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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 19 जनवरी। अभी भी समय है अधिकारी सुधर जाएं अन्यथा सख्त कार्यवाही होगी। उक्त बातें विधायक गुलाब कमरो ने कही, दरअसल, कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग में की जा रही भर्तियों में भारी लेनदेन की शिकायत आम हो गयी है। 
    बिना पैसे काम नहीं होने के नाम से बदनाम यह विभाग में नियमों को दरकिनार करते हुए कई नियुक्तियां की गई, पात्र लोगों को छोड़ अपात्र लोगों की नियुक्ति का आरोप सामने आने लगा है। जिसकी शिकायत विधायक तक पहुंच रही है। वहीं विधायक गुलाब कमरों का कहना है कि अभी भी वक्त है सुधर जाओ नही तो गंभीर परिणाम उठाने पड़ सकते हंै।
     स्वास्थ्य की समस्यों को लेकर वो किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगें, हाल ही में हुई नियुक्तियों में काफी शिकायते सामने आ रही है। मनचाहे लोगों की नियुक्ति की गई है। नियमों का ध्यान नहीं रखा गया है। 
    उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा संलंग्नीकरण  किया गया है, भरतपुर में पदस्थ्य कर्मचारी को बैकुंठपुर में संलग्न करके रखा गया है। यहां तक सोनहत के एक कर्मचारी को दूसरे जिला सुरजपुर में संलग्न करके रखा गया है और उसका वेतन कोरिया जिले से जारी किया जा रहा है। वहीं सोनहत में पदस्थ की गई स्त्री रोग विशेषज्ञ को बैकुंठपुर में संलग्न कर दिया गया है।

     

     

     

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Posted Date : 19-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 19 जनवरी। जमीन अदला बदली मामले में डीएमएफ की राशि से जिला प्रशासन द्वारा की गई फेंसिंग और समलतीकरण मामले में प्रशासन कटघरे में है, अब प्रशासन इसके लिए लोक निर्माण विभाग को दोषी ठहराने में जुटा है जबकि स्वयं कलेक्टर नरेन्द्र दुग्गा उस समय मौके पर पहुंच लोक निर्माण विभाग के एसडीओ और इंजीनियरों को बुला फेंसिग करने को कहा था। वहीं दूसरी ओर संभवत: सोमवार को संजय अग्रवाल मामले में प्रेस कांफ्रेस कर सकते है। वहीं लोग अब जिला प्रशासन से 24 लाख की वसूली की मांग कर रहे हंै। 
    मिली जानकारी के अनुसार शहर के बीचों बीच स्थित जमीन अदला बदली का मामला हर किसी की जुबान पर है, छत्तीसगढ की खबर के बाद अभाविप ने उक्त भूमि को खेलकूद मैदान के लिए कलेटर से मांगा है और नहीे देने पर चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। इधर, प्रशासन संजय अग्रवाल के पक्ष में फैसला आने से परेशान है। क्योंकि न्यायालय मेें विचाराधीन मामले में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि 24 लाख रू वाईबेड वायर फेंसिग के लगाए गए। डीएमएफ की राशि का बीते दो साल में जमकर दोहन किया गया है। उक्त राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत लोगों की जीवन को सुदृढ़ बनाने में खर्च किए जाने थे।
     यह सर्व विदित है कि जब मामले को लेकर जनदर्शन में शिकायत सामने आई जिसके बाद कलेक्टर नरेन्द्र दुग्गा स्वयं मौके पर पहुंचे थे, उनके साथ लोक निर्माण विभाग के एसडीओ और इंजीनियर भी थे, जहां उन्होंने स्वयं जमीन की फेंसिंग के निर्देश दिए, और डीएमएफ से दो भागोंं में राशि स्वीकृत कर डाली।  ऐसा तब जब मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच कमिश्नर के द्वारा की जा रही थी। बाद में वो राजस्व मंडल पहुंच गयी और राजस्व मंडल ने संजय अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुना दिया। 
    वहीं कानूनी जानकारों की माने तो अब इस मामले में सिर्फ सुप्री्रम कोर्ट का ही दरवाजा खटखटाया जा सकता है और यदि किसी तरह की और जांच खड़ी की जाती है तो सिर्फ कोरा दिखावा ही होगा। 
     अब जिला प्रशासन से लोग 24 लाख रू डीएमएफ के और 3 लाख रू विधायक निधि से समतली करण की राशि की वसूली की मांग कर रहे हंै, जिस पर जिला प्रशासन अब लोक निर्माण विभाग को दोषी ठहरा रहा है। डीएमएफ की राशि के बेवजह खर्च को लेकर लोगों में  नाराजगी देखी जा रही है। 
    प्रेस कांफ्रेस में 
    करेंगे खुलासा
    मामले को लेकर संजय अगवाल ने बताया कि भूमि अदला बदली का मामले में मुझे जो भी बताना है वो मै सोमवार को प्रेस कांफ्रेस कर सार्वजनिक करूंगा।  शहर के हितों को ध्यान रखने के लिए मेरी प्रतिबद्धता जग जाहिर है, मैने जिला मुख्यालय को एक बडे शहर के अनुरूप ढालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 

     

     

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Posted Date : 17-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 17 जनवरी। भरतपुर सोनहत विधान सभा क्षेत्र के नव निर्वाचित विधायक गुलाब कमरो अपने विधान सभा क्षेत्र मे स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है और अपने विधानसभा क्षेत्र में संचालित अस्पतालों का निरीक्षण कर जायजा ले रहे है। गुरूवार की सुबह जनकपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिये। 
    मिली जानकारी के अनुसार विधायक गुलाब कमरों जल्द ही सोनहत स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया, विधायक गुलाब कमरों ने कहा कि वनांचल क्षेत्र में संचालित अस्पतालो में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ ग्रामीणेों को मिले इसके लिए प्रयास किये जा रहे है साथ ही उन्होने कहा कि जनपद मुख्यालय के सादायिक स्वास्थ्य केंद्र में और भी सुविधाएं बढाने की जरूरत है। चिकित्सकों और कर्मचारियों का अटैचमेंट खत्म किया जाएगा। उन्होने कई कर्मचारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हे तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। 
    ज्ञात हो कि सोनहत स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जनपद क्षेत्र के 25-30 किमी की दूरी तक के ग्रामीण ब्लाक मुख्यालय सोनहत में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत पर निर्भर है। यहॉ कई चिकित्सकों के पद अभी भी खाली है।  यहां उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मरिजों व उनके परिजनों को नही मिल पा रहा है। कई केसों को तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर कर अपना पल्ला झाड लेते है। विधायक गुलाब कमरों ने कहा कि अब ऐसा नही चलेगा। मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ स्वास्थ्य केंद्र में मिले। शिकायत आने पर कडी कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि अब वे जल्द ही सोनहत स्थित स्वास्थ्य केंद्र का कभी भी औच्चक निरीक्षण कर सकते है। इसके बाद वे भैंसवार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे जहां बेहतर साफ सफाई के निर्देश दिए।
    समय पर नहीं पहुंचते चिकित्सक 
    जानकारी के अनुसार सोनहत स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक समय पर कभी नही पहुंचते है। जिससे लेागों केा परेशानी होती है। यहां के स्वास्थ्य केंद्र में दूर दूर के ग्रामीण क्षेत्रो के लोग बेहतर उपचार के लिए पहुॅचते है। चिकित्सकों की लेट लतीफी से क्षेत्र के लोग परेशान है अब जिस तरह से क्षेत्रीय विधायक के द्वारा स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा रही है और अस्पतालों का निरीक्षण कर जायजा लिया जा रहा है उससे लोगों में उम्मीद बंधी है कि  स्वास्थ्य व्यवस्था में अब कसावट देखने को मिलेगी। 
    रामगढ स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा बढ़ाने की जरूरत
    जनपद पंचायत सेानहत के वनांचल ग्राम रामगढ क्षेत्र का प्रमुख ग्राम पंचायत है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिया गया है लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाओ की कमी बनी हुई है। हालत यह है कि नाम भर के लिए खुले रामगढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा नही होने के कारण इस क्षेत्र के लोगों को सोनहत रेफर कर दिया जाता है सोनहत में भी पर्याप्त सुविधा नही होने के चलते जिला चिकित्सालय बैकुण्ठपुर रेफर कर दिया जाता है।

     

     

     

     

