‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 23 फरवरी। आज का दिन भारतीय इतिहास और छत्तीसगढ़ की माटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं भावुक है। आज हम देश की तीन ऐसी महान आत्माओं (कस्तूरबा गांधी, मौलाना आजाद, डॉ. खूबचंद बघेल) को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता, शिक्षा और समाज सुधार में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। संयोगवश, इन तीनों महान विभूतियों की पुण्यतिथि 22 फरवरी को ही है। उक्त बातें रविवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव ने कांग्रेस भवन में कही।
रविवार 22 फरवरी को तीनों महान विभूतियों की स्मृति में एक संयुक्त श्रद्धांजलि सभा राजीव भवन महासमुंद में आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत जिलाध्यक्ष द्वारकाधीश यादव ने तीनों स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयों को पुष्प अर्पित कर की।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष द्वारकाधीश यादव ने तीनों महान व्यक्तियों का जीवन परिचय बताया। कहा कि कस्तूरबा गांधी ने न केवल महात्मा गांधी के हर संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया, बल्कि स्वयं भी स्वाधीनता आंदोलन में एक साहसी सत्याग्रही के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाई। एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और नारी शक्ति की प्रतिमूर्ति और महात्मा गांधी जी की सहधर्मिणी थीं।
उन्होंने न केवल गांधीजी के आदर्शों का समर्थन किया, बल्कि स्वयं भी सक्रिय राजनीति और समाज सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिनका निधन 22 फरवरी 1944 को पुणे के आगा खान पैलेस में बंदी के रूप में हुआ था। उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में गांधी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया और जेल की यात्राएं सहीं।
कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात विद्वान और स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री थे। उनका पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था, लेकिन वे ‘आजाद’ उपनाम से प्रसिद्ध हुए। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष (1923 में, मात्र 35 वर्ष की आयु में) बने। उन्होंने विभाजन का कड़ा विरोध किया और संयुक्त भारत के समर्थक रहे। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने आईआईटी, यूजीसी और साहित्य अकादमी जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना की। उनका मानना था कि शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण का मुख्य स्तंभ है। उनके जन्मदिन, 11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें 1992 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान च्भारत रत्नज् से नवाजा गया। डॉ. खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल चिकित्सक और प्रखर साहित्यकार थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन छत्तीसगढ़ की अस्मिता और यहाँ के किसानों-मजदूरों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्हें पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना करने वाले शुरुआती नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने 1967 में रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ भ्रातृसंघ’ की स्थापना की ताकि क्षेत्रीय एकता को मजबूत किया जा सके। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और 1930 के नमक सत्याग्रह, 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की, जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
समाज में व्याप्त छुआछूत और भेदभाव को मिटाने के लिए उन्होंने ‘पंक्ति तोड़ो आंदोलन’ चलाया।
कार्यक्रम को शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत चावला ने संबोधित करते हुए कहा देश के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान विभूतियों को केवल जयंती अथवा पुण्यतिथि पर याद करने के अलावा हमें भी मौका मिलने पर देश तथा देश की जनता के लिए उसी तरह समर्पित होने के लिए तैयार रहना है जैसा अतित में महान लोगों ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों का आभार प्रदर्शन मंडल अध्यक्ष खिलावन बघेल ने किया।
उक्त श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष द्वारकाधीश यादव, शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत चावला, मंडल अध्यक्ष खिलावन बघेल, न.पा. अध्यक्ष निखिलकांत साहू, अन्नू चन्द्राकर, संजय शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष निर्मल जैन, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष दुर्गा सागर, पार्षद मुस्ताक खान विक्की, जसबीर ढिल्लों, भरत ठाकुर, सोनम बंसोड, तबरेज खान, टोमन सिंह कागजी, नितेंद्र बेनर्जी, सोमेश दवे, तुलसी साहू, राजू साहू, हुल्लास गिरी गोस्वामी, सचिन गायकवाड, गौरव चंद्राकर, गोपी तारक, डॉ तरुण साहू, प्रदीप चंद्राकर, अक्षय साकरकर, देवेश शर्मा, सुनील चंद्राकर, राशी महिलांग, लोकेश मांझी, जावेद चौहान, जय पवार, बसंत चंद्राकर, लीलू साहू, मोती साहू, आशीष साहू, कुणाल मेश्राम, अऊम मिश्रा, मदन भारतीय, भानु सोनी आदि उपस्थित रहे।