छत्तीसगढ़ » बीजापुर

Date : 16-Oct-2019

पट्टा, सड़क और पानी की मांग को ले सलवा जुडूम पीडि़त सड़क पर उपेक्षा का दंश झेल रहा पालिका का सबसे बड़ा वार्ड

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 16 अक्टूबर।
नगरपालिका के शांतिनगर वार्ड में व्याप्त मूलभूत समस्याओं को लेकर वार्ड के 700 से ज्यादा लोगों ने विधायक निवास के बाहर जमकर नारेबाजी की। लोगों ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। 
ज्ञात हो कि वर्ष 2004 के बाद सलवा जुडूम से पीडि़त तोयानार, गुड्डीपाल, कांदुलनार, आदेड, सागमेटा, जिनिप्पा, मोरमेड, पदेडा, पालनार, पुसनार, गंगालूर, पोंजेर, भोसागुड़ा, पेनगुंडा, नेतिकाकरेड और बासागुड़ा क्षेत्र के ज्यादातर सलवा जुडूम पीडि़तों ने बीजापुर नगर के शांतिनगर वार्ड में शरण ली है। शांतिनगर में घर बनाकर वहां रहने लगे हंै। वर्ष 2004 के बाद 15 साल बीत चुके हैं, उन्हें अब तक उनके जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है। नगरपालिका कार्यालय से शांतिनगर होते हुए नए बस स्टैंड तक पहुंचने वाले एकमात्र मुख्य सड़क भी बनने के कुछ वर्षों में जर्जर हो गई है। इस सड़क पर बमुश्किल दुपहिया वाहन चल पाते हैं। सड़क की हालत बेहद दयनीय हो चली है। करीब एक किमी बनी इस सीसी सड़क में दर्जनों गड्ढे हैं, जो बारिश के दिनों में भर जाते हैं और वार्डवासियों का सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है।

शांतिनगर वार्ड को चट्टानपारा के नाम से भी जाना जाता है 

भौगोलिक स्थिति ऐसी कि यहां का भूजल स्तर पालिका के 15 वार्डों में सबसे अलग है। इक्का-दुक्का हैंडपम्प हैं, जो खराब स्थिति में हैं। पालिका क्षेत्र में शांतिनगर ड्राई जोन इलाके में आता है, जहां बोर खनन भी असफल हो जाते हैं। शांतिनगर में 6000 हजार से ज्यादा की आबादी हैं जहां टैंकरों के माध्यम से ही जलापूर्ति की जाती है जो कि नाकाफी है। 
भूजल स्तर नीचे होने की वजह से पीने के पानी की आपूर्ति भी पूरी तरीके से नहीं हो पा रही है।

इसके पूर्व में चार दफे शांतिनगर वार्डवासियों ने धरना, रैली के माध्यम से जिला प्रशासन और सरकारों का इस समस्या की ओर ध्यानाकर्षण किया, पर नतीजा नहीं निकला। अब अपने ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ वार्ड पार्षद पुरुषोत्तम सल्लुर के नेतृत्व में 500 से ज्यादा लोगों ने कलेक्टर बीजापुर से मिलकर अपनी समस्याएं बताई। 

बीजापुर कलेक्टर के डी कुंजाम शांतिनगर के प्रतिनिधिमंडल से मिले। उन्होंने वार्डवासियों की हर मांगों को गंभीरता से सुना। कलेक्टर ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को बुलाकर समस्या के निराकरण करने का निर्देश दिए। कलेक्टर ने पत्रकारों को बताया कि वे स्वयं शांतिनगर वार्ड का दो बार मुआयना कर चुके हैं, जहां वाकई में समस्याएं व्याप्त हैं, जिनके निराकरण के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।--


Date : 15-Oct-2019

12 किमी पक्की सडक़ 12 महीने में ही उखड़ी!, भ्रष्टाचार की शिकायत, कार्रवाई की मांग

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बीजापुर, 15 अक्टूबर। जिले के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित व नक्सलियों के रेड कॉरिडोर कहे जाने वाले पामेड़ में आजादी के 70 साल बाद बनी 12 किमी सडक़ बनने के 12 माह भी नहीं टिक सकी और सडक़ पहली ही बारिश में गड्डों में तब्दील हो गई है। सडक़ की दुर्दशा ने पामेड़ के ग्रामीणों को परेशान कर दिया है।

