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18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी 21 तारीख को प्रदेश में राजीव गांधी न्याय योजना की शुरूआत कर सकते  हैं। बताया गया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राहुल गांधी से चर्चा की है और कहा जा रहा है कि श्री गांधी वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए योजना की शुरूआत करेंगे। इसमें किसानों को धान की अंतर राशि का प्रथम किश्त दिया जाएगा।

सरकार ने किसानों को इस योजना के मद में प्रति एकड़ 10 हजार रूपए देने की घोषणा की है। पिछली कैबिनेट में इस योजना को मंजूरी दी गई। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गांधी से भी इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने विस्तार से चर्चा की है और उनसे योजना के शुभारंभ का आग्रह किया। श्री गांधी ने इसके लिए सहमति दे दी है। बताया गया कि श्री गांधी वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए योजना की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर सरकार के मंत्री और विधायक भी मौजूद रहेंगे।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अम्फान का असर आज शाम से प्रदेश के बस्तर, रायपुर समेत आंध्र, ओडिशा तट से लगे अलग-अलग इलाकों में देखा जा रहा है। इन जगहों गरज-चमक के साथ हल्की बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि तूफान का असर प्रदेश में दो दिन रहेगा। इस  बीच तेज हवा के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 

मौसम विभाग के मुताबिक यह तूफान मध्य बंगाल की खाड़ी के करीब दक्षिणी भाग में है और धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम की ओर आगे बढ़ रहा है। आने वाले 8-10 घंटे में उसके और प्रबल होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह तूफान बांग्लादेश और बंगाल के बीच दीघा व हटिया के पास 20 मई की शाम तक टकरा सकता है। फिलहाल तूफान का प्रभाव यहां बस्तर, रायपुर, बिलासपुर व सरगुजा संभाग में कहीं-कहीं देखा जा रहा है। इन जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है।  (बाकी पेजï 5 पर)

मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा का कहना है कि चक्रवाती तूफान का ज्यादा असर बंगाल और ओडिशा में ज्यादा रहेगा। प्रदेश के बस्तर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार, रायपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ में ज्यादा रहेगा। इस दौरान तेज हवा और गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली भी गिर सकती है। उनका कहना है कि तूफान का प्रभाव आजकल ज्यादा रहेगा। परसों यह कमजोर पड़ जाएगा। दूसरी तरफ बेमौसम बदली-बारिश से उमस भरी गर्मी बनी रहेगी।


18-May-2020

 मजदूरों ने कहा : कमाने-खाने अब नहीं जाएंगे, दो वक्त की रोटी खाते गांव में ही रहेंगे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। बिलासपुर के मस्तूरी क्षेत्र से कमाने-खाने गए 40 मजदूर अपने 13-14 छोटे बच्चों के साथ दो महीने तक तेलंगाना में फंसे रहे। ये मजदूर आज एक मेटाडोर में सवार होकर भूखे-प्यासे रायपुर पहुंचे। इन मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद वहां ईंटभट्ठे में उन्हें मजदूरी नहीं मिली। ईंटभट्ठा मालिक से घर वापसी का इंतजाम कराने कहा, तो उसने सभी से दो-दो हजार रुपये मांगा। ऐसे में उन लोगों ने अपने पास रखे पंखे, मोबाइल व अन्य जरूरी सामान वहीं औने-पौने दाम पर बेचकर  उसके पास दो-दो हजार रुपये जमा किया, तब कहीं जाकर अब उनकी घर वापसी हो पा रही है।

मस्तूरी क्षेत्र के रहने वाले गोपाल राय, हनुमान प्रसाद कुर्रे व अन्य मजदूरों ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके पास न खेती है और न आय का कोई जरिया। ऐसे में यहां के 40 मजदूर अपनी बीवी-बच्चों के साथ कुछ समय पहले कमाने-खाने के लिए तेलंगाना चले गए। वहां सभी लोग एक जगह एक ईंटभट्ठे में काम कर रहे थे। उनका काम ठीक चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन के बाद सब कुछ गड़बड़ा गया। खुद उनका मालिक बेईमानी पर उतर आया। उनकी मुसीबत देखते हुए भी उसने उनकी मेहनत की कमाई को नहीं दिया। उन सब का वहां एक-एक दिन भारी पड़ रहा था। छोटे बच्चों के लिए दूध की समस्या हो रही थी।

ये मजदूर बताते हैं कि लगातार लॉकडाउन तारीख आगे बढ़ते देखकर सभी मजदूरों ने मिलकर अपने ईंटभट्ठे मालिक के पास जाकर गिड़गिड़ाया। अपनी समस्या बताते हुए उनसे घर वापसी इंतजाम कराने कहा। ऐसे में उस मालिक ने उनकी बाकी मजदूरी का भुगतान करने के बजाय उन सभी को दो-दो हजार रुपये मांगा। बच्चों को छोडक़र 40 मजदूरों ने उसके पास दो-दो हजार रुपये के हिसाब से 80 हजार रुपये जमा किया। इसके बाद उसने एक मेटाडोर किराया किया, जिसमें सवार होकर सभी मजदूर काफी निराश और उदास चेहरों के साथ वापस अपने गांव-घर जा रहे हैं।