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Posted Date : 16-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    मनेन्द्रगढ़, 16 जनवरी। मनेंद्रगढ़ में मानव तस्करी का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पीडि़त परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध कायम कर विवेचना शुरु की है। युवकों के बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिलने के कारण परिजनों का बुरा हाल है। इन चार  युवकों में दो नाबालिग भी है। 
    मनेंद्रगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत परसगढ़ी व खैरबना में रहने वाले मान सिंह, सुखसेन, नन्नू व हृदय सिंह को उनके ही गांव में रहने वाले सुग्रीव सिंह ने हैदराबाद में बोर मशीन में काम दिलाने का वायदा किया। उन्हें बताया कि हैदराबाद में काम करने पर उन्हें 10 हजार रुपये मेहनताना मिलेगा। साथ ही साथ रहना खाना फ्री रहेगा। चारों युवकों के परिजन दलाल के झांसे में आ गए और लगभग साढ़े 3 माह पूर्व दलाल के साथ चले गए। 
    गांव से जाने के 15 दिन बाद ही सुखसेन ने अपने मामा के लड़के को फोन कर बताया कि वे लोग भारी तकलीफ में हैं। 
    वे यहां नहीं रहना चाहते। ं आकर उन्हें ले जाओ। 
    इसके बाद से युवकों के परिजन लगातार सुग्रीव नाम के दलाल को फोन लगाते रहे, लेकिन उसका न फोन लगा न कोई बातचीत ही हुई। तब से युवकों के परिजन अपने बच्चों की सलामती व उनकी पतासाजी के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन चारों युवकों का कुछ पता नहीं चल सका। तब इन चारों युवकों के परिजन थाना मनेंद्रगढ़ पहुंचे और मामले की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी।
    मानव तस्करी की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी मनेंद्रगढ़ विमलेश दुबे ने उच्चाधिकारियों को घटना की जानकारी देते हुए अपराध कायम कर प्रारंभिक विवेचना शुरु कर दी है।

     

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Posted Date : 16-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 16 जनवरी। कोरिया जिले के भरतपुर में चना घोटाले को लेकर जिला प्रशासन एकदम चुप्पी साधे बैठा हुआ है, वहीं भरतपुर ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने खाद्य मंत्री से मिलकर मामले की निष्पक्ष जांच, पदस्थ खाद्य निरीक्षक की जांचकर उसे हटाने की मांग भी की है। इधर, खाद्य निरीक्षक को लेकर अब उचित मूल्य दुकान संचालक भी खुल कर सामने आने लगे है, वहीं दुकानों में ज्यादा स्टॉक को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे है।
    जानकारी के अनुसार कोरिया के भरतपुर तहसील में सितंबर माह के चने का वितरण नहीं करने को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया, कई ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने कलेक्टर और एसडीएम को शिकायत भी दर्ज कराई है कि उन्हे सितंबर माह का चना नहीं मिला है, बावजूद इसके जिला प्रशासन ने किसी भी तरह के जांच के आदेश नहीं दिए है। वहीं अब क्षेत्र के कई उचित मूल्य दुकान संचालक सामने आ रहे है। 
    संचालकों की मानें तो यहां पदस्थ खाद्य निरीक्षक द्वारा कभी भी दुकानों में रखे रजिस्टरों की जांच नहीं की। बताया जाता है कि प्रति माह हर दुकान से 2000 रू की दर से वसूली की जाती थी, जो नहीं दे पाते उनकी दुकान निलंबित कर अपने चहेते संचालक के यहां अटैच कर दी जाती। कुछ दुकानदारों ने लिखित शिकायत भी की है।
     उधर, भरतपुर कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष रविप्रताप सिंह का कहना है कि अधिकारियों की मनमर्जी के कारण गरीबों के खाद्यान का बड़ा घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई दुकानदार उनके पास ऐसी शिकायत लेकर आ रहे हैं कि अभी जिन दुकानों के पास कमीशन आया है, उसमें से अधिकारी को 20 हजार की राशि की मांग की जा रही है। हर दुकानदार डरा हुआ है। 
    उन्होंने बताया कि खाद्य मंत्री से मिलकर मामले की शिकायत कर खाद्य निरीक्षक और गोदाम प्रभारी को हटाने की मांग की है। उन्होंने आगे बताया कि चंूकि भरतपुर जिला मुख्यालय के बेहद दूर है इसलिए यहां अधिकारियों द्वारा सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं की जाती है। जिससे यहां पदस्थ अधिकारियों के हौसले बुलंद है। 
    चावल के स्टॉक में काफी बढ़त 
    भरतपुर की उचित मूल्य दुकानों में वेबसाईट पर दिख रहे चावल के स्टॉक में बहुत ज्यादा बचत दिखाई दे रही है, जबकि ऐसा यह बताता है कि या तो वितरण सही नहीं हो रहा है, या सब कुछ जानते हुए भी आबंटन से ज्यादा चावल भेजा जा रहा है। साईट पर ग्राम चिड़ौला में 209 किलो चावल दिसंबर के पहले बचत में था, उसके बाद 135 और भेज दिया गया, 127 बांट दिया और फिर 217 किलों चावल बचत में दिख रहा है।
     इसी तरह ग्राम पंचायत बेला मे 221 किलो, बड़वाही में 127 किलो, हरचोका में 167 किलो, जनकपुर और दुघासी में सहित कई दुकानों में काफी मात्रा में चावल रहते हुए आबंटन किया गया है, ऐसे में स्टॉक मेें बचत को लेकर जांच किया जाना बेहद आवश्यक है। 

     

     

     

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Posted Date : 16-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 16 जनवरी। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के रामानुज मिनी स्टेडियम में राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की तैयारियां शुरू हंो गई है। सुबह होने के साथ ही स्काउट गाईड, एनसीसी, पुलिस दल व छात्र छात्राओं के द्वारा परेड का रिहर्सल शुरू कर दी गई है। 
    गणतंत्र दिवस की परेड के लिए सुबह के अलावा अपरान्ह के समय में भी मिनी स्टेडियम में तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इसके लिए अब अधिक समय नहीं बचा है। इसके अलावा जिले के शैक्षणिक संस्थाओं में भी गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी चल रही है। अभी ठंड के बीच में सुबह 7 बजे से एनसीसी, स्काउट गाईड, पुलिस व छात्र छात्राओं का दल मिनी स्टेडियम में पहुंचकर दो घंटे तक प्रतिदिन अभ्यास कर रहे हैं। 
    आगामी  26 जनवरी को मिनी स्टेडियम में ही जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस का समारोह आयोजित होगा। जहां मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया जायेगा और परेड की सलामी ली जायेगी। जिसके लिए कई दिनो पूर्व से तैयारियॉ चल रही है। 
    अंतिम दौर में कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में अंतिम रिहर्सल किया जायेगा। शहरों के स्कूलों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां चल रही है। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में जिला स्तरीय समारोह मिनी स्टेडियम आयोजित की जाती है जहॉ शहर के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है साथ ही जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के द्वारा विभागीय योजनाओं को प्रदर्शित करने के लिए झांकी का आयोजन किया जाता है।  
    गणतंत्र दिवस के जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम रामानुज मिनी स्टेडियम में आगामी  26 जनवरी को मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक  अंबिका सिंहदेव के द्वारा ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली जायेगी। इसके लिए राज्य शासन के द्वारा सूची जारी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार राज्य गठन के पश्चात किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि विधायक के द्वारा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण  किया जायेगा। 

     

     

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Posted Date : 16-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 16 जनवरी। मकर सक्रांति का पर्व बीतने के बाद भी ठंड में कमी नहीं आई है। बैकुंठपुर सहित कोरिया जिले में पारा लगातार लुढ़कता जा रहा है, कई ग्राम में पाला पडऩे की खबर भी आ रही है।
    जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर के ग्राम पंचायत सोस सरपंच भूपेन्द्र सिंह ने उनके गांव में पाला की तस्वीर भेजकर बताया है कि ठंड अपने चरम पर है। अब दोपहर के समय अधिक देर तक धूप लेने से शरीर में सूर्य का प्रकाश चुभने लगा है लेकिन यह धूप सुबह के समय अच्छा लग रहा है। यही कारण है कि सुबह होने के साथ ही कई लोग धूप का आनंद लेते है लेकिन दिन जैसे-जैसे चढ़ता जाता है धूप का असर भी तेज होने लगा है।  मौसम के तापमान में थोड़ी बढ़ोत्तरी तो हुई है लेकिन सुबह-शाम के साथ रात के समय ठंड का असर अभी भी बरकरार है। 
    लोगों को सुबह  के कुछ घंटों तक ठंड से कंपकंपी का अहसास हो रहा है इसके अलावा शाम के बाद से ठंड का असर अभी पूरे जिले में है। जिस तरह से ठंड का असर हो रहा है इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इस माह तक ठंड तेज रहेगी जिससे कि लोगों के गर्म कपड़े अभी नहीं उतरेंगे। हालांकि मकर सक्रांति के पश्चात सूर्य के उत्तरायण होने से धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। 
    कुछ दिनों पूर्व की अपेक्षा दिन का तापमान अब बढ़ रहा है लेकिन रात के तापमान में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। उत्तरी सर्द हवाओं के चलते सुबह होने के कुछ घंटों तक ठंड का असर बना रहता है। जिले के वनांचल व पठारी क्षेत्रों में इन दिनों जोरों की ठंड पड़ रही है। इन क्षेत्रों के लोग सुबह व शाम के समय अलाव का सहारा लेकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
     चालू माह के समाप्त होने के बाद ही ठंड में कमी आने की संभावना है। जिस तरह से लोगों को लग रहा था कि मकर सक्रांति के पश्चात ठंड में कमी आयेगी वैसा नहीं रहा। मकर सक्रांति बीतने के बाद भी ठंड का असर बना हुआ है। हालांकि अब ठंड धीरे-धीरे विदाई की ओर जा रही है लेकिन जिस तरह से ठंड के तेवर है उससे ऐसा लग रहा है कि अभी ठंड के विदाई में समय लग सकता है। 