1200 जवानों की सुरक्षा के बीच 9.60 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई पामेड़ की 12 किलोमीटर की पक्की सडक़ पर निर्माण के 12 महीनों में ही 712 गड्ढे हो गए हैं। नक्सलगढ़ में सडक़ निर्माण के दौरान जवानों की शहादत पर भ्रष्टाचार हावी नजर आ रही है। नक्सल प्रभावित इलाकों में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखनी हो तो जिले का पामेड़ इसका ताजा उदाहरण है। यहां जवानों की शहादत पर भी भ्रष्टाचार भारी है। दरअसल इंटर स्टेट कॉरिडोर पर बसे पामेड़ को आजादी के सात दशक बाद सडक़ मार्ग से जोडऩे की कवायद एक साल पहले शुरू हुई थी। अब निर्माण के चंद महीनों बाद ही करोड़ों रुपयों से बनी पक्की सडक़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।

तेलंगाना के चेरला सीमा पर बसे बीजापुर के पामेड़ में सिर्फ 12 किलोमीटर की सडक़ निर्माण कार्य की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ , एसटीएफ  और जिला बल के 1200 जवानों को तैनात किया गया था। इस सडक़ निर्माण के दौरान 6 बार नक्सलियों ने हमला किया। 11 फ रवरी 2018 को सडक़ सुरक्षा के दौरान सहायक आरक्षक सोनधर हेमला का पैर नक्सलियों के लगाए प्रेशर आईईडी पर पड़ा, जिससे जवान की मौके पर ही मौत हो गई। इससे पहले 3 फ रवरी 2018 को नक्सली हमले में प्रधान आरक्षक अरविंद कुमार घायल हो गए थे। इसके बाद मार्च 2018 में हुए नक्सली हमले में दो जवान बुरी तरह जख्मी हो गए थे। इस इलाके में नक्सलियों की पैठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि सुरक्षा में लगे जवानों को इलाके से दूर जाना हो तो हेलिकॉप्टर ही एक मात्र सहारा था, क्योंकि सडक़ मार्ग पर नक्सलियों के हमले का खतरा हर वक्त था।

10 मीटर की सुरक्षा के लिए एक जवान की तैनाती

सडक़ निर्माण से पहले तेलंगाना के चेरला के कालीवेरू और चेलमेला के साथ तिप्पापुरम, तोंगगुड़ा सहित पामेड़ में सीआरपीएफ , सीएएफ , कोबरा, डीआरजी और जिला बल के करीब 1200 सशस्त्र जवानों को तैनात किया गया। मतलब साफ  है कि 12 किलोमीटर की सडक़ के लिए एक थाने के साथ ही 5 बेस कैंप स्थापित किए गए। अनुपात निकालें तो 10 मीटर के सडक़ निर्माण में लगे कर्मचारी और मशीनरी की सुरक्षा के लिए यहां एक जवान की तैनाती की गई थी। 10 मार्च 2018 को प्रेशर आईईडी की ही चपेट में आकर दो जवान जख्मी हुए, जिसमें आरक्षक सूरज मंडावी का दायां पैर शरीर से हमेशा के लिए अलग हो गया तो वहीं दूसरा जवान आरक्षक दुरपत सिंह ठाकुर बुरी तरह घायल हुआ। इतनी कुर्बानियों के बाद भी जवानों के हौसले पस्त नहीं हुए। वो सडक़ निर्माण की सुरक्षा में डटे रहे।

कांग्रेस नेता की कंपनी ने बनाई थी...

इस 12 किलोमीटर सडक़ निर्माण का ठेका बीजापुर के जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जयकुमार नायर की कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था। सडक़ निर्माण के चंद महीनों बाद ही सडक़ में जगह-जगह गड्ढे होने लगे हैं। बीते दिनों पामेड़ पहुंचे पत्रकारों के दल ने 12 किलोमीटर की सडक़ पर बने एक-एक गड्ढे की गिनती की तो जो आंकड़ा निकलकर सामने आया वो बेहद चैंकाने वाला था। 12 किलोमीटर की इस सडक़ पर 100-200 नहीं, बल्कि पूरे 712 गड्ढे हो चुके हैं। इतना ही नहीं बरसाती नाले पर बनाया गया एक पुल भी बह चुका है, जिसे बाद में ग्रामीणों और जवानों ने पत्थरों से भरकर आवागमन जाने लायक बनाया है।