अपनी पीड़ा सुनाते हुए ये मजदूर कहते हैं कि उनके पास अब सिर्फ कपड़े रह गए हैं। बाकी सभी सामान वहीं औने-पौने दाम पर बिक गए। यहां तक कि 8-10 हजार रुपये के मोबाइल को उन्हें एक से दो हजार रुपये में बेचना पड़ा। गर्मी से थोड़ी राहत के लिए अपने पास रखे पंखे बिक गए। थोड़े बहुत बर्तन थे, उसे भी वहीं बेच दिए। मतलब खाली हाथ गए थे और अब खाली हाथ लौट रहे हैं। वे कहते हैं कि अब गांव-घर में कम मजदूरी में कोई भी काम कर लेंगे, लेकिन कमाने-खाने के लिए बाहर नहीं जाएंगे। वे यह भी कह रहे हैं कि उनकी जिंदगी में वैसी दिक्कत अब और कभी न आए। दो वक्त की रोटी खाते हुए उनका दिन गांव में बीत जाए।


18-May-2020

रायपुर, 18 मई। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने संत देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने कहा कि वे एक महान संत थे। उनका पूरा जीवन दीन-दुखियों की सेवा में समर्पित रहा। देवप्रभाकर शास्त्री ने समाज को मानवता की राह में चलने को प्रेरित किया। राज्यपाल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

 


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 मई।
छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों को सहजता से उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज उपलब्ध हो सके, बीज उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ के किसान आत्मनिर्भर बनें। 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस मंशा को पूरा करने के उद्देश्य में कृषि मंत्री रविन्द्र चैबे के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा राज्य में इस साल बीज निगम एवं अन्य बीज उत्पादक सहकारी समितियों की मदद से 44 हजार हेक्टेयर में बीज उत्पादन कार्यक्रम एवं फसल प्रदर्शन लिए जाने की कार्य योजना तैयार करने साथ ही उसको मूर्तरूप देने की तैयारी में जुट गया है। राज्य के लगभग 100 गांवों, जिसमें से अधिकांश गांव सुराजी योजना के गौठान वाले गांव है, वहां कृषकों एवं कृषि उत्पादक समूहों के सहयोग से बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम वृहद पैमाने पर लिए जाएंगे। बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य खरीफ सीजन में 44 हजार हेक्टेयर में बीज उत्पादन कार्यक्रम एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम लिए जाने का लक्ष्य है।

जानकारी के अनुसार राज्य में हर साल लगभग साढ़े 9 लाख क्विंटल उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में शासकीय सेक्टर के 45 बीज प्रक्रिया केन्द्र तथा निजी क्षेत्र के लगभग 30 प्रक्रिया केन्द्रों के माध्यम से ग्रेडिंग के पश्चात विभिन्न फसलों के लगभग 7 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध हो पाते हैं। किसानों की आवश्यकता को देखते हुए लगभग 2.50 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज की आपूर्ति अन्य राज्यों से करनी पड़ती है। 

बीज उत्पादन कार्यक्रम के रकबे में वृद्धि करके राज्य में उन्नत एवं प्रमाणित बीज की पूर्ति हो सकेगी। उन्नत बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए किसानों को कृषि विभाग द्वारा मार्गदर्शन के साथ-साथ अनुदान दिए जाने का भी प्रावधान है, जिसका लाभ राज्य के किसानों को मिल सकेगा। 

रायपुर जिले में लगभग 50 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज की आवश्यकता होती है। इसको ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग द्वारा 1600 हेक्टेयर में बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन लिए जाने का कार्यक्रम है। बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन के लिए विभाग द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आरंग ब्लाक के छह गौठान ग्रामों को विशेष रूप से चयनित किया गया है, जिसमें ग्राम रींवा, गौरभाट, मोखला, फरफौद, कोसमखुटा और छटेरा शामिल है। 

इन गांव के 393 कृषकों की 651 हेक्टेयर भूमि पर धान, दलहन, तिलहन सहित अन्य फसलों के बीज उत्पादन व फसल प्रदर्शन लिए जाएंगे। 
उप संचालक कृषि श्री आर.एल. खरे ने बताया कि गौठान वाले ग्रामों में 49 हेक्टेयर में महामाया, 30 हेक्टेयर में स्वर्णा, 16 हेक्टेयर रकबे में बीपीटी 5204 तथा 416 हेक्टेयर में स्वर्णा सब-1, 13 हेक्टेयर में एमटीयू 1001, 17 हेक्टेयर में देवभाग तथा 5 हेक्टेयर में जिंक राइस इस प्रकार कुल 547 हेक्टेयर में धान बीज उत्पादन कार्यक्रम लिए जाने का कार्यक्रम है। इन्हीं गौठान वाले ग्रामों में 82 हेक्टेयर में अरहर, 10 हेक्टयर में उड़द, 3 हेक्टेयर में सोयाबीन तथा 9 हेक्टेयर में ढेचा बीज उत्पादन कार्यक्रय लिया जाएगा। उप संचालक कृषि ने बताया कि इसके अलावा रायपुर जिले के शेष विकासखण्डों के अन्य ग्रामों में लगभग एक हजार हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की प्रजाितयों के बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम लिए जाएंगे। जिससे आगामी खरीफ सीजन में रायपुर जिले के लिए बीज की आपूर्ति सहजता से हो सकेगी। इसी तर्ज पर बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम योजना राज्य के सभी जिलों के लिए तैयार की गई है। 