     

     

     

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Posted Date : 15-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 15 जनवरी। कोरिया जिले के 150 किमी दूर भरतपुर तहसील स्थित 100 बिस्तरीय अस्पताल में क्षेत्रीय विधायक गुलाब कमरो ने रात में औचक निरीक्षण किया, हर जगह फैली गंदगी, अव्यवस्था देख उन्होने डॉक्टरों को हिदायत दी और विधायक निधि से अस्पताल में शव वाहन, मर्च्यूरी, सीजर देने की घोषणा भी की। इधर, बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने भी रात 9 बजे जिला अस्पताल में औचक निरीक्षण किया। 
    कोरिया जिले के सबसे दूरस्थ्य तहसील भरतपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है, इलाज के नाम पर सिर्फ भवन है और वर्षो से जमे कुछ डॉक्टर जो यहां आने वाले मरीजों को सीधे मप्र के शहडोल रेफर कर दिया करते हंै। लम्बे समय से अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की मांग होती रही है। नव निर्वाचित विधायक गुलाब कमरो सोमवार की रात अचानक ब्लाक अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह, अंकुर प्रताप सिंह, अमित गुप्ता के साथ जनकपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे, जहां हर वार्ड में बदबू फैली हुई थी, कचरे के डिब्बे  भरे पड़े दिखे। उन्होंने तख्त तेवर दिखाते हुए हर दिन अस्पताल की साफ सफाई के निर्देश दिए, वहीं बीएमओ नदारद रहे।  उन्होने मरीजों से बात कर उनका हाल चाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को हिदायत दी कि अब समय बदल गया है, अब आपके कार्यो की मै समीक्षा करूंगा, हर मरीज को शहडोल रेफर नही किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा कि बीते 15 सालों से भाजपा सरकार ने इस दूरस्थ इलाके को भगवान भरोसे छोड़ दिया था। यहां ना तो शव वाहन है ना ही मर्च्यूरी है ना फ्रीजर है। खुले में शव विच्छेदन करने की मजबूरी है। उन्होंने तत्काल अपने विधायक निधि से तीनों सुविधाओं की घोषणा की। 
    अंबिका ने किया औचक निरीक्षण
    एक ओर भरतपुर सोनहत विधायक जनकपुर अस्पताल का निरीक्षण कर रहे थे तो दूसरी ओर बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने रात में ही जिला अस्पताल  पहुंचीं। उन्होंने वहां उपस्थित डॉक्टरों से चर्चा की, मरीजो का हाल जाना और साफ सफाई, दवाओं की जानकारी भी ली। उन्होंने करीब 1 घंटे जिला अस्पताल में बिताया, उन्होने कहा कि व्यवस्था सुधारने की दिशा में सबका साथ चाहिए और सब साथ आएगे तो जिला अस्पताल बेहतर सुविधा देने में कामयाब हो सकेगा। उनके दौर के दौरान यह देखा गया कि जो चिकित्सक कभी रात में जिला अस्पताल में नजर नहीं आते थे वो उस समय उपस्थित दिखे। 

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Posted Date : 13-Jan-2019

  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 13 जनवरी।
    कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में पेयजल संकट गहरा गया है, बीते दो दिन से शहर में जल आपूर्ति ढप्प हो गयी थी, शनिवार को नगर पालिका के अनुरोध पर गेज बांध का पानी शहर की ओर छोड]ा गया, तब कही जाकर शहर में पीने के पानी की सप्लाई हो पाई> दूसरी ओर शहर के दोनो गेज और झुमका के गेटों से अनवरत बह रहे पानी से आने वाली गर्मी में गंभीर पेयजल संकट से गुजरने की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। पानी को सहेजने के लिए पर्यावरण और प्रदूषण पर नियंत्रण किसी भी प्रकार का नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है।
    इस संबंध में बैकुंठपुर नगर पालिका के सीएमओ राकेश शर्मा ने बताय कि गेज डेम की ओर से शहर में आ रही गेज नदी पूरी तरह सूख चुकी है, उन्होंने जल संसाधन से अनुरोध किया तब कहीं पानी छोड़ा गया तो पानी की सप्लाई हो सकी है। 
     नगर पालिका बैकुंठपुर में गेज नदी से आने वाले पानी को रोक कर उसे फिल्टर प्लांट तक लाया जाता है, जिससे पूरे शहर को पीने के पानी की सप्लाई की जाती है। इसके अलावा गेज डेम से चरचा कालरी को पीने के पानी की सप्लाई भी की जाती है। परन्तु जनवरी माह भी पूरा नहीं बीता है और शहर की ओर आने वाली गेज नदी पूरी तरह सूख गयी, जिसके कारण शहर में पेयजल संकट खडा हो गया। दरअसल, पूर्व वित्त मंत्री डॉ रामचंद्र सिंहदेव  ने बैकुंठपुर के करीब दो बड़े डेमों को निर्माण करवाया, जिसके कारण कई एकड खेतों में पानी पहुंचा साथ ही दो बड़े शहरों को पीने के पानी की कभी कमी नहीं हुई, उनके रहते वो इन डेमो की सुध लेते रहते, उसके रख रखाव को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया करते थे।
    भाजपा सरकार के दौरान दोनों डेमों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई लिहाजा झुमका में जल प्रदूषण बहुत बढ चुका है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर ने झुमका में प्रदूषित पानी भेजने को लेकर चरचा कालरी के कोयले पर रोक लगा दी थी, इधर वर्तमान प्रशासन ने झुमका की कभी सुध नहीं ली, जबकि उनका बंगला झुमका के तट पर ही स्थित है। वर्तमान प्रशासन ने डीएमएफ से एक नया ट्रीटमेंट प्लांट बनवाने की प्लान किया, परन्तु वह भी कागजों में सिमट कर रहा गया। वहीं जल संसाधान विभाग दोनों डेमों पर रखरखाव के नाम पर मिलने वाली राशि का सही उपयोग नहीं कर रहा है। जिसके कारण दोनों की डेम का पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है, सैकड़ों किसानों को इसका पानी भी नहीं मिल रहा है जिससे वो सिंचाई से वंचित है।
    झुमका  प्रदूषित
    बैकुंठपुर का सबसे पुराना डेम झुमका एकदम प्रदूषित हो चुका है। चरचा आरओ से निकलने वाला एसिडिक पानी लगातार सीधे झुमका में गिर रहा है, एसईसीएल दिखावे के लिए खदान से निकलने वाले पानी को ट्रीट करने के लिए प्लांट की बात करता है, परन्तु बमुश्किल महिने मे जब कोई जांच में आता है तो प्लांट शुरू कर दिया जाता है, बाकि पूरे समय प्लांट पूरी तरह से बंद और खराब पड़ा रहता है, इसके संचालन के नाम पर करोड़ों रूपए का बंदरबांट जारी है। वहीं पहले चरचा कालरी के पेयजल की आपूर्ति झुमका डेम से ही की जाती थी, परन्तु जब पानी प्रदूषित हो गया तो कालरी ने वहां से पानी ना लेकर अब गेज से पीने को पानी लेना शुरू कर दिया है, वहीं अम्बिकापुर से आने वाले प्रदूषण के अधिकारी जांच के नाम पर डिस्टिल वाटर का सेंपल लेकर चले जाते है। जबकि प्रदूषित जल से कई गांव के ग्रामीण परेशान है। 
    गेज और झुमका 
    दोनों लीक
    शहर के समीप बने दो बड़े जलाशयों के गेट लीक है, छत्तीसगढ़ ने कई बार इसको लेकर खबर का प्रकाशन भी किया, जल संसाधान के अधिकारी मौके पर जाते हंै, गेट को देखकर उच्चाधिकारियों को  जानकारी देकर चुप्प बैठ जाते हंै। दूसरी ओर दोनों के गेट के नाम पर लाखों रूपए खर्च कर  किया जा चुका है, परन्तु अनवरत बहते पानी पर किसी भी तरह का ब्रेेक नहीं लग पाया है। चिंता की बात यह ंहै कि यदि इसी तरह पानी बहता रहा तो आने वाली गर्मी में शहर के लोगों को पेयजल के लिए गंभीर परिणाम भुगतने पड सकते है। 
    सैकड़ों अवैध ईट भट्टे
    गेज नदी के सूख जाने का एक कारण यह भी है कि नदी के दोनों तट पर सैकड़ों ईट भट्टों का संचालन हो रहा है। दरअसल, गेज नदी कलेक्टर कार्यालय के पीछे से होकर गुजरती है और बैकुंठपुर शहर से गुजरकर वो कई किमी दूर गेजी पहुंचती है। चरचा कालरी से निकलने वाला कोयला यहां अवैध रूप से इन ईट भट्टो में पहुंचता है, इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस विभाग को भी है, परन्तु इन्हे रोकने के लिए किसी भी तरह के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, अब नदी सूखती जा रही है।