आहत हैं ग्रामीण

अब इस इलाके के ग्रामीण भी सडक़ निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार से काफ ी आहत हैं। ग्रामीण सुमन कोत्तुल, भास्कर वंकैया और कोत्तुल श्रीनिवास का कहना है कि सडक़ निर्माण होने से वह काफ ी खुश थे, क्योंकि इससे पहले उनके पास मुख्य इलाकों में जाने के लिए कोई विकल्प नहीं था। आलम यह था कि बारिश के महीनों में वह अपने गांव से बाहर भी नहीं निकलते थे। सडक़ बनने से राहत मिली, लेकिन कुछ महीनों में ही इसके जर्जर हालत ने सबको परेशान कर दिया है।

कार्रवाई की मांग

बीजापुर के भाजपा जिला महामंत्री श्रीनिवास मुदलियार का कहना है कि संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ ही संबंधित विभाग के खिलाफ  कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं कांग्रेस के जिला अध्यक्ष लालू राठौर का कहना है कि इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर वह स्थानीय विधायक विक्रम शाह मंडावी से बात करेंगे। मामले में कलेक्टर केडी कुंजाम का कहना है कि अभी सडक़ पूरी तरह से नहीं बनी है। सडक़ पर कुछ ही जगहों पर गड्ढे हुए हैं। ठेकेदार को पूरा भुगतान नहीं किया गया है।


Date : 14-Oct-2019

60 परिवार में पानी के लिए मात्र एक हैंडपंप, पाइप लाइन बिछाने के 5 साल बाद भी एक बूंद पानी नहीं मिला

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 14 अक्टूबर।
पांच बरस से शहीद बुधराम राणा वार्ड क्रमांक 1 पनारापारा के निवासी पानी की समस्या से जूझ रहे हंै। वार्डवासियों की समस्या का निदान अब तक नहीं होने से वार्ड के लोगों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है। 

पालिका क्षेत्र के शहीद बुधराम राणा नगर वार्ड में लगभग 50 से 60 परिवार निवासरत हंै। पिछले 5 साल से यहां पानी के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम तो प्रशासन ने कर दिया है, लेकिन पानी की एक बूंद भी वार्डवासियों को नसीब नहीं हुई है। बेनहूर रावतिया, विनोद बडदी, सदाशिव राणा, चंद्रकला राणा, शकुंतला धुर्वा, अगरदया मांझी, सरिता गावड़े, अल्पना किसस्पोट्टा ने बताया कि वे पिछले 5 सालों से नल कनेक्शन की मांग कर रहे है। लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या नहीं सुनी। कई बार नगरपालिका के अधिकारी, कर्मचारी और पार्षद को इसकी जानकारी दे चुके है। पर इस ओर परेशानी किसी को भी दिखाई नहीं दे रही है। इसी के चलते वार्डवासीयों ने अपनी समस्या के निराकरण के लिए कलेक्टर से गुहार लगाकर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया है।पनारापारा में निवासरत परिवारों के लिए पानी की पूर्ति हेतु सिर्फ एक ही हैंडपम्प है। वार्डवासियों ने बताया कि वे 5 सालों से सिर्फ एक हैंडपंप से काम चला रहे हंै। हर दिन पानी के लिए लाइन लगाना पड़ता है। बोरिंग भी सही तरीके से काम नहीं करता। बहुत तकलीफ सहकर हमें पानी मिलता है। हर दिन पानी के लिए हम जंग लड़ते हंै। गर्मियों में तो स्थिति बहुत दयनीय हो जाती है।


Date : 13-Oct-2019

मुठभेड़ के बाद सर्चिंग के दौरान मिले मंहगे ब्राण्डेड वस्त्र

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 13 अक्टूबर।
जिले के मोदकपाल थाना क्षेत्र के ओगलापारा नुकनपाल में दो दिन पहले एनकाउण्टर के बाद जब सीआरपीएफ  के जवानों ने मौके की सर्चिंग की, तो वे दंग रह गए। वहां महिला नक्सलियों के महंगे, नए और ब्राण्डेड अण्डर गारमेंट के अलावा रेमण्ड कंपनी के दो सौ मीटर कपड़े भी मिले। 