18-May-2020

बालोद, जांजगीर-चांपा नया हॉट स्पॉट, दोनों जगहों से 11-11 मरीज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। देश में सुरक्षित माने जा रहे छत्तीसगढ़ में बीती देर रात तक 25  कोरोना पॉजिटिव सामने आए हैं। इसमें बालोद के नौ, बलौदाबाजार के छह, कवर्धा के दो और राजिम के एक मरीज को एम्स शिफ्ट किया गया है। इसके अलावा एम्स में पहले से दो मरीज भर्ती हैं। जांजगीर-चांपा के छह पॉजिटिव बिलासपुर जिला कोविड अस्पताल में रखे गए हैं। यहां इसी जांजगीर जिले के पांच और मरीज भर्ती हैं। कोरिया, सरगुजा के एक-एक मरीज अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में दाखिल किए गए हैं। इन मरीजों में अधिकांश प्रवासी मजदूर बताए जा रहे हैं।

प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के साथ ही यहां नए कोरोना पॉजिटिव केसेस भी सामने आने लगे हैं। हालांकि ये सभी लोग क्वारंटाइन सेंटरों में हैं और वहां साथ आए और रहने वाले सभी मजदूरों की रैपिड जांच चल रही है। रैपिड जांच के बाद कोरोना जांच में ये मजदूर पॉजिटिव निकले हैं। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल नया हॉट स्पॉट बालोद और जांजगीर-चांपा बन गया है। वहां से अब तक 11-11 पॉजिटिव सामने आ चुके हैं। बलौदाबाजार में बीती रात एक साथ छह मरीज सामने आए। इन जगहों पर जांच जारी है। माना जा रहा है कि जहां-जहां से ये पॉजिटिव सामने आए हैं, वहां और भी कोरोना मरीज मिल सकते हैं।

एम्स अधीक्षक डॉ. करन पिपरे ने बताया कि उनके अस्पताल में फिलहाल 20 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें 18 नए और दो पुराने मरीज हैं। इनमें से कोई भी मरीज वेंटीलेटर पर नहीं है और बाकी मरीजों की तरह ये सब भी जल्द ठीक होकर अपने घर लौट जाएंगे।

राज्य नोडल अफसर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी का कहना है कि प्रवासी मजदूरों के आने के साथ ही यहां नए-नए कोरोना मरीज सामने आने लगे हैं। प्रदेश में अब तक 92 कोरोना मरीज सामने आए हैं। इसमें से 59 स्वस्थ होकर अपने घर चले गए हैं। बाकी 33 मरीजों का एम्स व बिलासपुर, अंबिकापुर सरकारी अस्पतालों में इलाज जारी है। प्रदेश के कुछ और जिला अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों के लिए इंतजाम किया जा रहा है, ताकि दूर-दूर से सामने आने वाले नए कोरोना मरीजों का वहां शुरूआती जांच-इलाज हो सके।

भिलाई शंकाराचार्य मेडिकल कॉलेज में सौ बिस्तर की तैयारी

दूसरी तरफ राज्य सरकार अब भिलाई के शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज में भी कोरोना अस्पताल की चालू करने की तैयारी में है। यहां सौ बिस्तर का कोविड अस्पताल होगा। राज्य नोडल अफसर का कहना है

 

कि प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अलावा निजी मेडिकल कॉलेजों में भी कोरोना इलाज की व्यवस्था चल रही है और यह काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा। क्योंकि दूर-दराज के जिला अस्पतालों में यह व्यवस्था एकाएक मुश्किल है।


18-May-2020

अब तक लक्ष्य का एक तिहाई 5.59 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण
रायपुर, 18 मई।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में राज्य में चालू सीजन के दौरान तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य जोरों पर है। अब तक लक्ष्य का एक तिहाई अर्थात् 5 लाख 59 हजार 553 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। इसमें संग्राहकों को लगभग 224 करोड़ रूपए के पारिश्रमिक का भुगतान होना है। राज्य में चालू वर्ष 2020 में 16 लाख 71 हजार 700 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित है। 

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक वन मंडलवार बीजापुर में 42 हजार 223 मानक बोरा, सुकमा में 39 हजार 316 मानक बोरा, दंतेवाड़ा में 3 हजार 612 मानक बोरा तथा जगदलपुर में 11 हजार 529 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। वन मंडलवार दक्षिण कोण्डागांव में 11 हजार 484 मानक बोरा, केशकाल में 14 हजार 928 मानक बोरा, नारायणपुर में 11 हजार 565 मानक बोरा, पूर्व भानुप्रतापपुर में 60 हजार 752 मानक बोरा, पश्चिम भानुप्रतापपुर में 19 हजार 385 मानक बोरा तथा कांकेर में 24 हजार 686 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया है। 