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Posted Date : 11-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 11 जनवरी। आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिले में छेरछेरा का पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को अन्नदान का पर्व भी कहा जाता है। छेरता पर्व को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में रहता है। ग्रामीण बच्चे छेरता पर्व के दिन घर-घर जाकर अन्नदान की मांग करते हैं। छेर-छेरता कोठी के धान हेर-हेरता के साथ बच्चों की टोली एक घर के बाद दूसरे घर की दहलीज तक पहुंचती है। इसके पूर्व इन दिनों ग्रामीण अंचलों में सुगा नृत्य करने वालों की टोली घूमना शुरू कर दिए हंै। जिस तरह से बच्चों के द्वारा छेरता पर्व के अवसर पर अन्नदान की मांग करते है उसी तरह महिलाओं द्वारा सुगा नृत्य कर अन्न की मांग करते हैं। यह क्रम छेरता पर्व के आने तक जारी रहेगी। हालांकि अब पहले की तरह सुगा नृतक दलों की संख्या लगातार घटती जा रही है फिर भी कई ग्रामों में यह परंपरा अब भी कायम है। 
    जिले के सोनहत ब्लॉक के ग्राम रावत सरई के दर्जनों महिलाओं की टोली अपने गांव के साथ दूसरे गांव में सुगा नृत्य करने के लिए घूम रही हैं।  इस तरह यह सिललिा आगामी छेरता पर्व तक चलता रहेगा। ग्रामीण महिलाओं के दल के साथ दो पुरूष सदस्य भी साथ चल रहे हंै जिनके द्वारा घरों में मिलने वाले धान-चावल को ढोकर चलते हैं और रूपये रखते हैं। मिले धान-चावल को बेचते भी जाते हैं ताकि बोझ कम हो सके। विगत 10 वर्ष के पश्चात पंडो परिवार अपने गांव को छोड़कर दूसरे गांवों में सुगा नृत्य करने के लिए निकले हैं।  
    ग्राम रावत सरई की जिन महिलाओं की टोली के द्वारा अपने गांव के अलावा आसपास के कई ग्रामों में पड़ाव डालकर सुगा नृत्य किया जा रहा है वे सभी विशेष संरक्षित जनजाति पंडो जाति की महिलाएं हैं।  
    गांव-गांव में घूमकर सुगा नृत्य का प्रदर्शन करने वाले पंडो जनजाति की महिलाओं की टोली के साथ में चल रहे पुरूष सदस्य ने बताया कि वे अभी छेरता पर्व तक विभिन्न गॉवों में जाकर अन्न व रूपये की मांग करते है। इसके लिए विशेष डिमांड नही रहता बल्कि जो जितना दे दे वही उचित है। उन्होंने बताया कि अभी छेरता पर्व के पूर्व तक इस तरह से सुगा नृत्य करके अन्न एकत्र करते हैं और उसमें से धान को बेच देते हैं। छेरता पर्व के दिन एकत्र किये गये रूपये व अन्न से पूरे गांव के लोगों के लिए सामूहिक भोजन का आयोजन किया जाता है। बकरा भात के साथ शराब का भी चलता  है। गांव के सभी लोग एक स्थान पर जुटकर सामूहिक रूप से भोजन करते हंै। इस तरह से एक आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होता है।   

     

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Posted Date : 11-Jan-2019
  • हर घर कनेक्शन पर गलत प्रबंधन के कारण यूं बह रहा
    छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 11 जनवरी। कोरिय जिले के जनपद पंचायत बैकुंठपुर अंतर्गत प्रमुख ग्राम पंचायत बुढार जो कि विधायक आदर्श ग्राम का दर्जा मिला हुआ है। आदर्श ग्राम में पीने के पानी को लेकर लोग  परेशान है, कहने को पानी की टंकी भी है और पाईप लाइन भी बिछी है, परन्तु ना तो पानी घरों तक पहुंचता है और ना इसे दुरूस्त करने की पहल की गई है, ये जरूर है कि ग्राम पंचायत पानी का बिल हर माह जरूर वसूल लेता है। 
    जानकारी के अनुसार पूर्व श्रम मंत्री राजवाडे ने बैकुंठपुर जनपद के सबसे बड़े ग्राम बुढार को गोद लिया, इसे विधायक आदर्श ग्राम बताया जाने लगा।  सबसे बड़ी ग्राम पंचायत 22 मोहल्ले में बॅंटा हुआ है। यहां के लोगों की मुख्य समस्या पेयजल की बनी हुई है। गलत प्रबंधन के चलते लाखों खर्च करने के बाद भी यहां के ग्रामीणों को पेयजल सुविधा का लाभ नही मिल पा रहा है। दूसरी ओर हजारों लीटर पानी बहते हुए खेतों में जाकर डबरी का रूप ले लिया है। पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण इस कदर नाराज रहे कि विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। 
    अब नई सरकार गठन के बाद यहां के लोगो में उम्मीद बंधी है कि पेयजल की समस्या को दूर करने की दिशा में कारगर कदम उठाये जायेंगे। ग्राम के संतोष ठाकुर, कमलेश यादव, लक्ष्मी नारायण, त्रिभुवन प्रताप, उचित नारायण पैकरा ने बताया कि पानी की सुविधा के लिए ग्राम बुढार में लाखों रूपये खर्च किये गये है लेकिन उचित क्रियान्वयन नही होने के कारण यहॉ के लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है।
    विधायक आदर्श ग्राम बुढार में मुख्य पानी टंकी का निर्माण 20 लाख रूपये खर्च कर निर्माण कराया गया। जिसे वर्ष 2002 में प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री डॉ रामचंद्र सिंहदेव द्वारा 26 अप्रेल को शुभारंभ किया गया। 
    शुभारंभ के समय तब के जिला पंचायत अध्यक्ष फलेन्द्र सिंह मौजूद रहे। उसके बाद सत्ता बदली तो निर्मित पानी की टंकी को लेकर शासन का ध्यान कभी नहंी गया। लाखों खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। इसके बाद यहॉ के 22 मोहल्लों में से एक दो मोहल्लों को छोडकर शेष सभी मोहल्लों में पाईप लाईन का विस्तार कार्य किया गया है। 
    इसके अलावा मंडलपारा में दो पानी टंकी और है।  शुरूआती समय में पानी कुछ मोहल्लों तक जाती थी लेकिन घटिया पाईप लाईन विस्तार के कारण कई जगहों से पाईप लाईन फूट गयी जिससे कि अब सभी जगह पानी नही पहुंच पा रहा है। बनाये गये टंकियों को भरने के लिए दो पंप लगाये गये है लेकिन उचित व्यवस्था नही होने के कारण इसका लाभ गांव के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। 
    (बाकी पेज 12 पर)
    डेढ़ सौ रूपये कनेक्शन शुल्क वसूले
    जानकारी के अनुसार ग्राम बुढार में पाईप लाईन विस्तार के बाद जब लोगों ने नल के कनेक्शन लिये तो उनसे डेढ़ सौ रूपये की वसूली की गयी लोगों को लगा कि अब उनके घर तक पानी आयेगी लेकिन घटिया पाईप लाईन के कारण कई जगहों से पाईप फूट गया जिसके चलते घरों तक पानी नही पहुॅंच पा रहा है। सुधार कराने की मॉंग करते हुए ग्रामीण थक गये लेकिन सुधार नहीं हो पाया। इस तरह लाखों खर्च करने के बाद भी विधायक आदर्श ग्राम के लोग पेयजल के लिए पूरे साल परेशान होते हैं। 
    ज्यादातर हैंडपंप सूखे और पानी हो रहा बर्बाद
    ग्राम पंचायत बुढार के कई मोहल्लों में सरकारी हैंडपंपप का खनन किया गया है जिनमें से ज्यादातर स्थानों के हैंडपंप सूखे पडे हुए है कुछ खराब है। जिसके मरम्मत करने की दिशा में भी ध्यान नही दिया जा रहा है। यदि सूखे व बिगड़े  हैंडपंपों को भी सुधार कर दिया जाता है तो कई मोहल्ले जहॉ सरकारी हैंडपंप स्थित है उन मोहल्लों के लोगों को पेयजल प्राप्त करने में आसानी होती।  वही दूसरी ओर जिस स्थान पर पानी टंकी में पानी चढाने के लिए मोटर पंप लगे हुए है वहां पास से भारी मात्रा में पानी निकलकर खेतों में पहुंच रहा है और डबरी बन गया हैं। इस पानी का उपयोग अपने खेतों मे सिंचाई के लिए उपयोग लोगों द्वारा किया जा रहा है। लोगों की मांग है पंप हाउस के उपर 5 हजार ली की टंकी लगा दी जाए ताकि पानी व्यर्थ ना बहे और लोगों की उपलब्ध भी हो सके।

