‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 20 अप्रैल। बलौदाबाजार नगर समेत आसपास के इलाके का जल स्तर बीते दो दिनों में तेजी से गिरा हैं। खासतौर पर ग्राम झीपन और बिटकुली गांव और उनके करीबी गांव में।
अकेले झीपन की ही बात करें तो पिछले साल यहां किसानों ने 250 एकड़ जमीन पर ग्रीष्मकालीन धान की फसल ली थी। फसलों को पानी न मिलने के कारण इसमें से 75 फ़ीसदी खेती सूख गई। बाकी 25 फ़ीसदी 63 एकड़ जमीन पर किसानों ने यह सोचकर इस बार ग्रीष्मकालीन धान बो लिया कि उनके खेतों के नीचे जलस्तर ठीक हैं।
हालांकि, इसमें से भी 75 फ़ीसदी करीब 47 एकड़ खेती इस साल भी सूख गई हैं। प्रभावितों में सीताराम वर्मा, पदमन वर्मा, युरेंद्र निषाद, संतोष वर्मा, राजेश वर्मा, भगेलु सतनामी, चोखे वर्मा जैसे कई और किसान शामिल हैं। उनका कहना है कि रोपाई के बाद खाद दवाई डालकर छोड़ तब खेतों में पर्याप्त पानी और नमी थी। अब जब ऐन फसल पकने का दौर है, तब फसल तेजी से सूख रही हैं। अपनी मेहनत को वे अपने ही आंखों के सामने बर्बाद होता देखकर काफी मायूस हैं।
यही हाल नजदीकी गांव बिटकुली का हैं। यहां लगभग 105 एकड़ में धान की फसल ली गई थी। इसमें से केवल 10-12 एकड़ में ही फसल बचाने की उम्मीद हैं। इसके अलावा जांगड़ा में बोए गए महज 12 एकड़ में से चार एकड़ की फसल बर्बाद हो गई हैं। इसी तरह पडक़ीडीह में 70 एकड़ में से 35 एकड़ यानी सीधे आधी फसल सूखकर चौपट हो गई हैं।
5 साल पहली बार ऐसा सूखा पड़ा, अब लगातार दूसरी बार
इलाके के किसान बताते हैं कि तकरीबन 5 साल पहले पहली बार गर्मी के दिनों में पानी की कमी से फसल सूखने की पहली घटना हुई थी। इसके बाद के 3 साल तक सब ठीक रहा। पिछले साल बड़े पैमाने पर धान की फसल सूखी थी। उसके बाद यह लगातार दूसरी बार है, जब धान की फसल पानी की कमी की वजह से ठीक पकने से पहले सूख रही हैं।
पानी खरीदा, फसल मवेशियों को चराया
भोथीडीह के किसान चिंताराम यदु ने बताया कि सूखे के बीच अपने खेत में लगी फसल को पकाने के लिए वे दूसरे किसान से पानी खरीद रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अपने खर्चे से 400 मीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई हैं। जबकि बिटकुली में प्रदीप वर्मा ट्रैक्टर-टैंकर की मदद से अपनी खेतों तक पानी ला रहे हैं।
वहीं झीपन के युवरेंद्र निषाद, कामदेव वर्मा ने बताया कि अपनी फसल में बालियां आ चुकी थी। पानी के बिना वे सूख गई है, इसलिए अब इन्हें मवेशियों को चराने के तौर पर खिला रहे हैं।
दलहन-तिलहन में बंदर है बाधा
भारतीय किसान संघ के जिला संयोजक दिनेश वर्मा दिनेश्वर वर्मा, भोथीडीह के लीलूराम वर्मा, लोहारी के राजेंद्र वर्मा ने कहा कि वाटर लेवल डाउन होने से पंपों के फेल होने के कारण जैसी स्थिति बनी है, उससे आने वाले समय में कोई भी किसान ग्रीष्मकालीन धान का फसल नहीं ले पाएंगे। इसकी जगह दलहन-तिलहन की फसल न लेने की वजह बताते हुए वे कहते हंै कि इलाके में बंदरों का प्रकोप हैं। वे मटर, चना, मसूर, तिवरा उगाएंगे तो बंदर कुछ नहीं बचाएंगे।
गेहूं बिका पानी के मोल तो धान लेने की मजबूरी
इस बार क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में गेहूं की फसल ली थी जो पानी के मोल दिख रहा है, जिससे किसानों की लागत नहीं निकल पा रही है। यही वजह है कि दो पैसा अधिक मिलने के लालच में किसानों ने बड़े उत्साह के साथ धान की फसल ली थी।
किसानों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ग्रीष्म ऋ तु धान फसल लेने पर हाय तौबा मचाने वाले शासन-प्रशासन क्या सीमेंट संयंत्रों और स्टोन क्रशरों द्वारा पत्थर उत्खनन के लिए की जाने वाली गहरी खुदाई बंद करवा करवाएगा? पर्यावरण को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाने वाले अवैध ईटों का निर्माण बंद होगा? क्या भारी मात्रा में पेड़ों की कटाई बंद होगी?