इसी तरह वन मंडलवार राजनांदगांव में 32 हजार 698 मानक बोरा, खैरागढ़ में 10 हजार 830 मानक बोरा, बालोद में 12 हजार 960 मानक बोरा तथा कवर्धा में 12 हजार 723 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। वन मंडलवार धमतरी में 11 हजार 439 मानक बोरा, गरियाबंद में 51 हजार 203 मानक बोरा, महासमुंद में 42 हजार 863 मानक बोरा, बलौदाबाजार में 9 हजार 435 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया है। वन मंडलवार बिलासपुर में 5 हजार 603 मानक बोरा, मरवाही में छह हजार 108 मानक बोरा, जांजगीर-चांपा में 3 हजार 313 मानक बोरा, रायगढ़ में 19 हजार 409 मानक बोरा, धरमजयगढ़ में 38 हजार 840 मानक बोरा, कोरबा में 19 हजार 12 मानक बोरा तथा कटघोरा में 13 हजार 706 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। इसके अलावा वन मंडलवार जशपुरनगर में 9 हजार 646 मानक बोरा, मनेन्द्रगढ़ में 8 हजार 217 मानक बोरा, कोरिया में 4 हजार 467 मानक बोरा, सरगुजा में 4 हजार 238 मानक बोरा तथा सूरजपुर में 3 हजार 361 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। 


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 17 मई। सूरजपुर में आज एक और कोरोना पॉजिटिव पाया गया। उसे अंबिकापुर सरकारी अस्पताल में भर्ती करने की तैयारी है। एक पॉजिटिव को मिलाकर अब छत्तीसगढ़ में कोरोना मरीजों की संख्या 92 से बढक़र अब 93 हो गयी है। इसमें 34 एक्टिव मरीज हैं, जिनका एम्स के साथ बिलासपुर, अंबिकापुर के सरकारी अस्पतालों में इलाज जारी है। बाकी 59 डिसचार्ज हो चुके हैं। उल्लेखनीय है की इसके पहले भी सूरजपुर में 6 पॉजिटिव सामने आये थे, जिसमे से सभी डिस्चार्ज होकर अपने घर चले गए हैं।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 मई।
प्रदेश कांग्रेस ने कहा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के उस बयान पर हमला बोला है। उनके द्वारा कहा गया कि 5 हजार से अधिक मजदूर जम्मू कश्मीर राज्य से प्रदेश लौट रहे हैं इसके लिए उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को आभार माना है। 

उन्होंने यह नहीं बताया कि इन मजदूरों जैसे कितने लाख मजदूर उनके 15 साल के उनके ही शासन काल के चलते अपनी माटी,अपनी धरती छोडक़र अन्य प्रदेशों में रोजी-रोटी कमाने के लिए गए हुए थे पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल में 40 फीसदी से अधिक की आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने को मजबूर थी यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जारी किया था। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि कोरोना प्रकोप के समय गरीब मजदूरों को मदद एवं आर्थिक सहायता पहुंचाने में नाकाम केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बचाव में में उतर आए हैं। 


18-May-2020
प्रदेश के 62 हजार से अधिक बच्चे हुए कुपोषण मुक्त
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 मई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लॉकडाउन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर रेडी टू ईट की सामग्री और सूखा राशन वितरित करने तथा कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी देकर लोगों को जागरूक करने के काम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के नये मरीज मिल रहे हैं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पुन: घर-घर भेजकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाए और संदिग्ध मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से ऐसे मरीजों की स्वास्थ्य की जांच करायी जाए। 
मुख्यमंत्री ने आज अपने निवास कार्यालय पर आयोजित महिला और बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया, मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, समाज कल्याण विभाग के सचिव आर. प्रसन्ना, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग जनमेजय महोबे और संचालक समाज कल्याण पी. दयानंद उपस्थित थे।
 
बताया गया कि पिछले वर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ में शुरू किए गए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस अभियान के परिणाम स्वरूप प्रदेश के 62 हजार 617 बच्चे कुपोषण से मुक्त हुए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन अवधि के सुरक्षात्मक उपायों के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा 24 लाख 38 हजार हितग्राहियों को रेडी टू ईट और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत 3 लाख 62 हजार से अधिक हितग्राहियों को सूखा राशन घर-घर पहुंचाया जा रहा है और बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोडऩे का काम भी किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं और बच्चों को पोषण आहार पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने के कार्य की सराहना की है। 
 
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 90 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने हितग्राहियों के घरों में जाकर सामग्री वितरण के साथ-साथ लोगों को कोरोना से बचाव के संबंध में जागरूक करने का काम किया है। बैठक में बताया गया कि बस्तर क्षेत्र में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए अण्डा वितरण प्रारंभ किया गया है। जिसे बच्चे पसंद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर ही अण्डा लिए जाएं। इससे मुर्गी पालन से जुड़े स्थानीय लोगों को फायदा होगा। उन्होंने गौठानों में महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। श्री बघेल ने कहा कि इससे बच्चों के लिए ताजे अण्डे मिलेंगे। परिवहन का व्यय कम होगा और महिला समूहों को भी काम मिलेगा। 
 
