राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : तीर्थयात्रा करके लौटे सीएम-मंत्री
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : तीर्थयात्रा करके लौटे सीएम-मंत्री
Date : 10-May-2019

 

उत्तरप्रदेश की तीन लोकसभा सीटों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके एक वरिष्ठ मंत्री मोहम्मद अकबर चुनाव प्रचार करके लौट आए। अमेठी और रायबरेली तो कांग्रेस नेताओं के लिए तीर्थयात्रा जैसी रहती है इसलिए इन दोनों सीटों पर इन दोनों ने अपनी मेहनत भी की, और वहां पर गांव-गांव तक छत्तीसगढ़ के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ड्यूटी पर भी लगाया। लेकिन इसके अलावा एक तीसरी सीट पर भी मेहनत की, बाराबंकी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पी.एल. पुनिया का बेटा बाराबंकी से चुनाव लड़ रहा है, और यहां पर कुर्मी मतदाता भी खूब हैं, और मुस्लिम मतदाता भी। ऐसे में कुर्मी मुख्यमंत्री और मुस्लिम मंत्री की यह जोड़ी हिट रही क्योंकि दोनों बोलने में भी तेज हैं। वहां भूपेश बघेल को मुस्लिमों के बीच यह भी साफ करना पड़ा कि मोहम्मद अकबर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नहीं हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े विभागों के मंत्री हैं जिनमें सस्ता राशन देने वाला विभाग भी शामिल है। दोनों ने सस्ते राशन से लेकर कर्जमाफी तक का सारा श्रेय राहुल गांधी के नीति-निर्देश को दिया, और यह उम्मीद बंधाई कि दिल्ली में राहुल की सरकार बनने पर पूरे देश को इस तरह की मदद मिलेगी। अब उत्तरप्रदेश से लौटने के बाद भूपेश बघेल मध्यप्रदेश में भूतपूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ के इलाकों में चुनाव प्रचार करने चले गए हैं। वे अविभाजित मध्यप्रदेश के समय भी दिग्विजय के मंत्री रहे हैं, और उन्हीं के अखाड़े के पहलवान भी हैं। इस चुनाव में प्रदेश के बाहर जिस कांग्रेसी मुख्यमंत्री की सबसे अधिक मांग रही है, वे भूपेश बघेल ही हैं। इसके साथ-साथ अमेठी और रायबरेली की मेहनत भी उनके नाम मजबूती से दर्ज हो गई है। कांग्रेस में इससे अधिक लगता क्या है? 

नब्ज ऑटो-टैक्सी में है
पूरे देश में चुनाव की रिपोर्टिंग करते घूमने वाले मीडिया के लोगों को किसी शहर पहुंचते ही नब्ज टटोलने के लिए सबसे पहले टैक्सी या ऑटो के लोग मिलते हैं। इसलिए सरकार को इस तबके को खुश रखना चाहिए। लोगों को याद होगा कि केजरीवाल जब सरकार में आए, तब दिल्ली के सारे ऑटो वाले उनके साथ थे। हालांकि दिल्ली के वोटर को मीडिया से ऐसा कोई लेना-देना नहीं रहता कि बाहर के आए हुए मीडिया के लोग ऑटो-टैक्सी से पूछकर जो लिखें, उसे सुनकर दिल्ली के वोटर वोट डालते हों। लेकिन बाकी हिन्दुस्तान में तो बाहर से जाने वाला मीडिया चुनाव का रहस्य सबसे पहले ऑटो-टैक्सी वालों से ही समझना चाहता है। इसी तरह सड़क के रास्ते जो रिपोर्टर लंबा सफर करते हैं वे ढाबे वालों से बात करते चलते हैं, और हवा का रूख भांपने की कोशिश करते हैं। अभी छत्तीसगढ़ से कुछ रिपोर्टर उत्तरप्रदेश गए थे, और तरह-तरह से परखने के बाद उनका नतीजा यह था कि तकरीबन पूरा प्रदेश गठबंधन के साथ है। गठबंधन यानी सपा-बसपा गठबंधन। इन दोनों की ऐतिहासिक लड़ाई के बाद यह ऐतिहासिक दोस्ती उत्तरप्रदेश के आम वोटर के लिए बहुत ही वजनदार साबित हो रही है। और अगर यह रूख नतीजों को बता रहा है तो उसका मतलब यह है कि भाजपा को योगीराज में खासे बड़े हिस्से में संन्यास पर भेजा जा रहा है। 