मुरकीनार से शुक्रवार तड़के करीब पांच बजे सीआरपीएफ  की 229 बटालियन की ई कंपनी के जवान सहायक कमाण्डेंट अमित कुमार की अगुवाई  में निकले थे। उनके साथ इंस्पेक्टर रंजीत सिंह भी थे। जब वे ओगलापारा नुकनपाल पहुंच, तो वहां नक्सलियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। जब फोर्स की ओर से जवाबी फायरिंग हुई तो नक्सली नाले की ओट लेते भाग गए।  मौके की सर्चिंग की गई तो वहां दो सौ मीटर रेमण्ड के काले कपड़े के चार थान मिले। अनुमान है कि इसे काली वर्दी सिलवाने के लिए हाल ही में लाया गया था। इसे नक्सलियों ने खोला भी नहीं था। इससे करीब पचपन वर्दी बनाई जा सकती है। इसी तरह बड़ी संख्या में महिला नक्सलियों के ब्राण्डेड और नए अंत:वस्त्र पाए गए। 

सूत्रों के मुताबिक वहां पुलिस को मोटोरोला कंपनी के चार नए और पैक चार्जर भी मिले। समझा जाता है कि ये सामान हाल ही में नक्सलियों को सप्लाई किए गए थे। इसके अलावा एवरीडे नेस्ले का दूध का पैकेट, बासमती चावल, दवा, तौलिए, चादर, बर्तन, प्लास्टिक का स्टूल इत्यादि सामान बरामद किए गए। 

सीआरपीएफ की 229 बटालियन के जवानों ने मौके से कुकर में रखा गया, प्रेशर आईईडी बरामद किया। इसमें पांच किलो विस्फोटक रखा था और ये एक वाहन को उड़ाने के लिए काफी था। इसे ऐसा पैक किया गया था कि इसमें नमी किसी भी दशा में ना जाए। कुकर होन के बावजूद इसे पॉलीथीन से लपेट दिया गया था। 

ओगलापारा में नक्सली खतरनाक मंसूबों से जमा हुए थे और घात लगाए बैठे थे। नक्सलियों ने जवानों पर एके 47, एसएलआर, एलएमजी, थ्री नॉट थ्री इंसास आदि हथियारों से फायरिंग की। नक्सलियों ने ऑटो फॉल यानि एसएलआर के छोटे रूप का भी इस्तेमाल किया। इससे बस्र्ट फायर किया जाता है। अनुमान लगाया गया है कि यहां बड़े नक्सली भी मौजूद थे। तीस से पैंतीस नक्सली वर्दी में थे और बाकि सादे कपड़े में थे। इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी थी। जब फोर्स भारी पड़ी तो नक्सली भागने लगे। यहां छह से सात नक्सलियों के मारे जाने या घायल होने का अनुमान है। खून के धब्बे और घसीटने के निशान नाले किनारे देखे गए। 

 


Date : 12-Oct-2019

बीजापुर में युवक की नक्सल हत्या, पर्चे फेंक मुखबिरी का आरोप

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बीजापुर, 12 अक्टूबर। बीजापुर में नक्सलियों ने एक बार फिर मुखबिरी के आरोप में एक युवक की धारदार हथियार से हत्या कर दी है। नक्सलियों ने शव के पास पर्चा छोड़ कर युवक पर तेलंगाना पुलिस के लिए मुखबिरी का आरोप लगाया है।

घटना बीजापुर जिले के भद्रकाली थाना क्षेत्र के दुधेड़ा की है। यहां युवक परके किस्तैया की बीती रात नक्सलियों ने तेलंगाना पुलिस के संपर्क में रहते हुए मुखबिरी का आरोप लगाकर उसकी धारदार हथियार से हत्या कर दी। हत्या के बाद घटना स्थल पर नक्सलियों ने पर्चे छोड़े हैं। जिस पर युवक द्वारा तेलंगाना पुलिस के लिए मुखबीरी करने का आरोप लगाया गया है। इस वारदात को नक्सलियों के मद्देड एरिया कमेटी ने अंजाम दिया है। घटना की पुष्टि एसपी दिव्यांग पटेल ने की है।

नक्सलियों ने जारी पर्चे में कहा है कि युवक को बार-बार समझाइश दी गई थी, लेकिन वह मुखबिरी करने से बाज नहीं आ रहा था। मुखबिरी कर वह पुलिस से पैसे भी ले रहा था। इसके चलते उसे सजा दी गई है।

