ताजा खबर

पहले की खबरों के लिए क्लिक करें

हे राम... कांग्रेस और महात्मा गांधी का शताधिक वर्ष पुराना संबंध है। कांग्रेस जन मोहनदास करमचंद गांधी को अपना आराध्य भी मानते हैं। देश से लेकर छत्तीसगढ़ के गांव में गांधी प्रतिमाएं कांग्रेस ने ही स्थापित किया। इसके बाद अब और हाल के वर्षों में भाजपा पर गांधी को हाईजैक करने का आरोप लगाते रहे हैं। कल समूचे देश के साथ राजधानी में भी कांग्रेस ने गांधी पुण्यतिथि पर महात्मा को याद किया। राजधानी के पुराने कांग्रेस भवन में दशकों पूर्व स्थापित महात्मा की यह प्रतिमा कपाल से चटक और धूल धूसरित भी हो गई है। इसी हाल में अनुयायी कांग्रेस जनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर बापू को याद किया। तस्वीर / ‘छत्तीसगढ़’ / जय गोस्वामी

हे राम... कांग्रेस और महात्मा गांधी का शताधिक वर्ष पुराना संबंध है। कांग्रेस जन मोहनदास करमचंद गांधी को अपना आराध्य भी मानते हैं। देश से लेकर छत्तीसगढ़ के गांव में गांधी प्रतिमाएं कांग्रेस ने ही स्थापित किया। इसके बाद अब और हाल के वर्षों में भाजपा पर गांधी को हाईजैक करने का आरोप लगाते रहे हैं। कल समूचे देश के साथ राजधानी में भी कांग्रेस ने गांधी पुण्यतिथि पर महात्मा को याद किया। राजधानी के पुराने कांग्रेस भवन में दशकों पूर्व स्थापित  महात्मा की यह प्रतिमा कपाल से चटक और धूल धूसरित भी हो गई है। इसी हाल में अनुयायी कांग्रेस जनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर बापू को याद किया।  तस्वीर / ‘छत्तीसगढ़’ / जय गोस्वामी

विशेष रिपोर्ट

पीएससी : 2020 में भी हुआ था घोटाला

परीक्षा से पहले चेयरमैन को मिल गए थे पेपर, जांच में खुलासा

‘छत्तीसगढ़’ की विशेष रिपोर्ट

रायपुर, 20 सितंबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। पीएससी घोटाले की परतें खुलने लगी है। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि न सिर्फ 2021 बल्कि 2020 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी,  और पेपर लीक किए गए। इसमें तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की दो बहू मीशा कोसले डिप्टी कलेक्टर और दीपा आडिल जिला आबकारी अधिकारी के पद पर चयन हुआ था। मीशा और दीपा की गिरफ्तारी के बाद निलंबन आदेश जारी हो सकता है। 

सीबीआई ने पीएससी 2020 से 2022 तक परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता साक्ष्य जुटाए हैं। इसमें तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, सचिव जीवन किशोर ध्रुव, और परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक की भूमिका प्रमाणित हुई है।

सीबीआई ने गुरुवार को पीएससी के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, और उनके पुत्र सुमित के साथ परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के अलावा सुश्री मीशा कोसले, और दीपा आडिल को गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया, और 22 सितंबर को सीबीआई की रिमांड में भेज दिया गया है। 

सीबीआई ने अब तक की जांच को लेकर कई खुलासे किए हैं। यह बताया गया कि वर्ष-2020 की प्रारंभिक, और मुख्य परीक्षा से पहले  पेपर पीएससी के तत्कालीन चेयरमैन को प्राप्त हुए थे। इसमें उनके रिश्तेदारों का चयन हुआ था।

इसके बाद पीएससी के वर्ष-2020-21 के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के 171 पदों को भरने के लिए  विज्ञापन जारी किए गए थे। ध्रुव के हस्ताक्षर से विज्ञापन जारी किए गए। जांच में यह पता चला कि पीएससी सचिव के पुत्र सुमित ध्रुव ने वर्ष-2021 की राज्य सेवा परीक्षा के लिए आन लाईन आवेदन किए थे। उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण की, और फिर डिप्टी कलेक्टर के लिए चयनित हुए। 

जांच में यह पाया गया कि पीएससी चेयरमैन सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, सचिव, सीजीपीएससी और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अन्य व्यक्तियों ने सीजीपीएससी में विभिन्न पदों पर रहते हुए, वर्ष 2020 से 2022 के दौरान परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए और अपने बेटे, बेटी और रिश्तेदारों का चयन करवाया। 

