राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : सैलजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ से
16-May-2024 4:12 PM
राजपथ-जनपथ : सैलजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ से

सैलजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ से 

भाजपा कुछ भूतपूर्व कांग्रेस नेताओं को हरियाणा चुनाव प्रचार के लिए भेज रही है। यहां की सिरसा सीट से छत्तीसगढ़ कांग्रेस की प्रभारी रहीं सुश्री सैलजा चुनाव मैदान में हैं। 
सैलजा का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अशोक तंवर से है, जो कि खुद एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। सैलजा के साथ काम कर चुके छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोडक़र भाजपा में शामिल हो गए हैं। इन नेताओं को सैलजा के खिलाफ प्रचार के लिए भेजा जा रहा है। इससे पहले हरियाणा के ही कई लोग कोरबा आकर भाजपा के लिए प्रचार कर चुके। 

विधानसभा चुनाव में सैलजा के खिलाफ यहां के कई कांग्रेस नेता मुखर रहे हैं। कुछ ने तो टिकट को लेकर लेन-देन का आरोप भी लगा दिया था। पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी सैलजा पर गंभीर आरोप लगाए थे इस वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। अब कोरबा और सिरसा में प्रचार से पार्टी को कितना फायदा होगा, यह तो चुनाव नतीजे आने के बाद पता चलेगा। 

स्मार्ट सिटी और पीआर 

सांसद सुनील सोनी ऐंवैं ही स्मार्ट सिटी में केंद्र से मिली राशि के डकारने का आरोप नहीं लगाते रहे। कई तो वे साबित भी कर चुके हैं  तो कुछ में  केंद्रीय नगरीय विकास मंत्रालय और संसद की स्थाई  समिति ने भी रायपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के अफसरों को तलब कर हिसाब किताब मांग चुकी है । इसके बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है। कारण है कि इसमें नियुक्त कथित प्रोफेशनल। ये सरकारी तो है नहीं कांट्रेक्चुअल स्टाफ है। जब तक प्रोजेक्ट है तब तक पद, वेतन। इसलिए बंद होने से पहले वेतन भत्तों के अलावा जितना बटोरना है बटोर लो। तभी तो कुछ मल्टीनेशनल कंपनी और विदेशों की नौकरी छोड़ यहां काम कर रहे।

खेल मैदान का खेल 

गॉस मेमोरियल मैदान को लेकर एक समाज और एक कांग्रेस नेता के बीच तकरार, विवाद चल रहा है। समाज का आरोप है कि नेता अपने एक समर्थक को पार्किंग स्टैंड खुलवाकर उसका ठेका चाहता था। न मिलने पर खिलाडिय़ों के नाम पर कुछ लोगों को जमा कर प्रदर्शन करवाया। उनमें खिलाड़ी कितने थे ये फोटो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। इस भीड़ में एक मंत्री का पीए भी शामिल था। समाज का दावा है कि मैदान पर लगातार खेल गतिविधियों हो रही हैं। विवाद जारी है लेकिन प्रदर्शनी लगाने वाले ने नेता के खिलाफ एफिडेविट देकर खेल ही पलट दिया है।

अपने यहां तो निपट गया चुनाव

दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर 25 मई को मतदान होगा। वहां प्रचार अभियान पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। इस बीच छत्तीसगढ़ की तरह वहां भी मतदाताओं से नतीजों के बाद चुनावी गारंटी का लाभ दिलाने के नाम पर फॉर्म भरवाये जा रहे हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया है। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही मोड में भरवाये जा रहे फार्म के जरिये मतदाताओं के नाम, उम्र और अन्य व्यक्तिगत जानकारी ली जा रही है। दिल्ली पुलिस आयुक्त को उन्होंने ऐसी गतिविधि पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया है। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने भी यही निर्देश अपने मातहतों के लिए जारी कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने महतारी वंदन योजना के फॉर्म भरवाये। कांग्रेस ने महालक्ष्मी योजना के फॉर्म लोकसभा चुनाव के दौरान भरवाये। दोनों ही मामलों में इक्का-दुक्का कार्रवाई हुई पर यह काम बेखौफ चलता रहा। विधानसभा चुनाव के नतीजों पर महतारी वंदन योजना का असर सबने माना है। महालक्ष्मी योजना से कांग्रेस भी लाभ पाने की उम्मीद कर रही है। यदि फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया दिल्ली में गलत थी तो छत्तीसगढ़ में भी होनी चाहिए थी। इसका मतलब तो यही हुआ यहां निपटे दोनों चुनावों में मतदाताओं पर असर डालने के लिए अनुचित साधन का 
इस्तेमाल हुआ।

बेरोजगारों को भत्ते का इंतजार

सन् 2018 में कांग्रेस ने जिन चुनावी वायदों को सबसे देर से लागू किया उनमें बेरोजगारी भत्ता शामिल था। अप्रैल 2023 में यह वादा पूरा किया गया। लाखों आवेदनों में करीब 1.35 लाख युवाओं को भत्ते का पात्र माना गया और किश्तों का भुगतान चुनाव आते तक किया गया। नई सरकार की यह घोषणा थी कि पिछली सरकार की योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। जो योजनाएं ठीक लगेगी, वह जारी रखी जाएगी। सरकार ने जिन योजनाओं को बंद किया उनमें नरवा, गरुवा, घुरवा बाड़ी, सुराजी योजना, आदिवासी  परब योजना, गोधन न्याय योजना, छत्तीसगढिय़ा ओलंपिक जैसी योजनाएं शामिल हैं। संभवत: बेरोजगारी भत्ता भी इनमें शामिल है, क्योंकि रोजगार कार्यालयों में अधिकारियों का कहना है कि भत्ता देने के लिए नया निर्देश नहीं आया है, पर साफ-साफ बंद करने का आदेश भी नहीं मिला है। भत्ते से लाखों बेरोजगार वंचित भी रह गए थे। कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा था कि उसने शर्तें इतनी कड़ी कर दी थी कि बहुत कम बेरोजगार लाभ ले सके। जिन्हें भत्ता नहीं मिल रहा है उनको लग रहा है कि शायद भाजपा सरकार उनकी भी चिंता कर रही है। कोई बड़ी योजना आएगी, इसलिये भत्ते का भुगतान रोका गया है। वहीं जिन्हें पात्र माना गया था, उन्हें इसके पूरी तरह बंद हो जाने की चिंता सता रही है।

पिकनिक कहीं और मनाएं..

चारधाम में मंदिरों के पट खुलते ही पहले ही दिन भीड़ के कारण अव्यवस्था फैल गई। यमुनोत्री का मार्ग 6 घंटे जाम रहा। यह पहाड़ी रास्ता है जिसमें सिर्फ खच्चर और पैदल यात्री चलते हैं। बीते कुछ वर्षों से पर्वतीय क्षेत्रों के तीर्थ स्थलों में जिस तरह से भीड़ बढ़ रही है, उससे न केवल दुर्घटनाओं बल्कि पर्यावरण संतुलन की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में कुछ तीर्थ यात्री यह भी आह्वान कर रहे हैं कि- ध्यान रहे, केदारनाथ कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है।

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