मुख्यमंत्री ने गौठानों में मनरेगा से मुर्गी पालन के लिए शेड का निर्माण कराने और स्व सहायता समूहों को डीएमएफ तथा सीएसआर मद से सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्व सहायता समूहों को शहद उत्पादन से जोडऩे के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों और महिलाओं को मुर्गी पालन और शहद उत्पादन के लिए सहायता दी जा सकती है। बैठक में जानकारी दी गई कि लॉकडाउन के समय बच्चों को डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से घरों में ही रचनात्मक गतिविधियों से जोडऩे के लिए यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से प्रारंभ किए गए सजग और चकमक अभियान में बच्चे काफी रूचि ले रहे हैं। इन कार्यक्रमों से अब तक 18 लाख बच्चे जुड़े हैं। इस अभियान में बच्चों को स्थानीय बोलियों में बालगीत, कविता, कहानियों के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है।   
 
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस वर्ष प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार साडिय़ां वितरित की जाएंगी। प्रतिवर्ष कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दो-दो साडिय़ां यूनिफार्म के रूप में दी जाती हैं। श्री बघेल ने इस योजना के माध्यम से बुनकरों को रोजगार दिलाने के निर्देश दिए थे। बैठक में बताया गया कि लॉकडाउन के दौरान समाज कल्याण विभाग द्वारा समाज सेवी संगठनों की सहायता से प्रतिदिन लगभग 25 हजार से अधिक व्यक्तियों के लिए गर्म भोजन की व्यवस्था की गई और 27 हजार परिवारों को राशन सामग्री वितरित की गई। इसके साथ ही घुमंतू अर्द्ध विक्षिप्त और मानसिक रूप से अविकसित व्यक्तियों को सहारा देकर उनके भोजन और रहने की व्यवस्था भी विभाग द्वारा की गई। लॉकडाउन के दौरान बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके इसके लिए विभाग द्वारा संचालित विशेष स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करायी जा रही है।
 

18-May-2020

रायपुर। बूढ़ातालाब के भीतर से जलकुंभी एवं गाद निकालने का कार्य निरंतर प्रगति पर है। इसके तहत अब तक लगभग 550 डम्पर मात्रा से अधिक जलकुंभी व गाद बूढ़ातालाब के भीतर से सफाई महाभियान के तहत निकाली जा चुकी है। महापौर ने 25 मई तक बूढ़ातालाब को पूरी तरह से जलकुंभी एवं गाद से मुक्त करवाने निर्देशित किया है।  सफाई महाभियान के तत्काल बाद योजना के तहत बूढ़ातालाब को राजधानी रायपुर के सबसे सुन्दर व विकसित स्थल के रूप में बदलने का कार्य प्रारंभ किया जायेगा।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 मई।
ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी-कार्यकर्ता महामारी के दौर में मुसीबत में फंसे लोगों की लगातार सहायता में जुटे हैं। सीटू, आरडीआईयू, एमपीएमएसआरयू, माकपा व इससे जुड़े संगठन के पदाधिकारी अलग-अलग राज्यों में फंसे लोगों तक पहुंचकर उनकी मदद करते हुए घर वापसी भी करा रहे हैं। 

ट्रेड यूनियन नेता धर्मराज महापात्रा ने बताया कि आज सुबह साथी रतन गोंडाने से खबर मिली कि छत्तीसगढ़ के 70 मजदूर साथी जो पुणे के पास दाहू रोड पर सडक़ निर्माण श्रमिक का काम करते हैं, वे वापस रायपुर व बिलासपुर अपने घरों के लिए निकले है। वे किसी तरह अहमदनगर के केरगांव पहुंचे है, जहां विगत 2 दिन से महाराष्ट्र सरकार के शेल्टर में हैं और परेशान हंै। यह जानकारी मिलते ही हमने पुणे के आल इंडिया इंश्योरंस एम्पलॉइज एसोसिएशन के साथी कामरेड तिवारी से चर्चा की। उन्होंने तत्काल अहमदनगर के साथी मनोज भल्ला से बात की और कुछ समय में उनके सहायता पहुंच गई। उन्हें भोजन, बच्चों को दूध आदि उपलब्ध करा दिए गए। छत्तीसगढ़ सरकार तक भी ये संदेश पहुंचाया गया और अभी संदेश मिला कि राज्य सरकार के विशेष श्रमिक ट्रेन में कल वे लोग वापस छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो जाएंगे।

उन्होंने बताया कि महामारी और तालाबंदी से परेशान मजदूर साथी, प्रवासी मजदूर और गरीब जनता की सहायता में सीटू, आरडीआईयू, एम पी एम् एस आर यू, माकपा के साथी अपनी पूरी शक्ति के साथ जुटे है, आज अहमदनगर के साथियों के जरिए मिली तत्काल मदद ने हमारे संबल को और मजबूत किया। 