बताया गया कि चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने बेटे नितेश सोनवानी को डिप्टी कलेक्टर, अपने बड़े भाई के बेटे साहिल सोनवानी को डीएसपी और अपनी बहन की बेटी सुनीता जोशी को श्रम अधिकारी के रूप में चयनित करवाना सुनिश्चित किया। वर्ष 2020 में टामन सिंह सोनवानी ने अपने बेटे नितेश सोनवानी की पत्नी मीशा कोसले को डिप्टी कलेक्टर, और अपने भाई की बहू श्रीमती दीपा आडिल को जिला आबकारी अफसर के रूप में चयनित करवाया।

 

विचार/लेख

जगजीत : सुरेंद्र मोहन पाठक की यादें

-दिपाली अग्रवाल

जगजीत सिंह जालंधर के डीएवी कॉलेज के साइंस के छात्र थे। उस कॉलेज में रवीन्द्र कालिया, मोहन राकेश, उपेन्द्रनाथ अश्क, सुदर्शन फाकिर जैसे कितने ही प्रसिद्ध और कमाल के लोग भी पढ़े। रवीन्द्र कालिया ने अपनी आत्मकथा ग़ालिब छुटी शराब में जगजीत सिंह का जिक्र किया है, चूंकि वे उनके दो-तीन साल सीनियर थे इसलिए कॉलेज के दिनों का जिक्र कम है। मगर एक मजे की बात बताती हूं कि उसी कॉलेज में प्रसिद्ध पल्प लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक भी पढ़े हैं। उन्होंने अपनी आत्मकथा में-कॉलेज के दिनों को याद करते हुए जगजीत सिंह पर पूरे दस पन्ने लिखे हैं। कल ही उस किताब को पढ़ा, आज जगजीत सिंह का जन्मदिन भी है। कुछेक किस्से जो बताते हैं कि कैसे पूत के पांव पालने में पलते हैं और कैसे एक कलाकार बचपन से ही उस एक कला की मिट्टी के साथ पैदा तो होता है लेकिन अपनी मेहनत से उसे लगातार आकार में ढालता रहता है कि वह कहीं बिखर न जाए।

पाठक लिखते हैं कि कॉलेज के बच्चों को कमरे चुनने की सुविधा होती थी लेकिन कोई भी तीन कमरे नहीं चाहता था, सीढिय़ों के पास वाला (शोर के कारण), वॉशरूम के पास वाला (बदबू के कारण), जगजीत सिंह के बगल वाला (उनके 5 बजे उठकर रियाज के कारण)। जगजीत सिंह ने एक बार सुरेन्द्र मोहन पाठक को भी गाते सुना और कहा कि उनकी आवाज अच्छी है, उन्हें और गाना चाहिए और बाकी का रियाज वो खुद उन्हें करवा देंगे, रियाज का समय जब सुबह 5 बजे का पता चला तो पाठक जी ने मना कर दिया। फिर वो लिखते हैं कि उस इंकार का जगजीत ने न ही बुरा माना और न ही दोबारा पेशकश दी। वह एक खुशमिजाज लडक़े थे।

जगजीत सिंह को बच्चे अपने कमरे में बुलाकर फरमाइशी कार्यक्रम करते थे और वे ख़ूब मनोयोग से उन्हें गीत सुनाते थे। कभी उनका इतना गाने का मूड होता कि बरामदे में खड़े लडक़े को गाना सुनाने लग जाते थे और तब वो खीज कर कहता कि तुझे तो पास होना नहीं है, हमें तो पढऩे दे। इस पर जगजीत कहते कि नाशुकरों, एक दिन टिकट खरीदकर मेरे गाना सुनोगे (और ये बात आने वाले दिनों में सच हुई, रवीन्द्र कालिया को तो बड़े पापड़ बेलने पड़े थे)।

एक कमाल का हुनर जो शायद जगजीत सिंह के चाहने वालों को नहीं ही पता होंगी कि फिजिक्स की क्लास में रेजोनेन्स एक्सपेरिमेंट के दौरान दो तारों को एक ही फ्रीक्वेंसी पर झंकृत करना होता था, ये काम ट्यूनिंग फोर्क करता था लेकिन जगजीत सिंह बिना ट्यूनिंग फोर्क के वो सेट कर देते थे, जब परीक्षक चेक करता तो वो एकदम रेजोनेट होती थीं और वो विस्मय से भर जाता था जबकि जगजीत ख़ुद भी नहीं समझ पाते थे कि वो ये कैसे कर लेते थे।