‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 1 जून। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच बलौदाबाजार क्षेत्र में डीजल और पेट्रोल की कम आपूर्ति के कारण किसानों और ट्रैक्टर संचालकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ईंधन की सीमित उपलब्धता के चलते खेतों में अकरस जुताई प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही शासन द्वारा जेरीकैन और प्लास्टिक डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर लगाए गए प्रतिबंध ने किसानों की व्यावहारिक दिक्कतों को और बढ़ा दिया है।
ट्रैक्टर संचालकों के अनुसार, ईंधन के लिए उन्हें खेतों से 5 से 20 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंपों तक ट्रैक्टर लेकर जाना पड़ रहा है। वहां भी लंबी कतारों में लगने के बाद प्रति ट्रैक्टर मात्र 30 से 35 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है, और कई बार स्टॉक समाप्त होने पर खाली हाथ लौटना पड़ता है।
ईंधन की कमी और कुछ मामलों में कथित तौर पर अधिक दामों (ब्लैक) में डीजल खरीदने की मजबूरी के कारण कृषि लागत बढ़ गई है। पहले जहाँ अकरस जुताई की दर 800 से 1000 प्रति घंटा थी, वह अब बढक़र 1200 से 1500 प्रति घंटा तक पहुंच गई है।
किसानों ने समस्याएं की साझा
28 एकड़ के किसान और तीन ट्रैक्टरों के मालिक जितेन्द्र वर्मा (पडक़ीडीह) ने बताया कि एक ट्रैक्टर को प्रतिदिन 70 से 80 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है, जबकि पंपों से मात्र 30 लीटर ही मिल रहा है। खेतों से पंप तक आने-जाने और कतार में लगने में ही दो से ढाई घंटे का समय व्यय हो जाता है।
खपराडीह निवासी राजकुमार बाघमार ने बताया कि उनकी 18 एकड़ खेती और एक जेसीबी मशीन हैं। डीजल के अभाव में उनकी मशीन बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। खेत समतलीकरण और जुलाई का काम समय पर नहीं हो पा रहा। है। जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है
भोथाडीह निवासी पारस निर्मलकर ने बताया कि उनके पास 60 एचपी का 11 फाल वाला ट्रैक्टर हैं। जिसे प्रतिदिन लगभग 90 से 100 लीटर डीजल की आवश्यकता पड़ती हैं, लेकिन पंपों से 30 से 35 लीटर ही मिल रहा है। दूरी तय करने में ही 10 लीटर ईंधन खर्च हो जाने के कारण उन्होंने बाहरी गांवों (सरकीपार, साराह भालेसुर, सेमराडीह) में जुताई का काम बंद कर केवल अपने गांव तक सीमित कर दिया है।
ग्राम चंडी निवासी पीतांबर वर्मा ने बताया कि उनके 10 एकड़ खेत है लेकिन अभी तक अकरस जुताई शुरू नहीं हो पाई हैं। डीजल संकट और बढ़ती लागत के कारण खेती करना कठिन हो जा रहा हैं।
रवेली निवासी नोहर वर्मा की 20 एकड़ खेती हैं। ट्रैक्टर और डीजल की कमी के कारण खेत की जुताई समय पर नहीं हो पा रही हैं। बारिश आने से पहले खेत तैयार नहीं हुआ तो खरीफ फसल प्रभावित हो जाएगी।
पुनीत राम साहू ने बताया कि उनके पास खेती के साथ हार्वेस्टर भी हैं। डीजल संकट के कारण मशीनों का संचालन मुश्किल हो गया हैं। खेती और मशीन दोनों पर संकट मंडरा रह हैं।
सरकीपार निवासी किसान बाला बघेल ने कहा कि डीजल के कारण अभी तक खेती की अकरस जुताई नहीं हो पाई हैं। उन्होंने शासन से किसानों को पर्याप्त डीजल उपलब्ध कराने की मांग की हैं। इसी प्रकार भारत चतुर्वेदी, पीलाराम दास सतनामी, हरिश्चंद्र यादव, पकलू वर्मा, राजेश पटरे, दौलत सतनामी, भोजराम वर्मा सहित क्षेत्र के अनेक किसान डीजल संकट से जूझ रहे हैं।
ट्रैक्टर संचालकों को प्रतिदिन 60 से 80 लीटर डीजल दे
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सुहेला अध्यक्ष ने कहा कि खरीफ की तैयारी को सुचारू रखने के लिए सरकार को ट्रैक्टर संचालकों के लिए पर्याप्त ईंधन सुनिश्चित करना चाहिए और प्रतिदिन कम से कम 60 से 80 लीटर डीजल उपलब्ध कराना चाहिए।
भुवनेश्वर वर्मा पूर्व अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस) ने कहा कि पिछले 15 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि से खेती की लागत बढ़ गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
मंडल अध्यक्ष गजेंद्र वर्मा ने नीतिगत विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार एक ओर आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर इन संयंत्रों को चलाने के लिए आवश्यक डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसानों को तत्काल राहत देते हुए पर्याप्त आपूर्ति बहाल की जाए।