिभागियों को नवा रायपुर स्थित मुक्तांगन का भ्रमण कराया गया। प्रतिभागी मुक्तांगन स्थित आदिवासियों के घर, आदिवासी कलाकृति, छग परम्परा के प्रतीक, मातागुड़ी सहित विविध मॉडल को देख प्रभावित हुए। भ्रमण का उद्देश्य गुजरात के युवाओं को छग की पौराणिक संस्कृति, रहन सहन एवं आदिवासी परम्परा को मॉडल के माध्यम से समझना था। इस भ्रमण के माध्यम से गुजरात के युवाओं को छत्तीसगढ़ की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस भ्रमण में छग के 100 से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए इन्होंने  मुक्तांगन में वनभोज भी किया। शिविर में शामिल गुजरात के शेख अलिफजान ने बताया कि दाहोद एवं बस्तर की कलाकृति में बहुत समानता है। छग की बांस कला एवं मेटल आर्ट की जितनी तारीफ़ की जाए कम है। मुक्तांगन में बनाई गई कलाकृति छग की सांस्कृतिक सम्पन्नता को दर्शाता है।

छग के बिलासपुर से प्रतिभागी तपेश शर्मा ने अत्यंत हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि वे इस शिविर के माध्यम से छग को एक ही जगह में देखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि इस शिविर के माध्यम से छग के साथ साथ गुजरात की संस्कृति को भी जानने का अवसर मिला। वे गुजराती भाषा एवं खान पान से भी परिचित हुए।

गुजरात की तेजश्वीनी रोजिया ने बताया कि वे छग के बारे में अक्सर पढ़ा या सुना करती थी कि यहां विविधताओं से भरी संस्कृति है। लेकिन उन्होंने जितना सुना था उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत है। छग के लोग बहुत भोले एवं सहज स्वभाव के होते हैं। इनमें प्रतिस्पर्धा की भावना बेहद कम होती है वे सभी का सहयोग करने को तत्पर होने के साथ ही मिलनसार होते हैं।

इस भ्रमण को सफल बनाने में सांस्कृतिक विभाग छग शासन, जिला युवा समन्वयक अर्पित तिवारी, लुकेश बघेल, डॉ आशीष चंद्र शर्मा, आदित्य भारद्वाज, प्रीतम निर्मलकर, दीक्षा पटेल, रामेश्वर, लक्ष्मी, नरेंद्र, ईश्वर, रविशंकर, अनुपमा, शारदा, डालिमा सहित नेहरू युवा केन्द्र संगठन रायपुर का विशेष योगदान रहा।

 


Date : 17-Jan-2020

सामाजिक संस्था क्रिएटिव आईस प्रमोशन्स द्वारा वृद्धाआश्रम में मनाया गया जीना इसी का नाम है, बुजुर्गों को शॉल, कम्बल, श्रीफल, अनाज, दाले, तिल के लड्डू, फल एवं समस्त जरूरत की सामग्री प्रदान की गई

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 17 जनवरी। सामाजिक संस्था क्रिएटिव आईस प्रमोशन्स द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर श्याम नगर स्थित ‘आश्रय’ वृद्धाश्रम में ‘जीना इसी का नाम है’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजकों एवं अतिथियों द्वारा बुजुर्गों को शॉल, कम्बल, श्रीफल, अनाज, दाले, तिल के लड्डू, फल एवं समस्त जरूरत की सामग्री प्रदान की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि बृजमोहन अग्रवाल, डॉ. एस. के. शर्मा, महेश दरयानी एवं रिचा ठाकुर द्वारा समस्त दानदाताओं को’’ दानवीर 2020’’ के सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

कार्यक्रम की शुरूआत थांवर गजवानी ने ‘ये तो सच है कि भगवान है’ गाकर तालियां बटोरी। तुलिका शर्मा ने ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘ओ पालन हारे’ अनिल कृष्णानी ने ‘जीना इसी का नाम है’, ‘जीना यहां, मरना यहां’ बजरंग बंसल ने चलो बुलावा आया है, संदीप शर्मा ने ‘ओ माझी रे अपना किनारा’ गीत की सुमधुर प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. एस.के.शर्मा, आयोजक महेश दरयानी, बृजमोहन अग्रवाल एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. अजय आयोजक सतीश कटियारा एवं उर्मिला देवी अमर बसंल, रविन्द्र सिंह, राजकुमार राठी, मनोज पंजवानी, जितेन्द्र कृष्णानी, अमर गिदवानी, धमेन्द्र दुर्घा, हरिन्द्र अरोरा (रिक्की) प्रहलाद शादीजा, राजा बजाज, दुर्गा दुबे, राधा राजपाल, रिचा ठाकुर, सुनीता नागरानी की सहभागिता रही।  इस कार्यक्रम में महिला मंडल अशोका हाईट्स मोवा एवं सत्यमकाम वेलफेयर सोसायटी का विशेष सहयोग रहा।