     

     

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Posted Date : 10-Jan-2019
  • एसडीएम और कलेक्टर से की शिकायत

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 10 जनवरी। कोरिया जिले के भरतपुर तहसील में हुए चना घोटाले की दैनिक 'छत्तीसगढ़Ó की खबर पर मुहर लगनी शुरू हो गई है, घोटोले को लेकर ग्रामीण आगे आ रहे हैं और उन्होंने इसकी शिकायत भरतपुर एसडीएम और बैकुंठपुर आकर कलेक्टर से भी की है, वहीं जिला प्रशासन ने मिट्टी तेल और चना घोटाले को लेकर किसी भी तरह की जांच टीम गठित नहीं की है। जिससे उचित मूल्य दुकान संचालकों के हौसले बुलंद है।
    जानकारी के अनुसार भरतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मलकडोल, जमथान, कंजिया, घटई के ग्रामवासियों ने कलेक्टर और एसडीएम से शिकायत कर वहां पदस्थ खाद्य निरीक्षक को हटाने और सितंबर 2018 के चना गबन की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने बकायदा आवेदन में अपने राशन कार्ड का नंबर और नाम लिख कर शिकायत की है। ग्रामीण जीतराय, रामलखन, इंद्रपाल, कमलदेवी, हीरावती, शांति, रेवती, श्याम बाई, शशिकला, मालती, सोनिया बाई, दुर्गेश सिंह, अमर सिंह, रामभजन सिंह, पंतलीक सिंह,, रोहनी बाई, निरासिया बाई, अमर प्रताप, जुल्की बाई, बृजभान, रामदीन सिंह, नान बाई, जवाहर सिंह, फूलचंद, बेलाबाई, रमेशिया, सीतावती, तेरसिया सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत जमथान, कंजिया, घटई के दुकानों को सहकारी समिति जनकपुर में अटैच कर रखा है, माह सितंबर 2018 का चना सहकारी समिति में पहुंचा इसकी जानकारी नेट पर है और उन्हे सितंबर माह का चने का वितरण नहीं किया गया। उन्होने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कडी कार्यवाही की जाए।
    जिले भर अटैच का खेल
    राशन दुकानों का अटैच का खेल जिले भर में जारी है, जो भी समूह मांग के अनुरूप चढावा नहीं चढ़ा पाता है उन्हें अधिकारियों की पसंद की दुकानों मे अटैच कर वहां से राशन के वितरण को बंद कर दिया जाता है, ऐसे में अधिकारियों की पसंद की कई दुकानें चार चार ग्राम पंचायतों के खद्यान का वितरण कर रहे हंै और ग्रामीण खाद्यान के लिए कई किमी आने जाने को मजबूर हैं। 
    केरोसिन में जमकर धांधली
    कोरिया जिले में सबसे बड़ी धांधली केरोसिन में देखी जा रही है, छत्तीसगढ में भरतपुर और बैकुंठपुर की उचित मूल्य दुकानों में बचे स्टॉक को लेकर खबर का प्रकाशन किया था, जिले भर में कैरोसिन वितरण में निर्धारित मात्रा से ज्यादा केरोसिन सप्लाई किया जा रहा है, जिसकी मानिटरिंग करने वाले अधिकारी इस ओर देखना नहीं चाहते है ओर मिट्टी का तेल की अफरा तफरी बड़े पैमाने पर जारी है।

     

     

     

     

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Posted Date : 10-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 10 जनवरी। कोरिया जिले में दो वर्ष में रिकार्ड संस्थागत प्रसव की आंकड़े सामने आए है। जून 2018 तक निजी नर्सिग होम में हुए सामान्य प्रसव, सरकारी अस्पतालों की तुलना के बेहद कम है। जबकि वर्ष 2017-18 और 2018-19 के जून  तक निजी अस्पतालों में  ऑपरेशन से प्रसव  चौंकाने वाले है।  सामान्य प्रसव सिर्फ सरकारी अस्पतालों में बेहतर ढंग से किए जा रहे हंै। ऐसा तब हो रहा है जब जिला अस्पताल में निश्चिेतना विशेषज्ञ की पदस्थापना ही नहीं है। 
    जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में संस्थागत प्रसव के मामले में निजी अस्पतालों से बेहतर सरकारी अस्पताल काम कर रहे है। यहां सामान्य प्रसव के आंकड़ें निजी की तुलना में बेहद सुखद है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में बीते वर्ष 2017-18 संस्थागत प्रसव 10561 गर्भवती महिलाओंं का हुआ, इसके अलावा 1328 गर्भवती महिलाओं का प्रसव आपरेशन के जरीए किया गया, इसी तरह वर्ष 2018-19 में दिसंबर माह तक 5562 गर्भवती महिलाओं का सामान्य प्रसव हुआ जबकि 779 महिलाओं का आपेरशन से प्रसव किया गया। वहीं सिर्फ जिला अस्पताल बैकुंठपुर की बात करें तो वर्ष 2017-18 में सामान्य प्रसव 1315 हुआ और यहां मात्र 163 गर्भवती महिलाओं की आपरेशन के जरीए प्रसव कराया गया। वहीं वर्ष 2018-19 में दिसंबर माह तक 1059 सामान्य प्रसव तो 155 प्रसव आपरेशन के जरीए हुए। ठीक इसके विपरित जिले भर के निजी नर्सिग होम में वर्ष 2017-18 में 1628 प्रसव हुए जिसमें 1074 आपरेशन के जरीए और मात्र 554 प्रसव सामान्य हुए है वहीं चालू वर्ष 2018-19 में जून माह तक मिले आंकडों पर नजर डाले में कुल 295 प्रसव में 228 प्रसव आपरेशन के जरीए और मात्र 67 प्रसव सामान्य हुए है। 
    गर्भवतियों की बढ़ेगी परेशानी 
    जिला चिकित्सालय में पदस्थ  वरिष्ठ प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ कलावती पटेल का स्थानांतरण पश्चात गत दिवस  रिलीव कर दिये जाने से जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उनके स्थान पर सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ महिला चिकित्सक को यहॉ पदस्थ किया गया है। ऐसी स्थिति में वनांचल सोनहत जनपद क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड सकती है। उस क्षेत्र के महिलाओं को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल आना पड़ सकता है।
    निश्चेतना विशेषज्ञ अब नही हुए पदस्थ
    जिला चिकित्सालय में अब तक निश्चेतना चिकित्सक की नियुक्ति नही हो पायी है। उधार के निश्चेतना विशेषज्ञ की सेवाएॅ ली जाती है। जानकारी के अनुसार मनेंद्रगढ के एक निश्चेतना विशेषज्ञ की सेवाएॅ यहॉ विभिन्न ऑपरेशन के लिए लिया जाता है उनके सेवाओं के एवज में डेढ़ से दो हजार रूपये की राशि दी जाती है जिसके लिए मरीज के परिजनो को भी उसका भुगतान करना पड़ता है। जिले के सबसे बडे चिकित्सालय में जिला अस्पताल बनने के पश्चात अब तक निश्चेतना विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हुई  है।  निश्चेतना विशेषज्ञ के अभाव मे कई बार आपात काल में गर्भवती महिलाओं को निजी चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है इस समस्या से  नजात मिलेगा। 