भूमाफिया बनी पुलिस
छत्तीसगढ़ के बहुत से जिलों में पुलिस जमीन-जायदाद के अघोषित कारोबार में ऐसी लग गई है कि किसी थाने में पोस्टिंग का मोलभाव उस थाना इलाके में जमीनों के सौदों को देखकर तय होता है। जमीनों के कब्जों को लेकर, किसी और झगड़े को लेकर जहां पुलिस की दखल नहीं बनती है वहां पर भी पुलिस की दखल के दाम लगते हैं, जहां भी पुलिस दखल बनती है, वहां पर एफआईआर न लिखने के भी दाम लगते हैं। अभी दुर्ग जिले में कल ही एसपी ने एक थानेदार को सस्पेंड किया। उस पर लंबे समय से एक शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज न करने की शिकायतें थीं, और वही बात उसे ले डूबी। मुख्यमंत्री का अपना जिला, गृहमंत्री का भी जिला, और भी ताकतवर विधायकों का यह जिला पुलिस में ऐसे कई मामले देख रहा है जिनमें धड़ल्ले से मोलभाव चलते रहता है। अभी एक-दो ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है लेकिन कुल मिलाकर हाल बुरा ही है। दुर्ग पुलिस का जमीन का एक ऐसा मामला अभी सामने आया है जिसमें एक आदमी ने रिपोर्ट लिखाई, उस पर पुलिस ने सौदा करवाकर, रकम वापिस करवाने की बात तय कर ली, और जब शिकायतकर्ता ने हलफनामा देकर शिकायत वापिस ले ली, तो पुलिस रकम दिलवाने से मुकर गई। नतीजा यह है कि अब शिकायतकर्ता फिर पुलिस में पहुंचा हुआ है कि वह अपना हलफनामा खारिज करवाकर कार्रवाई चाहता है। 

रायपुर के एक अखबार में कल ही रिपोर्ट छपी है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अपने चुनाव क्षेत्र पाटन में पूरी रात शराब की होम-डिलिवरी चलती रहती है। अब यह जाहिर है कि पुलिस के साथ के बिना तो ऐसा हो नहीं सकता। देखना यह है कि बाकी प्रदेश में जमीनों के सौदागर और दलाल बनी हुई पुलिस की रंगदारी के खिलाफ कब कार्रवाई होगी। दरअसल यह प्रदेश ऐसे बड़े-बड़े धाकड़ और ताकतवर पुलिस अफसरों को जमीन के अवैध कारोबार का मुखिया बना हुआ देख चुका है, और उनकी वजह से विभाग के बाकी छोटे अफसरों की धड़क खुली हुई है। 

भाजपा के घर में खड़कते बर्तन
सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ विवादित बयान से भाजपा विधायक  शिवरतन शर्मा ने भले ही पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन पार्टी के भीतर इसको लेकर विवाद जारी है। चर्चा है कि पार्टी का संगठन में हावी खेमा चाहता था कि भूपेश के खिलाफ बयान को किसी भी दशा में वापस नहीं लिया जाना चाहिए। भले ही इसके लिए अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़े। 

सुनते हैं कि पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने शिवरतन शर्मा को सलाह दी कि बयान वापस लेने की जरूरत नहीं है। मगर पार्टी का दूसरा खेमा इससे सहमत नहीं था। चर्चा है कि एक पूर्व मंत्री ने रमन सिंह से पूछ लिया कि आपत्तिजनक बयान उन्हीं से जुड़े लोगों के नाम से क्यों जारी होती है? कभी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और राजेश मूणत इस तरह का बयान क्यों नहीं देते। विरोधी खेमे की आक्रामकता को देखकर रमन और बाकी नेताओं को पीछे हटना पड़ा। आनन-फानन में सब कुछ मीडिया विभाग पर थोपकर किसी तरह विवाद का निपटारा  करने की कोशिश हुई। मगर, एक खेमा अभी भी मीडिया विभाग में आमूलचूल परिवर्तन के लिए दबाव बनाए हुए हैं। अब लोकसभा चुनाव निपटने के बाद इन सबको लेकर हाईकमान हस्तक्षेप कर सकता है। 

(rajpathjanpath@gmail.com)

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