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर लॉकडाउन में जम्मू कश्मीर में फंसे हुए छत्तीसगढ़ के श्रमिकों के लिए दो ट्रेनों की अनुमति मिल गई है। ये श्रमिक स्पेशल ट्रेन जम्मू से बिलासपुर-चांपा चलेंगी। पहली ट्रेन 20 या 21 मई को यहां पहुंचने की संभावना है इसी तरह दूसरी ट्रेन 22 या 23 मई को आएगी। जम्मू कश्मीर में फंसे श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 3 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अनुमति प्रदान की थी। इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव आरपी मण्डल ने 12 मई को जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राज्य शासन के निर्णय से अवगत कराते हुए छत्तीसगढ़ के इन श्रमिकों को वापस लाने के लिए ट्रेनों के संचालन के लिए अनुमति मांगी थी जिस पर जम्मू-कश्मीर शासन से अनुमति के पश्चात् दो श्रमिक स्पेशल ट्रेन प्रस्तावित की गई है।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। प्रवासी मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए अब भाजपा ने भी योजना बनाई है। बताया गया कि पार्टी प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर समिति का गठन कर रही है। समिति के सदस्य प्रवासी मजदूरों को मदद पहुंचाएंगे।

मजदूरों को राहत पहुंचाने का मामला हो या किसी अन्य तरह की समस्याएं, कांग्रेस बढ़-चढक़र काम कर रही है। न सिर्फ कांग्रेस बल्कि सीपीएम जैसी छोटी पार्टियां भी अपने स्तर पर मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव पहल कर रही है। इससे मजदूरों को काफी राहत भी मिली है। अब भाजपा भी इस दिशा में सहयोग के लिए आगे आ रही है। पार्टी स्तर पर इसके लिए कार्ययोजना बनाई गई है।

बताया गया कि प्रदेश स्तर पर 11 सदस्यीय समिति का गठन किया जा रहा है। जिला स्तर पर तीन सदस्यीय समिति का गठन हो रहा है। ये सदस्य क्वॉरंटीन सेंटरों में भी जाकर मजदूरों का हाल देखेंगे और उनकी खाने-पीने की व्यवस्था और अन्य की निगरानी करेंगे। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाईकमान के निर्देश पर समिति बनाई जा रही है। साथ ही साथ यह भी कहा जा रहा है कि जो दूसरे राज्यों से यहां आने चाहते हैं उन्हें सूचीबद्ध करें और उनके लिए वाहनों की भी व्यवस्था करें।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। बिलासपुर रोड पर सांकरा पुल के नीचे सात छात्र मिलजुलकर प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे हैं। वे उन्हें चाय-नाश्ता करा आसपास के मजदूरों को आटो से उनके घरों तक छोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ वहां जायसवाल निकी कंपनी के स्टाल में इन मजदूरों को भोजन कराया जा रहा है। इन युवकों का कहना है कि अभी तक वे लोग करीब ढाई हजार मजदूरों की मदद कर चुके हैं और आगे भी उनका यह काम जारी रहेगा।

सांकरा पुल के नीचे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए आगे आए इन छात्रों का कहना है कि शुरूआत में ट्रक, मेटाडोर व अन्य वाहनों से घर लौट रहे मजदूरों की दशा देखकर वे लोग एकजुट होकर आए। और उनकी जैसे भी हो, मदद करने लगे। अब वे सभी इसे एक अभियान के रूप में लेकर काम कर रहे हैं। शुरूआत में इन मजदूरों को पुल के नीचे चाय-नाश्ता, पोहा देते रहे। उनकी मदद को देखकर निकी कंपनी आगे आई और वहां पोहा की जगह भोजन का इंतजाम किया गया।

ये छात्र बताते हैं कि तेलंगाना व अन्य राज्यों से टाटीबंध होकर बिलासपुर रोड से सैकड़ों मजदूर अपने घर लौट रहे हैं। ये मजदूर भूखे-प्यासे और परेशान देखे जा रहे हैं। ऐसे में इन मजदूरों को साकरा पुल के पास पहुंचकर काफी राहत मिल रही है। छात्र, सांकरा व आसपास क्षेत्र के रहने वाले मजदूरों को अपने पास रखे एक आटो से उनके घरों तक भी छोड़ रहे हैं, ताकि उन्हें बच्चों के साथ पैदल घर पहुंचने में कोई दिक्कत न हो।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ आने वाले स्थानीय और छत्तीसगढ़ से होकर अन्य राज्यों में जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की सहूलियत एवं व्यवस्था को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा सीमावर्ती चेकपोस्ट सहित जगह-जगह उनके ठहरने, भोजन एवं स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रमिकों को किसी भी तरह की तकलीफ न हो। छत्तीसगढ़ आने वाले श्रमिकों की उक्त व्यवस्था के साथ ही राज्य के श्रमिकों को उनके गृह जिले तक पहुंचाने के लिए बसों की नि:शुल्क व्यवस्था भी की गई है।