बता दें कि इससे पहले भी नक्सलियों के नेशनल पार्क एरिया कमेटी ने बीजापुर के तोयनार मार्ग माड़वी रामलु की हत्या कर दी थी। वारदात के बाद घटना स्थल पर पर्चे फेंक कर उस पर भी मुखबिरी करने का आरोप लगाया था।


Date : 11-Oct-2019

उशीला झाड़ी का निधन

बीजापुर, 11 अक्टूबर। उसूर बीआरसी राऊतपारा निवासी आरडी झाड़ी की पत्नी उशीला झाड़ी (50) का निधन गुरूवार की रात 11 बजे हो गया। वे अपने पीछे पति, तीन पुत्र एवं एक पुत्री का भरापूरा परिवार छोड़ गईं। उनकी अंंितम यात्रा में विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। 

 


Date : 11-Oct-2019

मुठभेड़ में मिलिशिया कमांडर ढेर, शव सहित भरमार बंदूक बरामद

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 11 अक्टूबर।
जिले के उसूर थाना क्षेत्र के टेकमेटला में सुरक्षाबल व नक्सलीयों के बीच हुए मुठभेड़ में जवानों ने एक नक्सली को मार गिराया है। जवानों ने मारे गए नक्सली के शव के साथ एक भरमार बंदूक बरामद किया है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक उसूर थाना से जिला बल और सीआरपीएफ 229 बटालियन के जवानों की संयुक्त पार्टी एरिया डॉमिनेशन के लिए गुरुवार की रात उसूर से करीब 8 किलोमीटर दूर टेकमेटला गांव की ओर निकली हुई थी। पार्टी शुक्रवार की सुबह वापस उसूर लौट रही थी। इसी बीच टेकमेटला के जंगल में घात लगाए नक्सलियों ने सुरक्षाबल के जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी हमला किया। दोनों ओर से करीब घंटे भर चली मुठभेड़ के बाद नक्सली जंगलों की आड़ में भाग खड़े हुए। मुठभेड़ थमने के बाद जवानों ने घटना स्थल की सर्चिंग की। यहां से जवानों एक मृत नक्सली का शव और एक भरमार बंदूक बरामद किया है। बताया गया है कि मारा गया नक्सली मिलिशिया कमांडर है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस उसकी शिनाख्ती के लिए शव को जिला मुख्यालय ला रही है।

 


Date : 10-Oct-2019

कंवर समाज ने मनाया वीर सीताराम कंवर शहादत दिवस

बीजापुर, 10 अक्टूबर। कंवर समाज द्वारा वीर शहीद क्रांतिकारी सीताराम कंवर का शहादत दिवस बीते दिनों बीजापुर के आरईएस कालोनी में मनाया गया। इस अवसर पर उनके छाया चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

कंवर समाज के बीजापुर जिला अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह पैंकरा ने कहा कि वीर शहीद क्रांतिकारी सीताराम कंवर ने सन 1857-58 में निमाड़ क्षेत्र में सशस्त्र विद्रोह कर न केवल ब्रिटिश साम्राज्य बल्कि होल्कर के भी छक्के छुड़ा दिए थे। 9 अक्टूबर 1858 को ब्रिटिश सैन्य बलों के साथ बंड नामक स्थान पर आमना सामना हुआ और भीषण मुठभेड़ में विद्रोही परास्त हुए। इस मुठभेड़ में वीर शहीद सीताराम कंवर सहित 20 विद्रोही वीर गति को प्राप्त किये। गवर्नर जनरल के एजेंट के 10 अक्टूबर 1858 के पत्र में वीर सीताराम कंवर को शौच जाने के दौरान मेजर कीटिंग की फ ोर्स ने अचानक गोलियां दागी तथा वीर सीताराम कंवर सहित 12 विद्रोही पकड़ लिए गए। पत्र में यह भी उल्लेख है कि सीताराम कंवर का सिर कैम्प लाया गया, उसकी पहचान कर ली गई, पत्र आगे बताता है कि इसमें कोई शक नहीं की वह मारा गया है। वीर सीताराम कंवर के 78 साथी पकड़े गए, जिसमें पु_ा सिंह और चांद खां भी थे जिन्हें फ ांसी दे दी गई।

