राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा खुद सुधरने में लगी...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा खुद सुधरने में लगी...
Date : 30-Sep-2019

भाजपा खुद सुधरने में लगी...

दंतेवाड़ा में करारी हार के बाद भाजपा चित्रकोट उपचुनाव एकजुट होकर लडऩे की कोशिश कर रही है। दंतेवाड़ा में एक तरह से पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह और उनके करीबी नेता ही चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए थे, जिसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम सहित अन्य दिग्गज नेताओं ने दूरियां बना ली थी। ये सभी पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने दंतेवाड़ा चुनाव के माहौल के बीच ही अंतागढ़ के मंतूराम पवार के भाजपा प्रवेश के खिलाफ बहुत कड़ा बयान दिया था जो कि मंतूराम को भाजपा लाने वाले लोगों पर खुला और सीधा हमला था। वे भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चे के अध्यक्ष भी हैं, इसलिए आदिवासियों के मुद्दों पर उनकी ऐसी खुली-खुली और खरी-खरी बातें पार्टी के खिलाफ गईं।

सुनते हैं कि पार्टी अब असंतुष्टों को भी साधने की कोशिश कर रही है। महामंत्री (संगठन) पवन साय ने खुद रामविचार नेताम से बात की है और उन्हें चित्रकोट से पार्टी प्रत्याशी लच्छूराम कश्यप के नामांकन दाखिले के मौके पर मौजूद रहने का आग्रह किया। नेताम ने उनकी बात मान ली है। चूंकि चित्रकोट में चुनाव संचालन की जिम्मेदारी नारायण चंदेल को दी गई है, जो कि पूर्व सीएम के विरोधी खेमे से जुड़ेे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि असंतुष्ट नेता भी उनके साथ जुड़ेंगे। कुल मिलाकर दंतेवाड़ा से सबक सीखकर पार्टी चित्रकोट में एकजुटता से चुनाव लड़ेगी, यह संकेत मिल रहा है। 

इस बीच आज चित्रकूट के लिए जगदलपुर में नामांकन के लिए इक_ा हुए भाजपा के भीतर के पक्ष-विपक्ष के नेताओं की जो तस्वीर सामने आई है, उनमें उनके चेहरे पार्टी का हौसला बढ़ाते नहीं दिख रहे हैं। 

हनीट्रैप के दौर में...
अब यह सही और गंभीर बात है या किसी ने मजाक में ऐसा पर्चा बांटना शुरू किया है, जो भी हो आज का वक्त कुछ ऐसा ही हो गया है कि प्रेमसंबंधों और देहसंबंधों में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को याद होगा कि कुछ बरस पहले तक गुजरात में शादी से परे के औरत-मर्द के संबंधों के लिए इसी किस्म का एक मैत्रीकरार होता था जिसमें एक निर्धारित समय के लिए आदमी-औरत साथ रहते थे, और फिर बिना किसी दावे के अलग हो जाते थे, उनका एक-दूसरे पर किसी तरह का दावा नहीं बचता था। अब वैसे ही एक दूसरे पर्चे के दर्शन हो रहे हैं। लेकिन जैसा कि हर कानूनी कागजात में होता है, इसके लिए गवाह कैसे रखे जाएंगे? उतना राजदार किसको बनाया जाएगा?  (rajpathjanpath@gmail.com)

Related Post

Comments