इसी तरह का इंतजाम अन्य राज्यों के प्रवासी श्रमिक जो छत्तीसगढ़ होते हुए अपने गृह राज्य जाने के लिए सफर पर निकले है, उनके लिए भी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भोजन, चाय-नाश्ता, चिकित्सा, परिवहन, चरण पादुका आदि का प्रबंध सुनिश्चित किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव एवं कवर्धा जिले के सीमावर्ती राज्य महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलगांना आदि से छत्तीसगढ़ राज्य सहित झारखंड, बिहार, ओडि़सा, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के श्रमिक प्रतिदिन बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ राज्य में आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ आने वाले श्रमिकों की सुविधा एवं व्यवस्था पर राजनांदगांव एवं कबीरधाम जिले में अब तक लगभग 5 करोड़ 15 लाख रूपए से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। बाघनदी बॉर्डर पर पहुंचने वाले श्रमिकों को जो छत्तीसगढ़ राज्य के है, उनको गृह जिला तथा अन्य राज्यों के श्रमिकों को राज्य की सीमा तक पहुंचाने के लिए 100 बसों का प्रबंध, मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देशानुसार किया गया है। बाघनदी बॉर्डर पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को बसों द्वारा लगातार उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचाया जा रहा है। इस व्यवस्था पर रोजाना लगभग 20 लाख रूपए व्यय हो रहा है।

राजनांदगांव जिले के अंतर्राज्यीय सीमाओं से अब तक लगभग 2 लाख 10 हजार लोग छत्तीसगढ़ राज्य आने के साथ ही यहां से होते हुए अपने गृह राज्य जाने के लिए प्रवेश कर चुके है। 60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों के परिवहन के दौरान भोजन एवं खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध कराई गई है। राजनांदगांव जिले के ही सडक़-चिरचारी एवं रैन-बसेरा राजनांदगांव में अन्य राज्यों के लगभग 1100 प्रवासी श्रमिकों के 14 दिवसीय क्वॉरेंटीन व्यवस्था पर 28 लाख रूपए व्यय किए गए हैं। राजनांदगांव जिले में स्थापित 1443 क्वॉरेंटाईन सेंटर में श्रमिकों के भोजन, आवास आदि की व्यवस्था पर अब तक 4 करोड़ 33 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं। राजनांदगांव जिले के रैन-बसेरा से 24 अप्रैल से लेकर अब तक 12 हजार श्रमिकों को बसों के माध्यम से कवर्धा, मुंगेली, बेमेतरा एवं बालोद जिले में सकुशल पहुंचाया गया है। इसी तरह कवर्धा जिला प्रशासन द्वारा 19 हजार से अधिक श्रमिकों के भोजन एवं परिवहन पर 8 लाख 17 हजार रूपए तथा प्रवासी श्रमिकों को ठहराने के लिए स्थापित 1087 क्वॉरेंटीन सेंटर की व्यवस्था पर लगभग 38 लाख रूपए व्यय किए जा चुके हैं। कवर्धा जिले से राज्य के अन्य जिलों के श्रमिकों के परिवहन व्यवस्था पर 7 लाख 58 हजार रूपए का व्यय हो चुका है।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। तीसरे लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी शास्त्री बाजार चिल्हर बाजार सोमवार को शुरू नहीं हो पाया। कारोबारियों ने शासन की नीति का विरोध करते हुए अपनी मांगों को लेकर आज विधायक विकास उपाध्याय से मुलाकात की।

पिछले 52 दिनों से बंद कारोबार को लेकर आक्रोशित कारोबारियों ने चिल्हर विक्रेता संघ के अध्यक्ष समीर खान पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए नगीना शेख को अध्यक्ष चुन लिया है। नगीना ने शास्त्री बाजार न खोले जाने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।

नगीना शेख ने बताया कि लॉकडाउन में शास्त्री बाजार बंद होने के कारण लगभग 3 सौ कारोबारियों के सामने रोजी रोटी की समस्या आ गई है। पिछले 15 दिनों से कारोबारी बाजार खोलने के लिए कोशिश कर रहे हैं। महापौर से लेकर सांसद सोनी तक वह फरियाद कर चुके हैं। कारोबारियों को उम्मीद थी कि 18 मई सोमवार से बाजार शुरू हो जाएगा। इस उम्मीद में सारे कारोबारी इकट्ठा भी हुए लेकिन बाजार नहीं खुल पाया।

नगीना कहती है विधायक विकास उपाध्याय से हमने आज मुलाकात की है। उन्होंने हमें कलेक्टर से मिलने कहा है। शास्त्री बाजार कारोबारी समीर खान ने बताया कि लॉकडाउन में सब्जी कारोबारियों में जबरदस्त इजाफा हुआ और इस भीड़ में मूल सब्जी विक्रेता पीछे रह गए। समीर खान कहते हैं दो महीने से हम जैसे कारोबारी घर बैंठे हैं सरकार हमें शास्त्री बाजार में कारोबार नहीं करने दे रही है। ऐसा ही रहा तो हम भूखे मर जाएंगे।