कंवर समाज के सक्रिय सदस्य सत्यजीत सिंह कंवर ने कार्यक्रम आयोजन की महत्ता के बारे में बताया कि पिछले तीन सालों से लगातार वीर शहीद सीताराम कंवर शहादत दिवस मनाने के पीछे स्वतंत्रता संग्राम में कंवर समुदाय की भागीदारी व कंवर गौरव को आने वाली पीढ़ी बताने सिखाने व गौरवशाली कंवरान इतिहास को बताना है। इस अवसर पर गोंडवाना समन्वय समिति के सदस्य व कोया पुनेम प्रशिक्षक सुशील हेमला ने आदिवासी समुदाय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला साथ ही  कोया पुनेम की प्रकृति के साथ जीवनचर्या के विषय में बताया। इस अवसर पर तारकेश्वर सिंह, योगेश्वर कपूर, सत्यजीत सिंग कंवर, केशव दीवान, तुकाराम कंवर, झामसिंह कंवर, संजय पैंकरा, शैलेन्द्र कंवर, डिगेश्वर साहू, विनय पैंकरा, कमलेश्वर सिंह पैंकरा, सुशील कुमार हेमला, रामवती पैंकरा, भावना सिंह, तुलसी कपूर, साधना, ममता, मंजू, अंजली, खुसबू, पूर्णिमा पैंकरा सहित काफ ी में महिलाएं व बच्चें शामिल थे।


Date : 10-Oct-2019

बीजापुर में वाटर प्रोजेक्ट के लिए बहा दिए करोड़ों, नहीं मिला एक बूंद भी पानी

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 10 अक्टूबर।
जिले में पीएचई विभाग द्वारा घर-घर साफ  पानी पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के अलग-अलग इलाकों में नल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत बनाये गये 30 वाटर प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे। वर्तमान स्थिति में केवल 8 वाटर प्रोजेक्ट ही चालू स्थिति में है, बाकि 22 वाटर प्रोजेक्ट निर्माण के बाद से ही सालों से या तो चालू नहीं हुए या फि र चंद दिनों तक चालू होकर फि र बंद हो गए हैं। बताया जाता है कि इन बंद पड़े 22 वाटर प्रोजेक्ट के लिए पीएचई विभाग ने 6 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च किए हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के बाद से ही ये प्रोजेक्ट सालों से बंद पड़ा हुआ है। करोड़ों की लागत से बनाये गये इस वाटर प्रोजेक्ट से ग्रामीणों को आज तक एक बूंद साफ  पानी नहीं मिल पाया है। 

बता दें कि जल प्रदाय योजना के तहत जिले के चार ब्लॉक बीजापुर, उसूर, भोपालपटनम और भैरमगढ़ के 30 अलग-अलग गांवों में ओवर हेड टैंक के निर्माण के साथ पाइप लाइन विस्तार और सार्वजनिक कनेक्शन लगाये गये हैं। इनके निर्माण के लिए राज्य मद, एनआरडीडब्ल्यूपी, डीएमएफ और एनएमडीसी के मद का उपयोग किया गया है। एक योजना के लिए जिले के 30 अलग-अलग इलाकों में चार मद से पीएचई विभाग ने 8 करोड़ 2 लाख रुपये खर्च किये। लेकिन 30 वाटर प्रोजेक्ट में से वर्तमान स्थिति में केवल 8 वाटर प्रोजेक्ट ही चालू स्थिति में है। बाकि बचे 22 वाटर प्रोजेक्ट निर्माण के बाद से ही सालों से या तो चालू नहीं हुए या फि र चंद दिनों तक चालू होकर फि र बंद हो गये हैं। इन बंद पड़े 22 वाटर प्रोजेक्ट के लिए पीएचई विभाग ने 6 करोड़ 23 लाख रुपये खर्च किए हैं। 

ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण के बाद से ही ये प्रोजेक्ट सालों से बंद पड़ा हुआ है। करोड़ों की लागत से बनाये गये इस वाटर प्रोजेक्ट से ग्रामीणों को आज तक एक बूंद साफ  पानी नहीं मिल पाया है।

विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक नल जल योजना के तहत अब तक कुल 30 वाटर प्रोजेक्ट पिछले कुछ सालों में पूरे किये गये हैं। विभाग का कहना है कि वर्तमान में 4 करोड़ 22 लाख के 16 ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनका निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माणाधीन इन 16 वाटर प्रोजेक्ट के लिए विभाग ने अब तक 2 करोड़ 63 लाख रुपये खर्च किया है।