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Posted Date : 10-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 10 जनवरी। कोरिया जिले में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि को किसानों के नाम पर एक और घोटाला सामने आया है। प्रशासन ने विधायक आदर्श ग्राम बुढ़ार के हर किसान के घर वर्मी टांका निर्माण कराने की योजना बनाई, कृषि विभाग ने आनन-फानन में आधे-अधूरे निर्माण को अंजाम दिया, कई के बने तो कईयों को पता ही नहीं चला, जिनके बने वो किसी काम के नहीं है, बने इतने गुणवत्ताहीन कि बिना उपयोग के ही टूट गए, कई ग्रामीण जिनके नहीं बने है वो बनने के बाट जोह रहे हैं।  मजे की बात तो यह कि साल भर बाद भी  कृषि विभाग के अधिकारी केंचूआ लेकर नहंी पहुंचें है। डीएमएफ राशि से प्रशासन की बनाई योजना से 86 लाख से ज्यादा रूपए की  है।  इस संबंध में कृषि उपसंचालक डीके रामटेके ने   जांच की बात कही। 
    जानकारी के अनुसार वर्तमान जिला प्रशासन ने जनपद पंचायत बैकुंठपुर अंतर्गत विधायक आदर्श ग्राम बुढार के 292 किसानों के घर में वर्मी टांका निर्माण कराया। योजना की स्वीकृति एक साल पहले 12 जनवरी 2018 को दी गई। कृषि विभाग ने पूर्व मंत्री के गोद लिये आदर्श गांव का चयन किया। लेकिन आज एक वर्ष बीत जाने के बाद भी  अधूरा पड़ा  है, कई किसानों के यहॉ तो उक्त कार्य की शुरूआत भी नहीं हुई है।
     एक वर्मी टांका निर्माण कार्य के लिए 29 हजार 500 रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी और प्रथम किश्त के रूप में 14 हजार 800 रूपये दे भी दिए गए। कुल 292 किसानों के लिए 86 लाख 14 हजार की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें आधी 43 लाख 7 हजार विभाग को स्वीकृति के समय ही दे दी गई। गांव के आगरदास का वर्मी टांका पूरी तरह टूट गया, जबकि उनके भाई सागर दास का आज भी अधूरा और एक ओर से टूटा पडा है, इसी तरह प्रशिद्ध नारायण, मुरलीदास, विश्वनाथ प्रसाद, पारस नाथ के बने वर्मी टांका भी क्रेक हो चुके है और वो इनका किसी भी तरह का उपयोग भी नहीं कर रहे है। 
    ग्रामीण बताते हंै कि निर्माण के दौरान कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर आए थे और वादा करके गए थे कि वर्मी टांका बनने के बाद सभी किसानों को केंचूआ मिलेगा, जिससे आप केंचुआ खाद बनाएंगे और खुद घर के बने खाद अपने खेतों में डालकर जैविक खेती करोगे, परन्तु जैसे जैसे काम बढ़ता गया, कुछ स्थानों पर वर्मी टांका पूरा भी हुआ तो नीचे से फटने लगा, परन्तु किसी ने भी सुध लेने की कोशिश नहीं की और ना विभाग के किसी अधिकारी ने पलट कर उनके बने वर्मी टांका की ओर देखने की कोशिश की।  
    किसानों को प्रशिक्षण भी नहीं 
    जनपद पंचायत बैकुंठपुर के आदर्श ग्राम बुढार में सैकडों किसान परिवारों के यहां करोड़ों रूपये खर्च कर वर्मी टॉका निर्माण तो करवाया गया। परन्तु किसी भी लाभार्थी किसान परिवार को आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान नहीं किया गया। जब गांव के कुछ किसानों से बात की गयी तो उनका कहना था कि उन्हें अभी तक किसी प्रकार का प्रशिक्षण इस संबंध में नही प्रदान किया गया है। किसानों का कहना है कि पहले टांका बनाने का कार्य तो पूरा कर ले। 
    समीक्षा न जांच
    डीएमएफ के तहत प्रशासन के द्वारा बनाई योजना के कार्यो की जिला प्रशासन ना तो समीक्षा करता और ना तो शिकायत आने पर किसी तरह की जांच की जाती है। यही कारण है कि अधिकारियों के द्वारा कार्य को समय सीमा पर पूर्ण कराने की दिशा में गंभीरता नही दिखाई जाती, वर्मी टांका निर्माण का नतीजा यह रहा कि लगभग 1 वर्ष बाद में कार्य अपूर्ण है। जिस उद्देश्य को लेकर कार्य की शुरूआत की गयी थी उसका लाभ आज किसी भी हितग्राही को नहीं मिल रहा है। 

     

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Posted Date : 07-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 7 जनवरी। प्रदेश के कोरिया जिले में सबसे पहले तत्कालीन कलेक्टर एस प्रकाश की पहल से  कोरिया नीर वाटर एटीएम की शुरूआत जिले से हुई जिसके बाद प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी वाटर एटीएम स्थापित किये गये।  वही जिस कोरिया जिले से वाटर एटीएम की पहल शुरू हुई आज वही कई वाटर एटीएम दम तोड़ रहे है। उचित संचालन की दिशा में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। 
    जानकारी के अनुसार एक वाटर एटीएम स्थापित करने के लिए लाखों रूपये खर्च किये है। इसके बाद भी इसके रख रखाव व उचत संचालन में ध्यान नही दिया जाता है। जिसके चलते जिले के कई क्षेत्रों के वाटर एटीएम बंद पडे है तो शुरू करने की दिशा में पहल नही की जा रही है। 
      जिले के खडगवॉ थानांतर्गत ग्राम पोडी में भी लाखों रूपये खर्च कर कोरिया नीर वाटर एटीएम स्थापित किया गया जो पिछले एक वर्ष सेे अधिक समय से बिगड़ा पडा है इसे सुधार करने की दिशा में संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा ध्यान नही दिया जा रहा है। लंबे समय से वाटर एटीएम के बंद पडे होने के कारण क्षेत्र के लोगों को इसका तनिक भी लाभ नही मिल पा रहा है। जिसके चलते क्षेत्रीय लोग अपनी व्यवस्था से ही पेयजल प्राप्त कर रहे है। संबंधित विभाग की यह लापरवाही की हद हो गयी कि एक वर्ष से ज्यादा समय तक कही का वाटर एटीएम बंद पडा है। लगता है कि विभागीय अधिकारी स्थापित वाटर एटीएम के बारे में भूल ही गये है। जिले में ऐसे कई स्थान है जहॉ का वाटर एटीएम कई माह से खराब पडे हुए है। क्षेत्रीय लोगों के द्वारा सुधार कार्य की मॉग किये जाने के बाद भी सुधार कार्य नही हो पा रहा है। यदि जिले के विभिन्न स्थानों पर बिगडे पडे वाटर एटीएम को सुधार दिया जाता है और इस दिशा में विभागीय पहल त्वरित गति से होती है तो वाटर एटीएम का लाभ क्षेत्र के लोगों को पूरा मिल सकेगा और वे वाटर एटीएम के माध्यम से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर सकते है। 
    मुख्यालय में ही कई पड़े हंै बंद
    कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में ही आधा दर्जन से अधिक वाटर एटीएम विभिन्न स्थानों  में स्थापित किये गये है जिनमें से कुछ शुभारंभ काख् इंतजार कर रहे है तो कई जगहों का वाटर एटीएम बिगड़कर बंद पडा हुआ है। नियमित रूप से दो तीन जगहों के ही वाटर एटीएम का संचालन हो रहा है। इसके अलावा शेष जगहों पर लगाये गये वाटर एटीएम बंद पड़े हैं और कुछ शंभारंभ होने का इंतजार है। पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद भी शुभारंभ किसी जनप्रतिनिधि से कराये भर के लिए लंबा इंतजार करना पड रहा है। यदि सभी जगहों के वाटर एटीएम चालू हो जाता तो अपने ही क्षेत्र में लागों को शुद्ध आरओं का पानी मिलता।

     

     

     

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Posted Date : 07-Jan-2019
  • भूमि का स्वामित्व संजय अग्रवाल को मिला 