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कोरोना त्रासदी के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निष्क्रियता और चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जनसेवा का दम भरने वाले खाकी पैंटधारी आरएसएस के कार्यकर्ता कोरोना संकट के समय कहां लापता हो गए हैं? उन्होंने पूछा है कि क्यों त्रासदी झेल रहे मजदूरों की सहायता के लिए आरएसएस के लोग नहीं दिख रहे हैं और वे क्यों नहीं कह रहे हैं कि इस भीषण, पीड़ादायक के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी दोषी हैं।

मरकाम ने कहा है कि भारत को ठीक तरह से समझने वाले आरएसएस को क्या यह समझ में नहीं आ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में मज़दूरों को सडक़ों पर हज़ारों मील पैदल चलने के लिए मजबूर करके केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना से बड़ी एक समस्या खड़ी कर दी है. उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी जी ने पहले बिना सोच विचार किए लॉक-डाउन पर लॉक-डाउन किया, लोगों से थाली ताली बजवाई, दीपक जलवाया फिर पुष्प वर्षा करवाई लेकिन देश के नाम किसी संबोधन में मजबूर और पीड़ा झेल रहे मजदूरों का जिक्र तक नहीं किया।

मरकाम ने कहा है कि हिंदू धर्म और हिंदुओं की रक्षा करने वाली संस्था आरएसएस इस समय कहां है जब करोड़ों मज़दूर लहुलुहान पैरों, भूखे पेटों और खाली जेबों के साथ सडक़ों पर पैदल चल रहे हैं? उन्होंने कहा है कि क्या मोहन भागवत और आरएसएस के दूसरे पदाधिकारियों को यह नहीं दिख रहा है कि जैसे तैसे घर पहुंचने की कोशिश कर रहे श्रमिकों में से अधिकांश हिंदू धर्म के अनुयायी ही हैं।

उन्होंने कहा कि सच यह है कि हिंदुओं की भलाई का नारा दरअसल भाजपा को वोट दिलाने तक ही सीमित है वरना इस संगठन ने आज तक हिंदू धर्म के किसी अनुयायी का भला नहीं किया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि आरएसएस किस तरह से भाजपा को नियंत्रित और संचालित करती है। आज आरएसएस के नेताओं को बताना चाहिए कि देश को कोरोना संकट के समय में इस तरह के दूसरे भीषण संकट में डालने के लिए क्या उन्होंने सुझाव दिए थे? और यदि नहीं दिए थे तो आरएसएस चुप क्यों है?

 


18-May-2020

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 मई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में महिला और बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण विभाग के काम-काज की समीक्षा की। 

बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया, मुख्य सचिव आरपी मण्डल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, समाज कल्याण विभाग के सचिव आर. प्रसन्ना, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग जनमेजय महोबे और संचालक समाज कल्याण पी. दयानंद  उपस्थित थे।

 


17-May-2020

धूप तेज होने से पहले ही काम खत्म कर घर लौट आने का सुकून
रायपुर, 17 मई। छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर शुरू किए गए मनरेगा कार्यों से ग्रामीण श्रमिक राहत में हैं। लॉक-डाउन के मौजूदा दौर में इसने न केवल उनकी रोजगार की चिंता दूर की है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक संबल भी प्रदान किया है। 

सामुदायिक और व्यक्तिमूलक आजीवन संवर्धन के कार्यों के तहत जल संरक्षण, कृषि, उद्यानिकी और पशुपालन को मजबूत करने विविध परिसंपत्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन कार्यों में अभी सीधे रोजगार के साथ ही मनरेगा के तहत निर्मित हो रही परिसंपत्तियों से भविष्य में जीविकोपार्जन के बेहतर संसाधन मिलेंगे।

बस्तर जिले में भी मनरेगा कार्य जोरों पर है। वहां संचालित विभिन्न कार्यों में अभी 31 हजार 397 श्रमिक काम कर रहे हैं। कार्यस्थलों पर सवेरे पांच बजे से ही श्रमिकों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। सुबह पांच से आठ बजे के बीच ये अपने-अपने हिस्से का काम खत्म कर धूप तेज होने के पहले ही घर लौट आते हैं। कोविड-19 से बचाव के लिए मजदूर मुंह ढंकने के लिए मास्क या गमछा का इस्तेमाल कर रहे हैं। परस्पर शारीरिक दूरी बनाए रखने के दिशा-निर्देशों के पालन के साथ ही सभी कार्यस्थलों पर साबुन से हाथ धुलाई की व्यवस्था की गई है।

बस्तर जिले में करीब छह हजार प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की संभावना है। इनकी क्वारेंटाइन अवधि पूरी होने के बाद काम की मांग करने वालों को भी तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी है। जिनके पास मनरेगा जॉब-कॉर्ड नहीं हैं, उनके नए जॉब-कॉर्ड बनाए जाएंगे। चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में बस्तर जिले में मनरेगा के लिए 94 करोड़ रूपए का लेबर बजट प्रावधानित है। पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में वहां मनरेगा कार्यों में 61 करोड़ रूपए से अधिक की राशि खर्च की गई है।