राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नड्डा के रूख पर निगाहें
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नड्डा के रूख पर निगाहें
Date : 18-Jun-2019

पूर्व केन्द्रीय मंत्री जगतप्रकाश नड्डा के भाजपा  कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के खेमे में खुशी का माहौल है। नड्डा प्रदेश भाजपा के प्रभारी रहे हैं और उनकी रमन सिंह से नजदीकियां रही हैं। वैसे तो, नड्डा के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से यारी-दोस्ती के संबंध रहे हैं। दोनों युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में साथ रहे हैं। दोनों के गहरे रिश्तों का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष-2013 के विधानसभा चुनाव में बृजमोहन के कहने पर नड्डा ने आधा दर्जन तय प्रत्याशियों को बदलवा दिया था। मगर, बाद में दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। 

जलकी प्रकरण के चलते बृजमोहन अग्रवाल मुश्किल में घिरे तो नड्डा, रमन सिंह के साथ खड़े नजर आए। और तो और नड्डा ने पिछले लोकसभा चुनाव में तत्कालीन सांसद मधुसूदन यादव की जगह अभिषेक सिंह को प्रत्याशी बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी। नड्डा के न सिर्फ रमन सिंह बल्कि उनके करीबी नौकरशाहों अमन सिंह और अन्य लोगों से भी गहरे रिश्ते रहे हैं। ऐसे में जब नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर आई, तो रमन सिंह के करीबी लोग एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए। 

विधानसभा चुनाव में बुरी हार के बाद रमन सिंह की हैसियत पार्टी के भीतर कमजोर दिख रही है। वे अपने पुत्र अभिषेक सिंह को भी टिकट नहीं दिलवा पाए। जबकि बृजमोहन अग्रवाल का खेमा मजबूत नजर आ रहा। ऐसे समय में नड्डा के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा की गुटीय राजनीति में बदलाव आने के संकेत दिख रहे हैं। रमन सिंह खेमे के फिर से ताकतवर बनने की उम्मीद जताई जा रही है। रमन सिंह के करीबियों को उम्मीद है कि न सिर्फ अभिषेक को संगठन में अहम दायित्व मिलेगा, बल्कि पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी जैसों को भी महत्व मिल सकता है। यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के खेमे की हालत पहले जैसे ही रहेगी। बहरहाल, नड्डा के रूख पर पार्टी के नेताओं की निगाहें टिकी हुई हंै। 


नांदगांव की सियासी तासीर 
राजनांदगांव की सियासी तासीर ऐसी है कि एक बार पैर जमाने के बाद राजनेताओं को अगल-बगल झांकना नागवार लगता है। मोतीलाल वोरा यहां से एक बार सांसद रहे। इसके बाद चुनाव हारने के बाद भी वोरा का राजनांदगांव से संबंध बरकरार रहा। सालों तक राजनांदगांव में उनके पास सरकारी बंगला था, जो उन्हें पूर्व सीएम की हैसियत से आबंटित किया गया था। वे अभी भी दुर्ग से ज्यादा राजनांदगांव की राजनीति में दिलचस्पी लेते हैं। इसी तरह डेढ़ दशक तक सीएम रहे डॉ. रमन सिंह और उनके पूर्व सांसद पुत्र अभिषेक सिंह अपने गृह जिले कवर्धा से ज्यादा राजनांदगांव में ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। सुनते हैं कि शहर में रचने-बसने के लिए नए अशियाने की तलाश में भी हैंं। चर्चा है कि उनके करीबी नेताओं ने  रमन और अभिषेक को राजनांदगांव में नया घरौंदा तैयार करने की सलाह दी है। पिता-पुत्र को नेताओं की राय जंच गई। इसके बाद उनके करीबियों ने मकान के लिए जमीन की खोजबीन शुरू कर दी। वैसे तो फिलहाल पिता-पुत्र के लिए पार्टी में अनुकूल स्थिति नहीं है। संतोष पाण्डेय के सांसद बनने के बाद राजनांदगांव जिले में भाजपा का एक और खेमे के उदय होने के संकेत दिख रहे हैं। संतोष का कद पार्टी में काफी बढ़ा है। ऐसे में रमन समर्थकों को उम्मीद है कि अपने बेटे और खुद का राजनीतिक कैरियर संवारने के लिए राजनांदगांव शुभ साबित होगा। 

तेज और धीमे सांसद
जांजगीर-चांपा के सांसद गुहाराम अजगले को छोड़ दें तो भाजपा के बाकी 8 पहली बार सांसद बने हैं। गुहाराम बेहद सरल स्वभाव के हैं। वे ज्यादा सुख-सुविधाओं के लिए लालायित नहीं रहते। लेकिन महासमुंद के सांसद चुन्नीलाल साहू ने सुविधाएं जुटाने के मामले में अपने साथी भाजपा सांसदों को पीछे छोड़ दिया है। बाकी भाजपा सांसद, संसद सदस्य के रूप में मिलने वाली सुविधाओं के लिए नियमावली का अध्ययन कर रहे थे कि चुन्नीलाल ने अपने लिए दिल्ली के कनाट प्लेस के वेस्टर्न कोर्ट में अपने लिए कमरा अलॉट करवा लिया। जब तक उन्हें फ्लैट नहीं मिलता वे यहां रहेंगे। यहां सांसदों के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। चुन्नीलाल की देखादेखी बाकी सांसद भी फ्लैट या फिर गेस्ट हाउस में रहने की व्यवस्था के जुगाड़ में लग गए हैं। 
(rajpathjanpath@gmail.com)

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