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 6 जनवरी। जिस विवादित भूमि पर डीएमएफ की राशि के दुरूपयोग की खबर 'छत्तीसगढ़Ó ने लगाई थी, प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया था, अब उक्त भूमि का स्वामित्व संजय अग्रवाल को मिल गया है, ऐसे में लाखों रूपए खर्च कर प्रशासन ने ना सिर्फ बिल्डर की मदद की, बल्कि उस समय पूर्व मंत्री को उपकृत करने तार फेंसिंग की गई ताकि भूमि सरकारी नियंत्रण में दिखाई जा सके, हुआ यह कि 24 लाख से ज्यादा की राशि बर्बाद हो गई।
    जानकारी के अनुसार कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर का बहुचर्चित अदला बदली मामले को सही ठहराते हुए राजस्व न्यायालय बिलासपुर ने उक्त भूमि को संजय अग्रवाल को दे दिया है। दैनिक छत्तीसगढ़ ने 16 फरवरी 2018 को प्रकाशित खबर में बताया था कि प्रशासन ने इस विवादित भूमि पर कुछ 24 लाख 60 हजार रू खर्च कर दिए, इसके लिए लोक निर्माण विभाग को वारवेड वायर फेंसिग का जिम्मा सौंपा गया, और विभाग ने 32 प्रतिशत बिलो टेंडर पर फेंसिग कार्य किया। सिर्फ फेसिंग में अनाप शनाप खर्च को लेकर प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। भूमि के सारे विवादों पर पानी फेरते हुए राजस्व मंडल के आदेश ने प्रशासन की बेवजह राशि खर्च पर सवाल खड़े कर दिए है। तब तत्कालीन एसडीएम ने फेंसिंग को गलत बताते हुए कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो भूमि पर फेसिंग के लिए राशि खर्च करना गलत है। 
    क्या था मामला
    जानकारी के अनुसार जिलामुख्यालय बैकुंठपुर में कालेज से लगी एनएच 43 स्थित भूमि को लेकर पूर्व नपा अध्यक्ष व सांसद प्रतिनिधि शैलेष शिवहरे, भानू पाल, विपिन बिहारी जायसवाल, संजय जायसवाल के साथ दर्जनों लोगों ने एक सप्ताह तक धरना दिया, मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, उनके साथ पूर्व मंत्री खुद फरियादी बनकर मुख्यमंत्री से कार्यवाही के लिए रायपुर में मिले। जिसमें कांग्रेस भाजपा के दोनों नेता साथ रहे, आरोप लगाया कि नगर पालिका एनओसी फर्जी लगाया गया था, मुख्यमंत्री ने कमिश्नर स्तर की जांच करवाई।  इसी बीच कमिश्नर कार्यालय से फाइल की गायब हो गयी, बाद में फाइल में एसडीएम कार्यालय के सामने पड़ी मिली।  फाइल को कोई भी लेने को तैयार नहीं था, बाद में सब कुछ ठीक हो गया, मामला धीरे-धीरे लोगों के जेहन से उतर गया। उसके बाद प्रशासन ने डीएमएफ की राशि के तहत लोक निर्माण विभाग को विवादित भूमि पर बाउंड्रीवाल निर्माण करने को कहा, विभाग ने 32 प्रतिशत बिलों में टेंडर जारी कर काम भी दे दिया। निर्माणाधीन बाउंडीवाल को लेकर लोग हैरान है, लोग ये समझ नहीं पा रहे हंै कि बाउंड्रीवाल का निर्माण बिल्डर करवा रहा है या प्रशासन। ऐसे में प्रशासन उक्त विवाद से लोगों और पूर्व मंत्री और जनप्रतिनिधियों का ध्यान हटाने के लिए बाउंडी वाल निर्माण करा दिया, तब मामला राजस्व मंडल पहुंच चुका था और अब फैसला संजय अग्रवाल के पक्ष में आ गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ द्वारा उठाया सवाल सही साबित हुआ कि कहीं प्रशासन बिल्डर की मदद कर रहा था। 
    आवदेन पर अधिकारियों 
    ने बदल दी जमीन
    अदला बदली के मामले को लेकर सरकार भी परेशान है, और मामले में कार्यवाही को लेकर चुप्पी साधे बैठी हुई है, दरअसल, संजय अग्रवाल ने खाली पड़ी भूमि को लेकर आवेदन किया और उसके बदल अपनी रामपुर स्थित भूमि देने की बात कही, जिसके बाद तत्कालिन पटवारी, आरआाई, तहसीलदार, एसडीएम और फिर अपर कलेक्टर ने तमाम कागजी कार्यवाही पूरी करते हुए कालेज की भूमि बिल्डर के नाम कर दी। अब सरकार यदि कार्यवाही करती है, तो कई अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी, यही कारण है सरकार इस मामले में बिल्कुल चुप्पी साधे बैठी हुई है, जबकि जांच रिपोर्ट कई महिनों से सीएस के पास पड़ी हुई है। 

    भूमि रही विवादित
    जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 में उक्त भूमि पर नवीन विश्राम गृह बनाए जाने का प्रस्ताव तब की भाजपा सरकार ने पास किया। तत्कालीन विधायक डॉ रामचंद्र सिंहदेव ने विरोध किया और वहां लगे बोर्ड पर कांग्रेसियों ने कालिख पोत दी थी, जिसके बाद उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद उक्त भूमि को उद्योग विभाग को दे दिया गया, भूमि कई साल तक ऐसे ही खाली पड़ी रही, जिसके बाद संजय अग्रवाल ने भूमि के लिए आवेदन दिया और तत्कालीन प्रशासन ने श्री अग्रवाल की रामपुर स्थित भूमि को बदल कर एनएच की भूमि दे डाली। 

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Posted Date : 03-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 3 जनवरी। कोरिया जिले में स्वच्छ भारत अभियान के तहत हितग्राहियों के  शौचालय निर्माण कार्य को लेकर अब लगातार शिकायतें सामने आने लगी है। बचरापेाडी के समाजिक कार्यकर्ता चंद्रभूषण चक्रधारी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत के बाद कार्यपाही की मांग की गई,शिकायत पर जनपद पंचायत खडगवॉ के कार्यक्रम अधिकारी ने मटेरियल सप्लाई करने वाले प्रोप्राईटर को बिन्दूवार अपना पक्ष कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये है। 
    उल्लेखनीय है शौचालय निर्माण कार्य को लेकर खडगवॉ जनपद क्ष़ेत्र से ढेरों शिकायतें मिलती रही हंै। कई स्थानों पर शिकायत की गयी थी लेकिन इसकी जॉच के नाम पर खानापूर्ति कर दी गयी और भ्रष्टाचार करने वाले साफ बच निकले। 
    प्राप्त जानकारी के अनुसार बचरापोडी सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता चंद्रभूषण चक्रधारी के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी निकाली उसके आधार पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को शिकायत प्रस्तुत कर आवश्यक जांच कार्यवाही किये जाने की मॉग की।
     जनपद पंचायत खडगवां के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपे अपने शिकायत में श्री चक्रधारी ने उल्लेख किया है कि ग्राम पंचायत तोलगा में प्रो रामप्रताप साहू द्वारा 53 नग बिल लगाकर नौ हजार रूपये की दर से 4 लाख 77 हजार रूपये आहरित कर लिया गया है। एक ही बिल में आठ प्रकार के मटेरियल सप्लाई करना बताया है जिसमें ईंट, सीमेंट, दरवाजा,रेता, पाईप, ढक्कन, नल एवं सीट का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार लगाये गये बिलो में से कुछ बिलों उक्तानुसार सील बनाकर मटेंरियल व रेट का उल्लेख किया गया है। जिसके संबंध में शिकायत यह में बताया है कि  ग्राम पंचायत तोलगा व बचरा में प्रो रामप्रताप साहू द्वारा जो मटेरियल सप्लाई की गयी है उसका कोई स्थाई या अस्थाई व्यवसाय नही है और न ही ईंट बनाने का लाईसेंस ही लिया है। लगाये गये सभी बिलो में जीएसटी का निर्धारण नही किया गया है जबकि सभी बिल जीएसटी लागू होने के पश्चात के है। इस मामले में जॉच कर दोषि के विरूद्ध कार्यवाही की मॉग की गयी है। शिकायत मिलने पर जनपद पंचायत खडगवां के कार्यक्रम अधिकारी ने मटेरियल सप्लाई कर्ता को शिकायत के बिन्दूबार जानकारी तीन दिवस के भीतर देने हेतु गत 29 दिसंबर को पत्र प्रेषित कर सूचना दी है। 

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Posted Date : 03-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बैकुंठपुर, 3 जनवरी। नव निर्वाचित भरतपुर सोनहत के विधायक गुलाब कमरो ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका क्षेत्र बेहद लंबा है, कहीं ना कहीं तीन तीन ब्लाक मुख्यालय में निवासरत ग्रामीणों को रोजाना राजस्व अधिकारियों के पास अपने काम के लिए जाना पड़ता है, उनके क्षेत्र की जनता को मनेन्द्रगढ, भरतपुर और सोनहत के राजस्व अधिकारियों से काम की जरूरत पड़ती ही है। 
    ऐसे में राजस्व अधिकारी सरकार और जनता को सर्वोपरि माने, दूर से दूर आने वाली जनता को बेवजह परेशानी ना झेलनी पड़े, उन्हे छोटे छोटे राजस्व के काम के लिए महीनों चक्कर ना लगाना पड़े, नहीं तो कार्यवाही के लिए तैयार रहे। उन्होने कहा कि अभी तक जो होता आया है वह अब नही चलेगा। जनता को परेशानी होगी तो तय है अधिकारियों को भी परेशानी होगी। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के ग्रामीण आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हंै, उनका पूरा जोर उनकी समस्याओं के निदान के लिए रहेगा।
    जीत के बाद आभार प्रदर्शन के लिए पहुंचे विधायक गुलाब कमरो को ग्राम पंचायत कंजिया और शेरी के ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई महीनों से वो अंधेरों में जीने को मजबूर है, कई बार शिकायत किए, हर मंच पर उनके गांव में ट्रांसफार्मर खराब होने की बात कही, परन्तु किसी ने नहीं सुनी, जिसके बाद विधायक ने विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर बदलने के निर्देश दिए। बुघवार को दोनेां ग्राम पंचायत में ट्रांसफार्मर को बदल दिया गया, गांव में महीनों बाद आई बिजली से ग्रामीणोंं में खुशी की लहर दौड गयी।
    किसानों को मिली राहत
    दरअसल, भरतपुर में ज्यादातर किसान रबी के फसल उगाते हंै, उनके खेतों में इस समय पानी की आवश्यकता होती है। जब विधायक ग्राम कंजिया पहुंचे तो ग्रामीणों ने बताया कि उदारी डायवर्सन से गुजरने वाली नहर का पानी उनके खेतों तक पहीं पहुंच रहा है, नहर बीच में से टूट गयी है, ग्रामीणों ने बताया कि उक्त नहर तीन बार टूट चुकी है, जिसके बाद विधायक श्री कमरो ने एसडीओ से कहा कि किसी भी वैकल्पिक तरीके सेे पानी किसानों के खेतों मं पहुंचाने का प्रयास करें, और व्यर्थ बह रहे पानी को रोके। उन्होने टूटी नहर को जोडने के निर्देश दिए और विभाग ने भी तत्पर्यता दिखाते हुए नहर का काम शुरू कर दिया। बमुश्किल कुछ दिनों में किसानों को उनके खेतों में पानी मिलने लगेगा।