 जिला पंचायत सदस्य बसंत राव ताटी का कहना है कि वे क्षेत्रीय विधायक व बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग करेंगे।

इस मामले में कलेक्टर केडी कुंजाम का कहना है कि अधिकांश ओवर हेड टैंक चालू स्थिति में हैं। इसकी जानकारी उन्हें समीक्षा बैठक के दौरान पीएचई विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई है।

 


Date : 05-Oct-2019

माओवादियों ने बीजापुर व आवापल्ली मार्ग पर दुगईगुड़ा में फेंके पर्चे                                  

बीजापुर, 5 अक्टूबर। माओवादियों ने बीजापुर व आवापल्ली मार्ग पर दुगईगुड़ा में पर्चे फेंके हंै। पोटाकेबिन के पास फेंके गए पर्चे से क्षेत्र में दहशत का माहौल है ।नक्सलियों ने पर्चे में उत्पीडि़त वर्ग व तबकों के संघर्षरत लोगों से 21 सितंबर से 8 नवम्बर तक पार्टी के 150 वीं वर्षगांठ को गांव-गांव में जोर-शोर से मनाने का आह्वान किया गया है। इसके साथ दंडकारण्य के क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पार्टी सदस्य बनने का आह्वान किया है।

 


Date : 04-Oct-2019

जिला अस्पताल के सीबीसी एनालाइजर मशीन में गड़बड़ी, दंपति ने लगाया महिला डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर आरोप, कहा हमारी जिंदगी नर्क बना दी

गर्भ में बच्चे की मौत, अब कभी नहीं बन सकेगी मां

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बीजापुर, 4 अक्टूबर।
जिला अस्पताल की महिला डॉक्टर और प्रबंधन पर संतोष पटनायक और उनकी पत्नी ज्योति पटनायक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। 

संतोष पटनायक ने बताया कि मेरी पत्नी ज्योति गर्भवती थी। उसका 8 से सवा 8 महीने तक जिला चिकित्सालय में इलाज चल रहा था और वह प्लेजेन्टा प्रिविया की मरीज थी, जिसका इलाज डॉक्टर महाजन कर रहे थे। गत 27 सितम्बर को पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई जिसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सब कुछ अच्छा चल रहा था। डॉ महाजन ने हमें बताया कि बच्चे की हार्टबीट अच्छी चल रही है सोनोग्राफी रिपोर्ट भी ठीक है। मैंने जो दवाइयां दी है उसे देते रहिए करके वो छुट्टी पर चले गए।

 संतोष ने आगे कहा कि सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट)एनालाइजर मशीन से ज्योति के रक्त की जांच की गई,  जिसमें उसके प्लेटलेट्स की संख्या 72 हजार बताई गई। मुझे महिला डॉक्टर ने कहा कि आपकी पत्नी का क्रिटिकल केस है आप इन्हें जगदलपुर मेडिकल कॉलेज ले जाइए। हम लोग हक्के-बक्के रह गए। हमें काफी बार कहा गया कि आप इन्हें जगदलपुर ले जाइए। इस वजह से मैं अपनी पत्नी को 102 में लेकर जगदलपुर पहुंचा। वहां रक्त की जांच कराई, जहां पर प्लेटलैट्स 2 लाख 23 हजार बताया गया।  मेरी पत्नी के शरीर में पर्याप्त प्लेटलैट्स थे। लेकिन वो प्लेजेंटा प्रिविया की मरीज थी, उसे डॉक्टर ने सफर करने के लिए मना किया था। लेकिन महिला डॉक्टर के दबाव में हमें मजबूरी में सफर करना पड़ा जिस वजह से हमारे बच्चे की मौत हो गई। 

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि मेरी पत्नी अब कभी मां नहीं बन सकेगी। डॉक्टर की एक लापरवाही ने हमारी पूरी जिंदगी तबाह कर दी। ऐसे लापरवाह अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर कार्यवाही होनी चाहिए ताकि किसी को हमारी जैसी स्थिति से न गुजरना पड़े। 

इस संबंध में सीएमएचओ डॉ बीआर पुजारी ने बताया कि कुछ दिनों से मशीन में कुछ खामियां पाई गई थी। इसे सुधार लिया गया है। लेकिन पूरी तरह से मशीन को दोष नहीं दिया जा सकता। क्योंकि ज्योति प्लेजेंटा प्रिविया की मरीज थीं। ऐसे केस में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है।