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Posted Date : 02-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बैकुंठपुर, 2 जनवरी। कोरिया जिले के चने के बाद केरोसिन वितरण में  भी धांधली बरती जाने की शिकायतें आ रही है। लंबे समय से चलने वाली इस अफरातफरी का यह आलम है कि ज्यादातर दुकानों के स्टॉक में ऑनलाइन कैरोसिन माईनस में बता रहा है। वहीं जिस दुकान का कोटा निर्धारित है उससे कही ज्यादा केरोसिन सप्लाई किया जा रहा है, और तो और वो बंट कहा रहा है इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
    इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी आशीष चर्तुवेदी का कहना है मुझे ज्वाइन किए मात्र डेढ माह हुआ है, परन्तु आप जो जानकारी दे रहे है वो दुकान संचालकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, मामले की जांच की जाएगी और कड़ी कार्यवाही देखने को भी मिलेगी।
    कोरिया जिले में बीते सरकार के कार्यकाल में पीडीएस की दुकानों का जिम्मा सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं के उपर रही, अभी भी उसका संचालन वे ही कर रहे है। छत्तीसगढ़ लगातार खाद्य विभाग मेे खाद्यान वितरण को लेकर खबर का प्रकाशन कर रहा है, ऑनलाइन वितरण प्रणाली के कोर पीडीएस में सबसे ज्यादा धांधली बरती जा रही है। दिसंबर माह में वितरण के बाद बचे स्टॉक को देखकर सजह अंदाजा लगाया जा सकता है कि केरोसिन का स्टॉक नहीं होने के बाद भी 2 हजार से ज्यादा ली केरोसिन माईस में है, इसका मतलब है कि कैरोसिन नहीं मिलने की दशा में भी उचित मूल्य दुकान द्वारा वितरण कर दिया गया है। 
    ज्यादातर दुकानों में यह देखने में आ रहा है कि जिसका जो कोटा निर्धारित है उससे कही ज्यादा केरोसिन का आबंटन किया जा रहा है और तो और दुकानदार उसका वितरण भी करता दिख रहा है। जबकि उसका कोटा काफी कम है। वहीं बीते 3 सालों में जिला प्रशासन की सुस्ती के कारण यह घोटाला बढता गया, क्योंकि उचित मूल्य दुकानों की शिकायतों को दबाया जाता रहा है। ऐसा जिले के लगभग सभी उचित मूल्य दुकानों से प्रतिमाह हेराफेरी जारी है। आलम यह है कि गरीब पात्र हितग्राहियों को दो लीटर मिट्टी तेल नही मिल पा रहा है और कालाबाजार में थोक में मिटटी तेल दे दिया जा रहा है। कालाबाजार में मिट्टी तेल 40 रूपये लीटर तक होटलों, ठेलों में होटल का संचालन करने वालों तक सेटिंग से पहुंच रहा है। इसके अलावा डीजल के विकल्प के रूप मे वाहन मालिकों को मिट्टी तेल प्रतिमाह दिया जा रहा है। डीजल के बढ़ते दाम की अपेक्षा मिट्टी तेल सस्ता पडता है जिसके चलते कई वाहन मालिकों के द्वारा मिट्टीतेल मिलाकर वाहन दौड़ा रहे हंै। 
    कोटे से ज्यादा आबंटन
    कई उचित मूल्य दुकानों में मिट्टी तेल स्टाक में बचे होने के बाद भी कोटा जारी कर दिया जा रहा है जो कालाबाजारी करने के लिए पर्याप्त है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भरतपुर की उचित मूल्य दुकान में सितंबर माह में 78 ली का स्टॉक था, उसे 400 ली केरोसिन भेजा गया, परन्तु ग्रामीणों को नहीं बांटा गया, अक्टूबर के स्टॉक में 478 ली केरोसिन था, उसके बाद उस माह कैरोसिन नहीं भेजा गया और उस माह 485 ली केरोसिन का वितरण कर दिया गया, जिसके बाद नंबवर में 73 ली का स्टॉक और उसी माह 900 ली केरोसिन भेजा गया जिसमें से 879 ली केरोसिन का वितरण बताया गया और 94 ली केरोसिन का स्टॉक दिसंबर माह में था, इसके बाद दिसंबर माह में फिर 400 ली केरोसिन भेजा गया जिसमें से 503 ली केरोसिन बांट दिया गया, अब 9 ली केरोसिन माइनस में स्टॉक है, सवाल यह खडा हो रहा है कि जब केरोसिन स्टॉक में ही नहीं था तो ज्यादा कैसे बांट दिया गया। 
    उज्जवला योजना और बिजली फिर भी कैरोसिन
    भरतपुर तहसील के कई ग्राम पंचायत क्षेत्र ऐसे भी है जहां बिजली की व्यवस्था हो गयी है तथा उन क्षेत्रों के प्रत्येक हितग्राहियों के द्वारा प्रतिमाह मिट्टी तेल का उठाव नही करते है। इस तरह उनका हिस्सा एक एक कर कई लोगों का बचता है इसके बाद भी अगले माह नई कोटा फिर जारी कर दी जाता है। बचत हुई मिट्टी तेल के साथ फर्जी तरीके से मिट्टी तेल वितरण दर्ज किये जाने की भी शिकायत है। वहीं लगभग ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन भी दिया गया है।  बावजूद इसके निर्धारित कोटा के बाद ज्यादा केरोसिन प्रदाय किया जाना कही ना कही कुछ गलत की ओर इशारा करता है। जिसकी भी जॉच बेहद जरूरी है। कमीशन के कारण ही निष्पक्षता के साथ जांच नही हो पाती जिससे कि भ्रष्टाचार उजाकर नही हो पा रहा है।

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Posted Date : 02-Jan-2019
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    मनेंद्रगढ़, 2 जनवरी। शहर समेत आसपास के सभी ग्रामीण अंचलों में नए वर्ष का उत्साह धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान अमृतधारा जलप्रपात के नजदीक हजारों की संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचे । यहां दिनभर मेले जैसा माहौल देखने को मिला। इसके साथ ही साथ हसदेव नर्सरी में भी लोगों का तांता लगा रहा । लोग दिन भर खुशियां मनाते दिखे।
    नववर्ष के अवसर पर जहां कुछ लोग नदियों जलप्रपात के नजदीक पहुंचे, वही काफी लोग शहर के मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थलों में पहुंचकर परिवारिक सुख समृद्धि की कामना की। इस मौके पर शहर के श्री राम मंदिर ,श्री संकट मोचन धाम सिरौली, श्री शिरडी साईं दरबार, श्री विजय हनुमान टेकरी समेत अन्य धार्मिक स्थलों में दिनभर लोगों की भीड़ जमा रही। इस अवसर पर अमृतधारा जलप्रपात के नजदीक लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था ।यहां लोग काफी संख्या में पहुंचे जरूर थे लेकिन हसदेव नदी पर बने जलप्रपात के पास सुरक्षा के संसाधनों का आभाव लोगों को काफी भयभीत कर रहा था।
    अमृतधारा जलप्रपात को देखने के लिए जो गैलरी बनाई गई थी वह पूरी तरह से टूट गई है ,वहां पर प्लास्टिक की रस्सी बांधकर काम चलाया जा रहा था ।वही अमृतधारा जलप्रपात के नजदीक जो होटल बंबू हट बनाए गए हैं वह पूरी तरह से टूट फूट गए हैं।
    इसके साथ ही साथ भीड़भाड़ होने के बावजूद भी सुरक्षा के जो इंतजाम किए जाने चाहिए उनका अभाव लोगों को काफी खल रहा था। अमृतधारा जलप्रपात के नजदीक पुलिस प्रशासन की पुख्ता व्यवस्था थी, लेकिन लाई से अमृतधारा पहुंचने वाले मार्ग पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आने जाने वाले लोगों को काफी परेशान कर रहा था। शराब के नशे में धुत कई युवा लोगों को परेशान करते दिखाई दिए ,यहां पुलिस की व्यवस्था ना होने से महिलाओं को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही थी। 
    हैरत वाली बात तो यह है कि जब जिले के आला अधिकारी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि आज जलप्रपात में हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं तो गिनती के कुछ पुलिसकर्मी भेज दिया।

     

     

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